पढ़ने वाला हो तो आप जैसा
एक एक चीज आपने पकड़ ली,... मैंने कहा था की इस कहानी में कोई फेरबदल नहीं करुँगी,
जोरू का गुलाम भी एक तरह से रिपोस्ट थी लेकिन करीब ४० % हिस्सा उसमें नया घुस गया, और फोरम की पॉलिसी के चक्कर में दो चार पार्ट कट भी गए,
लेकिन इसमें मैंने तय किया था की कुछ नया नहीं जोड़ूँगी, दो कहानिया आलरेडी चल रही हैं और पिक्स भी सिर्फ हर पार्ट में एक या वो भी नहीं
लेकिन रफ़ूगीरी तो करनी पड़ती है और एक कारण ये भी है कई बार बाद की पोस्टों में और शुरू की पोस्टों में कुछ बाद में पढ़ने में लगता है की अंतर् हो गया, जैसे ये कैरेक्टर कहानी में प्रॉपर्ली इंट्रोड्यूस नहीं हुआ।
कहानी के बाद के हिस्से में गुड्डी की माँ का भी कई बार जिक्र आया, इसलिए पात्र परिचय में भी उनका नाम जुड़ा और उसी तरह शुरूआती पोस्ट्स में ध्यान से देखने पर कुछ जोड़ा जाना लगे. लेकिन जैसा आपने कहा वो अच्छे के लिए ही होगा।
हाँ लेकिन उसके चक्कर में पार्ट नहीं बढ़ेंगे जैसा आपने सजेस्ट किया था कांटेट, पोस्ट की साइज, अगली पोस्ट ही काफी बड़ी होगी ६,००० शब्दों के आसपास , नार्मल दो तीन पोस्टों के बराबर।