Office and Stressful life
No time to write
wait few more days
Take care of yourself and your family
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Nice update..!!अपडेट १२
"ऐसे क्या देख रहा है लल्ला?" ताईजी मुझे घूरते हुए देख कर बोली
मैं ताईजी को ऊपर से नीचे तक देखते हुए "ताईजी आज कहर ढहाने का इरादा है क्या?"
"चल झूठे, इस बूढ़ी घोड़ी में क्या रखा है तुझे तो जवान और मस्तानी घोड़ियां पसंद होंगी" ताईजी ने मुझे ताना सा मारा और घर के बाहर चली गई
थोड़ी देर बाद पीहू दीदी भी घर के पिछवाड़े से निकलकर बाहर आ गई और फिर ताईजी ने घर के फाटक पर ताला मारा और चाबी के झल्ले को कमर में ठूंस लिया। पीहू दीदी थोड़ा आगे चली गई थी और मैं ताईजी के साथ पीछे पीछे चल रहा था, सड़क पर बहुत कीचड़ हो रहा था शायद किसी के खेत का पानी सड़क पर आ गया था।
"ताईजी सड़क पर बहुत कीचड़ है आप मेरा हाथ पकड़ कर चलिए" कहकर मैंने तपाक से ताइजी का हाथ पकड़ लिया
"लल्ला कोई देखेगा तो क्या कहेगा रे" ताईजी झल्लाती हुई बोली
"जो कहेगा सो कहे मगर आप कीचड़ में फिसल कर गिर गई तो कोई न कोई हंसेगा जरूर"
"हां लल्ला और फिर साड़ी भी तो गंदी हो जाएगी" कहकर ताईजी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में जकड़ कर पकड़ लिया।
ताइजी की नरम और गुदाज चूचियां मेरे बाजुओं से रगड़ रहे थे मुझे बहुत मजा आने लगा था इसलिए मैं जानबूझकर अपने बाजुओं को ताईजी की चूचियों पर गड़ा रहा था, फिर ऐसे ही थोड़ी देर बाद हम लालू के ढाबे पर पहुंच गए।
लालू का ढाबा बाजार से थोड़ा पास पड़ता था और गांव के लोग यहां खाने पीने के लिए आते थे, कोई बहुत शानदार ढाबा तो नहीं था लेकिन गांव के लोगों के लिए यह ढाबा किसी ५ स्टार होटल के कम भी नहीं था, मैं पीहू दीदी और ताईजी जगह देखकर कुर्सियों पर बैठ गए और भीमा भईया और शीला भाभी का इंतजार करने लगे।
"खाना क्या ऑर्डर करना है ताईजी"
"लल्ला मेरे लिए पुलाव और कढ़ी पकौड़े ऑर्डर कर देना।"
"और मेरे लिए चाउमीन और मंचूरियन" पीहू दीदी बोली
"मैं तो रूमाली रोटी के साथ पनीर खाऊंगा"
"क्या ऑर्डर किया जा रहा है देवर जी" शीला भाभी पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखते हुई बोली
"अरे आप दोनों भी आ गए" मैं पलटकर भईया और भाभी को देखते हुए बोला
फिर भीमा भईया और भाभी अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ गए।
"आपको क्या खाना है जो आप खाओगे मैं भी वही खाऊंगी" शीला भाभी भीमा भईया से बोली
"शीला मुझे तो आज बटर चिकन खाना है" भीमा भईया ताईजी की तरफ देखते हुए थोड़ा हिचकिचाते हुए बोले
ताईजी कुछ बोली नहीं पर उनकी खामोशी ने भीमा भईया को मंजूरी दे दी थी।
"आओ देवर जी खाना ऑर्डर करने चलते हैं।"
मैं उठकर शीला भाभी के साथ चल दिया, उन्होंने आज लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और श्रृंगार भी किया हुआ था आंखों में काजल, माथे पर बिंदी, होंठों पर लिपस्टिक और कलाइयों में चूड़ियां देखने में संस्कारी ग्रहणी लग रही थी। ताईजी की तुलना में शीला भाभी का जिस्म ढका हुआ था लेकिन फिर भी किसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए काफी था और मैंने नोटिस किया कि आस पास के लोग भाभी को हवस की नजर से घूर रहे थे।
"देवर जी कहां खोए हो क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नहीं"
"देवर जी मैं तो आपको बड़ा भोला समझती थी मुझे पता नहीं था कि आप इतने शैतान हो"
"मैंने क्या किया भाभी?"
"ये पूछो क्या नहीं किया, ऐसी फिल्म की टिकट कौन खरीदता है फिल्म का नाम क्या था "पेटीकोट में धमाका" हिहिहिही"
"अरे भाभी गांव के सिनेमा घर में ऐसी ही फिल्म लगती है, आपको फिल्म पसंद नही आई तो अगली बार से आपके लिए ऐसी किसी भी फिल्म की टिकट नहीं लूंगा"
"मैंने ऐसा तो नहीं कहा कि फिल्म अच्छी नहीं थी"
"मतलब फिल्म आपको पसंद आई और भीमा भईया को?
"उनका तो मूड बन गया था देवर जी हिहिहिही" कहकर शीला भाभी बटर चिकन का ऑर्डर देने चली गई और मैं शाकाहारी भोजन का ऑर्डर देकर पीहू दीदी के लिए चाइनीज खाना ऑर्डर कर आया।
कुछ देर बाद खाना आ गया और फिर सभी ने जमकर खाना पेला और उसके बाद एक एक ग्लास ठंडी लस्सी का लुफ्त उठाया, मैंने और ताईजी ने तो एक एक ग्लास लस्सी और पिया, फिर भीमा भईया पैसे पे करके आ गए, अब चूंकि ताईजी और मैंने बहुत ज्यादा खाना ठूंस लिया था तो ताईजी ने कहा कि हम टेम्पो से आएंगे और घर की चाबी का झल्ला शीला भाभी को थमा दिया, फिर भीमा भईया, शीला भाभी और पीहू दीदी घर के लिए निकल गए और हम लालू के ढाबे के बाहर टेम्पो का इंतजार करने लगे।
रात के १० बज रहे थे मुझे तो नही लग रहा था कि इस वक्त टेम्पो मिलेगा लेकिन काफी देर के बाद एक जीप रुकती है मैंने देखा कि ड्राइविंग सीट पर हरिया बैठा था और पीछे कोई गट्टा आदमी एक लंबी चौड़ी औरत के साथ बैठा था जो सोने की ज्वैलरी से लदी हुई थी
"नमस्ते कजरी बहन, आओ तुम्हे और इस बच्चे को तुम्हारे घर छोड़ देता हूं"
"नहीं प्रधान जी आप क्यों कष्ट कर रहे हैं हम चले जाएंगे"
तो ये मादरचोद साला बाऊना यहां का प्रधान है
"अरे कजरी बहन कहां देर रात को इस बच्चे के साथ अकेली जाओगी, वैसे भी गांव में चोर डकैत घूम रहे हैं तुम्हारे साथ कुछ ऊंच नीच हो गई तो"
साला मुश्किल से चार फुट का होगा और मुझे बच्चा बोल रहा था।
"लल्ला आगे बैठ जाओ मैं पीछे बैठ जाती हूं" कहकर ताईजी पीछे बैठ गई और मैं आगे बैठ गया।
हरिया ने गाड़ी चालू किया, तभी मुझे पीछे से हल्की हल्की आवाज आना शुरू हुई, लेकिन मैने बिलकुल भी रिएक्ट नहीं किया और तभी मैंने चुपके से जीप में टंगी मिरर में देखा तो दंग रह गया, साला प्रधान मेरी ताईजी के गुदाज पेट पर अपने हाथ फेर रहा था, ताईजी बीच में बैठी हुई थी और प्रधान की पत्नी कमला खिड़की से बाहर देख रही थी जैसे उसे कोई होश ही नहीं था या फिर जान कर अंजान बनने का नाटक कर रही थी, ताईजी के उभारदार पेट पर हाथ फेरते फेरते प्रधान तुरंत साड़ी का पल्लू सरका देता है और ताईजी की मोटी मोटी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगता है, ताईजी विरोध तक नहीं कर रही थी इससे ज्यादा हैरानी मुझे इस बात की थी कि प्रधान की पत्नी कमला को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। रात के अंधेरे में मुझे कुछ साफ नजर तो नही आ रहा था लेकिन चांद की रोशनी हल्की हल्की जीप के अंदर आ रही थी जिससे मुझे धुंधला धुंधला दिखाई पड़ रहा था कि पीछे क्या खेल चालू है और फिर कुछ देर बाद घर आ जाता है और मैं गाड़ी से उतर जाता हूं।
"धन्यवाद प्रधान जी" कहकर ताईजी अपनी साड़ी ठीक करते हुए गाड़ी से उतर गई
प्रधान अपने चेहरे पर बेहद घिनौनी मुस्कुराहट के साथ "कजरी बहन हवेली पर भी आती जाती रहना"
"जी प्रधान जी"
फिर प्रधान की जीप चली जाती है, मुझे अब ऐसे दर्शाना था जैसे मैंने जीप में कुछ देखा ही नहीं था।
"प्रधान जी तो बहुत अच्छे हैं ताईजी, उन्होंने हमें घर तक छोड़ दिया" मैं किसी नादान बच्चे की तरह बोला
"लल्ला, प्रधान और उसकी हवेली से दूर ही रहना, कभी–कभी जो जैसा दिखता है वैसा होता नही है।" कहकर ताईजी घर में चली गई और फिर मैं भी अपने कमरे में आ गया।
मुझे आज थोड़ा आगे बढ़ना था इसलिए मैंने सोचा कि आज रात ताईजी के साथ सोने का प्लान बनाता हूं और फिर मुझे एक आइडिया आया तो मैं धोती और बनियान पहनकर ताईजी के कमरे में पहुंच गया, ताईजी साड़ी में अपने बिस्तर पर बैठी हुई किसी सोच ने डूबी हुई थी।
"क्या हुआ लल्ला कुछ चाहिए क्या?"
"नहीं ताईजी कुछ चाहिए तो नहीं था"
"तो फिर किसलिए आए हो लल्ला?"
"ताईजी कल रात मुझे बहुत डरावना सपना आया था और फिर सारी रात मुझे ठीक से नींद भी नहीं आई इसलिए क्या मैं कुछ दिन के लिए आप के साथ सो सकता हूं"
"हां क्यों नही लल्ला लेकिन ऐसे डरेगा तो कैसे काम चलेगा"
फिर मै ताईजी के बिस्तर पर लेट गया और ताईजी भी साड़ी पहने लेट गई।
"ताईजी इतनी गर्मी में साड़ी पहन कर कैसे सो रही हो?"
"अरे नही लल्ला मैं तो पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोती हूं लेकिन अभी तू है इसलिए" कहकर ताईजी चुप हो गई
"ताईजी मैं कोई पराया थोड़ी न हूं, पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोइए नही तो नींद नहीं आएगी"
"तू तो मेरा लल्ला है मेरे जिगर का टुकड़ा है रे, चल मैं अभी आती हूं" कहकर ताईजी बिस्तर से उठकर घर के पिछवाड़े में चली गई
Okay Bhai..!! Bhai Pradhan kisi bure aadmi ka Mohra hi toh woh bhi bura hi huva na aur balram ko tayi ka dil jitkar sare raaj janane honge kyunki tayi toh randi hi lag rahi hai jo naukro se chud rahi hai aur Pradhan bhi usse chhed raha hai..!! Ab dekhte hai balram kaise sab baat ki tah tak jata hai..!!bhai maine pehle bhi kaha hai ki pradhan aur uska pariwar negative role me nahi hai bas itna samajh lo ki ye chote mote mohre hai, Suraj kaisa ladka hai accha bura ya harami ye aage pata chalega, philhaal toh koi doodh ka dhula nahi hai , abhi hariya aur kallu sabko gande lag rahe hai lekin jab asliyat pata chalegi toh shayad sabhi ko taras aayega khair chhodo mai aage spoiler nahi dunga
Mast update ab to lalla ko barha karo. Kab tak apna haath jagannath karega.अपडेट १२
"ऐसे क्या देख रहा है लल्ला?" ताईजी मुझे घूरते हुए देख कर बोली
मैं ताईजी को ऊपर से नीचे तक देखते हुए "ताईजी आज कहर ढहाने का इरादा है क्या?"
"चल झूठे, इस बूढ़ी घोड़ी में क्या रखा है तुझे तो जवान और मस्तानी घोड़ियां पसंद होंगी" ताईजी ने मुझे ताना सा मारा और घर के बाहर चली गई
थोड़ी देर बाद पीहू दीदी भी घर के पिछवाड़े से निकलकर बाहर आ गई और फिर ताईजी ने घर के फाटक पर ताला मारा और चाबी के झल्ले को कमर में ठूंस लिया। पीहू दीदी थोड़ा आगे चली गई थी और मैं ताईजी के साथ पीछे पीछे चल रहा था, सड़क पर बहुत कीचड़ हो रहा था शायद किसी के खेत का पानी सड़क पर आ गया था।
"ताईजी सड़क पर बहुत कीचड़ है आप मेरा हाथ पकड़ कर चलिए" कहकर मैंने तपाक से ताइजी का हाथ पकड़ लिया
"लल्ला कोई देखेगा तो क्या कहेगा रे" ताईजी झल्लाती हुई बोली
"जो कहेगा सो कहे मगर आप कीचड़ में फिसल कर गिर गई तो कोई न कोई हंसेगा जरूर"
"हां लल्ला और फिर साड़ी भी तो गंदी हो जाएगी" कहकर ताईजी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में जकड़ कर पकड़ लिया।
ताइजी की नरम और गुदाज चूचियां मेरे बाजुओं से रगड़ रहे थे मुझे बहुत मजा आने लगा था इसलिए मैं जानबूझकर अपने बाजुओं को ताईजी की चूचियों पर गड़ा रहा था, फिर ऐसे ही थोड़ी देर बाद हम लालू के ढाबे पर पहुंच गए।
लालू का ढाबा बाजार से थोड़ा पास पड़ता था और गांव के लोग यहां खाने पीने के लिए आते थे, कोई बहुत शानदार ढाबा तो नहीं था लेकिन गांव के लोगों के लिए यह ढाबा किसी ५ स्टार होटल के कम भी नहीं था, मैं पीहू दीदी और ताईजी जगह देखकर कुर्सियों पर बैठ गए और भीमा भईया और शीला भाभी का इंतजार करने लगे।
"खाना क्या ऑर्डर करना है ताईजी"
"लल्ला मेरे लिए पुलाव और कढ़ी पकौड़े ऑर्डर कर देना।"
"और मेरे लिए चाउमीन और मंचूरियन" पीहू दीदी बोली
"मैं तो रूमाली रोटी के साथ पनीर खाऊंगा"
"क्या ऑर्डर किया जा रहा है देवर जी" शीला भाभी पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखते हुई बोली
"अरे आप दोनों भी आ गए" मैं पलटकर भईया और भाभी को देखते हुए बोला
फिर भीमा भईया और भाभी अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ गए।
"आपको क्या खाना है जो आप खाओगे मैं भी वही खाऊंगी" शीला भाभी भीमा भईया से बोली
"शीला मुझे तो आज बटर चिकन खाना है" भीमा भईया ताईजी की तरफ देखते हुए थोड़ा हिचकिचाते हुए बोले
ताईजी कुछ बोली नहीं पर उनकी खामोशी ने भीमा भईया को मंजूरी दे दी थी।
"आओ देवर जी खाना ऑर्डर करने चलते हैं।"
मैं उठकर शीला भाभी के साथ चल दिया, उन्होंने आज लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और श्रृंगार भी किया हुआ था आंखों में काजल, माथे पर बिंदी, होंठों पर लिपस्टिक और कलाइयों में चूड़ियां देखने में संस्कारी ग्रहणी लग रही थी। ताईजी की तुलना में शीला भाभी का जिस्म ढका हुआ था लेकिन फिर भी किसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए काफी था और मैंने नोटिस किया कि आस पास के लोग भाभी को हवस की नजर से घूर रहे थे।
"देवर जी कहां खोए हो क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नहीं"
"देवर जी मैं तो आपको बड़ा भोला समझती थी मुझे पता नहीं था कि आप इतने शैतान हो"
"मैंने क्या किया भाभी?"
"ये पूछो क्या नहीं किया, ऐसी फिल्म की टिकट कौन खरीदता है फिल्म का नाम क्या था "पेटीकोट में धमाका" हिहिहिही"
"अरे भाभी गांव के सिनेमा घर में ऐसी ही फिल्म लगती है, आपको फिल्म पसंद नही आई तो अगली बार से आपके लिए ऐसी किसी भी फिल्म की टिकट नहीं लूंगा"
"मैंने ऐसा तो नहीं कहा कि फिल्म अच्छी नहीं थी"
"मतलब फिल्म आपको पसंद आई और भीमा भईया को?
"उनका तो मूड बन गया था देवर जी हिहिहिही" कहकर शीला भाभी बटर चिकन का ऑर्डर देने चली गई और मैं शाकाहारी भोजन का ऑर्डर देकर पीहू दीदी के लिए चाइनीज खाना ऑर्डर कर आया।
कुछ देर बाद खाना आ गया और फिर सभी ने जमकर खाना पेला और उसके बाद एक एक ग्लास ठंडी लस्सी का लुफ्त उठाया, मैंने और ताईजी ने तो एक एक ग्लास लस्सी और पिया, फिर भीमा भईया पैसे पे करके आ गए, अब चूंकि ताईजी और मैंने बहुत ज्यादा खाना ठूंस लिया था तो ताईजी ने कहा कि हम टेम्पो से आएंगे और घर की चाबी का झल्ला शीला भाभी को थमा दिया, फिर भीमा भईया, शीला भाभी और पीहू दीदी घर के लिए निकल गए और हम लालू के ढाबे के बाहर टेम्पो का इंतजार करने लगे।
रात के १० बज रहे थे मुझे तो नही लग रहा था कि इस वक्त टेम्पो मिलेगा लेकिन काफी देर के बाद एक जीप रुकती है मैंने देखा कि ड्राइविंग सीट पर हरिया बैठा था और पीछे कोई गट्टा आदमी एक लंबी चौड़ी औरत के साथ बैठा था जो सोने की ज्वैलरी से लदी हुई थी
"नमस्ते कजरी बहन, आओ तुम्हे और इस बच्चे को तुम्हारे घर छोड़ देता हूं"
"नहीं प्रधान जी आप क्यों कष्ट कर रहे हैं हम चले जाएंगे"
तो ये मादरचोद साला बाऊना यहां का प्रधान है
"अरे कजरी बहन कहां देर रात को इस बच्चे के साथ अकेली जाओगी, वैसे भी गांव में चोर डकैत घूम रहे हैं तुम्हारे साथ कुछ ऊंच नीच हो गई तो"
साला मुश्किल से चार फुट का होगा और मुझे बच्चा बोल रहा था।
"लल्ला आगे बैठ जाओ मैं पीछे बैठ जाती हूं" कहकर ताईजी पीछे बैठ गई और मैं आगे बैठ गया।
हरिया ने गाड़ी चालू किया, तभी मुझे पीछे से हल्की हल्की आवाज आना शुरू हुई, लेकिन मैने बिलकुल भी रिएक्ट नहीं किया और तभी मैंने चुपके से जीप में टंगी मिरर में देखा तो दंग रह गया, साला प्रधान मेरी ताईजी के गुदाज पेट पर अपने हाथ फेर रहा था, ताईजी बीच में बैठी हुई थी और प्रधान की पत्नी कमला खिड़की से बाहर देख रही थी जैसे उसे कोई होश ही नहीं था या फिर जान कर अंजान बनने का नाटक कर रही थी, ताईजी के उभारदार पेट पर हाथ फेरते फेरते प्रधान तुरंत साड़ी का पल्लू सरका देता है और ताईजी की मोटी मोटी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगता है, ताईजी विरोध तक नहीं कर रही थी इससे ज्यादा हैरानी मुझे इस बात की थी कि प्रधान की पत्नी कमला को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। रात के अंधेरे में मुझे कुछ साफ नजर तो नही आ रहा था लेकिन चांद की रोशनी हल्की हल्की जीप के अंदर आ रही थी जिससे मुझे धुंधला धुंधला दिखाई पड़ रहा था कि पीछे क्या खेल चालू है और फिर कुछ देर बाद घर आ जाता है और मैं गाड़ी से उतर जाता हूं।
"धन्यवाद प्रधान जी" कहकर ताईजी अपनी साड़ी ठीक करते हुए गाड़ी से उतर गई
प्रधान अपने चेहरे पर बेहद घिनौनी मुस्कुराहट के साथ "कजरी बहन हवेली पर भी आती जाती रहना"
"जी प्रधान जी"
फिर प्रधान की जीप चली जाती है, मुझे अब ऐसे दर्शाना था जैसे मैंने जीप में कुछ देखा ही नहीं था।
"प्रधान जी तो बहुत अच्छे हैं ताईजी, उन्होंने हमें घर तक छोड़ दिया" मैं किसी नादान बच्चे की तरह बोला
"लल्ला, प्रधान और उसकी हवेली से दूर ही रहना, कभी–कभी जो जैसा दिखता है वैसा होता नही है।" कहकर ताईजी घर में चली गई और फिर मैं भी अपने कमरे में आ गया।
मुझे आज थोड़ा आगे बढ़ना था इसलिए मैंने सोचा कि आज रात ताईजी के साथ सोने का प्लान बनाता हूं और फिर मुझे एक आइडिया आया तो मैं धोती और बनियान पहनकर ताईजी के कमरे में पहुंच गया, ताईजी साड़ी में अपने बिस्तर पर बैठी हुई किसी सोच ने डूबी हुई थी।
"क्या हुआ लल्ला कुछ चाहिए क्या?"
"नहीं ताईजी कुछ चाहिए तो नहीं था"
"तो फिर किसलिए आए हो लल्ला?"
"ताईजी कल रात मुझे बहुत डरावना सपना आया था और फिर सारी रात मुझे ठीक से नींद भी नहीं आई इसलिए क्या मैं कुछ दिन के लिए आप के साथ सो सकता हूं"
"हां क्यों नही लल्ला लेकिन ऐसे डरेगा तो कैसे काम चलेगा"
फिर मै ताईजी के बिस्तर पर लेट गया और ताईजी भी साड़ी पहने लेट गई।
"ताईजी इतनी गर्मी में साड़ी पहन कर कैसे सो रही हो?"
"अरे नही लल्ला मैं तो पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोती हूं लेकिन अभी तू है इसलिए" कहकर ताईजी चुप हो गई
"ताईजी मैं कोई पराया थोड़ी न हूं, पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोइए नही तो नींद नहीं आएगी"
"तू तो मेरा लल्ला है मेरे जिगर का टुकड़ा है रे, चल मैं अभी आती हूं" कहकर ताईजी बिस्तर से उठकर घर के पिछवाड़े में चली गई
Fantastic updated
Dekhte hai aage kya hota hai balram Pihu par bhi try karta h ya nahi
बहुत ही सुन्दर अपडेट है बलराम ने अंधेरे में तीर मारा और निशाने पे लगा पीहू का सूरज के साथ चक्कर है इसका पता तो लग गया लगता है अब पीहू का भी नंबर लग सकता है
बहुत ही सुन्दर और रमणीय अपडेट है
लगता है शीला भाभी धीरे धीरे खुल रही है ताई जी तो प्रधान के साथ थोड़ा बहुत मजा ले लिया अब देखते हैं रात को क्या होता हैं
Waiting for next update
बहुत ही सुंदर लाजवाब और रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
आ बैल मुझे मार वाला किस्सा हो गया पिहू के साथ बलराम ने मजाक में तीर छोडा और पिहू सुरज का नाम बक गयी अब बस देखना है बलराम इस अवस्था का फायदा उठाता हैं
Bahut hi sundar update he Baba Ji, ab hero ke samne 3 naye options he, Pihu, Bhabhi aur Tai, dekhte he sabse pehale kiska number lagta he
Waiting for the next update
बहुत ही सुंदर लाजवाब और मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
बलराम ने शिला भाभी को पेटीकोट में हंगामा फिल्म दिखाकर शिला का पेटीकोट उतारकर हंगामा करने के लिये पहला कदम बढा लिया
मस्तानी घोडी ताईजी जीप में प्रधान के हाथों से गरम हो गई है शायद
अब बिस्तर पर बलराम ने साडी उतारकर सोने को कहा और वो मान भी गयी
लगता है बिस्तर पर बलराम और ताईजी कुछ खेल कर जाये देखते हैं आगे
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
next
Nice update..!!
Balram ab tayi ke sath khul raha hai..ab balram ko tayi ko pyaar se patakar sare raaj jan lene chahiye kyunki tayi Jo kuchh bhi kar rahi hai woh lagta hai mann se nahi kar Rahi hai..aur yeh Pradhan bada harami aadmi lagta hai jo tayi ko cheed raha hai..ab balram ko sachhayi janani hogi..!! Sheela bhabhi bhi ab balram ke sath masti karne lagi hai..!! Balram ko pihu ko bhi safe rakhna hoga uss harami Pradhan ke ladke se..!!
Okay Bhai..!! Bhai Pradhan kisi bure aadmi ka Mohra hi toh woh bhi bura hi huva na aur balram ko tayi ka dil jitkar sare raaj janane honge kyunki tayi toh randi hi lag rahi hai jo naukro se chud rahi hai aur Pradhan bhi usse chhed raha hai..!! Ab dekhte hai balram kaise sab baat ki tah tak jata hai..!!
Waiting for next update..!!
Update postedMast update ab to lalla ko barha karo. Kab tak apna haath jagannath karega.
Jab rahasye khulenge tab pata chal jayega ki kaun accha hai aur kaun bura? ya phir koi majburi ke chalte bura ban gaya hai ya kya pata koi purani dushmani ka badla le raha hoOkay Bhai..!! Bhai Pradhan kisi bure aadmi ka Mohra hi toh woh bhi bura hi huva na aur balram ko tayi ka dil jitkar sare raaj janane honge kyunki tayi toh randi hi lag rahi hai jo naukro se chud rahi hai aur Pradhan bhi usse chhed raha hai..!! Ab dekhte hai balram kaise sab baat ki tah tak jata hai..!!