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Romance काला इश्क़! (Completed)

Rockstar_Rocky

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अब तक आपने पढ़ा:

मुझे सेठ के पैसों से कोई सरोकार नहीं था मुझे तो मुन्ना के जाने का दुःख था! भारी मन से मैं ऊपर आया और दरवाजा जोर से बंद किया| शराब की बोतल निकाली और उसे मुँह से लगा कर गटागट पीने लगा| एक साँस में दारु खींचने के बाद मैंने बोतल खेंच कर जमीन पर मारी और वो चकना चूर हो गई, कांच सारे घर में फ़ैल गया था! मैं बहुत जोर से चिल्लाया; "आआआआआआआआआआआआआ!!" और फिर घुटनों के बल बैठ कर रोने लगा| "क्या दुश्मनी है तेरी मुझसे? मैंने कौन सा सोना-चांदी माँगा था तुझसे? तुने 'ऋतू' को मुझसे छीन लिया मैंने तुझे कुछ नहीं कहा, पर वो छोटा सा बच्चा जिससे प्यार करने लगा था उसे भी तूने मुझसे छीन लिया? जरा सी भी दया नहीं आई तेरे मन में? क्या पाप किया है मैंने जिसकी सजा तू मुझे दे रहा है? सच्चा प्यार किया था मैंने!!!! कम से कम उस बच्चे को तो मेरे जीवन में रहने दिया होता! दो दिन की ख़ुशी दे कर छीन ली, इससे अच्छा देता ही ना!" मैं गुस्से में फ़रियाद करने लगा|

update 62

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना


जाना कहा है जाना
जाना कहा है जाना...


तय थे दिल को ग़म जहाँ पे
मिली क्यों खुशियां वहीँ पे
हाथों से अब फिसले जन्नत
हम तो रहे न कही के


होना जुदा अगर
है ही लिखा
यादों को उसकी
आके तू आग लगा जा


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना
अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे

तेरी ही मर्ज़ी सारे जहाँ में
तोह ऐसा क्यों जतलाये

ख्वाबों को मेरे छीन कैसे
तू खुदा कहलाये


माँग बैठा
चाँद जो दिल
भूल की इतनी
देता है कोई सजा किया?


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

जाना कहा है जाना…
जाना कहा है जाना


पर वहाँ मेरी फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं था, थी तो बस शराब जो मेरे दिल को चैन और रहत देती थी, एक वही तो थी जिसने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा था! कुछ देर बाद पोलिस और मकान मालिक घर आये और मेरी हालत देख कर पोलिस वाला कुछ पूछने ही वाला था की मकान मालिक बोला; "इंस्पेक्टर साहब ये तो अभी कुछ दिन पहले ही आया है| सीधा-साधा लड़का है!"

"हाँ वो तो इसे देख कर ही पता लग रहा है?! क्या नाम है?" पोलिस वाले ने पुछा| अब मैं इतना भी नशे में नहीं था; "मानु" मैंने बड़ा संक्षेप में जवाब दिया क्योंकि ज्यादा बोलता तो वो पता नहीं और कितने सवाल पूछता|

"तुम संजय या उसकी पत्नी को जानते थे?" उसने सवाल दागा|

"संजय से बस एक बार मिला था और उसकी पत्नी मेरे यहाँ काम करती थी|"

"उसका कोई फ़ोन नंबर है तुम्हारे पास?"

"जी नहीं!"

"दिन में क्यों पीते हो?"

"पर्सनल reason है!" ये सुन कर वो मुझे घूरता हुआ बाकियों से पूछताछ करने लगा| मैंने दरवाजा भेड़ा और बिस्तर पर लेट गया, इधर मेरा फ़ोन बज उठा| मैंने फ़ोन उठाया तो अरुण पूछने लगा की कब आ रहा है? मैंने बस इतना बोला की तबियत ठीक नहीं है और वो समझ गया की मैंने पी हुई है| शाम को वो धड़धड़ाता हुआ मेरे घर आ पहुँचा और जब मैंने दरवाजा खोला तो वो मेरी शक्ल देख कर समझ गया| मैं हॉल में बैठ गया और वो मेरे सामने बैठ गया, "भाई क्या हो गया है तुझे? दो दिन तो तू चक रहा था और अब फिर से वापस उदास हो गया? क्या हुआ?" मैंने कोई जवाब नहीं दिया बीएस सर झुकाये बैठा रहा| तभी उसकी नजर कमरे में बिखरे काँच पर पड़ी और वो बोला; "वो आई थी क्या यहाँ?" मैंने ना में सर हिलाया| "तो ये बोतल कैसे टूटी?" उसने पुछा और तब मुझे ध्यान आया की घर में काँच फैला हुआ है| वो खुद उठा और झाड़ू उठा कर साफ़ करने लगा, मुझे खुद पर बड़ा गुस्सा आया इसलिए मैंने उससे झाड़ू ले लिया और खुद झाड़ू लगाने लगा| "तू ने खाया कुछ?" अरुण ने पुछा तो माने फिर से ना में सर हिलाया और उसने खुद मेरे लिए खाना आर्डर किया| "देख तू कुछ दिन के लिए घर चला जा! मैं भी कुछ दिन के लिए गाँव जा रहा हूँ|" मैं उसकी बात समझ गया था, उसे चिंता थी की उसकी गैरहजरी में मैं यहाँ अकेला रहूँगा तो फिर से ये सब करता रहूँगा और तब मुझे टोकने वाला कोई नहीं होगा| "देखता हूँ!" मैं बस इतना बोला और वापस उसके सामने बैठ गया| "मेरी सास की तबियत खराब है, तेरी भाभी तो पहले ही वहाँ जा चुकी है पर वो अकेले संभाल नहीं पा रही इसलिए कुछ दिन की छुट्टी ले कर जा रहा हूँ|" अरुण ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा| "कुछ जयदा सीरियस तो नहीं?" मैंने पुछा और इस तरह से हमारी बात शुरू हुई| मैंने उसे अपनी बाइक की चाभी दी ताकि वो समय से घर पहुँच जाए वरना बस के सहारे रहता तो कल सुबह से पहले नहीं पहुँचता| "अरे! मैं बस से चला जाऊँगा|" अरुण ने चाबही मुझे वापस देते हुए कहा| अब मुझे बात बनानी थी इसलिए मैंने कहा; "यार तू ले जा वरना यहाँ कहाँ खड़ी रखूँगा?" मेरी बात सुन कर उसे विश्वास हो गया की मैं भी घर जा रहा हूँ और उसने चाभी ले ली| फिर मैं उसे नीचे छोड़ने के बहाने गया और रात की दारु का जुगाड़ कर वापस आ गया| वापस आया तो खाना भी आ चूका था, अब किसका मन था खाने का पर उसे waste करने का मन नहीं किया| मैं वापस से बालकनी में बैठ गया और अपना खाना और पेग ले कर बैठ गया|


मेरे मन में अब जहर भर चूका था, प्यार का नामोनिशान दिल से मिट चूका था| मन ने ये मान लिया था की इस दुनिया में प्यार-मोहब्बत सब दिखावा है, बस जर्रूरत पूरी करने का नाम है! पर अभी मेरी परेशानियाँ खत्म नहीं हुई थी, रितिका की शादी होनी थी और मुझे घर जाना था| घर अगर नहीं गया तो सब मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जायेंगे और फिर पता नहीं क्या काण्ड हो! घर जा कर मैं ये भी नहीं कह सकता की मैं शादी में शरीक ही नहीं होना चाहता! क्योंकि फिर मुझे उसका कारन बताना पड़ता जो की रितिका के लिए घातक साबित होता| ये ख्याल आते ही दिमाग ने बदला लेने की सोची, "जा के घर में सब सच बोल दे!" मेरे दिमाग ने कहा पर फिर उसका परिणाम सोच कर मन ने मना कर दिया| भले ही मेरा दिमाग रितिका से नफरत करता था पर मन तो अभी अपनी ऋतू का इंतजार कर रहा था| दिमाग और दिल में जंग छिड़ चुकी थी और आखिर नफरत ही जीती! इस जीत को मनाने के लिए मैंने एक लार्ज पेग बनाया और उसे गटक गया| नफरत तो जीत गई पर मेरा दिल हार गया और अब वो अंदर से बिखर चूका था| बस एक लाश ही रह गई थी जिसमें बस दर्द ही दर्द बचा था और उस दर्द की बस एक ही दवा थी वो थी शराब! अब तो बस इसी में डूब जाने का मन था शायद ये ही मुझे किसी किनारे पहुँचा दे|

अगली सुबह में देर से उठा और ऑफिस पहुँचा क्योंकि अरुण के गैरहाजरी में काम देखने वाला कोई नहीं था| अगले दो दिन तक मैंने देर रात तक बैठ कर काम निपटाया और फिर तीसरे दिन मैंने सर से बात की; "सर I'm सॉरी पर मैं अब और ऑफिस नहीं आ सकता! टैक्स रिटर्न्स फाइनल हो चुकी हैं और अरुण वापस आ कर जमा कर देगा| इसलिए प्लीज मैं कल से नहीं आ पाउँगा|" सर ने बटहरी कोशिश की पर मैं नहीं माना और उसी वक़्त सर से अपनी बैलेंस पेमेंट का चेक ले कर पहले बैंक पहुँचा और उसे जमा किया फिर घर आ कर सो गया| जब उठा तो पहले नहाया और जब खुद को आज माने आईने में देखा तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ की ये शक़्स कौन है? मैं आँखें बड़ी कर के हैरानी से खुद को ही आईने में देखने लगा| वो सीधा-साधा लड़का कहाँ खो गया? उसकी जगह ये कौन है जो आईने में मुझे ही घूर रहा है? मेरी दाढ़ी के बाल इतने बड़े हो गए थे की मैं अब बाबा लगने लगा था| सर के बाल झबरे से थे और जब नजर नीचे के बदन पर गई तो मुझे बड़ा जोर का झटका लगा| गर्दन से नीचे का जिस्म सूख चूका था और मैं हद्द से ज्यादा कमजोर दिख रहा था| मेरी पसलियाँ तक मुझे दिखने लगीं थी! ये क्या हालत बना ली है मैंने अपनी? क्या यही होता है प्यार में? अच्छा-खासा इंसान इस कदर सूख जाता है?! अब मुझे समझ आने लगा था की क्यों मेरे दोस्त मुझे कहते थे की मैंने अपनी क्या हालत बना ली है?! दिमाग कहने लगा था की सुधर जा और ये बेवकूफियां बंद कर, वो कमबख्त तो तेरा दिल तोड़ चुकी है तू क्यों उसके प्यार के दर्द में खुद को खत्म करना चाहता है| पर अगले ही पल मन ने मुझे फिर से पीने का बहाना दे दिया, "अभी तो उसकी शादी भी होनी है? तब कैसे संभालेगा खुद को?" और मेरे लिए इतनी वजह काफी थी फिर से पीने के लिए| "पुराना वाला मानु अब मर चूका है!" ये कहते हुए मैंने किचन काउंटर से गिलास उठाया और उसमें शराब डाल कर पीने लगा| दोपहर से रात हुई और रात से सुबह.... पर मेरा पीना चालु रहा| जब नींद आ जाती तो सो जाता और जब आँख खुलती तो फिर से पीने लगता, इस तरह से करते-करते संडे आया|


सुबह मेरी नींद पेट में अचानक हुए भयंकर दर्द से खुली, मैं तड़पता हुआ सा उठा और उठ कर बैठना चाहा| बैठने के बाद मैं अपने पेट को पकड़ कर झुक कर बैठ गया की शायद पेट दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| दर्द अब भी हो रहा था और धीरे-धीरे बढ़ने लगा था, मैं उठ खड़ा हुआ और किचन में जा कर पानी पीने लगा| मुझे लगा शायद पानी पीने से दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| मैं जमीन पर लेट गया पर पेट से अब भी हाथ नहीं हटाया था| बल्कि मैं तो लेटे-लेटे ही अपने घुटनों को अपनी छाती से दबाना छह रहा था ताकि दर्द कम हो पर उससे दर्द और बढ़ रहा था| फिर अचानक से मुझे उबकाई आने लगी, मैं फटाफट उठा और बाथरूम में भागा और कमर पकड़ कर उल्टियाँ करने लगा| मुँह से सिर्फ और सिर्फ दारु ही बाहर आ रही थी, खाने के नाम पर सिर्फ चखना या खीरा-टमाटर ही अंदर गए थे जो दारु के साथ बाहर आ गए| करीब 10 मिनट मैं कमोड पर झुक कर खड़ा रहा ताकि और उलटी होनी है तो हो जाये| पर उलटी नहीं आई और अब पेट का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था| मुँह-हाथ धो कर आ कर मैं जमीन पर बैठ गया, मेरे हाथ-पैर काँपने लगे थे और निगाह शराब की बोतल पर थी| पर दिमाग कह रहा था की और और पीयेगा तो मरेगा! उठ और डॉक्टर के चल| मैं उठा कपडे बदले और परफ्यूम छिड़क कर घर से निकला| ऑटो किया और डॉक्टर के पास पहुँचा, मेरा नम्बर आने तक मैं बैठा-बैठा ऊँघता रहा| जब आया तो डॉक्टर ने मुझसे बीमारी के बारे में पुछा| "सर आज सुबह मेरे पेट में बड़े जोर से दर्द हुआ, उसके कुछ देर बाद उल्टियाँ हुई और अब मेरे हाथ-पैर काँप रहे हैं!" उसने पुछा की मैं कितना ड्रिंक करता हूँ तो मैंने उन्हें सब सच बता दिया| उन्होंने कुछ टेस्ट्स लिखे और सामने वाले Lab में भेज दिया| वहाँ मेरा Ultrasound हुआ, ECG हुआ और X-ray भी हुआ और भी पता नहीं क्या-क्या ब्लड टेस्ट किये उन्होंने! मैं पूरे टाइम यही सोच रहा था की शरीर में कुछ है ही नहीं तो टेस्ट्स में आएगा क्या घंटा! पर जब रिपोर्ट्स डॉक्टर ने देखि तो वो बहुत हैरान हुआ| "It’s a clear case of fatty liver! You’ll have to stop drinking otherwise you’re very close to develop Cirrhosis of Liver and things will get complicated from there. Your present condition can be controlled and improved.” डॉक्टर ने बहुत गंभीर होते हुए कहा| पर उसकी बात का अर्थ जो मेरे दिमाग ने निकला वो ये था की मैं जल्द ही मरने वाला हूँ पर कितनी जल्दी ये मुझे पूछना था! "Sir if you don’t mind me asking, how much time do I have?” ये सवाल सुन कर डॉक्टर को मेरे मानसिक स्थिति का अंदाजा हुआ और वो गरजते हुए बोला; "Are you out of your mind? This condition of yours can be contained, you’re not gonna die!”

“But what if I don’t stop drinking? Then I’m gonna die right?”

“Tell me why do you wanna die? Is that a solution to whatever crisis you’re going through? Death isn’t a solution, Life is!”

मैं खामोश हो गया क्योंकि उसके आगे मेरे कान कुछ सुनना नहीं चाहते थे| डॉक्टर को ये समझते देर न लगी की I'm going through depression! इसलिए वो अपनी कुर्सी से उठा और मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे सांत्वना देने लगा|

“Do you have a family?” मैंने हाँ में सर हिलाया| “Call them here, you need their love and affection. You’ve to understand, you’re slipping into depression and its not good! You need proper medical care, don’t throw your life that easily!” मेरा दिमाग जानता था की डॉक्टर मेरे भले की कह रहा था पर रितिका की बेवफाई मुझे बस अन्धकार में ही रखना चाहती थी| "Thank you doctor!" इतना कह कर मैं उठ गया और उन्होंने मुझे मेरी केस फाइल दे दी| पर हॉस्पिटल से बाहर आते ही शराब की ललक जाग गई और मैं ऑटो पकड़ कर सीधा घर के पास वाले ठेके पर आ गया| वहाँ दारु ले ही रहा था की मेरी नजर एक बोर्ड पर पड़ी, कोई नया पब खुला था जिसका नाम 'मैखाना' था! ये नाम ही मेरे मन उस जगह के बारे में उत्सुकता जगाने के लिए काफी था, ऊपर से जब मैंने नीचे देखा तो वहाँ लिखा था 1 + 1 on IMFL Drinks after 8 PM अब ये पढ़ते ही मेरे मन में आया की आज रात तो कुछ नया ब्रांड try करते हैं! वहाँ से मेरा घर करीब 20 मिनट दूर था तो मैंने ऑटो किया और घर आ गया| अब शराब पीने लगा ही था की पिताजी का फ़ोन आ गया| "कब आ रहा है तू घर?' उन्होंने डाँटते हुए कहा| मैं आगे कुछ कहता उससे पहले ही उनका गुस्सा फुट पड़ा; "मुश्किल से महीना रह गया है, घर पर इतना काम है और तू है की घर तक नहीं भटकता? क्या तकलीफ है तुझे? यहाँ सब बहुत खफा हैं तुझसे!"

"पिताजी .... काम...." आगे कुछ कहने से पहले ही वो फिर से बरस पड़े; "हरबार तेरी मनमानी नहीं चलेगी! तूने कहा तुझे नौकरी करनी है हमने तुझे जाने दिया, तूने कहा मुझे शादी नहीं करनी हम वहां भी मान गए पर अब घर में शादी है और तू वहाँ अपनी नौकरी पकड़ कर बैठ है? छोड़ दे अगर छुट्टी नहीं देता तेरा मालिक तो! बाद में दूसरी पकड़ लिओ!"

"पिताजी इतनी आसानी से नौकरी नहीं मिलती! ये मेरी दूसरी नौकरी है, पहली वाली मैंने छोड़ दी क्योंकि वो बॉस तनख्वा नहीं बढ़ाता था| मैंने आप को इसलिए नहीं बताया क्योंकि आप मुझे वापस बुला लेटे! अब नई नौकरी है तो इतनी जल्दी छुट्टी नहीं माँग सकता! मैं कल बात करता हूँ बॉस से और फिर आपको बताता हूँ|" मैंने बड़े आराम से जवाब दिया|

"ठीक है! पर जल्दी आ यहाँ बहुत सा काम है!" उन्होंने बस इतना कहा और फ़ोन काट दिया| अब माने बहाना तो बना दिया था पर कल क्या करूँगा यही सोचते-सोचते शाम हो गई, जो जाम मैंने पहले बनाया था उसे पीया और फिर गांजा फूंका और फिर बालकनी में बैठ गया| बैठे-बैठे आँख लग गई और जब खुली तो रात के नौ बज रहे थे| मुझे याद आया की आज तो 'मैखाने' जाना है, मैंने मुँह-हाथ धोया, कपडे पहने और परफ्यूम छिड़क कर ही पैदल वहाँ पहुँच गया| ज्यादा लोग नहीं आये थे, मैं सीधा बार स्टूल पर बैठा और बारटेंडर से 60 ml सिंगल माल्ट मांगी! वहाँ के म्यूजिक को सुन कर मुझे अच्छा लग रहा था, अकेले में शराब पी कर सड़ने से तो ये जगह सही लगी मुझे| मरना ही तो थोड़ा ऐश कर के मरो ना! ये ख्याल आते ही मैंने भी गाने को एन्जॉय करना शुरू कर दिया| एक-एक कर मैंने 10 ड्रिंक्स खत्म की और अब बजे थे रात के बारह और बारटेंडर ने और ड्रिंक सर्वे करने से मना कर दिया| कारन था की मैं बहुत ज्यादा ही नशे में था और मुझसे ठीक से खड़ा ही नहीं जा रहा था| बारटेंडर ने बाउंसर को बुलाया जिसने मुझे साहरा दे कर बाहर छोड़ा और खुद अंदर चला गया| मैं वहाँ ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और ऑटो का इंतजार कर रहा था पर कोई ऑटो आ ही नहीं रहा था और जो आया भी वो मेरी हालत देख कर रुका नहीं| अब मुझे एहसास हुआ की घर में पीने का फायदा क्या होता है, वहाँ पीने के बाद कहीं भी फ़ैल सकते हो! मैंने हिम्मत बटोरी और पैदल ही जाने का सोचा, पर अभी मुझे एक सड़क पार करनी थी जो मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज था| रात का समय था और ट्रक के चलने का टाइम था इसलिए मैं धीरे-धीरे सड़क पार करने लगा| नशे में वो दस फूटा रोड भी किलोमीटर चौड़ी लग रही थी| आधा रास्ता पार किया की एक ट्रक के हॉर्न की जोरदार आवाज आई और मैं जहाँ खड़ा था वहीँ खड़ा हो गया| नशे में आपके बॉडी के रेफ्लेक्सेस काम नहीं करते इसलिए मैं रूक गया था, पर उस ट्रक वाले ने मेरे साइड से बचा कर अपना ट्रक निकाल लिया| आज तो मौत से बाल-बाल बचा था, पर मैं तो पलट के उसे ही गालियाँ देने लगा; "अबे! भोसड़ी के मार देता तो दुआ लगती मेरी बहनचोद साइड से निकाल कर ले गया!" पर वो तो अपना ट्रक भगाता हुआ आगे निकल गया| मैं फिर से धीरे-धीरे अपना रास्ता पार करने लगा| जैसे-तैसे मैंने रास्ता पार किया और सड़क किनारे खड़ा हो गया, कोई ऑटो तो मिलने वाला था नहीं, न ही फ़ोन में बैटरी थी की कैब बुला लूँ और अब चल कर घर जाने की हिम्मत थी नहीं| मैंने देखा तो कुछ दूर पर एक टूटा हुआ बस-स्टैंड दिखा, सोचा वहीँ रात काट लेता हूँ और सुबह घर चला जाऊँगा| धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा पर वहाँ लेटने की जगह नहीं थी बस बैठने भर को जगह थी| मैं अपनी पीठ टिका कर और सड़क की तरफ मुँह कर के बैठ गया और सोने लगा| वहाँ से जो कोई भी गाडी गुजरती उसकी हेडलाइट मेरे मुँह पर पड़ती, पर मैं गहरी नींद सो चूका था| कुछ देर बाद मेरे पास एक गाडी रुकी, गाडी से कोई निकला जिसने मेरा नाम पुकारा; "मानु!" पर मैं तो गहरी नींद में था तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया| फिर वो शक़्स मेरे नजदीक आया और अपने फ़ोन की रौशनी मेरे मुँह पर मार कर मेरी पहचान करने लगा| जब उसे यक़ीन हुआ की मैं ही मानु हूँ तो उसने मुझे हिलना शुरू कर दिया| मेरे जिस्म से आती दारु की महक से वो सक्स समझ गया की मैं नशे में टुन हूँ| बड़ी मेहनत से उसने मुझे अपनी गाडी की पिछली सीट पर लिटाया और मेरे पाँव अंदर कर के वो शक़्स चल दिया|


अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी आँखों के सामने छत थी और मैंने खुद को एक कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ पाया| मैं जैसे ही उठा वो शक़्स जो मुझे उठा कर लाया था वो मेरे सामने था| "आप?" मेरे मुँह से इतना निकला की उन्होंने मेरी तरफ एक कॉफ़ी का मग बढ़ा दिया| ये शक़्स कोई और नहीं बल्कि अनु मैडम थीं|
 

Rockstar_Rocky

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wonderfull update bhai dil ko chu liya yaar par qambakht zindgi jo bhi dikhaye kam hai

अपनी जिंदगी में भी लिखे हैं कुछ ऐसे ही किस्से,
किसी ने अपना बनाकर वक़्त गुजार लिया,
किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बना लिया|
 

Aakash.

ᴇᴍʙʀᴀᴄᴇ ᴛʜᴇ ꜰᴇᴀʀ
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मुझे सेठ के पैसों से कोई सरोकार नहीं था मुझे तो मुन्ना के जाने का दुःख था! भारी मन से मैं ऊपर आया और दरवाजा जोर से बंद किया| शराब की बोतल निकाली और उसे मुँह से लगा कर गटागट पीने लगा| एक साँस में दारु खींचने के बाद मैंने बोतल खेंच कर जमीन पर मारी और वो चकना चूर हो गई, कांच सारे घर में फ़ैल गया था! मैं बहुत जोर से चिल्लाया; "आआआआआआआआआआआआआ!!" और फिर घुटनों के बल बैठ कर रोने लगा| "क्या दुश्मनी है तेरी मुझसे? मैंने कौन सा सोना-चांदी माँगा था तुझसे? तुने 'ऋतू' को मुझसे छीन लिया मैंने तुझे कुछ नहीं कहा, पर वो छोटा सा बच्चा जिससे प्यार करने लगा था उसे भी तूने मुझसे छीन लिया? जरा सी भी दया नहीं आई तेरे मन में? क्या पाप किया है मैंने जिसकी सजा तू मुझे दे रहा है? सच्चा प्यार किया था मैंने!!!! कम से कम उस बच्चे को तो मेरे जीवन में रहने दिया होता! दो दिन की ख़ुशी दे कर छीन ली, इससे अच्छा देता ही ना!" मैं गुस्से में फ़रियाद करने लगा|

update 62

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना


जाना कहा है जाना
जाना कहा है जाना...


तय थे दिल को ग़म जहाँ पे
मिली क्यों खुशियां वहीँ पे
हाथों से अब फिसले जन्नत
हम तो रहे न कही के


होना जुदा अगर
है ही लिखा
यादों को उसकी
आके तू आग लगा जा


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना
अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे

तेरी ही मर्ज़ी सारे जहाँ में
तोह ऐसा क्यों जतलाये

ख्वाबों को मेरे छीन कैसे
तू खुदा कहलाये


माँग बैठा
चाँद जो दिल
भूल की इतनी
देता है कोई सजा किया?


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

जाना कहा है जाना…
जाना कहा है जाना


पर वहाँ मेरी फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं था, थी तो बस शराब जो मेरे दिल को चैन और रहत देती थी, एक वही तो थी जिसने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा था! कुछ देर बाद पोलिस और मकान मालिक घर आये और मेरी हालत देख कर पोलिस वाला कुछ पूछने ही वाला था की मकान मालिक बोला; "इंस्पेक्टर साहब ये तो अभी कुछ दिन पहले ही आया है| सीधा-साधा लड़का है!"

"हाँ वो तो इसे देख कर ही पता लग रहा है?! क्या नाम है?" पोलिस वाले ने पुछा| अब मैं इतना भी नशे में नहीं था; "मानु" मैंने बड़ा संक्षेप में जवाब दिया क्योंकि ज्यादा बोलता तो वो पता नहीं और कितने सवाल पूछता|

"तुम संजय या उसकी पत्नी को जानते थे?" उसने सवाल दागा|

"संजय से बस एक बार मिला था और उसकी पत्नी मेरे यहाँ काम करती थी|"

"उसका कोई फ़ोन नंबर है तुम्हारे पास?"

"जी नहीं!"

"दिन में क्यों पीते हो?"

"पर्सनल reason है!" ये सुन कर वो मुझे घूरता हुआ बाकियों से पूछताछ करने लगा| मैंने दरवाजा भेड़ा और बिस्तर पर लेट गया, इधर मेरा फ़ोन बज उठा| मैंने फ़ोन उठाया तो अरुण पूछने लगा की कब आ रहा है? मैंने बस इतना बोला की तबियत ठीक नहीं है और वो समझ गया की मैंने पी हुई है| शाम को वो धड़धड़ाता हुआ मेरे घर आ पहुँचा और जब मैंने दरवाजा खोला तो वो मेरी शक्ल देख कर समझ गया| मैं हॉल में बैठ गया और वो मेरे सामने बैठ गया, "भाई क्या हो गया है तुझे? दो दिन तो तू चक रहा था और अब फिर से वापस उदास हो गया? क्या हुआ?" मैंने कोई जवाब नहीं दिया बीएस सर झुकाये बैठा रहा| तभी उसकी नजर कमरे में बिखरे काँच पर पड़ी और वो बोला; "वो आई थी क्या यहाँ?" मैंने ना में सर हिलाया| "तो ये बोतल कैसे टूटी?" उसने पुछा और तब मुझे ध्यान आया की घर में काँच फैला हुआ है| वो खुद उठा और झाड़ू उठा कर साफ़ करने लगा, मुझे खुद पर बड़ा गुस्सा आया इसलिए मैंने उससे झाड़ू ले लिया और खुद झाड़ू लगाने लगा| "तू ने खाया कुछ?" अरुण ने पुछा तो माने फिर से ना में सर हिलाया और उसने खुद मेरे लिए खाना आर्डर किया| "देख तू कुछ दिन के लिए घर चला जा! मैं भी कुछ दिन के लिए गाँव जा रहा हूँ|" मैं उसकी बात समझ गया था, उसे चिंता थी की उसकी गैरहजरी में मैं यहाँ अकेला रहूँगा तो फिर से ये सब करता रहूँगा और तब मुझे टोकने वाला कोई नहीं होगा| "देखता हूँ!" मैं बस इतना बोला और वापस उसके सामने बैठ गया| "मेरी सास की तबियत खराब है, तेरी भाभी तो पहले ही वहाँ जा चुकी है पर वो अकेले संभाल नहीं पा रही इसलिए कुछ दिन की छुट्टी ले कर जा रहा हूँ|" अरुण ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा| "कुछ जयदा सीरियस तो नहीं?" मैंने पुछा और इस तरह से हमारी बात शुरू हुई| मैंने उसे अपनी बाइक की चाभी दी ताकि वो समय से घर पहुँच जाए वरना बस के सहारे रहता तो कल सुबह से पहले नहीं पहुँचता| "अरे! मैं बस से चला जाऊँगा|" अरुण ने चाबही मुझे वापस देते हुए कहा| अब मुझे बात बनानी थी इसलिए मैंने कहा; "यार तू ले जा वरना यहाँ कहाँ खड़ी रखूँगा?" मेरी बात सुन कर उसे विश्वास हो गया की मैं भी घर जा रहा हूँ और उसने चाभी ले ली| फिर मैं उसे नीचे छोड़ने के बहाने गया और रात की दारु का जुगाड़ कर वापस आ गया| वापस आया तो खाना भी आ चूका था, अब किसका मन था खाने का पर उसे waste करने का मन नहीं किया| मैं वापस से बालकनी में बैठ गया और अपना खाना और पेग ले कर बैठ गया|


मेरे मन में अब जहर भर चूका था, प्यार का नामोनिशान दिल से मिट चूका था| मन ने ये मान लिया था की इस दुनिया में प्यार-मोहब्बत सब दिखावा है, बस जर्रूरत पूरी करने का नाम है! पर अभी मेरी परेशानियाँ खत्म नहीं हुई थी, रितिका की शादी होनी थी और मुझे घर जाना था| घर अगर नहीं गया तो सब मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जायेंगे और फिर पता नहीं क्या काण्ड हो! घर जा कर मैं ये भी नहीं कह सकता की मैं शादी में शरीक ही नहीं होना चाहता! क्योंकि फिर मुझे उसका कारन बताना पड़ता जो की रितिका के लिए घातक साबित होता| ये ख्याल आते ही दिमाग ने बदला लेने की सोची, "जा के घर में सब सच बोल दे!" मेरे दिमाग ने कहा पर फिर उसका परिणाम सोच कर मन ने मना कर दिया| भले ही मेरा दिमाग रितिका से नफरत करता था पर मन तो अभी अपनी ऋतू का इंतजार कर रहा था| दिमाग और दिल में जंग छिड़ चुकी थी और आखिर नफरत ही जीती! इस जीत को मनाने के लिए मैंने एक लार्ज पेग बनाया और उसे गटक गया| नफरत तो जीत गई पर मेरा दिल हार गया और अब वो अंदर से बिखर चूका था| बस एक लाश ही रह गई थी जिसमें बस दर्द ही दर्द बचा था और उस दर्द की बस एक ही दवा थी वो थी शराब! अब तो बस इसी में डूब जाने का मन था शायद ये ही मुझे किसी किनारे पहुँचा दे|

अगली सुबह में देर से उठा और ऑफिस पहुँचा क्योंकि अरुण के गैरहाजरी में काम देखने वाला कोई नहीं था| अगले दो दिन तक मैंने देर रात तक बैठ कर काम निपटाया और फिर तीसरे दिन मैंने सर से बात की; "सर I'm सॉरी पर मैं अब और ऑफिस नहीं आ सकता! टैक्स रिटर्न्स फाइनल हो चुकी हैं और अरुण वापस आ कर जमा कर देगा| इसलिए प्लीज मैं कल से नहीं आ पाउँगा|" सर ने बटहरी कोशिश की पर मैं नहीं माना और उसी वक़्त सर से अपनी बैलेंस पेमेंट का चेक ले कर पहले बैंक पहुँचा और उसे जमा किया फिर घर आ कर सो गया| जब उठा तो पहले नहाया और जब खुद को आज माने आईने में देखा तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ की ये शक़्स कौन है? मैं आँखें बड़ी कर के हैरानी से खुद को ही आईने में देखने लगा| वो सीधा-साधा लड़का कहाँ खो गया? उसकी जगह ये कौन है जो आईने में मुझे ही घूर रहा है? मेरी दाढ़ी के बाल इतने बड़े हो गए थे की मैं अब बाबा लगने लगा था| सर के बाल झबरे से थे और जब नजर नीचे के बदन पर गई तो मुझे बड़ा जोर का झटका लगा| गर्दन से नीचे का जिस्म सूख चूका था और मैं हद्द से ज्यादा कमजोर दिख रहा था| मेरी पसलियाँ तक मुझे दिखने लगीं थी! ये क्या हालत बना ली है मैंने अपनी? क्या यही होता है प्यार में? अच्छा-खासा इंसान इस कदर सूख जाता है?! अब मुझे समझ आने लगा था की क्यों मेरे दोस्त मुझे कहते थे की मैंने अपनी क्या हालत बना ली है?! दिमाग कहने लगा था की सुधर जा और ये बेवकूफियां बंद कर, वो कमबख्त तो तेरा दिल तोड़ चुकी है तू क्यों उसके प्यार के दर्द में खुद को खत्म करना चाहता है| पर अगले ही पल मन ने मुझे फिर से पीने का बहाना दे दिया, "अभी तो उसकी शादी भी होनी है? तब कैसे संभालेगा खुद को?" और मेरे लिए इतनी वजह काफी थी फिर से पीने के लिए| "पुराना वाला मानु अब मर चूका है!" ये कहते हुए मैंने किचन काउंटर से गिलास उठाया और उसमें शराब डाल कर पीने लगा| दोपहर से रात हुई और रात से सुबह.... पर मेरा पीना चालु रहा| जब नींद आ जाती तो सो जाता और जब आँख खुलती तो फिर से पीने लगता, इस तरह से करते-करते संडे आया|


सुबह मेरी नींद पेट में अचानक हुए भयंकर दर्द से खुली, मैं तड़पता हुआ सा उठा और उठ कर बैठना चाहा| बैठने के बाद मैं अपने पेट को पकड़ कर झुक कर बैठ गया की शायद पेट दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| दर्द अब भी हो रहा था और धीरे-धीरे बढ़ने लगा था, मैं उठ खड़ा हुआ और किचन में जा कर पानी पीने लगा| मुझे लगा शायद पानी पीने से दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| मैं जमीन पर लेट गया पर पेट से अब भी हाथ नहीं हटाया था| बल्कि मैं तो लेटे-लेटे ही अपने घुटनों को अपनी छाती से दबाना छह रहा था ताकि दर्द कम हो पर उससे दर्द और बढ़ रहा था| फिर अचानक से मुझे उबकाई आने लगी, मैं फटाफट उठा और बाथरूम में भागा और कमर पकड़ कर उल्टियाँ करने लगा| मुँह से सिर्फ और सिर्फ दारु ही बाहर आ रही थी, खाने के नाम पर सिर्फ चखना या खीरा-टमाटर ही अंदर गए थे जो दारु के साथ बाहर आ गए| करीब 10 मिनट मैं कमोड पर झुक कर खड़ा रहा ताकि और उलटी होनी है तो हो जाये| पर उलटी नहीं आई और अब पेट का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था| मुँह-हाथ धो कर आ कर मैं जमीन पर बैठ गया, मेरे हाथ-पैर काँपने लगे थे और निगाह शराब की बोतल पर थी| पर दिमाग कह रहा था की और और पीयेगा तो मरेगा! उठ और डॉक्टर के चल| मैं उठा कपडे बदले और परफ्यूम छिड़क कर घर से निकला| ऑटो किया और डॉक्टर के पास पहुँचा, मेरा नम्बर आने तक मैं बैठा-बैठा ऊँघता रहा| जब आया तो डॉक्टर ने मुझसे बीमारी के बारे में पुछा| "सर आज सुबह मेरे पेट में बड़े जोर से दर्द हुआ, उसके कुछ देर बाद उल्टियाँ हुई और अब मेरे हाथ-पैर काँप रहे हैं!" उसने पुछा की मैं कितना ड्रिंक करता हूँ तो मैंने उन्हें सब सच बता दिया| उन्होंने कुछ टेस्ट्स लिखे और सामने वाले Lab में भेज दिया| वहाँ मेरा Ultrasound हुआ, ECG हुआ और X-ray भी हुआ और भी पता नहीं क्या-क्या ब्लड टेस्ट किये उन्होंने! मैं पूरे टाइम यही सोच रहा था की शरीर में कुछ है ही नहीं तो टेस्ट्स में आएगा क्या घंटा! पर जब रिपोर्ट्स डॉक्टर ने देखि तो वो बहुत हैरान हुआ| "It’s a clear case of fatty liver! You’ll have to stop drinking otherwise you’re very close to develop Cirrhosis of Liver and things will get complicated from there. Your present condition can be controlled and improved.” डॉक्टर ने बहुत गंभीर होते हुए कहा| पर उसकी बात का अर्थ जो मेरे दिमाग ने निकला वो ये था की मैं जल्द ही मरने वाला हूँ पर कितनी जल्दी ये मुझे पूछना था! "Sir if you don’t mind me asking, how much time do I have?” ये सवाल सुन कर डॉक्टर को मेरे मानसिक स्थिति का अंदाजा हुआ और वो गरजते हुए बोला; "Are you out of your mind? This condition of yours can be contained, you’re not gonna die!”

“But what if I don’t stop drinking? Then I’m gonna die right?”

“Tell me why do you wanna die? Is that a solution to whatever crisis you’re going through? Death isn’t a solution, Life is!”

मैं खामोश हो गया क्योंकि उसके आगे मेरे कान कुछ सुनना नहीं चाहते थे| डॉक्टर को ये समझते देर न लगी की I'm going through depression! इसलिए वो अपनी कुर्सी से उठा और मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे सांत्वना देने लगा|

“Do you have a family?” मैंने हाँ में सर हिलाया| “Call them here, you need their love and affection. You’ve to understand, you’re slipping into depression and its not good! You need proper medical care, don’t throw your life that easily!” मेरा दिमाग जानता था की डॉक्टर मेरे भले की कह रहा था पर रितिका की बेवफाई मुझे बस अन्धकार में ही रखना चाहती थी| "Thank you doctor!" इतना कह कर मैं उठ गया और उन्होंने मुझे मेरी केस फाइल दे दी| पर हॉस्पिटल से बाहर आते ही शराब की ललक जाग गई और मैं ऑटो पकड़ कर सीधा घर के पास वाले ठेके पर आ गया| वहाँ दारु ले ही रहा था की मेरी नजर एक बोर्ड पर पड़ी, कोई नया पब खुला था जिसका नाम 'मैखाना' था! ये नाम ही मेरे मन उस जगह के बारे में उत्सुकता जगाने के लिए काफी था, ऊपर से जब मैंने नीचे देखा तो वहाँ लिखा था 1 + 1 on IMFL Drinks after 8 PM अब ये पढ़ते ही मेरे मन में आया की आज रात तो कुछ नया ब्रांड try करते हैं! वहाँ से मेरा घर करीब 20 मिनट दूर था तो मैंने ऑटो किया और घर आ गया| अब शराब पीने लगा ही था की पिताजी का फ़ोन आ गया| "कब आ रहा है तू घर?' उन्होंने डाँटते हुए कहा| मैं आगे कुछ कहता उससे पहले ही उनका गुस्सा फुट पड़ा; "मुश्किल से महीना रह गया है, घर पर इतना काम है और तू है की घर तक नहीं भटकता? क्या तकलीफ है तुझे? यहाँ सब बहुत खफा हैं तुझसे!"

"पिताजी .... काम...." आगे कुछ कहने से पहले ही वो फिर से बरस पड़े; "हरबार तेरी मनमानी नहीं चलेगी! तूने कहा तुझे नौकरी करनी है हमने तुझे जाने दिया, तूने कहा मुझे शादी नहीं करनी हम वहां भी मान गए पर अब घर में शादी है और तू वहाँ अपनी नौकरी पकड़ कर बैठ है? छोड़ दे अगर छुट्टी नहीं देता तेरा मालिक तो! बाद में दूसरी पकड़ लिओ!"

"पिताजी इतनी आसानी से नौकरी नहीं मिलती! ये मेरी दूसरी नौकरी है, पहली वाली मैंने छोड़ दी क्योंकि वो बॉस तनख्वा नहीं बढ़ाता था| मैंने आप को इसलिए नहीं बताया क्योंकि आप मुझे वापस बुला लेटे! अब नई नौकरी है तो इतनी जल्दी छुट्टी नहीं माँग सकता! मैं कल बात करता हूँ बॉस से और फिर आपको बताता हूँ|" मैंने बड़े आराम से जवाब दिया|

"ठीक है! पर जल्दी आ यहाँ बहुत सा काम है!" उन्होंने बस इतना कहा और फ़ोन काट दिया| अब माने बहाना तो बना दिया था पर कल क्या करूँगा यही सोचते-सोचते शाम हो गई, जो जाम मैंने पहले बनाया था उसे पीया और फिर गांजा फूंका और फिर बालकनी में बैठ गया| बैठे-बैठे आँख लग गई और जब खुली तो रात के नौ बज रहे थे| मुझे याद आया की आज तो 'मैखाने' जाना है, मैंने मुँह-हाथ धोया, कपडे पहने और परफ्यूम छिड़क कर ही पैदल वहाँ पहुँच गया| ज्यादा लोग नहीं आये थे, मैं सीधा बार स्टूल पर बैठा और बारटेंडर से 60 ml सिंगल माल्ट मांगी! वहाँ के म्यूजिक को सुन कर मुझे अच्छा लग रहा था, अकेले में शराब पी कर सड़ने से तो ये जगह सही लगी मुझे| मरना ही तो थोड़ा ऐश कर के मरो ना! ये ख्याल आते ही मैंने भी गाने को एन्जॉय करना शुरू कर दिया| एक-एक कर मैंने 10 ड्रिंक्स खत्म की और अब बजे थे रात के बारह और बारटेंडर ने और ड्रिंक सर्वे करने से मना कर दिया| कारन था की मैं बहुत ज्यादा ही नशे में था और मुझसे ठीक से खड़ा ही नहीं जा रहा था| बारटेंडर ने बाउंसर को बुलाया जिसने मुझे साहरा दे कर बाहर छोड़ा और खुद अंदर चला गया| मैं वहाँ ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और ऑटो का इंतजार कर रहा था पर कोई ऑटो आ ही नहीं रहा था और जो आया भी वो मेरी हालत देख कर रुका नहीं| अब मुझे एहसास हुआ की घर में पीने का फायदा क्या होता है, वहाँ पीने के बाद कहीं भी फ़ैल सकते हो! मैंने हिम्मत बटोरी और पैदल ही जाने का सोचा, पर अभी मुझे एक सड़क पार करनी थी जो मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज था| रात का समय था और ट्रक के चलने का टाइम था इसलिए मैं धीरे-धीरे सड़क पार करने लगा| नशे में वो दस फूटा रोड भी किलोमीटर चौड़ी लग रही थी| आधा रास्ता पार किया की एक ट्रक के हॉर्न की जोरदार आवाज आई और मैं जहाँ खड़ा था वहीँ खड़ा हो गया| नशे में आपके बॉडी के रेफ्लेक्सेस काम नहीं करते इसलिए मैं रूक गया था, पर उस ट्रक वाले ने मेरे साइड से बचा कर अपना ट्रक निकाल लिया| आज तो मौत से बाल-बाल बचा था, पर मैं तो पलट के उसे ही गालियाँ देने लगा; "अबे! भोसड़ी के मार देता तो दुआ लगती मेरी बहनचोद साइड से निकाल कर ले गया!" पर वो तो अपना ट्रक भगाता हुआ आगे निकल गया| मैं फिर से धीरे-धीरे अपना रास्ता पार करने लगा| जैसे-तैसे मैंने रास्ता पार किया और सड़क किनारे खड़ा हो गया, कोई ऑटो तो मिलने वाला था नहीं, न ही फ़ोन में बैटरी थी की कैब बुला लूँ और अब चल कर घर जाने की हिम्मत थी नहीं| मैंने देखा तो कुछ दूर पर एक टूटा हुआ बस-स्टैंड दिखा, सोचा वहीँ रात काट लेता हूँ और सुबह घर चला जाऊँगा| धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा पर वहाँ लेटने की जगह नहीं थी बस बैठने भर को जगह थी| मैं अपनी पीठ टिका कर और सड़क की तरफ मुँह कर के बैठ गया और सोने लगा| वहाँ से जो कोई भी गाडी गुजरती उसकी हेडलाइट मेरे मुँह पर पड़ती, पर मैं गहरी नींद सो चूका था| कुछ देर बाद मेरे पास एक गाडी रुकी, गाडी से कोई निकला जिसने मेरा नाम पुकारा; "मानु!" पर मैं तो गहरी नींद में था तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया| फिर वो शक़्स मेरे नजदीक आया और अपने फ़ोन की रौशनी मेरे मुँह पर मार कर मेरी पहचान करने लगा| जब उसे यक़ीन हुआ की मैं ही मानु हूँ तो उसने मुझे हिलना शुरू कर दिया| मेरे जिस्म से आती दारु की महक से वो सक्स समझ गया की मैं नशे में टुन हूँ| बड़ी मेहनत से उसने मुझे अपनी गाडी की पिछली सीट पर लिटाया और मेरे पाँव अंदर कर के वो शक़्स चल दिया|


अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी आँखों के सामने छत थी और मैंने खुद को एक कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ पाया| मैं जैसे ही उठा वो शक़्स जो मुझे उठा कर लाया था वो मेरे सामने था| "आप?" मेरे मुँह से इतना निकला की उन्होंने मेरी तरफ एक कॉफ़ी का मग बढ़ा दिया| ये शक़्स कोई और नहीं बल्कि अनु मैडम थीं|
Nice update dear...:heart::heart::heart:
 

Rahul

Kingkong
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updated me to dukh ka bhandaar bhara pada tha par sukar hai anu mam aa gayi par mujhe lagta ye manu jarur marega pakka hai darde dil walon ka yahi anjaam hota hai....tukra ke mera pyar mera intjaam dekhegi :)
 

Rockstar_Rocky

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updated me to dukh ka bhandaar bhara pada tha par sukar hai anu mam aa gayi par mujhe lagta ye manu jarur marega pakka hai darde dil walon ka yahi anjaam hota hai....tukra ke mera pyar mera इन्तक़ाम dekhegi :)

वैसे आपका शेर यहाँ फिट नहीं होता! :)
 

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मुझे सेठ के पैसों से कोई सरोकार नहीं था मुझे तो मुन्ना के जाने का दुःख था! भारी मन से मैं ऊपर आया और दरवाजा जोर से बंद किया| शराब की बोतल निकाली और उसे मुँह से लगा कर गटागट पीने लगा| एक साँस में दारु खींचने के बाद मैंने बोतल खेंच कर जमीन पर मारी और वो चकना चूर हो गई, कांच सारे घर में फ़ैल गया था! मैं बहुत जोर से चिल्लाया; "आआआआआआआआआआआआआ!!" और फिर घुटनों के बल बैठ कर रोने लगा| "क्या दुश्मनी है तेरी मुझसे? मैंने कौन सा सोना-चांदी माँगा था तुझसे? तुने 'ऋतू' को मुझसे छीन लिया मैंने तुझे कुछ नहीं कहा, पर वो छोटा सा बच्चा जिससे प्यार करने लगा था उसे भी तूने मुझसे छीन लिया? जरा सी भी दया नहीं आई तेरे मन में? क्या पाप किया है मैंने जिसकी सजा तू मुझे दे रहा है? सच्चा प्यार किया था मैंने!!!! कम से कम उस बच्चे को तो मेरे जीवन में रहने दिया होता! दो दिन की ख़ुशी दे कर छीन ली, इससे अच्छा देता ही ना!" मैं गुस्से में फ़रियाद करने लगा|

update 62

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना


जाना कहा है जाना
जाना कहा है जाना...


तय थे दिल को ग़म जहाँ पे
मिली क्यों खुशियां वहीँ पे
हाथों से अब फिसले जन्नत
हम तो रहे न कही के


होना जुदा अगर
है ही लिखा
यादों को उसकी
आके तू आग लगा जा


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना
अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे

तेरी ही मर्ज़ी सारे जहाँ में
तोह ऐसा क्यों जतलाये

ख्वाबों को मेरे छीन कैसे
तू खुदा कहलाये


माँग बैठा
चाँद जो दिल
भूल की इतनी
देता है कोई सजा किया?


अल्लाह तुझसे, बंदा पूछे..
राह तू दे दे जाना कहा है जाना

जाना कहा है जाना…
जाना कहा है जाना


पर वहाँ मेरी फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं था, थी तो बस शराब जो मेरे दिल को चैन और रहत देती थी, एक वही तो थी जिसने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा था! कुछ देर बाद पोलिस और मकान मालिक घर आये और मेरी हालत देख कर पोलिस वाला कुछ पूछने ही वाला था की मकान मालिक बोला; "इंस्पेक्टर साहब ये तो अभी कुछ दिन पहले ही आया है| सीधा-साधा लड़का है!"

"हाँ वो तो इसे देख कर ही पता लग रहा है?! क्या नाम है?" पोलिस वाले ने पुछा| अब मैं इतना भी नशे में नहीं था; "मानु" मैंने बड़ा संक्षेप में जवाब दिया क्योंकि ज्यादा बोलता तो वो पता नहीं और कितने सवाल पूछता|

"तुम संजय या उसकी पत्नी को जानते थे?" उसने सवाल दागा|

"संजय से बस एक बार मिला था और उसकी पत्नी मेरे यहाँ काम करती थी|"

"उसका कोई फ़ोन नंबर है तुम्हारे पास?"

"जी नहीं!"

"दिन में क्यों पीते हो?"

"पर्सनल reason है!" ये सुन कर वो मुझे घूरता हुआ बाकियों से पूछताछ करने लगा| मैंने दरवाजा भेड़ा और बिस्तर पर लेट गया, इधर मेरा फ़ोन बज उठा| मैंने फ़ोन उठाया तो अरुण पूछने लगा की कब आ रहा है? मैंने बस इतना बोला की तबियत ठीक नहीं है और वो समझ गया की मैंने पी हुई है| शाम को वो धड़धड़ाता हुआ मेरे घर आ पहुँचा और जब मैंने दरवाजा खोला तो वो मेरी शक्ल देख कर समझ गया| मैं हॉल में बैठ गया और वो मेरे सामने बैठ गया, "भाई क्या हो गया है तुझे? दो दिन तो तू चक रहा था और अब फिर से वापस उदास हो गया? क्या हुआ?" मैंने कोई जवाब नहीं दिया बीएस सर झुकाये बैठा रहा| तभी उसकी नजर कमरे में बिखरे काँच पर पड़ी और वो बोला; "वो आई थी क्या यहाँ?" मैंने ना में सर हिलाया| "तो ये बोतल कैसे टूटी?" उसने पुछा और तब मुझे ध्यान आया की घर में काँच फैला हुआ है| वो खुद उठा और झाड़ू उठा कर साफ़ करने लगा, मुझे खुद पर बड़ा गुस्सा आया इसलिए मैंने उससे झाड़ू ले लिया और खुद झाड़ू लगाने लगा| "तू ने खाया कुछ?" अरुण ने पुछा तो माने फिर से ना में सर हिलाया और उसने खुद मेरे लिए खाना आर्डर किया| "देख तू कुछ दिन के लिए घर चला जा! मैं भी कुछ दिन के लिए गाँव जा रहा हूँ|" मैं उसकी बात समझ गया था, उसे चिंता थी की उसकी गैरहजरी में मैं यहाँ अकेला रहूँगा तो फिर से ये सब करता रहूँगा और तब मुझे टोकने वाला कोई नहीं होगा| "देखता हूँ!" मैं बस इतना बोला और वापस उसके सामने बैठ गया| "मेरी सास की तबियत खराब है, तेरी भाभी तो पहले ही वहाँ जा चुकी है पर वो अकेले संभाल नहीं पा रही इसलिए कुछ दिन की छुट्टी ले कर जा रहा हूँ|" अरुण ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा| "कुछ जयदा सीरियस तो नहीं?" मैंने पुछा और इस तरह से हमारी बात शुरू हुई| मैंने उसे अपनी बाइक की चाभी दी ताकि वो समय से घर पहुँच जाए वरना बस के सहारे रहता तो कल सुबह से पहले नहीं पहुँचता| "अरे! मैं बस से चला जाऊँगा|" अरुण ने चाबही मुझे वापस देते हुए कहा| अब मुझे बात बनानी थी इसलिए मैंने कहा; "यार तू ले जा वरना यहाँ कहाँ खड़ी रखूँगा?" मेरी बात सुन कर उसे विश्वास हो गया की मैं भी घर जा रहा हूँ और उसने चाभी ले ली| फिर मैं उसे नीचे छोड़ने के बहाने गया और रात की दारु का जुगाड़ कर वापस आ गया| वापस आया तो खाना भी आ चूका था, अब किसका मन था खाने का पर उसे waste करने का मन नहीं किया| मैं वापस से बालकनी में बैठ गया और अपना खाना और पेग ले कर बैठ गया|


मेरे मन में अब जहर भर चूका था, प्यार का नामोनिशान दिल से मिट चूका था| मन ने ये मान लिया था की इस दुनिया में प्यार-मोहब्बत सब दिखावा है, बस जर्रूरत पूरी करने का नाम है! पर अभी मेरी परेशानियाँ खत्म नहीं हुई थी, रितिका की शादी होनी थी और मुझे घर जाना था| घर अगर नहीं गया तो सब मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जायेंगे और फिर पता नहीं क्या काण्ड हो! घर जा कर मैं ये भी नहीं कह सकता की मैं शादी में शरीक ही नहीं होना चाहता! क्योंकि फिर मुझे उसका कारन बताना पड़ता जो की रितिका के लिए घातक साबित होता| ये ख्याल आते ही दिमाग ने बदला लेने की सोची, "जा के घर में सब सच बोल दे!" मेरे दिमाग ने कहा पर फिर उसका परिणाम सोच कर मन ने मना कर दिया| भले ही मेरा दिमाग रितिका से नफरत करता था पर मन तो अभी अपनी ऋतू का इंतजार कर रहा था| दिमाग और दिल में जंग छिड़ चुकी थी और आखिर नफरत ही जीती! इस जीत को मनाने के लिए मैंने एक लार्ज पेग बनाया और उसे गटक गया| नफरत तो जीत गई पर मेरा दिल हार गया और अब वो अंदर से बिखर चूका था| बस एक लाश ही रह गई थी जिसमें बस दर्द ही दर्द बचा था और उस दर्द की बस एक ही दवा थी वो थी शराब! अब तो बस इसी में डूब जाने का मन था शायद ये ही मुझे किसी किनारे पहुँचा दे|

अगली सुबह में देर से उठा और ऑफिस पहुँचा क्योंकि अरुण के गैरहाजरी में काम देखने वाला कोई नहीं था| अगले दो दिन तक मैंने देर रात तक बैठ कर काम निपटाया और फिर तीसरे दिन मैंने सर से बात की; "सर I'm सॉरी पर मैं अब और ऑफिस नहीं आ सकता! टैक्स रिटर्न्स फाइनल हो चुकी हैं और अरुण वापस आ कर जमा कर देगा| इसलिए प्लीज मैं कल से नहीं आ पाउँगा|" सर ने बटहरी कोशिश की पर मैं नहीं माना और उसी वक़्त सर से अपनी बैलेंस पेमेंट का चेक ले कर पहले बैंक पहुँचा और उसे जमा किया फिर घर आ कर सो गया| जब उठा तो पहले नहाया और जब खुद को आज माने आईने में देखा तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ की ये शक़्स कौन है? मैं आँखें बड़ी कर के हैरानी से खुद को ही आईने में देखने लगा| वो सीधा-साधा लड़का कहाँ खो गया? उसकी जगह ये कौन है जो आईने में मुझे ही घूर रहा है? मेरी दाढ़ी के बाल इतने बड़े हो गए थे की मैं अब बाबा लगने लगा था| सर के बाल झबरे से थे और जब नजर नीचे के बदन पर गई तो मुझे बड़ा जोर का झटका लगा| गर्दन से नीचे का जिस्म सूख चूका था और मैं हद्द से ज्यादा कमजोर दिख रहा था| मेरी पसलियाँ तक मुझे दिखने लगीं थी! ये क्या हालत बना ली है मैंने अपनी? क्या यही होता है प्यार में? अच्छा-खासा इंसान इस कदर सूख जाता है?! अब मुझे समझ आने लगा था की क्यों मेरे दोस्त मुझे कहते थे की मैंने अपनी क्या हालत बना ली है?! दिमाग कहने लगा था की सुधर जा और ये बेवकूफियां बंद कर, वो कमबख्त तो तेरा दिल तोड़ चुकी है तू क्यों उसके प्यार के दर्द में खुद को खत्म करना चाहता है| पर अगले ही पल मन ने मुझे फिर से पीने का बहाना दे दिया, "अभी तो उसकी शादी भी होनी है? तब कैसे संभालेगा खुद को?" और मेरे लिए इतनी वजह काफी थी फिर से पीने के लिए| "पुराना वाला मानु अब मर चूका है!" ये कहते हुए मैंने किचन काउंटर से गिलास उठाया और उसमें शराब डाल कर पीने लगा| दोपहर से रात हुई और रात से सुबह.... पर मेरा पीना चालु रहा| जब नींद आ जाती तो सो जाता और जब आँख खुलती तो फिर से पीने लगता, इस तरह से करते-करते संडे आया|


सुबह मेरी नींद पेट में अचानक हुए भयंकर दर्द से खुली, मैं तड़पता हुआ सा उठा और उठ कर बैठना चाहा| बैठने के बाद मैं अपने पेट को पकड़ कर झुक कर बैठ गया की शायद पेट दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| दर्द अब भी हो रहा था और धीरे-धीरे बढ़ने लगा था, मैं उठ खड़ा हुआ और किचन में जा कर पानी पीने लगा| मुझे लगा शायद पानी पीने से दर्द कम हो पर ऐसा नहीं हुआ| मैं जमीन पर लेट गया पर पेट से अब भी हाथ नहीं हटाया था| बल्कि मैं तो लेटे-लेटे ही अपने घुटनों को अपनी छाती से दबाना छह रहा था ताकि दर्द कम हो पर उससे दर्द और बढ़ रहा था| फिर अचानक से मुझे उबकाई आने लगी, मैं फटाफट उठा और बाथरूम में भागा और कमर पकड़ कर उल्टियाँ करने लगा| मुँह से सिर्फ और सिर्फ दारु ही बाहर आ रही थी, खाने के नाम पर सिर्फ चखना या खीरा-टमाटर ही अंदर गए थे जो दारु के साथ बाहर आ गए| करीब 10 मिनट मैं कमोड पर झुक कर खड़ा रहा ताकि और उलटी होनी है तो हो जाये| पर उलटी नहीं आई और अब पेट का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था| मुँह-हाथ धो कर आ कर मैं जमीन पर बैठ गया, मेरे हाथ-पैर काँपने लगे थे और निगाह शराब की बोतल पर थी| पर दिमाग कह रहा था की और और पीयेगा तो मरेगा! उठ और डॉक्टर के चल| मैं उठा कपडे बदले और परफ्यूम छिड़क कर घर से निकला| ऑटो किया और डॉक्टर के पास पहुँचा, मेरा नम्बर आने तक मैं बैठा-बैठा ऊँघता रहा| जब आया तो डॉक्टर ने मुझसे बीमारी के बारे में पुछा| "सर आज सुबह मेरे पेट में बड़े जोर से दर्द हुआ, उसके कुछ देर बाद उल्टियाँ हुई और अब मेरे हाथ-पैर काँप रहे हैं!" उसने पुछा की मैं कितना ड्रिंक करता हूँ तो मैंने उन्हें सब सच बता दिया| उन्होंने कुछ टेस्ट्स लिखे और सामने वाले Lab में भेज दिया| वहाँ मेरा Ultrasound हुआ, ECG हुआ और X-ray भी हुआ और भी पता नहीं क्या-क्या ब्लड टेस्ट किये उन्होंने! मैं पूरे टाइम यही सोच रहा था की शरीर में कुछ है ही नहीं तो टेस्ट्स में आएगा क्या घंटा! पर जब रिपोर्ट्स डॉक्टर ने देखि तो वो बहुत हैरान हुआ| "It’s a clear case of fatty liver! You’ll have to stop drinking otherwise you’re very close to develop Cirrhosis of Liver and things will get complicated from there. Your present condition can be controlled and improved.” डॉक्टर ने बहुत गंभीर होते हुए कहा| पर उसकी बात का अर्थ जो मेरे दिमाग ने निकला वो ये था की मैं जल्द ही मरने वाला हूँ पर कितनी जल्दी ये मुझे पूछना था! "Sir if you don’t mind me asking, how much time do I have?” ये सवाल सुन कर डॉक्टर को मेरे मानसिक स्थिति का अंदाजा हुआ और वो गरजते हुए बोला; "Are you out of your mind? This condition of yours can be contained, you’re not gonna die!”

“But what if I don’t stop drinking? Then I’m gonna die right?”

“Tell me why do you wanna die? Is that a solution to whatever crisis you’re going through? Death isn’t a solution, Life is!”

मैं खामोश हो गया क्योंकि उसके आगे मेरे कान कुछ सुनना नहीं चाहते थे| डॉक्टर को ये समझते देर न लगी की I'm going through depression! इसलिए वो अपनी कुर्सी से उठा और मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे सांत्वना देने लगा|

“Do you have a family?” मैंने हाँ में सर हिलाया| “Call them here, you need their love and affection. You’ve to understand, you’re slipping into depression and its not good! You need proper medical care, don’t throw your life that easily!” मेरा दिमाग जानता था की डॉक्टर मेरे भले की कह रहा था पर रितिका की बेवफाई मुझे बस अन्धकार में ही रखना चाहती थी| "Thank you doctor!" इतना कह कर मैं उठ गया और उन्होंने मुझे मेरी केस फाइल दे दी| पर हॉस्पिटल से बाहर आते ही शराब की ललक जाग गई और मैं ऑटो पकड़ कर सीधा घर के पास वाले ठेके पर आ गया| वहाँ दारु ले ही रहा था की मेरी नजर एक बोर्ड पर पड़ी, कोई नया पब खुला था जिसका नाम 'मैखाना' था! ये नाम ही मेरे मन उस जगह के बारे में उत्सुकता जगाने के लिए काफी था, ऊपर से जब मैंने नीचे देखा तो वहाँ लिखा था 1 + 1 on IMFL Drinks after 8 PM अब ये पढ़ते ही मेरे मन में आया की आज रात तो कुछ नया ब्रांड try करते हैं! वहाँ से मेरा घर करीब 20 मिनट दूर था तो मैंने ऑटो किया और घर आ गया| अब शराब पीने लगा ही था की पिताजी का फ़ोन आ गया| "कब आ रहा है तू घर?' उन्होंने डाँटते हुए कहा| मैं आगे कुछ कहता उससे पहले ही उनका गुस्सा फुट पड़ा; "मुश्किल से महीना रह गया है, घर पर इतना काम है और तू है की घर तक नहीं भटकता? क्या तकलीफ है तुझे? यहाँ सब बहुत खफा हैं तुझसे!"

"पिताजी .... काम...." आगे कुछ कहने से पहले ही वो फिर से बरस पड़े; "हरबार तेरी मनमानी नहीं चलेगी! तूने कहा तुझे नौकरी करनी है हमने तुझे जाने दिया, तूने कहा मुझे शादी नहीं करनी हम वहां भी मान गए पर अब घर में शादी है और तू वहाँ अपनी नौकरी पकड़ कर बैठ है? छोड़ दे अगर छुट्टी नहीं देता तेरा मालिक तो! बाद में दूसरी पकड़ लिओ!"

"पिताजी इतनी आसानी से नौकरी नहीं मिलती! ये मेरी दूसरी नौकरी है, पहली वाली मैंने छोड़ दी क्योंकि वो बॉस तनख्वा नहीं बढ़ाता था| मैंने आप को इसलिए नहीं बताया क्योंकि आप मुझे वापस बुला लेटे! अब नई नौकरी है तो इतनी जल्दी छुट्टी नहीं माँग सकता! मैं कल बात करता हूँ बॉस से और फिर आपको बताता हूँ|" मैंने बड़े आराम से जवाब दिया|

"ठीक है! पर जल्दी आ यहाँ बहुत सा काम है!" उन्होंने बस इतना कहा और फ़ोन काट दिया| अब माने बहाना तो बना दिया था पर कल क्या करूँगा यही सोचते-सोचते शाम हो गई, जो जाम मैंने पहले बनाया था उसे पीया और फिर गांजा फूंका और फिर बालकनी में बैठ गया| बैठे-बैठे आँख लग गई और जब खुली तो रात के नौ बज रहे थे| मुझे याद आया की आज तो 'मैखाने' जाना है, मैंने मुँह-हाथ धोया, कपडे पहने और परफ्यूम छिड़क कर ही पैदल वहाँ पहुँच गया| ज्यादा लोग नहीं आये थे, मैं सीधा बार स्टूल पर बैठा और बारटेंडर से 60 ml सिंगल माल्ट मांगी! वहाँ के म्यूजिक को सुन कर मुझे अच्छा लग रहा था, अकेले में शराब पी कर सड़ने से तो ये जगह सही लगी मुझे| मरना ही तो थोड़ा ऐश कर के मरो ना! ये ख्याल आते ही मैंने भी गाने को एन्जॉय करना शुरू कर दिया| एक-एक कर मैंने 10 ड्रिंक्स खत्म की और अब बजे थे रात के बारह और बारटेंडर ने और ड्रिंक सर्वे करने से मना कर दिया| कारन था की मैं बहुत ज्यादा ही नशे में था और मुझसे ठीक से खड़ा ही नहीं जा रहा था| बारटेंडर ने बाउंसर को बुलाया जिसने मुझे साहरा दे कर बाहर छोड़ा और खुद अंदर चला गया| मैं वहाँ ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और ऑटो का इंतजार कर रहा था पर कोई ऑटो आ ही नहीं रहा था और जो आया भी वो मेरी हालत देख कर रुका नहीं| अब मुझे एहसास हुआ की घर में पीने का फायदा क्या होता है, वहाँ पीने के बाद कहीं भी फ़ैल सकते हो! मैंने हिम्मत बटोरी और पैदल ही जाने का सोचा, पर अभी मुझे एक सड़क पार करनी थी जो मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज था| रात का समय था और ट्रक के चलने का टाइम था इसलिए मैं धीरे-धीरे सड़क पार करने लगा| नशे में वो दस फूटा रोड भी किलोमीटर चौड़ी लग रही थी| आधा रास्ता पार किया की एक ट्रक के हॉर्न की जोरदार आवाज आई और मैं जहाँ खड़ा था वहीँ खड़ा हो गया| नशे में आपके बॉडी के रेफ्लेक्सेस काम नहीं करते इसलिए मैं रूक गया था, पर उस ट्रक वाले ने मेरे साइड से बचा कर अपना ट्रक निकाल लिया| आज तो मौत से बाल-बाल बचा था, पर मैं तो पलट के उसे ही गालियाँ देने लगा; "अबे! भोसड़ी के मार देता तो दुआ लगती मेरी बहनचोद साइड से निकाल कर ले गया!" पर वो तो अपना ट्रक भगाता हुआ आगे निकल गया| मैं फिर से धीरे-धीरे अपना रास्ता पार करने लगा| जैसे-तैसे मैंने रास्ता पार किया और सड़क किनारे खड़ा हो गया, कोई ऑटो तो मिलने वाला था नहीं, न ही फ़ोन में बैटरी थी की कैब बुला लूँ और अब चल कर घर जाने की हिम्मत थी नहीं| मैंने देखा तो कुछ दूर पर एक टूटा हुआ बस-स्टैंड दिखा, सोचा वहीँ रात काट लेता हूँ और सुबह घर चला जाऊँगा| धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा पर वहाँ लेटने की जगह नहीं थी बस बैठने भर को जगह थी| मैं अपनी पीठ टिका कर और सड़क की तरफ मुँह कर के बैठ गया और सोने लगा| वहाँ से जो कोई भी गाडी गुजरती उसकी हेडलाइट मेरे मुँह पर पड़ती, पर मैं गहरी नींद सो चूका था| कुछ देर बाद मेरे पास एक गाडी रुकी, गाडी से कोई निकला जिसने मेरा नाम पुकारा; "मानु!" पर मैं तो गहरी नींद में था तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया| फिर वो शक़्स मेरे नजदीक आया और अपने फ़ोन की रौशनी मेरे मुँह पर मार कर मेरी पहचान करने लगा| जब उसे यक़ीन हुआ की मैं ही मानु हूँ तो उसने मुझे हिलना शुरू कर दिया| मेरे जिस्म से आती दारु की महक से वो सक्स समझ गया की मैं नशे में टुन हूँ| बड़ी मेहनत से उसने मुझे अपनी गाडी की पिछली सीट पर लिटाया और मेरे पाँव अंदर कर के वो शक़्स चल दिया|


अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी आँखों के सामने छत थी और मैंने खुद को एक कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ पाया| मैं जैसे ही उठा वो शक़्स जो मुझे उठा कर लाया था वो मेरे सामने था| "आप?" मेरे मुँह से इतना निकला की उन्होंने मेरी तरफ एक कॉफ़ी का मग बढ़ा दिया| ये शक़्स कोई और नहीं बल्कि अनु मैडम थीं|
Gajab bass Gajab :adore: kisi movie se kam nahi tha ye update :10:
Har baat ko detail me likha he sarkar aapne, sharab ko sahara to bana liya Maanu ne par uske anjaam Jane bina he :(
Kher naiya paar lagne ki jara si he aasha ko dor dikhi he ab Anu madam ke aane se
 

Rahul

Kingkong
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वैसे आपका शेर यहाँ फिट नहीं होता! :)
bhai yahan manu badla lene ki condition me na hai dubla bhi ho gaya ishiliye intjaam likhna sahi laga mujhe..badhiya likh rahe guru baki hamne bhi kisi ka dil toda hai lekin hamari majburi thi bhai ishiliye aisa karna pada warna hum to dusmano ka sath nahi chhodte doston me to jaan basti hai
 
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