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Incest घर की मोहब्बत

Raj Singh

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Zabardast update bhai...abb dheera dheera story ka 2 aur 3rd heros akku aur raman ka bhi role badh raha hai....jahan aaku aur nitu ka rishta din ba din ghera ota ja raha hai aur uski maa ko logo ki tension ho rahi hai ki sabko bhai behan ki rishta k baare main pata na chall jaaye...Dusri taraf ankush na raman ko sahi advice di gai dekhta titli raman ka jaal main fasti ya phir raman hi apne dill titli ka husn ka jaal main fasa deta hai ........ankus aur garima ki nokjhok bahut hi mazedaar ho rahi garima toh samjh gai ankush babu kab samjhege iss pyaar ko..gungun aur ankush ka bhi aamna saamna kab hoga aur kaise maaza aaiga😃
Gungun ka pyar Suraj hain na ki Ankush
 

insotter

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Update 8



सूरज से बात करने के बाद सुमित्रा बाथरूम के लिए निकल गयी और बाथरूम का दरवाजा बंद करके अंदर अपनी चुत में ऊँगली करने लगी और सूरज के बारे में सोचने लगी.. सुमित्रा ने बाथरूम की दिवार पर बनी जगह मे अपना फ़ोन सीधा करके रख दिया जिसमे सुमित्रा ने सूरज की तस्वीर लगा रखी थी.. सूरज की तस्वीर देखकर सुमित्रा अपनी चुत मे ऊँगली कर रही थी और मन मे सूरज के साथ आलिंगन करने और अपने ही बेटे को भोगने के ख्यालों से खुदको रोमांचित और कामुक कर उसने सूरज के नाम पर वापस अपनी नदी का पानी बहा दिया था और जब तक वो बाथरूम से बाहर आई सूरज भी रचना की चुत में अपना माल भर चूका था और अब बेड के पास खड़ा होकर अपनी पेंट पहन रहा था.. रचना बिस्तर पर ही लेटी हुई थी उसकी सांवली चुत से दोनों का मिश्रित वीर्य घुलकर बह रहा था जिसे रचना अपनी ऊँगली से उठाकर चाटते हुए बोली..

देवर जी दूध तो पिया ही नहीं तुमने..

सूरज रचना के पास बैठकर उसके बूब्स दबाते हुए - रात को मेरे कमरे में सोना भाभी.. सारी इच्छा पूरी कर दूंगा..

रचना सूरज के होंठों पर से लिपस्टिक साफ करती हुई बोलती है - घर पर बहुत लोग है देवर जी.. वहा ऐसा कुछ नहीं हो पायेगा..

आप फ़िक्र मत करो भाभी छत पर कोई नहीं आएगा.. छत वाले कमरे में आज रात आपके दूध का स्वाद लूंगा..

वैसे एक बात बताओ.. इंटरनेट पर मुझे देखकर मेरे नाम का जयकारा तो लगाया होगा तूमने..

कई बार भाभी.. कई राते आपको देखकर ही बिताई है मैंने.. अब तो आप ही मेरा पकड़ कर जयकारा लगा देना..

ये भी कोई बोलने वाली बात है देवर जी? मैं तो आपकी दिवानी हो गई.. जब बोलोगे ख़ुशी ख़ुशी सब दे दूंगी..

भाभी अब चलता हूँ... आप भी अपनेआप को ठीक करके नीचे आ जाओ..

सूरज स्टेज की तरफ आ जाता है...

कब से ढूंढ़ रही हूँ.. चल..
सुमित्रा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए सूरज का हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले जाती है जहाँ विनोद गरिमा के साथ साथ जयप्रकाश गरिमा के पिता लख्मीचंद और माँ उर्मिला भी मौजूद थे.. एक फॅमिली फोटो खींचती है..

गरिमा का सारा ध्यान सूरज पर था और वो खा जाने वाली नज़र से सूरज को देख रही थी मगर सूरज जैसे अनजान बनकर गरिमा के सामने से निकल गया उसने गरिमा की तरफ देखा भी नहीं.. फोटो खिचवाने के बाद वो स्टेज से नीचे आ गया और गरिमा का दिल जोरो से दुखने लगा वो सूरज के इस व्यवहार को समझ नहीं पाई.. उसे यहां सबसे ज्यादा अगर किसको देखने और मिलने की तलब थी तो वो सूरज था मगर सूरज ने उसे ऐसे अनदेखा किया जैसे बॉलीवुड सेलिब्रेटी एक दूसरे को करते है..

गरिमा कब से सूरज का ही इंतजार कर रही थी और जब वो मिला भी तो अनजान बनकर.. गरिमा ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को काबू में रखा अगर वो अकेली होती तो शायद रो पड़ती.. उसे अब अपने मन में सूरज के लिए पनप रहे प्रेम का आभास होने लगा था.. उसके साथ उसका होने वाला हस्बैंड खड़ा था मगर उसका दिल तो सूरज के नाम से धड़कने लगा था.. गरिमा को अब इसका अहसास होने लगा था कि वो अब एक दो राहें पर खड़ी हुई है.. जहाँ से ना वो वापस मुड़ सकती थी ना आगे बढ़ सकती थी.. 14 दिन सूरज के साथ बात करके उसे ऐसा लग रहा था जैसे सूरज के साथ उसका 14 जन्मो का बंधन हो.. उसे अब समझ आने लगा था कि ये प्रेम है..

सूरज को लगा था कि गरिमा कहीं सबके सामने उसे ताने मारने ना लग जाए और इतनी देर उससे दूर रहने का करण पूछते हुए विनोद के सामने ही नाराजगी ना हाज़िर करने लग जाए इसलिए उसने जानबूझ कर गरिमा को अनदेखा किया और उसे दूर ही रहा..


************


क्या हुआ अक्कू? यहां गाडी बाइक क्यों रोक दी..

माँ वो सर दर्द होने लगा मैं मेडिकल से गोली ले आता हूँ..

अरे मेरे पास है गोली अक्कू.. तू घर चल मैं दे दूंगी..

नहीं माँ आप रहने दो आपको भी जरुरत पड़ती रहती है मैं ले आता हूँ अपने लिए..

अंकुश बाइक से उतर कर मेडिकल कि दूकान पर चला जाता है और नीतू मन ही मन मुस्कुराने लगती है.. उसके पीछे उसकी माँ गोमती बैठी हुई अंकुश के आने का इंतजार करने लगती है..

हाँ भाईसाहब क्या चाहिए?

1 कंडोम का पैकेट दे दो 8 वाला.. चॉकलेट फ्लेवर..

केमिस्ट एक नज़र बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर अंकुश से - ये लो भाईसाब.. भाईसाब एक बात पुछु..

अंकुश- हा बोलो..

केमिस्ट - दोनों बिलकुल कड़क है.. कहाँ से लाये हो इन को? क्या रेट है नाईट का?

अंकुश पीछे बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर केमिस्ट से - भोस्डिके काम कर अपना..

अंकुश कंडोम जेब में रखकर वापस बाइक चलाने लगता है वही पीछे नीतू और गोमती बैठ जाती है.. और तीनो कुछ मिनटों में घर पहुंच जाते है.. जिसके बाद गोमती अपने कमरे मे सो जाती है और अंकुश नीतू के साथ रासलीला रचाने लगता है..


***********


नज़मा कुछ बात हुई हनी से?

जी...... वो तैयार है..

शुक्र है नज़मा.. कम से कम घर में बच्चे की खुशी तो आएगी.. दूकान तो ठीक चलने लगी है अब तू भी पेट से हो जाए तो ख़ुशी दुगुनी हो जायेगी..

मैं बिस्तर ठीक कर देती हूँ..

मैं कल ही हनी से बात करूंगा..

नज़मा बिस्तर ठीक करके एक तरफ लेट गई और आगे आने वाले पलों के बारे में सोचने लगी.. उसे हनी पसंद था मगर उसके साथ सोने के बारे में नज़मा ने पहले कभी नहीं सोचा था.. परदे में रहने वाली नज़मा अब किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर और हमबदन दोनों होने वाली थी.. नज़मा को घबराहट हो रही थी और एक रोमांच भी उसके दिल को घेरे जा रहा था.. उसे आज नींद नहीं आने वाली थी..

बिलाल घर की छत पर सिगरेट का धुआँ उड़ाते हुए सोच रहा था कि नज़मा पेट से हो गई तो जो रिस्तेदार उसे नामर्द कहकर चिढ़ाते है ताने मारते है उनका सबका मुंह चुप हो जाएगा और वो चैन से जी पायेगा..


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हेमलता बिस्तर लेटी हुई अब भी उन पलों को याद कर रही थी जब सूरज ने घर कि छत वाले बाथरूम में उसके अपनी मजबूत बाहों में कसके पकड़ा था.. और आज उसका सुन्दर मुखड़ा देखकर हेमलता के मन में उसके प्रति मातृत्व भाव के साथ काम का भाव भी आरहा था.. सूरज हेमलता के सामने ही तो बड़ा हुआ था मगर काम पीपासा ने किसे अछूता छोड़ा है? 50 साल कि उम्र को पार कर चुकी हेमलता खुली आँखों से सूरज के साथ प्यार मोहब्बत के सामने देख रही थी..


वही उसकी बेटी बरखा जिसने सूरज को टूशन पढ़ाया था वो भी सूरज के बारे में ही सोच रही थी.. वो यहां अपने माँ बाप के पास उनसे मिलने इसलिए नहीं आई थी कि हेमलता और बंसी ने उसे बुलाया था बल्कि इसलिए आई थी कि उसके अपने पति के साथ सम्बन्ध सही नहीं चल रहा था.. उसकी गृहस्थी अस्त व्यस्त होने की राह पर थी.. बरखा के पति का एक्स्ट्रा मेरिटयल अफेयर चल रहा था जिसका पता बरखा को चल गया था और वो गुस्से में होने बच्चे को भी वही उसकी दादी के पास छोड़कर यहां आ गई थी.. बरखा के मन में सूरज के प्रति लगाव और स्नेह था.. बरखा सूरज से खुलकर बात कर सकती थी और जब वो आई थी तब रास्ते में उसने सूरज से ढ़ेर सारी बातें की थी.. बरखा को नींद नहीं आई तो वो हेमलता से छुपकर घर की छत पर आ गई और एक सिगरेट अपने होंठों पर लगाकर जलाते हुए कश लेती हुई यहां से वहा घूमने लगी.. उसने मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे.. जैसे उसके मन में कोई युद्ध चल रहा हो..


**********


गुनगुन अपने कमरे की बालकनी में खड़ी होकर बाहर सडक पर एक कुतिया और एक कुत्ते के बीच हो रहे सम्भोग को देख रही थी.. रात का सन्नाटा था और कुत्ता खम्बे के नीचे आराम और इत्मीनान से अपनी कुतिया को चोद रह था..

गुनगुन को कुत्ते कुतिया की चुदाई देखकर अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब वो सूरज के साथ कभी कॉलेज के स्टोर रूम में तो कभी अपनी सहेली के घर जाकर सम्भोग किया करती थी.. गुनगुन की सील सूरज ने ही तोड़ी थी और गुनगुन अपनी जिंदगी में सिर्फ सूरज से ही चुदी थी..

सूरज पढ़ने में अच्छा नहीं था.. अक्सर ऐसा होता था कि गुनगुन सूरज के लंड को चुत में लेके उसे पढ़ाती थी और उसके पढ़ने और याद करने पर उससे अपनी चुत मरवाती थी.. इसमें दोनों को बराबर का सुख मिलता था..
गुनगुन सयानी थी मगर सूरज बचकाना.. गुनगुन सूरज को अच्छे से संभालती थी और उसके कारण सूरज एग्जाम में पासिंग मार्क्स ले आता था..

गुनगुन को आज भी याद है जब वो घुटने के बल बैठकर कॉलेज की छत पर सूरज के लंड को मुंह में लेकर उसे चूसते हुए सूरज को blowjob दे रही थी तब सूरज ने बड़े प्यार से गुनगुन को कहा था.. गुनगुन मुझे कभी छोड़ के मत जाना यार.. मैं ख़ुशी से जी नहीं पाऊंगा तेरे बिना..

ये सोचकर गुनगुन की आँख में आंसू आ गए.. गुनगुन सूरज को ढूंढ़ रही थी मगर सूरज उसे कहीं नहीं मिला.. गुनगुन ने कॉलेज से घर का एड्रेस पता किया तो पता चला की सूरज के परिवार ने घर बदल दिया था.. और कॉलेज में किसी को भी उसके बारे में पता नहीं है.. गुनगुन को ये तब नहीं पता था कि सूरज के घर का नाम हनी है... गुनगुन कि आँख में आंसू थे.. उसने सिगरेट का लम्बा कश लेते हुए सूरज को याद किया और सामने चल रही कुत्ते कुतिया कि चुदाई देखने लगी..

गुनगुन सिगरेट नहीं पीती थी मगर जब वो एग्जाम कि प्रिपरेशन कर रही थी तब साथ कि एक लड़कियों ने देर तक जागनेके लिए उसे सिगरेट पीना सिखाया और गुनगुन अब भी कभी कभी जब वो उदास और मायूस होती सिगरेट पी लेती थी..

गुनगुन को कुत्ते में सूरज और कुतिया में खुदकी शकल दिखने लगी थी और अब उसकी चुत से तरल पदार्थ रिसने लगा रहा.. गुनगुन सिगरेट के कश लेती हुई सूरज को वापस हासिल करने के ख्वाब देख रही थी..
एक आदमी जो सडक पर चल रहा था उसने कुत्ते और कुत्तिया को चुदाई करते देखकर पत्थर मारना शुरू कर दिया.. कुत्ते का लंड और कुतिया की चुत में चिपक गया था और दोनों इसी तरह उस आदमी से बचकर भाग गए.. गुनगुन को याद आने लगा कि एक दिन जब गुनगुन को घर आने कि जल्दी थी और सूरज उसकी चुत में लंड घुसा के लेटा हुआ था तब गुनगुन के कहने पर कि मुझे जाने दो सूरज ने जवाब दिया था.. मेरा लंड तो तेरी चुत मे चिपक गया है गुनगुन.. निकलता ही नहीं है... गुनगुन ने उस बात को याद करके मुस्कुराते हुए सिगरेट बुझाकार फेंक दी और वापस आकर बिस्तर में लेट गयी.. नींद उसकी आँख में भी नहीं थी..


************


रात के दस बज चुके थे.. सूरज ने vigra ली थी और अब तक कई बार झड़ चूका था.. सूरज गबरू जवान था और उसके कारण उसपर vigra का असर तुरंत हो गया था जिसके करण रचना और नेहा को उसने चोद दिया था... विनोद और गरिमा के साथ घर के बाकी लोग भी अब खाने के लिए बैठ गए थे मगर सूरज को भूक नहीं थी वो अपना खड़ा लंड लेकर बिल्डिंग कि छत पर आ गया था.. जहाँ वो एक तरफ बैठकर सोच रहा था कि उसपर से ये असर अब कब ख़त्म होगा? सूरज को छत ओर जाते हुए किसी ने देख लिया था और वो शख्स भी सीढ़ियों पर खड़ा हुआ सूरज को छत पर एक तरफ अपना लंड पकड़ के बैठे हुए देख रहा था..

सूरज ने कुछ देर बाद देखा कि कोई उसकी तरफ चला आ रहा है.. सूरज ने जैसे नज़र उठाकर देखा तो एक औरत सूरज के पास आकर अपने घुटनो पर बैठते हुए कहती है - भईया जी..

फुलवा.. तू यहां क्या कर रही है?

भईया जी आपको देखा तो मिलने चली आई.. आपने इतना बड़ा उपकार किया मेरे ऊपर.. मेरा घरवाला भी यहां आ गया है धरमु ने उसे काम दिया है.. आपने तो मेरा नसीब बदल दिया.. भईया आपको क्या हुआ है?

कुछ नहीं.. फुलवा जा यहां..

भईया जी हाथ से क्या पीछा रहे हो.. और आपको क्या हुआ है? आपको कोई दिक्कत है?

सूरज की नज़र फुलवा की चोली में गई तो उसके लंड में और अकड़न आ गई और फुलवा ने सूरज के लंड को पेंट के अंदर ही पूरी औकात में खड़ा देख लिया और हसने लगी.. और बोली - भईया जी लगता है आज बहुत मन है आपका?

सूरज फुलवा के बूब्स घूरकर - फुलवा जा यहां वरना कुछ हो जाएगा..

फुलवा हस्ती हुई - भईया जी लाओ.. मैं मदद कर देती हूँ आपकी..

सूरज - नहीं फुलवा.. रहने दे..

फुलवा सूरज का हाथ उसके लंड पर से हटा कर उसके पेंट की ज़िप खोल लेती है और सूरज के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है.. फिर सूरज का एक हाथ अपनी चोली के अंदर घुसा कर उसके लंड पर अपने होंठ लगा देती है और फिर धीरे धीरे प्यार से लंड चूसाईं शुरू कर देती है जिसमे सूरज को आराम आ आने लगा था और मज़ा भी मिलने लगा था.. सूरज एक हाथ से फुलवा के बूब्स दबाते हुए उसे लंड चुसवा रहा था तभी उसका फोन आ गया और सूरज उठाकर बातकरने लगा..

हेलो..

हनी तू फिर से कहा गायब हो गया? खाना नहीं खाना तुझे?

भूक नहीं है माँ..

अरे भूक क्यों नहीं है तुझे? देख यहां सब खाने के लिए बैठ गए है तू जल्दी आ..

कहा ना भूक नहीं है.. आप खा लो..

हनी तू है कहा? किसके साथ है?

मैं यही हूँ माँ.. आप फ़िक्र मतकरो.. आप खाना खाओ..

नहीं.. जब तक तू नहीं आएगा मैं नहीं खाऊंगी.. समझा..

माँ यार क्या बच्चों जैसी ज़िद करने लगी आप.. खा लो ना.. पहले भी तो खाती थी..

खाती थी पर अब से नहीं खाऊंगी.. तू आएगा तभी खाऊंगी.. समझा..

ठीक है थोड़ी देर रुको मैं आता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

फुलवा सूरज का पूरा लंड गले तक ले जाती है और अब जोर जोर से चूसने लगती है..

अह्ह्ह.. फुलवा.. अह्ह्ह.. अह्ह्ह

फुलवा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे वो लंड चूसने के लिए ही पैदा हुई हो.. उसने 10 मिनट के अंदर ही सूरज को अपने मुंह से ठंडा कर दिया था..

सूरज ने अपने बटुए से पांच सो का एक नोट निकालकर फुलवा की चोली में घुसा दिया और फुलवा का बोबा पकड़कर मसलते हुए बोला - फुलवा.. तू कमाल है..

फुलवा ने अपनी चोली से पैसे निकालकर सूरज से कहा - भईया जी.. ये क्या है? आप मेरी कीमत लगा रहे हो..

नहीं फुलवा.. मैं बस तुझे इनाम दे रहा हूँ.. चोली फटी हुई है तेरी नई ले लेना..

फुलवा ने अपनी चोली उतार कर एक तरफ रख दी और कमर से ऊपर पूरी नंगी होकर वापस सूरज के लंड को पकड़ती हुई मुंह में लेकर चूसने लगी..

फुलवा क्या कर रही है.. अह्ह्ह्ह.. आराम से.. फुलवा.. छोड़ ना.. वापस खड़ा हो जाएगा.. फुलवा...

वही तो करना है भईया जी.. ये कहकर फुलवा वापस लंड चूसने लगती है और दो मिनट में ही सूरज का लंड वापस खड़ा हो जाता है..

फुलवा.. बड़ी मुश्किल से झड़ा था तूने वापस खड़ा कर दिया..

मैं वापस झड़वा दूंगी भईया जी आप फ़िक्र मत कीजिये.. ये कहकर फुलवा अपना घाघरा उठाकर सूरज के लंड पर बैठ गई और सूरज का लंड घप करके फुलवा की चुत में चला गया.. फुलवा की चुत बड़ी थी उसे लंड लेने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई बल्कि मज़ा आने लगा.. वो सूरज के लंडपर उछलने लगी और अपने दोनों चुचे हिला हिला कर सूरज के मुंह पर मारने लगी.. सूरज दोनों हाथ से फुलवा की कमर पकड़ कर उसके बूब्स को कभी चूस तो कभी चाट रहा था..

पास में उसका फोन पड़ा था जिसमे अब सुमित्रा के साथ साथ गरिमा का फ़ोन भी आने लगा था और सूरज को इसका ध्यान नहीं था वो फुलवा की काम कला से काम के सुख में डूब गया था.. गरिमा और सुमित्रा ने कई बार सूरज को फ़ोन किया मगर सूरज ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया या यूँ कहे की उसे फ़ोन साइलेंट होने से पता ही नहीं चला..

फुलवा निकलने वाला है.. हट..

अंदर निकाल दो ना भैयाजी..

पागल है क्या फुलवा? कंडोम नहीं लगा हुआ.. हट..

फुलवा लंड चुत से निकाल कर मुँह मे भर लेती है और सूरज को अपने मुँह मे झड़वा लेती है मगर अब तक रात के साढ़े दस बज चुके थे और फंक्शन लगभग ख़त्म हो चूका था.. सुमित्रा के अलावा सबने खाना खा लिया था गरिमा का मन नहीं था मगर उसे भी सबके दबाव ने खाना खाना पड़ा था..

सूरज ने फ़ोन देखा तो चौंक गया और फुलवा का बोबा पकड़ के उसे साइड करते हुए अपने लंड पर से हटा दिया फिर पेंट बंद करके जल्दी से खड़ा हो गया..

क्या हुआ भैया जी?

फुलवा मर गया आज तो.. इतना लेट हो गया.. जाना पड़ेगा जल्दी निचे..

फुलवा भी खड़ी होकर अपनी चोली पहनती हुई - भैया जी जब भी आपका मन करे तो मिलने का अहसान जरुरत कीजियेगा.. आप जैसे बोलेंगे मैं वैसे आपको खुश कर दूंगी..

सूरज निचे आ जाता है..

सुमित्रा ने जैसे ही सूरज को देखा वो गुस्से से बोल पड़ी..

कहा था तू.. मेरी बात की जरा भी परवाह है या नहीं तुझे? किस लड़की के साथ था? बता?

माँ क्या बोल रही हो.. कहीं फंस गया था.. सॉरी.. आपने खाना नहीं खाया ना? चलो खाते है..

अब नहीं खाना मुझे.. सब का खाना हो गया सब चले भी गए और अब तेरे पापा के साथ बाकी लोग भी घर जा रहे है तेरी मर्ज़ी हो तो घर आ जाना वरना जिस लड़की के साथ मुंह काला कर रहा था उसी के साथ रह जाना..

कौन लड़की कैसी लड़की? क्या बोल रही हो किसी लड़की के साथ नहीं था.. कहा ना कहीं फंस गया था..

हनी ऐसा है मुझे अभी बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ है मेरा हाथ उठ जाएगा.. तूझे जो करना है कर.. हट मुझे जाने दे..

अरे माँ सुनो तो... चलो ना खाना खाते है अभी तो खा सकते है..

मुझे नहीं खाना.. हट..

देखो आपने वादा किया था आप मुझसे नाराज़ नहीं होगी..

तूने भी एक वादा किया था मुझे सब सच बताएगा.. बोल किसके साथ था.. कौन लड़की थी? देख मैंने फ़ोन पर आवाज सुनी थी उस लड़की.. पहले भी और अभी भी.. सच बता.. वरना कभी बात नहीं करुँगी..

माँ.. वो..

वो क्या कौन थी? चिंकी थी?

माँ.. चिंकी कहा से आएगी.. आप क्या बोल रही हो.. उससे तो बात भी नहीं की मैंने जब से उसकी शादी हुई है..

तो कौन थी?

कॉलगर्ल थी..

कौन? कौन सी गर्ल थी..

कोनसी गर्ल नहीं माँ.. पैसे लेकर.. जो आती है.. वो... कॉल गर्ल.. बस?

सुमित्रा गुस्से से - छी.. अब ये सब करेगा? शर्म नहीं आती तुझे?

सूरज नज़र झुकाकर कान पकड़ते हुए - सॉरी.. माँ..

सुमित्रा पास आकर कान में - कंडोम तो लगाया था ना?

सूरज गर्दन हां में हिला देता है..

सुमित्रा फिर से बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - लगता है तेरी शादी भी विनोद के साथ ही करवानी पड़ेगी.. बहुत जवानी फूट रही है नवाब को.. चल अब..खाना खाते है..

आप बैठो खाना लेके आता हूँ माँ..

सूरज प्लेट उठाकर खाना लेने चला जाता है और सुमित्रा सूरज को देखकर मन ही मन सूरज के साथ सेज सजाने के ख्याली पुलाव बनाकर अपने आप को कल्पनाओ की दुनिया में ले गई उसकी चुत गीली हो उठी थी.. वो सोच रही थी की सूरज ने एक रंडी को ये बोलने पर मजबूत कर दिया.. आराम से.. मतलब सूरज सम्भोग करने में माहिर और खिलाड़ी होगा.

मुन्ना और नेहा भी अब काम निपटाने में लगे थे और अब बचा हुआ सामान घर पहुंचने के लिए किसको बुला लिया था..

सूरज खाना ले आया और सुमन के साथ बैठकर खाने लगा.. दोनों साथ में खाना खा रहे थे और एक दूसरे से बिना कुछ बोले एक दुसरे को कभी कभी देखकर खाने का स्वाद लेने लगे थे.. खाने के बाद सुमित्रा ने देखा की लख्मीचंद और उर्मिला उसी की तरफ आ रहे थे और गरिमा के साथ बाकी सभी लोग जो उनकी तरफ से आये थे वापस जाने के लिए बस में बैठ गए थे..

सूरज ने जैसे ही लख्मी चंद और उर्मिला को देखा उसे याद आया कि उसने गरिमा से बात तक नहीं कि है..

सूरज वहा से बस कि तरफ चला गया और बस की खिड़की में गरिमा को देखकर व्हाट्सप्प पर गरिमा को से बस से बाहर आने को कहा.. गरिमा ने massage देखकर अनदेखा कर दिया और बस से कुछ दूर खड़े सूरज को गुस्से से देखकर मुंह मोड़ लिया..

सूरज ने गरिमा को कॉल किया मगर गरिमा ने फ़ोन भी नहीं उठाया और आँखे बड़ी बड़ी करके सूरज को घूरने लगी फिर मुंह फेर लिया.. सूरज समझ आ चूका था की गरिमा उस पर बहुत गुस्सा है और नाराज़ है..

सूरज ने व्हाट्सप्प पर लिखा - सॉरी भाभी..

गरिमा देखकर अनदेखा कर दिया और सूरज के बार बार massage और फ़ोन का कोई रिप्लई नहीं दिया..

सूरज के देखते ही देखते सब सब लोग बस में बैठ गए और बस चली गई किन्तु गरिमा ने सूरज से बात नहीं की..

सबके जाने के बाद सूरज भी घर आ गया.. और अपनी गलती पर मन ही मन खुदको बुरा भला कहने लगा.. सूरज को नहीं लगा था कि उसकी इतनी सी गलती से गरिमा इतना नाराज़ हो जायेगी मगर बात कुछ और थी.. गरिमा सूरज को मन ही मन चाहने लगी थी और एक माशूका अपने महबूब से इसी तरह नाराज़ हो जाया करती है.. मगर इसका इल्म सूरज को नहीं था.

सूरज अपने कमरे में आ गया और गद्दे पर उल्टा लेट गया.. उसने आज गुनगुन को देखा था जिसे वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था मगर शायद वक़्त ने उसके दिल से गुनगुन के लिए जो प्यार था उसे दबा दिया था.. सूरज गुनगुन के जाने के बाद जिन हालातों से गुजरा था उसे उभरते उभरते उसने गुनगुन को कभी ना मिलने की कसम खा ली थी.. थकावट के कारण उसे नींद आ गई थी.

रचना नज़र बचाकर उसके कमरे आई तो उसे सोता हुआ पाया और अपनी किस्मत को कोसती हुई वापस चली गई.

अगली सुबह जबतक सूरज की आँख खुली लगभग सभी मेहमान जा चुके थे.. सूरज ने उठते ही गरिमा को सॉरी मैसेज सेंड किया और गरिमा ने तुरंत उसे seen कर लिया मानो वो उसी के इंतजार में बैठी हो.. आज का पूरा दिन सूरज ने गरिमा को अनगिनत मैसेज और कॉल किये मगर गरिमा ना massage का रिप्लाई दिया ना कॉल उठाया..

कल रात गरिमा दिल दुख रहा था मगर आज उसको एक अजीब सुकून मिल रहा था उसके होंठों पर मुस्कान थी.. वही सुकून जो अपने प्रेमी को अपने लिए तड़पते देखकर मिलता है.. गरिमा का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो हर बार सूरज का massage seen करके छोड़ देती.. कोई जवाब नहीं देती..

सूरज और गरिमा के बीच कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.. सूरज रोज़ सुबह से रात तक गरिमा को पचासो मैसेज भेजता और गरिमा मैसेज देखकर मुस्कुराते हुए बिना रिप्लाई दिए फ़ोन बंद कर देती..

सगाई के सात दिन बाद तक ऐसा ही चलते रहा और सूरज घर से बाहर कहीं नहीं गया.. बस अपने कमरे में ही रहा.. उसके अंकुश और बिलाल ने भी मिलने को बुलाया मगर सूरज बात टाल कर फ़ोन रख देता..

सूरज को गरिमा से ना कोई मोहब्बत थी ना लगाव था उसे बस गरिमा से बात करना और उसके साथ बात करते हुए समय बिताना अच्छा लगता था.. सूरज
गरिमा से बात करने के लिए तड़प नहीं रहा था बस वो चाहता था कि गरिमा एक बार उसे बात कर ले ताकि सूरज गरिमा से माफ़ी मांग सके.. सूरज गरिमा को भाभी कि नज़र से ही देखता था और गरिमा के लिए उसके मन में कोई पाप नहीं था..


मुंह क्यों लटका हुआ है तेरा?

कहा लटका हुआ है? ठीक तो है..

चेहरे पर बारह बज रहे है.. क्या हुआ क्या बात है?

कुछ नहीं वो तो रात को ठीक से नींद नहीं आई इसलिए.. चाय दे दो..

सुमित्रा ने चाय देते हुए कहा - तेरे पापा बात करना चाहते है तुझसे.. सुबह पूछ रहे थे.. मैंने कहा अभी सो रहा है शाम को बात कर लेना..

मुझसे क्या बात करेंगे?

मुझे क्या पता? शायद कुछ जरुरी होगी तभी कह रहे थे वरना क्यों कहते.. और तू बोर नहीं होता अकेले?

नहीं.. मुझे अकेले रहना पसंद है.. आपका फ़ोन देना..

मेरा फ़ोन? क्यों?

किसीको फ़ोन करना है मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है..

तो कब तक पुराना फ़ोन चलाएगा नया लेले..

ले लूंगा आप दो ना अपना फ़ोन..

एक मिनट..
सुमित्रा चेक करती है कि उसके फ़ोन में सारी अप्प पर लॉक ठीक से लगा है या नहीं फिर सूरज को फ़ोन दे देती है कॉल खोल के..

सूरज गरिमा का नम्बर डायल करता है और छत पर चला जाता है..

हेलो..

भाभी आपको मेरी कसम है फ़ोन मत काटना..

गरिमा कुछ नहीं बोलती..

भाभी सॉरी.. उस दिन गलती हो.. आप बात तो करो.. ऐसे मेरा फ़ोन और massage इग्नोर करोगी तो मैं वापस आपको कभी massage और कॉल करूंगा ही नहीं..

गरिमा सूरज कि आवाज सुनकर खुश हो गई थी मगर जाताने के लिए कि वो कितनी नाराज़ है उसने कहा.. मत करना..

सूरज - ठीक है अब ना massage आयेगा ना कॉल आएगा आपको मेरा..

सूरज फ़ोन काट देता है और गरिमा सोचने लगती है कि क्या सूरज सच ने उसे मैसेज और कॉल नहीं करेगा? उसका दिल भारी सा होने लगता है गरिमा का मन करता है अभी वापस सूरज को फ़ोन करके उससे बात करें मगर उसका गुस्सा अभी सूरज पर शांत नहीं हुआ था ना ही उसकी नाराज़गी ख़त्म हुई थी ऊपर से गरिमा का अहंकार या कहो आत्मसम्मान भी उसे इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था..

सूरज नीचे आ गया और फ़ोन सुमित्रा को देकर घर से बाहर चला गया.


**************


नीतू छोड़ यार ऑफिस के लिए लेट हो जाऊँगा.

आज छूटी ले ले ना अक्कू.

क्यों आज क्या स्पेशल है?

अक्कू आज जोगिंदर के साथ समझौता होने वाला वो पैसे देगा.. वकील साहिबा ने बुलाया है.. चल ना मेरे साथ..

मम्मी को ले जाना नीतू.. मुझे उनसब चीज़ो में कोई दिलचस्पी नहीं है.. और तेरी वकील साहिबा मुझे देखते ही फिर से नैनो के तीर चलाना शुरू कर देगी.

अरे उसकी चिंता तू मत कर अक्कू.. वकील साहिबा को मैं संभाल लुंगी.. चल ना.

देख नीतू मुझे उस जोगिंदर कि शकल वापस नहीं देखनी.. तू जिद मत कर.. मम्मी को ले जा वो वैसे भी टीवी देखते देखते घर पर बोर हो जाती है.. चल जाने दे.

अक्कू रुको.

अब क्या है?

टिफिन तो लेते जाओ..

अंकुश नीतू के हाथ से टिफिन और होंठो से एक प्यार भरा चुम्मा लेकर ऑफिस के लिए निकल जाता है और नीतू नीचे गोमती के कमरे में आकर उससे कहती है..

मम्मी.. वकील ने बुलाया है आज समझौता होने वाला है.. कुछ दिनों में तलाक़ भी हो जाएगा.. आप चलोगी मेरे साथ.

गोमती अपनी गहरी सोच से बाहर आते हुए - तलाक़ के बाद क्या करेंगी नीतू? कैसे जियेगी अपनी जिंदगी?

नीतू गोमती के पास बैठ कर - आप फ़िक्र मत करो माँ.. मैं ऐसे ही खुश हूँ.

गोमती एक पेनी नज़र नीतू पर डाल कर कहती है - खुश? अरे जो लड़की तलाक़ लेकर पूरी उम्र घर पर बैठकर बिताती है उसे किस नज़रो से लोग देखते है जानती भी है? एक बार फिर सोच ले.. जोगिंदर से बात करेंगे तो वो फिर से तुझे रखने को तैयार हो जाएगा.

नीतू - माँ मैं उस आदमी के पास वापस कभी नहीं जाउंगी.. आपको चलना है तो चलो वरना साफ मना कर दो.. मैं अकेली चली जाउंगी.

गोमती - नीतू मैं अंधी नहीं हूँ.. घर में जो हो रहा है मुझे साफ नज़र आ रहा है.. मैं चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ नहीं जानती.. लोगों का तो ख्याल कर.. किसीको तेरी करतूत के बारे में पता चलेगा तो क्या इज़्ज़त रह जायेगी पुरे घर की.. मैं एक बार फिर तुझे समझा रही हूँ.. सोच ले.

नीतू - मैंने सोच लिया है माँ.

गोमती - नीतू मन कर रहा है तुझे जान से मार दूँ मगर क्या करू.. माँ जो हूँ तेरी.. अरे सारी जिंदगी क्या अपने छोटे भाई की रखैल बनकर रहेगी तू? क्या जिंदगी होगी तेरी सोचा है कभी? अक्कू तो मर्द जात है उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा मगर तू कुछ तो सोच. जब अक्कू की शादी होगी तब क्या हाल होगा तेरा?

नीतू नज़र झुका कर - तलाक़ के बाद मैं ही अक्कू से शादी करुगी माँ.. अक्कू और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते है.. मुझे पता नहीं आप सब जानती है वरना मैं आपको पहले ही बता देती.

गोमती - पता नहीं था.. तेरे कमरे का पलंग कैसे टूट जाता है तुझे लगता है मुझे पता नहीं चलता. घर के किस कोने में तुम भाई बहन कब क्या रास लीला रचाते हो मुझे सबकी खबर रहती है. मैं कुछ बोलती नहीं क्युकी डरती हूँ अगर किसीको पता चल गया तो क्या होगा? मगर अब बात हद से आगे बढ़ गई है.

नीतू - माँ अक्कू और मैंने ये घर छोड़कर कहीं और रहने का सोचा है.. एक बार तलाक़ हो जाए फिर हम ये घर बेचकर कहीं और शिफ्ट हो जायेगे.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा.. मैं अक्कू से शादी करूंगी और उसके बच्चे की माँ भी बनुँगी.. अक्कू से मैं प्यार करती हूँ माँ.

गोमती कुछ देर चुप रहकर - एक बार फिर सोच ले नीतू.. ये सब गलत है.

नीतू - प्यार सही और गलत की परवाह नहीं करता माँ.आपको हमारा साथ देना ही होगा.. आप मेरे और अक्कू से नाराज़ नहीं हो सकती.. माँ.. वकील साहिबा का फ़ोन आ रहा है.. बुला रही होगी.. मैं चलती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ तेरे साथ.

गोमती और नीतू रिक्शा लेकर कोर्ट पहुचे जाते है और समझौते के अनुसार पैसे ले लेते है फिर तलाक़ के लिए एक फ़ाइल पेश होती है और उसमे डेट लेकर वापस अपने घर आने के लिए कोर्ट से निकल जाते है..

रास्ते में नीतू - भईया वो बैंक के आगे रोकना.

गोमती - क्या हुआ नीतू?

नीतू - माँ बैंक जाकर आती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ.. भईया यही इंतजार करियेगा.. हम आते है.

नीतू पैसे अंकुश के अकाउंट में जमा करवा कर वापस गोमती के साथ रिक्शा में आकर बैठ जाती है और घर के लिए निकल जाती है.


****************


सूरज झील के किनारे बैठा हुआ अपने ही ख्यालों में गुम था कभी वो गरिमा के बारे में सोचता तो कभी गुनगुन के.. कभी उसका मन चिंकी के पास जाकर उसके साथ सम्भोग करने का होता तो कभी उसे चिंकी के घर पर उसके परिवार के होने का ख्याल आता और वो वापस किसी और ख्याल में खो जाता..
अभी तक नेहा ने सूरज को फ़ोन नहीं किया था और रचना तो अब सूरज से हर दिन थोड़ी बहुत बातचीत कर ही लेती थी.. रचना के साथ सूरज अब खुलकर बात करने लगा था मगर वो बात सिर्फ दोनों के बीच की ही होती..

रमन सूरज के पास आकर बैठ जाता है और कहता है - अच्छा हुआ भाई तूने यहां आने के लिए कह दिया. मैं भी घर पर बैठा बैठा बोर हो गया था..

सूरज - बता क्या कह रहा था.. काफी परेशान लग रहा है..

अरे क्या बताऊ यार वो औरत है ना.. उसने जीना हराम कर रखा है.. जब भी घर जाऊं.. धमकिया देती रहती है..

कौन लड़की? अच्छा.. तेरे बाप के रखैल की बेटी.. भाई वैसे तेरा बाप बड़ा रंगीन था..

अरे भाई क्या बताऊ यार.. मेरे बाप ने मेरे लिए फंदा तैयार किया है.. बहनचोद.. जब भी घर जाऊ उसकी शकल सामने आ जाती है..

क्या हो रहा है? बोल क्या रही है वो? सॉरी क्या नाम बताया था तूने उसका.. हां.. तितली..

क्या कहेगी.. साली.. बोल रही है बटवारा करो.. आधा हिस्सा चाहिए उसे.. बहनचोद.. मेरे बाप को भी सारी प्रॉपर्टी उसीके नाम करनी थी. सगे बेटे को कुछ नहीं दिया.

तू कह रहा था तेरे बाप की डॉक्टर भी थी वो.. इलाज़ करती थी तेरे बाप का? सही है मा बाप की रखैल और उस रखैल की बेटी बाप की डॉक्टर.. वैसे भाई अब क्या करेगा?

वही सोच रहा हूँ हनी.. समझ नहीं आ रहा यार..

वैसी तेरी ही तो उम्र की है.. अगर तुझे शकल पसंद है तो तू शादी कर ले.. बटवारा होने से बच जाएगा..

पागल है क्या चूतिये.. क्या कुछ भी बोल रहा है.. दिखने में अच्छी है तो क्या गले से बांध लू.. पैसो के लिए उसकी मा मेरे बाप की रखैल बनी.. अब उसकी बेटी आधी प्रॉपर्टी मांग रही है.

सूरज हसते हुए - भाई डॉक्टर है तेरा भी इलाज़ कर देगी मुफ्त में.. तू अच्छा दीखता है.. शायद पिगल जाए तेरे ऊपर.. और आधी मांग रही है वरना चाहे तो पूरी भी ले सकती है..

रमन - चने के झाड़ पर मत चढ़ाये जा.. गलत ही फ़ोन किया तुझे भी.. कुछ सलूशन देने की जगह मेरी ही गांड मारने लग गया.. कभी बात करते देखा है उसे? ऐसा लगता है जैसे अभी ऑपरेशन कर देगी..

सूरज - मैं क्या सलूशन दू मैं खुद उलझा पड़ा हूँ..

चल भाई आज दारु पीते है..

दिन में?

एक बियर तो पी ही सकते है.. चल बैठ गाडी में..

रमन सूरज को लेकर गाडी चलाता हुआ किसी बार में आ जाता है और दोनों एक टेबल पर बैठकर बियर पीते हुए वापस बात करने लगते है..

अब तो लगता है आधी प्रॉपर्टी हाथ से जाने ही वाली है.. कभी कभी अपने बाप पर बहुत गुस्सा आता है..

शुक्र कर पूरी नहीं ले रही. वैसे किस बात का गुस्सा.. और साले आधी भी बहुत है.. तेरा बाप तो कुछ नहीं छोड़ के गया तेरे लिए.. वो तो फिर भी आधी दे रही है.. हसते हुए..

तू भी मज़ाक़ बना ले साले.. उस लालची औरत से परेशान हूं ही..

डॉक्टर है लालची तो होगी ही.. वैसे एक बार मेरी बात मान के देख के.. क्या पता मान जाए...

तेरा दिमाग खराब है क्या भोस्डिके.. क्या कह रहा है..

बहन ले लंड बाप की पूरी जायदाद चाहिए या नहीं? मेरी तरह खाली जेब सडक पे घूमना है तैसे बस की बात नहीं.. और शादी करने को कह रहा हूँ.. कोनसा सुहागरात बनाने को कह रहा हूँ.. पटा के शादी कर ले.. प्रॉपर्टी तेरे हाथ में रहेंगी फिर तेरी ऐयाशी भी चलती रहेंगी..

भाई नहीं मानेगी...

कोशिश तो कर गांडु.. कॉलेज में चीटिंग करके कितनी लड़कियों को से थप्पड़ खाये थे तूने.. ज्यादा से ज्यादा तितली भी एक चिपका देगी.. और अगर मान गई तो तेरी मोज़ है.. प्यार से बात कर कुछ दिन.. उसे रेस्पेक्ट दे फिर शादी के लिए ऑफर मार दे..

उसकी शकल देखते ही गुस्सा आता है बहनचोद उससे प्यार से बात करू?

सूरज- पैसा सब करवा देगा..

रमन - अब किसका फ़ोन आ रहा है तुझे?

सूरज फ़ोन उठाकर - हां बिल्ले.. बोल..

बिलाल - बहुत बिजी रहने लगा है हनी.

सूरज - अरे नहीं यार.. कुछ नहीं. बस ऐसे ही.

बिलाल - कुछ बात करनी थी.. दूकान पर आएगा?

सूरज फ़ोन काटते हुए - हां.. आ रहा हूँ..
चल रमन छोड़ दे मुझे..

रमन - ठीक है चल..

रमन सूरज को बिलाल की दूकान पर छोड़कर घर निकल जाता है..

सूरज दूकान में आकर कुर्सी पर बैठ जाता है और बिलाल उसी तरह उसके कंधे पर दोनों हाथ रखकर दबाते हुए कहता है - ये तो वही था ना जिसे गार्डन में देखा था.. काफी बड़ी फर्म लगता है..

सूरज - इसका ही गार्डन है.. कॉलेज का दोस्त है..

बिलाल - रुक मैं नज़मा को चाय के लिए कह कर आता हूँ..

सूरज - नहीं बिल्ले... छोड.. बियर पी है थोड़ी देर पहले..

बिलाल - अच्छा हनी.. आज रात अम्मी मामू के यहां रहेंगी.. तू रात को यही रुक सके तो अच्छा रहेगा..

सूरज कुछ देर सोचकर - मैं आ जाऊंगा बिल्ले..

बिलाल - ले..

सूरज - ये क्या है?

बिलाल - पैसे है.. जो तूने दिए थे..

सूरज - छोड़ ना यार बिल्ले.. कभी जरुरत होगी तो मांग लूंगा.. चल मैं घर जाता हूँ..

बिलाल - मैं व्हाट्सप्प करूंगा हनी..

सूरज - ठीक है..

सूरज घर आ जाता है और अपने कमरे में जाकर फ़ोन में किसी से बात करने लगता है..


************


रमन अपने घर पहुँचता है तो घर में घुसते ही उसे तितली नज़र आती है और उसे देखकर सूरज की बातों को याद करने लगता है और तितली को ऊपर से नीचे देखकर उसकी खूबसूरती जो उसने अब से पहले कभी नोटिस नहीं की थी उसका जायजा ले रहा था..

तितली ने रमन को देखकर कहा - क्या सोचा है तुमने? सीधी तरह से मेरी बात माननी है या मैं कोर्ट में जाकर सारी प्रॉपर्टी ले लु?

तितली (24)
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रमन तितली की तरफ आकर अपने जेब से एक फूल निकालकर तितली को देते हुए - आज bday है ना तुम्हारा.. हैप्पीबर्थडे.. मैं तैयार हूँ.. अगले महीने शायद गाँव वाली जमीन के केस का फैसला आ जाएगा उसके बाद तुम जो कहोगी कर लेंगे..

तितली हैरानी से रमन को देखने लगी.. जो अब से पहले कभी उससे सीधे मुंह बात तक नहीं करता था और हमेशा उसकी मा को बाप की रखैल कहकर ही बुलाता था आज उसे bday विश कर रहा था और उसकी बात को इतनी आसानी से मान गया था.. तितली ने आगे कुछ नहीं कहा..

रमन ने नोकरानी शान्ति से खाना देने को कहा और अपने कमरे में चला गया.. तितली देखती ही रह गई और कुछ देर बाद वो भी अपने कमरे में चली गई और लगातार इसी बारे में सोचने लगी फिर उस फूल को जिसे रमन ने दिया था देखने लगी और बाद में उसे डस्टबिन में डाल दिया..

रात के 9 बज गए थे और तितली अब भी अपने कमरे में थी.. रमन तितली के कमरे में आते हुए कहता है - शान्ति बता रही थी, खाना नहीं खाया आज तुमने? तबियत ठीक है तुम्हारी?

तितली - तुमको मेरी तबियत की कब से चिंता होने लगी.. तुम तो चाहते है तुम्हारे पापा की तरह मैं भी मर जाऊ और तुम्हे मुझे कुछ ना देना पड़े.. मगर मैं मरने वाली नहीं हूँ..

रमन तितली के करीब बेड पर बैठते हुए - देखो तुम्हारी मा और मेरे बाप के बीच जो कुछ था वो सबको पता है.. तुम्हारी मा के मरने के बाद जिस तरह तुमने मेरे बाप का ख्याल रखा और मेरे बाप का इलाज़ किया उससे भी सबको यही लगता है की तुमने ये पैसे के लिए किया है और तुम गोल्डीदिग्गर हो.. मैं झूठ नहीं बोलूंगा पर.. मैं भी वही सोचता हूं.. मगर अब मैं तुमसे और झगड़ना नहीं चाहता..

तितली - तुम या सब क्या सोचते है मेरे बारे मे मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता.. जिसे जो सोचना हो सोचे जो बोलना हो बोले.. मैं किसीकी परवाह करने नहीं बैठी हूं.. मुझे और मेरी मा को सब तुम्हारे पापा की रखैल समझते है पर सच्चाई क्या है ये मैं अच्छे से जानती हूं और मुझे किसीको कुछ साबित करने की जरुरत नहीं है..

तितली के मुंह से ये सब सुनकर रमन का तितली के प्रति गुस्सा थोड़ा नर्म हो गया.. रमन को सूरज की बात याद थी और उसे अब अच्छा बनने का नाटक करना था.. उसने तितली का हाथ पकड़ कर कहा - चलो..

तितली की आँख नम थी उसने कहा - कहाँ?

रमन - bday है ना आज तुम्हारा.. कहीं घूम के आते है..

तितली - मुझे कहीं नहीं जाना..

रमन - देखो... सिर्फ एक महीने की बात है फिर तुम और मैं दोनों एक दूसरे की शकल से भी दूर हो जायेंगे.. तब तक हम बिना लड़े झगडे.. प्यार से दोस्त बनकर रह सकते है.. मुझे अपना दोस्त समझो और चलो.. तुम्हारा bday सेलिब्रेट करते है चलकर..

तितली को अपने कानो पर यक़ीन नहीं हो रहा था कि रमन उससे ये सब कह रहा है.. तितली को रमन से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी..

रमन ने आगे कहा - मैं बाहर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ..
ये कहकर रमन बाहर चला गया और तितली कुछ देर उसी तरह बैठकर कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा खोल कर एक नया सूट पहन लिया और बाहर आ गई.. बिना कुछ कहे तितली रमन की कार में बैठ गई और रमन गाडी चला कर कहीं जाने लगा.. तितली को यक़ीन नहीं हो रहा था की सुबह रमन से इतना बुरा झगड़ा होने के बाद रात को वो रमन के साथ bday मनाने जा रही है..

तितली - तुम सिगरेट पीते हो?

रमन - नहीं तो.. क्यों?

तितली - फिर ये सिगरेट का पैकेट और लाइटर किसका है?

रमन - कभी कभी पीता हूँ..

तितली मुस्कुराते हुए - निकोटिन होता है सिगरेट में.. और निकोटिन..

रमन - तितली.. अपनी डाक्टरी मत झाड़ो प्लीज..

तितली को रमन के मुंह से पहली बार अपना नाम सुनकर अजीब लगता है आज से पहले वो उसे बुरा भला ही कहता था और अपने बाप की रखैल जैसे शब्दों से ही पुकारता था मगर आज पहली बार रमन ने उसका नाम लेकर बात की थी जो तितली को अच्छा लगा था..

तितली - कहा ले जा रहे हो?

रमन - है एक स्पेशल जगह.. हर बार अकेला ही जाता हूँ आज तुम्हे ले जा रहा हूँ..

तितली - तुम सच में इतने अच्छे हो?

रमन - मतलब?

तितली - मेरे साथ कितना झड़गा किया है तुमने.. कितना बुरा बुरा कहा.. और अब अचानक से इतनी तमीज और रेस्पेक्ट से बात कर रहे हो.. मुझे कुछ अजीब लगता है.. लेकिन याद रखना मैं अपना मन नहीं बदलने वाली.. मुझे आधा हिस्सा चाहिए.

रमन मुस्कुराते हुए - आधे से कुछ कम नहीं हो सकता? अकेली लड़की तो तुम.. क्या करोगी इतने पैसो का?

तितली - इसी तरह तमीज में रहोगे तो सोचूंगी कुछ.. पर पक्का नहीं कह सकती.. और तुम भी तो अकेले हो तुम क्या करोगे?

रमन - लड़को के लिए तो कितना भी हो कम ही पड़ता है..

तितली - ऐयाशी के लिए तो सब कम ही पड़ेगा.

रमन - लो आ गए चलो..

रमन तितली को लेकर झील किनारे एक बड़े से होटल के टॉप फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में ले आता है जहाँ से रात का नज़ारा किसी जन्नत से कम नहीं था..

दोनों मध्यम रौशनी में उस रेस्टोरेंट की एक टेबल पर बैठ जाते है और तितली उस नज़ारे और जगह को देखकर रमन से कहती है - इतनी खूबसूरत जगह अकेले आते हो?

रमन - तुम चाहो तो अब से तुम्हारे साथ आऊंगा.

तितली - लाइन मार मार रहे हो मुझपर.

रमन - तुम्हे ऐसा लगता है तो मैं क्या कर सकता हूँ.

तितली मुस्कुराते हुए - एक बात बताओ.. ये अचानक से तुम्हरा ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? मैं तुम्हारे पापा की आधी प्रॉपर्टी जो तुम्हारी होनी चाहिए थी उसे लेने वाली हूँ.. तुम्हे तो मेरे ऊपर गुस्सा होना चाहिए.. मगर तुम मेरा bday मनाने के लिए मुझे अपनी पसंदीदा जगह लेकर आये हो.. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा.

रमन - इसमें समझना क्या है? यूँ समझ लो आज किसी महापुरुष ने मेरी आँखे खोल दी.. और मेरी गलतियों से मुझे रूबरू करवा दिया.. और मुझे कहा है कि वत्स.. तुझे अब तेरे पापो का प्राहिश्चित करना है.

तितली हसते हुए - उन महापुरुष का नाम जान सकती हूँ मैं?

रमन - हाँ.. क्यों नहीं? उनका नाम है श्री श्री श्री.. रमन महाराज जी जो तुम्हारे सामने शाक्षात् विराजमान है कन्या.

तितली जोर से हसते हुए - क्या.... तुम?

वेटर आते हुए - सर सेम आर्डर?

रमन - नहीं.. एक bday केक ले आओ.. उसपर तितली लिखवा देना..
वेटर - और कैंडल किस age कि जला के लानी है सर?

रमन तितली की तरफ देखकर - 18 या 19

तितली - 24..

वेटर - ok मैम.. 24.. वेटर चला जाता है.

रमन - उम्र से कम लग लगती हो काफी.

तितली - जानबूझ कह रहे हो ना ये सब तुम?

रमन - नहीं.. मैं बोलने से पहले कहा सोचता हूँ? तुम तो जानती हो.. कितनी तारीफे की है तुम्हारी पहले.

तितली - हाँ.. सब याद है.. रखैल.. छिनाल.. रंडी.. कुटला.. गश्ती... गोल्डडीग्गर... कामवाली.. तुमने जो जो मुझसे कहा था मुझे सब तारीफ़ याद है.

रमन - मुझे सोरी नहीं बोलना आता.

तितली - मुझे उम्मीद भी नहीं है तुमसे सोरी की.

रमन - जो हुआ सो हुआ.. हो सके तो भूल जाओ सब.

तितली - भूलने के लिए ही आधी प्रॉपर्टी ले रही हूँ.

रमन - हा.. मेहरबानी तुम्हारी.. तुम चाहती तो पूरी भी ले सकती थी. वैसे करोगी क्या इतने पैसो का?

तितली - मैं दुनिया घूमूँगी.

रमन - अकेले? चाहो तो मैं भी साथ में घूम सकता हूँ. तुम तो जानती हो मुझे घूमने का कितना शौक है.

तितली - एक शर्त पर.

रमन - क्या?

तितली - ऐसे ही रहने पड़ेगा.. तमीज में.

वेटर - मैम.. आपका bday केक.. एंड ये वाइन.

वेटर वाइन गिलास में वाइन डालकर रख जाता है और कैक के ऊपर 24 डिजिट की कैंडल जल रही थी.

तितली - वाइन?

वेटर - सर ने आर्डर की है.. मैसेज किया था.

रमन - ठीक है जिम्मी.. तुम जाओ..

वेटर चला जाता है..

तितली - तुम्हे वेटर ना नाम पता है.. उसका नंबर भी है.. मैसेज पर ऑडर कर देते हो.. लगता है लोगों को पटा के रखने माहिर हो तुम..

रमन मुस्कुराते हुए - काश तुम्हे पटा पाता.. कम से कम आधी प्रॉपर्टी तो बच जाती..

रमन तितली की तरफ आकर बैठते हुए - लो.. फुक मारके कैंडल बुझा दो..

तितली रमन के करीब आकर बैठने पर उसे नजदीक से देखकर एक पल के लिए किसी ख्याल में पड़ जाती है दूसरे पल उससे कहती है - गाना नहीं गाओगे? हैप्पी bday वाला?

रमन - मुझे देखकर क्या लगता है तुम्हे? मुझे आता होगा वो सब करना?

तितली मुस्कुराते हुए कैंडिल बुझा देती है और केक कट करके रमन को खिलाती है और फिर रमन अपने मुंह के झूठे केक को जो तितली ने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था उसीको वापस खिला देता है जिसे तितली खाते हुए रमन को देखती हुई मुस्कुरा पड़ती है..

रमन वापस सामने जाकर बैठ जाता है और वाइन का गिलास तितली के आगे करते हुए - ये तो कुछ बुरा नहीं करती ना डॉक्टरनी जी?

तितली हसते हुए वाइन का गिलास उठाकर - करती है बताऊ?

रमन - नहीं.. लो.. चेस..

रमन और तितली ग्लास पकड़ के वाइन पीते है और उसी तरह कुछ बात करते है..

रमन - खाने में क्या खाओगी?

तितली - कुछ भी.. जो तुमको पसंद हो..

रमन - मेरी पसंद का नहीं खा पाओगी.. लो.. इसमें से अपनी पसंद बताओ..

तितली मेनू देखकर - हम्म्म.. ये..

रमन आर्डर कर देता है...

रमन - बाथरूम होके आता हूँ.. तुम बैठो मैं आर्डर कर दिया है..

तितली मुस्कुराते हुए - हम्म..

तितली मन ही मन ये सोच रही थी की रमन बस अच्छे होने का दिखावा कर रहा है और उसके मन में कोई प्लान है जिससे वो उसे प्रॉपर्टी देने से बच जाएगा.. मगर क्या प्लान हो सकता है तितली यही सोच रही थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था..

तितली के मन में बस इतनी बात तय थी कि रमन जो उससे इतनी नफरत और नापसंद करता था अचानक से उसके साथ इतना शरीफ बनकर पेश आ रहा है जरुरत इसके पीछे उसका कोई स्वार्थ होगा.. तितली ने सोच लिया था कि वो भी रमन के साथ उसी तरह पेश आएगी जैसे रमन पेश आ रहा है और रमन के मन में जो प्लान चल रहा है उसका पता लगाकर उसके मनसूबे को नाकाम कर देगी.. और आधी प्रॉपर्टी लेकर ही रहेंगी..

रमन बाथरूम में जाकर मूतने लगा था और उसके मन में चल रहा था कि क्या तितली वाकई इतनी प्यारी है जितनी वो अभी बनकर दिखा रही है और क्या वो सच कह रही थी कि उसके बाप और तितली के बीच कुछ नहीं था.. ऐसा सच भी हो सकता है क्युकी रमन अपने बाप को अच्छे से जानता था और ऐसा होना संभव था..

रमन को बार बार तितली का मुस्कुराता और हसता हुआ चेहरा याद आने लगा और तितली के चेहरे पर उसकी जुल्फे बड़ी आँखे पतले गुलाबी होंठ सब याद आने लगे और उसका लंड जिसमे से मूत निकल रहा था खड़ा होने लगा और अकड़ने लगा..

एक दूसरा आदमी रमन के पास वाले पोट में मूतने लगा तो उसे रमन का खड़ा हुआ लंड दिखा और उसने रमन से कहा - सुसु करने से नहीं बैठेगा आपका लंड.. बाथरूम में जाकर हिला लो.. वैसे लड़की चाहिए बता सकते हो.. देसी विदेशी सब है.. बस थोड़े पैसे लगेंगे..

रमन आदमी से - भोस्डिके मूतने आया है तो मूतके निकल.. भड़वागिरी मत कर..

आदमी बाहर चला जाता और रमन एक कबीननुमा बाथरूम में.. उसका लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था.. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. उसके दिमाग में तितली का चेहरा चल रही थी और लंड पर उसके हाथ अपने आप आगे पीछे हो रहे थे..

उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि जिसे वो नापसंद और नफरत करता है उसके नाम का जयकारा लगा रहा है.. रमन ने कुछ ही देर में अपने लंड से तितली के नाम का वीर्य लम्बी लम्बी धार के साथ बाहर निकाल दिया था..

रमन को खुद पर गुस्सा आ रहा था मगर वो क्या कर सकता था.. उसे लग रहा था की तितली उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है और वो उसकी तरफ मोहित होते चले जा रहा है जबकि होना इसका उल्टा चाहिए था.. रमन तितली के दिल में अपने लिए प्यार जगाने की कोशिश कर रहा था.. ताकि तितली उससे शादी के लिए मान जाए और प्रॉपर्टी ना ले.. मगर यहां तो तितली ने रमन के दिल में जगह बनाने की शुरुआत कर दी थी..

रमन वापस टेबल आ गया और दोनों खाना खाने लगे.. तितली को इस बात कर अंदाजा भी नहीं था की रमन ने अभी अभी उसके नाम का जयकारा लगाया है.. दोनों खाने के बाद वापस घर के लिए निकल चुके थे..

रमन - कल सुबह तुम्हे कोई काम तो नहीं है?

तितली - क्यों?

रमन - कुछ नहीं.. सोचा मूवी देख आते है..

तितली कुछ सोचकर - कल सुबह मैं बिजी हूँ.. हिसाब लगाना है ना प्रॉपर्टी का.. कहीं तुम मुझे कम ना दे दो..

रमन - और शाम को?

तितली - तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है?

रमन - कुछ नहीं क्यों?

तितली - तुम्हरा इतना अच्छा होना मुझे कुछ हज़म नहीं हो रहा..

रमन हसते हुए - हज़मे की दवा ले लो.. हज़म हो जाएगा..

तितली - कोनसी मूवी दिखाओगे?

रमन - तुम्हे जो पसंद हो.. कैसी मूवी पसंद है वैसे ?

तितली - मुझे तो रोमेंटिक मूवीज पसंद है..

रमन - हाँ एक लगी है रोमेंटिक.. बरसात की रात.. वो देखने चले..

तितली - वो रोमेंटिक नहीं वल्गर मूवी है.. तुम बस ऐसी ही मूवीज दिखाओगे मुझे..

रमन - अच्छा कोई और देख लेंगे.. अभी तो बहुत सारी मूवीज लगी हुई है थिएटर में..

तितली - तुम करना क्या चाहते हो वो बताओ.. मैं जानती हूँ तुम कुछ ना कुछ सोच रहे हो ताकि तुम्हे मुझे प्रॉपर्टी ना देनी पड़े.. मैं इतनी भोली नहीं हूँ कि तुम्हारी ये चाल समझ ना पाउ.. बताओ क्या प्लान है तुम्हारा? वरना पता तो मैं लगा ही लुंगी.. और प्रॉपर्टी तो मैं किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. वो तो मैं लेकर ही रहूंगी तुमसे.. बताओ क्या सोच रहे हो?

रमन कुछ देर ठहर कर - सोच रहा था.. तुम्हे पटाकर तुमसे शादी कर लूँ.. एक खूबसूरत डॉक्टरनी बीवी भी मिल जायेगी और आधी प्रॉपर्टी भी नहीं देनी पड़ेगी..

तितली रमन कि बात सुनकर जोर से हसते हुए - मुझे पागल समझा है? मत बताओ मैं अपनेआप पता कर लुंगी.

रमन - लो.. अब जब सब सच बता दिया तो तुम्हे यक़ीन ही नहीं हो रहा..

तितली -. तुम तो मुझे अपने बाप की रखैल समझते हो ना? मुझसे शादी करोगे? इतने बड़े देवता तो नहीं हो तुम.

तितली इतना कह कर गाडी कि रेक में पड़े पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से जलाते हुए सिगरेट पिने लगती है जिसे देखकर रमन कहता है..

रमन - मूझे बड़ा ज्ञान दे रही थी अब खुद ही..

तितली सिगरेट के कश लेकर - तुम पी सकते तो मैं क्यों नहीं.. लड़की हूँ इसलिए?

रमन - मैंने ऐसा कब कहा.. तुम्हे जो करना करो.. मैं कौन होता हूँ तुम्हे रोकने वाला.. हा.. अगर मेरी बीवी मेरे सामने ऐसे सिगरेट कश लगाती तो उसे सजा जरुर देता..

तितली सिगरेट पीते हुए - क्या सजा देते?

रमन - रहने दो.. सुनोगी तो घबरा जाओगी..

तितली मुस्कुराते हुए कार का शीशा निचा करके सिगरेट बाहर फेंकते हुए कहती है - तुम बहुत पुरानी सोच के हो ना.. लड़की को ये नहीं करना चाहिए वो नहीं करना चाहिए.. मर्दो की सारी बातें माननी चाहिए.. उनके काबू में रहना चाहिए.. उनकी जुतियों में पड़े रहना चाहिए.. वगेरा वगेरा...

रमन - इसमें गलत क्या है? ऐसा ही होना चाहिए.. मेरा तो यही मानना है..

तितली - अपनी बीवी को तो बहुत सताओगे तुम..

रमन - सताऊँगा ही नही.. मारूंगा भी.. अगर मेरी बात नहीं मानेगी तो थप्पड़ से मारूंगा.. सिगरेट शराब पीयेगी तो बेल्ट से.. शराब पीके गाली गलोच भी करूंगा.. दासी बनाके रखूँगा... हुकुम चलाऊंगा उस पर... लो.. घर आ गया.. मुझे तो अभी से बहुत नींद आ रही है..गुडनाइट...

रमन जाकर अपने कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है और सोचने लगता है कि अगर वो इसी तरह तितली के साथ घूमता फिरता और बातें करता रहा तो तितली आसानी से उसकी बात मान लेगी और उससे शादी कर लेगी..

तितली अपने कमरे में आकर एक कुर्सी पर बैठकर रमन के बारे में सोचने लगी कि रमन आखिर चाहता क्या है? रमन ने उसके साथ वाइन पी थी मगर कह रह था औरतों का शराब सिगरेट पीना पसंद नहीं.. और उसने बातों ही बातों में जो शादी के लिए कहा था वो? क्या वो सच बोल रह था?

तितली कि आँखों में आज नींद नहीं थी वो रमन के बारे में ही सोचे जा रही थी मगर रमन ओंधे मुंह बिस्तर पर खराटे ले रहा था..


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Nice update bro 👍
 

meerkhan

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बिलाल सूरज के गले लागकर - भाई मैं तेरा ये अहसास कभी नहीं भूलूंगा यार.. तूने मेरे लिए इतना सब किया है और अब भी कर रहा है..

सूरज - बिल्ले.. छोड़ यार.. बाद में बात करते है..

सूरज बिलाल की दूकान से अपने घर आ जाता है और अब तक विनोद और जयप्रकाश दोनों सो चुके थे दरवाजा सुमित्रा ने खोला और सूरज सुमित्रा से बचते हुए होने कमरे में आ गया.. सुमित्रा जान गई थी की सूरज ने शराब पी है मगर उसने कुछ ना कहा..

सूरज कपड़े बदल कर गद्दे पर आ गया और जैसे ही उसने फ़ोन उठाया उसके कमरे के दरवाजे पर सुमित्रा खाना लेकर आ गई और अंदर आते हुए बोली - बेटू जी खाना भी खाना है या सिर्फ पीके सोने का ही इरादा है?

सूरज सुमित्रा को देखकर हड़बड़ाते हुए - माँ.. आप..

सुमित्रा गद्दे ओर बैठकर - चल खाना खा ले.. मुझे पता ही था आज तू कहीं पार्टी वार्टी करके आएगा..

सूरज शर्म से - आपको कहा था ना वेट मत करना..

सुमित्रा अपने हाथ से निवाला खिलाते हुए - क्यों ना वेट करू? मेरा इतना प्यारा जवाँ बेटा देर तक घर से बाहर था.. वैसे कहा पार्टी कर रहा था? कोई लड़की भी थी साथ मे?

सूरज - माँ...

सुमित्रा - अच्छा मत बता..

सूरज खाने की थाली लेते हुए - मैं खा लूंगा आप जाओ.. सो जाओ.. इतना देर तक जागोगी तो सुबह देर से उठोगी...

सुमित्रा - हा हा भगा अपनी माँ को अपने पास से.. दो पल साथ में बैठु तो तुझे पसंद नहीं आता.. आएगा भी क्यों.. मैं कोई लगती थोड़ी हूँ तेरी..

सूरज खाना खाते हुए - रहने दो इतना नाटक मत करो.. बैठ जाओ.. कुछ नहीं कहता..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - कल मेरे साथ मार्किट चलेगा ना? सगाई के कपड़े लेने है.. बुआ भी आएगी.. तेरे लिए कोई अच्छा सा सूट भी ले लेंगे..

सूरज - नहीं नहीं.. मैं कहीं नहीं जाने वाला.. आपके साथ जाउगा तो सुबह की शाम हो जायेगी..

सुमित्रा - बड़ा बिजी है ना तू.. जो कुछ बिगड़ जाएगा.. चल ना हनी.. वैसे भी घर पर ही तो रहेगा..

सूरज खाने की प्लेट वापस देते हुए - नहीं मतलब नहीं.. भईया को ले जाना ना..

सुमित्रा - और उसकी जगह ऑफिस तू जाएगा?

सूरज - अच्छा ठीक है चल चलूँगा.. अब खुश आप?

सुमित्रा सूरज के गाल चूमकर - बहुत खुश..

सूरज - माँ लाइट बंद कर देना जाते हुए..

सुमित्रा लाइट ऑफ करके दरवाजा लगाकर नीचे आ जाती है रसोई में प्लेट धोकर रखती हुई कुछ सोचने लगती है फिर अपने कमरे में जाकर लेट जाती है उसकी आँखों में नींद नहीं थी वो जो सोच रही थी उसने उसे कामुक कर दिया था मगर उसने कुछ देर पहले भी ऊँगली से हवस मिटाइ थी.. बार बार वो सूरज को चाय पीता हुआ सोचकर कामुक हो जाती.. मगर चाय पिने में ऐसा क्या था जो वो उत्तेजित हो गई थी? सुमित्रा ने एक नज़र जयप्रकाश को देखा और फिर खुद भी आँख बंद करके सो गई..

सूरज बिलाल की बातें सोच रहा था और उसे मन ही मन बिलाल के लिए बुरा लग रहा था.. वो नज़मा की बहुत इज़्ज़त करता था और उसके साथ कुछ ऐसा वैसा करने की सोच भी नहीं सकता था लेकिन बिलाल ने जो उसे मज़बूरी बताई थी उससे उसे हैरानी और बिलाल ओर अफ़सोस हो रहा था..

रात के बारह बजे तो सूरज के फ़ोन पर गरिमा का फ़ोन आ गया और सूरज बिलाल की बातों से निकल कर गरिमा का फ़ोन उठाते हुए उसे बात करने लगा..

बड़े झूठे हो आप तो देवर जी.. कहा था फ़ोन करोगे पर फ़ोन किया ही नहीं तुमने..

भाभी कहीं चला गया था.. सॉरी.. आपको अब तक जाग रही हो..मुझे लगा आपको सो गई होंगी..

ठीक है फिर मैं सो ही जाती हूँ.. गुडनाईट..

आप फिर से नाराज़ हो गई.. पता नहीं भईया कैसे संभालेंगे आपको.. आपको उनका जीना मुहाल कर दोगी..

मैं ऐसी हूँ देवर जी? तुम ये सोचते हो मेरे बारे में?

क्यों.. गलत सोचता हूँ भाभी? वैसे आप तो दस बजे सो जाती हो ना.. आज इतनी देर तक सिर्फ मुझसे बात करने के लिए जाग रही हो.. भईया को पता चलेगा तो शादी से पहले डाइवोर्स हो जायेगा आपका..

ठीक है तो फिर सो जाओ.. मैं भी सो जाती हूँ.. मैंने बस ये बताने के लिए फ़ोन किया था की तुम्हारी भेजा हुआ उपन्यास मैंने पढ़ना शुरू कर दिया है.. और मुझे पसंद भी आ रहा है.. और कुछ नहीं..

मुझे भी कुछ बताओ ना भाभी.. जो मैं भी पढ़ सकूँ..

हम्म.. मैं भी एक किताब भेजूंगी तुम्हे.. वो पढ़ना.. अब गुडनाइट.. बाए..

गुडनाईट भाभी.. स्वीट ड्रीम्स.. फ़ोन कट हो जाता है.. और सूरज सुबह पांच बजे का अलार्म सेट करके सो जाता है..

बिलाल और नज़मा के बीच आज बहुत लम्बी बातचीत हुई थी और बिलाल ने नज़मा को सूरज के साथ बच्चा करने के लिए मना लिया था.. नज़मा सूरज को पसंद करती थी मगर उस तरह नहीं पर अब नज़मा बिलाल की इज़ाज़त से सूरज के साथ सोने के लिए तैयार हो गई थी नज़मा को ये सब अजीब लग रहा था पर वो क्या कर सकती थी.. बिलाल उसका शोहर था और उसकी बात मानने के अलावा नज़मा के पास और कोई चारा भी ना था..

अगले दिन सुबह पांच बजे अलार्म से सूरज जाग गया और अपनी नींद तोड़ते हुए बाथरूम में जा घुसा.. आधे घंटे बाद ब्रश करके और नहाकर निकला फिर विनोद के दिए कपडे में से एक जीन्स और चेक शर्ट पहन कर विनोद की बाइक उठाकर सीधा रेलवे स्टेशन पहुच गया जहाँ उसे बरखा को लेके आना था..

गाडी 2 घंटा लेट थी.. सुबह सुबह का समय था लोग कम ही थे स्टेशन के आस पास लोग आ जा रहे थे सूर्य की पहली किरण अभी नहीं पड़ी थी फिर भी उजाला होने लगा था.. भोर का समय था..

सूरज स्टेशन के बाहर टहल रहा था की एक 35 साल की औरत उसके पास आ गई और बोली - भईया जी चलोगे क्या?

सूरज उसकी बात नहीं समझा और बोला - क्या?

औरत - चलोगे क्या.. करना है..

सूरज इस बार औरत को देखकर और उसकी बात सुनकर सब समझ गया और बोला - नहीं.. नहीं जाना..

औरत - भईया जी सिर्फ तीन सो दे देना..

सूरज - नहीं जाना ना.. जाओ यहां से..

औरत - भईया जी.. 200 दे देना.. आपको जो चाहिए वो करुँगी... चलिए ना..

सूरज चिढ़ते हुए - नहीं जाना ना.. जाओ यहां से..

औरत ने सूरज का हाथ पकड़ कर कहा - भईया सिर्फ सो दे देना..

सूरज हाथ छुड़ा कर गुस्से से - भोसड़ीवाली बोला ना तुझे नहीं करना मुझे जा यहां से.. बहनचोद चिपक रही है..

औरत इस बार बिन कुछ बोले सूरज से दूर हट जाती है और सूरज एक दूकान के पास जाकर एक चाय लेकर दुकान के पीछे खड़े होकर पिने लगता है तभी उसकी नज़र उस औरत पर पड़ी जिसे वो अभी गाली देखकर भगा रहा था..

औरत उसे कुछ दूर एक जगह बैठकर उदासी से रोने लगी थी जैसे उसका दिल बहुत दुखा हो..

सूरज ने उस औरत का रोना देखा ना गया और वो उस औरत के पास जाकर बैठ गया और बोला - रो क्यों रही है तू.. मेरा मन नहीं..

औरत - हमें कोनसा पसंद है भईया जी.. मज़बूरी में सब करना पड़ता है.. अकेली हूँ.. कल से कुछ खाया नहीं..

सूरज एक दो सो ना नोट देते हुए - अच्छा तुम ये लो कुछ खा लो.. मुझे गाली नहीं बकनी चाहिए थी.. माफ़ करना.

औरत पैसे लेकर - नहीं भईया जी.. हमारी तो आदत हो गई है.. आप चाहो तो मैं..

सूरज - मैंने कहा नहीं करना मुझे कुछ..

औरत - आप अच्छे आदमी है भईया जी..

सूरज - कहा से हो? कोनसा गाँव है?

औरत - हम बरेली से है.. हमारे पति के साथ आये थे मजदूरी करने पर वो तो पक्का शराबी है.. मज़बूरी है भईया जी..

सूरज - नाम क्या है तुम्हारा?

औरत - फुलवा भईया जी..

सूरज फुलवा के ब्लाउज में देखता हुआ - कहा रहती हो..

फुलवा - कहा रहेंगे? स्टेशन के उस पार छोटी सी झोपडी है वही रहती हूँ पति वही पड़ा रहता है..

सूरज - अगर कोई काम मिलेगा तो करेगी?

फुलवा - हमें कौन काम देगा भईया जी..

सूरज रमन को फ़ोन करके - तुझे वो गार्डन के लिए दो लोगों जरुरत थी ना..

रमन - सुबह सुबह ये बोलने के लिए फ़ोन किया है तूने?

सूरज - अरे एक बेचारी औरत है रख ले काम पर..

रमन - वही गार्डन भेज दे.. धरमु होगा वहाँ..

सूरह फोन काटकर फुलवा से - चल..

फुलवा - कहा भईया जी..

सूरज - तेरा सामान लेके आ जा.. काम दिलवाता हूँ तुझे.. रहना खाना भी वही पड़ेगा..

फुलवा - सच भईया जी.. मैं अभी लाती हूँ..

फुलवा वहा से चली जाती है और 10-15 मिनट बाद वापस वही आकर सूरज से मिलती है..

भईया जी.. मैं आ गई..

सूरज की नज़र फुलवा की छाती पर बड़े बड़े उभारो पर थी सुबह सुबह वो भी कामुक हो उठा था उसके मन में फुलवा के साथ कुछ करने का ख्याल नहीं आया था पर अब वो फुलवाके आम का रस पिने के बारे मे सोच रहा था..

सूरज - फुलवा ऐसे तो शायद तुझे काम नहीं मिलेगा.. कोई साफ कपडे है तेरे पास?

फुलवा - इस गठरी मे है भईया जी मैं बदल के आउ..

सूरज - नहाना भी पड़ेगा फुलवा.. चल..

सूरज फुलवा को वही आस पास होटल के कमरे मे ले आता है और फुलवा से नहा कर साफ कपडे पहनने को कहता है और फुलवा वैसा ही करती है.. साथ में सूरज कुछ खाने को भी मंगा लेता है..

फुलव जब नहाकर साथ कपड़े पहनती है तो सूरज उसके निखरे रूप को देखता ही रह जाता है.. सूरज फुलवा से खाने के लिऐ कहता है और फुलवा खाना खा कर बैठ जाती है..

फुलवा - भईया जी.. आप बहुत अच्छे है..

सूरज - अच्छा चल फुलवा.. मुझे वापस भी आना है.

सूरज फुलवा को उसी गार्डन में ले आया था और वहा धरमु से मिलवा देता है जहाँ फुलवा को छोटा मोटा काम मिल जाता है और उसके रहने खाने की व्यवस्था भी हो जाती है..

सूरज वापस स्टेशन जाता है और अब तक गाडी नहीं आई थी मगर आने की अनाउंसमेंट हो गई थी..

सूरज प्लेटफार्म पर खड़ा था और बरखा के आने का इंतजार कर रहा था..

बरखा ट्रैन से उतरती है तो सूरज उसकी तरफ बढ़ जाता है और बरखा के हाथ से उसका बेग लेता हुआ कहता है - लाओ दीदी मैं उठा लेता हूँ...

बरखा हनी को देखती तो एक पल हैरान होकर उसे गले से लगा लेती है और कहती है - हनी यहां कैसे?

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सूरज - आपको लेने आया हूँ दी.. यहां आने पर पता चला ट्रैन लेट है तो इंतजार कर रहा था.. चलो..

बरखा - तुझे किसने बताया मेरे आने का?

सूरज - काकी ने... उन्होंने ही तो कहा था आपको लाने के लिए..

बरखा सूरज को प्यार से - क्या करता है आजकल? कोई जॉब मिली या नहीं तुझे?.

सूरज - नहीं दी.. आपको तो जानती हो मुझे. मैं पढ़ाई में केसा हूँ..

बरखा - क्या करने का इरादा है जनाब का?

सूरज - अभी सोचा नहीं दी..

बरखा बाइक ओर बैठती हुई - तो कब सोचेगा हीरो.. इतना बड़ा हो गया है अब भी ऐसे घूमता है शर्म नहीं आती तुझे?

सूरज - आप तो आते ही ताने मारने लगी दी..

बरखा - तो क्या करू? तेरी आरती उतारू? जब मेरा हनी ऐसे बेकार घूमेगा तो गुस्सा नहीं आएगा मुझे? अच्छा उस चिंकी सेतो दूर है ना तू? अब तो परेशान नहीं करती ना वो तुझे?

सूरज - अब सब ठीक है दी.. आपको अकेली क्यों आयी हो? और किट्टू कहा है?

बरखा - किट्टू अपने पापा के पास है.. उसको आने का मन ही नहीं था.. अच्छा सुन उस पान वाले के पास रोक..

सूरज बाइक रोकते हुए - क्या हुआ दी..

बरखा - एक सुट्टा फुकना है.. बरखा पान वाले से एक सिगरेट लेकर जलाते हुए साइड में आकर पिने लगती है..

सूरज - आप अब भी सिगरेट पीती हो?

बरखा कश लेती हुई - तू घर पर बताना मत..

सूरज - पहले कभी बताया है क्या?

बरखा - अच्छा गर्लफ्रेंड बनाई तूने कोई या अभी भी अपने हाथ से जयकारे लगाकर बाथरूम की दिवार खराब करता है?

सूरज - दी यार कैसी बातें कर रही हो..

बरखा मुस्कुराते हुए सिगरेट पीकर - ओ हो.. अभी भी वैसे ही शर्माता है तू तो.. नहीं पटी ना तुझसे कोई?

सूरज - आप ना छोडो ये बात और सिगरेट ख़त्म करो ताकि घर चले..

बरखा सिगरेट का एक कश लेकर - चल..

सूरज - इसे तो ख़त्म करो..

बरखा - बाइक पर हो जायेगी हनी.. चल..

सूरज - बड़े शहर की हवा लग गई आपको...

बरखा हसते हुए - ऐसा होता ना तो तेरी दीदी सलवार कमीज़ में नहीं बल्कि हाफ टॉप और छोटी सी स्कर्ट में आती..

सूरज - आप पहनती हो स्कर्ट?

बरखा आखिरी कश लेकर सिगरेट फेंकते हुए - तू देखना चाहता है मुझे स्कर्ट में?

सूरज - मैंने ऐसा तो नहीं कहा..

बरखा अपने होंठ सूरज के कान के पास लाकर - दस साल बड़ी बड़ी हूँ तुझसे.. तुझे टूशन भी पढ़ाया है मैंने याद रखना.. कोई और नहीं पट रही तो मेरे ऊपर लाइन मत मारने लग जाना..

सूरज हसते हुए - दी.. आप फ़िक्र मत करो.. मैं सेकंड हैंड का चीज़ो शौकीन नहीं हूँ..

बरखा पीछे से एक टपली मारते हुए - मैं सेकंड हैंड हूँ..

सूरज - क्यों शादी नहीं हुई आपकी? सेकंड हैंड ही हुई ना..

बरखा सूरज कान को चूमते हुए - तुझे ना टूशन में डंडे से पीटना चाहिए था.. क्यूट कमीना.. इतना प्यारा और हैंडसम हो गया पर लड़कियों से बात करना भी नहीं आया अभी तक..

सूरज बात करते करते बरखा को उसके घर छोड़ देता है और रास्ते में उसे सुमित्रा का फ़ोन आता है तो वो सुमित्रा के कहने पर अपनी बुआ अनुराधा को लेने चला जाता है और अनुराधा को लेकर वापस अपने घर आ जाता है दस बज गए थे...

अनुराधा हॉल में सोफे पर बैठ गई और सूरज अपने कमरे में चला गया..

सुमित्रा ने दो कप चाय छन्नी की एक अनुराधा को दिया और दूसरा कप लेकर अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद करके अपनी शाडी उठाकर गर्म गर्म चाय के कप में थोड़ा सा अपना मूत मिला दिया और फिर वो कप ले जाकर ऊपर सूरज को देते हुए बोली - हनी.. ले.. चाय पिले..

सूरज चाय पिने लगा तो सुमित्रा कल की तरह आज भी सूरज को अपना मूत मिली चाय पीते देखकर उत्तेजित हो गई और वापस अपने कमरे में आकर सूरज को याद करके ऊँगली से अपनी नदी का पानी निकाल दिया... कुछ देर बाद सुमित्रा अनुराधा और सूरज मार्किट निकल गए...


*************


अंकुश - नीतू याद है ना कोर्ट में क्या बोलना है?

हाँ हाँ.. मुझे सब याद है अक्कू.. तू फ़िक्र मत कर उसकी तो ऐसी बैंड बजाउंगी ना मैं.. याद रखेगा.. साला हाथ उठाता था ना..

अंकुश नीतू को बाहों में लेता हुआ - एक बार फिर से सोच ले नीतू.. जोगिंदर पति है तेरा.. तुझे वापस घर ले जाने को तैयार है.. तू चाहे तो वापस अपनी गृहस्थी बसा सकती है..

नीतू अंकुश के होंठो चूमकर - वो मेरे ऊपर हाथ उठाता था मैं चुप थी बर्दाश्त कर रही थी.. मगर उसने नशे में जब तेरे ऊपर... मेरे भाई... मेरे अक्कू के ऊपर हाथ उठाया तो चुप नहीं रह सकती.. उसे तो मैं पागल कर दूंगी देखना तू..

अंकुश - तो क्या जिंदगी भर यहां अकेली रहेंगी? शादी तो करनी पडती है ना नीतू.. फिर तुझसे शादी कौन करेगा?

नीतू अंकुश की कॉलर पकड़कर गुस्से मे - तू करेगा और कौन करेगा.. मुझे तेरे अलावा कोई नहीं चाहिए.. मैं खुश हूँ इसी तरह तेरे साथ.. घर में भी और बिस्तर में भी.. वैसे तेरा कहीं चक्कर तो नहीं है ना.. पहले बता रही हूँ बहुत मारूंगी तुझे.. मेरे अलावा किसी को देखा भी तो..

अंकुश - शादी करेगी? जब किसी पता चलेगा ना एक 27 साल की बहन अपने 24 साल के भाई से शादी करना चाहती है तो कोई जीने तक नहीं देगा..

नीतू - किसीको बताना ही क्यों है? हम यहां से कहीं और चले जाएंगे.. वही रहेंगे.. शादी करके..

अंकुश - और मम्मी? उनका क्या? उनको जब पता लगेगा तब क्या होगा? हमारे बारे में पता लगते ही ना जाने क्या करेगी?

नीतू - उनकी चिंता तू मत कर अक्कू मैं सब संभाल लुंगी.. बस एक बार ये दोनों केस निपट जाए और पैसा हाथ में आ जाए..

अंकुश - चल वकील साहिबा का फ़ोन आ रहा है..

नीतू - चल..

अंकुश नीतू को बाइक ओर बैठाकर कोर्ट आ जाता है और वकील से मिलता है..

नीतू आज बयान है.. याद है ना?

हाँ मैडम.. याद है और क्या बोलना ये अच्छे से रट लिया है..

वैरी गुड.. अच्छा अंकुश फीस?

अंकुश 2 हज़ार देते हुए - मैडम..

वकील साहिबा - ये क्या है अंकुश तुझसे कहा था कम से कम 5 चाहिए तू 2 लेके आया है..

नीतू - मैडम केस जिताओ ना.. फिर आप पूरी फीस दे देगे.. 3 साल से कोर्ट आ आकर चप्पल गिस गई है.. सुना है समझौता करना चाहता है वो..

वकील साहिबा - दो दो केस लगाए है.. समझौते के लिए बोलेगा ही..

नीतू - एक बार समझोते की बात करके देखते है.. मैडम..

वकील साहिबा - बयान के बाद करते है.. देखते है क्या कहता है..

अंकुश - मैं निकलता हूँ नीतू.. तू कैब करके आ जाना..

नीतू - आराम से जाना अक्कू..

वकील साहिबा - सिंगल है क्या तेरा भाई..

नीतू - क्यों?

वकील साहिबा - नहीं बस ऐसे ही पूछा.. सही लगता है...

नीतू - उसका ख्याल छोड़ दो.. वो पुलिस और वकील
और फैमिनिस्ट टाइप की औरतों से दूर ही रहता है..

वकील साहिबा - अच्छा? कोई चांस नहीं है.. मतलब अगली बार से पूरी फीस लेनी पड़ेगी.. चलो.. कोर्ट में चलते है..

ब्यान रिकॉर्ड करवाने के बाद वकील साहिबा नीतू को लेकर उसके पति जोगिंदर के साथ समझौते के लिए बैठ जाती जहाँ और भी बाकी लोग थे जो रिस्तेदार थे..

जोगिंदर की माँ - नीतू ये सब बंद कर दे बेटा.. चल घर चल.. तुझे कोई कुछ नहीं कहेगा.. जोगिंदर भी सुधर चूका है..

नीतू - जिसके लिए बैठे है वो बात करिये..

नीतू इतनी सी बात कर लिए ये सब क्यों कर रही है? क्या ये सब तुझे अच्छा लगता है.. हम शरीफ घर से है..

अच्छा.. बेटा शराब पीकर बीवी से मारपीट करता है और माँ कहती है हम शरीफ घर से है वाह.. 2 साल तक मेरे साथ जो जो हुआ मैं सब सहती रही.. कभी कुछ नहीं बोला.. मगर मेरे अक्कू पर हाथ उठाने की हिम्मत कैसे हुई? वो तो बेचारा उस रात शराब पिने से रोक रहा था बस..

नीतू जो गया सो हो गया.. मैं वादा करता है हूँ अब वैसा कुछ नहीं होगा.. चल वापस.. मैं अंकुश से भी माफ़ी मांग लूंगा.. पर ये सब मत कर..

कोई जरुरत नहीं है मेरे भाई से माफ़ी मांगने की.. वो तो उस दिन मेरे खातिर चुप रहा.. वरना तेरे जैसे को मेरा अक्कू एक थप्पड़ में धूल चटवा दे.. अब जो बात करने बैठे वो करो.. मेरे पास टाइमपास नहीं है..

तुम बताओ.. क्या हो सकता है..

बताना क्या है? पहले ही कहा है.. 15 लाख..

मैं 8 देने को तैयार हूँ..

नीतू - मुझे मंज़ूर नहीं है.. चलिए मैडम..

रुको नीतू.. देखो तुम जानती हमारी हालात.. हम कहा से लाएंगे इतने पैसे?

क्यों? हम लोगों से पूछा था हम दहेज़ कहा से लाएंगे? शादी कैसे करेंगे? तब तो कह रहे थे शादी धूम धाम से होनी चाहिए..

देखो नीतू.. तुम समझो.. दो साल तुम रही हो तुम अच्छे से जानती हो हमारी क्या हैसियत है..

रही नहीं हूँ काटे है मैंने दो साल.. मुझे मंज़ूर नहीं है तो नहीं है.. हम कोर्ट में देख लेंगे सब..

नीतू ऐसे ज़िद तो मत करो.. तुम जानती हमारे पास 15 लाख नहीं है और कहा से आएंगे? देखो तुम भी नहीं चाहती यहां बार बार आना ना पड़े.. जो हम दे सकते है कम से काम वो तो मांगो.. देखो 8 तुम चाहो तो कल ही तुम्हे मिल जायेगे.. और लाख डेढ़ लाख मैं कहीं से कर तुम्हे दे दूंगा पर ऐसा मत करो हमारे साथ.. हम थक गए है..

मंज़ूर नहीं है.. चलिए मैडम..

समझौता नहीं होता और नीतू वापस आ जाती है..

वकील साहिबा - 10 तक तो आ गया.. मैं वापस बात करूंगी..

नीतू - मैडम मुझे 13 दिलवा दो ऊपर जो मिले आप रख लेना.. जानबूझकर गरीबी दिखा रहे है सब.. गाँव में जमीन पड़ी है.. किराए पर कमरे दे रखे है और कहते है हैसियत नहीं है.. दवाब पड़ेगा तो सब अकल आ जायेगी इनको..

वकील साहिबा - ठीक है मैं बात करती हूँ..

नीतू टेक्सी लेकर निकल जाती है और वकील साहिबा सामने वाली पार्टी के वकील को फ़ोन करती है..

हाँ आंनद जी.. मेरी पार्टी कह रही है साढ़े 14 तक समझौता हो सकता है.. आप अपनी पार्टी को समझा देना.. अगर माने तो ठीक है वरना कोई बात नहीं..

मेरी पार्टी 11 देने को तैयार है.. अपनी अपनी वाली को थोड़ा तोड़िये ना..

आंनद जी.. आप मेरे सीनियर है मैं आपके लिए 14 तक ला सकती हूँ पर उससे कम आप उम्मीद मत कीजियेगा..

ठीक मैं देखता हूँ.. फोन काटते हुए.. देखो भाई जोगिंदर बात ऐसी है.. 2 केस जो तुम्हारे ऊपर लगे है वो उनकी तरफ से बहुत स्ट्रांग है.. जब भी जज फैसला करेगा तुम्हे सो प्रतिशत सजा होगी और नीतू को पैसे देने पड़ेंगे.. 14 पर वो मान रहे है.. अब तुम देख लो.. तुम्हे क्या करना है.. मैं चलता हूँ...


*************


सगाई है शादी नहीं.. इतना क्या खरीद रही हो आप.. मैंने कल कहा था.. शाम कर दोगी और कर दी आपने शाम..

बस हो गया हनी.. दीदी.. ये अच्छा है ना..
हाँ सुमित्रा.. अनुराधा ने कहा..

सूरज शॉपिंग के बार जब सुमित्रा और अनुराधा को घर लेकर आया तो शाम के साढ़े पांच बज गए थे..


क्या भाई विनोद.. सबको सगाई का कार्ड व्हाट्सप्प कर रहे हो मुझे नहीं करोगे?

सबसे पहले आपको ही किया था सर.. आपकी जी हुज़ूरी नहीं करूँगा तो प्रमोशन कैसे मिलेगा..

मज़ाक़ मज़ाक़ में सच बोल जाते हो विनोद.. चलो मिलता हूँ..

सर मैं जानता हूँ आप बड़े बिजी हो पर पक्का आना है आपको.. समय निकालना थोड़ा आप आओगे तो अच्छा लगेगा..

मैं जरुर आऊंगा विनोद..

विनोद ने अपने दोस्तों और ऑफिस के स्टाफ को कार्ड व्हाट्सप्प कर दिया था वही जयप्रकाश भी अपने ऑफिस जहाँ वो सरकारी बाबू था यही काम कर रहा था..

जयप्रकाश ने सबको कार्ड व्हाट्सप्प कर दिया था.. और अब अपनी अधिकारी के चम्बर के बाहर खड़ा था..

मैडम..

एक लड़की जिसका कुछ महीने पहले ही सिलेक्शन हुआ था वो किसी सरकारी कागज को देख रही थी और जयप्रकाश के चम्बर में आने ओर उसे देखकर बोली..

हां.. जयप्रकाश जी.. आप घर गए नहीं अभी तक? छः तो बज चुके है ना..

साढ़े छः बज चुके है मैडम..

तो आप क्यों रुके हुए है अब तक? मैंने तो रुकने के लिए नहीं कहा..

जी मैडम दरअसल कुछ कहना था आपसे..

हाँ.. कहिये क्या बात है.. छुट्टी चाहिए? लाइये अप्लीकेशन दीजिये मैं sign कर देती हूँ..

जयप्रकाश एप्लीकेशन देते हुए मैडम इस शुक्रवार शनिवार की छुट्टी चाहिए.. ये एप्लीकेशन है..

लीजिये sign कर दिए है आपकी एप्लीकेशन पर..

मैडम एक कार्ड भेजा है आपको व्हाट्सप्प पर..

केसा कार्ड?

मेरे बड़े बेटे की सगाई का कार्ड मैडम.. उसी के लिए छूटी ले रहा हूँ..

मुबारक हो जयप्रकाश जी..

आप आएगी तो अच्छा लगेगा मैडम..

मैं जरुर आउंगी जयप्रकाश जी.. आप इतने ईमानदार है इतनी मेहनत से काम करते है.. घर फंक्शन है आपने इतने प्यार से बुलाया है आना तो पड़ेगा ही..

शुक्रिया मैडम..
जयप्रकाश घर आ जाता है..

अगले 4 दिन ऐसे ही गुजर जाते है और सब कुछ वैसे ही चलता रहता है..

सुबह 10 बज रहे थे और सूरज कहीं जाने की तैयारी में था..

कहा जा रहा है हनी?
सुमित्रा ने चाय लेकर कमरे में आते हुए कहा तो सूरज ने चाय का कप लेकर पीते हुए कहा - गार्डन जा रहा हूँ माँ.. शाम की तैयारियां हो गई या नहीं वो भी देख लूंगा..

सुमित्रा - बेटू.. तेरे पापा देख रहे है सब वहा..

सूरज - एक बार में भी देख लेता हूँ ना... वरना एन मोके आप सब मुझे ही बोलोगे..

सुमित्रा - अच्छा तूने मुन्ना को काम दिया हलवाई का? उस दिन कितना कुछ बोल के गया था वो यहां तेरे बारे में.. अपनी बहन की गलती तो उसे दिखी ही नहीं..

सूरज चाय का कप रखकर जाते हुए - छोडो ना माँ.. पुरानी बातों को भूल जाओ.. अच्छा मैं निकलता हूँ.. दिन तक वापस आ जाऊंगा.. जो मेहमान आये है आप उनको सम्भालो...

सूरज चला जाता है और सुमित्रा सूरज के कमरे से लगे हुए उसके बाथरूम में चली जाती है जहाँ वो पहले सूरज के चाय पिए हुए कप को चाटती है और फिर उसकी नज़र एक चड्डी पर पडती है जो सूरज की थी.. सुमित्रा बिना कुछ सोचे सूरज की चड्डी उठाकर उसके उस हिस्से को चाटने लगती है जो सूरज के लिंग और आंड से चिपक कर रहता था..

सुमित्रा की इन हरकतो में दिन ब दिन बढ़ोतरी हो रही थी और वो इन सब से वाकिफ भी थी मगर वो ये सब अकेले में ही किया करती थी और सबके सामने सभ्य और संस्कारी बनकर ही रहती थी.. उसने अपने मन के गिल्ट को अब दबा कर मार डाला था और सोच लिया था की वो ऊपरी तौर पर वैसे ही रहेंगी जैसे रहती आई है मगर अंदर अकेले में वो अपनी fantasy को जियेगी..

सुमित्रा सूरज के बाथरूम में नीचे बैठ गई और अपनी शादी कमर तक उठाकर अपनी चुत में ऊँगली करते हुए आँख बंद करके सूरज की चड्डी चाटती हुई सोच रही थी कि जैसे वो सूरज का लिंग पकड़ कर चाट रही हो.. उसकी कल्पनाओ ने उसे जल्दी ही झड़वा दिया और सुमित्रा फिर से सभ्य नारी बनाकर सूरज कि चड्डी रखते हुए कप लेकर नीचे रसोई में आ गई और उसे धोकर रख दिया.. घर में मेहमानो का ताता लगा हुआ था.. जो ख़ास ख़ास रिस्तेदार थे सभी आये हुए थे..

सूरज के घर से निकलते ही उसका फ़ोन आ गया और सीधा अंकुश के बुलाने पर बिलाल कि दूकान पर जा पंहुचा..

भाई क्या हुआ? फिर से गायब हो गया था तू.. ज्यादा जोर से मारा था क्या काकी ने उस दिन? अंकुश ने मज़ाक़ करते हुए पूछा..

सूरज कुर्सी पर बैठता हुआ बोला - भोस्डिके पड़ी तो तेरे भी थी.. भुल गया या याद दिलाऊ?

बिलाल सूरज के कंधे पर अपने दोनों हाथ रखकर उसके कंधे की मालिश करता हुआ बोला - सारी तैयारी हो गई क्या हनी?

बिलाल और सूरज के बीच उस रात के बाद बात नहीं हुई थी और दोनों ही मन में जानते थे की उस दिन दोनों के बीच क्या बातचित हुई थी मगर दोनों ने अंकुश के सामने उसका जिक्र न करते हुए उस बात से अनजान बनकर ही बात करना सही समझा..

सूरज - हाँ बिल्ले सब हो चूका.. सबको बोल दिया है.. तुम दोनों को बोलने की जरुरत नहीं है..

अंकुश - भाई फॅमिली के साथ आएंगे डोंट वोर्री.. अच्छा यार घर से नीतू का फ़ोन आ रहा है मम्मी को डॉक्टर के लेके जाना है.. मैं तुमसे शाम को मिलता हूँ..

अंकुश के जाने के बाद दूकान में सन्नाटा पसर जाता है और सूरज और बिलाल दोनों चुपचाप हो जाते है.. बिलाल सूरज के कंधे और गर्दन दबाते हुए मसाज कर रहा था और अब उसने कुछ देर बाद ख़ामोशी तोड़कर कुछ बोल दिया जो सूरज नहीं सुनना चाहता था और उसीके करण वो कुछ दिनों से दूकान पर भी नहीं आ रहा था..

बिलाल - हनी.. मैंने नज़मा को मना लिया है..

सूरज - बिल्ले.. नहीं यार.. मैं कर पाऊंगा..

बिलाल - भाई देख.. बस ये आखिरी अहसान कर दे मैं हमेशा तेरा अहसानमंद रहूँगा.. उस दिन तुझे लगा होगा मैं नशे में वो सब कह रहा हूँ पर नहीं.. मैंने ये सब सोच समझ कर ही कहा है..

सूरज - मुझे थोड़ा समय दे बिल्ले.. हम इस बारे में बाद में बात करेंगे..

बिलाल दूकान का शटर नीचे कर देता है और अंदर जाकर नज़मा कुछ बात करके वापस आकर सूरज के कंधे दबाते हुए कहता है - ठीक है हनी तू सोच ले.. मैं सगाई के बाद तुझसे इस बारे में बात करूंगा..

थोड़ी देर बाद नज़मा चाय लाती हुई - जी चाय..

बिलाल - यहां रख दे..

सूरज ने आईने में नज़मा को देखा तो पाया की आज नज़मा ने नकाब नहीं पहना था और ना ही दुपट्टा लिया था... उसकी खूबसूरती आज बेपर्दा सूरज की आँखों के सामने थी वो समझ गया था की बिलाल ने ही उसे इस तरह उसके सामने आने को कहा होगा....

नज़मा चाय रखकर जाने लगती है तो बिलाल उसे कहता है - नज़मा.. मैं ऊपर अम्मी को देखकर आता हूँ तू तब तक दूकान मे झाडू लगा दे..

बिलाल दूकान के अंदर वाले दरवाजे से होकर ऊपर छत पर चला जाता है और सिगरेट के कश लेते हुए कुछ सोचने लगता है वही नज़मा अपने हाथ मे झाडू उठाते हुए कहती है..

नज़मा - चाय पिजिये ना.. ठंडी हो जायेगी..

सूरज चाय का कप उठाकर पिने लगता है और दोनों में कोई और बात नहीं होती.. सूरज कुछ भी बोलने से झिझक रहा था मगर उसकी नज़र नज़मा की सुडोल और उन्नत चूचियों पर थी जिसका अहसास नज़मा को अच्छे से था..

नज़मा ने आईने में हनी की सूरत देखकर उसके मन के भाव पढ़ लिए और आगे कहा - चाय कैसी बनी है?

सूरज ने अपनी नज़र को नगमा की चूचियों से नज़मा की आँखों मे फेर लिया और कहा - बहुत अच्छी..

दोनों में आगे कोई बात नहीं होती और सूरज चाय ख़त्म करके कहता है - भाभी मैं चलता हूँ..

नज़मा हनी का हाथ पकड़ कर मुस्कुराते हुए - भाईजान..

सूरज - भाभी.. रहने दो..

नज़मा - भाईजान.. बिलाल ने आपसे जो कहा है एक बार आप सोचना उस बारे में.. बिलाल अच्छे इंसान है.. आपको बहुत मानते है..

सूरज - भाभी मैं आपके साथ..

नज़मा - भाईजान.. मज़बूरी में हम क्या कुछ नहीं करते? मैंने ही बिलाल से आपको वो सब कहने के लिए कहा था..

सूरह हैरानी से - भाभी..

नज़मा हनी के करीब आकर - भाईजान.. कुछ दिनों की बात है..

सूरज जाते हुए - शाम को सगाई में जरुरत आना भाभी..

नज़मा - मैं जरूर आउंगी भाईजान.. शायद शाम को आपका मन भी बदल जाए..

हनी नज़मा के सम्मोहन में आ गया था और उसे नज़मा के साथ कुछ रात सोने में अब कोई बुराई नहीं दिख रही थी मगर वो अपने जिगरी दोस्त की बीवी के साथ ये सब करना भी गलत मानता था.. नज़मा ने जिस तरह इठला कर और प्यार से बात की थी उसने सूरज को कामुक कर दिया था और सूरज कहीं अपना नियंत्रण ना खो दे इसलिए वो दूकान से निकल गया था.. मगर दूकान से निकल कर वो गार्डन जाने की बजाये सीधा मुन्ना के घर चला गया.. उसे पता था मुन्ना और नेहा गार्डन में अपने लोगों को खाना बनाने की तैयारी करवाने में व्यस्त होंगे..

दरवाजा चिंकी ने ही खोला और सूरज चिंकी को उठाकर सीधा उसके रूम में ले गया और उसके होंठों चूमते हुए बिस्तर में उसके साथ गिर गया.. चिंकी सूरज को ऐसा करते देखकर हैरान थी मगर उसे सूरज का ये रूम अच्छा लग रहा था चिंकी ने भी झट से सूरज और अपने कपड़े उतार दिए और सूरज के लंड को अपनी चुत में घुसाके सूरज के लबों को अपने लबों से मिलाकर काम के सागर में गोते खाने लगी..

सूरज चिंकी को आज वो सुख अपनेआप दे रहा था जो चिंकी उसे हमेशा छीनकर लेती थी..

चिंकी ने अपना चुचा सूरज के मुंह में दे दिया और उसे चूसाते हुए बोली - आज तो तू मेरी जान लेने के इरादे से आया है मेरे हीरो.. अह्ह्ह.. मार दी डालेगा मुझे तू आज..

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सूरज चिंकी की बातों को अनसुना करके उसके बदन को भोग रहा था और अब उसने चिंकी को घोड़ी बनाकर पीछे से झटके मारना शुरू कर दिया.. सूरज को नज़मा का भोला सा मासूम चेहरा याद आने लगा जो उसने अभी अभी देखा था और वो हसरत भरी निगाहे जिससे नज़मा सूरज को देख रही थी.. सूरज फूल स्पीड में झटके मार रहा था जिसकी आवाज कमरे से बाहर जाने लगी थी..

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अह्ह्ह.. अह्ह्ह.. उम्म्म्म... अह्ह्ह.. आज क्या कोई गोली खाके आया है क्या हनी.. अह्ह्ह.. ऐसे चोद रहा है जैसे जोनी सीन्स का भी बाप हो... अह्ह्ह..

चिंकी की चुत झड़ झड़ के गीली हो चुकी थी मगर सूरज अब तक नहीं झड़ा था..

सूरज चिंकी की चुत से लंड निकाल कर चिंकी के बाल खींचते हुए उसके मुंह में लंड डालके चिंकी का मुंह चोदने लगा.. सूरज को चिंकी के चेहरे में नज़मा का चेहरा नज़र आने लगा था और उसका दिल जोरो से धड़कते हुए मचलने लगा था.. कुछ देर मुंह चोदकर सूरज चिंकी को मिशनरी में चोदने लगा..

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आज फाड़ देगा क्या अपनी चिंकी को चुत को हनी? अह्ह्ह.. कब से कर रहा है.. आज क्या हुआ है तुझे? अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह.. उई.. मममम्मा.. अह्ह्ह्ह.. आई लव यू हनी..

सूरज ने चिंकी चुत चोदते हुए ये तय कर लिया था कि वो नज़मा कि गोद जरुर भरेगा और नज़मा को माँ बनायेगा.. मगर अब अभी तो वो चिंकी को माँ बनाने के इरादे से चोद रहा था और अब झड़ने कि कगार पर था..

चिंकी अपनी चुत में अंदर तक सूरज के लंड को महसूस कर अपनी अदखुली कामुक आँखों से सिसकियाँ भरती हुई सूरज के झड़ने का इंतजार कर रही थी वो खुद कई बार झड़ी थी मगर अब सूरज उसकी चुत में झड़ने लगा था.. चिंकी को सूरज के वीर्य की धार अपने अंदर महसूस होने लगी थी.. सूरज ने अपना सारा माल चिंकी की चुत में भर दिया और लम्बी लम्बी साँसे लेता हुआ उसके ऊपर गिर गया..

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चिंकी सूरज के चेहरे को हल्का सा उठाया और साइड में पड़ी अपनी चड्डी से उसके चेहरे पर आ रहा पसीना पोछ दिया और उसके होंठो को चूमकर बोली - कमीने तू ऐसा ज़ालिम मर्द होगा मुझे पता नहीं था.. आज तो बदन तोड़ कर रख दिया तूने मेरा पूरा.. आज लग रहा है मैं लड़की हूँ और तू लड़का..

सूरज चिंकी को देखता हुआ - छोड़ मुझे.. जाना है..
चिंकी अपनी बाहों से सूरज को आजाद करती हुई - हाज़िरी लगाने आते रहना हनी..
सूरज - शाम को मिलूंगा..
चिंकी - मैं नहीं आउंगी..
सूरज - क्यों?
चिंकी हसते हुए - तेरी मम्मी ने मुझे देख लिया तो जान से ही मार डालेगी मुझे..

सूरज चिंकी के ऊपर से उठता हुआ उसकी चुत से लंड निकालकर जैसे ही बेड से नीचे उतर कर खड़ा होता है कमरे के दरवाजे से चिंकी की माँ रमा अंदर आ जाती है देखती है की...

कमरा पूरा अस्त व्यस्त था बेड पर चिंकी नंगी लेटी हुई थी और उसकी चुत से थोड़ा वीर्य निकल रहा था बेड के साइड में सूरज नंगा खड़ा था जिसका लम्बा मोटा लंड भी वीर्य से सना हुआ था..

रमा ये देखकर गुस्से से भर गई और अपनी चप्पल निकालकर सूरज और चिंकी को मारने लगी..



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Nice update bro
 

meerkhan

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Update 6


तुझे मेरा ही घर मिलता है पूरा उदयपुर मे अपनी हवस मिटाने के लिए.. पिछली बार तो बच्चा समझ के छोड़ दिया था मगर तू अब भी नहीं सुधरा.. और तू करमजली रांड.. शर्म हया लाज कुछ बची है या नहीं तेरे अंदर.. पहले ही बदनाम थी अब और नाम कमाने चली है..

सूरज अपने कपड़े उठाकर पहनने लगता है और चिंकी बिना कुछ पहने नंगी ही अपनी माँ रमा को पकड़ कर बेड पर धकलती हुई कहती है - खबरदार जो हनी पर हाथ उठाया तो माँ..

रमा - अरे रंडी.. तू पैदा होते ही मर क्यों नहीं गई? शादी से पहले तो करती थी अब शादी के बाद तो सुधर जा.. कैसे बेशर्म बनकर खड़ी है मेरे सामने.. जरा भी शर्म नहीं है तुझमे?

चिंकी चड्डी और ब्रा पहनती हुई - शर्म की बात तो आप मत ही करो माँ.. मैं अच्छे से जानती हूँ आप कितनी शरीफ और सीधी है.. आप करो तो रास लीला और मैं करू तो करैक्टर ढीला.. सरकारी दामाद चाहिए था ना आप लोगों को? 2 इंच की लुल्ली है आपके सरकारी दामाद की.. घुसने पहले ही ढीला पड़ जाता है.. हनी को मैं पसंद करती हूँ और आप इसे कुछ नहीं कहेंगी.. समझी आप?

रमा - हे भगवान.. कैसी बेटी दी है तूने? इसे तो कोई लाज शर्म ही नहीं है.. अपनी माँ के सामने अपने आशिक को बचा रही है.. रुक मैं मुन्ना को फ़ोन करती हूँ.. जैसी पिछली बार तेरी सुताई की थी वैसे ही अब भी करेगा..

चिंकी - हाँ बुलाओ.. और मुन्ना को ये भी बताना की सुबह मंदिर के बहाने आप कहा जाती हो.. वो दिनु मामा आपके धर्म के भाई आपके साथ क्या क्या करते है वो भी बताना..

रमा इस बार चिंकी की बात सुनकर चुप हो गई थी.. सूरज अपने सारे कपड़े पहन चूका था और अब चिंकी ने भी सलवार पहन ली थी और कुर्ती हाथ में उठा रखी थी..

सूरज रमा के पैर पकड़कर - रमा ताई माफ़ कर देना मुझे.. आप घर पर मत बताना.. प्लीज..

चिंकी सूरज को उठाते हुए - किस बात की माफ़ी हनी.. उठ.. तू जा यहां से मैं देख लुंगी.. तेरे मेरे बीच में क्या है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा..

रमा गुस्से में सूरज से - अगली बार ईस घर में कदम रखा तो देख लेना..

चिंकी सूरज का हाथ पकड़ कर रमा के सामने ही उसे स्मूच करके सूरज के होंठो को चूमती है और फिर सूरज वहा से चला जाता है.. रमा देखती रह जाती है..

चिंकी - अगर किसी को मेरे और हनी के बारे में कुछ पता चला ना तो देख लेना माँ.. सुबह सुबह आप मंदिर के बहाने दिनु मामा के साथ जो भजन करके आती हो ना सारे शहर में चिल्ला चिल्ला उसकी कैसेट बजा दूंगी.. हनी मेरा यार है और मैं उसी के बच्चे भी पैदा करुँगी.. आपको अच्छा लगे या बुरा..

रमा शर्म से पानी पानी होकर धीरे से बोलती है - तुझे जो करना है कर.. मगर घर के बाहर.. उस लड़के अगली बार घर मत बुलाना चिंकी..

ये कहते हुए रमा जाने लगती है चिंकी अपनी माँ रमा का हाथ पकड़ कर उसे रोकते हुए कहती है - घर तो वो आएगा माँ.. जब अकेली रहूंगी तो उसे बुलाऊंगी और इसी बिस्तर वो मेरे साथ वो सब करेगा जो वो चाहेगा.. आपने अगर हनी से अगली बार कुछ कहा तो देख लेना.. चप्पल से मारा ना आपने मेरे हनी को.. बेचारे को लगी होगी.. आप शाम को मेरे साथ चलकर उससे माफ़ी मांगोगी.. वरना दिनु मामा सुबह पार्क मे झाड़ियों के पीछे रासलीला होती है ना उसके कई विडिओ पड़े है मेरे फ़ोन में.. गली मोहल्ले के लोग उस वीडियो को देखंगे तो आपके इस सीधे साधे चेहरे के पीछे की चालक औरत को भी पहचान जाएंगे..

रमा आंसू बहाते हुए - मैं तेरी माँ हूँ.. अपनी जबान संभाल के बात कर चिंकी.. एक तो आवारा लड़के के घर बुला कर मुंह काला करती है ऊपर अपनी माँ को ही बुरा भला कहती है..

चिंकी - आवारा नहीं है हनी.. और आपको माफ़ी मांगनी पड़ेगी..

रमा - नहीं माँगने वाली मैं किसी से माफ़ी.. समझी तू.. तुझे जो करना है कर.. मैं तुझसे नहीं डरने वाली.. माँ हूँ तेरी.. और अब ये कुर्ती लेकर खड़ी ही रहेंगी या पहनेगी भी? बेशर्म..

चिंकी कुर्ती पहनती हुई - माँ.. एक सॉरी बोलने में आपका कुछ नहीं जाएगा..

रमा गुस्से से - सॉरी बोलने कि नौबत ही क्यों आने देती है तू.. जो करना है परदे के पीछे छुपकर कर.. खुलेआम घर को रंडीखाना क्यों बना रही है? घर का मैन दरवाजा खुला हुआ था, तेरे कमरे का दरवाजा खुला हुआ था.. अगर मेरी जगह कोई और होता क्या इज़्ज़त रह घर की परिवार की? तेरी टांगो के बीच में आग ही भरी है या तेरे कानो के बीच में दिमाग भी है थोड़ा सा?

चिंकी रमा को गले लगाते हुए - एक छोटी सी सॉरी ही तो बोलनी ना माँ.. आपका असली दामाद है वो.. उसीके बच्चे आपको नानी नानी कहेँगे देखना.. मैं आगे से हर चीज का ख्याल रखूंगी.. कभी पकड़ी भी नहीं जाउंगी... आपने चप्पल से इतना मारा है उसे.. बस एक बार मेरे हनी को सॉरी बोल दो.. फ़ोन पर ही बोल दो..

रमा कुछ सोचकर - बाद में.. अभी बच्चों को स्कूल से लाने का समय हो गए है.. कमरा ठीक कर तेरा..

चिंकी मुस्कुराते हुए रमा के ब्लाउज पर हाथ रखकर अपनी माँ रमा के चुचे मसलते हुए - वैसे माँ.. वो दिनु मामा को आपके आम बड़े अच्छे लगते है.. कल देखा मैंने कैसे चूस रहे थे.. इतना पापा को चूसा देती तो शायद इतनी जल्दी भगवान के पास नहीं जाते..

रमा अपने बूब्स पर से चिंकी का हाथ हटाकर चिंकी को आँख दिखाती हुई बोली - मेरे ऊपर कम नज़र रखा कर.. समझी तू?

चिंकी हस्ती हुई - माँ.. चाहो तो दिनु मामा को घर बुला लो.. कंडोम में लाकर दे दूंगी आपको..

रमा जाते हुए - चुप बेशर्म.. बाल ठीक कर अपने..

रमा अपने बेटे मुन्ना और बहु नेहा के बच्चों को स्कूल से लेने चली जाती है वही चिंकी कमरे को फिर से व्यवस्थित करके हनी को फ़ोन करती है..

हनी गार्डन में मुन्ना और नेहा के पास आ जाता है जहाँ वो अपने लोगों से काम करवा रहे थे और जयप्रकाश के साथ कुछ रिस्तेदार भी वही थे.. हनी चिंकी का फ़ोन आता देखकर वहां से कुछ दूर चला जाता है और फ़ोन उठाता हुआ कहता है..

हेलो..

कहाँ है तू?

तेरे भाई के पास हूँ.. आंटी किसी से कुछ कहने तो नहीं वाली ना?

कहने तो वाली है पर तुझसे.. सॉरी.. माँ तुझे सॉरी बोलने वाली है..

क्यों?

क्यों क्या? चप्पल से कोई मारता है अपने असली दामाद को? सॉरी तो बुलवा कर रहूंगी मैं उनसे..

चिंकी पागल हो गई है क्या तू.. आंटी ने चप्पल से ही तो मारा है कोनसा तलवार से मार दिया..

मेरे हनी को कोई रुमाल से भी नहीं मार सकता.. सिर्फ मैं ही मार सकती हूँ तुझे समझा?

ज्यादा चिपक नहीं रही तू? शादीशुदा है याद है ना? मैंने कोई प्यार मोहब्बत का वादा नहीं किया तुझसे..

आज जैसे तूने मुझे चिपका चिपका के चोदा है ना मेरे हीरो.. मैं तो तेरी फैन हो गई.. तू फ़िक्र मत कर मैं गले नहीं पड़ने वाली तेरे.. जब तेरा मन तब मिल लेना.. मैं फ़ोर्स नहीं करुँगी तुझे.. पर मिलना जरुर.. तू जैसे करना चाहे वैसे करवा लुंगी.. और तेरा रुमाल मेरे पास ही रह गया मेरे क्यूट कमीने..

ठीक है चिंकी.. अच्छा मैं बाद में बात करूंगा अभी बहुत काम है.. बाय..

सूरज फ़ोन काट कर जैसे ही पीछे मुड़ता है नेहा खड़ी होती है..

भाभी.. आप?

भाभी के बच्चे.. चिंकी से बात कर रहा था ना तू? उस दिन जी भरके बात करवाई थी ना तेरी.. बातों बातों में तीन बार उल्टी कर दी थी तूने.. चिंकी ने सब बताया था मुझे बाद में.. अगर ऐसे खुले में उससे बात करेगा और मुन्ना ने सुन लिया तो हंगामा कर देगा..

भाभी उसने फोन किया था.. कह रही थी रुमाल रह गया उसके पास..

तेरा रुमाल उसके पास.. मतलब तू आज भी बात करने गया था ना उससे घर पर? मतलब उसका पेट पक्का फूलने वाला है.. अगर पकडे गए तो तुम ही निपटना फिर.
.
भाभी सॉरी ना.. अच्छा सुनो ना..

क्या है हनी.. मिठाई बनी या नहीं देखने जाना है फिर मत कहना ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ.. जल्दी बोल..

वो भाभी एक दोस्त का फोन आया था.. अगले महीने उसकी बहन की शादी तो कैर्टिंग के बारे में पूछ रहा था.. मैंने भी कह दिया मेरी नेहा भाभी से अच्छी कैटरिंग कौन कर सकता है.. बड़ी पार्टी है vip लोग आएंगे.. अच्छा माल बन जाएगा.. आपको नम्बर व्हाट्सप्प कर रहा हूँ एक बार बात कर लो शाम को मिलवा भी दूंगा..

नेहा ख़ुशी से इधर उधर देखकर हनी के गाल को चुम लेती है और कहती है - जब भी चिंकी से बात करने का मन करें बता दिया कर हनी.. मैं कोई ना कोई जुगाड़ करवा दिया करुँगी तुम दोनों का..

सूरज - चिंकी के अलावा किसीसे बात करनी हो तो भाभी..

नेहा - बता ना किससे बात करनी है? देख वो जो काम कर रही है ना वहा.. पांचो औरतों में जिसके साथ तेरा मन हो बता मैं ऊपर भेज दूंगी तेरे पास.. घंटे भर में फ्री कर देना.. समझा..

सूरज मुस्कुराते हुए - मैं आपको ऐसा लगता हूँ भाभी.. कि किसी के साथ भी बात कर लूंगा..

नेहा - जल्दी बता ना हनी.. मैं नहीं जाउंगी तो वो सब धीरे धीरे काम करेंगे.. फिर तू मुझे ही कहेगा भाभी ये काम नहीं हुआ वो नहीं हुआ..

सूरज - आप जाओ.. मैं बाद में व्हाट्सप्प पर बता दूंगा..

नेहा वापस इधर उधर देखकर जल्दी से हनी के गाल पर चुम्बन देने को आगे बढ़ती है मगर सूरज गाल घुमा लेता है और नेहा के होंठो से सूरज के होंठ मिल जाते है और नेहा होंठ मिलते ही अपने होंठों को सूरज के होंठों पर से हटा लेती है और सूरज के बाजू पर अपने हाथ से हल्का सा मारते हुए मुस्कुराकर वापस जाते हुए कहती है - लिपस्टिक साफ कर अपने होंठों से..

सूरज अपने होंठों पर जीभ फिरा कर अपने होंठों पर लगी लिपस्टिक साफ करते हुए जाती हुई नेहा को देखने लगता है और नेहा भी मुस्कुराते हुए सूरज को ही देखने लगती है फिर अपने काम में लग जाती है..

शाम के 6 बज चुके थे और अब सब रिश्तेदार और परिवार के सदस्य गार्डन में पहुंचने लगे थे.. गरिमा भी गार्डन में आ चुकी थी और वो वहा अकेले एक रूम में बैठी हुई थी.. वही सूरज घर जा चूका था और अपने कमरे में बैठा हुआ फ़ोन ओर गरिमा के साथ बात कर रहा था..

कहाँ हो? दिखाई क्यों नहीं दिए मुझे यहां? पहले तो कह रहे थे कि आते ही फूलों से मेरा स्वागत करोगे मगर तुम तो नज़र से भी दूर हो.. ऐसा करोगे देवर जी तो मैं नाराज़ हो जाउंगी आपसे..

भाभी किसी काम से घर आया था.. थोड़ी देर में वापस आ जाऊँगा.. वैसे भईया होंगे ना आपजे स्वागत में वहा..

अच्छा जी.. भईया का नाम लेकर तुम बचना चाहते हो देवर जी? जल्दी से यहाँ आ जाओ.. और मुझे अपने दर्शनलाभ दो.. समझें?

मुझे तो समय लगेगा भाभी.. तब तक आप भईया से बात कर लो..

देखो देवर जी मैं तैयार हो रही हूँ.. अगर मेरे तैयार होने तक नहीं आये तो मैं बात भी नहीं करुँगी तुमसे.. बाय.. फोन कट जाता है और सूरज गद्दे से खड़ा होकर अपने सूट को अलमीरा से निकालकर एक तरफ रख देता है और अपनी टीशर्ट उतारकर बाथरूम के अंदर चला जाता है और ब्रश करता हुआ बाल्टी में नहाने के लिए पानी भरने लगता है.. तभी बाथरूम के गेट पर उसे कोई दिखाई देता है और वो कहता है - भाभी देखो सुबह से बर्दास्त कर रहा हूँ आपको.. ये सब हरकते मेरे साथ मत करो.. वरना मैं नीलेश भईया को फोन कर दूंगा..

रचना - कर देना देवर जी.. मैंने रोका थोड़ी है आपको... वैसे बॉडी तो बहुत अच्छी है आपकी.. बिना जिम गए ही काफी अच्छी बॉडी बना ली.. मछली पडती है आपके? दिखाओ ना देवर जी..

भाभी देखो.. आप अकेले में जो करती हो ना मेरे साथ वो सब गलत है.. मैं अनुराधा बुआ और नीलेश भईया से आपकी शिकायत कर दूंगा.. पहले तो बातों से छेड़ती थी अब तो यहां वहां छूने भी लगी हो..

अच्छा ककहाँ छुआ मैंने? बताओ तो..

सुबह सीढ़ियों में आपने कहा कहा हाथ लगाया था? भूल गयी? और अभी थोड़ी देर पहले रसोई में चाय देते वक़्त भी.. शर्म नहीं आती आपको.. दो साल का बच्चा है आपका और ये सब करती हो..

रचना रचना...

रचना बाथरूम के दरवाजे से हटकर कमरे से बाहर आ जाती है और सीढ़ियों से ऊपर आती अनुराधा को देखकर कहती है..

जी माँ जी.. क्या हुआ?

रचना मैं मुन्ने को लेकर सुमित्रा और बाकी लोगों के साथ जा रही हूँ.. तू ये चाबी रख.. घर लॉक करके आना हनी के साथ आ जाना और उसे तंग मत करना.. अनुराधा वापस नीचे चली जाती है..

ठीक है माँ जी.. रचना वापस कमरे के अंदर आती है तो देखती है सूरज ने बाथरूम का दरवाजा लगा लिया है और नहा रहा है.. रचना अपने पर्स से एक vigra कि गोली जो नीलेश खाता था उसे एक जूस के गिलास में डाल कर मिला देती है और वही रख देती है..
फिर सूरज का सूट उठाकर कहीं छिपा देती है और सूरज के बाथरूम से बाहर आने का इंतजार करने लगती है..

सूरज जब बाथरूम से तौलिया लपेटकर बाहर आता है तो देखता है रचना वही गद्दे ओर बैठी हुई थी..

तोलिए में तो कमाल लगते हो देवर जी.. देखते ही आँखों में नशा चढ़ जाता है..

भाभी आप गई नहीं.. देखो अब आप लिमिट क्रॉस कर ही हो..

रचना उठकर करीब आती हुई - अभी कहा लिमिट क्रॉस की है देवर जी.. लेकिन आप चाहो तो लिमिट क्रॉस हो सकती है.. कसम से देवर जी.. पूरा सुखी कर दूंगी.. आप खुद बोलोगे भाभी मज़ा आ गया..

बुआ और भईया को पता चल गया ना आपने क्या बोला है तो आपका वो हाल होगा जो आप सोच भी नहीं सकती.. समझी.. और मेरा सूट कहा छिपाया है आपने..

बता दूंगी.. पहले थोड़ा रिलेक्स हो जाओ देवर जी.. लो जूस पिलो..

मुझे नहीं पीना भाभी मेरे कपड़े दो.. आप मेरे साथ ये सब करोगी मुझे उम्मीद नहीं थी..

अच्छा मेरे शरीफ देवर जी आप जूस तो पियो.. लो.. मैं आपका सूट लाती हूँ.. अब तंग नहीं करती आपको.. लो..

सूरज जूस लेकर एक सांस में पी लेता है.. और उसे अहसास होता है की जूस कुछ अजीब था वो पूछता है - जूस में क्या मिलाया था आपने?

रचना मुस्कुराते हुए सूरज को सूट देती हुई - vigra की गोली है देवर जी.. मेरे साथ कुछ नहीं करना ना आपको.. अब अपने तोते के लिए कोई मैना ढूंढ़ लो.. क्युकी तोता आसमान में उड़ने वाला है.. वैसे घर में अब हमारे अलावा कोई नहीं है.. आप चाहो तो मैं ही आपको ठंडा कर देती हूँ.. कुछ देर आराम रहेगा देवर जी..

सूरज गुस्से से - आप नीलेश भैया की भाई की बीवी हो.. मैं आपके साथ कुछ नहीं करने वाला.. और ये जो हरकत की है ना आपने.. इसका बदला जरुरत लूंगा मैं आपसे.. याद रखना..

रचना सूरज का लंड खड़ा होते देखकर मुस्कुराते हुए - लगता है तोता उड़ने लगा.. सोच लो देवर जी.. ऑफर लिमिट पीरियड के लिए है फिर मत कहना रचना भाभी अपने बोला नहीं था..

सूरज सूट पहनता हुआ - आपसे तो मैं बात करना ही नहीं चाहता..
ये कहते हुए सूरज अपना सूट पहनता है मगर अपने खड़े लंड से परेशान रहता है और रचना उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहती है - चलिए ना देवर जी अब तो वहा सब आ गए होंगे..

सूरज सूट पहनकर वापस बाथरूम में घुस जाता है..
रचना - जयकारा लगा रहे हो क्या देवर जी.. कब तक पकड़ के हिलाते रहोगे? बाहर आओ ना मैं मदद कर देती हूँ आपकी..

सूरज सच में अंदर लंड हिला रहा था और उसका लंड बिलकुल लोहै जैसा सख्त और मजबूत हो गया था उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें और उसे गार्डन में जाकर सबसे मिलने की भी बहुत तमन्ना थी.. रचना बाथरूम के बाहर खड़ी होकर जहरीली हंसी हसते हुए सूरज को बारबार उसके साथ सम्भोग करने के लिए उकसाए जा रही थी..

सूरज ने अपने खड़ा हुआ लंड देखकर रचना के बारे में एक बार सोचा और मन ही मन किसी ख्याल में पहुच गया और दो मिनट बाद उससे बाहर निकालकर पैंट से लंड बाहर रखकर ही बाथरूम से बाहर रचना के सामने आ गया..

रचना सूरज के लंड को उसकी पेंट से बाहर देखकर हसते हुए सूरज को देखने लगी मगर सूरज के लंड को देखकर उसके मुंह में पानी आने लगा था.. रचना के पति नीलेश भी रचना को पूरा मज़ा देते थे मगर रचना जगह जगह मुंह मारने वाली औरतों में थी और उसे सूरज जैसे लड़के की तलब थी..

क्या हुआ देवर जी चाहिए भाभी की मदद?

सूरज शर्म छोड़कर - भाभी घोड़ी बनोगी?
रचना सूरज के मुंह से इतना सुनकर ख़ुशी से झूम उठी और अपनी शाडी उठा के बिना कुछ बोले झट सेगद्दे पर घोड़ी बन गई..

सूरज ने रचना की बड़ी और चौड़ी गांड देगी तो वो कामुकता से भर गया मगर रचना से बदला लेने का उसका इरादा नहीं बदला और वो रचा के पीछे आकर उसकी गांड को सहलाने लगा..

देवर आराम से करना.. कहीं फाड़ मत देना अपनी भाभी की चुत को.. वरना आपके भईया को मैं क्या मुंह दिखाऊंगी? प्यार से करना..

सूरज अपने लंड ओर थूक लगता हुआ - चिंता मत करो भाभी मैं आपकी चुत को छूूँगा तक नहीं..
इतना कहकर सूरज ने लंड सीधा रचना की गांड के छेद पर टिका दिया और दोनों हाथ से रचना की कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का मार दिया.. लंड सीधा खड़ा हुआ था लोडे सा सख्त. रचना की गांड में आधा झट से घुस गया और रचना चिल्ला उठी मगर सूरज को रचना पर गुस्सा आ रहा था उसने 3-4 धक्के दबाव लगाते हुए लगाए जिससे पूरा लंड रचना की गांड में लगभग घुस ही गया था.. रचना दर्द से सिसक उठी थी और उसकी आँख में आंसू थे. उसे लगा था की वो सूरज के मज़े लेगी मगर सूरज ने बदले के चक्कर में रचना के मज़े ले लिए थे.

रचना सिसकती हुई आंसू बहा रही थी मगर उसे देखने सुनने वाला कोई नहीं था.. थोड़ी देर बाद जब रचना की गांड के मसल्स रिलैक्स हुए तब सूरज ने झटके पर झटके लगा कर रचना की गांड मारनी शुरू कर दी..

रचना तो कुछ बोलने लायक़ ही नहीं रही.. सूरज से गांड मरवाते हुए वो बस सूरज को गालिया ही दे रही थी और उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी.. मगर सूरज ने इतना कस के रचना को पकड़ लिया था कि उसकी पकड़ से छूटना आसान नहीं था..
सूरज धक्के पर धक्के दे रहा था और रचना गांड मरवाती हुई सिसकियाँ लेकर अपनी गांड का गोदाम बनते हुए लाचार होकर देख रही थी..

दिवार कि गाड़ी शाम के सात बजा रही थी और अब एक घंटे बाद जाकर सूरज रचना कि गांड मार कर उसमे अपना माल भरकर लंड बाहर निकाल चूका था.. रचना अपनी गांड पकड़ कर खड़ी हुई तो उसने महसूस किया कि उसकी गांड में दर्द हो रहा है और चलने में भी हलकी सी जलन का अहसास हो रहा है

सूरज का लंड ठंडा हो गया था और वो अब रचना से पूछने लगा - भाभी हो गई इच्छा पूरी?

रचना एक जोर दार थपड़ सूरज के गाल पर जड़ कर कमरे से अपनी गांड पकड़ कर बाहर आ जाती है.. सूरज भी अपनी पेंट ठीक से पहन कर अपना फ़ोन उठाते हुए कमरे से बाहर आ जाता है..

गरिमा कॉल पर - कहा हो.. आये क्यों नहीं अब तक?

घर पर हूँ बस आ रहा हूँ..

स्टेज पर जा रही हूँ.. जल्दी आओ वरना बात भी नहीं करूंगी समझें ना.. तुम्हारे भईया तो पहले से स्टेज ओर बैठे है..

ठीक है आ रहा हूँ..

सूरज फ़ोन काट कर रचना से - भाभी एक राउंड और हो जाए?

रचना - बहन के लोडे.. गांड में सुरंग बनायेगा क्या? सोचा था चिकना है चुत में घुसा कर निचोड़ लुंगी मगर तू गांड के पीछे पड़ गया..

सूरज खड़ा होता हुआ - 7.15 बजने वाले है.. चलो..

रचना गुस्से से - मेरी चुत नहीं मारेगा?

सूरज - मैंने कहा था मैं हाथ भी नहीं लगाऊंगा आपकी चुत को.. अब चलना है तो बोलो वरना मैं अकेला निकल जाऊँगा..

रचना अपनी गांड पकड़ कर खड़ी हुई - कमीने याद रखूंगी मैं भी.. देखना केसा बदला लेती हूँ तुझसे..

सूरज हसते हुए - दरवाजा लॉक करो और चलो.. देर करोगी तो सबके सवालों का जवाब देते नहीं बनेगा..

गार्डन में काफी लोग आ गए थे कुछ खाने के लिए चले गए तो कुछ स्टेज पर विनोद और गरिमा के साथ फोटोज खिचवा रहे थे.. कुछ dj ओर डांस भी कर रहे थे.. वही जयप्रकाश और उसके सहकर्मी भागते हुए गार्डन के गेट पर आये और अपने ऑफिस की अधिकारी मैडम का स्वागत करने लगे..

बहुत अच्छा लगा मैडम आप समय निकाल कर आई.. आइये मैं आपको अपने बेटे और उसकी मगेतर से मिलवाता हूँ..

आपने इतना जोर देकर कहा था जयप्रकाश जी.. आना तो था ही..

जी मैडम.. आईये.. ये मेरा बड़ा बेटा विनोद और ये उसकी मगेतर गरिमा..

Congratulations..

विनोद और गरिमा - थैंक्यू..

जयप्रकाश - मैडम.. फोटो.. इस तरफ..

सूरज अब तक रचना को गार्डन में ले आया था और रचना सूरज को आज की आखिरी गाली देकर अपनी गांड के दर्द के साथ अनुराधा के पास चला गया था..

सूरज ने स्टेज की तरफ देखा तो देखता ही रह गया और फिर एकदम से छुपते हुए भगकर गार्डन के बाई तरफ से होकर रसोई खाने में चला गया जहाँ अब एक्का दुक्का लोग थे..

सूरज रसोई के पीछे बने एक एक्स्ट्रा बाथरूम की तरफ चला गया और खड़े होकर लम्बी लम्बी साँसे लेता हुआ कुछ सोचने लगा.. उसने स्टेज पर जिसे बिनोद गरिमा के साथ फोटो खिचवाते हुए देखा था वो कोई और नहीं बल्कि सूरज की कॉलेज में गर्लफ्रेंड रह चुकी गुनगुन थी..

सूरज ने गुनगुन से वापस कभी ना मिलने की कसम खाई थी और वो अपनी कसम पर कायम था.. उसे समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है.. गुनगुन अचानक उसके सामने आ गई और कॉलेज के वो चार साल उसे याद आ गए.. दोनों के बीच प्यार और इश्क़ के दिन.. जब दिनों ने अपने अपने जीवन को एकदूसरे के लिए जीने की कसम खाई थी.. दोनों का पहला सम्भोग भी एक दूसरे के साथ ही हुआ था.. मगर फिर सूरज गुनगुन के जाने के बाद किस तरह से जिन्दा रहा उसे वो भी याद आ गया.. उसने नशे करना शुरू कर दिया था.. रात रात भर घर से गायब रहता था.. किसी से बात नहीं करता था.. मरने तक के ख्याल उसके दिमाग में आये थे और तभी उसने गुनगुन से कभी नहीं मिलने की कसम खाई थी और उसके बाद उसे चिंकी ने संभाला था.. उसे होने जिस्म का सुख और मोरल सपोर्ट देकर चिंकी ने वापस नशे से बाहर निकाला था.. सुमित्रा ने सूरज का ख्याल रहा था और उसे प्यार दिया था जिससे वो वापस ठीक हुआ..

आपके दो बेटे है ना जयप्रकाश जी..

जी मैडम.. छोटा वाला यही कहीं होगा.. फ़ोन भी नहीं उठा रहा वरना आपसे मिलवा देता.. आपकी ही उम्र का है पर अब भी कोई काम नहीं करता.. सोच रहा हूँ शादी के बाद उसे अपने भाई के पास भेज दूं.. वही कुछ कर लेगा..

देखना जयप्रकाश जी.. कहीं हाथ से निकल जाए.. आज कल बच्चे माँ बाप की नहीं सुनते..

सही कहा मैडम.. आइये खाना खा लीजिये है..

गुनगुन खाना खाने लगी थी वही सूरज अब वही था और उसने उस बाथरूम से किसी को बाहर आते हुए देखा एक औरत उस बाथरूम से बाहर आकर सूरज से बोली..

हनी तू यहां क्या कर रहा है..

हनी पर vigra का असर था उसने बिना कुछ सोचे समझें उस औरज को पकड़ लिया और उसे वापस वापस बाथरूम के अंदर घुसाकार अंदर से बाथरूम की कुंदी लगा ली और औरत की कमर में हाथ डाल कर उसके होंठों को चूमते हुए कहा..

नेहा भाभी आपसे बात करनी है अभी..

नेहा शॉक्ड हो गई मगर उसने हनी से कुछ नहीं कहा और बस उसे देखती ही रह गयी..

सूरज ने नेहा की ख़ामोशी को उसकी हां समझा और उसके होंठों को चूमने लगा..

नेहा ने पहले कुछ सेकंड तो कुछ नहीं किया मगर फिर वो भी कुछ सोचकर सूरज के साथ चुम्बन के बंधन में बंध गई और सूरज को बेतहाशा चूमने लगी..

सूरज ने नेहा का एक हाथ होने लंड के ऊपर रख दिया और नेहा के चेहरे और गर्दन को चूमने और चाटने लगा.. नेहा अपने हाथ से सूरज का लंड पकड़ते हुए दबा दिया और पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकडने लगी फिर बोली - हनी.. यहां इस बाथरूम में कैसे बात होगी? इतनी बू आ रही है..

हो जायेगी बात भाभी.. आप पलट जाओ और शाडी उठाकर झुक जाओ.. सूरज पेंट नीचे सरकाकर लंड बाहर निकलते हुए बोला और नेहा पलट गई और शाडी उठाकर झुक गई..

सूरज ने लंड को चुत पर सेट करके अंदर घुसा दिया और धीरे धीरे चोदने लगा..
भाभी टाइट निकली आओ तो.. ऐसा लगता ही नहीं आप दो बच्चों की माँ हो..

देवर जी मुन्ना ने देख लिया ना तो तुम्हारे साथ मुझे भी जान से मार देंग.. जल्दी से अपनी बात पूरी करो और जाओ.. यहाँ कोई आ ना जाए.. बस..

सूरज धीरे धीरे चोदते हुए - भाभी मुझे जल्दीबाज़ी में बात करनी नहीं आती.. तसल्ली से इत्मीनान से बात करना पसंद है.. यहां कोई नहीं आएगा..

ऐसा है देवर जी.. अभी लम्बी बातचीत का समय नहीं है.. जल्दी से बात ख़त्म करो और जाओ.. लम्बी बात करने के लिए मैं तुम्हे बाद में फ़ोन कर दूंगी.. अभी ज्यादा देर यहां रुकना ठीक नहीं..

सूरज झटके तेज़ करते हुए आपने दोनों हाथ आगे लेजाकर नेहा के चुचे पकड़ लेता है और मसलाते हुए कहता है - लगता है अब भी दूध आता है इनमे भाभी..

मैं बुलाऊंगी तब आके आराम से पी लेना मेरा दूध हनी..

भाभी चिंकी को हमारी इस बात के बारे में मत बताना प्लीज...

उसकी फ़िक्र मत करो देवर जी.. तुम बस जल्दी से बात ख़त्म करो..

बस भाभी झड़ने वाला हूँ..

अंदर मत निकलना हनी..

क्यों भाभी.. अंदर क्या परेशानी है? निकालने दो ना.. प्लीज..

ठीक है हनी.. निकाल दे..

हनी झड़ता हुआ - भाभी मैं प्रेग्नेंट ना कर दूँ आपको आज.. मज़ा आ गया भाई..आप बहुत मस्त हो..

नेहा अपनी शादी नीचे करके पालाते हुए - अब जा हनी.. कोई आ जाएगा वरना..

सूरज लंड की तरफ इशारा करते हुए - भाभी साफ कर दो ना..

नेहा नीचे झुकाकर लंड को मुंह में ले लेती है चूसते हुए साफ करने लगती है.. तभी दरवाजा बजता है..

नेहा अंदर ही रहेगी क्या?

नेहा लंड मुंह से निकालकर - वो मेरा पेट खराब है.. आप जाइये में आती हूँ.. और एक बार बाहर चक्कर लगा लीजियेगा.. कुछ कमी तो नहीं है कही..

मुन्ना - ठीक है..

नेहा - अब मैं जाती हूँ और तू रसोई की तरफ से मत जाना.. समझा.?

सूरज नेहा को चूमकर - thanks भाभी.. आपका ये अहसास याद रखूँगा..

नेहा मुस्कुराते हुए - अगली बार तसल्ली से बात करूंगी हनी..

नेहा चली जाती है कुछ देर बाद सूरज भी बाथरूम से निकालकर कहीं चला जाता है..


अच्छा जयप्रकाश जी.. इज़ाज़त दीजिये अब..

जी मैडम.. आप आई बहुत अच्छा लगा.. वरना छोटे से बाबू के यहाँ कोनसा अफसर आता है..

ऐसा मत कहिये जयप्रकाश जी.. और कुछ दिन आप रेस्ट कारिये.. ऑफिस आने की जरुरत नहीं है.. मैं देख लुंगी..

बहुत शुक्रिया मैडम..

रात के नो बजने तक गुनगुन वहा से चली जाती है..

Next on 50❤️
Nice update bro
 

ayush01111

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Update 7

अरे अरे कौन है तू? और अंदर कैसे चला आया?

वो आंटी मैं.. सो सॉरी.. मुझे पता नहीं था यहाँ कोई है..

गार्डन के एक कमरे मे रमन घुसा तो उसने देखा की एक 50 पार की महिला कमर से ऊपर पूरी तरह नंगी खड़ी हुई अपने कमरे बदल रही थी जो रमन के कमरे मे आने पर अपने हाथों की हथेलियों से अपने चूची को ढक कर रमन को देखने लगी और उसे गुस्से की निगाहो से देखते हुए बोली..

पता नहीं था या सबकुछ पता करके कमरे मे घुसा है? मैं अच्छे से जानती हु तुम जैसे आवारा लफंडर बदमाश लड़को को.. ना रिश्ता देखते हो ना उम्र.. तुम्हारी मा जैसी हूं.. चलो बाहर निकलो.. वरना चमाट खाओगे.. जाओ..

सॉरी आंटी.. माफ़ करना..

रमन बाहर चला जाता है और औरत अपने कपडे बदलने लगती है..

कुछ देर बाद रचना लचकते हुए उस कमरे मे आ जाती है और उस औरत से कहती है - क्या हुआ मम्मी जी?

कुछ नहीं रचना.. आज कल के लड़के भी ना.. ना उम्र देखते है ना समाज.. बस बेशर्म बनकर कुछ भी करने लगते है..

क्या हुआ मम्मी जी ऐसा क्यों बोल रही हो.. किसी ने प्रपोज़ कर दिया क्या आपको?

नहीं रे.. अभी कपडे बदलते वक़्त एक लड़का कमरे मे घुसा आया.. मैं तो शर्म से पानी पानी हो गई..

तो फिर कुछ हुआ क्या उस लड़के और आपके बीच मम्मी जी? बताओ ना?

तू भी बेशर्म हो गई है रचना.. भला मेरी उम्र है ये सब करने की? देख वो वहा जो लड़का है वही आया था.. मैं तो डांट कर भगा दिया..

रचना खिड़की से रमन को देखकर - ये.. मम्मी जी तो रमन है.. सूरज का दोस्त.. बहुत मालदार पार्टी है.. ये गार्डन इसी का तो है.. और भी बहुत सी प्रॉपर्टी है इसकी शहर मे.. बेचारा गलती से आया होगा.. आप भी ना मम्मी जी.. प्यार से जाने को कह देती डांटना जरुरी था? कितना हैंडसम है..

अनुराधा - रचना ये मत भूल तू शादीशुदा है.. और एक बच्चे की मा है.. ये मर्द देखकर तेरे मुँह मे जो पानी आता है ना सब जानती हूं मैं.. तेरी नियत तो हनी पर भी ठीक नहीं है.. अगर मुझे ऐसा वैसा कुछ पता चाला ना तो देख लेना..

रचना हस्ते हुए - मम्मी जी.. आप भी ना.. ना खुद बाहर की मिठाई खाती है ना मुझे खाने देती है.. अच्छा लो.. दो घूंट मार लो..

रचना अपने पर्स मे से एक वोटका का क्वाटर निकालकर अनुराधा के देती है और अनुराधा रचना के साथ मिलकर उस क्वार्टर को ख़त्म करते है दोनों सास बहु साथ मे इस तरह से पहले भी कई बार हलकी फुलकी शराब खोरी करते रहते थे और आज भी कर रहे थे.. दोनों पर सुरूर आ चूका था.. रचना तो अपनी गांड मे हो रहे हलके मीठे दर्द के साथ नाचने के लिए डांस फ्लोर पर चली गई मगर अनुराधा ने जब रमन को अकेला एक जगह बैठकर खाना खाते देखा तो वो कुछ सोच कर उसीके के पास चली गई..

तुम सूरज के दोस्त हो?

रमन ने साइड मे अनुराधा को खड़ा देखा तो झट से कुर्सी से खड़ा हो गया और बोला.. जी आंटी.. सॉरी वो गलती से आपके रूम मे आ गया..

कोई बात नहीं बेटा.. मैंने ही कुछ ज्यादा बोल दिया था तुम्हे.. मुझे लगा तुम कोई मनचले हो.. बैठो ना.. खाना खाते हुए उठा नहीं करते..

रमन वापस कुर्सी पर बैठ जाता है और अनुराधा भी रमन के बगल वाली कुर्सी पर बैठ जाती है..

ये गार्डन तुम्हारा है?

जी आंटी.. शहर मे काफी खानदानी जमीन थी तो पापा ने कई मैरिज हॉल और लोन बनाकर ये बिज़नेस शुरू किया था.. उनके बाद अब मैं ही इसे संभाल रहा हूं.. रमन ने खाना खाते हुए कहा..

ये तो बहुत अच्छी बात है.. अच्छा बेटा.. मेरे पोते का जन्मदिन है अगले महीने दस तारीख को.. छोटा सा प्रोग्राम करना था.. कोई छोटी जगह है?

जगह ही जगह है आंटी.. आप डेट बोलो मैं यही गार्डन बुक कर देता हूं..

अरे नहीं नहीं बेटा.. इतनी बड़ी जगह का क्या करना है.. मुश्किल से 100- 150 लोग आएंगे.. कोई छोटी जगह बताओ.. ये गार्डन तो महँगा लगता है..

अरे आंटी आप सूरज की रिश्तेदार हो.. आपके लिए क्या सस्ता क्या महँगा? वैसे आप सूरज की क्या लगती है?

मैं सूरज की बुआ हूं बेटा..

तो फिर आप मेरी भी बुआ हुई.. और आपका पोता मेरा भतीजा.. मैं अपनी बुआ और भतीजे के लिए इतना तो कर ही सकता हूं.. मैं सूरज से कह दूंगा जन्मदिन यही बनेगा.. आपको पैसे देने की जरुरत नहीं है.. रमन ने हस्ते हुए आखिरी लाइन कही तो अनुराधा के दिल मे रमन के लिए इज़्ज़त अचानक से बढ़ गईऔर रमन के प्रति अजीब सा खींचाव पनप गया.. अनुराधा पर शराब का सुरूर भी था उसने मुस्कुराते हुए रमन से कहा..

बेटा.. मुझे माफ़ करना.. मैंने तुझे गलत समझा.. तुम्हारी मा ने बहुत अच्छे संस्कार दिए है तुम्हे.. वो बहुत अच्छी होंगी..

रमन उदासी से भरी हुई मुस्कुहाट के साथ - हां.. वो सच मे बहुत अच्छी थी..

थी मतलब? अनुराधा ने हैरत से पूछा तो रमन ने जवाब दिया - आंटी वो मम्मी बहुत साल पहले भगवान के पास चली गई थी..

अनुराधा मे मन मे रमन के लिए मानो ये सुनकर मातृत्व का भाव जाग गया और अनुराधा ने रमन को गले लगाते हुए कहा - बेटा कभी कभी ऊपर वाला बड़ी कड़ी परीक्षा लेता है हम सबकी.. पर तुझे जब भी अपनी मा की याद आये तू मेरे पास मुझसे मिलने आ जाया कर..

अनुराधा के वातसल्य से रमन भाव विभोर हो गया और मुस्कुराते हुए अनुराधा से बोला.. थैंक्स आंटी..

आंटी नहीं बेटा.. बुआ.. तू भी तो मेरे लिए हनी की तरह है.. अच्छा अपना फ़ोन दे मैं नंबर देती हूं.. इस इतवार घर आना.. अपने हाथ से खाना बनाकर खिलाऊंगी तुझे..

रमन मुस्कुराते हुए - आप बहुत अच्छी हो आंटी.. सोरी बुआ..

अनुराधा कुछ देर और ठहर कर वहा से चली जाती है और कुछ देर बाद रमन जब सूरज से मिलकर वापस जाने लगता है तो किसी का कॉल आता है और रमन अपना फ़ोन देखकर गुस्से मे फ़ोन उठाता हुआ कहता है..

क्या है?

सामने सीख मीठी से आवाज मे लड़की जीज्ञासा के भाव से पूछती है- घर कब तक आओगे तुम?

रमन गुस्से मे - क्यों? मेरी शकल देखे बिना नींद नहीं आएगी तुझे?

मुझे कुछ बात करनी है तुमसे.. इसलिए पूछ रही थी.. मुझे भी शोख नहीं है सुबह शाम तुम्हारी शकल देखने का..

सुन.. तू ना मेरे बाप की रखैल थी.. और मेरे बाप ने तेरी माँ के और तेरे इश्क़ मे अपनी सारी जायदाद मुझे देने की जगह तेरे नाम कर दी.. इसलिए तुझे झेल रहा हूं.. बार बार फ़ोन करके परेशान किया ना तो अच्छा नहीं होगा..

नहीं तो क्या कर लोगे तुम.. एक बार नहीं सो बार फ़ोन करूँगी.. जल्दी घर आओ.. समझें? वरना ये जो ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हो ना.. सब छीन लुंगी.. और दुबारा रखैल कहकर बुलाया ना तो भिखारी बना दूंगी..

रमन गुस्से मे फ़ोन काट देता है और घर चाला जाता है..


***************


अंकुश - मम्मी मैं खाना ले आता हूँ..
नीतू - नहीं अक्कू तू बैठ मैं ले आती हूँ..
अंकुश माँ गोमती - अरे अकेली कैसे लायेगी नीतू.. अक्कू तू भी जा..
अंकुश - ठीक है माँ आप बैठो यही.. चल नीतू..
अंकुश और नीतू प्लेट लेकर खाना लेने चल देते है..

नीतू - वकील साहिबा का फोन आया था अभी..
अंकुश - क्या बोली?
नीतू - पूछ रही थी तेरा भाई अच्छा लगता है.. बॉयफ्रेंड बनेगा क्या? तुझे पसंद करती है वकील साहिबा..
अंकुश मुस्कुराते हुए - फिर तूने उसे बताना नहीं मुझे सिर्फ मेरी बहन पसंद है..
नीतू हसते हुए - क्या बताती? कि मेरा भाई बहनचोद है.. उसे बिस्तर मे सिर्फ उसकी बहन ही अच्छी लगती है..
अंकुश - वैसे तुझे जलन तो हुई होगी वकील साहिबा से.. सच बताना..
नीतू - जलन? मेरा तो मन किया साली के बाल पकड़ कर दो थप्पड़ लगा दूँ.. मेरे अक्कू पर नज़र रखती है कमीनी..
अंकुश - उफ्फ्फ मेरी झासी कि रानी.. एक बार घर चल.. आज रात तुझे सोने नहीं दूंगा..
नीतू मुस्कुराते हुए - सिर्फ एक कंडोम बचा हुआ है पैकेट में.. रातभर जगाना है तो और लगेंगे..
अंकुश - वो सब मैं देख लूंगा.. इतनी प्यारी लग रही है ना काले सूट में.. मन कर रहा है यही शुरू हो जाऊ..
नीतू हसते हुए - पहले खाना खा ले.. चल.. और वकील साहिबा ने कुछ और भी कहा था..
अंकुश - क्या?
नीतू - जोगिंदर मेरी शर्त मान गया है.. समझौता करना चाहता है.. 13 तक देने को तैयार है..
अंकुश - ती तू क्या चाहती है?
नीतू - क्या चाहूंगी? पैसे ले लुंगी और क्या? तुझे अपना काम शुरू करने के लिए जरुरत भी तो थी पैसो की.. तूने कहा था ना तुझे नोकरी नहीं करनी..
अंकुश - मुझे पैसे देगी?
नीतू - क्यों बड़ी बहन हूँ तेरी.. और होने वाली बीवी भी.. इतनी मदद कर ही सकती हूँ..
अंकुश - लगता है आज रात पलंग टूटने वाला है.. कल फिर से ठीक करवाना पड़ेगा..
नीतू हसते हुए - गद्दा फर्श पर डाल लुंगी.. बार बार पलंग कैसे टूट जाता है मम्मी पूछती है तो जवाब देते नहीं बनता..
अंकुश - साफ साफ बोल दिया कर ना.. भाई बहन के प्यार मे पलंग को नुक्सान तो होगा ही..
नीतू मुस्कुराते हुए - कमीने.. अब चल..
अंकुश नीतू खाना लेकर वापस अपनी माँ गोमती के पास आ जाते है और खाना खाने लगते है..


*************


हनी.. हनी..
क्या हाल है अक्कू.. नमस्ते आंटी.. कैसी हो नीतू
दीदी?
गोमती - नमस्ते बेटा..
नीतू - क्या बात है हनी.. कहा गायब थे अब तक? दिखे नहीं..
सूरज - काम में बिजी था.. किसी से नहीं मिल पाया..
अंकुश - हीरो लग रहा है सूट में.. अच्छा है.. तुझे टीशर्ट लोवर में देख देख मुझे टीशर्ट लोवर से नफरत हो गई थी..
सूरज - देखो बोल कौन रहा है.. सज धज के तू भी ऐसे आया है जैसे तेरी सगाई हो..
अंकुश नीतू को देखकर - मेरी दुल्हन तो तैयार है.. चाहु तो विनोद भईया के साथ साथ मैं भी सगाई कर सकता हूँ.. वैसे बिल्ला पूछ रहा था तेरे बारे में..
सूरज - कहा है वो?
अंकुश - थोड़ी देर पहले यही था नज़मा भाभी के साथ.. वो रहा.. आइसक्रीम वाली स्टाल के पास..
सूरज - ठीक है अक्कू मैं मिलके आता हूँ..
अंकुश - ठीक है ब्रो. वैसे खाना अच्छा बनाया है तेरे साले ने..
सूरज हसते हुए - साथ में नेहा भाभी थी ना..


***********


क्या हाल है बिल्ले..
बस हनी..
सूरज - खाना हो गया?
बिलाल - हाँ.. तेरी भाभी को आइसक्रीम पसंद है तो आइसक्रीम खाने यहां आ गए..
सूरज - अच्छा है.. भईया भाभी से मिले ना..
बिलाल - हाँ.. आते ही मिले थे.. अब तो जा ही रहे थे.. तुझे फ़ोन भी क्या पर तूने उठाया नहीं..
सूरज - भाई कई लोगों ने फ़ोन किया था पर साइलेंट था इसलिए उठा नहीं पाया किसी का भी..
नज़मा - सूट में बहुत प्यारे लग रहे हो भाईजान..
सूरज नज़मा को देखकर - शुक्रिया भाभी..
बिलाल - अच्छा तुम दोनों बात करो मैं बाथरूम जाकर आता हूँ..
बिलाल चला जाता है नज़मा सूरज को आइसक्रीम खाने को कहती है तो सूरज नज़मा के होंठो पर लगी हलकी सी आइसक्रीम अपनी ऊँगली से इधर उधर देखकर खाते हुए कहता है - भाभी बिलाल से कहना मैं तैयार हूँ.. बस ये बात किसी को पता ना चले..
नज़मा शरमाते हुए - शुक्रिया भाईजान..
सूरज - भाभी भाईजान मत बोलो प्लीज..
नज़मा शरमाते हुए नज़र झुका लेती है और कहती है - तो क्या कहु आपको..
सूरज - सूरज कहो ना भाभी.. आपके गुलाबी होंठो से अच्छा लगेगा सुनने में..
नज़मा इस बार कुछ नहीं बोलती और चुपचाप खड़ी रहती है जब तक बिलाल नहीं आ जाता.. और बिलाल आने के बाद सूरज कहता है - बिल्ले.. मैं बाकी लोगों से मिल लेता हूँ..
बिलाल - ठीक है हनी.. अब हम चलते है.. बहुत सही फंक्शन हुआ है..
सूरज - मैं किसी से कह दू छोड़ने के लिए?
बिलाल - अरे पास में ही तो घर है.. चलके चले जाएंगे.. चल ठीक है भाई..
सूरज - ठीक है बिल्ले.. भाभी का ख्याल रखना..
नज़मा - आप अपना ख्याल रखना भाईजान..


*************


सूरज बिल्ले के पास से जब वापस आने लगता है तो कोई उसका हाथ पकड़ लेता है और कहता है - बड़ी जल्दी में हो.. कहाँ जा रहे हो?

सूरज मुड़कर किसीका चेहरा देखता है फिर कहता है - कैसी हो दी... काकी कैसी हो?
बरखा - तुम तो घर छोड़ने के बाद गायब ही हो गए.. मिलने भी नहीं अपनी दीदी से.. और माँ बता रही थी तुम्हरी करतूतों के बारे में.. बहुत बिगड़ गए हो मेरे जाने के बाद..
हेमलता - आज पहली बार अच्छे कपड़ो में देखा है.. तु तो कोई फ़िल्मी हीरो लगता है हनी..
बरखा - वो तो है माँ.. बस आदत थोड़ी खराब इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - काकी आप बहुत अच्छी लग रही हो इस शाडी में.. काका को तो दौरा आ गया होगा..
हेमलता - देखा बरखा.. तेरा स्टूडेंट की कैसे केची की तरह जुबान चलने लगी है..
बरखा सूरज के होंठ पकड़कर - लगता है माँ... जबान कुतरनी पड़ेगी इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - दी.. अब मुझे डंडे से डर नहीं लगता..
बरखा - थप्पड़ से तो लगता है ना.. इस चाँद से चेहरे पर ग्रहण लगा दूंगी बच्चू..
सूरज हसते हुए - काका कहा है?
हेमलता - ये तू बता.. कहा है वो..
सूरज - मुझे क्या पता? उस रात के बाद मैंने बात भी नहीं की काका से..
हेमलता - अगर पता चला वो तेरे साथ है तो सुमित्रा से तेरी शिकायत कर दूंगी.. याद रखना..
सूरज - आपकी कसम काकी उस रात के बाद नहीं मिला बंसी काका से.. दी.. सच में..
बरखा - ठीक है हम जा ही रहे थे..
सूरज - इतनी जल्दी?
बरखा - साढ़े नो बजने वाले है.. आठ बजे के आये हुए थे.. सब से मिल लिया.. एक तू बाकी था बस..
सूरज - मैं घर छोड़ देता हूँ..
बरखा - रहने दे मैं स्कूटी लाई हूँ.. तू अपना ख्याल रख... आज बहुत प्यारा लग रहा है.. किसी नज़र ना लग जाए..
हेमलता - सच कहा बरखा.. हनी एक काला टिका लगा ही ले..
सूरज हसते हुए - काकी काला सूट पहना है और क्या काले की कमी है..
हेमलता - काका मिले तो बोलना काकी घर पर बुला रही है..
सूरज - वो तो आपके डर से ही कहीं गायब होंगे.. आ जाएंगे..
बरखा - अच्छा तू घर आना.. बात करेंगे बैठ कर..
सूरज - ठीक है दी...
बरखा और हेमलता भी चले जाते है सूरज स्टेज की तरफ देखता जहाँ से एक नज़रे सीधा उसे खा जाने वाली नज़रो से देखने लगती है..


सूरज देखता है कि गरिमा उसे ही देखे जा रही थी और वो खा जाने वाली आँखों से ही देख रही थी.. गरिमा दो घंटे से स्टेज पर थी अंगूठी की रस्म हो चुकी थी.. और सूरज अब तक गरिमा से नहीं मिला था.. सूरज नज़र बचाकर वहा से कहीं चला जाता है.. गरिमा फिर से सामने की भीड़ में उसे तलाश करने लगती है.. गरिमा का मन अव्यवस्थित था वो मन ही मन सूरज पर गुस्सा कर रही थी और सोच रही थी कि सूरज अब तक उसे मिलने क्यों नहीं आया..

सूरज का लंड फिर से खड़ा होने लगा था और वो समझ नहीं पास रहा था कि उसका क्या करें? सूरज खड़े लंड के साथ किसी से नहीं मिल सकता था.. उसने एक बार अपने लंड को हिलाने की सोची मगर फिर उसकी नज़र किसी पड़ी तो उसे गुस्से से देखने लगा और उसकी ओर बढ़ गया..

क्या हुआ देवर जी.. कुछ परेशान हो आप..
भाभी मेरे साथ चलो..
कहा ले जाओगे देवर जी अपनी भाभी को?
चलो ना..
सूरज रचना को अपने साथ गार्डन के एक होने में बनी तीन मंज़िला बिल्डिंग में ले जाता है जहाँ हर मंज़िल पर 4 कमरे थे..
सूरज तीसरी मंज़िल के लास्ट वाले कमरे में रचना को ले आता है ओर दरवाजा बंद होते ही रचना कहती है..
देवर जी घोड़ी नहीं बनुँगी.. अब भी दर्द और जलन है..

आप पर गुस्सा आ रहा है भाभी.. देखो बार बार खड़ा हो रहा है.. अब शांत करो इसको..

कर देती हूं देवर जी.. ये कहते हुए रचना सूरज के लंड को बाहर निकालकर मुंह भर लेटी है ओर जोर जोर से चूसने लगती है.. सूरज रचना को देखकर अब उसके अपनी भाभी होने का ख्याल ओर जो वो कर रहा है ये सब गलत होने का ख्याल छोड़ देता है.. सूरज कामुकता से भर जाता है ओर रचना के बाल पकड़ कर उसके मुंह में झटके मार मार कर उसका मुंह चोदने लगता है..

कुछ देर रचना का मुंह चोदकर सूरज रचना को पीछे धकेल देता है ओर ब्लाउज को खोलने लगता है..

देवर जी बहुत दूध है मेरे बोबो में.. चूसके ख़त्म कर दो.. बच्चे के लिए भी मत छोड़ना देवर जी..

सूरज जैसे ही रचना का ब्लाउज ओर ब्रा उतारता है उसके सुडोल उठे हुए मोटे चुचे देखकर उनपर टूट पड़ता है ओर चूसने लगता है मगर उसे रचना के बूब्स पर एक टट्टू ओर तिल का निशान दीखता है तो उसे ऐसा लगता है की ऐसा निशान कहीं देखा है..

सूरज रचना का बोबा पकड़ कर ठीक से वो सब देखने लगता है फिर अपना फ़ोन निकाल कर कुछ देखता है..

क्या हुआ देवर जी क्या देख रहे हो.. आओ ना चुसो मेरे चुचे.. चुत में खुजली हो रही है मिटा दो देवर जी..

सूरज फ़ोन दिखा कर - ये आप ही हो ना भाभी..

रचना फ़ोन में कुछ देखकर - हनी ये..

सूरज रचना का चुचा पकड़ कर - झूठ मत बोलना भाभी.. आपका ये टट्टू ओर तिल दोनों मिल रहे है.. मास्क लगा के इंटरनेट ये सब कर रही हो आप..

रचना सूरज का लंड पकड़ के अपनी चुत में घुसाती हुई - मैं ही हूँ देवर जी.. ओर तुम शकल से तो बड़े सीधे लगते हो मगर ये सब भी देखते हो..

सूरज रचना की चुत में एक जोरदार झटका मारके अपना लंड घुसा देता है ओर रचना की अह्ह्ह निकल जाती है..

रचना सूरज को अपनी बाहों में खींचकर - आराम से देवर जी.. गुस्सा थूक दो..

हलके हलके चोदते हुए - कहा थूकू गुस्सा भाभी..

मेरे मुंह में थूक दो ना देवर जी.. लो.. आ..

सूरज रचना के मुंह में थूक देता है और पूछता है - नीलेश भईया जानते है इस बारे में कि आप इंटरनेट ओर ये सब करती हो?

हाँ.. वो सब जानते है देवर जी.. ये सब उनका ही किया धरा है.. अपनी कमाई पूरी नहीं पड़ती इसलिए मुझसे ये सब करवाते है..

बुआ?

अह्ह्ह.. उनसे मत कहना हनी.. वो नहीं जानती.. हनी.. थोड़ा तेज़ करो ना..

सूरज स्पीड बढ़ा देता है और झटके मारते हुए रचना के मुंह और गर्दन को अच्छे से चूमता चाटता है..

मुझे पता होता कि तुम बिस्तर में इतने अच्छे हो तो मैं कब कि तुमको अपना बना लेती देवर जी.. अह्ह्ह.. गुस्सा तो नहीं हो ना अपनी भाभी पर..

सूरज लंड निकालकर - गुस्सा तो बहुत हु भाभी आप पर.. मगर आपकी प्यारी प्यारी बातो से गुस्सा ठंडा हो जाता है.. भाभी घोड़ी बनो..

नहीं.. तुम गांड मारने लग जाओगे.. पहले ही दर्द हो रहा है..

अरे नहीं मारूंगा भाभी.. चलो बनो जल्दी..

पक्का ना देवर जी..

सूरज रचना कि कमर पकड़कर घोड़ी बनाता हुआ - पक्का भाभी..

रचना - आपका फ़ोन आ रहा है..

सूरज चुत में लंड पेलकर - किसका है उठा कर स्पीकर पर डाल दो भाभी..

रचना वैसा ही करती है..

सूरज हलके हलके झटके मारते हुए - हेलो..

कहाँ है बेटू? क्या कर रहा है?

कुछ नहीं माँ.. यही था..

तो कब से तुझे ढूंढ़ रही हूँ.. स्टेज पर आजा.. फॅमिली फोटोज खिचवानी है..

माँ थोड़ा वक़्त लगेगा.. जरुरी काम है एक..

ऐसा क्या जरुरी काम है तुझे हनी.. जल्दी आ..

माँ आ रहा हूँ थोड़ी देर में.. फ़ोन रख दो..

सूरज ये कहकर रचना के बाल पकड़ के तेज़ झटके मारने लगा तो रचना के मुंह अह्ह्ह.. आराम से.. मार डालोगे क्या? की आवाज निकल गई और फ़ोन कटने से पहले सुमित्रा ने रचना की ये बात सुन ली.. जिससे वो समझ गई सूरज क्या कर रहा है.. सुमित्रा एक दम से कामुक हो गई और सूरज और उस लड़की के बारे में सोचने लगी जिसकी आवाज उसने फ़ोन पर सुनी थी.. सुमित्रा नहीं जानती थी कि वो लड़की कौन है मगर उसे इतना पता चल गया था की सूरज किसी लड़की को चोद रहा है..



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ayush01111

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Update 7

अरे अरे कौन है तू? और अंदर कैसे चला आया?

वो आंटी मैं.. सो सॉरी.. मुझे पता नहीं था यहाँ कोई है..

गार्डन के एक कमरे मे रमन घुसा तो उसने देखा की एक 50 पार की महिला कमर से ऊपर पूरी तरह नंगी खड़ी हुई अपने कमरे बदल रही थी जो रमन के कमरे मे आने पर अपने हाथों की हथेलियों से अपने चूची को ढक कर रमन को देखने लगी और उसे गुस्से की निगाहो से देखते हुए बोली..

पता नहीं था या सबकुछ पता करके कमरे मे घुसा है? मैं अच्छे से जानती हु तुम जैसे आवारा लफंडर बदमाश लड़को को.. ना रिश्ता देखते हो ना उम्र.. तुम्हारी मा जैसी हूं.. चलो बाहर निकलो.. वरना चमाट खाओगे.. जाओ..

सॉरी आंटी.. माफ़ करना..

रमन बाहर चला जाता है और औरत अपने कपडे बदलने लगती है..

कुछ देर बाद रचना लचकते हुए उस कमरे मे आ जाती है और उस औरत से कहती है - क्या हुआ मम्मी जी?

कुछ नहीं रचना.. आज कल के लड़के भी ना.. ना उम्र देखते है ना समाज.. बस बेशर्म बनकर कुछ भी करने लगते है..

क्या हुआ मम्मी जी ऐसा क्यों बोल रही हो.. किसी ने प्रपोज़ कर दिया क्या आपको?

नहीं रे.. अभी कपडे बदलते वक़्त एक लड़का कमरे मे घुसा आया.. मैं तो शर्म से पानी पानी हो गई..

तो फिर कुछ हुआ क्या उस लड़के और आपके बीच मम्मी जी? बताओ ना?

तू भी बेशर्म हो गई है रचना.. भला मेरी उम्र है ये सब करने की? देख वो वहा जो लड़का है वही आया था.. मैं तो डांट कर भगा दिया..

रचना खिड़की से रमन को देखकर - ये.. मम्मी जी तो रमन है.. सूरज का दोस्त.. बहुत मालदार पार्टी है.. ये गार्डन इसी का तो है.. और भी बहुत सी प्रॉपर्टी है इसकी शहर मे.. बेचारा गलती से आया होगा.. आप भी ना मम्मी जी.. प्यार से जाने को कह देती डांटना जरुरी था? कितना हैंडसम है..

अनुराधा - रचना ये मत भूल तू शादीशुदा है.. और एक बच्चे की मा है.. ये मर्द देखकर तेरे मुँह मे जो पानी आता है ना सब जानती हूं मैं.. तेरी नियत तो हनी पर भी ठीक नहीं है.. अगर मुझे ऐसा वैसा कुछ पता चाला ना तो देख लेना..

रचना हस्ते हुए - मम्मी जी.. आप भी ना.. ना खुद बाहर की मिठाई खाती है ना मुझे खाने देती है.. अच्छा लो.. दो घूंट मार लो..

रचना अपने पर्स मे से एक वोटका का क्वाटर निकालकर अनुराधा के देती है और अनुराधा रचना के साथ मिलकर उस क्वार्टर को ख़त्म करते है दोनों सास बहु साथ मे इस तरह से पहले भी कई बार हलकी फुलकी शराब खोरी करते रहते थे और आज भी कर रहे थे.. दोनों पर सुरूर आ चूका था.. रचना तो अपनी गांड मे हो रहे हलके मीठे दर्द के साथ नाचने के लिए डांस फ्लोर पर चली गई मगर अनुराधा ने जब रमन को अकेला एक जगह बैठकर खाना खाते देखा तो वो कुछ सोच कर उसीके के पास चली गई..

तुम सूरज के दोस्त हो?

रमन ने साइड मे अनुराधा को खड़ा देखा तो झट से कुर्सी से खड़ा हो गया और बोला.. जी आंटी.. सॉरी वो गलती से आपके रूम मे आ गया..

कोई बात नहीं बेटा.. मैंने ही कुछ ज्यादा बोल दिया था तुम्हे.. मुझे लगा तुम कोई मनचले हो.. बैठो ना.. खाना खाते हुए उठा नहीं करते..

रमन वापस कुर्सी पर बैठ जाता है और अनुराधा भी रमन के बगल वाली कुर्सी पर बैठ जाती है..

ये गार्डन तुम्हारा है?

जी आंटी.. शहर मे काफी खानदानी जमीन थी तो पापा ने कई मैरिज हॉल और लोन बनाकर ये बिज़नेस शुरू किया था.. उनके बाद अब मैं ही इसे संभाल रहा हूं.. रमन ने खाना खाते हुए कहा..

ये तो बहुत अच्छी बात है.. अच्छा बेटा.. मेरे पोते का जन्मदिन है अगले महीने दस तारीख को.. छोटा सा प्रोग्राम करना था.. कोई छोटी जगह है?

जगह ही जगह है आंटी.. आप डेट बोलो मैं यही गार्डन बुक कर देता हूं..

अरे नहीं नहीं बेटा.. इतनी बड़ी जगह का क्या करना है.. मुश्किल से 100- 150 लोग आएंगे.. कोई छोटी जगह बताओ.. ये गार्डन तो महँगा लगता है..

अरे आंटी आप सूरज की रिश्तेदार हो.. आपके लिए क्या सस्ता क्या महँगा? वैसे आप सूरज की क्या लगती है?

मैं सूरज की बुआ हूं बेटा..

तो फिर आप मेरी भी बुआ हुई.. और आपका पोता मेरा भतीजा.. मैं अपनी बुआ और भतीजे के लिए इतना तो कर ही सकता हूं.. मैं सूरज से कह दूंगा जन्मदिन यही बनेगा.. आपको पैसे देने की जरुरत नहीं है.. रमन ने हस्ते हुए आखिरी लाइन कही तो अनुराधा के दिल मे रमन के लिए इज़्ज़त अचानक से बढ़ गईऔर रमन के प्रति अजीब सा खींचाव पनप गया.. अनुराधा पर शराब का सुरूर भी था उसने मुस्कुराते हुए रमन से कहा..

बेटा.. मुझे माफ़ करना.. मैंने तुझे गलत समझा.. तुम्हारी मा ने बहुत अच्छे संस्कार दिए है तुम्हे.. वो बहुत अच्छी होंगी..

रमन उदासी से भरी हुई मुस्कुहाट के साथ - हां.. वो सच मे बहुत अच्छी थी..

थी मतलब? अनुराधा ने हैरत से पूछा तो रमन ने जवाब दिया - आंटी वो मम्मी बहुत साल पहले भगवान के पास चली गई थी..

अनुराधा मे मन मे रमन के लिए मानो ये सुनकर मातृत्व का भाव जाग गया और अनुराधा ने रमन को गले लगाते हुए कहा - बेटा कभी कभी ऊपर वाला बड़ी कड़ी परीक्षा लेता है हम सबकी.. पर तुझे जब भी अपनी मा की याद आये तू मेरे पास मुझसे मिलने आ जाया कर..

अनुराधा के वातसल्य से रमन भाव विभोर हो गया और मुस्कुराते हुए अनुराधा से बोला.. थैंक्स आंटी..

आंटी नहीं बेटा.. बुआ.. तू भी तो मेरे लिए हनी की तरह है.. अच्छा अपना फ़ोन दे मैं नंबर देती हूं.. इस इतवार घर आना.. अपने हाथ से खाना बनाकर खिलाऊंगी तुझे..

रमन मुस्कुराते हुए - आप बहुत अच्छी हो आंटी.. सोरी बुआ..

अनुराधा कुछ देर और ठहर कर वहा से चली जाती है और कुछ देर बाद रमन जब सूरज से मिलकर वापस जाने लगता है तो किसी का कॉल आता है और रमन अपना फ़ोन देखकर गुस्से मे फ़ोन उठाता हुआ कहता है..

क्या है?

सामने सीख मीठी से आवाज मे लड़की जीज्ञासा के भाव से पूछती है- घर कब तक आओगे तुम?

रमन गुस्से मे - क्यों? मेरी शकल देखे बिना नींद नहीं आएगी तुझे?

मुझे कुछ बात करनी है तुमसे.. इसलिए पूछ रही थी.. मुझे भी शोख नहीं है सुबह शाम तुम्हारी शकल देखने का..

सुन.. तू ना मेरे बाप की रखैल थी.. और मेरे बाप ने तेरी माँ के और तेरे इश्क़ मे अपनी सारी जायदाद मुझे देने की जगह तेरे नाम कर दी.. इसलिए तुझे झेल रहा हूं.. बार बार फ़ोन करके परेशान किया ना तो अच्छा नहीं होगा..

नहीं तो क्या कर लोगे तुम.. एक बार नहीं सो बार फ़ोन करूँगी.. जल्दी घर आओ.. समझें? वरना ये जो ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हो ना.. सब छीन लुंगी.. और दुबारा रखैल कहकर बुलाया ना तो भिखारी बना दूंगी..

रमन गुस्से मे फ़ोन काट देता है और घर चाला जाता है..


***************


अंकुश - मम्मी मैं खाना ले आता हूँ..
नीतू - नहीं अक्कू तू बैठ मैं ले आती हूँ..
अंकुश माँ गोमती - अरे अकेली कैसे लायेगी नीतू.. अक्कू तू भी जा..
अंकुश - ठीक है माँ आप बैठो यही.. चल नीतू..
अंकुश और नीतू प्लेट लेकर खाना लेने चल देते है..

नीतू - वकील साहिबा का फोन आया था अभी..
अंकुश - क्या बोली?
नीतू - पूछ रही थी तेरा भाई अच्छा लगता है.. बॉयफ्रेंड बनेगा क्या? तुझे पसंद करती है वकील साहिबा..
अंकुश मुस्कुराते हुए - फिर तूने उसे बताना नहीं मुझे सिर्फ मेरी बहन पसंद है..
नीतू हसते हुए - क्या बताती? कि मेरा भाई बहनचोद है.. उसे बिस्तर मे सिर्फ उसकी बहन ही अच्छी लगती है..
अंकुश - वैसे तुझे जलन तो हुई होगी वकील साहिबा से.. सच बताना..
नीतू - जलन? मेरा तो मन किया साली के बाल पकड़ कर दो थप्पड़ लगा दूँ.. मेरे अक्कू पर नज़र रखती है कमीनी..
अंकुश - उफ्फ्फ मेरी झासी कि रानी.. एक बार घर चल.. आज रात तुझे सोने नहीं दूंगा..
नीतू मुस्कुराते हुए - सिर्फ एक कंडोम बचा हुआ है पैकेट में.. रातभर जगाना है तो और लगेंगे..
अंकुश - वो सब मैं देख लूंगा.. इतनी प्यारी लग रही है ना काले सूट में.. मन कर रहा है यही शुरू हो जाऊ..
नीतू हसते हुए - पहले खाना खा ले.. चल.. और वकील साहिबा ने कुछ और भी कहा था..
अंकुश - क्या?
नीतू - जोगिंदर मेरी शर्त मान गया है.. समझौता करना चाहता है.. 13 तक देने को तैयार है..
अंकुश - ती तू क्या चाहती है?
नीतू - क्या चाहूंगी? पैसे ले लुंगी और क्या? तुझे अपना काम शुरू करने के लिए जरुरत भी तो थी पैसो की.. तूने कहा था ना तुझे नोकरी नहीं करनी..
अंकुश - मुझे पैसे देगी?
नीतू - क्यों बड़ी बहन हूँ तेरी.. और होने वाली बीवी भी.. इतनी मदद कर ही सकती हूँ..
अंकुश - लगता है आज रात पलंग टूटने वाला है.. कल फिर से ठीक करवाना पड़ेगा..
नीतू हसते हुए - गद्दा फर्श पर डाल लुंगी.. बार बार पलंग कैसे टूट जाता है मम्मी पूछती है तो जवाब देते नहीं बनता..
अंकुश - साफ साफ बोल दिया कर ना.. भाई बहन के प्यार मे पलंग को नुक्सान तो होगा ही..
नीतू मुस्कुराते हुए - कमीने.. अब चल..
अंकुश नीतू खाना लेकर वापस अपनी माँ गोमती के पास आ जाते है और खाना खाने लगते है..


*************


हनी.. हनी..
क्या हाल है अक्कू.. नमस्ते आंटी.. कैसी हो नीतू
दीदी?
गोमती - नमस्ते बेटा..
नीतू - क्या बात है हनी.. कहा गायब थे अब तक? दिखे नहीं..
सूरज - काम में बिजी था.. किसी से नहीं मिल पाया..
अंकुश - हीरो लग रहा है सूट में.. अच्छा है.. तुझे टीशर्ट लोवर में देख देख मुझे टीशर्ट लोवर से नफरत हो गई थी..
सूरज - देखो बोल कौन रहा है.. सज धज के तू भी ऐसे आया है जैसे तेरी सगाई हो..
अंकुश नीतू को देखकर - मेरी दुल्हन तो तैयार है.. चाहु तो विनोद भईया के साथ साथ मैं भी सगाई कर सकता हूँ.. वैसे बिल्ला पूछ रहा था तेरे बारे में..
सूरज - कहा है वो?
अंकुश - थोड़ी देर पहले यही था नज़मा भाभी के साथ.. वो रहा.. आइसक्रीम वाली स्टाल के पास..
सूरज - ठीक है अक्कू मैं मिलके आता हूँ..
अंकुश - ठीक है ब्रो. वैसे खाना अच्छा बनाया है तेरे साले ने..
सूरज हसते हुए - साथ में नेहा भाभी थी ना..


***********


क्या हाल है बिल्ले..
बस हनी..
सूरज - खाना हो गया?
बिलाल - हाँ.. तेरी भाभी को आइसक्रीम पसंद है तो आइसक्रीम खाने यहां आ गए..
सूरज - अच्छा है.. भईया भाभी से मिले ना..
बिलाल - हाँ.. आते ही मिले थे.. अब तो जा ही रहे थे.. तुझे फ़ोन भी क्या पर तूने उठाया नहीं..
सूरज - भाई कई लोगों ने फ़ोन किया था पर साइलेंट था इसलिए उठा नहीं पाया किसी का भी..
नज़मा - सूट में बहुत प्यारे लग रहे हो भाईजान..
सूरज नज़मा को देखकर - शुक्रिया भाभी..
बिलाल - अच्छा तुम दोनों बात करो मैं बाथरूम जाकर आता हूँ..
बिलाल चला जाता है नज़मा सूरज को आइसक्रीम खाने को कहती है तो सूरज नज़मा के होंठो पर लगी हलकी सी आइसक्रीम अपनी ऊँगली से इधर उधर देखकर खाते हुए कहता है - भाभी बिलाल से कहना मैं तैयार हूँ.. बस ये बात किसी को पता ना चले..
नज़मा शरमाते हुए - शुक्रिया भाईजान..
सूरज - भाभी भाईजान मत बोलो प्लीज..
नज़मा शरमाते हुए नज़र झुका लेती है और कहती है - तो क्या कहु आपको..
सूरज - सूरज कहो ना भाभी.. आपके गुलाबी होंठो से अच्छा लगेगा सुनने में..
नज़मा इस बार कुछ नहीं बोलती और चुपचाप खड़ी रहती है जब तक बिलाल नहीं आ जाता.. और बिलाल आने के बाद सूरज कहता है - बिल्ले.. मैं बाकी लोगों से मिल लेता हूँ..
बिलाल - ठीक है हनी.. अब हम चलते है.. बहुत सही फंक्शन हुआ है..
सूरज - मैं किसी से कह दू छोड़ने के लिए?
बिलाल - अरे पास में ही तो घर है.. चलके चले जाएंगे.. चल ठीक है भाई..
सूरज - ठीक है बिल्ले.. भाभी का ख्याल रखना..
नज़मा - आप अपना ख्याल रखना भाईजान..


*************


सूरज बिल्ले के पास से जब वापस आने लगता है तो कोई उसका हाथ पकड़ लेता है और कहता है - बड़ी जल्दी में हो.. कहाँ जा रहे हो?

सूरज मुड़कर किसीका चेहरा देखता है फिर कहता है - कैसी हो दी... काकी कैसी हो?
बरखा - तुम तो घर छोड़ने के बाद गायब ही हो गए.. मिलने भी नहीं अपनी दीदी से.. और माँ बता रही थी तुम्हरी करतूतों के बारे में.. बहुत बिगड़ गए हो मेरे जाने के बाद..
हेमलता - आज पहली बार अच्छे कपड़ो में देखा है.. तु तो कोई फ़िल्मी हीरो लगता है हनी..
बरखा - वो तो है माँ.. बस आदत थोड़ी खराब इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - काकी आप बहुत अच्छी लग रही हो इस शाडी में.. काका को तो दौरा आ गया होगा..
हेमलता - देखा बरखा.. तेरा स्टूडेंट की कैसे केची की तरह जुबान चलने लगी है..
बरखा सूरज के होंठ पकड़कर - लगता है माँ... जबान कुतरनी पड़ेगी इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - दी.. अब मुझे डंडे से डर नहीं लगता..
बरखा - थप्पड़ से तो लगता है ना.. इस चाँद से चेहरे पर ग्रहण लगा दूंगी बच्चू..
सूरज हसते हुए - काका कहा है?
हेमलता - ये तू बता.. कहा है वो..
सूरज - मुझे क्या पता? उस रात के बाद मैंने बात भी नहीं की काका से..
हेमलता - अगर पता चला वो तेरे साथ है तो सुमित्रा से तेरी शिकायत कर दूंगी.. याद रखना..
सूरज - आपकी कसम काकी उस रात के बाद नहीं मिला बंसी काका से.. दी.. सच में..
बरखा - ठीक है हम जा ही रहे थे..
सूरज - इतनी जल्दी?
बरखा - साढ़े नो बजने वाले है.. आठ बजे के आये हुए थे.. सब से मिल लिया.. एक तू बाकी था बस..
सूरज - मैं घर छोड़ देता हूँ..
बरखा - रहने दे मैं स्कूटी लाई हूँ.. तू अपना ख्याल रख... आज बहुत प्यारा लग रहा है.. किसी नज़र ना लग जाए..
हेमलता - सच कहा बरखा.. हनी एक काला टिका लगा ही ले..
सूरज हसते हुए - काकी काला सूट पहना है और क्या काले की कमी है..
हेमलता - काका मिले तो बोलना काकी घर पर बुला रही है..
सूरज - वो तो आपके डर से ही कहीं गायब होंगे.. आ जाएंगे..
बरखा - अच्छा तू घर आना.. बात करेंगे बैठ कर..
सूरज - ठीक है दी...
बरखा और हेमलता भी चले जाते है सूरज स्टेज की तरफ देखता जहाँ से एक नज़रे सीधा उसे खा जाने वाली नज़रो से देखने लगती है..


सूरज देखता है कि गरिमा उसे ही देखे जा रही थी और वो खा जाने वाली आँखों से ही देख रही थी.. गरिमा दो घंटे से स्टेज पर थी अंगूठी की रस्म हो चुकी थी.. और सूरज अब तक गरिमा से नहीं मिला था.. सूरज नज़र बचाकर वहा से कहीं चला जाता है.. गरिमा फिर से सामने की भीड़ में उसे तलाश करने लगती है.. गरिमा का मन अव्यवस्थित था वो मन ही मन सूरज पर गुस्सा कर रही थी और सोच रही थी कि सूरज अब तक उसे मिलने क्यों नहीं आया..

सूरज का लंड फिर से खड़ा होने लगा था और वो समझ नहीं पास रहा था कि उसका क्या करें? सूरज खड़े लंड के साथ किसी से नहीं मिल सकता था.. उसने एक बार अपने लंड को हिलाने की सोची मगर फिर उसकी नज़र किसी पड़ी तो उसे गुस्से से देखने लगा और उसकी ओर बढ़ गया..

क्या हुआ देवर जी.. कुछ परेशान हो आप..
भाभी मेरे साथ चलो..
कहा ले जाओगे देवर जी अपनी भाभी को?
चलो ना..
सूरज रचना को अपने साथ गार्डन के एक होने में बनी तीन मंज़िला बिल्डिंग में ले जाता है जहाँ हर मंज़िल पर 4 कमरे थे..
सूरज तीसरी मंज़िल के लास्ट वाले कमरे में रचना को ले आता है ओर दरवाजा बंद होते ही रचना कहती है..
देवर जी घोड़ी नहीं बनुँगी.. अब भी दर्द और जलन है..

आप पर गुस्सा आ रहा है भाभी.. देखो बार बार खड़ा हो रहा है.. अब शांत करो इसको..

कर देती हूं देवर जी.. ये कहते हुए रचना सूरज के लंड को बाहर निकालकर मुंह भर लेटी है ओर जोर जोर से चूसने लगती है.. सूरज रचना को देखकर अब उसके अपनी भाभी होने का ख्याल ओर जो वो कर रहा है ये सब गलत होने का ख्याल छोड़ देता है.. सूरज कामुकता से भर जाता है ओर रचना के बाल पकड़ कर उसके मुंह में झटके मार मार कर उसका मुंह चोदने लगता है..

कुछ देर रचना का मुंह चोदकर सूरज रचना को पीछे धकेल देता है ओर ब्लाउज को खोलने लगता है..

देवर जी बहुत दूध है मेरे बोबो में.. चूसके ख़त्म कर दो.. बच्चे के लिए भी मत छोड़ना देवर जी..

सूरज जैसे ही रचना का ब्लाउज ओर ब्रा उतारता है उसके सुडोल उठे हुए मोटे चुचे देखकर उनपर टूट पड़ता है ओर चूसने लगता है मगर उसे रचना के बूब्स पर एक टट्टू ओर तिल का निशान दीखता है तो उसे ऐसा लगता है की ऐसा निशान कहीं देखा है..

सूरज रचना का बोबा पकड़ कर ठीक से वो सब देखने लगता है फिर अपना फ़ोन निकाल कर कुछ देखता है..

क्या हुआ देवर जी क्या देख रहे हो.. आओ ना चुसो मेरे चुचे.. चुत में खुजली हो रही है मिटा दो देवर जी..

सूरज फ़ोन दिखा कर - ये आप ही हो ना भाभी..

रचना फ़ोन में कुछ देखकर - हनी ये..

सूरज रचना का चुचा पकड़ कर - झूठ मत बोलना भाभी.. आपका ये टट्टू ओर तिल दोनों मिल रहे है.. मास्क लगा के इंटरनेट ये सब कर रही हो आप..

रचना सूरज का लंड पकड़ के अपनी चुत में घुसाती हुई - मैं ही हूँ देवर जी.. ओर तुम शकल से तो बड़े सीधे लगते हो मगर ये सब भी देखते हो..

सूरज रचना की चुत में एक जोरदार झटका मारके अपना लंड घुसा देता है ओर रचना की अह्ह्ह निकल जाती है..

रचना सूरज को अपनी बाहों में खींचकर - आराम से देवर जी.. गुस्सा थूक दो..

हलके हलके चोदते हुए - कहा थूकू गुस्सा भाभी..

मेरे मुंह में थूक दो ना देवर जी.. लो.. आ..

सूरज रचना के मुंह में थूक देता है और पूछता है - नीलेश भईया जानते है इस बारे में कि आप इंटरनेट ओर ये सब करती हो?

हाँ.. वो सब जानते है देवर जी.. ये सब उनका ही किया धरा है.. अपनी कमाई पूरी नहीं पड़ती इसलिए मुझसे ये सब करवाते है..

बुआ?

अह्ह्ह.. उनसे मत कहना हनी.. वो नहीं जानती.. हनी.. थोड़ा तेज़ करो ना..

सूरज स्पीड बढ़ा देता है और झटके मारते हुए रचना के मुंह और गर्दन को अच्छे से चूमता चाटता है..

मुझे पता होता कि तुम बिस्तर में इतने अच्छे हो तो मैं कब कि तुमको अपना बना लेती देवर जी.. अह्ह्ह.. गुस्सा तो नहीं हो ना अपनी भाभी पर..

सूरज लंड निकालकर - गुस्सा तो बहुत हु भाभी आप पर.. मगर आपकी प्यारी प्यारी बातो से गुस्सा ठंडा हो जाता है.. भाभी घोड़ी बनो..

नहीं.. तुम गांड मारने लग जाओगे.. पहले ही दर्द हो रहा है..

अरे नहीं मारूंगा भाभी.. चलो बनो जल्दी..

पक्का ना देवर जी..

सूरज रचना कि कमर पकड़कर घोड़ी बनाता हुआ - पक्का भाभी..

रचना - आपका फ़ोन आ रहा है..

सूरज चुत में लंड पेलकर - किसका है उठा कर स्पीकर पर डाल दो भाभी..

रचना वैसा ही करती है..

सूरज हलके हलके झटके मारते हुए - हेलो..

कहाँ है बेटू? क्या कर रहा है?

कुछ नहीं माँ.. यही था..

तो कब से तुझे ढूंढ़ रही हूँ.. स्टेज पर आजा.. फॅमिली फोटोज खिचवानी है..

माँ थोड़ा वक़्त लगेगा.. जरुरी काम है एक..

ऐसा क्या जरुरी काम है तुझे हनी.. जल्दी आ..

माँ आ रहा हूँ थोड़ी देर में.. फ़ोन रख दो..

सूरज ये कहकर रचना के बाल पकड़ के तेज़ झटके मारने लगा तो रचना के मुंह अह्ह्ह.. आराम से.. मार डालोगे क्या? की आवाज निकल गई और फ़ोन कटने से पहले सुमित्रा ने रचना की ये बात सुन ली.. जिससे वो समझ गई सूरज क्या कर रहा है.. सुमित्रा एक दम से कामुक हो गई और सूरज और उस लड़की के बारे में सोचने लगी जिसकी आवाज उसने फ़ोन पर सुनी थी.. सुमित्रा नहीं जानती थी कि वो लड़की कौन है मगर उसे इतना पता चल गया था की सूरज किसी लड़की को चोद रहा है..



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meerkhan

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अरे अरे कौन है तू? और अंदर कैसे चला आया?

वो आंटी मैं.. सो सॉरी.. मुझे पता नहीं था यहाँ कोई है..

गार्डन के एक कमरे मे रमन घुसा तो उसने देखा की एक 50 पार की महिला कमर से ऊपर पूरी तरह नंगी खड़ी हुई अपने कमरे बदल रही थी जो रमन के कमरे मे आने पर अपने हाथों की हथेलियों से अपने चूची को ढक कर रमन को देखने लगी और उसे गुस्से की निगाहो से देखते हुए बोली..

पता नहीं था या सबकुछ पता करके कमरे मे घुसा है? मैं अच्छे से जानती हु तुम जैसे आवारा लफंडर बदमाश लड़को को.. ना रिश्ता देखते हो ना उम्र.. तुम्हारी मा जैसी हूं.. चलो बाहर निकलो.. वरना चमाट खाओगे.. जाओ..

सॉरी आंटी.. माफ़ करना..

रमन बाहर चला जाता है और औरत अपने कपडे बदलने लगती है..

कुछ देर बाद रचना लचकते हुए उस कमरे मे आ जाती है और उस औरत से कहती है - क्या हुआ मम्मी जी?

कुछ नहीं रचना.. आज कल के लड़के भी ना.. ना उम्र देखते है ना समाज.. बस बेशर्म बनकर कुछ भी करने लगते है..

क्या हुआ मम्मी जी ऐसा क्यों बोल रही हो.. किसी ने प्रपोज़ कर दिया क्या आपको?

नहीं रे.. अभी कपडे बदलते वक़्त एक लड़का कमरे मे घुसा आया.. मैं तो शर्म से पानी पानी हो गई..

तो फिर कुछ हुआ क्या उस लड़के और आपके बीच मम्मी जी? बताओ ना?

तू भी बेशर्म हो गई है रचना.. भला मेरी उम्र है ये सब करने की? देख वो वहा जो लड़का है वही आया था.. मैं तो डांट कर भगा दिया..

रचना खिड़की से रमन को देखकर - ये.. मम्मी जी तो रमन है.. सूरज का दोस्त.. बहुत मालदार पार्टी है.. ये गार्डन इसी का तो है.. और भी बहुत सी प्रॉपर्टी है इसकी शहर मे.. बेचारा गलती से आया होगा.. आप भी ना मम्मी जी.. प्यार से जाने को कह देती डांटना जरुरी था? कितना हैंडसम है..

अनुराधा - रचना ये मत भूल तू शादीशुदा है.. और एक बच्चे की मा है.. ये मर्द देखकर तेरे मुँह मे जो पानी आता है ना सब जानती हूं मैं.. तेरी नियत तो हनी पर भी ठीक नहीं है.. अगर मुझे ऐसा वैसा कुछ पता चाला ना तो देख लेना..

रचना हस्ते हुए - मम्मी जी.. आप भी ना.. ना खुद बाहर की मिठाई खाती है ना मुझे खाने देती है.. अच्छा लो.. दो घूंट मार लो..

रचना अपने पर्स मे से एक वोटका का क्वाटर निकालकर अनुराधा के देती है और अनुराधा रचना के साथ मिलकर उस क्वार्टर को ख़त्म करते है दोनों सास बहु साथ मे इस तरह से पहले भी कई बार हलकी फुलकी शराब खोरी करते रहते थे और आज भी कर रहे थे.. दोनों पर सुरूर आ चूका था.. रचना तो अपनी गांड मे हो रहे हलके मीठे दर्द के साथ नाचने के लिए डांस फ्लोर पर चली गई मगर अनुराधा ने जब रमन को अकेला एक जगह बैठकर खाना खाते देखा तो वो कुछ सोच कर उसीके के पास चली गई..

तुम सूरज के दोस्त हो?

रमन ने साइड मे अनुराधा को खड़ा देखा तो झट से कुर्सी से खड़ा हो गया और बोला.. जी आंटी.. सॉरी वो गलती से आपके रूम मे आ गया..

कोई बात नहीं बेटा.. मैंने ही कुछ ज्यादा बोल दिया था तुम्हे.. मुझे लगा तुम कोई मनचले हो.. बैठो ना.. खाना खाते हुए उठा नहीं करते..

रमन वापस कुर्सी पर बैठ जाता है और अनुराधा भी रमन के बगल वाली कुर्सी पर बैठ जाती है..

ये गार्डन तुम्हारा है?

जी आंटी.. शहर मे काफी खानदानी जमीन थी तो पापा ने कई मैरिज हॉल और लोन बनाकर ये बिज़नेस शुरू किया था.. उनके बाद अब मैं ही इसे संभाल रहा हूं.. रमन ने खाना खाते हुए कहा..

ये तो बहुत अच्छी बात है.. अच्छा बेटा.. मेरे पोते का जन्मदिन है अगले महीने दस तारीख को.. छोटा सा प्रोग्राम करना था.. कोई छोटी जगह है?

जगह ही जगह है आंटी.. आप डेट बोलो मैं यही गार्डन बुक कर देता हूं..

अरे नहीं नहीं बेटा.. इतनी बड़ी जगह का क्या करना है.. मुश्किल से 100- 150 लोग आएंगे.. कोई छोटी जगह बताओ.. ये गार्डन तो महँगा लगता है..

अरे आंटी आप सूरज की रिश्तेदार हो.. आपके लिए क्या सस्ता क्या महँगा? वैसे आप सूरज की क्या लगती है?

मैं सूरज की बुआ हूं बेटा..

तो फिर आप मेरी भी बुआ हुई.. और आपका पोता मेरा भतीजा.. मैं अपनी बुआ और भतीजे के लिए इतना तो कर ही सकता हूं.. मैं सूरज से कह दूंगा जन्मदिन यही बनेगा.. आपको पैसे देने की जरुरत नहीं है.. रमन ने हस्ते हुए आखिरी लाइन कही तो अनुराधा के दिल मे रमन के लिए इज़्ज़त अचानक से बढ़ गईऔर रमन के प्रति अजीब सा खींचाव पनप गया.. अनुराधा पर शराब का सुरूर भी था उसने मुस्कुराते हुए रमन से कहा..

बेटा.. मुझे माफ़ करना.. मैंने तुझे गलत समझा.. तुम्हारी मा ने बहुत अच्छे संस्कार दिए है तुम्हे.. वो बहुत अच्छी होंगी..

रमन उदासी से भरी हुई मुस्कुहाट के साथ - हां.. वो सच मे बहुत अच्छी थी..

थी मतलब? अनुराधा ने हैरत से पूछा तो रमन ने जवाब दिया - आंटी वो मम्मी बहुत साल पहले भगवान के पास चली गई थी..

अनुराधा मे मन मे रमन के लिए मानो ये सुनकर मातृत्व का भाव जाग गया और अनुराधा ने रमन को गले लगाते हुए कहा - बेटा कभी कभी ऊपर वाला बड़ी कड़ी परीक्षा लेता है हम सबकी.. पर तुझे जब भी अपनी मा की याद आये तू मेरे पास मुझसे मिलने आ जाया कर..

अनुराधा के वातसल्य से रमन भाव विभोर हो गया और मुस्कुराते हुए अनुराधा से बोला.. थैंक्स आंटी..

आंटी नहीं बेटा.. बुआ.. तू भी तो मेरे लिए हनी की तरह है.. अच्छा अपना फ़ोन दे मैं नंबर देती हूं.. इस इतवार घर आना.. अपने हाथ से खाना बनाकर खिलाऊंगी तुझे..

रमन मुस्कुराते हुए - आप बहुत अच्छी हो आंटी.. सोरी बुआ..

अनुराधा कुछ देर और ठहर कर वहा से चली जाती है और कुछ देर बाद रमन जब सूरज से मिलकर वापस जाने लगता है तो किसी का कॉल आता है और रमन अपना फ़ोन देखकर गुस्से मे फ़ोन उठाता हुआ कहता है..

क्या है?

सामने सीख मीठी से आवाज मे लड़की जीज्ञासा के भाव से पूछती है- घर कब तक आओगे तुम?

रमन गुस्से मे - क्यों? मेरी शकल देखे बिना नींद नहीं आएगी तुझे?

मुझे कुछ बात करनी है तुमसे.. इसलिए पूछ रही थी.. मुझे भी शोख नहीं है सुबह शाम तुम्हारी शकल देखने का..

सुन.. तू ना मेरे बाप की रखैल थी.. और मेरे बाप ने तेरी माँ के और तेरे इश्क़ मे अपनी सारी जायदाद मुझे देने की जगह तेरे नाम कर दी.. इसलिए तुझे झेल रहा हूं.. बार बार फ़ोन करके परेशान किया ना तो अच्छा नहीं होगा..

नहीं तो क्या कर लोगे तुम.. एक बार नहीं सो बार फ़ोन करूँगी.. जल्दी घर आओ.. समझें? वरना ये जो ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हो ना.. सब छीन लुंगी.. और दुबारा रखैल कहकर बुलाया ना तो भिखारी बना दूंगी..

रमन गुस्से मे फ़ोन काट देता है और घर चाला जाता है..


***************


अंकुश - मम्मी मैं खाना ले आता हूँ..
नीतू - नहीं अक्कू तू बैठ मैं ले आती हूँ..
अंकुश माँ गोमती - अरे अकेली कैसे लायेगी नीतू.. अक्कू तू भी जा..
अंकुश - ठीक है माँ आप बैठो यही.. चल नीतू..
अंकुश और नीतू प्लेट लेकर खाना लेने चल देते है..

नीतू - वकील साहिबा का फोन आया था अभी..
अंकुश - क्या बोली?
नीतू - पूछ रही थी तेरा भाई अच्छा लगता है.. बॉयफ्रेंड बनेगा क्या? तुझे पसंद करती है वकील साहिबा..
अंकुश मुस्कुराते हुए - फिर तूने उसे बताना नहीं मुझे सिर्फ मेरी बहन पसंद है..
नीतू हसते हुए - क्या बताती? कि मेरा भाई बहनचोद है.. उसे बिस्तर मे सिर्फ उसकी बहन ही अच्छी लगती है..
अंकुश - वैसे तुझे जलन तो हुई होगी वकील साहिबा से.. सच बताना..
नीतू - जलन? मेरा तो मन किया साली के बाल पकड़ कर दो थप्पड़ लगा दूँ.. मेरे अक्कू पर नज़र रखती है कमीनी..
अंकुश - उफ्फ्फ मेरी झासी कि रानी.. एक बार घर चल.. आज रात तुझे सोने नहीं दूंगा..
नीतू मुस्कुराते हुए - सिर्फ एक कंडोम बचा हुआ है पैकेट में.. रातभर जगाना है तो और लगेंगे..
अंकुश - वो सब मैं देख लूंगा.. इतनी प्यारी लग रही है ना काले सूट में.. मन कर रहा है यही शुरू हो जाऊ..
नीतू हसते हुए - पहले खाना खा ले.. चल.. और वकील साहिबा ने कुछ और भी कहा था..
अंकुश - क्या?
नीतू - जोगिंदर मेरी शर्त मान गया है.. समझौता करना चाहता है.. 13 तक देने को तैयार है..
अंकुश - ती तू क्या चाहती है?
नीतू - क्या चाहूंगी? पैसे ले लुंगी और क्या? तुझे अपना काम शुरू करने के लिए जरुरत भी तो थी पैसो की.. तूने कहा था ना तुझे नोकरी नहीं करनी..
अंकुश - मुझे पैसे देगी?
नीतू - क्यों बड़ी बहन हूँ तेरी.. और होने वाली बीवी भी.. इतनी मदद कर ही सकती हूँ..
अंकुश - लगता है आज रात पलंग टूटने वाला है.. कल फिर से ठीक करवाना पड़ेगा..
नीतू हसते हुए - गद्दा फर्श पर डाल लुंगी.. बार बार पलंग कैसे टूट जाता है मम्मी पूछती है तो जवाब देते नहीं बनता..
अंकुश - साफ साफ बोल दिया कर ना.. भाई बहन के प्यार मे पलंग को नुक्सान तो होगा ही..
नीतू मुस्कुराते हुए - कमीने.. अब चल..
अंकुश नीतू खाना लेकर वापस अपनी माँ गोमती के पास आ जाते है और खाना खाने लगते है..


*************


हनी.. हनी..
क्या हाल है अक्कू.. नमस्ते आंटी.. कैसी हो नीतू
दीदी?
गोमती - नमस्ते बेटा..
नीतू - क्या बात है हनी.. कहा गायब थे अब तक? दिखे नहीं..
सूरज - काम में बिजी था.. किसी से नहीं मिल पाया..
अंकुश - हीरो लग रहा है सूट में.. अच्छा है.. तुझे टीशर्ट लोवर में देख देख मुझे टीशर्ट लोवर से नफरत हो गई थी..
सूरज - देखो बोल कौन रहा है.. सज धज के तू भी ऐसे आया है जैसे तेरी सगाई हो..
अंकुश नीतू को देखकर - मेरी दुल्हन तो तैयार है.. चाहु तो विनोद भईया के साथ साथ मैं भी सगाई कर सकता हूँ.. वैसे बिल्ला पूछ रहा था तेरे बारे में..
सूरज - कहा है वो?
अंकुश - थोड़ी देर पहले यही था नज़मा भाभी के साथ.. वो रहा.. आइसक्रीम वाली स्टाल के पास..
सूरज - ठीक है अक्कू मैं मिलके आता हूँ..
अंकुश - ठीक है ब्रो. वैसे खाना अच्छा बनाया है तेरे साले ने..
सूरज हसते हुए - साथ में नेहा भाभी थी ना..


***********


क्या हाल है बिल्ले..
बस हनी..
सूरज - खाना हो गया?
बिलाल - हाँ.. तेरी भाभी को आइसक्रीम पसंद है तो आइसक्रीम खाने यहां आ गए..
सूरज - अच्छा है.. भईया भाभी से मिले ना..
बिलाल - हाँ.. आते ही मिले थे.. अब तो जा ही रहे थे.. तुझे फ़ोन भी क्या पर तूने उठाया नहीं..
सूरज - भाई कई लोगों ने फ़ोन किया था पर साइलेंट था इसलिए उठा नहीं पाया किसी का भी..
नज़मा - सूट में बहुत प्यारे लग रहे हो भाईजान..
सूरज नज़मा को देखकर - शुक्रिया भाभी..
बिलाल - अच्छा तुम दोनों बात करो मैं बाथरूम जाकर आता हूँ..
बिलाल चला जाता है नज़मा सूरज को आइसक्रीम खाने को कहती है तो सूरज नज़मा के होंठो पर लगी हलकी सी आइसक्रीम अपनी ऊँगली से इधर उधर देखकर खाते हुए कहता है - भाभी बिलाल से कहना मैं तैयार हूँ.. बस ये बात किसी को पता ना चले..
नज़मा शरमाते हुए - शुक्रिया भाईजान..
सूरज - भाभी भाईजान मत बोलो प्लीज..
नज़मा शरमाते हुए नज़र झुका लेती है और कहती है - तो क्या कहु आपको..
सूरज - सूरज कहो ना भाभी.. आपके गुलाबी होंठो से अच्छा लगेगा सुनने में..
नज़मा इस बार कुछ नहीं बोलती और चुपचाप खड़ी रहती है जब तक बिलाल नहीं आ जाता.. और बिलाल आने के बाद सूरज कहता है - बिल्ले.. मैं बाकी लोगों से मिल लेता हूँ..
बिलाल - ठीक है हनी.. अब हम चलते है.. बहुत सही फंक्शन हुआ है..
सूरज - मैं किसी से कह दू छोड़ने के लिए?
बिलाल - अरे पास में ही तो घर है.. चलके चले जाएंगे.. चल ठीक है भाई..
सूरज - ठीक है बिल्ले.. भाभी का ख्याल रखना..
नज़मा - आप अपना ख्याल रखना भाईजान..


*************


सूरज बिल्ले के पास से जब वापस आने लगता है तो कोई उसका हाथ पकड़ लेता है और कहता है - बड़ी जल्दी में हो.. कहाँ जा रहे हो?

सूरज मुड़कर किसीका चेहरा देखता है फिर कहता है - कैसी हो दी... काकी कैसी हो?
बरखा - तुम तो घर छोड़ने के बाद गायब ही हो गए.. मिलने भी नहीं अपनी दीदी से.. और माँ बता रही थी तुम्हरी करतूतों के बारे में.. बहुत बिगड़ गए हो मेरे जाने के बाद..
हेमलता - आज पहली बार अच्छे कपड़ो में देखा है.. तु तो कोई फ़िल्मी हीरो लगता है हनी..
बरखा - वो तो है माँ.. बस आदत थोड़ी खराब इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - काकी आप बहुत अच्छी लग रही हो इस शाडी में.. काका को तो दौरा आ गया होगा..
हेमलता - देखा बरखा.. तेरा स्टूडेंट की कैसे केची की तरह जुबान चलने लगी है..
बरखा सूरज के होंठ पकड़कर - लगता है माँ... जबान कुतरनी पड़ेगी इसकी..
सूरज मुस्कुराते हुए - दी.. अब मुझे डंडे से डर नहीं लगता..
बरखा - थप्पड़ से तो लगता है ना.. इस चाँद से चेहरे पर ग्रहण लगा दूंगी बच्चू..
सूरज हसते हुए - काका कहा है?
हेमलता - ये तू बता.. कहा है वो..
सूरज - मुझे क्या पता? उस रात के बाद मैंने बात भी नहीं की काका से..
हेमलता - अगर पता चला वो तेरे साथ है तो सुमित्रा से तेरी शिकायत कर दूंगी.. याद रखना..
सूरज - आपकी कसम काकी उस रात के बाद नहीं मिला बंसी काका से.. दी.. सच में..
बरखा - ठीक है हम जा ही रहे थे..
सूरज - इतनी जल्दी?
बरखा - साढ़े नो बजने वाले है.. आठ बजे के आये हुए थे.. सब से मिल लिया.. एक तू बाकी था बस..
सूरज - मैं घर छोड़ देता हूँ..
बरखा - रहने दे मैं स्कूटी लाई हूँ.. तू अपना ख्याल रख... आज बहुत प्यारा लग रहा है.. किसी नज़र ना लग जाए..
हेमलता - सच कहा बरखा.. हनी एक काला टिका लगा ही ले..
सूरज हसते हुए - काकी काला सूट पहना है और क्या काले की कमी है..
हेमलता - काका मिले तो बोलना काकी घर पर बुला रही है..
सूरज - वो तो आपके डर से ही कहीं गायब होंगे.. आ जाएंगे..
बरखा - अच्छा तू घर आना.. बात करेंगे बैठ कर..
सूरज - ठीक है दी...
बरखा और हेमलता भी चले जाते है सूरज स्टेज की तरफ देखता जहाँ से एक नज़रे सीधा उसे खा जाने वाली नज़रो से देखने लगती है..


सूरज देखता है कि गरिमा उसे ही देखे जा रही थी और वो खा जाने वाली आँखों से ही देख रही थी.. गरिमा दो घंटे से स्टेज पर थी अंगूठी की रस्म हो चुकी थी.. और सूरज अब तक गरिमा से नहीं मिला था.. सूरज नज़र बचाकर वहा से कहीं चला जाता है.. गरिमा फिर से सामने की भीड़ में उसे तलाश करने लगती है.. गरिमा का मन अव्यवस्थित था वो मन ही मन सूरज पर गुस्सा कर रही थी और सोच रही थी कि सूरज अब तक उसे मिलने क्यों नहीं आया..

सूरज का लंड फिर से खड़ा होने लगा था और वो समझ नहीं पास रहा था कि उसका क्या करें? सूरज खड़े लंड के साथ किसी से नहीं मिल सकता था.. उसने एक बार अपने लंड को हिलाने की सोची मगर फिर उसकी नज़र किसी पड़ी तो उसे गुस्से से देखने लगा और उसकी ओर बढ़ गया..

क्या हुआ देवर जी.. कुछ परेशान हो आप..
भाभी मेरे साथ चलो..
कहा ले जाओगे देवर जी अपनी भाभी को?
चलो ना..
सूरज रचना को अपने साथ गार्डन के एक होने में बनी तीन मंज़िला बिल्डिंग में ले जाता है जहाँ हर मंज़िल पर 4 कमरे थे..
सूरज तीसरी मंज़िल के लास्ट वाले कमरे में रचना को ले आता है ओर दरवाजा बंद होते ही रचना कहती है..
देवर जी घोड़ी नहीं बनुँगी.. अब भी दर्द और जलन है..

आप पर गुस्सा आ रहा है भाभी.. देखो बार बार खड़ा हो रहा है.. अब शांत करो इसको..

कर देती हूं देवर जी.. ये कहते हुए रचना सूरज के लंड को बाहर निकालकर मुंह भर लेटी है ओर जोर जोर से चूसने लगती है.. सूरज रचना को देखकर अब उसके अपनी भाभी होने का ख्याल ओर जो वो कर रहा है ये सब गलत होने का ख्याल छोड़ देता है.. सूरज कामुकता से भर जाता है ओर रचना के बाल पकड़ कर उसके मुंह में झटके मार मार कर उसका मुंह चोदने लगता है..

कुछ देर रचना का मुंह चोदकर सूरज रचना को पीछे धकेल देता है ओर ब्लाउज को खोलने लगता है..

देवर जी बहुत दूध है मेरे बोबो में.. चूसके ख़त्म कर दो.. बच्चे के लिए भी मत छोड़ना देवर जी..

सूरज जैसे ही रचना का ब्लाउज ओर ब्रा उतारता है उसके सुडोल उठे हुए मोटे चुचे देखकर उनपर टूट पड़ता है ओर चूसने लगता है मगर उसे रचना के बूब्स पर एक टट्टू ओर तिल का निशान दीखता है तो उसे ऐसा लगता है की ऐसा निशान कहीं देखा है..

सूरज रचना का बोबा पकड़ कर ठीक से वो सब देखने लगता है फिर अपना फ़ोन निकाल कर कुछ देखता है..

क्या हुआ देवर जी क्या देख रहे हो.. आओ ना चुसो मेरे चुचे.. चुत में खुजली हो रही है मिटा दो देवर जी..

सूरज फ़ोन दिखा कर - ये आप ही हो ना भाभी..

रचना फ़ोन में कुछ देखकर - हनी ये..

सूरज रचना का चुचा पकड़ कर - झूठ मत बोलना भाभी.. आपका ये टट्टू ओर तिल दोनों मिल रहे है.. मास्क लगा के इंटरनेट ये सब कर रही हो आप..

रचना सूरज का लंड पकड़ के अपनी चुत में घुसाती हुई - मैं ही हूँ देवर जी.. ओर तुम शकल से तो बड़े सीधे लगते हो मगर ये सब भी देखते हो..

सूरज रचना की चुत में एक जोरदार झटका मारके अपना लंड घुसा देता है ओर रचना की अह्ह्ह निकल जाती है..

रचना सूरज को अपनी बाहों में खींचकर - आराम से देवर जी.. गुस्सा थूक दो..

हलके हलके चोदते हुए - कहा थूकू गुस्सा भाभी..

मेरे मुंह में थूक दो ना देवर जी.. लो.. आ..

सूरज रचना के मुंह में थूक देता है और पूछता है - नीलेश भईया जानते है इस बारे में कि आप इंटरनेट ओर ये सब करती हो?

हाँ.. वो सब जानते है देवर जी.. ये सब उनका ही किया धरा है.. अपनी कमाई पूरी नहीं पड़ती इसलिए मुझसे ये सब करवाते है..

बुआ?

अह्ह्ह.. उनसे मत कहना हनी.. वो नहीं जानती.. हनी.. थोड़ा तेज़ करो ना..

सूरज स्पीड बढ़ा देता है और झटके मारते हुए रचना के मुंह और गर्दन को अच्छे से चूमता चाटता है..

मुझे पता होता कि तुम बिस्तर में इतने अच्छे हो तो मैं कब कि तुमको अपना बना लेती देवर जी.. अह्ह्ह.. गुस्सा तो नहीं हो ना अपनी भाभी पर..

सूरज लंड निकालकर - गुस्सा तो बहुत हु भाभी आप पर.. मगर आपकी प्यारी प्यारी बातो से गुस्सा ठंडा हो जाता है.. भाभी घोड़ी बनो..

नहीं.. तुम गांड मारने लग जाओगे.. पहले ही दर्द हो रहा है..

अरे नहीं मारूंगा भाभी.. चलो बनो जल्दी..

पक्का ना देवर जी..

सूरज रचना कि कमर पकड़कर घोड़ी बनाता हुआ - पक्का भाभी..

रचना - आपका फ़ोन आ रहा है..

सूरज चुत में लंड पेलकर - किसका है उठा कर स्पीकर पर डाल दो भाभी..

रचना वैसा ही करती है..

सूरज हलके हलके झटके मारते हुए - हेलो..

कहाँ है बेटू? क्या कर रहा है?

कुछ नहीं माँ.. यही था..

तो कब से तुझे ढूंढ़ रही हूँ.. स्टेज पर आजा.. फॅमिली फोटोज खिचवानी है..

माँ थोड़ा वक़्त लगेगा.. जरुरी काम है एक..

ऐसा क्या जरुरी काम है तुझे हनी.. जल्दी आ..

माँ आ रहा हूँ थोड़ी देर में.. फ़ोन रख दो..

सूरज ये कहकर रचना के बाल पकड़ के तेज़ झटके मारने लगा तो रचना के मुंह अह्ह्ह.. आराम से.. मार डालोगे क्या? की आवाज निकल गई और फ़ोन कटने से पहले सुमित्रा ने रचना की ये बात सुन ली.. जिससे वो समझ गई सूरज क्या कर रहा है.. सुमित्रा एक दम से कामुक हो गई और सूरज और उस लड़की के बारे में सोचने लगी जिसकी आवाज उसने फ़ोन पर सुनी थी.. सुमित्रा नहीं जानती थी कि वो लड़की कौन है मगर उसे इतना पता चल गया था की सूरज किसी लड़की को चोद रहा है..



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Nice update bro
 
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