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Incest घर की मोहब्बत

meerkhan

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Update 8



सूरज से बात करने के बाद सुमित्रा बाथरूम के लिए निकल गयी और बाथरूम का दरवाजा बंद करके अंदर अपनी चुत में ऊँगली करने लगी और सूरज के बारे में सोचने लगी.. सुमित्रा ने बाथरूम की दिवार पर बनी जगह मे अपना फ़ोन सीधा करके रख दिया जिसमे सुमित्रा ने सूरज की तस्वीर लगा रखी थी.. सूरज की तस्वीर देखकर सुमित्रा अपनी चुत मे ऊँगली कर रही थी और मन मे सूरज के साथ आलिंगन करने और अपने ही बेटे को भोगने के ख्यालों से खुदको रोमांचित और कामुक कर उसने सूरज के नाम पर वापस अपनी नदी का पानी बहा दिया था और जब तक वो बाथरूम से बाहर आई सूरज भी रचना की चुत में अपना माल भर चूका था और अब बेड के पास खड़ा होकर अपनी पेंट पहन रहा था.. रचना बिस्तर पर ही लेटी हुई थी उसकी सांवली चुत से दोनों का मिश्रित वीर्य घुलकर बह रहा था जिसे रचना अपनी ऊँगली से उठाकर चाटते हुए बोली..

देवर जी दूध तो पिया ही नहीं तुमने..

सूरज रचना के पास बैठकर उसके बूब्स दबाते हुए - रात को मेरे कमरे में सोना भाभी.. सारी इच्छा पूरी कर दूंगा..

रचना सूरज के होंठों पर से लिपस्टिक साफ करती हुई बोलती है - घर पर बहुत लोग है देवर जी.. वहा ऐसा कुछ नहीं हो पायेगा..

आप फ़िक्र मत करो भाभी छत पर कोई नहीं आएगा.. छत वाले कमरे में आज रात आपके दूध का स्वाद लूंगा..

वैसे एक बात बताओ.. इंटरनेट पर मुझे देखकर मेरे नाम का जयकारा तो लगाया होगा तूमने..

कई बार भाभी.. कई राते आपको देखकर ही बिताई है मैंने.. अब तो आप ही मेरा पकड़ कर जयकारा लगा देना..

ये भी कोई बोलने वाली बात है देवर जी? मैं तो आपकी दिवानी हो गई.. जब बोलोगे ख़ुशी ख़ुशी सब दे दूंगी..

भाभी अब चलता हूँ... आप भी अपनेआप को ठीक करके नीचे आ जाओ..

सूरज स्टेज की तरफ आ जाता है...

कब से ढूंढ़ रही हूँ.. चल..
सुमित्रा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए सूरज का हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले जाती है जहाँ विनोद गरिमा के साथ साथ जयप्रकाश गरिमा के पिता लख्मीचंद और माँ उर्मिला भी मौजूद थे.. एक फॅमिली फोटो खींचती है..

गरिमा का सारा ध्यान सूरज पर था और वो खा जाने वाली नज़र से सूरज को देख रही थी मगर सूरज जैसे अनजान बनकर गरिमा के सामने से निकल गया उसने गरिमा की तरफ देखा भी नहीं.. फोटो खिचवाने के बाद वो स्टेज से नीचे आ गया और गरिमा का दिल जोरो से दुखने लगा वो सूरज के इस व्यवहार को समझ नहीं पाई.. उसे यहां सबसे ज्यादा अगर किसको देखने और मिलने की तलब थी तो वो सूरज था मगर सूरज ने उसे ऐसे अनदेखा किया जैसे बॉलीवुड सेलिब्रेटी एक दूसरे को करते है..

गरिमा कब से सूरज का ही इंतजार कर रही थी और जब वो मिला भी तो अनजान बनकर.. गरिमा ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को काबू में रखा अगर वो अकेली होती तो शायद रो पड़ती.. उसे अब अपने मन में सूरज के लिए पनप रहे प्रेम का आभास होने लगा था.. उसके साथ उसका होने वाला हस्बैंड खड़ा था मगर उसका दिल तो सूरज के नाम से धड़कने लगा था.. गरिमा को अब इसका अहसास होने लगा था कि वो अब एक दो राहें पर खड़ी हुई है.. जहाँ से ना वो वापस मुड़ सकती थी ना आगे बढ़ सकती थी.. 14 दिन सूरज के साथ बात करके उसे ऐसा लग रहा था जैसे सूरज के साथ उसका 14 जन्मो का बंधन हो.. उसे अब समझ आने लगा था कि ये प्रेम है..

सूरज को लगा था कि गरिमा कहीं सबके सामने उसे ताने मारने ना लग जाए और इतनी देर उससे दूर रहने का करण पूछते हुए विनोद के सामने ही नाराजगी ना हाज़िर करने लग जाए इसलिए उसने जानबूझ कर गरिमा को अनदेखा किया और उसे दूर ही रहा..


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क्या हुआ अक्कू? यहां गाडी बाइक क्यों रोक दी..

माँ वो सर दर्द होने लगा मैं मेडिकल से गोली ले आता हूँ..

अरे मेरे पास है गोली अक्कू.. तू घर चल मैं दे दूंगी..

नहीं माँ आप रहने दो आपको भी जरुरत पड़ती रहती है मैं ले आता हूँ अपने लिए..

अंकुश बाइक से उतर कर मेडिकल कि दूकान पर चला जाता है और नीतू मन ही मन मुस्कुराने लगती है.. उसके पीछे उसकी माँ गोमती बैठी हुई अंकुश के आने का इंतजार करने लगती है..

हाँ भाईसाहब क्या चाहिए?

1 कंडोम का पैकेट दे दो 8 वाला.. चॉकलेट फ्लेवर..

केमिस्ट एक नज़र बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर अंकुश से - ये लो भाईसाब.. भाईसाब एक बात पुछु..

अंकुश- हा बोलो..

केमिस्ट - दोनों बिलकुल कड़क है.. कहाँ से लाये हो इन को? क्या रेट है नाईट का?

अंकुश पीछे बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर केमिस्ट से - भोस्डिके काम कर अपना..

अंकुश कंडोम जेब में रखकर वापस बाइक चलाने लगता है वही पीछे नीतू और गोमती बैठ जाती है.. और तीनो कुछ मिनटों में घर पहुंच जाते है.. जिसके बाद गोमती अपने कमरे मे सो जाती है और अंकुश नीतू के साथ रासलीला रचाने लगता है..


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नज़मा कुछ बात हुई हनी से?

जी...... वो तैयार है..

शुक्र है नज़मा.. कम से कम घर में बच्चे की खुशी तो आएगी.. दूकान तो ठीक चलने लगी है अब तू भी पेट से हो जाए तो ख़ुशी दुगुनी हो जायेगी..

मैं बिस्तर ठीक कर देती हूँ..

मैं कल ही हनी से बात करूंगा..

नज़मा बिस्तर ठीक करके एक तरफ लेट गई और आगे आने वाले पलों के बारे में सोचने लगी.. उसे हनी पसंद था मगर उसके साथ सोने के बारे में नज़मा ने पहले कभी नहीं सोचा था.. परदे में रहने वाली नज़मा अब किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर और हमबदन दोनों होने वाली थी.. नज़मा को घबराहट हो रही थी और एक रोमांच भी उसके दिल को घेरे जा रहा था.. उसे आज नींद नहीं आने वाली थी..

बिलाल घर की छत पर सिगरेट का धुआँ उड़ाते हुए सोच रहा था कि नज़मा पेट से हो गई तो जो रिस्तेदार उसे नामर्द कहकर चिढ़ाते है ताने मारते है उनका सबका मुंह चुप हो जाएगा और वो चैन से जी पायेगा..


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हेमलता बिस्तर लेटी हुई अब भी उन पलों को याद कर रही थी जब सूरज ने घर कि छत वाले बाथरूम में उसके अपनी मजबूत बाहों में कसके पकड़ा था.. और आज उसका सुन्दर मुखड़ा देखकर हेमलता के मन में उसके प्रति मातृत्व भाव के साथ काम का भाव भी आरहा था.. सूरज हेमलता के सामने ही तो बड़ा हुआ था मगर काम पीपासा ने किसे अछूता छोड़ा है? 50 साल कि उम्र को पार कर चुकी हेमलता खुली आँखों से सूरज के साथ प्यार मोहब्बत के सामने देख रही थी..


वही उसकी बेटी बरखा जिसने सूरज को टूशन पढ़ाया था वो भी सूरज के बारे में ही सोच रही थी.. वो यहां अपने माँ बाप के पास उनसे मिलने इसलिए नहीं आई थी कि हेमलता और बंसी ने उसे बुलाया था बल्कि इसलिए आई थी कि उसके अपने पति के साथ सम्बन्ध सही नहीं चल रहा था.. उसकी गृहस्थी अस्त व्यस्त होने की राह पर थी.. बरखा के पति का एक्स्ट्रा मेरिटयल अफेयर चल रहा था जिसका पता बरखा को चल गया था और वो गुस्से में होने बच्चे को भी वही उसकी दादी के पास छोड़कर यहां आ गई थी.. बरखा के मन में सूरज के प्रति लगाव और स्नेह था.. बरखा सूरज से खुलकर बात कर सकती थी और जब वो आई थी तब रास्ते में उसने सूरज से ढ़ेर सारी बातें की थी.. बरखा को नींद नहीं आई तो वो हेमलता से छुपकर घर की छत पर आ गई और एक सिगरेट अपने होंठों पर लगाकर जलाते हुए कश लेती हुई यहां से वहा घूमने लगी.. उसने मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे.. जैसे उसके मन में कोई युद्ध चल रहा हो..


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गुनगुन अपने कमरे की बालकनी में खड़ी होकर बाहर सडक पर एक कुतिया और एक कुत्ते के बीच हो रहे सम्भोग को देख रही थी.. रात का सन्नाटा था और कुत्ता खम्बे के नीचे आराम और इत्मीनान से अपनी कुतिया को चोद रह था..

गुनगुन को कुत्ते कुतिया की चुदाई देखकर अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब वो सूरज के साथ कभी कॉलेज के स्टोर रूम में तो कभी अपनी सहेली के घर जाकर सम्भोग किया करती थी.. गुनगुन की सील सूरज ने ही तोड़ी थी और गुनगुन अपनी जिंदगी में सिर्फ सूरज से ही चुदी थी..

सूरज पढ़ने में अच्छा नहीं था.. अक्सर ऐसा होता था कि गुनगुन सूरज के लंड को चुत में लेके उसे पढ़ाती थी और उसके पढ़ने और याद करने पर उससे अपनी चुत मरवाती थी.. इसमें दोनों को बराबर का सुख मिलता था..
गुनगुन सयानी थी मगर सूरज बचकाना.. गुनगुन सूरज को अच्छे से संभालती थी और उसके कारण सूरज एग्जाम में पासिंग मार्क्स ले आता था..

गुनगुन को आज भी याद है जब वो घुटने के बल बैठकर कॉलेज की छत पर सूरज के लंड को मुंह में लेकर उसे चूसते हुए सूरज को blowjob दे रही थी तब सूरज ने बड़े प्यार से गुनगुन को कहा था.. गुनगुन मुझे कभी छोड़ के मत जाना यार.. मैं ख़ुशी से जी नहीं पाऊंगा तेरे बिना..

ये सोचकर गुनगुन की आँख में आंसू आ गए.. गुनगुन सूरज को ढूंढ़ रही थी मगर सूरज उसे कहीं नहीं मिला.. गुनगुन ने कॉलेज से घर का एड्रेस पता किया तो पता चला की सूरज के परिवार ने घर बदल दिया था.. और कॉलेज में किसी को भी उसके बारे में पता नहीं है.. गुनगुन को ये तब नहीं पता था कि सूरज के घर का नाम हनी है... गुनगुन कि आँख में आंसू थे.. उसने सिगरेट का लम्बा कश लेते हुए सूरज को याद किया और सामने चल रही कुत्ते कुतिया कि चुदाई देखने लगी..

गुनगुन सिगरेट नहीं पीती थी मगर जब वो एग्जाम कि प्रिपरेशन कर रही थी तब साथ कि एक लड़कियों ने देर तक जागनेके लिए उसे सिगरेट पीना सिखाया और गुनगुन अब भी कभी कभी जब वो उदास और मायूस होती सिगरेट पी लेती थी..

गुनगुन को कुत्ते में सूरज और कुतिया में खुदकी शकल दिखने लगी थी और अब उसकी चुत से तरल पदार्थ रिसने लगा रहा.. गुनगुन सिगरेट के कश लेती हुई सूरज को वापस हासिल करने के ख्वाब देख रही थी..
एक आदमी जो सडक पर चल रहा था उसने कुत्ते और कुत्तिया को चुदाई करते देखकर पत्थर मारना शुरू कर दिया.. कुत्ते का लंड और कुतिया की चुत में चिपक गया था और दोनों इसी तरह उस आदमी से बचकर भाग गए.. गुनगुन को याद आने लगा कि एक दिन जब गुनगुन को घर आने कि जल्दी थी और सूरज उसकी चुत में लंड घुसा के लेटा हुआ था तब गुनगुन के कहने पर कि मुझे जाने दो सूरज ने जवाब दिया था.. मेरा लंड तो तेरी चुत मे चिपक गया है गुनगुन.. निकलता ही नहीं है... गुनगुन ने उस बात को याद करके मुस्कुराते हुए सिगरेट बुझाकार फेंक दी और वापस आकर बिस्तर में लेट गयी.. नींद उसकी आँख में भी नहीं थी..


************


रात के दस बज चुके थे.. सूरज ने vigra ली थी और अब तक कई बार झड़ चूका था.. सूरज गबरू जवान था और उसके कारण उसपर vigra का असर तुरंत हो गया था जिसके करण रचना और नेहा को उसने चोद दिया था... विनोद और गरिमा के साथ घर के बाकी लोग भी अब खाने के लिए बैठ गए थे मगर सूरज को भूक नहीं थी वो अपना खड़ा लंड लेकर बिल्डिंग कि छत पर आ गया था.. जहाँ वो एक तरफ बैठकर सोच रहा था कि उसपर से ये असर अब कब ख़त्म होगा? सूरज को छत ओर जाते हुए किसी ने देख लिया था और वो शख्स भी सीढ़ियों पर खड़ा हुआ सूरज को छत पर एक तरफ अपना लंड पकड़ के बैठे हुए देख रहा था..

सूरज ने कुछ देर बाद देखा कि कोई उसकी तरफ चला आ रहा है.. सूरज ने जैसे नज़र उठाकर देखा तो एक औरत सूरज के पास आकर अपने घुटनो पर बैठते हुए कहती है - भईया जी..

फुलवा.. तू यहां क्या कर रही है?

भईया जी आपको देखा तो मिलने चली आई.. आपने इतना बड़ा उपकार किया मेरे ऊपर.. मेरा घरवाला भी यहां आ गया है धरमु ने उसे काम दिया है.. आपने तो मेरा नसीब बदल दिया.. भईया आपको क्या हुआ है?

कुछ नहीं.. फुलवा जा यहां..

भईया जी हाथ से क्या पीछा रहे हो.. और आपको क्या हुआ है? आपको कोई दिक्कत है?

सूरज की नज़र फुलवा की चोली में गई तो उसके लंड में और अकड़न आ गई और फुलवा ने सूरज के लंड को पेंट के अंदर ही पूरी औकात में खड़ा देख लिया और हसने लगी.. और बोली - भईया जी लगता है आज बहुत मन है आपका?

सूरज फुलवा के बूब्स घूरकर - फुलवा जा यहां वरना कुछ हो जाएगा..

फुलवा हस्ती हुई - भईया जी लाओ.. मैं मदद कर देती हूँ आपकी..

सूरज - नहीं फुलवा.. रहने दे..

फुलवा सूरज का हाथ उसके लंड पर से हटा कर उसके पेंट की ज़िप खोल लेती है और सूरज के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है.. फिर सूरज का एक हाथ अपनी चोली के अंदर घुसा कर उसके लंड पर अपने होंठ लगा देती है और फिर धीरे धीरे प्यार से लंड चूसाईं शुरू कर देती है जिसमे सूरज को आराम आ आने लगा था और मज़ा भी मिलने लगा था.. सूरज एक हाथ से फुलवा के बूब्स दबाते हुए उसे लंड चुसवा रहा था तभी उसका फोन आ गया और सूरज उठाकर बातकरने लगा..

हेलो..

हनी तू फिर से कहा गायब हो गया? खाना नहीं खाना तुझे?

भूक नहीं है माँ..

अरे भूक क्यों नहीं है तुझे? देख यहां सब खाने के लिए बैठ गए है तू जल्दी आ..

कहा ना भूक नहीं है.. आप खा लो..

हनी तू है कहा? किसके साथ है?

मैं यही हूँ माँ.. आप फ़िक्र मतकरो.. आप खाना खाओ..

नहीं.. जब तक तू नहीं आएगा मैं नहीं खाऊंगी.. समझा..

माँ यार क्या बच्चों जैसी ज़िद करने लगी आप.. खा लो ना.. पहले भी तो खाती थी..

खाती थी पर अब से नहीं खाऊंगी.. तू आएगा तभी खाऊंगी.. समझा..

ठीक है थोड़ी देर रुको मैं आता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

फुलवा सूरज का पूरा लंड गले तक ले जाती है और अब जोर जोर से चूसने लगती है..

अह्ह्ह.. फुलवा.. अह्ह्ह.. अह्ह्ह

फुलवा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे वो लंड चूसने के लिए ही पैदा हुई हो.. उसने 10 मिनट के अंदर ही सूरज को अपने मुंह से ठंडा कर दिया था..

सूरज ने अपने बटुए से पांच सो का एक नोट निकालकर फुलवा की चोली में घुसा दिया और फुलवा का बोबा पकड़कर मसलते हुए बोला - फुलवा.. तू कमाल है..

फुलवा ने अपनी चोली से पैसे निकालकर सूरज से कहा - भईया जी.. ये क्या है? आप मेरी कीमत लगा रहे हो..

नहीं फुलवा.. मैं बस तुझे इनाम दे रहा हूँ.. चोली फटी हुई है तेरी नई ले लेना..

फुलवा ने अपनी चोली उतार कर एक तरफ रख दी और कमर से ऊपर पूरी नंगी होकर वापस सूरज के लंड को पकड़ती हुई मुंह में लेकर चूसने लगी..

फुलवा क्या कर रही है.. अह्ह्ह्ह.. आराम से.. फुलवा.. छोड़ ना.. वापस खड़ा हो जाएगा.. फुलवा...

वही तो करना है भईया जी.. ये कहकर फुलवा वापस लंड चूसने लगती है और दो मिनट में ही सूरज का लंड वापस खड़ा हो जाता है..

फुलवा.. बड़ी मुश्किल से झड़ा था तूने वापस खड़ा कर दिया..

मैं वापस झड़वा दूंगी भईया जी आप फ़िक्र मत कीजिये.. ये कहकर फुलवा अपना घाघरा उठाकर सूरज के लंड पर बैठ गई और सूरज का लंड घप करके फुलवा की चुत में चला गया.. फुलवा की चुत बड़ी थी उसे लंड लेने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई बल्कि मज़ा आने लगा.. वो सूरज के लंडपर उछलने लगी और अपने दोनों चुचे हिला हिला कर सूरज के मुंह पर मारने लगी.. सूरज दोनों हाथ से फुलवा की कमर पकड़ कर उसके बूब्स को कभी चूस तो कभी चाट रहा था..

पास में उसका फोन पड़ा था जिसमे अब सुमित्रा के साथ साथ गरिमा का फ़ोन भी आने लगा था और सूरज को इसका ध्यान नहीं था वो फुलवा की काम कला से काम के सुख में डूब गया था.. गरिमा और सुमित्रा ने कई बार सूरज को फ़ोन किया मगर सूरज ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया या यूँ कहे की उसे फ़ोन साइलेंट होने से पता ही नहीं चला..

फुलवा निकलने वाला है.. हट..

अंदर निकाल दो ना भैयाजी..

पागल है क्या फुलवा? कंडोम नहीं लगा हुआ.. हट..

फुलवा लंड चुत से निकाल कर मुँह मे भर लेती है और सूरज को अपने मुँह मे झड़वा लेती है मगर अब तक रात के साढ़े दस बज चुके थे और फंक्शन लगभग ख़त्म हो चूका था.. सुमित्रा के अलावा सबने खाना खा लिया था गरिमा का मन नहीं था मगर उसे भी सबके दबाव ने खाना खाना पड़ा था..

सूरज ने फ़ोन देखा तो चौंक गया और फुलवा का बोबा पकड़ के उसे साइड करते हुए अपने लंड पर से हटा दिया फिर पेंट बंद करके जल्दी से खड़ा हो गया..

क्या हुआ भैया जी?

फुलवा मर गया आज तो.. इतना लेट हो गया.. जाना पड़ेगा जल्दी निचे..

फुलवा भी खड़ी होकर अपनी चोली पहनती हुई - भैया जी जब भी आपका मन करे तो मिलने का अहसान जरुरत कीजियेगा.. आप जैसे बोलेंगे मैं वैसे आपको खुश कर दूंगी..

सूरज निचे आ जाता है..

सुमित्रा ने जैसे ही सूरज को देखा वो गुस्से से बोल पड़ी..

कहा था तू.. मेरी बात की जरा भी परवाह है या नहीं तुझे? किस लड़की के साथ था? बता?

माँ क्या बोल रही हो.. कहीं फंस गया था.. सॉरी.. आपने खाना नहीं खाया ना? चलो खाते है..

अब नहीं खाना मुझे.. सब का खाना हो गया सब चले भी गए और अब तेरे पापा के साथ बाकी लोग भी घर जा रहे है तेरी मर्ज़ी हो तो घर आ जाना वरना जिस लड़की के साथ मुंह काला कर रहा था उसी के साथ रह जाना..

कौन लड़की कैसी लड़की? क्या बोल रही हो किसी लड़की के साथ नहीं था.. कहा ना कहीं फंस गया था..

हनी ऐसा है मुझे अभी बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ है मेरा हाथ उठ जाएगा.. तूझे जो करना है कर.. हट मुझे जाने दे..

अरे माँ सुनो तो... चलो ना खाना खाते है अभी तो खा सकते है..

मुझे नहीं खाना.. हट..

देखो आपने वादा किया था आप मुझसे नाराज़ नहीं होगी..

तूने भी एक वादा किया था मुझे सब सच बताएगा.. बोल किसके साथ था.. कौन लड़की थी? देख मैंने फ़ोन पर आवाज सुनी थी उस लड़की.. पहले भी और अभी भी.. सच बता.. वरना कभी बात नहीं करुँगी..

माँ.. वो..

वो क्या कौन थी? चिंकी थी?

माँ.. चिंकी कहा से आएगी.. आप क्या बोल रही हो.. उससे तो बात भी नहीं की मैंने जब से उसकी शादी हुई है..

तो कौन थी?

कॉलगर्ल थी..

कौन? कौन सी गर्ल थी..

कोनसी गर्ल नहीं माँ.. पैसे लेकर.. जो आती है.. वो... कॉल गर्ल.. बस?

सुमित्रा गुस्से से - छी.. अब ये सब करेगा? शर्म नहीं आती तुझे?

सूरज नज़र झुकाकर कान पकड़ते हुए - सॉरी.. माँ..

सुमित्रा पास आकर कान में - कंडोम तो लगाया था ना?

सूरज गर्दन हां में हिला देता है..

सुमित्रा फिर से बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - लगता है तेरी शादी भी विनोद के साथ ही करवानी पड़ेगी.. बहुत जवानी फूट रही है नवाब को.. चल अब..खाना खाते है..

आप बैठो खाना लेके आता हूँ माँ..

सूरज प्लेट उठाकर खाना लेने चला जाता है और सुमित्रा सूरज को देखकर मन ही मन सूरज के साथ सेज सजाने के ख्याली पुलाव बनाकर अपने आप को कल्पनाओ की दुनिया में ले गई उसकी चुत गीली हो उठी थी.. वो सोच रही थी की सूरज ने एक रंडी को ये बोलने पर मजबूत कर दिया.. आराम से.. मतलब सूरज सम्भोग करने में माहिर और खिलाड़ी होगा.

मुन्ना और नेहा भी अब काम निपटाने में लगे थे और अब बचा हुआ सामान घर पहुंचने के लिए किसको बुला लिया था..

सूरज खाना ले आया और सुमन के साथ बैठकर खाने लगा.. दोनों साथ में खाना खा रहे थे और एक दूसरे से बिना कुछ बोले एक दुसरे को कभी कभी देखकर खाने का स्वाद लेने लगे थे.. खाने के बाद सुमित्रा ने देखा की लख्मीचंद और उर्मिला उसी की तरफ आ रहे थे और गरिमा के साथ बाकी सभी लोग जो उनकी तरफ से आये थे वापस जाने के लिए बस में बैठ गए थे..

सूरज ने जैसे ही लख्मी चंद और उर्मिला को देखा उसे याद आया कि उसने गरिमा से बात तक नहीं कि है..

सूरज वहा से बस कि तरफ चला गया और बस की खिड़की में गरिमा को देखकर व्हाट्सप्प पर गरिमा को से बस से बाहर आने को कहा.. गरिमा ने massage देखकर अनदेखा कर दिया और बस से कुछ दूर खड़े सूरज को गुस्से से देखकर मुंह मोड़ लिया..

सूरज ने गरिमा को कॉल किया मगर गरिमा ने फ़ोन भी नहीं उठाया और आँखे बड़ी बड़ी करके सूरज को घूरने लगी फिर मुंह फेर लिया.. सूरज समझ आ चूका था की गरिमा उस पर बहुत गुस्सा है और नाराज़ है..

सूरज ने व्हाट्सप्प पर लिखा - सॉरी भाभी..

गरिमा देखकर अनदेखा कर दिया और सूरज के बार बार massage और फ़ोन का कोई रिप्लई नहीं दिया..

सूरज के देखते ही देखते सब सब लोग बस में बैठ गए और बस चली गई किन्तु गरिमा ने सूरज से बात नहीं की..

सबके जाने के बाद सूरज भी घर आ गया.. और अपनी गलती पर मन ही मन खुदको बुरा भला कहने लगा.. सूरज को नहीं लगा था कि उसकी इतनी सी गलती से गरिमा इतना नाराज़ हो जायेगी मगर बात कुछ और थी.. गरिमा सूरज को मन ही मन चाहने लगी थी और एक माशूका अपने महबूब से इसी तरह नाराज़ हो जाया करती है.. मगर इसका इल्म सूरज को नहीं था.

सूरज अपने कमरे में आ गया और गद्दे पर उल्टा लेट गया.. उसने आज गुनगुन को देखा था जिसे वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था मगर शायद वक़्त ने उसके दिल से गुनगुन के लिए जो प्यार था उसे दबा दिया था.. सूरज गुनगुन के जाने के बाद जिन हालातों से गुजरा था उसे उभरते उभरते उसने गुनगुन को कभी ना मिलने की कसम खा ली थी.. थकावट के कारण उसे नींद आ गई थी.

रचना नज़र बचाकर उसके कमरे आई तो उसे सोता हुआ पाया और अपनी किस्मत को कोसती हुई वापस चली गई.

अगली सुबह जबतक सूरज की आँख खुली लगभग सभी मेहमान जा चुके थे.. सूरज ने उठते ही गरिमा को सॉरी मैसेज सेंड किया और गरिमा ने तुरंत उसे seen कर लिया मानो वो उसी के इंतजार में बैठी हो.. आज का पूरा दिन सूरज ने गरिमा को अनगिनत मैसेज और कॉल किये मगर गरिमा ना massage का रिप्लाई दिया ना कॉल उठाया..

कल रात गरिमा दिल दुख रहा था मगर आज उसको एक अजीब सुकून मिल रहा था उसके होंठों पर मुस्कान थी.. वही सुकून जो अपने प्रेमी को अपने लिए तड़पते देखकर मिलता है.. गरिमा का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो हर बार सूरज का massage seen करके छोड़ देती.. कोई जवाब नहीं देती..

सूरज और गरिमा के बीच कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.. सूरज रोज़ सुबह से रात तक गरिमा को पचासो मैसेज भेजता और गरिमा मैसेज देखकर मुस्कुराते हुए बिना रिप्लाई दिए फ़ोन बंद कर देती..

सगाई के सात दिन बाद तक ऐसा ही चलते रहा और सूरज घर से बाहर कहीं नहीं गया.. बस अपने कमरे में ही रहा.. उसके अंकुश और बिलाल ने भी मिलने को बुलाया मगर सूरज बात टाल कर फ़ोन रख देता..

सूरज को गरिमा से ना कोई मोहब्बत थी ना लगाव था उसे बस गरिमा से बात करना और उसके साथ बात करते हुए समय बिताना अच्छा लगता था.. सूरज
गरिमा से बात करने के लिए तड़प नहीं रहा था बस वो चाहता था कि गरिमा एक बार उसे बात कर ले ताकि सूरज गरिमा से माफ़ी मांग सके.. सूरज गरिमा को भाभी कि नज़र से ही देखता था और गरिमा के लिए उसके मन में कोई पाप नहीं था..


मुंह क्यों लटका हुआ है तेरा?

कहा लटका हुआ है? ठीक तो है..

चेहरे पर बारह बज रहे है.. क्या हुआ क्या बात है?

कुछ नहीं वो तो रात को ठीक से नींद नहीं आई इसलिए.. चाय दे दो..

सुमित्रा ने चाय देते हुए कहा - तेरे पापा बात करना चाहते है तुझसे.. सुबह पूछ रहे थे.. मैंने कहा अभी सो रहा है शाम को बात कर लेना..

मुझसे क्या बात करेंगे?

मुझे क्या पता? शायद कुछ जरुरी होगी तभी कह रहे थे वरना क्यों कहते.. और तू बोर नहीं होता अकेले?

नहीं.. मुझे अकेले रहना पसंद है.. आपका फ़ोन देना..

मेरा फ़ोन? क्यों?

किसीको फ़ोन करना है मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है..

तो कब तक पुराना फ़ोन चलाएगा नया लेले..

ले लूंगा आप दो ना अपना फ़ोन..

एक मिनट..
सुमित्रा चेक करती है कि उसके फ़ोन में सारी अप्प पर लॉक ठीक से लगा है या नहीं फिर सूरज को फ़ोन दे देती है कॉल खोल के..

सूरज गरिमा का नम्बर डायल करता है और छत पर चला जाता है..

हेलो..

भाभी आपको मेरी कसम है फ़ोन मत काटना..

गरिमा कुछ नहीं बोलती..

भाभी सॉरी.. उस दिन गलती हो.. आप बात तो करो.. ऐसे मेरा फ़ोन और massage इग्नोर करोगी तो मैं वापस आपको कभी massage और कॉल करूंगा ही नहीं..

गरिमा सूरज कि आवाज सुनकर खुश हो गई थी मगर जाताने के लिए कि वो कितनी नाराज़ है उसने कहा.. मत करना..

सूरज - ठीक है अब ना massage आयेगा ना कॉल आएगा आपको मेरा..

सूरज फ़ोन काट देता है और गरिमा सोचने लगती है कि क्या सूरज सच ने उसे मैसेज और कॉल नहीं करेगा? उसका दिल भारी सा होने लगता है गरिमा का मन करता है अभी वापस सूरज को फ़ोन करके उससे बात करें मगर उसका गुस्सा अभी सूरज पर शांत नहीं हुआ था ना ही उसकी नाराज़गी ख़त्म हुई थी ऊपर से गरिमा का अहंकार या कहो आत्मसम्मान भी उसे इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था..

सूरज नीचे आ गया और फ़ोन सुमित्रा को देकर घर से बाहर चला गया.


**************


नीतू छोड़ यार ऑफिस के लिए लेट हो जाऊँगा.

आज छूटी ले ले ना अक्कू.

क्यों आज क्या स्पेशल है?

अक्कू आज जोगिंदर के साथ समझौता होने वाला वो पैसे देगा.. वकील साहिबा ने बुलाया है.. चल ना मेरे साथ..

मम्मी को ले जाना नीतू.. मुझे उनसब चीज़ो में कोई दिलचस्पी नहीं है.. और तेरी वकील साहिबा मुझे देखते ही फिर से नैनो के तीर चलाना शुरू कर देगी.

अरे उसकी चिंता तू मत कर अक्कू.. वकील साहिबा को मैं संभाल लुंगी.. चल ना.

देख नीतू मुझे उस जोगिंदर कि शकल वापस नहीं देखनी.. तू जिद मत कर.. मम्मी को ले जा वो वैसे भी टीवी देखते देखते घर पर बोर हो जाती है.. चल जाने दे.

अक्कू रुको.

अब क्या है?

टिफिन तो लेते जाओ..

अंकुश नीतू के हाथ से टिफिन और होंठो से एक प्यार भरा चुम्मा लेकर ऑफिस के लिए निकल जाता है और नीतू नीचे गोमती के कमरे में आकर उससे कहती है..

मम्मी.. वकील ने बुलाया है आज समझौता होने वाला है.. कुछ दिनों में तलाक़ भी हो जाएगा.. आप चलोगी मेरे साथ.

गोमती अपनी गहरी सोच से बाहर आते हुए - तलाक़ के बाद क्या करेंगी नीतू? कैसे जियेगी अपनी जिंदगी?

नीतू गोमती के पास बैठ कर - आप फ़िक्र मत करो माँ.. मैं ऐसे ही खुश हूँ.

गोमती एक पेनी नज़र नीतू पर डाल कर कहती है - खुश? अरे जो लड़की तलाक़ लेकर पूरी उम्र घर पर बैठकर बिताती है उसे किस नज़रो से लोग देखते है जानती भी है? एक बार फिर सोच ले.. जोगिंदर से बात करेंगे तो वो फिर से तुझे रखने को तैयार हो जाएगा.

नीतू - माँ मैं उस आदमी के पास वापस कभी नहीं जाउंगी.. आपको चलना है तो चलो वरना साफ मना कर दो.. मैं अकेली चली जाउंगी.

गोमती - नीतू मैं अंधी नहीं हूँ.. घर में जो हो रहा है मुझे साफ नज़र आ रहा है.. मैं चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ नहीं जानती.. लोगों का तो ख्याल कर.. किसीको तेरी करतूत के बारे में पता चलेगा तो क्या इज़्ज़त रह जायेगी पुरे घर की.. मैं एक बार फिर तुझे समझा रही हूँ.. सोच ले.

नीतू - मैंने सोच लिया है माँ.

गोमती - नीतू मन कर रहा है तुझे जान से मार दूँ मगर क्या करू.. माँ जो हूँ तेरी.. अरे सारी जिंदगी क्या अपने छोटे भाई की रखैल बनकर रहेगी तू? क्या जिंदगी होगी तेरी सोचा है कभी? अक्कू तो मर्द जात है उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा मगर तू कुछ तो सोच. जब अक्कू की शादी होगी तब क्या हाल होगा तेरा?

नीतू नज़र झुका कर - तलाक़ के बाद मैं ही अक्कू से शादी करुगी माँ.. अक्कू और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते है.. मुझे पता नहीं आप सब जानती है वरना मैं आपको पहले ही बता देती.

गोमती - पता नहीं था.. तेरे कमरे का पलंग कैसे टूट जाता है तुझे लगता है मुझे पता नहीं चलता. घर के किस कोने में तुम भाई बहन कब क्या रास लीला रचाते हो मुझे सबकी खबर रहती है. मैं कुछ बोलती नहीं क्युकी डरती हूँ अगर किसीको पता चल गया तो क्या होगा? मगर अब बात हद से आगे बढ़ गई है.

नीतू - माँ अक्कू और मैंने ये घर छोड़कर कहीं और रहने का सोचा है.. एक बार तलाक़ हो जाए फिर हम ये घर बेचकर कहीं और शिफ्ट हो जायेगे.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा.. मैं अक्कू से शादी करूंगी और उसके बच्चे की माँ भी बनुँगी.. अक्कू से मैं प्यार करती हूँ माँ.

गोमती कुछ देर चुप रहकर - एक बार फिर सोच ले नीतू.. ये सब गलत है.

नीतू - प्यार सही और गलत की परवाह नहीं करता माँ.आपको हमारा साथ देना ही होगा.. आप मेरे और अक्कू से नाराज़ नहीं हो सकती.. माँ.. वकील साहिबा का फ़ोन आ रहा है.. बुला रही होगी.. मैं चलती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ तेरे साथ.

गोमती और नीतू रिक्शा लेकर कोर्ट पहुचे जाते है और समझौते के अनुसार पैसे ले लेते है फिर तलाक़ के लिए एक फ़ाइल पेश होती है और उसमे डेट लेकर वापस अपने घर आने के लिए कोर्ट से निकल जाते है..

रास्ते में नीतू - भईया वो बैंक के आगे रोकना.

गोमती - क्या हुआ नीतू?

नीतू - माँ बैंक जाकर आती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ.. भईया यही इंतजार करियेगा.. हम आते है.

नीतू पैसे अंकुश के अकाउंट में जमा करवा कर वापस गोमती के साथ रिक्शा में आकर बैठ जाती है और घर के लिए निकल जाती है.


****************


सूरज झील के किनारे बैठा हुआ अपने ही ख्यालों में गुम था कभी वो गरिमा के बारे में सोचता तो कभी गुनगुन के.. कभी उसका मन चिंकी के पास जाकर उसके साथ सम्भोग करने का होता तो कभी उसे चिंकी के घर पर उसके परिवार के होने का ख्याल आता और वो वापस किसी और ख्याल में खो जाता..
अभी तक नेहा ने सूरज को फ़ोन नहीं किया था और रचना तो अब सूरज से हर दिन थोड़ी बहुत बातचीत कर ही लेती थी.. रचना के साथ सूरज अब खुलकर बात करने लगा था मगर वो बात सिर्फ दोनों के बीच की ही होती..

रमन सूरज के पास आकर बैठ जाता है और कहता है - अच्छा हुआ भाई तूने यहां आने के लिए कह दिया. मैं भी घर पर बैठा बैठा बोर हो गया था..

सूरज - बता क्या कह रहा था.. काफी परेशान लग रहा है..

अरे क्या बताऊ यार वो औरत है ना.. उसने जीना हराम कर रखा है.. जब भी घर जाऊं.. धमकिया देती रहती है..

कौन लड़की? अच्छा.. तेरे बाप के रखैल की बेटी.. भाई वैसे तेरा बाप बड़ा रंगीन था..

अरे भाई क्या बताऊ यार.. मेरे बाप ने मेरे लिए फंदा तैयार किया है.. बहनचोद.. जब भी घर जाऊ उसकी शकल सामने आ जाती है..

क्या हो रहा है? बोल क्या रही है वो? सॉरी क्या नाम बताया था तूने उसका.. हां.. तितली..

क्या कहेगी.. साली.. बोल रही है बटवारा करो.. आधा हिस्सा चाहिए उसे.. बहनचोद.. मेरे बाप को भी सारी प्रॉपर्टी उसीके नाम करनी थी. सगे बेटे को कुछ नहीं दिया.

तू कह रहा था तेरे बाप की डॉक्टर भी थी वो.. इलाज़ करती थी तेरे बाप का? सही है मा बाप की रखैल और उस रखैल की बेटी बाप की डॉक्टर.. वैसे भाई अब क्या करेगा?

वही सोच रहा हूँ हनी.. समझ नहीं आ रहा यार..

वैसी तेरी ही तो उम्र की है.. अगर तुझे शकल पसंद है तो तू शादी कर ले.. बटवारा होने से बच जाएगा..

पागल है क्या चूतिये.. क्या कुछ भी बोल रहा है.. दिखने में अच्छी है तो क्या गले से बांध लू.. पैसो के लिए उसकी मा मेरे बाप की रखैल बनी.. अब उसकी बेटी आधी प्रॉपर्टी मांग रही है.

सूरज हसते हुए - भाई डॉक्टर है तेरा भी इलाज़ कर देगी मुफ्त में.. तू अच्छा दीखता है.. शायद पिगल जाए तेरे ऊपर.. और आधी मांग रही है वरना चाहे तो पूरी भी ले सकती है..

रमन - चने के झाड़ पर मत चढ़ाये जा.. गलत ही फ़ोन किया तुझे भी.. कुछ सलूशन देने की जगह मेरी ही गांड मारने लग गया.. कभी बात करते देखा है उसे? ऐसा लगता है जैसे अभी ऑपरेशन कर देगी..

सूरज - मैं क्या सलूशन दू मैं खुद उलझा पड़ा हूँ..

चल भाई आज दारु पीते है..

दिन में?

एक बियर तो पी ही सकते है.. चल बैठ गाडी में..

रमन सूरज को लेकर गाडी चलाता हुआ किसी बार में आ जाता है और दोनों एक टेबल पर बैठकर बियर पीते हुए वापस बात करने लगते है..

अब तो लगता है आधी प्रॉपर्टी हाथ से जाने ही वाली है.. कभी कभी अपने बाप पर बहुत गुस्सा आता है..

शुक्र कर पूरी नहीं ले रही. वैसे किस बात का गुस्सा.. और साले आधी भी बहुत है.. तेरा बाप तो कुछ नहीं छोड़ के गया तेरे लिए.. वो तो फिर भी आधी दे रही है.. हसते हुए..

तू भी मज़ाक़ बना ले साले.. उस लालची औरत से परेशान हूं ही..

डॉक्टर है लालची तो होगी ही.. वैसे एक बार मेरी बात मान के देख के.. क्या पता मान जाए...

तेरा दिमाग खराब है क्या भोस्डिके.. क्या कह रहा है..

बहन ले लंड बाप की पूरी जायदाद चाहिए या नहीं? मेरी तरह खाली जेब सडक पे घूमना है तैसे बस की बात नहीं.. और शादी करने को कह रहा हूँ.. कोनसा सुहागरात बनाने को कह रहा हूँ.. पटा के शादी कर ले.. प्रॉपर्टी तेरे हाथ में रहेंगी फिर तेरी ऐयाशी भी चलती रहेंगी..

भाई नहीं मानेगी...

कोशिश तो कर गांडु.. कॉलेज में चीटिंग करके कितनी लड़कियों को से थप्पड़ खाये थे तूने.. ज्यादा से ज्यादा तितली भी एक चिपका देगी.. और अगर मान गई तो तेरी मोज़ है.. प्यार से बात कर कुछ दिन.. उसे रेस्पेक्ट दे फिर शादी के लिए ऑफर मार दे..

उसकी शकल देखते ही गुस्सा आता है बहनचोद उससे प्यार से बात करू?

सूरज- पैसा सब करवा देगा..

रमन - अब किसका फ़ोन आ रहा है तुझे?

सूरज फ़ोन उठाकर - हां बिल्ले.. बोल..

बिलाल - बहुत बिजी रहने लगा है हनी.

सूरज - अरे नहीं यार.. कुछ नहीं. बस ऐसे ही.

बिलाल - कुछ बात करनी थी.. दूकान पर आएगा?

सूरज फ़ोन काटते हुए - हां.. आ रहा हूँ..
चल रमन छोड़ दे मुझे..

रमन - ठीक है चल..

रमन सूरज को बिलाल की दूकान पर छोड़कर घर निकल जाता है..

सूरज दूकान में आकर कुर्सी पर बैठ जाता है और बिलाल उसी तरह उसके कंधे पर दोनों हाथ रखकर दबाते हुए कहता है - ये तो वही था ना जिसे गार्डन में देखा था.. काफी बड़ी फर्म लगता है..

सूरज - इसका ही गार्डन है.. कॉलेज का दोस्त है..

बिलाल - रुक मैं नज़मा को चाय के लिए कह कर आता हूँ..

सूरज - नहीं बिल्ले... छोड.. बियर पी है थोड़ी देर पहले..

बिलाल - अच्छा हनी.. आज रात अम्मी मामू के यहां रहेंगी.. तू रात को यही रुक सके तो अच्छा रहेगा..

सूरज कुछ देर सोचकर - मैं आ जाऊंगा बिल्ले..

बिलाल - ले..

सूरज - ये क्या है?

बिलाल - पैसे है.. जो तूने दिए थे..

सूरज - छोड़ ना यार बिल्ले.. कभी जरुरत होगी तो मांग लूंगा.. चल मैं घर जाता हूँ..

बिलाल - मैं व्हाट्सप्प करूंगा हनी..

सूरज - ठीक है..

सूरज घर आ जाता है और अपने कमरे में जाकर फ़ोन में किसी से बात करने लगता है..


************


रमन अपने घर पहुँचता है तो घर में घुसते ही उसे तितली नज़र आती है और उसे देखकर सूरज की बातों को याद करने लगता है और तितली को ऊपर से नीचे देखकर उसकी खूबसूरती जो उसने अब से पहले कभी नोटिस नहीं की थी उसका जायजा ले रहा था..

तितली ने रमन को देखकर कहा - क्या सोचा है तुमने? सीधी तरह से मेरी बात माननी है या मैं कोर्ट में जाकर सारी प्रॉपर्टी ले लु?

तितली (24)
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रमन तितली की तरफ आकर अपने जेब से एक फूल निकालकर तितली को देते हुए - आज bday है ना तुम्हारा.. हैप्पीबर्थडे.. मैं तैयार हूँ.. अगले महीने शायद गाँव वाली जमीन के केस का फैसला आ जाएगा उसके बाद तुम जो कहोगी कर लेंगे..

तितली हैरानी से रमन को देखने लगी.. जो अब से पहले कभी उससे सीधे मुंह बात तक नहीं करता था और हमेशा उसकी मा को बाप की रखैल कहकर ही बुलाता था आज उसे bday विश कर रहा था और उसकी बात को इतनी आसानी से मान गया था.. तितली ने आगे कुछ नहीं कहा..

रमन ने नोकरानी शान्ति से खाना देने को कहा और अपने कमरे में चला गया.. तितली देखती ही रह गई और कुछ देर बाद वो भी अपने कमरे में चली गई और लगातार इसी बारे में सोचने लगी फिर उस फूल को जिसे रमन ने दिया था देखने लगी और बाद में उसे डस्टबिन में डाल दिया..

रात के 9 बज गए थे और तितली अब भी अपने कमरे में थी.. रमन तितली के कमरे में आते हुए कहता है - शान्ति बता रही थी, खाना नहीं खाया आज तुमने? तबियत ठीक है तुम्हारी?

तितली - तुमको मेरी तबियत की कब से चिंता होने लगी.. तुम तो चाहते है तुम्हारे पापा की तरह मैं भी मर जाऊ और तुम्हे मुझे कुछ ना देना पड़े.. मगर मैं मरने वाली नहीं हूँ..

रमन तितली के करीब बेड पर बैठते हुए - देखो तुम्हारी मा और मेरे बाप के बीच जो कुछ था वो सबको पता है.. तुम्हारी मा के मरने के बाद जिस तरह तुमने मेरे बाप का ख्याल रखा और मेरे बाप का इलाज़ किया उससे भी सबको यही लगता है की तुमने ये पैसे के लिए किया है और तुम गोल्डीदिग्गर हो.. मैं झूठ नहीं बोलूंगा पर.. मैं भी वही सोचता हूं.. मगर अब मैं तुमसे और झगड़ना नहीं चाहता..

तितली - तुम या सब क्या सोचते है मेरे बारे मे मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता.. जिसे जो सोचना हो सोचे जो बोलना हो बोले.. मैं किसीकी परवाह करने नहीं बैठी हूं.. मुझे और मेरी मा को सब तुम्हारे पापा की रखैल समझते है पर सच्चाई क्या है ये मैं अच्छे से जानती हूं और मुझे किसीको कुछ साबित करने की जरुरत नहीं है..

तितली के मुंह से ये सब सुनकर रमन का तितली के प्रति गुस्सा थोड़ा नर्म हो गया.. रमन को सूरज की बात याद थी और उसे अब अच्छा बनने का नाटक करना था.. उसने तितली का हाथ पकड़ कर कहा - चलो..

तितली की आँख नम थी उसने कहा - कहाँ?

रमन - bday है ना आज तुम्हारा.. कहीं घूम के आते है..

तितली - मुझे कहीं नहीं जाना..

रमन - देखो... सिर्फ एक महीने की बात है फिर तुम और मैं दोनों एक दूसरे की शकल से भी दूर हो जायेंगे.. तब तक हम बिना लड़े झगडे.. प्यार से दोस्त बनकर रह सकते है.. मुझे अपना दोस्त समझो और चलो.. तुम्हारा bday सेलिब्रेट करते है चलकर..

तितली को अपने कानो पर यक़ीन नहीं हो रहा था कि रमन उससे ये सब कह रहा है.. तितली को रमन से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी..

रमन ने आगे कहा - मैं बाहर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ..
ये कहकर रमन बाहर चला गया और तितली कुछ देर उसी तरह बैठकर कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा खोल कर एक नया सूट पहन लिया और बाहर आ गई.. बिना कुछ कहे तितली रमन की कार में बैठ गई और रमन गाडी चला कर कहीं जाने लगा.. तितली को यक़ीन नहीं हो रहा था की सुबह रमन से इतना बुरा झगड़ा होने के बाद रात को वो रमन के साथ bday मनाने जा रही है..

तितली - तुम सिगरेट पीते हो?

रमन - नहीं तो.. क्यों?

तितली - फिर ये सिगरेट का पैकेट और लाइटर किसका है?

रमन - कभी कभी पीता हूँ..

तितली मुस्कुराते हुए - निकोटिन होता है सिगरेट में.. और निकोटिन..

रमन - तितली.. अपनी डाक्टरी मत झाड़ो प्लीज..

तितली को रमन के मुंह से पहली बार अपना नाम सुनकर अजीब लगता है आज से पहले वो उसे बुरा भला ही कहता था और अपने बाप की रखैल जैसे शब्दों से ही पुकारता था मगर आज पहली बार रमन ने उसका नाम लेकर बात की थी जो तितली को अच्छा लगा था..

तितली - कहा ले जा रहे हो?

रमन - है एक स्पेशल जगह.. हर बार अकेला ही जाता हूँ आज तुम्हे ले जा रहा हूँ..

तितली - तुम सच में इतने अच्छे हो?

रमन - मतलब?

तितली - मेरे साथ कितना झड़गा किया है तुमने.. कितना बुरा बुरा कहा.. और अब अचानक से इतनी तमीज और रेस्पेक्ट से बात कर रहे हो.. मुझे कुछ अजीब लगता है.. लेकिन याद रखना मैं अपना मन नहीं बदलने वाली.. मुझे आधा हिस्सा चाहिए.

रमन मुस्कुराते हुए - आधे से कुछ कम नहीं हो सकता? अकेली लड़की तो तुम.. क्या करोगी इतने पैसो का?

तितली - इसी तरह तमीज में रहोगे तो सोचूंगी कुछ.. पर पक्का नहीं कह सकती.. और तुम भी तो अकेले हो तुम क्या करोगे?

रमन - लड़को के लिए तो कितना भी हो कम ही पड़ता है..

तितली - ऐयाशी के लिए तो सब कम ही पड़ेगा.

रमन - लो आ गए चलो..

रमन तितली को लेकर झील किनारे एक बड़े से होटल के टॉप फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में ले आता है जहाँ से रात का नज़ारा किसी जन्नत से कम नहीं था..

दोनों मध्यम रौशनी में उस रेस्टोरेंट की एक टेबल पर बैठ जाते है और तितली उस नज़ारे और जगह को देखकर रमन से कहती है - इतनी खूबसूरत जगह अकेले आते हो?

रमन - तुम चाहो तो अब से तुम्हारे साथ आऊंगा.

तितली - लाइन मार मार रहे हो मुझपर.

रमन - तुम्हे ऐसा लगता है तो मैं क्या कर सकता हूँ.

तितली मुस्कुराते हुए - एक बात बताओ.. ये अचानक से तुम्हरा ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? मैं तुम्हारे पापा की आधी प्रॉपर्टी जो तुम्हारी होनी चाहिए थी उसे लेने वाली हूँ.. तुम्हे तो मेरे ऊपर गुस्सा होना चाहिए.. मगर तुम मेरा bday मनाने के लिए मुझे अपनी पसंदीदा जगह लेकर आये हो.. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा.

रमन - इसमें समझना क्या है? यूँ समझ लो आज किसी महापुरुष ने मेरी आँखे खोल दी.. और मेरी गलतियों से मुझे रूबरू करवा दिया.. और मुझे कहा है कि वत्स.. तुझे अब तेरे पापो का प्राहिश्चित करना है.

तितली हसते हुए - उन महापुरुष का नाम जान सकती हूँ मैं?

रमन - हाँ.. क्यों नहीं? उनका नाम है श्री श्री श्री.. रमन महाराज जी जो तुम्हारे सामने शाक्षात् विराजमान है कन्या.

तितली जोर से हसते हुए - क्या.... तुम?

वेटर आते हुए - सर सेम आर्डर?

रमन - नहीं.. एक bday केक ले आओ.. उसपर तितली लिखवा देना..
वेटर - और कैंडल किस age कि जला के लानी है सर?

रमन तितली की तरफ देखकर - 18 या 19

तितली - 24..

वेटर - ok मैम.. 24.. वेटर चला जाता है.

रमन - उम्र से कम लग लगती हो काफी.

तितली - जानबूझ कह रहे हो ना ये सब तुम?

रमन - नहीं.. मैं बोलने से पहले कहा सोचता हूँ? तुम तो जानती हो.. कितनी तारीफे की है तुम्हारी पहले.

तितली - हाँ.. सब याद है.. रखैल.. छिनाल.. रंडी.. कुटला.. गश्ती... गोल्डडीग्गर... कामवाली.. तुमने जो जो मुझसे कहा था मुझे सब तारीफ़ याद है.

रमन - मुझे सोरी नहीं बोलना आता.

तितली - मुझे उम्मीद भी नहीं है तुमसे सोरी की.

रमन - जो हुआ सो हुआ.. हो सके तो भूल जाओ सब.

तितली - भूलने के लिए ही आधी प्रॉपर्टी ले रही हूँ.

रमन - हा.. मेहरबानी तुम्हारी.. तुम चाहती तो पूरी भी ले सकती थी. वैसे करोगी क्या इतने पैसो का?

तितली - मैं दुनिया घूमूँगी.

रमन - अकेले? चाहो तो मैं भी साथ में घूम सकता हूँ. तुम तो जानती हो मुझे घूमने का कितना शौक है.

तितली - एक शर्त पर.

रमन - क्या?

तितली - ऐसे ही रहने पड़ेगा.. तमीज में.

वेटर - मैम.. आपका bday केक.. एंड ये वाइन.

वेटर वाइन गिलास में वाइन डालकर रख जाता है और कैक के ऊपर 24 डिजिट की कैंडल जल रही थी.

तितली - वाइन?

वेटर - सर ने आर्डर की है.. मैसेज किया था.

रमन - ठीक है जिम्मी.. तुम जाओ..

वेटर चला जाता है..

तितली - तुम्हे वेटर ना नाम पता है.. उसका नंबर भी है.. मैसेज पर ऑडर कर देते हो.. लगता है लोगों को पटा के रखने माहिर हो तुम..

रमन मुस्कुराते हुए - काश तुम्हे पटा पाता.. कम से कम आधी प्रॉपर्टी तो बच जाती..

रमन तितली की तरफ आकर बैठते हुए - लो.. फुक मारके कैंडल बुझा दो..

तितली रमन के करीब आकर बैठने पर उसे नजदीक से देखकर एक पल के लिए किसी ख्याल में पड़ जाती है दूसरे पल उससे कहती है - गाना नहीं गाओगे? हैप्पी bday वाला?

रमन - मुझे देखकर क्या लगता है तुम्हे? मुझे आता होगा वो सब करना?

तितली मुस्कुराते हुए कैंडिल बुझा देती है और केक कट करके रमन को खिलाती है और फिर रमन अपने मुंह के झूठे केक को जो तितली ने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था उसीको वापस खिला देता है जिसे तितली खाते हुए रमन को देखती हुई मुस्कुरा पड़ती है..

रमन वापस सामने जाकर बैठ जाता है और वाइन का गिलास तितली के आगे करते हुए - ये तो कुछ बुरा नहीं करती ना डॉक्टरनी जी?

तितली हसते हुए वाइन का गिलास उठाकर - करती है बताऊ?

रमन - नहीं.. लो.. चेस..

रमन और तितली ग्लास पकड़ के वाइन पीते है और उसी तरह कुछ बात करते है..

रमन - खाने में क्या खाओगी?

तितली - कुछ भी.. जो तुमको पसंद हो..

रमन - मेरी पसंद का नहीं खा पाओगी.. लो.. इसमें से अपनी पसंद बताओ..

तितली मेनू देखकर - हम्म्म.. ये..

रमन आर्डर कर देता है...

रमन - बाथरूम होके आता हूँ.. तुम बैठो मैं आर्डर कर दिया है..

तितली मुस्कुराते हुए - हम्म..

तितली मन ही मन ये सोच रही थी की रमन बस अच्छे होने का दिखावा कर रहा है और उसके मन में कोई प्लान है जिससे वो उसे प्रॉपर्टी देने से बच जाएगा.. मगर क्या प्लान हो सकता है तितली यही सोच रही थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था..

तितली के मन में बस इतनी बात तय थी कि रमन जो उससे इतनी नफरत और नापसंद करता था अचानक से उसके साथ इतना शरीफ बनकर पेश आ रहा है जरुरत इसके पीछे उसका कोई स्वार्थ होगा.. तितली ने सोच लिया था कि वो भी रमन के साथ उसी तरह पेश आएगी जैसे रमन पेश आ रहा है और रमन के मन में जो प्लान चल रहा है उसका पता लगाकर उसके मनसूबे को नाकाम कर देगी.. और आधी प्रॉपर्टी लेकर ही रहेंगी..

रमन बाथरूम में जाकर मूतने लगा था और उसके मन में चल रहा था कि क्या तितली वाकई इतनी प्यारी है जितनी वो अभी बनकर दिखा रही है और क्या वो सच कह रही थी कि उसके बाप और तितली के बीच कुछ नहीं था.. ऐसा सच भी हो सकता है क्युकी रमन अपने बाप को अच्छे से जानता था और ऐसा होना संभव था..

रमन को बार बार तितली का मुस्कुराता और हसता हुआ चेहरा याद आने लगा और तितली के चेहरे पर उसकी जुल्फे बड़ी आँखे पतले गुलाबी होंठ सब याद आने लगे और उसका लंड जिसमे से मूत निकल रहा था खड़ा होने लगा और अकड़ने लगा..

एक दूसरा आदमी रमन के पास वाले पोट में मूतने लगा तो उसे रमन का खड़ा हुआ लंड दिखा और उसने रमन से कहा - सुसु करने से नहीं बैठेगा आपका लंड.. बाथरूम में जाकर हिला लो.. वैसे लड़की चाहिए बता सकते हो.. देसी विदेशी सब है.. बस थोड़े पैसे लगेंगे..

रमन आदमी से - भोस्डिके मूतने आया है तो मूतके निकल.. भड़वागिरी मत कर..

आदमी बाहर चला जाता और रमन एक कबीननुमा बाथरूम में.. उसका लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था.. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. उसके दिमाग में तितली का चेहरा चल रही थी और लंड पर उसके हाथ अपने आप आगे पीछे हो रहे थे..

उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि जिसे वो नापसंद और नफरत करता है उसके नाम का जयकारा लगा रहा है.. रमन ने कुछ ही देर में अपने लंड से तितली के नाम का वीर्य लम्बी लम्बी धार के साथ बाहर निकाल दिया था..

रमन को खुद पर गुस्सा आ रहा था मगर वो क्या कर सकता था.. उसे लग रहा था की तितली उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है और वो उसकी तरफ मोहित होते चले जा रहा है जबकि होना इसका उल्टा चाहिए था.. रमन तितली के दिल में अपने लिए प्यार जगाने की कोशिश कर रहा था.. ताकि तितली उससे शादी के लिए मान जाए और प्रॉपर्टी ना ले.. मगर यहां तो तितली ने रमन के दिल में जगह बनाने की शुरुआत कर दी थी..

रमन वापस टेबल आ गया और दोनों खाना खाने लगे.. तितली को इस बात कर अंदाजा भी नहीं था की रमन ने अभी अभी उसके नाम का जयकारा लगाया है.. दोनों खाने के बाद वापस घर के लिए निकल चुके थे..

रमन - कल सुबह तुम्हे कोई काम तो नहीं है?

तितली - क्यों?

रमन - कुछ नहीं.. सोचा मूवी देख आते है..

तितली कुछ सोचकर - कल सुबह मैं बिजी हूँ.. हिसाब लगाना है ना प्रॉपर्टी का.. कहीं तुम मुझे कम ना दे दो..

रमन - और शाम को?

तितली - तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है?

रमन - कुछ नहीं क्यों?

तितली - तुम्हरा इतना अच्छा होना मुझे कुछ हज़म नहीं हो रहा..

रमन हसते हुए - हज़मे की दवा ले लो.. हज़म हो जाएगा..

तितली - कोनसी मूवी दिखाओगे?

रमन - तुम्हे जो पसंद हो.. कैसी मूवी पसंद है वैसे ?

तितली - मुझे तो रोमेंटिक मूवीज पसंद है..

रमन - हाँ एक लगी है रोमेंटिक.. बरसात की रात.. वो देखने चले..

तितली - वो रोमेंटिक नहीं वल्गर मूवी है.. तुम बस ऐसी ही मूवीज दिखाओगे मुझे..

रमन - अच्छा कोई और देख लेंगे.. अभी तो बहुत सारी मूवीज लगी हुई है थिएटर में..

तितली - तुम करना क्या चाहते हो वो बताओ.. मैं जानती हूँ तुम कुछ ना कुछ सोच रहे हो ताकि तुम्हे मुझे प्रॉपर्टी ना देनी पड़े.. मैं इतनी भोली नहीं हूँ कि तुम्हारी ये चाल समझ ना पाउ.. बताओ क्या प्लान है तुम्हारा? वरना पता तो मैं लगा ही लुंगी.. और प्रॉपर्टी तो मैं किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. वो तो मैं लेकर ही रहूंगी तुमसे.. बताओ क्या सोच रहे हो?

रमन कुछ देर ठहर कर - सोच रहा था.. तुम्हे पटाकर तुमसे शादी कर लूँ.. एक खूबसूरत डॉक्टरनी बीवी भी मिल जायेगी और आधी प्रॉपर्टी भी नहीं देनी पड़ेगी..

तितली रमन कि बात सुनकर जोर से हसते हुए - मुझे पागल समझा है? मत बताओ मैं अपनेआप पता कर लुंगी.

रमन - लो.. अब जब सब सच बता दिया तो तुम्हे यक़ीन ही नहीं हो रहा..

तितली -. तुम तो मुझे अपने बाप की रखैल समझते हो ना? मुझसे शादी करोगे? इतने बड़े देवता तो नहीं हो तुम.

तितली इतना कह कर गाडी कि रेक में पड़े पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से जलाते हुए सिगरेट पिने लगती है जिसे देखकर रमन कहता है..

रमन - मूझे बड़ा ज्ञान दे रही थी अब खुद ही..

तितली सिगरेट के कश लेकर - तुम पी सकते तो मैं क्यों नहीं.. लड़की हूँ इसलिए?

रमन - मैंने ऐसा कब कहा.. तुम्हे जो करना करो.. मैं कौन होता हूँ तुम्हे रोकने वाला.. हा.. अगर मेरी बीवी मेरे सामने ऐसे सिगरेट कश लगाती तो उसे सजा जरुर देता..

तितली सिगरेट पीते हुए - क्या सजा देते?

रमन - रहने दो.. सुनोगी तो घबरा जाओगी..

तितली मुस्कुराते हुए कार का शीशा निचा करके सिगरेट बाहर फेंकते हुए कहती है - तुम बहुत पुरानी सोच के हो ना.. लड़की को ये नहीं करना चाहिए वो नहीं करना चाहिए.. मर्दो की सारी बातें माननी चाहिए.. उनके काबू में रहना चाहिए.. उनकी जुतियों में पड़े रहना चाहिए.. वगेरा वगेरा...

रमन - इसमें गलत क्या है? ऐसा ही होना चाहिए.. मेरा तो यही मानना है..

तितली - अपनी बीवी को तो बहुत सताओगे तुम..

रमन - सताऊँगा ही नही.. मारूंगा भी.. अगर मेरी बात नहीं मानेगी तो थप्पड़ से मारूंगा.. सिगरेट शराब पीयेगी तो बेल्ट से.. शराब पीके गाली गलोच भी करूंगा.. दासी बनाके रखूँगा... हुकुम चलाऊंगा उस पर... लो.. घर आ गया.. मुझे तो अभी से बहुत नींद आ रही है..गुडनाइट...

रमन जाकर अपने कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है और सोचने लगता है कि अगर वो इसी तरह तितली के साथ घूमता फिरता और बातें करता रहा तो तितली आसानी से उसकी बात मान लेगी और उससे शादी कर लेगी..

तितली अपने कमरे में आकर एक कुर्सी पर बैठकर रमन के बारे में सोचने लगी कि रमन आखिर चाहता क्या है? रमन ने उसके साथ वाइन पी थी मगर कह रह था औरतों का शराब सिगरेट पीना पसंद नहीं.. और उसने बातों ही बातों में जो शादी के लिए कहा था वो? क्या वो सच बोल रह था?

तितली कि आँखों में आज नींद नहीं थी वो रमन के बारे में ही सोचे जा रही थी मगर रमन ओंधे मुंह बिस्तर पर खराटे ले रहा था..


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सूरज से बात करने के बाद सुमित्रा बाथरूम के लिए निकल गयी और बाथरूम का दरवाजा बंद करके अंदर अपनी चुत में ऊँगली करने लगी और सूरज के बारे में सोचने लगी.. सुमित्रा ने बाथरूम की दिवार पर बनी जगह मे अपना फ़ोन सीधा करके रख दिया जिसमे सुमित्रा ने सूरज की तस्वीर लगा रखी थी.. सूरज की तस्वीर देखकर सुमित्रा अपनी चुत मे ऊँगली कर रही थी और मन मे सूरज के साथ आलिंगन करने और अपने ही बेटे को भोगने के ख्यालों से खुदको रोमांचित और कामुक कर उसने सूरज के नाम पर वापस अपनी नदी का पानी बहा दिया था और जब तक वो बाथरूम से बाहर आई सूरज भी रचना की चुत में अपना माल भर चूका था और अब बेड के पास खड़ा होकर अपनी पेंट पहन रहा था.. रचना बिस्तर पर ही लेटी हुई थी उसकी सांवली चुत से दोनों का मिश्रित वीर्य घुलकर बह रहा था जिसे रचना अपनी ऊँगली से उठाकर चाटते हुए बोली..

देवर जी दूध तो पिया ही नहीं तुमने..

सूरज रचना के पास बैठकर उसके बूब्स दबाते हुए - रात को मेरे कमरे में सोना भाभी.. सारी इच्छा पूरी कर दूंगा..

रचना सूरज के होंठों पर से लिपस्टिक साफ करती हुई बोलती है - घर पर बहुत लोग है देवर जी.. वहा ऐसा कुछ नहीं हो पायेगा..

आप फ़िक्र मत करो भाभी छत पर कोई नहीं आएगा.. छत वाले कमरे में आज रात आपके दूध का स्वाद लूंगा..

वैसे एक बात बताओ.. इंटरनेट पर मुझे देखकर मेरे नाम का जयकारा तो लगाया होगा तूमने..

कई बार भाभी.. कई राते आपको देखकर ही बिताई है मैंने.. अब तो आप ही मेरा पकड़ कर जयकारा लगा देना..

ये भी कोई बोलने वाली बात है देवर जी? मैं तो आपकी दिवानी हो गई.. जब बोलोगे ख़ुशी ख़ुशी सब दे दूंगी..

भाभी अब चलता हूँ... आप भी अपनेआप को ठीक करके नीचे आ जाओ..

सूरज स्टेज की तरफ आ जाता है...

कब से ढूंढ़ रही हूँ.. चल..
सुमित्रा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए सूरज का हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले जाती है जहाँ विनोद गरिमा के साथ साथ जयप्रकाश गरिमा के पिता लख्मीचंद और माँ उर्मिला भी मौजूद थे.. एक फॅमिली फोटो खींचती है..

गरिमा का सारा ध्यान सूरज पर था और वो खा जाने वाली नज़र से सूरज को देख रही थी मगर सूरज जैसे अनजान बनकर गरिमा के सामने से निकल गया उसने गरिमा की तरफ देखा भी नहीं.. फोटो खिचवाने के बाद वो स्टेज से नीचे आ गया और गरिमा का दिल जोरो से दुखने लगा वो सूरज के इस व्यवहार को समझ नहीं पाई.. उसे यहां सबसे ज्यादा अगर किसको देखने और मिलने की तलब थी तो वो सूरज था मगर सूरज ने उसे ऐसे अनदेखा किया जैसे बॉलीवुड सेलिब्रेटी एक दूसरे को करते है..

गरिमा कब से सूरज का ही इंतजार कर रही थी और जब वो मिला भी तो अनजान बनकर.. गरिमा ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को काबू में रखा अगर वो अकेली होती तो शायद रो पड़ती.. उसे अब अपने मन में सूरज के लिए पनप रहे प्रेम का आभास होने लगा था.. उसके साथ उसका होने वाला हस्बैंड खड़ा था मगर उसका दिल तो सूरज के नाम से धड़कने लगा था.. गरिमा को अब इसका अहसास होने लगा था कि वो अब एक दो राहें पर खड़ी हुई है.. जहाँ से ना वो वापस मुड़ सकती थी ना आगे बढ़ सकती थी.. 14 दिन सूरज के साथ बात करके उसे ऐसा लग रहा था जैसे सूरज के साथ उसका 14 जन्मो का बंधन हो.. उसे अब समझ आने लगा था कि ये प्रेम है..

सूरज को लगा था कि गरिमा कहीं सबके सामने उसे ताने मारने ना लग जाए और इतनी देर उससे दूर रहने का करण पूछते हुए विनोद के सामने ही नाराजगी ना हाज़िर करने लग जाए इसलिए उसने जानबूझ कर गरिमा को अनदेखा किया और उसे दूर ही रहा..


************


क्या हुआ अक्कू? यहां गाडी बाइक क्यों रोक दी..

माँ वो सर दर्द होने लगा मैं मेडिकल से गोली ले आता हूँ..

अरे मेरे पास है गोली अक्कू.. तू घर चल मैं दे दूंगी..

नहीं माँ आप रहने दो आपको भी जरुरत पड़ती रहती है मैं ले आता हूँ अपने लिए..

अंकुश बाइक से उतर कर मेडिकल कि दूकान पर चला जाता है और नीतू मन ही मन मुस्कुराने लगती है.. उसके पीछे उसकी माँ गोमती बैठी हुई अंकुश के आने का इंतजार करने लगती है..

हाँ भाईसाहब क्या चाहिए?

1 कंडोम का पैकेट दे दो 8 वाला.. चॉकलेट फ्लेवर..

केमिस्ट एक नज़र बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर अंकुश से - ये लो भाईसाब.. भाईसाब एक बात पुछु..

अंकुश- हा बोलो..

केमिस्ट - दोनों बिलकुल कड़क है.. कहाँ से लाये हो इन को? क्या रेट है नाईट का?

अंकुश पीछे बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर केमिस्ट से - भोस्डिके काम कर अपना..

अंकुश कंडोम जेब में रखकर वापस बाइक चलाने लगता है वही पीछे नीतू और गोमती बैठ जाती है.. और तीनो कुछ मिनटों में घर पहुंच जाते है.. जिसके बाद गोमती अपने कमरे मे सो जाती है और अंकुश नीतू के साथ रासलीला रचाने लगता है..


***********


नज़मा कुछ बात हुई हनी से?

जी...... वो तैयार है..

शुक्र है नज़मा.. कम से कम घर में बच्चे की खुशी तो आएगी.. दूकान तो ठीक चलने लगी है अब तू भी पेट से हो जाए तो ख़ुशी दुगुनी हो जायेगी..

मैं बिस्तर ठीक कर देती हूँ..

मैं कल ही हनी से बात करूंगा..

नज़मा बिस्तर ठीक करके एक तरफ लेट गई और आगे आने वाले पलों के बारे में सोचने लगी.. उसे हनी पसंद था मगर उसके साथ सोने के बारे में नज़मा ने पहले कभी नहीं सोचा था.. परदे में रहने वाली नज़मा अब किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर और हमबदन दोनों होने वाली थी.. नज़मा को घबराहट हो रही थी और एक रोमांच भी उसके दिल को घेरे जा रहा था.. उसे आज नींद नहीं आने वाली थी..

बिलाल घर की छत पर सिगरेट का धुआँ उड़ाते हुए सोच रहा था कि नज़मा पेट से हो गई तो जो रिस्तेदार उसे नामर्द कहकर चिढ़ाते है ताने मारते है उनका सबका मुंह चुप हो जाएगा और वो चैन से जी पायेगा..


***********


हेमलता बिस्तर लेटी हुई अब भी उन पलों को याद कर रही थी जब सूरज ने घर कि छत वाले बाथरूम में उसके अपनी मजबूत बाहों में कसके पकड़ा था.. और आज उसका सुन्दर मुखड़ा देखकर हेमलता के मन में उसके प्रति मातृत्व भाव के साथ काम का भाव भी आरहा था.. सूरज हेमलता के सामने ही तो बड़ा हुआ था मगर काम पीपासा ने किसे अछूता छोड़ा है? 50 साल कि उम्र को पार कर चुकी हेमलता खुली आँखों से सूरज के साथ प्यार मोहब्बत के सामने देख रही थी..


वही उसकी बेटी बरखा जिसने सूरज को टूशन पढ़ाया था वो भी सूरज के बारे में ही सोच रही थी.. वो यहां अपने माँ बाप के पास उनसे मिलने इसलिए नहीं आई थी कि हेमलता और बंसी ने उसे बुलाया था बल्कि इसलिए आई थी कि उसके अपने पति के साथ सम्बन्ध सही नहीं चल रहा था.. उसकी गृहस्थी अस्त व्यस्त होने की राह पर थी.. बरखा के पति का एक्स्ट्रा मेरिटयल अफेयर चल रहा था जिसका पता बरखा को चल गया था और वो गुस्से में होने बच्चे को भी वही उसकी दादी के पास छोड़कर यहां आ गई थी.. बरखा के मन में सूरज के प्रति लगाव और स्नेह था.. बरखा सूरज से खुलकर बात कर सकती थी और जब वो आई थी तब रास्ते में उसने सूरज से ढ़ेर सारी बातें की थी.. बरखा को नींद नहीं आई तो वो हेमलता से छुपकर घर की छत पर आ गई और एक सिगरेट अपने होंठों पर लगाकर जलाते हुए कश लेती हुई यहां से वहा घूमने लगी.. उसने मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे.. जैसे उसके मन में कोई युद्ध चल रहा हो..


**********


गुनगुन अपने कमरे की बालकनी में खड़ी होकर बाहर सडक पर एक कुतिया और एक कुत्ते के बीच हो रहे सम्भोग को देख रही थी.. रात का सन्नाटा था और कुत्ता खम्बे के नीचे आराम और इत्मीनान से अपनी कुतिया को चोद रह था..

गुनगुन को कुत्ते कुतिया की चुदाई देखकर अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब वो सूरज के साथ कभी कॉलेज के स्टोर रूम में तो कभी अपनी सहेली के घर जाकर सम्भोग किया करती थी.. गुनगुन की सील सूरज ने ही तोड़ी थी और गुनगुन अपनी जिंदगी में सिर्फ सूरज से ही चुदी थी..

सूरज पढ़ने में अच्छा नहीं था.. अक्सर ऐसा होता था कि गुनगुन सूरज के लंड को चुत में लेके उसे पढ़ाती थी और उसके पढ़ने और याद करने पर उससे अपनी चुत मरवाती थी.. इसमें दोनों को बराबर का सुख मिलता था..
गुनगुन सयानी थी मगर सूरज बचकाना.. गुनगुन सूरज को अच्छे से संभालती थी और उसके कारण सूरज एग्जाम में पासिंग मार्क्स ले आता था..

गुनगुन को आज भी याद है जब वो घुटने के बल बैठकर कॉलेज की छत पर सूरज के लंड को मुंह में लेकर उसे चूसते हुए सूरज को blowjob दे रही थी तब सूरज ने बड़े प्यार से गुनगुन को कहा था.. गुनगुन मुझे कभी छोड़ के मत जाना यार.. मैं ख़ुशी से जी नहीं पाऊंगा तेरे बिना..

ये सोचकर गुनगुन की आँख में आंसू आ गए.. गुनगुन सूरज को ढूंढ़ रही थी मगर सूरज उसे कहीं नहीं मिला.. गुनगुन ने कॉलेज से घर का एड्रेस पता किया तो पता चला की सूरज के परिवार ने घर बदल दिया था.. और कॉलेज में किसी को भी उसके बारे में पता नहीं है.. गुनगुन को ये तब नहीं पता था कि सूरज के घर का नाम हनी है... गुनगुन कि आँख में आंसू थे.. उसने सिगरेट का लम्बा कश लेते हुए सूरज को याद किया और सामने चल रही कुत्ते कुतिया कि चुदाई देखने लगी..

गुनगुन सिगरेट नहीं पीती थी मगर जब वो एग्जाम कि प्रिपरेशन कर रही थी तब साथ कि एक लड़कियों ने देर तक जागनेके लिए उसे सिगरेट पीना सिखाया और गुनगुन अब भी कभी कभी जब वो उदास और मायूस होती सिगरेट पी लेती थी..

गुनगुन को कुत्ते में सूरज और कुतिया में खुदकी शकल दिखने लगी थी और अब उसकी चुत से तरल पदार्थ रिसने लगा रहा.. गुनगुन सिगरेट के कश लेती हुई सूरज को वापस हासिल करने के ख्वाब देख रही थी..
एक आदमी जो सडक पर चल रहा था उसने कुत्ते और कुत्तिया को चुदाई करते देखकर पत्थर मारना शुरू कर दिया.. कुत्ते का लंड और कुतिया की चुत में चिपक गया था और दोनों इसी तरह उस आदमी से बचकर भाग गए.. गुनगुन को याद आने लगा कि एक दिन जब गुनगुन को घर आने कि जल्दी थी और सूरज उसकी चुत में लंड घुसा के लेटा हुआ था तब गुनगुन के कहने पर कि मुझे जाने दो सूरज ने जवाब दिया था.. मेरा लंड तो तेरी चुत मे चिपक गया है गुनगुन.. निकलता ही नहीं है... गुनगुन ने उस बात को याद करके मुस्कुराते हुए सिगरेट बुझाकार फेंक दी और वापस आकर बिस्तर में लेट गयी.. नींद उसकी आँख में भी नहीं थी..


************


रात के दस बज चुके थे.. सूरज ने vigra ली थी और अब तक कई बार झड़ चूका था.. सूरज गबरू जवान था और उसके कारण उसपर vigra का असर तुरंत हो गया था जिसके करण रचना और नेहा को उसने चोद दिया था... विनोद और गरिमा के साथ घर के बाकी लोग भी अब खाने के लिए बैठ गए थे मगर सूरज को भूक नहीं थी वो अपना खड़ा लंड लेकर बिल्डिंग कि छत पर आ गया था.. जहाँ वो एक तरफ बैठकर सोच रहा था कि उसपर से ये असर अब कब ख़त्म होगा? सूरज को छत ओर जाते हुए किसी ने देख लिया था और वो शख्स भी सीढ़ियों पर खड़ा हुआ सूरज को छत पर एक तरफ अपना लंड पकड़ के बैठे हुए देख रहा था..

सूरज ने कुछ देर बाद देखा कि कोई उसकी तरफ चला आ रहा है.. सूरज ने जैसे नज़र उठाकर देखा तो एक औरत सूरज के पास आकर अपने घुटनो पर बैठते हुए कहती है - भईया जी..

फुलवा.. तू यहां क्या कर रही है?

भईया जी आपको देखा तो मिलने चली आई.. आपने इतना बड़ा उपकार किया मेरे ऊपर.. मेरा घरवाला भी यहां आ गया है धरमु ने उसे काम दिया है.. आपने तो मेरा नसीब बदल दिया.. भईया आपको क्या हुआ है?

कुछ नहीं.. फुलवा जा यहां..

भईया जी हाथ से क्या पीछा रहे हो.. और आपको क्या हुआ है? आपको कोई दिक्कत है?

सूरज की नज़र फुलवा की चोली में गई तो उसके लंड में और अकड़न आ गई और फुलवा ने सूरज के लंड को पेंट के अंदर ही पूरी औकात में खड़ा देख लिया और हसने लगी.. और बोली - भईया जी लगता है आज बहुत मन है आपका?

सूरज फुलवा के बूब्स घूरकर - फुलवा जा यहां वरना कुछ हो जाएगा..

फुलवा हस्ती हुई - भईया जी लाओ.. मैं मदद कर देती हूँ आपकी..

सूरज - नहीं फुलवा.. रहने दे..

फुलवा सूरज का हाथ उसके लंड पर से हटा कर उसके पेंट की ज़िप खोल लेती है और सूरज के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है.. फिर सूरज का एक हाथ अपनी चोली के अंदर घुसा कर उसके लंड पर अपने होंठ लगा देती है और फिर धीरे धीरे प्यार से लंड चूसाईं शुरू कर देती है जिसमे सूरज को आराम आ आने लगा था और मज़ा भी मिलने लगा था.. सूरज एक हाथ से फुलवा के बूब्स दबाते हुए उसे लंड चुसवा रहा था तभी उसका फोन आ गया और सूरज उठाकर बातकरने लगा..

हेलो..

हनी तू फिर से कहा गायब हो गया? खाना नहीं खाना तुझे?

भूक नहीं है माँ..

अरे भूक क्यों नहीं है तुझे? देख यहां सब खाने के लिए बैठ गए है तू जल्दी आ..

कहा ना भूक नहीं है.. आप खा लो..

हनी तू है कहा? किसके साथ है?

मैं यही हूँ माँ.. आप फ़िक्र मतकरो.. आप खाना खाओ..

नहीं.. जब तक तू नहीं आएगा मैं नहीं खाऊंगी.. समझा..

माँ यार क्या बच्चों जैसी ज़िद करने लगी आप.. खा लो ना.. पहले भी तो खाती थी..

खाती थी पर अब से नहीं खाऊंगी.. तू आएगा तभी खाऊंगी.. समझा..

ठीक है थोड़ी देर रुको मैं आता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

फुलवा सूरज का पूरा लंड गले तक ले जाती है और अब जोर जोर से चूसने लगती है..

अह्ह्ह.. फुलवा.. अह्ह्ह.. अह्ह्ह

फुलवा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे वो लंड चूसने के लिए ही पैदा हुई हो.. उसने 10 मिनट के अंदर ही सूरज को अपने मुंह से ठंडा कर दिया था..

सूरज ने अपने बटुए से पांच सो का एक नोट निकालकर फुलवा की चोली में घुसा दिया और फुलवा का बोबा पकड़कर मसलते हुए बोला - फुलवा.. तू कमाल है..

फुलवा ने अपनी चोली से पैसे निकालकर सूरज से कहा - भईया जी.. ये क्या है? आप मेरी कीमत लगा रहे हो..

नहीं फुलवा.. मैं बस तुझे इनाम दे रहा हूँ.. चोली फटी हुई है तेरी नई ले लेना..

फुलवा ने अपनी चोली उतार कर एक तरफ रख दी और कमर से ऊपर पूरी नंगी होकर वापस सूरज के लंड को पकड़ती हुई मुंह में लेकर चूसने लगी..

फुलवा क्या कर रही है.. अह्ह्ह्ह.. आराम से.. फुलवा.. छोड़ ना.. वापस खड़ा हो जाएगा.. फुलवा...

वही तो करना है भईया जी.. ये कहकर फुलवा वापस लंड चूसने लगती है और दो मिनट में ही सूरज का लंड वापस खड़ा हो जाता है..

फुलवा.. बड़ी मुश्किल से झड़ा था तूने वापस खड़ा कर दिया..

मैं वापस झड़वा दूंगी भईया जी आप फ़िक्र मत कीजिये.. ये कहकर फुलवा अपना घाघरा उठाकर सूरज के लंड पर बैठ गई और सूरज का लंड घप करके फुलवा की चुत में चला गया.. फुलवा की चुत बड़ी थी उसे लंड लेने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई बल्कि मज़ा आने लगा.. वो सूरज के लंडपर उछलने लगी और अपने दोनों चुचे हिला हिला कर सूरज के मुंह पर मारने लगी.. सूरज दोनों हाथ से फुलवा की कमर पकड़ कर उसके बूब्स को कभी चूस तो कभी चाट रहा था..

पास में उसका फोन पड़ा था जिसमे अब सुमित्रा के साथ साथ गरिमा का फ़ोन भी आने लगा था और सूरज को इसका ध्यान नहीं था वो फुलवा की काम कला से काम के सुख में डूब गया था.. गरिमा और सुमित्रा ने कई बार सूरज को फ़ोन किया मगर सूरज ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया या यूँ कहे की उसे फ़ोन साइलेंट होने से पता ही नहीं चला..

फुलवा निकलने वाला है.. हट..

अंदर निकाल दो ना भैयाजी..

पागल है क्या फुलवा? कंडोम नहीं लगा हुआ.. हट..

फुलवा लंड चुत से निकाल कर मुँह मे भर लेती है और सूरज को अपने मुँह मे झड़वा लेती है मगर अब तक रात के साढ़े दस बज चुके थे और फंक्शन लगभग ख़त्म हो चूका था.. सुमित्रा के अलावा सबने खाना खा लिया था गरिमा का मन नहीं था मगर उसे भी सबके दबाव ने खाना खाना पड़ा था..

सूरज ने फ़ोन देखा तो चौंक गया और फुलवा का बोबा पकड़ के उसे साइड करते हुए अपने लंड पर से हटा दिया फिर पेंट बंद करके जल्दी से खड़ा हो गया..

क्या हुआ भैया जी?

फुलवा मर गया आज तो.. इतना लेट हो गया.. जाना पड़ेगा जल्दी निचे..

फुलवा भी खड़ी होकर अपनी चोली पहनती हुई - भैया जी जब भी आपका मन करे तो मिलने का अहसान जरुरत कीजियेगा.. आप जैसे बोलेंगे मैं वैसे आपको खुश कर दूंगी..

सूरज निचे आ जाता है..

सुमित्रा ने जैसे ही सूरज को देखा वो गुस्से से बोल पड़ी..

कहा था तू.. मेरी बात की जरा भी परवाह है या नहीं तुझे? किस लड़की के साथ था? बता?

माँ क्या बोल रही हो.. कहीं फंस गया था.. सॉरी.. आपने खाना नहीं खाया ना? चलो खाते है..

अब नहीं खाना मुझे.. सब का खाना हो गया सब चले भी गए और अब तेरे पापा के साथ बाकी लोग भी घर जा रहे है तेरी मर्ज़ी हो तो घर आ जाना वरना जिस लड़की के साथ मुंह काला कर रहा था उसी के साथ रह जाना..

कौन लड़की कैसी लड़की? क्या बोल रही हो किसी लड़की के साथ नहीं था.. कहा ना कहीं फंस गया था..

हनी ऐसा है मुझे अभी बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ है मेरा हाथ उठ जाएगा.. तूझे जो करना है कर.. हट मुझे जाने दे..

अरे माँ सुनो तो... चलो ना खाना खाते है अभी तो खा सकते है..

मुझे नहीं खाना.. हट..

देखो आपने वादा किया था आप मुझसे नाराज़ नहीं होगी..

तूने भी एक वादा किया था मुझे सब सच बताएगा.. बोल किसके साथ था.. कौन लड़की थी? देख मैंने फ़ोन पर आवाज सुनी थी उस लड़की.. पहले भी और अभी भी.. सच बता.. वरना कभी बात नहीं करुँगी..

माँ.. वो..

वो क्या कौन थी? चिंकी थी?

माँ.. चिंकी कहा से आएगी.. आप क्या बोल रही हो.. उससे तो बात भी नहीं की मैंने जब से उसकी शादी हुई है..

तो कौन थी?

कॉलगर्ल थी..

कौन? कौन सी गर्ल थी..

कोनसी गर्ल नहीं माँ.. पैसे लेकर.. जो आती है.. वो... कॉल गर्ल.. बस?

सुमित्रा गुस्से से - छी.. अब ये सब करेगा? शर्म नहीं आती तुझे?

सूरज नज़र झुकाकर कान पकड़ते हुए - सॉरी.. माँ..

सुमित्रा पास आकर कान में - कंडोम तो लगाया था ना?

सूरज गर्दन हां में हिला देता है..

सुमित्रा फिर से बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - लगता है तेरी शादी भी विनोद के साथ ही करवानी पड़ेगी.. बहुत जवानी फूट रही है नवाब को.. चल अब..खाना खाते है..

आप बैठो खाना लेके आता हूँ माँ..

सूरज प्लेट उठाकर खाना लेने चला जाता है और सुमित्रा सूरज को देखकर मन ही मन सूरज के साथ सेज सजाने के ख्याली पुलाव बनाकर अपने आप को कल्पनाओ की दुनिया में ले गई उसकी चुत गीली हो उठी थी.. वो सोच रही थी की सूरज ने एक रंडी को ये बोलने पर मजबूत कर दिया.. आराम से.. मतलब सूरज सम्भोग करने में माहिर और खिलाड़ी होगा.

मुन्ना और नेहा भी अब काम निपटाने में लगे थे और अब बचा हुआ सामान घर पहुंचने के लिए किसको बुला लिया था..

सूरज खाना ले आया और सुमन के साथ बैठकर खाने लगा.. दोनों साथ में खाना खा रहे थे और एक दूसरे से बिना कुछ बोले एक दुसरे को कभी कभी देखकर खाने का स्वाद लेने लगे थे.. खाने के बाद सुमित्रा ने देखा की लख्मीचंद और उर्मिला उसी की तरफ आ रहे थे और गरिमा के साथ बाकी सभी लोग जो उनकी तरफ से आये थे वापस जाने के लिए बस में बैठ गए थे..

सूरज ने जैसे ही लख्मी चंद और उर्मिला को देखा उसे याद आया कि उसने गरिमा से बात तक नहीं कि है..

सूरज वहा से बस कि तरफ चला गया और बस की खिड़की में गरिमा को देखकर व्हाट्सप्प पर गरिमा को से बस से बाहर आने को कहा.. गरिमा ने massage देखकर अनदेखा कर दिया और बस से कुछ दूर खड़े सूरज को गुस्से से देखकर मुंह मोड़ लिया..

सूरज ने गरिमा को कॉल किया मगर गरिमा ने फ़ोन भी नहीं उठाया और आँखे बड़ी बड़ी करके सूरज को घूरने लगी फिर मुंह फेर लिया.. सूरज समझ आ चूका था की गरिमा उस पर बहुत गुस्सा है और नाराज़ है..

सूरज ने व्हाट्सप्प पर लिखा - सॉरी भाभी..

गरिमा देखकर अनदेखा कर दिया और सूरज के बार बार massage और फ़ोन का कोई रिप्लई नहीं दिया..

सूरज के देखते ही देखते सब सब लोग बस में बैठ गए और बस चली गई किन्तु गरिमा ने सूरज से बात नहीं की..

सबके जाने के बाद सूरज भी घर आ गया.. और अपनी गलती पर मन ही मन खुदको बुरा भला कहने लगा.. सूरज को नहीं लगा था कि उसकी इतनी सी गलती से गरिमा इतना नाराज़ हो जायेगी मगर बात कुछ और थी.. गरिमा सूरज को मन ही मन चाहने लगी थी और एक माशूका अपने महबूब से इसी तरह नाराज़ हो जाया करती है.. मगर इसका इल्म सूरज को नहीं था.

सूरज अपने कमरे में आ गया और गद्दे पर उल्टा लेट गया.. उसने आज गुनगुन को देखा था जिसे वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था मगर शायद वक़्त ने उसके दिल से गुनगुन के लिए जो प्यार था उसे दबा दिया था.. सूरज गुनगुन के जाने के बाद जिन हालातों से गुजरा था उसे उभरते उभरते उसने गुनगुन को कभी ना मिलने की कसम खा ली थी.. थकावट के कारण उसे नींद आ गई थी.

रचना नज़र बचाकर उसके कमरे आई तो उसे सोता हुआ पाया और अपनी किस्मत को कोसती हुई वापस चली गई.

अगली सुबह जबतक सूरज की आँख खुली लगभग सभी मेहमान जा चुके थे.. सूरज ने उठते ही गरिमा को सॉरी मैसेज सेंड किया और गरिमा ने तुरंत उसे seen कर लिया मानो वो उसी के इंतजार में बैठी हो.. आज का पूरा दिन सूरज ने गरिमा को अनगिनत मैसेज और कॉल किये मगर गरिमा ना massage का रिप्लाई दिया ना कॉल उठाया..

कल रात गरिमा दिल दुख रहा था मगर आज उसको एक अजीब सुकून मिल रहा था उसके होंठों पर मुस्कान थी.. वही सुकून जो अपने प्रेमी को अपने लिए तड़पते देखकर मिलता है.. गरिमा का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो हर बार सूरज का massage seen करके छोड़ देती.. कोई जवाब नहीं देती..

सूरज और गरिमा के बीच कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.. सूरज रोज़ सुबह से रात तक गरिमा को पचासो मैसेज भेजता और गरिमा मैसेज देखकर मुस्कुराते हुए बिना रिप्लाई दिए फ़ोन बंद कर देती..

सगाई के सात दिन बाद तक ऐसा ही चलते रहा और सूरज घर से बाहर कहीं नहीं गया.. बस अपने कमरे में ही रहा.. उसके अंकुश और बिलाल ने भी मिलने को बुलाया मगर सूरज बात टाल कर फ़ोन रख देता..

सूरज को गरिमा से ना कोई मोहब्बत थी ना लगाव था उसे बस गरिमा से बात करना और उसके साथ बात करते हुए समय बिताना अच्छा लगता था.. सूरज
गरिमा से बात करने के लिए तड़प नहीं रहा था बस वो चाहता था कि गरिमा एक बार उसे बात कर ले ताकि सूरज गरिमा से माफ़ी मांग सके.. सूरज गरिमा को भाभी कि नज़र से ही देखता था और गरिमा के लिए उसके मन में कोई पाप नहीं था..


मुंह क्यों लटका हुआ है तेरा?

कहा लटका हुआ है? ठीक तो है..

चेहरे पर बारह बज रहे है.. क्या हुआ क्या बात है?

कुछ नहीं वो तो रात को ठीक से नींद नहीं आई इसलिए.. चाय दे दो..

सुमित्रा ने चाय देते हुए कहा - तेरे पापा बात करना चाहते है तुझसे.. सुबह पूछ रहे थे.. मैंने कहा अभी सो रहा है शाम को बात कर लेना..

मुझसे क्या बात करेंगे?

मुझे क्या पता? शायद कुछ जरुरी होगी तभी कह रहे थे वरना क्यों कहते.. और तू बोर नहीं होता अकेले?

नहीं.. मुझे अकेले रहना पसंद है.. आपका फ़ोन देना..

मेरा फ़ोन? क्यों?

किसीको फ़ोन करना है मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है..

तो कब तक पुराना फ़ोन चलाएगा नया लेले..

ले लूंगा आप दो ना अपना फ़ोन..

एक मिनट..
सुमित्रा चेक करती है कि उसके फ़ोन में सारी अप्प पर लॉक ठीक से लगा है या नहीं फिर सूरज को फ़ोन दे देती है कॉल खोल के..

सूरज गरिमा का नम्बर डायल करता है और छत पर चला जाता है..

हेलो..

भाभी आपको मेरी कसम है फ़ोन मत काटना..

गरिमा कुछ नहीं बोलती..

भाभी सॉरी.. उस दिन गलती हो.. आप बात तो करो.. ऐसे मेरा फ़ोन और massage इग्नोर करोगी तो मैं वापस आपको कभी massage और कॉल करूंगा ही नहीं..

गरिमा सूरज कि आवाज सुनकर खुश हो गई थी मगर जाताने के लिए कि वो कितनी नाराज़ है उसने कहा.. मत करना..

सूरज - ठीक है अब ना massage आयेगा ना कॉल आएगा आपको मेरा..

सूरज फ़ोन काट देता है और गरिमा सोचने लगती है कि क्या सूरज सच ने उसे मैसेज और कॉल नहीं करेगा? उसका दिल भारी सा होने लगता है गरिमा का मन करता है अभी वापस सूरज को फ़ोन करके उससे बात करें मगर उसका गुस्सा अभी सूरज पर शांत नहीं हुआ था ना ही उसकी नाराज़गी ख़त्म हुई थी ऊपर से गरिमा का अहंकार या कहो आत्मसम्मान भी उसे इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था..

सूरज नीचे आ गया और फ़ोन सुमित्रा को देकर घर से बाहर चला गया.


**************


नीतू छोड़ यार ऑफिस के लिए लेट हो जाऊँगा.

आज छूटी ले ले ना अक्कू.

क्यों आज क्या स्पेशल है?

अक्कू आज जोगिंदर के साथ समझौता होने वाला वो पैसे देगा.. वकील साहिबा ने बुलाया है.. चल ना मेरे साथ..

मम्मी को ले जाना नीतू.. मुझे उनसब चीज़ो में कोई दिलचस्पी नहीं है.. और तेरी वकील साहिबा मुझे देखते ही फिर से नैनो के तीर चलाना शुरू कर देगी.

अरे उसकी चिंता तू मत कर अक्कू.. वकील साहिबा को मैं संभाल लुंगी.. चल ना.

देख नीतू मुझे उस जोगिंदर कि शकल वापस नहीं देखनी.. तू जिद मत कर.. मम्मी को ले जा वो वैसे भी टीवी देखते देखते घर पर बोर हो जाती है.. चल जाने दे.

अक्कू रुको.

अब क्या है?

टिफिन तो लेते जाओ..

अंकुश नीतू के हाथ से टिफिन और होंठो से एक प्यार भरा चुम्मा लेकर ऑफिस के लिए निकल जाता है और नीतू नीचे गोमती के कमरे में आकर उससे कहती है..

मम्मी.. वकील ने बुलाया है आज समझौता होने वाला है.. कुछ दिनों में तलाक़ भी हो जाएगा.. आप चलोगी मेरे साथ.

गोमती अपनी गहरी सोच से बाहर आते हुए - तलाक़ के बाद क्या करेंगी नीतू? कैसे जियेगी अपनी जिंदगी?

नीतू गोमती के पास बैठ कर - आप फ़िक्र मत करो माँ.. मैं ऐसे ही खुश हूँ.

गोमती एक पेनी नज़र नीतू पर डाल कर कहती है - खुश? अरे जो लड़की तलाक़ लेकर पूरी उम्र घर पर बैठकर बिताती है उसे किस नज़रो से लोग देखते है जानती भी है? एक बार फिर सोच ले.. जोगिंदर से बात करेंगे तो वो फिर से तुझे रखने को तैयार हो जाएगा.

नीतू - माँ मैं उस आदमी के पास वापस कभी नहीं जाउंगी.. आपको चलना है तो चलो वरना साफ मना कर दो.. मैं अकेली चली जाउंगी.

गोमती - नीतू मैं अंधी नहीं हूँ.. घर में जो हो रहा है मुझे साफ नज़र आ रहा है.. मैं चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ नहीं जानती.. लोगों का तो ख्याल कर.. किसीको तेरी करतूत के बारे में पता चलेगा तो क्या इज़्ज़त रह जायेगी पुरे घर की.. मैं एक बार फिर तुझे समझा रही हूँ.. सोच ले.

नीतू - मैंने सोच लिया है माँ.

गोमती - नीतू मन कर रहा है तुझे जान से मार दूँ मगर क्या करू.. माँ जो हूँ तेरी.. अरे सारी जिंदगी क्या अपने छोटे भाई की रखैल बनकर रहेगी तू? क्या जिंदगी होगी तेरी सोचा है कभी? अक्कू तो मर्द जात है उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा मगर तू कुछ तो सोच. जब अक्कू की शादी होगी तब क्या हाल होगा तेरा?

नीतू नज़र झुका कर - तलाक़ के बाद मैं ही अक्कू से शादी करुगी माँ.. अक्कू और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते है.. मुझे पता नहीं आप सब जानती है वरना मैं आपको पहले ही बता देती.

गोमती - पता नहीं था.. तेरे कमरे का पलंग कैसे टूट जाता है तुझे लगता है मुझे पता नहीं चलता. घर के किस कोने में तुम भाई बहन कब क्या रास लीला रचाते हो मुझे सबकी खबर रहती है. मैं कुछ बोलती नहीं क्युकी डरती हूँ अगर किसीको पता चल गया तो क्या होगा? मगर अब बात हद से आगे बढ़ गई है.

नीतू - माँ अक्कू और मैंने ये घर छोड़कर कहीं और रहने का सोचा है.. एक बार तलाक़ हो जाए फिर हम ये घर बेचकर कहीं और शिफ्ट हो जायेगे.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा.. मैं अक्कू से शादी करूंगी और उसके बच्चे की माँ भी बनुँगी.. अक्कू से मैं प्यार करती हूँ माँ.

गोमती कुछ देर चुप रहकर - एक बार फिर सोच ले नीतू.. ये सब गलत है.

नीतू - प्यार सही और गलत की परवाह नहीं करता माँ.आपको हमारा साथ देना ही होगा.. आप मेरे और अक्कू से नाराज़ नहीं हो सकती.. माँ.. वकील साहिबा का फ़ोन आ रहा है.. बुला रही होगी.. मैं चलती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ तेरे साथ.

गोमती और नीतू रिक्शा लेकर कोर्ट पहुचे जाते है और समझौते के अनुसार पैसे ले लेते है फिर तलाक़ के लिए एक फ़ाइल पेश होती है और उसमे डेट लेकर वापस अपने घर आने के लिए कोर्ट से निकल जाते है..

रास्ते में नीतू - भईया वो बैंक के आगे रोकना.

गोमती - क्या हुआ नीतू?

नीतू - माँ बैंक जाकर आती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ.. भईया यही इंतजार करियेगा.. हम आते है.

नीतू पैसे अंकुश के अकाउंट में जमा करवा कर वापस गोमती के साथ रिक्शा में आकर बैठ जाती है और घर के लिए निकल जाती है.


****************


सूरज झील के किनारे बैठा हुआ अपने ही ख्यालों में गुम था कभी वो गरिमा के बारे में सोचता तो कभी गुनगुन के.. कभी उसका मन चिंकी के पास जाकर उसके साथ सम्भोग करने का होता तो कभी उसे चिंकी के घर पर उसके परिवार के होने का ख्याल आता और वो वापस किसी और ख्याल में खो जाता..
अभी तक नेहा ने सूरज को फ़ोन नहीं किया था और रचना तो अब सूरज से हर दिन थोड़ी बहुत बातचीत कर ही लेती थी.. रचना के साथ सूरज अब खुलकर बात करने लगा था मगर वो बात सिर्फ दोनों के बीच की ही होती..

रमन सूरज के पास आकर बैठ जाता है और कहता है - अच्छा हुआ भाई तूने यहां आने के लिए कह दिया. मैं भी घर पर बैठा बैठा बोर हो गया था..

सूरज - बता क्या कह रहा था.. काफी परेशान लग रहा है..

अरे क्या बताऊ यार वो औरत है ना.. उसने जीना हराम कर रखा है.. जब भी घर जाऊं.. धमकिया देती रहती है..

कौन लड़की? अच्छा.. तेरे बाप के रखैल की बेटी.. भाई वैसे तेरा बाप बड़ा रंगीन था..

अरे भाई क्या बताऊ यार.. मेरे बाप ने मेरे लिए फंदा तैयार किया है.. बहनचोद.. जब भी घर जाऊ उसकी शकल सामने आ जाती है..

क्या हो रहा है? बोल क्या रही है वो? सॉरी क्या नाम बताया था तूने उसका.. हां.. तितली..

क्या कहेगी.. साली.. बोल रही है बटवारा करो.. आधा हिस्सा चाहिए उसे.. बहनचोद.. मेरे बाप को भी सारी प्रॉपर्टी उसीके नाम करनी थी. सगे बेटे को कुछ नहीं दिया.

तू कह रहा था तेरे बाप की डॉक्टर भी थी वो.. इलाज़ करती थी तेरे बाप का? सही है मा बाप की रखैल और उस रखैल की बेटी बाप की डॉक्टर.. वैसे भाई अब क्या करेगा?

वही सोच रहा हूँ हनी.. समझ नहीं आ रहा यार..

वैसी तेरी ही तो उम्र की है.. अगर तुझे शकल पसंद है तो तू शादी कर ले.. बटवारा होने से बच जाएगा..

पागल है क्या चूतिये.. क्या कुछ भी बोल रहा है.. दिखने में अच्छी है तो क्या गले से बांध लू.. पैसो के लिए उसकी मा मेरे बाप की रखैल बनी.. अब उसकी बेटी आधी प्रॉपर्टी मांग रही है.

सूरज हसते हुए - भाई डॉक्टर है तेरा भी इलाज़ कर देगी मुफ्त में.. तू अच्छा दीखता है.. शायद पिगल जाए तेरे ऊपर.. और आधी मांग रही है वरना चाहे तो पूरी भी ले सकती है..

रमन - चने के झाड़ पर मत चढ़ाये जा.. गलत ही फ़ोन किया तुझे भी.. कुछ सलूशन देने की जगह मेरी ही गांड मारने लग गया.. कभी बात करते देखा है उसे? ऐसा लगता है जैसे अभी ऑपरेशन कर देगी..

सूरज - मैं क्या सलूशन दू मैं खुद उलझा पड़ा हूँ..

चल भाई आज दारु पीते है..

दिन में?

एक बियर तो पी ही सकते है.. चल बैठ गाडी में..

रमन सूरज को लेकर गाडी चलाता हुआ किसी बार में आ जाता है और दोनों एक टेबल पर बैठकर बियर पीते हुए वापस बात करने लगते है..

अब तो लगता है आधी प्रॉपर्टी हाथ से जाने ही वाली है.. कभी कभी अपने बाप पर बहुत गुस्सा आता है..

शुक्र कर पूरी नहीं ले रही. वैसे किस बात का गुस्सा.. और साले आधी भी बहुत है.. तेरा बाप तो कुछ नहीं छोड़ के गया तेरे लिए.. वो तो फिर भी आधी दे रही है.. हसते हुए..

तू भी मज़ाक़ बना ले साले.. उस लालची औरत से परेशान हूं ही..

डॉक्टर है लालची तो होगी ही.. वैसे एक बार मेरी बात मान के देख के.. क्या पता मान जाए...

तेरा दिमाग खराब है क्या भोस्डिके.. क्या कह रहा है..

बहन ले लंड बाप की पूरी जायदाद चाहिए या नहीं? मेरी तरह खाली जेब सडक पे घूमना है तैसे बस की बात नहीं.. और शादी करने को कह रहा हूँ.. कोनसा सुहागरात बनाने को कह रहा हूँ.. पटा के शादी कर ले.. प्रॉपर्टी तेरे हाथ में रहेंगी फिर तेरी ऐयाशी भी चलती रहेंगी..

भाई नहीं मानेगी...

कोशिश तो कर गांडु.. कॉलेज में चीटिंग करके कितनी लड़कियों को से थप्पड़ खाये थे तूने.. ज्यादा से ज्यादा तितली भी एक चिपका देगी.. और अगर मान गई तो तेरी मोज़ है.. प्यार से बात कर कुछ दिन.. उसे रेस्पेक्ट दे फिर शादी के लिए ऑफर मार दे..

उसकी शकल देखते ही गुस्सा आता है बहनचोद उससे प्यार से बात करू?

सूरज- पैसा सब करवा देगा..

रमन - अब किसका फ़ोन आ रहा है तुझे?

सूरज फ़ोन उठाकर - हां बिल्ले.. बोल..

बिलाल - बहुत बिजी रहने लगा है हनी.

सूरज - अरे नहीं यार.. कुछ नहीं. बस ऐसे ही.

बिलाल - कुछ बात करनी थी.. दूकान पर आएगा?

सूरज फ़ोन काटते हुए - हां.. आ रहा हूँ..
चल रमन छोड़ दे मुझे..

रमन - ठीक है चल..

रमन सूरज को बिलाल की दूकान पर छोड़कर घर निकल जाता है..

सूरज दूकान में आकर कुर्सी पर बैठ जाता है और बिलाल उसी तरह उसके कंधे पर दोनों हाथ रखकर दबाते हुए कहता है - ये तो वही था ना जिसे गार्डन में देखा था.. काफी बड़ी फर्म लगता है..

सूरज - इसका ही गार्डन है.. कॉलेज का दोस्त है..

बिलाल - रुक मैं नज़मा को चाय के लिए कह कर आता हूँ..

सूरज - नहीं बिल्ले... छोड.. बियर पी है थोड़ी देर पहले..

बिलाल - अच्छा हनी.. आज रात अम्मी मामू के यहां रहेंगी.. तू रात को यही रुक सके तो अच्छा रहेगा..

सूरज कुछ देर सोचकर - मैं आ जाऊंगा बिल्ले..

बिलाल - ले..

सूरज - ये क्या है?

बिलाल - पैसे है.. जो तूने दिए थे..

सूरज - छोड़ ना यार बिल्ले.. कभी जरुरत होगी तो मांग लूंगा.. चल मैं घर जाता हूँ..

बिलाल - मैं व्हाट्सप्प करूंगा हनी..

सूरज - ठीक है..

सूरज घर आ जाता है और अपने कमरे में जाकर फ़ोन में किसी से बात करने लगता है..


************


रमन अपने घर पहुँचता है तो घर में घुसते ही उसे तितली नज़र आती है और उसे देखकर सूरज की बातों को याद करने लगता है और तितली को ऊपर से नीचे देखकर उसकी खूबसूरती जो उसने अब से पहले कभी नोटिस नहीं की थी उसका जायजा ले रहा था..

तितली ने रमन को देखकर कहा - क्या सोचा है तुमने? सीधी तरह से मेरी बात माननी है या मैं कोर्ट में जाकर सारी प्रॉपर्टी ले लु?

तितली (24)
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रमन तितली की तरफ आकर अपने जेब से एक फूल निकालकर तितली को देते हुए - आज bday है ना तुम्हारा.. हैप्पीबर्थडे.. मैं तैयार हूँ.. अगले महीने शायद गाँव वाली जमीन के केस का फैसला आ जाएगा उसके बाद तुम जो कहोगी कर लेंगे..

तितली हैरानी से रमन को देखने लगी.. जो अब से पहले कभी उससे सीधे मुंह बात तक नहीं करता था और हमेशा उसकी मा को बाप की रखैल कहकर ही बुलाता था आज उसे bday विश कर रहा था और उसकी बात को इतनी आसानी से मान गया था.. तितली ने आगे कुछ नहीं कहा..

रमन ने नोकरानी शान्ति से खाना देने को कहा और अपने कमरे में चला गया.. तितली देखती ही रह गई और कुछ देर बाद वो भी अपने कमरे में चली गई और लगातार इसी बारे में सोचने लगी फिर उस फूल को जिसे रमन ने दिया था देखने लगी और बाद में उसे डस्टबिन में डाल दिया..

रात के 9 बज गए थे और तितली अब भी अपने कमरे में थी.. रमन तितली के कमरे में आते हुए कहता है - शान्ति बता रही थी, खाना नहीं खाया आज तुमने? तबियत ठीक है तुम्हारी?

तितली - तुमको मेरी तबियत की कब से चिंता होने लगी.. तुम तो चाहते है तुम्हारे पापा की तरह मैं भी मर जाऊ और तुम्हे मुझे कुछ ना देना पड़े.. मगर मैं मरने वाली नहीं हूँ..

रमन तितली के करीब बेड पर बैठते हुए - देखो तुम्हारी मा और मेरे बाप के बीच जो कुछ था वो सबको पता है.. तुम्हारी मा के मरने के बाद जिस तरह तुमने मेरे बाप का ख्याल रखा और मेरे बाप का इलाज़ किया उससे भी सबको यही लगता है की तुमने ये पैसे के लिए किया है और तुम गोल्डीदिग्गर हो.. मैं झूठ नहीं बोलूंगा पर.. मैं भी वही सोचता हूं.. मगर अब मैं तुमसे और झगड़ना नहीं चाहता..

तितली - तुम या सब क्या सोचते है मेरे बारे मे मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता.. जिसे जो सोचना हो सोचे जो बोलना हो बोले.. मैं किसीकी परवाह करने नहीं बैठी हूं.. मुझे और मेरी मा को सब तुम्हारे पापा की रखैल समझते है पर सच्चाई क्या है ये मैं अच्छे से जानती हूं और मुझे किसीको कुछ साबित करने की जरुरत नहीं है..

तितली के मुंह से ये सब सुनकर रमन का तितली के प्रति गुस्सा थोड़ा नर्म हो गया.. रमन को सूरज की बात याद थी और उसे अब अच्छा बनने का नाटक करना था.. उसने तितली का हाथ पकड़ कर कहा - चलो..

तितली की आँख नम थी उसने कहा - कहाँ?

रमन - bday है ना आज तुम्हारा.. कहीं घूम के आते है..

तितली - मुझे कहीं नहीं जाना..

रमन - देखो... सिर्फ एक महीने की बात है फिर तुम और मैं दोनों एक दूसरे की शकल से भी दूर हो जायेंगे.. तब तक हम बिना लड़े झगडे.. प्यार से दोस्त बनकर रह सकते है.. मुझे अपना दोस्त समझो और चलो.. तुम्हारा bday सेलिब्रेट करते है चलकर..

तितली को अपने कानो पर यक़ीन नहीं हो रहा था कि रमन उससे ये सब कह रहा है.. तितली को रमन से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी..

रमन ने आगे कहा - मैं बाहर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ..
ये कहकर रमन बाहर चला गया और तितली कुछ देर उसी तरह बैठकर कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा खोल कर एक नया सूट पहन लिया और बाहर आ गई.. बिना कुछ कहे तितली रमन की कार में बैठ गई और रमन गाडी चला कर कहीं जाने लगा.. तितली को यक़ीन नहीं हो रहा था की सुबह रमन से इतना बुरा झगड़ा होने के बाद रात को वो रमन के साथ bday मनाने जा रही है..

तितली - तुम सिगरेट पीते हो?

रमन - नहीं तो.. क्यों?

तितली - फिर ये सिगरेट का पैकेट और लाइटर किसका है?

रमन - कभी कभी पीता हूँ..

तितली मुस्कुराते हुए - निकोटिन होता है सिगरेट में.. और निकोटिन..

रमन - तितली.. अपनी डाक्टरी मत झाड़ो प्लीज..

तितली को रमन के मुंह से पहली बार अपना नाम सुनकर अजीब लगता है आज से पहले वो उसे बुरा भला ही कहता था और अपने बाप की रखैल जैसे शब्दों से ही पुकारता था मगर आज पहली बार रमन ने उसका नाम लेकर बात की थी जो तितली को अच्छा लगा था..

तितली - कहा ले जा रहे हो?

रमन - है एक स्पेशल जगह.. हर बार अकेला ही जाता हूँ आज तुम्हे ले जा रहा हूँ..

तितली - तुम सच में इतने अच्छे हो?

रमन - मतलब?

तितली - मेरे साथ कितना झड़गा किया है तुमने.. कितना बुरा बुरा कहा.. और अब अचानक से इतनी तमीज और रेस्पेक्ट से बात कर रहे हो.. मुझे कुछ अजीब लगता है.. लेकिन याद रखना मैं अपना मन नहीं बदलने वाली.. मुझे आधा हिस्सा चाहिए.

रमन मुस्कुराते हुए - आधे से कुछ कम नहीं हो सकता? अकेली लड़की तो तुम.. क्या करोगी इतने पैसो का?

तितली - इसी तरह तमीज में रहोगे तो सोचूंगी कुछ.. पर पक्का नहीं कह सकती.. और तुम भी तो अकेले हो तुम क्या करोगे?

रमन - लड़को के लिए तो कितना भी हो कम ही पड़ता है..

तितली - ऐयाशी के लिए तो सब कम ही पड़ेगा.

रमन - लो आ गए चलो..

रमन तितली को लेकर झील किनारे एक बड़े से होटल के टॉप फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में ले आता है जहाँ से रात का नज़ारा किसी जन्नत से कम नहीं था..

दोनों मध्यम रौशनी में उस रेस्टोरेंट की एक टेबल पर बैठ जाते है और तितली उस नज़ारे और जगह को देखकर रमन से कहती है - इतनी खूबसूरत जगह अकेले आते हो?

रमन - तुम चाहो तो अब से तुम्हारे साथ आऊंगा.

तितली - लाइन मार मार रहे हो मुझपर.

रमन - तुम्हे ऐसा लगता है तो मैं क्या कर सकता हूँ.

तितली मुस्कुराते हुए - एक बात बताओ.. ये अचानक से तुम्हरा ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? मैं तुम्हारे पापा की आधी प्रॉपर्टी जो तुम्हारी होनी चाहिए थी उसे लेने वाली हूँ.. तुम्हे तो मेरे ऊपर गुस्सा होना चाहिए.. मगर तुम मेरा bday मनाने के लिए मुझे अपनी पसंदीदा जगह लेकर आये हो.. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा.

रमन - इसमें समझना क्या है? यूँ समझ लो आज किसी महापुरुष ने मेरी आँखे खोल दी.. और मेरी गलतियों से मुझे रूबरू करवा दिया.. और मुझे कहा है कि वत्स.. तुझे अब तेरे पापो का प्राहिश्चित करना है.

तितली हसते हुए - उन महापुरुष का नाम जान सकती हूँ मैं?

रमन - हाँ.. क्यों नहीं? उनका नाम है श्री श्री श्री.. रमन महाराज जी जो तुम्हारे सामने शाक्षात् विराजमान है कन्या.

तितली जोर से हसते हुए - क्या.... तुम?

वेटर आते हुए - सर सेम आर्डर?

रमन - नहीं.. एक bday केक ले आओ.. उसपर तितली लिखवा देना..
वेटर - और कैंडल किस age कि जला के लानी है सर?

रमन तितली की तरफ देखकर - 18 या 19

तितली - 24..

वेटर - ok मैम.. 24.. वेटर चला जाता है.

रमन - उम्र से कम लग लगती हो काफी.

तितली - जानबूझ कह रहे हो ना ये सब तुम?

रमन - नहीं.. मैं बोलने से पहले कहा सोचता हूँ? तुम तो जानती हो.. कितनी तारीफे की है तुम्हारी पहले.

तितली - हाँ.. सब याद है.. रखैल.. छिनाल.. रंडी.. कुटला.. गश्ती... गोल्डडीग्गर... कामवाली.. तुमने जो जो मुझसे कहा था मुझे सब तारीफ़ याद है.

रमन - मुझे सोरी नहीं बोलना आता.

तितली - मुझे उम्मीद भी नहीं है तुमसे सोरी की.

रमन - जो हुआ सो हुआ.. हो सके तो भूल जाओ सब.

तितली - भूलने के लिए ही आधी प्रॉपर्टी ले रही हूँ.

रमन - हा.. मेहरबानी तुम्हारी.. तुम चाहती तो पूरी भी ले सकती थी. वैसे करोगी क्या इतने पैसो का?

तितली - मैं दुनिया घूमूँगी.

रमन - अकेले? चाहो तो मैं भी साथ में घूम सकता हूँ. तुम तो जानती हो मुझे घूमने का कितना शौक है.

तितली - एक शर्त पर.

रमन - क्या?

तितली - ऐसे ही रहने पड़ेगा.. तमीज में.

वेटर - मैम.. आपका bday केक.. एंड ये वाइन.

वेटर वाइन गिलास में वाइन डालकर रख जाता है और कैक के ऊपर 24 डिजिट की कैंडल जल रही थी.

तितली - वाइन?

वेटर - सर ने आर्डर की है.. मैसेज किया था.

रमन - ठीक है जिम्मी.. तुम जाओ..

वेटर चला जाता है..

तितली - तुम्हे वेटर ना नाम पता है.. उसका नंबर भी है.. मैसेज पर ऑडर कर देते हो.. लगता है लोगों को पटा के रखने माहिर हो तुम..

रमन मुस्कुराते हुए - काश तुम्हे पटा पाता.. कम से कम आधी प्रॉपर्टी तो बच जाती..

रमन तितली की तरफ आकर बैठते हुए - लो.. फुक मारके कैंडल बुझा दो..

तितली रमन के करीब आकर बैठने पर उसे नजदीक से देखकर एक पल के लिए किसी ख्याल में पड़ जाती है दूसरे पल उससे कहती है - गाना नहीं गाओगे? हैप्पी bday वाला?

रमन - मुझे देखकर क्या लगता है तुम्हे? मुझे आता होगा वो सब करना?

तितली मुस्कुराते हुए कैंडिल बुझा देती है और केक कट करके रमन को खिलाती है और फिर रमन अपने मुंह के झूठे केक को जो तितली ने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था उसीको वापस खिला देता है जिसे तितली खाते हुए रमन को देखती हुई मुस्कुरा पड़ती है..

रमन वापस सामने जाकर बैठ जाता है और वाइन का गिलास तितली के आगे करते हुए - ये तो कुछ बुरा नहीं करती ना डॉक्टरनी जी?

तितली हसते हुए वाइन का गिलास उठाकर - करती है बताऊ?

रमन - नहीं.. लो.. चेस..

रमन और तितली ग्लास पकड़ के वाइन पीते है और उसी तरह कुछ बात करते है..

रमन - खाने में क्या खाओगी?

तितली - कुछ भी.. जो तुमको पसंद हो..

रमन - मेरी पसंद का नहीं खा पाओगी.. लो.. इसमें से अपनी पसंद बताओ..

तितली मेनू देखकर - हम्म्म.. ये..

रमन आर्डर कर देता है...

रमन - बाथरूम होके आता हूँ.. तुम बैठो मैं आर्डर कर दिया है..

तितली मुस्कुराते हुए - हम्म..

तितली मन ही मन ये सोच रही थी की रमन बस अच्छे होने का दिखावा कर रहा है और उसके मन में कोई प्लान है जिससे वो उसे प्रॉपर्टी देने से बच जाएगा.. मगर क्या प्लान हो सकता है तितली यही सोच रही थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था..

तितली के मन में बस इतनी बात तय थी कि रमन जो उससे इतनी नफरत और नापसंद करता था अचानक से उसके साथ इतना शरीफ बनकर पेश आ रहा है जरुरत इसके पीछे उसका कोई स्वार्थ होगा.. तितली ने सोच लिया था कि वो भी रमन के साथ उसी तरह पेश आएगी जैसे रमन पेश आ रहा है और रमन के मन में जो प्लान चल रहा है उसका पता लगाकर उसके मनसूबे को नाकाम कर देगी.. और आधी प्रॉपर्टी लेकर ही रहेंगी..

रमन बाथरूम में जाकर मूतने लगा था और उसके मन में चल रहा था कि क्या तितली वाकई इतनी प्यारी है जितनी वो अभी बनकर दिखा रही है और क्या वो सच कह रही थी कि उसके बाप और तितली के बीच कुछ नहीं था.. ऐसा सच भी हो सकता है क्युकी रमन अपने बाप को अच्छे से जानता था और ऐसा होना संभव था..

रमन को बार बार तितली का मुस्कुराता और हसता हुआ चेहरा याद आने लगा और तितली के चेहरे पर उसकी जुल्फे बड़ी आँखे पतले गुलाबी होंठ सब याद आने लगे और उसका लंड जिसमे से मूत निकल रहा था खड़ा होने लगा और अकड़ने लगा..

एक दूसरा आदमी रमन के पास वाले पोट में मूतने लगा तो उसे रमन का खड़ा हुआ लंड दिखा और उसने रमन से कहा - सुसु करने से नहीं बैठेगा आपका लंड.. बाथरूम में जाकर हिला लो.. वैसे लड़की चाहिए बता सकते हो.. देसी विदेशी सब है.. बस थोड़े पैसे लगेंगे..

रमन आदमी से - भोस्डिके मूतने आया है तो मूतके निकल.. भड़वागिरी मत कर..

आदमी बाहर चला जाता और रमन एक कबीननुमा बाथरूम में.. उसका लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था.. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. उसके दिमाग में तितली का चेहरा चल रही थी और लंड पर उसके हाथ अपने आप आगे पीछे हो रहे थे..

उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि जिसे वो नापसंद और नफरत करता है उसके नाम का जयकारा लगा रहा है.. रमन ने कुछ ही देर में अपने लंड से तितली के नाम का वीर्य लम्बी लम्बी धार के साथ बाहर निकाल दिया था..

रमन को खुद पर गुस्सा आ रहा था मगर वो क्या कर सकता था.. उसे लग रहा था की तितली उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है और वो उसकी तरफ मोहित होते चले जा रहा है जबकि होना इसका उल्टा चाहिए था.. रमन तितली के दिल में अपने लिए प्यार जगाने की कोशिश कर रहा था.. ताकि तितली उससे शादी के लिए मान जाए और प्रॉपर्टी ना ले.. मगर यहां तो तितली ने रमन के दिल में जगह बनाने की शुरुआत कर दी थी..

रमन वापस टेबल आ गया और दोनों खाना खाने लगे.. तितली को इस बात कर अंदाजा भी नहीं था की रमन ने अभी अभी उसके नाम का जयकारा लगाया है.. दोनों खाने के बाद वापस घर के लिए निकल चुके थे..

रमन - कल सुबह तुम्हे कोई काम तो नहीं है?

तितली - क्यों?

रमन - कुछ नहीं.. सोचा मूवी देख आते है..

तितली कुछ सोचकर - कल सुबह मैं बिजी हूँ.. हिसाब लगाना है ना प्रॉपर्टी का.. कहीं तुम मुझे कम ना दे दो..

रमन - और शाम को?

तितली - तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है?

रमन - कुछ नहीं क्यों?

तितली - तुम्हरा इतना अच्छा होना मुझे कुछ हज़म नहीं हो रहा..

रमन हसते हुए - हज़मे की दवा ले लो.. हज़म हो जाएगा..

तितली - कोनसी मूवी दिखाओगे?

रमन - तुम्हे जो पसंद हो.. कैसी मूवी पसंद है वैसे ?

तितली - मुझे तो रोमेंटिक मूवीज पसंद है..

रमन - हाँ एक लगी है रोमेंटिक.. बरसात की रात.. वो देखने चले..

तितली - वो रोमेंटिक नहीं वल्गर मूवी है.. तुम बस ऐसी ही मूवीज दिखाओगे मुझे..

रमन - अच्छा कोई और देख लेंगे.. अभी तो बहुत सारी मूवीज लगी हुई है थिएटर में..

तितली - तुम करना क्या चाहते हो वो बताओ.. मैं जानती हूँ तुम कुछ ना कुछ सोच रहे हो ताकि तुम्हे मुझे प्रॉपर्टी ना देनी पड़े.. मैं इतनी भोली नहीं हूँ कि तुम्हारी ये चाल समझ ना पाउ.. बताओ क्या प्लान है तुम्हारा? वरना पता तो मैं लगा ही लुंगी.. और प्रॉपर्टी तो मैं किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. वो तो मैं लेकर ही रहूंगी तुमसे.. बताओ क्या सोच रहे हो?

रमन कुछ देर ठहर कर - सोच रहा था.. तुम्हे पटाकर तुमसे शादी कर लूँ.. एक खूबसूरत डॉक्टरनी बीवी भी मिल जायेगी और आधी प्रॉपर्टी भी नहीं देनी पड़ेगी..

तितली रमन कि बात सुनकर जोर से हसते हुए - मुझे पागल समझा है? मत बताओ मैं अपनेआप पता कर लुंगी.

रमन - लो.. अब जब सब सच बता दिया तो तुम्हे यक़ीन ही नहीं हो रहा..

तितली -. तुम तो मुझे अपने बाप की रखैल समझते हो ना? मुझसे शादी करोगे? इतने बड़े देवता तो नहीं हो तुम.

तितली इतना कह कर गाडी कि रेक में पड़े पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से जलाते हुए सिगरेट पिने लगती है जिसे देखकर रमन कहता है..

रमन - मूझे बड़ा ज्ञान दे रही थी अब खुद ही..

तितली सिगरेट के कश लेकर - तुम पी सकते तो मैं क्यों नहीं.. लड़की हूँ इसलिए?

रमन - मैंने ऐसा कब कहा.. तुम्हे जो करना करो.. मैं कौन होता हूँ तुम्हे रोकने वाला.. हा.. अगर मेरी बीवी मेरे सामने ऐसे सिगरेट कश लगाती तो उसे सजा जरुर देता..

तितली सिगरेट पीते हुए - क्या सजा देते?

रमन - रहने दो.. सुनोगी तो घबरा जाओगी..

तितली मुस्कुराते हुए कार का शीशा निचा करके सिगरेट बाहर फेंकते हुए कहती है - तुम बहुत पुरानी सोच के हो ना.. लड़की को ये नहीं करना चाहिए वो नहीं करना चाहिए.. मर्दो की सारी बातें माननी चाहिए.. उनके काबू में रहना चाहिए.. उनकी जुतियों में पड़े रहना चाहिए.. वगेरा वगेरा...

रमन - इसमें गलत क्या है? ऐसा ही होना चाहिए.. मेरा तो यही मानना है..

तितली - अपनी बीवी को तो बहुत सताओगे तुम..

रमन - सताऊँगा ही नही.. मारूंगा भी.. अगर मेरी बात नहीं मानेगी तो थप्पड़ से मारूंगा.. सिगरेट शराब पीयेगी तो बेल्ट से.. शराब पीके गाली गलोच भी करूंगा.. दासी बनाके रखूँगा... हुकुम चलाऊंगा उस पर... लो.. घर आ गया.. मुझे तो अभी से बहुत नींद आ रही है..गुडनाइट...

रमन जाकर अपने कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है और सोचने लगता है कि अगर वो इसी तरह तितली के साथ घूमता फिरता और बातें करता रहा तो तितली आसानी से उसकी बात मान लेगी और उससे शादी कर लेगी..

तितली अपने कमरे में आकर एक कुर्सी पर बैठकर रमन के बारे में सोचने लगी कि रमन आखिर चाहता क्या है? रमन ने उसके साथ वाइन पी थी मगर कह रह था औरतों का शराब सिगरेट पीना पसंद नहीं.. और उसने बातों ही बातों में जो शादी के लिए कहा था वो? क्या वो सच बोल रह था?

तितली कि आँखों में आज नींद नहीं थी वो रमन के बारे में ही सोचे जा रही थी मगर रमन ओंधे मुंह बिस्तर पर खराटे ले रहा था..


Next on 60❤️
Dhire dhire sab ke apne apne relation clear ho rhe h , ek nya relation Titli or raman ke bich panap rha h
Dekhte h Gungun or suraj ki mulakat kab hoti h
 

rajeev13

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Update 8



सूरज से बात करने के बाद सुमित्रा बाथरूम के लिए निकल गयी और बाथरूम का दरवाजा बंद करके अंदर अपनी चुत में ऊँगली करने लगी और सूरज के बारे में सोचने लगी.. सुमित्रा ने बाथरूम की दिवार पर बनी जगह मे अपना फ़ोन सीधा करके रख दिया जिसमे सुमित्रा ने सूरज की तस्वीर लगा रखी थी.. सूरज की तस्वीर देखकर सुमित्रा अपनी चुत मे ऊँगली कर रही थी और मन मे सूरज के साथ आलिंगन करने और अपने ही बेटे को भोगने के ख्यालों से खुदको रोमांचित और कामुक कर उसने सूरज के नाम पर वापस अपनी नदी का पानी बहा दिया था और जब तक वो बाथरूम से बाहर आई सूरज भी रचना की चुत में अपना माल भर चूका था और अब बेड के पास खड़ा होकर अपनी पेंट पहन रहा था.. रचना बिस्तर पर ही लेटी हुई थी उसकी सांवली चुत से दोनों का मिश्रित वीर्य घुलकर बह रहा था जिसे रचना अपनी ऊँगली से उठाकर चाटते हुए बोली..

देवर जी दूध तो पिया ही नहीं तुमने..

सूरज रचना के पास बैठकर उसके बूब्स दबाते हुए - रात को मेरे कमरे में सोना भाभी.. सारी इच्छा पूरी कर दूंगा..

रचना सूरज के होंठों पर से लिपस्टिक साफ करती हुई बोलती है - घर पर बहुत लोग है देवर जी.. वहा ऐसा कुछ नहीं हो पायेगा..

आप फ़िक्र मत करो भाभी छत पर कोई नहीं आएगा.. छत वाले कमरे में आज रात आपके दूध का स्वाद लूंगा..

वैसे एक बात बताओ.. इंटरनेट पर मुझे देखकर मेरे नाम का जयकारा तो लगाया होगा तूमने..

कई बार भाभी.. कई राते आपको देखकर ही बिताई है मैंने.. अब तो आप ही मेरा पकड़ कर जयकारा लगा देना..

ये भी कोई बोलने वाली बात है देवर जी? मैं तो आपकी दिवानी हो गई.. जब बोलोगे ख़ुशी ख़ुशी सब दे दूंगी..

भाभी अब चलता हूँ... आप भी अपनेआप को ठीक करके नीचे आ जाओ..

सूरज स्टेज की तरफ आ जाता है...

कब से ढूंढ़ रही हूँ.. चल..
सुमित्रा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए सूरज का हाथ पकड़ कर स्टेज पर ले जाती है जहाँ विनोद गरिमा के साथ साथ जयप्रकाश गरिमा के पिता लख्मीचंद और माँ उर्मिला भी मौजूद थे.. एक फॅमिली फोटो खींचती है..

गरिमा का सारा ध्यान सूरज पर था और वो खा जाने वाली नज़र से सूरज को देख रही थी मगर सूरज जैसे अनजान बनकर गरिमा के सामने से निकल गया उसने गरिमा की तरफ देखा भी नहीं.. फोटो खिचवाने के बाद वो स्टेज से नीचे आ गया और गरिमा का दिल जोरो से दुखने लगा वो सूरज के इस व्यवहार को समझ नहीं पाई.. उसे यहां सबसे ज्यादा अगर किसको देखने और मिलने की तलब थी तो वो सूरज था मगर सूरज ने उसे ऐसे अनदेखा किया जैसे बॉलीवुड सेलिब्रेटी एक दूसरे को करते है..

गरिमा कब से सूरज का ही इंतजार कर रही थी और जब वो मिला भी तो अनजान बनकर.. गरिमा ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को काबू में रखा अगर वो अकेली होती तो शायद रो पड़ती.. उसे अब अपने मन में सूरज के लिए पनप रहे प्रेम का आभास होने लगा था.. उसके साथ उसका होने वाला हस्बैंड खड़ा था मगर उसका दिल तो सूरज के नाम से धड़कने लगा था.. गरिमा को अब इसका अहसास होने लगा था कि वो अब एक दो राहें पर खड़ी हुई है.. जहाँ से ना वो वापस मुड़ सकती थी ना आगे बढ़ सकती थी.. 14 दिन सूरज के साथ बात करके उसे ऐसा लग रहा था जैसे सूरज के साथ उसका 14 जन्मो का बंधन हो.. उसे अब समझ आने लगा था कि ये प्रेम है..

सूरज को लगा था कि गरिमा कहीं सबके सामने उसे ताने मारने ना लग जाए और इतनी देर उससे दूर रहने का करण पूछते हुए विनोद के सामने ही नाराजगी ना हाज़िर करने लग जाए इसलिए उसने जानबूझ कर गरिमा को अनदेखा किया और उसे दूर ही रहा..


************


क्या हुआ अक्कू? यहां गाडी बाइक क्यों रोक दी..

माँ वो सर दर्द होने लगा मैं मेडिकल से गोली ले आता हूँ..

अरे मेरे पास है गोली अक्कू.. तू घर चल मैं दे दूंगी..

नहीं माँ आप रहने दो आपको भी जरुरत पड़ती रहती है मैं ले आता हूँ अपने लिए..

अंकुश बाइक से उतर कर मेडिकल कि दूकान पर चला जाता है और नीतू मन ही मन मुस्कुराने लगती है.. उसके पीछे उसकी माँ गोमती बैठी हुई अंकुश के आने का इंतजार करने लगती है..

हाँ भाईसाहब क्या चाहिए?

1 कंडोम का पैकेट दे दो 8 वाला.. चॉकलेट फ्लेवर..

केमिस्ट एक नज़र बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर अंकुश से - ये लो भाईसाब.. भाईसाब एक बात पुछु..

अंकुश- हा बोलो..

केमिस्ट - दोनों बिलकुल कड़क है.. कहाँ से लाये हो इन को? क्या रेट है नाईट का?

अंकुश पीछे बाइक पर नीतू और गोमती को देखकर केमिस्ट से - भोस्डिके काम कर अपना..

अंकुश कंडोम जेब में रखकर वापस बाइक चलाने लगता है वही पीछे नीतू और गोमती बैठ जाती है.. और तीनो कुछ मिनटों में घर पहुंच जाते है.. जिसके बाद गोमती अपने कमरे मे सो जाती है और अंकुश नीतू के साथ रासलीला रचाने लगता है..


***********


नज़मा कुछ बात हुई हनी से?

जी...... वो तैयार है..

शुक्र है नज़मा.. कम से कम घर में बच्चे की खुशी तो आएगी.. दूकान तो ठीक चलने लगी है अब तू भी पेट से हो जाए तो ख़ुशी दुगुनी हो जायेगी..

मैं बिस्तर ठीक कर देती हूँ..

मैं कल ही हनी से बात करूंगा..

नज़मा बिस्तर ठीक करके एक तरफ लेट गई और आगे आने वाले पलों के बारे में सोचने लगी.. उसे हनी पसंद था मगर उसके साथ सोने के बारे में नज़मा ने पहले कभी नहीं सोचा था.. परदे में रहने वाली नज़मा अब किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर और हमबदन दोनों होने वाली थी.. नज़मा को घबराहट हो रही थी और एक रोमांच भी उसके दिल को घेरे जा रहा था.. उसे आज नींद नहीं आने वाली थी..

बिलाल घर की छत पर सिगरेट का धुआँ उड़ाते हुए सोच रहा था कि नज़मा पेट से हो गई तो जो रिस्तेदार उसे नामर्द कहकर चिढ़ाते है ताने मारते है उनका सबका मुंह चुप हो जाएगा और वो चैन से जी पायेगा..


***********


हेमलता बिस्तर लेटी हुई अब भी उन पलों को याद कर रही थी जब सूरज ने घर कि छत वाले बाथरूम में उसके अपनी मजबूत बाहों में कसके पकड़ा था.. और आज उसका सुन्दर मुखड़ा देखकर हेमलता के मन में उसके प्रति मातृत्व भाव के साथ काम का भाव भी आरहा था.. सूरज हेमलता के सामने ही तो बड़ा हुआ था मगर काम पीपासा ने किसे अछूता छोड़ा है? 50 साल कि उम्र को पार कर चुकी हेमलता खुली आँखों से सूरज के साथ प्यार मोहब्बत के सामने देख रही थी..


वही उसकी बेटी बरखा जिसने सूरज को टूशन पढ़ाया था वो भी सूरज के बारे में ही सोच रही थी.. वो यहां अपने माँ बाप के पास उनसे मिलने इसलिए नहीं आई थी कि हेमलता और बंसी ने उसे बुलाया था बल्कि इसलिए आई थी कि उसके अपने पति के साथ सम्बन्ध सही नहीं चल रहा था.. उसकी गृहस्थी अस्त व्यस्त होने की राह पर थी.. बरखा के पति का एक्स्ट्रा मेरिटयल अफेयर चल रहा था जिसका पता बरखा को चल गया था और वो गुस्से में होने बच्चे को भी वही उसकी दादी के पास छोड़कर यहां आ गई थी.. बरखा के मन में सूरज के प्रति लगाव और स्नेह था.. बरखा सूरज से खुलकर बात कर सकती थी और जब वो आई थी तब रास्ते में उसने सूरज से ढ़ेर सारी बातें की थी.. बरखा को नींद नहीं आई तो वो हेमलता से छुपकर घर की छत पर आ गई और एक सिगरेट अपने होंठों पर लगाकर जलाते हुए कश लेती हुई यहां से वहा घूमने लगी.. उसने मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे.. जैसे उसके मन में कोई युद्ध चल रहा हो..


**********


गुनगुन अपने कमरे की बालकनी में खड़ी होकर बाहर सडक पर एक कुतिया और एक कुत्ते के बीच हो रहे सम्भोग को देख रही थी.. रात का सन्नाटा था और कुत्ता खम्बे के नीचे आराम और इत्मीनान से अपनी कुतिया को चोद रह था..

गुनगुन को कुत्ते कुतिया की चुदाई देखकर अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब वो सूरज के साथ कभी कॉलेज के स्टोर रूम में तो कभी अपनी सहेली के घर जाकर सम्भोग किया करती थी.. गुनगुन की सील सूरज ने ही तोड़ी थी और गुनगुन अपनी जिंदगी में सिर्फ सूरज से ही चुदी थी..

सूरज पढ़ने में अच्छा नहीं था.. अक्सर ऐसा होता था कि गुनगुन सूरज के लंड को चुत में लेके उसे पढ़ाती थी और उसके पढ़ने और याद करने पर उससे अपनी चुत मरवाती थी.. इसमें दोनों को बराबर का सुख मिलता था..
गुनगुन सयानी थी मगर सूरज बचकाना.. गुनगुन सूरज को अच्छे से संभालती थी और उसके कारण सूरज एग्जाम में पासिंग मार्क्स ले आता था..

गुनगुन को आज भी याद है जब वो घुटने के बल बैठकर कॉलेज की छत पर सूरज के लंड को मुंह में लेकर उसे चूसते हुए सूरज को blowjob दे रही थी तब सूरज ने बड़े प्यार से गुनगुन को कहा था.. गुनगुन मुझे कभी छोड़ के मत जाना यार.. मैं ख़ुशी से जी नहीं पाऊंगा तेरे बिना..

ये सोचकर गुनगुन की आँख में आंसू आ गए.. गुनगुन सूरज को ढूंढ़ रही थी मगर सूरज उसे कहीं नहीं मिला.. गुनगुन ने कॉलेज से घर का एड्रेस पता किया तो पता चला की सूरज के परिवार ने घर बदल दिया था.. और कॉलेज में किसी को भी उसके बारे में पता नहीं है.. गुनगुन को ये तब नहीं पता था कि सूरज के घर का नाम हनी है... गुनगुन कि आँख में आंसू थे.. उसने सिगरेट का लम्बा कश लेते हुए सूरज को याद किया और सामने चल रही कुत्ते कुतिया कि चुदाई देखने लगी..

गुनगुन सिगरेट नहीं पीती थी मगर जब वो एग्जाम कि प्रिपरेशन कर रही थी तब साथ कि एक लड़कियों ने देर तक जागनेके लिए उसे सिगरेट पीना सिखाया और गुनगुन अब भी कभी कभी जब वो उदास और मायूस होती सिगरेट पी लेती थी..

गुनगुन को कुत्ते में सूरज और कुतिया में खुदकी शकल दिखने लगी थी और अब उसकी चुत से तरल पदार्थ रिसने लगा रहा.. गुनगुन सिगरेट के कश लेती हुई सूरज को वापस हासिल करने के ख्वाब देख रही थी..
एक आदमी जो सडक पर चल रहा था उसने कुत्ते और कुत्तिया को चुदाई करते देखकर पत्थर मारना शुरू कर दिया.. कुत्ते का लंड और कुतिया की चुत में चिपक गया था और दोनों इसी तरह उस आदमी से बचकर भाग गए.. गुनगुन को याद आने लगा कि एक दिन जब गुनगुन को घर आने कि जल्दी थी और सूरज उसकी चुत में लंड घुसा के लेटा हुआ था तब गुनगुन के कहने पर कि मुझे जाने दो सूरज ने जवाब दिया था.. मेरा लंड तो तेरी चुत मे चिपक गया है गुनगुन.. निकलता ही नहीं है... गुनगुन ने उस बात को याद करके मुस्कुराते हुए सिगरेट बुझाकार फेंक दी और वापस आकर बिस्तर में लेट गयी.. नींद उसकी आँख में भी नहीं थी..


************


रात के दस बज चुके थे.. सूरज ने vigra ली थी और अब तक कई बार झड़ चूका था.. सूरज गबरू जवान था और उसके कारण उसपर vigra का असर तुरंत हो गया था जिसके करण रचना और नेहा को उसने चोद दिया था... विनोद और गरिमा के साथ घर के बाकी लोग भी अब खाने के लिए बैठ गए थे मगर सूरज को भूक नहीं थी वो अपना खड़ा लंड लेकर बिल्डिंग कि छत पर आ गया था.. जहाँ वो एक तरफ बैठकर सोच रहा था कि उसपर से ये असर अब कब ख़त्म होगा? सूरज को छत ओर जाते हुए किसी ने देख लिया था और वो शख्स भी सीढ़ियों पर खड़ा हुआ सूरज को छत पर एक तरफ अपना लंड पकड़ के बैठे हुए देख रहा था..

सूरज ने कुछ देर बाद देखा कि कोई उसकी तरफ चला आ रहा है.. सूरज ने जैसे नज़र उठाकर देखा तो एक औरत सूरज के पास आकर अपने घुटनो पर बैठते हुए कहती है - भईया जी..

फुलवा.. तू यहां क्या कर रही है?

भईया जी आपको देखा तो मिलने चली आई.. आपने इतना बड़ा उपकार किया मेरे ऊपर.. मेरा घरवाला भी यहां आ गया है धरमु ने उसे काम दिया है.. आपने तो मेरा नसीब बदल दिया.. भईया आपको क्या हुआ है?

कुछ नहीं.. फुलवा जा यहां..

भईया जी हाथ से क्या पीछा रहे हो.. और आपको क्या हुआ है? आपको कोई दिक्कत है?

सूरज की नज़र फुलवा की चोली में गई तो उसके लंड में और अकड़न आ गई और फुलवा ने सूरज के लंड को पेंट के अंदर ही पूरी औकात में खड़ा देख लिया और हसने लगी.. और बोली - भईया जी लगता है आज बहुत मन है आपका?

सूरज फुलवा के बूब्स घूरकर - फुलवा जा यहां वरना कुछ हो जाएगा..

फुलवा हस्ती हुई - भईया जी लाओ.. मैं मदद कर देती हूँ आपकी..

सूरज - नहीं फुलवा.. रहने दे..

फुलवा सूरज का हाथ उसके लंड पर से हटा कर उसके पेंट की ज़िप खोल लेती है और सूरज के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है.. फिर सूरज का एक हाथ अपनी चोली के अंदर घुसा कर उसके लंड पर अपने होंठ लगा देती है और फिर धीरे धीरे प्यार से लंड चूसाईं शुरू कर देती है जिसमे सूरज को आराम आ आने लगा था और मज़ा भी मिलने लगा था.. सूरज एक हाथ से फुलवा के बूब्स दबाते हुए उसे लंड चुसवा रहा था तभी उसका फोन आ गया और सूरज उठाकर बातकरने लगा..

हेलो..

हनी तू फिर से कहा गायब हो गया? खाना नहीं खाना तुझे?

भूक नहीं है माँ..

अरे भूक क्यों नहीं है तुझे? देख यहां सब खाने के लिए बैठ गए है तू जल्दी आ..

कहा ना भूक नहीं है.. आप खा लो..

हनी तू है कहा? किसके साथ है?

मैं यही हूँ माँ.. आप फ़िक्र मतकरो.. आप खाना खाओ..

नहीं.. जब तक तू नहीं आएगा मैं नहीं खाऊंगी.. समझा..

माँ यार क्या बच्चों जैसी ज़िद करने लगी आप.. खा लो ना.. पहले भी तो खाती थी..

खाती थी पर अब से नहीं खाऊंगी.. तू आएगा तभी खाऊंगी.. समझा..

ठीक है थोड़ी देर रुको मैं आता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

फुलवा सूरज का पूरा लंड गले तक ले जाती है और अब जोर जोर से चूसने लगती है..

अह्ह्ह.. फुलवा.. अह्ह्ह.. अह्ह्ह

फुलवा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे वो लंड चूसने के लिए ही पैदा हुई हो.. उसने 10 मिनट के अंदर ही सूरज को अपने मुंह से ठंडा कर दिया था..

सूरज ने अपने बटुए से पांच सो का एक नोट निकालकर फुलवा की चोली में घुसा दिया और फुलवा का बोबा पकड़कर मसलते हुए बोला - फुलवा.. तू कमाल है..

फुलवा ने अपनी चोली से पैसे निकालकर सूरज से कहा - भईया जी.. ये क्या है? आप मेरी कीमत लगा रहे हो..

नहीं फुलवा.. मैं बस तुझे इनाम दे रहा हूँ.. चोली फटी हुई है तेरी नई ले लेना..

फुलवा ने अपनी चोली उतार कर एक तरफ रख दी और कमर से ऊपर पूरी नंगी होकर वापस सूरज के लंड को पकड़ती हुई मुंह में लेकर चूसने लगी..

फुलवा क्या कर रही है.. अह्ह्ह्ह.. आराम से.. फुलवा.. छोड़ ना.. वापस खड़ा हो जाएगा.. फुलवा...

वही तो करना है भईया जी.. ये कहकर फुलवा वापस लंड चूसने लगती है और दो मिनट में ही सूरज का लंड वापस खड़ा हो जाता है..

फुलवा.. बड़ी मुश्किल से झड़ा था तूने वापस खड़ा कर दिया..

मैं वापस झड़वा दूंगी भईया जी आप फ़िक्र मत कीजिये.. ये कहकर फुलवा अपना घाघरा उठाकर सूरज के लंड पर बैठ गई और सूरज का लंड घप करके फुलवा की चुत में चला गया.. फुलवा की चुत बड़ी थी उसे लंड लेने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई बल्कि मज़ा आने लगा.. वो सूरज के लंडपर उछलने लगी और अपने दोनों चुचे हिला हिला कर सूरज के मुंह पर मारने लगी.. सूरज दोनों हाथ से फुलवा की कमर पकड़ कर उसके बूब्स को कभी चूस तो कभी चाट रहा था..

पास में उसका फोन पड़ा था जिसमे अब सुमित्रा के साथ साथ गरिमा का फ़ोन भी आने लगा था और सूरज को इसका ध्यान नहीं था वो फुलवा की काम कला से काम के सुख में डूब गया था.. गरिमा और सुमित्रा ने कई बार सूरज को फ़ोन किया मगर सूरज ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया या यूँ कहे की उसे फ़ोन साइलेंट होने से पता ही नहीं चला..

फुलवा निकलने वाला है.. हट..

अंदर निकाल दो ना भैयाजी..

पागल है क्या फुलवा? कंडोम नहीं लगा हुआ.. हट..

फुलवा लंड चुत से निकाल कर मुँह मे भर लेती है और सूरज को अपने मुँह मे झड़वा लेती है मगर अब तक रात के साढ़े दस बज चुके थे और फंक्शन लगभग ख़त्म हो चूका था.. सुमित्रा के अलावा सबने खाना खा लिया था गरिमा का मन नहीं था मगर उसे भी सबके दबाव ने खाना खाना पड़ा था..

सूरज ने फ़ोन देखा तो चौंक गया और फुलवा का बोबा पकड़ के उसे साइड करते हुए अपने लंड पर से हटा दिया फिर पेंट बंद करके जल्दी से खड़ा हो गया..

क्या हुआ भैया जी?

फुलवा मर गया आज तो.. इतना लेट हो गया.. जाना पड़ेगा जल्दी निचे..

फुलवा भी खड़ी होकर अपनी चोली पहनती हुई - भैया जी जब भी आपका मन करे तो मिलने का अहसान जरुरत कीजियेगा.. आप जैसे बोलेंगे मैं वैसे आपको खुश कर दूंगी..

सूरज निचे आ जाता है..

सुमित्रा ने जैसे ही सूरज को देखा वो गुस्से से बोल पड़ी..

कहा था तू.. मेरी बात की जरा भी परवाह है या नहीं तुझे? किस लड़की के साथ था? बता?

माँ क्या बोल रही हो.. कहीं फंस गया था.. सॉरी.. आपने खाना नहीं खाया ना? चलो खाते है..

अब नहीं खाना मुझे.. सब का खाना हो गया सब चले भी गए और अब तेरे पापा के साथ बाकी लोग भी घर जा रहे है तेरी मर्ज़ी हो तो घर आ जाना वरना जिस लड़की के साथ मुंह काला कर रहा था उसी के साथ रह जाना..

कौन लड़की कैसी लड़की? क्या बोल रही हो किसी लड़की के साथ नहीं था.. कहा ना कहीं फंस गया था..

हनी ऐसा है मुझे अभी बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ है मेरा हाथ उठ जाएगा.. तूझे जो करना है कर.. हट मुझे जाने दे..

अरे माँ सुनो तो... चलो ना खाना खाते है अभी तो खा सकते है..

मुझे नहीं खाना.. हट..

देखो आपने वादा किया था आप मुझसे नाराज़ नहीं होगी..

तूने भी एक वादा किया था मुझे सब सच बताएगा.. बोल किसके साथ था.. कौन लड़की थी? देख मैंने फ़ोन पर आवाज सुनी थी उस लड़की.. पहले भी और अभी भी.. सच बता.. वरना कभी बात नहीं करुँगी..

माँ.. वो..

वो क्या कौन थी? चिंकी थी?

माँ.. चिंकी कहा से आएगी.. आप क्या बोल रही हो.. उससे तो बात भी नहीं की मैंने जब से उसकी शादी हुई है..

तो कौन थी?

कॉलगर्ल थी..

कौन? कौन सी गर्ल थी..

कोनसी गर्ल नहीं माँ.. पैसे लेकर.. जो आती है.. वो... कॉल गर्ल.. बस?

सुमित्रा गुस्से से - छी.. अब ये सब करेगा? शर्म नहीं आती तुझे?

सूरज नज़र झुकाकर कान पकड़ते हुए - सॉरी.. माँ..

सुमित्रा पास आकर कान में - कंडोम तो लगाया था ना?

सूरज गर्दन हां में हिला देता है..

सुमित्रा फिर से बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - लगता है तेरी शादी भी विनोद के साथ ही करवानी पड़ेगी.. बहुत जवानी फूट रही है नवाब को.. चल अब..खाना खाते है..

आप बैठो खाना लेके आता हूँ माँ..

सूरज प्लेट उठाकर खाना लेने चला जाता है और सुमित्रा सूरज को देखकर मन ही मन सूरज के साथ सेज सजाने के ख्याली पुलाव बनाकर अपने आप को कल्पनाओ की दुनिया में ले गई उसकी चुत गीली हो उठी थी.. वो सोच रही थी की सूरज ने एक रंडी को ये बोलने पर मजबूत कर दिया.. आराम से.. मतलब सूरज सम्भोग करने में माहिर और खिलाड़ी होगा.

मुन्ना और नेहा भी अब काम निपटाने में लगे थे और अब बचा हुआ सामान घर पहुंचने के लिए किसको बुला लिया था..

सूरज खाना ले आया और सुमन के साथ बैठकर खाने लगा.. दोनों साथ में खाना खा रहे थे और एक दूसरे से बिना कुछ बोले एक दुसरे को कभी कभी देखकर खाने का स्वाद लेने लगे थे.. खाने के बाद सुमित्रा ने देखा की लख्मीचंद और उर्मिला उसी की तरफ आ रहे थे और गरिमा के साथ बाकी सभी लोग जो उनकी तरफ से आये थे वापस जाने के लिए बस में बैठ गए थे..

सूरज ने जैसे ही लख्मी चंद और उर्मिला को देखा उसे याद आया कि उसने गरिमा से बात तक नहीं कि है..

सूरज वहा से बस कि तरफ चला गया और बस की खिड़की में गरिमा को देखकर व्हाट्सप्प पर गरिमा को से बस से बाहर आने को कहा.. गरिमा ने massage देखकर अनदेखा कर दिया और बस से कुछ दूर खड़े सूरज को गुस्से से देखकर मुंह मोड़ लिया..

सूरज ने गरिमा को कॉल किया मगर गरिमा ने फ़ोन भी नहीं उठाया और आँखे बड़ी बड़ी करके सूरज को घूरने लगी फिर मुंह फेर लिया.. सूरज समझ आ चूका था की गरिमा उस पर बहुत गुस्सा है और नाराज़ है..

सूरज ने व्हाट्सप्प पर लिखा - सॉरी भाभी..

गरिमा देखकर अनदेखा कर दिया और सूरज के बार बार massage और फ़ोन का कोई रिप्लई नहीं दिया..

सूरज के देखते ही देखते सब सब लोग बस में बैठ गए और बस चली गई किन्तु गरिमा ने सूरज से बात नहीं की..

सबके जाने के बाद सूरज भी घर आ गया.. और अपनी गलती पर मन ही मन खुदको बुरा भला कहने लगा.. सूरज को नहीं लगा था कि उसकी इतनी सी गलती से गरिमा इतना नाराज़ हो जायेगी मगर बात कुछ और थी.. गरिमा सूरज को मन ही मन चाहने लगी थी और एक माशूका अपने महबूब से इसी तरह नाराज़ हो जाया करती है.. मगर इसका इल्म सूरज को नहीं था.

सूरज अपने कमरे में आ गया और गद्दे पर उल्टा लेट गया.. उसने आज गुनगुन को देखा था जिसे वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था मगर शायद वक़्त ने उसके दिल से गुनगुन के लिए जो प्यार था उसे दबा दिया था.. सूरज गुनगुन के जाने के बाद जिन हालातों से गुजरा था उसे उभरते उभरते उसने गुनगुन को कभी ना मिलने की कसम खा ली थी.. थकावट के कारण उसे नींद आ गई थी.

रचना नज़र बचाकर उसके कमरे आई तो उसे सोता हुआ पाया और अपनी किस्मत को कोसती हुई वापस चली गई.

अगली सुबह जबतक सूरज की आँख खुली लगभग सभी मेहमान जा चुके थे.. सूरज ने उठते ही गरिमा को सॉरी मैसेज सेंड किया और गरिमा ने तुरंत उसे seen कर लिया मानो वो उसी के इंतजार में बैठी हो.. आज का पूरा दिन सूरज ने गरिमा को अनगिनत मैसेज और कॉल किये मगर गरिमा ना massage का रिप्लाई दिया ना कॉल उठाया..

कल रात गरिमा दिल दुख रहा था मगर आज उसको एक अजीब सुकून मिल रहा था उसके होंठों पर मुस्कान थी.. वही सुकून जो अपने प्रेमी को अपने लिए तड़पते देखकर मिलता है.. गरिमा का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो हर बार सूरज का massage seen करके छोड़ देती.. कोई जवाब नहीं देती..

सूरज और गरिमा के बीच कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.. सूरज रोज़ सुबह से रात तक गरिमा को पचासो मैसेज भेजता और गरिमा मैसेज देखकर मुस्कुराते हुए बिना रिप्लाई दिए फ़ोन बंद कर देती..

सगाई के सात दिन बाद तक ऐसा ही चलते रहा और सूरज घर से बाहर कहीं नहीं गया.. बस अपने कमरे में ही रहा.. उसके अंकुश और बिलाल ने भी मिलने को बुलाया मगर सूरज बात टाल कर फ़ोन रख देता..

सूरज को गरिमा से ना कोई मोहब्बत थी ना लगाव था उसे बस गरिमा से बात करना और उसके साथ बात करते हुए समय बिताना अच्छा लगता था.. सूरज
गरिमा से बात करने के लिए तड़प नहीं रहा था बस वो चाहता था कि गरिमा एक बार उसे बात कर ले ताकि सूरज गरिमा से माफ़ी मांग सके.. सूरज गरिमा को भाभी कि नज़र से ही देखता था और गरिमा के लिए उसके मन में कोई पाप नहीं था..


मुंह क्यों लटका हुआ है तेरा?

कहा लटका हुआ है? ठीक तो है..

चेहरे पर बारह बज रहे है.. क्या हुआ क्या बात है?

कुछ नहीं वो तो रात को ठीक से नींद नहीं आई इसलिए.. चाय दे दो..

सुमित्रा ने चाय देते हुए कहा - तेरे पापा बात करना चाहते है तुझसे.. सुबह पूछ रहे थे.. मैंने कहा अभी सो रहा है शाम को बात कर लेना..

मुझसे क्या बात करेंगे?

मुझे क्या पता? शायद कुछ जरुरी होगी तभी कह रहे थे वरना क्यों कहते.. और तू बोर नहीं होता अकेले?

नहीं.. मुझे अकेले रहना पसंद है.. आपका फ़ोन देना..

मेरा फ़ोन? क्यों?

किसीको फ़ोन करना है मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है..

तो कब तक पुराना फ़ोन चलाएगा नया लेले..

ले लूंगा आप दो ना अपना फ़ोन..

एक मिनट..
सुमित्रा चेक करती है कि उसके फ़ोन में सारी अप्प पर लॉक ठीक से लगा है या नहीं फिर सूरज को फ़ोन दे देती है कॉल खोल के..

सूरज गरिमा का नम्बर डायल करता है और छत पर चला जाता है..

हेलो..

भाभी आपको मेरी कसम है फ़ोन मत काटना..

गरिमा कुछ नहीं बोलती..

भाभी सॉरी.. उस दिन गलती हो.. आप बात तो करो.. ऐसे मेरा फ़ोन और massage इग्नोर करोगी तो मैं वापस आपको कभी massage और कॉल करूंगा ही नहीं..

गरिमा सूरज कि आवाज सुनकर खुश हो गई थी मगर जाताने के लिए कि वो कितनी नाराज़ है उसने कहा.. मत करना..

सूरज - ठीक है अब ना massage आयेगा ना कॉल आएगा आपको मेरा..

सूरज फ़ोन काट देता है और गरिमा सोचने लगती है कि क्या सूरज सच ने उसे मैसेज और कॉल नहीं करेगा? उसका दिल भारी सा होने लगता है गरिमा का मन करता है अभी वापस सूरज को फ़ोन करके उससे बात करें मगर उसका गुस्सा अभी सूरज पर शांत नहीं हुआ था ना ही उसकी नाराज़गी ख़त्म हुई थी ऊपर से गरिमा का अहंकार या कहो आत्मसम्मान भी उसे इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था..

सूरज नीचे आ गया और फ़ोन सुमित्रा को देकर घर से बाहर चला गया.


**************


नीतू छोड़ यार ऑफिस के लिए लेट हो जाऊँगा.

आज छूटी ले ले ना अक्कू.

क्यों आज क्या स्पेशल है?

अक्कू आज जोगिंदर के साथ समझौता होने वाला वो पैसे देगा.. वकील साहिबा ने बुलाया है.. चल ना मेरे साथ..

मम्मी को ले जाना नीतू.. मुझे उनसब चीज़ो में कोई दिलचस्पी नहीं है.. और तेरी वकील साहिबा मुझे देखते ही फिर से नैनो के तीर चलाना शुरू कर देगी.

अरे उसकी चिंता तू मत कर अक्कू.. वकील साहिबा को मैं संभाल लुंगी.. चल ना.

देख नीतू मुझे उस जोगिंदर कि शकल वापस नहीं देखनी.. तू जिद मत कर.. मम्मी को ले जा वो वैसे भी टीवी देखते देखते घर पर बोर हो जाती है.. चल जाने दे.

अक्कू रुको.

अब क्या है?

टिफिन तो लेते जाओ..

अंकुश नीतू के हाथ से टिफिन और होंठो से एक प्यार भरा चुम्मा लेकर ऑफिस के लिए निकल जाता है और नीतू नीचे गोमती के कमरे में आकर उससे कहती है..

मम्मी.. वकील ने बुलाया है आज समझौता होने वाला है.. कुछ दिनों में तलाक़ भी हो जाएगा.. आप चलोगी मेरे साथ.

गोमती अपनी गहरी सोच से बाहर आते हुए - तलाक़ के बाद क्या करेंगी नीतू? कैसे जियेगी अपनी जिंदगी?

नीतू गोमती के पास बैठ कर - आप फ़िक्र मत करो माँ.. मैं ऐसे ही खुश हूँ.

गोमती एक पेनी नज़र नीतू पर डाल कर कहती है - खुश? अरे जो लड़की तलाक़ लेकर पूरी उम्र घर पर बैठकर बिताती है उसे किस नज़रो से लोग देखते है जानती भी है? एक बार फिर सोच ले.. जोगिंदर से बात करेंगे तो वो फिर से तुझे रखने को तैयार हो जाएगा.

नीतू - माँ मैं उस आदमी के पास वापस कभी नहीं जाउंगी.. आपको चलना है तो चलो वरना साफ मना कर दो.. मैं अकेली चली जाउंगी.

गोमती - नीतू मैं अंधी नहीं हूँ.. घर में जो हो रहा है मुझे साफ नज़र आ रहा है.. मैं चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ नहीं जानती.. लोगों का तो ख्याल कर.. किसीको तेरी करतूत के बारे में पता चलेगा तो क्या इज़्ज़त रह जायेगी पुरे घर की.. मैं एक बार फिर तुझे समझा रही हूँ.. सोच ले.

नीतू - मैंने सोच लिया है माँ.

गोमती - नीतू मन कर रहा है तुझे जान से मार दूँ मगर क्या करू.. माँ जो हूँ तेरी.. अरे सारी जिंदगी क्या अपने छोटे भाई की रखैल बनकर रहेगी तू? क्या जिंदगी होगी तेरी सोचा है कभी? अक्कू तो मर्द जात है उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा मगर तू कुछ तो सोच. जब अक्कू की शादी होगी तब क्या हाल होगा तेरा?

नीतू नज़र झुका कर - तलाक़ के बाद मैं ही अक्कू से शादी करुगी माँ.. अक्कू और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते है.. मुझे पता नहीं आप सब जानती है वरना मैं आपको पहले ही बता देती.

गोमती - पता नहीं था.. तेरे कमरे का पलंग कैसे टूट जाता है तुझे लगता है मुझे पता नहीं चलता. घर के किस कोने में तुम भाई बहन कब क्या रास लीला रचाते हो मुझे सबकी खबर रहती है. मैं कुछ बोलती नहीं क्युकी डरती हूँ अगर किसीको पता चल गया तो क्या होगा? मगर अब बात हद से आगे बढ़ गई है.

नीतू - माँ अक्कू और मैंने ये घर छोड़कर कहीं और रहने का सोचा है.. एक बार तलाक़ हो जाए फिर हम ये घर बेचकर कहीं और शिफ्ट हो जायेगे.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा.. मैं अक्कू से शादी करूंगी और उसके बच्चे की माँ भी बनुँगी.. अक्कू से मैं प्यार करती हूँ माँ.

गोमती कुछ देर चुप रहकर - एक बार फिर सोच ले नीतू.. ये सब गलत है.

नीतू - प्यार सही और गलत की परवाह नहीं करता माँ.आपको हमारा साथ देना ही होगा.. आप मेरे और अक्कू से नाराज़ नहीं हो सकती.. माँ.. वकील साहिबा का फ़ोन आ रहा है.. बुला रही होगी.. मैं चलती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ तेरे साथ.

गोमती और नीतू रिक्शा लेकर कोर्ट पहुचे जाते है और समझौते के अनुसार पैसे ले लेते है फिर तलाक़ के लिए एक फ़ाइल पेश होती है और उसमे डेट लेकर वापस अपने घर आने के लिए कोर्ट से निकल जाते है..

रास्ते में नीतू - भईया वो बैंक के आगे रोकना.

गोमती - क्या हुआ नीतू?

नीतू - माँ बैंक जाकर आती हूँ.

गोमती - रुक मैं भी आती हूँ.. भईया यही इंतजार करियेगा.. हम आते है.

नीतू पैसे अंकुश के अकाउंट में जमा करवा कर वापस गोमती के साथ रिक्शा में आकर बैठ जाती है और घर के लिए निकल जाती है.


****************


सूरज झील के किनारे बैठा हुआ अपने ही ख्यालों में गुम था कभी वो गरिमा के बारे में सोचता तो कभी गुनगुन के.. कभी उसका मन चिंकी के पास जाकर उसके साथ सम्भोग करने का होता तो कभी उसे चिंकी के घर पर उसके परिवार के होने का ख्याल आता और वो वापस किसी और ख्याल में खो जाता..
अभी तक नेहा ने सूरज को फ़ोन नहीं किया था और रचना तो अब सूरज से हर दिन थोड़ी बहुत बातचीत कर ही लेती थी.. रचना के साथ सूरज अब खुलकर बात करने लगा था मगर वो बात सिर्फ दोनों के बीच की ही होती..

रमन सूरज के पास आकर बैठ जाता है और कहता है - अच्छा हुआ भाई तूने यहां आने के लिए कह दिया. मैं भी घर पर बैठा बैठा बोर हो गया था..

सूरज - बता क्या कह रहा था.. काफी परेशान लग रहा है..

अरे क्या बताऊ यार वो औरत है ना.. उसने जीना हराम कर रखा है.. जब भी घर जाऊं.. धमकिया देती रहती है..

कौन लड़की? अच्छा.. तेरे बाप के रखैल की बेटी.. भाई वैसे तेरा बाप बड़ा रंगीन था..

अरे भाई क्या बताऊ यार.. मेरे बाप ने मेरे लिए फंदा तैयार किया है.. बहनचोद.. जब भी घर जाऊ उसकी शकल सामने आ जाती है..

क्या हो रहा है? बोल क्या रही है वो? सॉरी क्या नाम बताया था तूने उसका.. हां.. तितली..

क्या कहेगी.. साली.. बोल रही है बटवारा करो.. आधा हिस्सा चाहिए उसे.. बहनचोद.. मेरे बाप को भी सारी प्रॉपर्टी उसीके नाम करनी थी. सगे बेटे को कुछ नहीं दिया.

तू कह रहा था तेरे बाप की डॉक्टर भी थी वो.. इलाज़ करती थी तेरे बाप का? सही है मा बाप की रखैल और उस रखैल की बेटी बाप की डॉक्टर.. वैसे भाई अब क्या करेगा?

वही सोच रहा हूँ हनी.. समझ नहीं आ रहा यार..

वैसी तेरी ही तो उम्र की है.. अगर तुझे शकल पसंद है तो तू शादी कर ले.. बटवारा होने से बच जाएगा..

पागल है क्या चूतिये.. क्या कुछ भी बोल रहा है.. दिखने में अच्छी है तो क्या गले से बांध लू.. पैसो के लिए उसकी मा मेरे बाप की रखैल बनी.. अब उसकी बेटी आधी प्रॉपर्टी मांग रही है.

सूरज हसते हुए - भाई डॉक्टर है तेरा भी इलाज़ कर देगी मुफ्त में.. तू अच्छा दीखता है.. शायद पिगल जाए तेरे ऊपर.. और आधी मांग रही है वरना चाहे तो पूरी भी ले सकती है..

रमन - चने के झाड़ पर मत चढ़ाये जा.. गलत ही फ़ोन किया तुझे भी.. कुछ सलूशन देने की जगह मेरी ही गांड मारने लग गया.. कभी बात करते देखा है उसे? ऐसा लगता है जैसे अभी ऑपरेशन कर देगी..

सूरज - मैं क्या सलूशन दू मैं खुद उलझा पड़ा हूँ..

चल भाई आज दारु पीते है..

दिन में?

एक बियर तो पी ही सकते है.. चल बैठ गाडी में..

रमन सूरज को लेकर गाडी चलाता हुआ किसी बार में आ जाता है और दोनों एक टेबल पर बैठकर बियर पीते हुए वापस बात करने लगते है..

अब तो लगता है आधी प्रॉपर्टी हाथ से जाने ही वाली है.. कभी कभी अपने बाप पर बहुत गुस्सा आता है..

शुक्र कर पूरी नहीं ले रही. वैसे किस बात का गुस्सा.. और साले आधी भी बहुत है.. तेरा बाप तो कुछ नहीं छोड़ के गया तेरे लिए.. वो तो फिर भी आधी दे रही है.. हसते हुए..

तू भी मज़ाक़ बना ले साले.. उस लालची औरत से परेशान हूं ही..

डॉक्टर है लालची तो होगी ही.. वैसे एक बार मेरी बात मान के देख के.. क्या पता मान जाए...

तेरा दिमाग खराब है क्या भोस्डिके.. क्या कह रहा है..

बहन ले लंड बाप की पूरी जायदाद चाहिए या नहीं? मेरी तरह खाली जेब सडक पे घूमना है तैसे बस की बात नहीं.. और शादी करने को कह रहा हूँ.. कोनसा सुहागरात बनाने को कह रहा हूँ.. पटा के शादी कर ले.. प्रॉपर्टी तेरे हाथ में रहेंगी फिर तेरी ऐयाशी भी चलती रहेंगी..

भाई नहीं मानेगी...

कोशिश तो कर गांडु.. कॉलेज में चीटिंग करके कितनी लड़कियों को से थप्पड़ खाये थे तूने.. ज्यादा से ज्यादा तितली भी एक चिपका देगी.. और अगर मान गई तो तेरी मोज़ है.. प्यार से बात कर कुछ दिन.. उसे रेस्पेक्ट दे फिर शादी के लिए ऑफर मार दे..

उसकी शकल देखते ही गुस्सा आता है बहनचोद उससे प्यार से बात करू?

सूरज- पैसा सब करवा देगा..

रमन - अब किसका फ़ोन आ रहा है तुझे?

सूरज फ़ोन उठाकर - हां बिल्ले.. बोल..

बिलाल - बहुत बिजी रहने लगा है हनी.

सूरज - अरे नहीं यार.. कुछ नहीं. बस ऐसे ही.

बिलाल - कुछ बात करनी थी.. दूकान पर आएगा?

सूरज फ़ोन काटते हुए - हां.. आ रहा हूँ..
चल रमन छोड़ दे मुझे..

रमन - ठीक है चल..

रमन सूरज को बिलाल की दूकान पर छोड़कर घर निकल जाता है..

सूरज दूकान में आकर कुर्सी पर बैठ जाता है और बिलाल उसी तरह उसके कंधे पर दोनों हाथ रखकर दबाते हुए कहता है - ये तो वही था ना जिसे गार्डन में देखा था.. काफी बड़ी फर्म लगता है..

सूरज - इसका ही गार्डन है.. कॉलेज का दोस्त है..

बिलाल - रुक मैं नज़मा को चाय के लिए कह कर आता हूँ..

सूरज - नहीं बिल्ले... छोड.. बियर पी है थोड़ी देर पहले..

बिलाल - अच्छा हनी.. आज रात अम्मी मामू के यहां रहेंगी.. तू रात को यही रुक सके तो अच्छा रहेगा..

सूरज कुछ देर सोचकर - मैं आ जाऊंगा बिल्ले..

बिलाल - ले..

सूरज - ये क्या है?

बिलाल - पैसे है.. जो तूने दिए थे..

सूरज - छोड़ ना यार बिल्ले.. कभी जरुरत होगी तो मांग लूंगा.. चल मैं घर जाता हूँ..

बिलाल - मैं व्हाट्सप्प करूंगा हनी..

सूरज - ठीक है..

सूरज घर आ जाता है और अपने कमरे में जाकर फ़ोन में किसी से बात करने लगता है..


************


रमन अपने घर पहुँचता है तो घर में घुसते ही उसे तितली नज़र आती है और उसे देखकर सूरज की बातों को याद करने लगता है और तितली को ऊपर से नीचे देखकर उसकी खूबसूरती जो उसने अब से पहले कभी नोटिस नहीं की थी उसका जायजा ले रहा था..

तितली ने रमन को देखकर कहा - क्या सोचा है तुमने? सीधी तरह से मेरी बात माननी है या मैं कोर्ट में जाकर सारी प्रॉपर्टी ले लु?

तितली (24)
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रमन तितली की तरफ आकर अपने जेब से एक फूल निकालकर तितली को देते हुए - आज bday है ना तुम्हारा.. हैप्पीबर्थडे.. मैं तैयार हूँ.. अगले महीने शायद गाँव वाली जमीन के केस का फैसला आ जाएगा उसके बाद तुम जो कहोगी कर लेंगे..

तितली हैरानी से रमन को देखने लगी.. जो अब से पहले कभी उससे सीधे मुंह बात तक नहीं करता था और हमेशा उसकी मा को बाप की रखैल कहकर ही बुलाता था आज उसे bday विश कर रहा था और उसकी बात को इतनी आसानी से मान गया था.. तितली ने आगे कुछ नहीं कहा..

रमन ने नोकरानी शान्ति से खाना देने को कहा और अपने कमरे में चला गया.. तितली देखती ही रह गई और कुछ देर बाद वो भी अपने कमरे में चली गई और लगातार इसी बारे में सोचने लगी फिर उस फूल को जिसे रमन ने दिया था देखने लगी और बाद में उसे डस्टबिन में डाल दिया..

रात के 9 बज गए थे और तितली अब भी अपने कमरे में थी.. रमन तितली के कमरे में आते हुए कहता है - शान्ति बता रही थी, खाना नहीं खाया आज तुमने? तबियत ठीक है तुम्हारी?

तितली - तुमको मेरी तबियत की कब से चिंता होने लगी.. तुम तो चाहते है तुम्हारे पापा की तरह मैं भी मर जाऊ और तुम्हे मुझे कुछ ना देना पड़े.. मगर मैं मरने वाली नहीं हूँ..

रमन तितली के करीब बेड पर बैठते हुए - देखो तुम्हारी मा और मेरे बाप के बीच जो कुछ था वो सबको पता है.. तुम्हारी मा के मरने के बाद जिस तरह तुमने मेरे बाप का ख्याल रखा और मेरे बाप का इलाज़ किया उससे भी सबको यही लगता है की तुमने ये पैसे के लिए किया है और तुम गोल्डीदिग्गर हो.. मैं झूठ नहीं बोलूंगा पर.. मैं भी वही सोचता हूं.. मगर अब मैं तुमसे और झगड़ना नहीं चाहता..

तितली - तुम या सब क्या सोचते है मेरे बारे मे मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता.. जिसे जो सोचना हो सोचे जो बोलना हो बोले.. मैं किसीकी परवाह करने नहीं बैठी हूं.. मुझे और मेरी मा को सब तुम्हारे पापा की रखैल समझते है पर सच्चाई क्या है ये मैं अच्छे से जानती हूं और मुझे किसीको कुछ साबित करने की जरुरत नहीं है..

तितली के मुंह से ये सब सुनकर रमन का तितली के प्रति गुस्सा थोड़ा नर्म हो गया.. रमन को सूरज की बात याद थी और उसे अब अच्छा बनने का नाटक करना था.. उसने तितली का हाथ पकड़ कर कहा - चलो..

तितली की आँख नम थी उसने कहा - कहाँ?

रमन - bday है ना आज तुम्हारा.. कहीं घूम के आते है..

तितली - मुझे कहीं नहीं जाना..

रमन - देखो... सिर्फ एक महीने की बात है फिर तुम और मैं दोनों एक दूसरे की शकल से भी दूर हो जायेंगे.. तब तक हम बिना लड़े झगडे.. प्यार से दोस्त बनकर रह सकते है.. मुझे अपना दोस्त समझो और चलो.. तुम्हारा bday सेलिब्रेट करते है चलकर..

तितली को अपने कानो पर यक़ीन नहीं हो रहा था कि रमन उससे ये सब कह रहा है.. तितली को रमन से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी..

रमन ने आगे कहा - मैं बाहर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ..
ये कहकर रमन बाहर चला गया और तितली कुछ देर उसी तरह बैठकर कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा खोल कर एक नया सूट पहन लिया और बाहर आ गई.. बिना कुछ कहे तितली रमन की कार में बैठ गई और रमन गाडी चला कर कहीं जाने लगा.. तितली को यक़ीन नहीं हो रहा था की सुबह रमन से इतना बुरा झगड़ा होने के बाद रात को वो रमन के साथ bday मनाने जा रही है..

तितली - तुम सिगरेट पीते हो?

रमन - नहीं तो.. क्यों?

तितली - फिर ये सिगरेट का पैकेट और लाइटर किसका है?

रमन - कभी कभी पीता हूँ..

तितली मुस्कुराते हुए - निकोटिन होता है सिगरेट में.. और निकोटिन..

रमन - तितली.. अपनी डाक्टरी मत झाड़ो प्लीज..

तितली को रमन के मुंह से पहली बार अपना नाम सुनकर अजीब लगता है आज से पहले वो उसे बुरा भला ही कहता था और अपने बाप की रखैल जैसे शब्दों से ही पुकारता था मगर आज पहली बार रमन ने उसका नाम लेकर बात की थी जो तितली को अच्छा लगा था..

तितली - कहा ले जा रहे हो?

रमन - है एक स्पेशल जगह.. हर बार अकेला ही जाता हूँ आज तुम्हे ले जा रहा हूँ..

तितली - तुम सच में इतने अच्छे हो?

रमन - मतलब?

तितली - मेरे साथ कितना झड़गा किया है तुमने.. कितना बुरा बुरा कहा.. और अब अचानक से इतनी तमीज और रेस्पेक्ट से बात कर रहे हो.. मुझे कुछ अजीब लगता है.. लेकिन याद रखना मैं अपना मन नहीं बदलने वाली.. मुझे आधा हिस्सा चाहिए.

रमन मुस्कुराते हुए - आधे से कुछ कम नहीं हो सकता? अकेली लड़की तो तुम.. क्या करोगी इतने पैसो का?

तितली - इसी तरह तमीज में रहोगे तो सोचूंगी कुछ.. पर पक्का नहीं कह सकती.. और तुम भी तो अकेले हो तुम क्या करोगे?

रमन - लड़को के लिए तो कितना भी हो कम ही पड़ता है..

तितली - ऐयाशी के लिए तो सब कम ही पड़ेगा.

रमन - लो आ गए चलो..

रमन तितली को लेकर झील किनारे एक बड़े से होटल के टॉप फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में ले आता है जहाँ से रात का नज़ारा किसी जन्नत से कम नहीं था..

दोनों मध्यम रौशनी में उस रेस्टोरेंट की एक टेबल पर बैठ जाते है और तितली उस नज़ारे और जगह को देखकर रमन से कहती है - इतनी खूबसूरत जगह अकेले आते हो?

रमन - तुम चाहो तो अब से तुम्हारे साथ आऊंगा.

तितली - लाइन मार मार रहे हो मुझपर.

रमन - तुम्हे ऐसा लगता है तो मैं क्या कर सकता हूँ.

तितली मुस्कुराते हुए - एक बात बताओ.. ये अचानक से तुम्हरा ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? मैं तुम्हारे पापा की आधी प्रॉपर्टी जो तुम्हारी होनी चाहिए थी उसे लेने वाली हूँ.. तुम्हे तो मेरे ऊपर गुस्सा होना चाहिए.. मगर तुम मेरा bday मनाने के लिए मुझे अपनी पसंदीदा जगह लेकर आये हो.. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा.

रमन - इसमें समझना क्या है? यूँ समझ लो आज किसी महापुरुष ने मेरी आँखे खोल दी.. और मेरी गलतियों से मुझे रूबरू करवा दिया.. और मुझे कहा है कि वत्स.. तुझे अब तेरे पापो का प्राहिश्चित करना है.

तितली हसते हुए - उन महापुरुष का नाम जान सकती हूँ मैं?

रमन - हाँ.. क्यों नहीं? उनका नाम है श्री श्री श्री.. रमन महाराज जी जो तुम्हारे सामने शाक्षात् विराजमान है कन्या.

तितली जोर से हसते हुए - क्या.... तुम?

वेटर आते हुए - सर सेम आर्डर?

रमन - नहीं.. एक bday केक ले आओ.. उसपर तितली लिखवा देना..
वेटर - और कैंडल किस age कि जला के लानी है सर?

रमन तितली की तरफ देखकर - 18 या 19

तितली - 24..

वेटर - ok मैम.. 24.. वेटर चला जाता है.

रमन - उम्र से कम लग लगती हो काफी.

तितली - जानबूझ कह रहे हो ना ये सब तुम?

रमन - नहीं.. मैं बोलने से पहले कहा सोचता हूँ? तुम तो जानती हो.. कितनी तारीफे की है तुम्हारी पहले.

तितली - हाँ.. सब याद है.. रखैल.. छिनाल.. रंडी.. कुटला.. गश्ती... गोल्डडीग्गर... कामवाली.. तुमने जो जो मुझसे कहा था मुझे सब तारीफ़ याद है.

रमन - मुझे सोरी नहीं बोलना आता.

तितली - मुझे उम्मीद भी नहीं है तुमसे सोरी की.

रमन - जो हुआ सो हुआ.. हो सके तो भूल जाओ सब.

तितली - भूलने के लिए ही आधी प्रॉपर्टी ले रही हूँ.

रमन - हा.. मेहरबानी तुम्हारी.. तुम चाहती तो पूरी भी ले सकती थी. वैसे करोगी क्या इतने पैसो का?

तितली - मैं दुनिया घूमूँगी.

रमन - अकेले? चाहो तो मैं भी साथ में घूम सकता हूँ. तुम तो जानती हो मुझे घूमने का कितना शौक है.

तितली - एक शर्त पर.

रमन - क्या?

तितली - ऐसे ही रहने पड़ेगा.. तमीज में.

वेटर - मैम.. आपका bday केक.. एंड ये वाइन.

वेटर वाइन गिलास में वाइन डालकर रख जाता है और कैक के ऊपर 24 डिजिट की कैंडल जल रही थी.

तितली - वाइन?

वेटर - सर ने आर्डर की है.. मैसेज किया था.

रमन - ठीक है जिम्मी.. तुम जाओ..

वेटर चला जाता है..

तितली - तुम्हे वेटर ना नाम पता है.. उसका नंबर भी है.. मैसेज पर ऑडर कर देते हो.. लगता है लोगों को पटा के रखने माहिर हो तुम..

रमन मुस्कुराते हुए - काश तुम्हे पटा पाता.. कम से कम आधी प्रॉपर्टी तो बच जाती..

रमन तितली की तरफ आकर बैठते हुए - लो.. फुक मारके कैंडल बुझा दो..

तितली रमन के करीब आकर बैठने पर उसे नजदीक से देखकर एक पल के लिए किसी ख्याल में पड़ जाती है दूसरे पल उससे कहती है - गाना नहीं गाओगे? हैप्पी bday वाला?

रमन - मुझे देखकर क्या लगता है तुम्हे? मुझे आता होगा वो सब करना?

तितली मुस्कुराते हुए कैंडिल बुझा देती है और केक कट करके रमन को खिलाती है और फिर रमन अपने मुंह के झूठे केक को जो तितली ने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था उसीको वापस खिला देता है जिसे तितली खाते हुए रमन को देखती हुई मुस्कुरा पड़ती है..

रमन वापस सामने जाकर बैठ जाता है और वाइन का गिलास तितली के आगे करते हुए - ये तो कुछ बुरा नहीं करती ना डॉक्टरनी जी?

तितली हसते हुए वाइन का गिलास उठाकर - करती है बताऊ?

रमन - नहीं.. लो.. चेस..

रमन और तितली ग्लास पकड़ के वाइन पीते है और उसी तरह कुछ बात करते है..

रमन - खाने में क्या खाओगी?

तितली - कुछ भी.. जो तुमको पसंद हो..

रमन - मेरी पसंद का नहीं खा पाओगी.. लो.. इसमें से अपनी पसंद बताओ..

तितली मेनू देखकर - हम्म्म.. ये..

रमन आर्डर कर देता है...

रमन - बाथरूम होके आता हूँ.. तुम बैठो मैं आर्डर कर दिया है..

तितली मुस्कुराते हुए - हम्म..

तितली मन ही मन ये सोच रही थी की रमन बस अच्छे होने का दिखावा कर रहा है और उसके मन में कोई प्लान है जिससे वो उसे प्रॉपर्टी देने से बच जाएगा.. मगर क्या प्लान हो सकता है तितली यही सोच रही थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था..

तितली के मन में बस इतनी बात तय थी कि रमन जो उससे इतनी नफरत और नापसंद करता था अचानक से उसके साथ इतना शरीफ बनकर पेश आ रहा है जरुरत इसके पीछे उसका कोई स्वार्थ होगा.. तितली ने सोच लिया था कि वो भी रमन के साथ उसी तरह पेश आएगी जैसे रमन पेश आ रहा है और रमन के मन में जो प्लान चल रहा है उसका पता लगाकर उसके मनसूबे को नाकाम कर देगी.. और आधी प्रॉपर्टी लेकर ही रहेंगी..

रमन बाथरूम में जाकर मूतने लगा था और उसके मन में चल रहा था कि क्या तितली वाकई इतनी प्यारी है जितनी वो अभी बनकर दिखा रही है और क्या वो सच कह रही थी कि उसके बाप और तितली के बीच कुछ नहीं था.. ऐसा सच भी हो सकता है क्युकी रमन अपने बाप को अच्छे से जानता था और ऐसा होना संभव था..

रमन को बार बार तितली का मुस्कुराता और हसता हुआ चेहरा याद आने लगा और तितली के चेहरे पर उसकी जुल्फे बड़ी आँखे पतले गुलाबी होंठ सब याद आने लगे और उसका लंड जिसमे से मूत निकल रहा था खड़ा होने लगा और अकड़ने लगा..

एक दूसरा आदमी रमन के पास वाले पोट में मूतने लगा तो उसे रमन का खड़ा हुआ लंड दिखा और उसने रमन से कहा - सुसु करने से नहीं बैठेगा आपका लंड.. बाथरूम में जाकर हिला लो.. वैसे लड़की चाहिए बता सकते हो.. देसी विदेशी सब है.. बस थोड़े पैसे लगेंगे..

रमन आदमी से - भोस्डिके मूतने आया है तो मूतके निकल.. भड़वागिरी मत कर..

आदमी बाहर चला जाता और रमन एक कबीननुमा बाथरूम में.. उसका लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था.. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. उसके दिमाग में तितली का चेहरा चल रही थी और लंड पर उसके हाथ अपने आप आगे पीछे हो रहे थे..

उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि जिसे वो नापसंद और नफरत करता है उसके नाम का जयकारा लगा रहा है.. रमन ने कुछ ही देर में अपने लंड से तितली के नाम का वीर्य लम्बी लम्बी धार के साथ बाहर निकाल दिया था..

रमन को खुद पर गुस्सा आ रहा था मगर वो क्या कर सकता था.. उसे लग रहा था की तितली उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है और वो उसकी तरफ मोहित होते चले जा रहा है जबकि होना इसका उल्टा चाहिए था.. रमन तितली के दिल में अपने लिए प्यार जगाने की कोशिश कर रहा था.. ताकि तितली उससे शादी के लिए मान जाए और प्रॉपर्टी ना ले.. मगर यहां तो तितली ने रमन के दिल में जगह बनाने की शुरुआत कर दी थी..

रमन वापस टेबल आ गया और दोनों खाना खाने लगे.. तितली को इस बात कर अंदाजा भी नहीं था की रमन ने अभी अभी उसके नाम का जयकारा लगाया है.. दोनों खाने के बाद वापस घर के लिए निकल चुके थे..

रमन - कल सुबह तुम्हे कोई काम तो नहीं है?

तितली - क्यों?

रमन - कुछ नहीं.. सोचा मूवी देख आते है..

तितली कुछ सोचकर - कल सुबह मैं बिजी हूँ.. हिसाब लगाना है ना प्रॉपर्टी का.. कहीं तुम मुझे कम ना दे दो..

रमन - और शाम को?

तितली - तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है?

रमन - कुछ नहीं क्यों?

तितली - तुम्हरा इतना अच्छा होना मुझे कुछ हज़म नहीं हो रहा..

रमन हसते हुए - हज़मे की दवा ले लो.. हज़म हो जाएगा..

तितली - कोनसी मूवी दिखाओगे?

रमन - तुम्हे जो पसंद हो.. कैसी मूवी पसंद है वैसे ?

तितली - मुझे तो रोमेंटिक मूवीज पसंद है..

रमन - हाँ एक लगी है रोमेंटिक.. बरसात की रात.. वो देखने चले..

तितली - वो रोमेंटिक नहीं वल्गर मूवी है.. तुम बस ऐसी ही मूवीज दिखाओगे मुझे..

रमन - अच्छा कोई और देख लेंगे.. अभी तो बहुत सारी मूवीज लगी हुई है थिएटर में..

तितली - तुम करना क्या चाहते हो वो बताओ.. मैं जानती हूँ तुम कुछ ना कुछ सोच रहे हो ताकि तुम्हे मुझे प्रॉपर्टी ना देनी पड़े.. मैं इतनी भोली नहीं हूँ कि तुम्हारी ये चाल समझ ना पाउ.. बताओ क्या प्लान है तुम्हारा? वरना पता तो मैं लगा ही लुंगी.. और प्रॉपर्टी तो मैं किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. वो तो मैं लेकर ही रहूंगी तुमसे.. बताओ क्या सोच रहे हो?

रमन कुछ देर ठहर कर - सोच रहा था.. तुम्हे पटाकर तुमसे शादी कर लूँ.. एक खूबसूरत डॉक्टरनी बीवी भी मिल जायेगी और आधी प्रॉपर्टी भी नहीं देनी पड़ेगी..

तितली रमन कि बात सुनकर जोर से हसते हुए - मुझे पागल समझा है? मत बताओ मैं अपनेआप पता कर लुंगी.

रमन - लो.. अब जब सब सच बता दिया तो तुम्हे यक़ीन ही नहीं हो रहा..

तितली -. तुम तो मुझे अपने बाप की रखैल समझते हो ना? मुझसे शादी करोगे? इतने बड़े देवता तो नहीं हो तुम.

तितली इतना कह कर गाडी कि रेक में पड़े पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से जलाते हुए सिगरेट पिने लगती है जिसे देखकर रमन कहता है..

रमन - मूझे बड़ा ज्ञान दे रही थी अब खुद ही..

तितली सिगरेट के कश लेकर - तुम पी सकते तो मैं क्यों नहीं.. लड़की हूँ इसलिए?

रमन - मैंने ऐसा कब कहा.. तुम्हे जो करना करो.. मैं कौन होता हूँ तुम्हे रोकने वाला.. हा.. अगर मेरी बीवी मेरे सामने ऐसे सिगरेट कश लगाती तो उसे सजा जरुर देता..

तितली सिगरेट पीते हुए - क्या सजा देते?

रमन - रहने दो.. सुनोगी तो घबरा जाओगी..

तितली मुस्कुराते हुए कार का शीशा निचा करके सिगरेट बाहर फेंकते हुए कहती है - तुम बहुत पुरानी सोच के हो ना.. लड़की को ये नहीं करना चाहिए वो नहीं करना चाहिए.. मर्दो की सारी बातें माननी चाहिए.. उनके काबू में रहना चाहिए.. उनकी जुतियों में पड़े रहना चाहिए.. वगेरा वगेरा...

रमन - इसमें गलत क्या है? ऐसा ही होना चाहिए.. मेरा तो यही मानना है..

तितली - अपनी बीवी को तो बहुत सताओगे तुम..

रमन - सताऊँगा ही नही.. मारूंगा भी.. अगर मेरी बात नहीं मानेगी तो थप्पड़ से मारूंगा.. सिगरेट शराब पीयेगी तो बेल्ट से.. शराब पीके गाली गलोच भी करूंगा.. दासी बनाके रखूँगा... हुकुम चलाऊंगा उस पर... लो.. घर आ गया.. मुझे तो अभी से बहुत नींद आ रही है..गुडनाइट...

रमन जाकर अपने कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है और सोचने लगता है कि अगर वो इसी तरह तितली के साथ घूमता फिरता और बातें करता रहा तो तितली आसानी से उसकी बात मान लेगी और उससे शादी कर लेगी..

तितली अपने कमरे में आकर एक कुर्सी पर बैठकर रमन के बारे में सोचने लगी कि रमन आखिर चाहता क्या है? रमन ने उसके साथ वाइन पी थी मगर कह रह था औरतों का शराब सिगरेट पीना पसंद नहीं.. और उसने बातों ही बातों में जो शादी के लिए कहा था वो? क्या वो सच बोल रह था?

तितली कि आँखों में आज नींद नहीं थी वो रमन के बारे में ही सोचे जा रही थी मगर रमन ओंधे मुंह बिस्तर पर खराटे ले रहा था..


Next on 60❤️
सूरज, अंकुश और रमन तीनों के ज़िंदगी में हसीन मोड़ की शुरुवात हो चुकी है,
बहुत बढ़िया moms_bachha भाई, सुपर से ऊपर वाला अपडेट था।
 

Danny69

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Update 2

(फ़्लैशबैक start)

सूरज - मैं... मैं.. मैं सूरज...

गुनगुन सूरज के हकलाने से खिलखिला कर हसने लगती है....

हनी... चल क्लास लगने वाली है.. आजा..
सूरज के दोस्त रमन (3rd हीरो) ने उसका हाथ पकड़कर गुनगुन के सामने से खींचता हुआ अपने साथ कॉलेज के बाहर बने प्याऊ के पास से कॉलेज के मुख्य भवन अंदर ले गया और रूम नंबर 42 में आ गया जहाँ लगभग 60-65 और स्टूडेंट्स थे.. स्कूल की तरह यहां भी सूरज और रमन सबसे पीछे वाली सीट पर आ गए और बेग नीचे रखकर सामने देखने लगे.. सभी चेहरे नए और खिले खिले थे सबके अंदर नई ऊर्जा और उत्साह था.

सूरज ने देखा की कुछ ही देर बाद गुनगुन भी क्लास में आ गई थी और आगे जगह ना होने के करण उसे पीछे बैठना पड़ा था.. सूरज और गुनगुन की नज़र एक बार फिर से टकराई और दोनों के होंठों पर हलकी सी मुस्कुराहट आ गई मानो दोनों एक दूसरे को फिर से मिलने की बधाई दे रहे थे..

क्लास दर क्लास ये सिलसिला जारी रहा और फिर जब सूरज बस स्टेण्ड पंहुचा तो वहां भी गुनगुन आ गई.. सूरज के मन में मोर नाच रहे थे जिसकी खबर सिर्फ उसे ही थी.. बस में चढ़ते ही सूरज को एक खाली सीट मिल गई थी जो उसकी किस्मत थी वगरना स्टूडेंट के आने से बस खचाखच भर चुकी थी..

गुनगुन सूरज के पीछे ही तो थी जो अब उसकी सीट के सामने खड़ी होकर बस के एक एंगल को पकडे कभी बाहर तो कभी भीतर अपने सामने सीट पर बैठे सूरज को देख रही थी..

सूरज ने उठते हुए गुनगुन को अपनी सीट पर बैठने का इशारा कर दिया था और गुनगुन मुस्कुराते हुए सूरज की सीट पर बैठ कर उसके बेग को भी अपने बेग के साथ अपनी गोद में रख लिया था.. दोनों में बोलकर बात भले ही नहीं हुई थी मगर नज़रो में इतनी बात हो चुकी थी कि दोनों एकदूसरे को पहले दिन ही समझने और जानने लगे थे..

दिन के बाद दिन फिर महीने और फिर साल बीत गए थे.. दोनों में समय के साथ प्यार पनपा.. और एकदूसरे ने इसका इज़हार भी कर दिया.. कच्ची उम्र कि मोहब्बत पक्के जख्म दे जाती है यही सूरज और गुनगुन कि मोहब्बत के साथ भी हुआ.. सूरज और गुनगुन की पहली मुलाक़ात जो कॉलेज के पहले दिन हुई थी वो अब आखिरी बनकर कॉलेज के आखिरी साल के आखिरी इम्तिहान के बाद होने वाली थी..

तुम समझ नहीं रहे सूरज.. मैं यहां नहीं रुक सकती.. मुझे अपने ख़्वाब पुरे करने है कुछ बनना है.. कब तक इस तरह मैं तुम्हारे साथ यहां वहा घूमती रहूंगी?

पर हम प्यार करते है ना गुनगुन? क्या हम एकदूसरे के बिना रह पाएंगे? क्या तुम मेरे बिना रह पाओगी? पिछले 4 साल हमने साथ बिताये है जीने मरने की कस्मे खाई है सब झूठ तो नहीं हो सकता गुनगुन.. तुम इतनी कठोर तो नहीं हो सकती कि वो सब भुलाकर मुझसे मुंह मुड़ जाओ.. मैं कैसे तुम्हारे बिना रह पाऊंगा?

सूरज तुम अपने प्यार की बेड़िया मेरे पैरों में ना बांधो.. मैं उड़ना चाहती हूँ..मुझे अगर तुम अपनी क़ैद में रखोगे तब भी मैं घुट घुट कर अपने देखे हुए सपनो को मरता देखकर जी नहीं पाउंगी.. मुझे इस बात का दुख है कि हम अब अलग हो रहे है मगर मैं वादा करती हूँ एक दिन जरुर तुम्हारे लिए लौटकर आउंगी..

नहीं गुनगुन.. मैं तुम्हारा इंतजार नहीं कर सकता.. तुम अगर कहोगी तो मैं कोई काम वाम कर लेता हूँ और हम शादी भी कर सकते है पर तुम मुझे यूँ बीच राह में बैठाकर कही जाने की जिद ना करो.. अगर तुम चली गई तो मैं फिर कभी नहीं तुम्हे मिलूंगा..

सूरज.. क्या तुम अपनी ख़ुशी के लिए मेरी ख़ुशीयों का गला घोंट दोगे? इतने स्वार्थी तो नहीं थे तुम..

नहीं गुनगुन.. मैं सिर्फ अपने आप को परखना चाहता हूँ.. देखना चाहता हूँ कि तुम्हारे बाद मैं अपनेआप को किस तरह संभाल पाऊंगा..

मैं वापस लौट आउंगी सूरज कुछ सालों की तो बात है.. आगे की पढ़ाई ख़त्म होते ही तुम्हारे पास चली आउंगी..

मुसाफिर पुराने रास्ते पर वापस नहीं लौटा करते गुनगुन.. वो पुराने रास्ते को भुला दिया करते है.. तुम भी अपने ख्वाब पुरे करना.. तुम्हारे पापा ने जो ख़्वाब तुम्हारे लिए देखे है उन्हें हासिल करना.. मैं कोशिश करूँगा तुम्हारे बाद खुश रहू और तुम्हे भूल जाऊ..

ऐसा मत कहो सूरज.. मैं किसी ना किसी तरीके से तुम्हारे नजदीक रहूंगी.. हम फ़ोन पर बात करेंगे.. तुम्हारे पास फ़ोन नहीं है ना.. लो तुम मेरा फ़ोन रख लो.. मैं इसी पर तुम्हे अपने हर दिन का हाल शाम की बहती हवा के साथ लिखा करुँगी..

नहीं.. मैं ये नहीं ले सकता.. तुम जाओ गुनगुन.. तुमने कहा था आज शाम को तुम शहर से जाने वाली हो.. जाओ.. अब मैं तुम्हे नहीं रोकता.. तुम्हे आकाश में उड़ना था बदलो को महसूस करना था बारिशो में भीगना था पंछियो की तरह चहचहाना था.. मैं नहीं डालता तुम्हारे पैरों में अपनी मोहब्बत की बेड़िया.. जाओ गुनगुन.. तुम्हारे ख्वाब तुम्हारा इंतजार कर रहे है..

सूरज.. मुझे गलत मत समझो..

नहीं गुनगुन.. अब और नहीं.. इससे पहले की तुम कमजोर पढ़कर मेरे सामने अपना फैसला बदलो और फिर उम्र भर मुझे अपनी किस्मत के लिए कोसो.. मैं अब यहाँ से चला जाना चाहता हूँ.. अगली बार अगर किस्मत ने मुझे तुमसे मिलवाया तो मैं दुआ करूँगा तब तक तुमने अपने सारे ख्वाब पुरे कर लिए होंगे.. अलबिदा गुनगुन.. अपना ख्याल रखना..

सूरज जब आखिरी मुलाक़ात के बाद गुनगुन को कॉलेज के गेट पर अकेला छोड़कर बस में चढ़ा तो गुनगुन की आँख से आंसू टप टप करके बह रहे थे.. गुनगुन किसी बेजान मूरत जैसी कॉलेज के गेट के बाहर खड़ी हुई आंसू बहाये जी रही थी सूरज जो पलटकर गया तो उसने एक बार भी मुड़कर गुनगुन को नहीं देखा मगर गुनगुन आंसू बहाते हुए सूरज को तब तक देखती रही जबतक वो आँखों से ओझल नहीं हो गया.. गुनगुन को उसकी सहेलियों ने आकर संभाला मगर तब तक गुनगुन के अंदर जो बांध छलक रहा था वो फट पड़ा था और गुनगुन अपनी सहेलियों से लिपटकर रो रही थी..

बस में चढ़कर सूरज एक तरफ खड़ा हो गया और अपने सारे मनोभाव अपने अंदर ही दबाकर खड़ा रहा.. सूरज आम दिनों की तरह ही घर आया और सामान्य बर्ताव करते हुए सुमित्रा और बाकी लोगों से मिला मगर शाम को उसके कदम ना जाने क्यों अपने आप मोहल्ले से बाहर एक शराबखाने की ओर मुड़ गए ओर सूरज शराब खाने जाकर एक शराब की बोतल खरीद कर दूकान के पीछे रखी पत्थर की पट्टी पर आ बैठा जहाँ उसने अंकुश (2nd हीरो) ओर बंसी काका को देखा जो सूरज के यहां आने पर ऐसे हैरान थे जैसे कोई असमान्य घटना देखकर सामान्य आदमी हो जाता है..

अंकुश और बंसी अच्छे से जानते थे की सूरज शराब नहीं पीता मगर आज उसे यहां देखकर वो हैरानी से उसके पास आकर उसके यहां आने की वजह पूछने लगे जिसपर सूरज के सब्र का बाँध टूट गया और वो बच्चों की जैसे अंकुश और बंसी के सामने रोने लगा..
अंकुश और बंसी के लाख पूछने के बाद भी सूरज ने उन्हें इसकी असली वजह तो नहीं बताइ मगर रोकर अपने दिल का दुख पीड़ा व्यथा को अपने आँखों से आंसू बनाकर कुछ पल की राहत जरुर हासिल कर ली थी..

वही दिन था जब सूरज ने शराब पीना शुरू किया था और आज तीन साल बाद भी वो अक्सर अपने दोस्त अंकुश और बंसी काका के साथ बैठके शराब पी लिया करता था.. गुनगुन को भुलाने के लिए उसने कई तरतीब सोची और उनपर अमल किया मगर कोई काम ना आ पाई मगर फिर एक दिन घर में धूल खाती किताब जिसे दिवाली की सफाई में सुमित्रा ने निकाल कर रद्दी वाले को देने के लिए रख दिया सूरज ने उसे उठा लिया और ऐसे ही उसके शुरूआती कुछ पन्ने पढ़ डाले.. उसके बाद सूरज को उस किताब में इतनी रूचि पैदा हुई की कुछ ही समय में सूरज ने सारी किताब पढ़ डाली और यही से सूरज को किताबें पढ़ने का शौख पैदा हुआ जिसमे वो अक्सर अपने जैसे नाकाम इश्क़ वालों से मिलता उनकी कहानी जीता.. महसूस करता और अपने आप होंसला देता.. कुछ समय में उसके मन से गुनगुन के यादो की परत धुंधली पड़ गई थी.. हसते खेलते नटखट मुहफट और बचकाने सूरज को गुनगुन के इश्क़ ने शांत और कम बोलने वाला सूरज बना दिया.. गुनगुन के जाने के डेढ़ साल बाद चिंकी ने सूरज के साथ घूमना फिरना शुरू कर दिया था और यही से सूरज और चिंकी का रिलेशन जो रमन के अलावा सभी की नज़रो में सूरज का एकलौता रिलेशनशिप था शुरू हुआ मगर 6 महीने बाद ही मुन्ना ने दोनों को अपने घर की छत पर रासलीला करते हुए पकड़ लिया और ये सब भी ख़त्म हो गया.. ऊपर से सूरज के बारे में उसके घर परिवार को सब पता चल गया था.. चिंकी की शादी हो गई और सूरज फिर से अकेला रह गया..

(फ़्लैशबैक end)

सुरज को नींद नहीं आ रही थी वो काफी देर तक यूँही लेटा रहा फिर खड़ा होकर घर की छत पर आ गया और छात पर बने एक्स्ट्रा कमरे की छत पर से एक खाचे जो छिपा हुआ था वहा से सूरज ने कुछ निकाला और फिर कमरे पीछे जाकर उस थैली को खोला और उसमें से लाइटर और सिगरेट पैकेट निकालकर कश लेते हुए गरिमा के बारे में सोचने लगा जो ना चाहते हुए शादी करने को तैयार है और अपने पीता की हर बात को पत्थर की लकीरें मान बैठी है.. उसी के साथ आज सूरज को गुनगुन की भी याद आ गई थी सूरज वापस गुनगुन के चेहरे को याद करने लगा था मगर अब पहले की तरह उसकी आँख में आंसू नहीं थे..

गरिमा ने जब किसी की आहट सुनी तो वो गद्दे से उठ गई और कमरे से बाहर झाँक कर देखा तो पाया की सूरज छत पर जा रहा था गरिमा ने फ़ोन में समय देखा तो रात के 2 बज रहे थे.. जिज्ञासावश गरिमा भी उसके पीछे ऊपर आ गई और सीढ़ियों से ही सूरज को छत पर बने कमरे के पीछे की तरफ सिगरेट पीते देखा तो वो बिना कुछ आवाज किये वापस नीचे कमरे में आ गई और उसी किताब जिसे वो पढ़ रही थी अब किनारे रखकर सोने लगी..

गरिमा के मन में कई बातें थी जिसे सुनने वाला कोई नहीं था.. पीता तो उसकी बात सुनने से पहले ही अपने फैसले उसपर थोप देते थे और माँ उर्मिला जमाने की होड़ में अंधी होकर बेटी के सुख दुख की चिंता किये बिना ही गरिमा के लिए नियम कायदे तय करती थी.. गरिमा की आँखों में आंसू थे मगर पोंछने वाला कोई ना था.. होंठों पर बातें थी मगर सुनने वाला कोई ना था..

सुबह की पहली किरण के साथ सूरज ने चाय का प्याला अपने हाथ में उठा लिया और नीचे जयप्रकाश लंखमीचंद और बाकी लोगों से दूर छत पर आ गया और छत की एक दिवार पर बैठकर चाय पिने लगा तभी गरिमा छत पर आते हुए बोली..

छत पर क्यों आ गए?

बस ऐसे ही..

तुम इतना चुपचुप क्यों रहते हो?

आप भी तो सबके सामने चुप रहती हो..

हाँ क्युकी मेरी सुनने वाला कोई नहीं.. पर तुम तो सबके चाहते हो.. तुम ऐसे उदासी लेकर क्यों रहते हो?

आपसे किसने कहा मैं उदास हूँ?

गरिमा मुस्कुराते हुए बोली - तुम्हारे चेहरे पर लिखा है.

सूरज - अच्छा तो आपको चेहरा पढ़ना भी आता है?

गरिमा - नहीं पर तुम्हारा पढ़ सकती हूँ.. चाँद से चेहरे पर काली घटाये तो यही बताती है.. कोई बात है जिसे मन में छुपाए बैठे हो? बता दो.. तुमने मुझसे कल सब पूछ लिया था अब अपने मन की बताओगे भी नहीं?

सूरज - बताने के लिए कुछ ख़ास नहीं है भाभी..

गरिमा मुस्कान लिए - अरे अभी तो तुम्हारे भईया के साथ मेरी सगाई तक नहीं हुई और तुम मुझे भाभी भी बोलने लगे.

सूरज - माफ़ करना गलती से निकल गया.

गरिमा - इसमें माफ़ करने वाली क्या बात है? अब जो बोलने वाले हो वही तो बोलोगे.. मैं तो बस हंसी कर रही थी तुम्हारे साथ.. देवर जी..

सूरज - आप भी ना.. कल तक तो कितनी गुमसुम और उदास थी अब अचानक से आपको मसखरी सूझने लगी..

गरिमा - हाँ पर कल तक मैंने अपने देवर जी से बात कहा की थी? मुझे लगता अब कोई है जो मेरे साथ बातें कर सकता है दोस्त बनकर मेरे साथ रह सकता है

सूरज - ये दोस्ती विनोद भईया के साथ रखना भाभी.. मैं अपने मन का करता हूँ..

गरिमा - तुम इतने साल से अपने भईया के साथ हो मगर अब तक उनके बारे में कुछ नहीं जान पाए..

सूरज - जानना क्या है?

गरिमा - यही की उनके लिए रिश्तो और भावनाओ का मोल ज्यादा नहीं है.. मैं उनके साथ वो सब नहीं कह सुन सकती जो तुम्हारे साथ बोल सकती हूँ सुन सकती हूँ.. तुम मन पढ़ सकते हो.. भावनाओ को समझ सकते हो मगर तुम्हारे भईया ऐसा कुछ नहीं कर सकते.. उनके लिए ये सब बचकानी बातें है..

सूरज - अगले सप्ताह सगाई है आपकी भईया के साथ और 6 महीने बाद शादी.. एक बार वापस सोच लीजिये.. कई बार हमें अपनी छोटी सी गलती के लिए उम्रभर पछताना पड़ता है..

गरिमा - तो बताओ ऐसी कोनसी गलती तुमसे हो गई थी कि तुम आधी रात को किसी कि याद छत के उस कोने में बैठकर आँख में आंसू लिए सिगरेट के कश भरते हो..

सूरज सकपकाते हुए - मैं.. मैं..

गरिमा - मैं किसी से नहीं कहूँगी देवर जी.. आप फ़िक्र मत करो.. अब तो हम देवर भाभी बनने वाले है.. आपके छोटे मोटे राज़ तो मैं भी छीपा कर रख सकती हूँ..

सूरज - भाभी.. वो मैं..

गरिमा - किसी को याद कर रहे थे? पर तुम्हे कौन छोड़ के जा सकता है? कहीं बेवफाई तो नहीं की थी तुमने?

सूरज - भाभी.. आप भी ना.. कुछ भी कहती हो.. ऐसा कुछ नहीं है.

गरिमा हसते हुए - एक बात बताओ क्या इसी तरह अकेले ही रहते हो घर में?

सूरज - क्यों?

गरिमा - अपना फोन दो जरा..

सूरज फ़ोन देते - लो..

गरिमा - ये फ़ोन है? लगता है शहर से पुराना तो तुम्हारा फ़ोन है.. चलता तो है ना.. हाँ.. गनीमत है चल तो रहा है.. लो.. जब अकेलेपन से बोर हो जाओ और मुझसे बात करने का मन करें तो massage करना.. हम दोनों ढ़ेर सारी बात करेंगे..

सूरज मुस्कुराते हुए - ठीक है भाभी..

विनोद आते हुए -अरे क्या बात हो रही दोनों में? हनी मम्मी कब से तुझे आवाज लगा रही है सुनाई नहीं दिया तुझे? चल नीचे.. और तुम्हे भी नीचे आ जाना चाहिए.. तुम्हारे पापा याद कर रहे थे तुम्हे..

जी.. कहते हुए गरिमा नीचे चली गई और उसके पीछे पीछे सूरज भी चला गया..

लख्मीचंद - अच्छा तो भाईसाहब अब इज़ाज़त दीजिये.. अगले हफ्ते सगाई कि तैयारी करनी है.. बहुत काम पड़ा है.. हम समय से आपके द्वारे उपस्थित हो जायेगें..

जयप्रकाश - जी भाईसाब... तैयारिया तो हमें भी करनी होगी.. पंडित जी ने मुहूर्त भी इतना जल्दी का सुझाया है कि क्या कहा जाए?

उर्मिला - बहन जी.. बहुत बहुत आभार आपका आपने हमारी बिटिया को पहली नज़र में ही पसंद कर लिया और अपने घर की बहु बनाने की हामी भर दी.. मैं भरोसा दिलाती हूँ हमारी गरिमा आपके घर का पूरा मान सम्मान कायम रखेगी..

सुमित्रा - जानती हूँ बहन जी.. आपकी बिटिया के बारे में नरपत भाईसाब ने जो जो बताया था गरिमा उससे कहीं बढ़कर है.. मैं अब जल्दी से अपने विनोद के साथ आपकी गरिमा का ब्याह होते देखना चाहती हूँ..

लख्मीचंद - भाईसाब अगर आपकी कोई बात है या कुछ और आप मुझे बता सकते है..

जयप्रकाश - अरे आप क्यों बार बार ये बोलकर मुझे शर्मिंदा कर रहे है.. मैंने आपसे साफ साफ कह दिया है कि हमें आपकी बिटिया के अलावा और कुछ नहीं चाहिए.. हम तो दहेज़ के सख्त खिलाफ है..

नरपत - अब तो आप लोग अगले सप्ताह विनोद और गरिमा की सगाई की तैयारी कीजिये... अब समय से निकलते है वरना ट्रैन ना छूट जाए.. सूरज गाडी भी ले आया.. चलिए..

गरिमा जाते हुए सूरज को एक नज़र देखकर मुस्कुरा पड़ी थी बदले में सूरज के होंठों पर भी मुस्कान आ गई.. विनोद भी स्टेशन तक साथ गया मगर गरिमा के साथ उसकी आगे कोई बात ना हो पाई.. विनोद लख्मीचंद के साथ ही बैठा हुआ यहां वहा की बात कर रहा था.. स्टेशन पर लख्मीचंद उर्मिला नरपत और गरिमा को ट्रैन में बिठाने के बाद वो सीधे ऑफिस निकल गया था..

आज ऑफिस नहीं जायेगे?

नहीं.. मैडम को पता चला कि लड़की वाले बेटे को देखने आये हुए है तो उन्होंने आज घर पर रहने को ही कहा है..

पर वो तो चले गए..

तो ये बात मैडम को कहा पता है सुमित्रा? आज घर पर ही आराम करने का मन है..

सही है.. कम से कम थोड़ी तो समझ है..

मैं तो पहले से ही बहुत समझदार हूँ..

तुमको नहीं तुम्हारी उस अफसर मैडम को कह रही हूँ..

सुमित्रा ने बेड पर तौलिया लपेटकर बैठे जयप्रकाश से ये कहा और कमरे से बाहर आकर सीधा कल के सुखाये कपड़े उतारने छत पर चली गई..

************

वाह भाई बिल्ले.. 3-4 दिनों में ही दूकान चमका दी तूने तो.. अंकुश (2nd हीरो) ने बिलाल की दूकान में कदम रखते हुए कहा जहाँ रंग रोगन हो चूका था और दूकान पुराने जमाने के ताबूत से निकलकर नए जमाने के लिबास से सज गई थी.. दूकान के सीढ़ियों की मरम्मत के साथ बाहर लटक रहे लाइट के वायर को व्यवस्थित करके स्विच बोर्ड भी बदल दिए गए थे..

बिलाल ने अंकुश की बात सुनकर कहा - हाँ अक्कू.. सब काम तो हो चूका है बस अब आइना और कुर्सी खरीदना बाकी है.. वैसे पिछले 3-4 दिनों से हनी कहा है? ना दिखाई दिया ना बात की..

अंकुश - बात मेरी भी नहीं हुई.. उस दिन विनोद भईया को लड़किवाले देखने आये थे उसके बाद से मैं भी नहीं मिला यार..

बिलाल - रुक मैं फ़ोन करता हूँ.. जरा पूछे तो आज कल है कहाँ?

हेलो..

हेलो.. हनी?

हाँ बिल्ले..

अरे आज कल है कहाँ भाई? ना फ़ोन ना मुलाक़ात.. कोई गलती हो गई क्या हमसे?अक्कू से भी बात नहीं की तूने?

कहाँ है तू?

मैं और कहाँ होऊंगा? दूकान पर.. आइना और कुर्सी खरीदना था तो सोचा तुझसे बात कर लु.. अक्कू भी यही है..

हाँ.. यार कुछ बिजी हो गया था तुम रोको मैं 10 मिनट आता हूँ वहा..

पिछले तीन चार दिनों से सूरज गरिमा के साथ व्हाट्सप्प पर बातचीत में ऐसा उलझा की उसे अपने दोस्तों और परिवार के लोगो से बात करने और मिलने का समय ही नहीं मिला.. गरिमा को भी सूरज के रूप में अच्छा दोस्त मिल गया था और अब दोनों एक दूसरे को देवर भाभी कहकर ही बुलाने और बात करने लगे थे.. दोनों की बातों में एक दूसरे की पसंद नापसंद जानना और मिलती हुई रूचि की चीज़ो घंटो लम्बी बातें करना शामिल था.. विनोद तो गरिमा से बात करना जरुरी ना समझता था उसे औरत बस घर में काम करने और पति को खुश रखने की वस्तु मात्र ही लगती थी.. कभी कभार विनोद गरिमा औपचारिक बात किया करता उससे ज्यादा उसने कभी गरिमा से कुछ नहीं कहा ना पूछने की जहमत की.. विनोद काम में तनलिन था मगर गरिमा और सूरज के बीच सुबह शाम बातें हो रही थी.. दोनों एक दूसरे के सुबह उठने पर चाय पिने से लेकर रात को खाना खाने तक की बातें पूछने और बताने लगे थे.. दोनों के मन मिलने लगे थे और दोनों को ख़ुशी की थी कोई है जो उनके मन का हाल समझ सकता है और उससे वो सब बात कह सकते है..

बिलाल का फ़ोन आने पर सूरज फ़ोन बंद करके अपने कमरे से निकल कर नीचे आ गया जहाँ उसने देखा कि सुमित्रा जयप्रकाश और विनोद साथ में बैठे किसी गहरे मंथन में घूम थे और आपस में कुछ कह रहे थे..

नहीं पापा.. मेरे ऑफिस के सभी लोगों को पता चल गया है और उन्होंने खुद आने कहा कहा है.. 20-25 लोग तो ऑफिस से ही हो जाएंगे.. फिर स्कूल कॉलेज और मोहल्ले के यार दोस्त अलग से.. कम से कम 35-40 लोग मेरे ही हो जाएंगे.. इतने सारे रिश्तेदार भी बुला लिए आपने.. आपके ऑफिस से भी लोग आएंगे.. माँ ने भी आस पड़ोस में सबको बता दिया है अब उन्हें भी नहीं बुलाया जाएगा तो सब मुंह फुला के बैठ जाएंगे.. इतने सारे लोगो कि व्यवस्था घर और गली में तो नहीं हो सकती.. एक गली पीछे जो बिट्टू के पास वाला खाली प्लाट है वहा इंतजाम किया जा सकता है.. बस लाइट और टैंट का बंदोबस्त करना पड़ेगा.. 15-20 हज़ारका खर्चा आएगा.. हलवाई से भी मैंने बात कर ली है.. 150-200 अपनी तरफ के और लख्मीचंद बता रहे थे 50 उनकी तरफ से.. 250 आदमियों का खाना भी हो जाएगा..

सूरज विनोद के बातें सुनकर फ्रीज़ से पानी कि बोतल निकाल कर हॉल में सोफे कि तरफ आता हुआ विनोद कि बात काटते हुए कहा - 200 गज के प्लाट में 250 आदमियों कि व्यवस्था कैसे होगी भईया? और अब वो प्लाट बिक चूका है नया मालिक वहा फंक्शन करने की इज़ाज़त दे या ना दे.. किसे पता? और किस हलवाई से बात की है आपने? उस कांतिलाल से ना जिसने मधुर भईया की शादी में खाना बिगाड़ दिया था.. कितनी थू थू हुई थी उनकी..

जयप्रकाश - तो तू ही बता कुछ.. पहले तो बाहर घूमता था अब सिर्फ कमरे में ही पड़ा रहता है.. कोई उपाय हो तो बता.. क्या कोई गार्डन बुक कर ले?

सूरज - सगाई की जगह और खाने की जिम्मेदारी मेरी.. बाकी आपको देख लो.

विनोद - 5 दिन बाद सगाई है.

सूरज - कल इतवार है दोनों काम निपट जाएंगे.. आपको बेफिक्र रहो..

विनोद जयप्रकाश को देखकर सूरज से - ठीक है फिर.. मैं अभी कुछ पैसे ट्रांसफर कर रहा हूँ आगे जो कम पड़े वो बता देना..

जयप्रकाश - हनी.. सोच कर करना जो करना है..

सूरज अपने पीता की बात सुनकर घर से निकल जाता है और बिलाल की दूकान पर पहुंच जाता है..

क्या बात है ईद के चाँद.. कहा था पिछले कुछ दिनों से?

कहीं नहीं यार बस कुछ तबियत हलकी थी.. और सुनाओ.. दूकान तो नई जैसी कर दी बिल्ले तूने.

सब तुम दोनों की महरबानी से ही तो हो रहा है भाई..

हनी.. आइना और कुर्सी लानी बाकी है फिर बिल्ले की दूकान भी नये सलून जैसी हो जायेगी..

हाँ वो तो है.. तो बिल्ले कहा से ला रहा है बाकी सामान?

एक जानकार है हनी.. किसी दूकान का पता दिया है.. कह रहा था अच्छा सामान देता है.. बस वही जाना था.. एक बार देख आते केसा सामान है?

नज़मा चाय लेकर - चाय.. भाईजान..

सूरज चाय लेते हुए - तो चले जाओ ना तुम दोनों.. अगर सही लगे तो साथ ही ले आना..

बिलाल - और तू नहीं चलेगा?

सूरज - मुझे कहीं और जाना है आज..

अंकुश चाय पीते हुए - बेटा देख रहा हूँ पिछले कुछ दिनों से तेवर बदले बदले लगते है तेरे.. क्या बात है?

सूरज - कुछ भी नहीं.. 5 दिन बाद सगाई है भईया की.. थोड़ा बहुत काम है इसलिए किसी से मिलने जाना है.

नज़मा - सगाई भी तय हो गई.. अभी लड़की वाले देखने ही आये थे..

सूरज - अब जब सब राज़ी थे तो पंडित ने इतना जल्दी का मुहूर्त सुझाया की क्या कहा जाए.. वैसे लोकेशन अभी फाइनल नहीं है सगाई कहा होगी.. जैसे ही होती है मैं दोनों को व्हाट्सप्प कर दूंगा.

नज़मा अंदर जाते हुए - अच्छा..

अंकुश हसते हुए - तू नहीं बुलायेगा तब भी हम चले आएंगे.. डोंट वार्री.

बिलाल - हनी जा भी रहा है.. थोड़ी देर बैठ ना..

सूरज - अभी नहीं बिल्ले.. किसी दोस्त से बात की है उससे मिलने जाना है तू अक्कू के साथ बाकी सामान ले आ.. कल इतवार है दूकान पर भीड़ रहेंगी..

बिलाल - क्या भीड़ भाई.. इतवार हो या कोई दिन गिनती के 2-4 ही तो आते है कल क्या बदल जाएगा.

अंकुश - क्यों मनहूस बात करता है बिल्ले कल देखना लोगो की लाइन लग जायेगी दूकान पर.. चल चलते है उस दूकान पर..

अंकुश और बिलाल दूकान का बाकी सामान लाने चले जाते है और सूरज अपने कॉलेज दोस्त रमन के पास चला आता है..


रमन (3rd हीरो) - कहा चला गया था भाई सीधा तो रास्ता बताया था तुझे..

सूरज - मुझे लगा आगे से कोने वाली दूकान होगी..

चल कोई ना छोड़.. बता क्या लेगा?

कुछ नहीं चाय पीके आया हूँ..

तो फिर कॉफ़ी पिले..

नहीं रहने दे यार..

अरे क्यों रहने दे.. साले इतने महीनों के बाद तो मिलने आया है.. फ़ोन करो तो कोई जवाब नहीं.. किस हाल में ये भी नहीं पता.. कॉलेज के बाद तो ऐसे गायब हुआ जैसे गधे के सर से सींग..

कुछ नहीं यार.. बस यूँ समझा ले कहीं मन ही नहीं लगा..

तो मन को लगा भाई ऐसे क्या जीना? धरमु... दो कॉफ़ी बोल..

रमन ने अपने यहां काम करने वाले एक आदमी से कहा..

और सुना सूरज.. आज कैसे याद कर लिया तूने?

विनोद भईया की शादी तय हुई है.. 5 दिन बाद सगाई होनी है..

अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है.. साथ में तू भी शादी करवा ले भाई सुखी रहेगा..

पहले अपनी करवा ले..

रमन हसते हुए - भाई अब लगा ना पहले वाला सूरज.. कब से मनहूसियत लेते बैठा था चेहरे पर.. हाँ बोल क्या कह रहा था..

सूरज - भईया कि सगाई है पांच दिन बाद.. जगह चाहिए सगाई के लिए..

रमन - इतनी सी बात.. बता कहाँ चाहिए.. इतने सारे गार्डन है अपने.. अभी शादी का सीजन भी नहीं है खाली ही पड़े है सब.. बता कोनसा चाहिए?

सूरज - घर के आस पास देख ले कोई.. ज्यादा बड़ा प्रोग्राम नहीं है..

रमन - तेरे घर के पास है तो सही.. पर बंद पड़ा है.. सफाई करानी पड़ेगी..

सूरज - बंद क्यों पड़ा है? बुकिंग नहीं मिल रही क्या?

रमन - अरे नहीं बे.. वो जगह पापा और चाचा साझे में खरीदी थी और शादी ब्याह के लिए वहा गार्डन बनवाया था मगर बाद में विवाद हो गया.. कचहरी में मुकदमा चला तो अदालत ने पैसे देकर जमीन लेने को कहा.. चाचा के पास इतने पैसे नहीं थे तो वो जमीन खरीद नहीं सकते थे इसलिए हमने चाचा को जो उनका हक़ बनता था उसके मुताबित पैसे देकरजमीन लेली.. अभी 3 महीने पहले ही उसका सौदा हुआ है.. 8 साल से बंद पड़ा है.. मैं धरमु को कह दूंगा वो सफाई करवा देगा कल वहा की और लाइट, हॉल और रूम्स वगैरह भी देख लेगा.. लक्मी पैराडाइस नाम है.. मेरी दादी के नाम रखा था पापा और चाचा ने..

धरमु कॉफी रख देता है और चला जाता है..

सूरज - चलो अच्छा है..पैसे क्या लेगा?

रमन कॉफी पीते हुए - तुझसे पैसे लूंगा क्या भाई.. बस एक बार मेरा मुंह में ले लेना..

सूरज - भोस्डिके मेरे पास भी लंड है.. भूल गया तो याद दिलाऊ?

रमन हसते हुए - मज़ाक़ कर रहा था भाई.. अब तुझसे भी पैसे लूंगा क्या.. वैसे भी खाली पड़ा है..

सूरज - बहनचोद.. कॉलेज में चाय नहीं पीलाई तूने और आज इतनी मेहरबानी?

रमन - समय समय की बात है बेटा.. तब मेरा बाप फूटी कोड़ी तक नहीं देता था.. आज मैं बाप का पूरा धंधा संभाल रहा हूँ.. रईस हो गया है तेरा भाई.. रोज़ गाड़ी बदलता हूँ..

सूरज हसते हुए - चलानी आती है या ड्राइवर रखा है उसके लिए..

रमन - तेरा भाई उड़ा सकता है गाडी अब.. वैसे एक गुडमॉर्निंग न्यूज़ देनी है तुझे..

सूरज - क्या?

रमन - तेरी मेहबूबा को देखा था मैंने दो हफ्ते पहले.. ट्रैफिक में था.. बात नहीं हो पाई..

सूरज - माँ चुदाए.. मुझे बात नहीं करनी उसकी.. चल निकलता हूँ..

रमन - क्या हो गया भाई.. नाम लेते ही जाने की बात कर दी.. इतना गुस्सा? छोड़ यार.. जो हुआ सो हुआ.. उसे अपना भविष्य बनाना था.. लाइफ में कुछ करना था.. 3 साल हो गए हो गए उस बात को..

सूरज खड़ा होते हुए - कल सफाई करवा देना याद से उस जगह की.. मैं तुझे कार्ड व्हाट्सप्प कर दूंगा.

रमन - अच्छा सुन.. भाई.

सूरज - बोल..

रमन - मैं अगर गुनगुन से मिला और उसने तेरे बारे में पूछा तो मैं क्या जवाब दू?

सूरज - कहना मैं मर गया..

रमन अपना फ़ोन देखकर - ये चुड़ैल पीछा नहीं छोड़ेगी..

सूरज - कौन है?

रमन - कोई नहीं यार.. बस ये मान ले एक बला है मेरे सर पर.. बाप मर गया पर अपनी रखैल छोड़ गया मेरा खून पिने के लिए..

सूरज हसते हुए - रंगीन तो था तेरा बाप.. चल निकलता हूँ..

सूरज को रमन के पास से वापस बिलाल की दूकान पर आते आते शाम के 7 बज चुके थे.. उसने देखा की दूकान में बड़ा सा नया आइना और एक आरामदायक कुर्सी लग चुकी थी..

बोल क्या कहता है? है ना मस्त?

अंकुश ने सूरज से कहा तो सूरज कुर्सी पर बैठते हुए कहा - परमानन्द... अच्छा सुन तेरे पास लैपटॉप है ना..

अंकुश - क्या करेगा?

सूरज - जगह फाइनल हो गई सगाई का कार्ड बना देता हूँ सबको व्हाट्सप्प कर दूंगा..

अंकुश - अरे उसमे क्या बड़ी बात है तू जगह और बाकी चीज़े लिख दे मैं खुद बनाके तुझे सेंड कर दूंगा.. वैसे जगह कोनसी तय की..

सूरज - ये स्कूल के पीछे वाला गार्डन.. जो बंद पड़ा है..

अंकुश - उस पर तो केस चल रहा था ना.. सुना है दोनों भाई है..

सूरज - फैसला हो गया.. कॉलेज का एक दोस्त है उसके बाप के हक़ में है सब.. कल परसो में सफाई और बाकी चीज़े करवा देगा.. एक पंखा भी ले आते तुम.. ये चलता कम शोर ज्यादा करता है..

बिलाल - कल वो भी आ जाएगा हनी.. जितना सोचा था उसे कम में ही काम हो गया..

सूरज - तो फिर पंखे की जगह कूलर ही ले लेना भाई.. अभी मार्च में ये हाल है मई जून में ना जाने क्या होगा?

अंकुश - निश्चिन्त रह भाई.. कल प्लास्टिक के परदे भी लग जाएंगे.. और कूलर भी आ जाएगा.. आखिर अपनी बैठक है ये.. कोई कमी थोड़ी रहने देंगे..

सूरज - अच्छा चलता हूँ.. कल मिलते है.. अक्कू याद से सेंड कर देना तू कार्ड..

अंकुश - अरे हनी.. कल शाम वो बंसी काका के साथ बैठना है याद है ना..

सूरज - हाँ याद है.. पर पहले अपने मुन्ना से मिलके आएंगे..

अंकुश - क्यों?

सूरज जाते हुए - भाई सगाई में हलवाई भी तो बुक करना है..

अंकुश हसते हुए - असली जीजा के घर फंक्शन है हलवाई का काम साला ही तो करेगा..

बिलाल - भाई जैसी हरकते है ना तुम्हारी.. कभी भी पिट सकते हो तुम मुन्ना से..

***********

सूरज और गरिमा व्हाट्सप्प पर बातें कर रहे थे जिनमे दोनों ही मशगूल थे आज के दिन का सारा हाल दोनों ने एकदूसरे को कह सुनाया था.. सूरज गरिमा से बात कर ही रहा था कि नीचे से सुमित्रा उसके नाम कि आवाजे लगाते हुए छत पर आ गई..

खाना नहीं खाना तुझे? कब से छत पर बैठा है..

आ रहा हूँ माँ.. आप खाना डाल दो ना..

और ये बू कैसी है? तू फिर से नशा तो नहीं करने लगा ना हनी? देख बड़ी मुश्किल से तू वापस सुधरा है इन सब चीज़ो से दूर रह..

मैं कोई नशा नहीं कर रहा माँ.. मालती आंटी के हस्बैंड छत पर आते थे अभी अभी सिगरेट पीके गए है नीचे.. उसी की बू आ रही होगी आपको.. अब लगती हुई छत है तो स्मेल आ रही होगी.. आप जाओ में आता हूँ नीचे..

सुमित्रा सूरज के गाल को अपने हाथ से सहलाती हुई अपनी प्यारी भरी आँखों से उसे एक नज़र देखकर जाते हुए कहती है - जल्दी आ.. खाना ठंडा हो जाएगा..

सुमित्रा के नीचे जाने के बाद सूरज व्हाट्सप्प पर गरिमा से खाना खाने की इज़ाज़त लेता है और नीचे आ जाता है..

सबने खाना खा लिया एक तू ही बचा है.. ले.. खा ले..
सूरज खाने कि प्लेट लेकर वही रसोई की स्लेब पर बैठकर खाते हुए - माँ.. पापा से कहना जगह देख ली है सगाई की..

सुमित्रा बर्तन धोते हुए - अच्छा.. कहाँ?

यही.. स्कूल के पीछे जो बंद बड़ी हुई जगह है वही.. कल सफाई हो जायेगी उसकी.. अच्छी जगह है.. बहुत बड़ी भी है.. और ये लो.. कार्ड भी बनवा दिया है.. भईया और पापा जिसे भी सगाई में बुलाना चाहते है उनको व्हाट्सप्प कर देगे..

सुमित्रा सूरज के फ़ोन में सगाई का कार्ड देखकर खुश होते हुए बोली - अरे.. क्या बात है मेरा हनी तो बहुत जिम्मेदार हो गया.. इसे तू मेरे फ़ोन में भेज में सबको भेज दूंगी..

भेज रहा हूँ.. कल हलवाई का भी फाइनल हो जाएगा.. और कुछ करना हो वो भी बता देना.. हो जाएगा..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - ठीक है.. अच्छा एक बात बता.. मालती आंटी के जो हस्बैंड है वो अपनी छत पर आके सिगरेट पीते है क्या?

सूरज हड़बड़ाते हुए - मतलब?

सुमित्रा मुस्कुराते हूर - नहीं वो बस ऐसे ही पूछा.. सिगरेट पीकर अपनी छत पर फेंक देते है ना.. कल सुबह मालती से बात करनी पड़ेगी..

सूरज - इतनी सी बात कर लिए क्या बात करनी है.. छोडो ना.. फिज़ूल क्यों मुंह लगना उनके..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - नहीं नहीं बात तो करनी पड़ेगी.. ये अच्छी बात थोड़ी है..

सूरज खाना खा कर प्लेट वश बेसिन में रखते हुए - अरे माँ छोडो ना... इतनी सी बात का क्यों बतंगड़ बना रही हो.. मुझे नींद आ रही है मैं सोने जा रहा हूँ..

सुमित्रा जाते हुए सूरज का हाथ पकड़ लेटी है और उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुरा कर कहती है - चुपचुप के सिगरेट पीता है ना तू?

सूरज - नहीं माँ.. मैंने बताया ना वो मालती आंटी के हस्बैंड थे..

सुमित्रा - मालती आंटी अपने हस्बैंड के साथ शिमला गई है घूमने.. मुझे उल्लू समझा है तूने? देख हनी.. तू कहीं फिर से वो सब मत करने लग जाना.. बड़ी मुश्किल से तू सही हुआ है.. कहीं फिर से शराब और उन सब नशे में डूब गया तो सबकुछ खराब हो जाएगा..

सूरज - मैंने वो सब कुछ छोड़ दिया है माँ.. बस कभी कभी छत पर सिगरेट पीता हूँ.. आपसे झूठ बोला उसके लिए सॉरी..

सुमित्रा - सच कह रहा है ना तू?

सूरज - आपकी कसम.. बस कभी कभी शराब भी हो जाती है.. पर कभी कभी..

सुमित्रा सूरज को अपने गले से लगा लेती है और कहती है - हनी.. मैं तेरी माँ हूँ.. बेटा मुझसे कुछ मत छिपाया कर.. तू जानता है मैं तेरी बातें किसी और से नहीं करती.. फिर भी तू छिपकर ये सब करता है.. वादा कर तू अब से मुझसे सब सच सच कहेगा..

सूरज - अच्छा वादा.. अब छोडो मुझे.. वरना आपके गले लगे लगे ही सो जाऊँगा..

सुमित्रा सूरज के दोनों गाल चूमते हुए - सुना है आज वो चिंकी ससुराल से वापस आई है.. उसे दूर रहना.. उस कलमुही की हमेशा तेरे ऊपर नियत ख़राब रहती है..

सूरज मुस्कुराते हुए - अब माँ इतना हैंडसम बेटा पैदा किया है आपने.. लड़किया आगे पीछे ना घूमे तो क्या फ़ायदा..

सुमित्रा सूरज को अपनी बाहों से आजाद करती हुई - चल बदमाश कहीं का.. सो जा जाकर..

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Jabardas Update....
Avi tak to Kahini kisi Normal Serial jasa hi lag raha ha...
Na koi Incest, Na koi Adultary, Na koi Cuckold Cuckson...

Or tin tin hero...
Na jana aga kiya kiya Scene hoga....

Chalo dekhta ha....



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