- 22,596
- 59,650
- 259
कोमल जी मम्मी की गांड़ की मालिश करवाओ, और गांड़ चटवाओ।मालिश
" जा रहा हूँ ,कड़ाही जल रही होगी। " और वो भाग के किचेन में।
मैं और मम्मी खिलखिलाते रहे।
उनके कपडे मैंने उनकी आलमारी में लगा दिए।
शाम का खाना सिम्पल था लेकिन प्योर नान वेज।
और उसके बाद कटे हुए दसहरी ,अल्फांसो ,..
मम्मी ने जिद कर के अपने साथ बैठाया उन्हें खिलाने के लिए और पूरे खाते समय ,...
उनकी माँ बहनों का नाम ले लेकर ,...
और बीच बीच में धमकी भी देतीं
," चल मेरी समधन से तेरी कबड्डी तो होगी ही ,लेकिन देख आज मैं क्या हाल करती हूँ तेरा मादर चो..."
वो बिचारे शर्मा भी रहे थे , झिझक भी रहे थे ,कुछ घबड़ा भी रहे थे लेकिन कुछ कुछ मन भी कर रहा था।
खाने के बाद हम तीनों मम्मी के कमरे में पहुंचे तो वहां भी मम्मी ने , ...
उनके गोल गोल कड़े नितम्ब सहलाते दबाते ,
एक ऊँगली उन्होंने बीच की दरार में घुसा दी और हलकेहलके चलाते बोलीं ,
" मेरी समधन के भी चूतड़ भी ऐसे ही मस्त मस्त गोल हैं , छिनार बचपन से मरवाती है न। "
मम्मी बिस्तर पे लेट गयी और वोलने लगीं ,थोड़ी थकान लग रही है।
मैंने इशारा किया और वो मम्मी के पैर दबाने में लग गए , पहले तलुए ,फिर पिंडलियाँ ,फिर थोड़ा और ऊपर , फिर ,..
उँगलियों से जिस तरह वो दबा रहे थे ,प्रेस कर रहे थे ,नीड कर रहे थे क्या कोई प्रोफेशनल मालिश वाली करेगी।
थोड़ी देर में मम्मी का दर्द काफूर हो गया लेकिन वो गहरी नींद में सो गयीं ,और हम दोनों अपने बेड रूम में आ गए।
आपको भी double attack पसंद है क्या???कोमल जी
निहारिका का प्यार भरा नमस्कार !
"
हम दोनों के डबल अटैक के आगे , ...
बस गृहिणियों का पुराना बहाना और पुरानी छिपने की जगह ,
" जा रहा हूँ ,कड़ाही जल रही होगी। "
और वो भाग के किचेन में। "
एकदम सच ..... मैं भी सीधा किचन मैं ही भगा करती हूँ ..... आज भी .... पर बाच पाना नमुमकिन .....
वो बस आ कर पीछे से .... कभी कमर पर नहीं तो मेरे गोल मटोल मेरे पीछे वाले ... साड़ी उठा कर ..... शरारत ... और मैं गर्म हो कर रह जाती हूँ ...
आप तो यहाँ डबल अटैक पर हैं .....
मनमोहक .... टोर्चेर ... काबिले - ऐ- तारीफ ..
आपकी निहारिका