जोरू का गुलाम भाग २५६ पृष्ठ १६०७
अब मेरी बारी
अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
अब मेरी बारी
अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
लम्बाई भी ज़रूरी है पर असली चीज़ मोटाइ है
ये बात वही जाने जिसने अच्छे से मारवाई है
लिंग का कड़कपन और देर तक टिकना जरूरी है
ऐसे लौड़े से चुदे बिना औरत की प्यास अधूरी है
ख़ुशी ख़ुशी सौंप देती है औरत उसे जवानी
चोद चोद के उसको चूत से निकाल दे पानी
स्त्री भी उसी पुरुष को चुनती हैं जिसमें उसे मर्दानगी पुरुष्राथ नज़र आता हैं और उस स्त्री को रूह से एहसास होता हैं की सिर्फ इसी मर्द में स्त्रीभोग करने का साहस हैं तो वो स्त्री उस मर्द के साथ खुशी खुशी उसे स्त्रीभोग ओर खुद उस मर्दानगी का सुख पाने के लिए बेताब हो जाति है.
कोमल जी, आप कितनी खूबसूरती से एक महिला की भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करती हैं। वो दिन गए जब एक महिला घर की चारदीवारी में खुद को गुप्त रखती थी और जिससे उसकी शादी हुई थी उसी के साथ अपनी जिंदगी बिताती थी। अब वह अपनी शर्तों पर जीवन जीना चाहती है और अगर वह अपने शयनकक्ष में असंतुष्ट महसूस करती है तो दूसरे पुरुषों की तलाश करने से नहीं हिचकिचाती।
आपकी कविता पढ़ते - पढ़ते काव्य बहुत आसान सा जान पड़ता है लेकिन जैसे ही लिखने की सोचो तब पता लगता है कि आपकी विधा और उसकी गहराई।आरुषि मैम
isme koyi shak nahi . you are a stickler to facts, as my friend says, a statistician, who knows how to figure out figures, and i do not mean the way we use the figure in the stories.
सहज होना सबसे कठिन हैआपकी कविता पढ़ते - पढ़ते काव्य बहुत आसान सा जान पड़ता है लेकिन जैसे ही लिखने की सोचो तब पता लगता है कि आपकी विधा और उसकी गहराई।
वाकई आपके सहज और सरल काव्य की प्रशंसा भी करना मुझ जैसे पाठक की शक्ति से परे है।
मेरा विनम्र अभिवादन स्वीकार कर मुझे अनुगृहित करे।
सादर
कितनी ज्ञान भरी बातें लेकिन कितने कामोत्तेजक शब्दों के साथ, और कितनी आसानी सेलम्बाई भी ज़रूरी है पर असली चीज़ मोटाइ है
ये बात वही जाने जिसने अच्छे से मारवाई है
लिंग का कड़कपन और देर तक टिकना जरूरी है
ऐसे लौड़े से चुदे बिना औरत की प्यास अधूरी है
ख़ुशी ख़ुशी सौंप देती है औरत उसे जवानी
चोद चोद के उसको चूत से निकाल दे पानी
स्त्री भी उसी पुरुष को चुनती हैं जिसमें उसे मर्दानगी पुरुष्राथ नज़र आता हैं और उस स्त्री को रूह से एहसास होता हैं की सिर्फ इसी मर्द में स्त्रीभोग करने का साहस हैं तो वो स्त्री उस मर्द के साथ खुशी खुशी उसे स्त्रीभोग ओर खुद उस मर्दानगी का सुख पाने के लिए बेताब हो जाति है.
कोमल जी, आप कितनी खूबसूरती से एक महिला की भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करती हैं। वो दिन गए जब एक महिला घर की चारदीवारी में खुद को गुप्त रखती थी और जिससे उसकी शादी हुई थी उसी के साथ अपनी जिंदगी बिताती थी। अब वह अपनी शर्तों पर जीवन जीना चाहती है और अगर वह अपने शयनकक्ष में असंतुष्ट महसूस करती है तो दूसरे पुरुषों की तलाश करने से नहीं हिचकिचाती।
Next part soon aaj ya kal pakkaAb to bus party shuru ho jaye jaldi se
आपने मेरी ननद को कमजोर समझा है, मैच होने दीजिये देखिये कैसे छक्के मारती हैNo. 1 ko jhelna guddi ke liye to bahut mushkil hai, guddi ki bhabhi hi jhel skti hai use
एकदम और इन्सेस्ट के आँगन में बेबी स्टेप्स बिना डाक्टर साहिबा की मदद के, उनका हाथ थामे मुश्किल हैलेकिन पात्रों के नाम के चयन... और उनके बीच रिश्तों की डोर... के लिए...
कहानी के स्थूल रूप के लिए कुछ पहले से हीं जरूरत पड़ेगी...
फिर डिटेल और संवादों में भी आप दोनों का समन्वय हो तो अति-उत्तम...
गुड्डी को दोनों काम करना है,बेचारी नर्ड के बीच फंस गई... ननद रानी...
लेकिन इसकी मेंटर कहाँ गई....
इसके साथ को छोड़ कर किसी और के साथ...
अक्सर हाईस्कूल के बाद ही कोचिंग शुरू हो जाती, कोचिंग वाले ११, १२ की पढाई भी करवा देते हैं और कोचिंग भी, और नहीं हुआ तो एक साल का अलग से कोर्स होता है,... तो तीन साल तो,और एक नई .. मस्त बिंदास... झक्कास लड़की..
समाज सेविका.. सब सेक्शन का ध्यान रखने वाली...
लेकिन ये चार साल.. कोचिंग तो साल... बहुत हुआ तो दो साल...
ये कुछ समझ नहीं आया...