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चलिए अब कहानी की ओर रुख करते है.................देखते है आगे क्या क्या हुआ..............और कहा तक ...............
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खेर यह पात्र इतना ज्यादा महत्त्व नहीं रखता, यह नाम सिर्फ उदहारण के तौर पे लिया गया था. फिर भी इमली काकी अपनी बेटी की सौतन बनी थी................ जो यहाँ इस कहानी में सुंदरी और महक के बिच बात हो रही थी.B
UT imli kaki kiski sautan hai
Mast update“देखो मैं हररोज तो नहीं आ पाऊँगी पर जब मौक़ा मिलेगा तुम्हारे इस लंड को शांत करने के लियी आ जाउंगी पर मुनीम को नहीं बताना की मैं तुमसे चुदवा रही हु, मैं मुनीम से कह दूंगी की मैंने उसके लिए चुतो का इंतज़ाम कर रखा है और वह जब भी चाहे तुम्हारी बीवी और बेटी की चूत भर सकता है, ठीक है!” उसने अपना और मुनीम का इंतज़ाम कर दिया और यह भी नहीं बताना चाहती थी की यह सब मुनीम की मंजूरी से हो रहा है। सब के मन में कुछ डर मुनीम का रखना चाहती थी। आखिर वह भी तो मुनीम से बहोत प्यार करती थी। “मुझे लगता है की तुम्हे यह सौदा मंजूर है!”
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अब आगे...................
अरे, कैसी बात कर रही हो! तुम कहो और मैं ना मानु कैसे हो सकता है! बस मुझे तेरी चूत और पिछवाड़ा में मजा लेने देना, जब समय मिले तब मेरे पास आ जाना या फिर जब मुनीम घर पर ना हो मुझे बुला लेना, मुझे तुम्हारा हर सौदा मंजूर है, रजनी और मेरी बेटी की चूत अब तुम चाहो तब इस्तेमाल कर सकती हो उसके लिए अब मेरी परमिशन की जरुरत नहीं होगी। यह बात मैं दोनों चुदासी को बता दूंगा और मेरी नौकरानी की चूत भी उपलब्ध होगी। वो क्या है की मुझे मुनीम से थोडा डर लगता है बाकि कुछ नहीं।“
सुंदरी ने टेबलेट की पट्टी ली, जब तक सुंदरी कपडे पहन रही थी तब तक वह उसके हर एक अंग को निहारता रहा। फिर सुंदरी ने कपड़े पहने और दोनों बाहर आये और उन्होंने देखा कि परम नग्न अवस्था में बैठा था और रजनी के साथ खेल रहा था वह अपनी उंगलियो से रजनी को चोद रहा था और रिंकू उसके बगल में नग्न अवस्था में बैठी थी। रिंकू परम के ढीले लंड को ऊपर निचे कर के खेल रही थी। फनलवर की प्रस्तुति।
“क्यों बेटा, रजनी की चूत पसंद आई!” आदमी ने पूछा।
“हा काका… आपकी बीबी रजनी और रिंकू दोनों ने बहुत मजा दिया। जम के चुदवाती थी।” परम ने कहा “और मेरी माँ सुंदरी ने पूरा मजा दिया की नहीं…? आप ने मम्मी को मजे से चोदा ना!”
“पूछ मत बेटा, इतना मजा जिंदगी में पहले कभी नहीं आया, तेरी माँ एक मस्त माल है जिसे जितनी बार चोदो कम ही लगता है।” आदमी ने कहा।
उसने अपनी पत्नी से पूछा कि क्या वह उन्हें जूस और खाने का कुछ सामान नहीं देगी।
रजनी और रिंकू उठ गए, उन्हों ने कपडे पहन ने की तस्दी तक नहीं ली और नंगी ही किचन की ओर चल दी। सुंदरी अपने बेटे परम के पास बैठ गई। उसका मन अपने बेटे के लंड को सहलाने का हुआ लेकिन उसने अपने प्रलोभन का विरोध किया और उसी समय दरवाजे पर दस्तक हुई। परम उठकर अंदर चला गया। आदमी ने दरवाज़ा खोला और यह उसकी बेटी सुधा थी जो महक को विनोद के साथ उसके घर पर छोड़कर लौटी थी। (आप लोगो को याद ही होगा।) फनलवर की पेशकश
वह कल्पना कर रही थी कि विनोद उसकी सहेली महक को कैसे चोद रहा होगा। वह पहले से ही गीली थी और अपने पिता को देखकर और भी उत्तेजित हो गई। वह अपने पिता से चुदने का प्रस्ताव रखना चाहती थी। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, उसने अपनी माँ और नौकरानी को नग्न अवस्था में सुंदरी को खाना परोसते हुए देखा। वह सोच रही थी कि परम कहाँ है, लेकिन उसके पिता ने उसे चौंका दिया। उसने उसे पीछे से पकड़ लिया और बेटी के एक बोबले को दबोच लिया।
“मैं पीछले एक साल से इस मौके के इंतज़ार में था कि लोग मेरी बेटी सुधा को अपने बाप से चुदते देखे!”
उसने उसकी फ्रॉक उसके शरीर से उतार दी और स्लिप और पैंटी भी नीचे सरका दी। अब सुधा नग्न थी और अपने स्तनों को ढकने की कोशिश कर रही थी।
“अपनी ही बेटी को चोदोगे!” रजनी ने कहा। "सुंदरी को दो-दो बार चोद कर लौड़ा ठंडा नहीं हुआ आपका जोइस बेचारी को नंगी कर दिया? उसका माल नजर आ रहा है।"
उसने अपनी धोती और बनियान उतार दी और अब अपना तना हुआ लंड अपनी बेटी के कूल्हों पर रगड़ने लगा।
“साली कुतिया रोज मुझे अपनी चूत दिखा कर तड़पाती थी, आज साली को चोदकर अपने बच्चे की माँ बनाउंगा।” उसने उसे चारपाई पर धकेल दिया, सुधा ने भी कोई विरोध नहीं किया।
रजनी ने कहा: “अरे बाप रे.....अब आपका बच्चा सुधा की कोंख में डालने का इरादा भी कर रखा है! गजब के बाप हो तुम। जाओ अन्दर जाके आराम से बेटी को चोदो, चाहिए तो रिंकू की मदद ले सकते हो।“ रजनी ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि वह खुश थी की बेटी अपने बाप से चुदेगी।
सुधाने कहा, “आपने ही तो रिंकू को मेरे सामने चोदकर सील फाड़ दिया था और रोज अपना लौड़ा दिखा कर रिंकू की चुदाई करते हैं।”
सुधा अपनी बात पूरी नहीं कर पाई और उसके पिता का लंड उसकी चूत में अपनी सफ़र के लिए चल दिया।
“रंडी तू तो पहले से ही चुदी हुई है।” बाप ने कहा।
“और कितना इंतज़ार करती, मैं रोज़ अपनी चूत को खुजलाती हूँ कि तुम चोदोगे लेकिन तुम्हें उस कुतिया रंडी रिंकू की ही चूत पसंद थी। मैं चाहती थी की घर का लंड मेरी चूत चोदेगा तो कोई जानेगा नहीं और मेरी चूत शांत रहेगी, तभी तो मैं रोज आपको चूत देखाती थी, पर आप ने कभी आपका लंड मेरी ओर लाये ही नहीं।” फनलवर रचित कहानी है।
अपने बाप के लंड को पूरी तरह निगलने के लिए उसने अपने पैर हवा में फैलाते हुए कहा। उसके बाप को अब पूरी जगह मिल गई थी और बाप का लंड बेटी की चूत को खुरेदने लगा। उसके धक्के कुछ शक्तिशाली था तो बेटी सहन नहीं कर पाई और जल्दी ही अपना चुतरस छोड़ दिया। जब वह ढीली हुई तो रजनी आआगे आके सुधा के पैरो को ऊपर उठाये पकडे रखा।
“अब लंड को शांत करने की जिम्मेदारी चूत की है बेटे। मार ने दे अब तेरे बाप को जितने धक्के मारने है। मैं पैर पकड़ती हु।“
लेकिन बाप का लंड कैसा था वह तो सुंदरी अच्छे से जानती थी उसकी चूत अब सूजी हुई पड़ी थी और उसने फिल किया की उसकी चूत अभी भी सुजन बढ़ा रही थी।
बाप और बेटी दोनों ने आपस में बातें कीं और सबने देखा कि बाप ने उसकी इकलौती बच्ची को 20 मिनट तक चोदा। वह पूरी तरह थक जाने पर ही उठा, हालाँकि उसका लंड अभी भी बेटी को और चोदने के लिए तैयार था। उसने अपना लंड बेटी की क्लिट पर रगड़ा और आखिरकार उसका वीर्यपात हो गया और उसने फिर से बेटी की चूत में लंड डाल दिया।
“ले बेटी, मेरी बेटी की माँ बन जा। जो बड़ी हो के मेरा लंड को शांत करे।”
रजनी को बुरा इसलिए नहीं लगा क्योंकि उसके पिता ने परम और सुंदरी समेत बाकी लोगों की मौजूदगी में अपनी ही बेटी को चोदा, बल्कि उसे इस बात का दुख था कि उसके पति को अभी भी एक बेटे की चाहत है और वह चाहता है कि उसकी बेटी उसके गर्भ में उसका बीज धारण करे, उसका फुग्गा फुले। वह जानती थी कि पिछले एक साल से उनकी नौकरानी को उसका पति नियमित रूप से चोद रहा था, लेकिन वह अपने पति से बच्चा पैदा नहीं कर पा रही थी। वह नौकरानी को पुडिया देके गर्भाधान से बचा रही थी।
सुंदरी ने पहले भी अपने पति मुनीम को अपनी बेटी महक को चोदते देखा था, लेकिन वह बिना किसी को देखे हुआ था और अब एक पिता चाहता था कि उसकी बेटी चार दर्शकों की मौजूदगी में गर्भवती हो, उसके मन में भी विचार आया की क्यों ना महक भी मुनीम का बच्चा रख ले। वह सुधा के पास गई और उसकी योनि को सहलाया और वह आदमी सुंदरी को सहलाने लगा।
“बेटी, बाप के बिज से बच्चा पैदा करना सब के नसीब में नहीं होता। तू तो काफी नसीबवाली है बेटी, जो तुझे आज अपने बाप का लंड से तुझे फुग्गेवाली बनाये जा रहा है।“ सुंदरी ने सब को उकसाते हुए कहा। रजनी भी अब कोई इरोध नहीं कर सकी। जब सुंदरी ने रजनी के सामने देखा तो वह मुस्कुराते हुए अपनी सम्मति जाता रही थी।
उसने सुंदरीके कपड़े उतार दिए और लगभग 15-20 मिनट बाद उसने तीसरी बार सुंदरी की सूजी हुई चूत में अपना लंड डाला। लेकिन वह थका हुआ था और उसे 5 मिनट से ज़्यादा नहीं चोद सका। उसने परम से पूछा कि क्या वह सुधा को चोदना नहीं चाहता, और परम ने जवाब दिया कि सुबह ही जब वह उन्हें बुलाने आई थी, तब उसने उसे चोदा था। सुधा ने आगे बताया कि परम ने उसकी चूत में पहला लंड डाला था। तभी सुंदरी ने एक इशारा किया तो उसने यह नहीं बताया कि सुंदरी के पति ने भी उसे चोदा है।
कुछ देर बाद सुंदरी और परम वहां से चले गए और करीब एक बजे वे अपने घर पहुंचे। महक ने दरवाज़ा खोला और जब वे अंदर दाखिल हुए तो उन्हें विनोद को अपने बिस्तर पर नग्न अवस्था में पड़ा हुआ देखकर बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ। कुछ दिन पहले ही महक ने साफ़ कर दिया था कि वह विनोद से शादी करना चाहती है और उससे चुदवाना चाहती है। उन्हें देखकर विनोद चौंक गया और उन्होंने अपना पायजामा पहन लिया। सुंदरी ने महक के एक पैर को थोडा फैलाया और देखा उसकी चूत विनोद और चूत के मिक्सचर को उगल रही थी और उसकी झांगो को गिला कर रही थी। सुंदरी ने महक की ओर देख के अपनी संतुष्टि जताई।
“विनोद अब तो तुमने महक का मजा ले लिया, अब तो उससे शादी नहीं करेगा!” सुंदरी ने कहा।
“कौन भोसडिका कहता है? अब तो मैं जरूर महक से शादी करुंगा। इससे अच्छी माल कोई नहीं है। मैं मां को बोलता हूं कि जल्दी से शादी करवा दे।” विनोद ने महक की गांड के छेद को सहलाया।
महक शरमा गई और दूसरे कमरे में चली गई। परम ने अपनी माँ से पूछा, “विनोद से चुदवाओगी।?”
“नहीं आज नहीं। बाद में, बहुत थक गयी हूँ।” सुंदरी ने कहा। वह कह नहीं सकी की अभी उसकी चूत सुजन से भरी पड़ी है, ठीक से मूत भी पाएगी की नहीं। उसे लग रहा था की यह मुनीमजी जैसा ही है, अच्छा हुआ गांड नहीं मरवाई। वह विनोद की ओर मुड़ी और बोली, "तू कल 10 बजे आ जाना, मैं तैयार रहूंगी।" उसने आगे कहा, "कल महक को कॉलेज भेज दूँगी तुम दोनों (विनोद और परम) साथ मिल के मेरे छेदों से मज़ा लेना।" विनोद खुशी-खुशी बाहर चला गया।
उसने साड़ी और ब्लाउज़ उतार दिया और अपने दोनों बच्चों के साथ आराम करने लगी। उसने बच्चों को अपने साथ प्यार से पेश आने दिया। उस दौरान उसने महक की चूत का अंदाजा लगा लिया की वह कितनी बार चुदी है। महक ने भी जान लिया की माँ काफी चुद के आई है उसकी चूत की सुजन ही बता रही थी। पर उसने उसका जिक्र नहीं किया।
लगभग एक घंटे बाद, परम दस्तक सुनकर दरवाज़ा खोलने के लिए बाहर गया और वहाँ पुष्पा थी जो उससे चुदाई करवाने के लिए उसके घर आने को तैयार हो गई थी। जब तक पुष्पा कमरे में दाखिल हुई, तब तक माँ और बेटी दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए थे। पुष्पा ने सोचा कि परम अकेला होगा, लेकिन वहाँ दो और थीं। वह उदास हो गई। परम ने सुंदरी और महक को बाहर बुलाया और उन्हें बताया कि पुष्पा क्यों आई है। फनलवर की प्रस्तुति।
सुंदरी मुस्कुराई, लेकिन महक बोली, "भैया तुम भी,...पहले बेटी (पूनम) को चोदा और अब उसकी माँ को।"
"बेटी, पूनम को कुछ भी बताना नहीं! मैं बस चुदवा के चली जाउंगी।"
“अरे आंटी, क्या बात करते हो आप की बात आप के साथ, उसकी बात उसके साथ, आप बेफिक्र हो के परम के लंड से खेले, मैं कुछ भी नहीं बताउंगी पूनम को। आप चिंता ना के और अपनी चूत आराम से भरा के जाइए।“
सुंदरी पुष्पा को बेड तक ले गई और जोर से धक्का लगा के पुष्पा के ऊपर चढ़ गई, पुष्पा ने कोई विरोध नहीं किया और उसने अपना घाघरा ऊपर कर दिया, जैसा की कोई महिला पेंटी में समजती ही नहीं सिवा उन 3 से 5 दिनों तक जब उनकी चूत छुट्टी पर होती है। और स्कुल-कोलेज के समय पर बाकी समय अन्दर से बिलकुल नंगी।
पुष्पा अभी भी महक की ओर देखती थी शायद अभी भी उसे विश्वास नहीं था जो महक ने बोला। यह बात महक के समज में आ गई उसने वही बात फिर से दौराही
"चिंता मत करो काकी, जो तुमने और माँ ने किया है वो मैं और पूनम पहले ही कई बार कर चुके हैं।" महक ने कहा। “आप निश्चिन्त रहे और अपनी मजा ले। चलिए अपनी चूत खोलिए, देखू भोस कैसी है।“ उसने पुष्पा को आश्वासन दिया।
सुंदरी ने भी कहा “अरे पुष्पा रानी जब चूत खोलनी ही है तो जी भर के खोल रानी, ऐसे डर के चूत खोलोगी तो ना तुम्हे मजा आयेगा ना तुम्हारी यह हसीन चूत को, चल आ बैठ और मुझे तेरा चूत का रस पिला जरा, देखू तो सही मेरे बेटे की सांस की चूत में कितना दम है और कैसा उसका स्वाद है।“ कह के उसने फिर से पुष्पा के पैर उठाये और अपना मुंह उसकी चूत पर ड़ाल के उसकी चूत को लोंक कर दिया।
पुष्प अभी भी महक को देखती थी और अपनी सिस्कारिया लेती थी। महक भी थोडा आगे आई और जोर से पुष्पा के स्तनों को मसला जिस से पुष्पा की सिसकारी और तेज हो गई।
“भाई की चोदी हुई जरा धीरे दबा।“ इस एक्शन से पुष्पा जरा खुली, उसका डर थोडा कम हुआ और उसने महक की स्तन की दीनटी को थोडा बाहर की ओर खिंचा और छोड़ा जिस से महक थोड़ी खिसक गई।
थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा अब महक ने रूम छोड़ दिया और अपनी माँ और आंटी को एक दुसरे की चूत के पानी का स्वाद लेने दिया।
थोड़ी देर के बाद पुष्पा और सुंदरी बिना कपड़ो ही बाहर आ गई और महक ने कुछ नाश्ता बनाया था तो नाश्ते को खाने को बैठ गई, और बाते करने लगी, खाते खाते ही दोनों ने अपने अपने ब्लाउज चढ़ा दिए थे।
पुष्पा ने कहा की वह थोड़ी ही देर के लिए आई हुई थी तो सब लोग वहा उसके घर चले। उन्होंने नाश्ता खत्म किया, तैयार हुए और सब साथ में घर से निकल पड़े। वे सब पुष्पा के घर पहुँचे। पुष्पा घर में ही रही और पूनम ने महक को पकड़ लिया और उससे साथ रहने का अनुरोध किया। उसने कहा कि शाम को वे दोनों सेठजी के घर चलेंगे। परम ने पूमा को देखा, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाता, पुष्पा का पति बाहर आ गया। सुंदरी ने अपना सिर ढक लिया और कहा, "प्रणाम भैया" और परम ने उनके पैर छुए। आखिर वह परम के होने वाले ससुर जो थे।
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आज के लिए बस इतना ही कल फिर मिलेंगे यही पर तब तक के लिए शुभरात्री।
तब तक आपको ठीक लगे तो कोमेंट कर देना।
जय भारत.
De diya sirji....अपडेट के इंतेज़ार में है मैडम जी !
Bhaut hee jabardast update hai… ab sab ek dusre ke sath puri khul gayin hai or koi bhi kabhi kisi ke sath shuru ho skta hai …“देखो मैं हररोज तो नहीं आ पाऊँगी पर जब मौक़ा मिलेगा तुम्हारे इस लंड को शांत करने के लियी आ जाउंगी पर मुनीम को नहीं बताना की मैं तुमसे चुदवा रही हु, मैं मुनीम से कह दूंगी की मैंने उसके लिए चुतो का इंतज़ाम कर रखा है और वह जब भी चाहे तुम्हारी बीवी और बेटी की चूत भर सकता है, ठीक है!” उसने अपना और मुनीम का इंतज़ाम कर दिया और यह भी नहीं बताना चाहती थी की यह सब मुनीम की मंजूरी से हो रहा है। सब के मन में कुछ डर मुनीम का रखना चाहती थी। आखिर वह भी तो मुनीम से बहोत प्यार करती थी। “मुझे लगता है की तुम्हे यह सौदा मंजूर है!”
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अब आगे...................
अरे, कैसी बात कर रही हो! तुम कहो और मैं ना मानु कैसे हो सकता है! बस मुझे तेरी चूत और पिछवाड़ा में मजा लेने देना, जब समय मिले तब मेरे पास आ जाना या फिर जब मुनीम घर पर ना हो मुझे बुला लेना, मुझे तुम्हारा हर सौदा मंजूर है, रजनी और मेरी बेटी की चूत अब तुम चाहो तब इस्तेमाल कर सकती हो उसके लिए अब मेरी परमिशन की जरुरत नहीं होगी। यह बात मैं दोनों चुदासी को बता दूंगा और मेरी नौकरानी की चूत भी उपलब्ध होगी। वो क्या है की मुझे मुनीम से थोडा डर लगता है बाकि कुछ नहीं।“
सुंदरी ने टेबलेट की पट्टी ली, जब तक सुंदरी कपडे पहन रही थी तब तक वह उसके हर एक अंग को निहारता रहा। फिर सुंदरी ने कपड़े पहने और दोनों बाहर आये और उन्होंने देखा कि परम नग्न अवस्था में बैठा था और रजनी के साथ खेल रहा था वह अपनी उंगलियो से रजनी को चोद रहा था और रिंकू उसके बगल में नग्न अवस्था में बैठी थी। रिंकू परम के ढीले लंड को ऊपर निचे कर के खेल रही थी। फनलवर की प्रस्तुति।
“क्यों बेटा, रजनी की चूत पसंद आई!” आदमी ने पूछा।
“हा काका… आपकी बीबी रजनी और रिंकू दोनों ने बहुत मजा दिया। जम के चुदवाती थी।” परम ने कहा “और मेरी माँ सुंदरी ने पूरा मजा दिया की नहीं…? आप ने मम्मी को मजे से चोदा ना!”
“पूछ मत बेटा, इतना मजा जिंदगी में पहले कभी नहीं आया, तेरी माँ एक मस्त माल है जिसे जितनी बार चोदो कम ही लगता है।” आदमी ने कहा।
उसने अपनी पत्नी से पूछा कि क्या वह उन्हें जूस और खाने का कुछ सामान नहीं देगी।
रजनी और रिंकू उठ गए, उन्हों ने कपडे पहन ने की तस्दी तक नहीं ली और नंगी ही किचन की ओर चल दी। सुंदरी अपने बेटे परम के पास बैठ गई। उसका मन अपने बेटे के लंड को सहलाने का हुआ लेकिन उसने अपने प्रलोभन का विरोध किया और उसी समय दरवाजे पर दस्तक हुई। परम उठकर अंदर चला गया। आदमी ने दरवाज़ा खोला और यह उसकी बेटी सुधा थी जो महक को विनोद के साथ उसके घर पर छोड़कर लौटी थी। (आप लोगो को याद ही होगा।) फनलवर की पेशकश
वह कल्पना कर रही थी कि विनोद उसकी सहेली महक को कैसे चोद रहा होगा। वह पहले से ही गीली थी और अपने पिता को देखकर और भी उत्तेजित हो गई। वह अपने पिता से चुदने का प्रस्ताव रखना चाहती थी। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, उसने अपनी माँ और नौकरानी को नग्न अवस्था में सुंदरी को खाना परोसते हुए देखा। वह सोच रही थी कि परम कहाँ है, लेकिन उसके पिता ने उसे चौंका दिया। उसने उसे पीछे से पकड़ लिया और बेटी के एक बोबले को दबोच लिया।
“मैं पीछले एक साल से इस मौके के इंतज़ार में था कि लोग मेरी बेटी सुधा को अपने बाप से चुदते देखे!”
उसने उसकी फ्रॉक उसके शरीर से उतार दी और स्लिप और पैंटी भी नीचे सरका दी। अब सुधा नग्न थी और अपने स्तनों को ढकने की कोशिश कर रही थी।
“अपनी ही बेटी को चोदोगे!” रजनी ने कहा। "सुंदरी को दो-दो बार चोद कर लौड़ा ठंडा नहीं हुआ आपका जोइस बेचारी को नंगी कर दिया? उसका माल नजर आ रहा है।"
उसने अपनी धोती और बनियान उतार दी और अब अपना तना हुआ लंड अपनी बेटी के कूल्हों पर रगड़ने लगा।
“साली कुतिया रोज मुझे अपनी चूत दिखा कर तड़पाती थी, आज साली को चोदकर अपने बच्चे की माँ बनाउंगा।” उसने उसे चारपाई पर धकेल दिया, सुधा ने भी कोई विरोध नहीं किया।
रजनी ने कहा: “अरे बाप रे.....अब आपका बच्चा सुधा की कोंख में डालने का इरादा भी कर रखा है! गजब के बाप हो तुम। जाओ अन्दर जाके आराम से बेटी को चोदो, चाहिए तो रिंकू की मदद ले सकते हो।“ रजनी ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि वह खुश थी की बेटी अपने बाप से चुदेगी।
सुधाने कहा, “आपने ही तो रिंकू को मेरे सामने चोदकर सील फाड़ दिया था और रोज अपना लौड़ा दिखा कर रिंकू की चुदाई करते हैं।”
सुधा अपनी बात पूरी नहीं कर पाई और उसके पिता का लंड उसकी चूत में अपनी सफ़र के लिए चल दिया।
“रंडी तू तो पहले से ही चुदी हुई है।” बाप ने कहा।
“और कितना इंतज़ार करती, मैं रोज़ अपनी चूत को खुजलाती हूँ कि तुम चोदोगे लेकिन तुम्हें उस कुतिया रंडी रिंकू की ही चूत पसंद थी। मैं चाहती थी की घर का लंड मेरी चूत चोदेगा तो कोई जानेगा नहीं और मेरी चूत शांत रहेगी, तभी तो मैं रोज आपको चूत देखाती थी, पर आप ने कभी आपका लंड मेरी ओर लाये ही नहीं।” फनलवर रचित कहानी है।
अपने बाप के लंड को पूरी तरह निगलने के लिए उसने अपने पैर हवा में फैलाते हुए कहा। उसके बाप को अब पूरी जगह मिल गई थी और बाप का लंड बेटी की चूत को खुरेदने लगा। उसके धक्के कुछ शक्तिशाली था तो बेटी सहन नहीं कर पाई और जल्दी ही अपना चुतरस छोड़ दिया। जब वह ढीली हुई तो रजनी आआगे आके सुधा के पैरो को ऊपर उठाये पकडे रखा।
“अब लंड को शांत करने की जिम्मेदारी चूत की है बेटे। मार ने दे अब तेरे बाप को जितने धक्के मारने है। मैं पैर पकड़ती हु।“
लेकिन बाप का लंड कैसा था वह तो सुंदरी अच्छे से जानती थी उसकी चूत अब सूजी हुई पड़ी थी और उसने फिल किया की उसकी चूत अभी भी सुजन बढ़ा रही थी।
बाप और बेटी दोनों ने आपस में बातें कीं और सबने देखा कि बाप ने उसकी इकलौती बच्ची को 20 मिनट तक चोदा। वह पूरी तरह थक जाने पर ही उठा, हालाँकि उसका लंड अभी भी बेटी को और चोदने के लिए तैयार था। उसने अपना लंड बेटी की क्लिट पर रगड़ा और आखिरकार उसका वीर्यपात हो गया और उसने फिर से बेटी की चूत में लंड डाल दिया।
“ले बेटी, मेरी बेटी की माँ बन जा। जो बड़ी हो के मेरा लंड को शांत करे।”
रजनी को बुरा इसलिए नहीं लगा क्योंकि उसके पिता ने परम और सुंदरी समेत बाकी लोगों की मौजूदगी में अपनी ही बेटी को चोदा, बल्कि उसे इस बात का दुख था कि उसके पति को अभी भी एक बेटे की चाहत है और वह चाहता है कि उसकी बेटी उसके गर्भ में उसका बीज धारण करे, उसका फुग्गा फुले। वह जानती थी कि पिछले एक साल से उनकी नौकरानी को उसका पति नियमित रूप से चोद रहा था, लेकिन वह अपने पति से बच्चा पैदा नहीं कर पा रही थी। वह नौकरानी को पुडिया देके गर्भाधान से बचा रही थी।
सुंदरी ने पहले भी अपने पति मुनीम को अपनी बेटी महक को चोदते देखा था, लेकिन वह बिना किसी को देखे हुआ था और अब एक पिता चाहता था कि उसकी बेटी चार दर्शकों की मौजूदगी में गर्भवती हो, उसके मन में भी विचार आया की क्यों ना महक भी मुनीम का बच्चा रख ले। वह सुधा के पास गई और उसकी योनि को सहलाया और वह आदमी सुंदरी को सहलाने लगा।
“बेटी, बाप के बिज से बच्चा पैदा करना सब के नसीब में नहीं होता। तू तो काफी नसीबवाली है बेटी, जो तुझे आज अपने बाप का लंड से तुझे फुग्गेवाली बनाये जा रहा है।“ सुंदरी ने सब को उकसाते हुए कहा। रजनी भी अब कोई इरोध नहीं कर सकी। जब सुंदरी ने रजनी के सामने देखा तो वह मुस्कुराते हुए अपनी सम्मति जाता रही थी।
उसने सुंदरीके कपड़े उतार दिए और लगभग 15-20 मिनट बाद उसने तीसरी बार सुंदरी की सूजी हुई चूत में अपना लंड डाला। लेकिन वह थका हुआ था और उसे 5 मिनट से ज़्यादा नहीं चोद सका। उसने परम से पूछा कि क्या वह सुधा को चोदना नहीं चाहता, और परम ने जवाब दिया कि सुबह ही जब वह उन्हें बुलाने आई थी, तब उसने उसे चोदा था। सुधा ने आगे बताया कि परम ने उसकी चूत में पहला लंड डाला था। तभी सुंदरी ने एक इशारा किया तो उसने यह नहीं बताया कि सुंदरी के पति ने भी उसे चोदा है।
कुछ देर बाद सुंदरी और परम वहां से चले गए और करीब एक बजे वे अपने घर पहुंचे। महक ने दरवाज़ा खोला और जब वे अंदर दाखिल हुए तो उन्हें विनोद को अपने बिस्तर पर नग्न अवस्था में पड़ा हुआ देखकर बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ। कुछ दिन पहले ही महक ने साफ़ कर दिया था कि वह विनोद से शादी करना चाहती है और उससे चुदवाना चाहती है। उन्हें देखकर विनोद चौंक गया और उन्होंने अपना पायजामा पहन लिया। सुंदरी ने महक के एक पैर को थोडा फैलाया और देखा उसकी चूत विनोद और चूत के मिक्सचर को उगल रही थी और उसकी झांगो को गिला कर रही थी। सुंदरी ने महक की ओर देख के अपनी संतुष्टि जताई।
“विनोद अब तो तुमने महक का मजा ले लिया, अब तो उससे शादी नहीं करेगा!” सुंदरी ने कहा।
“कौन भोसडिका कहता है? अब तो मैं जरूर महक से शादी करुंगा। इससे अच्छी माल कोई नहीं है। मैं मां को बोलता हूं कि जल्दी से शादी करवा दे।” विनोद ने महक की गांड के छेद को सहलाया।
महक शरमा गई और दूसरे कमरे में चली गई। परम ने अपनी माँ से पूछा, “विनोद से चुदवाओगी।?”
“नहीं आज नहीं। बाद में, बहुत थक गयी हूँ।” सुंदरी ने कहा। वह कह नहीं सकी की अभी उसकी चूत सुजन से भरी पड़ी है, ठीक से मूत भी पाएगी की नहीं। उसे लग रहा था की यह मुनीमजी जैसा ही है, अच्छा हुआ गांड नहीं मरवाई। वह विनोद की ओर मुड़ी और बोली, "तू कल 10 बजे आ जाना, मैं तैयार रहूंगी।" उसने आगे कहा, "कल महक को कॉलेज भेज दूँगी तुम दोनों (विनोद और परम) साथ मिल के मेरे छेदों से मज़ा लेना।" विनोद खुशी-खुशी बाहर चला गया।
उसने साड़ी और ब्लाउज़ उतार दिया और अपने दोनों बच्चों के साथ आराम करने लगी। उसने बच्चों को अपने साथ प्यार से पेश आने दिया। उस दौरान उसने महक की चूत का अंदाजा लगा लिया की वह कितनी बार चुदी है। महक ने भी जान लिया की माँ काफी चुद के आई है उसकी चूत की सुजन ही बता रही थी। पर उसने उसका जिक्र नहीं किया।
लगभग एक घंटे बाद, परम दस्तक सुनकर दरवाज़ा खोलने के लिए बाहर गया और वहाँ पुष्पा थी जो उससे चुदाई करवाने के लिए उसके घर आने को तैयार हो गई थी। जब तक पुष्पा कमरे में दाखिल हुई, तब तक माँ और बेटी दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए थे। पुष्पा ने सोचा कि परम अकेला होगा, लेकिन वहाँ दो और थीं। वह उदास हो गई। परम ने सुंदरी और महक को बाहर बुलाया और उन्हें बताया कि पुष्पा क्यों आई है। फनलवर की प्रस्तुति।
सुंदरी मुस्कुराई, लेकिन महक बोली, "भैया तुम भी,...पहले बेटी (पूनम) को चोदा और अब उसकी माँ को।"
"बेटी, पूनम को कुछ भी बताना नहीं! मैं बस चुदवा के चली जाउंगी।"
“अरे आंटी, क्या बात करते हो आप की बात आप के साथ, उसकी बात उसके साथ, आप बेफिक्र हो के परम के लंड से खेले, मैं कुछ भी नहीं बताउंगी पूनम को। आप चिंता ना के और अपनी चूत आराम से भरा के जाइए।“
सुंदरी पुष्पा को बेड तक ले गई और जोर से धक्का लगा के पुष्पा के ऊपर चढ़ गई, पुष्पा ने कोई विरोध नहीं किया और उसने अपना घाघरा ऊपर कर दिया, जैसा की कोई महिला पेंटी में समजती ही नहीं सिवा उन 3 से 5 दिनों तक जब उनकी चूत छुट्टी पर होती है। और स्कुल-कोलेज के समय पर बाकी समय अन्दर से बिलकुल नंगी।
पुष्पा अभी भी महक की ओर देखती थी शायद अभी भी उसे विश्वास नहीं था जो महक ने बोला। यह बात महक के समज में आ गई उसने वही बात फिर से दौराही
"चिंता मत करो काकी, जो तुमने और माँ ने किया है वो मैं और पूनम पहले ही कई बार कर चुके हैं।" महक ने कहा। “आप निश्चिन्त रहे और अपनी मजा ले। चलिए अपनी चूत खोलिए, देखू भोस कैसी है।“ उसने पुष्पा को आश्वासन दिया।
सुंदरी ने भी कहा “अरे पुष्पा रानी जब चूत खोलनी ही है तो जी भर के खोल रानी, ऐसे डर के चूत खोलोगी तो ना तुम्हे मजा आयेगा ना तुम्हारी यह हसीन चूत को, चल आ बैठ और मुझे तेरा चूत का रस पिला जरा, देखू तो सही मेरे बेटे की सांस की चूत में कितना दम है और कैसा उसका स्वाद है।“ कह के उसने फिर से पुष्पा के पैर उठाये और अपना मुंह उसकी चूत पर ड़ाल के उसकी चूत को लोंक कर दिया।
पुष्प अभी भी महक को देखती थी और अपनी सिस्कारिया लेती थी। महक भी थोडा आगे आई और जोर से पुष्पा के स्तनों को मसला जिस से पुष्पा की सिसकारी और तेज हो गई।
“भाई की चोदी हुई जरा धीरे दबा।“ इस एक्शन से पुष्पा जरा खुली, उसका डर थोडा कम हुआ और उसने महक की स्तन की दीनटी को थोडा बाहर की ओर खिंचा और छोड़ा जिस से महक थोड़ी खिसक गई।
थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा अब महक ने रूम छोड़ दिया और अपनी माँ और आंटी को एक दुसरे की चूत के पानी का स्वाद लेने दिया।
थोड़ी देर के बाद पुष्पा और सुंदरी बिना कपड़ो ही बाहर आ गई और महक ने कुछ नाश्ता बनाया था तो नाश्ते को खाने को बैठ गई, और बाते करने लगी, खाते खाते ही दोनों ने अपने अपने ब्लाउज चढ़ा दिए थे।
पुष्पा ने कहा की वह थोड़ी ही देर के लिए आई हुई थी तो सब लोग वहा उसके घर चले। उन्होंने नाश्ता खत्म किया, तैयार हुए और सब साथ में घर से निकल पड़े। वे सब पुष्पा के घर पहुँचे। पुष्पा घर में ही रही और पूनम ने महक को पकड़ लिया और उससे साथ रहने का अनुरोध किया। उसने कहा कि शाम को वे दोनों सेठजी के घर चलेंगे। परम ने पूमा को देखा, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाता, पुष्पा का पति बाहर आ गया। सुंदरी ने अपना सिर ढक लिया और कहा, "प्रणाम भैया" और परम ने उनके पैर छुए। आखिर वह परम के होने वाले ससुर जो थे।
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आज के लिए बस इतना ही कल फिर मिलेंगे यही पर तब तक के लिए शुभरात्री।
तब तक आपको ठीक लगे तो कोमेंट कर देना।
जय भारत.