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Incest बेटी का हलाला अपने ही बाप के साथ

Ek number

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उस्मान बोलै :- " अब्बा जान ऐसा कोई लड़का जो पैसा भी न मांगे और बाद में आराम से तलाक भी दे दे और ऊपर से हमारी बेइज्जती भी न करे। ऐसा कोई लड़का को अपने किसी रिश्तेदारी मैं ही हो सकता है. आप सोचिये कि क्या आपकी रिश्तेदारी में ऐसा कोई लड़का आपकी नजर में है क्या ?"

अब्बास :- " बेटा मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है. मेरी रिश्तेदारी में तो ऐसा कोई लड़का मेरी नजर मैं नहीं है. तुम्हारी रिश्तेदारी में है क्या कोई.? "

उस्मान :- "नहीं अब्बा। में तो पहले ही सोच चूका हूँ पर कोई भी लड़का मेरी नजर में नहीं है. वैसे हमारे मजहब के मुताबिक कोइ भी ऐसा व्यक्ति जिस के साथ माँ के दूध का सम्भन्ध न हो हलाला कर सकता है. यानि सगे भाई बहन के बीच हलाला नहीं हो सकता. बाकि कोई भी हो। "

इतना कह कर उस्मान चुप हो गया.

अब्बास और उस्मान दोनों सोच में बैठे थे. अचानक उस्मान बोला

"अब्बाजान मैं एक बात कहूं यदि आप बुरा न माने और ध्यान से मेरी बात सुने. एक आदमी मेरी दिमाग में अभी आया है. जिस के साथ यह डर भी नहीं रहेगा की वो बाद में तलाक देने से इंकार न कर दे और न ही बदनामी का कोई डर रहेगा और ऊपर से कोई पैसा भी देना नहीं पड़ेगा. "

अब्बास भी एकदम ख़ुशी से उछल पड़ा और बोला

" या अल्लाह , जल्दी बोलो। नेकी और पूछ पूछ. "

उस्मान :- "अब्बाजान ऐसा है कि कहते हैं के शादी के बाद लड़की परायी हो जाती है. उसका ससुराल ही उसका घर होता है. तो इस हिसाब से तो आप के साथ ज़ैनब का कोई रिश्ता नहीं रहा. और ज़ैनब के साथ आपका माँ के दूध का भी रिश्ता नहीं है. तो क्यों न आप के साथ ज़ैनब की शादी कर दी जाये और आप ज़ैनब के साथ हलाला कर के उसे तलाक दे दे और फिर मेरी शादी दोबारा से ज़ैनब से हो जाये. "

यह बात सुनते ही अब्बास और ज़ैनब दोनों हैरानी से उछल पड़े। ज़ैनब की तो मरे हैरत से आँखें ही जैसे फटी की फटी रह गयी. अब्बास का भी हैरानी से मुँह ही खुला रह गया.

अब्बास हैरत से बोलै

"लौहौल विला कुव्वत। उस्मान तुम्हे पता भी है कि तुम यह क्या कुफ्र बोल रहे हो ? ज़ैनब मेरी सगी बेटी है. भला बाप बेटी में हलाला कैसे हो सकता है. "
उस्मान शांति से बोला

"अब्बा आप जरा ठन्डे दिमाग से सोचिये। शादी के बाद ज़ैनब मेरी बीवी बन गयी है. वो अब हमारे घर का मेंबर है न कि आपके घर की सदस्य। तो आप आराम से उस से शादी कर सकते है. फिर आप उसे तलाक दे देंगे तो मेरी शादी उस से हो जाएगी. अभी क्योंकि मेरा ज़ैनब से तलाक हो चूका है तो हमारा सम्भन्ध टूट चूका है. और मैं खुद एक मौलवी हूँ तो मैं आप दोनों की शादी करवा दूंगा. फिर जब आप हलाला करने के बाद ज़ैनब को तलाक दे देंगे तो आप का मिया बीवी का रिश्ता ज़ैनब से टूट जायेगा तब आप मौलवी के नाते मेरा और ज़ैनब का निकाह पढ़वा देना. इस तरह मजहब का काम भी हो जायेगा. और साडी समस्या भी हल हो जाएगी। हम दोनों ही मौलवी हैं तो हम दोनों एक दुसरे का निकाह करवा देंगे तो बाहर समाज में किसी को कानो कान खबर भी नहीं होगी और हमारी समस्या का समाधान भी हो जायेगा. आप जरा एक बार ठन्डे दिमाग से सोचिये. मेरे ख्याल में तो इस मुसीबत का इस से अच्छा कोई इलाज हो ही नहीं सकता "

उस्मान यह कह कर चुप हो गया.

सरे घर में एकदम से चुप्पी छा गयी जैसे सभी के मुँह पे ताले लग गए हो.

ज़ैनब भी चुप थी।

अब्बास भी सोच में पड गया। उसे इस बात मैं दम तो दिखाई दे रहा था. उस के मन में तो यह बात सुन कर असल में लड्डू ही फूटने लग गए थे.

हे अल्लाह तुन कितना मेहरबान है? अपनी जिस बेटी के सेक्सी जिस्म को देख देख कर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है, और न जाने उसको चोदने के कितने सपने देखे है. क्या उस को चोद पाने का तूने यह क्या मौका पैदा किया है.

पर प्रगट में वो नाराजगी दिखते हुए बोला (हालाँकि उसके मन मैं तो सैंकड़ों पटाके छूट रहे थे और ख़ुशी के लड्डू फुट रहे थे. )

"उस्मान यह नहीं हो सकता। बाप बेटी में कभी हलाला नहीं हो सकता. तुम कोई और लड़का ढूंढो. जरा तुम ही सोचो कि यदि किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे. "

उधर ज़ैनब भी मन ही मन खुश हो रही थी. उसे भी यह बहुत बढ़िया मौका लग रहा था कि जिस से वो अपने अब्बा से चुदवाने का जो सपना कितने ही सैलून से मन में बसाये बैठी थी वो अल्लाह की रेहमत से पूरा होने का एक मौका लग रहा था.

उसने न जाने कितनी ही बार अपने बाप को अपनी मरहूम माँ की याद में मुठ मरते देखा था. उसका बापू उसके खविंद उस्मान से चाहे उम्र में बड़ा था पर वो सेहत में उस्मान से बहुत हत्ता कट्टा था और ज़ैनब को पूरा यकीं था की उसका अब्बा उसे जिंदगी का सेक्स का वो मजा चखा सकता था जो उसका शौहर उसे आज तक नहीं चखा सका था.

ज़ैनब ने न जाने कितनी बार अपने अब्बा का नाम ले कर अपनी चूत मैं ऊँगली करि थी. उस्मान के इस बात से उसे अपनी अधूरी ख्वाहिशों को पूरा करने का मौका मिल रहा था. उसका मन कर रहा था कि उसका बाप झट से उस्मान के उस बात पर हाँ बोल दे. पर जब उसने अपने अब्बा को हामी भरते न देखा तो उसे मन ही मन मैं अपने बाप पर बहुत गुस्सा आ रहा था।
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उस्मान बोला

"अब्बूजान मेरे ख्याल में इस से बढ़िया कुछ हो नई नहीं सकता. आप एक बार है बोल दें. किसी को कानो कान खबर भी न होगी. और मजहबी काम भी पूरा हो जायेगा. "

अब्बास जिस के मन मैं तो खुशियों के लड्डू फुट रहे थे, पर प्रगट में वो उदास सा मुँह बना कर बोला

"उस्मान देख लो अगर और कोई चारा नहीं है तो मैं तुम्हारी और ज़ैनब की जिंदगी बचाने के लिए इस के लिए भी त्यार हूँ। शायद अल्लाह को यही मंजूर है. "

ज्योंही अब्बास ने हाँ करी , ज़ैनब के भी मन मैं ख़ुशी के लड्डू फूटने लगे. उसका मन कर रहा था की वो ख़ुशी से नाच उठे. पर उसका बाप और शोहर पास में थे तो वो दिखावे के लिए चुप बैठी रही.

अब्बास बोला " ठीक है उस्मान , हम बाजार से तो ज़ैनब के लिए शादी का जोड़ा नहीं खरीदने जा सकते. तो ऐसा करते है कि ज़ैनब की माँ का जो शादी का जोड़ा पड़ा है ज़ैनब वो ही पहन लेती है तुम मौलवी हो तो तुम हम दोनों का निकाह पढ़वा दो। "

अब्बास ने अंदर से अपनी मरहूम बीवी का शादी का लाल लेहंगा चोली का सूट निकल कर ज़ैनब को दे दिया. जिसे ज़ैनब ने बाथरूम मैं जाकर पहन लिया.

फिर उस्मान ने दोनों बाप बेटी अब्बास और ज़ैनब को बिठा कर निकाह पढ़वा दिया.

उस्मान " आप दोनों आज से बाप बेटी नहीं बल्कि मिया बीवी हो। ज़ैनब अब अब्बास तुम्हारा शोहर है. इस को शोहर का प्यार देना. और अब्बाजान अब काफी शाम हो गयी है रात होने ही वाली है. आप आज रात को हलाला कर लीजिये (दुसरे शब्दों में कहें तो भरपूर चुदाई कर लीजिये ) . मैं कल सुबह आऊंगा और तब आप ज़ैनब तो तलाक दे कर मेरे साथ उसकी शादी कर देना. अब मैं अपने घर जाता हूँ. खुदा हाफिज."

यह कह कर उस्मान अपने घर चला गया और इधर घर में रह गए दोनों बाप बेटी। जिन्हे अब हम बाप बेटी नहीं बल्कि बीवी और शोहर कहेंगे.

अब दोनों को इंतजार था अपनी सुहागरात का।

अब्बास ने कहा

"ज़ैनब रात होने ही वाली है. में बाजार से कुछ खाने को ले आता हूँ, खाना बनाने में तो बहुत टाइम लगेगा. फिर हम सोने चलेंगे. "

ज़ैनब मन ही मन मुस्कुरा दी. वो समझ गयी की उस का बाप खाना बनाने का भी टाइम खराब नहीं करना चाहता और उस के साथ हलाला करने को उत्सुक है. वो खुद भी चाहती थी कि खाना तो रोज ही खाते हैं बस आज तो जितनी जल्दी हो सके असली काम को शुरु किया जाये.

उस ने है में सर हिला दिया.

अब्बास जल्दी से बाजार से खाना लाया और दोनों बाप बेटी ने फटाफट खा लिया. दोनों एक दुसरे से शर्मा रहे थे.

चाहे उनकी शादी हो गयी थी पर असल में वो थे तो बाप बेटी ही, कुछ शर्म तो होनी लाजमी ही थी, (चाहे वो शर्म थोड़ी देर मैं बैडरूम में उतर जाने वाली थी,)

खाना खाने के बाद अब्बास ने ज़ैनब से कहा

"बेटी बर्तन साफ़ करने को तो आज रहने दो। तुम जल्दी से मुँह हाथ धो कर बैडरूम में चलो मैं मैं दो घंटे में आता हूँ, तुम तब तक त्यार हो जाओ. “

ज़ैनब समझ गयी की उस का बाप उसे सुहागरात (हलाला) के लिए तैयार होने को कह रहा है. ज़ैनब समझ गयी की जिस घडी का उन दोनों को सालों से इन्तजार था वो आ गयी है.
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वो चुपचाप उठी और बैडरूम में जा कर नयी नवेली दुल्हन की तरह बेड़ पर जा कर बैठ गयी और अपने सईआं (आज उसे अपना बाप , अपना सईयां ही लग रहा था ) के इंतजार में बैठ गयी.

फिर उसके दिमाग में एक बात आयी कि उसके बाप अब्बास ने उसे दो घंटे में आने को क्यों बोलै है, सोच सोच कर उसके दिमाग में आया कि अब्बास असल मैं उसे चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार होने के लिए समय दे रहा है ताकि वो अपनी सुहागरात के लिए अच्छी तरह से तैयार हो जाये। वो समझ गयी कि उस का पिता असल में उसको अच्छी तरह से चोदना चाहता है और इसीलिए वो २ घंटे का समय दे रहा है.

ये सोच कर ही की उस का बाप उसे चोदने को मरा जा रहा है , ज़ैनब की चूत गीली हो गयी और वो शर्मा गयी. फिर उसने भी सोचा कि जब वो दोनों बाप बेटी एक दूसरे के लिए इतने दीवाने हैं, तो उस का भी फर्ज बनता है की वो अपने बाप से चुदवाने के लिए पूरी तयारी करे. ये सोच कर वो चुदाई के लिए तैयार होने को उठ खड़ी हुए.



ज़ैनब के पास दो घंटे थे सजने के लिए वो अपनी सजावट में लग गई। चुदवाने की सजावट में। ज़ैनब पूरी तरह नंगी हो गई और आईने में खुद को देखने लगी- चलो ज़ैनब रानी, सुहागरात मानने के लिए तैयार हो जाओ। उसका पूरा जिस्म चिकना तो था ही फिर भी वो चूत, गाण्ड और कांखों के बालों पर बाल साफ करने वाली क्रीम लगा कर अपनी चूत अच्छी तरह से साफ़ की। । फिर ज़ैनब अपनी कमर के नीचे चूत, गाण्ड और जांघ एरिया और चूची में फेंशियल मसाज की। नहाते वक्त ज़ैनब अपनी चूत में उंगली कर रही थी। वो अपनी चूत से पानी निकालना चाह रही थी। वा चाहती थी की जब अब्बास उसके जिस्म से खेलें तो वो अब्बास का भरपूर साथ दे। चूत से पानी निकला हुआ रहेगा तो वो देर तक अब्बास का साथ दे पाएगी और अब्बास से मिलता सुख महसूस कर पाएगी।



ज़ैनब सोचने लगी की कैसे उसका बाप उसे चोद रहा है। वैसे तो अब्बा के बारे में सोचते ही उसकी चूत गीली हो जाती थी, लेकिन अभी तो कुछ हो ही नहीं रहा था। तभी साचते-सोचते उसका ख्याल बनने लगे की अब्बास बेरहमी से उसके साथ पेश आ रहा है। ये सब सोचते ही ज़ैनब की चूत गीली हो गई और उंगली करती हुई वो चूत से पानी निकाल ली। पानी निकलने के बाद उसे खुद में बुरा भी लगा की मैं अपने पिता में किस तरह चुदवाना चाहती हैं

ज़ैनब नहाकर वो अपने रूम में आ गई। नहाने के बाद उसका जिश्म और चमक रहा था। ज़ैनब अपने पूरे जिस्म में चाकलेट फ्लेवर की बाडी लोशन लगाई। फिर नई पैंटी ब्रा निकली, लाल रंग की पैंटी ब्रा डिजाइनर थी और ट्रांसपेरेंट थी। पैंटी ब्रा को पहनने के बाद वो घूम-घूमकर आईने में खुद को देख रही थी। कितनी सेक्सी लग रही हैं मैं। आह्ह... मेरे प्यारे अब्बा , इस चमकते जिश्म पे आज आपका अधिकार है। इतनी मेहनत तो मैं अपनी ओरिजिनल सुहागरात के लिए भी नहीं की थी, जितनी आपके लिये कर रही हैं। मसल देना मझे, रौंद डालना मेरे जिश्म को, अपने मन में कोई कसर मत छोड़ना मेरे दूल्हे राजा। ज़ैनब चेहरे का मेकप पूरा की और उसके बाद ज़ैनब अपने बालों को सवार ने लगी। आधे घंट लग गये उसे बाल बनाने में।



7:30 बज चुके थे। ज़ैनब लहँगा पहन ली। पहले तो बो नाभि से कुछ नीचे पहनी लहँगा को, जहाँ से नार्मली पहनती थी। लेकिन फिर कुछ सोचकर वो लहँगा को और बहुत नीचे कर ली। उसकी कमर पे बने मेहन्दी का डिजाइन अब साफ-साफ दिख रहा था। फिर वा चोली पहन ली। चोली कंधे के किनारे पे थी और सामने थोड़ा डीप था जिससे क्लीवेज थोड़ा सा दिखाते हुए ज़ैनब को सेक्सी बना रहा था। पीठ पे सिर्फ 2 इंच की पट्टी थी।



ज़ैनब अपनी बा को चोली के अंदर करके हुक लगा ली। अब वो पूरी तैयार थी अपनी सुहागरात के लिए। 8:00 बज चुके थे।
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ज़ैनब कि दूसरी सुहागरात अब्बास के साथ.

ज़ैनब अपनी चुदाई के लिए पूरी तैयार थी। पूरा मेकप और पूरी ज्वेल्लरी में वो बहुत ही हसीन लग रही थी। उसकी धड़कन तेज हो गई थी। वो किचन में जाकर जूस पी ली थी। अब उसे ठीक लग रहा था। ज़ैनब 8:00 बजने का इंतजार कर रही थी।

ठीक 8:00 बजे अब्बास खान ने दरवाजा नाक किया। वो भी नये कुर्ता पायजामा और स्कल कैप में था। ज़ैनब कौंपते हाथों से दरवाजा खोली। जैसे वो अपने घर का नहीं चूत का दरवाजा खोल रही थी अपने पिता अब्बास खान के लिए। अब्बास ज़ैनब को देखता ही रह गया। ज़ैनब बहुत हसीन थी, लेकिन आज तो वो कयामत लग रही थी। उफफ्फ.. अब्बास की आँखें चंधिया गई थी इस बेपनाह हश्न को देखकर।

ज़ैनब सुहाग सेज पर सर झुके बैठी थी जब अब्बास कमरे में आए। उस ने कमरे के दरवाज़े को बंद कर दिया और चुपचाप आ कर ज़ैनब के पास बैठ गए । अब्बास खामोशी से ज़ैनब को देख रहे थे जो लाल जोड़े में दुल्हन बनी बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

अब्बास :- बेटी...!!

ज़ैनब:- कृपया मुझे बेटी नहीं बुलाएं। मैं आज आपकी बीवी हूं. मुझे मेरे नाम से बुलाएं.

अब्बास :- लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता।

ज़ैनब:- क्यू नहीं ??

अब्बास :- ज़ैनब यह ठीक है कि हमारी शादी हुई है पर फिर भी असल में तुम मेरी बेटी हो. हमने मजहब का अपना फर्ज पूरा करने के लिए शादी की है न की शादी के लिए। इस लिए मैं तुम्हे छू कर तुम्हे नहीं करना चाहता। तुम कहो तो मैं तुम्हारे साथ औरत मर्द वाला कोई काम नहीं करूँगा और ऐसे ही हम सो जायेंगे, मैं कल सुबह ही उस्मान को कह दूंगा कि हमारा हलाला हो चूका है और मैं तुम्हे तलाक दे कर आजाद कर दूंगा.

(असल में अब्बास तो अपनी बेटी को चोदने को पूरी तरह से तैयार था पर वो झूठ मूठ बोल कर ज़ैनब को चेक करना चाह रह था कि वो उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहती है या नहीं,)

ज़ैनब:- लेकिन एक बात आप भूल गए । जब तक आप मेरे साथ सुहागरात नहीं मनाएंगे, मेरे अंदर अपना बीज नहीं डालेंगे तब तक हमारा हलाला पूरी तरह से नहीं हो सकता और बगैर हलाला किये , हमारी तलाक नहीं हो सकती ।

अब्बास :- हम झूठ भी तो कह सकते हैं।

ज़ैनब:- बेशक हम झूठ कह सकते हैं लेकिन हकीकत से तो मुँह नहीं मोड सकते। अगर हमारा मिलन नहीं हो सकता, तो शादी ख़त्म नहीं हो सकती।

अब्बास :- इसका मतलब???

ज़ैनब:- इसका मतलब मैं हलाला के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ. आज आप मेरे पिता नहीं बल्कि मेरे शौहर हैं। आप आगे बढ़ें और एक शोहर का अपना हक़ मुझसे से लें। मैं पूरी तरह से तैयार हूं।

ये सुनते ही अब्बास खुश हो गए।

ज़ैनब ने फिर कहा. "अब्बाजान मैं जानती हूँ की आप यह सब मेरा मन रखने के लिए कह रहे हैं. असल में तो आप मेरे से बहुत सालों से प्यार करते हैं और जिस्मानी ताल्लुकात भी बनाना चाहते हैं. मैं जानती हूँ की अम्मी के मौत के बाद आप अकेले रह गए हैं और आप के पास अपनी जिस्मानी जरूरतों को पूरा करने का कोई साधन नहीं है. मैं जानती हूँ की आप सालों से औरत के जिस्म के लिए तड़प रहे हैं. मैंने अपनी शादी के पहले कई बार आपको मुझे छुप छुप कर देखते हुए देखा है. आप को शायद पता नहीं है पर मैंने आप को कितनी ही बार अपने बैडरूम में मु...... (फिर वो मुठ शब्द कहने मैं शर्मा गयी ) , मेरा मतलब अपने अंग से खुद ही खेलते देखा है. मैंने आप को उस वक़्त मेरा नाम लेते सुना है. मैं जानती हूँ की आप बहुत सालों से मेरे से सेक्स करना चाहते हो. पर शायद बाप बेटी के रिश्ते के कारण आप हिम्मत न कर सके. मैंने तो आप को कई बार मेरी पैंटी, जो मैंने नहाते हुए बाथरूम में उतार दी थी, को सूंघते और अपने गुप्त अंग पर लपेट कर मु........ मारते देखा है. मैं तो शर्म के कारण कुछ नहीं कह सकी पर मैं जानती हूँ की आप मेरे से सेक्स करने के लिए बहुत सालों से तड़प रहे हो. अल्लाह बहुत ही मेहरबान है उस ने देखो तो आज आप को अपने मन की सालों से दबी हुई इच्छा को पूरा करने का मौका दिया है। और अब तो आप का यह मजहबी हक भी है क्योंकि अब मैं आप की बेटी नहीं बल्कि आपकी बीवी हूँ. आप कुछ मत सोचो और आगे बढ़ कर अपना पति का हक़ ले लो. मैं इसके लिए तैयार हूँ. "

यही सुनते ही अब्बास ख़ुशी से मनो पागल ही हो गया. फिर भी उसे शर्म आ रही थी कि उस का अपनी बेटी के प्रति शारीरिक आकर्षण उसकी बेटी को पता चल गया है. पर वो जानना चाहता था की उसकी बेटी ज़ैनब का उस के प्रति का विचार है. क्या वो निकाह के कारण उसको चोदने को कह रही है या उसके मन मैं भी उसके बाप के लिए वही भावनाएं है जो खुद अब्बास के मन मैं हैं.

तो वो ज़ैनब से बोला. "बेटी ज़ैनब। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ कि मेरी उस बात का तुम्हे पता चल गया. पर जब तुम्हे पता चला तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं? क्या तुम उस से नाराज नहीं थी. क्या तुम्हारे मन में भी ऐसी ही भावनाएं थी ?"

ज़ैनब शर्म से मुँह छुपा कर बोली "अब्बा , अम्मी की मौत के बाद आप बिलकुल अकेले हो गए थे. हर आदमी की अपनी जरूरतें होती हैं, जिन में सेक्स भी एक जरुरत है, मैं जानती थी की आप की इस जरुरत का कोई इंतजाम नहीं है. पर फिर भी आप ने बाज़ारू औरतों से अपनी जरूरत पूरी न कर के , अपनी भवनाओँ को मार कर पाक साफ़ जिंदगी जी है. इसलिए मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूँ. मैं चाहती थी कि किसी तरह हो सके तो आपके किसी काम आ सकूँ, पर आप ने अपने आप पर काबू रखा और कभी आगे बढ़ कर कोई हरकत मेरे साथ न की, मैं हालाँकि मन से तैयार थी की अपने प्यारे अब्बू को खुश कर सकूँ. पर हम दोनों की बाप बेटी की मर्यादा की सीमा को न तोड़ सके. पर अल्लाह बहुत मेहरबान हैं इसीलिए तो उसे रहीम कहते है, देखो उसने कैसे आज हम दोनों को अपने मन की छुपी हुइ इच्छाएं पूरी करने का मौका दिया है. इसलिए आप ज्यादा सोच विचार न करे. "

अब्बास अपनी बेटी रुपी बीवी की बात सुन कर बहुत खुश हो गया और आगे आ कर सुहाग सेज पर अपनी बेटी ज़ैनब के पास बैठ गया.

और उसके बाद आगे बाढ़ कर ज़ैनब को अपनी बाहो में भर लिया। साथ ही उन दोनों के होंठ भी आपस में मिल गए। दोनों जोश में एक दूसरे को किस करने लगे । अब्बास तो बहुत अरसे से प्यासे थे लेकिन ज़ैनब को सेक्स किये हुए इतने दिन नहीं हुए थे।

लेकिन फिर भी वो खुल केर उनका साथ दे रही थी। ज़ैनब अब्बू की आँखों में देखती हुई शर्मा गई और उसकी नजरें झुक गई। अब्बास के लिए ता ज़ैनब का ये अंदाज जानलेवा था। अब्बास यूँ ही खड़ा रहा तो ज़ैनब एक कदम आगे बढ़कर उसके गले से लिपट गई, और कहा- " अब्बू , ऐसे क्यों देख रहे हैं, मुझं शर्म आ रही है...

अब्बास अपने होश में लौटा, और बोला- "मैंने सुना था हूरों के बारे में, आज यकीन हो गया की वो होती होगी, सुभान अल्लाह, तुम्हारा हुस्न तो बेमिशाल है..."

ज़ैनब अपनी तारीफ सुनकर और शर्मा गई और अब्बास को कसकर पकड़ ली। अब्बास ने भी प्यार से उसकी पीठ पे हाथ फैरा। ज़ैनब उसे देख रही थी।

ज़ैनब उसके सीने से लग गई और महसूस करने की कोशिश करने लगी की अब्बू ही उसका सब कुछ है ज़ैनब का रोम-रोम सिहर उठा। अब वो अब्बू की दुल्हन है, अब्बू की बीवी है। अब अगर मैं अब्बू के साथ कुछ भी करती हैं तो कुछ गलत नहीं कर रही हैं मैं। अब अब्बू का पूरा हक है मेरे पे। अब मुझे कुछ भी सोचने की जरुरत नहीं है। अब्बू अब मेरे पति हैं।

ज़ैनब थोड़ी देर बाद अब्बास से अलग हुई एक ग्लास उठाकर अब्बास को दी जिसमें दूध भरा हुआ था। अब्बास की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने खुद इतना उम्मीद नहीं किया था। वो दूध पी लिया तो ज़ैनब दूसरे ग्लास से उसे पानी दी। अब्बास ने पानी पी लिया और नीचे रख दिया। उसने एक हाथ से ज़ैनब का एक हाथ पकड़ लिया था।
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Ting ting

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अब्बास में हाथ को सामने किया और नीचे से ब्रा के अंदर हाथ डालता हुआ चूचियों को मसलने लगा। वो जोर जोर से चचियों और निपलों का मसलने लगा। अब्बास ने ब्रा को हाथ से निकाल दिया। अब ज़ैनब ऊपर से टापलेश थी। अब अब्बास ने ज़ैनब को फिर से सीधा लिटा दिया और चूचियों को चूस रहा था। अब्बास एक निपल को मुँह में लेकर बच्चों की तरह चूस रहा था। अगर ज़ैनब दूध दे रही होती तो अब्बास तुरंत ही उसका टैंकर खाली कर देता। वो दूसरे निपल को मसलता उंगली में लेकर जा रहा था। गोरी चूचियां लाल हो रही थी। ज़ैनब आह्ह... उह्ह.. करने लगी थी। उसे लग रहा था की अब्बास जल्दी में उसे नंगी करतें और तुरंत ही चोद डालते।

फिर अब्बास दूसरे निपल को चूसने लगा और ज़ैनब के पेंट, बगल को सहलाने लगा और पेंट सहलाते हए लहँगा के ऊपर से जांघों को सहला रहा था। ज़ैनब का एक पैर सीधा था और दूसरा पैर उसने मोड़ लिया था। अब्बास लहँगा ऊपर करना शुरू कर दिया और फिर लहँगे के अंदर हाथ डालकर वो ज़ैनब की नंगी जांघों को सहलाने लगा था। ज़ैनब का जिस्म हिलने लगा था अब। अब्बास का हाथ पैंटी के ऊपर से चूत में था और वो चूत के आसपास के एरिया को सहला रहा था। अब्बास ने लहँगा का पूरा ऊपर कर दिया।

ज़ैनब अंदर में लाल रंग की डिजाइनर पैटी पहनी थी जो आधी ट्रांसपेरेंट थी चूत के ऊपर। अब्बास ज़ैनब के पैरों के बीच में आ गया और अच्छे से पेंटी को देखता हुआ जाँघों और पैंटी को सहलाने लगा। ज़ैनब की चूत तो कब से गीली थी और वो गीलापन पैटी पे भी आ चुका था। अब ज़ैनब के लिये बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। अब्बास को अपनी गीली पैंटी को देखते पाकर वो शर्मा गई।

अब्बास में ज़ैनब के लहंगे को उतार दिया और अपने कुर्ते को उतारते हुए ज़ैनब के बगल में लेट गया। ज़ैनब चाह रही थी की जल्दी से अब्बास उसकी पेंटी भी उतार दे और चोदना शुरू कर दें। लेकिन अब्बास को बिना पेंटी उतारे बगल में लेटता हुआ देखकर उसे मायूसी हई। ज़ैनब सिर्फ एक लाल पैंटी में अब्बास खान के साथ लेटी हुई थी । ज़ैनब के हिलने से चूड़ी और पायल की आवाज आ रही थी, और कमरे में बैंड में हर तरफ फूल बिखरे हए थे। अब्बास ज़ैनब के बगल में लेटकर उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके हठों को चूसने लगा और पीठ को सहलाते हए पैंटी के अंदर हाथ डालकर गाण्ड को सहलाने लगा।

पीछे से ज़ैनब की आधी गाण्ड दिख रही थी तो, अब्बास अपना हाथ सामने लाया और ज़ैनब की चिकनी चूत को सहलाने लगा। अब्बास का हाथ ज़ैनब की लाल पैंटी के अंदर उसकी चिकनी गीली चूत पे था। अब्बास चूत को सहला रहा था और उसने अपनी एक उंगली गरमाई ज़ैनब की गीली चूत के अंदर डाल दिया। उफफ्फ... चूत के अंदर का तापमान पूरा बढ़ा हुआ था। उंगली चूत में जाते ही ज़ैनब का बदन हिलने लगा और वो अब्बास को कस के पकड़ ली और उसके होठों को चमने लगी। पेंटी सामने में भी चूत में नीचे हो चुकी थी।

अब्बास चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगा और पैटी को नीचे करता गया। पैंटी घुटने तक पहुँच चुकी थी। अब्बास उठकर बैठ गया और ज़ैनब को सीधा किया। अब्बास ज़ैनब के पैरों के बीच बैठ गया और उसकी पैंटी को उतार दिया।

ज़ैनब अब पूरी नंगी लेटी हुई थी अब्बास के आगे। अब उसके जिस्म में बस चूड़ी, कंगन, पायल ही थे। अब्बास ज़ैनब के चमकतें जिस्म को निहारने लगा। ज़ैनब उस तरह अब्बा को देखता देखकर शमां गई और अपनी मेहन्दी लगे हाथों से अपना चेहरा छुपा ली।

अब्बास मुश्कुरा दिया। उसने ज़ैनब के पैर फैलाए तो गोली चूत के होंठ आपस में खुल गये। वो अपने एक हाथ से चूत को फैलाया । ज़ैनब आँख से थोड़ा सा देखी और अपने अब्बा को इस तरह उसकी चूत के प्यार से देखता देख कर देखकर और शर्मा गई। अब्बास अपनी उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

अब्बास की उंगली चूत से बाहर आई तो पूरी तरह गीली थी। अब्बास ज़ैनब को अपनी गीली उंगली दिखाने लगा और उसी हाथ से ज़ैनब की एक चूची और निपल को मसलने लगा।अब्बास निपल को कस के मसलकर ऊपर खींचने लगा। ज़ैनब आउ: करती हई दर्द कम करने के लिए अपने बदन को ऊपर उठाई और चेहरे से हाथ हटाकर अब्बास का हाथ पकड़ ली। अब्बास मुश्कुरा दिया।

अब्बास फिर से ज़ैनब के पैरों के बीच बैठ गया। अब्बास ने ज़ैनब के पैरों को अच्छे से फैला दिया, और अपने हाथों से चूत को फैलाता हुआ चूत पे किस किया और फिर चूसने लगा। वो अपनी उंगली भी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था और चूत को चूस भी रहा था। हाथ से चूत के छेद को फैलाकर अपनी जीभ को चूत के अंदरूनी हिस्से में सटा रहा था अब्बास अपनी जीभ से ही ज़ैनब की चुदाई कर रहा था। अब्बास जीभ को चूत के अंदर सटाकर चूस रहा था और फिर चूत के दाने को मुँह में भरकर खींचने लगा था।

ज़ैनब अब खुद को नहीं रोक पाई और उसके मुँह से आऽ5 उड्... की आवाज निकलने लगी। अब्बास ज़ैनब की चूत को चूसता जा रहा था और बीच-बीच में उंगली भी करता जा रहा था। ज़ैनब अपने बदन को ऐठने लगी और उसकी चूत में कामरस छोड़ दिया और अब्बास को पता चला गया। ज़ैनब हाँफ रही थी।

अब्बास अब लेटी हूई ज़ैनब के मुँह के पास आया और अपने पायजामें को नीचे कर दिया और उसका विशाल सा लण्ड उसके अंडरवेर को फाड़ने के लिए तैयार था। उसने ज़ैनब का हाथ पकड़कर अपने अंडरवेर पे रखा और ज़ैनब ने अपने बाप का लण्ड धीरे से शरमाते हुए पकड़ लिए और उसे सहलाने लगी। अब्बास ज़ैनब के बगल में सीधा लेट गया।

ज़ैनब करवट होकर अब्बास से चिपक गई, उसकी चूचियां अब्बास के जिश्म से दब रही थी। अब वो अब्बास के लण्ड का अंडरवेर के ऊपर से सहला रही थी। ज़ैनब से अब रहा नहीं जा रहा था उस का मन तो कर रहा था की उस का अब्बा अब्बास जल्दी से जल्दी लण्ड को उसकी चूत के अंदर डाल दे और खूब जोर जोर से उसे छोड़ दे. पर जब उसने अब्बू को ऐसा कुछ न करते देखा तो तो उसे लगा की ऐसे तो उस का अब्बा पूरी रात ऐसे ही गुजार देगा तो उसे खुद ही कुछ करना पड़ेगा. यस सोच कर ज़ैनब थोड़ा सा उठी और अंडरवेर को नीचे कर दी। अंडरबेर नीचे करते ही फुफकारते हए सौंप की तरह लण्ड बाहर निकला और तनकर खड़ा हो गया। ज़ैनब मुश्कुरा दी।

उसे लण्ड और बड़ा और मोटा नजर आया। आज फाइनली उस के प्यारे अब्बा के इस मोटे और बड़े से लण्ड को ज़ैनब की छोटी सी चूत के अंदर की सैर करनी थी।

ज़ैनब उस लण्ड को सहलाने लगी यह उस के बाप का वही प्यारा सा लण्ड तह जिसने कई बार उसके नाम का मूठ मारा था। ज़ैनब का ये सब पहला अनुभव था। वो अपने पति उस्मान के साथ ये सब कुछ नहीं की थी, फिर भी अब्बा को बुरा ना लगे और उसे खुशी मिले, उसने अब्बास का पायजामा और अंडरवेर को नीचे करके उतार दिया और अब्बास के पैरों के बीच बैठ गईं। ज़ैनब लण्ड को पूरे हाथ में लेकर पकड़ ली और झुकती हुई उसे किस की। लण्ड की खुश्ब उसे दीवाना कर गई। वो लण्ड पे झकती गई और मैंह को फैलाती गई और फिर उसे मैंह में लेकर चूसने लगी। उसकी चूचियों अब्बास के जांघों को सहला रही थी। ज़ैनब अपने मुँह का और फैलाई और अच्छे से लण्ड का मुँह में भर कर चूसने लगी।

उसने अपनी सहेलियों से लण्ड को चूसने के बारे में सुना तो जरूर था पर उस ने कभी भी अपने पति उस्मान का लण्ड चूसा नहीं था. उस्मान भी इसको बड़ा गन्दा समझता था. पर ज़ैनब के मन में लण्ड को चूसने की एक दबी हुई इच्छा जरूर थी. उसने सोचा की आज यही अच्छा मौका है जब वो अपने जनम देने वाले अब्बा का लण्ड चूस सकती है और लण्ड चूसने का स्वाद भी चख सकती है,

अब्बास ने ज़ैनब को रोक दिया और उसका मुंह हटा दिया। ज़ैनब चौंक गई की अब क्या हो गया? कहीं मेरे अब्बा को मेरा लण्ड चूसना अच्छा नहीं लगा क्या क्या? लेकिन आज बहुत कुछ होना था। अब्बास उठकर बैड के किनारे पैर लटका कर बैठ गया और ज़ैनब अब नीचे बैठकर अब्बास का लण्ड चूस रही थी।

ज़ैनब बहुत जतन और ध्यान से अब्बास का लण्ड चूस रही थी। वो इस तरह कोशिश कर रही थी की पूरा लण्ड वो मुँह में ले पाए लेकिन ये हो नहीं पा रहा था। ज़ैनब बहुत सेक्सी लग रही थी इस तरह अपने बाप अब्बास का लण्ड को चूसते हुए। अब्बास ने ज़ैनब को बेड पे लेटने के लिए कहा। ज़ैनब बैड पर आकर लेट तो गई, लेकिन उसकी टाँगें आपस में सटी हुई थी और एक तरह से वो अपने नंगे बदन को समेट रही थी। वो समझ रही थी की अब्बास ने उसे चोदने के लिए बैंड पे लिटाया है और अब उसकी चुदाई होने वाली है। चुदाई के इस एहसास ने उसे रोमांचित कर दिया और वो फिर से शर्मा रही थी।

अब्बास ज़ैनब के पैर को फैलाता हुआ बीच में बैठ गया। उसने ज़ैनब के पैर को अच्छे से फैला दिया और चूत में किस करता हुआ उंगली करने लगा। अब वो ज़ैनब के पैरों के बीच में थोड़ा आगें आ गया और अपने लण्ड को ज़ैनब की चूत में सटा दिया और फिर चूत को लण्ड से सहलाने लगा। लण्ड चूत में सटते ही ज़ैनब के जिस्म में करेंट दौड़ गया। वो पूरी तरह गरमा गई और चूत गीली हो गईं। अब्बास अपने लण्ड से ज़ैनब की चूत को सहलाते जा रहा था और जगह बनाते जा रहा था।

ज़ैनब चूत में अब्बास का लण्ड लेने के लिए आतुर हो रही थी। लण्ड के अंदर जाने पर होने वाले दर्द को सहनें के लिए भी वो मेंटली तैयार हो चुकी थी। ज़ैनब सोच रही थी "आहह... अब्बा डालिए ना अब अंदर। मेरी चूत आपके सामने हैं। डाल दीजिए अपने लण्ड को अंदर और चोदिए मुझे। जितने सपने आपने देखें हैं मुझे सोचते हुए, सब पूरे कर लीजिए आह्ह... रौंद डालिए मेरे जिसम को आहह... अब्बा प्लीज़... डालिए ना अंदर"

.. लेकिन उसके मुँह से बस आहह... उम्म्म ह... की आवाज ही आ रही थी।
 

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Nice update
 
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VijayD

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Please add dirty talk
 
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Rinkp219

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Superb Bhai... Bhai threesomes karwao
 
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