पूरी रात दोनों ने रो रो कर गुजारी. उस्मान को अपनी गलती का एहसास था क्योंकि वो खुद भी तो एक मौलवी था. पर अब वो करे भी तो क्या करे.
अगले दिन ज़ैनब अपने अब्बू के घर वापिस आ गयी.
अब्बास को भी पता चल गया कि उसकी बेटी के साथ क्या वाकया हो गया है.
दोनों बाप बेटी बड़े परेशान बैठे थे. उस्मान भी पास में था. सभी परेशान थे की क्या किया जाये. उस्मान ने हाथ जोड़ कर अपने ससुर मौलवी अब्बास से कहा
"अब्बा जान , मैं मानता हूँ कि मेरे से गलती हो गयी है. पर मैं मन से ज़ैनब को तलाक नहीं देना चाहता था. वो तो बस मेरे से गुस्से में मुँह से निकल गया। आप कुछ कीजिये और ज़ैनब को समझाइये की सच में मैंने तलाक नहीं दिया है और वो मेरे साथ वापिस चले. "
अब्बास ने न में सर हिलाते हुए कहा
:"बेटा मैं जानता हूँ की तुम ज़ैनब से बहुत प्यार करते हो और तुम्हारे मन में को ऐसी बात नहीं है. पर हम सब गैरतमंद मुस्लमान है और ऊपर से हम दोनों ही एक मौलवी है. इसलिए हम को तो मजहब का पालन करना होगा. तुमने चाहे गुस्से में तलाक दिया है पर के अनुसार तलाक तो हो चूका है. अब ज़ैनब तुम्हारी बीवी नहीं रही. तुम दोनों में कोई भी रिश्ता अब नहीं है इसलिए ज़ैनब अब तुम्हारे साथ नहीं जा सकती. "
उस्मान बोला, “मैं ज़ैनब से दोबारा निकाह करने को तैयार हूँ।” ज़ैनब के पिता ने उस्मान को फिर समझाया, “बेटा, इससे दोबारा निकाह करने के लिए ज़ैनब को हलाला करनाहोगा, हलाला मतलब ज़ैनब को किसी दूसरे से निकाह करके उसके साथ कम से कम एक रातउसकी पत्नी के रूप में गुजारनी होगी, उसके बाद ज़ैनब का शौहर जब अपनी मर्जी से इसेतलाक देगा तभी इसके साथ तुम्हारी दोबारा शादी हो सकती है। इसमे अहम है दोनों को पतिपत्नी के रूप में रिश्ता कायम करना, और इसके लिए हर कोई तैयार भी नहीं होता, और यह रिश्ता दोनों की रजामंदी से बनाया जाता है किसी की ज़ोर जबर्दस्ती से नहीं।
उस्मान ने कहा, “अगर मैं अपने किसी जानकार को हलाला के लिए तैयार कर लूँ तो क्या आप रजामंद होंगे?”
ज़ैनब के पिता बोले, “हाँ! अगर कोई विश्वसनीय व्यक्ति हुआ तो अवश्य हम रजामंद होजाएंगे, हमारी बेटी के जीवन का जो सवाल है।”
(यही मैं अपने उन पाठको को जो हमारे मजहब के बारे में या हलाला प्रथा के बारे में नहीं जानते उन्हें बता दू की हलाला क्या होता है.
किसी शौहर द्वारा अपनी पत्नी (बेगम) को तीन तलाक दिए जाने के बाद यदि वहः उससे दोबारा निकाह करना चाहे तो वो तब तक नहीं कर सकता जब तक वो औरत दूसरा निकाह करके उससे तलाक ना ले ले । यहाँ दूसरे विवाह के बाद शारारिक संबंध आवश्यक है । औरत दूसरे निकाह के तलाक के बाद जब पहले शौहर से दोबारा निकाह करे इसे निकाह हलाला कहा जाता है । कुरआन के मुताबिक तीन तलाक एक औरत का अपमान है और अब तलाक देने वाले शौहर का अधिकार अपने बेगम पर से खत्म हो जाता है .
औरत के दूसरे निकाह के बाद पहला शौहर दूसरे शौहर को तलाक के लिए मजबूर नहीं कर सकता दूसरा शौहर यदि तलाक ना दे तो हलाला नही होगा । यदि दूसरे शौहर के साथ औरत के शारारिक संबंध नहीं बने तो भी हलाला मान्य नही होगा ।
हलाला में औरत की शादी किसी दूसरे मर्द से कर दी जाती हैl फिर वों नया मर्द औरत के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाता है और उसे कुछ रांते टांग उठा कर पेलता हैl हलाला होने के लिए औरत का उसके नये शौहर से जिस्मानी रिश्ता होना जरूरी हैl इसके बिना दूसरा निकाह पूरा नही होताl उसके बाद वों नया शौहर कुछ दिन बाद औरत को तलाक दे देता हैl अब वों औरत अपने पहले शौहर से निकाह कर सकती हैl ये पूरी रस्म हलाला की होती हैl