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Incest बेटी का हलाला अपने ही बाप के साथ

bbbb

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Halala ke durmiyan usmaan zaniab ko pet se kar or hamesha ke liye apne pass rakh le apni begum bana karke
 
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Dharmendra Kumar Patel

Nude av or dp not allowed. Edited
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बहुत ही शानदार अपडेट
 
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karthik90

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Hot update
 
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urc4me

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Pratiksha agle rasprad update ki
 
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Bittoo

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उस्मान बोलै :- " अब्बा जान ऐसा कोई लड़का जो पैसा भी न मांगे और बाद में आराम से तलाक भी दे दे और ऊपर से हमारी बेइज्जती भी न करे। ऐसा कोई लड़का को अपने किसी रिश्तेदारी मैं ही हो सकता है. आप सोचिये कि क्या आपकी रिश्तेदारी में ऐसा कोई लड़का आपकी नजर में है क्या ?"

अब्बास :- " बेटा मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है. मेरी रिश्तेदारी में तो ऐसा कोई लड़का मेरी नजर मैं नहीं है. तुम्हारी रिश्तेदारी में है क्या कोई.? "

उस्मान :- "नहीं अब्बा। में तो पहले ही सोच चूका हूँ पर कोई भी लड़का मेरी नजर में नहीं है. वैसे हमारे मजहब के मुताबिक कोइ भी ऐसा व्यक्ति जिस के साथ माँ के दूध का सम्भन्ध न हो हलाला कर सकता है. यानि सगे भाई बहन के बीच हलाला नहीं हो सकता. बाकि कोई भी हो। "

इतना कह कर उस्मान चुप हो गया.

अब्बास और उस्मान दोनों सोच में बैठे थे. अचानक उस्मान बोला

"अब्बाजान मैं एक बात कहूं यदि आप बुरा न माने और ध्यान से मेरी बात सुने. एक आदमी मेरी दिमाग में अभी आया है. जिस के साथ यह डर भी नहीं रहेगा की वो बाद में तलाक देने से इंकार न कर दे और न ही बदनामी का कोई डर रहेगा और ऊपर से कोई पैसा भी देना नहीं पड़ेगा. "

अब्बास भी एकदम ख़ुशी से उछल पड़ा और बोला

" या अल्लाह , जल्दी बोलो। नेकी और पूछ पूछ. "

उस्मान :- "अब्बाजान ऐसा है कि कहते हैं के शादी के बाद लड़की परायी हो जाती है. उसका ससुराल ही उसका घर होता है. तो इस हिसाब से तो आप के साथ ज़ैनब का कोई रिश्ता नहीं रहा. और ज़ैनब के साथ आपका माँ के दूध का भी रिश्ता नहीं है. तो क्यों न आप के साथ ज़ैनब की शादी कर दी जाये और आप ज़ैनब के साथ हलाला कर के उसे तलाक दे दे और फिर मेरी शादी दोबारा से ज़ैनब से हो जाये. "

यह बात सुनते ही अब्बास और ज़ैनब दोनों हैरानी से उछल पड़े। ज़ैनब की तो मरे हैरत से आँखें ही जैसे फटी की फटी रह गयी. अब्बास का भी हैरानी से मुँह ही खुला रह गया.

अब्बास हैरत से बोलै

"लौहौल विला कुव्वत। उस्मान तुम्हे पता भी है कि तुम यह क्या कुफ्र बोल रहे हो ? ज़ैनब मेरी सगी बेटी है. भला बाप बेटी में हलाला कैसे हो सकता है. "
उस्मान शांति से बोला

"अब्बा आप जरा ठन्डे दिमाग से सोचिये। शादी के बाद ज़ैनब मेरी बीवी बन गयी है. वो अब हमारे घर का मेंबर है न कि आपके घर की सदस्य। तो आप आराम से उस से शादी कर सकते है. फिर आप उसे तलाक दे देंगे तो मेरी शादी उस से हो जाएगी. अभी क्योंकि मेरा ज़ैनब से तलाक हो चूका है तो हमारा सम्भन्ध टूट चूका है. और मैं खुद एक मौलवी हूँ तो मैं आप दोनों की शादी करवा दूंगा. फिर जब आप हलाला करने के बाद ज़ैनब को तलाक दे देंगे तो आप का मिया बीवी का रिश्ता ज़ैनब से टूट जायेगा तब आप मौलवी के नाते मेरा और ज़ैनब का निकाह पढ़वा देना. इस तरह मजहब का काम भी हो जायेगा. और साडी समस्या भी हल हो जाएगी। हम दोनों ही मौलवी हैं तो हम दोनों एक दुसरे का निकाह करवा देंगे तो बाहर समाज में किसी को कानो कान खबर भी नहीं होगी और हमारी समस्या का समाधान भी हो जायेगा. आप जरा एक बार ठन्डे दिमाग से सोचिये. मेरे ख्याल में तो इस मुसीबत का इस से अच्छा कोई इलाज हो ही नहीं सकता "

उस्मान यह कह कर चुप हो गया.

सरे घर में एकदम से चुप्पी छा गयी जैसे सभी के मुँह पे ताले लग गए हो.

ज़ैनब भी चुप थी।

अब्बास भी सोच में पड गया। उसे इस बात मैं दम तो दिखाई दे रहा था. उस के मन में तो यह बात सुन कर असल में लड्डू ही फूटने लग गए थे.

हे अल्लाह तुन कितना मेहरबान है? अपनी जिस बेटी के सेक्सी जिस्म को देख देख कर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है, और न जाने उसको चोदने के कितने सपने देखे है. क्या उस को चोद पाने का तूने यह क्या मौका पैदा किया है.

पर प्रगट में वो नाराजगी दिखते हुए बोला (हालाँकि उसके मन मैं तो सैंकड़ों पटाके छूट रहे थे और ख़ुशी के लड्डू फुट रहे थे. )

"उस्मान यह नहीं हो सकता। बाप बेटी में कभी हलाला नहीं हो सकता. तुम कोई और लड़का ढूंढो. जरा तुम ही सोचो कि यदि किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे. "

उधर ज़ैनब भी मन ही मन खुश हो रही थी. उसे भी यह बहुत बढ़िया मौका लग रहा था कि जिस से वो अपने अब्बा से चुदवाने का जो सपना कितने ही सैलून से मन में बसाये बैठी थी वो अल्लाह की रेहमत से पूरा होने का एक मौका लग रहा था.

उसने न जाने कितनी ही बार अपने बाप को अपनी मरहूम माँ की याद में मुठ मरते देखा था. उसका बापू उसके खविंद उस्मान से चाहे उम्र में बड़ा था पर वो सेहत में उस्मान से बहुत हत्ता कट्टा था और ज़ैनब को पूरा यकीं था की उसका अब्बा उसे जिंदगी का सेक्स का वो मजा चखा सकता था जो उसका शौहर उसे आज तक नहीं चखा सका था.

ज़ैनब ने न जाने कितनी बार अपने अब्बा का नाम ले कर अपनी चूत मैं ऊँगली करि थी. उस्मान के इस बात से उसे अपनी अधूरी ख्वाहिशों को पूरा करने का मौका मिल रहा था. उसका मन कर रहा था कि उसका बाप झट से उस्मान के उस बात पर हाँ बोल दे. पर जब उसने अपने अब्बा को हामी भरते न देखा तो उसे मन ही मन मैं अपने बाप पर बहुत गुस्सा आ रहा था।
बहुत अच्छी शुरुआत
👍👍
 
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Ting ting

Ting Ting
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उस्मान बोला

"अब्बूजान मेरे ख्याल में इस से बढ़िया कुछ हो नई नहीं सकता. आप एक बार है बोल दें. किसी को कानो कान खबर भी न होगी. और मजहबी काम भी पूरा हो जायेगा. "

अब्बास जिस के मन मैं तो खुशियों के लड्डू फुट रहे थे, पर प्रगट में वो उदास सा मुँह बना कर बोला

"उस्मान देख लो अगर और कोई चारा नहीं है तो मैं तुम्हारी और ज़ैनब की जिंदगी बचाने के लिए इस के लिए भी त्यार हूँ। शायद अल्लाह को यही मंजूर है. "

ज्योंही अब्बास ने हाँ करी , ज़ैनब के भी मन मैं ख़ुशी के लड्डू फूटने लगे. उसका मन कर रहा था की वो ख़ुशी से नाच उठे. पर उसका बाप और शोहर पास में थे तो वो दिखावे के लिए चुप बैठी रही.

अब्बास बोला " ठीक है उस्मान , हम बाजार से तो ज़ैनब के लिए शादी का जोड़ा नहीं खरीदने जा सकते. तो ऐसा करते है कि ज़ैनब की माँ का जो शादी का जोड़ा पड़ा है ज़ैनब वो ही पहन लेती है तुम मौलवी हो तो तुम हम दोनों का निकाह पढ़वा दो। "

अब्बास ने अंदर से अपनी मरहूम बीवी का शादी का लाल लेहंगा चोली का सूट निकल कर ज़ैनब को दे दिया. जिसे ज़ैनब ने बाथरूम मैं जाकर पहन लिया.

फिर उस्मान ने दोनों बाप बेटी अब्बास और ज़ैनब को बिठा कर निकाह पढ़वा दिया.

उस्मान " आप दोनों आज से बाप बेटी नहीं बल्कि मिया बीवी हो। ज़ैनब अब अब्बास तुम्हारा शोहर है. इस को शोहर का प्यार देना. और अब्बाजान अब काफी शाम हो गयी है रात होने ही वाली है. आप आज रात को हलाला कर लीजिये (दुसरे शब्दों में कहें तो भरपूर चुदाई कर लीजिये ) . मैं कल सुबह आऊंगा और तब आप ज़ैनब तो तलाक दे कर मेरे साथ उसकी शादी कर देना. अब मैं अपने घर जाता हूँ. खुदा हाफिज."

यह कह कर उस्मान अपने घर चला गया और इधर घर में रह गए दोनों बाप बेटी। जिन्हे अब हम बाप बेटी नहीं बल्कि बीवी और शोहर कहेंगे.

अब दोनों को इंतजार था अपनी सुहागरात का।

अब्बास ने कहा

"ज़ैनब रात होने ही वाली है. में बाजार से कुछ खाने को ले आता हूँ, खाना बनाने में तो बहुत टाइम लगेगा. फिर हम सोने चलेंगे. "

ज़ैनब मन ही मन मुस्कुरा दी. वो समझ गयी की उस का बाप खाना बनाने का भी टाइम खराब नहीं करना चाहता और उस के साथ हलाला करने को उत्सुक है. वो खुद भी चाहती थी कि खाना तो रोज ही खाते हैं बस आज तो जितनी जल्दी हो सके असली काम को शुरु किया जाये.

उस ने है में सर हिला दिया.

अब्बास जल्दी से बाजार से खाना लाया और दोनों बाप बेटी ने फटाफट खा लिया. दोनों एक दुसरे से शर्मा रहे थे.

चाहे उनकी शादी हो गयी थी पर असल में वो थे तो बाप बेटी ही, कुछ शर्म तो होनी लाजमी ही थी, (चाहे वो शर्म थोड़ी देर मैं बैडरूम में उतर जाने वाली थी,)

खाना खाने के बाद अब्बास ने ज़ैनब से कहा

"बेटी बर्तन साफ़ करने को तो आज रहने दो। तुम जल्दी से मुँह हाथ धो कर बैडरूम में चलो मैं मैं दो घंटे में आता हूँ, तुम तब तक त्यार हो जाओ. “

ज़ैनब समझ गयी की उस का बाप उसे सुहागरात (हलाला) के लिए तैयार होने को कह रहा है. ज़ैनब समझ गयी की जिस घडी का उन दोनों को सालों से इन्तजार था वो आ गयी है.
 

urc4me

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Romanchak. Baap aur Beti ka halal hoga. Pratiksha agle rasprad update ki
 
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