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वो क्या है कि मूवी देखने आई थी तो यहां पर समीर और अपूर्वा मिल गये------------- अभी समीर के पास तुम्हारी मम्मी का फोन आया था तो उससे पता चला कि तू घर पर नहीं है, इसलिए मैंने फोन कर लिया कि पूछूं तो कहां पर है तू------------
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नहीं--------
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तो---------
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ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं है, समझी, नहीं तो फोन में घुस में दो लगाउंगी,,,,,,
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क्या कहा तुने,,,,,,,, उस दिन तो बडी चिपक के बैठी थी, अब बेकार हो गया,-------
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हुआ क्या---- ये तो बता-------
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अरे तो बतायेगी नहीं तो पता कैसे चलेगा------------
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अच्छा मुझे तुसझे एक बात पूछनी है, एक मिनट रूक------- (और नवरीत हमसे थोड़ा साइड में चली गई, क्या बात हुई हमें कुछ नहीं सुना)।
फोन पर हुई बातों से ये तो पता चल गया था कि वो सोनल से बात कर रही थी, पर क्या कया बातें हुई ये समझ में नहीं आया।
थोडी देर बाद वो बात खत्म करके वापिस आई। और मेरे पास आकर मेरे गालों को भींचने लगी।
ओए होए,,,,,,,,,,, मेरे अन्ना हजारे----------- नाराज कर दिया ना मेरी दोस्त को, नवरीत ने दोनों हाथों से मेरे गालों को भींचते हुए कहा।
पर मैं बड़ी खुश हूं, तुम्हारे इस काम से,,,,,, नवरीत ने फिर कहा।
तभी मेरा फोन बजने लगा, मैंने देखा तो मम्मी का फोन था। मैंने कॉल रिसीव की।
नमस्ते मम्मी जी, मैंने कहा।
नमस्ते बेटा, कैसे हो, मम्मी ने कहा।
ठीक हूं मम्मी जी, मैंने कहा।
छुट्टी ले ली या नहीं ऑफिस से, मम्मी ने कहा।
छूट्टी, किसलिए,,,,, मैंने कहा।
घर नहीं आना तुझे,,,,,,,, मुझे कुछ नहीं पता,,,,, कल तक मुझे घर पर चाहिए तू----------- मम्मी ने गुस्सा होते हुए कहा।
पर किसलिए---- अभी तो छुट्टी भी नहीं है---- मैंने कहा।
इतवार को तुझे देखने वाले आयेंगे,,,, और अगर तू इतवार तक घर नहीं आया ना तो फिर देख लेना------ बहुत मारूंगी---- मम्मी ने कहां
आप भी ना मम्मी,,, अभी मेरी शादी की उम्र भी हुई है------- मैंने बहाना बनाते हुए कहा।
मैंने क्या कहा है, इतवार तक घर पहुंच जाना,,,,,, मम्मी ने कहा।
ठीक है,,, मम्मी जी,,,, देखूंगा-------- मैंने कहां
देखूंगा नहीं,,,, अगर नहीं आया ना तो उधर ही डंडा लेके आउंगी------ मम्मी ने डांटते हुए कहा।
ठीक है---- आ जाउंगा----- अब खुश--- मैंने कहा।
तबीयत ठीक है ना तेरी------ मौसम चेंज हो रहा है, थोड़ा धयान रखना------ कहीं बिमार पड़ जाये--- मम्मी ने कहा।
मैं बिल्कुल ठीक हूं मम्मी जी---- आप चिंता मत करो----- मुझे कुछ नहीं होगा--- मैंने कहा।
ठीक है---- और इतवार तक आ जाना याद करके----- मम्मी ने कहा।
ओके---- मम्मी आ जाउंगा,, बाये----- मैंने कहा।
बाये बेटा------ कहते हुए मम्मी ने फोन रख दिया।
क्या कह रही थी आंटी---- मेरे फोन जेब में रखते ही अपूर्वा ने पूछा।
अरे वही----- कि देखने वाले आ रहे हैं--- संडे तक घर आ जाना----- मैंने कहा।
तो--- जा रहे हो----- अपूर्वा ने कहा।
अब जाना तो पड़ेगा ही----- मैंने कहा।
नवरीत कभी मेरी तरफ तो कभी अपूर्वा की तरफ देख रही थी।
शादी में हमारा भी निमंत्रण होगा या नहीं---- रिया ने कहा।
जरूर क्यों नही होगा---- शादी होगी तो आपका निमंत्रण भी होगा---- मैंने कहा।
क्या मतलब शादी होगी तो------- अब देखने वाले आ रहे हैं तो शादी तो होगी ही----- सुमन ने कहा।
देखने के लिए आ रहे हैं, कोई सगाई करने नहीं आ रहे---- मैंने कहा।
तो---- तुम्हें तो कोई भी देखते ही शादी के लिये हां कर देगें------ अपूर्वा ने कहा।
पर जरूरी थोड़े ही है कि मैं भी हां कर दूं----- मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा खुश हो गई और अपना हाथ मेरे हाथ में डाल दिया।
अच्छा तुम्हें कैसी लड़की पसंद है----- नवरीत ने कहा।
कैसी से क्या मतलब है---- अब कोई मैंने उसकी तस्वीर थोडे ही बना रखी है कि तुम्हें दिखाकर बता दूं कि ऐसी लडकी पसंद है, मैंने कहा।
फिर भी---- दिखने में कैसी हो------ किस टाइप की हो----- नवरीत ने पूछा।
अच्छा चलो---- अगर मेरे जैसी मिले तो चलेगी---- मेरे कुछ कहने से पहले ही नवरीत ने फिर कहा।
दौडेगी जी-------- आप चलने की कह रही हो---- मैंने कहा।
क्यों मुझमें ऐसा क्या है--- जो दौड़ेगी---- नवरीत ने कहा।
सब कुछ तो है जी----- चंचलता---- सादगी----- हंसमुख------ अच्छा स्वभाव, इतनी सुंदर हो--- और प्यारी भी इतनी हो कि मन करता है कि खा जाउं----- मैंने कहा।
बकसना जी बकसना---- अब तो थोड़ा संभल कर रहना पडेगा आपसे-------- कहीं सच में ही ना खा जाओ--- नवरीत ने कहा।
अच्छा अगर अपूर्वा जैसी लड़की मिले तो---- नवरीत ने फिर कहा।
तभी नवरीत का फोन फिर से बजने लगा--- उसने कॉल रिसीव की।
जी डैडी जी------
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नहीं, बस आ ही रहे हैं--------
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हां---- ठीक है--- बस अभी पहुंच जाउंगी-----
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नहीं ज्यादा देर नहीं लगेगी----
और उसने फोन काट दिया।
चलो चलो--- जल्दी चलो----- घर पे मेहमान आये हुए हैं, नवरीत ने स्कूटी स्टार्ट करते हुए कहा।
गहरा अंधेरा हो चुका था। हम सभी अपने अपने साधनों पर बैठे और घर की तरफ चल दिये। अपूर्वा नवरीत के साथ ही चली गई। और मैं अपने घर आ गया।
घर पर आकर मैंने बाइक खडी की और उपर जाने लगा तो आंटी बाहर ही बैठी थी।
आ गये बेटा---- सोनल तो अभी तक नहीं आई है--- चलो तुम ही मासिल कर दो,, आंटी ने कहा।
जी आंटी जी--- तेल कहां पर है,, मैंने कहा।
वो रसोई में रखा है बेटा--- आंटी ने रसोई की तरफ इशारा करते हुए कहा।
मैं रसोई में से तेल उठा लाया। आंटी चेयर पर बैठी थी--- और उन्होंने अपनी सलवार घुटनों से उपर कर ली और पैर आगे की तरफ कर दिया।
मैं नीचे बैठ गया और उनकी मालिश करने लगा। दोनों घुटनों की मालिश करके अभी मैं उठ ही रहा था कि नीचे गेट खुलने की आवाज आई। मैंने नीचे देखा तो सोनल आई थी--- वो स्कूटी खड़ी कर रही थी। मैं उठा और तेल को किचन में रखा और आंटी के पास आकर बैठ गया।
कुछ आराम भी हुआ है आंटी, या नहीं- मैंने कहा।
अभी तो कुछ आराम नहीं हुआ है बेटा---- एक दो दिन तो लगेगा ही---- थोड़ा थोड़ा आराम होने में--- आंटी ने कहा।
सोनल उपर आ गई। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो नाक सिकोड़ते हुए अंदर चली गई।
ओके आंटी--- गुड इवनिंग, कहते हुए मैं खड़ा हो गया और उपर आ गया।
पूनम छत पर ही थी--- परन्तु उसके साथ वो दोपहर वाली लड़की भी थी,,, इसलिए मैं सीधा अंदर आ गया और बेड पर लेट गया। भूख तो कुछ खास नहीं थी,,, इसलिए खाना नहीं बनाया।
मैं बाहर आकर छत पर टहलने लगा। मेरी नजर सामने वाले मकान पर गई तो वहां उपर एक लड़की टहल रही थी---- वैसे तो अंधेरा था, पर देखने से ही पता चल रहा था कि वो विदेशी है----- एकदम गोरी-चिटी---- टी-शर्ट ऐसी पहनी हुई थी कि नाभि भी साफ दिखाई दे रही थी---- और फिर शॉर्ट भी ऐसी की अगर झुक जाये तो आधे कुल्हें बाहर आ जाये। उसके उभार कुछ छोटे छोटे ही लग रहे थे---- अंधेरा था--- इसलिए कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था। शॉर्ट एकदम टाइम थी जिससे छोटे छोटे कुल्हें--- उजागर हो रहे थे---- बहुत ही स्लीम थी वो लड़की--- कमर इतनी की दोनों हाथों में पकड़े तो पूरी कवर हो जाये।
अभि---- एक मिनट इधर आना----- जब उसकी ये आवाज मेरे कानों में पड़ी तो ऐसा लगा कि जैसे कोयल बोली हो।
क्रमशः.....................