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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

Kahani kaisi hai?

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andyking302

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मैंने नवरीत को चलने के लिए कहा, तो वो उंट पर जाकर बैठ गई। मैं उसके पिछे बैठ गया। अब बैठने की इतनी ही जगह थी कि दोनों चिपक कर ही बैठ सकते थे। जिसका असर ये हुआ कि जैसे ही मेरा शरीर नवरीत के फूल की तरह कोमल से शरीर से टच हुआ तो मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई और मेरा पप्पू खड़ा हो गया। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके पेट कस दिये। नवरीत ने गहरी सांस ली और फिर अपने हाथ मेरे हाथों पर रखें और पिछे की तरफ होकर मुझसे सट गई।
पहले उंट आगे से आधा उठा जिस कारण से हम पिछे की तरफ झुक गये। मेरे हाथ एकदम से नीचे की तरफ फिसल गये और उसकी योनि पर जाकर रूके, गिरने के डर से मैंने अपने हाथों को कसा तो उसकी मेरी एक उंगली उसकी सलवार को धकेलते हुए उसकी योनि की फांकों के बीच में घुस गई। नवरीत के मुंह से एक सिसकारी निकली और उसके हाथ मेरे हाथों पर कस गये। मैं संभलकर अपने हाथ वहां से हटाने की कोशिश की ही थी कि उंट पिछे की साइड से पूरा खड़ा हो गया, जिस कारण हमारा झुकाव आगे की तरफ हुआ और जो मैं हाथों को उपर करने की कोशिश कर रहा था, मेरे हाथ सीधे नवरीत के उभारों पर जाकर अटक गये और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। नवरीत तो अभी पहले सदमे से उभरी भी नहीं थी कि उसे दूसरा झटका मिल गया। उंट आगे से भी पूरा खड़ा हो गया। पर नवरीत मेरे हाथों का स्पर्श सहन नहीं कर पाई और उसका शरीर अकड़ गया। उसने मेरे हाथों को कसकर अपने उभारों पर दबा लिया और अपना सिर पिछे की तरफ कर दिया, जिससे उसके गाल मेरे गालों से टकरा गये। उसकी आंखें पूरी तरह बंद थी और वो गहरी सांसे ले रही थी। मेरा धयान नीचे गया तो अपूर्वा, सुमन और रिया बातें कर रहे थे, अपूर्वा बार बार हमारी तरफ देख रही थी और बुरा सा मुंह बना रही थी। उंट वाले ने उंट को आगे बढ़ा दिया।
सॉरी, मैंने धीरे से उसके कान में कहा।
मेरी आवाज सुनकर जैसे वो सपने से बाहर आयी हो, उसके हाथ एकदम मेरे हाथों पर से हट गये और मैंने भी अपने हाथ उसके उभारों पर से हटाकर उसके पेट पर कस दिये। उसने अपना चेहरा आगे कर लिया और अपने हाथ मेरे हाथों के नीचे अपनी जांघों पर रख लिये। उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी। मुझे उसका पेट जोर जोर से कूदता महसूस हो रहा था।
सॉरी, प्लीज, मैंने फिर से उसके कान में कहा।
पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
उंट वाला हमें पार्क का एक चक्कर लगवा कर लाया और वापिस आकर उंट को बैठा दिया। बैठते वक्त भी उंट ने वही हरकत की, पर अब मैं चौकना था और अपने हाथों को फिसलने नहीं दिया। नवरीत ने भी मेरे हाथों को जोर से जकड़ लिया था। उंट के बैठने के बाद हम नीचे उतरे। नवरीत सीधा अपूर्वा के पास जाकर खडी हो गई। उसकी नजरें नीचे झुकी हुई थी और चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। गाल फड़क रहे थे।
मैंने उंट वाले को पैसे दिये और फिर नवरीत की तरफ देखा। उसने एक बार पलके उठाकर मेरी तरफ देखा, पर मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वापिस पलकें झुका ली।
उसने अपूर्वा का हाथ पकड़ रखा था। मैं उनके पास आया। किसी को और किसी चीज की सवारी करनी हो तो बताओ, अभी तो इधर ही हैं, मैंने कहा।
झुला----- रिया ने झूले की तरफ अपनी उंगली करते हुए कहा।
हम झूले के पास आ गये, अपूर्वा मेरी तरफ देखते हुए झूले पर बैठ गई, और नवरीत भी उसके साथ बैठ गई। जब नवरीत ने झूले पर चढने के लिए पैर आगे बढ़ाया तो मेरी नजर उसकी सलवार पर गीले स्पॉट पर पड़ी तो मैं गौर से देखने की कोशिश करने लगा, परन्तु तब तक उसने अपना दूसरा पैर भी आगे बढ़ा दिया था, जिससे मैं देख नहीं पाया।
मैं और रिया उनके सामने वाले सीट पर बैठ गये। मैं नवरीत की जांघों में वो गीला स्पॉट ढूंढने की कोशिश करने लगा, परन्तु कुर्ती के कारण कुछ नहीं दिख पा रहा था। सुमन हमारे से आगे वाली सीट पर बैठ गई और उसके साथ एक अंकल आंटी और उनका एक बच्चा बैठ गया। सीट फुल होने के बाद झूले वाले ने झूला चलाया और जैसे ही झुला थोड़ा सा तेज हुआ नवरीत की कुर्ती हवा के झोंके से उड गई और मेरी नजर तो वहीं पर थी, नवरीत की योनि के आगे से सलवार पर हलका सा गीलापन था। वो मेरे हाथों की छुउन से ही चरम सुख का आनंद ले चुकी थी। और इसीलिए शायद वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही थी। नवरीत ने कुर्ती को नीचे करके अपना हाथ जांघों पर रख दिया। झुला तेज तेज चलने लगा।
मैंने नवरीत के चेहरे की तरफ देखा, वो अभी भी गुलाबी था और उसकी नजरे नीचे ही झुकी हुई थी। वो अपूर्वा को पकड़कर बैठी थी। चेयर की बेल्ट ने उसके पेट को अच्छे से बांध रखा था। झुला तेज घूमने लगा तो मेरा सिर भी घूमने लगा और मुझे चक्कर आने लगे।
पांच मिनट तक झूला ऐसे ही तेज तेज घूमता रहा, तब कहीं जाकर वो धीमे होना शुरू हुआ। मेरा तो बुरा हाल हो चुका था। सिर पूरी तरह घूम रहा था। झुला रूकने पर सभी नीचे उतर गये। मैंने जैसे ही नीचे पैर रखा तो पैर डगमगाने लगा और मैंने झूले को पकड़ लिया। यही हाल अपूर्वा का भी था। उसने मुझे कसके पकड़ लिया। बाकी तीनों पर कोई असर नहीं था।
जब थोडी देर बाद हम नोर्मल हुए तो मैंने तीनों की तरफ देखा, वो हमें देख देखकर हंसे जा रही थी। अपूर्वा ने अभी भी मुझे पकड़ा हुआ था, उसके उभार मेरे कंधे के पास हाथों पर सटे हुए थे। नोर्मल होने के बाद अपूर्वा ने उनकी तरफ देखा।
क्या खीं खीं किये जा रही हो, इतनी तेज धूमा था कि अब तक सिर घूम रहा है, अपूर्वा ने गुस्सा होते हुए तीनों से कहा।
हम आप पर थोडे ही हंस रहे हैं दी, हमें तो इन महानुभाव पर हंसी आ रही है, देखो कैसे पैर भी लड़खड़ा रहे हैं, रिया ने कहा।
मुझे नहीं लगता कि अब ये खुद चलकर घर तक चले जायेंगे, हमें ही इनको उठाकर घर पटक कर आना पडेगा, नवरीत ने जुमला कसते हुए कहा। मेरी स्थिति देखकर वो उंट पर घटित घटना को भूल चुकी थी और अब खुलकर हंस रही थी और मेरा मजाक उडा रही थी।
क्रमशः.....................
जबरदस्त भाई
 
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andyking302

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????????????????
वो क्या है कि मूवी देखने आई थी तो यहां पर समीर और अपूर्वा मिल गये------------- अभी समीर के पास तुम्हारी मम्मी का फोन आया था तो उससे पता चला कि तू घर पर नहीं है, इसलिए मैंने फोन कर लिया कि पूछूं तो कहां पर है तू------------
?????????????????????
नहीं--------
?????????????????????
तो---------
?????????????????????
ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं है, समझी, नहीं तो फोन में घुस में दो लगाउंगी,,,,,,
?????????????????????
क्या कहा तुने,,,,,,,, उस दिन तो बडी चिपक के बैठी थी, अब बेकार हो गया,-------
?????????????????????
हुआ क्या---- ये तो बता-------
?????????????????????
अरे तो बतायेगी नहीं तो पता कैसे चलेगा------------
?????????????????????
अच्छा मुझे तुसझे एक बात पूछनी है, एक मिनट रूक------- (और नवरीत हमसे थोड़ा साइड में चली गई, क्या बात हुई हमें कुछ नहीं सुना)।
फोन पर हुई बातों से ये तो पता चल गया था कि वो सोनल से बात कर रही थी, पर क्या कया बातें हुई ये समझ में नहीं आया।
थोडी देर बाद वो बात खत्म करके वापिस आई। और मेरे पास आकर मेरे गालों को भींचने लगी।
ओए होए,,,,,,,,,,, मेरे अन्ना हजारे----------- नाराज कर दिया ना मेरी दोस्त को, नवरीत ने दोनों हाथों से मेरे गालों को भींचते हुए कहा।

पर मैं बड़ी खुश हूं, तुम्हारे इस काम से,,,,,, नवरीत ने फिर कहा।
तभी मेरा फोन बजने लगा, मैंने देखा तो मम्मी का फोन था। मैंने कॉल रिसीव की।
नमस्ते मम्मी जी, मैंने कहा।
नमस्ते बेटा, कैसे हो, मम्मी ने कहा।
ठीक हूं मम्मी जी, मैंने कहा।
छुट्टी ले ली या नहीं ऑफिस से, मम्मी ने कहा।
छूट्टी, किसलिए,,,,, मैंने कहा।
घर नहीं आना तुझे,,,,,,,, मुझे कुछ नहीं पता,,,,, कल तक मुझे घर पर चाहिए तू----------- मम्मी ने गुस्सा होते हुए कहा।
पर किसलिए---- अभी तो छुट्टी भी नहीं है---- मैंने कहा।
इतवार को तुझे देखने वाले आयेंगे,,,, और अगर तू इतवार तक घर नहीं आया ना तो फिर देख लेना------ बहुत मारूंगी---- मम्मी ने कहां
आप भी ना मम्मी,,, अभी मेरी शादी की उम्र भी हुई है------- मैंने बहाना बनाते हुए कहा।
मैंने क्या कहा है, इतवार तक घर पहुंच जाना,,,,,, मम्मी ने कहा।
ठीक है,,, मम्मी जी,,,, देखूंगा-------- मैंने कहां
देखूंगा नहीं,,,, अगर नहीं आया ना तो उधर ही डंडा लेके आउंगी------ मम्मी ने डांटते हुए कहा।
ठीक है---- आ जाउंगा----- अब खुश--- मैंने कहा।
तबीयत ठीक है ना तेरी------ मौसम चेंज हो रहा है, थोड़ा धयान रखना------ कहीं बिमार पड़ जाये--- मम्मी ने कहा।
मैं बिल्कुल ठीक हूं मम्मी जी---- आप चिंता मत करो----- मुझे कुछ नहीं होगा--- मैंने कहा।
ठीक है---- और इतवार तक आ जाना याद करके----- मम्मी ने कहा।
ओके---- मम्मी आ जाउंगा,, बाये----- मैंने कहा।
बाये बेटा------ कहते हुए मम्मी ने फोन रख दिया।
क्या कह रही थी आंटी---- मेरे फोन जेब में रखते ही अपूर्वा ने पूछा।
अरे वही----- कि देखने वाले आ रहे हैं--- संडे तक घर आ जाना----- मैंने कहा।
तो--- जा रहे हो----- अपूर्वा ने कहा।
अब जाना तो पड़ेगा ही----- मैंने कहा।
नवरीत कभी मेरी तरफ तो कभी अपूर्वा की तरफ देख रही थी।
शादी में हमारा भी निमंत्रण होगा या नहीं---- रिया ने कहा।
जरूर क्यों नही होगा---- शादी होगी तो आपका निमंत्रण भी होगा---- मैंने कहा।
क्या मतलब शादी होगी तो------- अब देखने वाले आ रहे हैं तो शादी तो होगी ही----- सुमन ने कहा।
देखने के लिए आ रहे हैं, कोई सगाई करने नहीं आ रहे---- मैंने कहा।
तो---- तुम्हें तो कोई भी देखते ही शादी के लिये हां कर देगें------ अपूर्वा ने कहा।
पर जरूरी थोड़े ही है कि मैं भी हां कर दूं----- मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा खुश हो गई और अपना हाथ मेरे हाथ में डाल दिया।
अच्छा तुम्हें कैसी लड़की पसंद है----- नवरीत ने कहा।
कैसी से क्या मतलब है---- अब कोई मैंने उसकी तस्वीर थोडे ही बना रखी है कि तुम्हें दिखाकर बता दूं कि ऐसी लडकी पसंद है, मैंने कहा।
फिर भी---- दिखने में कैसी हो------ किस टाइप की हो----- नवरीत ने पूछा।
अच्छा चलो---- अगर मेरे जैसी मिले तो चलेगी---- मेरे कुछ कहने से पहले ही नवरीत ने फिर कहा।
दौडेगी जी-------- आप चलने की कह रही हो---- मैंने कहा।
क्यों मुझमें ऐसा क्या है--- जो दौड़ेगी---- नवरीत ने कहा।
सब कुछ तो है जी----- चंचलता---- सादगी----- हंसमुख------ अच्छा स्वभाव, इतनी सुंदर हो--- और प्यारी भी इतनी हो कि मन करता है कि खा जाउं----- मैंने कहा।
बकसना जी बकसना---- अब तो थोड़ा संभल कर रहना पडेगा आपसे-------- कहीं सच में ही ना खा जाओ--- नवरीत ने कहा।
अच्छा अगर अपूर्वा जैसी लड़की मिले तो---- नवरीत ने फिर कहा।
तभी नवरीत का फोन फिर से बजने लगा--- उसने कॉल रिसीव की।
जी डैडी जी------
?????????????????????
नहीं, बस आ ही रहे हैं--------
?????????????????????
हां---- ठीक है--- बस अभी पहुंच जाउंगी-----
?????????????????????
नहीं ज्यादा देर नहीं लगेगी----
और उसने फोन काट दिया।
चलो चलो--- जल्दी चलो----- घर पे मेहमान आये हुए हैं, नवरीत ने स्कूटी स्टार्ट करते हुए कहा।
गहरा अंधेरा हो चुका था। हम सभी अपने अपने साधनों पर बैठे और घर की तरफ चल दिये। अपूर्वा नवरीत के साथ ही चली गई। और मैं अपने घर आ गया।
घर पर आकर मैंने बाइक खडी की और उपर जाने लगा तो आंटी बाहर ही बैठी थी।
आ गये बेटा---- सोनल तो अभी तक नहीं आई है--- चलो तुम ही मासिल कर दो,, आंटी ने कहा।
जी आंटी जी--- तेल कहां पर है,, मैंने कहा।
वो रसोई में रखा है बेटा--- आंटी ने रसोई की तरफ इशारा करते हुए कहा।
मैं रसोई में से तेल उठा लाया। आंटी चेयर पर बैठी थी--- और उन्होंने अपनी सलवार घुटनों से उपर कर ली और पैर आगे की तरफ कर दिया।
मैं नीचे बैठ गया और उनकी मालिश करने लगा। दोनों घुटनों की मालिश करके अभी मैं उठ ही रहा था कि नीचे गेट खुलने की आवाज आई। मैंने नीचे देखा तो सोनल आई थी--- वो स्कूटी खड़ी कर रही थी। मैं उठा और तेल को किचन में रखा और आंटी के पास आकर बैठ गया।
कुछ आराम भी हुआ है आंटी, या नहीं- मैंने कहा।
अभी तो कुछ आराम नहीं हुआ है बेटा---- एक दो दिन तो लगेगा ही---- थोड़ा थोड़ा आराम होने में--- आंटी ने कहा।
सोनल उपर आ गई। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो नाक सिकोड़ते हुए अंदर चली गई।
ओके आंटी--- गुड इवनिंग, कहते हुए मैं खड़ा हो गया और उपर आ गया।
पूनम छत पर ही थी--- परन्तु उसके साथ वो दोपहर वाली लड़की भी थी,,, इसलिए मैं सीधा अंदर आ गया और बेड पर लेट गया। भूख तो कुछ खास नहीं थी,,, इसलिए खाना नहीं बनाया।
मैं बाहर आकर छत पर टहलने लगा। मेरी नजर सामने वाले मकान पर गई तो वहां उपर एक लड़की टहल रही थी---- वैसे तो अंधेरा था, पर देखने से ही पता चल रहा था कि वो विदेशी है----- एकदम गोरी-चिटी---- टी-शर्ट ऐसी पहनी हुई थी कि नाभि भी साफ दिखाई दे रही थी---- और फिर शॉर्ट भी ऐसी की अगर झुक जाये तो आधे कुल्हें बाहर आ जाये। उसके उभार कुछ छोटे छोटे ही लग रहे थे---- अंधेरा था--- इसलिए कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था। शॉर्ट एकदम टाइम थी जिससे छोटे छोटे कुल्हें--- उजागर हो रहे थे---- बहुत ही स्लीम थी वो लड़की--- कमर इतनी की दोनों हाथों में पकड़े तो पूरी कवर हो जाये।
अभि---- एक मिनट इधर आना----- जब उसकी ये आवाज मेरे कानों में पड़ी तो ऐसा लगा कि जैसे कोयल बोली हो।
क्रमशः.....................
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andyking302

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मेरा दूसरा हाथ मैम की योनि को साड़ी के उपर से ही सहला रहा था, मेरी नजरें कोमल को ही देख रही थी, ताकि स्थिति बिगडने से पहले संभला जा सके।
जब कोमल का कोई रिएक्शन नहीं हुआ तो मैंने अपने हाथ को एक बार अपने बालों में घुमाया और फिर से थोड़ा ज्यादा उसकी जांघों से सटाते हुए रख दिया। उसने मैग्जीन को साइड में किया और मेरी तरफ देखने लगी, पर मैं सीधा सामने देखने लगा। उसने अपना पैर थोड़ा सा साइड में कर लिया और फिर से मैग्जीन पड़ने लगी।
जी मैम, बोलिये क्या काम था, मैंने मैम को कहा।
वो मेरे पेट में दर्द हो रहा है, और तुमने एक दिन बताया था कि तुम नाभि (हमारे वहां पर इसको धरन बोलते हैं, पर अब सभी धरन समझते नहीं होंगे, इसलिए नाभि लिख रहा हूं) अच्छी देखते हो, इसलिए बुलाया था, कि क्या तुम मेरी नाभि देख दोगे, मैम ने कहा।
मैंने हैरान होते हुए मैम की तरफ देखा, मैंने तो कभी भी मैम को ऐसा कुछ नहीं कहा, मैंने मन ही मन सोचा।
मुझे ऐसे देखते हुए पाकर मैम ने अपनी एक आंख दबा दी। मैं समझ गया कि मैम थोड़े मजे लेने के लिए बहाना बना रही है।
आप नीचे लेट जाइये मैम, मैं देख देता हूं, मैंने कहा।
मैम खडी हुई और नीचे कालिन पर दरी बिछाकर उस पर लेट गई।
मैं मैम के पास गया और दूसरी साइड से होकर इस तरह से बैठ गया कि मेरा चेहरा कोमल की तरफ था और वो हमें साफ साफ देख सकती थी।
मैंने मैम की साड़ी का पल्लू हटाकर उनके उभारों पर रख दिया और हल्का सा उनके उभारों को दबा दिया। मैम के मुंह से एक हल्की सी आह निकली। मैंने कोमल की तरफ देखा, उसने जल्दी से मैग्जीन अपने चेहरे के सामने कर ली, मतलब वो हमें ही देख रही थी।
फिर मैं मैम के पेट की तरफ देखने लगा, एकदम कसा हुआ पेट था। मैंने अपनी उंगलियां मैम के पेट पर रख दी। जैसे ही मेरी उंगलियां मैम के पेट पर लगी तो मैम का पेट उछलने लगा और मैम आहें भरने लगी। मैंने हलके से कोमल की तरफ इस तरह से देखा कि उसको पता न चले कि मैं उसे देख रहा हूं, वो मैग्जीन के साइड से हमें ही देख रही थी।
मेरे चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

मैं दबा दबा कर मैम के पेट को चैक करने लगा, जैसे बचपन में मम्मी हमारा चैक करती थी जब पेट में दर्द होता था (मम्मी को नाभि देखनी आती थी और वो पैरों को झटके मारकर ठीक कर देती थी)।
मैम ने साड़ी को काफी नीचे बांधा हुआ था, जिससे उनका पेडू भी नजर आ रहा था। मैंने ऐसे ही पेट को दबाते हुए नीचे की तरफ से चैक करने लगा। अब मेरा हाथ मैम की योनि से थोड़ा सा ही उपर चैक कर रहा था। मैं मैम के पैरा के बीच में आ गया और उनकी साड़ी को किनारों से पकड़कर थोड़ा सा नीचे कर दिया। उनकी योनि के उपर वाले हिस्से के बाल दिखाई देने लगे। मैंने कनखियों से कोमल की तरफ देखा तो वो बहुत ही गौर से हमें ही देख रही थी।
अब मैं मैम की योनि के पास हाथ लगाकर दबा दबाकर चैक करने लगा। कोमल की जांघे आपस में भींच गई थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसका एक हाथ उसकी जांघों के बीच में था जो जांघों के बीच भींचा हुआ था।
कुछ देर ऐसे ही दबा दबाकर कोमल को गरम करने के बाद मैं उठा और मैम की साड़ी को उनकी जांघों तक उपर कर दिया और फिर उनका पैर पकड़ कर हल्का सा झटका दिया। झटका थोडा सा तेज हो गया था। मैम के मुंह से एक आह निकली। मुझे लगा कि कहीं नाभि सरक ना गई हो अपनी जगह से तो मैं वापिस आकर चैक करने लगा। पर वो बिल्कुल नाभि के सेंटर में ही फुदक रही थी। मैंने चैन की सांस ली और फिर दूसरे पैर को भी एक बहुत ही हलका सा झटका मारा। और फिर वापिस आकर नाभि चैक की।
मैंने मैम की तरफ आंख दबाई।
अब तो कुछ आराम लग रहा है, मैम ने कहा।
मैंने एक कपड़े का गोला सा बनाया और मैम के पेट पर रख दिया और उसके पकड़े हुए ही मैम की गर्दन के नीचे हाथ लगाकर उठाने लगा। मैम उठने लगी। मैंने उन्हें उकडू बैठने को कहा। जैसे ही वो उकडू बैठी, जिस हाथ से मैंने कपड़े को पकड़ा हुआ था वो एक तरफ तो उनकी जांघों पर सट गया और उपर से मैम की चूचियों पर दब गया। मैम के मुंह से सिसकारी निकली। मैं मैम की चूचियों को मसलते हुए अपना हाथ बाहर निकाल लिया।
आप कुछ देर ऐसे ही बैठे रहिये, अपने आप ठीक हो जायेगी, मैंने कहा।
मैं वही सब कर रहा था, जैसे बचपन में मम्मी करती थी। आता जाता कुछ नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मैम से पूछा कि ठीक हो गया क्या।
हां अब आराम महसूस हो रहा है, मैम ने कहा।
मैंने उनकी कमर में हाथ लगाया और उनका हाथ पकड़कर उनको खड़ा किया और फिर सहारा देकर सोफे पर बैठाने लगा।
मैंने जान बूझ कर उनको कोमल से सटाकर बैठाया, और उनको बैठाते वक्त मेरा हाथ कोमल के नरम नरम कुल्हों से टच हुआ तो मैंने उन्हें और जोर से दबा दिया। बहुत ही नरम कुल्हे थे।
उसके कुल्हें और सातलों को रगड़ते हुए मैंने अपना हाथ निकाल लिया। कोमल मेरी तरफ तिरछी नजरों से देख रही थी।
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andyking302

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सोनल का शरीर भी ढीला पड़ गया था और उसने अपना चेहरा टेबल पर रख दिया था और गहरी सांसे ले रही थी। मैं ऐसे ही उसकी कमर पर अपना चेहरा रखकर उसके उपर लेट गया। और हांफने लगा। अपने हाथों को मैंने नीचे लटका कर ढीला छोड़ दिया।
थोड़ी देर में मेरा लिंग छोटा होकर उसी योनि से बाहर आ गया। और मेरे लिंग के साथ साथ हमारा मिक्सचर भी उसकी जांघों पर से नीचे की तरफ बहने लगा। हम ऐसे ही आधे खडे आधे लेटे एक दूसरे से चिपके हुए थे।
कुछ देर बाद सोनल ने उठने की कोशिश की तो मैं उसके उपर से उठ गया और उसे अपनी बांहों में उठाकर बेड पर लाकर लेटा दिया और खुद उसके बगल में लेट गया। सोनल ने अपनी बांहें मेरे गलें में डाल दी और अपना चेहरा मेरी छाती पर रखकर मुझसे चिपक कर लेट गई।
हम ऐसे ही लेटे हुए थे, मुझे हल्की हल्की नींद आनी शुरू हो गई थी कि तभी दरवाजे पर खट-खट हुई।


आवाज सुनते ही सोनल एकदम से उठ कर बैठ गई।
अब ये कौन कबाब में हड्डी आ गया, सोनल ने बड़बड़ाते हुए कहा और ऐसे ही बाथरूम की तरफ भागी और अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया, पर वो अपने कपड़े तो यही छोउ़ गई थी जो बेड पर ही अस्त व्यस्त पड़े थे।
मैंने उन पर चदद्र डाल दी और तौलिया लपेटकर दरवाजा खोला। सामने पायल खड़ी थी।
उसे देखते ही मेरे होश उड़ गये। उसने गुलाबी टी-शर्ट जो कि उसकी नाभि को उजागर कर रही थी और नीचे एक नीकर जो कि उसके घुटनों से उपर ही रह गई थी, पहनी हुई थी।
उसके मोटे मोटे उभार देखकर मेरी नजरें वही पर जम गई और मेरे पप्पू ने तौलियों के अंदर तम्बू बना दिया।
हाय, उसने मेरी नजरों का पिछा करते हुए कहा और जब पता चला कि मेरी नजरें कहां पर है तो थोउ़ा झेंप गई।
उसकी आवाज सुनकर मैं सपने से बाहर आया।
हाय, आप, इतना कहकर मैं इधर उधर देखने लगा कि "ाायद पूनम भी उसके साथ ही आई हो। परन्तु वहां पर उसके इलावा कोई नहीं था।
अगर आपको एतराज न हो तो मैं अंदर आ सकती हूं, उसने कहा और मेरे उतर का इंतजार किये बगैर ही आगे की तरफ बढ़ गई। मैं थोड़ा सा साइड में हो गया, परन्तु वो कुछ इस तरह से अंदर की तरफ आई की मेरा लिंग उसकी साइड से उसकी जांघों से टकरा गया। मेरी तो सांसे रूक सी गई।
सोनल अंदर बाथरूम में ही थी, कहीं वो ये सोचकर बाहर ना निकल आये कि जो था वो चला गया होगा, मैं बस यही सोच कर घबरा रहा था।
कमरा तो शानदार सजा रखा है आपने, इतना साफ सुथरा तो मेरा रूम भी नहीं रहता, वो मुस्कराते हुए बोली।
जी ऐसा कुछ नहीं है, वो तो बस ऐसे ही, मैंने दरवाजे के पास खड़े खड़े ही कहा।
फिर उसकी नजरें मुझ पर जम गई।
नाइस बॉडी, उसने मुस्कराते हुए कहा।
जी ये तो बस नेचुरल ही है, कभी जिम वगैरह नहीं गया तो इसलिए ज्यादा अच्छी नहीं है, मैंने शरमाते हुए कहा।
वो बेड पर बैठ गई, बैठने से उसकी टी-शर्ट ने उसके पेट को छुपा लिया परन्तु उसकी निकर से उसकी योनि का उभार प्रदर्शित होने लगा। वो बड़ी ही लापरवाही से पैरों को थोड़ा सा चौड़ा करके बैठी थी और नीचे लटके हुए पैरों को हिला रही थी और इधर उधर देख रही थी।
मैं बेड के पास गया और अपनी टी-शर्ट उठा कर पहन ली और फिर अपना अंडरविडर और कैपरी उठा कर बाथरूम की तरफ चल दिया।
अरे कोई बात नहीं, ऐसे ही अच्छे लग रहे हो, पायल ने मुझे आंख मारते हुए कहा।
पर मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और अंदर जाकर दरवाजे की चिटकनी लगा दी। सोनल आराम से कमोड पर बैठी थी। मुझे देखते ही वो बुदबुदायी, कौन है?
पूनम की बहन है, मैंने हलके से कहा।
वो यहां क्या कर ही है, कहीं मेरे पिछे से तुमने उसको भी तो नहीं----- सोनल ने कहा।
अरे नहीं यार, पता नहीं क्या करने आई है, कहते हुए मैंने तौलिया खोल दिया और अंडरवियर पहनने लगा।
जैसे ही मैंने तौलिया खोला, सोनल ने मेरे लिंग को पकड़ लिया और मसलने लगी। मेरे मुंह से जोर की आह निकल गई।
क्या हुआ, बाहर से पायल की आवाज आई। शायद उसने मेरी आवाज सुन ली थी।
मरवाओगी तुम, छोड़ो, मैं उसे भगाता हूं, फिर कर लेना जो करना है, मैंने सोनल का हाथ अपने लिंग पर से हटाते हुए कहा।
मरवाउंगी, अरे जब उसे पता चलेगा कि उसके आने से पहले यहां क्या चल रहा था, तो उसकी चूत गीली हो जायेगी, और तेरा ये मोटा लंड लेने के लिए तड़पने लगेगी, सोनल ने खड़े होते हुए मेरे लिंग को अपनी योनि पर रगड़ते हुए कहा और अपने हाथ मेरी गर्दन में डाल कर मेरे होंठों पर एक किस ली।
मैंने उसे अपने से दूर किया और कपड़े पहनकर बाहर आ गया।
क्या हुआ था, पायल ने बाहर आते ही मुझसे पूछा।
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा।
अरे वो आपकी आहह की आवाज आई थी, इसलिए पूछ रही हूं, उसने उतर देते हुए कहा।
नहीं कुछ नहीं, हाथ टूंटी से टकरा गया था, बस इसलिए आह निकल गई, मैंने बात को संभालते हुए कहा।
अरे दीदी, आप यहां पर बैइी हो, और वहां मैं आपको कहां कहां नहीं ढूंढ के आई, पूनम ने अंदर आते हुए कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कराई।
वो--- वो--- मैं उपर छत पर घूमने आई थी तो सोचा समीर का रूम देख लेती हूं, कैसा है, पायल ने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा।
कैसा लगा, अच्छा है ना, पूनम ने चहकते हुए कहा।
काफी इम्प्रेसिव है, पायल ने तारीफ करते हुए मुंह बनाकर कहा।
चलो आपको पापा बुला रहे हैं, पूनम ने कहा।
चलो, कहते हुए पायल बेड पर से उठी गई।
कल आउंगी, सुबह, आज तो सही तरह से नहीं देखा है रूम, कल देखूंगी, कहते हुए वो और पूनम बाहर निकल गई।
मैं भी उनके पिछे पिछे बाहर आ गया और जब वो नीचे चली गई तो, मैं वापिस अंदर आया और बाथरूम में गया।
सोनल अभी भी कमोउ पर ही बैठी थी और अपनी कमर पिछे लगाकर आंखें बंद करके बैठी थी।
मैं आराम से उसके पास गया और झुककर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।
उसने एकदम से आंखें खोली और मुझे देखकर अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिये और मुझे किस करने लगी।

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पायल अपनी छत पर जाने के लिए मुंडेर को कूद रही थी। जब उसने अपनी एक टांग उठाकर मुंडेर पर रखी तो उसके सैक्सी कुल्हें क्या मस्त लग रहे थे। जब पूनम ने मुझे अपनी बहन को घूरते देखा तो उसने मेरे कंधे पर एक मुक्का मार दिया।
मैंने उसकी तरफ देखा और फिर जब वापिस पायल की तरफ देखा तो वो दूसरी तरफ जा चुकी थी।
मैं आकर तान्या और रूपाली के पास बैठ गया, पूनम भी मेरे सामने आकर बैठ गई। हम छत पर नीचे ही बैठे थे, बस एक चद्दर बिछी हुई थी।
इतने में सोनल भी उपर आ गई।
चलो, अब मुझे नींद आ रही है, सोनल ने तान्या की पीठ में हाथ मारते हुए कहा।
तान्या ने उसकी तरफ घूर कर देखा और उसका हाथ पकड़कर नीचे खंीचं लिया।
यार मुझे नींद आ रही है, ओके चल तुम बाद में आ जाना जब तुम्हें नींद आये, पर मुझे तो जाने दो, सोनल ने कहा।
तान्या ने उसका हाथ छोड़ दिया और सोनल नीचे चली गई। पूनम अभी भी यही बैठी थी, इसलिए बेचारी तान्या कुछ नहीं कर पा रही थी।
उंहहहह--- मुझे भी नींद आ रही है, मैं भी सोने जा रहा हूं, उंघते हुए मैंने कहा और तान्या की तरफ आंख मार दी।
मैं उठ खड़ा हुआ और अंदर की तरफ चलने लगा। तान्या और रूपाली मायूस सा मुंह लटकाये उठी।
क्या यार, अभी बैठते हैं ना कुछ देर और, अभी कौनसा सोने का टाइम हो गया, पूनम ने झुंझलाते हुए कहा।
कितना अंधेरा हो गया है, और तुम कह रही हो सोने का टाइम नहीं हुआ है, मैंने पूनम की तरफ देखते हुए कहा।

तान्या ने मेरी तरफ मायूस दृष्टि से देखा तो मैंने उसे आंखों के इशारे से आश्वासन दिया और पूनम को उठाकर एक साइड में ले गया।
अरे यार ये अपने घर पर झूठ बोलकर आई हैं, ताकि मेरे साथ सो सकें, पर तुम्हारे कारण शर्मा रही हैं, मैंने धीरे से पूनम से कहा।
क्या------ ये भी------- कमाल करते हो समीर साहब,,,,,, कितनी लड़कियों के साथ चक्कर हैं आपके, पूनम ने दबी आवाज में कहा।
और एक साथ दो-दो, इनको जरा भी शर्म नहीं है क्या--- पूनम ने उनकी तरफ देखते हुए कहा।
इसका मतलब तुम भी बेशर्म हो, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
मैं कैसे, पूनम ने कहा और मेरी आंखों में देखने लगी।
याद है ना सोनल के साथ, सुहानी रात,,, मैंने चटकारा लेते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर पूनम शर्मा गई।
ओके ठीक है,,, मैं चलती हूं, पर ये रात उधार रही आप पर, चुन चुनकर बदला लूंगी, कहते हुए वो अपनी छत पर चली गई।
पूनम के जाते ही तान्या मुझसे लिपट गई और पागलों की तरह मेरे गालों और होंठों को चूसने लगी।
अंदर तो चल, यही पे शुरू हो गई, रूपाली ने तान्या को इस तरह पागल होते देख कहा।
तान्या ने मेरा हाथ पकड़ा और खींचकर अंदर ले आई। हमारे पीछे पीछे रूपाली भी अंदर आ गई।
अंदर आते ही तान्या ने मुझे बेड पर धक्का दिया और खुद भी उपर आ गई। रूपाली ने दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
तान्या ने अपनी टीशर्ट उतारकर एक तरफ फेंक दी और पिछे हाथ करके अपनी ब्रा भी उतार दी और फिर मेरी टी-शर्ट को उतारने लगी। मैंने अपनी कमर उपर करके उतारने में उसकी मदद की। टीशर्ट को उतार कर वो मेरे उपर लेट गई। उसके मीडियम आकार के उभार मेरी छाती पर दब गये और उसके होंठ ने मेरे होंठों को कस लिया। उसकी और मेरी बेल्ट आपस में मेल-जोल बढ़ा रही थी। उसकी जांघें मेरी जांघों पर उठा पटक कर रही थी।
मैंने रूपाली की तरफ देखा, वो दरवाजे से पीठ लगाये खड़ी हमें ही देख रही थी। मैंने अपने हाथ तान्या की कमर में रखे और सहलाने लगा। मेरे हाथ लगते ही उसने एक झटका खाया और बैठ गई।
वो बेड से नीचे उतरी और अपनी बेल्ट खोलने लगी। अपनी बेल्ट खोलकर उसने जींस का हुक भी खोल दिया और जींस की चैन खोलकर मेरी कमर की तरफ अपने हाथ बढ़ा दिये।
उसने मेरी बेल्ट को खोला और जींस का हुक खोलकर अदा के साथ चैन को खोलने लगी। चैन को खोलकर उसने जींस के अंदर हाथ दिया और मेरे सांप को मुठठी में पकड़कर अंडरवियर समेत बाहर खिंच लिया।
मैंने रूपाली की तरफ देखा, उसकी सांसे जोर से चल रही थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो चुका था। उसकी सांसों के साथ उसकी चूचियां उठक बैठक कर रही थी और उसका एक हाथ बार बार उसकी मुनिया को सहला रहा था।
तान्या ने मेरे लिंग को अंडरवियर से बाहर निकाला और एक बार मेरी आंखों में देखा और फिर अपने होंठों को मेरे सुपाड़े पर कस दिया। मेरे मुंह से एक जोर की सिसकारी निकली। मेरे सुपाड़े को होंठों में कसे हुए वो उस पर जीभ फिरा रही थी। मेरे शरीर में रह रहकर तरंगे उठ रही थी और साथ में मेरी कमर भी।
मेरे सुपाड़े को चूसते हुए उसने अपनी उंगलियों को मेरी जींस के किनारों में फंसाया और धीरे धीरे नीचे सरकाने लगी। घुटनों तक जींस को सरकाने के बाद उसने अपने हाथ मेरी नंगी जांघों पर रख दिये और सहलाने लगी। मैं कमर उठा कर अपने लिंग को और अंदर करने की कोशिश कर रहा था पर वह मेरी कमर के साथ साथ अपना मुंह भी उपर की तरफ कर लेती। उसने मेरे सुपाड़े को जोरों से अपने होंठों के बीच भींचा हुआ था और जीभ से चाट रही थी।
मुझे लग रहा था कि अगर कुछ देर और ये ऐसे ही चाटती रही तो मैं तो गया काम से, और अबकी बार गया तो काफी टाइम लगेगा दोबारा तैयार होने में, पहले ही सोनल की बच्ची ने ऐसा चबाया था।
मैंने उसके चेहरों को पकड़ा और बैठते हुए उसके मुंह को उपर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
उसके होंठों को चूसते हुए मैं खड़ा हो गया। खड़े होते ही मेरी जींस घुटनों पर आकर टिक गई। मैंने पैरों को हिला हिलाकर जींस को पैरों से अलग कर दिया और अपने हाथ नीचे ले जाकर उसकी जींस को नीचे सरकाना शुरू कर दिया।
अचानक उसने किस तोड़ी और थोड़ा पीछे होते हुए जींस को पकउ़कर अपने पैरों से अलग कर दिया। जींस निकालते हुए उसका मुंह और सिर मेरे लिंग से टकरा रहा था।
क्रमशः.....................
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रूपाली भी मेरे होंठों को चूसने में बराबर साथ दे रही थी। जब काफी देर तक चूसने के कारण मेरे होंठ दर्द करने लगे तो मैंने उसके लबों को उसके लबों से अलग किया। हमारे सांसे उखड चुकी थी। मैंने रूपाली को अपनी बांहों में भरकर उठाया और बेड पर लाकर लेटा दिया और खुद उसके साथ लेट गया। मैं अपनी सांसे दुरूस्त करने की कोशिश कर रहा था।
तान्या मुंह लटका कर वहीं टेबल पर अपने पैर लटका कर बैठ गई। जब मेरी सांसे कुछ नोर्मल हुई तो मैं रूपाली के उपर आ गया और उसके योनि के लबों को अपने हाथों से अलग किया। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था, देखने से ऐसा लग रहा था कि अभी आये ही नहीं है। गोरी चिटी योनि की मोटी मोटी फांके देखते ही मेरा लिंग पागल हो उठा और जोर जोर से झटके मारने लगा। मैंने अपनी उंगलियों से उसकी योनि के लबों को एक दूसरे से अलग किया। अंदर पूरी तरह से गीली गुलाबी योनि को देखते ही मेरी लार टपक गई और मेरे होंठ सीधे उसकी योनि से जाकर चिपक गये। मेरी जीभ उसकी योनि की फांकों के बीच अपना पहुंच गई।
जैसे ही मेरे होंठ उसकी योनि पर टच हुए रूपाली की कमर हवा में उठ गई और उसके मुंह से जोर की आहहह निकली और उसके हाथ सीधे मेरे सिर पर पहुंच कर मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगे। मैंने अपनी जीभ से उसका अम्त चाटना शुरू कर दिया। हल्का हल्का बकबका सा रस, पर शायद आज पहली बार बह रहा था। मैंने अपने होंठों को उसके स्वर्ग द्वार पर सैट किया और जोर से अपनी अंदर की तरफ खींचने लगा। उसकी योनि अमृत रस खिंचता चला आया और मेरे मुंह को भर दिया।
रूपाली का शरीर अकड़ कर हवा में उठ गया। सिर्फ उसका सिर और पैरों के पंजे ही बेड पर टिके थे।
मैंने अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसके योनि द्वार पर लगाकर अंदर की तरफ धकेलने लगा। परन्तु उसकी योनि बहुत ही टाइट थी, जीभ अंदर जा ही नहीं रही थी।
एक बार झडने के बाद उसका शरीर वापिस धड़ाम से बेड पर गिरा और वो जोर जोर से सांसे लेने लगी।
मैं उपर की तरफ होता हुआ उसकी नाभि तक आया और अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी। धीरे धीरे मैं उपर की तरफ आता गया और उसके उभारों के पास आकर मैंने अपनी जीभ उसके एक निप्पल पर टच की और फिर उसके ऐरोला पर फिराने लगा। रूपाली के पैरों में फिर से हरकत होनी शुरू हो गई। वो अपनी जांघों को भिंचने लगी।
मैं उसके उपर लेट गया और लिंग को उसकी योनि पर सैट करके हल्का सा धक्का लगाया। पर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने दोबारा ट्राई किया पर फिर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने लिंग को हाथ में पकड़कर उसकी योनि के द्वार पर सैट किया और एक हल्का सा धक्का लगाया। मेरा लिंग हल्का सा अंदर हो गया, केवल सुपाड़े के आगे का भाग।
रूपाली का शरीर एक बार कांपा और फिर ढीला पड़ गया। उसने मुझे कसके अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने लिंग को वैसे ही पकउ़े पकउ़े थोड़ा सा दबाव डाला तो रूपाली की कमर बेड से उपर उठ गई और उसके मुंह से हल्की सी दर्द भरी आह निकली।
उसके हिलने से मेरा लिंग साइड में फिसल गया। मैंने फिर से लिंग को उसकी योनि पर सैट किया और हल्का सा दबाव डाला, पर जैसे ही मैं दबाव डालता वो हिलती और लिंग साइड में फिसल जाता। परेशान होकर मैं बैठ गया और एक तकिया उठाकर उसके कुल्हों के नीचे सैट किया और फिर बैठे बैठे ही अपना लिंग उसकी योनि द्वार पर सैट किया और उसके उपर लैट गया। तकिया लगाने से मेरा लिंग उसकी योनि पर सही तरह से सैट हो गया था। मैंने अपने लिंग को थोड़ा सा पिछे किया, मेरा हाथ अभी भी लिंग को उसकी योनि द्वार के अलाइन में बनाये हुये था और फिर एक धक्का मारा। मेरा लिंग थोड़ा सा अंदर होकर वापिस बाहर की तरफ फिसल गया। पर उस थोउ़े से अंदर होने से ही रूपाली के शरीर में एक दर्द की लहर दौड़ गई।
उसने अपने पैर मेरे कुल्हों पर लपेट दिये और जोर से भींच लिये। उसके ऐसा करने से मैं हिल नहीं पा रहा था, जिससे धक्का नहीं लगा सकता था। मैंने वैसे ही लेटे हुए उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा।
मस्ती में आकर उसके पैरों की पकड़ कुछ ढीली हो गई और मौके का फायदा उठाते हुए मैंने लिंग को उसकी योनि द्वार पर सैट किया और एक जोर का धक्का मार दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी योनि की दीवारों को चीरता हुआ आधा अंदर समा गया।
रूपाली का शरीर अकड़ गया और उसकी आंखों से अश्रु धारा बह निकली। उसके पैरों की पकड़ एकदम कस गई और उसके हाथ सीधे मेरी पीठ पर पर्हुच गये और उसके नाखून मेरी पीठ में उतर गये, उसके नाखून चुभने से मुझे भी काफी दर्द हुआ।
उसके मुंह से निकली चीख मेरे लबों में दब कर रह गई। मैंने ऐसे ही रहते हुए लिंग को थोड़ा थोड़ा दबाव डालने लगा। लिंग योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा। रूपाली के नाखून मेरी कमर में गडने लगे और मेरे होंठों में उसका दांत। दर्द तो बहुत हो रहा था पर जो आनंद उसकी कसी हुई कच्ची टाइट योनि में आ रहा था, उसके सामने दर्द कम ही था। दबाव डालते डालते लिंग लगभग 2 इंच अंदर पहुुंच चुका था। आगे कुछ अड़चन महसूस हो रही थी शायद उसकी झिल्ली थी। मैं कुछ देर वहीं पर रूक गया। जब रूपाली कुछ नोर्मल हुई और उसके नाखून का दबाव मेरी कमर में कम हो गया और होंठों पे दांतों का तो मैंने अपनी कमर को उठाते हुए लिंग को बाहर खींचा और फिर एक जोरदार धक्का मार दिया। लिंग उसकी झिल्ली को फाडता हुआ सीधा उसके गर्भाश्य से जा टकराया।
उसने भी बदला लेते हुए मेरे होंठों को बुरी तरह से काट लिया और नाखून कमर में गाड़ कर खरोंच दिये। दर्द के मारे मेरी आह निकली गई।

उसकी योनि ने मेरे लिंग को इस तरह जकड़ लिया था कि अभी के अभी उसकी जान निकाल लेगी। झिल्ली फटने से बहता गर्म खून आग में घी का काम कर रहा था। इतना दर्द हो रहा था मुझे कि मन कर रहा था उसको कच्च चबा जाउं। मैं ऐसे कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा, कुछ मेरे दर्द के कारण कुछ उसके दर्द के कारण। जब कुछ समय बाद उसके नाखूनों और दांतों की पकउ़ ढीली हुई तो मैंने राहत की सांस ली। उसकी योनि ने अभी भी मेरे लिंग को उसी तरह जकड़ रखा था। जब वो नोर्मल हो गई तो मैंनें उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मजे में दर्द को तो मैं भूल ही चुका था। थोउ़ी ही देर में वो अपने कुल्हे हिलाने लगी। मैंने अपने लिंग को बाहर खींचा और फिर से एक जोर का धक्का मारा। उसके मुंह से आह निकल कर मेरे मुंह में गुम हो गई और उसकी हाथ मेरी कमर पर कस गये और पैर कुल्हों पर। गनीमत थी की अबकी बार नाखून और दांत नहीं कसे थे।
फिर तो धक्कों ने जो रफतार पकड़ी तो उसकी कुल्हें भी ताल से ताल मिलाकर साथ देने लगे।
उसकी योनि के अंदर की गर्मी और इतना ज्यादा कसाव मेरा लिंग सहन नहीं कर पाया और उसके अंदर की आग को शांत करने के लिए अपना रस उगलना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने मेरे रस को महसूस किया उसका शरीर अकड़ा और उसने मुझे इस तरह से अपनी बाहों में भींच लिया कि मानो दो टुकउ़े कर देगी। उसकी योनि ने भी अपना रस बहाना शुरू कर दिया।
मेरा लिंग जड़ तक उसकी योनि में घुसा हुआ था। कुछ देर बाद हम स्वर्ग से वापिस लौटे तो हमारी सांसे उखडी हुई थी और शरीर में दर्द का अहसास तडपा रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे होंठ को काट कर मुझसे अलग कर दिया है। दर्द के अहसास के कारण मेरा लिंग सिकुड कर छोटा सा हो गया और उसकी योनि से बाहर निकल गया।
वो बुरी तरह से मेरे मुंह को चाटने और चूमने लगी।
मेरे होंठ में दर्द हो रहा था इसलिए मैंने खुद को उससे अलग किया और उठ कर बेड पर बैठ गया। मेरा धयान उसकी योनि की तरफ गया तो वो बुरी तरफ से फट चुकी थी और उसका मुंह खुला हुआ था। उसकी योनि से मेरा और उसका रस बह रहा था, जो हलका हलका लाल लाल सा था।
रूपाली बेड पर लेटी हुई अपनी आंखें बंद करके मुस्करा रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बाथरूम में लाकर शॉवर चलाकर उसके नीचे खड़ी कर दिया। परन्तु खड़े होते ही उसे योनि में असीम दर्द का अहसास हुआ जिस कारण से वो मेरे गले में बाहें डालकर झूल गई।
मैंने उसे सहारा देकर कमोड़ पर बैठा दिया और फिर गीजर चालू कर दिया। गर्म गर्म पानी से उसकी योनि को साफ किया और फिर नहाने के लिए शॉवर के नीचे आ गया।
सॉरी----- आई एम सो सॉरी,,, अचानक उसकी आवाज आई।
क्या हुआ,,,, सॉरी क्यों बोल रही हो, मैंने कहा।
उसने अपनी उंगली मेरी कमर की तरफ कर दी। मैंने पिछे मुंह करके सीसे में अपनी कमर देखी तो कमर पर खून जमा हुआ था और जगह जगह घाव हो रहे थे। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
इट्स ओके---- टैंशन मत लो, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही वो उठने लगी पर जैसे ही उसने उठकर एक कदम आगे बढ़ाया उसके शरीर में दर्द की लहर दौड़ गई और वो वापिस कमोड़ पर बैठ गई।
मैंने उसे सहारा देकर उठाया और शॉवर के नीचे लाकर खडी कर दिया। उसने मेरे कंधे को पकड़ लिया और धीरे धीरे नीचे बैठ गई। शॉवर से निकलता हलका गर्म पानी बहुत ही राहत दे रहा था।
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जबरदस्त भाई
 
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उसकी गर्मी के कारण मैं अब किसी भी समय निकलने वाला था। और वही हुआ। लिंग ने अपने रस से उसकी योनि को भरना शुरू कर दिया और मेरे रस को महसूस करते ही वो दूसरी बार फिर से खाली होने लगी।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद वो मेरे उपर लेट गई। उसके लेटने से मेरी कमर बेड पर जाकर टिक गई और दर्द के मारे मेरे मुंह से आहहहहह निकली।
तान्या तुरंत उठकर साइड में बैठ गई। मैं उठा और बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया और आकर लेट गया। तान्या ने तकियों को सिरहाने रख दिया था और लेटी हुई थी।
मैं आकर औंधा लेट गया और अपना एक हाथ और एक पैर रूपाली के उपर रख दिया और जल्दी ही नींद के आगोश में समा गया।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो मेरी कमर पर हलके हलके हाथ महसूस हुआ। मैंने आंख खोलकर सिर उठाकर देखा तो सोनल बैठी हुई थी।
गुड मॉर्निंग,,,,, मुझे उठा हुआ देखकर सोनल ने कहा।
गुड मॉर्निग------- मैंने बैठते हुए कहा।
मैंने बेड पर देखा तो तान्या और रूपाली वहां पर नहीं थी।
वो दोनों कहां गई---- मैंने सोनल से पूछा।
घर----- सोनल ने कहा।
मैंने टाइम देखा----- साढ़े आठ बजने वाले थे।
मैं जल्दी से उठा, पर जैसे ही उठने लगा तो कमर में खिंचाव महसूस हुआ। मैं वापिस बैठ गया और फिर धीरे धीरे उठ कर बाथरूम में गया। फ्रेश होकर नहाया और तैयार हुआ। सोनल नीचे चली गई थी। तैयार होकर ऑफिस के लिये निकल पड़ा।

ऑफिस जाकर बाइक खडी की और सीधा ऑफिस में आ गया। ऑफिस में कोई नहीं था।
आज अपूर्वा नहीं आई क्या, मैंने मन ही मन सोचा। तभी धयान आया कि अपूर्वा की स्कूटी भी नहीं खड़ी थी।
मैंने सिस्टम ऑन किया और चेयर पर बैठकर अपूर्वा का नम्बर मिलाया।
हैल्लो----- फोन आंटी ने उठाया था।
हैल्लो आंटी, मैं समीर बोल रहा हूं अपूर्वा के ऑफिस से, आज वो आई नहीं, मैंने कहा।
समीर बेटा----- उसकी आज तबीयत खराब है, तो इसलिए मैंने नहीं आने दिया, आंटी ने कहा।
क्या हुआ, डॉक्टर को दिखाया, क्या कहा डॉक्टर ने---- मैंने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए।
कुछ नहीं हुआ, बस हल्का सा बुखार है, डॉक्टर को दिखा दिया, आंटी ने कहा।
बड़ी फिकर हो रही है, आंटी ने फिर से कहा।
बात करनी है---- लो बात करो---- मेरा उतर जाने बगैर ही आंटी ने अपूर्वा को फोन दे दिया।
हैल्लो--- अपूर्वा की धीमी सी आवाज आई।
हैल्ललााो--- मैंने भी उसकी नकल उतारते हुए कहा।
क्या हो गया तुम्हें------- मैंने कहा।
हल्का सा बुखार है------ अपूर्वा ने कहा।
तभी मुझे बाहर से बॉस की आवाज आई।
ओके, जल्दी से ठीक हो जाओ, बॉस आ रहे हैं,, मैं बाद में बात करता हूं,,,, मैंने कहा।
ओके बाय------ अपूर्वा कहा और फोन रख दिया।
आज अपूर्वा नहीं आई, बॉस ने अंदर आते हुए कहा।
वो उसको बुखार है, अभी फोन किया था मैंने, मैंन कहा।
चलो कोई नहीं, मुझे अभी मीटिंग में जाना है, मैडम की तबीयत भी कुछ खराब है, कोमल यहीं पर है, थोड़ा धयान रखना, बॉस ने कहा।
ओके बॉस, मैंने कहा और काम करने लगा।
बॉस चले गये। मैं अपने काम में बिजी हो गया। कुछ देर बाद कोमल चाय लेकर आई। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
गुड मॉर्निंग, उसके अंदर आते ही मैंने कहा।
कोमल ने एक फीकी सी मुस्कान दी और चाय रखकर वापिस चली गई।
बड़ी नखरैल है, मैंने मन ही मन सोचा और चाय पीने लगा।
अभी चाय पी ही रहा था कि कोमल फिर से आई और आकर मेरे साइड में खड़ी हो गई।
मैंने सिर उठाकर उसकी तरफ प्रश्नवाचक निगाह से देखा।
दीदी बुला रही है, चाय पीकर चलो, कोमल ने कहा।
उसकी छोटी सी टी-शर्ट में से झांकता उसका सपाट मुलायम मखमली पेट देखकर मन तो कर रहा था कि छू लूं, पर फिर खुद को रोक ही लिया।
मैंने चाय खत्म की और कोमल के कंधे पर हाथ रखकर खड़ा होने लगा। खड़े होते हुए जानबूझ कर अपना सिर उसके उन्नत उरोजों पर टकरा दिया। एक बार तो उसके मुंह से हल्की सी आह निकली पर फिर वह संभली और तुरंत पिछे हो गई और बाहर निकल गई।
मैं उसके पिछे पिछे चल दिया। उसने एकबार पिछे मुडकर देखा और जब पाया कि मैं पिछे ही आ रहा हूं तो जल्दी जल्दी कुल्हे मटकाते हुए अंदर आ गई।
वो सीधे मैम के बेडरूम में गई। मैं भी उसके पिछे पिछे अंदर आ गया। मैम बेड पर चद्दर ओढकर लेटी हुई थी।
कोमल मैम जाकर बेड पर बैठ गई। वो बेड के साथ कमर लगाकर पैरों को आधे मोडकर बैठी थी। पैरों को थोड़ा सा खोला हुआ था। मैं बेड के सामने आकर खडा हो गया और जैसे ही मेरी नजरें कोमल की तरफ गई तो मेरी आंखें वहीं पर जम गई। उसकी पजामी योनि वाली जगह से गीली थी और उसकी योनि की शेप एकदम से उजागर हो रही थी। गोरी गोरी फांके भीगी हुई पजामी को अपने से चिपकाये हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे आमंत्रण दे रही हों। लग रहा था कि उसने पेंटी नहीं पहनी है। मैं तो बस देखता ही रह गया।
कोमल मैम की तरफ मुंह करके उनसे कुछ कह रही थी। जब उसकी मेरी मुझ पर पड़ी और मेरी आंखों का पीछा करते हुए जब उसे एहसास हुआ कि मेरी नजरें कहां पर हैं, तो उसने एकदम से अपने पैरों को बेड पर सीधा करके एक दूसरे से चिपका लिया और तकिया उठाकर अपनी जांघों पर रख लिया। शायद मैम ने मुझे उसे यों घूरते देख लिया था, वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
तभी मुझे ऐसा लगा कि मैम ने अपनी पजामी का उतारा है चद्दर के अंदर ही, या फिर पहना है। मैं आंखें फाड़कर मैम की तरफ देख रहा था। मैम ने मुझे आंख मारी।
वो तुम्हारे सर को तो आज अचानक मीटिंग में जाना पड़ गया तो तुम कोमल के साथ चले जाओ। जगतपुरा में इसकी कोई दोस्त रहती है, दोनों साथ में कॉलेज में पढ़ती थी।
ठीक है, पर फिर यहां आपका धयान कौन रखेगा, वैसे ही आपकी तबीयत ठीक नहीं है, मैंने मैम से कहा।
मेरी चिंता मत करो, शुकन्तला है, तुम जाओ, मैम ने कहा।
और धयान से जाना, मैम ने फिर कहा।
ओके मैम, मैंने कहा।
कब चलना है कोमल जी, मैंने कोमल की तरफ देखकर कहा।
उसने अपनी आंखें झुका रखी थी और मेरे पूछने पर बस इतना ही बोली, 10 मिनट में चलते हैं।
मैंने ऑफिस में आकर सिस्टम शटडाउन किया और आकर मैम के पास बैठ गया। कोमल वहां पर नहीं थी, शायद तैयार होने गई थी। मैम ने चदद्र को थोडा सा साइड में किया और मेरा हाथ पकड़ कर सीधा अपनी योनि पर रख दिया। मेरा हाथ सीधा उनकी नंगी योनि पर जाकर टकराया। मैंने एकदम से उनकी तरफ देखा। उन्होंने कुछ भी नहीं पहना हुआ था। बिल्कुल नंगी लेटी थी। मैम की योनि एकदम गीली थी।
तब मेरी समझ में आया कि कोमल की योनि क्यों गीली थी, शायद मैम के साथ मस्ती चल रही थी। मेरा धयान दरवाजे की तरफ ही था और हाथ मैम की योनि को सहला रहा था।
तभी बाहर से आवाज आई और मैंने अपना हाथ हटा लिया, मैम ने चद्दर ओढ ली। कोमल ही थी।
जैसे ही वो कमरे में एंटर हुई मैं तो आंखें फाडे उसे ही देखता रह गया। आसमानी चमकदार कुर्ती जिसका गला बहुत ही डिप था, और बटन सभी बटन खुले हुये थे। उसके आधे से ज्यादा उरोज बीच में से नंगे दिख रहे थे। मैंने थोड़ा धयान से देखा तो उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। मेरी सांसे तो उपर नीचे होनी शुरू हो गई। स्कीन टाइट जींस में उसकी मादक जांघें उभर कर आ रही थी।
चले---- उसने मुझे खुदको यूं घूरते हुए देखकर कहा।
ओ-के- चलो, कहकर मैं बाहर आ गया।
मैंने बाइक स्टार्ट की और कोमल ने जाकर गेट खोल दिया।
कोमल आकर बाइक पर बैठ गई। उसने टोपी वाला हेलमेट पहना था। वो थोड़ा पिछे हटकर बैठी थी, उसका मेरे कंधे को पकड़ा हुआ था। वो इतना पिछे बैठी थी कि मेरे थोडा पिछे होने पर भी वो टच नहीं हुई। मैंने बाइक में एकदम से रेस दी और एकदम से ब्रेक लगा दिये। कोमल सीधा मेरी छाती से आकर टकराई और उसके उन्नत उरोज मेरी कमर में गड़ गये। क्या फिलिंग थी, बता नहीं सकता। कोमल के मुंह से एक आह निकल गई।
क्या है, आराम से नहीं चला सकते, मैं नहीं जा रही तुम्हारे साथ,,, कोमल ने कहा।
ठीक से चलानी है तो चलाओ, नहीं तो रहने दो, मैं ऑटो में चली जाउंगी, उसने फिर से कहा।
सॉरी, आराम से चलाउंगा, आप नाराज न हो,,, मैंने कहा और बाइक को आगे बढ़ा दिया।
मैं धीरे धीरे 50 की स्पीड पर बाइक चला रहा था। कोमल अभी भी मुझसे चिपक के ही बैठी हुई थी और उसके उरोज मेरी कमर में दबे हुए थे।
थोडी दूर चलने पर उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर से हटाकर अपनी जांघों पर रख लिया, जो मेरी जांघों को साइड में से छूने लगा। तभी एक बाइक वाले ने तेजी से हमारी साइड से बाइक निकाल कर हमारे आगे कर दी, जिससे मुझे ब्रेक लगाने पड़े। अचानक ब्रेक लगाने से थोड़ा सा बैलेंस बिगड़ा, पर स्पीड कंट्रोल में थी तो संभल में आ गई, पर इससे एक फायदा ये हुआ कि गिरने से बचने के लिए कोमल का हाथ मेरे पेट पर पहुंच गया और उसने दोनों हाथों से मेरे पेट को पकड़ लिया।
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देवा रे देवा,,,,,,, क्या करूं इन लड़कियों का,,, मैं अपना माथा पिटते हुए बड़बड़ाया।
मैंने कोमल का हाथ पकड़ा और पैसे उसके हाथ में रखने लगा तो उसने अपना हाथ एक तरफ कर लिया।
मेरी तो सटक गई थी, मैंने उसकी गोद में जोर से हाथ मारते हुए पैसे रख दिए। मेरा हाथ उसकी पजामी में से उभर रही योनि पर टच हो गया। मुझे एकदम से करंट सा लगा। मैंने अपना हाथ वैसे ही रख दिया और अब पकड़ लो इन्हें, कहते हुए और ज्यादा अपने हाथ का दबाव कोमल की योनि पर बना दिया। कोमल की सांसे तेज हो गई थी और उसका शरीर बार बार झुरझुरी सी ले रहा था। पर न तो उसने पैसे पकड़े और न ही मेरा हाथ हटाया। मैं वैसे ही अपना हाथ वहां पर दबाकर रखे रहा।
जब कोमल ने मेरा हाथ नहीं हटाया तो मैंने अपने हाथ को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी उंगली सीधी करके उसकी योनि के उपर रख दी।
कोमल के शरीर ने एकदम से झुरझुरी ली और मुझे अपनी उंगली पर कुछ गीलापन महसूस हुआ। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसकी आंखें आधी बंद थी और चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसके उन्नत उरोज तो सांसों के साथ तेजी से उपर नीचे हो रहे थे। मेरा मन तो कर रहा था कि बस मुंह में भरकर चूस लूं।
उसकी हालत देखकर मैं समझ गया कि अब ये इस दुनिया में नहीं है। मैंने अपनी उंगली का हलका हलका दबाव उसकी योनि पर बढ़ाया और रगड़ने लगा।
मैंने उसकी कुर्ती को उपर किया और पजामी की डोर पकड़कर खींच दी। जैसे ही उसकी पजामी की डोर खुली, कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर जाने से रोक लिया और वापिस अपनी योनि पर पजामी के उपर से ही दबा दिया। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसका उसकी आंखें बंद थी।
वो मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने भी हाथ को सही तरह से सैट करके उसकी योनि को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और एक उंगली, पजामी समेत उसकी फांकों में सैट कर दी।
मेरे ऐसा करते ही कोमल का शरीर अकड़ गया और मेरा हाथ पूरा भीग गया। उसने मेरे हाथ को जोर से अपनी योनि पर दबा लिया था, जिससे मेरी उंगली हलकी सी उसकी योनि में चली गई थी।
कुछ देर तक उसका शरीर ऐसे ही अकड़ा रहा। मुझे अपनी उंगली पर उसकी योनि का संकुचन महसूस हो रहा था। उसकी आंखें जोर से बंद थी।
जब वो कुछ नोर्मल हुई तो मेरे हाथ से उसने अपना हाथ हटा लिया, उसने धीरे से थोड़ी सी आंखें खोली, मुझे अपनी तरफ ही देखता पाकर उसने वापिस अपनी आंखें बंद कर ली।
क्रमशः.....................
जबरदस्त भाई
 
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