ऋषभ जैसे ही क्लिनिक पहुँचा, वहाँ का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। बाहर मरीजों की भारी भीड़ लगी थी और लोग शोर मचा रहे थे।
ऋषभ ने राजू को कड़े लहजे में निर्देश दिया, "राजू, सबको शांत करो और एक-एक करके अंदर भेजो। कोई भी जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।"
राजू ने भीड़ को संभाला और सबसे पहले एक अधेड़ उम्र की महिला को अंदर भेजा, जिनका नाम शालिनी था। शालिनी की उम्र करीब 38-40 साल रही होगी।
वह एक घरेलू महिला थी, जिसने एक साधारण सूती साड़ी पहनी थी, लेकिन उसकी देह का उभार उसकी उम्र के बावजूद बहुत कामुक था। शालिनी पिछले कई सालों से शादीशुदा थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही थी।
वह अपनी बांझपन की समस्या को लेकर बहुत परेशान थी और ऋषभ के पास आखिरी उम्मीद लेकर आई थी।
जैसे ही शालिनी ऋषभ के सामने आई और उसने अपनी समस्या बतानी शुरू की, ऋषभ की नज़रें उसके चेहरे पर टिक गईं।
शालिनी का चेहरा, उसकी आँखों की मासूमियत और उसके बात करने का तरीका बिल्कुल उसकी माँ ममता जैसा था।
ऋषभ के दिमाग में अचानक अपनी माँ की वह ट्रांसपेरेंट पिंक साड़ी और उसकी उभरी हुई चूचियों की छवि कौंध गई। शालिनी को देखते ही ऋषभ के अंदर दबी हुई वासना ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी।
उसकी कल्पनाओं ने काम करना शुरू कर दिया। उसे शालिनी में अपनी माँ की परछाई दिखने लगी। जैसे ही उसने शालिनी की तरफ देखा, उसकी पैंट के अंदर उसका मोटा लंड एक झटके में तनकर खड़ा हो गया।
वह इतना सख्त हो गया कि पैंट का कपड़ा उसे चुभने लगा। ऋषभ की सांसें तेज हो गईं और उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख उतर आई।
ऋषभ ने अपनी आवाज़ को पेशेवर रखने की कोशिश की, लेकिन उसके शब्दों में कामुकता साफ झलक रही थी।
उसने शालिनी से कहा, "शालिनी जी, आपकी समस्या थोड़ी जटिल लग रही है। मुझे आपका गहन शारीरिक चेकअप (Physical Examination) करना पड़ेगा। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपने सारे कपड़े उतार दें और इस बेड पर लेट जाएँ।"
शालिनी थोड़ी झिझकी, उसने धीरे से कहा, "डॉक्टर साहब, क्या यह ज़रूरी है? क्या मैं सिर्फ साड़ी हटाकर नहीं लेट सकती?"
ऋषभ ने अपनी कुर्सी से उठकर उसके करीब कदम बढ़ाए। उसकी नज़रे शालिनी के सीने पर थीं। उसने धीमे लेकिन अधिकारपूर्ण स्वर में कहा, "देखिए, मैं एक स्पेशलिस्ट हूँ।
जब तक मैं आपके शरीर के हर हिस्से की जांच नहीं करूँगा, मैं सही कारण नहीं बता पाऊंगा। अगर आप माँ बनना चाहती हैं, तो आपको मुझ पर भरोसा करना होगा।"
शालिनी, जो माँ बनने की तड़प में थी, ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी का पल्लू गिराया। उसने अपनी ब्लाउज की हुक खोली और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी।
जैसे-जैसे कपड़े उतर रहे थे, ऋषभ की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। जब शालिनी पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ के सामने एक ऐसा शरीर था जो परिपक्वता और कामुकता का संगम था।
उसकी चूचियाँ भारी और गोल थीं, और उनके बीच की गहरी घाटी ऋषभ को अपनी ओर खींच रही थी।
ऋषभ ने दस्ताने पहने और शालिनी के पास गया। उसने सबसे पहले उसकी चूचियों की जांच करने का फैसला किया।
उसने अपने दोनों हाथों से शालिनी की भारी चूचियों को मजबूती से पकड़ा और उन्हें दबाने लगा।
"आह... डॉक्टर साहब..." शालिनी के मुँह से एक हल्की सी आह निकली।
ऋषभ ने उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाया और मरोड़ा, यह चेक करने के बहाने कि क्या उनमें से दूध आने के कोई संकेत हैं या हार्मोनल असंतुलन है।
लेकिन असल में, वह अपनी माँ की याद में उन चूचियों का आनंद ले रहा था। जैसे ही ऋषभ की उंगलियों ने शालिनी के गुलाबी निप्पल्स को रगड़ा, शालिनी के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई।
उसकी चूत में एक तीव्र सिहरन हुई और वह अनजाने में अपनी जाँघें फैलाने लगी।
शालिनी की चूत अब गीली होने लगी थी। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से उत्तेजित हो रही थी। ऋषभ ने देखा कि शालिनी की सांसें तेज हो गई हैं और उसका शरीर हल्का सा कांप रहा है।
ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया। उसने शालिनी की जाँघों को फैलाया और उसकी चूत के पास अपनी उंगलियाँ ले गया।
शालिनी की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, जिससे वहां एक चिपचिपा पानी जैसा पदार्थ निकल रहा था।
ऋषभ ने फुसफुसाते हुए कहा, "शालिनी जी, आपकी चूत बहुत ज्यादा उत्तेजित और गीली है। लगता है आपके शरीर में कामेच्छा बहुत अधिक है, जो शायद आपकी प्रेग्नेंसी में बाधा बन रही है।"
यह सुनकर शालिनी और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जैसे वह ऋषभ को अपनी चूत के और करीब बुला रही हो।
ऋषभ अब और नियंत्रण नहीं रख सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना खड़ा हुआ, मोटा और लाल लंड बाहर निकाल लिया।
शालिनी ने जब उस विशाल लंड को देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं। उसने कभी इतना बड़ा और सख्त लंड नहीं देखा था।
ऋषभ ने बिना समय गंवाए शालिनी के पैरों को उसके कंधों पर रख दिया और अपनी उंगलियों से उसकी चूत के छेद को सहलाने लगा।
"डॉक्टर साहब... यह आप क्या कर रहे हैं... आह..." शालिनी ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध नहीं, बल्कि एक गहरी तड़प थी।
ऋषभ ने अपनी जीभ निकाली और शालिनी की चूत के क्लिटोरिस को जोर से चाटना शुरू कर दिया।
"चप-चप-चप" की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। ऋषभ उसकी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे वह अपनी माँ की चूत को चाट रहा हो।
वह उसकी गीली गर्माहट और स्वाद का आनंद ले रहा था। शालिनी अपनी कमर को बेड पर पटकने लगी और जोर-जोर से कराहने लगी।
"ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत अच्छा लग रहा है... और जोर से चाटिए... आह!"
जब शालिनी चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी, तभी ऋषभ ने अपना मोटा लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे पूरा अंदर उतार दिया।
"आह्ह्ह्ह!" शालिनी की एक लंबी चीख निकली, लेकिन वह चीख दर्द की नहीं, बल्कि एक असीम सुख की थी।
ऋषभ का मोटा लंड उसकी तंग चूत को फाड़ता हुआ अंदर तक चला गया था।
ऋषभ ने अब अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज़ आने लगी।
वह पूरी ताकत से शालिनी की चूत में अपना लंड ठोक रहा था। हर धक्के के साथ शालिनी की भारी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं।
ऋषभ ने एक हाथ से उसकी चूचियों को जोर से दबाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।
"तुम बिल्कुल मेरी ममता जैसी लग रही हो... तुम्हारी चूत बहुत तंग और गर्म है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।
शालिनी अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह ऋषभ के लंड को अपनी चूत की दीवारों से जकड़ने लगी।
वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "हाँ... मुझे भर दो... मुझे अपने बीज से भर दो डॉक्टर... मुझे प्रेग्नेंट कर दो!"
ऋषभ की रफ्तार और बढ़ गई। वह पागलों की तरह शालिनी की चूत में अपना लंड उतार रहा था।
उसकी चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।
उसने आखिरी के कुछ धक्के बहुत जोर से मारे और शालिनी की चूत की गहराई में अपना लंड पूरी तरह धंसा दिया।
एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ का गर्म और गाढ़ा वीर्य शालिनी की चूत के अंदर फुहारों की तरह छूटने लगा।
"आह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना पूरा लोड शालिनी के गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।
शालिनी भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को कसकर जकड़ लिया।
काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी सांसें तेज थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे शालिनी की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।
ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और शालिनी से कहा, "अब आप कपड़े पहन लीजिए। मैंने आपकी समस्या का 'इलाज' कर दिया है। अब उम्मीद है कि आप जल्द ही प्रेग्नेंट हो जाएंगी।"
शालिनी ने एक मदहोश मुस्कान के साथ ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह संतुष्ट थी। वह धीरे से उठी, अपने कपड़े पहने और ऋषभ को एक कामुक नज़र देकर क्लिनिक से बाहर चली गई।
ऋषभ ने एक गहरी सांस ली और अपने मन को शांत करने की कोशिश की। शालिनी के साथ जो कुछ भी हुआ था,
उसने उसके शरीर में कामुकता का एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था।
उसके लंड में अभी भी हल्की सी झनझनाहट थी और दिमाग में शालिनी की उन भारी चूचियों और गीली चूत की यादें घूम रही थीं।
लेकिन क्लिनिक में भीड़ बहुत थी, इसलिए उसने खुद को संभाला और तुरंत बेल बजाई।
अगला मरीज एक 54 साल का व्यक्ति था, जो काफी उदास और परेशान दिख रहा था। उसने अपनी समस्या बताई—उसे 'इरेक्टाइल डिस्फंक्शन' (Erectile Dysfunction) की समस्या थी।
वह बता रहा था कि अब उसका लंड उत्तेजित नहीं होता और वह अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा है।
ऋषभ ने पेशेवर अंदाज में उसकी बात सुनी, उसे कुछ कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) समझाईं और कुछ दवाइयां लिखकर दे दीं। वह आदमी राहत की सांस लेकर बाहर चला गया।
उसके बाद एक और पुरुष आया, जिसे 'हाइड्रोसील' (Hydrocele) की समस्या थी। उसके अंडकोष में सूजन थी। ऋषभ ने उसकी जांच की और उसे सटीक निदान के लिए स्क्रोटम के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के लिए बाहर भेज दिया।
अब ऋषभ की बारी थी उस मरीज को बुलाने की जिसका नंबर अगला था। जैसे ही उसने बेल बजाई, अंदर एक 23 साल की युवती दाखिल हुई।
उसका नाम रिया था। वह बहुत ही सुंदर, छरहरी काया वाली और मासूम दिखने वाली लड़की थी। उसने एक टाइट फिटिंग वाली कुर्ती और लेगिंग्स पहनी हुई थी,
जिससे उसके शरीर के कर्व्स साफ झलक रहे थे। उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी और वह अपनी नजरें नीचे झुकाए हुए थी।
रिया ने धीमी आवाज में कहा, "डॉक्टर साहब... मेरे पीरियड्स पिछले दो महीने से मिस हो गए हैं। मैं बहुत डरी हुई हूँ।"
ऋषभ ने उसकी ओर देखा। उसकी उम्र, उसकी मासूमियत और वह घबराहट... ऋषभ के अंदर का शिकारी जाग उठा।
उसने रिया की आंखों में देखा, जो डर और शर्म से झुकी हुई थीं। ऋषभ एक अनुभवी डॉक्टर था, वह समझ गया कि यह कोई हार्मोनल समस्या नहीं, बल्कि कुछ और है।
ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर पीछे झुकते हुए एक कामुक मुस्कान के साथ कहा, "रिया, पीरियड्स मिस होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम कारण प्रेग्नेंसी है।
मुझे तुम्हारा गहन चेकअप करना होगा ताकि मैं पक्का कर सकूँ कि अंदर क्या चल रहा है।"
रिया ने धीरे से सिर हिलाया, लेकिन वह अभी भी झिझक रही थी। ऋषभ ने अपनी आवाज को थोड़ा सख्त और अधिकारपूर्ण बनाया, "देखो रिया, अगर तुम चाहती हो कि समस्या का सही समाधान निकले, तो तुम्हें मेरी बात माननी होगी। चलो, अपने सारे कपड़े उतारो और इस बेड पर लेट जाओ।"
रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने धीरे से पूछा, "क्या... क्या पूरे कपड़े उतारना ज़रूरी है, डॉक्टर साहब?"
ऋषभ ने अपनी नजरें उसकी टाइट कुर्ती के नीचे उभरी हुई छोटी लेकिन सख्त चूचियों पर टिका दीं।
उसने कहा, "हाँ, बिल्कुल। मुझे पेट के निचले हिस्से और चूत की जांच करनी होगी। बिना कपड़ों के जांच करना मेडिकल प्रोटोकॉल है। डरो मत, मैं सिर्फ एक डॉक्टर हूँ।"
रिया ने धीरे-धीरे अपनी कुर्ती उतारी। उसके नीचे एक पतला सा ब्रा था, जो उसकी गोरी त्वचा को और भी उभार रहा था।
फिर उसने अपनी लेगिंग्स और अंडरवियर भी उतार दिए। जब वह पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ की सांसें तेज हो गईं।
रिया का शरीर एकदम तराशा हुआ था। उसकी त्वचा मखमली और सफेद थी, और उसकी चूत के ऊपर के बाल बहुत ही सलीके से ट्रिम किए हुए थे।
ऋषभ ने मन ही मन सोचा, 'इस मासूम लड़की को किसी ने अच्छे से चोदा होगा, तभी तो यह इतनी डरी हुई है। अब जब यह मेरे पास आई है, तो थोड़ा मजा मैं भी लूँगा।'
ऋषभ ने दस्ताने पहने और रिया के पास गया। उसने सबसे पहले उसके पेट को दबाकर चेक करना शुरू किया। जैसे ही ऋषभ की उंगलियां उसके पेट के निचले हिस्से पर घूमीं, रिया ने एक हल्की सी आह भरी।
ऋषभ ने धीरे से पूछा, "रिया, क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? क्या तुमने हाल ही में असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं?"
रिया ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा, "जी... डॉक्टर साहब..."
ऋषभ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। उसने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और रिया की जाँघों को धीरे से फैलाया।
उसकी चूत गुलाबी और बेहद नाजुक दिख रही थी। ऋषभ ने अपनी उंगली उसकी चूत के मुहाने पर रखी और धीरे से अंदर धकेलने की कोशिश की।
"आह्ह्ह..." रिया के मुँह से एक कराह निकली।
ऋषभ ने महसूस किया कि रिया की चूत अंदर से गर्म और हल्की गीली थी। उसने अपनी उंगली को थोड़ा और अंदर डाला और उसकी दीवारों को सहलाने लगा।
वह यह चेक करने का नाटक कर रहा था कि गर्भाशय का मुँह कैसा है, लेकिन असल में वह रिया की कामुकता को जगा रहा था।
"तुम्हारी चूत बहुत तंग है, रिया। लगता है तुम बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही हो," ऋषभ ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया।
रिया की सांसें अब तेज होने लगी थीं। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से डर रही थी, लेकिन साथ ही उसे एक अजीब सा सुख भी मिल रहा था।
उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जो ऋषभ के लिए एक खुला निमंत्रण था।
ऋषभ अब और इंतजार नहीं कर सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना वह विशाल, सख्त और लाल लंड बाहर निकाल लिया, जो शालिनी के बाद अब रिया के लिए तड़प रहा था।
जब रिया ने उस भीमकाय लंड को देखा, तो वह दंग रह गई। उसने कभी इतना बड़ा अंग नहीं देखा था।
ऋषभ ने बिना किसी देरी के रिया के दोनों पैरों को पकड़कर उसके कंधों तक फैला दिया। उसने अपने लंड की नोक को रिया की गीली चूत के छेद पर रगड़ा।
"डॉक्टर साहब... यह... यह गलत है... प्लीज..." रिया ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज में कोई ताकत नहीं थी। उसकी चूत से अब पानी रिसने लगा था।
ऋषभ ने एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड रिया की तंग चूत के अंदर उतार दिया।
"आह्ह्ह्ह्ह!" रिया की एक तीखी चीख निकली। उसकी चूत इतनी तंग थी कि ऋषभ को ऐसा लगा जैसे वह किसी गर्म मखमल के अंदर घुस गया हो। लंड के अंदर जाते ही रिया की चूत ने उसे कसकर जकड़ लिया।
ऋषभ ने अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज क्लिनिक के कमरे में गूंजने लगी।
वह पूरी ताकत से रिया की मासूम चूत को फाड़ रहा था। हर धक्के के साथ रिया का शरीर बेड पर ऊपर-नीचे उछल रहा था।
ऋषभ ने एक हाथ से उसकी छोटी चूचियों को जोर से मरोड़ा और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।
"तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने तुम्हें ठीक से नहीं चोदा होगा, तभी तुम यहाँ आई हो। देखो, मेरा लंड तुम्हारी चूत के हर कोने को छू रहा है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।
रिया अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह अपनी आँखें बंद करके कराहने लगी, "ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत गहरा जा रहा है... आह... मुझे और जोर से चोदिए... मुझे खत्म कर दीजिए!"
ऋषभ की रफ्तार अब पागलों जैसी हो गई थी। वह रिया की चूत में अपना लंड ऐसे ठोक रहा था जैसे वह कोई मशीन हो।
रिया की चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।
उसने रिया की जाँघों को और कसकर पकड़ लिया और आखिरी के कुछ धक्के इतनी जोर से मारे कि रिया की चीखें कमरे की दीवारों से टकराने लगीं।
एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ ने अपना पूरा लोड रिया की चूत की गहराई में, उसके गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।
"आह्ह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और गर्म वीर्य की फुहारों ने रिया के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह भर दिया।
रिया भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि ऋषभ को एक पल के लिए लगा कि वह वहीं फंस गया है।
काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी भारी सांसें कमरे की खामोशी को तोड़ रही थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे रिया की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।
ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और रिया से कहा, "अब तुम कपड़े पहन सकती हो। मैंने तुम्हारा 'चेकअप' पूरा कर लिया है। अब तुम्हें पता चल गया होगा कि असली इलाज क्या होता है।"
रिया ने एक मदहोश और संतुष्ट नजर से ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह से खाली हो चुकी थी।
इसके बाद रिया को अबॉर्शन पिल दे दिया
उसने धीरे से अपने कपड़े पहने और एक धीमी मुस्कान के साथ क्लिनिक से बाहर चली गई।
ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर बैठकर एक लंबी सांस ली। आज उसने दो अलग-अलग उम्र की महिलाओं की कामुकता का आनंद लिया था,
लेकिन उसके अंदर की असली आग अभी भी जल रही थी। शालिनी और रिया सिर्फ एक जरिया थे, उसकी असली मंजिल तो उसकी माँ ममता थी।
वह अब बस उस पल का इंतजार कर रहा था जब वह अपनी माँ को पूरी तरह से अपने वश में कर लेगा और उसे अपनी वासना की आग में जलाकर राख कर देगा।