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Incest माँ का चेकअप और चुदाई (नए अंदाज में )Running Story

दोस्तों क्या आप इस कहानी की नायिका ममता का अपने दोनों पुत्रो के साथ threesome sex चाहते है

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Sugna

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क्लिनिक में सन्नाटा छा चुका था। दोपहर की धूप खिड़कियों से छनकर अंदर आ रही थी, जिससे कमरे में एक अजीब सी गर्माहट और शांति थी।

ऋषभ ने राजू को विदा कर दिया था। राजू के जाते ही ऋषभ ने एक गहरी साँस ली और अपना फोन उठाया। उसके दिमाग में इस वक्त सिर्फ एक ही चेहरा घूम रहा था—उसकी माँ, ममता।

उसने नंबर डायल किया और फोन कान से लगाया।

"हेलो माँ," ऋषभ की आवाज़ में एक अलग ही तरह की मिठास और गहराई थी।

दूसरी तरफ से ममता की कोमल और थोड़ी संकोची आवाज़ आई, "हाँ बेटा, बोलो।"

"क्या कर रही हो माँ?" ऋषभ ने धीरे से पूछा, जैसे वह उसकी साँसों को महसूस करना चाहता हो।

ममता ने जवाब दिया, "तेरे लिए लंच पैक कर रही हूँ बेटा। तूने सुबह ठीक से नाश्ता नहीं किया था, इसलिए सोच रही थी कि टिफिन में खाना दे दूँ।"

ऋषभ के होंठों पर एक शरारती मुस्कान आ गई। वह कल्पना कर सकता था कि उसकी माँ रसोई में खड़ी होगी, शायद उसकी वही पारदर्शी साड़ी पहनी होगी जो उसके शरीर के उभारों को और भी निखार देती है।

उसने अपनी आवाज़ को और भी भारी करते हुए कहा, "नहीं माँ, तुम पैक मत करो। मैं थोड़ी देर बाद घर ही आ रहा हूँ, वहीं तुम्हारे साथ बैठकर लंच करूँगा।"

ममता के स्वर में एक हल्की सी घबराहट और उत्तेजना थी, "अच्छा... ठीक है। मैं इंतज़ार कर रही हूँ, जल्दी आना।"

"हूँ... बस अभी आता हूँ," ऋषभ ने कहा और फोन रख दिया। फोन रखते ही ऋषभ के ज़हन में अपनी माँ के साथ बिताए पिछले पलों की यादें ताज़ा हो गईं। उसका शरीर अब धीरे-धीरे उत्तेजित होने लगा था।

तभी, क्लिनिक के बाहर एक कार के रुकने की आवाज़ आई। ऋषभ ने खिड़की से देखा, वह ज्योति थी।


ज्योति, जो ऋषभ से बेइंतहा प्यार करती थी और उसकी एक झलक पाने के लिए तरसती रहती थी। वह कार से उतरी और तेज़ी से क्लिनिक के अंदर दाखिल हुई। उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी।

"कैसी हो ज्योति?" ऋषभ ने पेशेवर अंदाज़ में पूछा, हालाँकि उसका दिमाग अभी भी घर और अपनी माँ के ख्यालों में था।

ज्योति ने अपनी नज़रें नीचे झुकाते हुए कहा, "ठीक हूँ... बस थोड़ी प्रॉब्लम है।" उसने इधर-उधर देखा और धीरे से बोली, "क्लिनिक एकदम शांत है, एक भी पेशेंट नहीं है।"

ऋषभ ने हल्का सा मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "हाँ, लंच का टाइम है इसलिए। चलो, मैं तुम्हारा चेकअप कर लूँ, फिर मैं घर के लिए निकलता हूँ।"

ज्योति के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। वह ऋषभ के करीब आने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहती थी।

उसने हिचकिचाते हुए कहा, "ऋषभ... मेरी योनि (vagina) में बहुत खुजली होने लगी है। मुझे बहुत बेचैनी हो रही है।"

ऋषभ ने अपनी कुर्सी पीछे खिसकाई और एक सख्त, आदेशात्मक आवाज़ में बोला, "अपनी पैंटी उतारकर लेट जाओ।"

ज्योति एकदम से चौंक गई। उसने अपनी आँखें बड़ी कीं और हकलाते हुए पूछा, "क्या... क्या कहा आपने?"

ऋषभ ने बिना किसी नरमी के दोहराया, "जो तुमने सुना। चेकअप करना पड़ेगा ठीक से, तभी पता चलेगा कि समस्या क्या है।"

ज्योति का चेहरा शर्म से लाल हो गया। वह पहली बार किसी मर्द के सामने इस तरह की स्थिति में थी।

उसने धीरे से कहा, "मुझे... मुझे बहुत शर्म आ रही है। क्या आप कोई मेडिसिन दे सकते हैं? मैं उसे इस्तेमाल कर लूँगी।"

ऋषभ ने अपनी मेज़ पर रखे कागज़ात को किनारे किया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला, "बिना चेकअप के मैं कोई मेडिसिन नहीं दे सकता।

एक डॉक्टर के तौर पर मेरा फर्ज़ है कि मैं समस्या को देखूँ। कोई बात नहीं, बस कपड़े उतार दो।"

ज्योति के लिए यह एक कठिन निर्णय था, लेकिन उसका प्यार और समर्पण उसकी शर्म से कहीं ज़्यादा बड़ा था। वह जानती थी कि ऋषभ उसे देख रहा है,


और यह विचार ही उसे अंदर से उत्तेजित कर रहा था। उसने कांपते हाथों से अपनी सलवार को नीचे खिसकाया और फिर धीरे-धीरे अपनी पैंटी उतारी।

जब ज्योति पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ की साँसें थम गईं। उसने पहली बार ज्योति की गुलाबी, सुडौल और बेहद साफ़-सुथरी चूत को इतने करीब से देखा था।

वह इतनी सुंदर और मासूम लग रही थी कि ऋषभ का लंड उसकी पैंट के अंदर एक ही पल में पत्थर की तरह सख्त हो गया। उसकी नसों में खून तेज़ी से दौड़ने लगा।

ज्योति ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं, उसका पूरा शरीर हल्का-हल्का कांप रहा था। वह पूरी तरह से ऋषभ के सामने समर्पित थी।

ऋषभ ने अपने दस्ताने पहने और धीरे से अपनी उंगली ज्योति की चूत के बाहरी हिस्से पर रखी। ज्योति ने एक गहरी सिसकी भरी और अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया।

"हम्म... ज्योति," ऋषभ ने धीमी आवाज़ में कहा, "तुम्हारी वैजाइना में काफी ड्राईनेस (dryness) है। यही वजह है कि तुम्हें खुजली महसूस हो रही है।"

ऋषभ ने अपनी उंगली को थोड़ा अंदर धकेला। वह महसूस कर सकता था कि ज्योति कितनी तंग है और उसकी योनि की दीवारें कितनी संवेदनशील हैं।


जैसे ही उसकी उंगली अंदर गई, ज्योति के मुँह से एक दबी हुई आह निकली।

"आह्ह... ऋषभ..." ज्योति ने अनजाने में उसका नाम ले लिया।

ऋषभ का मन अब पूरी तरह से ज्योति को अपनी बाहों में भरने और उसके साथ हिंसक सेक्स करने का था।

उसका सख्त लंड पैंट की ज़िप को फाड़ने की कोशिश कर रहा था। वह चाहता था कि वह अभी इसी वक्त अपनी पैंट उतारे और ज्योति की उस गुलाबी योनि में अपना पूरा लंड धँसा दे।

वह उसकी चीखें सुनना चाहता था, उसकी तड़प को महसूस करना चाहता था।

लेकिन तभी, उसके दिमाग में एक बिजली की तरह विचार आया—'माँ'।

उसे याद आया कि उसने माँ से कहा है कि वह लंच के लिए घर आ रहा है। उसे याद आई माँ की वह आवाज़, उसकी वह पारदर्शी साड़ी और वह प्यास जो उन दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों से सुलग रही थी।

ऋषभ के लिए ज्योति सुंदर थी, लेकिन उसकी माँ ममता उसके लिए एक जुनून थी। एक ऐसा जुनून जिसने उसे पागल कर दिया था।

उसे महसूस हुआ कि अगर वह अभी ज्योति के साथ समय बिताता है, तो वह अपनी माँ के साथ मिलने का वह कीमती समय खो देगा।

उसकी उत्तेजना अब ज्योति से हटकर अपनी माँ की ओर मुड़ गई थी। उसे अब ज्योति की योनि से ज़्यादा अपनी माँ के शरीर की खुशबू और उनके साथ होने वाले उस वर्जित (taboo) सुख की तलब हो रही थी।

ऋषभ ने अचानक अपनी उंगली बाहर निकाल ली। ज्योति, जो अब तक पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और ऋषभ के स्पर्श का इंतज़ार कर रही थी, एकदम से अधूरी महसूस करने लगी।

"क्या हुआ डॉक्टर?" ज्योति ने धीरे से पूछा, उसकी आँखों में एक उम्मीद थी।

ऋषभ ने अपनी उत्तेजना को जबरदस्ती दबाया और पेशेवर अंदाज़ में वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गया। "कुछ नहीं, बस समस्या समझ आ गई है। यह सिर्फ ड्राईनेस की वजह से है।"

उसने तेज़ी से अपनी दवाइयों की अलमारी से एक क्रीम और कुछ गोलियाँ निकालीं। "यह लो, यह क्रीम दिन में दो बार लगाना और ये गोलियाँ सुबह-शाम लेना। तुम्हारी खुजली दो-तीन दिन में ठीक हो जाएगी।"

ज्योति हैरान थी। उसे लगा था कि ऋषभ उसे और सहलाएगा, शायद उसे चूम लेगा या कुछ और करेगा। लेकिन ऋषभ अब बहुत जल्दी में था।


वह बस घर पहुँचकर अपनी माँ के साथ उन पलों को जीना चाहता था जिनके सपने उसने पूरे दिन देखे थे।

"बस इतना ही?" ज्योति ने उदासी से पूछा।

"हाँ, अब तुम कपड़े पहन लो। मुझे घर निकलना है, माँ मेरा इंतज़ार कर रही होंगी," ऋषभ ने बिना उसकी तरफ देखे कहा।

ज्योति ने चुपचाप अपने कपड़े पहने। वह समझ गई थी कि ऋषभ के दिमाग में कुछ और चल रहा है। उसने ऋषभ को देखा, जो अब अपना बैग पैक कर रहा था


और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो ज्योति के लिए नहीं थी।

"ठीक है ऋषभ, शुक्रिया," ज्योति ने धीमी आवाज़ में कहा।

ऋषभ ने बस एक औपचारिक मुस्कान दी और कहा, "अपना ख्याल रखना। अगली बार चेकअप के लिए आना।"

जैसे ही ज्योति क्लिनिक से बाहर निकली और अपनी कार में बैठी, ऋषभ ने एक पल की भी देरी नहीं की। उसने क्लिनिक का शटर गिराया, लाइटें बंद कीं और तेज़ी से अपनी कार की ओर बढ़ा।

उसकी कार की रफ्तार तेज़ थी, लेकिन उसका मन उससे भी तेज़ दौड़ रहा था। वह कल्पना कर रहा था कि जब वह घर पहुँचेगा, तो माँ उसे किस रूप में मिलेगी।


क्या वह रसोई में होगी? क्या वह उसे गले लगाएगी? या फिर वह सीधे कमरे में जाकर उसे अपनी बाहों में भर लेगा?

उसका लंड अभी भी पूरी तरह सख्त था और वह अपनी पैंट के अंदर रगड़ खा रहा था। वह मन ही मन कह रहा था, "इंतज़ार करो माँ... तुम्हारा बेटा आ रहा है। आज मैं तुम्हें वह सब दूँगा जिसकी तुम्हें ज़रूरत है।"

ऋषभ की उत्तेजना अब चरम पर थी। ज्योति का वह अनुभव उसके लिए सिर्फ एक छोटा सा ट्रेलर था, असली फिल्म तो अब घर पर शुरू होने वाली थी।


वह अपनी माँ के साथ उसforbidden pleasure (वर्जित सुख) में डूबने के लिए बेताब था।

जैसे ही उसकी कार घर के गेट पर रुकी, ऋषभ ने एक गहरी साँस ली और अपनी आँखों में वासना की आग लिए घर के अंदर कदम रखा।
Bahut achchha likha ek beta ka jishmani pyar jo jishm hi nhi aatma ko bhi trapt krta h jha ek tarf ma apne bete ki chhuan se bhi sihar jati bahi beta bhi ma ka sath ke liye jawan ladki ko chhod de bahut sahi aage aage hota h kya
 

shineplace

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ऋषभ ने जैसे ही घर के अंदर कदम रखा, उसकी आँखों के सामने एक ऐसा दृश्य था जिसने उसकी वासना की आग में घी डालने का काम किया।

उसकी माँ, ममता, एक गहरे काले रंग की शिफॉन साड़ी पहने खड़ी थी। वह काला रंग उनके गोरे और निखरे हुए बदन पर ऐसा लग रहा था जैसे चांदनी रात में कोई गहरा बादल छा गया हो।

साड़ी इतनी पारदर्शी थी कि उनके शरीर के उभार, उनकी कमर का घुमाव और उनके चूचियों की गोलाई साफ झलक रही थी।

ऋषभ का लंड पहले से ही ज्योति की वजह से पत्थर की तरह सख्त था, लेकिन माँ को इस रूप में देखकर उसकी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई।

उसके दिमाग में अब सिर्फ एक ही बात चल रही थी—अपनी माँ के इस काले लिबास को फाड़कर उनके बदन को अपनी बाहों में भरना।

ऋषभ ने एक पल की भी देरी नहीं की। वह तेज़ी से आगे बढ़ा और ममता को दीवार से सटा दिया।

इससे पहले कि ममता कुछ समझ पाती, ऋषभ ने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और एक जोरदार, हिंसक किस (kiss) किया।

ऋषभ ने सिर्फ किस नहीं किया, बल्कि जुनून में आकर ममता के निचले होंठ को अपने दांतों से जोर से काट लिया।

"आह्ह...!" ममता के मुँह से एक दबी हुई चीख निकली।

उस एक झटके और उस दर्द भरे सुख ने ममता के पूरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। उनके सिर से लेकर उनके पैरों तक,

और सबसे ज्यादा उनकी भीगी हुई चूत (pussy) तक एक अजीब सी झनझनाहट फैल गई। उनकी टांगें कांपने लगीं और उनका शरीर ढीला पड़ गया।

ऋषभ ने अपनी पकड़ और मजबूत की और उनके होंठों को चूसने लगा। ममता ने अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश की और धीरे से ऋषभ के सीने पर हाथ रखकर उसे थोड़ा पीछे धकेला।

उनकी आवाज़ में अभी भी वह संकोच और ममता थी, लेकिन आंखों में वासना की चमक थी।

"बे... बेटा... पहले खाना तो खा ले... मैंने तेरे लिए लंच बनाया है," ममता ने हांफते हुए कहा। उनकी सांसें तेज चल रही थीं और उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी,

जिससे उनके चूचियाँ साड़ी के अंदर जोर-जोर से हिल रहे थे।

ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी माँ की गर्दन पर अपनी नाक रगड़ते हुए उनकी खुशबू को महसूस किया।

उसने भारी और कामुक आवाज़ में कहा, "माँ... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। मेरा लंड फट जाएगा अगर मैंने अभी तुम्हें नहीं पाया। मुझे खाने की भूख नहीं है, मुझे तुम्हारी भूख है।"

ममता ने शर्माते हुए अपनी नज़रें झुकाईं, "बेटा... खाना खा लेता तो... फिर आराम से..."

लेकिन ऋषभ ने उनकी बात पूरी नहीं होने दी। उसने फिर से उनके होंठों पर हमला किया, इस बार किस और भी गहरा और लंबा था।

उसकी जीभ ममता के मुँह के अंदर घुसकर उनकी जीभ के साथ खेलने लगी। यह एक ऐसा चुंबन था जिसमें भूख, प्यास और सालों का दबा हुआ वर्जित सुख एक साथ फूट पड़ा था।

धीरे-धीरे, ममता की ममता हारने लगी और उनकी अंदर की दबी हुई जवान औरत जाग उठी। वह भी ऋषभ के इस जुनून के आगे मजबूर हो गई। उन्होंने अपनी बाहें ऋषभ की गर्दन के चारों ओर लपेट लीं और उतनी ही शिद्दत से उसे चूमने लगीं।

उनके शरीर अब एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक चुके थे। ऋषभ महसूस कर सकता था कि उसकी माँ के चूचियों के सख्त निप्पल उसकी छाती से रगड़ खा रहे थे।

ऋषभ ने अपना हाथ नीचे ले जाकर ममता की कमर को कसकर पकड़ा और उन्हें अपनी ओर और खींच लिया। उसने धीरे से फुसफुसाया, "माँ... तुम्हारी यह काली साड़ी मुझे पागल कर रही है।"

ममता ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और ऋषभ की आँखों में देखते हुए कहा, "तो फिर... उतार क्यों नहीं देते इसे?"शरमाते हुए बोली

यह सुनते ही ऋषभ का संयम पूरी तरह टूट गया। उसने एक झटके में ममता की साड़ी के पल्लू को उनके कंधे से नीचे गिरा दिया।

अब ममता के सामने सिर्फ उनकी ब्लाउज और साड़ी का निचला हिस्सा था। ऋषभ ने उनके गले से नीचे उतरते हुए उनके कंधों और कॉलर बोन को चूमना शुरू किया।

"आह्ह...रेशु... बेटा... बहुत अच्छा लग रहा है," ममता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और सिर पीछे की ओर झुका लिया।

ऋषभ ने अपने हाथ ममता के ब्लाउज के हुक की तरफ बढ़ाए। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उत्तेजना इतनी अधिक थी कि उसने फुर्ती से हुक खोल दिए।

जैसे ही ब्लाउज खुला, ममता के भारी और गोल स्तन उनके सामने आ गए। काले रंग की ब्रा ने उनके स्तनों को आधा ढका हुआ था, लेकिन उनके उभार बाहर की ओर छलक रहे थे।

ऋषभ ने बिना देर किए अपना चेहरा उनके चूचियों के बीच दबा दिया और उन्हें जोर-जोर से चूसने लगा। वह उनके निप्पल्स को अपनी जीभ से सहला रहा था और कभी-कभी उन्हें दांतों से हल्का सा काट रहा था।

"ओह्ह... आह्ह... रेशु... धीरे... बहुत तेज़ हो रहा है," ममता ने कराहते हुए कहा, लेकिन उनके हाथ ऋषभ के बालों को

और कसकर पकड़ रहे थे, जिससे पता चलता था कि उन्हें यह सब कितना पसंद आ रहा था।

ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी के कमरबंद को ढीला किया और धीरे-धीरे साड़ी को नीचे खिसकाया।

जैसे ही साड़ी नीचे गिरी, ममता के सामने सिर्फ एक छोटी सी सफेद रंग की लेस वाली पैंटी बची थी। उनके गोरे पैर और सुडौल जांघें ऋषभ की आँखों के सामने थीं।
 

pussylover1

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ऋषभ ने जैसे ही घर के अंदर कदम रखा, उसकी आँखों के सामने एक ऐसा दृश्य था जिसने उसकी वासना की आग में घी डालने का काम किया।

उसकी माँ, ममता, एक गहरे काले रंग की शिफॉन साड़ी पहने खड़ी थी। वह काला रंग उनके गोरे और निखरे हुए बदन पर ऐसा लग रहा था जैसे चांदनी रात में कोई गहरा बादल छा गया हो।

साड़ी इतनी पारदर्शी थी कि उनके शरीर के उभार, उनकी कमर का घुमाव और उनके चूचियों की गोलाई साफ झलक रही थी।

ऋषभ का लंड पहले से ही ज्योति की वजह से पत्थर की तरह सख्त था, लेकिन माँ को इस रूप में देखकर उसकी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई।

उसके दिमाग में अब सिर्फ एक ही बात चल रही थी—अपनी माँ के इस काले लिबास को फाड़कर उनके बदन को अपनी बाहों में भरना।

ऋषभ ने एक पल की भी देरी नहीं की। वह तेज़ी से आगे बढ़ा और ममता को दीवार से सटा दिया।


इससे पहले कि ममता कुछ समझ पाती, ऋषभ ने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और एक जोरदार, हिंसक किस (kiss) किया।

ऋषभ ने सिर्फ किस नहीं किया, बल्कि जुनून में आकर ममता के निचले होंठ को अपने दांतों से जोर से काट लिया।

"आह्ह...!" ममता के मुँह से एक दबी हुई चीख निकली।

उस एक झटके और उस दर्द भरे सुख ने ममता के पूरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। उनके सिर से लेकर उनके पैरों तक,

और सबसे ज्यादा उनकी भीगी हुई चूत (pussy) तक एक अजीब सी झनझनाहट फैल गई। उनकी टांगें कांपने लगीं और उनका शरीर ढीला पड़ गया।

ऋषभ ने अपनी पकड़ और मजबूत की और उनके होंठों को चूसने लगा। ममता ने अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश की और धीरे से ऋषभ के सीने पर हाथ रखकर उसे थोड़ा पीछे धकेला।

उनकी आवाज़ में अभी भी वह संकोच और ममता थी, लेकिन आंखों में वासना की चमक थी।

"बे... बेटा... पहले खाना तो खा ले... मैंने तेरे लिए लंच बनाया है," ममता ने हांफते हुए कहा। उनकी सांसें तेज चल रही थीं और उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी,


जिससे उनके चूचियाँ साड़ी के अंदर जोर-जोर से हिल रहे थे।

ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी माँ की गर्दन पर अपनी नाक रगड़ते हुए उनकी खुशबू को महसूस किया।

उसने भारी और कामुक आवाज़ में कहा, "माँ... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। मेरा लंड फट जाएगा अगर मैंने अभी तुम्हें नहीं पाया। मुझे खाने की भूख नहीं है, मुझे तुम्हारी भूख है।"

ममता ने शर्माते हुए अपनी नज़रें झुकाईं, "बेटा... खाना खा लेता तो... फिर आराम से..."

लेकिन ऋषभ ने उनकी बात पूरी नहीं होने दी। उसने फिर से उनके होंठों पर हमला किया, इस बार किस और भी गहरा और लंबा था।


उसकी जीभ ममता के मुँह के अंदर घुसकर उनकी जीभ के साथ खेलने लगी। यह एक ऐसा चुंबन था जिसमें भूख, प्यास और सालों का दबा हुआ वर्जित सुख एक साथ फूट पड़ा था।

धीरे-धीरे, ममता की ममता हारने लगी और उनकी अंदर की दबी हुई जवान औरत जाग उठी। वह भी ऋषभ के इस जुनून के आगे मजबूर हो गई। उन्होंने अपनी बाहें ऋषभ की गर्दन के चारों ओर लपेट लीं और उतनी ही शिद्दत से उसे चूमने लगीं।


उनके शरीर अब एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक चुके थे। ऋषभ महसूस कर सकता था कि उसकी माँ के चूचियों के सख्त निप्पल उसकी छाती से रगड़ खा रहे थे।

ऋषभ ने अपना हाथ नीचे ले जाकर ममता की कमर को कसकर पकड़ा और उन्हें अपनी ओर और खींच लिया। उसने धीरे से फुसफुसाया, "माँ... तुम्हारी यह काली साड़ी मुझे पागल कर रही है।"

ममता ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और ऋषभ की आँखों में देखते हुए कहा, "तो फिर... उतार क्यों नहीं देते इसे?"शरमाते हुए बोली

यह सुनते ही ऋषभ का संयम पूरी तरह टूट गया। उसने एक झटके में ममता की साड़ी के पल्लू को उनके कंधे से नीचे गिरा दिया।

अब ममता के सामने सिर्फ उनकी ब्लाउज और साड़ी का निचला हिस्सा था। ऋषभ ने उनके गले से नीचे उतरते हुए उनके कंधों और कॉलर बोन को चूमना शुरू किया।

"आह्ह...रेशु... बेटा... बहुत अच्छा लग रहा है," ममता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और सिर पीछे की ओर झुका लिया।

ऋषभ ने अपने हाथ ममता के ब्लाउज के हुक की तरफ बढ़ाए। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उत्तेजना इतनी अधिक थी कि उसने फुर्ती से हुक खोल दिए।

जैसे ही ब्लाउज खुला, ममता के भारी और गोल स्तन उनके सामने आ गए। काले रंग की ब्रा ने उनके स्तनों को आधा ढका हुआ था, लेकिन उनके उभार बाहर की ओर छलक रहे थे।

ऋषभ ने बिना देर किए अपना चेहरा उनके चूचियों के बीच दबा दिया और उन्हें जोर-जोर से चूसने लगा। वह उनके निप्पल्स को अपनी जीभ से सहला रहा था और कभी-कभी उन्हें दांतों से हल्का सा काट रहा था।

"ओह्ह... आह्ह... रेशु... धीरे... बहुत तेज़ हो रहा है," ममता ने कराहते हुए कहा, लेकिन उनके हाथ ऋषभ के बालों को


और कसकर पकड़ रहे थे, जिससे पता चलता था कि उन्हें यह सब कितना पसंद आ रहा था।

ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी के कमरबंद को ढीला किया और धीरे-धीरे साड़ी को नीचे खिसकाया।


जैसे ही साड़ी नीचे गिरी, ममता के सामने सिर्फ एक छोटी सी सफेद रंग की लेस वाली पैंटी बची थी। उनके गोरे पैर और सुडौल जांघें ऋषभ की आँखों के सामने थीं।
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Pirate100

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ऋषभ जैसे ही क्लिनिक पहुँचा, वहाँ का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। बाहर मरीजों की भारी भीड़ लगी थी और लोग शोर मचा रहे थे।

ऋषभ ने राजू को कड़े लहजे में निर्देश दिया, "राजू, सबको शांत करो और एक-एक करके अंदर भेजो। कोई भी जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।"

राजू ने भीड़ को संभाला और सबसे पहले एक अधेड़ उम्र की महिला को अंदर भेजा, जिनका नाम शालिनी था। शालिनी की उम्र करीब 38-40 साल रही होगी।

वह एक घरेलू महिला थी, जिसने एक साधारण सूती साड़ी पहनी थी, लेकिन उसकी देह का उभार उसकी उम्र के बावजूद बहुत कामुक था। शालिनी पिछले कई सालों से शादीशुदा थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही थी।

वह अपनी बांझपन की समस्या को लेकर बहुत परेशान थी और ऋषभ के पास आखिरी उम्मीद लेकर आई थी।

जैसे ही शालिनी ऋषभ के सामने आई और उसने अपनी समस्या बतानी शुरू की, ऋषभ की नज़रें उसके चेहरे पर टिक गईं।


शालिनी का चेहरा, उसकी आँखों की मासूमियत और उसके बात करने का तरीका बिल्कुल उसकी माँ ममता जैसा था।

ऋषभ के दिमाग में अचानक अपनी माँ की वह ट्रांसपेरेंट पिंक साड़ी और उसकी उभरी हुई चूचियों की छवि कौंध गई। शालिनी को देखते ही ऋषभ के अंदर दबी हुई वासना ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी।

उसकी कल्पनाओं ने काम करना शुरू कर दिया। उसे शालिनी में अपनी माँ की परछाई दिखने लगी। जैसे ही उसने शालिनी की तरफ देखा, उसकी पैंट के अंदर उसका मोटा लंड एक झटके में तनकर खड़ा हो गया।

वह इतना सख्त हो गया कि पैंट का कपड़ा उसे चुभने लगा। ऋषभ की सांसें तेज हो गईं और उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख उतर आई।

ऋषभ ने अपनी आवाज़ को पेशेवर रखने की कोशिश की, लेकिन उसके शब्दों में कामुकता साफ झलक रही थी।

उसने शालिनी से कहा, "शालिनी जी, आपकी समस्या थोड़ी जटिल लग रही है। मुझे आपका गहन शारीरिक चेकअप (Physical Examination) करना पड़ेगा। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपने सारे कपड़े उतार दें और इस बेड पर लेट जाएँ।"

शालिनी थोड़ी झिझकी, उसने धीरे से कहा, "डॉक्टर साहब, क्या यह ज़रूरी है? क्या मैं सिर्फ साड़ी हटाकर नहीं लेट सकती?"

ऋषभ ने अपनी कुर्सी से उठकर उसके करीब कदम बढ़ाए। उसकी नज़रे शालिनी के सीने पर थीं। उसने धीमे लेकिन अधिकारपूर्ण स्वर में कहा, "देखिए, मैं एक स्पेशलिस्ट हूँ।


जब तक मैं आपके शरीर के हर हिस्से की जांच नहीं करूँगा, मैं सही कारण नहीं बता पाऊंगा। अगर आप माँ बनना चाहती हैं, तो आपको मुझ पर भरोसा करना होगा।"

शालिनी, जो माँ बनने की तड़प में थी, ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी का पल्लू गिराया। उसने अपनी ब्लाउज की हुक खोली और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी।

जैसे-जैसे कपड़े उतर रहे थे, ऋषभ की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। जब शालिनी पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ के सामने एक ऐसा शरीर था जो परिपक्वता और कामुकता का संगम था।


उसकी चूचियाँ भारी और गोल थीं, और उनके बीच की गहरी घाटी ऋषभ को अपनी ओर खींच रही थी।

ऋषभ ने दस्ताने पहने और शालिनी के पास गया। उसने सबसे पहले उसकी चूचियों की जांच करने का फैसला किया।


उसने अपने दोनों हाथों से शालिनी की भारी चूचियों को मजबूती से पकड़ा और उन्हें दबाने लगा।

"आह... डॉक्टर साहब..." शालिनी के मुँह से एक हल्की सी आह निकली।

ऋषभ ने उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाया और मरोड़ा, यह चेक करने के बहाने कि क्या उनमें से दूध आने के कोई संकेत हैं या हार्मोनल असंतुलन है।

लेकिन असल में, वह अपनी माँ की याद में उन चूचियों का आनंद ले रहा था। जैसे ही ऋषभ की उंगलियों ने शालिनी के गुलाबी निप्पल्स को रगड़ा, शालिनी के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई।


उसकी चूत में एक तीव्र सिहरन हुई और वह अनजाने में अपनी जाँघें फैलाने लगी।

शालिनी की चूत अब गीली होने लगी थी। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से उत्तेजित हो रही थी। ऋषभ ने देखा कि शालिनी की सांसें तेज हो गई हैं और उसका शरीर हल्का सा कांप रहा है।

ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया। उसने शालिनी की जाँघों को फैलाया और उसकी चूत के पास अपनी उंगलियाँ ले गया।

शालिनी की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, जिससे वहां एक चिपचिपा पानी जैसा पदार्थ निकल रहा था।

ऋषभ ने फुसफुसाते हुए कहा, "शालिनी जी, आपकी चूत बहुत ज्यादा उत्तेजित और गीली है। लगता है आपके शरीर में कामेच्छा बहुत अधिक है, जो शायद आपकी प्रेग्नेंसी में बाधा बन रही है।"

यह सुनकर शालिनी और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जैसे वह ऋषभ को अपनी चूत के और करीब बुला रही हो।

ऋषभ अब और नियंत्रण नहीं रख सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना खड़ा हुआ, मोटा और लाल लंड बाहर निकाल लिया।

शालिनी ने जब उस विशाल लंड को देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं। उसने कभी इतना बड़ा और सख्त लंड नहीं देखा था।


ऋषभ ने बिना समय गंवाए शालिनी के पैरों को उसके कंधों पर रख दिया और अपनी उंगलियों से उसकी चूत के छेद को सहलाने लगा।

"डॉक्टर साहब... यह आप क्या कर रहे हैं... आह..." शालिनी ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध नहीं, बल्कि एक गहरी तड़प थी।

ऋषभ ने अपनी जीभ निकाली और शालिनी की चूत के क्लिटोरिस को जोर से चाटना शुरू कर दिया।

"चप-चप-चप" की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। ऋषभ उसकी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे वह अपनी माँ की चूत को चाट रहा हो।

वह उसकी गीली गर्माहट और स्वाद का आनंद ले रहा था। शालिनी अपनी कमर को बेड पर पटकने लगी और जोर-जोर से कराहने लगी।

"ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत अच्छा लग रहा है... और जोर से चाटिए... आह!"

जब शालिनी चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी, तभी ऋषभ ने अपना मोटा लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे पूरा अंदर उतार दिया।

"आह्ह्ह्ह!" शालिनी की एक लंबी चीख निकली, लेकिन वह चीख दर्द की नहीं, बल्कि एक असीम सुख की थी।


ऋषभ का मोटा लंड उसकी तंग चूत को फाड़ता हुआ अंदर तक चला गया था।

ऋषभ ने अब अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज़ आने लगी।

वह पूरी ताकत से शालिनी की चूत में अपना लंड ठोक रहा था। हर धक्के के साथ शालिनी की भारी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं।

ऋषभ ने एक हाथ से उसकी चूचियों को जोर से दबाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।

"तुम बिल्कुल मेरी ममता जैसी लग रही हो... तुम्हारी चूत बहुत तंग और गर्म है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।

शालिनी अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह ऋषभ के लंड को अपनी चूत की दीवारों से जकड़ने लगी।


वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "हाँ... मुझे भर दो... मुझे अपने बीज से भर दो डॉक्टर... मुझे प्रेग्नेंट कर दो!"

ऋषभ की रफ्तार और बढ़ गई। वह पागलों की तरह शालिनी की चूत में अपना लंड उतार रहा था।

उसकी चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।

उसने आखिरी के कुछ धक्के बहुत जोर से मारे और शालिनी की चूत की गहराई में अपना लंड पूरी तरह धंसा दिया।

एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ का गर्म और गाढ़ा वीर्य शालिनी की चूत के अंदर फुहारों की तरह छूटने लगा।

"आह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना पूरा लोड शालिनी के गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।

शालिनी भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को कसकर जकड़ लिया।

काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी सांसें तेज थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे शालिनी की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।

ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और शालिनी से कहा, "अब आप कपड़े पहन लीजिए। मैंने आपकी समस्या का 'इलाज' कर दिया है। अब उम्मीद है कि आप जल्द ही प्रेग्नेंट हो जाएंगी।"

शालिनी ने एक मदहोश मुस्कान के साथ ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह संतुष्ट थी। वह धीरे से उठी, अपने कपड़े पहने और ऋषभ को एक कामुक नज़र देकर क्लिनिक से बाहर चली गई।

ऋषभ ने एक गहरी सांस ली और अपने मन को शांत करने की कोशिश की। शालिनी के साथ जो कुछ भी हुआ था,


उसने उसके शरीर में कामुकता का एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था।

उसके लंड में अभी भी हल्की सी झनझनाहट थी और दिमाग में शालिनी की उन भारी चूचियों और गीली चूत की यादें घूम रही थीं।

लेकिन क्लिनिक में भीड़ बहुत थी, इसलिए उसने खुद को संभाला और तुरंत बेल बजाई।

अगला मरीज एक 54 साल का व्यक्ति था, जो काफी उदास और परेशान दिख रहा था। उसने अपनी समस्या बताई—उसे 'इरेक्टाइल डिस्फंक्शन' (Erectile Dysfunction) की समस्या थी।


वह बता रहा था कि अब उसका लंड उत्तेजित नहीं होता और वह अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा है।

ऋषभ ने पेशेवर अंदाज में उसकी बात सुनी, उसे कुछ कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) समझाईं और कुछ दवाइयां लिखकर दे दीं। वह आदमी राहत की सांस लेकर बाहर चला गया।

उसके बाद एक और पुरुष आया, जिसे 'हाइड्रोसील' (Hydrocele) की समस्या थी। उसके अंडकोष में सूजन थी। ऋषभ ने उसकी जांच की और उसे सटीक निदान के लिए स्क्रोटम के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के लिए बाहर भेज दिया।

अब ऋषभ की बारी थी उस मरीज को बुलाने की जिसका नंबर अगला था। जैसे ही उसने बेल बजाई, अंदर एक 23 साल की युवती दाखिल हुई।

उसका नाम रिया था। वह बहुत ही सुंदर, छरहरी काया वाली और मासूम दिखने वाली लड़की थी। उसने एक टाइट फिटिंग वाली कुर्ती और लेगिंग्स पहनी हुई थी,


जिससे उसके शरीर के कर्व्स साफ झलक रहे थे। उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी और वह अपनी नजरें नीचे झुकाए हुए थी।

रिया ने धीमी आवाज में कहा, "डॉक्टर साहब... मेरे पीरियड्स पिछले दो महीने से मिस हो गए हैं। मैं बहुत डरी हुई हूँ।"

ऋषभ ने उसकी ओर देखा। उसकी उम्र, उसकी मासूमियत और वह घबराहट... ऋषभ के अंदर का शिकारी जाग उठा।


उसने रिया की आंखों में देखा, जो डर और शर्म से झुकी हुई थीं। ऋषभ एक अनुभवी डॉक्टर था, वह समझ गया कि यह कोई हार्मोनल समस्या नहीं, बल्कि कुछ और है।

ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर पीछे झुकते हुए एक कामुक मुस्कान के साथ कहा, "रिया, पीरियड्स मिस होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम कारण प्रेग्नेंसी है।

मुझे तुम्हारा गहन चेकअप करना होगा ताकि मैं पक्का कर सकूँ कि अंदर क्या चल रहा है।"

रिया ने धीरे से सिर हिलाया, लेकिन वह अभी भी झिझक रही थी। ऋषभ ने अपनी आवाज को थोड़ा सख्त और अधिकारपूर्ण बनाया, "देखो रिया, अगर तुम चाहती हो कि समस्या का सही समाधान निकले, तो तुम्हें मेरी बात माननी होगी। चलो, अपने सारे कपड़े उतारो और इस बेड पर लेट जाओ।"

रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने धीरे से पूछा, "क्या... क्या पूरे कपड़े उतारना ज़रूरी है, डॉक्टर साहब?"

ऋषभ ने अपनी नजरें उसकी टाइट कुर्ती के नीचे उभरी हुई छोटी लेकिन सख्त चूचियों पर टिका दीं।

उसने कहा, "हाँ, बिल्कुल। मुझे पेट के निचले हिस्से और चूत की जांच करनी होगी। बिना कपड़ों के जांच करना मेडिकल प्रोटोकॉल है। डरो मत, मैं सिर्फ एक डॉक्टर हूँ।"

रिया ने धीरे-धीरे अपनी कुर्ती उतारी। उसके नीचे एक पतला सा ब्रा था, जो उसकी गोरी त्वचा को और भी उभार रहा था।

फिर उसने अपनी लेगिंग्स और अंडरवियर भी उतार दिए। जब वह पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ की सांसें तेज हो गईं।

रिया का शरीर एकदम तराशा हुआ था। उसकी त्वचा मखमली और सफेद थी, और उसकी चूत के ऊपर के बाल बहुत ही सलीके से ट्रिम किए हुए थे।

ऋषभ ने मन ही मन सोचा, 'इस मासूम लड़की को किसी ने अच्छे से चोदा होगा, तभी तो यह इतनी डरी हुई है। अब जब यह मेरे पास आई है, तो थोड़ा मजा मैं भी लूँगा।'

ऋषभ ने दस्ताने पहने और रिया के पास गया। उसने सबसे पहले उसके पेट को दबाकर चेक करना शुरू किया। जैसे ही ऋषभ की उंगलियां उसके पेट के निचले हिस्से पर घूमीं, रिया ने एक हल्की सी आह भरी।

ऋषभ ने धीरे से पूछा, "रिया, क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? क्या तुमने हाल ही में असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं?"

रिया ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा, "जी... डॉक्टर साहब..."

ऋषभ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। उसने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और रिया की जाँघों को धीरे से फैलाया।

उसकी चूत गुलाबी और बेहद नाजुक दिख रही थी। ऋषभ ने अपनी उंगली उसकी चूत के मुहाने पर रखी और धीरे से अंदर धकेलने की कोशिश की।

"आह्ह्ह..." रिया के मुँह से एक कराह निकली।

ऋषभ ने महसूस किया कि रिया की चूत अंदर से गर्म और हल्की गीली थी। उसने अपनी उंगली को थोड़ा और अंदर डाला और उसकी दीवारों को सहलाने लगा।


वह यह चेक करने का नाटक कर रहा था कि गर्भाशय का मुँह कैसा है, लेकिन असल में वह रिया की कामुकता को जगा रहा था।

"तुम्हारी चूत बहुत तंग है, रिया। लगता है तुम बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही हो," ऋषभ ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया।

रिया की सांसें अब तेज होने लगी थीं। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से डर रही थी, लेकिन साथ ही उसे एक अजीब सा सुख भी मिल रहा था।

उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जो ऋषभ के लिए एक खुला निमंत्रण था।

ऋषभ अब और इंतजार नहीं कर सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना वह विशाल, सख्त और लाल लंड बाहर निकाल लिया, जो शालिनी के बाद अब रिया के लिए तड़प रहा था।

जब रिया ने उस भीमकाय लंड को देखा, तो वह दंग रह गई। उसने कभी इतना बड़ा अंग नहीं देखा था।

ऋषभ ने बिना किसी देरी के रिया के दोनों पैरों को पकड़कर उसके कंधों तक फैला दिया। उसने अपने लंड की नोक को रिया की गीली चूत के छेद पर रगड़ा।

"डॉक्टर साहब... यह... यह गलत है... प्लीज..." रिया ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज में कोई ताकत नहीं थी। उसकी चूत से अब पानी रिसने लगा था।

ऋषभ ने एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड रिया की तंग चूत के अंदर उतार दिया।

"आह्ह्ह्ह्ह!" रिया की एक तीखी चीख निकली। उसकी चूत इतनी तंग थी कि ऋषभ को ऐसा लगा जैसे वह किसी गर्म मखमल के अंदर घुस गया हो। लंड के अंदर जाते ही रिया की चूत ने उसे कसकर जकड़ लिया।

ऋषभ ने अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज क्लिनिक के कमरे में गूंजने लगी।


वह पूरी ताकत से रिया की मासूम चूत को फाड़ रहा था। हर धक्के के साथ रिया का शरीर बेड पर ऊपर-नीचे उछल रहा था।

ऋषभ ने एक हाथ से उसकी छोटी चूचियों को जोर से मरोड़ा और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।

"तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने तुम्हें ठीक से नहीं चोदा होगा, तभी तुम यहाँ आई हो। देखो, मेरा लंड तुम्हारी चूत के हर कोने को छू रहा है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।

रिया अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह अपनी आँखें बंद करके कराहने लगी, "ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत गहरा जा रहा है... आह... मुझे और जोर से चोदिए... मुझे खत्म कर दीजिए!"

ऋषभ की रफ्तार अब पागलों जैसी हो गई थी। वह रिया की चूत में अपना लंड ऐसे ठोक रहा था जैसे वह कोई मशीन हो।


रिया की चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।

उसने रिया की जाँघों को और कसकर पकड़ लिया और आखिरी के कुछ धक्के इतनी जोर से मारे कि रिया की चीखें कमरे की दीवारों से टकराने लगीं।

एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ ने अपना पूरा लोड रिया की चूत की गहराई में, उसके गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।

"आह्ह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और गर्म वीर्य की फुहारों ने रिया के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह भर दिया।

रिया भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि ऋषभ को एक पल के लिए लगा कि वह वहीं फंस गया है।

काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी भारी सांसें कमरे की खामोशी को तोड़ रही थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे रिया की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।

ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और रिया से कहा, "अब तुम कपड़े पहन सकती हो। मैंने तुम्हारा 'चेकअप' पूरा कर लिया है। अब तुम्हें पता चल गया होगा कि असली इलाज क्या होता है।"

रिया ने एक मदहोश और संतुष्ट नजर से ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह से खाली हो चुकी थी।

इसके बाद रिया को अबॉर्शन पिल दे दिया

उसने धीरे से अपने कपड़े पहने और एक धीमी मुस्कान के साथ क्लिनिक से बाहर चली गई।

ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर बैठकर एक लंबी सांस ली। आज उसने दो अलग-अलग उम्र की महिलाओं की कामुकता का आनंद लिया था,


लेकिन उसके अंदर की असली आग अभी भी जल रही थी। शालिनी और रिया सिर्फ एक जरिया थे, उसकी असली मंजिल तो उसकी माँ ममता थी।

वह अब बस उस पल का इंतजार कर रहा था जब वह अपनी माँ को पूरी तरह से अपने वश में कर लेगा और उसे अपनी वासना की आग में जलाकर राख कर देगा।
Story acchi chal rahi thi lekin apne bina wajah ke patients ke sath sex dikha diya, jis ki ke bilkul bhi jaroorat nhi thi. Ab ye story Incest story nahi rahi. Ye sirf mera opinion hai, aap story apne hisab se aage badha sakte hain. 🙏
 

gaushjsjjsija

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भाई आपसे एक रिक्वेस्ट है इसमें कारण को भी ऐड कर लो बहुत मजा आएगा स्टोरी सुपर डुपर हिट होगी आपकी
 
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