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Incest माँ बेटा इक दूजे के सहारे (completed)

Ting ting

Ting Ting
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“....ओह्ह्ह्हह...ओह....” माँ के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे .

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी माँ के स्तन पर पहुँच गया .
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यहाँ पर अभी भी माँ के हाथ थे . मेरा चेहरा जैसे ही माँ के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है . मैं फिर से माँ के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था .
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माँ मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी .

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी माँ अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी .

तकरीबन दस सालो के बाद माँ ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा माँ को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके बेटे ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी माँ पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.

हम दोनों माँ बेटे की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी माँ के चेहरे की और बढ़ता हु .

माँ भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है . मेरा चेहरा सीधा अपनी माँ के चेहरे पर झुक जाता है

और हमदोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं . दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे . कभी माँ मेरे तो कभी मैं माँ के होंठों को चूस रहा था .
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उधर माँ को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है .

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है .
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माँ की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है . मैं अपना मुंह खोल देता हु और माँ की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है .

माँ मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है .

मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.

“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” माँ मेरे मुंह में सिसकने लगी और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगी.

मैं यह समझकर कि माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता हु और फिर हम दोनों एकदम से सिसक उठते हैं .

माँ योनि दरार में लण्ड के एहसास को पाकर ठिठक गई थी वो मेरे चेहरे की और देखती है मैं उसी की और देख रहा था मैं सोच मैं पड गया इतनी छोटी योनि में मेरा लण्ड कैसे जाएगा जो ना सिर्फ नौ इंचलम्बा था बल्कि चार इंच मोटा भी था और उनका आगे का टोपा बहोत बडा किसी जंगली आलू की तरह.
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वह इस संकरी जगह में कैसे जाएगा.

माँ को बहोत दर्द होगा क्या वह झेल पाएगी मैं अपनी माँ को कोई दर्द नही देना चाहता. अब मैं गहरे सोच मैं पड़ गया

माँ ने मेरी तरफ देखा मुझे किसी सोच में पड़ा देखकर मुझे हिलाकर नजरोसे कहा

“क्या हुआ”?

मैने उन्हें सब बताया तब वह हस पड़ी और उन्होंने कहा

“बेटा कुछ नही होता तुम कुछ मत सोचो , जो होता है वह हो जाने दो ”

पर मैन कहा “आपको बहुत दर्द होगा कैसे सह पाओगी तुम”

तब माँ ने कहा “हर औरत यही चाहती है की उनका प्यार करने वाला उसे बहोत सारा प्यार करे, हर नारी को यह दर्द सहना ही पड़ता है, जीवन मे सिर्फ एक बार, हालाँकि मैं तुम्हारी माँ हूँ और बहुत बार तुम्हारे पापा के साथ सेक्स कर चुकी हूँ, पर ठीक है की अब मुझे किसी मर्द के साथ यह सब किये १० साल हो चुके हैं, पर मैं खीरा या मूली आदि से अपना काम चला ही लेती थी तो मुझे अभी भी आदत है. कुछ नहीं होगा इसलिए तुम कोई चिंता मत करो ”

मैंने उनकी और देखा तो माँ धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे मेरे किसी सवाल का जवाब दे रही हो .

मैं माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ गया

जब मैं ने माँ की जाँघो पर किस करना शुरू किया तब धीरे धीरे माँ अपने पैर को अलग कर रही थी.
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जैसे मैं उपर जाता वैसे उनके पैर एक दूसरे से अलग हो रहे थे.

अब माँ की योनि मेरे सामने थी. माँ की स्मॉल योनि जिसके लिप्स अंदर की तरफ थे सिर्फ एक लकीर दिख रही थी किसी छोटी बच्ची की योनि की तरह थी बिना बालो की गुलाबी रंगत लिए हुये

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मैंने उँगलिसे लिप्स अलग करके देख तो अंदर से पूरी लाल थी मानो अंदर लिपस्टिक लगाई हो बहोत छोटा सा होल था इसमें मेरा इतना बड़ा लिंग कैसे जाएगा मेरा लिंग तो पूरी तबाही मचाएगा

माँ की योनि पूरी गीली हो चुकी थी. माँ की योनि चमक रही थी.
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वो चमक मेरे आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

...मैं तो आँखो से माँ की चुदाई करने लगा.

माँ की योनि गीली थी

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जिस से मुझे पहले माँ की योनि को साफ करना था .

मैं ने अपनी जीभ से माँ की योनि को साफ करना शुरू किया.

जब भी मैं माँ के किसी पार्ट को अपने जीभ से टच करता तब मुझे क्या हो जाता

मैं अपने होश खो बैठता. मुझे ऐसा लगता कि इस दुनिया मे माँ और मैं,सिर्फ़ हम दोनो ही हो ,जो सिर्फ़ प्यार करना जानते है.

मैं अपनी जीभ से माँ की योनि चाटने लगा. माँ बस एक काम कर रही थी वो था सिसकिया लेना .
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एक पत्नी जैसे सुहागरात के दिन अपने पति के साथ चुदाई करते हुए शरमा कर खुल कर सिसकिया नही लेती उसी तरह माँ भी मुझसे शरमा कर सिसकारियों पर कंट्रोल रख रही थी.

पर जो भी था उसमे मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.

माँ की बिना बालो वाली गुलाबी योनि अब मैं ने चाट कर साफ कर दी थी.

फिर मैं ने अपनी जीभ को माँ की योनि मे डाल कर माँ को भी आनंद देने लगा. माँ भी अपना पानी छोड़ कर मेरी प्यास बुज़ा रही थी.

मैं ने हाथो से माँ की योनि के होंठ खोल दिए.
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फिर मैं आराम से अपनी जीभ माँ की योनि मे डाल कर चाटने लगा खेलने लगा .

माँ की योनि मे मैं जितनी ज़ोर से अपनी जीभ अंदर डालता उतनी ज़ोर से माँ की योनि जीभ को बाहर फेक देती .

जैसे कह रही थी कि मुझे जीभ नही तुम्हारा लण्ड चाहिए. देना है तो लण्ड दो जीभ से मेरा क्या होगा.

जीभ से तो मेरी आग भड़क जाएगी. पर मैं भी कहा हार मानने वाला था ,मैं ने भी उसकी योनि मे जीभ डालना जारी रखा.
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उसकी टाइट योनि मेरी जीभ को बाहर धकेल देती इस खेल मे मुझे अपना ही आनंद मिल रहा था. साथ मे माँ को भी.

माँ इतनी गरम हो चुकी थी की उसको कुछ भी करना बर्दास्त नही हो रहा था .

फिर ज़्यादा देर करना ठीक नही होता.

मैं ने माँ को आँखो खोलने के लिए कहा . उसने आँखो खोल दी.मैं ने लण्ड को माँ के हाथो मे दिया.

माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर लण्ड की तरफ . फिर लण्ड पे एक किस कर के लण्ड को छोड़ दिया और गर्दन हिला दी.
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मतलब अब बस एक काम बाकी था. वो था ...ढेर सारी चुदाई

फिर मैं ने माँ के नितम्बो के नीचे पिल्लो रख दिया.

फिर मैं माँ के टाँगो के बीच मे आ गया.

मैं ने लण्ड पे थूक लगा दी. और लण्ड को योनि पर रख दिया. मेरा लण्ड माँ की योनि को प्यार करना चाहता था.
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उसको फील करना चाहता था. मैं ने लण्ड वैसे ही रहने दिया . लण्ड और योनि का मिलन होने वाला था.

उस मिलन मे दर्द होने वाला था पर मेरा लण्ड योनि को दर्द देने से पहले उसको प्यार कर रहा था.

दर्द से पहले प्यार...
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मुझे कुछ ना करते हुए देख कर माँ ने आँखें खोल कर मुझे आगे बढ़ने को कहा.

इसका मतलब था की मेरे जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आ गया था जिस की मैं न जाने कब से इन्तजार कर रहा था.

मैं ने फिर से लण्ड पर थूक लगाया और लण्ड को योनि पर रखा .

और माँ के उपर आ गया.
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sunoanuj

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बहुत ही अच्छा अपडेट है ! सुपर डुपर हिट अपडेट है!
 

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मैं हँसते हुए माँ से बोला "माँ। जिस की माँ तुम्हारे जितनी सुन्दर हो उस का बेटा तो अपने आप अकलमंद हो ही जायेगा. "

माँ खुश हो गयी।

मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा

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और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। माँ मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. माँ को बहुत सालों के बाद इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो माँ उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से ‘अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह… आआआ..’ की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।
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उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
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अब मुझे एहसास हो गया कि माँ को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर माँ ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए ‘ओह.. शिइ… इइइइ.. शीईईई..’ की सीत्कार के साथ ‘अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..’ करने लगी।

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह ह्ह..’ छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली- बेटा ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है..
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मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा. .. जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।

‘अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ… शहअह…’ की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब माँ की चूत में डाल दी।
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इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब माँ झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ताकि छेद भी थोड़ा और फ़ैल जाए।
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इस अवस्था में इसे दर्द भी महसूस नहीं होगा.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब माँ के मुँह से भी ‘गु.. गगगग गु.. आह्ह..’ की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
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मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

माँ को शायद थोड़ा दर्द हुआ , जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी ‘अह्ह ह्ह्ह्ह..’ की चीख निकल गई।

सच कहूँ , हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी हम आपस में जब मिलते हैं तो इस बात को याद करते ही एक्साइटेड हो जाते हैं मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए ‘अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..’ के साथ ही झड़ गई। माँ का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। माँ की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि माँ के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का माँ का यह पहला अनुभव था..
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मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच माँ की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..’ के साथ चहकते हुए स्वर में बोली- बेटा.. मुझे जिंदगी में पहली बार चुसवाने में इतना मजा आया है. .. मुझे तो तूने फुल टाइट कर दिया"

तो मैं बोला- माँ तुम्हारा डिस्चार्ज हो गया है और मेरा अभी नहीं हुआ है और असली मज़ा डिस्चार्ज होने के बाद ही आता है। प्लीज जल्दी से मेरा लौड़ा चूसो ताकि मेरा भी रस निकल सके.
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उसने झट से बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर बोली- अच्छा.. और मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।
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हाय .. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी माँ मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे .. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से ‘उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..’ की आवाजें आने लगीं।
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इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने माँ को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
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हम दोनों माँ बेटा अपने पहले सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे. तो मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा- अरे माँ तुम तो बहुत माहिर हो लण्ड चूसने में… कहाँ से सीखा?

तो बोली- और कहाँ से सीखूँगी… तुम्हारे पिता भी तुम्हारे तरह ही लण्ड चुसवाने के शौकीन थे. उन्ही से सब सीखा है. !

तो मैं बोला- माँ आप को मेरा आप की चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा. ?

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो… मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया… पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी।

तो मैं बोला- फिर अभी क्यों किया?

माँ बोली - बेटा तुम्हारे पापा का लौड़ा काफी बड़ा था पर तुम्हारा लौड़ा तो उन से काफी बड़ा है. कम से कम तुम उनसे २-३ इंच लम्बे हो. पर असली चीज है तुम्हारे लण्ड की मोटाई। तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे पापा से बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा.
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मैंने कहा _ माँ तुम्हे लौड़ा चूसने में ज्यादा मजा आया या चूत चटवाने में ?

वो बोली- बेटा मुझे दोनों में मजा आया. पर एक बात बोलूं. तुम्हारा लौड़ा ही तुम्हारे पापा से बड़ा नहीं है. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुम्हारे पापा मेरी चूत चाटते तो थे पर थोड़ा सा ही. असल में उन्हें चूत चाटना अच्छा नहीं लगता था. पर तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!

मैंने बोला- अच्छा अगर मैं इसी तरह तुम्हें मज़ा देता रहा तो क्या तुम भी मुझे मज़े देती रहोगी?

वो बोली- यह बाद की बात है पर तुमने अपने आखिर में तो मेरे मुंह में इतने जोर से धक्के मरे की सच में मेरे गले में दर्द होने लगा था!

मैंने बोला- अच्छा, अब आगे से ध्यान रखूँगा पर तुम्हें बता दूँ कि आने वाले दिनों में मैं बहुत कुछ देने वाला हूँ।

वो बोली- और क्या?

तब मैंने बोला- यह तो सिर्फ शुरुआत है, और अभी सब बता कर मज़ा नहीं खराब करना चाहता, बस देखती जाओ कि आगे आगे होता है क्या?

कहते हुए मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,
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सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब माँ की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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मैं हँसते हुए माँ से बोला "माँ। जिस की माँ तुम्हारे जितनी सुन्दर हो उस का बेटा तो अपने आप अकलमंद हो ही जायेगा. "

माँ खुश हो गयी।

मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा

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और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। माँ मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. माँ को बहुत सालों के बाद इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो माँ उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से ‘अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह… आआआ..’ की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।
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उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
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अब मुझे एहसास हो गया कि माँ को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर माँ ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए ‘ओह.. शिइ… इइइइ.. शीईईई..’ की सीत्कार के साथ ‘अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..’ करने लगी।

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह ह्ह..’ छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली- बेटा ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है..
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मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा. .. जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।

‘अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ… शहअह…’ की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब माँ की चूत में डाल दी।
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इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब माँ झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ताकि छेद भी थोड़ा और फ़ैल जाए।
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इस अवस्था में इसे दर्द भी महसूस नहीं होगा.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब माँ के मुँह से भी ‘गु.. गगगग गु.. आह्ह..’ की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
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मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

माँ को शायद थोड़ा दर्द हुआ , जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी ‘अह्ह ह्ह्ह्ह..’ की चीख निकल गई।

सच कहूँ , हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी हम आपस में जब मिलते हैं तो इस बात को याद करते ही एक्साइटेड हो जाते हैं मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए ‘अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..’ के साथ ही झड़ गई। माँ का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। माँ की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि माँ के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का माँ का यह पहला अनुभव था..
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मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच माँ की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..’ के साथ चहकते हुए स्वर में बोली- बेटा.. मुझे जिंदगी में पहली बार चुसवाने में इतना मजा आया है. .. मुझे तो तूने फुल टाइट कर दिया"

तो मैं बोला- माँ तुम्हारा डिस्चार्ज हो गया है और मेरा अभी नहीं हुआ है और असली मज़ा डिस्चार्ज होने के बाद ही आता है। प्लीज जल्दी से मेरा लौड़ा चूसो ताकि मेरा भी रस निकल सके.
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उसने झट से बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर बोली- अच्छा.. और मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।
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हाय .. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी माँ मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे .. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से ‘उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..’ की आवाजें आने लगीं।
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इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने माँ को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
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हम दोनों माँ बेटा अपने पहले सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे. तो मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा- अरे माँ तुम तो बहुत माहिर हो लण्ड चूसने में… कहाँ से सीखा?

तो बोली- और कहाँ से सीखूँगी… तुम्हारे पिता भी तुम्हारे तरह ही लण्ड चुसवाने के शौकीन थे. उन्ही से सब सीखा है. !

तो मैं बोला- माँ आप को मेरा आप की चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा. ?

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो… मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया… पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी।

तो मैं बोला- फिर अभी क्यों किया?

माँ बोली - बेटा तुम्हारे पापा का लौड़ा काफी बड़ा था पर तुम्हारा लौड़ा तो उन से काफी बड़ा है. कम से कम तुम उनसे २-३ इंच लम्बे हो. पर असली चीज है तुम्हारे लण्ड की मोटाई। तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे पापा से बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा.
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मैंने कहा _ माँ तुम्हे लौड़ा चूसने में ज्यादा मजा आया या चूत चटवाने में ?

वो बोली- बेटा मुझे दोनों में मजा आया. पर एक बात बोलूं. तुम्हारा लौड़ा ही तुम्हारे पापा से बड़ा नहीं है. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुम्हारे पापा मेरी चूत चाटते तो थे पर थोड़ा सा ही. असल में उन्हें चूत चाटना अच्छा नहीं लगता था. पर तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!

मैंने बोला- अच्छा अगर मैं इसी तरह तुम्हें मज़ा देता रहा तो क्या तुम भी मुझे मज़े देती रहोगी?

वो बोली- यह बाद की बात है पर तुमने अपने आखिर में तो मेरे मुंह में इतने जोर से धक्के मरे की सच में मेरे गले में दर्द होने लगा था!

मैंने बोला- अच्छा, अब आगे से ध्यान रखूँगा पर तुम्हें बता दूँ कि आने वाले दिनों में मैं बहुत कुछ देने वाला हूँ।

वो बोली- और क्या?

तब मैंने बोला- यह तो सिर्फ शुरुआत है, और अभी सब बता कर मज़ा नहीं खराब करना चाहता, बस देखती जाओ कि आगे आगे होता है क्या?

कहते हुए मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,
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सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब माँ की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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मैं हँसते हुए माँ से बोला "माँ। जिस की माँ तुम्हारे जितनी सुन्दर हो उस का बेटा तो अपने आप अकलमंद हो ही जायेगा. "

माँ खुश हो गयी।

मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा

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और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। माँ मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. माँ को बहुत सालों के बाद इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो माँ उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से ‘अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह… आआआ..’ की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।
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उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
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अब मुझे एहसास हो गया कि माँ को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर माँ ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए ‘ओह.. शिइ… इइइइ.. शीईईई..’ की सीत्कार के साथ ‘अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..’ करने लगी।

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह ह्ह..’ छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली- बेटा ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है..
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मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा. .. जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।

‘अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ… शहअह…’ की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब माँ की चूत में डाल दी।
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इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब माँ झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ताकि छेद भी थोड़ा और फ़ैल जाए।
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इस अवस्था में इसे दर्द भी महसूस नहीं होगा.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब माँ के मुँह से भी ‘गु.. गगगग गु.. आह्ह..’ की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
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मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

माँ को शायद थोड़ा दर्द हुआ , जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी ‘अह्ह ह्ह्ह्ह..’ की चीख निकल गई।

सच कहूँ , हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी हम आपस में जब मिलते हैं तो इस बात को याद करते ही एक्साइटेड हो जाते हैं मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए ‘अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..’ के साथ ही झड़ गई। माँ का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। माँ की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि माँ के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का माँ का यह पहला अनुभव था..
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मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच माँ की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..’ के साथ चहकते हुए स्वर में बोली- बेटा.. मुझे जिंदगी में पहली बार चुसवाने में इतना मजा आया है. .. मुझे तो तूने फुल टाइट कर दिया"

तो मैं बोला- माँ तुम्हारा डिस्चार्ज हो गया है और मेरा अभी नहीं हुआ है और असली मज़ा डिस्चार्ज होने के बाद ही आता है। प्लीज जल्दी से मेरा लौड़ा चूसो ताकि मेरा भी रस निकल सके.
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उसने झट से बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर बोली- अच्छा.. और मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।
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हाय .. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी माँ मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे .. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से ‘उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..’ की आवाजें आने लगीं।
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इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने माँ को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
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हम दोनों माँ बेटा अपने पहले सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे. तो मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा- अरे माँ तुम तो बहुत माहिर हो लण्ड चूसने में… कहाँ से सीखा?

तो बोली- और कहाँ से सीखूँगी… तुम्हारे पिता भी तुम्हारे तरह ही लण्ड चुसवाने के शौकीन थे. उन्ही से सब सीखा है. !

तो मैं बोला- माँ आप को मेरा आप की चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा. ?

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो… मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया… पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी।

तो मैं बोला- फिर अभी क्यों किया?

माँ बोली - बेटा तुम्हारे पापा का लौड़ा काफी बड़ा था पर तुम्हारा लौड़ा तो उन से काफी बड़ा है. कम से कम तुम उनसे २-३ इंच लम्बे हो. पर असली चीज है तुम्हारे लण्ड की मोटाई। तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे पापा से बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा.
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मैंने कहा _ माँ तुम्हे लौड़ा चूसने में ज्यादा मजा आया या चूत चटवाने में ?

वो बोली- बेटा मुझे दोनों में मजा आया. पर एक बात बोलूं. तुम्हारा लौड़ा ही तुम्हारे पापा से बड़ा नहीं है. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुम्हारे पापा मेरी चूत चाटते तो थे पर थोड़ा सा ही. असल में उन्हें चूत चाटना अच्छा नहीं लगता था. पर तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!

मैंने बोला- अच्छा अगर मैं इसी तरह तुम्हें मज़ा देता रहा तो क्या तुम भी मुझे मज़े देती रहोगी?

वो बोली- यह बाद की बात है पर तुमने अपने आखिर में तो मेरे मुंह में इतने जोर से धक्के मरे की सच में मेरे गले में दर्द होने लगा था!

मैंने बोला- अच्छा, अब आगे से ध्यान रखूँगा पर तुम्हें बता दूँ कि आने वाले दिनों में मैं बहुत कुछ देने वाला हूँ।

वो बोली- और क्या?

तब मैंने बोला- यह तो सिर्फ शुरुआत है, और अभी सब बता कर मज़ा नहीं खराब करना चाहता, बस देखती जाओ कि आगे आगे होता है क्या?

कहते हुए मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,
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सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब माँ की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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“....ओह्ह्ह्हह...ओह....” माँ के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे .

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी माँ के स्तन पर पहुँच गया .
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यहाँ पर अभी भी माँ के हाथ थे . मेरा चेहरा जैसे ही माँ के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है . मैं फिर से माँ के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था .
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माँ मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी .

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी माँ अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी .

तकरीबन दस सालो के बाद माँ ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा माँ को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके बेटे ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी माँ पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.

हम दोनों माँ बेटे की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी माँ के चेहरे की और बढ़ता हु .

माँ भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है . मेरा चेहरा सीधा अपनी माँ के चेहरे पर झुक जाता है

और हमदोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं . दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे . कभी माँ मेरे तो कभी मैं माँ के होंठों को चूस रहा था .
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उधर माँ को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है .

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है .
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माँ की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है . मैं अपना मुंह खोल देता हु और माँ की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है .

माँ मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है .

मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.

“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” माँ मेरे मुंह में सिसकने लगी और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगी.

मैं यह समझकर कि माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता हु और फिर हम दोनों एकदम से सिसक उठते हैं .

माँ योनि दरार में लण्ड के एहसास को पाकर ठिठक गई थी वो मेरे चेहरे की और देखती है मैं उसी की और देख रहा था मैं सोच मैं पड गया इतनी छोटी योनि में मेरा लण्ड कैसे जाएगा जो ना सिर्फ नौ इंचलम्बा था बल्कि चार इंच मोटा भी था और उनका आगे का टोपा बहोत बडा किसी जंगली आलू की तरह.
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वह इस संकरी जगह में कैसे जाएगा.

माँ को बहोत दर्द होगा क्या वह झेल पाएगी मैं अपनी माँ को कोई दर्द नही देना चाहता. अब मैं गहरे सोच मैं पड़ गया

माँ ने मेरी तरफ देखा मुझे किसी सोच में पड़ा देखकर मुझे हिलाकर नजरोसे कहा

“क्या हुआ”?

मैने उन्हें सब बताया तब वह हस पड़ी और उन्होंने कहा

“बेटा कुछ नही होता तुम कुछ मत सोचो , जो होता है वह हो जाने दो ”

पर मैन कहा “आपको बहुत दर्द होगा कैसे सह पाओगी तुम”

तब माँ ने कहा “हर औरत यही चाहती है की उनका प्यार करने वाला उसे बहोत सारा प्यार करे, हर नारी को यह दर्द सहना ही पड़ता है, जीवन मे सिर्फ एक बार, हालाँकि मैं तुम्हारी माँ हूँ और बहुत बार तुम्हारे पापा के साथ सेक्स कर चुकी हूँ, पर ठीक है की अब मुझे किसी मर्द के साथ यह सब किये १० साल हो चुके हैं, पर मैं खीरा या मूली आदि से अपना काम चला ही लेती थी तो मुझे अभी भी आदत है. कुछ नहीं होगा इसलिए तुम कोई चिंता मत करो ”

मैंने उनकी और देखा तो माँ धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे मेरे किसी सवाल का जवाब दे रही हो .

मैं माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ गया

जब मैं ने माँ की जाँघो पर किस करना शुरू किया तब धीरे धीरे माँ अपने पैर को अलग कर रही थी.
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जैसे मैं उपर जाता वैसे उनके पैर एक दूसरे से अलग हो रहे थे.

अब माँ की योनि मेरे सामने थी. माँ की स्मॉल योनि जिसके लिप्स अंदर की तरफ थे सिर्फ एक लकीर दिख रही थी किसी छोटी बच्ची की योनि की तरह थी बिना बालो की गुलाबी रंगत लिए हुये

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मैंने उँगलिसे लिप्स अलग करके देख तो अंदर से पूरी लाल थी मानो अंदर लिपस्टिक लगाई हो बहोत छोटा सा होल था इसमें मेरा इतना बड़ा लिंग कैसे जाएगा मेरा लिंग तो पूरी तबाही मचाएगा

माँ की योनि पूरी गीली हो चुकी थी. माँ की योनि चमक रही थी.
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वो चमक मेरे आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

...मैं तो आँखो से माँ की चुदाई करने लगा.

माँ की योनि गीली थी

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जिस से मुझे पहले माँ की योनि को साफ करना था .

मैं ने अपनी जीभ से माँ की योनि को साफ करना शुरू किया.

जब भी मैं माँ के किसी पार्ट को अपने जीभ से टच करता तब मुझे क्या हो जाता

मैं अपने होश खो बैठता. मुझे ऐसा लगता कि इस दुनिया मे माँ और मैं,सिर्फ़ हम दोनो ही हो ,जो सिर्फ़ प्यार करना जानते है.

मैं अपनी जीभ से माँ की योनि चाटने लगा. माँ बस एक काम कर रही थी वो था सिसकिया लेना .
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एक पत्नी जैसे सुहागरात के दिन अपने पति के साथ चुदाई करते हुए शरमा कर खुल कर सिसकिया नही लेती उसी तरह माँ भी मुझसे शरमा कर सिसकारियों पर कंट्रोल रख रही थी.

पर जो भी था उसमे मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.

माँ की बिना बालो वाली गुलाबी योनि अब मैं ने चाट कर साफ कर दी थी.

फिर मैं ने अपनी जीभ को माँ की योनि मे डाल कर माँ को भी आनंद देने लगा. माँ भी अपना पानी छोड़ कर मेरी प्यास बुज़ा रही थी.

मैं ने हाथो से माँ की योनि के होंठ खोल दिए.
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फिर मैं आराम से अपनी जीभ माँ की योनि मे डाल कर चाटने लगा खेलने लगा .

माँ की योनि मे मैं जितनी ज़ोर से अपनी जीभ अंदर डालता उतनी ज़ोर से माँ की योनि जीभ को बाहर फेक देती .

जैसे कह रही थी कि मुझे जीभ नही तुम्हारा लण्ड चाहिए. देना है तो लण्ड दो जीभ से मेरा क्या होगा.

जीभ से तो मेरी आग भड़क जाएगी. पर मैं भी कहा हार मानने वाला था ,मैं ने भी उसकी योनि मे जीभ डालना जारी रखा.
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उसकी टाइट योनि मेरी जीभ को बाहर धकेल देती इस खेल मे मुझे अपना ही आनंद मिल रहा था. साथ मे माँ को भी.

माँ इतनी गरम हो चुकी थी की उसको कुछ भी करना बर्दास्त नही हो रहा था .

फिर ज़्यादा देर करना ठीक नही होता.

मैं ने माँ को आँखो खोलने के लिए कहा . उसने आँखो खोल दी.मैं ने लण्ड को माँ के हाथो मे दिया.

माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर लण्ड की तरफ . फिर लण्ड पे एक किस कर के लण्ड को छोड़ दिया और गर्दन हिला दी.
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मतलब अब बस एक काम बाकी था. वो था ...ढेर सारी चुदाई

फिर मैं ने माँ के नितम्बो के नीचे पिल्लो रख दिया.

फिर मैं माँ के टाँगो के बीच मे आ गया.

मैं ने लण्ड पे थूक लगा दी. और लण्ड को योनि पर रख दिया. मेरा लण्ड माँ की योनि को प्यार करना चाहता था.
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उसको फील करना चाहता था. मैं ने लण्ड वैसे ही रहने दिया . लण्ड और योनि का मिलन होने वाला था.

उस मिलन मे दर्द होने वाला था पर मेरा लण्ड योनि को दर्द देने से पहले उसको प्यार कर रहा था.

दर्द से पहले प्यार...
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मुझे कुछ ना करते हुए देख कर माँ ने आँखें खोल कर मुझे आगे बढ़ने को कहा.

इसका मतलब था की मेरे जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आ गया था जिस की मैं न जाने कब से इन्तजार कर रहा था.

मैं ने फिर से लण्ड पर थूक लगाया और लण्ड को योनि पर रखा .

और माँ के उपर आ गया.
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बहुत ही जबरदस्त और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से
 

Vishalji1

I love lick😋women's @ll body part👅(pee+sweat)
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Bht hi kamuk bhara update
 
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