“....ओह्ह्ह्हह...ओह....” माँ के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे .
होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी माँ के स्तन पर पहुँच गया .
यहाँ पर अभी भी माँ के हाथ थे . मेरा चेहरा जैसे ही माँ के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है . मैं फिर से माँ के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था .
माँ मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी .
अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी माँ अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी .
तकरीबन दस सालो के बाद माँ ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा माँ को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके बेटे ने यह सुख उसे दिया.
निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी माँ पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
हम दोनों माँ बेटे की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी माँ के चेहरे की और बढ़ता हु .
माँ भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है . मेरा चेहरा सीधा अपनी माँ के चेहरे पर झुक जाता है
और हमदोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं . दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे . कभी माँ मेरे तो कभी मैं माँ के होंठों को चूस रहा था .
उधर माँ को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है .
बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है
और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है .
माँ की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है . मैं अपना मुंह खोल देता हु और माँ की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है .
माँ मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है .
मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.
“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” माँ मेरे मुंह में सिसकने लगी और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगी.
मैं यह समझकर कि माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता हु और फिर हम दोनों एकदम से सिसक उठते हैं .
माँ योनि दरार में लण्ड के एहसास को पाकर ठिठक गई थी वो मेरे चेहरे की और देखती है मैं उसी की और देख रहा था मैं सोच मैं पड गया इतनी छोटी योनि में मेरा लण्ड कैसे जाएगा जो ना सिर्फ नौ इंचलम्बा था बल्कि चार इंच मोटा भी था और उनका आगे का टोपा बहोत बडा किसी जंगली आलू की तरह.
वह इस संकरी जगह में कैसे जाएगा.
माँ को बहोत दर्द होगा क्या वह झेल पाएगी मैं अपनी माँ को कोई दर्द नही देना चाहता. अब मैं गहरे सोच मैं पड़ गया
माँ ने मेरी तरफ देखा मुझे किसी सोच में पड़ा देखकर मुझे हिलाकर नजरोसे कहा
“क्या हुआ”?
मैने उन्हें सब बताया तब वह हस पड़ी और उन्होंने कहा
“बेटा कुछ नही होता तुम कुछ मत सोचो , जो होता है वह हो जाने दो ”
पर मैन कहा “आपको बहुत दर्द होगा कैसे सह पाओगी तुम”
तब माँ ने कहा “हर औरत यही चाहती है की उनका प्यार करने वाला उसे बहोत सारा प्यार करे, हर नारी को यह दर्द सहना ही पड़ता है, जीवन मे सिर्फ एक बार, हालाँकि मैं तुम्हारी माँ हूँ और बहुत बार तुम्हारे पापा के साथ सेक्स कर चुकी हूँ, पर ठीक है की अब मुझे किसी मर्द के साथ यह सब किये १० साल हो चुके हैं, पर मैं खीरा या मूली आदि से अपना काम चला ही लेती थी तो मुझे अभी भी आदत है. कुछ नहीं होगा इसलिए तुम कोई चिंता मत करो ”
मैंने उनकी और देखा तो माँ धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे मेरे किसी सवाल का जवाब दे रही हो .
मैं माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ गया
जब मैं ने माँ की जाँघो पर किस करना शुरू किया तब धीरे धीरे माँ अपने पैर को अलग कर रही थी.
जैसे मैं उपर जाता वैसे उनके पैर एक दूसरे से अलग हो रहे थे.
अब माँ की योनि मेरे सामने थी. माँ की स्मॉल योनि जिसके लिप्स अंदर की तरफ थे सिर्फ एक लकीर दिख रही थी किसी छोटी बच्ची की योनि की तरह थी बिना बालो की गुलाबी रंगत लिए हुये
मैंने उँगलिसे लिप्स अलग करके देख तो अंदर से पूरी लाल थी मानो अंदर लिपस्टिक लगाई हो बहोत छोटा सा होल था इसमें मेरा इतना बड़ा लिंग कैसे जाएगा मेरा लिंग तो पूरी तबाही मचाएगा
माँ की योनि पूरी गीली हो चुकी थी. माँ की योनि चमक रही थी.
वो चमक मेरे आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.
...मैं तो आँखो से माँ की चुदाई करने लगा.
माँ की योनि गीली थी
जिस से मुझे पहले माँ की योनि को साफ करना था .
मैं ने अपनी जीभ से माँ की योनि को साफ करना शुरू किया.
जब भी मैं माँ के किसी पार्ट को अपने जीभ से टच करता तब मुझे क्या हो जाता
मैं अपने होश खो बैठता. मुझे ऐसा लगता कि इस दुनिया मे माँ और मैं,सिर्फ़ हम दोनो ही हो ,जो सिर्फ़ प्यार करना जानते है.
मैं अपनी जीभ से माँ की योनि चाटने लगा. माँ बस एक काम कर रही थी वो था सिसकिया लेना .
एक पत्नी जैसे सुहागरात के दिन अपने पति के साथ चुदाई करते हुए शरमा कर खुल कर सिसकिया नही लेती उसी तरह माँ भी मुझसे शरमा कर सिसकारियों पर कंट्रोल रख रही थी.
पर जो भी था उसमे मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.
माँ की बिना बालो वाली गुलाबी योनि अब मैं ने चाट कर साफ कर दी थी.
फिर मैं ने अपनी जीभ को माँ की योनि मे डाल कर माँ को भी आनंद देने लगा. माँ भी अपना पानी छोड़ कर मेरी प्यास बुज़ा रही थी.
मैं ने हाथो से माँ की योनि के होंठ खोल दिए.
फिर मैं आराम से अपनी जीभ माँ की योनि मे डाल कर चाटने लगा खेलने लगा .
माँ की योनि मे मैं जितनी ज़ोर से अपनी जीभ अंदर डालता उतनी ज़ोर से माँ की योनि जीभ को बाहर फेक देती .
जैसे कह रही थी कि मुझे जीभ नही तुम्हारा लण्ड चाहिए. देना है तो लण्ड दो जीभ से मेरा क्या होगा.
जीभ से तो मेरी आग भड़क जाएगी. पर मैं भी कहा हार मानने वाला था ,मैं ने भी उसकी योनि मे जीभ डालना जारी रखा.
उसकी टाइट योनि मेरी जीभ को बाहर धकेल देती इस खेल मे मुझे अपना ही आनंद मिल रहा था. साथ मे माँ को भी.
माँ इतनी गरम हो चुकी थी की उसको कुछ भी करना बर्दास्त नही हो रहा था .
फिर ज़्यादा देर करना ठीक नही होता.
मैं ने माँ को आँखो खोलने के लिए कहा . उसने आँखो खोल दी.मैं ने लण्ड को माँ के हाथो मे दिया.
माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर लण्ड की तरफ . फिर लण्ड पे एक किस कर के लण्ड को छोड़ दिया और गर्दन हिला दी.
मतलब अब बस एक काम बाकी था. वो था ...ढेर सारी चुदाई
फिर मैं ने माँ के नितम्बो के नीचे पिल्लो रख दिया.
फिर मैं माँ के टाँगो के बीच मे आ गया.
मैं ने लण्ड पे थूक लगा दी. और लण्ड को योनि पर रख दिया. मेरा लण्ड माँ की योनि को प्यार करना चाहता था.
उसको फील करना चाहता था. मैं ने लण्ड वैसे ही रहने दिया . लण्ड और योनि का मिलन होने वाला था.
उस मिलन मे दर्द होने वाला था पर मेरा लण्ड योनि को दर्द देने से पहले उसको प्यार कर रहा था.
दर्द से पहले प्यार...
मुझे कुछ ना करते हुए देख कर माँ ने आँखें खोल कर मुझे आगे बढ़ने को कहा.
इसका मतलब था की मेरे जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आ गया था जिस की मैं न जाने कब से इन्तजार कर रहा था.
मैं ने फिर से लण्ड पर थूक लगाया और लण्ड को योनि पर रखा .
और माँ के उपर आ गया.
thanks