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Incest रेखा, स्मिता और उसका बेटा : एक अनकहा रिश्ता

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फाइव-स्टार होटल के आलीशान सुइट की खिड़की के भारी, मखमली परदे सुबह की गुनगुनी धूप को पूरी तरह अंदर आने से रोक रहे थे, लेकिन फिर भी सूरज की एक पतली सी सुनहरी किरण तैरती हुई सीधे उस किंग-साइज़ बेड पर आ गिरी थी। पूरा कमरा अभी भी रात के उस खूंखार, रसीले और बेबाक देसी समागम की महक से सराबोर था। चादरें पूरी तरह से तहस-नहस थीं, हवा में स्मिता के महंगे परफ्यूम और अर्जुन के मर्दाना पसीने के साथ-साथ योनि और वीर्य के रसीले पानी की एक तीखी, कामुक गंध घुली हुई थी।

स्मिता अभी भी पूरी तरह नग्न अवस्था में चादर को आधा ओढ़े अर्जुन की चौड़ी, सांवली और गठीली छाती पर सिर रखकर सो रही थीं। उनकी ३६D की भारी, थलथलाती हुई गोरी छाती का एक बड़ा हिस्सा अर्जुन के सीने के कड़े मसल्स से सटा हुआ था। रात भर अर्जुन के बड़े हाथों की मार झेलने की वजह से उनके बड़े, भूरे निप्पलों पर अभी भी हल्की सी सुर्खी और कड़ापन साफ दिख रहा था। अर्जुन का एक मजबूत हाथ अभी भी स्मिता के चौड़े, मांसल चूतड़ों के ढलान पर थमा हुआ था।

जब दोपहर के बारह बजने को आए, तब स्मिता की आँखें अलसाए अंदाज़ में खुलीं। बदन के हर हिस्से में रात की दीवानगी की एक मीठी सी थकान थी, लेकिन दिल में एक असीम सुकून और जीत का अहसास था। उन्होंने ऊपर देखा, अर्जुन जाग चुका था और अपनी गहरी, दीवानी नजरों से अपनी माँ के इस अलसाए, रसीले रूप को ही निहार रहा था।

"जाग गईं, मेरी मल्लिका?" अर्जुन ने अपनी भारी, रसीली मर्दाना आवाज़ में फुसफुसाते हुए स्मिता के होठों पर एक गहरा, गीला चुंबन अंकित कर दिया।

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"उम्मम्... अर्जुन... तुमने रात को मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। मेरी कमर अभी भी टूट रही है," स्मिता ने लजाते हुए अपनी आँखें मूंद लीं और अपने भारी स्तनों को अर्जुन की छाती में और ज्यादा भींच दिया।


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दो घंटे बाद, स्मिता और अर्जुन पूरी तरह तैयार होकर अपने घर पहुंच चुके थे। दोपहर ढल रही थी, और रेखा मौसी, जो सुबह सुइट से अपने काम के लिए निकली थीं, वह स्मिता से मिलने और रात का हालचाल जानने उनके घर आई हुई थीं। घर के एक एकांत और आलीशान कोने में दोनों बहनें—स्मिता और रेखा—हाथ में कॉफ़ी के मग लिए बैठ गईं। अर्जुन अपने स्टडी रूम में किसी कॉल में व्यस्त था।

खिड़की से आती मद्धम धूप में स्मिता का चेहरा अभी भी रात के समागम के निखार से दमक रहा था, जिसे रेखा की पारखी नजरों ने तुरंत भांप लिया।

"आहा... स्मिता! सच कहूं तो आज तुम्हारे चेहरे की यह लाली और आँखों का यह गीलापन साफ बता रहा है कि रात को अर्जुन ने तुम्हें किस कदर अपनी मर्दानगी के रस से सराबोर किया है," रेखा ने एक नटखट, रसभरी हंसी हंसते हुए अपनी कॉफ़ी की चुस्की दी।

रेखा ने उस वक्त गहरे जामुनी रंग की एक बेहद मॉडर्न, sleeveless वाली मैक्सी पहनी थी, जिससे उनकी ४९ साल की उम्र का सुडौल बदन, गोरी बाहें और भारी जांघों का उभार साफ झलक रहा था।

"उस बुड्ढे (एक्स-हस्बैंड) के सामने अर्जुन का वो रसूख देखकर तो मेरा भी बदन सिहर उठा था। मुझे तो तभी समझ आ गया था कि होटल के सुइट में जाते ही तुम दोनों के बीच कैसी आग भड़कने वाली है।"

स्मिता के गाल रेखा की इस बेबाक बात को सुनकर लाल हो गए। उन्होंने अपनी कॉफ़ी की चुसकी ली, थोड़ा आगे झुकीं, जिससे उनकी छातियों का भारी उभार सोफे के किनारे से हल्का सा सटा। उन्होंने रेखा का हाथ थाम लिया।

"सब तुम्हारी वजह से है, रेखा। अगर तुमने शुरुआत में मुझे उस झिझक से बाहर न निकाला होता, अर्जुन के प्रति मेरी उस छुपी हुई तीव्र इच्छा को पंख न दिए होते, तो शायद मैं आज भी उसी दर्द में जी रही होती," स्मिता की आवाज़ में गहरा प्यार था। फिर उनके होठों पर एक शरारती, नटखट मुस्कान तैर गई। उन्होंने रेखा की आँखों में आँखें डालीं। "पर रेखा... एक बात कहूं? अब हमारा तो सब सेट हो गया। अर्जुन जैसा मर्द पाकर मेरी जिंदगी मुकम्मल हो गई है। लेकिन अब... अब तेरा क्या? हमारा तो करा दिया, अब तेरा और तेरे कबीर का कुछ करना पड़ेगा।"

स्मिता की यह बेबाक और अप्रत्याशित बात सुनकर रेखा के हाथ एक पल के लिए थम गए। ४९ साल की उस बोल्ड, हाई-क्लास औरत के चेहरे पर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। रेखा ने अपनी जामुनी मैक्सी के पल्लू को थोड़ा संभाला, अपनी भारी जांघों को आपस में थोड़ा भींचा।

"धत्त... स्मिता! तुम भी क्या बातें लेकर बैठ गईं," रेखा ने अपनी नजरें चुराते हुए हंसने की कोशिश की, लेकिन उनकी सांसें थोड़ी भारी हो गई थीं। "कबीर? वह मेरा बेटा है, स्मिता। और वैसे भी, तुम तो जानती ही हो कि मेरा अपना घर, मेरी अपनी गृहस्थी अलग है। मेरे हस्बैंड अपने बिजनेस के सिलसिले में सालों से इतने बिजी रहते हैं कि उन्हें घर-परिवार या मेरे बदन की जरूरतों से कोई मतलब ही नहीं रहा। कबीर पिछले पांच-छह सालों से विदेश में रहा है, अब जब वह हमेशा के लिए इंडिया लौट रहा है और शायद यही रहेगा पर उसका सोचना, उसका नज़रिया बिल्कुल अलग है।"

"तो क्या हुआ? अर्जुन भी तो मेरा बेटा है," स्मिता ने पूरी समझदारी और परिपक्वता से रेखा का हाथ और कसकर दबाया। "रिश्ते तो समाज के लिए होते हैं रेखा, पर इस चारदीवारी के भीतर असली सुख तो सिर्फ एक ताकतवर, जवान और वफादार मर्द के स्पर्श से ही मिलता है। कबीर अब २८ साल का एक पूरा, मुकम्मल मर्द बन चुका है। चौड़ा कंधा, लंबा कद... मैंने उसकी तस्वीरें देखी हैं। तू खुद अपने घर में इतनी अकेली रहती है, और इस उम्र में भी इतनी हॉट और सम्मोहक है, बेटे समान अर्जुन से तो चुदाई करा ली, तब नहीं सोचा बेटे जैसा ही है। सच बोल ऐसे ही क्या तेरे मन में कभी कबीर के लिए कोई वैसी तरंग नहीं उठी?"

रेखा ने एक गहरी, लंबी सांस ली। उनकी छाती मैक्सी के भीतर ज़ोर से ऊपर-नीचे हुई। स्मिता की बातों ने उनके भीतर के उस दबे हुए ज्वालामुखी को हल्के से कुरेद दिया था।

"तू समझ नहीं रही है स्मिता... यह बहुत टफ है," रेखा ने अपनी आवाज़ को धीमा करते हुए कहा, उनकी आँखों में एक अजीब सा कामुक सस्पेंस था। "अर्जुन की बात अलग थी। वह शुरुआत से ही तेरे प्रति एक गहरा जुड़ाव, एक सुरक्षा की भावना रखता था। वह तुझे जी-जान से चाहता है, तेरी इस काया का वो दीवाना था, इसलिए यह रिश्ता इतनी सहजता और असीम प्यार से बन गया। लेकिन कबीर... कबीर की कहानी अलग है। विदेश में उसकी कई गर्लफ्रेंड्स रह चुकी हैं। गोरी, मेम जैसी लड़कियां। हालांकि वह किसी के साथ सीरियस नहीं रहा, लेकिन मुझे लगता है कि उसे सिर्फ जवान और स्लिम लड़कियां ही पसंद हैं। वह भला मुझ जैसी ४९ साल की परिपक्व और भारी बदन वाली औरत की तरफ उस नज़र से क्यों देखेगा? और वह भी अपनी मॉम।"

स्मिता ने एक रहस्यमयी हंसी हंसी। उन्होंने रेखा की नग्न, गोरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा, "यही तो मर्दों की साइकोलॉजी है, रेखा। कबीर ने विदेश की वो सूखी-साकी लड़कियां देखी हैं, लेकिन उसने अभी तक एक मुकम्मल, रसीली, भारी और बोल्ड देसी औरत का स्वाद नहीं चखा है। तू अभी ४९ की उम्र में भी किसी २५ साल की लड़की को मात देती है। यह जो तेरी भारी जांघें और यह सुडौल बदन है ना, जब इसके करीब वह आएगा, तो विदेश की सारी मेमों को भूल जाएगा। बस, हमें और अर्जुन को मिलकर कुछ ऐसा ताना-बाना बुनना होगा कि उसे बिना पता चले, वह तेरी इस कशिश में आ जाए।"

तभी रेखा के फोन पर एक नोटिफिकेशन टोन बजी। उन्होंने स्क्रीन देखी और उनके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई।

"लो... कबीर का मैसेज आ गया। वह एयरपोर्ट से बाहर निकल चुका है और ड्राइवर लेकर सीधे घर पर पहुंच रहा है। मुझे अब तुरंत अपने घर निकलना होगा, उसे वहां अकेले अजीब लगेगा," रेखा ने अपनी मैक्सी को संभालते हुए हड़बड़ाहट में कहा।
बहुत ही शानदार लाजवाब और जानदार मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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स्मिता ने मुस्कुराते हुए रेखा को गले लगाया और उनके कान में फुसफुसाया, "जा रेखा... अपनी इस जवानी का जादू आज से ही उस जवान मर्द पर चलाना शुरू कर दे।" रेखा ने शरमाते हुए स्मिता को देखा, अर्जुन से विदा ली और तुरंत अपनी गाड़ी से अपने आलीशान पेंटहाउस की तरफ रवाना हो गईं।

रेखा का पेंटहाउस शहर के एक बेहद पॉश और रईस इलाके की २2वीं मंजिल पर था। आधुनिक इंटीरियर, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियां और आलीशान सजावट रेखा के हाई-क्लास स्टेटस को साफ बयां करती थी। उनके पति हमेशा की तरह एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में देश से बाहर थे, इसलिए पूरा घर खाली और शांत था।

रेखा जैसे ही अपने घर पहुंचीं, उन्होंने जल्दी से लिविंग रूम को सलीके से व्यवस्थित किया। दोपहर की धूप कांच की खिड़कियों से छनकर फर्श पर तैर रही थी। रेखा के दिल की धड़कन बढ़ रही थी। कबीर... उनका जवान बेटा, २८ साल का पूरा मर्द, सालों बाद हमेशा के लिए अपनी माँ के पास लौट रहा था।

ठीक बीस मिनट बाद, पेंटहाउस की मुख्य घंटी बजी। रेखा ने गहरी सांस ली, अपनी जामुनी स्लीवलेस मैक्सी के गले को हल्का सा ठीक किया और भारी दरवाज़ा खोल दिया।

दरवाज़े पर २८ साल का कबीर खड़ा था। छह फीट का लंबा कद, चौड़े और कड़े कसरती कंधे, सांवला-रफ रंग रूप, और चेहरे पर ट्रिम की हुई हल्की सी दाढ़ी—कबीर अपनी माँ रेखा की तरह ही बेहद आकर्षक, मॉडर्न और एक मुकम्मल रसूखदार जवान मर्द लग रहा था। उसने नीले रंग की जींस और एक कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिससे उसकी छाती और बाइसेप्स के कड़े मसल्स साफ उभर कर दिख रहे थे। उसके साथ उसके दो बड़े ट्रॉली बैग्स थे।

"मॉम!" कबीर के चेहरे पर एक बड़ी सी, चमकीला मुस्कान आ गई। उसने बिना एक पल गंवाए अपने बैग्स को वहीं छोड़ा और आगे बढ़कर रेखा को अपनी कसी हुई, मजबूत बाहों में भर लिया।

जैसे ही कबीर के कड़े, कसरती सीने ने रेखा के ४९ साल के उस भरे-पूरे, रसीले बदन को भींचे लिया, रेखा के मुंह से एक मद्धम सी सिसकारी निकलने को हुई जिसे उन्होंने बहुत मुश्किल से भीतर ही रोक लिया। कबीर के बदन की वो मर्दाना कड़वाहट, उसकी गर्म सांसें जो रेखा के नग्न गोरे कंधे पर पड़ रही थीं, और उसके हाथों का वो भारी दबाव—रेखा को अंदर तक हिला गया। कबीर ने रेखा को इतने ज़ोर से भींचा कि उन्हें ज़मीन से एक इंच ऊपर उठा दिया, जिससे रेखा की भारी जांघें और उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा अनजाना में कबीर की जींस से कड़े हो चुके जांघों के हिस्से से बुरी तरह रगड़ खा गया।

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"ओह गॉड, मॉम! आई मिस्ड यू सो मच!" कबीर ने रेखा को वापस नीचे उतारते हुए कहा। उसके दोनों बड़े, गर्म हाथ अभी भी रेखा के दोनों गोरे, नग्न कंधों पर टिके हुए थे।

कबीर ने पिछले पांच सालों में अपनी माँ को सिर्फ वीडियो कॉल्स पर देखा था, जहाँ कैमरे के एंगल्स हकीकत को छुपा देते हैं। लेकिन आज, जब वह अपनी माँ के ठीक सामने खड़ा था, तो उनके इस भारी, रसीले और सम्मोहक देसी बदन को देखकर कबीर की आँखों में एक पल के लिए एक अजीब सी मर्दाना हैरानी और कशिश कौंध गई। उसकी नजरें एक सेकंड के लिए रेखा की मैक्सी के गहरे गले से झांकते उनके उरोजों के भारी उभार पर टिकीं और फिर बहुत ही स्वाभाविक रूप से हट गईं।

"विश्वास नहीं होता मॉम... आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं," कबीर ने बहुत ही बेबाकी और विदेशी तारीफ भरे अंदाज़ में कहा। "डैड सच में बहुत लक्की और अनलकी दोनों हैं, आप जैसी खूबसूरत बीवी मिली पर हमेशा काम के चक्कर में इस खूबसूरत घर और आपसे दूर रहते हैं।"

विदेश में रहने के कारण कबीर का बातचीत का तरीका बहुत खुला था, लेकिन रेखा के लिए एक जवान मर्द के मुंह से, जो उनका अपना बेटा था, अपने बदन और खूबसूरती की ऐसी बेबाक तारीफ सुनना उनके खून की रवानी को अचानक तेज कर गया।

"चलो-चलो, अब अंदर आओ। थके होगे," रेखा ने अपनी धड़कनों को संभालते हुए कहा। उन्होंने कबीर के गाल को चूमा, लेकिन चूमते वक्त उनके हाथ कबीर के टी-शर्ट के नीचे छिपे कड़े बाइसेप्स पर हल्के से कांप गए।

कबीर अपना सामान खींचते हुए आलीशान लिविंग रूम के भीतर आया और वहाँ रखे मखमली सोफे पर आराम से अपनी लंबी टांगें फैलाकर बैठ गया। रेखा किचन की तरफ बढ़ीं ताकि उसके लिए पानी और जूस ला सकें। जब वह चल रही थीं, तो मैक्सी के भीतर से उनके चूतड़ों का भारी, रसीला मटकना कबीर की नजरों के सामने था। कबीर सोफे पर बैठा अनजाने में अपनी माँ के उस परिपक्व और सम्मोहक बदन के पीछे के हिस्से को निहार रहा था, और उसके दिमाग में एक अनजानी सी, धुंधली कामुक कशिश का पहला बीज बिना उसकी मर्जी के बोया जा चुका था।

खेल की शुरुआत रेखा के अपने इसी एकांत पेंटहाउस से हो चुकी थी, जहाँ पति के न होने का सन्नाटा और कबीर की यह जवान मर्दानगी , रेखा का हुस्न माहौल में नशा घोल रहा था।

कबीर ने सामने मेज से पानी का ग्लास हाथ में लिया और आँखें बंद करके सोफे पर सिर टिका दिया, जबकि रेखा कमरे के कोने से उसकी उस कसरती काया को देखकर अंदर ही अंदर सिहर रही थीं।

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पानी का खाली गिलास मेज पर रखते हुए कबीर ने एक लंबी, राहत भरी सांस ली। सोफे पर सिर टिकाए हुए उसकी आँखें आधी मुंदी थीं, जिससे उसकी घनी पलकों के नीचे की सांवली रंगत और उभरी हुई जॉ-लाइन और भी ज़्यादा आकर्षक लग रही थी। विदेश की लंबी और थकाऊ फ्लाइट के बाद इस आलीशान पेंटहाउस का सन्नाटा और घर की जानी-पहचानी खुशबू उसके बदन को ढीला कर रही थी। लेकिन वहीं, किचन के संगमरमरी काउंटर के सहारे खड़ी रेखा की हालत बिल्कुल अलग थी।

रेखा के ४९ साल के रसीले और परिपक्व बदन के भीतर एक अनजानी सी तपन धीरे-धीरे सुलगने लगी थी।
स्मिता की कही हुई हर एक बेबाक बात उनके कानों में किसी मंत्र की तरह गूंज रही थी—*"तू अभी भी इतनी हॉट और सम्मोहक है... क्या तेरे मन में कभी कबीर के लिए कोई तरंग नहीं उठी?"*
और अभी बेटे कबीर ने भी *"आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं"* कहकर आग में घी डालने का काम किया था।

रेखा ने अपनी नज़रों को सोफे पर फैले अपने २८ साल के जवान बेटे के बदन पर टिका दिया। कबीर की कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट उसकी चौड़ी छाती से इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी छाती के कड़े मसल्स और टी-शर्ट के ऊपर से झलकते दो छोटे, सख्त उभार रेखा की आँखों में सीधे चुभ रहे थे। कबीर ने जब अपनी लंबी, कसरती टांगों को थोड़ा फैलाया, तो उसकी नीले रंग की जींस का अगला हिस्सा उसकी मर्दानगी के भारीपन के कारण हल्का सा तन गया।

रेखा की सांसें अचानक भारी होने लगीं। उनकी जामुनी मैक्सी के भीतर ढके उनके दोनों भारी उरोज अपनी जगह पर जोर-जोर से धड़कने लगे। उन्होंने अपनी कांपती हुई उंगलियों से मैक्सी के पतले स्ट्रैप को संभाला और दबे पैरों से सोफे के करीब आईं।

"कबीर..." रेखा की आवाज़ में एक अजीब सा गीलापन और अलसायापन था, जैसे कोई कामुक सुरा उनकी जुबान पर तैर गई हो।

कबीर ने आँखें खोलीं और अपनी माँ को देखा। धूप की सुनहरी किरणें रेखा के गोरे, सुडौल कंधों और उनकी मैक्सी के गहरे गले से झलकती क्लीवेज की गहरी घाटी पर पड़ रही थीं।

"हम्म, मॉम?" कबीर की भारी, रसीली आवाज़ ने माहौल के सन्नाटे को तोड़ा।

"बेटा, तू बहुत थका हुआ होगा। सामान वैसे ही रहने दे... चल, मैं तुझे तेरे कमरे तक छोड़ देती हूँ। तू थोड़ा शावर ले ले और आराम कर," रेखा ने एक बेहद मीठी, मादक मुस्कान के साथ कहा।

कबीर मुस्कुराया और धीरे से सोफे से उठ खड़ा हुआ। छह फीट का वह कड़ा, कसरती जवान बदन जब रेखा के ठीक सामने खड़ा हुआ, तो रेखा की आँखें कबीर के कंधे तक ही पहुँच पाईं। कबीर ने एक अनजाने अधिकार भाव से रेखा के नग्न गोरे कंधे पर अपना भारी, गर्म हाथ रखा। कबीर की उंगलियों की तपन रेखा के मखमली बदन में सीधे उतर गई। रेखा का पूरा वजूद एक पल के लिए कांप उठा; उनकी भारी जांघों के बीच एक हल्की सी नमी की बूँद रसातल की ओर सरक गई।

"आप सही कह रही हैं मॉम, मुझे सच में एक हॉट शावर की ज़रूरत है," कबीर ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी सांसें रेखा की गर्दन के पास से गुजरती हुई उनके कान की लौ को छुईं।

रेखा उसे मास्टर बेडरूम की तरफ ले गईं। कमरा पूरी तरह से वातानुकूलित था और उसकी बड़ी कांच की खिड़की से पूरे शहर का नजारा दिखता था। कबीर ने अपनी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा और एक ही झटके में उसे सिर के ऊपर से उतारकर बेडरूम की कुर्सी पर फेंक दिया।

जैसे ही कबीर का ऊपरी बदन नग्न हुआ, रेखा की आँखें फटी की फटी रह गईं। चौड़ा, सांवला और सुगठित सीना, जिस पर बहुत हल्के सांवले बाल थे, छः पैक्स में बँटा हुआ पेट, और बाइसेप्स की कड़ी नसें... कबीर की जवानी का यह नग्न प्रदर्शन रेखा के दिमाग में एक तीखा नशा घोल गया।

कबीर ने बिना किसी झिझक के अपनी जींस का बटन भी खोल दिया और ज़िपर की तीखी 'ज़िप' की आवाज़ से सन्नाटा टूट गया।

"मॉम, टॉवल?" कबीर ने अपनी जींस को नीचे सरकाते हुए पूछा, वह नीचे सिर्फ एक काले रंग के बॉक्सर अंडरवेयर में खड़ा था, जो उसकी भारी मर्दानगी और कड़े चूतड़ों को पूरी तरह से उभार रहा था।

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रेखा की नजरें कबीर के उस उभरे हुए निचले हिस्से पर जा टिकीं। उनका गला सूख गया, आँखें उस भारी मर्दाना उभार से हट ही नहीं रही थीं। उन्होंने हड़बड़ाहट में अलमारी से एक भारी, सफ़ेद तौलिया निकाला और कांपते हाथों से कबीर की ओर बढ़ाया।

"य... यह ले कबीर," रेखा की आवाज़ में एक कंपकंपी थी।
कबीर ने तौलिया लेने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जानबूझकर या अनजाने में, उसकी उंगलियां तौलिए को पकड़ने के बजाय रेखा के भारी, गोरे हाथों को छू गईं और तौलिया नीचे फर्श पर गिर गया।

"ओह, सॉरी मॉम!" कबीर ने फौरन नीचे झुककर तौलिया उठाया। जब कबीर नीचे झुका, तो उसका चौड़ा, नग्न कंधा रेखा की जामुनी मैक्सी से ढके घुटनों और भारी जांघों से बुरी तरह रगड़ खा गया।

रेखा के मुंह से एक दबी हुई सी सिसकारी निकली—*"अह्ह्ह..."*—और उन्होंने पीछे हटने की बजाय अनजाने में कबीर के कड़े नग्न कंधे पर हाथ टिका दिया। कबीर ने ऊपर देखा। उसकी आँखें सीधे रेखा की मैक्सी के ढीले गले में झांक रही थीं, जहाँ से ३६ साइज के कड़े, गोरे स्तनों का ऊपरी उभार और उनके बीच की रसीली दरार साफ दिख रही थी।

कबीर की आँखों में एक तीखी, कामुक लालसा कौंध गई। उसने पहली बार अपनी माँ के इस ४९ साल के बदन को एक माँ के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद सम्मोहक, रसीली और भारी देसी औरत के रूप में देखा। माहौल में एक भारी, दम घोटने वाली कामुकता तैरने लगी थी।

"मॉम... आप सच में बहुत... बहुत खूबसूरत हैं," कबीर की भारी आवाज़ बाथरूम की दीवारों से टकराकर गूंजी।

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रेखा का दिल किसी बागी घोड़े की तरह धड़क रहा था। उन्होंने अपनी आँखें नीची कर लीं और शरमाते हुए कांपती आवाज़ में कहा, "त... तू बहुत शैतान हो गया है कबीर... जा, जाकर नहा ले। शाम को हमें स्मिता मौसी के घर डिनर पर भी जाना है।"

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कबीर मुस्कुराया, उसने रेखा के गाल पर एक हल्का सा गीला चुंबन दिया और बाथरूम के भीतर चला गया। शावर के चालू होने की आवाज़ के साथ ही रेखा तेजी से कमरे से बाहर निकल आईं। उन्होंने बाहर आते ही अपने भारी स्तनों पर हाथ रखा, जहाँ कबीर के हाथों की और उसकी नज़र की तपन अभी भी महसूस हो रही थी। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और मैक्सी के भीतर उनकी पैंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी।

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बडा ही खुबसुरत शानदार गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

Befriendmy

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आपके शब्द ही मेरी लेखनी की ताकत है। बहुत बहुत धन्यवाद।
और खुश हूँ कि मेरा काम आप मित्रों को पसंद आ रहा है। आशा करता हूं कि आगे भी मै आपकी उम्मीदों पर खरा उतरू।


Bahut hi detailed scene creation hai aapka. Nakabposh party ko itne detail aur bariki se bataya hai ki jisne kabhi koi party join na ki ho vah bhi khud ko wahan baith kar feel kar sakta hai. Rekha ko khubsurti pahne hue libas aur us libas ko khasiyat ke alawa poora mahol itna bariki khubsurti aur vistrit bataya hai ki log mantramugdh ho gaye. Kabir jis maada ko lekar pagal ho gaya aur jo vah uske sath aage karne wala tha ek anjan aurat samjh kar aur song khatm hone se pahle Rekha khud ko bacha kar wahan se baag gai ek bar to Kabeer ko laga ki ab shayad vah dobara uss haseena se kabhi nahi mil payega magar uske ghar pahunchte hi vo raaz Kabeer ke samne khil gaya ki vah koi aur aurat nahi balki uski sahi maa hai.
Yah update bahut hi khubsurti sateekta aur ekdam balancing likha hai. Ek behad shandar update ke liye bahut bahut Dhanyvad.
eri
 

Befriendmy

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रात के तूफानी सन्नाटे के बाद, २२वीं मंजिल के उस आलीशान पेंटहाउस की खिड़कियों से सुबह की गुनगुनी, साफ धूप अंदर तैर रही थी। पूरा लिविंग रूम शांत था, लेकिन हवा में अभी भी उस रहस्यमयी नकाबपोश रात की बची-कुची महक और दोनों कमरों के भीतर अलग-अलग बहे काम-रस के सोलो थिंकिंग सेशन की अदृश्य गर्मी मौजूद थी। स्मिता और अर्जुन अपने घर थे, और इस खाली पेंटहाउस के भीतर सिर्फ दो जिस्म मौजूद थे, जिनके बीच की मर्यादा की दीवारें अंधेरे में ढह चुकी थीं और अब दिन के उजाले में बेपर्दा होने वाली थीं।

४९ साल की रेखा सुबह सात बजे ही सोकर उठ चुकी थीं। रात भर अपने ही २८ साल के जवान बेटे कबीर की खुरदरी, मजबूत उंगलियों का जो तीखा और रसीला स्पर्श उन्होंने अपनी शेव की हुई चिकनी योनि की फांकों के बीच महसूस किया था, उसकी वजह से उनके बदन में एक अजीब सी मीठी टूट और अलसाया हुआ भारीपन था।

उन्होंने नहाया नहीं था; वह सीधे बेड से उठी थीं और उनके सुडौल, ४९ साल के प्लस-साइज़ बदन पर इस वक्त हल्के जामुनी रंग की एक बेहद ढीली, साटन-रेशम की नाइटी थी।

यह नाइटी इतनी ढीली और महीन थी कि बिना ब्रा-पैंटी के रेखा की सुडौल काया का हर एक curve उसके भीतर स्वतंत्र रूप से डोल रहा था। नाइटी की पतली डोरियाँ उनके गोरे, नग्न कंधों पर टिकी थीं। आगे का गला इतना गहरा था कि जब वह सांस लेती थीं, तो उनके भारी ३६D स्तनों का ऊपरी गोरा मांसल हिस्सा और उनके बड़े, भूरे निप्पलों का कड़ापन उस पतले रेशमी कपड़े को बाहर की तरफ धकेल रहा था। पेट का हिस्सा हल्का थलथला और चिकना था, और नीचे से नाइटी उनके घुटनों से चार इंच ऊपर तक ही थी, जिससे उनकी गोरी, सुडौल और केले के तने सी चिकनी भारी जांघें पूरी तरह से बेपर्दा चमक रही थीं।

रेखा किचन में गईं और उन्होंने मद्धम आंच पर चाय की केतली चढ़ाई। उनके दिल की धड़कनें तेज थीं। उन्हें पता था कि कबीर जाग चुका होगा या जागने वाला होगा, और जो सच रात को सेंटर-टेबल पर छूटे मास्क ने खोला था, वह अब दोनों के बीच एक अदृश्य बारूद की तरह फटने को तैयार था।

कबीर अपने बेडरूम से बाहर निकला। उसने सिर्फ एक ढीला, ग्रे रंग का लोअर पहना हुआ था और उसका ऊपर का पूरा कसरती बदन, चौड़े सांवले कंधे और छाती के कड़े मसल्स नग्न थे। रात भर माँ की याद में खुद को मुठ मारते हुए जो तीखा सुख उसने भोगा था, उसकी थकान और एक गहरा मनोवैज्ञानिक शॉक उसकी आँखों में साफ दिख रहा था। उसकी आँखें हल्की लाल थीं और दिमाग में लगातार वही एक ख्याल घूम रहा था—*वह औरत, जिसके ३६D स्तन को उसने मसला था, जिसकी पैंटी के भीतर हाथ डालकर उसका गाढ़ा काम-रस निचोड़ा था, वह उसकी सगी माँ रेखा थी।*

कबीर भारी कदमों से लिविंग रूम की तरफ बढ़ा। लेकिन जैसे ही उसने लिविंग रूम के सोफे के पास कदम रखे, वह वहीं ठिठक गया।
सोफे के कोने पर उसका अपना कल रात का ब्लैक सूट, सफेद शर्ट और वह काला वेनेशियन मास्क बेतरतीब तरीके से पड़ा हुआ था, जिसे वह रात की हड़बड़ाहट में वहीं छोड़ गया था। और ठीक उसी के बगल में, काँच की सेंटर-टेबल पर माँ रेखा का वह सोने और काले रंग का भारी मुखौटा और वह जामुनी वेल्वेट गाउन ड्रेस रखी थी। दिन की तेज धूप उन दोनों मुखौटों और कपड़ों पर सीधे पड़ रही थी, मानो रात के उस पूरे कच्चे, पाशविक और रसीले खेल पर हकीकत की गवाही दे रही हो।

तभी किचन से रेखा हाथ में चाय के दो कप लिए लिविंग रूम में दाखिल हुईं। उनके चलने की मद्धम थाप के साथ उनकी साटन की ढीली नाइटी के भीतर उनके ३६D के भारी, ब्रा-लेस स्तन हल्के-हल्के डोल रहे थे।

रेखा जैसे ही सोफे के पास पहुँचीं, उनकी नज़र टेबल पर पड़े कबीर के उस ब्लैक सूट और काले मास्क पर पड़ी। उन्होंने चाय के कप को धीरे से साइड टेबल पर रखा। रेखा ने चेहरे पर एक गहरा, चौंकने वाला भाव लाया—एक ऐसी सधी हुई एक्टिंग, मानो उन्हें इसी वक्त यह अहसास हुआ हो कि रात को अंधेरे में जिस जवान, हट्टे-कट्टे मर्द ने उन्हें दीवार से सटाकर उनकी पैंटी के भीतर अपनी उंगलियां धंसा दी थीं, वह कोई और नहीं बल्कि उनका अपना सगा बेटा कबीर था।

रेखा के हाथ हल्के से काँपे। उन्होंने आगे बढ़कर बहुत ही मद्धम, अलसाए अंदाज़ में कबीर का वह काला मास्क अपने गोरे हाथ में उठा लिया। उनकी उंगलियाँ उस मास्क के कोनों को छू रही थीं, और उनके चेहरे पर एक गहरा सन्नाटा पसर गया। उन्होंने उस मास्क को हाथ में लेकर धीरे से अपनी नजरें ऊपर उठाईं और सीधे कबीर की आँखों में आँखें डाल दीं।

यहीं से दोनों के बीच **नज़रों का वो भारी, सम्मोहक और नसों को कड़ा कर देने वाला खेल** शुरू हुआ।

कमरे के भीतर एक ऐसा सन्नाटा छा गया जिसे काटा जा सकता था। कबीर वहीं बिना शर्ट के खड़ा था, उसके चौड़े कंधे धूप में चमक रहे थे। जब उसने अपनी माँ की आँखों में देखा, तो उसके चेहरे पर एक गहरा पछतावा, एक 'सॉरी' वाली भावना साफ झलक उठी। उसकी नजरें झुकने लगीं, मानो वह कह रहा हो—*मॉम, मुझे माफ़ कर दीजिए... मुझे नहीं पता था कि नकाब के पीछे आप थीं, वरना मैं कभी मर्यादा पार करके आपकी पैंटी में हाथ डालने की जुर्रत नहीं करता।*

लेकिन कबीर ने जैसे ही दोबारा रेखा की आँखों में देखा, उसे वहाँ कोई गुस्सा, कोई नफ़रत या कोई डांट नज़र नहीं आई। ४९ साल की रेखा उस ढीली जामुनी नाइटी में खड़ी कबीर के उस ६ फीट के कड़े, नग्न मर्दाना बदन को ऊपर से नीचे तक निहार रही थीं। रेखा की आँखों में एक अजीब सी परिपक्व नरमी, एक गहरा सस्पेंस और एक मूक इकरार (acceptance) था। उनकी आँखें कबीर को साफ़-साफ़ बता रही थीं—*हाँ कबीर... वह मैं ही थी। और जो स्पर्श, जो मर्दाना रसूख तूने रात को मुझे दिया... उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया है।*

रेखा ने कबीर के मास्क को वापस सोफे पर रखा। दोनों के बीच एक शब्द भी नहीं फूटा, लेकिन हवा में दोनों के जिस्मों की कामुक उत्तेजना इतनी तीखी थी कि कबीर की पैंट के भीतर उसका ७.५ इंच का औजार उस मूक इकरार को भांपकर दिन के उजाले में दोबारा कड़ा होने लगा।

"चाय... ठंडी हो रही है, कबीर," रेखा ने अपनी आवाज़ को बहुत ही शांत, भारी और मखमली रखते हुए सन्नाटे को तोड़ा। उनकी नाइटी का गला थोड़ा और नीचे झुका, जिससे उनके स्तनों का भारी भराव कबीर की नजरों के ठीक सामने आ गया।

कबीर इस भारी, दमघोंटू और अत्यधिक कामुक तनाव को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसकी आँखों के सामने बार-बार रात की वो तस्वीरें घूम रही थीं जब उसकी उंगलियां रेखा की उसी जांघों के जोड़ पर रेंग रही थीं।

उसने चाय का कप हाथ में लिया, लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे। उसने एक घूंट लिया और कप को वापस रख दिया। "मॉम... मुझे... मुझे अर्जुन भाई के ऑफिस जाना था... कुछ ज़रूरी काम हैं। मैं... मैं जरा जल्दी में हूँ, मैं बाहर निकल रहा हूँ," कबीर ने लड़खड़ाती, भारी आवाज़ में बहाना बनाया। वह इस सच के सामने पूरी तरह से असहज हो चुका था।

"ठीक है... आराम से जाओ," रेखा ने बहुत ही शांत लहजे में कहा, लेकिन उनकी आँखें अभी भी कबीर के कड़े होते लोअर के उभार पर टिकी थीं। कबीर बिना देर किए सीधे अपने कमरे में भागा, कपड़े बदले और कैब बुलाकर पेंटहाउस से बाहर निकल गया। वह घर से तो भाग गया, लेकिन पूरे दिन दिल्ली की सड़कों पर, अर्जुन के ऑफिस में बैठ कर भी उसका दिमाग सिर्फ अपनी माँ के उसी ४९ साल के भारी बदन, उनकी ढीली नाइटी और उनकी उन आँखों के मूक इकरार में ही अटका रहा।

कबीर के पेंटहाउस से बाहर निकलते ही रेखा ने राहत की एक भारी सांस ली। उनका पूरा बदन सुबह की उस मुलाकात के बाद काम-रस से और ज्यादा सुलगने लगा था। वह लिविंग रूम के सोफे पर ढीली साटन नाइटी में ही पसरी हुई थीं, जांघों के बीच की गर्मी उन्हें शांत नहीं बैठने दे रही थी।

दोपहर के बारह बज रहे थे। दिल्ली की तपती धूप पेंटहाउस की विशाल काँच की खिड़कियों पर सीधी पड़ रही थी, जिससे लिविंग रूम के भीतर एक अजीब सी सुनहरी, गर्म और सुस्त रोशनी छनकर आ रही थी।

सुबह जब कबीर ने बिना शर्ट के, सिर्फ ग्रे लोअर में खड़े होकर अपनी माँ रेखा की आँखों में देखा था, तो उसके कसरती सांवले सीने और उसकी पैंट में कड़े होते ७.५ इंच के औजार के उभार ने रेखा की जांघों के बीच एक अजीब सी मचलती हुई आग छोड़ दी थी। रेखा बेडरूम से निकलकर कबीर के खाली कमरे की तरफ बढ़ीं।

कबीर के बेडरूम में अभी भी एक जवान मर्द के जिस्म की सोंधी, कड़क महक बसी हुई थी। रूम स्प्रे की जगह वहां कबीर के पसीने, उसकी कसरती त्वचा और रात भर उसकी उंगलियों से बहे उसके काम-रस की एक कच्ची, मादक गंध तैर रही थी।

तभी रेखा के हाथ में पकड़ा हुआ मोबाइल बज उठा। स्क्रीन पर उनकी बहन स्मिता का नाम जगमगा रहा था। रेखा ने अपने गालों पर आती बिखरी जुल्फों को पीछे करते हुए मुस्कुराकर कॉल रिसीव किया।

"हाँ दीदी..." रेखा की आवाज़ में एक अजीब सा अलसाया, मदहोश खुमार था।

उधर, कुछ किलोमीटर दूर अपने विशाल बेडरूम में ५४ साल की स्मिता अपने किंग-साइज़ बेड की रेशमी चादर पर पूरी तरह उघाड़ी लेटी थीं। उनका भारी, ३६D का थलथला बदन पसीने की मद्धम बूंदों से चमक रहा था। उनके ठीक बगल में उनका बेटा अर्जुन बैठा था। अर्जुन का नग्न, कसरती बदन अपनी माँ के जिस्म से पूरी तरह सटा हुआ था, और उसका हाथ स्मिता की नग्न, गोरी जांघों को लगातार सहला रहा था।

स्मिता ने अपनी उंगलियों से अर्जुन की कड़क मूंछों को छुआ और फोन को तुरंत **लाउडस्पीकर** पर डाल दिया, ताकि उनका बेटा अर्जुन भी अपनी मौसी रेखा की एक-एक रसीली बात को साफ-साफ सुन सके।

"और मेरी कामुक रेखा! कैसी रही कल की नकाबपोश रात? कबीर ने तेरी उस ३६D जवानी का स्वाद चखा या तू सिर्फ मुखौटा पहनकर शर्माती रही?" स्मिता ने फोन पर अपनी रसभरी, मसालेदार देसी आवाज़ में चुटकी ली।

रेखा कबीर के बेडरूम के बेड के पास जाकर खड़ी हो गईं। उनकी ढीली जामुनी नाइटी उनके गोरे कंधों से थोड़ी खिसक गई थी, जिससे उनका आधा नग्न ३६D स्तन बाहर छलक रहा था।

रेखा ने बिना किसी झिझक के, बहुत ही खुले और रॉ अंदाज़ में हंसते हुए कहा, "उफ़्फ़ स्मिता... मत पूछ! तेरे इस नकाबपोश विचार ने तो कल रात मेरे बदन का कोना-कोना सुलगा दिया। कबीर... मेरा कबीर सच में पूरा मर्द है स्मिता!"

यह सुनते ही अर्जुन ने बेड पर सीधे होकर अपनी पीठ सीधी की। उसकी आँखें चमक उठीं। अर्जुन की मजबूत, खुरदरी हथेली स्मिता की नग्न कमर से नीचे खिसककर उनके भारी, थलथलाते चूतड़ के मांस को कसकर भींचने लगी।

स्मिता ने अपने बेटे के इस सख्त, कामुक स्पर्श को अपनी जांघों के बीच महसूस किया और फोन में फुसफुसाकर पूछा, "अच्छा? ज़रा खुल के बता ना रेखा! कबीर ने तेरे साथ क्या-क्या किया? उसने तुझे पहचाना या नहीं?"

रेखा ने कबीर की लॉन्ड्री बास्केट की तरफ देखा। वहाँ कल रात का कबीर का वह बिना धुला, काला कॉटन बॉक्सर पड़ा हुआ था—वही बॉक्सर जिसे पहनकर कबीर ने रात को अपनी माँ की याद में खुद को मुठ मारते हुए अपना गाढ़ा, गर्म काम-रस निकाला था।

रेखा ने आगे बढ़कर उस काले बॉक्सर को अपने गोरे हाथों में उठा लिया। जब उन्होंने उस बॉक्सर को अपनी नाक के बिल्कुल पास लाया, तो उसमें से कबीर के पसीने और उसके ताज़ा वीर्य की एक तीखी, कड़क और पूरी तरह से रॉ मर्दाना महक उनके नथुनों में समा गई। उस सोंधी महक ने रेखा की नसों में बिजली दौड़ा दी।

"पार्टी में तो उसने मुझे नहीं पहचाना स्मिता..." रेखा ने फोन पर अपनी आवाज़ को बेहद कामुक, भारी और हांफती हुई बनाते हुए कहा। "वह मुझे बस एक रसीली, अनजान औरत समझकर अपनी बाहों में भींचता रहा। जब वो मुझे डांस फ्लोर के अंधेरे कोने में ले गया, तो उसने सबसे पहले अपनी मजबूत हथेली मेरी कमर से नीचे खिसकाकर मेरे चूतड़ों पर रखी... और क्या बताऊँ स्मिता, उसने मेरे भारी चूतड़ के गोश्त को उस कपड़े के ऊपर से ही इतने रसूख से मसला कि मेरी चीख निकलते-निकलते बची!"

अर्जुन ने लाउडस्पीकर पर मौसी रेखा की यह बात सुनते ही अपनी माँ स्मिता के ३६D के गोरे स्तन को अपनी हथेली में पूरा भींच दिया। उसने अपने अंगूठे से स्मिता के बड़े, कड़े हो चुके भूरे निप्पल को बेरहमी से मरोड़ दिया।

"आहहह... उफ़्फ़..." स्मिता के मुंह से अचानक एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली। उन्होंने अपनी एक टांग अर्जुन की जांघ पर चढ़ा ली और फोन में फुसफुसाते हुए पूछा, "ओह... कबीर का औजार कैसा लगा?"

कबीर के बेडरूम में खड़ी रेखा ने अपने हाथ में पकड़े कबीर के उस गंदे, वीर्य से सने बॉक्सर को अपनी ढीली साटन नाइटी के भीतर डाल दिया। उन्होंने उस बॉक्सर के सूती कपड़े को अपनी नग्न, गोरी जांघों के बीच की पूरी तरह से शेव की हुई, चिकनी योनि की फांकों पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। कबीर के वीर्य की सोंधी महक सीधे उनकी नाक में जा रही थी और कबीर का ही बॉक्सर उनकी योनि के रसीले होठों को सहला रहा था।

"फिर वो मुझे और अंधेरे कोने में ले गया स्मिता..." रेखा ने फोन पर अपनी सांसों की रफ्तार तेज़ करते हुए कहा। उनकी उंगलियां कबीर के बॉक्सर के कपड़े के साथ अपनी योनि की फांकों को खंगाल रही थीं। "उसने अपना पूरा हाथ मेरी गाउन के गले में डाल दिया! उसने बिना ब्रा के मेरे उस ३६D स्तन को पूरा अपनी हथेली में भींच लिया... उसकी उंगलियों ने जब मेरे निप्पल को पकड़ा ना, तो मुझे लगा जैसे मेरा बदन पिघल गया। और सबसे बड़ी बात... उसके पैंट के भीतर उसका लंड लोहे की रॉड की तरह कड़ा था, जो मेरी जांघों के जोड़ पर लगातार रगड़ खा रहा था! इतना मोटा और कड़ा औजार... मैंने अपनी जिंदगी में महसूस नहीं किया था!"

फोन के उस पार, अर्जुन का ७ इंच का लंबा, मोटा और सांवला औजार पूरी तरह तड़प चुका था। अर्जुन ने अपनी माँ स्मिता की दोनों गोरी जांघों को पूरी ताकत से चौड़ा कर दिया। स्मिता की योनि भी अपनी बहन रेखा की ये रसीली बातें सुन-सुनकर पानी छोड़ चुकी थी।

अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए अपना कड़ा औजार सीधे अपनी माँ स्मिता की उस गीली, रसीली योनि के भीतर पूरा धकेल दिया और फोन पर रेखा मौसी से कहा "मेरा लंड भी वैसा नहीं क्या मौसी?"

तभी "आह्ह्ह्ह्ह... रेखा... उफ़्फ़... मार डाला!" स्मिता के मुंह से एक लंबी, बेबाक चीख निकली। अर्जुन उनके ऊपर पूरी तरह झुक गया और अपनी माँ के होठों को अपने मुंह में भरकर उनकी योनि में भारी, पाशविक धक्के मारने लगा। बेड के स्प्रिंग की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी।

रेखा कबीर के बेड पर चित्त लेट चुकी थीं। उनकी नाइटी पूरी तरह से ऊपर कमर तक खिसक चुकी थी, जिससे उनका ४९ साल का गोरा, थलथला और पूरी तरह नग्न पेट और उनकी शेव की हुई चिकनी जांघें पूरी तरह बेपर्दा थीं। रेखा कबीर के उस गंदे बॉक्सर के हिस्से को—जहाँ रात का कड़क वीर्य सूखा हुआ चिपका था—अपनी चिकनी रसीली चुत के मुख्य सुराख पर जोर-जोर से रगड़ रही थीं।

"और सुन स्मिता..." रेखा ने बेड पर अपने कूल्हों को ऊपर उठाते हुए, पूरी तरह काम-रस में डूबकर हांफते हुए कहा, "उसने अपनी दो उंगलियां मेरी पैंटी के किनारे से भीतर घुसा दीं! उसकी उंगलियां सीधे मेरी चिकनी, शेव की हुई योनि के भीतर तक धंस गईं! उसने मेरी चुत का सारा पानी अपनी उंगलियों पर निचोड़ लिया स्मिता... और इस वक्त... इस वक्त मैं कबीर के बेड पर लेटी हूँ... और कबीर के रात के पहने हुए बिना धुले बॉक्सर को... उसकी वीर्य की महक के साथ अपनी योनि में रगड़ रही हूँ! उफ़्फ़ कबीर... तेरा यह वीर्य... तेरी माँ को पागल कर रहा है!"

यह सुनते ही अर्जुन का दिमाग पूरी तरह बेकाबू हो गया। मौसी रेखा का अपने भाई कबीर के वीर्य वाले बॉक्सर से सोलो खेल सुनकर अर्जुन का औजार स्मिता की योनि के भीतर और ज्यादा अकड़ गया। उसने स्मिता के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और पूरी ताकत से स्मिता की योनि की दीवारों को फाड़ते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए।

"ओहhh... रेखा..." स्मिता फोन पर हांफते हुए चिल्लाने लगीं, उनका पूरा बदन अर्जुन के धक्कों से कांप रहा था, "तू... तू कबीर के बॉक्सर से खेल रही है... और यहाँ अर्जुन... अर्जुन मेरे भीतर... पूरा का पूरा उतर चुका है... आहहह! ये... ये मुझे इतनी बेरहमी से ठोक रहा है रेखा... कि मेरी आँखें बंद हो रही हैं!"

रेखा ने फोन पर अपनी बहन स्मिता की वो तीखी चीखें और अर्जुन के धक्कों की छप-छप आवाज़ सुनी, तो उनके अपने बदन की उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच गई। रेखा ने कबीर के बॉक्सर को अपनी योनि के होठों के भीतर और गहराई से दबाया और अपनी दो उंगलियों से अपने उभरे हुए दाने को गोल-गोल घुमाते हुए तेजी से रगड़ना शुरू कर दिया।

"हाँ स्मिता... ठोकने दे अर्जुन को..." रेखा ने अपनी आँखें बंद करके, अपनी जांघों को पूरी तरह हवा में फैलाते हुए चिल्लाया, "कबीर का औजार भी आज रात मेरी इस योनि में ऐसे ही धक्के मारेगा! सुबह जब वो उठा... तो मैंने उसकी आँखों में वही भूखा मर्द देखा है। वह मुझसे नज़रें चुरा रहा था, लेकिन मैंने उसे बता दिया कि उसकी माँ का यह ३६D बदन... सिर्फ उसी के औजार के लिए तड़प रहा है!"

अर्जुन ने फोन के पास झुककर, अपनी भारी, कड़क मर्दाना आवाज़ में हांफते हुए कहा, "मौसी... आप कबीर को छोड़ना मत! आज रात जब वो आए... तो उसको अपनी इस जवानी के रस में ऐसा डुबोना कि वो जिंदगी भर किसी और औरत को देखने लायक न रहे!"

"हाँ अर्जुन... आज रात ही यह पर्दा गिरेगा!" रेखा का पूरा सुडौल बदन अचानक अकड़ गया। कबीर के वीर्य से सने बॉक्सर की रगड़ और अपनी उंगलियों के तीखे खेल ने रेखा के ४९ साल के बदन को काम-रस के एक तूफानी चरम में झोंक दिया। रेखा की योनि से गर्म, गाढ़ा काम-रस छलककर कबीर के उस बॉक्सर के कपड़े पर पूरी तरह बह गया। रेखा बेड पर हांपती हुई ढीली पड़ गईं।

उधर, अर्जुन ने भी स्मिता की योनि की गहराई में अपना सारा गर्म वीर्य खाली कर दिया। दोनों तरफ सन्नाटा छा गया, सिर्फ दो कमरों में तीन जिस्मों की भारी, कामुक सांसें गूंज रही थीं।

फोन कट गया, लेकिन रेखा की आँखों में अब रात के उस आने वाले पल के लिए एक बेबाक, नग्न और अटूट आत्मविश्वास चमक रहा था।
 
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शाम के सात बज चुके थे। शहर की नाइटलाइफ़ धीरे-धीरे अपनी रंगीनियत बिखेर रही थी। पेंटहाउस के भीतर रोशनी मद्धम थी।
रेखा अपने ड्रेसिंग रूम में शीशे के सामने खड़ी होकर तैयार हो रही थीं। स्मिता की बातें उनके दिमाग में किसी शराब की तरह चढ़ी हुई थीं। उन्होंने आज खुद को छुपाने के बजाय अपने हुस्न को पूरी तरह से नुमाइश करने का फैसला किया था। उन्होंने एक गहरे जामुनी और सुनहरे बॉर्डर वाली सिल्क की साड़ी चुनी, लेकिन उसके साथ जो ब्लाउज़ पहना, वह आधुनिकता और कामुकता की सारी हदें पार कर रहा था।

गहरे गले का बैकलेस ब्लाउज़, जिसमें सिर्फ दो पतली डोरियाँ उनकी गोरी, नग्न पीठ को थामे हुए थीं। ब्लाउज़ का कट इतना गहरा था कि रेखा के ३६D के भारी स्तनों का आधा हिस्सा बाहर छलकने को आतुर दिख रहा था। उनकी कमर पर थोड़ा सा मांस लटक रहा था, जो देसी और रसीलेपन का चरम रूप था। रेखा ने अपने बालों को एक ढीले जूड़े में बांधा, जिससे उनकी गोरी, सुराहीदार गर्दन पूरी तरह नंगी हो गई। होठों पर गहरी लाल लिपस्टिक और आँखों में गीला काजल लगाकर जब रेखा शीशे के सामने घूमीं, तो खुद उनकी आँखों में भी एक नशा तैर गया।

तभी ड्रेसिंग रूम का दरवाज़ा खुला और कबीर भीतर आया। कबीर ने एक कसी हुई डार्क ब्लू रंग की फॉर्मल शर्ट और ब्लैक ट्राउज़र पहन रखा था, जिसमें उसका लंबा, कसरती बदन बेहद हैंडसम लग रहा था।

लेकिन जैसे ही कबीर की नज़र अपनी माँ रेखा पर पड़ी, उसके कदम वहीं ठिठक गए। उसकी आँखें पूरी तरह फैल गईं। रेखा साड़ी के पल्लू को अपनी भारी छाती पर सलीके से ढालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी नंगी पीठ और ब्लाउज़ से छलकते स्तनों का उभार किसी भी जवान मर्द का ईमान डोलने के लिए काफी था।

"वॉट द एफ... आई मीन, मॉम!" कबीर के मुंह से बेसाख्ता निकला। वह धीरे-धीरे चलकर रेखा के पीछे आकर खड़ा हो गया।

शीशे में दोनों की नजरें मिलीं। कबीर के सांवले, कड़े बदन के पीछे रेखा का यह रसीला, परिपक्व और बेबाक रूप एक अद्भुत कामुक दृश्य बना रहा था।

"क्या हुआ कबीर? मैं... मैं कैसी लग रही हूँ?" रेखा ने शीशे में कबीर की आँखों में अपनी काया के लिए पनपती हुई हवस और दीवानगी को साफ पढ़ते हुए पूछा। उनकी आवाज़ में लज्जा और नशा दोनों घुला था।

कबीर ने आगे बढ़कर अपने दोनों बड़े, गर्म हाथ रेखा की नंगी कमर पर रख दिए। जहाँ कबीर की उंगलियों की सांवली त्वचा रेखा की गोरी, मांसल कमर से छुई, वहाँ रेखा के बदन में एक सिहरन की बिजली दौड़ गई।

"मॉम... आप आज रात किसी भी सुपरमॉडल को चुटकियों में मात दे सकती हैं," कबीर ने फुसफुसाते हुए रेखा की नंगी पीठ पर अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए कहा।

कबीर की इस बेहद बेबाक टिप्पणी से रेखा के गालों पर सुर्खी दौड़ गई। उनके बदन का रोआँ-रोआँ सुलग उठा। उन्होंने मुड़कर कबीर के सीने पर हाथ रखा, जो शर्ट के भीतर भी लोहे की तरह सख्त था।

"चल, बहुत बातें बनाना सीख गया है विदेश में रहकर," रेखा ने झूठी डांट डांटते हुए कहा, लेकिन उनके होठों की मुस्कान उनके भीतर छिपी कामुक तड़प को साफ बयां कर रही थी। "चलो, स्मिता और अर्जुन हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे।"

रात के आठ बजे कबीर अपनी कार चलाकर स्मिता के पोर्टिको में दाखिल हुआ। घर आलीशान और बत्तियों की रोशनी में नहाया हुआ था।

गाड़ी से उतरकर कबीर ने रेखा का हाथ थाम लिया। जब दोनों बंगले के मुख्य हॉल में पहुँचे, तो स्मिता उनका स्वागत करने के लिए सामने खड़ी थीं।

स्मिता को देखते ही कबीर की नजरें एक पल के लिए चकाचौंध हो गईं। स्मिता ने हल्के नीले (आइस ब्लू) रंग की एक बेहद पारदर्शी शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी। उस पतली, पारदर्शी शिफॉन की साड़ी के भीतर से स्मिता की ३६D की भारी, गोरी छातियों का भारी उभार, उनकी नाभि का गहरा गड्ढा और उनकी चौड़ी, मांसल जांघों का ढांचा पूरी तरह से छनकर बाहर आ रहा था। उनका ब्लाउज़ भी काफी गहरा था, जिससे रात के समागम के बाद उनके बदन पर आया निखार और सुर्खी साफ झलक रही थी।

"कबीर! ओ माई गॉड! मेरा बच्चा कितना बड़ा और हैंडसम हो गया है!" स्मिता ने अपनी भारी, रसीली आवाज़ में चहकते हुए कहा।
कबीर आगे बढ़ा, "मौसी! लॉन्ग टाइम!"

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कबीर ने स्मिता को गले लगाने के लिए अपनी बाहें फैलाईं। स्मिता ने भी आगे बढ़कर अपने उस भारी, रसीले बदन को कबीर के कड़े, कसरती सीने से पूरी तरह से भींच लिया।

जैसे ही दोनों का आलिंगन हुआ, स्मिता के ३६D के भारी, नर्म और थलथलाते हुए उरोज कबीर की कसी हुई नीली शर्ट और उसकी छाती के मसल्स से बुरी तरह चपटे हो गए। स्मिता की पतली शिफॉन की साड़ी उनके बीच में कोई रुकावट ही नहीं बन पा रही थी। कबीर को अपने सीने पर स्मिता के स्तनों की वो अद्भुत, रसीली गर्माहट और कड़ापन साफ महसूस हुआ। स्मिता के महंगे परफ्यूम और उनके बदन की देसी खुशबू ने कबीर के नथुनों में प्रवेश किया, जिससे उसकी सासों की गति अचानक तेज हो गई।

कबीर के बड़े, मजबूत हाथ स्वाभाविक रूप से स्मिता की पतली शिफॉन से ढकी नंगी पीठ और उनकी कमर के ढलान पर थमे। शिफॉन का कपड़ा इतना महीन था कि कबीर को ऐसा लगा जैसे वह स्मिता की नंगी, गोरी त्वचा को ही छू रहा है।

"ओह मौसी... आप तो दिन-ब-दिन और भी ज़्यादा यंग और गॉर्जियस होती जा रही हैं," कबीर ने स्मिता की पीठ पर अपनी उंगलियों की पकड़ को थोड़ा कसते हुए कहा।

स्मिता ने कबीर को थोड़ा पीछे हटकर देखा, उनकी आँखों में एक नटखट और शरारती चमक थी। उन्होंने कबीर के कड़े बाइसेप्स पर हाथ फेरा और फिर रेखा की तरफ देखकर एक इशारेबाज़ मुस्कान दी।

"तारीफ तो तेरी मॉम की होनी चाहिए कबीर, देख तो सही आज कैसी कयामत ढा रही है मेरी बहन," स्मिता ने रेखा के गहरे गले के ब्लाउज़ और उनकी नंगी पीठ की तरफ इशारा करते हुए कहा।
तभी हॉल में अर्जुन दाखिल हुआ। ब्लैक कुर्ता-पायजामा में अर्जुन अपनी ६ फीट की चौड़ी, मर्दाना काया के साथ किसी राजा की तरह लग रहा था। उसकी आँखों में स्मिता के लिए एक मालिकाना हक और रेखा के प्रति एक गुप्त, कामुक तालमेल साफ दिख रहा था।

"कबीर भाई! वेलकम बैक!" अर्जुन ने आगे बढ़कर कबीर से हाथ मिलाया और उसे कसकर गले लगाया।

दो जवान, ताकतवर और रसूखदार मर्दो का यह मिलन माहौल में एक अलग ही ऊर्जा भर गया।

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चारों लोग लिविंग रूम में रखे आलीशान चमड़े के सोफे पर बैठ गए। रेखा और स्मिता एक साथ सोफे पर बैठी थीं। शिफॉन की साड़ी में स्मिता का रसीला बदन और सिल्क की साड़ी में रेखा का भारी, सम्मोहन से भरा रूप... दोनों बहनें किसी कामुकता की देवियों जैसी लग रही थीं। अर्जुन एक तरफ बैठा स्मिता के पारदर्शी शिफॉन के भीतर से झलकते स्तनों को अपनी गहरी नजरों से पी रहा था, जबकि कबीर बार-बार अपनी मॉम की नंगी पीठ और स्मिता की साड़ी से छलकती नाभि के गहरे गड्ढे को देखने से खुद को रोक नहीं पा रहा था।

रात के नौ बजे सभी लोग डाईनिंग टेबल पर इकट्ठा हुए। डार्क ग्लास की बनी बड़ी डाईनिंग टेबल पर तरह-तरह के लजीज देसी पकवान सजे हुए थे।

बैठने की व्यवस्था कुछ ऐसी थी कि अर्जुन और स्मिता एक तरफ बैठे थे, जबकि कबीर और रेखा उनके ठीक सामने।

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डिनर के दौरान बातचीत का दौर शुरू हुआ। स्मिता ने एक रोटी अर्जुन की प्लेट में रखी और अपने हाथों से अर्जुन की उंगलियों को हल्का सा दबाया। अर्जुन ने स्मिता की आँखों में देखा और टेबल के नीचे से अपना भारी, चौड़ा पैर आगे बढ़ा दिया। अर्जुन के नंगे पैर की उंगलियां स्मिता की पारदर्शी शिफॉन साड़ी के नीचे उनकी गोरी पिंडलियों और जांघों को धीरे-धीरे सहलाने लगीं। स्मिता के मुंह से खाना चबाते हुए एक मद्धम सी सिसकारी निकलने को हुई, जिसे उन्होंने वाइन का घूंट भरकर दबाया।

कबीर की नज़र टेबल के नीचे स्मिता की साड़ी की हल्की सी हलचल पर पड़ी, लेकिन वह समझ नहीं पाया। उसने अपनी मॉम रेखा की तरफ देखा।

रेखा अपनी प्लेट से पनीर कबाब उठाकर खा रही थीं, लेकिन उनकी नज़रें कबीर के कड़े होठों और उसके चौड़े सीने पर ही टिकी थीं।

"वैसे... इस वीकेंड दिल्ली के उस बड़े रियल एस्टेट टायकून, सिंघानिया का बुलावा आया है। उसने अपने नए रीसॉर्ट के लॉन्च पर एक बेहद अजीब और अजीबोगरीब थीम वाली प्राइवेट पार्टी रखी है। माँ और मौसी तो साफ मना कर रही हैं, और मैं भी थोड़ा हिचकिचा रहा हूँ," अर्जुन ने पास पड़े कार्ड को देखते हुए कहा। "तुझे जाना है तो चले जाना।" कबीर की ओर देखते हुए अर्जुन ने कहा।

कबीर ने टेबल पर रखे उस चमकीले कार्ड को उठाया। उस पर बड़े अक्षरों में लिखा था—**'द वेनेशियन सीक्रेट: ए नकाबपोश वाइन गाला'**।
नीचे पार्टी के नियम लिखे थे: *चेहरे पर पूरा मास्क अनिवार्य है।*

कार्ड पढ़ते ही कबीर की आँखों में विदेश वाला रोमांच और एक जवान पुरुष की उत्सुकता चमक उठी। "अरे भाई! यह तो 'मास्क्युराइड सीक्रेट' पार्टी है! इसमें कतराना कैसा? विदेशों में—पेरिस, न्यूयॉर्क और मिलान के रईस सर्कल्स में ऐसी पार्टियां होना बहुत आम बात है। वहाँ के बड़े-बड़े कपल्स और रईस लोग अपने रोज़मर्रा के तनाव से बाहर निकलने और एक अनजाना, थ्रिलिंग अनुभव पाने के लिए ऐसी पार्टियां रखते हैं। कसम से भाई, चलो ना... बहुत मज़ा आएगा!"

स्मिता ने तुरंत एक झिझक भरी, झूठी हंसी हंसने का नाटक किया। "धत्त कबीर... तुम भी क्या कह रहे हो। हम ठहरे इस उम्र के लोग। वहाँ सब नकाब पहनकर अनजान बनकर घूमेंगे, कोई किसी की कमर में हाथ डालकर डांस कर रहा होगा, कोई किसी को छू रहा होगा... हमारी सोसाइटी के हिसाब से यह बहुत अजीब और बोल्ड थीम है।"

"अरे बड़ी माँ, यही तो इस पार्टी का असली मज़ा है!" कबीर ने अपनी वाइन का ग्लास टेबल पर रखा और थोड़ा आगे झुका, जिससे उसकी चौड़ी छाती रेखा के उभरे हुए ३६D स्तनों के ऊपरी हिस्से से हल्की सी छू गई। उसने रेखा का हाथ थाम लिया। "मॉम, आप बताओ... आप खुद इतनी मॉडर्न हो। इस पार्टी का नियम ही यही है कि वहाँ कोई किसी का चेहरा नहीं देख सकता। सब नकाबपोश होंगे। वहाँ कोई मर्यादा या जजमेंट नहीं होता। चलो न कुछ नया ट्राई करते है।"

कबीर के मुंह से 'कोई किसी का चेहरा नहीं देख सकता। सब नकाबपोश होंगे' सुनकर रेखा के बदन का तापमान अचानक बढ़ गया। उनकी ब्लाउज के भीतर उनकी छाती ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगी। उन्हें स्मिता की वो बात याद आई—*"कबीर को तेरी इस परिपक्व काया का स्वाद चखाना होगा।"*

रेखा ने स्मिता की तरफ देखा, स्मिता की आँखों में एक गुप्त, कामुक चमक तैर रही थी। स्मिता ने रेखा के पैर को सोफे के नीचे हल्के से दबाया, मानो कह रही हों कि *शिकार खुद जाल बुन रहा है, हाँ कर दे।*

रेखा ने अपनी ज़ुबान से अपने सूखे होठों को धीरे से चाटा, जिससे कबीर की नज़रें एक पल के लिए उनके गुलाबी होठों पर टिक गईं। रेखा ने कबीर का हाथ थोड़ा भींचते हुए कहा, "कबीर... तुम कह तो सही रहे हो। लेकिन अगर वहाँ अंधेरे में किसी ने... किसी अनजान मर्द ने मुझे डांस के लिए हाथ पकड़ लिया, या कुछ ज्यादा... तो?"

"मॉम, यही तो उस विदेशी थीम का थ्रिल (रोमांच) है!" कबीर ने हंसते हुए बेबाकी से कहा। वाइन का नशा और कमरे में फैली इन दो मैच्योर औरतों के बदन की महक उसके दिमाग पर हावी हो रही थी।

"वहाँ सब नकाब के पीछे छिपे बदन का असली रस ढूंढते हैं। कोई किसी को मजबूर नहीं करता, सब आपसी कशिश और स्पर्श के खेल से आगे बढ़ता है। भाई, आप मना मत करना प्लीज। हम चारों चलेंगे!"

अर्जुन ने अपने होठों को दबाकर अपनी मुस्कान छुपाई। कबीर जिसे अपनी मर्जी और विदेशी शौक समझ रहा था, वह असल में उसके जीवन का सबसे बड़ा और सबसे रसीला मोड़ बनने जा रहा था।

अर्जुन ने अपनी रौबदार आवाज़ में कहा, "ठीक है कबीर, अगर तेरी इतनी ही इच्छा है... तो डन रहा। इस वीकेंड हम चारों सिंघानिया के उस फार्महाउस पर जा रहे हैं। लेकिन याद रखना... कोई किसी के नकाब की जानकारी न ले, सब नकाब के पीछे अनजान होंगे।"

स्मिता ने कबीर के कंधे को एक आखिरी बार भींचते हुए रेखा की तरफ देखा, जिनकी नाभि के नीचे इस आने वाले खेल की कल्पना से ही काम-रस का एक कतरा पिघलकर बह चुका था। कबीर को बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि वह खुद अपने हाथों से अपनी माँ के उस भारी, रसीले और नग्न बदन को छूने और उसे अपनी बाहों में भींचने का टिकट बुक कर चुका था। खेल की बिसात कबीर की ही मर्जी से बिछ चुकी थी।

कबीर की काट का इंजन स्टार्ट हुआ और लाल रंग की बैकलाइट्स पार्किंग से बाहर निकलकर शहर की सन्नाटे भरी सड़क पर गायब हो गईं। कबीर अपनी माँ रेखा को लेकर पेंटहाउस के लिए रवाना हो चुका था।

घर का दरवाज़ा बंद होते ही, माहौल की सारी औपचारिकताएं जैसे पल भर में ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।

लिविंग रूम में अब सिर्फ दो लोग बचे थे—अर्जुन और स्मिता।

स्मिता ने अपनी आइस-ब्लू पारदर्शी शिफॉन की साड़ी का पल्लू, जिसे उन्होंने कबीर के सामने कुछ हद्द तक संभाल रखा था, एक ही झटके में पूरी तरह कंधे से नीचे गिरा दिया। शिफॉन का वह महीन कपड़ा उनके पेट की नाभि के नीचे सरक गया। उनके ३६D के भारी, थलथलाते हुए उरोज अब सिर्फ एक पतले, नीले रंग के गहरे गले के ब्लाउज़ की कैद में थे। उनकी भारी क्लीवेज की घाटी पर पसीने की छोटी-छोटी बूँदें जगमगा रही थीं, जो उनके भीतर सुलगती वासना की गवाही दे रही थीं।

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अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए आगे बढ़कर स्मिता को पीछे से अपनी कसी हुई, मर्दाना बाहों में दबोच लिया। अर्जुन के दोनों बड़े, गर्म और सांवले हाथ सीधे स्मिता की साड़ी के ऊपर से उनकी छातियों पर पड़े और उसने उन्हें बेदर्दी से भींच दिया।

"अह्ह्ह... अर्जुन!" स्मिता के मुंह से एक तीखी, कामुक सिसकारी निकली। उन्होंने अपना सिर पीछे फेंककर अर्जुन के कड़े, चौड़े सीने पर टिका दिया।

अर्जुन ने अपनी भारी, रसीली आवाज़ में स्मिता के कान की लौ को अपने दांतों से दबाते हुए कहा, "देखा मां? जैसा तुमने कहा था, खेल बिल्कुल वैसा ही बिछ रहा है। कबीर खुद अपनी माँ को उस नकाबपोश रात की आग में झोंकने के लिए बेताब है।"

"उम्मम्म... अर्जुन, ज़रा धीरे..." स्मिता ने आंहें भरते हुए अर्जुन की दाढ़ी वाली गर्दन पर अपने हाथ फेरे। "कबीर को नहीं पता कि वहां उसे जन्नत महसूस होने वाली है।"

अर्जुन ने स्मिता को घुमाकर अपनी तरफ किया। स्मिता की आँखों में वाइन और कामुकता का एक तीखा, गंदा नशा चढ़ चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, भारी हाथ से स्मिता के बैकलेस ब्लाउज़ की डोरी खींच दी। डोरी खुलते ही वह भारी गोरा उरोज ब्लाउज़ की सीमा तोड़कर बाहर छलक आया। उनका भूरा, बड़ा निप्पल रात भर की मार और अभी की तपन से पूरी तरह अकड़ा हुआ था।

"सच बताओ मां..." अर्जुन ने अपने अंगूठे और उंगली की चुटकी में स्मिता के उस अकड़े हुए निप्पल को कसकर मरोड़ते हुए पूछा, "जब कबीर तुझे गले लगा रहा था, उसकी छाती तेरे इस भारी बदन से सट रही थी... तब तेरे मन में क्या चल रहा था?"

"अहह्ह... ओफ़्फ़... अर्जुन! मत पूछ..." स्मिता की सांसें फूलने लगीं, उनकी आँखों की पुतलियां ऊपर चढ़ गईं। "जब उसने मुझे भींचा, तो मेरे भी इस बदन में नीचे तक झनझनाहट हो गई। मुझे तो तभी समझ आ गया था कि जब यह कड़ा मर्दाना लंड रेखा की रसीली चूत के भीतर जाएगा ना... तो रेखा चीख उठेगी!"

अर्जुन ने एक दरिंदगी भरी, कामुक हंसी हंसते हुए स्मिता की साड़ी को कमर से नीच खींच दिया। स्मिता की भारी, चौड़ी चूतड़ों का उभार और उनकी जांघों का मांस पूरी तरह नंगा हो गया। अर्जुन ने अपने भारी हाथ का एक कड़ा थप्पड़ सीधे स्मिता के दाहिने चूतड़ पर दे मारा—**'चटाक!'**

"आहहह! अर्जुन... मारो मुझे!" स्मिता वासना में अंधी होकर सिसक उठीं।

"दोनों बहनों का बदन रसीला है," अर्जुन ने स्मिता की साड़ी के साये के भीतर अपना हाथ डालते हुए उनकी भीगी हुई, गर्म चूत की दरार में अपनी दो उंगलियां एक ही झटके में पूरी भीतर उतार दीं। "कबीर जब उस नकाबपोश अंधेरे में अपनी माँ की इस चूत में उंगलियां डालेगा, और रेखा को लगेगा कि कोई जवान मर्द खुद बेटा कबीर उसे चोदने वाला है... तब देखना असली मजा!"

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अर्जुन ने स्मिता को वहीं सोफे पर उल्टा गिरा दिया। शिफॉन की साड़ी, पेटीकोट सब तहस-नहस होकर एक तरफ पड़ा था। अर्जुन ने अपना पजामा नीचे सरकाया और अपने भारी, अकड़े हुए काले लंड को सीधे स्मिता की काम-रस से लबालब भरी चूत के मुहाने पर टिकाकर एक ही धक्के में पूरा भीतर उतार दिया।

सोफे की स्प्रिंगें चरमरा उठीं और पूरे घर में स्मिता की बेबाक, गंदी सिसकारियां और अर्जुन के मर्दाना धक्कों की तीखी आवाज़ें गूंजने लगीं।

दूसरी तरफ, कार पेंटहाउस की पार्किंग में आकर रुकी।

पूरे रास्ते कबीर और रेखा के बीच एक अजीब सी खामोशी छाई रही थी। गाड़ी की एसी की ठंडक के बावजूद रेखा के बदन से एक अजीब सी तपन निकल रही थी। कबीर बीच-बीच में अपनी नीली शर्ट के कॉलर को ढीला करता और साइड ग्लास से रेखा की साड़ी के बैकलेस ब्लाउज़ से झांकती उनकी नंगी पीठ और उनकी गोरी गर्दन को निहारता रहा था।

जब दोनों पेंटहाउस के भीतर पहुँचे, तो पूरे घर में एक गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था।

रेखा ने लिविंग रूम की मद्धम पीली लाइट्स ऑन कीं। साड़ी का सिल्क उनकी भारी जांघों और चूतड़ों से रगड़ खा रहा था।

"कबीर... तू जा, जाकर सो जा। बहुत देर हो गई है," रेखा ने बिना कबीर की तरफ देखे, अपनी कांपती आवाज़ में कहा। वह सीधे अपनी अलमारी या बेडरूम की तरफ भागना चाहती थीं, क्योंकि उनके भीतर की कामुक ज्वाला अब उनके नियंत्रण से बाहर हो रही थी।

लेकिन कबीर ने पीछे से आकर रेखा की कलाई पकड़ ली।

कबीर की सांवली, चौड़ी और गर्म हथेली का दबाव जब रेखा की पतली कलाई पर पड़ा, तो रेखा का पूरा वजूद वहीं जम गया। उन्होंने मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर एक जवान पुरुष का वह अधिकार भाव था, जो किसी भी औरत के सब्र को तोड़ दे।

"मॉम... कुछ सोच रही हो?" कबीर की भारी, रसीली आवाज़ ने सन्नाटे को चीर दिया। वह एक कदम और आगे बढ़ा, जिससे उसकी कसी हुई शर्ट रेखा के साड़ी से ढके स्तनों के उभार को हल्की सी छूने लगी।

"आप उस नकाबपोश पार्टी की बात से डरी हुई हैं ना?" कबीर ने एक हल्की सी शरारती मुस्कान के साथ कहा। उसने रेखा की कलाई को छोड़ा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को सरकाते हुए रेखा की गोरी बांह से होते हुए उनके नंगे, सुडौल कंधे पर ले गया।

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"मॉम... आप भूल रही हैं कि उस पार्टी में आप अकेली नहीं होंगी," कबीर ने फुसफुसाते हुए अपना चेहरा रेखा के चेहरे के इतना करीब कर लिया कि उसकी गर्म, शराब से महकती सांसें रेखा के सुर्खी लगे होठों पर टकराने लगीं। "मैं वहाँ रहूँगा। अगर कोई अनजान मर्द आपको छूने की कोशिश करेगा... तो पहले उसे मुझसे गुज़रना होगा।"

"कबीर... ऐसी बात नहीं पर... थोड़ा अजीब लगेगा न" रेखा की आवाज़ गड़गड़ा गई।

"मैं समझता हूं मॉम, चिल, आराम करो और जिंदगी बिना टेंशन जियो। जो होगा देखा जाएगा। हम अकेले तो होंगे नहीं पार्टी में, सब बड़े और अपने लेवल के ही तो होंगे।" कबीर ने बेबाकी सें कहा और अपना दूसरा हाथ रेखा की नंगी कमर पर रख दिया।

"गुड नाइट, मॉम..." कबीर फुसफुसाते हुए एक मदमस्त चाल से अपने बेडरूम की तरफ बढ़ गया।

रेखा वहीं लिविंग रूम के बीचों-बीच खड़ी रह गईं। उनका पूरा बदन थर-थर कांप रहा था। कबीर के हाथों का वो भारी दबाव अभी भी उनकी नंगी कमर पर छपा हुआ महसूस हो रहा था। उनकी साड़ी के भीतर उनकी पैंटी पूरी तरह से भीगकर चिपक चुकी थी।

रेखा ने कांपते हाथों से अपनी साड़ी के पल्लू को सीने पर भींचा और अपने कमरे की तरफ बढ़ीं। उस आने वाले वीकेंड की 'मास्क्युराइड प्राइवेट पार्टी' की कल्पना मात्र से ही उनके बदन के हर एक पोर से हवस का रस छलकने लगा था। उन्हें पता था कि नकाब के पीछे उस रात कोई मर्यादा नहीं बचेगी—माँ और बेटे के बीच का आखिरी पर्दा भी उसी फार्महाउस की रोशनी में जलकर राख होने वाला था।

अपने मास्टर बेडरूम का दरवाज़ा बंद करते ही रेखा ने पीछे मुड़कर लॉक लगा दिया। 'क्लिक' की वह हल्की सी आवाज़ सन्नाटे में गूंजी, और उसी के साथ रेखा की बची-कुची रोक-टोक और सामाजिक मर्यादा की दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

कमरे का वातानुकूलित सन्नाटा और उसमें तैरती हुई लैवेंडर की ठंडी खुशबू रेखा के भीतर उठती हुई भयंकर आग को शांत करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही थी। कबीर की सांवली उंगलियों की तपन, उसका वह ६ फीट का कसरती बदन, और उसकी शराब से महकती बेबाक बातें रेखा के पूरे वजूद में किसी ज़हर की तरह फैल चुकी थीं।

रेखा मखमली कदमों से चलकर ड्रेसिंग टेबल के बड़े से शीशे के सामने आकर खड़ी हो गईं।

पीली, मद्धम डिम-लाइट में शीशे के भीतर उनका अपना ही रूप एक अद्भुत, सम्मोहक और कामुक दृश्य बना रहा था। सिल्क की साड़ी, जो अब तक उन्हें एक रसूखदार औरत की पहचान दे रही थी, अब उनके बदन पर किसी लोहे की जंजीर की तरह चुभने लगी थी।

उनकी ४९ साल की परिपक्व काया का रोआँ-रोआँ उस एक स्पर्श के बाद से सुलग रहा था।

कांपती, गोरी उंगलियों से रेखा ने अपनी साड़ी के पल्लू को धीरे से कंधे से नीचे सरकाया। पिन की तीखी चुभन के साथ ही साड़ी फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।

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अब वह सिर्फ अपने बैकलेस ब्लाउज़ और पेटीकोट में खड़ी थीं। रेखा ने शीशे में अपनी नंगी पीठ को देखा, उन्होंने उंगलियों को पीछे ले जाकर ब्लाउज़ की पतली डोरियों को खींचा।
डोरियाँ खुलते ही ब्लाउज़ का कसाव ढीला पड़ा, और रेखा ने उसे अपनी बाहों से उतारकर नीचे फेंक दिया।

३६D के वे भारी, मखमली और थलथलाते हुए गोरे उरोज ब्लाउज की बंदिश से पूरी तरह आज़ाद होकर नीचे लटक गए। रात भर की तपन और कबीर की कसी हुई छाती के दबाव की वजह से उनके बड़े, भूरे निप्पलों पर एक तीखा कड़ापन और सुर्खी साफ दिख रही थी। रेखा के भारी स्तनों की क्लीवेज में पसीने का एक रसीला कतरा जगमगा रहा था।

रेखा ने एक लंबी, कांपती हुई सांस ली। उनकी नाभि का गहरा गड्ढा और कमर का मांसल उभार हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहा था।
"अहह्ह... गॉड..." रेखा के मुंह से एक दबी हुई सिसकारी निकल गई।

उन्होंने अपने पेटीकोट के नाड़े को एक ही झटके में खोल दिया। रेशमी पेटीकोट और उसके नीचे छिपी भीगी हुई मखमली पैंटी एक साथ सरकते हुए उनकी भारी, गोरी जांघों से होकर पैरों के पास फर्श पर जमा हो गए।

रेखा अब अपने विशाल बेडरूम के शीशे के सामने पूरी तरह नग्न अवस्था में खड़ी थीं। ४९ साल की उम्र का वह भारी, थलथलाता और काम-रस से सराबोर देसी बदन—चौड़े चूतड़, गोरी-मांंसल जांघें, और उनके बीच कामुकता से दमकता हुआ वह रसीला रसातल।

रेखा धीरे-धीरे चलकर अपने किंग-साइज़ बेड पर पहुँचीं और मखमली चादरों पर पीठ के बल ढह गईं। बंद आँखों के अंधेरे में उन्हें सिर्फ और सिर्फ कबीर का चेहरा दिखाई दे रहा था।

कबीर के सांवले, कड़े बाइसेप्स, उसकी शर्ट के भीतर दबे लोहे जैसे कड़े मसल्स, और जब उसने रेखा की कमर को अपने हाथ के पकड़ा था, रेखा के दिमाग में एक तीखा नशा घोल रहा था।

"उफ़्फ़... कबीर..." रेखा ने सिसकते हुए अपने दोनों भारी, गोरे हाथों को अपनी ही ३६D छातियों पर रख दिया।

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उनकी अपनी गोरी उंगलियां जब उनके भूरे, अकड़े हुए निप्पलों को कसकर मरोड़ने लगीं, तो रेखा ने अपनी आँखें और कसकर मूंद लीं। उन्हें महसूस हुआ जैसे यह हाथ उनका अपना नहीं, बल्कि उनके २८ साल के जवान बेटे कबीर का है। उन्हें लगा जैसे कबीर का भारी, सांवला बदन उनके ऊपर झुका हुआ है और अपनी भारी मर्दाना छाती से उनके इन थलथलाते स्तनों को कुचल रहा है।

"अहह्ह... दबाओ... कबीर... अपनी मॉम को कसकर भींच लो..." रेखा बेडशीट को अपने गोरे पैरों की उंगलियों से भींचते हुए बड़बड़ाने लगीं।

उनकी एक हथेली धीरे-धीरे छाती से नीचे सरकती हुई, उनकी नाभि के रसीले गड्ढे को पार कर, उनकी भारी जांघों के बीच जा पहुँची।
कबीर के उस एक स्पर्श और उसकी बेबाक बातों के जादू से रेखा की जांघों के बीच की दरार पूरी तरह काम-रस से लबालब भरी हुई थी। काम-रस का एक गरम, गाढ़ा कतरा पिघलकर उनकी जांघों की ढलान पर बह रहा था।

रेखा ने बिना किसी झिझक के अपनी दो उंगलियां अपनी उस भीगी हुई, गर्म और सुलगती हुई चुत के भीतर एक ही झटके में उतार दीं।

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"आहह्हह... स्मिता... तू सही कह रही थी..." रेखा का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया। उनकी कमर बेड से एक इंच ऊपर उठ गई। उनकी उंगलियां तेजी से भीतर-बाहर होने लगीं, जिससे कमरे के सन्नाटे में एक तीखी,
बहुत ही गरमागरम शानदार लाजवाब और मदहोशी से भरपूर उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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सिंघानिया का वह आलीशान फार्महाउस शहर के बाहरी इलाके में कई एकड़ में फैला हुआ था। रात के दस बज चुके थे और पूरा फार्महाउस किसी रहस्यमयी, इरोटिक वेनेशियन पैलेस में तब्दील हो चुका था। हवेली के भीतर की लाइटें बेहद मद्धम थीं—केवल नीली, बैंगनी और गहरी लाल रंग की लेज़र लाइटें हवा में तैर रही थीं, जिससे वहाँ मौजूद लोगों के केवल बदन के ढांचे और उनके पहने हुए मुखौटे ही नजर आ रहे थे। बैकग्राउंड में एक बहुत ही लाउड, मदहोश करने वाला बेस-म्यूजिक बज रहा था, जो सीधे बदन की नसों में उतरकर खून की रवानी को तेज कर रहा था।

रेखा उस रात बेटे कबीर के साथ नहीं आई थीं। उन्होंने सुबह ही बहाना बना दिया था कि उन्हें बुटीक और पार्लर में कुछ ज्यादा वक्त लग जाएगा, इसलिए वह सीधे सिंघानिया के फार्महाउस ही पहुंचेंगी। यह स्मिता, रेखा और अर्जुन की गुप्त योजना का हिस्सा था।

जब रेखा अपनी पर्सनल सेडान गाड़ी से फार्महाउस के पिछले वीआईपी गेट पर उतरीं, तो रात का सन्नाटा उनकी काया की गर्मी से पिघलने लगा था। उन्होंने वह ब्लैक शिफॉन साड़ी नहीं पहनी थी जो घर पर तय हुई थी। ४९ साल की रेखा ने उस रात गहरे बैंगनी और जामुनी रंग की एक बेहद मॉडर्न, इंडो-वेस्टर्न वेल्वेट गाउन ड्रेस पहनी थी। यह लिबास इतना कड़क और कातिलाना था कि उनके बदन का एक-एक इंच हिस्सा नग्नता और कशिश की गवाही दे रहा था।

इस जामुनी गाउन का स्ट्रेचेबल वेलवेट फैब्रिक रेखा की ४९ साल की परिपक्व काया पर किसी दूसरी त्वचा की तरह चिपका हुआ था। ड्रेस का गला (नेकलाइन) इतना गहरा, चौड़ा और लचीला था कि उनके भारी प्लस-साइज़ स्तनों का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा ऊपर से बिल्कुल नग्न, गोरा और बेपर्दा चमक रहा था। स्तनों के बीच की गहरी, रसीली घाटी में मद्धम लाल रोशनी पड़ रही थी। रेखा ने उस रात अपने इन विशाल उरोजों के नीचे कोई ब्रा नहीं पहनी थी; वह पूरी तरह से 'ब्रा-लेस' थीं। ब्रा न पहनने की वजह से उनके भारी स्तनों का प्राकृतिक थलथलापन और उनके बड़े, कड़े हो चुके भूरे निप्पलों का उभार उस महीन वेलवेट कपड़े को अंदर से लगातार फाड़ देने की हद तक धकेल रहा था।

नीचे से उस गाउन में बाईं जांघ के ठीक ऊपर से शुरू होकर कमर के ऊपरी हिस्से तक का एक बेहद लंबा और तीखा स्लिट (कट) था। रेखा ने आज अपनी इस भारी काया के नीचे कोई स्किन कलर नायलॉन नहीं पहना था। उन्होंने अपनी चौड़ी, मांसल जांघों और भारी चूतड़ों के बीच केवल एक बेहद पतली, महीन काली रेशमी लेस वाली पैंटी पहन रखी थी। उनकी जांघों और बिकनी लाइन की त्वचा को पूरी तरह से शेव किया गया था, जिससे उनकी गोरी त्वचा मक्खन की तरह चिकनी और साफ थी। उस पतली पैंटी का रेशमी कपड़ा उनके उस कच्चे, रसीली चुत की दोनों भारी फांकों के बीच पूरी तरह से धंसा हुआ था, जिसे बिना उतारे भी केवल एक उंगली से सरकाकर सीधे उनके जीवन के सबसे रसीले हिस्से तक पहुँचा जा सकता था। उनके चेहरे पर सोने और काले रंग का एक भारी वेनेशियन मास्क था, जिसने उनकी आँखों और चेहरे को पूरी तरह से एक रहस्यमयी पहेली बना दिया था।

कबीर पार्टी के भीतर पिछले आधे घंटे से घूम रहा था। उसने ब्लैक सूट और सफेद शर्ट पहनी थी, और उसके चेहरे पर भी काले रंग का मुखौटा था।

स्मिता और अर्जुन दूर एक वीआईपी लाउंज में वाइन के ग्लास हाथ में लिए, मद्धम अंधेरे का फायदा उठाकर एक-दूसरे से सटकर बैठे थे और उनकी नजरें कबीर पर ही टिकी थीं।


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"देखो अर्जुन, तुम्हारा भाई पूरी तरह से इस माहौल के नशे में डूब रहा है," स्मिता ने अर्जुन के कान के पास अपनी रसभरी आवाज़ में फुसफुसाया। "और उधर देखो... रेखा ने आज जो जामुनी लिबास पहना है, कसम से, उसने तो पूरे हॉल की औरतों को फीका कर दिया है। कबीर की नजरें अब बस उस पर पड़ने ही वाली हैं।"

"मुझे पता था माँ," अर्जुन ने मुस्कुराते हुए स्मिता की रेशमी साड़ी के ऊपर से उनकी भारी कमर को भींचा। "कबीर ने आज तक सिर्फ विदेशों की सूखी लड़कियां देखी हैं। जब वह मौसी के इस भारी, रसीले और मैच्योर बदन के करीब जाएगा, तो उसका पुरुष मन हमेशा के लिए इस देसी भराव का गुलाम हो जाएगा। बस देखते जाओ।"

कबीर ने विदेश में ढेरों नकाबपोश पार्टियां देखी थीं, लेकिन आज इस माहौल में जो तीखा, देसी और कच्चा (raw) सम्मोहन था, उसने उसके २८ साल के कड़े मर्दाना बदन के भीतर एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी थी।

तभी कबीर की नजर बार काउंटर के पास खड़ी उस जामुनी गाउन वाली नकाबपोश महिला पर पड़ी।

मद्धम नीली रोशनी रेखा के उस भारी, सुडौल और ४९ साल के परिपक्व बदन पर पड़ रही थी। कबीर के पैर अनजाने में उसी तरफ बढ़ने लगे। उसे लगा कि यह शहर के किसी रईस खानदान की कोई तलाकशुदा या बोल्ड हाई-सोसाइटी महिला है, पल भर के लिए उसे ख्याल न आया कि असल में वो है कौन। रेखा चूंकि जानती थी कबीर क्या पहनने वाला है, जानती थी वो कबीर ही है, उसका अपना बेटा। जैसे ही कबीर को अपनी तरफ आते देखा, रेखा के दिल की धड़कन बढ़ गई। उन्होंने तुरंत अपनी आवाज़ को पूरी तरह से भारी और एक विदेशी, मद्धम लहजे में बदल लिया।

"अलोन, हैंडसम?" रेखा ने अपनी आवाज़ को गले के भीतर ही दबाकर, बेहद कामुक फुसफुसाहट में कहा।

कबीर ने मुस्कुराते हुए अपना स्कॉच का ग्लास बार काउंटर पर रखा और रेखा के बिल्कुल करीब आ गया। "इस खूबसूरत और कातिलाना रात में अगर आपके जैसी हसीन पहेली अकेली खड़ी हो, तो किसी भी मर्द का अकेला रहना गुनाह हो जाता है। मे आई?" कबीर ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

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रेखा ने बिना कुछ बोले अपना कोमल, गोरा हाथ कबीर की मजबूत हथेली में दे दिया। कबीर उन्हें लेकर सीधे डांस फ्लोर के उस कोने की तरफ बढ़ गया, जहाँ रोशनी सबसे कम थी और सिर्फ गहरी लाल लेज़र लाइटें हवा में तैर रही थीं। बेस-म्यूजिक धीमा और धीमा होता गया, और एक बेहद सेंसुअल, धीमा गाना बजने लगा।

कबीर ने आगे बढ़कर अपना दायां हाथ रेखा की उस जामुनी गाउन से ढकी भारी, मांसल कमर पर रख दिया। रेखा ने अपना हाथ कबीर के चौड़े, कड़े कसरती कंधे पर रखा। जैसे ही कबीर ने उन्हें अपनी तरफ खींचा, रेखा के ३६D के वो भारी, ब्रा-लेस स्तन बिना किसी रुकावट के कबीर की चौड़ी, कड़क छाती से पूरी तरह भींच गए।

कबीर को साफ महसूस हुआ कि उस औरत के स्तनों में कोई पैडिंग या ब्रा का तार नहीं था; वह पूरी तरह से कच्चे, असली और थलथलाते हुए गोश्त के दो विशाल लोथड़े थे जो उसकी छाती को दबा रहे थे।

"उफ्फ..." कबीर के मुंह से एक भारी सांस निकली। रेखा के बदन से उठने वाली महंगे विदेशी परफ्यूम और उनके जिस्म की अपनी सोंधी, गर्म महक ने कबीर के खून में आग लगा दी।

स्मिता और अर्जुन दूर खड़े होकर इस पहले डांस को देख रहे थे। स्मिता ने देखा कि कैसे कबीर का हाथ धीरे-धीरे रेखा की पीठ पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था। "अर्जुन, देखो... कबीर अब धीरे-धीरे उसके बदन के सम्मोहन में आ रहा है। उसके कदम देखो, वह रेखा को और करीब खींच रहा है।"


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"हाँ माँ, कबीर का पुरुष स्वभाव अब जाग रहा है। उसे समझ आ रहा है कि इस जामुनी वेलवेट के नीचे जो बदन है, वो कितना कीमती और रसीला है," अर्जुन ने अपनी गहरी नजरें टिकाए हुए कहा।

जैसे-जैसे गाना आगे बढ़ा, कबीर की मर्दाना बेबाकी बढ़ने लगी। वह कबीर जो अपनी माँ के सामने हमेशा एक संस्कारी बेटा बनकर रहता था, आज इस नकाबपोश रात के अंधेरे में एक पूरा भूखा और बेकाबू मर्द बन चुका था। उसने अपनी हथेली को रेखा की कमर से थोड़ा नीचे सरकाया। उसका हाथ रेखा के उन चौड़े, मांसल और भारी चूतड़ों (कूल्हों) के ढलान पर चला गया। कबीर ने अपनी मजबूत उंगलियों को फैलाया और रेखा के उस ४९ साल के भारी चूतड़ के मांस को उस टाइट वेलवेट कपड़े के ऊपर से ही पूरी तरह से भींच दिया।


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"आह..." रेखा के मुंह से एक तीखी, दबी हुई सिसकारी निकली जो लाउड म्यूजिक के पीछे छिप गई। उनके बदन में एक ४४० वोल्ट का करंट दौड़ गया। उनका अपना २८ साल का जवान, हट्टा-कट्टा बेटा उनके कूल्हों को इतनी बेरहमी और मर्दाना रसूख से मसल रहा था। रेखा ने विरोध करने का नाटक करते हुए कबीर की छाती पर थोड़ा सा दबाव बनाया।


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"नो... प्लीज... नॉट दिस मच। आई एम मैरिड..." रेखा ने अपनी बदली हुई, भारी आवाज़ में थोड़ा सा कतराते हुए फुसफुसाया।

कबीर ने रेखा को अपनी तरफ और कसकर भींच लिया। उसका पैर रेखा की टांगों के बीच फंस चुका था, जिससे उसकी जींस के भीतर लोहे की रॉड बन चुका उसका कड़ा मर्दाना औजार सीधे रेखा की जांघों के जोड़ पर उस पारदर्शी स्लिट के पास रगड़ खाने लगा था।


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"इट्स ओके इन द पार्टी, ब्यूटीफुल..." कबीर ने रेखा के कान के बिल्कुल पास आकर, अपनी भारी और रसीली मर्दाना आवाज़ में कहा। उसकी गर्म सांसें रेखा की गोरी गर्दन को झुलसा रही थीं। "इस नकाब के पीछे कोई शादीशुदा नहीं होता, कोई कुंवारा नहीं होता। यहाँ सिर्फ एक मर्द है और एक बेहद रसीली, सम्मोहक औरत। तुम्हारा यह भारी बदन खुद गवाही दे रहा है कि तुम्हें एक मजबूत मर्द के स्पर्श की कितनी भूख है।"

कबीर की इस मर्दानी जिद और बेबाकी ने रेखा के भीतर की बची-कुची मर्यादा को भी पिघला दिया। उन्होंने कबीर के कंधे पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।


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कबीर अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। उसने अपना बायां हाथ रेखा के उस गहरे, स्ट्रेचेबल गाउन के गले के भीतर डाल दिया। वेलवेट का कपड़ा नीचे सरक गया, और कबीर की बड़ी, खुरदरी हथेली सीधे रेखा के उस नग्न, गोरे और ३६D के भारी ब्रा-लेस स्तन पर जा टिकी। रेखा की त्वचा पर कोई बाल नहीं थे, वह पूरी तरह से साफ और चिकनी थी। कबीर ने उस भारी स्तन को अपने हाथ में पूरा भींच लिया। मक्खन जैसा मुलायम गोश्त उसकी उंगलियों के बीच से बाहर छलक रहा था। कबीर ने अपनी उंगलियों के पोरों से रेखा के उस बड़े, कड़े हो चुके भूरे निप्पल को पकड़ा और उसे हल्के से मरोड़ दिया।

"उम्मम्म... आहहह..." रेखा ने अपनी आँखें मूंद लीं। दर्द और चरम उत्तेजना के उस कच्चे मिश्रण ने उनकी जांघों के बीच एक अजीब सी तड़प पैदा कर दी।

कबीर का हाथ अब थमा नहीं। वह डांस करते-करते रेखा को दीवार के एक और भी ज्यादा अंधेरे कोने की तरफ ले गया। कबीर का दायां हाथ रेखा के उस लंबे स्लिट (कट) के भीतर दाखिल हुआ। वेलवेट का कपड़ा हटा, और कबीर की उंगलियां रेखा की उस नग्न, गोरी, चिकनी और पूरी तरह से शेव की हुई रेशमी जांघ को सहलाने लगीं। कबीर का हाथ ऊपर और ऊपर बढ़ता गया, जहाँ केवल उस पतली, काली रेशमी लेस वाली पैंटी का घेरा था।


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कबीर की उंगलियां जैसे ही उस पैंटी के रेशमी कपड़े के ऊपर से रेखा की योनि के उभरे हुए मांसल हिस्से (माउंड) पर पड़ीं, उसे महसूस हुआ कि वह हिस्सा पूरी तरह से गर्म और काम-रस से तर हो चुका था। पैंटी का वह काली लेस वाला कपड़ा रेखा के अपने ही बेटे के स्पर्श की गर्मी से पूरी तरह भीग चुका था। कबीर ने अपनी दो उंगलियों को उस पतली पैंटी के किनारे से भीतर डाला। उसकी उंगलियां सीधे रेखा की उस चिकनी, शेव की हुई बिकनी लाइन को पार करती हुई उनकी योनि की दोनों रसीली, भारी फांकों के बीच पूरी तरह से धंस गईं।

"ओह गॉड... You are already wet" कबीर ने रेखा के होठों के ठीक पास आकर अपनी भारी आवाज़ में फुसफुसाया।
उसने अपनी उंगली को रेखा के उस कच्चे, रसीले हिस्से के भीतर थोड़ा और गहराई तक धकेल दिया। रेखा का तीखा, असली काम-रस कबीर की उंगलियों पर पूरी तरह से लिपट गया। रेखा ने अपनी सिसकारियों को मास्क के पीछे छुपाने के लिए अपने दांतों से अपने निचले होंठ को काट लिया। उनका पूरा बदन कांप रहा था; उनका अपना जवान बेटा उनकी पैंटी के भीतर अपनी उंगलियां डालकर उनके बदन का रस निचोड़ रहा था, और वह एक अंजान औरत बनकर इस असीम सुख को भोग रही थीं।

गाना खत्म होने को आया, तो रेखा ने पूरी ताकत बटोरी और कबीर को हल्के से पीछे धकेल दिया। "अब... अब बस करो... मुझे जाना होगा," रेखा ने हांफते हुए अपनी बदली हुई आवाज़ में कहा और बिना एक पल गंवाए, अंधेरे का फायदा उठाकर सीधे वीआईपी एग्जिट (निकास) की तरफ दौड़ पड़ीं, जहाँ उनकी गाड़ी पहले से तैयार खड़ी थी।

कबीर वहीं खड़ा हांफ रहा था। उसने अपनी उंगलियों को देखा, जिन पर उस जामुनी गाउन वाली औरत की योनि का रसीला पानी चमक रहा था। कबीर ने अपनी उंगलियों को अपने होठों के पास लाया और उन्हें सूंघा—एक बेहद तीखी, मादक और पूरी तरह से रॉ देसी औरत के काम-रस की महक उसके नथुनों में समा गई।

पार्टी खत्म होने के बाद, कबीर अर्जुन की गाड़ी में बैठकर अकेले वापस अपने घर की तरफ लौट रहा था। अर्जुन और स्मिता फार्महाउस पर ही रुक गए थे। पूरी रात कबीर के दिमाग में सिर्फ उसी जामुनी गाउन वाली नकाबपोश औरत का बदन, उसके ३६D के भारी ब्रा-लेस स्तन और उसकी पैंटी के भीतर का वह गीला, रसीला हिस्सा ही घूम रहा था। कबीर की पैंट के भीतर उसका औजार अभी भी पूरी तरह से कड़ा और उत्तेजित था।

रात के करीब दो बज रहे थे जब कबीर ने पेंटहाउस के मुख्य दरवाज़े का लॉक खोला और भीतर दाखिल हुआ। पूरा घर शांत था, सिर्फ लिविंग रूम में एक मद्धम पीली नाइट-लैंप जल रही थी। कबीर थका हुआ और उत्तेजित कदमों से सोफे की तरफ बढ़ा ताकि अपना सूट जैकेट उतार सके।

लेकिन जैसे ही उसकी नज़र सोफे के सामने रखी कांच की सेंटर-टेबल पर पड़ी, उसके पूरे बदन का खून जैसे एक सेकंड के लिए जम गया। उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई और उसे एक ज़ोरदार ४४० वोल्ट का झटका लगा।

टेबल पर वही सोने और काले रंग का भारी वेनेशियन मास्क (मुखौटा) रखा हुआ था!

कबीर ने काँपते हाथों से उस मास्क को उठाया। उसके पास ही वही गहरे बैंगनी और जामुनी रंग की वेलवेट गाउन ड्रेस भी बेतरतीब तरीके से मुड़ी हुई रखी थी, जिसे उस औरत ने पार्टी में पहना था।

कबीर ने उस गाउन को उठाया; उसके गले के हिस्से पर अभी भी कबीर के अपने हाथों के मरोड़ने के निशान थे, और उस ड्रेस के निचले स्लिट वाले हिस्से से वही परफ्यूम महक रहा था जो पूरी रात कबीर को मदहोश कर रहा था।

कबीर का दिमाग सुन्न हो गया। आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह मुखौटा... वह जामुनी गाउन... वह ३६D का भारी, ब्रा-लेस बदन... वह चौड़े चूतड़... और वह रेशमी पैंटी के भीतर का पूरी तरह से गीला, कच्चा और रसीला हिस्सा... वह कोई और नहीं, बल्कि उसकी अपनी सगी माँ रेखा थी!

"ओह माय गॉड... मॉम... वह मॉम थीं!" कबीर के मुंह से एक सूखी चीख निकली।

वह पूरी तरह से शॉक्ड था। लेकिन उसके मन में अपनी माँ के प्रति कोई हीन भावना या 'loose character' होने का ख्याल बिल्कुल नहीं आया। उसे तुरंत याद आया कि कैसे उसकी माँ ने पार्टी में कहा था—*"नो, प्लीज... आई एम मैरिड..."* और वह खुद ही एक बेबाक मर्द बनकर उन पर हावी हुआ था, उसने खुद ही जिद की थी कि *'पार्टी में सब चलता है।'* उसकी माँ ने तो अपनी मर्यादा बचाने की कोशिश की थी, लेकिन उनके भीतर छिपी उस अकेली, परिपक्व औरत की भूख को कबीर की अपनी मर्दानगी ने ही जगाया था।
कबीर काँपते कदमों से, अपने सिर को थामे हुए सीधे अपने बेडरूम की तरफ भागा और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया।

उधर, बगल के बड़े मास्टर बेडरूम में रेखा पूरी तरह नग्न अवस्था में किंग-साइज़ बेड पर लेटी थीं। उन्होंने पार्टी के कपड़े और पैंटी उतारकर फेंक दिए थे। ४९ साल की रेखा का वह भरा-पूरा, रसीला बदन बेड की सफेद चादर पर पूरी तरह बिखरा हुआ था। उनकी गोरी, चिकनी त्वचा पर अभी भी कबीर की मजबूत उंगलियों के लाल निशान साफ दिख रहे थे। उनके स्तनों पर, विशेष रूप से उनके बड़े भूरे निप्पलों पर अभी भी कबीर के मर्दाना हाथों की गर्मी और खिंचाव महसूस हो रहा था।

रेखा की योनि जिसे कबीर ने अपनी उंगलियों से पूरी तरह से खंगाल दिया था, अभी भी थ्रॉब (फड़क) कर रही थी। वह अपने कमरे में अकेली बेड पर करवटें बदल रही थीं, और उनके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ अपने २८ साल के जवान, हट्टे-कट्टे बेटे कबीर की वह मर्दाना धमक, उसके चौड़े कंधे और उसकी पैंट के भीतर लोहे की रॉड की तरह कड़ा हो चुका उसका औजार घूम रहा था, जो पूरी रात उनकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था।

"कबीर... मेरे बच्चे... तूने अपनी माँ को आज कहाँ पहुंचा दिया..."

रेखा ने कराहते हुए चादर को अपने नग्न बदन पर लपेट लिया।
उनका पूरा बदन कबीर के उस मर्दाना स्पर्श के लिए दोबारा तड़प रहा था। वह अपने कमरे में सोलो थिंकिंग (solo thinking) कर रही थीं, अपने ही बेटे के उस कड़े लंड की कल्पना करके उनका बदन दोबारा काम-रस से गीला होने लगा था।

अपने कमरे में, कबीर ने अपनी शर्ट के बटन पूरी तरह से खोल दिए थे। वह बेड पर चित्त लेटा था और अपनी उन्हीं उंगलियों को बार-बार अपने होठों से लगा रहा था, जिन पर अभी भी उसकी माँ रेखा के उस कच्चे हिस्से के रस की तीखी, मादक महक आ रही थी। कबीर ने आँखें मूंद लीं। माँ का वह भारी ३६D का बदन, उनका वह थलथलाता हुआ गोरा पेट, और उनके वो चौड़े चूतड़ जिन्हें उसने अपने हाथों से मसला था—यह सब याद करते ही कबीर की पैंट के भीतर उसका लंड इस कदर कड़ा हो गया कि वह लोहे की कड़क रॉड बन चुका था।

कबीर ने बिना एक पल गंवाए अपनी पैंट और अंडरवियर को नीचे सरका दिया। उसका ७.५ इंच का लंबा, मोटा और सांवला मर्दाना औजार, जिसकी नसें पूरी तरह से उभरी हुई थीं, हवा में कड़क कर सीधा खड़ा हो गया। कबीर ने अपनी हथेली में थोड़ा सा लोशन लिया और आँखें मूंदकर, अपनी सगी माँ रेखा के उस नग्न, भारी और रसीले बदन की छवि को अपने दिमाग में पूरी तरह से बसा लिया।

उसने अपने औजार के कड़े पुर्जे पर अपनी मजबूत हथेली को ऊपर-नीचे (stroking) करना शुरू किया। वह पूरी तरह से रॉ और बेबाक अंदाज़ में खुद को मुठ मारते हुए अपनी माँ के प्यार और उनके बदन के रस में समर्पित कर चुका था। "उफ्फ... मॉम... आपकी वो पैंटी... आपका वो रसीला पानी... मैं अब खुद को नहीं रोक सकता..." कबीर अपनी ही भारी सांसों में फुसफुसा रहा था, और उसकी रफ्तार तेज होती जा रही थी।

उधर, ठीक बगल के बड़े मास्टर बेडरूम के भीतर मद्धम अंधेरा था, और रेखा की आँखें छत को निहार रही थीं, लेकिन उनके हाथ अनजाने में उनके अपने ही बदन पर रेंग रहे थे। उनके दोनों भारी ३६D स्तनों पर, विशेष रूप से उनके बड़े भूरे निप्पलों पर अभी भी कबीर के मजबूत, मर्दाना हाथों की गर्मी और मरोड़ का अहसास जिंदा था। कबीर ने जिस बेरहमी से उनके स्तन को भींचा था, उसकी वजह से वहां हल्की सी सुर्खी आ गई थी, जिसे रेखा अपनी उंगलियों से सहला रही थीं।


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"आह... कबीर..." रेखा के मुंह से एक तीखी कराह निकली।
उनकी जांघों के बीच का वह कच्चा, रसीली चुत, जिसे कबीर ने अपनी दो उंगलियों से पूरी तरह से खंगाल दिया था, अभी भी बुरी तरह थ्रॉब (पल्स) कर रहा था। रेखा बेड पर करवटें बदल रही थीं।

उसकी पूरी तरह से शेव की हुई, चिकनी चुत और फांकें दोबारा काम-रस से इतनी तर होने लगी थीं कि चिकनी मांसल जांघों तक रस फैल चुका था। उनके दिमाग में सिर्फ और सीधे कबीर का वह २८ साल का जवान, कसरती बदन घूम रहा था। वो चौड़े कंधे, वो कड़े बाइसेप्स जिन्होंने उन्हें हवा में उठा दिया था, और सबसे बढ़कर... डांस करते वक्त कबीर की जींस के भीतर का वो लोहे जैसा कड़ा औजार जो उनकी जांघों के जोड़ पर लगातार दबाव बना रहा था।

रेखा ने अपनी आँखें मूंद लीं। उनका हाथ उनके भारी, थलथलाते पेट को पार करता हुआ सीधे उनकी टांगों के बीच पहुंच गया। उन्होंने अपनी दो उंगलियों को अपनी ही योनि की रसीली, गीली फांकों के भीतर डाल दिया। लेकिन इस वक्त वह खुद को नहीं, बल्कि अपने ही सगे जवान बेटे कबीर की उन मजबूत, खुरदरी उंगलियों को वहां महसूस कर रही थीं।

"उम्मम्म... हाँ कबीर... और गहरा... मसल दो अपनी माँ को..." रेखा ने अपनी उंगलियों की रफ्तार अपनी योनि के भीतर बढ़ा दी।


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उनका पूरा सुडौल बदन बेड पर धनुष की तरह अकड़ने लगा। चूतड़ों का भारी घेरा चादर पर रगड़ खा रहा था। अपने बेटे के मर्दाना रसूख और उसके कड़े औजार की कल्पना ने रेखा को कामुकता के उस आखिरी छोर पर पहुंचा दिया था, जहाँ मर्यादा का नामोनिशान नहीं बचता। रेखा अपने ही कमरे में सोलो थिंकिंग और उंगलियों के इस कच्चे खेल (solo masturbation) के जरिए उस असीम, निषिद्ध सुख के चरम पर पहुंच रही थीं, जहां शायद बहुत जल्द कबीर का असली औजार उनकी इस तड़प को शांत करने वाला था।

दोनों कमरों के बीच केवल एक दीवार थी, लेकिन उस दीवार के दोनों तरफ माँ और बेटे का बदन एक-दूसरे की याद में, बिना किसी सेंसर और मर्यादा के, पूरी तरह से कामुकता के उस कच्चे और सबसे तीखे देसी रस में डूबने के लिए तैयार हो चुका था। बिसात पूरी हो चुकी थी, और अब दोनों के मन का यह सस्पेंस बहुत जल्द इस पेंटहाउस की चारदीवारी के भीतर एक असली और बेबाक समागम का रूप लेने वाला था।
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर जबरदस्त कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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रात के तूफानी सन्नाटे के बाद, २२वीं मंजिल के उस आलीशान पेंटहाउस की खिड़कियों से सुबह की गुनगुनी, साफ धूप अंदर तैर रही थी। पूरा लिविंग रूम शांत था, लेकिन हवा में अभी भी उस रहस्यमयी नकाबपोश रात की बची-कुची महक और दोनों कमरों के भीतर अलग-अलग बहे काम-रस के सोलो थिंकिंग सेशन की अदृश्य गर्मी मौजूद थी। स्मिता और अर्जुन अपने घर थे, और इस खाली पेंटहाउस के भीतर सिर्फ दो जिस्म मौजूद थे, जिनके बीच की मर्यादा की दीवारें अंधेरे में ढह चुकी थीं और अब दिन के उजाले में बेपर्दा होने वाली थीं।

४९ साल की रेखा सुबह सात बजे ही सोकर उठ चुकी थीं। रात भर अपने ही २८ साल के जवान बेटे कबीर की खुरदरी, मजबूत उंगलियों का जो तीखा और रसीला स्पर्श उन्होंने अपनी शेव की हुई चिकनी योनि की फांकों के बीच महसूस किया था, उसकी वजह से उनके बदन में एक अजीब सी मीठी टूट और अलसाया हुआ भारीपन था।

उन्होंने नहाया नहीं था; वह सीधे बेड से उठी थीं और उनके सुडौल, ४९ साल के प्लस-साइज़ बदन पर इस वक्त हल्के जामुनी रंग की एक बेहद ढीली, साटन-रेशम की नाइटी थी।

यह नाइटी इतनी ढीली और महीन थी कि बिना ब्रा-पैंटी के रेखा की सुडौल काया का हर एक curve उसके भीतर स्वतंत्र रूप से डोल रहा था। नाइटी की पतली डोरियाँ उनके गोरे, नग्न कंधों पर टिकी थीं। आगे का गला इतना गहरा था कि जब वह सांस लेती थीं, तो उनके भारी ३६D स्तनों का ऊपरी गोरा मांसल हिस्सा और उनके बड़े, भूरे निप्पलों का कड़ापन उस पतले रेशमी कपड़े को बाहर की तरफ धकेल रहा था। पेट का हिस्सा हल्का थलथला और चिकना था, और नीचे से नाइटी उनके घुटनों से चार इंच ऊपर तक ही थी, जिससे उनकी गोरी, सुडौल और केले के तने सी चिकनी भारी जांघें पूरी तरह से बेपर्दा चमक रही थीं।

रेखा किचन में गईं और उन्होंने मद्धम आंच पर चाय की केतली चढ़ाई। उनके दिल की धड़कनें तेज थीं। उन्हें पता था कि कबीर जाग चुका होगा या जागने वाला होगा, और जो सच रात को सेंटर-टेबल पर छूटे मास्क ने खोला था, वह अब दोनों के बीच एक अदृश्य बारूद की तरह फटने को तैयार था।

कबीर अपने बेडरूम से बाहर निकला। उसने सिर्फ एक ढीला, ग्रे रंग का लोअर पहना हुआ था और उसका ऊपर का पूरा कसरती बदन, चौड़े सांवले कंधे और छाती के कड़े मसल्स नग्न थे। रात भर माँ की याद में खुद को मुठ मारते हुए जो तीखा सुख उसने भोगा था, उसकी थकान और एक गहरा मनोवैज्ञानिक शॉक उसकी आँखों में साफ दिख रहा था। उसकी आँखें हल्की लाल थीं और दिमाग में लगातार वही एक ख्याल घूम रहा था—*वह औरत, जिसके ३६D स्तन को उसने मसला था, जिसकी पैंटी के भीतर हाथ डालकर उसका गाढ़ा काम-रस निचोड़ा था, वह उसकी सगी माँ रेखा थी।*

कबीर भारी कदमों से लिविंग रूम की तरफ बढ़ा। लेकिन जैसे ही उसने लिविंग रूम के सोफे के पास कदम रखे, वह वहीं ठिठक गया।
सोफे के कोने पर उसका अपना कल रात का ब्लैक सूट, सफेद शर्ट और वह काला वेनेशियन मास्क बेतरतीब तरीके से पड़ा हुआ था, जिसे वह रात की हड़बड़ाहट में वहीं छोड़ गया था। और ठीक उसी के बगल में, काँच की सेंटर-टेबल पर माँ रेखा का वह सोने और काले रंग का भारी मुखौटा और वह जामुनी वेल्वेट गाउन ड्रेस रखी थी। दिन की तेज धूप उन दोनों मुखौटों और कपड़ों पर सीधे पड़ रही थी, मानो रात के उस पूरे कच्चे, पाशविक और रसीले खेल पर हकीकत की गवाही दे रही हो।

तभी किचन से रेखा हाथ में चाय के दो कप लिए लिविंग रूम में दाखिल हुईं। उनके चलने की मद्धम थाप के साथ उनकी साटन की ढीली नाइटी के भीतर उनके ३६D के भारी, ब्रा-लेस स्तन हल्के-हल्के डोल रहे थे।

रेखा जैसे ही सोफे के पास पहुँचीं, उनकी नज़र टेबल पर पड़े कबीर के उस ब्लैक सूट और काले मास्क पर पड़ी। उन्होंने चाय के कप को धीरे से साइड टेबल पर रखा। रेखा ने चेहरे पर एक गहरा, चौंकने वाला भाव लाया—एक ऐसी सधी हुई एक्टिंग, मानो उन्हें इसी वक्त यह अहसास हुआ हो कि रात को अंधेरे में जिस जवान, हट्टे-कट्टे मर्द ने उन्हें दीवार से सटाकर उनकी पैंटी के भीतर अपनी उंगलियां धंसा दी थीं, वह कोई और नहीं बल्कि उनका अपना सगा बेटा कबीर था।

रेखा के हाथ हल्के से काँपे। उन्होंने आगे बढ़कर बहुत ही मद्धम, अलसाए अंदाज़ में कबीर का वह काला मास्क अपने गोरे हाथ में उठा लिया। उनकी उंगलियाँ उस मास्क के कोनों को छू रही थीं, और उनके चेहरे पर एक गहरा सन्नाटा पसर गया। उन्होंने उस मास्क को हाथ में लेकर धीरे से अपनी नजरें ऊपर उठाईं और सीधे कबीर की आँखों में आँखें डाल दीं।

यहीं से दोनों के बीच **नज़रों का वो भारी, सम्मोहक और नसों को कड़ा कर देने वाला खेल** शुरू हुआ।

कमरे के भीतर एक ऐसा सन्नाटा छा गया जिसे काटा जा सकता था। कबीर वहीं बिना शर्ट के खड़ा था, उसके चौड़े कंधे धूप में चमक रहे थे। जब उसने अपनी माँ की आँखों में देखा, तो उसके चेहरे पर एक गहरा पछतावा, एक 'सॉरी' वाली भावना साफ झलक उठी। उसकी नजरें झुकने लगीं, मानो वह कह रहा हो—*मॉम, मुझे माफ़ कर दीजिए... मुझे नहीं पता था कि नकाब के पीछे आप थीं, वरना मैं कभी मर्यादा पार करके आपकी पैंटी में हाथ डालने की जुर्रत नहीं करता।*

लेकिन कबीर ने जैसे ही दोबारा रेखा की आँखों में देखा, उसे वहाँ कोई गुस्सा, कोई नफ़रत या कोई डांट नज़र नहीं आई। ४९ साल की रेखा उस ढीली जामुनी नाइटी में खड़ी कबीर के उस ६ फीट के कड़े, नग्न मर्दाना बदन को ऊपर से नीचे तक निहार रही थीं। रेखा की आँखों में एक अजीब सी परिपक्व नरमी, एक गहरा सस्पेंस और एक मूक इकरार (acceptance) था। उनकी आँखें कबीर को साफ़-साफ़ बता रही थीं—*हाँ कबीर... वह मैं ही थी। और जो स्पर्श, जो मर्दाना रसूख तूने रात को मुझे दिया... उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया है।*

रेखा ने कबीर के मास्क को वापस सोफे पर रखा। दोनों के बीच एक शब्द भी नहीं फूटा, लेकिन हवा में दोनों के जिस्मों की कामुक उत्तेजना इतनी तीखी थी कि कबीर की पैंट के भीतर उसका ७.५ इंच का औजार उस मूक इकरार को भांपकर दिन के उजाले में दोबारा कड़ा होने लगा।

"चाय... ठंडी हो रही है, कबीर," रेखा ने अपनी आवाज़ को बहुत ही शांत, भारी और मखमली रखते हुए सन्नाटे को तोड़ा। उनकी नाइटी का गला थोड़ा और नीचे झुका, जिससे उनके स्तनों का भारी भराव कबीर की नजरों के ठीक सामने आ गया।

कबीर इस भारी, दमघोंटू और अत्यधिक कामुक तनाव को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसकी आँखों के सामने बार-बार रात की वो तस्वीरें घूम रही थीं जब उसकी उंगलियां रेखा की उसी जांघों के जोड़ पर रेंग रही थीं।

उसने चाय का कप हाथ में लिया, लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे। उसने एक घूंट लिया और कप को वापस रख दिया। "मॉम... मुझे... मुझे अर्जुन भाई के ऑफिस जाना था... कुछ ज़रूरी काम हैं। मैं... मैं जरा जल्दी में हूँ, मैं बाहर निकल रहा हूँ," कबीर ने लड़खड़ाती, भारी आवाज़ में बहाना बनाया। वह इस सच के सामने पूरी तरह से असहज हो चुका था।

"ठीक है... आराम से जाओ," रेखा ने बहुत ही शांत लहजे में कहा, लेकिन उनकी आँखें अभी भी कबीर के कड़े होते लोअर के उभार पर टिकी थीं। कबीर बिना देर किए सीधे अपने कमरे में भागा, कपड़े बदले और कैब बुलाकर पेंटहाउस से बाहर निकल गया। वह घर से तो भाग गया, लेकिन पूरे दिन दिल्ली की सड़कों पर, अर्जुन के ऑफिस में बैठ कर भी उसका दिमाग सिर्फ अपनी माँ के उसी ४९ साल के भारी बदन, उनकी ढीली नाइटी और उनकी उन आँखों के मूक इकरार में ही अटका रहा।

कबीर के पेंटहाउस से बाहर निकलते ही रेखा ने राहत की एक भारी सांस ली। उनका पूरा बदन सुबह की उस मुलाकात के बाद काम-रस से और ज्यादा सुलगने लगा था। वह लिविंग रूम के सोफे पर ढीली साटन नाइटी में ही पसरी हुई थीं, जांघों के बीच की गर्मी उन्हें शांत नहीं बैठने दे रही थी।

दोपहर के बारह बज रहे थे। दिल्ली की तपती धूप पेंटहाउस की विशाल काँच की खिड़कियों पर सीधी पड़ रही थी, जिससे लिविंग रूम के भीतर एक अजीब सी सुनहरी, गर्म और सुस्त रोशनी छनकर आ रही थी।

सुबह जब कबीर ने बिना शर्ट के, सिर्फ ग्रे लोअर में खड़े होकर अपनी माँ रेखा की आँखों में देखा था, तो उसके कसरती सांवले सीने और उसकी पैंट में कड़े होते ७.५ इंच के औजार के उभार ने रेखा की जांघों के बीच एक अजीब सी मचलती हुई आग छोड़ दी थी। रेखा बेडरूम से निकलकर कबीर के खाली कमरे की तरफ बढ़ीं।

कबीर के बेडरूम में अभी भी एक जवान मर्द के जिस्म की सोंधी, कड़क महक बसी हुई थी। रूम स्प्रे की जगह वहां कबीर के पसीने, उसकी कसरती त्वचा और रात भर उसकी उंगलियों से बहे उसके काम-रस की एक कच्ची, मादक गंध तैर रही थी।

तभी रेखा के हाथ में पकड़ा हुआ मोबाइल बज उठा। स्क्रीन पर उनकी बहन स्मिता का नाम जगमगा रहा था। रेखा ने अपने गालों पर आती बिखरी जुल्फों को पीछे करते हुए मुस्कुराकर कॉल रिसीव किया।

"हाँ दीदी..." रेखा की आवाज़ में एक अजीब सा अलसाया, मदहोश खुमार था।

उधर, कुछ किलोमीटर दूर अपने विशाल बेडरूम में ५४ साल की स्मिता अपने किंग-साइज़ बेड की रेशमी चादर पर पूरी तरह उघाड़ी लेटी थीं। उनका भारी, ३६D का थलथला बदन पसीने की मद्धम बूंदों से चमक रहा था। उनके ठीक बगल में उनका बेटा अर्जुन बैठा था। अर्जुन का नग्न, कसरती बदन अपनी माँ के जिस्म से पूरी तरह सटा हुआ था, और उसका हाथ स्मिता की नग्न, गोरी जांघों को लगातार सहला रहा था।

स्मिता ने अपनी उंगलियों से अर्जुन की कड़क मूंछों को छुआ और फोन को तुरंत **लाउडस्पीकर** पर डाल दिया, ताकि उनका बेटा अर्जुन भी अपनी मौसी रेखा की एक-एक रसीली बात को साफ-साफ सुन सके।

"और मेरी कामुक रेखा! कैसी रही कल की नकाबपोश रात? कबीर ने तेरी उस ३६D जवानी का स्वाद चखा या तू सिर्फ मुखौटा पहनकर शर्माती रही?" स्मिता ने फोन पर अपनी रसभरी, मसालेदार देसी आवाज़ में चुटकी ली।

रेखा कबीर के बेडरूम के बेड के पास जाकर खड़ी हो गईं। उनकी ढीली जामुनी नाइटी उनके गोरे कंधों से थोड़ी खिसक गई थी, जिससे उनका आधा नग्न ३६D स्तन बाहर छलक रहा था।

रेखा ने बिना किसी झिझक के, बहुत ही खुले और रॉ अंदाज़ में हंसते हुए कहा, "उफ़्फ़ स्मिता... मत पूछ! तेरे इस नकाबपोश विचार ने तो कल रात मेरे बदन का कोना-कोना सुलगा दिया। कबीर... मेरा कबीर सच में पूरा मर्द है स्मिता!"

यह सुनते ही अर्जुन ने बेड पर सीधे होकर अपनी पीठ सीधी की। उसकी आँखें चमक उठीं। अर्जुन की मजबूत, खुरदरी हथेली स्मिता की नग्न कमर से नीचे खिसककर उनके भारी, थलथलाते चूतड़ के मांस को कसकर भींचने लगी।

स्मिता ने अपने बेटे के इस सख्त, कामुक स्पर्श को अपनी जांघों के बीच महसूस किया और फोन में फुसफुसाकर पूछा, "अच्छा? ज़रा खुल के बता ना रेखा! कबीर ने तेरे साथ क्या-क्या किया? उसने तुझे पहचाना या नहीं?"

रेखा ने कबीर की लॉन्ड्री बास्केट की तरफ देखा। वहाँ कल रात का कबीर का वह बिना धुला, काला कॉटन बॉक्सर पड़ा हुआ था—वही बॉक्सर जिसे पहनकर कबीर ने रात को अपनी माँ की याद में खुद को मुठ मारते हुए अपना गाढ़ा, गर्म काम-रस निकाला था।

रेखा ने आगे बढ़कर उस काले बॉक्सर को अपने गोरे हाथों में उठा लिया। जब उन्होंने उस बॉक्सर को अपनी नाक के बिल्कुल पास लाया, तो उसमें से कबीर के पसीने और उसके ताज़ा वीर्य की एक तीखी, कड़क और पूरी तरह से रॉ मर्दाना महक उनके नथुनों में समा गई। उस सोंधी महक ने रेखा की नसों में बिजली दौड़ा दी।

"पार्टी में तो उसने मुझे नहीं पहचाना स्मिता..." रेखा ने फोन पर अपनी आवाज़ को बेहद कामुक, भारी और हांफती हुई बनाते हुए कहा। "वह मुझे बस एक रसीली, अनजान औरत समझकर अपनी बाहों में भींचता रहा। जब वो मुझे डांस फ्लोर के अंधेरे कोने में ले गया, तो उसने सबसे पहले अपनी मजबूत हथेली मेरी कमर से नीचे खिसकाकर मेरे चूतड़ों पर रखी... और क्या बताऊँ स्मिता, उसने मेरे भारी चूतड़ के गोश्त को उस कपड़े के ऊपर से ही इतने रसूख से मसला कि मेरी चीख निकलते-निकलते बची!"

अर्जुन ने लाउडस्पीकर पर मौसी रेखा की यह बात सुनते ही अपनी माँ स्मिता के ३६D के गोरे स्तन को अपनी हथेली में पूरा भींच दिया। उसने अपने अंगूठे से स्मिता के बड़े, कड़े हो चुके भूरे निप्पल को बेरहमी से मरोड़ दिया।

"आहहह... उफ़्फ़..." स्मिता के मुंह से अचानक एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली। उन्होंने अपनी एक टांग अर्जुन की जांघ पर चढ़ा ली और फोन में फुसफुसाते हुए पूछा, "ओह... कबीर का औजार कैसा लगा?"

कबीर के बेडरूम में खड़ी रेखा ने अपने हाथ में पकड़े कबीर के उस गंदे, वीर्य से सने बॉक्सर को अपनी ढीली साटन नाइटी के भीतर डाल दिया। उन्होंने उस बॉक्सर के सूती कपड़े को अपनी नग्न, गोरी जांघों के बीच की पूरी तरह से शेव की हुई, चिकनी योनि की फांकों पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। कबीर के वीर्य की सोंधी महक सीधे उनकी नाक में जा रही थी और कबीर का ही बॉक्सर उनकी योनि के रसीले होठों को सहला रहा था।

"फिर वो मुझे और अंधेरे कोने में ले गया स्मिता..." रेखा ने फोन पर अपनी सांसों की रफ्तार तेज़ करते हुए कहा। उनकी उंगलियां कबीर के बॉक्सर के कपड़े के साथ अपनी योनि की फांकों को खंगाल रही थीं। "उसने अपना पूरा हाथ मेरी गाउन के गले में डाल दिया! उसने बिना ब्रा के मेरे उस ३६D स्तन को पूरा अपनी हथेली में भींच लिया... उसकी उंगलियों ने जब मेरे निप्पल को पकड़ा ना, तो मुझे लगा जैसे मेरा बदन पिघल गया। और सबसे बड़ी बात... उसके पैंट के भीतर उसका लंड लोहे की रॉड की तरह कड़ा था, जो मेरी जांघों के जोड़ पर लगातार रगड़ खा रहा था! इतना मोटा और कड़ा औजार... मैंने अपनी जिंदगी में महसूस नहीं किया था!"

फोन के उस पार, अर्जुन का ७ इंच का लंबा, मोटा और सांवला औजार पूरी तरह तड़प चुका था। अर्जुन ने अपनी माँ स्मिता की दोनों गोरी जांघों को पूरी ताकत से चौड़ा कर दिया। स्मिता की योनि भी अपनी बहन रेखा की ये रसीली बातें सुन-सुनकर पानी छोड़ चुकी थी।

अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए अपना कड़ा औजार सीधे अपनी माँ स्मिता की उस गीली, रसीली योनि के भीतर पूरा धकेल दिया और फोन पर रेखा मौसी से कहा "मेरा लंड भी वैसा नहीं क्या मौसी?"

तभी "आह्ह्ह्ह्ह... रेखा... उफ़्फ़... मार डाला!" स्मिता के मुंह से एक लंबी, बेबाक चीख निकली। अर्जुन उनके ऊपर पूरी तरह झुक गया और अपनी माँ के होठों को अपने मुंह में भरकर उनकी योनि में भारी, पाशविक धक्के मारने लगा। बेड के स्प्रिंग की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी।

रेखा कबीर के बेड पर चित्त लेट चुकी थीं। उनकी नाइटी पूरी तरह से ऊपर कमर तक खिसक चुकी थी, जिससे उनका ४९ साल का गोरा, थलथला और पूरी तरह नग्न पेट और उनकी शेव की हुई चिकनी जांघें पूरी तरह बेपर्दा थीं। रेखा कबीर के उस गंदे बॉक्सर के हिस्से को—जहाँ रात का कड़क वीर्य सूखा हुआ चिपका था—अपनी चिकनी रसीली चुत के मुख्य सुराख पर जोर-जोर से रगड़ रही थीं।

"और सुन स्मिता..." रेखा ने बेड पर अपने कूल्हों को ऊपर उठाते हुए, पूरी तरह काम-रस में डूबकर हांफते हुए कहा, "उसने अपनी दो उंगलियां मेरी पैंटी के किनारे से भीतर घुसा दीं! उसकी उंगलियां सीधे मेरी चिकनी, शेव की हुई योनि के भीतर तक धंस गईं! उसने मेरी चुत का सारा पानी अपनी उंगलियों पर निचोड़ लिया स्मिता... और इस वक्त... इस वक्त मैं कबीर के बेड पर लेटी हूँ... और कबीर के रात के पहने हुए बिना धुले बॉक्सर को... उसकी वीर्य की महक के साथ अपनी योनि में रगड़ रही हूँ! उफ़्फ़ कबीर... तेरा यह वीर्य... तेरी माँ को पागल कर रहा है!"

यह सुनते ही अर्जुन का दिमाग पूरी तरह बेकाबू हो गया। मौसी रेखा का अपने भाई कबीर के वीर्य वाले बॉक्सर से सोलो खेल सुनकर अर्जुन का औजार स्मिता की योनि के भीतर और ज्यादा अकड़ गया। उसने स्मिता के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और पूरी ताकत से स्मिता की योनि की दीवारों को फाड़ते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए।

"ओहhh... रेखा..." स्मिता फोन पर हांफते हुए चिल्लाने लगीं, उनका पूरा बदन अर्जुन के धक्कों से कांप रहा था, "तू... तू कबीर के बॉक्सर से खेल रही है... और यहाँ अर्जुन... अर्जुन मेरे भीतर... पूरा का पूरा उतर चुका है... आहहह! ये... ये मुझे इतनी बेरहमी से ठोक रहा है रेखा... कि मेरी आँखें बंद हो रही हैं!"

रेखा ने फोन पर अपनी बहन स्मिता की वो तीखी चीखें और अर्जुन के धक्कों की छप-छप आवाज़ सुनी, तो उनके अपने बदन की उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच गई। रेखा ने कबीर के बॉक्सर को अपनी योनि के होठों के भीतर और गहराई से दबाया और अपनी दो उंगलियों से अपने उभरे हुए दाने को गोल-गोल घुमाते हुए तेजी से रगड़ना शुरू कर दिया।

"हाँ स्मिता... ठोकने दे अर्जुन को..." रेखा ने अपनी आँखें बंद करके, अपनी जांघों को पूरी तरह हवा में फैलाते हुए चिल्लाया, "कबीर का औजार भी आज रात मेरी इस योनि में ऐसे ही धक्के मारेगा! सुबह जब वो उठा... तो मैंने उसकी आँखों में वही भूखा मर्द देखा है। वह मुझसे नज़रें चुरा रहा था, लेकिन मैंने उसे बता दिया कि उसकी माँ का यह ३६D बदन... सिर्फ उसी के औजार के लिए तड़प रहा है!"

अर्जुन ने फोन के पास झुककर, अपनी भारी, कड़क मर्दाना आवाज़ में हांफते हुए कहा, "मौसी... आप कबीर को छोड़ना मत! आज रात जब वो आए... तो उसको अपनी इस जवानी के रस में ऐसा डुबोना कि वो जिंदगी भर किसी और औरत को देखने लायक न रहे!"

"हाँ अर्जुन... आज रात ही यह पर्दा गिरेगा!" रेखा का पूरा सुडौल बदन अचानक अकड़ गया। कबीर के वीर्य से सने बॉक्सर की रगड़ और अपनी उंगलियों के तीखे खेल ने रेखा के ४९ साल के बदन को काम-रस के एक तूफानी चरम में झोंक दिया। रेखा की योनि से गर्म, गाढ़ा काम-रस छलककर कबीर के उस बॉक्सर के कपड़े पर पूरी तरह बह गया। रेखा बेड पर हांपती हुई ढीली पड़ गईं।

उधर, अर्जुन ने भी स्मिता की योनि की गहराई में अपना सारा गर्म वीर्य खाली कर दिया। दोनों तरफ सन्नाटा छा गया, सिर्फ दो कमरों में तीन जिस्मों की भारी, कामुक सांसें गूंज रही थीं।

फोन कट गया, लेकिन रेखा की आँखों में अब रात के उस आने वाले पल के लिए एक बेबाक, नग्न और अटूट आत्मविश्वास चमक रहा था।
बहुत ही गरमागरम कामुक और बडा ही जबरदस्त उन्मादक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
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Ashiq Baba

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Bahut hi umda update diya hai. Behad kamuk aur raseela. Kya scene create Kiya hai maja aa gya. Do chudasi bahne kamuk baten kar rahi hai jisse garm ho kar ek bahan ka beta apni maa ko chod raha hai vahin dusri taraf ek bahan apne bete ke veerya se sani hui underwear ko apni pyasi aur tadpti chut par ragad kar masterbate kar rahi hai. Gajab scene likha hai. Pathak chaunkte hue romanchito ho gaye hai. Thanks a lot.
 
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