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Incest All short story collected from Net

आप केसी सेक्स स्टोरी पढना चाहते है. ??

  • माँ - बेटा

  • भाई - बहेन

  • देवर - भाभी

  • दामाद – सासु

  • ससुर – बहु


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junglecouple1984

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पहली बार में ही सगे भाई से चुदी



मेरा नाम अश्विनी है, मेरी उम्र अभी 22 साल की है.
मैं सोलापुर के एक छोटे से गांव में रहती हूँ.

हमारे घर में 4 लोग हैं. मैं, मेरे पापा मम्मी और बड़ा भाई.

मेरे पापा खेतों में काम करते हैं.
मेरी माँ एक छोटी सी सरकारी नौकरी करती हैं.
वे आंगनवाड़ी में हैं और छोटे बच्चों को खाना बनाकर खिलाती हैं.

मैं फिलहाल एमबीए कर रही हूं, जो बारामती में कॉलेज है, उससे कर रही हूँ.

ये कहानी मेरी और मेरे बड़े भाई की है जिसमें मेरे भाई ने चोदा मुझे … अपनी सगी बहन को!

दोस्तो, ये कोई काल्पनिक घटना नहीं है. मेरे साथ जो हुआ था, मैं वही बताने जा रही हूं. उम्मीद है आपको मेरी सच्ची कहानी पसंद आएगी.

मेरी हाईट 5 फुट 3 इंच है. मेरे बूब्स 32D, कमर 30 की है और मेरी गांड 34 इंच की है.
मैं जब बाहर जाती हूं तो अच्छे अच्छों का पानी निकाल देती हूँ.

जब मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर में थी, तब मैं एक लड़के को पसंद करने लगी थी और वह भी मुझे बहुत पसंद करता था.

मैं और मेरा भाई पहले से ही दोस्त की तरह रहते आए थे, तो मैंने अपने भाई को बता दिया था कि मुझे एक लड़के ने प्रपोज किया है. मुझे क्या करना चाहिए?

तो भाई ने कहा- उससे ना बोल दे, उसे मना कर दे.
भाई बहुत गुस्सा भी हुआ था.

जब भाई ने मना किया तो मेरा तो मानो दिल टूट चुका था क्योंकि मैं उस लड़के को काफी पसंद करने लगी थी.

जब भाई का गुस्सा कुछ ठंडा हुआ तो मैंने भाई से पूछा- तुम मना करने के लिए क्यों बोल रहे हो?
तो भाई बताने लगा- तुझे पता नहीं है क्या कि लड़के किसी लड़की को अपनी जीएफ बनाने के बाद उसके साथ क्या क्या करते हैं?

मुझे ये सब पता नहीं था, तो उसने मुझे चुदाई के बारे में बताया कि लौंडिया सैट करने के बाद अधिकतर लड़के चोद-चाद कर छोड़ देते हैं.

भाई के मुँह से मुझे ये सब सुनने में बहुत गंदा लगा.

जब मेरे भाई ने सब कुछ साफ साफ बताया तो मैंने भाई से बोला कि ओके मैं ये सब नहीं करूंगी.

एक दिन घर पर कोई भी नहीं था.
मम्मी पापा 4 दिन के लिए किसी रिश्तेदार के यहाँ शादी में गए हुए थे.
घर पर सिर्फ भाई और मैं ही थे.

मैं तो मम्मी पापा के साथ कॉलेज की वजह से नहीं जा पायी.
और भाई की आदत है कि वह ज्यादातर घर से बाहर नहीं निकलना पसंद ही नहीं करता है. बस घर पर रह कर अपनी पढ़ाई करता है या अपने किसी दोस्त के साथ बैठ कर बातें करने में लग जाता है.

साथ ही उसे मम्मी पापा के साथ जाना पसंद नहीं है.

उस दिन मैं सारे दिन कॉलेज में थी और भाई की बातों को ही सोच रही थी.
उसने बताया था कि लड़का लड़की प्यार में क्या क्या करते हैं.

मैंने वह सब अपनी एक पक्की सहेली को बताया तो वह बोली- हां, ये सच है.
अब मुझे उसके मुँह से भी सुनने में झटका सा लगा.

उसका ब्वॉयफ्रेंड भी था तो उससे ही पूछा- क्या तू भी वह सब करती है?
उसने कुछ नहीं कहा और मेरे पास से उठ कर चली गई.

उस दिन कॉलेज में पूरे दिन दिमाग में यही सब चलता रहा.

फिर जब घर आयी तो नहाने चली गयी.

उस दिन पहली बार मैंने अपनी चूत में उंगली की.
तो मुझे बहुत मजा आया.

नहाने के बाद कपड़े बदले, फिर खाना बनाया.

तब तक घर पर भाई भी नहीं था; वह अपने दोस्तों के साथ कहीं गया था.

जब वह घर आया तो उसने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ था.
फिर हम दोनों ने खाना खाया और इधर उधर की बातें करने लगे.

उस वक्त मैंने भाई से पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
भाई बोला- नहीं है.

मैंने पूछा- क्यों नहीं है?
उसने कहा- मुझे कोई तुम्हारी जैसी मिली नहीं!

उसके मुँह से ये सुन कर मुझे कुछ अजीब सा लगा.
मैंने भाई से पूछा- मुझमें ऐसा क्या है … जो तुम्हें कोई और पसंद नहीं आया?
तब भाई बोला- तुझे पाने वाला बहुत खुशकिस्मत वाला होगा.

भाई मेरी बहुत तारीफ कर रहा था, ये सुन कर मुझे अच्छा लग रहा था.

हमारा घर दो रूम वाला है, जिसमें एक में किचन है और एक में हम सब सोते हैं. उसमें एक बेड है … उस पर मम्मी पापा सोते हैं और नीचे मैं और भाई सोते हैं.

अब मम्मी पापा नहीं थे तो बेड पर सोने के लिए मेरी और भाई की मीठी वाली बहस हो रही थी.
भाई बोला- हम दोनों ही साथ में बेड पर सोते हैं.

यह बोल कर भाई ने बहस खत्म की और मुझे भी ये बात ठीक लगी.
मेरी सहेली प्रणाली ने सेक्स के बारे में बताया था, वही दिमाग में चल रहा था.

फिर मैं सोने लगी.

रात को मुझको अपने पेट पर कुछ हलचल का अहसास हुआ.
तो मैंने थोड़ी सी आंख खोल कर देखा, तो भाई मेरे पेट हाथ फेर रहा था.

मुझे अच्छा लग रहा था तो मैंने भाई को रोका नहीं.
मैं सोने का नाटक करती हुई पड़ी रही.

जब मेरी ओर से कोई हलचल नहीं देखी तो भाई ने मेरी टी-शर्ट को थोड़ा ऊपर किया और मेरी नाभि को चाटने लगा.

मेरी तो उस समय हालत बहुत खराब होने लगी थी.

फिर उसने मेरी टी-शर्ट को गले तक लाकर छोड़ दिया और मेरी गुलाबी कलर की ब्रा के ऊपर हाथ रख दिया.

वह हल्के हाथ से मेरे दूध दबाने लगा.
मुझे बेहद लज्जत मिल रही थी और ऐसा लग रहा था कि ये मुट्ठी में भर कर मेरे दूध मसल दे.

मगर मैं इस बात से डर रही थी कि कहीं कुछ गलत न हो जाए.
कुछ समय तक नाभि चाटने के बाद वह मेरे बूब्स को दबाने लगा.
अब मुझे अच्छा लग रहा था.

तभी भाई ने मेरी तरफ देखा, तो उसे मेरे चेहरे पर थोड़ी मुस्कान सी दिखी.

वह समझ गया कि मैं जाग रही हूँ और सोने का नाटक कर रही हूँ.
पर मेरी आंखें बंद थीं.

अचानक से उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करना चालू कर दिया.

मुझे ये कुछ अजीब सा लगा और मैंने अपने भाई को धक्का दे दिया.

मैं भाई से बोली- हम दोनों भाई बहन हैं और ये सब गलत है.
भाई बोला- जब मैं बूब्स दबा रहा था, तब क्यों नहीं रोका? अब तुझे भाई बहन का रिश्ता दिख रहा है?

मैंने भाई से कहा- गलत है, भाई मत करो.
वह बहुत मिन्नतें करने लगा- सिर्फ एक बार, फिर कभी नहीं करेंगे.

मैंने मन में सोचा कि मजा तो मुझे भी आ रहा था क्या फर्क पड़ता है कि लौड़ा किसी का भी हो.

तब भी मैंने कड़क भाव से कहा- अच्छा सिर्फ एक बार … और सिर्फ ऊपर से. मैं कपड़े नहीं निकालूंगी.
मेरा भाई मान गया.

भाई ने किस करना चालू किया.
उसने पूरी जीभ मेरे मुँह में ठेल दी और अन्दर घुमाने लगा.

मुझे काफी अच्छा लग रहा था.
मैं भी किस करने में उसका साथ देने लगी.

उसने मुझे कुछ मिनट किस किया और नीचे आकर मेरे गले को चाटने लगा.
अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.

मेरी सांसें तेज होती जा रही थीं.
मैं भी पूरे मन से उसका साथ देने लगी थी.

अब मुझे लग रहा था कि ये मुझे पूरी नंगी करके चोद दे.

मुझे बीच बीच में महसूस हो रहा था कि उसका लंड कड़क हो रहा है और वह मेरी दोनों जाँघों के बीच में चुभने लगा था.
मैं उसे रोकना चाह रही थी, पर रोक नहीं पा रही थीं … मुझे भी अच्छा लग रहा था.

उसने तभी एक झटके से मेरी टी-शर्ट को निकाल दिया.
अब मैं सिर्फ ब्रा में थी.
वह कभी किस कर रहा था तो कभी ब्रा के ऊपर से मेरे एक दूध को मुँह में ले रहा था, तो कभी पेट या नाभि चाटने में लग जा रहा था.

फिर उसने मेरी शॉर्ट्स नीचे कर दी.
मैं अब सिर्फ गुलाबी रंग की ब्रा और नीले रंग की पैंटी में रह गई थी.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.

अब भाई ने भी खुद के कपड़े निकाल दिए और चड्डी में मेरे ऊपर आ गया.

वह मुझे किस करने लगा.
उसने मेरी ब्रा को भी निकाल दिया और बूब्स को मुँह में लेने लगा.

मैं तो मानो सातवें आसमान पर पहुंच गई थी.
वह इतने प्यार से मेरे बूब्स पी रहा था कि मैं कुछ कह ही न पाई कि ये मत करो.

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और ज़ोर से मेरी चूत में उंगली डाल दी.
मेरे मुँह से एक तेज आहह हह निकल गयी.

फिर उसने पैंटी भी निकाल दी और चूत के बालों को बीच से हटा कर छेद देखने लगा.

उसने कहा- मैंने गुलाबी रंग की ऐसी चूत कभी नहीं देखी.
उस समय मुझे बहुत शर्म आ रही थी.

भाई ने अपनी चड्डी भी निकाल दी.
मैंने भाई का लंड देखा … तो बहुत डर लगा क्योंकि उसका लंड काफी बड़ा लग रहा था.

मैंने अपने जीव में पहली बार किसी लड़के का लंड देखा था.

मैं भाई से बोली- इतना बड़ा लिंग?
तो भाई बोला- लिंग नहीं, इसे लंड कहते हैं.
मुझे लंड बोलने में शर्म आ रही थी.

भाई बोला- लंड मुँह में लेकर देख … और अच्छा लगेगा.
मैंने तो सीधे से ना बोल दिया.

उसने न जाने कितना जोर दिया कि मुँह में लेकर देखो.
फिर भी मैंने अपने मुँह में लंड नहीं लिया, उसे साफ मना कर दिया.

उसने भी कुछ नहीं कहा और मुझे किस करते हुए चूत में उंगली करने लगा.

फिर वह मेरी चूत को अपने मुँह से चाटने लगा.
भाई ने चूत चाट कर मुझे जन्नत का नजारा दिखा दिया.

मैं आखें बंद करके आहह हह आहहह कर रही थी.
भाई ने मेरी चूत के अन्दर इतनी ज्यादा आग लगा दी थी कि क्या कहूँ. मैं पहली बार अपनी चूत चटवा रही थी. मुँह से सिर्फ आहह आहह निकल रही थी.

वह अपनी जीभ को जोर जोर से अन्दर तक डालने की कोशिश कर रहा था.

फिर पानी निकलने लगा और भाई मेरी चूत के पानी को पी गया.
उसने फिर से मेरे होंठों को किस किया तो उसके मुँह से मेरे मुँह में कुछ नमकीन जैसा आ गया.

मुझे अच्छा नहीं लगा.
मैंने उससे पूछा- ऐसा क्यों लग रहा नमकीन सा?

उसने बोला- तेरी चूत का पानी है.
मैं कुछ नहीं बोली.

भाई ने कहा- एक तकिया दे.
मैंने उसे दे दिया.

उसने मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और बोला- थोड़ा दर्द होगा, सहन कर लेना.
मैं भी बोली- हां ठीक है.

उसने मेरे पैरों को फैला दिया और लंड डालने के लिए सैट कर दिया.

पहले उसने मुझे एक किस किया, फिर चूत में लंड सैट किया और अन्दर डालने लगा.

पहली बार तो उसका लौड़ा मेरी चूत से फिसल गया क्योंकि मुझे दर्द हुआ.
मैं थोड़ा पीछे को हटी.

भाई ने फिर से लंड सैट किया और थोड़ा जोर से धक्का लगा दिया.
इस बार उसका लंड थोड़ा सा अन्दर घुस गया.

आह भयंकर दर्द हुआ … मैं तो मानो मर ही गयी थी. मेरी सांसें अटक गयी थीं.

काफी दर्द हो रहा था, मेरी आंखों से आंसू आने लगे.
मैंने भाई से कहा- मुझे कुछ नहीं करना आह मुझे छोड़ दो.

पर अब वह कहां कुछ सुनने वाला था.
उसने मुझे किस करना चालू किया, बूब्स दबाने लगा.

मुझे थोड़ा अच्छा लगा.

उसने एक और धक्का दे दिया तो ऐसा लगा मानो मेरे अन्दर एक गर्म किया हुआ लोहे का रॉड अन्दर घुसेड़ दिया गया हो.

वह भी अभी आधा ही गया था.
फिर उसने किस करते वक्त पूरा लंड अन्दर डाल दिया.
मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

यह देख कर भाई रूक गया.
वह कभी किस करने लगता तो कभी बूब्स दबा रहा था.

मैं उससे छूटने की कोशिश कर रही थी.
पर मेरी सब कोशिशें नाकाम थीं.

भाई बोला- अश्विनी अब दर्द नहीं होगा.
पर उसे क्या पता कि मुझे कितना दर्द हो रहा था.
उसका लंड मेरे बच्चेदानी को टच हो रहा था.

मेरे मुँह से आहहह आहहह निकल रही थी.
पर एक बात थी कुछ देर बाद मुझे बहुत मीठा सा मजा आने लगा था.

उसने स्पीड बढ़ा दी तो मैं बोली- भाई, थोड़ा धीरे धीरे करो.

भाई बहुत तेज स्पीड से अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था.
मैं आहह आहह आह कर रही थी.

उसे चोदते हुए दस मिनट हो चुके थे.
भाई ने चोदा तो मेरा पानी छूटने लगा.

फिर भी भाई का काम नहीं हुआ था.
वह तेजी से लौड़े को आगे पीछे कर रहा था.

मैं वैसे ही निढाल पड़ी उसके लंड को अपने चूत में चलता हुआ महसूस कर रही थी.
कुछ समय बाद मैं वापस गर्म हो गई.

अब मेरी मदमस्त आवाजों से भाई और कामुक हो गया.
सगी बहन की चूत में उसके लंड के झटके और तेज होने लगे थे.

मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर उसका साथ देने लगी.

भाई ने पूछा- कैसा लग रहा है?
मैंने कहा- बहुत मजा आ रहा है! आह चोदो अपनी बहन को … आहहह बन जाओ बहन चोद.

तभी भाई बोला- हां बहन चोद तो बन ही गया हूँ मेरी बहना. अभी तो शुरूआत हुई है. देखती जा, कैसे मैं तेरी चूत का भोसड़ा बनाने वाला हूँ.

यह सुन कर मेरे अन्दर और जोश आ गया और मैं और तेज आहहह ओहहह करने लगी थी.

अब उसका पानी निकलने वाला था तो वह बोला- जल्दी बोल अश्विनी, कहां निकाल दूँ पानी?
मैं बोली- भाई, आज पहली बार चूत चुदी है … तो अन्दर ही छोड़ दो.

उसने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ाई और मेरे अन्दर रस छोड़ने लगा.
मेरी चूत में कुछ लावा जैसे गर्म गर्म अन्दर आया, ऐसा महसूस हुआ.

वह कटी हुई डाल सा मेरे ऊपर गिर गया और सो गया.
मैंने भी उसे बांहों में कस लिया.

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे पड़े रहे और अपनी सांसों को काबू करते रहे.

फिर भाई ने मेरी चूत से लंड निकाला और बगल में होकर मुझसे चिपक कर लेट गया.

हम दोनों प्यार भरी बातें करने लगे.

मैंने उससे पूछा- तुम तो चुदाई के लिए बड़ा खराब खराब कह रहे थे. इसमें तो बड़ा मजा आया है!
वह हंस कर बोला- हां, मगर तेरी पहली चुदाई मैं करना चाहता था.

हम दोनों हंसने लगे.

उसके बाद मेरे भाई ने मुझे एक बार और चोदा उसके बाद हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए.

सुबह मुझसे उठा भी नहीं जा रहा था, तो मैंने भाई से बोला.

उसने मुझे गोदी में उठाया और बाथरूम में लेकर गया.

बाद में भाई बाहर से नाश्ता और कुछ दवाएं लाया और उसने मेरी चूत की तेल से मालिश की.
भाई मेरी चूत सहलाता हुआ बोला- इससे आराम मिलेगा.

पहली बार की चुदाई में मेरी तो पूरी चूत सूज चुकी थी.

अब अगली कहानी में मैं बताऊंगी कि भाई ने कैसे मेरी गांड मारी और मुझसे अपना लंड चटवाया.
मैं अपने भाई की कैसे रंडी बन गई.
 

junglecouple1984

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जन्मदिन पर मिली आपा की चूत




दोस्तो, मेरा नाम रूप मुहम्मद है. पर यह बदला हुआ नाम है.

मैं दिल्ली में अपनी फैमिली के साथ रहता हूँ.
मेरी फैमिली में मैं मेरी आपा और मेरी अम्मी हम तीन ही लोग रहते हैं.

मेरे अब्बू की डेथ आज से कोई दस साल पहले हो गई थी.
तो मेरी अम्मी ने ही हम दोनों भाई बहन को पाल-पोस कर बड़ा किया है.

यह कहानी मेरे जन्मदिन से एक दिन पहले की है.
मेरा 19वां जन्मदिन था.

उस दिन मैंने अपने सभी दोस्तों को पार्टी दी और घर पर मेरी अम्मी ने मेरी पसंद का खाना बनाया.

हम दोनों भाई बहन ने खूब मज़े किए.
मेरी आपा ने उस दिन लाल रंग का टॉप और नीचे एक ब्लॅक कलर की स्कर्ट पहनी थी.

मैं आपको अपनी आपा के बारे में बता देता हूँ.
वे एक बड़े ही गठीले और मस्त सुंदर शरीर की मालकिन हैं.

आपा मुझे बहुत अच्छी लगती हैं.
मैं और आपा एक ही कमरे में सोते हैं.

पार्टी करके हम दोनों कमरे में आए तो मैंने ऐसे ही मज़े लेने के लिए आपा को बोल दिया- आपा, आपने तो मुझे कोई गिफ्ट ही नहीं दिया?
इस पर आपा बोलीं- बता तुझे क्या चाहिए?
उनकी इस बात पर मैं चुप रहा.

आपा मेरे पास आईं और उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया.
उनके ऐसा करने से मेरा सिर आपा के मम्मों से टकरा गया.

मुझे ना जाने क्यों आज एक अलग सा अहसास हुआ.

फिर आपा मेरा सिर सहलाती हुई बोलीं- बता, क्या चाहिए तुझे?
मेरा तो मन हो रहा था कि मैं आपा को बोल दूँ कि मुझे आपके साथ सेक्स करना है.

मैंने मुँह बनाते हुए बोला- नहीं आपा, आप मना कर दोगी.
वे बोलीं- नहीं करूंगी. तू बता तो सही कि तुझे क्या चाहिए?

मैंने एकदम से बोल दिया- मुझे आज आपके साथ सेक्स करना है.
इस पर वह एकदम से गुस्सा हो गईं और बोलीं- मैं आपा हूँ तेरी … कुछ तो शर्म कर!

मैंने कहा- आपा, आप बस एक बार.
वे मना करती रहीं.

पर मेरे बहुत रिक्वेस्ट करने पर वह राज़ी हो गईं.

मैंने अपना एक हाथ उनकी नंगी गोरी जांघ पर रख दिया और उनकी जांघ को सहलाने लगा.
वह अपने मुँह से ‘आह आह … आह.’ की कामुक आवाजें निकाल रही थीं.

मैंने उनके मुलायम होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
अब तो आपा भी मेरा साथ दे रही थीं.

फिर उन्होंने मुझसे अपने और उनके सारे कपड़े एक एक करके उतारने को बोला.
मैंने ठीक वैसा ही किया.

कुछ ही देर में हम दोनों बिल्कुल नंगे थे.
मेरी आपा वाकयी में कोई करिश्मा सी लग रही थीं, वे बहुत मस्त माल लग रही थीं.

अब मैं उनकी 36 इंच नाप की चूचियों को मसलने लगा और बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने और काटने लगा.

आपा लगातार गर्म हो रही थीं, उनके मुँह से ‘आह … आह भाई पी ले … आह …’ की गर्म आवाजें निकल रही थीं.

कुछ देर बाद मैं आपा की चूत पर आ गया.
उन्होंने बोला- तू जल्दी से मेरी चूत चाट ले.

मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया और अपनी एक उंगली उनकी चूत के अन्दर डाल दी.
उनके मुँह से एकदम से आह निकल गई.
वे बोलीं- भाई थोड़ा धीरे! मुझे दर्द हो रहा है.

मैंने उनसे पूछा- क्या आपने कभी सेक्स नहीं किया?
तो वे बोलीं- नहीं.

मैंने कुछ नहीं कहा और उनकी चूत को बड़े प्रेम से चूसने लगा.

फिर वे मेरे सर को अपनी चूत पर दबाती हुई बोलीं- तूने किया है क्या कभी?
मैंने आपा को बता दिया- किया है, मेरी एक गर्लफ्रेंड है उसको चोदा है.

आपा ने पूछा- कौन है वह?
मैंने कहा- आपकी बेस्ट फ्रेंड रूबी.

आपा रूबी का नाम सुनकर एकदम से चौंक गईं और मुझे अपनी चूत से हटाती हुई बोलीं- उसने तो आज तक मुझे बताया ही नहीं?

तो मैंने उनकी तरफ देख कर कहा- हां आपा, मैंने ही उसको आपको बताने से रोका था.

आपा अब मेरे पास को आईं और मेरे होंठों में लगे अपनी बुर के रस को चाटने लगीं.
हम दोनों फिर से चूमाचाटी में लग गए.

इस बार आपा मेरी जीभ को चूसने लगी थीं और मैं भी उनकी जीभ से अपनी जीभ को कुचलवाने लगा था.

उनकी लार और मेरी लार के साथ साथ आपा की चूत के रस की महक बड़ा ही स्वादिष्ट रस का मजा दे रही थी.

कुछ देर बाद आपा ने मेरे कच्छे पर अपना हाथ लगाया और मेरे लौड़े को सहलाने लगीं.

मैंने उनकी एक चूची को मसला और लंड को उठाते हुए उनके हाथ से लौड़े को सही से मसलवाने लगा.
मेरा लौड़ा एकदम सख्त लोहे जैसा हुआ पड़ा था.

आपा ने लौड़े को ऊपर से नीचे तक टटोला और उनसे रहा न गया तो वे मेरे मुँह से अपने मुँह को हटा कर लौड़े की तरफ देखने लगीं और हैरत से लंड को पकड़ कर चैक सी करने लगीं कि ये लंड है या कुछ और चीज है.

मैंने कच्छे को एक तरफ से हटा कर लंड को बाहर निकाल कर आपा को दिखाया तो आपा के मुँह से ‘आह मर गई अम्मी रे … ये तेरा लंड है या शैतान का लंड है!’

आपा मेरे लंबे मोटे और काले लंड को देख कर हैरान थीं.
लौड़े ने कच्छे को एकदम से तान रखा था.

मैं उठ कर खड़ा हो गया तो आपा ने एकदम से मेरे अंडरवियर को खींच कर नीचे कर दिया और मेरा काला लंड देख कर डर गईं.
वे बोलीं- भाई, मैं तेरा इतना मोटा और बड़ा लंड कैसे ले पाऊंगी?

मैंने कहा- आपा आप चिंता मत करो, मैं पहली बार में बस उतना ही अन्दर पेलूँगा, जितना आपसे झेला जा सकेगा. बस अब आप अपने भाई के लौड़े को चूस कर प्यार कर दो.
यह सुनकर आपा खुश हो गईं और मेरा लंड चाटने चूसने लगीं.
वे मेरी गोटियों को भी चूसने लगीं.

पूरे कमरे में बस ‘गों गों …’ की और ‘आह … आह …’ की आवाजें आ रही थीं.

कुछ ही देर में मेरे लंड में से लावा निकलने जैसा हो गया.
मैं अभी आपा का मुँह अपने लौड़े से हटा पाता कि लंड में एक पिचकारी छूटी और सारा रस आपा के मुँह में जाने लगा.

आपा ने तब भी अपना मुँह नहीं हटाया और वे मेरे लौड़े के रस को आब की पी गईं.

जिस वक्त आपा मेरे लौड़े से रस चूस रही थीं, सच बता रहा हूँ मुझे मेरी नंगी बहन एकदम बाजारू रांड लग रही थी.

उसे इस तरह से देख कर मेरे लौड़े मे फिर से तनाव आने लगा था और आपा भी लंड को वापस सख्त होते देख कर लौड़े को और जोर जोर से चूसने लगी थीं.
कुछ ही देर में लौड़े में जान आ गई और वह दुबारा से टनटनाने लगा.

अब मैंने देरी ना करते हुए आपा के मुँह में से अपना लंड निकाला और उनकी चूत की फांकों में रख दिया.
आपा ने भी झट से टांगें फैला कर लंड को चूत में घुस जाने के लिए रास्ता दे दिया.

मैंने एक जोर का धक्का दे दिया, तो मेरे लंड का टोपा उनकी चूत में घुसता चला गया.
मैं बहन चोद बन गया.

केवल लंड के सुपारे के घुसने से उनके मुँह से एकदम से ‘अया … अम्मी …’ की आवाज निकली.
पर मैंने जल्दी से अपना मुँह अपनी आपा के मुँह पर रखा और उनकी आवाज को अपने होंठों से दबा दिया.

उधर मैंने उनका मुँह दबाया, नीचे से लौड़े को दबाते हुए उनके एक चूचे को दबाने लगा.
उनकी आंखों से आंसू आ रहे थे.

टांगें और हाथ बेतरतीब तरीके से छटपटाते हुए मेरी पकड़ से छूटने के लिए तड़फ रहे थे.

आपा बेहद दर्द से गाफिल थीं और किसी भी तरह से छूटने की भरसक कोशिश कर रही थीं.
मगर मैं भी किसी कड़ियल और कामांध मर्द की तरह अपनी आपा के ऊपर छाया हुआ था.

मैं लगा रहा और थोड़ी देर बाद जब वह नॉर्मल सी हुईं तो मैंने एक बार फिर से अपना लंड उनकी सीलपैक चूत को फाड़ने की गर्ज से अन्दर पेल दिया.

वे तो एकदम से ऐसे होने लगीं, जैसे मर गई हों.
उनकी आंखों से लगातार आंसू आ रहे थे और चूत से खून निकल रहा था.

पर मैंने उनकी जरा भी फ़िक्र ना करते हुए चुदाई जारी रखी.

करीब दो मिनट की चुदाई के बाद अब आपा भी मजा लेने लगी थीं और वे अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी थीं.

मैंने यह देखा तो अपने होंठों को उनके होंठों से अलग कर लिए और उनके हाथों को कुछ ढील दे दी.

वे एकदम से फड़क उठीं और उन्होंने मेरे चूतड़ पर एक जोर का चांटा मार दिया.
साथ ही आपा मुझे गंदी गंदी गाली देने लगीं.
वे बोल रही थीं- साले बहनचोद, मैं तेरी बहन हूँ … कोई रंडी नहीं हूँ, जो तू मुझे ऐसे चोद रहा है.

मैं चुप था और उनकी बातों का मजा लेते हुए धकापेल उनकी चूत में लंड अन्दर तक पेल रहा था.

कुछ देर बाद आपा भी मेरे साथ मस्ती से चुदने लगीं और उनकी आवाजें अब वाकयी में किसी प्यासी रांड के जैसे निकलने लगी थीं.

‘आह चोद दे मेरे राजा … आह फाड़ दे मेरी चूत … साले मेरी चूत का भोसड़ा बना दे … आह न जाने कब से तेरे साथ चुदाई की सोच रही थी.’

मैं भी उन्हें चोदते हुए कहे जा रहा था- साली रंडी आपा … बहन की लौड़ी कुतिया … तेरी माँ को चोदूं मादरचोदी … आह ले अपने भाई का लवड़ा … आज तेरी चूत को कचौड़ी बना कर खा जाऊंगा.

इस तरह से करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई हुई और मेरे लंड का फव्वारा उनकी चूत में बह निकला.
मैंने आपा की चूत में ही अपने लंड का पूरा माल छोड़ दिया था.

चुदाई के बाद हम दोनों निढाल हो गए थे और हम दोनों नंगे ही एक दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े थे.
न जाने कब हम दोनों की आंखें मुँद गईं और हम दोनों गहरी नींद में सो गए.

करीब आधा घंटा बाद मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि आपा की चूत से खून बहकर उनकी जांघों पर और बेड पर गिर कर सूख गया था.
मैंने उनको उठाया और अपनी गोदी में उठा कर बाथरूम में ले गया.

उधर उनकी चूत और जांघ पर साबुन लगाकर खून को साफ किया और उन्हें कमोड पर बिठा दिया.
आपा सूसू करने लगीं और मैं कमरे में से बेड की चादर भी ले आया, उसमें खून लगा था सो उसे धोकर सुखा दी.

आपा मुझे ये सब करती हुई देख रही थीं और मुस्कुरा रही थीं कि कैसे मैं चुदाई के निशान मिटा रहा हूँ.

फिर हम दोनों नहा कर कमरे में नंगे ही आए.

मैंने आपा को बेड पर बैठाया और उनसे पूछा- कैसा लगा?
वे बोलीं- बहुत अच्छा.

मैंने उनको एक किस की और उनसे गांड मरवाने के लिए कहा.

उन्होंने गाली देते हुए एक चांटा मार कर बोलीं- साले बहनचोद, तू आज मुझे बाजारू रंडी समझ कर चोद चुका है और अभी भी रंडी ही समझ रहा है क्या?
मैंने हंस कर कहा- चुदाई के वक्त रंडी बन कर ही चुदाई का सही मजा आता है आपा.
आपा भी हंसती हुई बोलीं- हां ये तो है.

मैंने कहा- तो मैं पीछे से आपकी ले लूँ?
वे हंस कर बोलीं- ले लेना पर अभी नहीं, बाद में फिर कभी.

उन्होंने मेरे गाल पर एक किस की और फिर अपने कपड़े पहनने लगीं.

मैंने उनको एक किस की और कहा- आपा, आज कपड़े मत पहनो, आज मेरा दिल आपके साथ नंगे सोने का है.

वे झट से मान गईं और हम दोनों सारी रात नंगे ही एक दूसरे की बांहों में सोए.

मैंने उस रात अपनी आपा को दो और बार चोदा.

अब तो ये हमारा रोज़ाना का काम हो गया था. हम दोनों लगभग हर रोज़ चुदाई करते हैं और रात को नंगे ही सोते हैं.
 

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अपनी मौसी की गांड फाड़ चुदाई



दोस्तो, मैं अभी नन्दन!
मैं सेना का जवान हूं. मेरी कद कठी 6 फीट 2 इंच और मेरे लंड की लंबाई सामान्य से ज्यादा है.
मेरी उम्र 25 साल है।

अभी जनवरी के महीने में मैं छुट्टी पर घर आया हुआ था.
तभी मेरे फोन पर मेरे मौसी का कॉल आया.
उन्हें कैन्टीन से कुछ सामान लेना था, तो मैंने उन्हें तैयार रहने को कहा.

यह कहानी इन्हीं के साथ सेक्स की है.

मैं आपको अपने मौसी के बारे में बता दूँ.
वे करीब 40 साल की एक तलाकशुदा महिला हैं.
उनका फिगर लगभग 36-34-38 का होगा.

उनकी दो बेटियाँ भी हैं.
बड़ी वाली इंजीनियरिंग कर रही है और छोटी अभी 10वीं में है।
मौसी घर पर अकेली ही रहती हैं।

मैं अगले दिन सुबह तैयार होकर उनको लेने पहुँच गया और हम लोग कैन्टीन से सामान लेने लगे.

भीड़ बहुत थी इसीलिए शाम हो गई.

हम लोग लगभग 7 बजे शाम को घर पहुँचे.
ठंड काफी थी इसीलिए मौसी मुझसे काफी चिपक कर बैठी थी जिसमे मैं उनकी जिस्म की गर्मी को अच्छे से महसूस कर रहा था।

घर पहुँचने के बाद मैं फ्रेश हुआ और हॉल में सोफ़े पर बैठ गया.
कंबल ओढ़ कर मैं टीवी देखने लगा.

तभी मौसी भी ड्रेस बदल कर लाल सफ़ेद रंग का सूट पहन कर किचन से मेरे लिए चाय और पकौड़े ले कर आयी.
उन्होंने अपने बालों को एक तरफ कर लिया और मेरे साथ सोफ़े पर मेरे कम्बल में बैठ गई.

हम दोनों बातें करने लगे और चाय पीने लगे।

मैं फिर से उनके जिस्म की गर्मी को महसूस करने लगा.
मेरा ध्यान बार बार उनकी गर्दन और छाती पर जा रहा था जिससे मैं भी गर्म होने लगा और मेरा लंड ने हरकत शुरू कर दी।

चाय खत्म हुई और मैं अब अपने घर जाने के लिए खड़ा हुआ.
तो मौसी का ध्यान मेरी पैन्ट में उभर कर दिख रहे मेरे लम्बे लंड पर गया.

वे कुछ देर तो उसे देखती रही … और तभी उनके चेहरे पर एक चमक आ गई, जैसे उन्होंने कुछ सोच लिया हो.

उन्होंने मुझे जाने से मना किया कि रात हो गई है और ठंड बहुत ज्यादा है. शीतलहर चल रही है, इसलिए कल सुबह चले जाना!

इतना ही नहीं, उन्होंने तुरंत मेरी माँ को फोन लगा कर बता दिया कि मैं आज घर नहीं आ पाऊंगा.

रात हो जाने के कारण मेरी माँ भी रुरांत मान गई.
मैं कुछ बोल नहीं पाया।

शायद मेरे लंड को देखने के बाद मौसी की नीयत बदल गई थी।

उन्होंने मुझे कहा कि यहां ठंड ज्यादा है, इसलिए मेरे रूम में बैठ कर टीवी देखो.

फिर हम दोनों उनके बेडरूम में बैठ कर टीवी देखने लगे.
और हम दोनों ने एक ही कंबल ओढ़ रखी थी।

मौसी बिल्कुल मेरे करीब बैठी थी जिसमें उनकी जांघें और बदन मेरे बदन को छू रहा था.
मेरे अन्दर आग लग चुकी थी।

तभी मौसी ने पूछा- 25 साल के हो गए हो, शादी कब करोगे? कोई गर्लफ्रेंड बना रखी है या नहीं?
मैंने कहा- इस साल अक्टूबर तक कश्मीर से पोस्टिंग हो जाएगी. फिर करूंगा शादी … अभी तो कश्मीर की ही कुछ लड़किया फ्रेंड हैं।

मैं उन्हें अपनी फोटो दिखाने लगा.

फोटो देखने के बहाने वे जान बूझ कर मेरे हाथ को छूने लगी और एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया.
मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था।

मौसी ने धीरे धीरे अपने हाथ को लंड के तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया था और उनकी सांसें काफी तेज हो गई थी.

तभी अचानक उन्होंने मुझे गले लगा लिया और रो रोकर अपना दुख बताने लगी.
वे सेक्स से वंचित रही थी और अभी काफी प्यासी हो रही थी।

मैंने पहले तो उनके आंसू पौंछे और फिर अपने होठों को उनके होठों पर रख दिया.
अब हम दोनों की सासें एक जैसी होने लगी.

लगभग 10 मिनट तक मैंने उनको अच्छे से चूसा और उनके चूतड़ों को सहलाने लगा.

वे ऊपर से ही अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने लगी.

फिर मैंने उनकी टी-शर्ट को उतारा.
उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी।

मैंने उनको बेड पर जोर से धक्का दे कर लिटाया और उनके मम्मों को बेरहमी से चूसने और दबाने लगा.
वे काफी जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी और तड़पने लगी.

उनके मम्मों को अच्छे से चूसते हुए मैं उनकी नाभि में अपनी जीभ फेरने लगा.
जिससे वे मेरे सर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर जोर से दबाने लगी और बोलने लगी- अच्छे से चूसो मुझे!

उनकी चूत से पानी आ रहा था जिससे मौसी की सलवार गीली हो गई थी।

मैंने उनकी सलवार के नाड़े को खोला और उन्हें पूरे तरह नंगी कर दिया.
मेरी सेक्सी मौसी की बिल्कुल गुलाबी स्पंज जैसी रस भरी चूत मेरे सामने थी.

मैंने बिना देर किए अपने होंठ उनके चूत पर रखे और चूत के रस का आनंद लेने लगा।

जैसे ही मैंने अपनी जीभ चूत के अंदर डाली, उन्होंने अपनी जांघों से मेरे सिर को दबा लिया और जोर जोर से कहने लगी- जल्दी चोदो मुझे!
और अपना रस मेरे मुंह पर छोड़ दिया।

फिर मैंने अपने लंड को चूत पर सेट किया और धक्का दिया.

मौसी चीख पड़ी क्योंकि एक लंबे अर्से से वे चुदी नहीं थी.

मैंने उनके होठों पर अपने होंठ रख कर उनके मुंह को बंद किया और उनके दोनों हाथों को जोर से पकड़ कर एक झटके में पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया.
जिससे वे दर्द से तड़प उठी.

पर मैंने बिल्कुल कस के पकड़ रखा था जिससे वे मुझ रोक नहीं पाई।

मैंने बिना रुके मौसी की चुदाई जारी रखी.

उनका दर्द अब धीरे-धीरे चरम सुख में बदल गया.

उन्होंने मुझे जोर से पकड़ा और कहने लगी- और जोर से चोदो मुझे … मेरी फुद्दी को फाड़ दो आज!
और मेरी पीठ पर अपने नाखून चुभाने लगी।

कुछ देर बाद मैं लेट गया और मौसी को अपने लंड पर बैठा लिया.
तब वे खुद से अपने भानजे के लंड से चूत चुदाई का मज़ा लेने लगी।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया.

तभी मेरा ध्यान उनकी गांड पर गया.
तो मैं अपनी उंगली को उनकी गांड के छेद में डालने लगा जिसका मौसी ने विरोध किया.

बहुत मनाने पर भी मौसी अपनी गांड मरवाने के लिए तैयार नहीं थी.
पर मेरे ऊपर तो मौसी की गांड चुदाई का भूत सवार हो गया था।

तब मौसी को घोड़ी बना कर चोदते समय मैंने मौसी के कमर को कास के पकड़ लिया ताकि वे हिल ना पायें.
और अपने गीले लंड को मौसी की चूत से निकाल कर उनकी गांड के छेद पर सेट किया और जोर से धक्का मारा.

जिसके कारण मेरा पूरा का पूरा लंड गांड को फाड़ता हुआ अंदर चला गया।

तीखे दर्द की मारी मौसी जोर जोर से चिल्लाने लगी और बेड पर गिर गई.
मैं भी उनके ऊपर था लेकिन मैंने लंड को बाहर नहीं निकलने दिया।

मौसी की गांड से खून आने लगा.

मैंने कुछ देर लंड को गांड के अंदर रखा और फिर धीरे धीरे चोदना शुरू किया.
और कुछ देर चोदने के बाद मैं उनकी गांड में ही झड़ गया और उनकी बगल में लेट गया।

तब तक मौसी की हालत बहुत खराब हो गई थी, उनसे तो उठा भी नहीं जा रहा था.

फिर मैं उन्हें अपनी गोद में उठा कर बाथरूम में ले गया और उनको और खुद को साफ़ किया।
बाथरूम से मैं नंगी मौसी को गोद में ही बेडरूम में लाया और बिस्तर पर लिटा दिया.

अब तक मौसी को गांड दर्द से कुछ राहत मिल चुकी थी.
मौसी ने मुझे बहुत डांटा कि क्यों मैंने उनकी अनचुदी गांड मारी.

मैंने मौसी को सॉरी बोला और पूछा कि क्या उन्हें आज की चुदाई में मजा आया?
तो उन्होंने मुझे प्यार से चपत लगाते हुए अपने गले से लगा लिया और मेरे लबों पर अपने लब रख दिए.

हम दोनों फिर से प्रगाढ़ चुम्बन में लिप्त हो गये.
 

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मामी ने पहली चुदाई का अनुभव कराया



नमस्कार दोस्तो, मैं आज आपको मेरा पहला सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूं.
यह कहानी मेरी दूर की मामी की है, जो हमारे ही गांव में रहती हैं.

मामी की हाइट 5 इंच 5 फुट है और मेरी हाइट 5 फुट 11 इंच की है.
मामी की एकदम मस्त फिगर थी.

दरअसल मामी और मामा पिछले 10 सालों से मुंबई में रह रहे थे पर अभी वे दोनों गांव में शिफ्ट हो गए थे.

उनके तीन बेटे थे जो अभी गांव के ही स्कूल में पढ़ने जाते थे.

मामी को शहर की आदत थी तो उन्हें अभी खेत में काम करने की बिल्कुल भी आदत नहीं थी.
वे दिन भर अकेली ही रहती थीं.

यह बात गर्मियों के दिनों की है जब मैं कॉलेज की छुट्टियों हो जाने के कारण फ्री था और अपने गांव वापस आ गया था.

दरअसल मुझे गर्मी जरा सी भी बर्दाश्त नहीं होती थी तो घर में मुझे बड़ी गर्मी लगती थी और मेरी पढ़ाई भी कुछ नहीं हो पाती थी.

ऐसे ही मैं एक दिन गर्मी मैं घर पर बैठा था, तभी मामी कुछ काम के लिए हमारे घर आईं.

उन्होंने मेरी परेशानी समझी और मुझे अपने घर पर पढ़ाई करने आने को कहा.
उनका घर काफी बड़ा था और उनके घर एक नीम का पेड़ भी था, जिससे उनके घर में काफी ठंडक रहती थी.
मैं उनकी इस बात से राजी हो गया.

उनके जाने के बाद 10-15 मिनट बाद में उनके घर की ओर चल पड़ा.

उस दिन रविवार होने के कारण उनके बच्चे दोपहर की धूप की वजह से कमरे में कूलर के सामने सो रहे थे.
मैंने एक चारपाई ली और नीम के पेड़ के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने बैठ गया.

अब ये मेरा हर दिन का रूटीन हो गया था.
मैं उनके घर में काफी घुल-मिल गया था और मुझे ये बात समझने देर नहीं लगी कि मामा मामी के बीच कुछ अनबन है.

मामी मुझसे हर रोज बात करती थीं.
मेरी उनसे काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी.

एक दिन की बात है, मैं पढ़ाई करते करते वैसे ही चारपाई पर सो गया.

पता नहीं कैसे … पर मेरे लौड़ा खड़ा हो गया.
मैं उस वक्त गहरी नींद में था.

पर जब मेरी आंख खुली, तो मैंने मामी को मेरे पैरों के पास देखा.
वे मेरे लौड़े वाले भाग को घूरे जा रही थीं.

मेरी आंख खुलते ही वे वहां से उठ कर चली गईं और थोड़ी देर बाद मेरे लिए चाय लेकर आ गईं.
मेरी तो नजरें शर्म के मेरे नीचे ही झुकी थीं पर मामी ने इधर उधर की बातें करनी शुरू कर दीं.

बातें करते करते उन्होंने मुझसे पूछा कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं?
पर मैं तो था बाल ब्रह्मचारी.

उस दौरान मैंने उन्हें थोड़ा अजीब सा बर्ताव करते देखा जिससे मैं समझ गया कि मामी के नीचे आग बहुत जोरों की लगी है.
फिर मैंने सोचा कि इन्हें अभी न ही छेड़ा जाए तो बेहतर रहेगा.

अगले दिन जब मैं दोपहर एक बजे उनके घर गया तो दरवाजा अन्दर से बंद था.
मैंने दरवाजा बजाया तब भी पांच मिनट तक कोई नहीं आया.

पांच मिनट बाद जब दरवाजा खुला तो मैं अवाक ही रह गया.
मामी एकदम मस्त नई ग्रे कलर की साड़ी में एकदम मेकअप करके तैयार थीं.
उन पर ग्रे साड़ी में लाइट हरा ब्लाउज काफी जंच रहा था.
होंठों पर लाली तो चार चांद लगा रही थी.

मेरा हथियार वहीं खड़ा होने लगा था इसलिए मैंने जल्दी से चारपाई उठाई और अपनी जगह पर चारपाई लेकर बैठ गया.

मैंने मामी से पूछा- मामी आप कहीं जा रही हैं क्या?
मामी ने कहा- नहीं रे, मैं ऐसे ही मेकअप नहीं कर सकती क्या?

ऐसा कहते समय उनके आंखों में अलग ही नूर था जो मुझे कुछ बड़ा होने की कल्पना करवा रहा था.
वे वहीं मेरे पास में ही बैठ गईं.

अब तो मेरी हवा टाइट हो गई.
ऐसी बला पास में बैठी हो, तो किसकी पढ़ाई हो सकेगी.

मैं ऐसे ही किताब में मुँह डाल कर बैठा रहा.

आखिरकार मैंने मामी से कह ही दिया- मुझे बहुत नींद आ रही है.
उन्होंने कहा कि तुम आज अन्दर बेडरूम में ही सो जाओ, घर पर कोई नहीं है. कूलर की हवा में अच्छी नींद आ आएगी.

मैं कूलर की हवा के लिए उनके बेडरूम में सोने चला गया.
उनका रूम काफी साफ सुथरा और आज ही साफ किया हुआ लग रहा था.

मैं जाकर सीधा लेट गया पर मुझको अभी नींद नहीं आ रही थी तो मैं ऐसे आंख बंद करके पड़ा हुआ था.

लगभग दस मिनट बाद मुझे मेन गेट बंद होने की आवाज आई और बाद में मेरी नाक में मामी की परफ्यूम की महक बस गई.
फिर बेडरूम का दरवाजा बंद होने की आवाज आई.

मैंने धीरे से आधी आंख खोली तो देखा कि मामी मेरी तरफ ही बढ़ रही थीं.

रूम मैं अब थोड़ा अंधेरा हो गया था तो उनको मेरे जागने का पता ही नहीं चला.

वह मेरे पेट के पास आकर बैठ गई और वासना से मेरी ओर देखने लगीं.
उनका हाथ धीरे धीरे मेरे लौड़े के पास बढ़ता गया.

अब वे मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से ही अपने हाथ से रगड़ रही थीं जो पहले से खड़ा हो चुका था पर अब अन्दर ही उफान मार रहा था.

उन्होंने धीरे से पैंट का हुक खोल दिया और पैंट नीचे खिसकाने लगीं.

मेरे लिए ये सब पहली बार था तो मैं झट से उठ गया.

अभी मैं कुछ बोल पाता कि रेखा मामी (मामी का नाम रेखा था) ने अपने रसीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मेरे हाथ अपने हाथों से पकड़ लिए.

मैं अपना सर जब पीछे करने लगा तो उन्होंने अपने हाथों से मेरा सर पकड़ लिया.

उनके होंठ अब मेरे होंठों को पूरी शिद्दत से पी रहे थे.
इससे धीरे धीरे मेरा भी विरोध खत्म हो गया था और अब मैं भी उनके होंठों को चूस रहा था.

हम दोनों एक दूसरे में खो गए थे.

रेखा मामी ने मेरे हाथों को पकड़ कर अपने मम्मों पर रख दिए.
मैं भी वासनावश पता नहीं कैसे उनके बूब्स दबाने लगा था.

वे अपनी जीभ को मेरे मुँह डाल रही थीं, साथ ही वे मुझे जगह जगह चूम रही थीं, कभी गालों पर तो कभी गर्दन पर.

इससे उनकी बरसों की प्यास साफ झलक रही थी.
मैं तो उनके बूब्स दबाने में मस्त था.

तभी उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी शर्ट को निकाल कर कुर्सी की ओर फेंक दिया.
मैं भी उनकी साड़ी के पल्लू को हटा कर उनकी गर्दन को चूम रहा था और मेरे हाथ उनके कमर को कस रहे थे.

फिर मैंने चूमते चूमते उन्हें नीचे ले लिया और उनके ऊपर चढ़ गया.
मैं उन्हें चूमता रहा.

बाद में मैंने उनकी साड़ी खोलनी शुरू कर दी और साड़ी को निकालकर साइड में फेंक दिया.

अब वे मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही थीं जिस पर उनका मंगलसूत्र उनकी सुंदरता को निखार रहा था.

मैं उनके पेट को चूमने लगा तो उनकी आवाजें निकलनी शुरू हो गईं.

अपना एक हाथ उनकी चूत पर रखकर मैं पेटीकोट के ऊपर से ही मसलने लगा.
मामी अपने हाथों से मेरे सर को उनकी चूत की तरफ दबा रही थीं.

मैं पेटीकोट के नीचे अन्दर सर डाल कर चूत की तरफ बढ़ने लगा.
वे अपने पैरों से चूत को ढकने लगी थीं, पर जैसे तैसे मैं उनकी चूत के पास आ गया.

अब मैंने अपनी जीभ उनकी चूत पर रख दी और उसे चूसने लगा.
थोड़ी ही देर में मामी को भी मजा आने लगा.
वे भी मेरे सर को ऊपर से दबा रही थीं और कामुक आवाजें निकाल रही थीं ‘आ … आह … अह्ह …’

अब तो उनकी चूत से पानी भी निकलने लगा था.
मैं बाहर निकल आया.

उन्होंने मुझे नीचे गिराया और मेरे पैंट को निकालने लगीं.
मैं सिर्फ अंडरवियर में था और वे ब्लाउज और पेटीकोट में थीं.

उन्होंने झट से मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरे लौड़े को आजाद कर दिया.
मेरा लंड अब उन्हें कामुक देखकर और उफान मारने लगा.

मामी लौड़े को देख कर और ज्यादा जोश में आ गईं.
वे बोलीं- आज तो बहुत चहक रहा है ये … इसका तो मैं पूरा माल निकाल दूंगी.

इसी के साथ वह अपने कोमल हाथों से मेरे लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगीं.

मेरे लौड़े को आज तक किसी लेडी के स्पर्श का अनुभव नहीं था तो थोड़ी ही देर में उसने अपना फव्वारा मामी के मुँह पर मार दिया.

इस पर मामी जोरों से हंसने लगीं- मुझे पता था कि तेरा यह आज पहली बार है, फिर भी तेरा बहुत देर तक टिका रहा.
ऐसा कह कर वे फिर से मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों को चूसने लगीं.

उनके बूब्स मेरी छाती अब छूने लगे थे जो मुझे अलग ही अहसास दे रहे थे.

मैं उनके बूब्स को कपड़ों की कैद से आजाद करने लगा.
उनके ब्लाउज का हुक खोल दिया और उनका ब्लाउज मेरी छाती पर गिरा और साथ ही में मामी भी.

वे अपने बूब्स को अपने हाथों से छुपा रही थीं.
मैं भी उनके हाथ हटाकर उनको जोरों से दबाने लगा था.

नीचे से मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था.
यह देख मामी की वासना और बढ़ने लगी.

अब उन्होंने मुझे नीचे लेटे रहने का कहा और खुद मेरे लौड़े के ऊपर चढ़ गईं.
मामी मेरे लौड़े को अपनी चूत में सैट करने लगीं.

उन्होंने धीरे धीरे करके अपना पूरा भार लौड़े पर डाल दिया.

मेरा लौड़ा भी उनकी चूत के अन्दर सरकने लगा था, जिससे रेखा मामी की दर्द भरी आवाज हल्की सी तेजी के साथ निकली.

मेरे लिए ये देसी सेक्स X अनुभव काफी रोमांचित करने वाला था क्योंकि मेरा लौड़ा पहली बार किसी की चूत के अन्दर जा रहा था.

हालांकि मेरा लंड भी थोड़ा दर्द करने लगा था पर मामी के इस अवतार के सामने कुछ नहीं था.

अब मेरा पूरा लौड़ा रेखा मामी की चूत के अन्दर धंस गया था.
रेखा मामी ने अब अपने हाथ मेरे छाती पर टिकाए और अपनी गांड को धीरे धीरे से ऊपर नीचे करने लगीं.

फिर उनकी स्पीड बढ़ने लगी थी और मैं भी नीचे से धक्के मारने लगा था.
इससे उन्हें भी काफी मजा आ रहा था.

इस दौरान उनके बूब्स और मंगलसूत्र मेरी तरफ झुक रहे थे जो मेरे हाथों से मसले जाने लगे थे.
हम दोनों लगभग 20 मिनट तक ऐसे ही चुदाई करते रहे.

इसके बाद मामी ने खुद नीचे लेटकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
मेरे लौड़ा अभी भी उनकी चूत के अन्दर ही था.

हम दोनों एक दूसरे को फिर से चूम रहे थे.
इस पोज में मामी को मेरा लंड कुछ ज्यादा ही दर्द दे रहा था.

इसी वजह से रेखा मामी ने पास रखी तेल की बोतल उठाई और मेरा लौड़ा बाहर निकालकर उस पर तेल चुपड़ दिया.
फिर वे उसे सहलाने लगीं और थोड़ा सा तेल अपनी चूत में भी डाल दिया.

इसके बाद मामी ने अपने दोनों पैर उठाकर मेरे कंधों पर रख दिए और बोलीं- अब तुम मेरी प्यास बुझा दो.

मैं भी अपना लौड़ा उनकी चूत के पास ले जाकर अन्दर सरकाने लगा, तो वह काफी आराम से चूत में समा गया.

लौड़ा अन्दर घुसते ही मैं मामी के होंठों में लग गया.
दोनों हाथों से उनके बूब्स मसलते हुए उन्हें जोरदार किस करने लगा और साथ ही मैं अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगा.

इससे रेखा मामी की कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह … चोदो मुझे और जोर से चोदो … आह!

साथ ही में वे भी नीचे से अपनी गांड उठा रही थीं.

लगभग 20 मिनट के बाद उनकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा और मामी झड़ गईं.

इसी के साथ मेरा भी निकलने वाला हो गया था.
मेरी अकड़न देख कर मामी बोलीं- अन्दर ही गिरा देना. आज मेरी चूत की बरसों की प्यास बुझा दो जो तेरे मामा से कभी नहीं बुझती.

मैंने भी अपना सारा माल रेखा मामी की चूत के अन्दर ही डाल दिया और वैसे ही उनके मम्मों पर सर रखकर उनके ऊपर सो गया.
हम दोनों भी वैसे ही नंगे सोए पड़े थे.

लगभग चार बजे हम दोनों नींद से उठे तो मामी ने जल्दी जल्दी कपड़े पहनने को कहा और खुद भी साड़ी पहन ली.
क्योंकि 4 बजे उनके बच्चों का स्कूल छूटता था.

कपड़े पहनने के बाद मैंने उन्हें फिर से पकड़ कर दीवार से चिपका दिया और उन्हें किस करने लगा.

मैंने मामी से पूछा कि दोबारा मुझे ऐसा मौका कब मिलेगा?
मामी ने कहा- अब तो मैं तेरी ही हूं. हम हर रोज मजा ले सकते हैं. कल तुमको मैं गांड मारनी सिखाऊंगी.

मैंने उन्हें चूमा और अपने घर चला गया.
 

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मादक मामी की जोरदार चुदाई का मजा



दोस्तो, मैं आपको अपनी सेक्स कहानी सुनाने के लिए हाजिर हूँ.

मैं अभी 19 साल का ही हुआ हूँ.

सेक्स रिलेशन का मजा मुझे मेरी सगी मामी से मिला.

हुआ यूं कि मेरी मामी और मामा दोनों हमारे घर के पास ही रहते थे.
मेरा अपनी मामी को चोदने का मन तो काफी समय से कर रहा था पर मौका नहीं मिल रहा था.

जब मामी मेरे घर आतीं तो मैं मजाक मजाक में कभी उनके दूध छू लेता, कभी उनकी मखमली गांड को छू लेता.
उनको भी इस बात का अहसास हो जाता था लेकिन उन्होंने कभी कुछ कहा नहीं.

उनकी इसी बात से मुझे लगा कि कुछ बात तो है मुझमें कि मामी को भी मैं पसंद आ रहा हूँ.

हां एक और बात … मामी का एक छोटा सा बेबी भी था.
कभी जब मामी अपने बच्चे को दूध पिलातीं … तो मुझे मामी के बूब्स दिख जाते और वे भी अपने चूचे ढकने की कोशिश नहीं करतीं.

इससे एक बार को लगता कि मामी कुछ सिग्नल दे रही हैं.

एक दिन मेरे मम्मी पापा और मामा मामी रिश्तेदारी में चले गए थे.
शाम को मेरे पापा और मामी घर आ गए.

मैंने पूछा कि मामा और मम्मी कहां हैं?
मामी ने बताया- बाबू (बेबी) की तबियत वहां ठीक नहीं लग रही थी. इसलिए मुझे आपके पापा के साथ वापस आना पड़ा. आपके पापा रात में फिर से उधर चले जाएंगे और सुबह सब आ जाएंगे.

पापा ने जाते हुए कहा- आज मामी यहीं पर सोएंगी. तुम AC मत चलाना. वरना बाबू को ठंड लग जाएगी.

पापा ने ऊपर के रूम में मामी को सुलाने के लिए कहा, उधर पर कूलर लगा है.
और पापा फिर से चले गए.

पापा के जाने के बाद मामी ने कहा- ऊपर नहीं, नीचे ही सो जाते हैं. बाबू को अन्दर के रूम में सुला देती हूँ और उसे चादर से ढक दूँगी.
मुझे तो लग रहा था कि आज मौका मिल गया है.

मैं सोचने लगा कि कैसे मामी को पटाऊं और उन्हें अपने लौड़े के नीचे लूँ.

रात हुई तो हम दोनों लेट गए.
लेकिन मुझे नींद आ ही नहीं रही थी.

मैं AC को देख रहा था.
मैंने कुछ सोचा और एसी को एकदम कम पर कर दिया.

अब कमरे में ठंडक बढ़ रही थी.
मैंने अपना कंबल नीचे सरका कर गिरा दिया और बाबू के रूम का दरवाजा उड़का दिया, ताकि उसे सर्दी न लगे.

कुछ ही देर में मामी को ठंड लगने लगी.
मैं भी मामी के पास होता चला गया, मैंने मामी के कंबल में खुद को घुसा लिया और उनकी कमर पर हाथ रख दिया.

एक पल को रुक कर मैंने देखा कि मामी कुछ कह तो नहीं रही हैं.
जब उन्होंने कुछ भी न कहा, तो मैंने अपना एक पैर भी मामी के ऊपर चढ़ा दिया.

एक साथ चिपक जाने से ठंड भी कम लग रही थी.

कुछ देर बाद मामी हिलने लगीं, मैं सोने का नाटक करने लगा.

तब करीब रात के दो बजे का समय रहा होगा.

जब मामी ने भी कुछ नहीं किया तो मैंने अपने हाथ को हरकत दी और उनके एक बूब को सहला दिया.

कुछ पल बाद मामी ने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने दूध पर रख कर सो गईं.
अब मेरा लंड भी तन रहा था. मैंने हिम्मत जुटा कर अपने लंड को मामी के पीछे से लगा दिया और आगे पीछे करने लगा.

मेरे लंड की गर्मी और मामी की गांड की गर्मी एक दूसरे से मिलने को बेताब हो रही थी.

तभी मैंने कहा- मामी सो रही हो क्या?
मैंने ऐसे ही पूछा था कि मामी जाग रही होंगी, तो वे जवाब देंगी और मामला साफ हो जाएगा.

उनका कोई जबाब न आने पर मैंने धीरे से उनके एक दूध को दबा दिया.
उनकी चुप्पी मेरी हिम्मत बढ़ा रही थी.

मेरा जोश और जज्बा दोनों बढ़ रहा था.

फिर मैंने सोचा कि जो होगा, सो देखा जाएगा.
अगर मामी पापा को या किसी को कुछ बताने की बात बोली, तो इनके साथ जबरदस्ती करके अभी तो चोद ही दूंगा. बाद का बाद में देखा जाएगा.

लेकिन दोस्तो, आप यकीन मानिए मुझे किसी भी तरह की जबरदस्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी.
मैंने कंबल को झटके से हटा दिया, तो भी मामी नहीं जगीं.

अब मुझे शक होने लगा.

मैं मामी के मम्मों को ऊपर से ही दबाने लगा.
फिर भी जब मामी नहीं जगीं तो मैंने मामी की साड़ी और पेटीकोट को उठा दिया.

उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैं उनकी चूत में उंगली करने लगा.

अब मामी हल्की सी कसमसाईं लेकिन वे अभी भी कुछ बोल नहीं रही थीं.
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

मैं मामी को चूमने लगा.
इस बार वे मेरा साथ देने लगीं तो मामला साफ हो गया.

उन्होंने धीरे से कहा- अपने कपड़े उतारो.

मैंने अपनी टी-शर्ट को उतार दिया और मामी के कपड़े भी उतारने लगा.
उनके ब्लाउज के सारे बटन मैंने खोल दिए और ब्रा का हुक भी खोल दिया.

फिर उनकी साड़ी को खींच कर निकाल दिया और पेटीकोट को ढीला करके नीचे कर दिया.
मैं मामी को चूमने लगा.

मेरा लंड भी सख्त हो ही चुका था.
मामी ने मेरे लंड को छुआ तो वह और ज्यादा तन गया.

अब मुझसे रहा नहीं गया.
मैंने उठ कर मामी के मुँह में लंड घुसा दिया.

वह कुछ कह पातीं कि उससे पहले ही मैंने उनका सर पकड़ कर लंड को अन्दर तक पेल दिया और आगे पीछे करने लगा.
वे सर झटकने लगीं.

उनके सर झटकने से लग रहा था कि मामी ने कभी लंड नहीं चूसा था.
मैंने मामी से पूछा तो मामी ने धीरे से कहा- मैंने ना कभी इतना बड़ा लंड असली में देखा था, न ही कभी चूसा. बस चुदाई के वीडियो में देखा था.

मैंने पूछा- आपने सेक्स वीडियो कब देखे थे? क्या मामा ने दिखाए?
उन्होंने कहा- नहीं, तुम्हारे मामा से कुछ नहीं होता. मैं जिधर पहले किराये पर रहती थी न, उधर वाली सहेली ने दिखाए थे.

मुझे बाद में पता चला कि मामी ऊपर वाले किरायेदार के साथ सेक्स करती थीं और शायद ये औलाद भी उसी की थी.
उन्होंने मुझसे छिपाने के लिए सहेली कह दिया था.

बस फिर क्या था, मामी ने अपने तरीके से लंड चूसना शुरू किया.
मैं भी ऐसा कौन सा लंड चुसाने में एक्सपर्ट था.

करीब दो मिनट तक लंड चुसवाने के बाद मैंने मामी की चूत को चड्डी के ऊपर से चूमा और उनकी पैंटी को उतार दिया.

मैं अब उनकी चूत को चूसने लगा.
मामी तो चूत चुसवाने से एकदम मदहोश हो गयी थीं.
वे कहने लगीं- आज तक इतना मजा कभी नहीं आया.

फिर मैंने मामी की चूत में अपना लंड घुसा दिया.
मामी एकदम से लंड घुसेड़ देने से चीख पड़ीं.

मैं मामी को चूमने लगा.
जैसे ही वे शांत हुईं, मैं उन्हें धीरे धीरे चोदने लगा.

कभी मैं ज्यादा जोर से पेल देता, तो उनकी चीख निकल जाती.

मुझे मामी को पेलने में बहुत मजा आ रहा था.

उनकी ‘आह … आह …’ की आवाज से ही पता चल रहा था कि मामी भी मेरे लौड़े से मजा ले रही हैं.

फिर मैं स्पीड को बढ़ाने लगा तो मामी की आह आह की आवाज तेज होने लगी.

मैंने मामी के मुँह में उंगली डाल दी, तो मामी मेरी उंगली को चूसने लगीं.
मुझे भी उन्हें चोदने में मजा आने लगा.

कुछ ही समय में मामी एक बार झड़ चुकी थीं और उनकी चूत में चिकनाहट आ गई थी.

मेरे लंड ने सरपट दौड़ लगानी शुरू कर दी थी.
मामी भी दोबारा से लौड़े को चूत में निचोड़ने लगी थीं.

इस बार उनकी गांड ने भी चुदाई की लय के साथ लय मिलाना शुरू कर दिया था.

अब मेरा माल झड़ने वाला था.
मेरी स्पीड एकदम से शताब्दी एक्सप्रेस जैसी तेज हो गई.

मामी भी अपनी गांड उठा उठा कर मुझे धक्का देने लगीं.
मैं पागलों की तरह जोर जोर से चुदाई करने लगा था.

मामी ने पास पड़ी मेरी टी-शर्ट को उठा कर अपने मुँह में भर लिया, जिससे उनकी आवाज बंद हो गई.

फिर मेरे लंड से पिचकारी छूटने को हुई तो मैंने मामी के मुँह से टी-शर्ट को निकाल कर अपना लंड दे दिया.
मामी ने लंड को चूसना चालू कर दिया.
वह किसी पॉर्न एक्ट्रेस की तरह गांड हिला हिला कर लंड को चूस रही थीं.

तभी मुझे लगा कि अब मैं गया.

मैंने मामी के मुँह को अपने पैरों से पकड़ कर दबा दिया और उनके मुँह में अन्दर तक लंड पेल कर उनके मुँह में ही झड़ गया.

मामी खुद को हटाने लगीं लेकिन मैंने उन्हें मुँह हटाने ही नहीं दिया.
जब पूरा पानी उनके मुँह में गिर गया तब मैंने अपनी पकड़ को ढीला किया.

मामी रोने लगीं. उनकी आंखों से बस आंसू आ रहे थे, कोई आवाज नहीं.
फिर मैं लेट गया.

मामी भी सीधी लेट गईं.

मैंने मामी को अपने ऊपर लेटने के लिए कहा.
वे मेरे ऊपर आकर लेट गईं.

मैं अपनी मामी को देख रहा था.
वे मुझे देख रही थीं.

मैं उनके गालों को चूमने लगा.
मामी बोलीं- एसी बंद कर दो, ठंड लग रही है.

मैंने मामी से रिमोट मांगा … तो वह ढूंढने लगीं.

तभी उनकी गांड मेरी तरफ को हुई. मुझे गांड देख कर जोश आने लगा, लेकिन मेरा लंड पूरा कड़क नहीं हुआ था.
मैंने उनकी गांड पर हाथ से छुआ, काफी मजा सा आया.

मामी ने रिमोट दिया तो मैंने एसी ऑफ कर दिया.
अब हमारी बातें होने लगीं.

मैं मामी की गांड को सहलाने लगा.
उस वक्त सुबह हो चुकी थी.

मेरा मन अभी भी भरा नहीं था.
मैंने मामी से अपनी गांड से लंड को सहलाने को कहा.

मामी की गांड इतनी मुलायम थी कि बता नहीं सकता.
उनके सहलाने से मेरा लंड भी तनता जा रहा था.

मामी ने पूछा- तुमने मेरे मुँह में क्यों रस निकाला!
मैंने उनकी चूत को रगड़ते हुए कहा- अगर इसमें निकाल देता तो मेरा भी बच्चा हो जाता!
मामी बोलीं- तो क्या हो जाता?

मैंने समझ लिया कि इनको दूसरे बेबी की चाहत है.
फिर मैंने मामी से कहा- बाबू को देख आओ.

जब वे जाने लगीं तो उनकी गांड देख कर मैं पागल सा हो रहा था.
मैं भी उठा और अपने बेड की दराज एक गोली निकाल कर खा ली.

अब मेरा लंड भी मोटा हो गया और बड़ा भी.
तभी मामी आईं और बोलीं- बाबू ठीक है.

मैं बोला- तो चलो एक बार और करते हैं. सुबह तो पापा मामी मामा आने वाले हैं.
मामी हंसती हुई बोलीं- अच्छा जी, ये बात है.

फिर मामी में रसोई में गईं और सिंक में मुँह धोने लगीं.
उन्होंने मुझे भी मुँह धोने के लिए बुलाया.

मैंने सोचा कि मुँह तो बाथरूम में भी धो सकते हैं. किचन में क्यों?

फिर जब मैं किचन में गया, तो मामी फ्रिज खोल कर शहद हाथ में लिए खड़ी थीं.

वे बोलीं- मैंने शहद के साथ सेक्स करना एक वीडियो में देखा था.

मैंने उनकी बात को समझ लिया और मामी को उठा कर चूम लिया.

मैं उन्हें चूमते हुए बिस्तर पर ले आया, बेड पर लिटा दिया और शहद को अपने लंड पर लगा दिया.

मैंने मामी से लंड चूसने के लिए कहा.
तो वे चूसने लगीं.
शहद लगा कर लंड चुसवाने में दोनों को ही काफी मजा आने लगा था.

फिर मैंने मामी की चूत पर शहद लगाया और उसको चाटते हुए चूमा, तो मामी को भी मजा आने लगा.

उसके बाद मैंने मामी की गांड मारी तो मामी की हालत खराब हो गई.

क्या कहूँ मामी की दर्द भरी आवाजें सुनकर मेरे लंड में जोश का दरिया बहने लगा था.

मैंने काफी देर तक मामी की चूत और गांड की चुदाई की.
कसम से इतना मजा आया और वह भी पहले सेक्स में … मैंने सोचा ही नहीं था.
मामी का तो रो-रो कर बुरा हाल हो गया था.

जब मेरा लंड झड़ने वाला था तब मैंने मामी से कहा- बस हो गया.
मामी ने ‘आह … आह …’ करते हुए कहा- अब और नहीं … नहीं.

मैंने मामी के मुँह में लंड डाल दिया. इस बार भी मामी लंड चूसने लगीं.
मैंने कहा- हां ले लो मजा … आह क्या मस्त चूस रही हो मामी … आह.

मैं लंड चुसवाने के मजे लेने लगा.
मामी के मुँह को तो मैंने पूरा लंड गले तक घुसा कर जाम कर दिया था.
वे बुरी तरह से हांफ रही थीं. सच में बड़ा मजा आ रहा था.

तभी मामी ने मेरे लंड में दांत गड़ा कर हल्का सा काट लिया.
मुझे दर्द हुआ तो मैंने तुरंत मामी के मुँह से लंड निकाल लिया.

मामी सॉरी कहने लगीं.
मैंने मामी के दूध पकड़ कर जोर से भींच दिया और गाली बक दी- साली रंडी?

मामी को कुछ भी बुरा नहीं लगा लेकिन उन्होंने हंसते हुए कसमसा कर मुझसे सॉरी सॉरी कहते हुए अपना दूध छुड़वा लिया.

वे मेरे लंड को फिर से मुँह में लेकर चूसने लगीं.
मैंने मामी की गांड को दबा दबा कर उंगलियों से नोंचा और गाली देते हुए उनकी गांड में उंगली पेल दी.

पहले पहल तो वे उचक गईं फिर जब उंगली उनकी गांड में सटासट चलने लगी तो मामी कहने लगीं- आह और जोर से करो.
मैं उनकी गांड पर दूसरे हाथ से जोरदार चाटें लगा कर मजा लेने लगा.

फिर मैं नहाने चला गया. मेरे पीछे पीछे मामी भी बाथरूम में आ गईं.
मेरे ऊपर अभी भी गोली का असर था इसलिए मैंने मामी को बाथरूम में घोड़ी बना कर चोदा.

फिर मामी ने साफ सफाई की और नहा कर बाबू को भी नहला धुला कर चाय नाश्ता बनाया.
मैं चाय पीने लगा.

मामी बाबू को अपने निप्पल से दूध पिलाने लगीं.
वे उस समय ऊपर से नंगी थीं.
अब तो हम दोनों के बीच कोई पर्दा ही रह गया था.

हमारी बात होने लगी.
वे सेक्स के अलावा दूसरी बात भी कर रही थीं और मुझे दिखा दिखा कर अपने निप्पल को बाबू के मुँह में दे रही थीं.

मैंने मामी के निप्पल को देखा तो मेरा लंड फिर से सख्त हो गया.
मामी लंड खड़ा होते देख कर कहने लगीं- क्या हुआ, अभी भी मन नहीं भरा क्या?

मैंने कहा- जिसके सामने आपके जैसी परी हो, उसका मन कैसे भरेगा!
मामी हंसने लगीं.

मैंने लंड सहलाते हुए कहा- पता नहीं आपको देख कर ये कैसे फड़फ़ड़ाने लगता है!
मामी कहने लगीं- एक मिनट रुको, मैं इसे अभी शांत करवा देती हूँ.

मैंने कहा- इसमें रुकना क्या! बाबू दूध पी रहा है, आप इसे पी लो.
ये कह कर मैंने अपना लंड मामी के मुँह में डाल दिया और उनके दूसरे दूध को दबाने लगा.

मामी लंड चूसने लगीं.
कुछ देर बाद बाबू को अलग लिटा दिया और चुदने आ गईं.

मैंने उनकी साड़ी उठा कर लंड चूत के अन्दर घुसा दिया.
कुछ देर बाद मामी को वहीं घोड़ी बना कर उनकी गांड पर जोर जोर से चमाट मारने लगा.

हम दोनों मस्ती से चुदाई करने लगे. फिर मिशनरी पोज में एक दूसरे को चूमते हुए चुदाई करने लगे.
जब झड़ने का समय आया तो मैंने फिर से मामी को अपना लंड चूसने दे दिया.

इस बार मैं जल्दी ही झड़ गया.
मेरा सारा रस मामी ने खुद ही चूस लिया और लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.

वह फिर से फ्रेश होने गईं.
मैं भी पीछे से चला गया.

उधर हम दोनों साथ में फिर से नहाये.
अब तक सबके वापस आने का समय हो गया था.

हम दोनों में इसके बाद अब तक चुदाई का सिलसिला चल रहा है.
 

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चुदक्कड़ चाची की चूत चुदाई




दोस्तो, कैसे हो आप सब!
मैं आशा करता हूँ कि आप सब लोग अच्छे होंगे.

मेरा नाम शिवम चौधरी है और मैं उत्तरप्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला हूँ. मैं दिखने मैं ठीक लगता हूँ, पर मेरे छोटे मियां कुछ ज्यादा ही कड़क हैं, जो हर समय चुदाई के लिए तैयार रहते हैं.

दोस्तो, आज मैं आपको अपने परिवार की एक चुक्कड़ चाची सेक्स की कहानी बताने जा रहा हूँ जो पूरी तरह से सच है.

इन चाची को मैंने एक बार बचपन मैं नंगी नहाते हुए देखा था.
उस वक्त इन्होंने मुझे शैंपू लाने को बोला था.

तब मैं कम उम्र का था पर तभी से मैं इनके लिए सेक्सी विचार रखता था और ये मुझे बच्चा समझती थीं.

अब मैं उन चाची के बारे में आपको बताता हूँ. उनका नाम मोनिका है. वैसे तो उनका 32-28-34 का फिगर सामान्य ही है, पर उनका चेहरा काफी अच्छा और किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने वाला है.
चाची की उम्र लगभग 32 साल है और हमारे परिवार में इनके बारे में सबको पता है कि वह शुरू से ही चुदककड़ टाइप की हैं.
इनके बहुत से अफेयर शादी के बाद भी चले हैं.

मेरे पापा परिवार में सबसे अच्छा और ज्यादा कमाते थे तो हमारी फैमिली की बहुत इज्जत होती थी.

मैं अपने बाकी के परिवार वालों के घर बहुत कम जाता था.
अगर कभी जाता तो सब बिठा कर बातें किया करते थे.

मेरी मम्मी जब कभी मुझको मोनिका चाची के घर भेजती थीं तो मैं खुश होकर जाता और चाची के साथ बातें करता, चाची पर लाइन भी मारता.

चाची भी मेरी हरकतों को समझती थीं.
वे भी हंस कर मेरा साथ देती थीं.

एक दिन मैं उनके घर पूजा में आने की कहने गया था.
उस वक्त मैंने लोवर पहना हुआ था.

मेरा लंड थोड़ा टाइट था.
मेरे लौड़े को तना हुआ देख कर चाची खुश हो गईं और मुझे छू छू कर बातें करने लगीं.

कुछ समय बाद मैं घर आ गया और मुठ मार कर शांत हो गया.

अगले दिन परिवार में पूजा थी तो सब लोग हवन करने के लिए इकट्ठे हुए थे.

पूजा में हवन को खेत में बने हुए पूजन के स्थान पर किया जाना था.
हम सब वहीं थे लेकिन चाची वहां नहीं दिख रही थीं.

पापा ने मुझसे कहा कि चाची के घर जाकर उन्हें आने की कह देना और उधर हलवाइयों के पास जाकर देखना कि खाना बन कर तैयार हुआ या नहीं.
तुम वहीं पर रुक कर सब ध्यान रखना.

मैं खुश होकर घर आ गया और सीधा चाची के घर चला गया.

मैंने आवाज़ लगाई तो वे बोलीं- ऊपर आ जाओ … मैं ऊपर ही हूँ.

उनसे मैंने पूछा- चाची आप क्यों नहीं आईं?
वे बोलीं- मैं अकेली थी. चली जाती तो घर पर कौन रहता?

मैंने कहा- अरे ताला लगा कर आ जाती न. ऐसा कौन सा कोई घर में घुस जाता?
वे हंसने लगीं.

मैंने कहा- चलो ना चाची … सब आपका ही इंतजार कर रहे हैं.
मैंने यह कहते हुए उनका हाथ पकड़ लिया.

चाची ने कहा- तुमने हाथ तो ऐसे पकड़ा है, जैसे तुम्हीं को मेरा इंतजार ज्यादा है!
मैंने कहा- हां चाची ऐसा ही समझ लो कि मुझे ही आपका इंतजार था.

वे हंसने लगीं और बोलीं- तुझे मैं इतनी अच्छी लगती हूँ क्या?
मैंने उनकी बात को सुना और उनकी आंखों की तरफ देखने लगा.

तब मैंने कहा- हां चाची आप ऐसा ही समझ लो. मैं सच में आपको बहुत पसंद करता हूँ.
चाची बोलीं- और वह क्यों?

मैंने उनकी तरफ देखा और मुस्कुरा दिया.

वे फिर से बोलीं- बता न!
मैंने कहा- ये तो नहीं मालूम चाची … मगर आपको देख कर मुझे बड़ा अच्छा लगता है. क्या आपको मैं अच्छा नहीं लगता हूँ?

वे कहने लगीं- अरे ऐसा क्यों सोचता है. मैं भी तुझे बहुत पसंद करती हूँ.
बस इतना कह कर चाची ने मुझे अपने गले से लगा लिया.

आह … मेरी तो समझो लॉटरी ही लग गई थी.
चाची के भरे हुए दूध मेरे सीने से गड़े तो लंड का मानो बटन दब गया और लंड एकदम से कड़क होने लगा.

चाची ने मुझे अपने सीने से लगाए रखा और वे सों सों करके गर्म साँसों से मुझे चुदासा करने लगीं.

मैंने कहा- चाची, आपके सीने से लग कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.
वे बोलीं- हां, मुझे भी तुझको गले से लगा कर बड़ा सुकून मिल रहा है.

अब हम दोनों अलग हुए और सोफ़े पर ही पास पास बैठ गए.
हमारे बीच ऐसे ही बात होने लगीं.

हमेशा की तरह वे मुझे छू छू कर बात करने लगीं.
उन्होंने पहले मेरे कंधे को छुआ और फिर घुटने पर हाथ रख दिया.

मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था.
पर उनके हाथ रखते ही मेरे लंड ने एक बार फिर से खड़ा होकर लोवर को फुला दिया.

चाची ने मेरे खड़े होते लौड़े को देखा तो उन्होंने हंसते हुए कहा- तू अब बड़ा हो गया है.

मैं उनकी बात समझ गया और मौके का फायदा उठाते हुए बोल दिया- चाची, अब तो मेरा सब कुछ बड़ा हो गया है.

वे हंसने लगीं और बोलीं- तेरी मम्मी को बताना पड़ेगा कि तू चाची पर लाइन मार रहा है. वैसे मैं भी तो देखूँ कि तेरा क्या क्या कितना कितना बड़ा हो गया है?

मैंने भी बेशर्म बन कर अपना लोवर नीचे कर दिया.

अब चाची तो थीं ही बड़ी चुदक्कड़, उन्होंने भी सीधा झपट्टा मारा और मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर आगे पीछे करने लगीं.

मैं भी आराम से मजा लेने लगा क्योंकि मुझे पता था अभी पूजा में एक घंटा से ज्यादा लगेगा.
तब तक यहां चाची की जवानी की पूजा की जाए.

मैंने उन्हें लंड पर झपट्टा मारते हुए देखा तो उन्हें दबा दिया और उनका मुँह अपने लौड़े की तरफ झुकाने लगा.

वे भी शायद यही चाहती थीं तो उन्होंने अपनी जीभ से लंड को चाट लिया.

मुझे सुरसुरी सी हुई तो मेरे मुँह से आह निकल गई.

मैंने कहा- चाची ले लो मुँह में … सच में बड़ा अच्छा लग रहा है.

किसी रंडी की तरह चाची ने बिंदास मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगीं.

उनके इस कदम से तो मानो मेरे कलेजे को ठंडक पड़ गई थी.
मैंने उनके सर पर हाथ रखा और सर को लौड़े पर दबाते हुए लंड से उनका मुँह चोदने लगा.

वे भी पुरानी खिलाड़िन थीं तो मेरे कोरे लंड को अपने गले के अंतिम छोर तक ले जाकर चूसने लगीं.

चाची मेरे लौड़े को चूसती हुई बोलीं- वाह शिवम, ये तो साढ़े छह इंच के करीब का है, आज तो तेरे लौड़े से चुदने में मजा आ जाएगा.

चाची के मुँह से चुदाई की बात सुनी, तो मैंने चाची को अपनी तरफ खींच लिया और उनके होंठ चूसने लगा.

होंठ चूसते चूसते मैंने उनकी जीभ अपने मुँह में पकड़ कर चूसना शुरू कर दी.

कुछ देर मैंने चाची का कुर्ता निकाल लिया और उनके चूचों को हाथ से दबाते हुए मस्ती करने लगा.
मैं एक दूध को चूस रहा था और दूसरे को मसल रहा था.

चाची भी मेरे मुँह में दूध दे रही थीं और कह रही थीं- आह चूस ले शिबू … मेरे दूध चूस.

उनकी ब्रा निकाल कर मैंने उनके दोनों चूचों को चूस चूस कर लाल कर दिया.
मैं उस टाइम सच में जन्नत की सैर कर रहा था.

फिर मैंने चाची के पूरे पेट पर किस किया और अपने सारे कपड़े निकाल दिए.

मैंने चाची की सलवार को भी निकाल दिया और उनकी चूत पर मुँह रख कर जीभ अन्दर डाल दी.

चाची शायद इसके लिए तैयार नहीं थीं.
वे तो चूत चुसवाने की सोच ही नहीं रही थीं.
मगर चूत पर मेरी जीभ का अहसास उन्हें मदस्त करने लगा था और वे सातवें आसमान पर पहुंच गईं.

मैं भी जैसे चाची की चूत के रस को चाट कर चूत खाने लगा था.
वे अपनी दोनों टांगों को खोल कर मेरे सर को अपनी चूत पर ऐसे दबा रही थीं मानो चूत के रास्ते वे मुझे अपने अन्दर घुसेड़ ही लेंगी.

फिर मैंने उनसे लंड चुसवाया और उनकी चूत में उंगली डालने लगा.

वे मादक सिसकारियां लेने लगीं- आह आह डाल दे अब … आह शिवम् क्यों तड़पा रहा है!
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैंने उनकी चूत में दो उंगलियां डाल रखी थीं.

वे लगातार सिसकारियां ले रही थीं- आह आह … डाल भी दे माँ के लवड़े … चोदने का दम नहीं है क्या भोसड़ी के!

उनकी यह बात सुनकर अब मुझे गुस्सा आ गया.
मैंने लंड सैट किया और अपनी पूरी ताकत लगा कर उनकी चूत में लौड़ा पेल दिया.

उन्होंने एक बार तो बड़े तेज चीख मार दी.
शायद वे इसके लिए तैयार नहीं थीं.

उनकी चीख सुनकर मेरी भी गांड फट गई कि कहीं किसी ने सुन न ली हो.

चाची अपना मुँह खुद दबाती हुई बोलीं- फाड़ देगा क्या?
मैंने देखा तो चाची के चेहरे पर रंडी की तरह मुस्कान थी.

मैं फिर से अपनी पूरी ताकत के साथ उनको चोदने लगा.
चाची मजा लेती हुई साथ देने लगीं और बोलीं- आह शिवम् आह … उई उई आह मां … वाह आज तो मजा आ गया. मेरी जान तुमने तो आज जन्नत का मजा दिला दिया आह.

वे सिसकारियों के साथ अपनी गांड उठा उठा कर चुदाई का मजा ले रही थीं.

कुछ देर यूं ही पेलने के बाद मैंने सोचा कि क्यों ना चाची को पोज़ बदल कर चोदा जाए.

मैंने चाची से कहा- चाची उठो और कुतिया बन जाओ. मैं पीछे से आपकी चूत चोदूंगा!
चाची एकदम से उठीं और कुतिया बन गईं.

मैं चाची के पीछे आ गया और उनकी चूत पर लंड को सैट करके उनकी कमर पकड़ कर चोदने लगा.
इसी बीच मेरी नजर उनकी गांड के छेद पर गई.

मैंने मन ही मन सोचा कि आज नहीं तो कल तुझे भी चोदूंगा टेंशन मत ले.

इस हार्डकोर सेक्स में चाची और मुझे दोनों को बहुत मजा आ रहा था और हम दोनों गालियां दे देकर चुदाई का मजा ले रहे थे.

फिर मैं नीचे लेट गया और चाची को लौड़े की सवारी करने को कहा.

चाची मेरे लंड पर बैठ गईं.
मैंने उनकी एक चूची को हाथ से पकड़ लिया.

अब चाची फुल स्पीड में धक्के मार रही थीं और मजा ले रही थीं.

फिर चाची झड़ गईं और धीरे धीरे निढाल होने लगीं.
मैंने नीचे से लंड पेलने की स्पीड बढ़ा दी.

चाची मेरी चुदाई की बहुत तारीफ कर रही थीं.
मैं भी अपनी पूरी जान लगा कर चाची की चूत का भोसड़ा बनाने में लगा हुआ था.

इसी तरह 15 मिनट तक चुदाई करने के बाद मैं चाची के अन्दर ही निकल कर उनके ऊपर लेट गया, उनको किस करने लगा.
चाची आज बहुत ख़ुश थीं.

अब ज़ब भी मौका लगता है, मैं चाची की चूत को बजा देता हूँ.
 

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मां बेटे के मध्य बना सेक्स सम्बन्ध



दोस्तो, मेरा नाम राज है. मैं हरियाणा के फरीदाबाद जिले का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 22 साल है. मेरी फैमिली में हम तीन लोग हैं.
मैं राज, मॉम रेखा, पापा जय.

मेरी मॉम की उम्र 44 साल है और पापा की 46 साल है.
पापा दिल्ली में जॉब करते हैं. घर पर मैं और मेरी मॉम ही रहते हैं. यह कहानी मेरे जीवन की सत्य घटना पर आधारित है.

यह इंडियन मां बेटा सेक्स हिंदी कहानी आज से 3 साल पहले की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी.
मैंने अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर ली थी और ज्यादातर घर पर ही रहता था.

मुझे लड़कियों से ज्यादा इंटरेस्ट भरे हुए बदन की महिलाओं से था … और यही कारण था कि मुझे अपनी मॉम की गांड बहुत ज्यादा पसंद थी क्योंकि उनकी गांड बहुत ही ज्यादा बड़ी थी.

मेरी मॉम का फिगर 36-30-40 का था.
उनकी गांड बहुत ही ज्यादा मोटी और बाहर को निकली हुई थी.

मैं जब भी घर पर रहता तो ज्यादातर उनकी गांड को ही देख कर लंड सहलाता रहता था.
मेरा शुरू से ही सपना रहा था कि मैं अपनी मां की चुदाई करूं.

मैं अपनी मां की गांड का ज्यादा दीवाना तब हुआ, जब मैंने अपनी मां की गांड को बाथरूम करते हुए देखा.
उनकी गांड बहुत ही ज्यादा बड़ी और बिल्कुल दूध के जैसे सफेद थी.

हालांकि मैं और मां एक ही बेड पर सोते थे. काफी बार मैंने सोते टाइम उनकी गांड से अपना लंड टच कराया था और उनकी गांड पर हाथ भी फेरा था.
लेकिन मेरा मन इन सबसे कहां मानने वाला था. मुझे तो अपनी मां की गांड में लंड डालना था.

वैसे तो सोते टाइम मैंने खूब मजे किए थे पर लेकिन कभी कुछ कायदे से नहीं कर पाया था; हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं मॉम जाग ना जाएं और मेरी शिकायत पापा से ना कर दें.

इसी कारण से मैं कभी कुछ कर नहीं पाता था.

एक बार की बात है, तब मेरे एक दोस्त की शादी थी.
मैं शादी में गया हुआ था.
शादी में मैंने ड्रिंक भी की थी.

मैं रात को करीब ग्यारह बजे घर पहुंचा.
जब मैं घर पहुंचा तो मम्मी ने दरवाजा खोला.

दरवाजा खोलने के बाद मॉम बाथरूम में पेशाब करने चली गईं.
लेकिन नींद के कारण उन्होंने बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया.
जिस कारण से मुझे आज भी उनकी बड़ी और सुंदर गांड के दीदार हो गए.

नशे में होने के कारण मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया और मैंने ठान ली कि आज कुछ भी हो जाए, मैं मॉम की इस सलोनी गांड को पाकर रहूंगा.

फिर मॉम बाथरूम से आकर बेड पर सो गईं.
हमारे घर में एक ही कमरा होने के कारण मैं और मॉम एक ही बेड पर सोया करते थे.

मॉम बेड पर जाकर सो गईं, मैं कपड़े चेंज करने लगा.
मैंने लोअर टी-शर्ट डाल लिए और जानबूझ कर अंडरवियर नहीं पहना.

फिर जाकर मॉम के साइड में लेट गया मॉम मेरी तरफ अपनी गांड करके सोई हुई थीं.

काफी देर तक मैं मॉम के सोने का इंतजार करता रहा.

करीब एक घंटा बाद मैंने हिम्मत करके मॉम की तरफ करवट ली और अपना लंड मॉम की गांड पर टच करके लेट गया.

मेरा लंड बिल्कुल लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया था, जो कि मॉम की गांड में चुभ रहा था.
मुझे यकीन हो गया था कि मॉम सो चुकी हैं.

उसके बाद मैंने अपने लोवर को नीचे करके लंड को बाहर निकाल लिया और मॉम की गांड में स्पर्श कराने लगा.

मॉम ने उस समय सिल्क की नाइटी पहनी हुई थी, जिस पर लंड को टच करने में बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था.

मैं अपने लंड को मॉम की नाइटी के ऊपर से ही उनकी गांड में आगे पीछे रगड़ने लगा.
कुछ समय तक लंड रगड़ने के बाद जब मॉम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और उसके बाद मैं धीरे-धीरे करके मॉम की नाइटी को ऊपर की ओर खिसकाने लगा.

धीरे-धीरे करके मैंने मॉम की नाइटी को ऊपर उनकी कमर तक चढ़ा दिया.
मैंने देखा कि मॉम नें नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी.

वह नाइटी के नीचे बिल्कुल नंगी थी. उसकी गांड अंधेरे में एकदम चमक रही थी.
उनकी गांड को देखकर मेरे लंड में और जोश आ गया था.

फिर मैंने धीरे से हिम्मत करके अपने लंड को मां की नंगी गांड के छेद से टच कराया.

जैसे ही मैंने अपने लंड को मॉम के चूतड़ों के बीच में दिया, तो मेरे लंड पर मुझे उनकी गांड के टाइट छेद का अहसास हुआ.

उनका छेद मुझे अपने लौड़े के हिसाब से काफी छोटा सा लगा.

मेरा लंड बहुत ही बड़ा है.
मॉम के छेद से लंड कर सुपारा अठखेलियां करने लगा था.
मुझे बेहद सनसनी हो रही थी.

इतना होने के बाद भी मॉम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई थी.
इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं धीरे-धीरे करके अपने लंड को गांड के छेद से होता हुआ आगे मॉम की चूत तक पहुंचाने की कोशिश करने लगा.

मैं इस काम में सफल भी हो गया. मैं अपने लंड को मॉम की चूत से टच कराने लगा.

कुछ देर लंड को मॉम की चूत के ऊपर घिसने के बाद मेरे मन में लंड को अन्दर डालने की इच्छा हुई.
लेकिन डर के कारण मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं मॉम जाग ना जाएं.

पर लेकिन दारू हिम्मत भी बढ़ा रही थी.
उसके बाद मैं लंड को चूत में अन्दर डालने की कोशिश करने लगा.

मॉम के चूतड़ बहुत ही बड़े और भारी थे जिस कारण से मैं अपने लंड को अन्दर चूत में डाल नहीं पा रहा था.

मेरी बहुत कोशिश करने के बावजूद मैं अपने लंड को मॉम की चूत में नहीं डाल पा रहा था.

फिर मेरे दिमाग में आया कि अगर चूत में नहीं जा रहा है तो एक बार गांड में डालने की ही कोशिश करता हूं.

उसके बाद मैंने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और थोड़ा सा उंगली पर ले कर मैं मॉम की गांड के छेद पर लगाने लगा.

लेकिन जैसे ही मैं मॉम की गांड के छेद पर उंगली रखी तो मैंने देखा कि मॉम की गांड का छेद खुल बंद हो रहा है.

ऐसा महसूस हो रहा था.
मैं सेक्स के नशे में उस पर कोई ध्यान नहीं दे पाया.

अब मैंने अपने लंड को गांड के छेद पर लगा दिया, फिर धीरे-धीरे करके आगे को सरकाने लगा.
लेकिन मॉम की गांड का छेद बहुत ही टाइट था जिस कारण मैं लंड को अंदर नहीं पेल पा रहा था.

थोड़ा ज्यादा जोर देने पर लंड मॉम की गांड को पसारता हुआ अन्दर को घुसा.
जैसे ही लंड थोड़ा सा आगे हुआ, मुझे कुछ हलचल महसूस हुई और मैं ऐसे ही रुक गया.

कुछ समय रुकने के बाद मुझे मेरे लंड पर हाथ का अहसास हुआ.
मैं समझ गया कि यह हाथ मॉम का है.

उस समय मानो जैसे मेरे खून का पानी बन गया हो.
मेरे मन में एक ही बात आ रही थी कि बेटा आज तो तू गया.

लेकिन जो जो होना होता है वह तो होता ही है.

मॉम ने मेरे लंड को पकड़ कर गांड से खींचा और अपनी एक टांग ऊपर उठाकर चूत के मुँह पर रख दिया.
फिर आराम से अपनी गांड को पीछे की ओर सरका दिया.

इससे मेरे लंड का आधा टोपा मॉम की चूत में फंस गया.
उनके ऐसा करने से मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा; मुझे तो मानो जैसे जन्नत मिल गई थी.

फिर मैंने मॉम की गांड को पकड़कर हल्का सा एक झटका मारा जिससे मेरे लंड का पूरा टोपा मॉम की चूत में फंस गया.

मुझे अहसास हुआ कि मॉम की चूत भी बहुत टाइट है.
हालांकि अब मुझे किसी बात का कोई डर नहीं था.

मैंने बिंदास मॉम की गांड को कसके पकड़ कर एक झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड उनकी चूत में फंस गया.
आधा मॉम की मोटे और बड़े चूतड़ों की वजह से अन्दर नहीं जा पाया.

इससे यह हुआ कि मॉम एकदम आगे को उचक गईं और मेरा लंड बाहर निकल गया.

मैंने धीरे से कहा- क्या हुआ?
लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

उन्होंने अपनी गांड को फिर से पीछे कर दिया और मेरे लंड से टच कराने लगीं.

इसके बाद मैंने अपने लंड को एक बार फिर से उनकी चूत पर रखा और इस बार में धीरे-धीरे करके अपने लंड को अन्दर डालने लगा.

मुझे साफ अहसास हो रहा था- उनकी चूत बहुत ज्यादा टाइट है और धीरे-धीरे करके मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया.

उनकी गांड बड़ी होने के कारण पीछे से उनकी चूत में मेरा लंड पूरा नहीं जा पा रहा था.

फिर ऐसे ही रुक कर मैंने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और मॉम की नाइटी को उनके बूब्स से ऊपर कर दिया.

अपने एक हाथ से उनके बूब्स को धीरे-धीरे से दबाने लगा और उनकी चूत में गए हुए मेरे आधे लंड को आगे पीछे करके उन्हें चोदने लगा.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.

मैं बेड से नीचे खड़ा हो गया और अपने सारे कपड़े उतार दिए.

फिर वापस बेड पर चढ़कर मॉम की नाइटी को उतारने लगा.
लेकिन वह मना करने लगीं.

वे कहने लगीं- यह सब गलत है, तू मेरा बेटा है.
मैंने कहा- अभी तक बेटे के लंड को चूत में लेकर मजा ले रही थीं, तब मैं बेटा नहीं था. अब मैं बेटा हो गया!

वे कहने लगीं- मैं नींद में थी और मुझे पता नहीं चला कि क्या हो रहा है. लेकिन अब यह सब गलत है, मैं ऐसा नहीं करने दूंगी.

पर मुझे पता था कि यह सब जो हो रहा है … वो सिर्फ नाटक हो रहा है; मॉम के मन में तो चुदवाने का ही प्लान है.

मैंने उनकी एक न सुनी और उनकी नाइटी को उतारकर अलग फेंक दिया.
अब मैं मॉम की टांगों को खोलने लगा. लेकिन वे अपने पैरों को चिपका रही थीं.

मैंने उनके पैरों को पूरा खोल कर उनकी चूत पर अपना मुँह लगा दिया और उनकी चूत को चाटने लगा.

उसके बाद थोड़ी देर बाद वे एकदम शांत पड़ गईं और चूत चटाई का मजा लेने लगीं.
अब वे कुछ बोल नहीं रही थीं.
मैं अपने काम में लगा हुआ था.

कुछ देर तक और चूत चाटने के बाद मैं अपने लंड को हाथ में लेकर आने लगा और मैंने अपने लंड में चूत के मुँह पर टिका दिया और धीरे-धीरे करके लंड के टोपे को चूत में अन्दर करके एक जोर का झटका दे मारा.
जिससे मॉम की चीख निकल गई और वे मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगीं.

मैंने उन्हें कसके को पकड़ा हुआ था, तो वे बस कसमसा कर रह गईं.
उसके बाद मैं उनकी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.
उनके मुँह से दर्द भरी आवाज निकल रही थी.

पांच मिनट बाद लंड चूत में सरपट दौड़ लगाने लगा था.

अब मैंने मॉम की टांगों को अपने कंधे पर रख लिया. इस तरह से मेरा लंड और भी गहराई तक जा रहा था … इससे उनकी मीठे दर्द से भरी आवाजें और तेज होती जा रही थीं.
कुछ देर बाद वह शांत होकर पर पड़ गईं और मैं अपने काम में लगा रहा.

करीब बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई ने मॉम को तोड़ दिया और मॉम की चूत से पानी बहने लगा.
उनका शरीर एकदम कांपने लगा था और वह निढाल हो गई थीं.

लेकिन मेरा लंड कहां काबू में आने वाला था. वह तो चूत को चोदे ही जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मॉम फिर से झड़ने लगीं और इस बार मेरे लंड ने भी हार मान ली.
लंड ने अपना सारा पानी मॉम की चूत में ही भर दिया.

इंडियन मां बेटा सेक्स के पश्चात कुछ देर मॉम के ऊपर ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं एक तरफ होकर लेट गया.

मॉम उस टाइम तक ऐसे ही निढाल पड़ी रहीं और बाहर खड़ी होकर अपनी नाइटी को हाथ में लेकर बाथरूम में चली गईं.
कुछ देर बाद मॉम नाइटी पहन कर वापस आईं और बेड पर मेरे साइड में ही लेट गईं.

अब मैं समझ गया था कि मॉम को मुझ से चुदाई करवाने में कोई दिक्कत नहीं है.

उसके बाद मैंने भी अपना लोअर पहना और मॉम की गांड से चिपक कर सो गया.

जब मैं सुबह उठा तो मॉम किचन में खाना बना रही थीं.

मैं उठकर बाहर गया तो हम दोनों एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहे थे.

पर मैंने देखा कि मॉम का आज कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थीं.
उनको चलने में भी थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
 

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बड़ी भाभी को चोद कर मां बना दिया




नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोशन है. मैं एक 22 साल युवक हूँ.

मैं महाराष्ट्र के अहमदनगर का रहने वाला हूं. मैं एक मध्यम वर्ग के परिवार से हूं और मराठी मानुष हूं.
और मैं सामान्य से बड़े मोटे लंड का मालिक हूं.

आज मैं अपनी बड़ी देसी भाबी चुदाई कहानी बताने जा रहा हूँ.

आप सभी औरतों और लड़कियों के लिए मेरी सलाह है कि आप सब अपनी अपनी पैंटी उतार कर अपनी चूत में उंगली डाल लें … और लड़के अपना लंड
पकड़ कर हिलाना शुरू कर दें.

यह सेक्स कहानी मेरे और मेरी बड़ी भाबी के बीच हुई चुदाई की है.

तब मैं 19 साल का हुआ ही था.
सेक्स के बारे में मुझे कुछ भी अनुभव नहीं था.
कभी कोई चूत चुदाई के लिए मिली ही नहीं थी.

उसी दौरान दोस्तों की संगत में रह कर मैंने पॉर्न वीडियो देखे थे और बगल वाले पड़ोसी की चुदाई भी देखी थी.
तो मुझे सेक्स के बारे में समझ आ गई थी और अब चुदाई करने की बड़ी इच्छा होने लगी थी.

उन दिनों हमारे पैतृक गांव में वार्षिक मेला लगा हुआ था तो हम सब लोग अपने गांव गए थे.
उधर मेरे बड़े भाई और भाभी रहते हैं.

मेरे भाई की शादी को लगभग 3 साल हो गए थे और उनको एक छोटा लड़का भी हो गया था.

महाराष्ट्र में ‘तमाशा’ नाम का कार्यक्रम होता है तो तब हम सब तमाशा देखने गए थे.

मैं तब छोटा ही था तो भाभी मुझे अपने साथ लेकर बैठी थीं.
मैंने थोड़ी देर तक तो तमाशा देखा, पर बाद मैं मुझे नींद आने लगी तो मैं भाभी की जांघों पर सिर रखकर सो गया.

भाभी ने मेरे ऊपर चादर डाल दी. भाभी ने तब मैक्सी पहनी थी और पैर फैला कर बैठने की वजह से वे कुछ ऊपर को उठ गयी थीं.

जब मैं लेटा हुआ था तो मुझे एक अलग सी खुशबू आने लगी.

मैंने थोड़ी देर सोचा कि यह कैसी गंध है.

फिर मुझे समझ आया कि यह तो भाभी की चूत की खुशबू है.
मुझे उनकी चूत देखने की इच्छा होने लगी.

मैंने अपने सिर को बार बार हिलाया और उनकी मैक्सी को उनकी जांघों तक सरका ली.

अब उनकी नंगी चूत मेरे सामने आ गयी थी.

गांव में रहने के कारण भाभी पैंटी नहीं पहनती थीं.

जैसे ही उनकी चूत मेरे सामने आयी तो वह खुशबू और तेज होने लगी और मुझे भाभी को चोदने की इच्छा होने लगी.

थोड़ी देर इंतजार करने के बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत के पास रख कर उंगली को उनकी चूत के छेद से लगा दिया.

एक दो पल रुकने के बाद मुझे अपनी उंगली पर उनकी चूत की तपिश को महसूस होने लगी.

अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं उनकी चूत पर उंगली रगड़ने लगा.

वह चूत पर हुए इस प्रहार से एकदम से हड़बड़ा सी गईं और उन्होंने मेरा हाथ हटा कर अपनी मैक्सी नीचे कर दी.

भाभी ने मुझे थोड़ा डांटा भी कि ये क्या कर रहे हो?
मैंने कुछ भी जवाब नहीं दिया; बस ऐसे पड़ा रहा जैसे मैं गहरी नींद में हूँ.

यह देख कर भाभी भी चुप हो गईं.

उसके बाद मैंने अपनी उंगली को उनकी चूत में रगड़ने की बहुत कोशिश की पर भाभी ने अपनी चूत से उंगली टच नहीं होने दी.

अगले दिन सब लोग गांव से निकल गए और मुझे वहीं छोड़ दिया.

मेरी परीक्षाएं हो चुकी थीं और छुट्टियां चालू थीं तो अब घर मैं और भाभी ही थे.
उनका छोटा लड़का भी हमारे साथ था.

भाभी ने अपने बच्चे को दूध पिला कर सुला दिया और वे टीवी देखने बैठ गईं.

एक दिन पहले ही मैंने भैया और भाभी की चुदाई देखी थी.
उस दिन भाभी भैया से उन्हें और चोदने की कह रही थीं पर भैया का लंड खड़ा ही नहीं हुआ और भाभी अधूरी रह गईं.
इससे मुझे लगाने लगा था कि भाभी को चुदाई का मजा नहीं मिल रहा है तो वे मुझे सेक्स करने दे सकती हैं.

जब वे टीवी देख रही थीं, तो मैं अचानक से अपना तना हुआ लंड लेकर उनके सामने आ गया.
वे अचानक से उठीं और दरवाजा बंद कर लिया.

भाभी मुझे समझाने लगीं- ये सब गलत है, मैं तुम्हारी भाभी हूं.
पर मैं कहां कुछ मानने वाला था, मैंने कहा- भाभी, सिर्फ एक बार!
उन्होंने एक मिनट सोचा.

चूंकि भैया सरकारी दफ्तर में हैं और उन्हें काम से 3-4 दिन तक बाहर ही रहना पड़ता था.
वे भाभी की चूत प्यास भी नहीं बुझा पाते थे.

एक मिनट के बाद भाभी ने दरवाजा खोल कर बाहर झांका और फिर से दरवाजा बंद कर दिया.
उन्होंने अपने बच्चे के ऊपर चादर डाल दी और मुझसे बोलीं- बोलो क्या करना है?

अब इधर मुझे कुछ भी पता नहीं था कि किस तरह से शुरुआत करनी होती है.

मैंने कहा- मुझे तो बस चोदना है.
यह सुनकर भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- ठीक है, आ जाओ चोद लो.
ये बोलकर वे लेट गईं.

अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे शुरू करूं.

भाभी बोलीं- क्या हुआ, नहीं आता है क्या?
मैंने गर्दन ना में हिलाई और कहा- कैसे करना है भाभी?

भाभी थोड़ी हंस दीं और उठ कर बैठ गईं.
उन्होंने मुझे करीब आने का इशारा किया.
मैं उनके करीब आ गया.

भाभी ने मेरा लंड हाथ में पकड़ा और उसे सहलाया.

मेरा लंड भाभी का हाथ लगने से फड़कने लग गया.
उसमें जान आने लगी.

भाभी ने लौड़े को सहलाया और जीभ से लौड़े के सुपारे को चाटा.
उससे मुझको तो जैसे आग लग गई; लंड ने उठक बैठक शुरू कर दी.
वे भी अब लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

जैसे ही उनके मुँह में लंड गया तो मैं मदहोश हो गया.

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे लेटने के लिए बोला तो मैं लेट गया.
वे अपनी मैक्सी उतारने लगीं.

मैं तो बस उन्हें देखता ही रहा.

उनकी चूचियां कुछ छोटी थीं पर गांड इतनी जबरदस्त दिख रही थी कि क्या कहूँ.

वे अपनी मैक्सी उतार कर नंगी हो गईं और वापस मेरे नजदीक आकर एक बार फिर से मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

फिर वे मेरी दोनों तरफ टांगें डाल कर नीचे को हो गईं.
एक हाथ मेरे सीने पर रखा और एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर उसे अपनी चूत के मुँह पर टिका दिया.

लंड चूत के मुँह से लगते ही वे एकदम से नीचे हो गईं तो मेरा लंड उनकी चूत में घुस गया.

भाभी की आह्ह्ह्ह करके चीख निकल गयी क्योंकि मेरा लंड भैया के लंड से काफी बड़ा था और भाभी की चूत में अभी आधा ही घुसा था.

वे थोड़ी सी रुक गईं और अपने आपको ऊपर नीचे करने लगीं.

मेरा आधा लंड उनकी चूत की खाज को मिटाने लगीं.
भाभी ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह आई …’ करने लगीं.

कुछ ही देर में भाभी एक बार झड़ चुकी थीं और लौड़े की झांट तक टेड़ी नहीं हुई थी.
वे समझ गईं कि मैं लंबी रेस का घोड़ा हूँ.

तब वे चित लेट गईं और कहने लगीं- मैं दो बार झड़ चुकी हूँ. अब तुम्हें जितना चोदना हो, तुम मुझे चोद लो.
मैं अब भाभी की दोनों तरफ अपने हाथ टिका कर उनकी चूत में लंड पेलने लगा.

उन्होंने भी अपनी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़ कर पूरा फैला लिया था.

भाभी का चुदाई का पोज देख कर मुझे एक देसी चुदाई की फिल्म की याद आ गई.
उसमें एक आंटी को एक युवा चोद रहा था और वे आंटी अपनी टांगों को ठीक इसी तरह से खोले हुई थीं, जैसे इस वक्त भाभी अपनी टांगें खोल कर चुदवा रही थीं.

कुछ 10-12 मिनट बाद मैं भी झड़ने को हो गया और मैंने अपना सारा पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया.

पर अभी तक भाभी नीचे से अपने छुटद उछाल कर मुझे चोद रही थीं, उन्हें पता भी नहीं चला कि मैं झड़ चुका हूं.

थोड़ी देर बाद जब नीचे की सारी जगह गीली हो गई और भाभी भी थक गईं … तो उन्होंने देखा कि मैं भी झड़ चुका हूं.

वे एकदम से खुश होकर उठीं और अन्दर जाकर कुमकुम लेकर आईं, बोली- देवर जी, मेरी मांग भर दीजिये और मुझे आज से अपनी पत्नी बना लीजिए.

मैं उनकी बात सुनकर तनिक अचकचा सा गया कि ये क्या बवाल हुआ … पर अगले ही पल मैंने उनकी मांग भर दी.

उसके बाद भाभी की दिनचर्या शुरू हो गई और मैं लेट गया.
उस दिन दोपहर से लेकर शाम तक मैंने पॉर्न वीडियो देखे.

चूंकि भैया आज घर नहीं आने वाले थे तो भाभी ने मुझसे कहा था- आज रात को हम दोनों सुहागरात मनाएंगे.
जैसे ही रात हुई तो हम दोनों ने खाना खा लिया और मैं थोड़ी देर बैठ कर टीवी देखने लगा.

तब तक भाभी अपने बिस्तर पर बैठ कर अपने बच्चे को बोतल से दूध पिला रही थीं.

मैं ये देख कर जरा चौंका कि आज भाभी अपने बच्चे को सीधे अपने चूचे से दूध न पिला कर बोतल से दूध क्यों पिला रही हैं?
लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा.

वे अपने बच्चे को सुलाने लगीं.

थोड़ी देर बाद भाभी ने मुझे आवाज दी और अन्दर बुलाया.

मैं अन्दर गया तो देखता ही रह गया.
भाभी लाल साड़ी मैं एकदम नयी दुल्हन की तरह दिख रही थीं.

मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझे दूध का ग्लास पकड़ा दिया.

मैंने दूध पी लिया पर उसका टेस्ट कुछ अलग सा लगा.
तो मैंने भाभी से कहा- ये दूध कुछ अलग सा लग रहा है, कहां से मंगाया है?

इस पर भाभी ने अपना ब्लाउज खोल दिया और इशारा कर दिया.
मैं समझ गया कि भाभी ने अपने मम्मों से दूध निकाल कर गिलास भर दिया है.

आज उन्होंने अपने बच्चे को बोतल से ऊपर का दूध पिलाया था और मुझे अपने चूचों का अमृत पिलाया है.

फिर उन्होंने हल्के से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया.

थोड़ी देर तक हम दोनों ने प्यार किया और एक दूसरे को गर्म किया.

बाद मैं भाभी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया.

मैंने दोपहर मैं बहुत सारे आसन देखे थे, तो मैं तुरंत 69 की पोजीशन में आ गया और भाभी की चूत चाटने लगा.

भाभी को इस तरह से अपनी चूत चटवाने में बहुत अच्छा लगा.
वे और जोर से मेरे लंड को चूसने लगीं.

कुछ ही देर में हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए.

थोड़ी देर फिर से चूमाचाटी करने के बाद हम दोनों सेक्स के लिए तैयार हो गए.

इस बार मैंने भाभी को घोड़ी बना लिया और कुतिया की तरह उनकी चूत को लौड़े के निशाने पर सैट कर लिया.
फिर उनके बाल पकडकर मैं डॉग शॉट मारने लगा.

भाभी को भी अब चुदाई में मजा आने लगा था.

उस रात भाभी को मैंने तीन बार चोदा और अलग अलग पोजीशनों में सेक्स किया.
मैंने उन्हें खड़े होकर भी चोदा.

भाभी चुदाई में इतनी ज्यादा थक गई थीं कि वे अपने होश में ही नहीं रही थीं.
चुदाई के बाद हम दोनों नंगे ही सो गए.

सुबह मैंने भाभी को एक बार फिर से चोदा.

मैं तीन महीने तक गांव में रहा था तो हर रोज देसी भाबी चुदाई करता रहा.
मैं हर बार अपना लंड का पानी भाबी की चूत में ही टपकाता रहा था.

बाद में मैं वापस आ गया.

कुछ दिन बाद खबर मिली कि भाबी के पैर भारी हो गए हैं.

जब मैं फिर से गांव गया तो भाभी ने बताया- मेरे पेट में तुम्हारा बीज पल रहा है और तुम ही इस बच्चे के बाप बनने वाले हो.

वे मुझसे चुद कर दुबारा से मां बनने वाली थीं.

समय पर उनको एक बेटा हुआ.
मैंने उनसे पूछा- भाभी, पहला बच्चा किसका है?

तो उन्होंने होंठ दबा कर हंस कर दिखा दिया.
मैं समझ गया कि पहला बच्चा भी किसी और ने उन्हें चोदकर दिया था.

अब मैं जब भी गांव जाता हूं तो हम दोनों को जैसे ही मौका मिलता था, हम तब सेक्स कर लेते हैं.
 

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विधवा आंटी की जवानी का भोग



नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राघव है, मेरी उम्र 24 वर्ष है, गोरा रंग और हाइट 5. 9 और फीट और सुडौल बदन!

मुझे शुरू से ही लड़कियों के मुकाबले भाभी और आंटी की चुदाई में दिलचस्पी है.

तो अब आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए अपनी कहानी शुरू करता हूं.

आज मैं इस कहानी के माध्यम से अपने अनुभव को शेयर कर रहा हूं. मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और घर में मम्मी पापा के अलावा एक छोटा भाई है.

हमारे पड़ोस में एक आंटी रहती हैं, उनका नाम फरियाल है.
आंटी की उम्र करीब 40 वर्ष है।

वे दिखने में बहुत खूबसूरत हैं, उनका रंग गोरा है और उनका बदन 34-32-38 है.

मैं आंटी को शुरू से ही बहुत पसंद करता हूं

आंटी के घर में उनका एक बेटा है और एक बेटी है. आंटी के पति की मौत 5 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हो चुकी है.
तब से आंटी अपने बच्चों के साथ रहती है.

हमारे परिवार का आंटी के साथ अच्छा रिश्ता है.
अंकल की मौत के बाद हमारे परिवार ने आंटी को संभाला और उनका साथ दिया और उन्हें उस सदमे से निकलने में उनकी मदद की.

हाल ही में मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई खत्म की और अब गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर रहा हूं.

शाम को जिम मैं जाता हूं क्योंकि मुझे बॉडी बनाने का बहुत शोंक है.
और मैं अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखता हूं.

एक दिन आंटी ने मुझे दिन में बुलाया और उनके साथ मार्केट चलने को पूछा.
उन्हें वहाँ से कुछ सामान लेना था.
उस समय आंटी के दोनो बच्चे स्कूल गए थे.

मैं जाने के लिए तैयार हो गया.
मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि आंटी ने मुझे उनके साथ जाने का कहा.

मार्केट हमारे घर से थोड़ा दूर थी.
मैंने अपनी बाइक निकाली और आंटी मेरे पीछे बैठ गयी और उन्होंने एक हाथ मेरे कन्धे पर रख लिया.
आंटी को लेकर मार्किट की तरफ चल पड़ा.

उनके उस स्पर्श से मुझे बहुत मजा आया।

आंटी ने सफेद रंग का पजामी सूट पहना था. आंटी उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा.
वे दिखने में एकदम खूबसूरत माल हैं.

कुछ देर बाद हम मार्किट पहुंच गए और आंटी मुझे एक कपड़े के शोरूम में ले गयी.
आंटी को उनके लिए कुछ कपड़े लेने थे.

वहाँ जाकर आंटी ने कुछ कपड़े पसंद किए और उन्हें ट्रायल कमरा में पहनकर देखने लगी.
आंटी को समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे कपड़े लें.

तब उन्होंने मेरी मदद ली और उनके लिए कपड़े पसन्द करने को बोला.
मैंने उनके लिए कुछ कपड़े निकाले.
उन्हें भी वे पसन्द आये.

आंटी ने कपड़े लेने के बाद बोला कि उन्हें अंडरगारमेंट्स भी लेने हैं.
फिर हम एक दूसरी दुकान पर गए.

आंटी ने अपने लिए ब्रा और पैंटी पसन्द की.

अंडरगार्मेंट्स लेने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें भूख लगी है.
तब हम दोनों एक रेस्टोरेंट में गए और वहाँ जाकर खाने का आर्डर दिया.

वहाँ से खाना खाकर हम घर के लिए निकल पड़े.

मैं आंटी से रास्ते भर यहाँ वहाँ की बात करता रहा.

हम घर पहुंचे तो मैं आंटी को छोड़कर अपने घर जाने लगा.
तब आंटी ने मुझे रुकने को बोला और कहा- चाय पीकर जाना.

आंटी मुझे घर के अंदर ले गयी, मैं सोफे पर बैठ गया.

वे सामान रख कर अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गयी.

कपड़े बदलने के बाद आंटी अपने कमरे से बाहर आयी तो मैं उन्हें देखता ही रह गया.
उन्होंने नाइटी पहनी थी, आंटी उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी.
उनके बड़े बड़े बूब्स देखकर मेरा लंड हरकत में आने लगा.

मैंने जैसे तैसे खुद पर काबू किया. फिर आंटी चाय बनाने किचन में चली गयी.

मैं आंटी की खूबसूरती को निहार रहा था.
वे बिल्कुल जवान दिखती हैं.

आंटी चाय बनाकर लायी और हम दोनों साथ बैठकर चाय पीने लगे.
मेरा ध्यान बार बार आंटी के बूब्स पर जा रहा था.

हम बात करने लगे.
मैं आंटी से अंकल के बारे में बात करने लगा.
तो आंटी थोड़ा इमोशनल हो गयी.

मैं आंटी को होंसला देने लगा और आंटी मेरे गले लग गयी.
आंटी के बूब्स मेरे सीने से सट गये और मेरे बदन में करंट सा महसूस हुआ.

फिर आंटी मुझसे अलग हुई और कहने लगी- समीर और फरहाना स्कूल से आने वाले हैं.

मैं अपने घर जाने लगा.
जाते जाते आंटी ने मुझे प्यार से थैंक यू बोला.
मैंने भी उन्हें बोला कि अगर उन्हें किसी भी काम की जररूत हो तो मुझे बतायें.
उन्होंने प्यारी सी स्माइल दी और फिर मैं अपने घर चला गया.

रात भर मैं आंटी के बारे में सोचता रहा और उन्हें याद करता रहा.
मैं मार्किट वाली बात को याद कर रहा था और मुझे नींद नहीं आ रही थी.

अब मैं आंटी को चोदना चाहता था.
मैं आंटी के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा, फिर झड़ कर सो गया.

अगले दिन सुबह उठा नाश्ता करके मैं अपने कमरा में पढ़ाई कर रहा था.
तभी अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी और मम्मी ने दरवाजा खोला.

फरियाल आंटी को देखकर मम्मी ने उन्हें अंदर बुलाया.

आंटी मम्मी से कहने लगी कि आज उनके बच्चों के स्कूल में मीटिंग है और वे थोड़ा लेट हो गयी है तो मुझे साथ ले जाने के लिए पूछने लगी.
मम्मी ने मुझे आंटी के साथ जाने को बोला.

मैं आंटी को देखकर खुश हो गया और मैं उनको देखता ही रह गया.
जो कपड़े कल मैंने आंटी के लिए पसंद किए थे, आंटी वही कपड़े पहनकर आयी थी.

आंटी उन कपड़ों में बहुत सुंदर लग रही थी. आंटी को देख कर मन कर रहा था कि उन्हें अभी चोद लूं!

फिर आंटी ने बोला- थोड़ा जल्दी चलो!

मैंने अपनी बाइक निकाली और आंटी पीछे बैठ गयी.
मैं बोला- आंटी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हो.

आंटी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी और प्यार से मुझे थैंक यू बोला.

कुछ ही देर में हम स्कूल पहुंच गए.
आंटी मुझे अपने साथ अंदर ले गयी.

कुछ देर बाद मीटिंग खत्म हुई और हम घर निकलने लगे.

मैं आंटी को उनके घर छोड़कर अपने घर चला गया और अपने कमरे में जाकर सो गया.

शाम को उठ के मैं फ्रेश होकर जिम चला गया.
आज मेरा ध्यान जिम में न होकर आंटी में था.

मैं उन्हें प्यार करने लगा था.
आंटी का चेहरा मेरे दिमाग में घूम रहा था.
मैं उन्हें याद कर रहा था.

जिम खत्म करने के बाद मैं अपने घर चला गया और डिनर करने के बाद अपने कमरे में चला गया और गाने सुनने लगा.
कुछ देर बाद मैं सो गया.

ऐसे ही कुछ दिन बीत गए और ये सब चलता रहा.

कुछ दिन बाद हमारे परिवार को एक शादी में शहर से बाहर जाना था.
हमने ट्रेन से जाने का फ़ैसला किया.

लेकिन ट्रेन की सभी सीटों की एडवान्स बुकिंग की वजह से केवल तीन वेटिंग के टिकट ही मिले.

तब मैं घर पर रुक गया और बाकी सब लोग शादी में चले गए.

लेकिन जाने से पहले मम्मी ने फरियाल आंटी को मुझे खाना देने के लिए बोल दिया था.

उसके बाद मैं शाम को जिम चला गया.
जिम खत्म करने के बाद मैं घर आया, तब तक रात हो चुकी थी.

तभी फरियाल आंटी का फ़ोन आया, उन्होंने मुझे अपने घर खाना खाने के लिए बुलाया.

मैं अपनी बाइक लेकर आंटी के घर गया और घण्टी बजाई.
आंटी ने दरवाज़ा खोला.

उन्होंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी.
मैं आंटी को देखता ही रह गया.
आंटी उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी.

उन्होंने मुझे अंदर आने को बोला.
मैं अंदर आया.

आंटी ने बोला- तुम बैठो, मैं खाना लगाती हूं.

हम सबने साथ में बैठकर खाना खाया.

मैं समीर के साथ बैठकर टीवी देखने लगा.

टाइम देखा तो रात के 10:30 हो चुके थे.
तब मैंने आंटी से बोला- मुझे घर चलना चाहिए.

आंटी बोली- राघव, आज रात तुम यहीं रुक जाओ हमारे साथ ही. तुम्हारे घर वाले शादी में शहर से बाहर गए हैं, तुम अकेले घर पर क्या करोगे?

उनकी बात सुनकर मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हुई, मानो मेरे दिल में लड्डू फूट रहे हों.

पर मैंने आंटी के सामने नाटक किया और बोला- आप लोगों को मेरी वजह से दिक्कत होगी.
आंटी- हमें कोई दिक्कत नहीं होगी, तुम आराम से यहीं रुक जाओ.

मैं आंटी की बात मानकर उनके घर रुक गया.

एक कमरा समीर और फरहाना का था.
तब आंटी ने बोला- राघव, तुम मेरे कमरे में सो जाओ.
उनके दोनों कमरों में ए-सी लगा है.

मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.
मैं कब से इस पल का इंतजार कर रहा था

तभी मैं आंटी के कमरे में सोने चला गया और बेड की एक साइड लेट गया.

थोड़ी देर बाद आंटी रसोई का काम खत्म करके कमरे में आई और लाइट बन्द करके मेरे साथ बेड पर लेट गयी.

मेरे साथ फरियाल आंटी सो रही हैं … मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था.
मैं खुशी के मारे पागल हुआ जा रहा था.

इस मौके को मैं अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था.

कुछ देर बाद जब मैंने देखा कि आंटी सो रही हैं और उनका गाउन घुटनों तक सरक गया था. आंटी की गुलाबी पैंटी दिख रही थी.
उसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था.
मैं आंटी की चुदाई करना चाहता था.

तब मैं आंटी के थोड़ा पास चला गया और अपना एक हाथ आंटी के ऊपर रख दिया और सोने का नाटक करने लगा.

कुछ देर बाद जब मुझे लगा कि आंटी गहरी नींद में सो गई हैं तो मैं अपना दूसरा हाथ आंटी की टांगों पर फिराने लगा.
लेकिन आंटी आराम से सो रही थी.

मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गयी, मैंने आंटी का पूरा गाउन ऊपर कर दिया और उनकी पैंटी पूरी दिखने लगी.

मैंने अब ज्यादा देर न करते हुए अपना हाथ आंटी की पैंटी में डाल दिया.
उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और चूत बहुत मुलायम थी.

अब मेरी हिम्मत और बढ़ गयी थी; आंटी को चोदने की हवस दिमाग में ऐसी हुई कि उस समय दिमाग काम करना भी बंद कर गया था.

मैंने अपनी उंगली आंटी की चूत में घुसा दी.
इस उम्र में भी आंटी की चूत काफी टाइट थी.

आंटी एकदम से जाग गयी.
मैं सोने का नाटक करने लगा.
डर के मारे मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.

कुछ देर बाद मैं सो गया.

जब सुबह आंख खुली तो आंटी किचन में नाश्ता बना रही थी.

मैं आंटी के सामने जाने से डर रहा था कि कहीं आंटी को कल रात वाली बात पता लग गयी तो आंटी मम्मी को बता देंगी.

जब मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो आंटी ने मुझसे कहा- राघव, तुम उठ कर फ्रेश हो गए हो तो ब्रेकफास्ट कर लो.

मैं आंटी के बर्ताव को देखकर समझ गया कि आंटी को कल रात के बारे में कुछ नहीं पता.

तब तक आंटी के बच्चे भी स्कूल जा चुके थे.
मैं आंटी के घर ही टीवी देखने लगा.

आंटी भी अपना काम खत्म करके मेरे साथ आकर बैठ गयी.

आज आंटी के बूब्स कुछ ज्यादा ही बड़े दिख रहे थे.
आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो उनके निप्पल का उभार नज़र आ रहा था.

अब आंटी का बर्ताव भी कुछ बदला हुआ लग रहा था.
मैं और आंटी यहाँ वहाँ की बात करने लगे.

आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैं अचानक आंटी के मुँह से ऐसी बात सुन कर चौंक गया.

मैंने आंटी से कहा- ऐसी कोई मिली ही नहीं अब तक!
आंटी ने पूछा- कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए तुम्हें?
तब मैंने कहा- बिल्कुल आप जैसी.

आंटी ने बोला- मुझमें ऐसा क्या अच्छा लगा जो मेरी जैसी गर्लफ्रेंड चाहिए?
मैं बोला- आप इतनी खूबसूरत हो, आपका फिगर मस्त है.

आंटी हँसकर बोली- मुझे ही गर्लफ्रेंड बना ले फिर! मेरे जैसी गर्लफ्रेंड कहीं नहीं मिलेगी तुझे!

मैं आंटी की बात सुन कर सातवें आसमान में था, मैंने भी तुंरत हाँ कर दिया.
मैंने आंटी से अपने प्यार का इज़हार कर दिया.

फरियाल आंटी को मैं बोला- मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं और आपको बहुत पसंद भी करता हूं.
आंटी ने भी बोला- मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूं.

बस आंटी के इतना कहते ही मैंने फरियाल आंटी को अपनी तरफ खींच कर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिये.

मैं आंटी को पागलों की तरह चूमने लगा.
आंटी भी मेरा साथ दे रही थी.

करीब 20 मिनट बाद हम अलग हुए.
फिर मैं आंटी के बड़े बड़े बूब्स दबाने लगा और आंटी का गाउन निकालने लगा.

मैं उनके बड़े बड़े बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगा.
और दूसरा हाथ मैंने आंटी की पैंटी में डाल दिया.

आंटी की चूत गीली हो चुकी थी.

मैं आंटी को उठाकर उनके कमरे में ले गया और उनके कपड़े उतारने लगा.

आंटी को पहली बार बिना कपड़ों के देख कर मैं खुद पर क़ाबू नहीं कर पा रहा था.
मुझे ये सपने जैसा लग रहा था.

फिर अचानक आंटी बोली- कल रात तुमने जो किया, मुझे सब पता है.
मैं उनकी बात सुनकर हंस पड़ा और बोला- कल रात तुम्हें अपने साथ सोती देख खुद को रोक नहीं पाया. फिर तुम्हारे जागने के डर से सो गया.

आंटी भी हंसने लगी और गले लग गयी, बोली- जान, मैं भी तुमसे कबसे चुदवाना चाहती थी.
उनके इतना कहते ही मैं आंटी पर टूट पड़ा और उन्हें किस करने लगा.

आंटी भी मेरा साथ दे रही थी.

उसके बाद मैं आंटी की चूत चाटने लगा.
आंटी सिसकारियां ले रही थी.

मैंने अपनी जीभ आंटी की चूत में घुसा दी.
आंटी की चूत की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी.
चूत में जीभ अंदर बाहर करने से आंटी भी तड़प रही थी.

कुछ देर बाद आंटी की चूत ने पानी छोड़ दिया, उसका स्वाद नमकीन था.

अब आंटी ने मेरे कपड़े उतारे और मेरा लंड देखकर आंटी बोली- तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है. मैं 5 साल से चुदी नहीं हूँ.
मैंने आंटी को बोला- फरियाल मेरी जान, आज से हर रोज तेरी चुदाई होगी.
आंटी भी खुश हो गयी.

अब आंटी मेरा लंड मुख में लेकर चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था जैसे जन्नत में पहुंच गया हूं.

मैं आंटी के बाल पकड़ में उनके मुँह में झटके मारने लगा.
मेरा बड़ा लंड आंटी के मुंह में ठीक से नहीं जा रहा था.

कुछ देर बाद मैं आंटी को नीचे लेटा कर उनकी चूत में उंगली डालने लगा.
आंटी भी तड़प उठी.

मैं उनकी चूत में जोर जोर से उंगली अंदर बाहर करने लगा.
वे तड़प रही थी और कहने लगी- राघव मेरी जान, अब मत तड़पाओ. मेरी चूत में अपना लंड डाल दो. अब और इंतज़ार नहीं होता.

फरियाल आंटी की बात सुनकर मुझे जोश आ गया.
मैं आंटी की गांड के नीचे तकिया लगा के उनके ऊपर आ गया और उनकी चूत पर अपना लंड रख कर रगड़ने लगा.

वे लंड अंदर लेने के लिए तड़प रही थी.

मैं अपना लंड फरियाल आंटी की चूत में डालने लगा.
तब एक झटके में आधा लंड उनकी चूत में घुसा दिया.

वे दर्द के मारे चिल्लाने लगी.
मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिये और एक जोरदार झटका मारा.
अब पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया.

वे दर्द से तड़पने लगी.

अब मैं धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा.
कुछ देर बाद वे नार्मल हो गयी और अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी.

अब मैं भी विडो आंटी फक में अपने झटकों की स्पीड बढ़ा रहा था.

करीब 20 मिनट बाद उनका पानी निकल गया और वे झड़ गयी.

अब मैं उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदने लगा.

10 मिनट बाद अब मैं भी झड़ने वाला था, मैंने भी अपने झटकों की स्पीड बढ़ा दी और उनकी चूत में ही झड़ गया.

मैं उनके ऊपर गिर गया.
हम कुछ देर ऐसे रहे.

थोड़ी देर बाद आंटी मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी.
उनकी इस हरकत से मेरा लंड फिर हरकत में आ गया और इस बार फिर उनकी चूत में जाने को तैयार था.

मैं नीचे लेट गया.
आंटी मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट किया.

मैंने एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया.

अब फरियाल आंटी भी उछल उछल कर लंड लेने लगी.

मैं एक हाथ से उनके स्तन दबा रहा था.

कुछ देर बाद आंटी का निकलने वाला था.

अब आंटी नीचे आयी और मैं आंटी की दोनों टांगें खोल कर उनके बीच उनकी चूत में झटके देने लगा.

और कुछ मिनट की चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

फिर आंटी उठकर बाथरूम में चली गयी.
और मैं भी अपने कपड़े पहनकर घर जाने लगा क्योंकि आंटी के बच्चों का स्कूल से आने का समय हो गया था.

मैं आंटी को किस करके अपने घर चला गया.

शाम को मैं मार्किट से उनके लिए एक सेक्सी ब्रा पैंटी सेट लाया और रात की चुदाई के लिये प्लान करने लगा.

जिम से आने के बाद मैं फटाफट अपने घर जाकर फ्रेश हुआ और फिर फरियाल आंटी के घर निकल गया.

आंटी ने दरवाजा खोलकर मुझे अंदर बुलाया फिर हम खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगे.

मैं आंटी के कमरे में उनका इंतजार कर रहा था.

कुछ देर बाद आंटी कमरे में आयी.
मैं उन्हें देखकर उन पर टूट पड़ा और उनके होंठों को चूमने लगा.

मैंने आंटी को वह ब्रा पैंटी पहनने को बोला.

आंटी बाथरूम में चली गयी और कुछ देर बाद आंटी ब्रा और पैंटी में बाहर आयी.

मैं उन्हें देखता रह गया.
वे हुस्न की मल्लिका लग रही थी.

मैंने उन्हें गोद में उठा कर बेड पर बिठाया और उन्हें प्यार से किस करने लगा.
आंटी भी मेरा साथ दे रही थी.

फिर आंटी उठकर सिंदूर की डिब्बी लाई और बोली- आई लव यू राघव! तुम आज यह सिंदूर मेरी मांग में भर दो और मुझे अपनी पत्नी बना लो!

मैंने सिन्दूर लेकर आंटी की मांग में भर दिया और मैंने आंटी से बोला- फरियाल, आज से तुम मेरी पत्नी हो और मैं तुम्हारा पति!
आंटी ने मेरे पैर छुए और मैंने उन्हें गले से लगा लिया.

फिर रात को हमने सुहागरात मनाई.

अब मैं हर रोज आंटी की चुदाई करता हूं.
मैं और आंटी खुश हैं.
 

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मेरी प्यारी खूबसूरत मामी की चुदाई



दोस्तो, मेरा नाम अभिषेक उर्फ अभी है और मैं राजस्थान के उदयपुर का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 25 साल की है और मैं अपनी पढ़ाई खत्म करके जॉब कर रहा हूँ.

मैंने कई भाभी और आंटी को उनके घर जाकर चोदा है. मैं उनको खुश करता हूँ.

अब मैं आपको अपनी मामी के बारे में बता देता हूँ.
मेरी मामी का नाम निर्मला है. ये नाम बदला हुआ है. मेरी मामी की उम्र 35 साल है और वे दिखने में बहुत ही मस्त आइटम लगती हैं; एकदम स्वर्ग से आई परी जैसी लगती हैं.
उनको देख कर कोई बोल ही नहीं सकता है कि उनकी उम्र 35 साल की है. उनको देख कर ऐसा लगता है, जैसे वो अभी 30 साल की ही हों.
उनका शरीर भरा हुआ है. बड़े बड़े चूचे और मोटी गांड देखते ही लंड खड़ा हो जाता है.

यह कहानी आज से दो साल पहले की उस वक्त की है जब मैं अपने मामा के घर किसी प्रोग्राम में गया हुआ था.
वैसे तो जैसे ही मेरे स्कूल की छुट्टियां होती हैं, मैं मामा के घर पहुंच जाता था. पर उस वक्त मैं छोटा था और मुझे वहां बहुत अच्छा लगता था. उधर रह कर मैं मामी के कामों में हेल्प करता था.

तब मुझे पता नहीं था कि सेक्स क्या होता है.
उस वक्त मामी कभी कभी अपने बच्चे को दूध पिलातीं तो मैं उनके बोबे देख लेता था.
कभी कभी तो मामी मेरे सामने ही अपने कपड़े चेंज कर लेती थीं.
तब मुझे पता नहीं था कि ऐसा भी कुछ होता है.

वो तो जब सेक्स की समझ आई, तब लगा कि मामी तो लौड़े के नीचे लेने वाली माल हैं.

तो हुआ यूं था कि मामा का एक दिन पहले मम्मी को फोन आया- कल प्रोग्राम है तो आप लोग आज ही आ जाना.
मम्मी ने मुझे बताया- मामा का फोन आया है. उनके घर में प्रोग्राम है और उन्होंने आज ही आने को कहा है. क्योंकि कल प्रोग्राम है, तो तू आज चला जा. मैं कल सुबह आ जाऊंगी.
मैंने मम्मी से बोला- ठीक है.

उनके घर जाने की सुनकर मैं भी खुश हो गया था कि चलो मामी को देखने को मिलेगा. इसी बहाने उनको चोदने का कुछ जुगाड़ भी हो जाएगा तो मैं उन्हें चोद दूंगा.

मैं मामा के घर के लिए निकल गया.

मेरे मामा एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और उनके 2 बच्चे हैं.

मैंने वहां पहुंच कर उनके घर के बाहर लगी घंटी बजाई तो मामी ने गेट खोला.

मामी मुझे देखकर बहुत खुश हो गईं और उन्होंने मुझसे कहा- अरे वाह अभी तुम … आज याद आई अपनी मामी की तुमको. इतने दिनों बाद आए हो!
मैंने कहा- अरे मामी, ऐसा नहीं है, याद तो आपकी रोज आती है. ऐसा कोई दिन नहीं होगा, जब आपको याद ना किया हो.

मामी बोलीं- चल झूठे … चलो अब अन्दर भी आ जाओ. बाहर ही खड़े रहोगे क्या?

यह कह कर मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अन्दर ले आईं और सोफे पर बिठा कर बोलीं- तू बैठ, मैं तेरे लिए कुछ चाय नाश्ता लेकर आती हूँ. तब तक तू हाथ मुँह धो ले.

मैंने ओके बोल दिया और मैं हाथ मुँह धोकर वापस आकर सोफे पर बैठ गया.
मामी आईं और नीचे झुककर मुझे चाय देने लगीं.

मेरी नजर मामी के चूचों पर चली गई जो उनके गहरे गले वाले ब्लाउज से बाहर आने को बेताब हो रहे थे.
उनके रसभरे चूचे देख कर मेरे लंड ने आकार लेना शुरू कर दिया था.

मुझे अपने चूचे घूरते देख कर मामी बोलीं- कहां खो गया अभी … चाय ले न!
मैं अचानक से हड़बड़ा गया और सकपका कर मैंने मामी के हाथ से चाय ले ली.

मामी हंस कर बोलीं- तू तो काफी बड़ा हो गया है!
मैं तब कुछ समझा नहीं था कि क्या बड़ा हो गया है. शायद मामी का इशारा मेरे बड़े हो चुके लौड़े पर था.

फिर हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे.
मैंने मामी से पूछा- मामा और बच्चे कहां हैं?

मामी ने बताया- तेरे मामा तो ऑफिस गए हैं और बच्चे यहीं बाहर गए हैं.
उस वक्त घर पर मामी अकेली ही थीं.

चाय पीने के बाद मैं भी उठा और बाहर चला गया.

मैंने बाहर एक पान की गुमटी पर जाकर एक सिगरेट ली और सुलगा कर मामी की मदमस्त जवानी को याद करके धुआं उड़ाने लगा.

आज सिगरेट भी बड़ा मजा दे रही थी.
लौड़े ने भी बैठने से मानो मना कर दिया था.

शाम को जब मैं वापस आया, तब तक मामा भी आ गए थे और हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे.
मामी ने खाना खाने को बोला तो हम सभी खाना खाने लगे.

खाना खाने के बाद मामी ने कहा- अभी, तुम राहुल के रूम में सो जाना.

राहुल ने भी मुझसे उसके कमरे में सोने का बोल दिया था- भईया, आप मेरे कमरे में ही सो जाना.

हम सभी खाना खाकर सोने चले गए.
मामी भी काम खत्म करके सोने चली गई थीं क्योंकि कल प्रोग्राम था और सुबह जल्दी उठना था.

मैं भी सफर से बहुत थक गया था तो मुझे भी जल्दी नींद आ गई थी.

अगले दिन सुबह सभी जल्दी उठ गए थे.

सुबह सभी मेहमान आ चुके थे.
मेरी मम्मी भी आ गई थीं और कार्यक्रम भी आरम्भ हो गया था.

पंडित जी अपनी पूजा विधि करवा रहे थे और मैं अपनी प्यारी मामी को निहार रहा था, उनके बड़े बड़े चूचे देख रहा था.

मुझे घूरता देख मामी ने मुझे ताड़ लिया था.
पर वे मुस्कुरा कर अपने काम में लग गई थीं.

जैसे तैसे पूरा दिन निकल गया.
प्रोग्राम अच्छे से निपट गया था.
सभी मेहमान लगभग जा चुके थे.
जो मेहमान बचे थे, वो भी निकल गए थे.

अब मम्मी और मैं भी वापस जाने वाले थे.

इतने में मामी आईं और मम्मी से बोलीं- अभी की तो अभी छुट्टियां चल रही हैं दीदी … तो इसको अभी यहीं रहने दो. इसका भी यहां मन लगा रहेगा और ये मेरे काम में हाथ भी बंटा लिया करेगा.
मम्मी ने मुझसे कहा- ठीक है, तू कुछ दिन यहीं रुक जा.

इस बात से मानो मेरी तो लॉटरी निकल गई हो.
मैंने तुरंत हां बोल दी और कमरे में चला गया.

मैं अपना सामान कमरे में रख कर मम्मी को बस स्टैन्ड छोड़ने चला गया.

जब मैं मम्मी को छोड़कर आया तो मामी सोफे पर बैठ कर टीवी देख रही थीं.
मैंने पूछा- मामा और राहुल सभी कहां गए हैं?

मामी ने बताया कि तेरे मामा को ऑफिस से फोन आया था तो वे 5 दिनों के लिए जयपुर गए हैं और राहुल नानी के साथ उनके घर चला गया है. वह कुछ दिन वहीं रहेगा.
इतना सुनते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैं बहुत खुश हुआ कि अब कैसे भी करके मुझे मामी को चोदना ही है.

इतना कहकर मामी बोलीं- चल अब खाना खा लेते हैं, फिर सो जाएंगे. आज मैं बहुत थक गई हूँ.
फिर हम दोनों खाना खा रहे थे तो मैं बीच बीच में मामी को घूर रहा था.

मामी ने भी नोटिस कर लिया था पर उन्होंने मुझसे कुछ बोला नहीं था.

अब हम दोनों ने खाना खा लिया था.
मामी किचन में अपना काम खत्म कर रही थीं और मैं रूम में चला गया था.
उधर मैं मोबाइल में गेम खेल रहा था.

इतने में मामी आईं और मुझसे बोलीं- अभी मेरे हाथ पर में बहुत दर्द हो रहा है, जरा तू मार्केट से दवाई ले आ.

मैंने कहा- हां मामी, मैं अभी लेकर आया. वैसे आप कहें तो मैं आपके हाथ पैर दबा दूँ?
वे बोलीं- नहीं, तू बस दवा ला दे.
मैं मेडिकल स्टोर पर गया और पेनकिलर के साथ एक कामवासना बढ़ाने वाली दवा भी ले आया.

मैंने मामी को किचन से पानी में कामवासना वाली दवा मिला कर पानी का गिलास पकड़ा दिया और दवाई लेने को कहा.
मामी ने दवाई ले ली और सोने चली गईं.

करीब एक घंटा बाद मामी आईं और बोलीं- अभी मेरे हाथ पैर में जान ही नहीं बची, प्लीज मेरी थोड़ी मालिश कर दो.
मैं खुश हो गया और मैंने मामी की मालिश के लिए हामी भर दी.

मैंने मामी से कहा- आप लेट जाओ, मैं तेल गर्म करके ले आता हूँ.

मैं तेल गर्म करके ले आया, तो मामी ने मैक्सी पहन ली थी.
मैंने मामी से औंधा लेटने को कहा.

मामी लेट गईं.
पहले मैंने मामी के हाथ पर मालिश की.

कुछ देर हाथ की मालिश करने के बाद मैंने मामी से पूछा- मामी, कैसा लग रहा है?
मामी बोलीं- बहुत अच्छा लग रहा है. तुम सच में बड़ी अच्छी मालिश कर लेते हो.

मैंने कहा- अरे अभी आपने अभी का कमाल देखा कहां है. अब आप कहें तो क्या मैं आपके पैरों की भी मालिश कर दूँ?
मामी ने हां में सिर हिला दिया.

मैंने अपने हाथों पर थोड़ा ज्यादा सा तेल लिया और मामी की मैक्सी को उनके घुटनों तक करके पैरों की पिंडलियों की मालिश करने लगा.
उनकी पिंडलियों में गांठें बन गई थीं जिनको दबवाने में मामी को बड़ा आराम मिल रहा था और वे आह आह करने लगी थीं.

मामी की मालिश करते करते मेरा लंड भी ऐसा बड़ा हो गया था मानो अभी लोवर से बाहर आ जाएगा.

फिर धीरे धीरे करके मैंने मामी की मैक्सी को थोड़ी और ऊपर कर दिया.
उन्होंने भी कोई आपत्ति नहीं की.

मैं अब मामी की जांघों पर भी मालिश कर रहा था.
मामी को बड़ा अच्छा लग रहा था और वे कुछ भी नहीं बोल रही थीं.
वे बस आह आह करती हुई मालिश का मजा ले रही थीं.

कुछ देर बाद मैंने मामी से पूछा- मामी, आप बोलो तो आपकी कमर की मालिश कर दूँ. आपको अच्छा लगेगा.
मामी ने एक बार में ही हां भर दी और कहा- जरा रुक … मैं मैक्सी ऊपर कर देती हूँ.

ये कह कर उन्होंने बिंदास अपनी मैक्सी पूरी ऊपर कर दी.
हाय … वो मामी की लाल पैंटी क्या कयामत लग रही थी. मन कर रहा था कि अभी अपना मुँह उनकी चूत में घुसा दूँ … पर मैंने दवा के असर होने का इंतजार किया.

अब मैं मामी की कमर की मालिश करने लगा.
मेरा हाथ उनकी पीठ तक जाने लगा था जिस वजह से उनकी मैक्सी से मेरे तेल के हाथ लग रहे थे.
करीब पांच मिनट बाद मामी ने बोला- रुक एक मिनट!

मामी उठीं.
तो मैं सोचने लगा कि अचानक से मामी को क्या हुआ!

मामी ने बैठ कर अपनी मैक्सी उतार दी और वापिस औंधी होकर लेट गईं.

हाय वो कातिल बॉडी मामी की, मेरी एक नजर ही उनकी ब्रा में कसी चूचियों पर जा पाई थी कि मामी औंधी होकर लेट गई थीं.

मैं मामी की पीठ तरफ से उनकी पूरी बॉडी पर मालिश करने लगा.

अब मामी भी पूरे रंग में आ गई थीं, वे बीच बीच में बोल रही थीं- अभी तूने इतनी अच्छी मालिश करना कहां से सीखा है, बहुत अच्छा लग रहा है. तूने तो मेरा सारा दर्द खत्म कर दिया.

मैंने मामी की बात काटते हुए कहा- मामी, अगर आपको मालिश में और मजा चाहिए तो आपको एक बात बोलूं, बुरा नहीं मानो तो कहूँ?
मामी ने कहा- अरे अभी, मैं भला बुरा क्यों मानूंगी … तुम बोलो ना!

मैं- मामी आपकी ब्रा बीच में आ रही है. आप बोलो तो आपकी ब्रा उतार दूँ?

मामी थोड़ी देर चुप रहीं फिर उन्होंने खुद ही अपनी ब्रा को उतार दिया और सीधी लेट गईं.

दोस्तो … मैं आपको बता नहीं सकता कि मेरी मामी क्या माल लग रही थीं.
अब मामी सिर्फ पैंटी में थीं.

मैंने मामी के पेट पर मालिश करना शुरू कर दिया था.
मामी ने अपने दोनों हाथ अपने चूचों पर रखे हुए थे.

मैंने धीरे से मामी से कहा- मामी हाथ हटा भी दो, अब मुझसे क्या शर्माना!
मामी ने आंख खोली और मुझे देख कर एक प्यारी सी स्माइल करके अपने हाथ हटा दिए.

आह दोस्तो, क्या चूचे थे यार … मन कर रहा था कि अभी मुँह लगा दूँ और खा जाऊं.
फिर धीरे धीरे मैंने मामी के चूचों पर हाथ लगा दिया और उनके चूचों की मालिश करने लगा.

मामी को भी मजा आ रहा था, वे भी बीच बीच में मादक सिसकारियां भर रही थीं- हम्म्म आआह्ह!

मैं समझ गया था कि मामी अब गर्म हो गई हैं, तो हथौड़ा मार देना चाहिए.

मैंने अपना एक हाथ मामी को चूत पर रखा, जो पूरी गीली हो गई थी.
ये देखते ही मैंने अपना मुँह मामी के एक चूचे पर रख दिया और उनके एक दूध को चूसने लगा.

इतने में मामी बोलीं- आहह आह्ह्म्म अभी … क्या कर रहे हो आह्ह्हह.
मैं- मामी आपको प्यार कर रहा हूँ. मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ मामी … प्लीज आज मत रोकना मुझे … आह.

मामी- मैं कहां रोक रही हूँ. मैं भी तुझे बहुत प्यार करती हूँ, पर तुझसे कहने में डरती थी. अभी आज मेरी प्यास बुझा दे. मैं बहुत दिनों से तड़प रही हूँ. आज जाकर अपनी चूत की प्यास बुझाने का मौका मिला है … अभी मुझे चोद दे मेरी जान.

मामी के इतना कहने पर मैं मामी पर टूट पड़ा और उनको किस करने लगा.
करीब दस मिनट किस करने के बाद मैंने मामी की पैंटी निकाल फेंकी.

वाह क्या चूत थी. एकदम क्लीन शेव्ड चूत … मैंने मामी की चूत पर अपनी जीभ लगा दी.
अपनी चूत पर मेरी जीभ का अहसास पाते ही मामी सिसक गईं और उन्होंने जोर से मुझे पकड़ लिया.

अब मामी से रहा नहीं गया तो मामी ने कहा- अभी, अब सहन नहीं हो रहा. मुझे चोद दे जल्दी से … मेरी आग शांत कर दे.
मैंने मामी से कहा- अरे मेरी जान, इतना इंतजार किया है तो थोड़ा और इंतजार कर लो.

वह बोलीं- इंतजार ही तो नहीं हो रहा है अभी.
मैंने मामी से कहा- मामी, मेरा लंड भी चूस लो एक बार.

पहले तो मामी ने मना कर दिया, फिर मेरे कहने पर वो मान गईं और बड़ी जोरदार तरीके से मेरा लंड चूसने लगीं.
पांच मिनट बाद मामी बोलीं- अब तो डाल दो मेरी जान … अब रहा नहीं जा रहा मुझसे.

मैंने मामी को सीधा लेटाया और मामी की गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया.
फिर मामी की चूत पर लंड सैट करने लगा.
चूत की फांकें मानो खुद ही लंड के सुपारे को चूमने लगी थीं.

फांकों से गलबहियां करते ही लौड़े ने ठुमका लगा दिया और एक जोर सा झटका लग गया.

रस से भरी चूत में मेरा लंड फिसलता चल गया और एक ही बार में आधा लंड मामी की चूत में घुस गया.

मामी की जोर से चीख निकल गई.
वे बोलीं- अभी तेरा बहुत बड़ा है … प्लीज धीरे करो.

मैं थोड़ी देर रुक कर मामी को लिप किस करने लगा.
कुछ पल बाद वापिस एक झटका लगाया तो पूरा लंड मामी की चूत में चला गया.

मामी जोर से चीख पड़ीं- आह अभी निकाल दे … नहीं सहन हो रहा.
मैंने मामी को किस करना शुरू कर दिया और मामी शांत हो गईं.

मैं धीरे धीरे अपना लंड मामी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.
अब मामी भी अपनी गांड उछाल उछाल कर मजा ले रही थीं.

थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद मैंने मामी को घोड़ी बनने को बोला.
मामी फटाफट घोड़ी बन गईं और मैं पीछे से मामी को चोदने लगा.

अब मामी भी मजा ले रही थीं.
वे मस्ती से ‘आह्ह्ह हम्मम आह्ह ह …’ कर रही थीं और बोल रही थीं- और चोदो मेरी जान … फाड़ दो आज मेरी चूत आआहह.

दस मिनट में मामी एक बार झड़ चुकी थीं पर मैं अभी कहां रुकने वाला था.
मैं जोर जोर से मामी को चोदने लगा.

करीब दस मिनट और तगड़े झटके देने के बाद मैंने मामी से कहा- मामी, अब मेरा निकलने वाला है, कहां निकालूं?
मामी बोलीं- अन्दर ही निकाल दे, मैंने ऑपरेशन करवाया हुआ है. कोई परेशानी नहीं है.

उनके इतना कहते ही मैंने पूरी ताकत से दो तीन झटके मारे और पूरा माल मामी के अन्दर ही निकाल दिया.
मैं झड़ कर मामी के ऊपर ही सो गया.

मामी बोलीं- अभी, तूने मुझे इतना बड़ा सुख दिया है, जिसे मैं कभी भूल नहीं सकती. जब जब मौका मिलेगा, मैं तेरे लिए हाजिर रहूंगी.

इतना सुनते ही मैंने मामी को किस कर दिया और हम दोनों ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गए.

अगले पांच दिन तक मैंने मामी को बहुत चोदा.

उसके बाद मामा आ गए और मैं भी अपने घर आ गया.

अब जब भी मौका मिलता है, मामी मुझे कॉल करके बुला लेती हैं और मैं मामी की चूत मार देता हूँ.
 
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