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Incest All short story collected from Net

आप केसी सेक्स स्टोरी पढना चाहते है. ??

  • माँ - बेटा

  • भाई - बहेन

  • देवर - भाभी

  • दामाद – सासु

  • ससुर – बहु


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junglecouple1984

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नई भाभी की गर्म चूत की चुदाई




मेरा नाम राहुल है और मैं 22 साल का हूँ.

यह सेक्सी न्यू भाभी कहानी उन दिनों की है, जब मैं सर्दियों की छुट्टियों अपने मामा के घर गया हुआ था.

मेरे मामा के लड़के की शादी को सिर्फ़ एक महीना हुआ था और भैया अपनी जॉब के लिए वापिस मुंबई चले गए थे.

भाभी यहीं घर में मामा मामी के देखभाल के लिए रह गई थीं.

जब मैं मामा के घर पहुंचा, तो उस समय मामा और मामी श्री ख़ाटू श्याम जी की पूजा के प्रोग्राम में 5 दिन के लिए गए हुए थे.
उनके घर पर सिर्फ़ भाभी थीं … और उनके साथ मामा की लड़की थी.

मैंने उस वक्त भाभी को पहली बार देखा था. वे किसी परी से कम नहीं थीं.
उनका फिगर 32-30-36 का था. एकदम नयी नवेली माल थीं.
उनको देखते ही मैं पागल हो गया था और मेरा लंड खड़ा होकर मेरी पैंट में फूल गया था.

मेरे उधर पहुंचते ही दीदी मुझसे बात करने लगी.
दीदी, भाभी दोनों मेरे बारे में पूछने लगीं.

भाभी मेरी बातों को बहुत ध्यान देकर सुन रही थीं और बार बार मेरी पैंट की तरफ देख रही थीं.

कुछ देर बाद दीदी और भाभी ने मुझसे खाना खाने के लिए कहा.
मैं खाना खाकर लेट गया क्योंकि मैं बहुत थका हुआ था.

कुछ देर आराम करके मैं शाम को उठा तो देखा कि भाभी ने कपड़े बदल लिए थे और उन्होंने नीले रंग की साड़ी पहनी है. भाभी ने ब्लू साड़ी के साथ लाल रंग का ब्लाउज पहना था.

वे बेहद सेक्सी लग रही थीं.
भाभी को इस क्रॉस मैचिंग में देखकर मैं पागल हो गया और मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा.

और भाभी ने भी मेरे खड़े होते लंड को पुन: देख लिया था और वे मुँह छिपा कर हंसने सी लगी थीं.

मेरे जागने पर भाभी ने मुझसे पूछा- आपके चाय ले आऊं देवर जी?
मैंने उन्हें देखते हुए कहा- हां भाभी.

फिर भाभी मेरे लिए चाय लेकर आ गईं और वे उधर ही बैठ कर चाय पीने लगीं.

मेरे साथ में हंसी मज़ाक करती हुई भाभी पूछने लगीं- और सुनाओ देवर जी, कॉलेज में सिर्फ़ पढ़ाई करते हो या कोई देवरानी भी सैट कर रखी है?
तो मैं बोला- नहीं भाभी, अभी तक कोई अच्छी मिली ही नहीं है.

भाभी- अरे, इतने हैंडसम हो आप … फिर भी सिंगल?
मैं- अरे भाभी जी, किस्मत में कोई अच्छी सी आई ही नहीं है.

भाभी- आपको कैसी लड़की चाहिए?
मैं- कुछ ख़ास नहीं, पर आपके जैसी तो होनी ही चाहिए.

भाभी- हा हा हा, क्या देवर जी आप भी मजाक करते हैं. मेरी जैसी क्यों? क्या मैं आपको इतनी सुंदर लगती हूँ? वैसे भी मेरी किस्मत में तो पति का प्यार लिखा ही नहीं है. आपके भैया शादी होते ही वापिस जॉब पर चले गए.
मैं- अरे कोई बात नहीं भाभी जी, मैं हूँ ना अभी सारी सर्दियों तक मैं आपकी सेवा के लिए यहीं हूँ.

ऐसा सुनकर भाभी शर्म से लाल हो गईं और वापिस अपने रूम में चली गईं.
मैं समझ गया कि भाभी को अभी तक मर्द का साथ मिला नहीं है, इसलिए चुदाई की लिए उतावली हो रही हैं.

मैंने सोच लिया कि मैं आज भाभी की चुदाई करके ही रहूँगा.
फिर रात हो गयी और हम लोग सो गए.

सिर्फ़ मेरे वाले रूम में हीटर लगा था, तो रात को भाभी मेरे रूम में हीटर के बहाने आ गईं.
वे बोलीं- देवर जी, आप अगर बुरा ना मानो तो मैं यहीं सो जाती हूँ क्योंकि घर में सिर्फ़ यही एक हीटर है.

यह सुनकर मैं बोला- अच्छा तो आप और दीदी साथ में सो जाओ, मैं सोफा पर सो जाता हूँ.
इस पर भाभी बोलीं- दीदी सो चुकी हैं और उनको हीटर नहीं चाहिए.

ये बोलकर भाभी मेरे बेड पर एक साइड में लेट गईं.
भाभी ने नाइटी पहनी थी.

उनकी नीले रंग की नाइटी एकदम सॉफ्ट वेल्वेट वाली थी.
यह उनके बदन से चिपक कर बेहद सेक्सी लग रही थी.
उस नाइटी में उनके निप्पल के दाने और पैंटी की लाइन साफ समझ आ रही थी.

उन्हें देख कर मैं अपने मन में सोच रहा था कि भाभी को कैसे चोदूं.
तभी भाभी मेरी तरफ गांड घुमा कर लेट गईं.
उनकी रसीली गांड को देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैं थोड़ा उनके करीब को सरक गया.

वे सो गई थीं.

मैंने भाभी की नाइटी ऊपर कर दी और अपने मोबाईल की फ्लश लाइट ऑन करके नीचे से देखने लगा.
क्या हॉट माल थीं सेक्सी न्यू भाभी … उन्होंने लाल रंग की डोरी वाली पैंटी पहनी हुई थी.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने पैंटी की डोरी खोल दी और मेरे सामने भाभी की एकदम पिंक चूत आ गयी.
उनकी गुलाबी चूत को देखते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया और उसकी नसें फूलने लगीं.

मैंने जल्दी जल्दी पैंट खोली और लंड बाहर निकाल लिया.
लंड सहलाया तो वह भाभी की चूत में घुसने के लिए मरा जा रहा था.

मैंने भाभी के पास सरक कर पोजीशन बनाई और लंड को चूत के सामने सैट कर दिया.
भाभी की चूत एकदम टाइट दिख रही थी मानो अभी तक उनकी किसी ने चुदाई की ही नहीं थी.

जैसे ही मैंने भाभी की चूत पर लंड रखा तो भाभी की चूत गीली हो गयी और पानी छोड़ने लगी.
मैं समझ गया कि भाभी सिर्फ़ सोने की एक्टिंग कर रही हैं और कुछ नहीं.

इससे मेरा कॉन्फिडेन्स बढ़ गया और मैं लंड को चूत में धकेलने लगा.
पर चूत में लंड नहीं जा रहा था क्योंकि मेरा लंड ज्यादा लंबा और मोटा था.

उधर भाभी भी उत्तेजना के मारे कांप रही थीं और ऐसी सर्दी में भी भाभी के बदन से पसीना निकलने लगा था.

इतने में मैंने फिर से लंड चूत में धकेला तो भाभी हल्के से बोलीं- इतना बड़ा लंड कैसे जाएगा अन्दर देवर जी?
मैं बोला- फिर क्या करूं?

तो भाभी बोलीं- कोई क्रीम चिकनाई लगाकर आप मेरी चुदाई करो.
यह कह कर भाभी उठीं और वे कोल्ड क्रीम ले आईं.
मैंने क्रीम अपने लंड पर लगाई और भाभी की चूत में तो काफी सारी लगा दी.

अब मैंने लंड चूत पर लगा कर झटका मारा तो लंड का टॉप अन्दर चला गया.

भाभी चिल्ला पड़ीं- उई मां … मर गई.
मैंने डर के मारे लंड बाहर निकाल लिया.
लंड निकाल कर मैं रुक गया.

भाभी बोलने लगीं- बहुत बड़ा है, मैं नहीं ले पाऊंगी इतना बड़ा लंड … बहुत दर्द हो रहा है. कहीं आवाज सुनकर दीदी ना उठ जाएं.
मैंने भाभी को समझाया और भाभी के मुँह पर हाथ लगा दिया.

भाभी के पैरों में अपने पैर फंसा कर मैंने लंड का झटका दिया तो लंड का सुपारा वापस चूत के अन्दर चला गया.
पर भाभी रोने लगीं और मुझसे दूर होने के छटपटाने लगीं.

लेकिन मैंने भाभी की कमर पकड़ कर लंड पेले रखा.
धीरे धीरे लंड चूत में घुसने लगा.

भाभी कराहने लगीं.

मैंने वापस लंड बाहर निकाला और भाभी को बेड पर उल्टा लेटा कर उनके ऊपर चढ़ गया.
भाभी के मुँह में कपड़ा ठूंस कर मैंने फिर से झटका मारा.
इस बार मेरा आधा लंड भाभी की चूत में चला गया और भाभी की आंखों से आंसू निकलने लगे.

उनके मुँह में कपड़ा ठुंसा हुआ था, तब भी उनकी दर्द भरी धीमी धीमी आवाजें ‘आह आह उन्ह मर गई …’ निकल रही थीं.
इस बार मैं नहीं रुका और उन्हें पेलने में लगा रहा.
मैंने एक और झटका मार कर अपना पूरा लंड अन्दर डाल दिया.

अब मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और उन्हें चूमते हुए सहलाने लगा.
मैं कुछ देर रुका रहा.

अब भाभी को भी मज़ा आने लगा और भाभी ने रोना बंद कर दिया.
मैंने उनके मुँह से कपड़ा हटा दिया.

भाभी हांफती हुई बोलीं- देवर जी, आपके लंड ने तो मेरी जान ही निकाल दी है. अब प्लीज धीरे धीरे करना.
मैं बोला कि भाभी अभी तो सिर्फ़ शुरुआत हुई है. अब देखिएगा कि कैसे आपकी नॉन स्टॉप चुदाई होती है.

बस ऐसा बोलकर मैंने भाभी के दोनों पैर फैला दिए और भाभी के पैरों पर मैंने अपने घुटने रख कर पैर दबा लिए कि भाभी हिल न पाएं.
फिर से लंड में तेल लगा कर भाभी की चूत में झटका मारा तो भाभी ने पूरा लंड अन्दर ले लिया और मादक सिसकारियां भरने लगीं.

मैंने अपनी स्पीड पकड़ ली और जोर जोर से भाभी की चूत में हमला करने लगा.
तेल की चिकनाहट के कारण भी चुदाई से पट फट की जोर जोर से आवाज आ रही थी.
उनकी चूत के अन्दर से चूत रस के कारण ‘छक … पछ … फक्क …’ की आवाजें आ रही थीं.

भाभी अब अपना कंट्रोल खो चुकी थीं और जोर जोर से आवाज देने लगी थीं- आअहह … अओई एमाआ … मुम्म याहह … हाईए मर गई देवर जी किस जन्म की सजा दे रहे हो … प्लीज धीरे करो … मैं आज पहली बार चुद रही हूँ … वह भी इतने बड़े लंड से अहह …’

भाभी चीखती रहीं और मैं धकापेल में लगा रहा.
काफी देर तक मैंने उनकी चुदाई की और मैंने अपने लंड का सैलाब भाभी की चूत में ही छोड़ दिया.

उस वक्त तो मजा आ रहा था.
पर जैसे ही होश आया तो भाभी थोड़ा सा टेन्शन में आ गईं- देवर जी आपने तो अपना माल मेरे अन्दर ही छोड़ दिया. अब मैं क्या करूं?
मैं बोला- कुछ नहीं भाभी, भैया को बुला कर जल्दी जल्दी एक दो बार चुदाई कर लेना. कोई दिक्कत नहीं है.

मैं इतना बोल ही रहा था कि भाभी उठ कर बाथरूम में अपनी चूत साफ करने चली गईं.
मैं भी उन्हीं के साथ में अन्दर चला गया.

भाभी ने मुझे देखा, तो मैंने उनसे कहा- मुझे भी साफ कर दो.
भाभी इठला कर बोलीं- कैसे?

मैंने भाभी को पकड़ कर नीचे बैठाया और अपना लंड उनके मुँह के सामने कर दिया.
भाभी समझ गईं और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

फिर सेक्सी न्यू भाभी मेरे लंड को हाथ सहलाती हुई बोलीं- आज ही सारे मज़े ले लोगे मेरे देवर जी?
मैं मुस्कुराने लगा.

भाभी इतने मजे से लंड चूस रही थीं कि मेरा लौड़ा फिर से टाइट हो गया.
मैंने भाभी को उठाया और शॉवर के नीचे झुका कर उनके पीछे से लंड लगा दिया और जब तक भाभी संभलतीं मैंने एक करारा झटका मारते हुए लंड चूत के अन्दर पेल दिया.

मैं उन्हें चोदने लगा, तो भाभी बोलीं- आहह देवर जी … आपका मन नहीं भरा अभी तक … इतना भी मत सताओ यार, दीदी उठ जाएंगी.
पर मैंने उनकी एक नहीं सुनी और जोर जोर से चोदने लगा.

भाभी भी मस्ती में आ गईं और जोर जोर से चिल्लाने लगीं- आह … अह कितने अन्दर तक पेल रहे हो देवर जी … ओह उईए मां … मर गयी आहह … और जोर से चोदो मजा आ रहा है अहह … अहं मैं मर गयी अओह.’

फिर मैंने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें जोर जोर से ऊपर नीचे उछालने लगा. इस तरह से मेरा लंड अपने आप उनकी चूत में आ जा रहा था.
मैं उन्हें काफी देर तक अलग अलग मुद्राओं में चोदता रहा और भाभी भी मजा लेती रहीं.

अब वे पूरी तरह से थक चुकी थीं और हिलने की हालत में भी नहीं थीं.
हम दोनों बाथरूम में चुदाई में मगन थे और दीदी ऊपर अपने कमरे में सोई हुई थीं.

उस रात को मैंने 12 बजे से 3 बजे तक भाभी की 3 बार चुदाई की.
भाभी की चूत पूरी तरह से सूज गयी थी.
उनको बहुत दर्द भी हो रहा था और चला भी नहीं जा रहा था.

भाभी बोलीं- देवर जी, आप मेरे रूम में चले जाओ, नहीं तो इसी रूम में रहोगे तो फिर से चढ़ जाओगे. मेरी ये हालत देखकर दीदी को भी शक हो जाएगा. आपके पास कोई दर्द निवारक दवा हो, तो मुझे दे जाओ.
मैंने अपने सामान में से एक पेन किलर निकाल कर भाभी को खिला दी और खुद दूसरे कमरे में चला गया.

सुबह सब उठे तो देखा कि भाभी अपनी टांगों को फैला कर धीरे धीरे चल रही हैं.
दीदी ने उनसे पूछा- भाभी आपको क्या हुआ, तबीयत तो ठीक है?

भाभी बोलीं- नहीं, कुछ नहीं … कल काम कुछ ज्यादा कर लिया था तो पैर दुख रहे हैं.
मैं बोला- भाभी तेल मालिश करवा लो … अच्छा रहेगा.

ये सुन कर भाभी अपनी चूत को देखकर इशारा करने लगीं.
फिर वे मेरे लंड की तरफ देखकर बोलीं- नहीं देवर जी, मैं कभी मालिश नहीं करवाऊंगी. उससे तो और ज्यादा दर्द हो जाता है.
मैं दीदी से नजर बचा कर हंसने लगा.

दोस्तो, मेरी सेक्स कहानी यहीं खत्म होती है. हालांकि उन 5 दिनों में मैंने भाभी को बहुत चोदा था.
 

junglecouple1984

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बहन की कुंवारी चूत की चुदाई




दोस्तो, ये एकदम सच्ची कहानी है.
मेरी बहन जब 19 साल की थी, तब वह पढ़ रही थी और उसका कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.

मैं अपनी बहन से 5 साल बड़ा हूँ.
उसकी एक सहेली थी नीलम नाम की … वह भी बहुत मस्त माल थी.

एक दिन मैं रोड पर अपने दोस्तों के साथ समोसा खा रहा था.
तो उसी वक़्त मेरी बहन अपनी सहेली के साथ जा रही थी.

उसी समय रोड पर एक कुत्ता और कुतिया सेक्स कर रहे थे.

अभी कुत्ते का लंड कुतिया की चूत में घुसा नहीं था, वह घुसा रहा था.
बहन की सहेली नीलम ने बहन से कुछ कहा और वे दोनों भी समोसा खाने के लिए हमारे ठीक सामने वाली दुकान में बैठ गईं.
उन्होंने भी समोसा का ऑर्डर दिया.

मैंने देखा कि मेरी बहन और उसकी सहेली उन कुत्ते कुतिया को ही देख रही थीं और हंस रही थीं.
तब मेरे दिमाग़ में यह विचार आया कि शायद मेरी बहन को सेक्स देखना बहुत पसन्द है.

मैंने खुद से अपने मन में कहा कि क्यों न मैं ही इसको चोद दूँ और उसकी सहेली को भी सैट कर लूँ.

वैसे भी मैंने अब तक बहुत सारी लड़कियों को चोदा था पर अब सिर्फ़ यही लग रहा था कि मुझे मेरी बहन कि ले ही लेनी चाहिए.

कुछ देर बाद वे दोनों समोसा खाकर उठ गईं और जाने लगीं.
तब तक कुत्ते का लंड कुतिया की चूत के अन्दर फंस गया था.

वे दोनों रुक गईं और एक एक प्लेट समोसा और लेकर खाती हुई बहुत देर तक उन दोनों की चुदाई को देखती रहीं.

अब कुत्ते का लंड कुतिया की चूत में फंस गया था और वे दोनों विपरीत दिशा में अपने अंग फंसाए हुए स्खलन का मजा ले रहे थे.
उसी वक्त हम लौंडे उस कुत्ते कुतिया को पत्थर मारने लगे.

मैं भी ऐसा जताते हुए कुत्ते कुतिया के मजा लेता रहा, जैसे मैंने अपनी बहन को देखा ही नहीं है.
मेरी बहन ने भी यही जताया कि उसने मुझे नहीं देखा है.

फिर हम सब लोग आगे बढ़ गए और कुछ देर बाद मैं घर आ गया.
उस वक्त मेरी बहन छत पर चली गई थी.

मैं अपने एक दोस्त के साथ घर आया था तो उसी के साथ चैस खेलने में लग गया.

जब रात हुई तो बाहर कुत्ते बहुत ज्यादा भोंक रहे थे.
मैं बाहर निकला और उनको पत्थर से मार कर भगा दिया.

मेरी बहन वह नजारा देख रही थी.
वह बोली- अरे जानवरों को पत्थर से क्यों मार रहे हो?

मैंने कहा- भोंक रहे हैं … हल्ला हो रहा है.
वह बोली- जो नहीं भोंकते, तुम तो उनको भी पत्थर मारते हो!

मैं समझ गया कि वह उन कुत्ते कुतिया की बात कर रही है, जिनको हम लोगों ने रोड पर चुदाई करते देखा था.
मैंने जानबूझ कर अजनबी बनने की कोशिश करते हुए कहा- कब मारा?

वह बोली- मेरी सहेली आज बता रही थी कि तेरा भाई डॉगी को पत्थर मार रहा था.
मैंने कहा- उसको कैसे पता?
वह बोली- उसने देखा था.

मैं- और क्या देखा था उसने?
“और कुछ नहीं.”

मैंने कहा- तुम भी वहीं थीं. तुमको भी देख कर मुझे बहुत हंसी आ रही थी.
“मैं … मैं कब?”
“ज़्यादा नौटंकी मत करो … मैं भी वहीं समोसा खा रहा था, जब तुम सामने की दुकान में थीं. मैंने तुमको देखा था. तुम्हारी नज़र सिर्फ़ उनके ऊपर ही थी. उस वक्त तेरी सहेली तुझसे क्या बोल रही थी, वह बताओ?”

“उसने बोला था कि आओ तुमको दिखाते हैं कि जानवर कैसे सेक्स करते हैं.”
“तुम हंस क्यों रही थीं?”

“इसलिए कि वह कुत्ता उसके ऊपर कई बार चढ़ रहा था और उससे हो ही नहीं रहा था. बाद में जब हुआ, तो वह एक दूसरे से सट गए थे. ऐसा क्यों होता है?”
“ऐसा सिर्फ़ कुत्ते कुतिया में ही होता है. इंसानों में नहीं.”

बहन बोली- हां, तुमको ज़्यादा पता है. तुमने कभी किया है क्या?
मैंने कहा- हां बहुत बार. मैंने तो कई लड़कियों के साथ किया है.

उसने पूछा- किसके साथ?
मैं बोला- बगल में प्रियंका है न … और खुशबू … उनके साथ.

“क्या … कैसे … तुम तो कितने बड़े हो और वे कितनी छोटी हैं?”

“वह सब छोड़ो. चुदाई में कोई छोटा बड़ा नहीं होता.”
वह चुप रही.

मैं- तुमको देखने में जब मज़ा आ रहा था, तो सोचो न कि करने में कैसा लगेगा?
“नहीं भाई, मैं ऐसा कुछ नहीं सोचती हूँ.

“अच्छा एक काम करो, तुम मेरी अपनी सहेली के साथ सैटिंग करवा दो.”
“क्यों?”

“मैं उसके साथ वही करूँगा, जो कुत्ते कुतिया कर रहे थे.”
“क्यों? … उसकी में अपना फंसाना चाहते हो?”

मैंने कहा- इंसानों में नहीं फंसता.
“कैसे मान लूँ?”
“ठीक है, रात को तुम मेरे कमरे में आना जब सब लोग सो जाएं, तब मैं तुमको सेक्स मूवी दिखाऊंगा और तुम देखना.”

वह बोली- तेरा दिमाग़ खराब है क्या?
मैंने कहा- अच्छा तुम अकेले देख लेना. मैं बाहर रहूँगा.
उसने कहा- नहीं, रहने दो.

मैंने बोला- ओके कोई बात नहीं, मैं तो रात को सेक्स मूवी देखता ही हूँ. अगर तुमको देखना हो तो मेरा दरवाजा खुला रहेगा … आके देख लेना.

वह कुछ नहीं बोली और चली गई.

रात हुई तो मैंने अपने कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला ही छोड़ दिया था क्योंकि मुझे मालूम था कि आज वह जरूर आएगी.

मैं बहुत देर से देख रहा था तो कुछ देर के बाद शायद मेरी बहन मेरे दरवाजे पर आ गई थी और वह झांक कर देख भी रही थी.

जब मुझे ऐसा लगा कि वह देख रही है, तब मैंने उससे बोला- आ जाओ यहीं … साथ में देखते हैं.
वह अन्दर आई और बोली- किसी को पता चला तो?

मैंने कहा- किसी को पता नहीं चलेगा. फिर भी तुम कहो तो दरवाजा बंद कर दूँ?
बहन ने बोला- ठीक है, दरवाजा बंद कर दो.

मैंने फट से दरवाजा बंद कर दिया अऔर लाइट भी ऑफ कर दी.
मैं अपनी सगी बहन को चुदाई की मूवी दिखाने लगा.

वह चुदाई देख कर गर्म हो गई.
मैं धीरे धीरे उसके पैर पर हाथ फेरने लगा और उसको अपनी बांहों में लेने लगा.
वह भी मेरा सहयोग करने लगी.

मैंने कहा- क्यों न आज सब कुछ हम भी करके देखें?
वह बोली- मैंने पहले कभी नहीं की है, अगर दर्द हुआ तो?

मैंने कहा- हां तेरी चूत छोटी तो है और तुम मेरा लंड देखोगी तो शायद हां न कहो!
वह बोली- हां हो सकता है कि तुम्हारा बड़ा हो. तब भी देख लेते हैं.

मैंने समझ गया कि इसका मूड है.
मैंने कहा- ओके पहले देखोगी?

तो उसने हां कहा और मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड को टच किया.

वह बोली- तुम्हारा तो सच में बहुत मोटा है!
मैंने कहा- मैं बाहर निकालूँ?
वह बोली- हां.

मैंने लंड बाहर निकाला.
मेरा लंड बहन की चुदाई की सोच कर एकदम टाइट खड़ा था.

वह अपने भाई का लौड़ा देख कर शर्मा गई और बोली- तुम्हारा तो कुत्ते से भी बड़ा और मोटा है … नहीं मैं नहीं करूंगी.

मैंने बोला- ये अभी और मोटा होगा … चलो, पहले तुम्हारी चूत देखता हूँ.

उसने मना कर दिया, वह अपनी पैंटी ही नहीं उतार रही थी.

मैंने ज़बरदस्ती उतार दी और देखा तो उसकी चूत बहुत छोटी थी.

मैंने कहा- आज तो मज़ा आ जाएगा. तुम्हारी चूत तो सच में बहुत छोटी है.
उसकी चूत देख कर ऐसा लग रहा था जैसे किसी छोटी उम्र की लड़की की हो.

मैंने उसकी टांगों को फैला कर देखा तो गजब का छेद था.

तब मैंने कहा- तुम रूको, मैं इसको गीला करता हूँ.
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
उसको भी चूत चटवाने में मज़ा आने लगा.

कुछ देर बाद मैंने 69 में होकर अपना लंड उसके मुँह में दिया और उसकी चूत चाटते हुए बोला- तुम मेरे लंड पर अपना खूब सारा थूक लगा दो.

उसने ढेर सारा थूक लगाते हुए मेरे लौड़े को चिकना कर दिया.
इधर मैंने उसकी चूत को चूस कर गीला कर दिया था.

सिस्टर हॉट होकर बोली- अब चोद दो.
मैंने उसकी चूत पर लंड का सुपारा रखा और झटके से पेल दिया.
टाइट चूत में लंड पेला तो मुझे भारी मज़ा आ गया.

मेरा लंड सटाक से अन्दर घुसा तो सील तक घुसता चला गया.

वह दर्द से कराह उठी और ‘आह आह मर गई.’ कहने लगी.
मैंने उसकी एक न सुनी और वापस झटका देते हुए लंड को और अन्दर घुसेड़ दिया.

वह छटपटा रही थी और कांपती हुई बोली- बहुत ज्यादा लग रही है. निकाल लो.
मैंने उसकी किसी भी बात को तवज्जो नहीं दी और एक दो बार अन्दर बाहर किया.

उसको बहुत दर्द होने लगा था; वह मुझे नोचने लगी थी.

मैंने लंड बाहर निकाल लिया और बोला- आज इतना काफी है, बाकी कल करेंगे. तब तक तुम्हारी चूत को थोड़ा आराम मिल जाएगा.
वह धीमी आवाज में बोली- भाई, अभी कल तक की बात मत करो … कुछ देर रुक कर करते हैं.

मैंने मन में सोचा कि मेरी बहन को चुदवाने की खुद से चुल्ल हो रही है, पर दर्द के कारण नाटक कर रही है.

अब मैंने उसे पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया.
मैं उसकी चूचियों को चूसने लगा, तो उसे मजा आने लगा.

वह बोली- कोई फिल्म तो लगाओ.
मैंने मोबाइल में एक सेक्स मूवी लगा दी और उसके चूचे चूसते हुए फिल्म देखने लगा.

कुछ ही देर में बहन की चूत फड़कने लगी और वह मेरे लौड़े को हाथ से सहलाने लगी.
मैंने फिल्म में देखा कि लड़के का लंड लड़की चूस रही थी.

तो अपनी बहन से पूछा- मुँह में लोगी?
वह एक बार लंड चूस चुकी थी तो बोली- ओके एक साथ करते हैं.

हम दोनों वापस 69 में आ गए और मैं उसकी चूत को चाट कर उसकी चूत को मजा देने लगा.

वह भी मेरे लंड को चूस रही थी.
लंड चूसते हुए ही वह मेरे टट्टों से भी खेलने लगी थी.

मुझे अपनी बहन से अपने टट्टे सहलवाने में बड़ा मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत में उंगलियां घुसेड़नी शुरू की तो वह मस्त होने लगी.
थोड़ी ही देर में उसकी चूत वापस लंड से चुदने के लिए मचलने लगी.

मैंने सीधे होकर अपनी सगी बहन की चूत पर अपना मूसल लंड टिकाया और उसके होंठों को अपने होंठों से बंद करके झटका दे दिया.
लंड एकदम शताब्दी एक्सप्रेस की तरह बहन की चूत का भोसड़ा बनाते हुए अन्दर घुसता चला गया.

मेरी बहन को बहुत तेज दर्द हुआ और वह छटपटाई भी … लेकिन उसका मुँह मेरे मुँह से बंद था तो कुछ भी आवाज वगैरह बाहर नहीं निकल सकी.

मैं भी किसी वहशी दरिंदे की तरह अपनी बहन की चूत को फाड़ता रहा और लंड को पूरी तरह से चूत की जड़ में सैट करके रुक गया.

सिस्टर बेहद तड़फ रही थी.
मैंने उसकी चूचियों को सहलाया और उसे चूमा तो वह शांत हो गई और अब मैंने उसकी चूत का मजा लेना शुरू कर दिया.

कुछ ही देर में हम दोनों भाई बहन की प्रेम मिलन की ट्रेन हवा से बातें करने लगी.

करीब बीस मिनट तक चुदाई के बाद मैंने अपने लंड को चूत से खींचा और बहन के पेट पर ही अपना माल टपका दिया.
मेरी बहन मुझसे चुदवा कर बहुत खुश थी.

अब हम दोनों रोज ही सेक्स करने लगे हैं.
मेरी बहन मेरे लंड की दीवानी हो गई है.
 

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गाँव में मां बेटा ने लिया चुदाई का मजा



मेरा नाम संजीव है. हमारे घर में मेरे पापा, मम्मी, मैं और मेरा छोटा भाई हैं.

मेरी उम्र 19 साल की है, पापा की 47 और मम्मी 42 की.

मेरे पापा की बड़ी किराने की होलसेल की दुकान है तो पापा अपने बिजनेस में बहुत ज्यादा व्यस्त रहते हैं.
पापा रात को घर पर आते हैं.

मेरा भाई हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रहा है.
तो घर में मम्मी और मैं ही रहते हैं.

यह कहानी मेरी और मेरी मम्मी की है कि कैसे मैंने अपने मम्मी को नाना (मम्मी के पापा) के गांव में चोदा.

मेरी मम्मी का नाम रेखा है.
उनकी हाइट लगभग सवा पांच फीट की है.
उनके चूचे 34 इंच के हैं, गांड 36 इंच के आसपास है.
वे बहुत हॉट हैं.
मेरी मम्मी ज्यादातर साड़ी पहनती हैं. वे रात को सोते समय नाइटी पहन लेती हैं.

एक दिन मम्मी की मां यानि मेरी नानी का फोन आया.
नानी ने मुझे बताया कि मेरे नाना जी की तबियत ठीक नहीं है. मम्मी को गांव आना होगा.

मैंने उनकी बात मम्मी से करवाई.
मम्मी ने नानी से बोला कि हम दोनों कल सुबह गांव आ जाएंगे.

रात को मम्मी ने पापा से कहा.
मम्मी- अजी सुनते हो, मेरी पिताजी की तबीयत खराब हो गई है, हमें गांव जाना होगा.
पापा- यार रेखा, दुकान में बहुत काम है, मैं तो जा नहीं सकता. एक काम करो … तुम संजीव के साथ चली जाओ.

यह कह कर पापा ने मुझे बुलाया, तो मैं आ गया.

पापा- बेटा, तेरे नाना जी की तबीयत खराब है, तुम और तुम्हारी मां दोनों वहां चले जाओ. उनके ठीक होने के बाद आ जाना.

हमारे घर में दो गाड़ी हैं. एक स्विफ्ट और एक बोलेरो.

अगली सुबह मैं और मम्मी गांव के लिए स्विफ्ट में निकल गए.
मम्मी ने एक ग्रीन साड़ी पहनी थी, उसमें वे बहुत ही हॉट दिख रही थीं.

लगभग 4 घंटे का रास्ता था.
लगभग दो घंटे बाद मम्मी ने गाड़ी रोकने को कहा.

मम्मी- बेटा, गाड़ी रोक जरा!
मैं- क्यों मम्मी, कुछ काम है?
मम्मी- हां बेटा मुझे जोर से सुसु लगी है.

मैंने गाड़ी एक पेड़ के पास रोक दी.
मुझे मम्मी को देखना था तो मैंने मम्मी से बोला- मम्मी मुझे भी लगी है.

मम्मी- ठीक ही तुम भी उतर कर सुसू कर लो.

फिर मैं पेड़ के पास और मम्मी मेरे से थोड़ी दूर झाड़ी में सुसु करने चली गईं.
मैं जहां खड़ा था, वहां से सब दिख रहा था.

मम्मी ने वहां जाकर अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठा कर अपनी पैंटी नीचे घुटनों तक कर दी.
मुझे उनकी गांड दिख रही थी.

उनकी गांड बिल्कुल सफेद, गोल थी. मोटे मोटे चूतड़ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

फिर जब मम्मी सुसु करके पीछे मुड़ीं, तो मैंने उनको अनदेखा कर दिया.
पर मेरा लंड खड़ा था और बाहर ही निकला हुआ था. शायद मम्मी ने भी मेरा लंड देख लिया था.

मम्मी गाड़ी के पास आकर बोलीं- बेटा कितनी देर तक करोगे!
मैं- बस हो गया मम्मी, अभी आया.

मैं जल्दी से आया और हम दोनों आगे चल पड़े.

कोई 2 घंटे बाद हम लोग गांव पहुंच गए.
नाना नानी हमारे आने की राह देख रहे थे.

नाना जी का घर बहुत बड़ा है, पर उसमें सिर्फ वे दोनों ही रहते हैं.

मम्मी ने नाना जी के डॉक्टर से बात की और उनके कहे अनुसार कुछ और दवाइयां मंगवाईं.

रात को हम सभी ने एक साथ खाना खाया.
खाना खाने के बाद मैं अपने लिए बताए गए रूम में चला गया और सो गया.

सुबह उठा और बाथरूम जाने लगा तो बाथरूम अन्दर से लॉक था.

मैं- कौन है अन्दर?
मैंने आवाज लगाई, तो अन्दर से मम्मी बोलीं- बेटा मैं हूँ, रुको जरा … बस 2 मिनट में आई.

कुछ टाइम बाद मम्मी एक तौलिया बांधे हुई निकलीं.
वह तौलिया उनकी गांड के नीचे तक ही आ रही थी. ऊपर से मम्मी के आधे बूब्स दिख रहे थे.

जब वे बाहर निकल रही थीं तो जल्दबाजी में मुझसे टकरा गईं और उनकी तौलिया थोड़ी सी नीचे सरक गई.
मम्मी ने अपने एक हाथ से तौलिया पकड़ा और दूसरे हाथ से अपने मम्मों को छुपाने लगीं.

मैं- ओह सॉरी मम्मी.
मम्मी अपना तौलिया ठीक करके बोलीं- कोई बात नहीं बेटा.

यह कह कर मम्मी ने मुझे एक मुस्कान दी और वे कमरे में चली गईं.

इधर मैं बाथरूम में घुस गया.
अन्दर जाकर मैंने देखा कि मम्मी की ब्रा और चड्डी वहीं पड़ी थी.

मेरे अन्दर कुछ ठरक चढ़ गई थी तो मैंने उनकी चड्डी को अपने लंड पर लपेटा और उसी से लंड को रगड़ कर हिलाने लगा.

मैंने मम्मी की चूचियां देख ली थीं तो उनके ही नाम की मुठ मार ली और सारा वीर्य मम्मी की चड्डी में गिरा दिया.

फिर मैं नहा कर बाहर आ गया और ब्रेकफास्ट करके घर के बाहर बैठ गया था.

कुछ देर बाद मम्मी भी आ गईं और वे मेरे साथ बैठ कर बातें करने लगीं.
मम्मी- बेटा, कैसा लगा नानी के घर आकर?

मैं- मम्मी, नाना जी का घर तो बड़ा मस्त है. मैंने पहली बार इतनी ध्यान से देखा. पहले छोटा था तब कुछ ज्यादा समझ में ही नहीं आता था.
मम्मी- बेटा हमारा एक फॉर्महाउस भी है. वह बस 200 मीटर दूर है, घर के पीछे से ही उसी रास्ता है.

नाना जी का घर गांव से थोड़ा दूर खुले में था.
आस-पास कुछ घर बने थे, पर वे भी थोड़े दूर दूर थे.

मैं- मम्मी उधर घूमने चलें क्या? मुझे भी देखना है.
मम्मी- ठीक है बेटा, मैं तेरी नानी को बता कर आती हूँ.

फिर कुछ मिनट में मम्मी के साथ मैं नाना जी के फॉर्म हाउस पर पहुंच गए.

मम्मी ने एक ब्लैक कलर की साड़ी पहनी हुई थी.
मैं- फार्म पर कोई नहीं है क्या? कोई दिखाई नहीं दे रहा है!

मम्मी- हां बेटा, अभी गर्मियों के कारण फार्म बंद है. कोई फसल भी नहीं लगी है, तो कोई मजदूर भी नहीं है.
हम दोनों फार्महाउस के अन्दर गए.

उधर एक छोटा सा घर बना हुआ था, वह काफी अच्छा था.
हम दोनों घर की छत पर आ गए.

तो मैंने देखा कि पास ही मैं एक छोटा सा तालाब बना था. उसका पानी बिल्कुल साफ था.
मैंने मम्मी को भी दिखाया.

मैं- मम्मी वह तालाब कितना मस्त है ना … मेरा तो नहाने का मन हो रहा है. मम्मी उधर जाएं क्या?
मम्मी- बेटा मन तो मेरा भी हो रहा है, पर हम लोग पहनने के लिए तो कुछ नहीं लाए!

मैं- मम्मी नीचे रूम में शायद कुछ तौलिया थे, मैं ले आता हूँ.
मम्मी- पर बेटा तौलिया में?

मैं- अरे यार मम्मी, बस हम दोनों ही तो हैं और कोई नहीं है. आप शर्माओ मत मम्मी प्लीज … और मम्मी मैंने तो आप को कई बार तौलिया में देखा है.
मम्मी- ठीक है चलते हैं.

फिर हम दोनों तालाब के किनारे पहुंच गए.
मैंने अपने सारे कपड़े उतार कर तौलिया लपेटी और मैं तालाब में घुस गया.
अन्दर जाकर मैंने मम्मी से कहा.

मैं- मम्मी आप भी आ जाओ, बहुत मजा आ रहा है.
फिर मम्मी ने मेरे सामने ही अपनी साड़ी उतार दी और वे सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में आ गईं.

उनको देख कर मेरा लंड पानी में खड़ा हो गया.
उसके बाद मम्मी ने मेरी तरफ पीठ करके अपना ब्लाउज उतार कर नीचे फेंक दिया.

मम्मी ने काली ब्रा पहनी थी. अभी भी वे मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थीं.
फिर उन्होंने अपनी ब्रा भी खोल कर फेंक दी.
उनकी नंगी पीठ मेरी तरफ थी.

उसके बाद मम्मी ने अपनी पेटीकोट का नाड़ा खोला और अपने ऊपर तौलिया लपेट कर पेटीकोट नीचे कर दिया.
मेरा बुरा हाल हो रहा था.

फिर मम्मी मेरी तरफ मुड़ीं तब मैंने देखा कि मम्मी की तौलिया उनकी चूत से सिर्फ 4 इंच नीचे थी.

उसके बाद मम्मी ने मेरी तरफ देख कर कहा- क्या देख रहे हो बेटा?
मैं- मम्मी, आप बहुत सुंदर लग रही हैं.
मम्मी- थैंक्स बेटा.

फिर मम्मी ने अपनी पैंटी निकालनी शुरू कर दी.
उन्होंने लाल रंग की पैंटी निकाली और नीचे गिरा दी.

उसके बाद मम्मी भी मेरे साथ पानी में आ गईं.
हम दोनों ने लगभग एक घंटा तक साथ में मजे किए.

उस दौरान मैंने कई बार मम्मी की चूचियों और गांड को भी दबा कर मजा लिया था.
एक बार तो मम्मी की तौलिया खुल भी गई थी और उनकी चुत व चूचियां मेरे सामने नंगी हो गई थीं.

पर मम्मी ने हँसते हुए खुद को मोड़ लिया था और चुत व चूचियों की एक झलक दिख कर रह गई थी.

काफी देर तक मस्ती करने के बाद हम दोनों ने बाहर आकर देखा, तो हमारे सारे कपड़े गीले हो गए थे.

हमारे कपड़े पानी के बिल्कुल करीब रखे थे और शायद जब हम पानी को उछालते हुए एक दूसरे के साथ खेल रहे थे, तभी पानी कपड़ों के ऊपर गिर गया होगा.

मैं- मम्मी हमारे सारे कपड़े तो गीले हो गए, अब क्या करेंगे?
मम्मी- बेटा अभी तो फॉर्महाउस में चलते हैं, फिर सोचेंगे.

हम दोनों घर के अन्दर आ गए.

मम्मी- बेटा एक काम करते हैं, सारे कपड़ों को ऊपर छत पर सुखाने डाल देते हैं. फिर मैं तेरी नानी को कॉल करके बोल देती हूँ कि हम शाम को घर वापस आएंगे.
मैं- ठीक है मम्मी.

फिर मम्मी ने नानी को फोन करके बोला कि हम दोनों फार्म पर हैं और शाम को घर आएंगे.

उसके बाद मैंने मम्मी के साथ मिल कर सारे कपड़े ऊपर छत पर सुखाने डाल दिए. हम दोनों सिर्फ तौलिया में थे.

नीचे आकर हम लोग एक एक कुर्सी लेकर बैठ गए और बातें करने लगे.
मैं- मम्मी हमें सर्दी हो जाएगी क्योंकि हम दोनों ने ही गीले तौलिया पहने हैं.

मम्मी को भी यही लग रहा था.
मम्मी- हां बेटा, पर क्या करें?

मैं- मम्मी मेरे पास एक आइडिया है.
मम्मी- क्या?

मैं- क्यों ना हम दोनों बिना तौलिया के कुछ टाइम रहें और जब तौलिया सूख जाएंगे तो वापस पहन लेंगे.
मम्मी- आइडिया तो अच्छा है, पर बेटा नंगा?

मैं- मम्मी मैं आपका बेटा हूँ. मुझसे कैसी शर्म? बचपन में भी तो आपने मुझे नंगा देखा है.
मम्मी- ठीक है बेटा, अगर तुझे कोई परेशानी नहीं है, तो मैं भी राजी हूँ.

फिर मम्मी ने घर का दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया और हम दोनों नंगे होकर बैठ गए.
मम्मी अपने चूचियों को हाथों से छुपा रही थीं, पर उनके बड़े बड़े बूब्स सब दिख रहे थे.

मेरा लंड भी तन कर बड़ा हो गया था.
मम्मी ने मेरे खड़े लंड को देख लिया था.

कुछ देर हम दोनों ऐसे ही बैठे रहे.
फिर मुझे थोड़ी प्यास लगने लगी.

मैंने मम्मी से बोला कि मम्मी मुझे प्यास लगी है … बहुत जोर से.
मम्मी- पर बेटा घर पर तो पानी नहीं है … शायद बाहर पानी का टब रखा है. पर बेटा हम तो नग्न हैं. हम बाहर निकल ही नहीं सकते.

मैं- पर मम्मी मुझे तो बहुत प्यास लग रही है.
मम्मी- बेटा, तू एक काम करेगा? पर बेटा किसी को बताना मत!

मैं- हां मम्मी.
मम्मी- बेटा एक काम कर, तू मेरे बूब्स से दूध पी ले.

मैं- मम्मी आपके बूब्स में अभी भी दूध आता है क्या?
मम्मी- हां बेटा, तेरे पापा को दूध पीना बहुत पसंद है, तो मैंने दवाई लेकर अपने बूब्स में दूध निकलने का इंतजाम करवा लिया है.

मैं अपनी कुर्सी मम्मी के पास लेकर आया और उनके करीब बैठ कर उनकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.

उनकी चूची से दूध नहीं आ रहा था पर मजा भरपूर आ रहा था.
मैंने उनकी चूची को चूसते हुए उनकी आंखों में देखा तो मम्मी की आंखों से वासना का सैलाब घुमड़ते हुए दिखा.

मैं समझ गया कि मेरी मम्मी प्यासी हैं और उन्हें मेरे साथ चुदने में कोई गुरेज नहीं है.

अब मेरा एक हाथ मम्मी की नंगी जांघ पर था और एक हाथ उनके कंधे पर था.
कुछ टाइम तक दूध चूसने के बाद मम्मी के मुँह से आह निकलनी शुरू हो गई.

मम्मी ने मेरे एक हाथ को उनके दूसरे दूध पर रखते हुए कहा- बेटा इसको भी दबाओ न!
मैं- हां मम्मी. मम्मी आपका दूध बहुत मीठा है.

मेरा लंड खड़ा था.
मैंने अपना दूसरा हाथ कुर्सी और मम्मी के बीच में लिया और मम्मी की नंगी कमर और पीठ को सहलाने लगा.

अब मम्मी के मुँह से धीमी आवाज में सिसकारियां निकलने लगी थीं.
मम्मी- उम्म्म उम्मम आह … मैं बहुत प्यासी हूँ संजू.

उन्होंने अपने होंठों को दबाना शुरू कर दिया था.
कुछ ही मिनट बाद उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे हिलाने लगीं.

मैंने मम्मी के दूध छोड़ कर उनके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा.
आह क्या मजा आ रहा था दोस्तो. मेरा मन उन्हें खा जाने का कर रहा था.

हम दोनों पूरे जोश में एक दूसरे को किस कर रहे थे.
हम दोनों ने अपनी जीभों को चूसना शुरू कर दिया था.

मम्मी मेरे लंड को मस्ती से सहला रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने मम्मी को अपनी गोदी में उठा लिया और अन्दर बने बेडरूम में ले गया.

उधर मैंने उन्हें बेड पर गिरा दिया.
क्या माल लग रही थीं … बिल्कुल गोरी पॉर्न एक्ट्रेस … एकदम साफ चूत, बड़ी बड़ी चूचियां.

मम्मी ने कहा- बेटा, इसके बारे में किसी को बताना मत, ये बात सिर्फ हम दोनों के बीच रहनी चाहिए.
मैं- हां मम्मी.

फिर मैंने मम्मी को बेड पर चित लिटा कर उनके दोनों पैरों को फैला दिए और अपना लंड चूत पर रगड़ने लगा.

मम्मी मस्ती भरी आवाज में बोलीं- बेटा तू कंडोम लाया है ना!
मैं- मम्मी, वह तो नहीं है.

मम्मी- ठीक है, तुम एक काम करना … लास्ट टाइम में जब तेरा गिरने वाला होगा तो मेरी चूत के अन्दर मत छोड़ना. रस बाहर गिरा देना. वरना बेटा में प्रेगग्रेंट हो जाऊंगी.
मैं- हां मम्मी, मैं वीर्य बाहर निकाल दूंगा.

फिर मैंने अपना लंड मम्मी की चूत के थोड़ा अन्दर डाला.
तो मम्मी चीख पड़ीं- अहह मैं मर गई … आह बाहर निकाल इसको.

मैंने लंड बाहर निकाल कर मम्मी से पूछा- मम्मी क्या हुआ?
मम्मी- मैंने कभी इतना बड़ा लंड नहीं लिया अन्दर … तू एक काम कर थोड़ा सा तेल लाकर अपने लंड और मेरी चूत पर लगा ले … फिर चोदना.

मैंने थोड़ा सा तेल लाकर मम्मी की चूत में लगाया और अपनी दो उंगली अन्दर डाल कर चुत को ढीला किया.
मम्मी- आह बेटा, उंगली मत डाल, तेरा लंड खड़ा है न उसी को डाल!

यह सुनते ही मैंने अपना लंड मम्मी की चूत में पेल दिया और एक ही धक्के के में पूरा अन्दर तक ठांस दिया.
मम्मी बहुत जोर से चिल्ला पड़ीं- आआह आआह मर गई … मादरचोद साले निकल इसको मां के लौड़े … आह फाड़ दी मेरी चुत.

मैं मम्मी के मुँह से यह सुन कर और जोश में आ गया. पर मैंने अब धक्का नहीं मारा, बस लंड को पूरा अन्दर डाल कर चुत का मजा लेता रहा.

थोड़ी देर बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.
मम्मी- अह उम्म ओह्ह … चोद धीरे धीरे चोद बेटा अह … क्या बड़ा लंड है तेरा ओह्ह्ह उम्म्म.

मैं मम्मी को चोदते हुए उन्हें किस करने लगा और बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा.
मैंने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी.

मम्मी जोर जोर से चिल्लाने लगीं.
मम्मी- अह्ह्ह्ह्ह बेटा चोद दे बेटा … अपनी मां को चोद साले.

मैं मम्मी के एक दूध को मुँह में लेकर चूस रहा था और लौड़े को काम पर लगाए हुए था.
मैं- आह मम्मी सच में आपको चोद कर बहुत मजा आ रहा है … क्या मस्त चूत है आपकी.

लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद मेरा निकलने वाला था.
मम्मी भी डिस्चार्ज हो गई थीं.

मैं- ओह मम्मी, मेरा निकलने वाला है.
मम्मी- अह्ह्ह् … बेटा अन्दर मत निकालना बेटा!

मैं बहुत स्पीड में मम्मी को चोद रहा था; पूरा बेड हिल रहा था.
जब मेरा निकलने को हुआ तो मैंने गलती से अन्दर ही निकाल दिया.

मैं- ओह्ह्ह् मम्मी सॉरी … गलती से अन्दर निकल गया.
मम्मी- बेटा ये क्या किया तूने!

मेरा लंड अभी भी अन्दर था.

मम्मी- बेटा एक काम करना, शाम को किसी मेडिकल की दुकान से कुछ प्रेग्रनेंसी रोकने की दवाई और कुछ कंडोम ले लेना.
मैं- हां मम्मी गुड आईडिया.

उसके बाद हम दोनों ने 3 बार फार्म हाउस में सेक्स किया, फिर हम घर आ गए.

शाम को मैंने कुछ पिल्स और कंडोम लाकर मम्मी को दे दिए.
रात को मम्मी ने नानी से कहा- मैं संजीव के साथ रूम में सो जाऊंगी.

उन्हें भला क्या आपत्ति हो सकती थी.
इस तरह से हम दोनों कई दिन तक नाना के घर रहे.

रोज दोपहर में और रात को एक बजे तक हम सेक्स का मजा करते थे.
मैंने मम्मी की गांड भी बहुत बार मारी.

मैंने मम्मी के चूचे दबा कर और गांड मार मार कर दोनों का आकार बढ़ा कर दिया था.

उसके बाद हम अपने घर चले आए.
घर पर भी हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे थे.

पापा अक्सर दुकान में होते थे तो दिन में खुल कर सेक्स का मजा लेते थे.
रात के 12 बजे जब पापा सो जाते थे तो मम्मी मेरे कमरे में आ जाती थीं और हम दोनों सेक्स कर लेते थे.

कुछ दिनों बाद मम्मी को पता चला कि वह प्रेगनेंट हैं … तो उन्होंने मुझे बताया.
मैंने एक डॉक्टर से मम्मी का अबॉर्शन करवा लिया, किसी को कुछ पता भी नहीं चला.

हम दोनों को अब जब भी मौका मिलता है, ताबड़तोड़ सेक्स कर लेते हैं
 

junglecouple1984

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भाभी की बड़ी बहन की चूत फाड़ चुदाई



दोस्तो, मेरा नाम राजकुमार है।
मैं प्रयागराज उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं।

मेरी उम्र 24 साल है। मेरी हाईट 6 फीट है। मेरी बॉडी बहुत नॉर्मल सी है। मैं थोड़ा पतला हूँ।
इसी तरह मेरे लन्ड की लंबाई सामान्य के थोड़ी अधिक और मोटाई 2.5 इंच है।


यह घटना पिछले साल दिसंबर में हुई थी।

यह इंडियन लेडी सेक्स कहानी मेरी भाभी की बड़ी बहन रजनी की है जिनके पति का देहावसान कैंसर की वजह से 2019 में हो गया था।
इनकी उम्र 36 साल है।
और फिगर ऐसा कि किसी का भी मन डोल जाए।
इनके 2 बच्चे हैं।

अपने पति की डेथ के बाद वे मायके में बच्चों के साथ रहने लगी हैं।
उनके अलावा केवल उनकी मां उनके साथ रहती हैं।

भाभी की शादी के बाद उनसे हम लोगों की बात कभी कभी हो जाती थी।

उनके पति की मृत्यु के बाद उनका एक बेटा हमारे घर रहकर पढ़ाई करने लगा है।
तब से हम लोगों की बातें कुछ ज्यादा होने लगी हैं।

एक दिन शाम को रजनी का फोन आया और बेटे की पढ़ाई के बारे में पूछने लगी।
फिर वे बोली- दिन भर घर पर बैठ कर बोर होती रहती हूं। तो फोन लगाकर लोगों से बात कर लेती हूं।
तो मैंने उनसे कहा- अगर ऐसी बात है तो आप मुझे रोज आधे घंटे के लिए फोन कर सकती हैं।

उसके बाद हम और रजनी दोनों लोग रोज बातें करने लगे।

शुरु में तो मैं पढ़ाई की बात और वे अपनी बीते दिनों के बारे में बात करती थी।
फिर धीरे धीरे बातें मेरी गर्लफ्रेंड पर आ गई।

मैंने रजनी पर लाइन मारते हुए कहा जब आपके जैसी भाभी हो तो गर्लफ्रेंड की क्या जरूरत है।
रजनी हंसकर बात को टाल गई।

उसके बाद से मैं रजनी को हंसी मजाक में अपनी गर्लफ्रेंड बोलने लगा और वे बुरा भी नहीं मानती थी, बस यही कहती- कोई अपनी उम्र की पटाओ।

धीरे धीरे हम डबल मीनिंग चुटकुले और जोक्स शेयर करने लगे और बातें करने लगे।

फिर धीरे धीरे हम सेक्स की बातें करने लगे।
तब रजनी ने बताया कि उन्होंने पहला सेक्स अपने पति के साथ ही शादी के बाद किया था।

इन बातों को सुनकर अब मैं मेरे मन में जल्द से जल्द उनको अपने लन्ड के नीचे लाने के लिए जुगाड़ सोचने लगा।

एक दिन मैंने मजाक में फोन पे उनसे कहा कि मुझे उनको चोदना है।
इस बात को सुनकर वे गुस्सा हो गई और बात करना बंद कर दी।

करीब एक हफ्ते बाद उनका फोन आया और बात हुई।
रजनी ने कहा कि मैं ऐसी बात दोबारा न करूं।

मैंने कहा- बचाकर क्या करोगी?
तो रजनी ने कहा- मैंने अपने पति के अलावा कभी किसी के बारे में नहीं सोचा!
मैंने कहा- अब सोचो।
वे कुछ नहीं बोली और बाद में धीरे धीरे फिर से सेक्स की बातें शुरू हुई।

कुछ ही दिनों में हम दोनों फोन पर ढेर सारी सेक्स की बातें करते और रजनी अपने एक्सपीरियंस मुझे बताती।

फिर हम दोनों अब फोन पर सेक्स करने लगे थे।
कभी वीडियो काल पर तो कभी फोन पर!

वीडियो कॉल पर रजनी को पूरी तरह नंगी देखकर मैं फोन सेक्स करता था।

रजनी के भरे हुए बदन और बूब्स को देखकर अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं जल्द जल्द रजनी को अपने लन्ड के नीचे लाना चाह रहा था।

रजनी का शरीर एकदम कसा हुआ है जैसे बड़ी नाजों से बनाया गया हो।

अब तक हम लोग सिर्फ फोन सेक्स से ही गुजारा कर रहे थे क्योंकि भाभी के घर जाने का कोई चांस नहीं मिल रहा था।

एक महीने बाद भाभी की मां 4 दिन के लिए अपने मायके जाने वाली थी।
रजनी ने फोन करके मुझे पहले ही बता दिया था।

और फिर रजनी का फोन भाभी के पास आया- अगले 4 दिन मैं घर पर अकेले रहने वाली हूँ तो राज को घर पर भेज दे।
अगले दिन सुबह भाभी ने मुझको अपने घर जाने को बोला।
मैं बहुत खुशी से जाने लिए तैयार था।

शाम को मैं 3 बजे घर से निकला।
रास्ते में जाते वक्त मैंने मेडिकल शॉप से कंडोम की 4 पैकेट और सेक्स की गोली ली।

मैं झूठ नहीं बोलूंगा, मैंने यह चुदाई सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा खाकर की थी।

5 बजे रजनी के घर पहुंच गया।
तब तक उनकी मां जा चुकी थी।

शाम को सबसे पहले पहुंच कर मैंने फ्रिज में बर्फ जमने के लिए रख दिया और फिर हम बात करने बैठ गए।
उनका छोटा बेटा मेरी मोबाइल में गेम खेलने लगा।

रात को रजनी ने खाना बनाया और तकरीबन रात 9 बजे हम तीनों ने खाना खाया.
मैंने साथ ही सेक्स की एक गोली खा ली और सोने के लिए एक ही कमरे अलग अलग तख्त पर लेट गए।

करीब आधे घंटे बाद उनका बेटा सो गया।
फिर रजनी धीरे से मेरे तख्त पर रजाई के अंदर आ गई।

और फिर हम दोनों एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे।
कभी रजनी मेरे गालों को चूमती तो कभी मैं रजनी के गालों को चूमता और चूचियां दबा देता, वे हल्की सी सी … सी … की आवाज निकलती।

इस तरह हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से खेलते खेलते कब आधे नंगे हो गए पता नहीं चला।
मैं सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में और रजनी केवल ब्रा और पैंटी में थी।

फिर हम दोनों एक दूसरे को कस कर गले लगाया और किस करने लगे।

रजनी किस करने में एकदम माहिर थी.
एक पल ऐसा लगा कि जैसे वे मेरे होंठों को काट खायेंगी।
इधर मुझ पर भी अब दवाई का असर होने लगा था, मेरे अंडरवीयर में बने तंबू से महसूस हो रहा था।

मैं अब रजनी को जानवरों की तरह किस करने लगा था।
कभी उनके गले पर तो कभी कान और होठों पर मैं काट रहा था।

रजनी के मुंह से सिर्फ आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सीश्स … आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … की कामुक आवाज़ें आ रही थी।

मैं गले से चूमते हुए चूचियों तक पहुंचा जो अब तक ब्रा में कैद थी।
मैंने एक ही झटके ब्रा को खींचा और पीछे से उसकी स्ट्रिप टूट कर रजनी की चूचियों पर लगी जिससे उसकी चीख … अरे मम्मी रे … निकल गई।

तब मैंने उसके गालों पर किस किया और चूचियों को दबाने लगा।

उनके मुंह से आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … की आवाज़ें निकल रही थी।

अब मैंने उसकी दोनों चूचियों को हाथों से मसला और उनके मुंह से आह … सी … निकला।

फिर मैं रजनी की एक चूची को मुंह में लेकर तेजी तेजी चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को तेजी तेजी पूरे बल से दबा रहा था।

इससे उसके मुंह से केवल आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … अरे मम्मी रे … आह … आह … आह … ईई … धीरे करो की कामुक आवाज़ें आ रही थी।
जो पूरे कमरे के माहौल को और भी रोमांटिक बना रही थी।

इन सिसकारियों से मुझ पर और भी नशा छा रहा था और मैं और भी तेजी से करने लगता था।
उनके मुंह से केवल कराहने और हल्की सिसकारियों की आवाज आ रही थी।

अब धीरे धीरे मेरा एक एक हाथ उनकी पैंटी पर गया जो काले रंग की थी।
मैंने पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसल दिया जिससे उन्होंने चीख कर गर्दन उठा ली।

फिर मैं उठा और फ्रिज से जमाई बर्फ उठा लाया जो छोटे छोटे क्यूब आकार में थी।

बर्फ साइड में रख कर मैंने अपने एक हाथ से उनकी पैंटी उतार दी और चूत को सहलाने लगा।
और वे कमर उठा उठा कर साथ दे रही थी।
उनकी चूत बहुत गर्म हो गई थी।

तभी मैंने साइड में रखे एक बर्फ के टुकड़े को उनकी चूत में डाल दिया।
जिससे रजनी अपने हाथ पैरों को पटकने लगी।
लेकिन मैंने उस टुकड़े को बाहर नहीं निकलने दिया.

अब वे बिन पानी मछली की तरह तड़प छटपटा रही थी।
लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा।

फिर मैंने थोड़ा नीचे आकर उनकी चूत पर अपने होंठ रख दिए जिससे वे चिंहुक उठी।

अब मैं अपने होंठों से उनकी चूत में घुसे उस बर्फ के टुकड़े इधर उधर करने लगा।
जब एक टुकड़ा पिघल जाता तो उसको मैं पी जाता।

इस बीच रजनी के मुंह से से सीत्कार निकल रही थीं- आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … चूस लो … खा जाओ … ये निगोड़ी चूत बहुत परेशान करती है … इसका भरता बना दो … आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … के आवाज निकल रही थी।

यह खेल तकरीबन 20 मिनट तक चला।
इस बीच वे 1-2 बार झड़ चुकी थी।

इसके बाद मैं एक साइड में लेट गया गया और किस करने लगा।

थोड़ी देर में मैंने उन्हें लन्ड चूसने को कहा मगर वे मना करने लगी।
मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया।

फिर रजनी उठी और मेरे लन्ड को हाथ में लेकर हिलाने लगी और लन्ड के टोपे को आगे पीछे करने लगी।

उसने पास रखे कंडोम को उठाया और लन्ड पर लगाकर लेट गई और मुझे ऊपर आने का इशारा किया।
मैं उसके ऊपर लेट कर उसको किस करने लगा।

फिर लन्ड को चूत पर घिसने लगा जिससे वे और उत्तेजित होने लगी और गांड़ उठा कर चूत में लन्ड लेने की कोशिश करने लगी.
वे मुंह से आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … कर रही थी।

फिर मैंने अपने लन्ड को चूत के मुंह पर एक झटका मारा लेकिन लन्ड चूत के बाहर छिटक गया।
इस पर रजनी हंसने लगी, बोली- तुमसे ना होगा।

इस पर हंस पड़ा और बोला- रुको, अभी तुम्हारी चूत फाड़ता हूं।
वे बोली- मेरी चूत फाड़ के दिखाओ तो मैं तुम्हारी भाभी की चूत भी तुमसे फड़वा दूंगी।

मैंने उससे शर्त लगाई कि उनको भाभी की चूत दिलानी पड़ेगी।
वे मान गई।

इस बार मैंने लन्ड को चूत के मुंह पर सेट किया और एक जोर का झटका लगाया।
लन्ड आधा उसकी चूत में जाकर फंस गया।
उनको बहुत दर्द हुआ।

रजनी जोर से चीखने लगी, बोली- लन्ड बाहर निकालो, बहुत जलन हो रही है.
वे इधर उधर सर पटक रही थी … मुझको पीछे करने की नाकाम कोशिश कर रही थी और जोर जोर से चीख रही थी.

लेकिन मैंने एक हाथ से मुंह पकड़ रखा था।
मैं आधा मिनट रुका तो रजनी ने चीखना कम किया।

मैंने लन्ड को थोड़ा बाहर निकाला और एक जोरदार झटका लगाया।
और मेरा लन्ड चूत तो फाड़ता हुआ अंदर बच्चेदानी जा टकराया।

इस पर रजनी बहुत जोर से चीख पड़ी और मुझसे चिपक गई.
उन्होंने मेरे गले पर काट लिया और अपने नाखून मेरे पीठ में गड़ा दिये और रोने लगी।

वे बोली- प्लीज … निकालो बाहर एक बार … बहुत लम्बा और मोटा है तुम्हारा … बहुत दर्द कर रहा है।
मगर मैं रुका नहीं, मैं उनको बिना रुके चोदने लगा.

वे सिर्फ ‘आह आह आह’ करके कराहे जा रही थी.

थोड़ी देर बाद जब वे नॉर्मल हुई तो गांड उठा कर लन्ड के ताल से ताल मिला रही थी।
और पूरे कमरे से फच्च … फ्चा … फच्च … की आवाज़ आ रही थी।

वे मजे से सीत्कारें भरने लगीं- आह … पूरा पेलो आह मजा आ रहा है. और चोदो … अन्दर तक लंड पेलो … मेरी बच्चेदानी में छेद कर दो … आह, फाड़ दो मेरी चूत को!
मैं भी जोश में आ गया- आह ये लो और अन्दर लो … आज के बाद तुम मेरी बीवी हो … आह अह!

रजनी- आह जान, ऐसे ही पेलो. मेरा जीवन धन्य हो गया … आज पहली बार इतनी देर तक चुदी हूँ. आह फाड़ डालो आज मेरी चूत को!

उनके मुंह से निकल रहा था- ऊँ … हहूँ … ओह … हाय रे … वॉव … हां … हो … ओहो … आये हाय और चोदो … बाप रे बाप … फाड़ डालो मेरी बुर … हूँ … ओ … हो … क्या मस्त लौड़ा है तेरा … ऊँहूँ … हो … आ … आहां … बड़ा मज़ा दे रही है। हाय जवानी तो बड़ी कुत्ती चीज है बुरचोदी!

फिर मैंने कहा- अब मैं तुझे घोड़ी बनाकर चोदूंगा, डॉगी स्टाइल में चोदूंगा।
वह बोली- जैसे चाहो, वैसे चोदो पर चोदो, रुको नहीं, चोदे जाओ।

मैंने उसे नीचे उतारा और एक गद्दा डाल कर उसे घोड़ी बना दिया।
तब मैंने लौड़ा पीछे से पेल दिया।

अब मैं अपने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़े हुए दनादन चोदने लगा; पूरा लौड़ा घुसा घुसा कर चोदने लगा।
वे भी चुदाई में पूरा साथ देने लगी।

मैं झटके पर झटके मारे जा रहा था और वे हर झटके का जबाब दे रही थी।

पन्द्रह मिनट में ही रजनी दो बार झड़ चुकी थी और मेरा अभी हुआ नहीं था.

लगभग 25 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं झड़ गया और रजनी के ऊपर लेट गया।

थोड़ी देर बाद रजनी उठी और कंडोम निकाल दिया.
वे लन्ड को मुंह में लेकर चूसने लगी।

मैं सोच रहा था कि जो अभी तक चूसने के लिए तैयार नहीं थी, वो अचानक रण्डी की तरह मेरा लंड चूस रही थी।
मैं एकदम मस्त था।

थोड़ी देर में मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और वे लन्ड के ऊपर बैठ कर चुदाने लगी।

मैं उनकी दोनों चूचियों को हाथ में लेकर दबा रहा था।
तभी रजनी तेज तेज लन्ड पर कूदने लगी- चोदो मुझे … आह … आह … उह … उह… हाय तौबा… मेरी चूत … और चोदो़ मुझे … फाड़ दो मेरी चूत को … साली बहुत परेशान करती है … हमेशा लंड मांगती रहती है … और चोदो मुझे. आज से मैं तुम्हारी रखैल बन कर रहूँगी. बस मुझे ऐसे ही चोदते रहना।

इंडियन लेडी सेक्स में मेरे लंड पर कूद रही थी और मुझे जहाँ तहां काट रही थी।
थोड़ी देर के लिए तो मुझे उनसे डर ही लगने लगा था।

फिर मैंने भी उनके मम्मों को मुख में भरा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।
इस पर वे और तेजी से मेरे लंड पर उछल कूद करने लगी और ‘आअ या ऊंह उम्म … आआआह … आआ ऊंह उम्म … आआआह … आआह … ऊंह उम्म … आआआह …’ कर रही थी।

दोस्तो, सच बताऊं तो मुझे मजा भी आ रहा था और थोड़ा डर भी लग रहा था।
जिस तरह से रजनी मेरे लंड पर कूद रही थी।
अब मैं उनकी नहीं, वे मेरी चुदाई कर रही थी।

करीब 15 मिनट बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगीं- आ अया … आ … ह हाए मम्मी … हाए मम्मी मर गई आ अया … आज मर गई आह बचा लो … मम्मी! … आंह आई आईआई … अहह … उम्म्म … हम्म्म!
ऐसे करती हुई झड़ गई और मेरे ऊपर लेट गई।

अब मैं नीचे से धीरे धीरे उसकी चुदाई करने लगा.
वे मेरे ऊपर लेटी हुई मुझे किस कर रही थी.

तभी मैंने उनको लेटाया और मैं उनके ऊपर आकर उनकी चुदाई करने लगा.

मेरा भी होने वाला था … तो मैं और तेजी तेजी झटके मारने लगा।
हर झटके पर वे पूरा सिहर जाती और मुख से आवाज़ आ रही थी- हाय मम्मी … मर गई. आह … आह … उम्ह!

करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा भी पानी निकल गया और मैं उनके साइड में उन्हें गले लगाकर लेट गया।

उसके बाद हमने लगभग आधे घंटे तक बातें की.
कि कैसे उसकी पहली चुदाई हुई थी जो उसके पति ने की थी.
और कितने लोग उन पर लाइन मार रहे थे।

इसी बीच मैंने उन्हें उनके किये वादे को याद दिलाया कि उन्हें अब मेरी भाभी को भी मेरे लंड के नीचे लाना है।

उन्होंने कहा- ठीक है, मैं तुम्हारी भाभी को भी तुमसे चुदवा दूँगी. लेकिन अगले तीन दिन तुम मेरी जमकर चुदाई करो और मेरी चूत को भोसड़ा बना दो.

मैंने खुशी से उसे चूम लिया।

मुझे अपनी भाभी के बारे में सोचकर एक अलग सी ही खुशी हो रही थी।

हो भी क्यों ना … मेरी भाभी तब्बू जैसी दिखती है … एकदम कड़क माल 34-32-36 की।

उस रात और अगले तीन दिन मैंने और रजनी ने खूब सेक्स किया।
तीन दिन के बाद रजनी के चेहरे पर एक अलग ही निखार था।

इसके बाद रजनी ने अपने वादे अनुसार भाभी की चूत का भी मुझसे भोसड़ा बनवाया और गांड मरवाई।

उसके बाद अब रजनी मेरे घर आकर मैं, भाभी और रजनी मिल कर खूब चुदाई करते।
फिर कभी जब भाभी मायके जाती तो मैं भी पहुँच जाता और तीनों घमासान चुदाई करते।

 

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दो दोस्तों ने अपनी अपनी अम्मी को चोदा- 1




हाय दोस्तो, मेरा नाम अल्ताफ है. मेरी उम्र 21 साल है.
मैं मिडल क्लास फैमिली से हूं. घर में मैं मुझसे बड़ा भाई, मेरी अम्मी और अब्बू हैं.
मेरा बड़ा भाई शहर में पढ़ाई करता है इसलिए वह वहीं पर रहता है.

मैं आज अपनी स्टोरी में बताऊंगा कि कैसे मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि उसने भी अपनी अम्मी को सैट करके चोद लिया है.
तो उसी की सलाह पर मैंने भी अपनी अम्मी को सैट करके चोद दिया.

यह स्टोरी पिछले साल की है.
मैं पढ़ाई में कमजोर था इसलिए मैंने पढ़ाई छोड़ दी और खेती में पापा का हाथ बंटाने लगा.
जब काम ज्यादा होता, तो अम्मी भी मदद करने आ जातीं.

मैं आपको मेरी अम्मी के बारे में बता देता हूँ. मेरी अम्मी की उम्र 45 साल है, लेकिन वे अब भी जवान ही लगती हैं.

मेरी अम्मी का नाम सुल्ताना है. उनका रंग एकदम गोरा है. उनका शरीर गदराया हुआ है.
चूचियों का साइज 36 इंच है, गांड बाहर को निकली हुई है.

पहले मैं अम्मी को बहुत अच्छी नजरों से देखता था, लेकिन जब से अशफाक ने मुझे पोर्न दिखाना शुरू किया, मैं बिगड़ने लगा.
अशफाक मेरा खास दोस्त है, हम एक साथ ही स्कूल में पढ़े थे.

अशफाक बहुत हरामी लड़का था. वह मुझसे कोई भी बात नहीं छुपाता था.

एक दिन उसने मुझे मां और बेटे की चुदाई की फिल्म दिखाई.
तो मैंने उससे पूछा- क्या ऐसा भी होता है कि कोई बेटा अपनी अम्मी को चोद सकता है?

अशफाक मुस्कुराने लगा और कहने लगा- होता है मेरी जान, बिल्कुल होता है.
मैंने कहा- ऐसा कैसे हो सकता है?

यह सुनकर अशफाक कहने लगा- मैंने खुद अपनी अम्मी को चोदा है.
मैंने हैरान होकर कहा- क्या बात कर रहा है यार … तूने ऐसा कैसे किया?

अशफाक ने कहा- मैं रोज मां बेटे की चुदाई वीडियो देखता हूं और सेक्स कहानी पढ़ता हूँ.
यह सुनकर मुझे भी अपनी अम्मी को चोदने का नशा चढ़ने लगा.

मैंने पूछा- लेकिन तूने यह सब कैसे किया?
अब अशफाक उसकी और उसकी अम्मी की चुदाई की कहानी बयान करने लगा.

वह कहने लगा कि मेरी अम्मी मुझसे बहुत प्यार करती हैं, मेरा बहुत ख्याल करती हैं. मैंने आज तक अम्मी से जो मांगा, मुझे मिल जाता रहा है.

मैं आप सबको बता दूँ कि अशफाक बहुत गरीब घर का लड़का था. उसके घर में किचन बाथरूम के अलावा एक ही कमरा था. अशफाक अपनी अम्मी अब्बू के पास ही सोता था.

उसने मुझे बताया:
मैं एक दिन अपनी अम्मी के पास सोया हुआ था.
रात के करीब एक बजे मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरा बाप अम्मी को चोद रहा है.
मैं चुपचाप यह सब देखने लगा. मैं उस वक्त 19 साल का हो गया था.
अपने सामने अम्मी अब्बू की चुदाई देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं रजाई में ही अपने लंड की मुट्ठी मारने लगा.
मेरी अम्मी उस वक्त पूरी नंगी थीं. मेरी अम्मी की बड़ी-बड़ी चूचियां लटक रही थीं.
मेरे बाप का लंड लगभग 7 इंच का था. उनका लौड़ा बहुत काला था.
उस वक्त अब्बू का लंड मेरी अम्मी की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था.
मैं अपनी रजाई में मुठ मारे जा रहा था और अपनी अम्मी का गोरा शरीर देखकर गर्म हो गया था.
अचानक से मेरी उत्तेजना चरम पर आ गई और मेरे लंड का पानी गिर गया.
बस तब से मैं मां और बेटे की पॉर्न देखने लगा और अपनी अम्मी के शरीर का दीवाना बन गया.
अब मैं रोज अपनी अम्मी अब्बू की चुदाई देखने लगा और मुठ मारने लगा.

अशफाक के दिमाग में उसकी अम्मी की जवानी घुस गई थी और अब वह अपनी अम्मी को चोदने की योजना बनाने लगा.

उसका बाप सुबह 5:00 बजे खेत चला जाता था और शाम को 7:00 बजे ही घर आता था.

सारा दिन अशफाक और उसकी अम्मी ही घर में रहते थे.
उसकी अम्मी अशफाक को बहुत सीधा बालक समझती थीं.
वे उसे अभी छोटा बच्चा ही समझती थीं.

इसी के चलते अशफाक की अम्मी उसके सामने ही कपड़े आदि बदल लिया करती थीं.
और कमरे के बाहर एक आड़ लगी हुई थी, जो कमरे में खुली हुई थी, वे उधर ही नंगी होकर नहाती थीं.

अशफाक यह सब देखकर ठरकी बन चुका था.
उसकी अम्मी अब भी उसे अपने हाथों से ही नहलाती थीं.

एक दिन उसकी अम्मी नहा रही थीं, अशफाक ने देखा तो वह अपनी अम्मी को अन्दर से देखकर मुठ मारने लगा.

उसकी अम्मी ने उसे आवाज लगाई- बेटा अशफाक … जरा इधर आना!
अशफाक ने झट से कहा- हां आ रहा हूं अम्मी!

वह खुशी खुशी अपनी अम्मी के पास आ गया.

अशफाक की अम्मी को उससे शर्म नहीं आती थी क्योंकि अशफाक उसकी अम्मी के लिए अभी बच्चा ही था.
उसकी अम्मी ने उससे कहा- बेटा सहन का पर्दा लगा दे. मैं लगाना भूल गई और नहाने बैठ गई.

अशफाक ने सहन का पर्दा डाल दिया.
उसकी अम्मी ने उस वक्त सिर्फ पेटीकोट ही पहना हुआ था और उसकी अम्मी की चूचियां बिल्कुल नंगी थीं.

यह देखकर अशफाक का लंड खड़ा हो गया और वह अम्मी से कहने लगा- अम्मी मुझे भी आपके साथ नहाना है.
उसकी अम्मी ने कहा- ठीक है आ जा बेटा.

अशफाक अपनी अम्मी के पास आकर खड़ा हो गया.
उसकी अम्मी ने कहा- चल बेटा, अपने कपड़े उतार दे.

अशफाक ने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए.
वह सिर्फ चड्डी पहने था और उसका खड़ा लंड चड्डी से उसकी अम्मी को साफ नजर आ रहा था.

अशफाक भोला होने का नाटक करने लगा और उसने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए अपनी अम्मी से कहा- अम्मी यह बहुत दर्द कर रहा है.

लंड देख कर उसकी अम्मी ने कहा- बेटा तू अब बड़ा हो गया है, इसलिए हो रहा है. थोड़ी देर में यह बैठ जाएगा और दर्द कम हो जाएगा.
अशफाक ने अपनी अम्मी से कहा- क्या मैं चड्डी उतार दूं?

अम्मी मुस्कुराईं और बोलीं- अब तू बड़ा हो गया … लेकिन दिमाग से अभी बच्चा ही है. उतार दे अपनी चड्डी.
अशफाक का प्लान सही जा रहा था.
उसने अम्मी से कहा- अब तुम ही उतार दो ना अम्मी!

उसकी अम्मी ने उसकी चड्डी उतार दी.
अशफाक का 8 इंच का लंड उसकी अम्मी के सामने अकड़ कर तन्ना रहा था.

उसकी अम्मी ने अपने बेटे के लंड को देखा और वे चौंक गईं.
उन्होंने कहा- बेटा कितना बड़ा है तेरा?

अशफाक खुश हो गया और कहने लगा- सच में अम्मी मेरा यह बड़ा है!
अम्मी ने कहा- हां बेटा, सच में.

अशफाक का लंड उसकी अम्मी के होंठों के बिल्कुल करीब था.
अशफाक ने नाटक करते हुए कहा- इसमें बहुत दर्द हो रहा है … कुछ करो ना अम्मी!

अम्मी ने कहा- बेटा कुछ देर रुक, दर्द कम हो जाएगा.
अशफाक ने कहा- अम्मी आप इसे हाथ लगाओ ना!

उसकी अम्मी ने डरते हुए अपने बेटे का लंड पकड़ लिया.
अशफाक ने कहा- आह अम्मी इस पर थोड़ा हाथ फेरो न!

उसकी अम्मी उसके लंड पर हाथ फेरने लगीं.
अशफाक आंख बंद करके और सर ऊपर उठा कर मजे लेने लगा.

उसकी अम्मी ने कुछ देर के बाद अपना हाथ हटा दिया, तो अशफाक झट से अम्मी से बोला- हाथ फेरती रहो अम्मी … दर्द कम हो रहा है.
उसकी अम्मी ने उसका लंड फिर से पकड़ लिया और लंड को आगे पीछे करने लगीं.

अशफाक अपनी अम्मी से कह रहा था कि करते रहो अम्मी … आह बड़ा सुकून मिल रहा है मुझे.
उसकी अम्मी ने कहा- बेटा अपने हाथ से हिला ले, पानी निकल जाने पर दर्द कम हो जाएगा.

अशफाक रोने के अंदाज में कहने लगा- अम्मी तुम ही करो न!
उसकी अम्मी ने कहा- लेकिन तू अपनी आंखें तो खोल … और मुझे देख. इससे तेरा पानी जल्दी निकल जाएगा.

अशफाक यह सुनते ही खुश हो गया और वह आंखें खोल कर अपनी अम्मी की चूचियों को देखने लगा. वह साथ ही रोने का नाटक भी कर रहा था.
उसकी अम्मी कह रही थीं- बेटा फिक्र मत करो, दर्द कम हो जाएगा तुम मेरी छातियों को देखो. इससे तुम्हारा पानी जल्दी बाहर निकल जाएगा … और दर्द खत्म हो जाएगा. अब तुम जवान हो गए हो, इसलिए यह सब हो रहा है. तुम मेरी छातियों को देखते रहो, तुम्हें अच्छा लगेगा.

अशफाक ने रोने के अंदाज में कहा- अम्मी तुम्हारी छातियों कितनी बड़ी हैं और कितनी नर्म नर्म दिख रही हैं.
उसकी अम्मी ने कहा- हां जब तू छोटा था, तो इनको चूस चूस कर पीता था.

अशफाक अम्मी से कहने लगा- अम्मी क्या मैं इन्हें छू सकता हूं?
अम्मी ने कहा- बिल्कुल मेरे बच्चे … क्यों नहीं!

यह सुनते ही अशफाक और खुश हो गया.
वह अपनी अम्मी के मम्मों को हाथों से दबाने लगा और कहने लगा- अम्मी कितने अच्छे दूध हैं आपके … कितने नर्म नर्म है अम्मी … क्या मैं इन्हें पी भी सकता हूं?
उसकी अम्मी ने कहा- हां पी ले मेरे बच्चे.

फिर वह अपनी अम्मी की चूचियों को बच्चों की तरह चूसने लगा.
कुछ देर बाद उसकी अम्मी ने कहा- बेटा, तेरा पानी तो निकल ही नहीं रहा है, चलो मैं अब ऐसा करती हूं कि इसे अपने मुँह में ले लेती हूँ और चूसती हूँ. शायद पानी निकल जाए और तुम्हारा दर्द कम हो जाए. चलो अब खड़े हो जाओ.

अशफाक खड़ा हो गया.
उसकी अम्मी ने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं.

अशफाक का प्लान सही काम कर गया.
अब वह अपनी अम्मी का मुँह चोदने लगा.

उसकी अम्मी यह सब उसके दर्द के लिए कर रही थीं लेकिन अशफाक बड़ा तो नंबर एक का हरामी था.
उसे तो अपनी अम्मी को चोदना था.
जैसे मॉम सन पोर्न में होता है.

वह अपनी अम्मी से कहने लगा- आह … बहुत अच्छा लग रहा है अम्मी.

अशफाक अपनी अम्मी के मुँह में लंड घुसा रहा था.

फिर कुछ देर बाद उसकी अम्मी ने उसका लंड मुँह से निकाल दिया तो अशफाक फिर से रोने का नाटक करने लगा- अम्मी, मेरा दर्द ठीक नहीं हुआ है.
उसकी अम्मी कहने लगीं- बेटा बहुत वक्त हो रहा है. मेरे सारे काम बाकी हैं. इसे अपने हाथों से हिला ले, यह ठीक हो जाएगा.

वह फिर रोने का नाटक करने लगा और कहने लगा- नहीं अम्मी मुझको यह सब नहीं आता. प्लीज प्लीज आप करो न!
उसकी अम्मी को उस पर रहम आ गया और वे कहने लगीं- ठीक है मेरे लाल … तू पहले रोना बंद कर. मैं कुछ करती हूं … लेकिन तुम यह बात किसी को नहीं बताना!

फिर उसकी अम्मी ने अपना पेटीकोट उतार दिया. अब उसकी अम्मी उसके सामने बिल्कुल नंगी थीं.
अशफाक के मन में लड्डू फूटने लगे, उसका लंड और फड़फड़ाने लगा.

अशफाक अपनी अम्मी को नंगी देखकर बहुत खुश था; उसका सपना सच होने जा रहा था.

उसकी अम्मी ने अशफाक से कहा- बेटा किचन में जा और सरसों का तेल लेकर आ.

वह समझ गया कि अम्मी अब उससे चुदने वाली हैं.
वह दौड़ कर अन्दर गया और झट से सरसों का तेल लेकर आ गया.

उसकी अम्मी ने कहा- चलो अब सरसों का तेल अपनी लूली पर लगाओ.
उसकी अम्मी लंड कहने में अब भी शर्मा रही थीं लेकिन वे अपने बेटे के लिए यह सब कर रही थीं.

अशफाक ने अपने लंड पर सरसों का तेल लगाया और भोला बनकर पूछने लगा- अम्मी अब क्या करना है?
उसकी अम्मी उसके आगे कुतिया के जैसे झुक गईं.

अशफाक की योजना अब अपने शिखर पर थी.
उसकी अम्मी ने कहा- बेटा इधर आओ.

अपनी अम्मी की गदराई हुई गांड देखकर अशफाक का लंड झटके खाने लगा.
उसका लंड सरसों के तेल में लथपथ था.

अब अशफाक का सपना पूरा होने वाला था.
अशफाक अपनी अम्मी के पास गया और बोला- हां कहो अम्मी, अब क्या करूं?
अम्मी ने कहा- बेटा मेरी गांड के दोनों फलकों को थोड़ा फैलाओ.

वैसे अशफाक को सब पता था लेकिन वह तो नाटक कर रहा था.
उसने अपनी अम्मी की गांड के दोनों फलकों को खोला. वह अपनी अम्मी की चूत का दीदार करने लगा.

अपनी अम्मी की फूली हुई चूत देखकर वह और ज्यादा उत्तेजित हो गया और अपने लंड को दबाने लगा.
फिर उसने अपनी अम्मी से पूछा- अम्मी अब क्या करूं?

उसकी अम्मी ने कहा- बेटा जो नीचे वाला छेद दिख रहा है न … वह मेरी योनि का छेद है. उसमें अपनी लूली को डालो.
अशफाक ने झट से अपनी अम्मी की चूत पर अपना लंड रख दिया.

अम्मी अपने बेटे के गर्म लंड के अहसास से चुदास से भर उठीं और कहने लगीं- बेटा आराम आराम से पूरा अन्दर तक घुसा दे.

अशफाक तो यही चाहता था.
वह धीरे-धीरे अपनी अम्मी की चूत में लंड घुसाने लगा और पूरा लंड अन्दर डाल दिया.

उसने नाटक करते हुए पूछा- अम्मी अब क्या करना है?
अम्मी ने आंखों में वासना भरते हुए कहा- आह बेटा अब अपनी लूली को अन्दर बाहर करो.

अशफाक अपनी अम्मी की चूत में शॉट मारने लगा.

उसकी अम्मी भी सिसकारियां लेने लगीं- आह आह आह उम उम आह्ह्ह!

अशफाक अम्मी से कहने लगा- आह अम्मी … आपकी चूत बड़ा मजा दे रही है … यह बहुत मजा आ रहा है.
उसकी अम्मी भी चूत शब्द सुनकर और भी ज्यादा गर्म हो गई थीं.

अम्मी कहने लगीं- आह बेटा … तेरा लंड भी बड़ा मस्त चुदाई कर रहा है … आह चोदते रहो बेटा अपनी अम्मी की चूत का भोसड़ा बना दे … आह जब तक तेरे लौड़े का पानी ना निकल जाए … तब तक जोर जोर से चोदो मुझे … आआह आह अह्ह्ह.

अशफाक ने अम्मी की कमर पकड़ कर ताबड़तोड़ धकापेल चुदाई की और दस मिनट तक वह अपनी अम्मी को चोदता रहा.
आखिर में उसने अपनी अम्मी की चूत में ही अपने लंड का पानी छोड़ दिया.

उसकी अम्मी भी दो बार झड़ चुकी थीं.

फिर अशफाक ने अम्मी से कहा- थैंक्यू अम्मी … आपने मेरा दर्द समझा और मुझे सुकून दिया.
उसकी अम्मी ने कहा- कोई बात नहीं मेरे बच्चे … मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं. मैं तुझे तकलीफ में नहीं देख सकती. लेकिन तू यह बात किसी से नहीं कहना.

अशफाक ने यहीं पर अपनी स्टोरी खत्म कर दी.

उसकी सेक्स कहानी सुनकर मेरा तो लंड खड़ा हो गया था.
वह मुझसे पूछने लगा- तूने अपनी अम्मी को नहीं चोदा?
मैंने कहा- नहीं यार.

वह कहने लगा- तेरी अम्मी तो बहुत सेक्सी हैं अल्ताफ.
उसने मुझे कुछ प्लान बताए कि अम्मी को कैसे चोदा जा सकता है.

कुछ देर बाद मैं अपने घर आ गया.

अब मैं अपनी अम्मी को चोदने के ख्वाब देखने लगा.
मेरी अम्मी भी मुझे बहुत प्यार करती थीं.
 

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दो दोस्तों ने अपनी अपनी अम्मी को चोदा- 2



कहानी के पहले भाग

में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरे दोस्त अशफाक ने मुझे अपनी अम्मी की चुदाई की कहानी सुनाई थी.

जिस वजह से मैं भी अपनी मां चोदने को लालायित हो उठा था.

अब आगे:

एक दिन मैं मॉम सन पोर्न देख रहा था, सुबह के 8:00 बज रहे थे.

तभी अम्मी ने आवाज लगाई- अल्ताफ बेटा अल्ताफ … इधर आओ!
मैंने कहा- क्या हुआ अम्मी?

अम्मी ने कहा- बेटा, भाई की तबीयत खराब है, अभी खबर मिली है. तेरे पापा शहर जा रहे हैं. उनके खेत का कुछ काम बाकी है … चलो हम दोनों खेत चलते हैं. तेरे पापा को शहर भेज देती हूँ, वे भाई के पास जाकर उसकी तबियत का देख लेंगे.
मैंने कहा- ठीक है अम्मी.

फिर मैं कपड़े पहन कर तैयार हो गया.
अम्मी ने घर को ताला लगाया और हम दोनों खेत में आ गए.

उधर पापा घर से निकल गए थे.
अम्मी और मैं खेत में आकर उधर का कुछ बचा हुआ काम करने लगे.

हमारा खेत जंगल के करीब था और हमारे खेत के करीब कोई अन्य खेत नहीं थे.
खेत से लगा हुआ घना जंगल था.

सुबह से ही हल्की हल्की बारिश हो रही थी तो मिट्टी में पैर धंस रहे थे.

हमारी फसल अच्छी बढ़ गई थी.
हमारे खेत में एक छोटी सी झोपड़ी भी थी, जिसमें पापा रात को आराम करते थे.
उसमें एक खटिया थी, फसल बड़ी होने पर पापा रात भर वहीं सोते थे ताकि जानवर फसल को नुकसान ना पहुंचाएं.

पापा पिछले कुछ दिनों से वहीं सो रहे थे.
काम खत्म करने के बाद मैं और अम्मी उसी झोपड़ी में आ गए.

बारिश थोड़ी तेज हो गई थी. अम्मी और मेरे कपड़े पहले ही गीले हो चुके थे.
जल्दी जल्दी में अम्मी अपने कपड़े साथ लाना भूल गई थीं.

हम दोनों के कपड़े बहुत ज्यादा गीले हो चुके थे.
अम्मी ने कहा- बेटा अल्ताफ, अपने कपड़े उतार दो, वर्ना सर्दी हो जाएगी और सर भी पौंछ लो.

वहां अब्बू का गमछा लटका हुआ था.
मैंने अम्मी से कहा- लेकिन अम्मी मैं अपने कपड़े साथ में नहीं लाया?

अम्मी ने कहा- अरे तो सारे कपड़े उतार दो न … और गमछा से जिस्म पौंछ लो.
मैंने कहा- आप भी तो गीली हो चुकी हैं, आप कैसे करेंगी?
अम्मी ने कहा- मैं भी कपड़े उतार रही हूं बेटा.

यह सुनकर मैं अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हुआ.
मैं सोचने लगा कि आज अम्मी का गदराया हुआ शरीर देखने को मिलेगा.

यही सोच कर मेरा लंड टाइट होने लगा; मुझे नशा सा होने लगा.

अम्मी ने कहा- क्या सोच रहा है अल्ताफ … उतार दे ना अपने कपड़े!

मुझे अब अशफाक की तरकीब याद आने लगी.

मैं अपने कपड़े उतारने लगा.
कुछ ही पलों बाद मैं सिर्फ चड्डी में ही रह गया था.
चड्डी में मेरा लंड बिल्कुल अकड़ा हुआ खड़ा था.

उधर अम्मी भी अपने कपड़े उतार रही थीं.
मैं अम्मी को आंखें चुरा कर देख रहा था.

पहले अम्मी ने अपनी साड़ी उतार दी और मुझसे कहा- अल्ताफ यह साड़ी टांग दो.

मेरी चड्डी भी बहुत गीली थी.
अम्मी ने कहा- अल्ताफ बेटा तुम्हारी चड्डी बहुत गीली हो चुकी है, इसे भी उतार दो वर्ना खुजली हो सकती है.

यह सुनते ही मुझे अशफाक की याद आ गई.
तभी अम्मी ने कहा- क्या सोच रहा है … शर्मा मत बेटा, मैं तेरी अम्मी हूं. मेरे सामने कैसी शर्म! उतार दे बेटा अपनी चड्डी!

मैंने हिम्मत करके अपनी चड्डी नीचे खींच दी.
मेरा तना हुआ लंड अम्मी के सामने आ गया लेकिन अम्मी ने कुछ ना कहा.

अम्मी का ब्लाउज और पेटीकोट भी भीगा हुआ था.
मैं नंगा चारपाई पर बैठ गया और अपने लंड को हाथों से छुपाने लगा.

अम्मी ने कहा- मुझे ब्लाउज और पेटीकोट भी उतारना ही पड़ेगा, नहीं तो खुजली हो सकती है. वैसे भी हमारे अलावा यहां कोई नहीं है और बारिश में कोई आएगा भी नहीं … और तू तो मेरा बेटा है, तुझसे कैसी शर्म!
और अम्मी अपना ब्लाउज उतारने लगीं.

मेरा लंड और खड़ा होने लगा.

अम्मी ने अपना ब्लाउज उतारकर मेरी तरफ फेंकते हुए कहा- ले इसे भी लटका दे बेटा!

अब अम्मी ने अपना पेटीकोट भी उतार दिया और मेरी तरफ फेंक दिया.
उनका पेटीकोट बहुत भीगा हुआ था. अम्मी अब सिर्फ ब्रा और पैंटी ही पहनी थीं.

मैं अम्मी का कामुक शरीर घूर रहा था.
अम्मी गोरा बदन मुझे मदहोश कर रहा था.

अब अम्मी ब्रा उतारने की कोशिश कर रही थीं लेकिन हुक नहीं खुल रहा था.
उन्होंने मुझे आवाज लगाई- बेटा जरा मेरी ब्रा खोल दो.

मैं अपना लंड हाथों से छुपाता हुआ चलने लगा.
यह देखकर अम्मी ने कहा- क्यों छुपा रहा है इसे हाथों से … मैं तेरी अम्मी हूं बेटा मुझसे क्या शर्माना. अपने हाथों को हटाओ और जल्दी मेरी ब्रा खोलो.

मेरा लंड बहुत तना हुआ था.
मैं अम्मी की ब्रा खोलने लगा.

मेरा लंड अम्मी की गांड से टच हो रहा था.

मैंने अम्मी की ब्रा खोल दी.
अम्मी की बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम से आजाद हो गईं.

तब अम्मी ने मुझसे ब्रा सुखाने के लिए कहा.
अम्मी की चूचियां एकदम टाइट थीं … मेरा मन कर रहा था कि उन्हें मुँह में भर लूं. लेकिन मैं कंट्रोल कर रहा था.

अम्मी ने अपने पूरे बाल खोल दिए.

अब अम्मी सिर्फ पैंटी में ही थी.
पैंटी भी बहुत शॉर्ट थी, जिससे अम्मी की गांड मुझे साफ नजर आ रही थी. उनकी सिर्फ चुत ढकी हुई थी.

अम्मी की गांड भी बहुत गोरी और मोटी थी.
मेरा जी कर रहा था कि मैं अम्मी की गांड पर टूट पड़ूँ.

अम्मी अपना शरीर पौंछने लगीं.
मेरा लंड तो सलामी दे रहा था.

इसी सबमें कब शाम हो गई, हमें पता ही नहीं चला. हम दोनों को साथ में लाया हुआ खाना खाना था और आज की रात खेत में ही सोना था.
बहुत अंधेरा हो चुका था, बारिश भी अच्छी खासी शुरू हो गई थी.

अम्मी ने कहा- बेटा, अपने मोबाइल की टॉर्च तो जला दे.
मैंने टॉर्च लगा दी. अम्मी का नंगा शरीर मुझे नजर आ रहा था.

मैं भी अम्मी को नजर आ रहा था.

फिर हम नंगे बैठकर ही खाना खाने लगे.
हमारे कपड़े अभी तक सूखे नहीं थे.

हम दोनों ने खाना खा लिया.

अम्मी ने कहा- चलो ऐसे ही सो जाते हैं. कपड़े तो सूखेंगे नहीं.
हमारी झोपड़ी में एक ही चारपाई थी.

अम्मी ने कहा- चलो अपन दोनों इसी चारपाई पर सो जाते हैं.
मैंने कहा- अम्मी, मैं नीचे सो जाता हूं.

अम्मी ने कहा- नहीं बेटा, कोई कीड़ा बिच्छू ना काट ले तुम्हें! ऊपर ही सो जाओ मेरे साथ … और यहां रजाई भी एक ही है. ठंडी भी लग रही है. ऊपर से हम दोनों नंगे हैं, बुखार हो जाएगा.

चारपाई थोड़ी बड़ी थी, उस पर दो लोग सो सकते थे.
शायद अब्बू अपनी किसी सैटिंग को खेत में बुला कर उसके साथ चुदाई की मस्ती करते थे.

मैं अम्मी के पास लेट गया.
अम्मी ने मेरे लंड की तरफ देखा और कहा- कब से खड़ा है?
मैंने कुछ नहीं कहा.

अम्मी ने कहा- कोई बात नहीं, तू भी तो एक मर्द है. मुझे नंगी देखकर खड़ा हो गया शायद … तू भी क्या कर सकता है, चल सो जा.

मैं सोने का नाटक करने लगा.
मुझे कहां नींद आने वाली थी.

मेरी अम्मी मेरे साथ में नंगी लेटी थीं और मेरा लंड खड़ा हुआ था.
बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी. हमारा खेत जंगल में होने के कारण ठंड भी लग रही थी.

कुछ देर बाद अम्मी सो गईं. मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी.
अम्मी की नंगी चूचियां मेरे सामने थीं, मुझे कैसे नींद आती.

फिर मुझे अशफाक और उसकी अम्मी की चुदाई की कहानी याद आने लगी.
मैं तो बेहाल होने लगा; मेरा लंड झटके मारने लगा.

मैंने मोबाइल अपने हाथ में लिया और उसकी टॉर्च से अम्मी के शरीर को देखने लगा.
पहले अम्मी की चूचियों को देखा, फिर नाभि को देखने लगा.

अम्मी की नाभि बहुत गहरी थी. मेरा दिल कर रहा था कि चूम लूं लेकिन डर भी लग रहा था.

फिर मैं अम्मी की जांघों को देखने लगा.
क्या मुलायम जांघें थी मक्खन की तरह सफेद.

मुझसे अब जरा भी कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया. फिर एक हाथ अम्मी के बूब्स पर रखा और सहलाने लगा.
क्या मुलायम अहसास हो रहा था.

फिर मैं अम्मी से चिपक कर सोने लगा. मैंने अम्मी का एक दूध मुँह में ले लिया और पीने लगा.
मैं अब अपना आपा खो चुका था.

मुझे जन्नत का मज़ा आने लगा था.
मैं अपनी अम्मी की चूचियों को पी रहा था.
अम्मी बहुत थकी हुई थीं इसलिए बहुत गहरी नींद में थीं.

मैंने अम्मी के नंगे शरीर से अपना नंगा शरीर चिपका दिया और हिम्मत करके अम्मी की पैंटी में हाथ डाल दिया.

अम्मी की चुत के बाल कटे हुए थे.
मेरा हाथ अम्मी की चुत के दाने को महसूस कर रहा था.
उनकी चुत फूली हुई थी.

मैं अम्मी की चुत सहलाने लगा.
साथ में मैं अम्मी की चूचियां भी चूस रहा था और चुत को सहला रहा था.

अचानक से अम्मी थोड़ा हिलीं, मैं डर गया और चुत से हाथ निकाल दिया.

मैं सोने का नाटक करने लगा.

फिर अम्मी मेरी तरफ पीठ करके सोने लगीं.
मैंने ठान लिया कि आज अम्मी को चोद कर ही रहूंगा चाहे कुछ भी हो जाए.
यह नहीं मौका फिर नहीं मिलेगा.

मैं कुछ देर रुका.
फिर मैं अम्मी की गांड सहलाने लगा.
बहुत मुलायम गांड थी.

मैंने धीरे धीरे अम्मी की पैंटी उतार दी.
अब अम्मी पूरी नंगी हो गई थीं.
अम्मी की बाहर निकली हुई गांड मेरे लंड से टच हो रही थी.

मैंने अम्मी की गांड पर लंड रगड़ना शुरू किया, मुझे बहुत मजा आ रहा था.

मैं उनकी पैंटी सूंघ रहा था, उनकी गांड पर लंड पर रख रहा था.
मैंने अपनी अम्मी की गांड की फांक खोली और टॉर्च से अम्मी की चुत देखने लगा.

मस्त नजारा था.
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अम्मी की चुत पर मुँह रख दिया और चाटने लगा.

अम्मी सिसकारियां लेने लगीं और कहने लगीं- आह नूर और चाटो मेरी चुत को.

नूर मेरे अब्बू का नाम था.

अम्मी नींद में थीं, उन्हें लगा कि अब्बू उनकी चुत चाट रहे हैं.

मैं अम्मी की चुत को कुत्तों की तरह चाटने लगा.
वे कामुक सिसकारियां लेने लगीं.

अम्मी की चुत से रस बहने लगा.

मैंने देर ना करते हुए अपना 6 इंच का लौड़ा अम्मी की फूली हुई चुत पर रख दिया.
अम्मी नींद में बड़बड़ा रही थीं- चोदो मुझे चोदो नूर … बहुत दिनों से मुझे चोदा नहीं तुमने … डाल दो मेरी चुत में अपना लंड.

मैंने अम्मी की चुत में अपना लंड डाल दिया.
अम्मी की चीख निकल गई- आह आराम से डालो नूर … आज तेरे लौड़े को क्या हो गया है!

अम्मी की चुत काफी टाइट थी. मेरा लंड तो मौज कर रहा था.
अम्मी कहने लगीं- नूर मेरी चूचियों को मसल डालो.

मैं अम्मी की चूचियों को मसलने लगा, तो वे मादक सिसकारियां भरने लगीं- आह … आह उम … और जोर से चोदो नूर … मेरी चुत को फाड़ दो.

शायद अम्मी नींद में यह भूल गई थीं कि आज वे मेरे साथ सोई हुई हैं और मैं उन्हें चोद रहा हूं.
फिर मैं दस मिनट के बाद अम्मी की चुत में झड़ गया और मेरे लंड को आराम मिल गया.

अम्मी भी झड़ चुकी थीं.
फिर मैं अम्मी से चिपक कर सो गया.

सुबह जब अम्मी जागीं, तो अम्मी की पैंटी उनकी चुत पर नहीं थी.

अम्मी ने मुझसे पूछा- अल्ताफ क्या रात को तुमने मेरी पैंटी उतारी थी?
मैंने कहा- नहीं अम्मी, मैं भला क्यों उतारूँगा आपकी पैंटी, आप रात में बहुत बड़बड़ा रही थीं.

अम्मी ने कहा- क्या कह रही थी मैं?
मैंने कहा- मैं कह नहीं कर सकता.

अम्मी ने कहा- बताओ बेटा.
मैं कहने लगा- अम्मी, आप गंदी गंदी बातें कह रही थीं.

अम्मी ने कहा- क्या क्या कहा मैंने?
मैं कहने लगा- बता दूँ?
अम्मी बोलीं- हां बताओ.

मैं कहने लगा कि अम्मी आपने पहले अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी और पूरी नंगी हो गईं. फिर आपने मेरा लंड पकड़ लिया और उस पर मालिश करने लगीं, जिससे मेरा लंड टाइट हो गया. मैं आपको रोकता, लेकिन मैंने सोचा आप मुझ पर गुस्सा होंगी तो मैंने आपको नहीं रोका.

फिर आपने मेरा लंड अपनी चुत में घुसवा लिया.
फिर मैं भी गर्म हो गया और आपको चोदने लगा.
आपने मेरे हाथों को अपनी चूचियों पर रगड़ा.

हॉट मॅाम फक स्टोरी सुनकर अम्मी परेशान हो गईं और कहने लगीं- बेटा, प्लीज यह बात किसी को मत बताना. चलो अब जल्दी अपने कपड़े पहन लो.

मैंने कहा- अम्मी जब से मैंने आपको चोदा है, मेरा लंड बैठ ही नहीं रहा है. प्लीज एक बार और चोद लेने दो ना! कल रात आपने मुझसे जबरदस्ती चुदवाया था, इसलिए अब मेरा लंड मांग कर रहा है. प्लीज अम्मी एक बार करने दो.
अम्मी नंगी थीं.

उन्होंने कहा- ठीक है बेटा, लेकिन किसी को मत बताना.
अम्मी घोड़ी बन गईं और उन्होंने गांड हिलाते हुए कहा- ले जल्दी से चोद ले मुझे. वैसे तेरे लंड से मुझे रात को भी बड़ा आराम मिला था. तेरे अब्बू से भी बुर चुदवाने में इतना मजा नहीं मिलता है. रात में भी मुझे अहसास था कि मैं तेरे अब्बू से नहीं बल्कि तुझसे ही चुदवा रही हूँ. पर एकदम से कैसे खुल जाती, इसलिए तेरे अब्बू के नाम को लेकर तुझसे चुद रही थी.

मैंने फिर से अम्मी को चोदना शुरू कर दिया.

अम्मी सिसकारियां लेने लगीं- आह्ह्ह आआह … तू तो बड़ा मस्त चोदता है रे बेटा … कहां से सीखा यह सब?
मैंने कहा- मैं कभी-कभी पॉर्न देख लेता हूं अम्मी … वहीं से सीखा है.

फिर मैंने अम्मी की चुत में अपना पानी छोड़ दिया और हम दोनों खेत का काम करने लगे.

हम दोनों जितने दिन खेत में रहे, मैं अम्मी को चोदता रहा.
अब तो दिन में खुले खेत में भी मैं अम्मी की ले लेता था.
 

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बरसात में आंटी की चूत चुदाई का मजा




फ्रेंड्स, मेरा नाम विजय है. मैं केरल का रहने वाला हूँ. मेरी हाइट अच्छी खासी लंबी है और मेरा रंग भी गोरा है. दिखने अच्छा हट्टा-कट्टा 21 साल का सांड जैसा मर्द हूँ.

यह कहानी आज से दो साल पहले की उस वक्त की है जब मैं अपनी आंटी के यहां उनके घर ऐसे ही गया था.

मेरी आंटी दिखने में काफ़ी अच्छी हैं.
उनके बूब्स व गांड एकदम कड़क हैं.

उन दिनों अंकल भी अपने काम के चलते सारे दिन बाहर रहते थे.

अंकल का पहली बीवी से एक बेटा था, वह अपनी बीवी के साथ अलग रहता था.
अंकल ने नई आंटी से शादी करके उन्हें अपने साथ रख तो लिया था पर वे आंटी की सही से चुदाई नहीं कर पाते थे इसलिए आंटी शायद लंड की भूखी थीं.

यह बात मुझे उस वक्त पता चली थी जब मैंने उन्हें अपने लौड़े से ताबड़तोड़ चोदा था.

उस दिन मैं आंटी के घर गया हुआ था.
आंटी और मैं उनके बेडरूम में बातें कर रहे थे.
उनके घर के हॉल में कुछ सामान रखा हुआ था, आंटी मुझे अपने बेडरूम में ले गई थीं.

हम दोनों इधर उधर की समय पास वाली बातें करने लगे थे.

उसी दौरान मैं कुछ जोक सुनाने लगा और आंटी मेरे चुटकुले सुन कर हंस रही थीं.
मैं कसम से सच कह रहा हूँ कि उस समय तक मेरे मन में आंटी के लिए कोई ग़लत अहसास नहीं था.

उस दिन आंटी ने लाल रंग की एक प्लेन साड़ी पहनी हुई थी और कसे हुए बड़े गले के ब्लाउज से उनके बूब्स की दरार साफ दिख रही थी.

बातों ही बातों में आंटी ने मुझसे कहा- तुम जरा रुकना, कोई आए जाए तो बता देना. तब तक मैं नहा कर आती हूँ.
मैंने हामी भर दी और बैठ कर टीवी देखने लगा.

आंटी अपने एक पेटीकोट में अन्दर नहा रही होंगी.
उसी वक्त वे नहाने के बाद बाथरूम में कपड़े पहन रही थीं कि अचानक से मुझे बहुत जोर से सुसू आई और मुझे बाथरूम जाना था.

मैंने उनसे पूछा- आंटी आपका नहाना हो गया हो, तो आप बाहर आ जाओ. मुझे बहुत जोर से सुसू लगी है.
आंटी ने कह दिया कि आ जाओ, मैं नहा चुकी हूँ.

मैंने बाथरूम के दरवाजे को धक्का दिया तो वह खुला हुआ ही था.

दरवाजा खोला तो देखा कि मेरे सामने आंटी सिर्फ़ पेटीकोट में थीं.
उन्होंने अपने मम्मों तक पेटीकोट को चढ़ा रखा था.

वे मुझे देख हल्की सी रुकी, फिर निकल कर मुस्कुराती हुई बेडरूम में चली गईं.
मैं बाथरूम में दरवाजा बंद करके सुसू करने लगा.

मैं अपने हाथ में लंड पकड़े हुए आंखें बंद करके अपने मन में आंटी की उस छवि को याद करने लगा, जिसमें वे एक पेटोकोट में अपने दूध कसे हुई खड़ी थीं.
कसम से उनके आधे दूध उस गीले से पेटीकोट में क्या मस्त दिख रहे थे … मैं तो बस गनगना ही गया था.

मेरे मन से अब आंटी एक चोदने लायक माल नजर आने लगी थीं.
बस अब तो उनके शेष शरीर की छवि दिमाग में उभरने लगी थी.

उनके गीले पेटीकोट में कसी हुई बिना चड्डी की गांड तो मानो मुझे अपनी ओर खींच रही थी.

हाथ में पकड़ा हुआ लंड पेशाब की धार खत्म कर चुका था और लंड ने कड़क होना शुरू कर दिया था.
अचानक से लंड की इस हरकत को देख कर मुझे अच्छा लगने लगा और मैं लंड हिलाने लगा.

कुछ ही देर में मेरी बंद आंखों के सामने चाची की मादक और कामुक काया थी.

मैं अपने लौड़े को तेज तेज हिला रहा था.
जल्दी ही लंड से वीर्य की पिचकारियां निकल गईं और मैं फ्रेश होकर बेडरूम में आ गया.

तब तक आंटी अपने कपड़े पहन चुकी थीं.

अब हम दोनों बैठ कर टीवी देख रहे थे.
मैं टीवी के सामने था और आंटी पीछे को बैठी थीं.

अचानक से न जाने मेरे दिमाग में क्या आया कि मैंने घूम कर पीछे देखा.
उधर देखा तो आंटी अपनी चूत खुजा रही थीं.
उन्होंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी.
उनकी साड़ी घुटनों से ऊपर तक उठी हुई थी.

मुझे अपनी तरफ देखता पाकर उन्होंने अपना हाथ पेटीकोट से बाहर निकाल लिया.
मैंने टीवी बंद किया और कहा- अच्छा, अब मैं चलता हूँ आंटी जी. अंकल भी आते ही होंगे.

तभी अंकल का कॉल आ गया.
आंटी ने मुझे रुकने का इशारा किया और वे स्पीकर पर अंकल से बात करने लगीं.

उन्होंने बात की तो वे कह रहे थे कि उनको अचानक काम आ गया है और वे दो दिन बाद घर आएंगे.

आंटी ने कहा- मैं क्या घर पर अकेली रहूँगी?
इस पर अंकल ने आंटी से कहा कि या तो तुम बेटे बहू के यहां चली जाओ … या अकेली रह लो.

मैंने आंटी को फोन पर बात करते हुए देखा, तो उनसे कहा- आंटी, मैं जा रहा हूँ.
तभी आंटी ने फोन पर बात करते हुए ही मुझसे कहा- अरे विजय, तुम कहां जा रहे हो, बैठो न!

अंकल ने यह सुन लिया और कहा कि क्या विजय घर आया है. अरे तो विजय को ही घर पर रोक लो न. मेरी उससे बात करवाओ.
आंटी ने कहा कि फोन स्पीकर पर ही है.

अंकल ने मुझसे कहा- विजय, यदि तुमको कुछ काम ना हो बेटा, तो क्या तुम दो दिन अपनी आंटी के पास रुक सकते हो?
तो मैंने कहा- हां ठीक है अंकल, मैं यहीं रुक जाता हूँ.

वैसे भी मैं आज आंटी को चोदने का मूड बना चुका था और यह सुनहरा मौका छोड़ना नहीं चाहता था.

अंकल ने मेरी सहमति सुनते ही आंटी से कहा- चलो ठीक है मधु, अब तो कोई समस्या नहीं है?
आंटी ने कहा- नहीं अब कोई दिक्कत नहीं है. अच्छा है विजय यहां रहेगा, तो मेरा मन भी बहल जाएगा.

शायद आंटी भी इस बात को समझ गई थीं कि इस सुनहरे मौके का फायदा उठाया जा सकता है.

अब आंटी ने कॉल कट किया और एक मस्त अंगड़ाई लेती हुई मुझसे बोलीं- चलो अब शुरू करते हैं.

मैंने कहा- क्या?
आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा- अरे यार खाना नहीं खाना है क्या? वही शुरू करते हैं.

हम दोनों ने खाना खाया और उस समय भी आंटी ने मुझे अपने दूध दिखाते हुए काफी गर्म किया.
फिर हम दोनों बेडरूम में आ गए और बेड पर बैठ गए.

उस वक्त तक मुझे काफी कुछ समझ में आ गया था कि आज आंटी को चूत में लंड लेने की खुजली है और मेरे लंड को काम मिलने वाला है.

आंटी ने अपनी अल्मारी से निकाल कर मुझे एक रेडियो दिया और बोलीं- इसे देखना, यह विजय चालू हो जाए, तो रात को गाने सुनते हुए नींद आ जाएगी.

दोस्तो, उन दिनों बारिश भी बहुत तेज हो रही थी … तो रोकने टोकने भी कोई नहीं आ सकता था.
मैंने रेडियो लिया और उसे सुधारने लगा.

उसी दरमियान मैं तिरछी नज़रों से आंटी को भी देखता जा रहा था.
उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया था और उनके आधे से ज्यादा दूध ब्लाउज के बड़े गले से बाहर को निकलते हुए दिखाई दे रहे थे.

यह सीन देख कर मेरा लंड टनटना गया था.

उन्होंने भी मुझे अपने दूध देखते हुए देख लिया था, तब भी उन्होंने अपने मम्मों को छिपाने का प्रयास नहीं किया.
वे झुक कर मेरे काम को देखने लगीं कि मैं किस तरह से रेडियो सुधार रहा हूँ.

मैंने एक गहरी सांस भरी, तो वे मुझसे दूर होकर लेट गईं.
आंटी ने अब अपना एक हाथ पेटीकोट में डाल दिया और चूत को खुजलाने लगीं.

तभी मैंने रेडियो चालू कर दिया और गाना बजने लगा
‘आख़िर तुम्हें आना ही होगा, ज़रा देर लगेगी.’

वे खिलखिला कर बोलीं- अरे वाह यह तो सही हो गया और गाना भी मस्त बज रहा है.
उसके बाद मैं भी आंटी के बगल में लेट गया और हम दोनों बातें करने लगे थे.

आंटी का पल्लू अब उनके मम्मों से अलग था और उसी वक्त उन्होंने अपने एक हाथ को पेटीकोट में डाल रखा था, जिससे वे अपनी चूत खुजाने के लिए ही आगे पीछे कर रही थीं.
उनके हाथ से ऐसा लग रहा था मानो वे अपनी चूत में उंगली करती हुई मुठ मार रही हों.

मैंने पूछा- आंटी क्या हो गया, कुछ प्राब्लम है क्या?
वे बोलीं- अरे यार पता नहीं, आज मुझे नीचे खुजली बहुत हो रही है.

तभी मैंने चुदास भरी आवाज में कहा- आप कहें तो मैं देखूं?
वे बोलीं- हां ले देख … उसमें क्या है!

यह कहते हुए आंटी ने अपने पेटीकोट को पेट तक उठाया दिया और उनकी चूत दिखाई देने लगी.
उनकी इस बिंदास हरकत से यह साफ हो गया था कि आज तो कबड्डी का खेल होना ही है. मैं सेक्स प्लेज़र मिलने की संभावना से उत्तेजित हो गया.

मैंने आंटी की टांगों के बीच में देखा, तो घने काले बालों से घिरी हुई गुलाब की पंखुरियों के जैसी खुली हुई चूत एकदम चिकनी सी नजर आ रही थी.
मैंने उनकी चूत को देखते हुए कहा- आंटी इन बालों की वजह से आपको खुजली हो रही है. आप कहें तो मैं इसका इलाज कर दूँ!

आंटी बोलीं- हां कर दे.
मैंने कहा- ओके आप जरा रुकिए, मैं पहले आपके बाल साफ कर देता हूँ.

मैंने अंकल के जिलेट गार्ड वाले रेजर से आंटी की चूत के सारे बाल साफ कर दिए.
इसी दौरान आंटी की चूत को मैंने कई बार स्पर्श किया, पर चूत से खेला नहीं.

आंटी की चूत टपकने लगी थी और वे बस अपनी आंखों में वासना भर कर मुझे झांटें साफ करते हुए देख रही थीं.

आप खुद सोचिए कि एक औरत अपनी चूत खोल कर किसी जवान लड़के से झांटें साफ करवाएगी, तो उसकी चूत का क्या हाल होगा!

यही हुआ, आंटी की चुदास एकदम से भड़क उठी और उन्होंने मेरी उंगली अपनी चूत में लेकर कहा- खुजली यहां हो रही है पगले.
मैंने कहा- अच्छा ऐसा है क्या!

वे अपने होंठ गोल करके और आगे को करती हुई बोलीं- हां विज्जू आज मेरी प्यास बुझा दे.
मैंने एक पल भी न लगाया और आंटी के होंठों को अपने होंठों में भर लिया.

उन दोनों ने एक दूसरे को एक लंबा चुंबन किया और एक दूसरे को चूसने लगे.
मैंने आंटी के मम्मों पर हाथ फेरा और एक दूध को दबा दिया.

आंटी के मुँह से हल्की सी आह निकलने को हुई, पर मेरे मुँह में ही दब कर रह गई.

मैंने झटके से उनके ब्लाउज के सभी चटकनी बटनों को खींच कर चटचट करते हुए खोल दिए.
और आंटी ने अपने हाथ ऊपर हवा में उठा दिए, मैंने ब्लाउज को हटा दिया.

जल्द ही उनकी साड़ी और पेटीकोट को भी हटा दिया.
ब्रा पैंटी उन्होंने पहनी ही ना थी.

उन्होंने मेरे शॉर्ट्स भी उतार कर मुझे भी नंगा कर दिया था

अब आंटी मेरे सामने नंगी लेटी थीं और मैं उनके सामने नंगा खड़ा था.
वे मेरे खड़े लंड को देख रही थीं.

मैंने आंटी के ऊपर लेट कर उनके दूध चूसना शुरू कर दिए और उनके दोनों थन खूब खींच खींच कर चूसे.

मैं उनके मम्मे चूस रहा था, तो उनमें से हल्का हल्का दूध भी आ रहा था.
मैंने आश्चर्य से आंटी से पूछा कि यह दूध कैसे?

इस पर उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही मैंने दवा ली है. मैं प्रेग्नेंट हो गई थी, तो थोड़ा बहुत दूध आ गया होगा.
मैं उनके स्तनों को पीते हुए उनके दूध को पीने की कोशिश कर रहा था और साथ ही उनके दूध को दबा भी रहा था.
पर बहुत ज्यादा दूध नहीं निकला था.

आंटी ने कहा- दूध से ही खेलता रहेगा क्या? छेद की खुजली भी तो मिटा दे.

मैंने एकदम से याद आ गई हो, ऐसे रिएक्ट किया और नीचे को खिसक कर उनकी चूत को चाटने लगा.

आंटी ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे अपनी चूत में दबाते हुए कहा कि आह चाट ले साले … जोर जोर से चाट साले और निकाल दे मेरा रस … पी ले मेरे जानू चोद दे मुझे … बुझा दे मेरी प्यास … बरसात के इस मौसम में मेरी चूत की आग भड़क गई है जान!

मैंने तुरंत 69 में होकर अपना लंड आंटी के मुँह में पेल दिया और वे लंड को आइसक्रीम की तरह चाटने और चूसने लगी थीं.

मैं लंड से उनके मुँह को चोदता जा रहा था.
कुछ ही देर में मैंने अपना लंड रस उनके मुँह में टपका दिया.

आंटी ने रस खाते हुए कहा- तू तो झड़ गया … अब मेरी खुजली कैसे मिटेगी?

मैंने कहा- अरे मेरी जान … एक बार रस निकालना जरूरी था. बस अब इस बार आप इसको चूस कर खड़ा करो और अपनी खुजली का गारंटी से इलाज करवाओ.
आंटी ने मेरे लौड़े को चूस कर खड़ा कर दिया और बोलीं- अब बस जल्दी से चोद दे … और मत तड़पा. आज मुझे खुलकर चुदवाना है तुझसे.

मैंने उन्हें अपनी ओर खींच लिया और उनकी दोनों टांगें हवा में उठा कर लंड का सुपारा चूत की दरार में रगड़ दिया.
वे मस्त हो गईं और गांड उठा कर लंड गपकने की कोशिश करने लगीं.

मैंने भी देर न करते हुए एक ही शॉट में पूरा लंड पेल दिया.

आंटी की चूत मेरे लंड को एक ही बार में पूरा निगल गई और उनकी एक आह निकल आई- आह मर गई.

मेरा लंड चूत की गहराइयों में मचलने लगा था.
कमरे में हम दोनों की घपाघप चालू हो गई थी.

आंटी कामुक सिसकारियां ले रही थीं- आह चोद दे विजय … और ज़ोर से चोद दे … यस्स ऐसे ही बाबू अहह उहह अरे इतनी स्पीड से मैं कभी किसी से नहीं चुदी … आज तो मजा आ गया … आह फाड़ दे … मिटा दे चूत की खुजली पूरी! उहह अहह … ओह यस विजय … आह फक मी हार्ड … उहह चोद डाल अपनी आंटी को … आज से मैं तेरी गर्लफ्रेंड, जब चाहे चोद लेना.

मैंने आंटी को हर तरह से चोदा.
कभी घोड़ी से बना कर, कभी टांग उठा कर.

वे मुझे कसके दबा लेतीं, मेरे ऊपर आकर कूदने लगतीं और लगातार चूमती जा रही थीं.

ऐसा लग रहा था कि हम दोनों दुनिया से दूर किसी जन्नत में सैर कर रहे थे.
खूब जोरदार चुदाई चल रही थी.

आंटी को चोदते चोदते मेरा पसीना छूटने लगा था.
उनकी मादक आवाज मुझे और ज्यादा जोश दे रही थी.

मैंने उन्हें पूरे 35 मिनट तक चोदा.
इस दौरान आंटी दो बार झड़ गई थीं.

अब मैं झड़ने की कगार पर आ गया था.
मैंने पूछा- आंटी माल निकलने वाला है … कहां निकालूं?

वे बोलीं- अरे मैंने दवा ली हुई है. तू बिंदास मेरे अन्दर ही झड़ जा … उहह आह.
अब दोनों तरफ से तेज तेज शॉट लगने लगे थे.

अचानक से मैं और आंटी एक साथ झड़ गए और हम दोनों थक कर एक दूसरे से चिपक गए.
आधा घंटा तक हम दोनों बेसुध लेटे रहे.

आंटी ने धीमे से कहा- विजय, मुझे अब तुझसे रोज चुदवाना है.
मैंने उन्हें चूमा और कहा- ठीक है डार्लिंग.

उन्होंने डार्लिंग सुनकर स्माइल की और हम दोनों चूमते चाटते हुए मजा लेते रहे.

उस रात मैंने आंटी को दो बार चोदा और अगले दिन पूरे समय हम दोनों घर में नंगे ही पड़े रहे.

बारिश के कारण कोई आ भी नहीं पाया था.
नाश्ता करने के बाद चुदाई, खाना खाने के बाद चुदाई, शाम को चुदाई, रात को चुदाई … यानि मैंने आंटी को चोद चोद कर उनकी चूत का भोसड़ा बना दिया था.

मैं खुद भी इतना ढीला पड़ गया था कि आंटी ने ताकत देने के लिए मुझे दो लीटर दूध और काफी सारे ड्राइ फ्रूट्स खिलाए.
दो ताकत वाले कैप्सूल भी दिए.

उस दिन के बाद से मैं आंटी को जी भरके चोदता हूँ और अब तो मैंने उनकी गांड को भी खोल दी है.

उनकी मैंने इतनी ज्यादा चुदाई की है कि अब वे सारे दिन नाइटी पहनने लगी हैं ताकि मैं कभी भी उन्हें नंगी किए बिना चोद लूं.

अब चूंकि अंकल का भी नियम हो गया कि वे महीने में बीस दिन बाहर रहने लगे हैं, तो हम दोनों बिंदास चुदाई करने लगे हैं.

आंटी और मेरा पति पत्नी वाला रिश्ता बन गया है.
मैं आंटी को चोदते हुए खूब गाली भी देता हूँ और वे भी अब मुझे जी भरके गरियाती हुई चुदवाती हैं.

हम दोनों पॉर्न वीडियो देख कर वैसे ही चुदाई करते हैं.
अपनी खुद की चुदाई की वीडियो भी शूट करते हैं.

आंटी और मैं इन छुट्टियों में शिमला मनाली जाकर हनीमून मनाने जाने वाले हैं.

उन्हें अब खुली वादियों में चुदवाना है.
इन दिनों उन्होंने मुझे अश्वगंधा, सफेद मूसली पाउडर, खजूर और ड्राइ फ्रूट आदि दूध में डाल कर देती हैं और काफी मजबूत कर दिया है. वे मेरे लंड की नियमित तेल मालिश करती हैं.

मैं भी उन्हें रोजाना हचक कर पेलता हूँ. धकापेल चुदाई होती है.

आंटी ने अब अपनी सहेलियों के साथ भी चुदना चालू कर दिया है.
हम लोग आंटी के फार्महाउस में आ जाते हैं और उधर मैं उनकी दो सहेलियों के साथ चुदाई कर लेता हूँ.

स्विमिंग पूल में खूब मस्ती होती है.
घर में भी खूब मज़े करते हैं.

तीन औरतों के नौ छेदों का सुख पाकर मैं निहाल हो गया हूँ.
 

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मैंने अपने बेटों से अपनी चूत चुदवा ली




दोस्तो, मैं नजमा एक बार फिर से आपके सामने हाजिर हूँ.

जो लोग मुझे नहीं जानते हैं, उनको मैं अपने बारे में कुछ बता देती हूँ.

मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और मेरे शौहर कहते हैं कि मैं बला की खूबसूरत हूँ.
मेरा रंग एकदम दूध गोरा और रेशमी बाल एकदम स्याह काले हैं.

मेरी उम्र 35 साल है और मेरी फिगर की साइज 36बी-32-34 है.
मेरे तीन बच्चे हैं.
बड़ा बेटे का नाम साजिद है, वह 21 साल का खास गबरू जवान हो गया है. दूसरा बेटा आमिर है जो 19.5 साल का है और उसके बाद 18 साल का इमरान है.

मैं आप लोगों को आज एक नई सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ.
यह जो बात आप को बताने जा रही हूँ वह अभी कुछ दिनों पहले की ही है. जब मैंने अपने बेटों को सेक्सी माँ की चूत का मजा दिया

कोविड के दौर से ठीक पहले मेरे शौहर एक रिश्तेदार के घर शादी पर गए थे और वहीं फंस गए थे.
अब मैं और मेरे तीनों बेटे ही घर पर रह गए थे.

कोरोना के समय में कोई ज़्यादा काम भी नहीं रह गया था.
सिर्फ मोबाइल पर वीडियो देख देख कर काम चल रहा था.
या वीडियो कॉल पर बात करके समय पास कर रही थी.

जब पूरा एक सप्ताह बिना चुदाई के गुज़रा तो मैं बहुत बेचैन हो गई.

चूंकि मैं एक मजहबी लड़की हूँ और हम लड़कियां बिना चुदाई के नहीं रह सकती हैं.
अब मैं क्या करूँ, कुछ समझ नहीं आ रहा था.
मैं बहुत परेशान हो रही थी.

एक दिन रात को मैं अपने रूम में अकेली लेटी थी.
उस समय रात का एक बज रहा होगा.

मैं एक पोर्न मूवी का सीन देख कर कुछ ज़्यादा गर्मा गई थी.
तो मैंने कुछ सोचा और किचन से एक खीरा लेकर कमरे में आ गई.

अब मैंने अपने कपड़े उतार दिए और एक नाइटी पहन ली.
फिर ड्रेसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और खीरे पर तेल लगा लिया.

उसके बाद अपने हाथ पर थूक से खीरा और चिकना कर लिया.
अब खीरा एक मोटा लंड जैसा बन गया था.

मैं उसे लंड समझ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
मुझे थोड़ा आराम सा मिलने लगा.

कुछ ही देर में मैंने उस खीरे को अपनी चूत में अन्दर तक घुसा दिया और अन्दर बाहर करने लगी.
मुझे बेहद मज़ा आने लगा था.

मैं आंखों को बंद करके उस खीरे को अपने शौहर का लंड समझती हुई अन्दर बाहर कर रही थी.
मेरा एक हाथ मेरी चूची पर था और एक हाथ खीरे को लंड बना कर चुत में अन्दर बाहर करती हुई चुदाई का मादक अहसास कर रही थी.

उस समय मैं अपने ही आनन्द में डूबी हुई थी कि तभी मेरी नज़र उठी और मैंने दरवाजे की ओर देखा.
दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और कोई झांक रहा था.

ओ तेरी का … मर गई, यह तो साजिद था.
उसने जैसे ही यह देखा कि मैंने उसको देख लिया है, वह अन्दर आ गया.

मैंने अपनी चूत से खीरे को बाहर निकाला और जल्दी से सीधी खड़ी हो गई.
मैं अपनी नाइटी को ठीक करने लगी.

‘ओह … नो नो बेटा, तुमको यहां नहीं आना चाहिए था. तुम यहां क्या कर रहे हो … यह अच्छी बात नहीं है!’

‘अम्मी यह आप क्या कर रहीं थी?’
‘कुछ नहीं बेटा, मैं बस ऐसे ही. वह कुछ अन्दर चला गया था, उसे निकाल रही थी.’
‘अम्मी मैं जवान हो गया हूँ. मैं जानता हूँ कि आप क्या कर रही थीं!’

यह सुन कर मैं सन्न रह गई- चलो, तुम यहां से जाओ और सो जाओ!
‘मुझे नींद नहीं आ रही है.’
‘क्यों क्या हुआ?’

उसने एक हाथ मेरी कमर में डाल कर मुझे झटका दिया और मैं उसके शरीर से सट गई.

वह अब एक गबरू जवान लड़का हो गया था और अपने पापा की तरह गठीला हो गया था.
उसकी हाइट पाँच फुट ग्यारह इंच की है.

झटके के कारण मेरी छाती और उसकी छाती एक साथ सट गई थी.

उसने एक चुंबन मेरे होंठों पर किया और बोला- मुझे चुदास चढ़ गई है और अभी ही किसी को चोदना है!
मैं बिल्कुल असहाय सा महसूस कर रही थी.

मैंने उससे हारी हुई आवाज़ से कहा- मैं तो तुम्हारी अम्मी हूँ!
‘हम्म … आप मेरी अम्मी हो, यह मैं जानता हूँ. लेकिन अम्मी आप उससे पहले एक औरत हैं. अम्मी बेटे का रिश्ता हम दोनों जानते हैं लेकिन मेरा लंड और आपकी चूत यह सब नहीं जानते हैं. उनको तो बस प्यास बुझाने से मतलब है.’

उसकी यह गंभीर बात सुन कर न जाने क्यों मुझे बड़ा सुकून मिला.
उसकी बात बिल्कुल सही थी कि मेरी चूत को क्या पता कि उसको किसका लंड चोद रहा है!

‘ये बात तो तुमने बिल्कुल सही कही है!’

अब मैंने खुद उसको अपनी बांहों में भरा और अपनी बांहों को उसके गले में डाल कर उसको भरपूर किस किया.
वह भी मेरे होंठों को अपने होंठों पर रख कर चूसना शुरू कर चुका था.

मैं उसको उसकी पत्नी की तरह प्यार करने लगी.

मैंने अपनी नाइटी उतार कर एक तरफ फेंक दी और पूरी नंगी होकर उसके साथ प्यार करने लगी.
उसने अपने मज़बूत हाथों से मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेड पर ले आया.

बेड पर लाकर उसने मुझे बड़े प्यार से लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया.
हम दोनों शौहर और बीवी की तरह प्यार करने लगे.

कुछ पल बाद वह मेरे करीब बैठ गया.
मैं लेटी हुई थी.

उसने मेरी एक चूची को पकड़ कर मेरी तरफ देखा और चूची को दबा दिया.
मैं शर्मा गई.

वह मेरी चूची के पास झुक गया. वह अपनी जीभ से मेरी चूची के निप्पल को टच करने लगा और चूसने लगा.

मेरे शरीर में सिरहन सी दौड़ गई.
एक अजीब सा अहसास था … मैं तनने लगी और अंगड़ाई लेने लगी.

वह मेरी एक चूची को चूस रह था और दूसरी चूची को दबा रहा था.
मैं आराम से लेटी हुई अपनी चूचियों को दबवाने और चुसवाने का आनन्द ले रही थी.

मेरा एक हाथ उसके पैंट में खड़े लंड पर चलने लगा था.
साथ ही मैं अपने दूसरे हाथ से उसके सर के बालों को सहलाती हुई उसे अपने मम्मों पर दबा रही थी.

कुछ देर बाद वह मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर मेरी जीभ को चूसने लगा.

मेरे हाथ उसकी गर्दन और उसके बालों से खेल रहे थे.

मैं अपने बेटे को प्यार करने लगी और धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगी.
मैं आज उसको दूसरी नज़र से देख रही थी और बस यही सोच रही थी कि इसके साथ चुदवाने का आइडिया मुझे पहले क्यों नहीं आया!

मेरे घर में ही लंड का इंतजाम था तो मैं क्यों परेशान हो रही थी.
मैं उठी और मैंने उसकी पैंट को कच्छे समेत उसकी टांगों से निकालते हुए उतार दी.

उसका भीमकाय लंड मेरे सामने था.
याखुदा … यह तो बिल्कुल इसके अब्बू की तरह ही था.

मैंने कहा- साजिद, यह तो बिल्कुल तुम्हारे अब्बू की तरह है!
‘हां अम्मी.’

‘पर तुमको कैसे पता कि यह अब्बू की तरह है. यह तो सिर्फ मैं जानती हूँ.
‘नहीं अम्मी, मैं आपको और अब्बू को कई बार चुदाई करते देख चुका हूँ.

‘अच्छा … तुमने यह आज से पहले क्यों नहीं बताया?’
वह उठा और मेरे करीब आ गया, बिल्कुल मेरे चेहरे के पास और बोला- अम्मी सच बताऊं … मैं कई बार आपको चोदने के बारे मैं सोच चुका हूँ, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी.

मैं मुस्कुराई और उसको किस करने लगी.
मैंने उसके होंठ पर किस किया और मैं उसके घुटनों के पास बैठ गई.

फिर उसकी दोनों जांघों को फैला कर मैं उसके लंड को देखने लगी.
मैंने उसके लंड को अपने हाथों में लेकर उसके सुपारे पर किस किया और नायक से सांस खींचते हुए उसकी महक को जज़्ब किया.

अगले ही पल मैंने उसके लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

लंड चूसते हुए ही मैंने साजिद की ओर देखा तो वह बिल्कुल पागल हो रहा था.
उससे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था.

मैंने उसके लंड को अपने मुँह में पूरा भर लिया.
इसी तरह से मैं उसके अब्बू के लंड को अपने मुँह में भर कर चूसती हूँ.

साजिद का लंड लगभग आठ इंच का था और मेरे हलक तक पहुँच रहा था.

मैंने पूरे लंड को मुँह में लेकर रुकने का प्रयास किया तो मेरी सांस रुकने सी लगी.

मैंने लंड बाहर निकाला तो उसका लंड मेरी लार से पूरा चिकना हो गया था.

उसने मेरे सर पर हाथ रख कर मेरे मुँह को अपने लंड पर दबाना शुरू कर दिया.
मेरा मुँह उसके लंड को चुभलाने लगा था.
उसका लंड मेरे हलक तक उतर रहा था.

यह चुसाई कुछ ही देर तक चली होगी कि तभी मुझे अहसास हुआ कि उसका वीर्य मेरे मुँह में ही निकलने लगा.

अब मैं लंड को अपने मुँह से निकालना चाह रही थी लेकिन उसने मेरे सर के बालों को नहीं छोड़ा.

पूरा वीर्य मेरे पेट में उतरा जा रहा था.
मुझे मजबूरन पूरा वीर्य पीना पड़ा.

जब उसने सारा रस मुझे पिला दिया, तब मेरा सर छोड़ा.

उसकी पकड़ से छूटते ही मेरी जान में जान आई- यह क्या किया साजिद … पूरा माल मेरे पेट में ही पहुंचा दिया!
‘कसम से अम्मी तुमने क्या लंड चूसा है … गज़ब की लंडबाज़ हो!’

मैं मुस्कुरा दी … और उसकी तरफ देखने लगी.

वह बोला- यह तो अब मुरझा गया है?
‘कोई बात नहीं … मैं हूँ न!’

यह कह कर मैंने उसके लंड को वापस अपने मुँह में भर लिया.
उसका लंड पहले से ही मेरे मुँह की लार और उसके वीर्य से सना हुआ था.

मैंने अपनी जीभ से सुपारा चाटा और लंड के बाहर लगा हुआ सारा रस चाट चाट कर साफ कर दिया.
मैं अब फिर से अपनी जीभ से सहला सहला कर लंड चूसने लगी.

थोड़ी ही देर में उसका लंड फिर से एक बार तन कर खड़ा हो गया था.

मैंने साजिद की ओर देखा.
वह मुझे मुस्कुरा कर देख रहा था.

मैं शर्मा गई और बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
‘यही कि मैं जिसको इतने दिनों से चोदने के ख्वाब देख रहा था, आज वह मेरे पास बैठी मेरे लंड को चूस रही है!’

मैं वाकयी में शर्मा गई और मैंने कहा- अब बातें ही करोगे या कुछ करोगे भी!
यह कह कर मैं उठ कर उसके पास आ गई.

हम दोनों बिल्कुल नंगे थे.

मैं उसके पास जाकर लेट गई.
उस वक्त मैं अपनी पीठ के बल बिल्कुल सीधी लेटी थी.

मेरे शरीर का पूरा निखार और सौन्दर्य उभर कर आ रहा था.
मेरी चूत चिकनी थी और मेरी चूचियां हौले हौले से हिल रही थीं.

दरअसल मेरी सांस ऊपर नीचे होने से मेरी चूचियां गजब की थिरकन दिखा रही थीं.
मेरा रंग और सौन्दर्य साजिद को मेरा आशिक बना रहा था.

वह हौले से मेरे ऊपर झुका और मेरी एक चूची को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए अपने मुँह की तरफ खींचा.
मैं मस्त नजरों से उसकी हरकत को देख रही थी.

उसने जीभ की नोक से मेरे निप्पल को टच किया और जीभ से लिकलिक करते हुए निप्पल को कुरेदा.

उस कामुक अहसास से मेरी आंखें बंद होने लगीं.

इसी तरह से वह मेरी दोनों चूचियों के साथ खेलने लगा.
वह कभी चूची को मुँह में भर कर चूसता और कभी हाथ से दबा देता.

उसके इस तरह से मस्ती करने से मेरे बदन में अजीब सी उमंग भर रही थी.
मैं अपने बेड पर ऐसी मचल रही थी, लग रहा था कि आज मैं पहली बार चुदने जा रही थी.

वह मेरी गर्दन पर … मेरी छाती पर और मेरी चूचियों पर चुम्बनों की बरसात सी कर रहा था.

मैं उसके गले लग कर मचल उठी थी.
उसने मुझे सीधा रहने का इशारा किया.

मैं सीधी हो गई.
वह मेरे हर एक अंग को चूमता हुआ नीचे जाने लगा.

मेरी छाती, फिर सीना, पेट और फिर कमर तक आ गया.

इसके बाद वह उस हिस्से पर आया, जो सबसे ज्यादा उत्तेजना वाला होता है. वह मेरी चूत के ऊपर के हिस्से में यानि पेड़ू पर आ गया था.
मेरे पेड़ू पर उसके होंठों का स्पर्श मेरी तड़प बढ़ाने वाला था.

उसने मेरी दोनों जांघों को खोल दिया और मेरी चूत के पास बैठ गया.

आगे बढ़ने से पहले उसने मेरी ओर देखा.
मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी.

अगले ही पल उसने अपनी जीभ मेरी चूत पर रखी और घुमाने लगा.
‘आह … अह्ह्ह हम्म्म आह अह्ह ह्ह्ह्ह …’
मैं खुद को संभाल ही नहीं पा रही थी.

वह मेरी चूत के होंठों से अपनी जीभ से खेल रहा था.

मैंने अपनी दोनों टांगों को पूरा फैला दिया ताकि वह अच्छे से मेरी चूत को चूस सके.
वह वही कर भी रहा था … साथ ही अपनी एक उंगली को मेरी चूत में डाल कर नीचे की ओर से अन्दर बाहर करने लगा था.

मैं तड़प सी रही थी.
वह मेरे ऊपर झुके झुके ऊपर को हुआ और अपने लंड को मेरी चूत के होंठों से सटा कर मेरे ऊपर छाता चला गया.

उसका लंड मेरी चूत पर गर्म गर्म लग रहा था. उसने मेरी कमर को पकड़ा और एक धक्का दे मारा.

‘आय हाए आह आह्ह … हम्म्म आह्ह ह्ह … एईई ..’ उसका पूरा लंड मेरी चुत के अन्दर घुसता चला गया.

एक पल बाद मैंने नीचे देखा, तो उसका लंड मेरी चूत में खो गया था.
मुझे महसूस भी हो रहा था कि लंड जड़ तक घुस गया था.

मैंने साजिद को देखा, वह मुस्कुरा रहा था.
नजरें मिलीं तो उसने अपने होंठों को गोल करके एक चुम्मा हवा में उछाला.

मैं उसके चुंबन को देख कर शर्मा गई.
उसने मेरे सीने से खुद को लिपटा दिया और मुझे किस करने लगा.
साथ ही वह अपनी कमर मटकाने लगा.

उसका लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर आने जाने लगा.
मैं भी उससे लिपटने लगी और चुम्बन का आदान-प्रदान करने लगी.

वह भी मुझे अपनी किसी माशूका की तरह चोदने लगा.
उसका लंड मेरी चूत की दीवारों पर दबाव डाल रहा था.

मैं भी अपनी कमर को उठा उठा कर उसके लंड को अपने अन्दर ले रही थी.

पूरा कमरा उसके लंड के मेरी चूत से टकराने की आवाज़ों से गूंजने लगा था.
फच फच की आवाज़ें गूंज रही थी!

मेरे मुँह से अजीब अजीब आवाज़ें अपने आप बाहर आने लगी थीं.

मैंने अपनी दोनों टांगों को उठा कर हवा में दोनों ओर फैला दिया था ताकि वह मुझे अच्छे से चोद ले.
वह भी अपनी चुदास से भरी अम्मी को अपनी बीवी की तरह रगड़ कर चोद रहा था.

अब मैंने अपनी दोनों टांगों को उसकी कमर के दोनों ओर से लपेड़ लिया.
साथ ही उसको अपने सीने से लिपटा कर चुम्बन देने लगी.

उसका लंड मेरी बिना रुके चुदाई कर रहा था.
जब उसका लंड पूरा बाहर निकल कर मेरी चूत की गहराई में तेज गति से घुस रहा था, तब मेरी चूत के होंठ चिर से रहे थे.

उस चिरांध में मुझे इतना ज्यादा आनन्द मिल रहा था कि क्या ही कहूँ … मैंने कभी भी यह सब अपने सपने तक में नहीं सोचा था.

लगभग बीस मिनट तक मेरी ऐसी ही तगड़ी चुदाई करने के बाद उसके धक्कों में तेज़ी आ गई.
मैं तो समझो कुचली जा रही थी.

धीरे धीरे उसके धक्के सेक्सी माँ की चूत पर तेज़ होते ही चले गए और अंत में उसने मेरी चूत में अपने लंड से वीर्य की पिचकारियां छोड़ना शुरू कर दिया.

‘आह अहह आह हआ …’ आज मैं तर गई थी.
मेरे बेटे ने आज पहली बार मुझे चोदा था.

मैं बहुत प्यार से उसे निहार रही थी और सोच रही थी कि अभी कुछ साल पहले ही तो मैंने इसे जन्म दिया था और आज यह इतना बड़ा हो गया कि मुझे ही चोद रहा है.

उसका लंड अभी भी मेरी चुत के अन्दर ही था.
लंड अब मुरझाने लगा था.

वह मेरी चूचियों पर सर रख कर लेटा हुआ था और मैं उसको प्यार कर रही थी, उसके बालों को सहला रही थी.

फिर वह एक ओर सरक कर लेट गया.
हम दोनों बिल्कुल नंगे थे.

मैंने देखा कि उसका लंड पूरी तरह से मुरझा कर सिकुड़ गया था और मेरी चूत और उसके वीर्य से सना हुआ चमक रहा था.

मैं उसके चेहरे के पास अपना चेहरा ले गई और उसको किस किया.
वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगा.

‘अम्मी … मैं आपको कैसा लगा?’
मैंने कहा- मस्त बेटा … तुम तो बड़े छुपे रुस्तम हो. इतनी अच्छी चुदाई करते हो, मुझे तो पता ही नहीं था.

‘अम्मी मेरे लिए यह बहुत खुशनसीबी की बात है कि मैं आप को चोद पाया.’
मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था.

मैंने देखा कि वह बहुत उत्सुक है.
मैंने उसके लंड को फिर से छुआ और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

कुछ ही देर की मशक्कत के बाद वह फिर खड़ा हो गया.

वह फिर से मेरे ऊपर चढ़ गया और चुत में लंड पेल कर मुझे चोदने लगा.
मैं तड़प रही थी और वह मुझ पर लद कर धकाधक चोदे जा रहा था.

उसी वक्त मेरी नज़र दरवाजे पर गई.
“याखुदा … यह क्या … वह हल्का सा खुला हुआ था और कोई झांक रहा था.”
यह आमिर था.

वह दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.
मैं बुदबुदाई- ओह्ह … नहीं नहीं .. यह कुछ गलत हो रहा है! तुम यहां क्या कर रहे हो?

‘वह तो मैं आप दोनों की आवाज़ों से जग गया, लेकिन भाई आपके ऊपर चढ़ कर यह क्या कर रहे हैं?’
‘व…वह .. कुछ नहीं बस मेरी च..चूत में कुछ घुस गया है, उसी को निकलवा रही थी.’

‘अम्मी मैं बड़ा हो गया हूँ और मैं जानता हूँ कि भाई आपको चोद रहे हैं.’
‘हां तो … अगर मैं चुदवा रही थी तो तुमसे क्या? तुम जाओ और जाकर सो जाओ. तुम अभी छोटे हो!’

‘क्यों भाई को ही क्यों अम्मी … मैं क्यों नहीं? जब कि मैं कई बार आपको अब्बू से चुदवाते हुए देख चुका हूँ.’
‘तो … तो मैं क्या करूँ .. अब तुम यह कहोगे कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो?’

‘हां हां मुझे भी आपको चोदना है. बल्कि मुझे आपको चोदना ही है!’
‘तो चिल्ला क्यों रहे हो … कपड़े उतारो न … क्या ऐसे कपड़े पहन कर ही चोदोगे?’

मैं हंसने लगी … और साजिद भी हंसने लगा.

आमिर शर्मा सा गया.

फिर उसने कपड़े उतार दिए और वह भी मेरे पास आ गया.

लेकिन उसका लंड अभी खड़ा नहीं था.
मैंने उसको बैठाया और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

तभी साजिद बोला- अम्मी वह देखो!
उसने दरवाजे की तरफ इशारा किया.

मैंने देखा तो वहां इमरान खड़ा था.
‘ओह … यह भी आ गया?’

अगले ही पल मैं मुस्कुरा कर बोली- आ जाओ बेटा … तुम भी आ जाओ!
तो दोस्तो, इस तरह से मैं अपने उन तीनों जवान बेटों से पूरी रात चुदी.

आज भी वह रात मुझे याद है और मैं उस रात को भूल नहीं पाती हूँ.
 

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छोटी मामी को पटा कर चोद ही लिया




नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विशाल है और मेरा लंड भी विशाल है.
मेरी उम्र 21 वर्ष है.

यह नंगी मामी पोर्न कहानी 2 महीने पहले की है जब मैंने पहली बार अपनी मामी जी की चूत का रस पिया और उनकी चूत चुदाई का मजा लिया.

मैं आपको पहले अपनी मामी जी के बारे में बता देता हूँ.
उनका नाम श्वेता है और उनकी उम्र लगभग 34 वर्ष है.
मामी के बूब्स बहुत मस्त हैं, गांड बाहर की ओर निकली हुई है और वे एकदम दूध से गोरे रंग की हैं.
वे भरे बदना की हैं पर ज्यादा मोटी भी नहीं हैं.

मैं बहुत समय से उनकी चूत चुदाई के सपने देखता आ रहा हूँ और बहुत बार मुठ मार लेता हूँ.

वैसे तो मैंने अपनी दो गर्लफ्रेंड्स के साथ पहले कई बार सेक्स किया हुआ है पर मुझे अपनी मामी पर बहुत ज्यादा क्रश था.

अब आपको सीधा उस सेक्स कहानी का मजा देता हूँ कि कैसे मैंने मामा के लड़के की शादी में मामी जी की चूत का सुख प्राप्त किया.

मेरे 2 मामा हैं. मेरे बड़े मामा के लड़के की शादी थी.
मुझ पर छोटी मामी को चोदने का भूत सवार था.

बस मैं कोई अच्छा सा मौका देख रहा था कि मामी जी के साथ मुझे कुछ समय अकेले वाला मिल जाए.

ऐसा ही हुआ.

मेरे मामा के लड़के की शादी दिसंबर में थी, तो मैं 20 दिन पहले ही उनको मदद करने के बहाने वहां चला गया था.

मुझे उधर जाते ही मेरे बड़े मामा मिल गए.
मैं उनके पास थोड़ी देर बैठा.

फिर छोटे मामा के घर चला गया.
वहां जाते ही मुझे मामी जी के दर्शन हो गए.
मैं उनके कामुक बदन को देखकर खुश हो गया.
वे बहुत ही सेक्सी लग रही थीं.

मैंने उनको नमस्ते किया और पूछा- मामा जी कहां हैं?
उन्होंने बताया कि वे तो अपनी जॉब पर गए हुए हैं.

उनका एक छोटा सा लड़का है. उसकी उम्र 10 साल है. वह भी स्कूल गया हुआ था.
मैं अपनी पसंदीदा मामी जी से बात करने लगा.

वे मेरे लिए चाय बनाने किचन में जाने लगीं तो मैं भी उनके साथ किचन में आ गया.

कुछ देर बाद चाय बन गई और मामी दो कप में चाय छान कर बाहर ले आईं.
हम दोनों बैठकर चाय पीने लगे और बातें करने लगे.

उनकी चूचियां मेरे लौड़े को और बड़ा कर रही थीं.
यह शायद मामी ने देख लिया था पर उन्होंने अपनी भावना को दबा लिया था.

वे भी शायद मेरे साथ सैट होने को राजी थीं.
मैं मामी जी को चोदने का प्लान बनाने लगा.

शाम को मामा जी भी जॉब से आ गए और हमने कुछ देर बात की.
फिर खाना आदि के बाद हम सब सो गए.

ऐसे ही उधर समय व्यतीत होने लगा और 4 दिन निकल गए.

उस दिन मैं दूसरे घर गया हुआ था.
वापिस आया तो मैं चुपचाप घर में आ गया.

मैं मामी के कमरे में अन्दर आया ही था कि मामी जी बिना कपड़ों के थीं.
वे नहा कर आई थीं और घर पर कोई नहीं था तो वहीं कपड़े बदलने लग गई थीं.

नंगी मामी को देख कर मैं एकदम से सकपका गया और मामी जी भी घबरा गईं.
उन्होंने जल्दी से अपने बदन को तौलिए से ढक लिया.

मैंने इतने में सब कुछ देख लिया था.

फिर मामी जी बोलीं- तू कब आया?
मैंने कहा- मुझे पता नहीं था कि आप ऐसी हालत में हैं.

मैं सॉरी बोलकर बाहर चला गया और बाहर चबूतरे पर बैठ कर मोबाइल चलाने लगा.

फिर मामी जी ने आवाज दी- अन्दर आ जाओ ना!
मैंने कोई जबाव नहीं दिया और वे अपना घर का काम करने लगीं.

कुछ देर बाद मामी जी ने चाय बनाई और मुझे आवाज दी.
मैं अन्दर आ गया और हम दोनों चाय पीने लगे.

मैंने मामी जी को फिर से सॉरी बोलते हुए कहा- मुझे पता नहीं था कि आप कपड़े पहन रही हैं वर्ना मैं नहीं आता. आगे से ऐसा नहीं होगा.

मामी जी ने कहा- कोई बात नहीं, आगे से ध्यान रखना कि कब आना है और कब नहीं!
इतना कह कर वे हंसने लगीं.

हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे.
फिर मुझे लगा कि मामी मेरे साथ थोड़ी फ्रैंक होना चाहती हैं.

मैं भी प्लान बनाने लगा कि मामी को किस तरह से खोला जाए.

अब मैं मामी जी के सामने ही अपनी जीएफ से बातें करने लगा.

फोन कटते ही मामी जी ने पूछ लिया- किस से बात कर रहे थे?
मैंने बोल दिया कि फ्रेंड है.
मामी जी बोलीं- अच्छा इतना हंस हंस कर फ्रेंड से बात कौन करता है?

मैंने बोला- वैसे तो वह लड़की है लेकिन बस फ्रेंड है.
मामी जी बोलीं- फ्रेंड क्यों कहते हो … सीधा सीधा गर्लफ्रेंड ही बोल दो ना!

मैं मामी जी के मुँह से यह सब सुनकर अन्दर ही अन्दर खुश हो रहा था.

मामी जी ने कहा- फोटो तो दिखाओ उसकी?
मैंने दिखा दी.

मामी जी बोलीं- दिखने में तो अच्छी है … इससे शादी भी करनी है या ऐसे ही मजे लेने हैं?
मैंने पूछा- मतलब?
वे हंस कर बोलीं- कुछ नहीं.

यही सब बातें करते करते हम दोनों को दोपहर हो गई.

मैंने हिम्मत करके मामी जी से पूछ लिया- आपका भी कोई बीएफ था क्या शादी से पहले?
मेरी उम्मीद से हट कर उन्होंने हां में सर हिला दिया.

मैंने भी तपाक से बोल दिया- आपने भी उसके साथ टाइम पास किया था या … और कुछ भी?
वे बोलीं- हां, टाइम पास ही किया था, फिर तुम्हारे मामा से शादी हो गई.

मैंने कहा- तो मतलब आपने शादी से पहले मजे नहीं लिए?
वे बोलीं- थोड़े बहुत लिए बस!

मैंने पूछा- क्या क्या?
वे बोलीं- तुम क्या करोगे जानकर?

मैंने कहा- बताओ ना मामी जी, मुझे भी कुछ अनुभव हो जाएगा.
वे बोलीं- बस यूं ही किस वगैरह किया था.

मैंने बोला- और कुछ!
वे बोलीं- वह सब शादी के बाद तुम्हारे मामा से किया … बस अब और नहीं.
यह कह कर वे रूम में जाने लगीं.

अब तक मेरा लंड पूरा तन कर खड़ा हो चुका था.

मैं भी मामी जी के पीछे पीछे आ गया और बोला- मुझे क्या करना चाहिए?
वे बोलीं- अपनी लाइफ के मजे लो … जितना हो सके!

यह सुनकर मेरा हौसला बढ़ गया और मैंने कहा- मुझे तो आपके जैसे फिगर की अच्छी लगती है मामी जी!
वे बोलीं- अच्छा.

वे अच्छा कह कर कुछ अर्थ पूर्ण अंदाज में हंसने लगीं.
मैं उनकी आंखों में वासना से देखने लगा.

फिर वे इतरा कर बोलीं- तो मेरी जैसी कोई ढूंढ लो न!
मैंने कहा- इतनी जल्दी थोड़ी मिलती है.

वे हंसने लगीं.

मैंने कहा- एक बात पूछूँ, आप बुरा तो नहीं मानेंगी?
उन्होंने कहा- हां पूछो.

फिर मैंने पूछा- आपने लास्ट टाइम सेक्स कब किया था?
उन्होंने बताया- एक महीने पहले … पर यह सवाल क्यों?
मैं बोला- बस ऐसे ही!

फिर एक पल रुकने के बाद मैंने कह ही दिया- मेरा आपके साथ करने का बहुत मन करता है.
यह कह कर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.

वे बोलीं- यह क्या बोल रहे हो?
मैंने कहा- कसम से मामी जी, बस एक बार!
तो वे बोलीं- किसी को कुछ पता चल गया तो?

यह सुनते ही मुझे समझ आ गया कि मामी जी के मन में भी आग लग चुकी है.

मैंने उन्हें पकड़ लिया और किस करने लगा, उनकी गर्दन पर चूमने लगा.
मुझे पता था कि गर्दन पर किस करने से औरत जल्दी गर्म होती है.

वे बोलीं- अरे छोड़ो मुझे … कोई देख लेगा.
और वे खुद को छुड़ाने लगीं.
पर मैंने कसके पकड़ा हुआ था.

मैं उन्हें किस करने लगा.
धीरे धीरे वे भी शांत होने लगी और उनकी सांसें तेज होने लगीं.

सों सों करके उनकी सांसें गर्म धौंकनी सी चलने लगीं.
वे रुक गईं और मैं किस करता रहा.

मुझको पता चल गया था कि काम हो गया है.

मैंने आगे बढ़ कर उनको अपनी बांहों में भर लिया और होंठों पर किस करने लगा.

वे बोलीं- एक बार रुको, देख लेने दो कि कोई आ ना जाए.
और वे मेरी बांहों से निकल कर दरवाजे को सही से बंद करने के लिए चली गईं.

मैं भी साथ में चला गया.
गेट बंद करते ही मैंने उनको पकड़ लिया और किस करने लगा.
अब वे भी मेरा साथ देने लगीं.

हम दोनों रूम में आ गए और बेड पर मैं मामी के ऊपर लेट गया.
वे भी पूरा साथ दे रही थी और किस कर रही थीं.

मामी बोल रही थीं- बहुत दिन इंतजार करवाया विशाल तुमने … अब चाट लो मुझे पूरा … मेरी भूख मिटा दो!

मैंने मामी जी के बूब्स को मसलना शुरू किया और उनका कमीज उतार दिया.
मैं ब्रा के ऊपर से ही मामी के दूध चूसने लगा.

फिर मैंने ब्रा खोली और उनके मम्मों एक एक करके अच्छे से चूसने लगा.

मामी मेरे लंड पर हाथ घुमाने लगीं और बोलीं- विशाल, तुम्हारा तो लंड कड़क हो चुका है.
मैंने कहा- आपका ही है मामी जी.

मैंने उनके पेट पर किस करना शुरू किया और नाभि तक पहुँच गया.
फिर पाँच मिनट तक मैंने उनकी नाभि को अच्छे से चूसा और उनकी सलवार खोल दी.

मैंने अन्दर हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से चूत को सहलाने लगा.
मामी तड़फ उठीं. मैंने पैंटी के ऊपर से चूत में अपनी उंगली अन्दर कर दी.

मामी ने आह भरी और चड्डी सिकोड़ ली.

अब मामी ने भी मेरी शर्ट उतार दी और मेरे बालों को पकड़ लिया.

उन्होंने मुझे अपनी चूत पर दबा दिया और कहा- चाट इसे!

फिर मैं उनकी पैंटी के ऊपर से चूत को चूसने लगा, फिर उसे उतार दिया.
अब मामी मेरे सामने पूरी नंगी थीं.

मैं चूत चाट रहा था.
उनकी चूत गीली हो चुकी थी जिससे मुझे उनके चूत के पानी का स्वाद आ रहा था.

मैं चूत में जीभ को अन्दर बाहर करने लगा और मामी सिसकारियां भरने लगीं ‘आह … आ हह … ईईह … आआह.’
वे अपनी चूत ऊपर नीचे करने लगी.

कुछ मिनट तक चूत चूसने के बाद मैंने मामी से कहा- मामी, अब मेरे हथियार को भी जरा मजा करा दो.

उन्होंने मुझे लेटा दिया और मेरे लंड को हाथों में पकड़ कर हिलाने लगीं.
नंगी मामी लंड सहलाती हुई बोलीं- तुम्हारा हथियार तो काफी बड़ा है.
मैंने कहा- अब इसको थोड़ा शांत तो करवाओ?

उन्होंने उस पर अपनी जीभ फेरना शुरू कर दी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उन्होंने लंड को मुँह में ले लिया और अन्दर बाहर करने लगीं.
मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था.
मैं आह आह कर रहा था.

मैंने कहा- पूरा अन्दर लो ना.
उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए पूरा लंड अन्दर ले लिया और अन्दर बाहर करने लगीं.

मैंने भी थोड़े झटके दिए.

कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद मामी ने कहा- मेरी चूत की भी भूख मिटा दो, अब रहा नहीं जाता.

मैंने अपने गीले हो चुके लंड को हाथ में लेकर भाभी को लेटाया और उनकी चूत पर रगड़ने लगा.
भाभी मानो ऐसी मचलने लगीं, जैसे बिना पानी के मछली.

उन्होंने लंड को पकड़ कर कहा- डाल दो अब विशाल जान!
मैंने कहा- ये लो मामी जान!

मैंने पूरा लंड एक बार में ही अन्दर डाल दिया.
पोर्न मामी की मानो चूत फट गई.
उनकी तेज चीख के साथ आंसू निकल आए.

वे बोलीं- आह मर गई … निकालो, ऐसे थोड़ी बोला था!
पर मैं अब कहां निकालने वाला था.

मैंने धीरे धीरे झटके देने शुरू कर दिए.

थोड़ी ही देर में मामी ठीक हो गईं और मजे लेकर आवाज निकालने लगीं.
मैं भी झटके तेज करने लगा.
मामी के बूब्स झटके के साथ हिल रहे थे.

मैं मामी के ऊपर आकर उनके बूब्स को कट्टू करने लगा और चूसने लगा.
साथ में झटके से लंड पेल रहा था.

मामी जी मानो पूरा मजा ले रही थीं.
वे बोल रही थीं- पहले कहां थे तुम … मुझे ऐसी ही चुदाई का बहुत दिनों से इंतज़ार था!
मैंने कहा- इंतज़ार तो मुझे भी था जान … अब बस मजे लो इस लंड के.

मैं झटके तेज करता गया.
मेरा होने ही वाला था कि मामी बोल पड़ीं कि मेरा आने वाला है.

मैंने झटके तेज कर दिए और साथ मैं ऊपर से हाथ से मसलने लगा.
मामी झड़ गईं और पानी छोड़ दिया.

मेरा पूरा लंड पानी से भर गया.
मैंने अपने हाथ से चूत से टपकते हुए पानी को लिया और उस पानी को मुँह से चाट लिया.
साथ ही मैंने मामी के मुँह में एक उंगली दे दी.
उन्होंने वह चाट ली.

फिर मैंने लंड निकाला और चूत के पानी को चाटने लगा.

चूत रस से सने हुए होंठों से मैं मामी को लिपकिस करने लगा.
सच में बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने मामी से कहा- मेरे लंड को शांत तो कर दो.
मामी ने लंड मुँह में ले लिया और मैंने झटके शुरू कर दिए.

थोड़ी देर बाद मैंने मामी से कहा- मेरा आने वाला है.
मामी ने सर हिला कर बताया कि अन्दर ही आने दो.

मैं अपने चरम पर था. मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था.

मेरा लंड मामी के मुँह के अन्दर ही झड़ गया.
लगभग सारा माल मामी अन्दर ही गटक गईं और थोड़ा उनके होंठों पर लग गया.

उन्होंने स्माइल करके मेरी तरफ देखा.
मैंने उनको लिप किस किया और कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए.

मामी मेरे गले से लग गईं और बोलीं- आज तक ऐसा सेक्स मैंने पूरी ज़िंदगी में नहीं किया.

मैंने उन्हें चूमा तो उन्होंने मुझे किस कर दिया और बोलीं- आज से तुम मेरी जान हो.
मैंने कहा- आप भी मेरी मामी जान हो. आई लव यू.

अब मामी अपने काम में लग गईं.
शादी तक हम दोनों ने चार बार सेक्स किया.


 

junglecouple1984

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मेरा पूरा परिवार ही चुदक्कड़ निकला




मेरा नाम रॉकी है. मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ.
मेरे परिवार में मम्मी पापा और हम दो भाई व 3 बहनें हैं.
हम सभी कॉलेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स हैं.
मम्मी गृहणी हैं और पापा छोटा सा व्यापार करते हैं.

हमारे घर में 3 कमरे हैं.
एक कमरे में मम्मी पापा, एक में मेरी बहनें और एक में हम दोनों भाई रहते हैं.

हमारे घर में बाथरूम सिर्फ़ दो ही हैं.
पूरे घर में एक भी कमरे में अटैच्ड बाथरूम नहीं है.

मेरी सबसे छोटी बहन निशा, उससे बड़ी कोमल और सबसे बड़ी का नाम नेहा दीदी है.
हम दोनों भाई में राजा भैया और मैं रॉकी हूँ. मैं निशा से बड़ा हूँ.

एक रात की बात है.
मैं पानी पीने के लिए उठा. उस वक्त रात के दो बजे होंगे.
मैंने देखा कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है और निशा इयरफोन लगा कर मोबाइल में ब्लू फिल्म देख रही है.

वह ब्लू फिल्म देख रही है, इसका अंदाजा मुझे इस बात से हुआ क्योंकि वह मोबाइल में अपनी आंखें गड़ाई हुई थी और अपनी चूत में उंगली कर रही थी.

मैं तो यह देख कर हैरान ही हो गया.
मेरी कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
इसलिए मैं बस उसको देखता ही रहा.

उसका ध्यान सिर्फ़ मोबाइल में था और वह जोर जोर से अपनी चूत में उंगली करने में लगी हुई थी.
कानों में ईयर फोन लगे थे तो उसे इधर-उधर का कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था.
और वह समय भी आधी रात का था, जिस वजह से वह और भी ज्यादा बेफिक्र थी कि उस वक्त कौन उसे देखने आता.

तभी उसकी सिसकारियों की आवाज आना शुरू हो गई.
मैंने देखा कि वह दीवार से अपनी गांड सटा कर कुछ अकड़ सी गई थी और उसने अपनी चूत में उंगली चलाने की रफ्तार कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी थी.

मेरी बहन की ‘आहह अह अह …’ की मादक आवाजें मेरे लौड़े को भी खड़ा करने लगी थीं.

थोड़ी देर बार उसकी चूत से पानी और पेशाब दोनों एक साथ निकलने लगा और वह ढीली होती चली गई.
अब शांत हो कर नीचे फर्श पर बैठ गई थी.

यह सब देख कर मेरा भी हाल बहुत बुरा था. मेरे लंड से भी पानी निकलने लगा था.
इससे पहले कि मेरी बहन की नजर मुझ पर पड़ती, मैं तुरंत वहां से चला गया.

थोड़ी देर में मैंने देखा निशा वापस अपने कमरे में चली गई.
उसके जाने के तुरंत बाद मैंने बाथरूम में जाकर मुठ मारी.
फिर पानी पिया और कमरे की तरफ जाने लगा.

तभी मैंने देखा कि मेरे मॉम डैड के कमरे की खिड़की हल्की सी खुली हुई थी और वहां एक छोटा सा बल्ब जल रहा था, जिससे हल्की लाइट हो रही थी.
उसमें अन्दर का सब साफ साफ दिख रहा था.

मैंने देखा कि मॉम की साड़ी ऊपर को हो गई है और उनकी पैंटी नीचे पैरों के पास है.
मॉम के ऊपर डैड चढ़े हुए थे और उनका अंडरवियर भी उनके पैरों के पास था.

उसी वक्त मैंने देखा कि डैड के शरीर में हलचल हुई और वे मॉम की चूत में अपना लंड सैट करके धक्के देने लगे.

मॉम धीरे धीरे बोलने लगीं- आह … और थोड़ी जोर से पेलो … आह!
यही सब कहती हुई मॉम शांत हो गईं.

पर डैड अभी भी जोर जोर से धक्के मारने में लगे थे.
मॉम भी फिर से चार्ज हो गईं.
वे दोनों मजे लेने लगे.

मॉम के चेहरे और उनकी आवाजों से साफ समझ आ रहा था कि उनको भी चुदने में बहुत मजा आ रहा है.

मैं सब देख रहा था.
उसी वक्त मॉम ने मुझे देख लिया लेकिन वे उस टाइम कुछ नहीं बोलीं.
वे बस ‘आहहा अहहा … और और जोर से … आह …’ करती हुई डैड को चोदने के लिए बोलती रही थीं.

उन्होंने मुझे देख कर भी अनदेखा कर दिया था.

मैं वहां से कमरे में चला गया.

मैंने दोबारा से मुठ मारी और मॉम डैड के सेक्स व बहन की चूत में उंगली की सोचते हुए ही सो गया.

सुबह मैं देर से उठा, चूंकि आज संडे था, तो सब घर पर ही थे.

मैंने निशा को देखा तो सुबह सुबह से उसके तने हुए बूब्स देख कर बस उसकी रात वाली हरकत का ख्याल आ रहा था.

उसके लिए आज से पहले मैंने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था.
फिर मैंने मॉम को देखा तो वे हल्के से मुस्कुरा दीं और कुछ नहीं बोलीं.

कुछ देर बाद सबने दोपहर का खाना खाया और सोने लगे.

राजा भैया हॉल में सो रहे थे तो निशा मुझसे बोली- मैं आपके साथ सो जाती हूँ भैया!

मैंने कहा- हां ठीक है. मैं मोबाईल में गेम खेल रहा हूँ तू चाहे तो मेरे साथ खेल सकती है.
वह बोली- हां भैया, हम दोनों गेम खेलते खेलते ही सो जाएंगे.

मैं भी ठीक है बोल कर कमरे में चला गया.
फिर निशा और मैं कुछ देर फोन में लूडो खेलने के बाद ऊंघने लगे.

निशा बोली- मुझको नींद आ रही है, मैं अब सो रही हूँ.
मैं भी बोला- हां ठीक है, सो जाओ. मैं भी सो रहा हूँ.

थोड़ी देर में निशा सो गई.

पर मुझको तो सिर्फ निशा की चूत का ही ख्याल आ रहा था.

कुछ देर तक सोचने के बाद मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने निशा के लोवर के ऊपर हाथ रख दिया.
उसने कुछ नहीं कहा बल्कि वह और सीधा होकर सो गई.

उसकी इस हरक से मेरी हिम्मत कुछ और बढ़ गई.
मैंने धीरे से उसका लोवर नीचे को सरका दिया.
फिर देखा कि उसकी पैंटी गीली हो गई थी.

मुझको लगा कि इसकी पैंटी पहले से ही गीली होगी.
मैंने उसकी पैंटी की इलास्टिक में हाथ की उंगलियां फंसाईं और पैंटी को कुछ नीचे किया तो देखा कि उसकी चूत से पानी निकल रहा है.

मैं समझ गया कि शायद निशा जाग रही है और मेरी हरकतों को समझ कर भी नजरअंदाज कर रही है.
मैंने अब बेखौफ उसकी चूत में हाथ फेरना शुरू कर दिया.

इससे उसके मुखड़े पर मुस्कान आ गई और वह उठ कर बोली- अच्छे से करो ना भैया … आप टच कर रहे हो तो कितना अच्छा लग रहा है.
मैं एकदम से डर गया और बोली- तू जाग रही है!

वह इठला कर बोली- हां, मैंने कल भी आपको देखा था. इसी लिए तो मैं और जोर जोर से अपनी चूत में उंगली कर रही थी ताकि आप मुझे चोद दो. पर आप रात को मेरे पास आए ही नहीं!
मैं यह सब सुन कर हैरान था कि मेरी बहन मेरे से भी हॉट है.

अब मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया.
वह भी मुझे चूमने लगी.
उसकी चूत की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी.

मेरा लंड जींस के अन्दर अकड़ा जा रहा था, उसे खड़े होने के लिए खुला माहौल चाहिए था.

मैंने अपना पैंट उतारा और अंडरवियर निकाल कर लंड अपनी बहन को दिखाया.
वह मेरे मोटे लंड को हसरत से देखने लगी.

मैंने निशा से लंड चूसने के लिए बोला.
वह मना करने लगी.

मैंने भी बोल दिया कि तू तो पॉर्न देखती है. उसमें लंड चूस कर दिखाते हैं ना!

उसने हां में सिर हिला दिया और लंड पकड़ कर सूंघने लगी फिर अचानक से मुँह में लेकर चूसने लगी.

कुछ ही देर में मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था.
मैंने अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत में सैट किया और थोड़ा सा धक्का दे दिया.

लंड की धमक से निशा कराह कर बोली- आह भैया धीरे करो … दर्द होता है.

मैंने कुछ देर उसे चूमा और लंड को एक जोरदार धक्के के साथ एक ही बार में उसकी चूत में पेल दिया.
उसकी ‘आह मर गई …’ की आवाज निकल गई.

मैंने उसका मुँह चूम लिया और अपने होंठों से उसके मुँह को बंद कर दिया.

वह कराहती हुई इशारे से मुँह से मुँह हटाने का कहने लगी.
मैंने मुँह हटाते हुए कहा- शोर मत करना!

वह धीमी आवाज में कहने लगी- आह भैया … आप लंड बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने उससे कहा- तू तो सब जानती है. पहली बार में तो दर्द होता ही है.
वह कुछ नहीं बोली.

मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा.
वह आह अह की सिसकारियां निकालने लगीं और दर्द से कराहने का मुँह बनाने लगी.

मैं उसे धकापेल पेले जा रहा था.
मुझे पता ही नहीं था कि कमरे का दरवाजा तो खुला हुआ है.

मैं निशा को पेले जा रहा था और मॉम हम दोनों के पास आकर खड़ी हो गईं.

अचानक से मेरी नजर उन पर पड़ी तो मेरे मुँह से निकल गया- मॉम आप?
निशा की बंद आंखें, मॉम का नाम सुनते ही खुल गईं.

हम दोनों डर गए और एक दूसरे से अलग हो गए.
मॉम बोलीं- डरो मत, एक ना एक दिन तो तुमको यह करना ही था. निशा तू कहीं बाहर यह सब करती, तो हमारी बदनामी हो सकती थी. इससे अच्छा है कि तुम दोनों साथ में ही कर लो.

यह सुनकर निशा हैरान हुई लेकिन मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि मॉम ने मुझे रात को देखा था और कुछ नहीं बोली थीं, मैं तभी समझ गया था कि मॉम को इस बात से कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला है.

मॉम- रुको मैं भी तुम दोनों के साथ में मजा करती हूँ. तुम दोनों को कुछ सिखा भी दूँगी.

मैं मॉम के मुँह से यह सब सुन कर काफी हैरान हो गया था … लेकिन खुशी भी हो रही थी कि आज मॉम साथ देंगी तो मैं अपनी बाकी दोनों बहनों को भी चोद सकूँगा.

इतनी देर में मेरा लंड ढीला हो गया था.
मॉम ने मेरे लंड को हाथ में लिया और वे उसे किसी भैंस के थन के जैसे आगे पीछे करने लगीं.

मेरा लंड हरकत करने लगा.

मैं अभी कुछ कहता कि मॉम ने घुटनों के बल बैठ कर मेरे लंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगीं.
निशा बस यह सब देख रही थी.

मॉम मेरा लंड मस्ती से चूस रही थीं.
उनके लंड चूसने में एक आर्ट थी.

सच में निशा का लंड चूसना तो कुछ भी नहीं था.
मॉम मेरे टट्टे भी सहलाती जा रही थीं.

कमरे का दरवाजा अभी भी बंद नहीं था.
उसी वजह से से मेरा बड़ा भाई भी आ गया.

वह देख कर हैरान हो गया लेकिन शायद वह मॉम के साथ ये सब पहले से कर चुका था इसलिए वह बिंदास अन्दर आया और उसने मॉम की नाइटी को उठाया और उनकी पैंटी को निकाल दिया.

मॉम हंसने लगीं और उसके मुताबिक हो गईं.

राजा भैया ने अपना लंड मॉम की चूत में डाला और वह उन्हें चोदने लगा.

मॉम भी एक साइड मेरा लंड चूस रही थीं व दूसरी साइड से भैया उन्हें चोदे जा रहा था.
मैं और निशा उन दोनों की इस बिंदास धकापेल को देख कर हैरान थे.

ये सब चल ही रहा था कि मॉम ने कहा- देख क्या रहे हो … तुम और निशा सबसे छोटे हो, इसलिए तुमको अभी तक यह नहीं बताया था. तुम्हारी बड़ी दीदी, राजा भैया, पापा और मैं सब साथ में ही चुदाई करते हैं. जिसको जब भी मन होता है, वह किसी को भी चोद सकता है. तुम्हारी उम्र भी चुदाई की हो गई है तो तुम दोनों भी हमारे साथ अब सेक्स के मजे ले सकते हो!

इतने ने मॉम ने दीदी और पापा को आवाज़ दी.
वे लोग भी कमरे में आ गए और मॉम ने उनको भी चुदाई में शामिल कर लिया.

मैंने देखा और सोचा कि अब तो और मजा आएगा, सब लोग बिना डर के मजे कर सकते हैं.

इतने में पापा निशा के पास आए जो पहले से नंगी थी.
वे उसकी चूत चाटने लगे- वाउ बेटा कितनी गर्म चूत है तुम्हारी!

तभी दोनों बहनों ने भी अपने अपने कपड़े उतार दिए और सब बिस्तर पर आ गए.
मैं सब देखता रह गया.

कोमल दीदी के बूब्स कितने बड़े बड़े थे.
अब मैं कोमल दीदी को अपनी तरफ खींच कर उन्हें किस करने लगा, उनके दूध दबाने लगा.

उधर भैया मम्मी को चोदते हुए उन्हीं की चूत में झड़ गए और लेट गए.
नेहा दीदी भाई के ऊपर चढ़ गईं और उसके साथ लेटी रहीं.

उधर डैड ने अब अपना लंड निकाला और निशा के चूत में पेलने लगे.
निशा कराहने लगी और आह आह करने लगी.

तभी डैड ने लंड चूत के अन्दर डाल दिया और चोदने लगे.
निशा भी अब मजे लेने लगी.

वह ‘आहा हह आअहह डैड … मजा आ रहा है डैड …’ बोलने लगी.
इधर कोमल दीदी ने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठ गईं.

वे ऊपर नीचे होकर मुझे चोदने लगीं और बोलीं- कैसा लग रहा है रॉकी, मजा आ रहा है ना?
मैंने भी हां बोल दिया कि दीदी ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया.

धकापेल चुदाई चालू थी.

मैंने देखा कि डैड ने निशा को डॉगी स्टाइल में पेल रहे हैं और निशा मजे ले रही है.
मैं दीदी से बोला- मैं भी ऐसा करूं?

तो दीदी बोलीं- हां उस तरह से भी करूँगी.
वे डॉगी बन गईं और मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड पेल दिया.
दीदी आह आह करती हुई मुझसे धकापेल चुदने लगीं.

इतने में भैया का लंड वापस खड़ा हो गया और वे नेहा दीदी को चोदने लगे.

नेहा दर्द में कराहने लगी- आह धीमे चोद बहन के लौड़े … तेरा पूरा लंड मेरे पेट तक जा रहा है … धीरे धीरे कर ना!
उसके मुँह से गाली सुनकर मुझे और जोश आ गया और मैं कोमल दीदी के दूध दबाते हुए उनकी लेने लगा.

भैया भी नेहा को जोर जोर से चोदने लगे.
थोड़ी देर में नेहा भी गर्म हो गई और चुदाई के मजे लेने लगी.

ऐसे ही सबकी बारी बारी से चुदाई होने लगी.
दोपहर से रात … और रात से दिन हो गया.

हम सब रुकते फिर शुरू कर देते.
ऐसे ही पूरी एक रात और एक दिन पोर्न फॅमिली फक का जश्न चला.

अगले दिन से सब सामान्य होने लगा क्योंकि अब सभी बोला गया था कि हर वक्त ऐसा नहीं करना है और जमाने के सामने अपनी असलियत जाहिर नहीं करनी है.
 
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