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आर्यमणि वहां पहुंचकर नीचे बोर्ड पर अपना लात मारा और सभी स्विच एक साथ ऑन कर दिया। जैसे ही स्विच ऑन हुआ कुछ हल्की सी आवाज हुई।… "कमाल का सिविल इंजीनियरिंग है मौसा जी, स्विच कहीं है और दरवाजा कहीं और।" लेकिन इससे पहल की आर्यमणि उस गुप्त दरवाजे तक पहुंच पता, शांताराम के साथ कुछ हथियारबंद लोग अंदर हॉल में प्रवेश कर चुके थे।
इधर आवाज आना सुरु हुआ और पीछे से आ रही बू से आर्यमणि समझ चुका था कि वहां कुछ लोग पहुंच चुके है। लेकिन आर्यमणि सबको अनदेखा कर अपने काम में लगा रहा… "आर्य यहां क्या कर रहे हो।".... पीछे से नौकर शांताराम की आवाज आयि।
आर्यमणि:- सब लोग चले गए है काका और मै बिस्तर पर परे–परे उब गया हूं, शॉकेट से वायर निकाल रहा हूं, ये टीवी मुझे ऊपर के कमरे में चाहिए।
आर्यमणि बिना पीछे पल्टे जवाब दिया। तभी बहुत से लोगों में से किसी एक ने… "आप रहने दीजिए सर, मै नया टीवी मंगवा देता हूं।"… उसकी आवाज़ पर आर्यमणि पीछे पलट गया। आंखों के सामने कई गार्ड खड़े थे। सभी वर्दी में और अत्यआधुनिक हथियारों से लैस...…. "ये सब क्या है काका। इतने हथियारबंद लोग घर के अंदर।"..
शांताराम:- उन्हें लगा घर में कोई चोर घुस आया है, इसलिए ये लोग आ गये।
आर्यमणि:- हम्मम ! माफ कीजिएगा, मुझे इस घर के बारे में पता नहीं था। और हां टीवी रहने दीजिएगा, मै मासी को बोलकर मंगवा लूंगा।
आर्यमणि अपनी बात कहकर वहां से अपने कमरे में निकल गया। बिस्तर पर लेटकर वो अभी हुई घटना पर ध्यान देने लगा। नीचे लगे बोर्ड को ठोका और बड़ी ही धीमी आवाज़ जो मौसा–मासी के ठीक बाजू वाले कमरे से आयी। किताब घर से यह आवाज़ आयी थी।… "मंजिल तो यहीं है बस मंजिल की जाभी के बारे में ज्ञान नहीं। मौसा जी और तेजस दादा के करीब जाना होगा। हम्मम ! मतलब दोनो को कुछ काम का बताना होगा। इन्हे कुछ खास यकीन दिलाना होगा।"
आर्यमणि अपने सोच में डूबा हुआ था, तभी फिर से फोन की रिंग बजी, दूसरी ओर से मीनाक्षी थी। आर्यमणि ने जैसे ही फोन उठाया…. "तुझे टीवी चाहिए क्या आर्य।"..
आर्यमणि:- हद है टीवी वाली बात आपको भी बता दिया ये लोग। नहीं मासी मुझे नहीं चाहिए टीवी, दीदी से मेरी बात करवाओ।
भूमि:- क्या हुआ आर्य..
आर्यमणि:- दीदी यहां रहना मुझे कन्फ्यूजन सा लग रहा है। मै आपके साथ ही रहूंगा।
मीनाक्षी:- मै यही हूं और फोन स्पीकर पर है, मै भी सुन रही हूं।
भूमि:- आई रुको अभी। आर्य तू मेरे साथ ही रहना बस जरा अपनी सिचुएशन एक्सप्लेन कर दे, वरना मेरी आई को खाना नहीं पचेगा।
आर्यमणि:- मैं गहन सोच में था। मुझे लगा मैंने रीछ स्त्री और उसके साथी का लगभग पता लगा ही लिया। मेरे दादा अक्सर कहते थे, "बारीकियों पर यदि गौर किया जाय, फिर किसी भी सिद्धि के स्रोत का पता लगाया जा सकता है। सिद्धियां द्वारा बांधना या मुक्त करना उनका भी पता लगाया जा सकता है।" और जानती हो दीदी अपनी बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने एक ऐसी पुस्तक को खोल डाली जो आम इंसान नही खोल पाये। बस इसी तर्ज पर मैंने रीछ स्त्री के मुक्त करने की पूरी सिद्धि पर ध्यान दिया। बहुत सारे तर्क दिमाग में थे और मैं किसी नतीजे पर पहुंचना चाहता था। लेकिन नतीजे पर पहुंचने से पहले मुझे अपने दिमाग में चल रहे सभी बातों को बिलकुल साफ करना था। ध्यान भटकाने के लिए मैंने सोचा क्यों न आराम से शाम तक टीवी देखा जाये।
बस यही सोचकर हॉल से टीवी निकालकर अपने कमरे में शिफ्ट कर रहा था, तभी 10-15 हथियारबंद लोग आ गए। फिर उन्ही में से एक कहता है मै नई टीवी ला देता हूं। उसे मैने साफ कह दिया की मुझे कुछ भी मंगवाना हो तो वो मैं मासी से मंगवा लूंगा। और देखो इतना कहने के बावजूद भी 5 मिनट बाद मासी का कॉल आ गया। एक टीवी के लिए मै पुरा शर्मिंदा महसूस करने लगा। दीदी तुम ही बताओ मुझे कैसा लगना चाहिए?
सुकेश:- बस रे लड़के। ये सब मेरी गलती है। मै आकर बात करता हूं, और मुझे पता है तुम मेरे यहां वैसे भी नहीं रहेने वाले थे, रहोगे तो भूमि के पास ही। टीवी नहीं तो किसी और बहाने से, नहीं तो किसी और बहाने से।
आर्यमणि:- सॉरी मौसा जी।
जया:- इसका यही तो है बस सॉरी बोलकर बात खत्म करो। ये नहीं को मौसा से अच्छे से बात कर ले।
आर्य:- मौसा ने क्या गलत कहा है, सही ही तो कह रहे है। मेरा दिल कह रहा है कि मै दीदी के पास रहूं। अभी टीवी का इश्यू दिखा तो अपने आप बढ़ गया। कल को हो सकता है कोई और इश्यू हो। अब वो सही कह रहे है तो उसपर मै क्या झूठ कह दू, जबकि समझ वो सारी बात रहे है। मां अब ये दोबारा दिल रखने वाली बात मत करना। मै आप सब को दिल से चाहता हूं, हां साथ में पलक को भी। बस मुझ से ये दिल रखने वाली बातो को उम्मीद नहीं रखो, और ना ही मै अपनी बात से किसी का दिल तोड़ूंगा।
मीनाक्षी:- तेरे तो अभी से लक्षण दिख रहे है।
आर्य:- मै फोन रखता हूं। सब लोग आ जाओ फिर बातें होंगी।
मीनाक्षी:- देखा जया, उसे लग गया कि खिंचाई होगी तो फोन रख दिया। क्यों पलक सुनी ना की दोबारा सुना दूं, उसके दिल का हाल।
पलक बेचारी, पूरे परिवार के सामने पानी–पानी हो गई। लेकिन साथ ही साथ दिल में गुदगुदी सी भी होने लगी थी। सभी लोग शाम के 8 बजे तक लौट आए थे। आज काफी मस्ती हुई। आकर सभी लोग हॉल में ही बैठ गए। कहने को यहां थे तो 3 परिवार थे, लेकिन सबसे छोटा भाई अरुण और उसका पूरा परिवार लगभग कटा ही था। क्योंकि बच्चो को किसी भी भाई–बहन से मतलब नहीं था, अरुण और उसकी पत्नी प्रीति का छल उसके चेहरे से नजर आता था। बावजूद इसके कि उस वक़्त शादी से पहले जया क्यों भागी थी ये बात सामने आने के बाद भी, अरुण ने ऐसा रिएक्ट किया जैसे हो गया हमे क्या करना। जबकि इसी बात को लेकर जो उसने एक बार रिश्ता तोड़ा था फिर तो एक दूसरे को तब देख पाये जब फेसबुक का प्रसार हुआ था।
अगली सुबह सुकेश, भूमि, तेजस और आर्यमणि को अपने साथ लिया और किताब वाले घर में चला आया…. "बाबा, आप आर्य को अंदर ले जाने वाले हो।"..
सवाल की गहराई को समझते हुए सुकेश कहने लगा… "हां शायद। मुझे लगता है चीजें जितनी पारदर्शी रहे उतना ही अच्छा होगा। आर्य वैसे भी है तो परिवार ही।"..
तेजस:- लेकिन बाबा क्या वो चीजों को समझ पाएगा?
सुकेश:- जब मैंने फैसला कर लिया है तो कुछ सोच–समझकर ही किया होगा। और आज से आर्य तुम दोनो का उत्तरदायित्व है, जैसे मैंने तुम्हे चीजें समझाई है, तुम दोनो आर्य को समझाओगे।
आर्यमणि:- क्या कुछ ऐसा है जो मुझे नहीं जानना चाहिए था मौसा जी। या कल अंजाने में मैंने आपका दिल दुखा दिया।
सुकेश:- ज्ञान का प्रसार जितने लोगों में हो अच्छा होता है। बस बात ये है कि तुमसे जिस कार्य को सम्पन्न करवाना चाहते हैं, उसके लिए हमने 25 साल की आयु निर्धारित की है। वो भी केवल प्रहरी समूह के सदस्य के लिए। पहली बार किसी घर के सदस्य को वो चीजें दिखा रहे है।
आर्यमणि:- मौसा जी फिर ये मुझे नहीं देखना है। बाद में आप मुझे प्रहरी सभा में सामिल होने कहोगे और वो मैं नही कर सकता...
तेजस:- मेरी अनुपस्थिति में मेरा प्रतिनिधित्व तो करने जा सकते हो ना। भूमि के साथ खड़े तो हो सकते हो ना। पलक जब अपना जौहर दिखा रही होगी तो उसकी मदद कर सकते हो ना। चित्रा और निशांत के लिए खड़े तो रह सकते हो ना।
आर्यमणि:- सकते वाला तो बात ही नहीं है दादा, मै ही सबसे आगे खड़ा रहूंगा। मै लेकिन प्रहरी समूह का हिस्सा नहीं हूं, बस ये बात मै अभी से साफ कर रहा हूं।
सुकेश:- हम जानते है ये बात। जया और केशव का भी यही मत है, इसलिए उसने तुम्हे कभी प्रहरी समूह के बारे में नहीं बताया और ना ही उसके और हमरे बीच क्या बातें होती थी वो बताया होगा।
सभी लाइब्रेरी में थे। इनकी बातें चल रही थी। इसी बीच दीवार के किनारे से एक गुप्त दरवाजा खुल गया। अंदर का गुप्त कमरा तो वाकई काफी रहस्यमय था। पीछे एक पूरी लाइब्रेरी थी लेकिन इस गुप्त कमरे में भी कई सारी पुस्तक थी। दीवार पर कई सीसे के सेल्फ बने थे, जिसमे कई तरह की वस्तु थी। आर्यमणि उन वस्तुओं का प्रयोग नही जानता था, लेकिन सभी वस्तुओं में कुछ तो खास था। एक सेल्फ के अंदर एक लंबी सी छड़ी थी। ऐसा लग रहा था, मानो किसी जादूगर की छड़ी हो, जिसे दंश कहते थे।आर्यमणि जिज्ञासावश उस सेल्फ को हाथ लगा लिया।
उसने जैसे ही सेल्फ को छुआ, तेज सायरन बजने लगा। आगे चल रहे सुकेश ने पीछे मुड़कर देखा और तेजस को अपनी नजरों से कुछ समझाया। चंद सेकेंड तक अलार्म बजने के बाद बंद हो गया और तेजस उस शेल्फ के पास पहुंचते.…. "ये किसी महान ऋषि का दंश था। वह जब मरने लगे तब उन्होंने इसे प्रहरी समुदाय को सौंप दिया था, ताकि कोई गलत इस्तमाल न कर सके। तब से यह दंश प्रहरी के कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है?"..
आर्यमणि:– वाउ!!! एक असली पौराणिक वस्तु, जिसे मंत्रों से सिद्ध किया गया है। क्या मैं इसे देख सकता हूं?
तेजस:– नही, इसे कोई हाथ नहीं लगा सकता...
आर्यमणि:– क्या बात कर रहे? क्या मौसा जी भी नही?
तेजस:– कोई नही, मतलब कोई नही...
आर्यमणि:– यदि कोई इसे चुरा ले, या फिर जबरदस्ती हाथ लगाने की कोशिश करे...
तेजस:– ऐसा कभी नहीं हो सकता...
आर्यमणि:– लेकिन फिर भी... यदि ऐसा हुआ तो?
सुकेश, थोड़ा गंभीर आवाज में.… "तेजस ने कहा न... ऐसा हो ही नही सकता... जो बात होगी ही नही उसमे दिमाग लगाने का कोई अर्थ नहीं... हमे ऊपर चलना चाहिए.…
सुकेश ने सबको आगे किया और खुद पीछे–पीछे चलने लगा। लाइब्रेरी के पीछे कमरा और कमरे के अंत में एक घुमावदार सीढ़ी जो ऊपर के ओर जा रही थी। ऊपर के १४ फिट वाले कमरे के पीछे का जो 8 फिट का हिस्सा छिपा था, उसी का रास्ता। आर्यमणि के लिए ऊपर और भी आश्चर्य था। 6 कमरे के पीछे बना 8 फिट चौड़ा 90 फिट लंबा गुप्त हॉल। चारो ओर दीवार पर हथियार टंगे थे। चमचमाती रसियन, जर्मन और यूएस मेड अत्याधुनिक हथियार रखे थे। उसी के नीचे कई साइज के तलवार, भाला, बरछी, जंजीर और ना जाने क्या-क्या। कमरे की दीवार पर तरह-तरह के स्लोक लिखे हुए थे। आर्य चारो ओर का नजारा देखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।
चलते-चलते दीदार उस पुस्तक के भी हुए जिसके आकर्षण में आर्यमणि नागपुर आया था। आर्यमणि सबके पीछे ही खड़ा था और उस पुस्तक को अपने पास होने का अनुभव कर रहा था। वो आगे बढ़कर जैसे ही उस पुस्तक को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढाया… "नाह ! ऐसे नहीं। इसमें 25 अध्याय है और हर अध्याय को पढ़ने के लिए एक परीक्षा। कुल 25 परीक्षा देने होंगे तभी इस पुस्तक को हाथ लगा सकते हो, इसे पढ़ सकते हो। इसलिए तो इसके जानने की आयु भी हमने 25 वर्ष रखी है।"… शुकेश मुस्कुराते हुए पुस्तक खोलने की विधि का वर्णन करने लगा...
आर्यमणि:- और वो 25 परीक्षाएं क्या है मौसा जी?
सुकेश:- 25 अलग-अलग तरह के हथियारबंद लोगो से एक साथ लड़ना और जीत हासिल करना। लेकिन एक बात ध्यान रहे, लड़ाई के दौरान एक कतरा खून का बहना नहीं चाहिए।
आर्यमणि:- इस से अच्छा मै फिजिक्स, मैथमेटिक्स न पढ़ लूं। वैसे मौसा जी बिना परीक्षा दिए इस किताब को खोले तो..
सुकेश:- एक कोशिश करो, खोलकर दिखाओ इस पुस्तक को।
आर्यमणि आगे बढ़कर किताब के ऊपर ऐसे हाथ फेरा जैसे किसी मासूम बच्चे के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हो। हाथ लगने से ही किताब का रंग बदलना शुरू हो गया। ऊपर का जो काला कवर था वो बदलकर हरे रंग का हो गया और कुछ अजीब सा लिखा आ रहा था।
सुकेश आश्चर्य से आर्यमणि का चेहरा देखते हुए..… "तुमने अभी क्या किया?"
आर्यमणि:- केवल स्पर्श ही तो किया है, आप भी तो यहीं हो।
सुकेश:- किताब तुम्हारे स्पर्श को पहचानती हुई कह रही है, धन्यवाद जो तुम यहां तक पहुंचे, अपने लक्ष्य में कामयाब हो। किताब तुमसे खुश है।
आर्यमणि:- खुश होती तो खुल ना जाती। मुझे तो आप पर शक होता है कि आप कोई सॉलिड जादूगर हो।
सुकेश:- और तू ये क्यों बोल रहा है?
आर्यमणि:- क्योंकि आपने जो अभी किताब के साथ किया वो अद्भुत है। खैर जो भी हो यहां तक लाने का शुक्रिया। मेरी इंजिनियरिंग की बुक ही सही है, मै वही पढूंगा। हर 6 महीने में अपना एग्जाम दूंगा और कोशिश करूंगा किसी विषय में बैक ना लगे।
भूमि:- बाबा चिंता मत करो, इसे मै तैयार करूंगी।
आर्यमणि:- 25 लोग और 25 तरह के हथियार, दीदी मै तो सहिद ही हो जाऊंगा।
भूमि:- बात शहीद की नहीं बल्कि आनंत कीर्ति की है। बाकी मै हूं ना। चलो नीचे चला जाए। आर्य मेरे साथ रहना, मै चाहती हूं यदि मै कहीं भटकूं तो तुम मुझे संभालना।
आर्यमणि:- ठीक है दीदी।
भूमि और आर्यमणि सीधा पहुंचे गेस्ट रूम में, जहां मामा का परिवार रुका हुआ था। गेस्ट रूम का क्या नजारा था। भूमि और आर्यमणि एक ओर दरवाजे के बाहर देख रहे थे जहां हॉल में उसका पूरा परिवार बैठा था। नौकरों की कोई कमी नहीं फिर भी एक बहु अपने हाथ से चाय दे रही थी। बच्चे कभी अपने इस दादी तो कभी अपने उस दादी, तो कभी अपने दादा। जिसके साथ मन हुआ उसके साथ खेल रहे थे। अंदर मामा की फैमिली थी। मामा कुर्सी पर बैठकर मोबाइल चला रहे थे। मामी उसके बाजू में बैठकर मोबाइल चला रही थी। ममेरा भाई–बहन बिस्तर के दोनो किनारे पर लेटकर मोबाइल चला रहे थे। सभी मोबाइल चलाने में इतने मशगूल थे कि होश ही नहीं कमरे में कोई आया है।
भूमि:- वंश, नीर तुम दोनो बाहर जाओ। हमे कुछ जरूरी बात डिस्कस करनी है।
अरुण:- नहीं तुम रहने दो, हम अभी जाकर दीदी से ही डिस्कस कर लेते है।
भूमि:- कोई बात नहीं है मामा जी, जैसा आप ठीक समझे।
भूमि, आर्यमणि के साथ हॉल में चली आयी और पीछे-पीछे मामा और मामी भी.. अरुण, सुकेश के पास खड़ा होकर.… "बड़े जीजाजी, बड़ी दीदी आपसे कुछ बात करनी थी।"
सुकेश:- हां अरुण कहो ना।
अरुण:- जीजाजी वो मै बिजनेस में कहीं फंस गया हूं, आलम यें है कि यदि जल्द से जल्द मैटर सॉल्व नहीं किया तो हम सड़क पर आ जाएंगे।
सुकेश:- हम्मम ! कितने पैसे की जरूरत है।
इस से पहले की अरुण कुछ कहता, जया की भावना फूट पड़ी। अनायास ही उसके मुख से निकल गया.… "अरुण तू कितना स्वार्थी हो गया रे।"
अरुण, चिढ़ते हुए एक बार जया को देखा, इसी बीच उसकी पत्नी कहने लगी… "मुझे तो पहले से पता था कि हम रोड पर भी आ जाए तो भी ये हमारी मदद नहीं करेंगे। जान बूझकर हमे यहां अटकाकर रखे है।"..
अरुण, चिढ़ते हुए एक बार जया को देखा, इसी बीच उसकी पत्नी कहने लगी… "मुझे तो पहले से पता था कि हम रोड पर भी आ जाए तो भी ये हमारी मदद नहीं करेंगे। जान बूझकर हमे यहां अटकाकर रखे है।"..
सुकेश:- जया ने अपने भाई से कुछ कहा है, इसमें इतना आवेश में आने की क्या जरूरत है। तुम लोगों ने भी तो जया को बेवजह बहुत कुछ सुनाया था। इतने सालों के रिश्ते में तुम्हे हमारी तब याद आयि जब पैसों की जरूरत हुई। जया का सच सामने आने के बाद भी एक जरा शर्म आई, जो झूठे मुंह माफी ही मांग लेते... भूमि सुनो...
भूमि:- हां बाबा..
अरुण:- जीजाजी क्या है ये पुरा घर का संचालन बेटी के हाथ में दे दिए हो।
वैदेही:- मामाजी हमने पुरा घर का संचालन भूमि के हाथ में नहीं दिया है बल्कि घर में अलग-अलग मामलों के लिए अलग-अलग लोग है।
भूमि:- छोड़ो ना भाभी। बाबा मैंने पता किया है मामाजी ने हर किसी से गलत डील किया है, जिस कारण फसे है। जिस मॉल के केस में ये उलझे है, ठीक उसी वक़्त इन्होंने अपना लगभग पैसा..
भूमि अपनी बात कह ही रही थी ठीक उसी वक़्त आर्यमणि भूमि के कान में कुछ कहा। कुछ शब्द एक दूसरे से कहे गए और उसके बाद… "आपको कितने पैसे चाहिए मामा जी।"..
अरुण:- 500 करोड़।
सुकेश:– 500 करोड़... एक बार जरा फिर से कहना...
प्रीति:– इन्होंने 500 करोड़ कहा...
सुकेश:– इतने सालों बाद हमारे घर आये। चलो मान लिया की भूमि और तेजस बड़े हो गये है, लेकिन घर में तेजस के बच्चे तो है। उनके लिए तो 5 रुपए की टॉफी तक नही लाये, और हमसे 500 करोड़ की उम्मीद रखे हो। जया ने तुम्हे स्वार्थी कहा है तो कुछ गलत नही कहा...
अरुण:- जीजाजी 500 करोड़ कोई बहुत बड़ी रकम नहीं आपके लिए। धंधे में कहीं फसा हूं इसलिए परेशान हूं। और यही वजह है कि इस वक्त मुझे कुछ सूझ नही रहा, वरना मैं अपने भांजे के बच्चों के लिए कुछ न करता। वैदेही के लिए कुछ न लेकर आता। यदि आप मेरी परिस्थिति को सोचते तो बच्चों की बात बीच में न लाते। चलो प्रीति तुम सही कही थी, हमारा दिन बर्बाद किया।
भूमि:- मामाजी पैसे और परिवार को अलग ही रखो तो अच्छा है। 5 करोड़ या 10 करोड़ नहीं आप मांग रहे है कि किसी तरह अरेंज करके से दिए जाए।
प्रीति:- 700 करोड़ का शॉपिंग मॉल तो अपनी दूर की चहेती बहन नम्रता को गिफ्ट कर आयी हो और तुम हमे ऐसी बात कह रही।
भूमि:- हां मै वहीं कल्चर आगे बढ़ा रही हूं जिस कल्चर में मै पली हूं। काका (उज्जवल भारद्वाज) ने जब मुझे अपना उतराधिकारी बनाया था तब उन्होंने नागपुर के बीचोबीच पुरा जमीन का टुकड़ा और साथ ने 180 करोड़ कैश गिफ्ट किए थे। ताली एक हाथ से नहीं बजती मामीजी।
अरुण:- अच्छा ऐसी बात है क्या? यदि मेरी जगह जया दीदी का बेटा होता फिर भी तुम लोग ऐसी ही बातें करते क्या?
मीनाक्षी:- तू घर का सदस्य होता तो जया का बेटा नही बल्कि आर्य कहता। और दिया तो तुझे भी है, लेकिन तेरे आंख में पानी नहीं है। बांद्रा में बाबा ने मेरे और जया के नाम से जो प्लॉट लिया था उसे तुझे ही दी, ना की आर्य को दे दी। भूमि बांद्रा में 10000 स्क्वेयर फीट जगह की कीमत क्या होगी बताओ जरा।
भूमि:- आई मुंह मांगी कीमत। कम से कम हजार करोड़ तो दे ही देंगे।
मीनाक्षी:- अब बोल अरुण। तूने तो हमसे रिश्ता तोड़ लिया था तब भी तेरे एक बुलाए पर हम दोनों बहन पहुंची थी रजिस्ट्रेशन करवाने। यहां आर्य का लगन तय कर दिया, तूने तो होने वाली बहू को आशीर्वाद तक नहीं दिया। तुझे देते रहे तो ठीक है, दूसरों को कुछ दे तो तेरे आंख में खटकता है कि ये धन दूसरे को क्यों दे रही मुझे ही दे दे। भूमि ये स्वार्थी सबके बीच आया है मदद मांगने, जानती हूं ये बेईमान है, लेकिन फिर भी का इसकी मदद कर दे।
भूमि:- ठीक है इनसे कह दो भाऊ से जाकर मिल लेंगे। लेकिन भाऊ के साथ डील में गड़बड़ होगी, तो ये जाने और इनका काम।
मीनाक्षी:- सुन लिया ना तुम दोनो मिया बीवी ने।
अरुण:- जी सुन लिया। कम से कम 5 साल का वक़्त बोलना देने, ताकि मै सब सैटल कर सकूं।
सुकेश:- जब इतना कर रहे है तो ये भी कर लेंगे। अरुण दोबारा फिर कभी अपने उलझे मामले लेकर मत आना, परिवार से मिलने आना।
अरुण:- जी जीजाजी। अब हम चलते है, सारा काम हमारा रुका हुआ है।
सुकेश:- ठीक है जाओ।
अरुण के जाते ही मीनाक्षी और जया, दोनो के आंखो में आंसू आ गए। सुकेश दोनो को चुप करवाते हुए… "हर इंसान एक जैसा नहीं होता। शायद ये तुम दोनो के भाई कहलाने के लायक नहीं।"..
मीनाक्षी:- थैंक्स भूमि, क्या करूं एक ही भाई है ना।
भूमि:- बस भी कर आई, मासी तुम भी चुप हो जाओ। हमने मामा का प्रॉब्लम सैटल कर दिया है। अच्छा अब तुम सब सुनो, मै आर्य को ले जा रही हूं।
मीनाक्षी:- जा ले जा, मेरी बहन है ना यहां। सुनो जी केशव बाबू का ट्रांसफर नागपुर करवाओ। ये लोग अपने परिवार से बहुत दिन दूर रह लिये।
सुकेश:- जी हो जाएगा, और कोई हुकुम।
मीनाक्षी:- नहीं और कोई हुक्म नहीं।
वैदेही:- आई, बाबा ने वो काम कल ही कर दिया था, बस कह रहे थे भूमि को नहीं बताने, वरना आर्य के मोह में ये मौसा जी का ट्रांसफर नहीं होने देंगी।
जया:- नाना हम यहां भी रहे तो भी आर्य भूमि के पास ही रहेगा, और जिला अध्यक्ष आवास यहां, दीदी के घर।
भूमि:- बच गई मासी, वरना नागपुर की जगह कोल्हापुर का ट्रांसफर लेटर आता।
सभा समाप्त होते ही हर कोई अपने अपने काम के लिए निकल गए। डॉक्टर ने भी आर्यमणि की रिकवरी को देखते हुए उसे कॉलेज जाने की अनुमति दे दी थी, इसलिए वो भी कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रहा था, तभी उसके कमरे बाहर निशांत और चित्रा शोर मचाते हुए पार्टी, पार्टी चिल्लाने लगे। दोनो की जोश से भरी जोरदार आवाज सुनकर आर्यमणि हंसता हुआ बाहर आया।
चित्रा वेसल बजाती... "पार्टी–पार्टी".. और ठीक वैसे ही निशांत भी कान फाड़ वेसल बजाते... "पार्टी–पार्टी"
आर्यमणि, हंसते हुए.… "हां ले, लेना पार्टी, अब सिटी बजाना बंद भी करो"…
आर्यमणि की बात सुनकर, निशांत और चित्रा दोनो उसे घेरकर, उसके कानो में वेसल बजाते... "पार्टी–पार्टी"…
आर्यमणि:– अब क्या कान फाड़ोगे? ऐसे पार्टी–पार्टी चिल्लाओ नही... कहां, कब और कैसी पार्टी चाहिए...
चित्रा:– हमे ऐसी वैसी नही, एक यादगार एडवेंचरस पार्टी चाहिए...
निशांत:– हां चित्रा ने सही कहा...
भूमि, जो इनका शोरगुल कबसे सुन रही थी.… "वैसे मेरे विचार से रसिया के बोरियल जंगल में तुम लोग पार्टी ले सकते हो। आखिर आर्यमणि ने उस जंगल को पैदल पार किया था, चप्पे चप्पे से वाकिफ भी है और बेस्ट लोकेशन को जनता भी होगा।
भूमि अपनी बात कहकर मुस्कुराती हुई आर्यमणि को देखने लगी। मानो कह रही हो, तुम्हारी कहानी को एक बार हम भी तो क्रॉस चेक कर ले। आर्यमणि, भूमि के इस तिकरम पर हंसते हुए.… "जमा देने वाली ठंड का यदि मजा लेना चाहते हो तो मुझे कोई ऐतराज नहीं। प्लान कर लो कब चलना है।"
निशांत और चित्रा दोनो अपने दोस्त के हाथ में अपना हाथ फसाकर.… "फिलहाल हम कॉलेज चलते हैं। भूमि दीदी आप करते रहो आर्य के बीते ४ साल को क्रॉस चेक, पार्टी तो हम अपने हिसाब से लेंगे। चले आर्य..."
दोनो भाई बहन एक लय से एक साथ अपनी बात कही और दोनो आर्यमणि के साथ कॉलेज के लिए निकल गये। इधर कल रात पलक इतनी थकी थी आकर सीधा अपने कमरे में गई और बिस्तर पर जाकर लेट गई। पलक के कानो में वो बात मिश्री की तरह घोल रही थी… "मैं सबको दिल से चाहता हूं और साथ में पलक को भी"… कितना गुदगुदाने वाला एहसास था। रात भर गुदगुदाते ख्याल आते रहे। कॉलेज का मामला पहले से ही सैटल, ऊपर से आर्यमणि ने वादे के मुताबिक बिना दोनो के बारे में जाहिर किये रिश्ता भी तय करवा दिया। अब ना जाने तब क्या होगा जब वो दोनो अकेले में होंगे।
खैर, सुबह का वक़्त था। आर्यमणि, चित्रा और निशांत के साथ कॉलेज पहुंचा। उन दोनो को विदा कर आर्यमणि, रूही को मैसेज करके लैब बुला लिया। रूही जल्दी से लैब पहुंची और आते ही अपना टॉप निकाल दी। आर्यमणि, उसके हाव–भाव देखकर.… "जलते तवे पर बैठी हो क्या, जो कपड़े भी काटने दौड़ रहे।"
रूही:- अभी अंदर का जानवर हावी है जो मुझसे चिंखकर कह रहा.… "कौन सा जानवर कपड़े पहन कर घूमता है बताओ।"
आर्यमणि:- टॉप पहन लो। मुझे अभी सेक्स में इंट्रेस्ट नहीं, बल्कि सवालों के जबाव में इंट्रेस्ट है।
रूही:- वो तो हर धक्के के साथ भी अपना सवाल दाग सकते हो आर्य।
आर्यमणि:- मै अपना पैक बनाने का इरादा छोड़ रहा हूं, तुम पैक में रही तो मुझे ही अपनी रानी से दूर होना पर जायेगा।
रूही:- ऐसे अकड़ते क्यों हो। तुम तो खुद से आओगे नहीं, इसलिए साफ-साफ बता दो कि कब मेरे अरमान पूरे करोगे..
आर्यमणि:- आज रात तुम्हारे घर में, तुम्हारे ही बिस्तर पर… अब खुश..
रूही:- ठीक है मै बिस्तर सजा कर रखूंगी। हां पूछो क्या पूछना है।
आर्यमणि:- अपने बाप को डूबता क्यों देखना चाहती हो।
आर्यमणि, रूही के साथ अपनी पहली मुलाकात को ध्यान में रखकर बात शुरू किया, जब उसने जंगलों में रूही की जान किसी दूसरे पैक के वेयरवुल्फ से बचाया था.…
रूही:- तुम अनजानों की तरह सवाल ना करो। सरदार खान मुझे मारकर अपनी ताकत बढ़ाय, उस से पहले मै उसे मारकर अल्फा बन जाऊंगी।
आर्यमणि:- सरदार खान को मारकर तुम अल्फा नहीं फर्स्ट अल्फा बनोगी। इसका मतलब उस रात तुम पर 2 अल्फा ने हमला किया था ना?
रूही:- हां लेकिन 2 अलग-अलग मामले मे तुम कौन सा संबंध ढूंढ रहे?
आर्यमणि:- तुम्हारी दूरदर्शिता को समझ रहा हूं। 2 अल्फा वेयरवुल्फ जब एक साथ हो, तब कोई वूल्फ पैक उसे हाथ नहीं लगा सकता। मै तो फिर भी अकेला था। जैसे ही मैंने उन दोनों को मारा, तुम समझ गई कि मैं एक फर्स्ट अल्फा हूं। एक फर्स्ट अल्फा दूसरा फर्स्ट अल्फा मार सकता है, तुमने यही सोचकर मुझपर जाल बिछा रही। ताकि मै और तुम्हारे बाबा भिड़े और जब वो कमजोर पर जाय तब तुम उसे मारकर उसकी जगह लेलो।"
रूही:- हां तो वो कोई संत है क्या? हर साल किसी ना किसी वूल्फ पैक के कई बीटा को खा जाता है। 20 वूल्फ पैक की पूरी बस्ती है, जिसमें केवल 6 वूल्फ पैक के पास अल्फा बचा है। वो तो 12 अल्फा को भी खा चुका है। तुम्हे क्या पता वो क्या है.. वो एक बीस्ट से कम नहीं है आर्य। उसकी ताकत अद्भुत है। वो अकेला चाह ले तो बस्ती क पूरे पैक को खत्म कर सकता है। कमीना साला, हवस और बदन नोचने के मामले में भी वो जानवर है। वो अपनी बस्ती में कहीं भी, किसी के साथ भी संभोग कर सकता है। अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बच्चा पैदा करता है, ना की उसे अपने बच्चों से कोई इमोशन है।
आर्यमणि:- तुम्हे एक अल्फा बनना है, या तुम्हे फर्स्ट अल्फा बनना है, ये बताओ?
रूही:- मुझे नॉर्मल होना है, बिल्कुल सामान्य इंसानों की तरह। घूट गई हूं मै अपनी ज़िंदगी से।
आर्यमणि:- बंदिश खोल दूं तो क्या तुम ये हवाई अवतार छोड़ दोगी।
रूही:- तुम्हरे आज रात के वो मेरे बिस्तर में पूरे मज़े के सेशन के बाद… जान बचाने का शुक्रिया तो कह दूं तुम्हे।
आर्यमणि:- ब्लड ओथ लो फिर, आज अपने पैक का काम शुरू करते है।
रूही:- क्यों झुटी आस दिला रहे हो। क्या तुम वाकई में मेरे साथ पैक बनाना चाहते हो?
आर्यमणि:– जब यकीन ही नहीं फिर बात खत्म करो। जाओ यहां से...
रूही, झटपट आर्यमणि के पाऊं को पकड़कर रोकती.… "क्या अकडू हो बॉस। हां मुझे यकीन है। मैं तो बस एक और बार सुनिश्चित करना चाहती थी की आप हो क्या? अभी खुद मुंह से कबूल किये कि फर्स्ट अल्फा हो जो की हो नही क्योंकि नरभक्षी और खून पीने की प्रवृत्ति तो क्या आप के वुल्फ होने के निशान दूर–दूर तक नही दिखते। फिर वुल्फ नही हो तो एक वुल्फ के साथ पैक क्यों बना रहे? हो क्या आप.. बस यही सुनिश्चित करना चाह रही हूं...
आर्यमणि:– ज्यादा सुनिश्चित के चक्कर में रहोगी तब यही हाल होना है। वक्त आने पर शायद तुम्हे पता चल जाए की मैं क्या हूं। फिलहाल फर्स्ट अल्फा ही रहने दो जो एक अल्फा का आसानी से शिकार कर लेता है। अब काम की बात कर ले। तो क्या तुम पैक में सामिल होने के लिए तैयार हो?
रूही:– बॉस क्या मैं पैक में सामिल हुई तो तुम मुझे टैटू बाना दोगे?
वेयरवुल्फ के लिए टैटू बनाना टेढ़ी खीर होती है। वुल्फ पैक का मुखिया जिसके ब्लड ओथ से पैक बना, वो टैटू का निशान दे सकता है। इसके अलावा 1 बीटा को 1 हाफ अल्फा टैटू के निशान दे सकता था। एक हॉफ अल्फा को 1 अल्फा और 1 अल्फा को फर्स्ट अल्फा टैटू का निशान दे सकते थे। वरना वेयरवोल्फ शरीर पर टैटू के निशान नहीं दिया जा सकता क्योंकि वेयरवोल्फ बहुत तेजी के साथ हील होते हैं और हील होने के बाद निशान नहीं रहता। किसी की हड्डियां तोड़ने में भी यही दूसरी सीरीज चलती है। किसी भी वेयरवुल्फ का शरीर काफी तेजी से हिल करता है। लेकिन एक पायदान ऊपर के वेयरवुल्फ का तोड़ा हील नहीं होता उसे फिर सामान्य इंसानों के तरह मेडिकल प्रोसीजर करना पड़ता है।
आर्यमणि, रूही की जिज्ञासा देखकर हंसते हुए.… "हां बनवा लेना टैटू, बस ज्यादा पेंचीदा टैटू मत कहना बनाने के लिए।"
रूही:- एक बैंड टैटू लेफ्ट हैंड में। एक हार्ट बीट कम करने वाला टैटू जो मुखिया देता है अपने बीटा को। एक अपने पैक का टैटू और एक रिचुअल टैटू।
आर्यमणि:- बस इतना ही। नाना और भी बता दो। एक काम करता हूं, पीठ पर पूरी दुनिया का नक्शा ही बना देता हूं।
रूही:- अब जब टैटू बना ही रहे रहे हो तो इतना कर दो ना, प्लीज…
आर्यमणि:- हम्मम ! ठीक है आज रात जब मै आऊंगा तब ये टैटू का काम कर दूंगा। अब मुझे ये बताओ, उस रात बीस्ट पैक (सरदार खान का वुल्फ पैक) से कौन सा दूसरा वूल्फ पैक पंगे करने आया था?
रूही:- उस रात जंगल में मुझपर भी अचानक हमला हुआ था। एक भटका हुआ पैक जो सरदार खान से क्षेत्र के लिए लड़ने आया है। 30 वुल्फ का पैक है और ट्विन अल्फा मुखिया।
रूही जो बता रही थी वो एक प्रतिद्वंदी पैक था, जो सरदार खान के पैक पर हमला करने आया था। वूल्फ पैक के बीच ये लड़ाई आम बात होती है जहां एक वूल्फ पैक दूसरे वूल्फ पैक के इलाके में अपना निशान छोड़ते है। उन्हे लड़ने के लिए चैलेंज करते हैं।
रूही जो बता रही थी वो एक प्रतिद्वंदी पैक था, जो सरदार खान के पैक पर हमला करने आया था। वूल्फ पैक के बीच ये लड़ाई आम बात होती है जहां एक वूल्फ पैक दूसरे वूल्फ पैक के इलाके में अपना निशान छोड़ते है। उन्हे लड़ने के लिए चैलेंज करते हैं।
अमूमन एक वूल्फ पैक मे 6 से 8 सदस्य होते है। जितना बड़ा वूल्फ पैक उतना ही शक्तिशाली वो लोग। 30 का वूल्फ पैक मतलब काफी मजबूत वूल्फ पैक था जो किसी से भी नहीं डर सकते थे। ऊपर से इस पैक का मुखिया ट्विन अल्फा। इसका मतलब होता है कि जब ट्विन वूल्फ जन्म लेते है और अल्फा बनते है, तब वो दोनो अपने शरीर को एक दूसरे मे निहित करके एक नया और विशाल शरीर बना सकते हैं। और फिर अपने मजबूत से मजबूत दुश्मनों पर भी भारी पड़ सकते हैं।
आर्यमणि:- ट्विन अल्फा मुखिया। फिर रहने दो, वो सरदार खान से भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा। यहां तुम सरदार खान के पैक मे 6 अल्फा बता रही थी। उसमे से किसने तुम्हे ज्यादा दर्द दिया है।
रूही:- सरदार खान पहले नंबर पर उसके बाद उसका राइट हैंड नरेश ने।
आर्यमणि:- और ये नरेश का पैक कहां मिलेगा।
रूही:- नरेश का पैक है तो किले में ही, लेकिन उसका बीटा यहां कॉलेज आता है।
आर्यमणि:- तो चलो चलते है शिकार पर। लेकिन शिकार पर जाने से पहले..
रूही:- हां ब्लड ओथ लेनी होगी। अपना हाथ आगे बढ़ाओ बॉस..
आर्यमणि ने अपना हाथ आगे बढाया। रूही चाकू निकालकर अपनी हथेली को चिर ली, फिर आर्यमणि की हथेली को चीरकर अपनी हथेली को सामने फैला दी। आर्यमणि उसके ऊपर अपना हाथ रखा।
दोनो 2 मिनट तक मौन खड़े रहे। आर्यमणि ने अपना हाथ हटाया और रूही अपने हाथ को उपर से नीचे ले जाकर देखती हुई… "कमाल की कशिश है तुम्हारे खून में। मै इसे मेहसूस कर सकती हूं। इसकी खुशबू.… मै बयान नहीं कर सकती की मुझे कैसा महसूस हुआ। ये कमाल के है आर्य…
आर्यमणि, रूही के हाथ में एक नक्शा दिया। यह नक्शा आस–पास के जंगलों और घाटियों का था, जिसपर आर्यमणि ने कयि पॉइंट मार्क किये थे। सारी प्लानिंग विस्तार में समझा दिया तथा अंधेरा होने बाद किस पॉइंट पर मिलना है, यह बताकर आर्यमणि वहां से निकल गया। रूही अब भी अपने उस हाथ को उलट–पलट कर देख रही थी, जिससे ब्लड ओथ ली थी। आज से पहले उसने कभी इतना अच्छा और अपने आप में इतना निडर मेहसूस नहीं की थी।
पहले क्लास खत्म होने के इंतजार में आर्यमणि जाकर कैंटीन में ही बैठ गया। आज कॉलेज का पूरा माहौल बिल्कुल शांत–शांत था। आर्यमणि पर हसने वाले लड़के-लड़कियां, आज उसके ओर देखकर फीकी मुस्कान देते और वहां से कट लेते। धड़कनों की रफ्तार और शरीर में स्त्राव होने वाले हार्मोन्स से आर्यमणि को पता चल रहा था कि कौन गुस्से से देखकर जा रहा था और कौन डरकर।
कुछ देर इंतजार करने के बाद इनके सभी दोस्त भी कैंटीन पहुंच रहे थे। पलक की नजर जैसे ही आर्यमणि पर गई उसके कदम अपने आप ही धीमे हो गए। दिल अंदर से जैसे गुदगुदा रहा हो और रक्त में अजीब ही तरंगों का संचार हो रहा हो। वो समझ चुकी थी कि आर्यमणि आज यहां क्यों आया है।
पलक फिर अपने मन में कुछ सोची और तेजी से कदम बढ़ाकर आर्यमणि के पास पहुंची…. "तुम आराम करने के बदले यहां क्या कर रहे हो।"..
आर्यमणि:- सॉरी जा रहा हूं।
चित्रा:- बस-बस इतना ओवर एक्टिंग करने की जरूरत नहीं है। अब आ ही गया है तो बैठ जा। ये बता उस दिन इतने सारे एक्शन दिखाने के बाद तूने वो हरकत की क्यों?
पलक:- 2 परिवार को एक करने के लिए। यहां ये सब डिस्कस मत करो।
माधव:- ई सब फालतू की बात छोड़ो और हम सबको पार्टी दो।
निशांत:– मेरा दोस्त केवल पार्टी नही, बल्कि ग्रैंड पार्टी देगा। सुबह ही हमारी बात हो गयि है, बस छुट्टियों का इंतजार है। वूहू–वूहू–वूहू …
चित्रा, भी पूरे उत्साह में वही पर नाचती हुई.… "छुट्टियों में हम करेंगे पार्टी क्यूंकि... क्यूंकि... क्यूंकि...
इतना कहने के बाद चित्रा और निशांत ने एक दूसरे को देखा और दोनो भाई–बहन एक लय में... "राजा को रानी से प्यार हो गया... पहली नजर में इकरार हो गया"…
पलक और चित्रा के जोश और उत्साह को देखकर आर्यमणि हंसने लगा। पलक की भी हंसी निकल गयि। दोनो भाई–बहन को आर्यमणि चुप करवाते.… "मैं तो पार्टी दूंगा ही लेकिन पार्टी तो तुम भी दोगी चित्रा। तुम्हारे और माधव के बीच क्या चल रहा है वो मै जानता हूं।
माधव और चित्रा दोनो हड़बड़ाते…. "क्या चल रहा है?"
आर्यमणि:- चित्रा तुम हर किसी से अपनी भावना छिपा सकती हो, लेकिन मुझसे नहीं।
माधव:- क्या बात कर रहे हो आर्य भाई। आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हो।
चित्रा:- आर्य जैसे तेरे और मेरे बीच लोगो को शक हो जाता था, ये भी ठीक ऐसा ही है। दुनिया ये बात कहती तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन तुमने ऐसा सोचा आर्य..
आर्यमणि:- हम्मम ! सॉरी ठीक है तुम लोग बात करो।
"सुनो तो, सुन ना, आर्य… रुक जा ना कहां जा रहा है।.. आर्य.."… पीछे से चित्रा आवाज़ लगाती रही लेकिन वो सुना नहीं और अपनी बाइक उठाकर कॉलेज से बाहर निकल गया।
चित्रा गुस्से में…. "जा चला जा। जब से आया है परेशान कर रखा है। एक दिन भी ऐसा हुआ है जो बैठकर बातें किया हो। जबसे आया है पहले कॉलेज की रैगिंग के कारण मुझसे काटा रहा और अभी मुंह फुला कर भाग गया।"
पलक:- शांत शांत शांत..
चित्रा:- तू क्या शांत-शांत कर रही है। उसे रोक नहीं सकती थी, जब वो जा रहा था। सोची थी अब सब क्लियर हो गया है तो बैठूंगी, बाते करेंगे। उस रात डिस्को नही आया था तो वीक एंड कुछ प्लान करते है, लेकिन नहीं इसको तो ऐटिट्यूड दिखाना है।
निशांत, पीछे से उस माहौल में पहुंचते… "तुम्हे क्या हुआ, बावड़ी क्यों बनी है।"..
पलक:- आर्य रुका नही इसलिए...
निशांत:- वो रुके भी क्यूं? दोनो पर शक तो मुझे भी है। आर्य ने तो वही देखा जो सबने मेहसूस करते है।
पीछे से आर्यमणि चित्रा के गर्दन में हाथ डालकर उसका गर्दन दबाते… "कंप्यूटर साइंस के लिए मैंने तुझसे 6 महीने तक कहा, वही लेते है। तूने क्या कहा मुझे केमिकल इंजिनियरिंग में इंट्रेस्ट है। फिर यहां आकर कंप्यूटर साइंस ली, क्योंकि मुझे सरप्राइज देना चाहती थी।"
"6 महीने बाद तुझे लगा कि अब मै तेरे साथ नहीं पढ़ सकता इसलिए तुमने ब्रांच चेंज करने का सोचा, लेकिन केमिकल इंजीनियरिंग ना लेकर मैकेनिकल में आ गई। ये हृदय परिवर्तन कैसे हो गया।"
"आगे और भी है। जैसे तुझसे आम ड्राफ्ट नहीं होता तू मैकेनिकल के ड्राफ्टिंग में कैसे मास्टर हो गई। तेरे लिए तो थरमोडायनामिक्स ही सर दर्द था फिर ये.."
चित्रा:- बस बस.. सॉरी.. मुझे माधव अच्छा लगने लगा था तो मैंने उसी के वजह से मैकेनिकल ली। 3 महीने से हम रिलेशन में है। अब खुश, लेकिन प्लीज माधव का मज़ाक मत उड़ाना।
निशांत:- ये अस्थि पंजर तुम्हारा बॉयफ्रेंड है।
माधव:- हम लवर्स है, ब्वॉयफ्रैंड–गर्लफ्रेंड नहीं।
निशांत:- हिम्मत तो देखो इसकी मेरे सामने ही ये ऐसे कह रहा है।
माधव:- तुम्हारे सामने क्या हम तो तुम्हारे पापा के सामने भी कह देंगे। ये बेशर्मी नहीं है, सच्चा प्यार करते है और उम्र भर साथ रहने का वादा किया है। चित्रा के लिए हम खुद को किसी भी मंच पर प्रूफ कर सकते है।
निशांत:- ठीक है फिर लगाओ अपने बाबूजी को फोन और अपने बाबूजी के सामने ये बात कहकर बताओ...
माधव:– उ बाबूजी अभी मां वैष्णो देवी की यात्रा पर गये हैं।
पलक:– 98XXXXXX05, यही नंबर है न... लो रिंग हो रहा है...
माधव लगभग पलक के पाऊं में गिड़ते.… "अरे नही पलक... कॉल कट कर दो.…" फोन स्पीकर पर था और उधर से कड़कती आवाज... "हां हेल्लो"… जैसे ही उधर से आवाज आयि, माधव रोनी सी सूरत बनाते पलक को देखने लगा... पलक, माधव की हालत पर हंसती हुई... "नमस्ते अंकल जी"
अंकल जी उसी कड़कती आवाज में... "आप कौन हो बेटा"…
पलक:– मैं माधव की दोस्त बोल रही हूं...
अंकल जी:– उ गधा वहां पढ़ने गया है कि लड़कियों संग दोस्ती करने। फोन दो जरा उस गधे को...
पलक:– लेकिन अंकल जी मेरी बात तो सुनिए...
अंकल जी:– देखो बेटी, हम एक अभिभावक होने के नाते यही कहेंगे की अपने पढ़ाई–लिखाई में ध्यान दीजिये। लड़कों संग दोस्ती अच्छी नहीं। बाकी आप रखिये फोन, हम तनिक माधव को कॉल लगाते हैं।
बेचारा माधव.... पलक के इतने छोटे से वार्तालाप के बाद तो जैसे माधव पर बाबूजी नामक कहर ही टूट गया हो। एक लड़की से दोस्ती मात्र की यह सजा हो गई की उसे बाबूजी ने घर बुला लिया, वो भी उसी रात की ट्रेन से। माधव की हालत पर सभी मजे ले रहे थे और माधव उस घड़ी को कोस रहा था जब उसने बड़बोलापन दिखाया।
आर्यमणि, एक किनारे से माधव के कंधे पर हाथ रखते... तुम बहुत साहसी हो माधव, और चित्रा ने अपने लिये बहुत सही लड़का चुना है।
माधव:– हां हमरी लंका लगा के तारीफों के पुल बांध रहे।
दूसरे किनारे से निशांत हाथ रखते.… "अरे घबरा क्यों रहे हो फट्टू, अभी तो कह रहे थे न, खुद को हर मंच पर प्रूफ करोगे... तो जाओ, पहला मंच तो तुम्हारा घर ही है।
माधव:– लेडीज है इसलिए पूरा नहीं बोल सकते लेकिन हमरी तो पूरी तरह फट गई है।
चित्रा और पलक दोनो जोर से हंसती हुई.… "क्या फटी?"
माधव:– हट बेशर्म लड़कियां। हमरी हालत पतली हो रही और सब मजे ले रहे हैं। उस मंच पर कोई सुने तब न कुछ प्रूफ करें। डेमो तो अभी देख लिए न... खाली लड़की से दोस्ती के कारण पहली फुरसत में घर बुलवा लिये। कहीं प्यार मोहब्बत की बात पता चली फिर तो चमरी छिल देंगे और घर पर बिठाकर किसानी करवाएंगे।
चित्रा, माधव की हालत पर हंसती हुई.… "उ बाबूजी हुए, उनका हक है। तुमको किसी मंच पर प्रूफ करने की जरूरत नाही है माधव। वक्त आने पर हम दोनो साथ मिलकर दोनो बाबूजी को मना लेंगे। क्या समझे बुड़बक..
चित्रा की बात जैसे कोई मलहम हो। माधव पूरा राहत महसूस करते.… "हां समझ गये चित्रा"
चित्रा फिर थोड़ी झिझकती हुई निशांत और आर्यमणि के ओर देखी। दोनो ही मुस्कुरा रहे थे मानो उन्होंने चित्रा के फैसले को बिलकुल सही मान लिया हो। और मुस्कुराते हुए दोनो ने अपनी बाहें खोल दी। चित्रा, हंसती हुई पहले निशांत से लिपटकर उसे थैंक्स कहीं, फिर आर्यमणि से। अभी एक मामला थमा नहीं था कि आर्यमणि ने दूसरा मामला उठा दिया… "क्यूं निशांत 1 साल पुराने रिलेशन का हो गया ब्रेकअप।"
निशांत:- कमिने कंफ्यूजन वाला रिलेशन तो तुमने बना दिया है। मेरे ब्रेकअप और पैचअप तो होते रहता है पहले ये बताओ कि सारी दुनिया छोड़कर तुझे पलक ही मिली थी।
पलक:- इतना एक्साइटेड होने की जरूरत नहीं है, घरवालों ने यें रिश्ता तय किया है, लेकिन मै घरवालों के फैसले के लिए बाध्य नहीं।
चित्रा:- राजा को रानी से प्यार हो गया। पहली नजर में इकरार हो गया। दिल जिगर दोनो घायल हुए…
आर्यमणि ने चित्रा का मुंह बंद किया और पीछे से कमर में हाथ डालकर उठाकर ले जाते हुए…. "2 मिनट में आया, कुछ प्राइवेट चैट करनी है।"
आर्यमणि चित्रा को कैंटीन के दूसरे हिस्से में ले जाते…. "हल्ला मत कर, तुझे कैसे पता हमारे बारे में।"..
चित्रा:- "जैसे तुमने मेहसूस किया वैसे ही मैंने। पहली बार जब रैगिंग हो रही थी तो जनाब की नजर किसपर टिकी थी। डिस्को के बाहर मैंने तुम दोनों को बाइक पर साथ जाते देख लिया था। उसी रात तुम दोनों को सड़क पर गले लगते भी देखी। जिस शनिवार मिस पलक हेरोइन के अवतार में तुम्हे पिकअप करके अपने साथ ले गई, मै भी सुबह-सुबह तुम्हे सरप्राइज देने आयी थी लेकिन उल्टा सरप्राइज हो गई। फिर क्या था बस समझ में आ गया कि तुम्हारी रानी की तलाश समाप्त हो गई।"
"मै बहुत खुश हूं तुम्हारे लिए। पलक बहुत अच्छी है और प्यारी भी। हां और हॉट भी है ये उस दिन समझ में आया जब पूरी तरह तैयार होकर निकली। मैत्री के कारन तुम्हे टूटते हुए देखी थी। तुम्हारी गर्लफ्रेंड बनकर उसे दूर करने की भी कोशिश की लेकिन तुम्हारा टूटना जारी रहा। कॉलेज के पहले दिन ही तुम्हे जुड़ते देखी, देखकर दिल को सुकून मिल गया। और चिंता मत कर मै ये बात किसी को नहीं बताउंगी, लेकिन उसके लिए रिश्वत लगेगी।
आर्यमणि:- जो तुम चाहो। चलो चलते है।
दोनो वापस अपने दोस्तो के पास पहुंचे। कुछ देर के बात–चित के बाद सभी अपने-अपने क्लास चल दिए और आर्यमणि वापस घर। घर के अंदर बैठकर वो आसपास के जंगल के इलाकों की मैप देखने लगा। शिकारियों के मैप में बहुत कुछ क्लियर था। आर्यमणि ने नक्शे की तस्वीर निकालकर रूही को भेज दिया। नक्शे में सभी हाईलाइट प्वाइंट थे, किस वक़्त कहां मिलना है। आर्य पुरा मैप तैयार करके भेजकर जैसे ही फुर्सत हुआ वहां उसके कमरे में रिचा पहुंच गई… "हम्मम ! तो तुम वाकई में उस रात नहीं डरे थे।"
आर्यमणि:- किस रात रिचा..
रिचा:- जिस रात हमारी शर्त लगी थी..
आर्यमणि:- मैंने तो पहले ही कहा था।
रिचा:- प्रहरी के बीच में आजकल तुम एक चर्चा के विषय बने हो।
आर्यमणि:- और क्या चर्चा हो रही है?
रिचा:- "कुछ का मानना है कि तुममें कुछ खास शक्तियां है जो जाने–अनजाने में तुम्हे सिक्किम के जंगलों से मिली। शायद तुम्हारे जान बचाने की रुचि को देखते हुए किसी सिद्ध पुरुष ने तुम्हे दी हो। और कई लोगो का मानना है कि तुम एक वुल्फ हो। एक अल्फा जिसके पास कोई पैक नहीं।"
"जिस हिसाब से तुमने एक वुल्फ को मारा और वो हिल नहीं हुआ उससे तो सबको यही लगता है, लेकिन सबकी सोच वहां काम नहीं करती जब उन्हें ये पता चलता है कि तुम प्रहरी के घर रहते हो।"
आर्यमणि:- अच्छा प्रहरी के घर में रहने वाला वुल्फ नहीं होगा, ये कैसा लॉजिक है?
रिचा:- इसे लॉजिक नहीं मैजिक कहते है। माउंटेन एश का मैजिक, जिसके रेखा को कोई भी सुपरनैचुरल पार नहीं कर सकता, और तुम तो माउंटेन एश से घिरे पूरे एक बंगलो में रहते हो।
आर्यमणि:- तो सहमति किस बात पर बनी..
रिचा:- दुनिया एडवांस है और तुमने कुछ खेल रचा है माउंटेन एश के सर्किल को भेदने के लिए, ऐसा लोगो का विचार बना है। बातों से हम केवल निर्दोष या दोषी साबित नही कर सकते है। जैसे तुम कहोगे मेरे घाव जल्दी भर जाए यदि मैं वुल्फ होता और मैं कहूंगी तुमने लेथारिया वुलपिना इस्तमाल किया है। सो इस मौखिक चर्चा को बंद करते हुए कुछ प्रयोग कर लेते है ताकि सबको यकीन हो जाए कि तुम एक वेयरवुल्फ नहीं हो।
आर्यमणि:- और यदि मैं एक वुल्फ निकला तो क्या तुमलोग मुझे मौत दोगे।
रिचा:- हाहाहाहा… प्रहरी मतलब पहरेदार। हम 2 दुनिया के बीच के पहरेदार है, केवल भटकों का शिकार करते है। तुम्हे शिकारियों द्वारा बस हिदायत दी जाएगी की नागपुर में कैसे रहना है।
आर्यमणि:- मै एक संपूर्ण इंसान हूं, और ये मै तुम्हे इसलिए नहीं बता रहा क्योंकि मुझे टेस्ट नहीं देना। केवल पूछने के लिए बताया है, क्या वुल्फ परखने के टेस्ट में किया गया प्रयोग, एक इंसान को दर्द देगा या नहीं। और दर्द होगा तो कितना..
रिचा:- हां टेस्ट में दर्द तो होगा, वो भी भयानक, फिर वो चाहे इंसान या प्रशिक्षित प्रहरी ही क्यों ना हो। लेकिन चिंता नहीं करो, हम तुम्हे फास्ट हील कर देंगे।
आर्यमणि:- और उस दर्द का क्या, जो मुझे टेस्ट के दौरान होगा। उसकी भरपाई कौन करेगा…
रिचा:- उसकी भरपाई प्रहरी समाज करेगा..
आर्यमणि:- नाना मुझे तो रिचा देसाई लेकर जा रही है तो भुगतान भी उसी से चाहिए…..
रिचा:- हम्मम ! ठीक है यदि तुम हमारे जैसे इंसान हये बस कुछ अलग से अलौकिक शक्ति वाले, तब जो हारी हुई शर्त के मुताबिक तुम्हे न्यूड शो दिखाने वाली हूं, उसमे तुम अपनी मर्जी का भुगतान ले सकते हो, मै नहीं रोकूंगी। लेकिन वो वन टाइम होगा।
आर्यमणि:- मचलते अरमान, मुझे मंजूर है। चलो कहां टेस्ट देना है।
रिचा:- प्रहरी के वर्क स्टेशन में.. 20 लोगों के टीम के सामने..
आर्यमणि:- लगता है पूरी तैयारी है।
रिचा 10 मिनट में हॉल में आने के लिये कहकर कमरे से निकल गई। आर्यमणि हालात को समझते हुये कुछ सोचा। टेस्ट में बॉडी डैमेज होना ही था और वो अपनी हीलिंग कैपेसिटी जाहिर नहीं होने दे सकता था इसलिए उसने अपने पास से लेथारिया वुलपिना निकलाऔर एक बार में इतनी मात्रा ले ली जिसका असर 5–6 घंटे में खत्म ना हो।
रिचा 10 मिनट में हॉल में आने के लिये कहकर कमरे से निकल गई। आर्यमणि हालात को समझते हुये कुछ सोचा। टेस्ट में बॉडी डैमेज होना ही था और वो अपनी हीलिंग कैपेसिटी जाहिर नहीं होने दे सकता था, इसलिए उसने अपने पास से लेथारिया वुलपिना निकला और एक बार में इतनी मात्रा ले ली, जिसका असर 5–6 घंटे में खत्म ना हो।
दोनो साथ निकले। कुछ ही देर में आर्यमणि एक बड़े से होटल के रिसेप्शन एरिया में था। रिचा उसे अपने साथ लेकर किचेन के एरिया में आयी, जिसके दरवाजे पर खड़े 2 मुलाजिम ने रिचा से कुछ बातचीत की और आर्यमणि को लेकर चल दिये। किचेन के पीछे लगे लिफ्ट से रिचा ने माइनस 4 बटन प्रेस किया और बेसमेंट के नीचे बने तीन मजिली इमारत के बारे में बताती हुई, वर्क स्टेशन तक ले आयी। ये जगह किसी सीक्रेट एजेंसी के वर्क स्टेशन से कम नहीं लग रहा था। रिचा आर्यमणि को लेकर एक खाली कमरे में पहुंची। कमरे में जरूरत कि कुछ चीजें थी और चारो ओर कवर करता कैमरा लगा हुआ था।
रिचा:- सॉरी आर्य, नथिंग प्रसनल।
आर्यमणि:- मेरे लिए तो ये पर्सनल ही है। मै बस अपनी बहन भूमि और अपनी होने वाली पत्नी पलक के लिए यहां हूं, जो इस जगह को मंदिर मानती है। तुम बेफिक्र होकर प्रयोग शुरू करो।
"हम्मम, कुर्सी पर बैठ जाओ"…
आर्यमणि कुर्सी पर बैठ गया। रिचा ने उसके हाथ और पाऊं को बांध दिया, और मुंह में कपड़ा। शर्ट के बटन को खोलकर, इलेक्ट्रिक वायर की दो चिमटी उसके निपल पर लगा दी। सर पर एक इलेक्ट्रिक ताज, दोनो हाथ, दोनो पाऊं और गर्दन के दोनो ओर चिमटी।
रिचा कैमरे को दिखाकर थम्स उप की और उधर से उसके ब्लूटूथ पर इंस्ट्रक्शन आने शुरू हो गए…. करंट प्रवाह होना शुरू हुआ। धीरे-धीरे धीरे करेंट फ्लो बढ़ता चला गया। आर्यमणि का पूरा बदन झटके के साथ हिलने लगा। लेकिन यहां आर्यमणि की धड़कने बढ़ नहीं रही थी, उल्टा जैसे-जैसे करंट बढ़ रहा था आर्यमणि का हार्ट रेट धीरे-धीरे कम होते-होते 40, 30, 20 तक पहुंच गया।
उसका दिमाग सुन पड़ने लगा। धड़कन धड़कने की रफ्तार बिल्कुल न्यूनतम हो गई। 3 सेकंड में धड़कन एक बार धड़क रही थी। आर्यमणि का स्वांस लेना दूभर हो गया था। छटपटाते हुए उसने कुर्सी के हैंड रेस्ट को उखाड़ दिया। उतनी ही तेजी के साथ बदन से लगे वायर को नोचकर हटा दिया और वहीं नीचे जमीन में बेसुध गिर गया।
रिचा को उधर से जो भी संदेश मिला हो। इधर से वो बड़े गुस्से में… "जितना करंट आप लोगों ने टेस्ट के नाम पर इसके अंदर प्रवाह करने के आदेश दिए है, उसका 20% भी आप में से कोई झेल नहीं पता और किसी भी वुल्फ का तो आधे में जान निकल गई होती।"..
फिर से ब्लूटूथ पर कुछ करने के आदेश मिले और रिचा आर्यमणि को सीधा करके एक चाकू उसके सीने में आधा इंच घुसाकर ऊपर से लेकर नीचे पेट में लगी पट्टियों तक चिर दी। आर्यमणि की तेज चींख उस बंद कमरे में गूंज उठी। खून उसके शरीर से बहने लगा और जख्म भरने के कहीं कोई निशान नजर नहीं आ रहे थे।
फिर सबसे आखरी में हुक्म आया, वुल्फबेन का इंजेक्शन उसके नर्व में चढ़ाया जाय। वुल्फबेन सबसे आखरी टेस्ट था। ये आम इंसान पर कुछ असर नहीं करती। लेकिन यदि किसी वुल्फ को वुल्फबेन इंजेक्ट किया गया हो, तब उसकी ज़िंदगी उतनी ही है जबतक वो वुल्फबेन ब्लड फ्लो के जरिए सीने तक नहीं पहुंचे। एक बार वुल्फबेन किसी वेयरवुल्फ के सीने के अंदर पहुंची, उसकी मृत्यु निश्चित है।
रिचा को कोई आपत्ती नहीं थी इस आखरी टेस्ट से। उसने वुल्फबेन को इंजेक्ट कर दिया और घड़ी देखने लगी। तकरीबन 4 घंटे भर बाद पूर्णतः सुनिश्चित हो चुका था कि आर्यमणि कोई शेप शिफ्टर नहीं है, बल्कि सिक्किम के जंगलों में कुछ ऐसा हुए की उसकी ताकत आम लोगों से ज्यादा है।
नजर धुंधली सी थी, जो धीरे-धीरे साफ होती जा रही थी। आर्यमणि शायद किसी बाथरूम मे था, लेकिन काफी बड़ी ये जगह थी। एक किनारे से केवल बाथ टब रखे हुए थे और सामने दूसरे किनारे से शॉवर लगा हुआ था और सेक्शन को सीसे से पार्टेशन किया गया था।
आर्यमणि बाथ टब से उठकर खड़ा हुआ। उसके पूरे बदन पर हल्के नीले रंग का चिपचिपा द्रव्य लगा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसे ग्रीस में डुबाकर छोड़ दिया हो। उसके बदन से पूरे कपड़े गायब थे। तभी उस बाथरूम का दरवाजा खुला और रिचा वहां पहुंच गई।
"सामने के शॉवर में नहा लो, जबतक मै तुम्हारे लिए कपड़े निकाल लाती हूं।"
आर्यमणि:- मै कितनी देर से यहां पर हूं, और ये मेरे पूरे बदन पर चिपचिपा सा क्या लगा हुआ है।
रिचा, उसके करीब आकर उसके सीने पर अपनी उंगली रखकर ऊपर के उस द्रव्य को साफ करती…. "ये संजीवनी रस है, जो जख्म को जादुई तरीके से भर देता है। याद है मैंने कहां चाकू मारा था।"..
"हम्मम ! ठीक है", कहते हुए आर्यमणि शॉवर की ओर चला गया और जल्दी से खुद को साफ करते हुए तौलिया उठा लिया। रिचा उसके हाथ से तौलिया लेकर उसके बदन को पोंछती हुई कहने लगी…. "तुम बहुत ताकतवर हो। इतनी शक्ति कहां से अर्जित की।"..
"समय क्या हो रहा है।".. "लगता है किड नाराज हो गया है। इसे खुश करना पड़ेगा।"….. "रिचा तुम गलत जगह टच कर रही हो।"….. "मै तो देख रही थी बच्चे हो या जवान भी हुये की नहीं।"…… "तुम्हारा हो गया हो तो क्या तुम मुझे कपड़े दोगी, ये सब फिर कभी और चेक कर लेना।"…
रिचा उसके हाथ में कपड़े थामती हुई…. "तुम इंपोटेंट हो क्या, मेरे छूने पर भी तुम्हारा लिंग में हलचल नहीं हुई।"..
आर्यमणि अपने कपड़े पहनते… "ये कोई नया टेस्ट है या मेरा टेस्ट पुरा हुआ।"..
रिचा:- हां टेस्ट पुरा भी हुआ और लोगो को यकीन भी।
आर्यमणि:- ठीक है मुझे बाहर लेकर चलो।
रिचा के साथ वो वापस लौट भी रहा था और बार-बार उसकी नजर घड़ी पर भी थी। जैसे ही वो घर पहुंचा, अपनी बाइक निकालकर वो तूफान से भी ज्यादा गति में निकला। अंधेरा पता नहीं कब हुआ था, घड़ी में 8 बज रहे थे। आर्यमणि जंगल के ओर निकल चुका था। तकरीबन 15 मिनट लगे, उसे नागपुर से जबलपुर के रास्ते में पड़ने वाले उन वीरान घाटीयों के जंगल में पहुंचने में, जहां आर्य ने मार्क किया था।
इसके पूर्व सुबह रूही और आर्यमणि के बीच एक छोटी सी योजना बनी थी। योजना थी, सरदार खान के एक अल्फा पैक, जिसका मुखिया नरेश था, उसे मारकर रूही को अल्फा बनाना। योजना कुछ इस तरह से थी कि नरेश के पैक का एक बीटा विकास, जो कॉलेज में साथ ही पढ़ता था, उसे झांसे में लेकर ट्विन वुल्फ पैक के इलाके तक ले जाना था। जब भटका हुआ ट्विन अल्फा का पैक और सरदार खान के पैक में खूनी भिड़ंत होती, तब नरेश को मारकर रूही को उसकी शक्ति दे दी जाती।
लेकिन जब योजना को धरातल पर लाया गया तब बाजी थोड़ी उल्टी पड़ गई। रूही, विकास को लेकर ट्विन अल्फा के सीमा में घुसती और वहां विकास को घायल करके वोल्फ कॉलिंग साउंड देती। नतीजा ये होता की सरदार खान का पैक पहले ट्विन वुल्फ के इलाके में पहुंचता और बाद में ट्विन वुल्फ से खूनी भिड़ंत होती। लेकिन हो गया उल्टा। शायद हमले के इरादे से ट्विन वुल्फ भी घात लगाये बैठे थे। कुछ दिन पूर्व हुए उनके 2 अल्फा की मौत ने शायद उनके अंदर बौखलाहट भर दी थी। रूही जैसे ही उनके इलाके में घुसी, ट्विन वुल्फ ने मौका तक नहीं दिया। ट्विन अल्फा के एक अल्फा अपने कुछ बीटा के साथ विकास को इस कदर नोच खाया की उसकी दर्द भरी चीख सरदार खान के इलाके तक किसी भयावह आवाज की तरह सुनाई दे रही थी। वहीं ट्विन अल्फा के दूसरे अल्फा ने रूही को पेड़ से बांध दिया और पेट चीड़कर उसके खून को बाहर रिस्ता छोड़ दिये।
गाड़ी लगाकर आर्यमणि अभी घाटियों के अंदर प्रवेश ही किया था कि वुल्फ साउंड सुनाई देने लगा। "वुउउउ वुउउउ वुउउउ वुउउउ" करके तकरीबन 50 वुल्फ एक साथ आवाज़ लगा रहे थे। आवाज़ नक्शे के हिसाब से तीसरे प्वाइंट से आ रही थी। ये सरदार खान और ट्विन वुल्फ पैक के इलाके का बॉर्डर था। वहीं ट्विन वुल्फ पैक के इलाके से विकास की तेज चींख लागातार बनी हुई थी जो धीरे–धीरे बिलकुल शांत हो गयि। सरदार खान के क्षेत्र से एक साथ सभी के शोक की आवाज़ आनि शुरू हो गई। मतलब सरदार खान के पैक का एक वुल्फ, विकास, ट्विन वुल्फ के इलाके में मारा जा चुका था। और सरदार खान का पैक अपनी असहाय आवाज मे साथी के मरने का शोक मना रहा था।
अभी सरदार खान के खेमे में शोक समाप्त भी नही हुआ था कि रूही की दर्द भरी चीख गूंजी, जो धीरे–धीरे सिसकियों में तब्दील हो गयि। इस बार सरदार खान के इलाके से केवल नरेश की आवाज आयि। बड़े से पैक के मुखिया का सिंगल वुल्फ साउंड, जिसका मतलब था, हम तुम तक नही पहुंच सकते। आर्यमणि के कान तक जैसे ही रूही की आवाज पहुंची, आर्यमणि अपनी बाइक छोड़कर काफी तेज दौड़ लगा दिया। जब वह रुका तब वो ट्विन वुल्फ पैक के इलाके में था और सामने का नजारा भयावह । रूही को ट्विन पैक के कम से कम 20 बीटा ने घेर रखा था। उसका पेट बीच से चिरा हुए था और बूंद-बूंद करके उसके खून को ट्विन पैक के बीटा चूस रहे थे।
ट्विन अल्फा का एक भाई रूही से…. "नगोड़ी ट्विन के इलाके में घुसने की हिम्मत। सुन तू अपने अल्फा को आवाज़ दे। वो यदि यहां आ गया तो मै तुझे छोड़ दूंगा और पैक का हिस्सा बना लूंगा।"..
रूही दर्द से कर्राहती हुई…. "जिसने तेरे 2 अल्फा को मरा था वह क्या है मुझे भी पता नहीं, लेकिन मै उसके पैक का हिस्सा हूं। वो यहां आया ना तो तुझसे और तेरे इस पैक से इतनी बातें भी नहीं करेगा। मुझ अकेली के लिए तूने पुरा पैक दाव पर लगा लिया।"
ट्विन अल्फा का दूसरा भाई…. "ख़ामोश गिरी हुई वेयरवुल्फ जो किसी इंसान का हुक्म मानने को मजबूर हो। बच्चो, खाने का समय हो गया। अपने जैसे को ज्यादा तड़पाते नहीं।"
"इतनी जल्दी भी क्या है, अभी तो खेल शुरू ही हुआ है। रूही हौसला रखना। मै बस 5 मिनट में इन्हे निपटाकर आया।"… आर्यमणि उनके सामने आते हुये कहने लगा।
ट्विन ब्रदर एक साथ… "क्या इसी ने मेरे पैक के 2 अल्फा को मारा था।"
रूही:– पूछ क्या रहा है, अभी कुछ देर में तुझे भी काल के दर्शन होंगे...
ट्विन ब्रदर:– अब आएगा मज़ा शिकार का"..
देखते ही देखते पुरा झुंड आर्यमणि के ओर बढ़ने लगा। एक साथ चारो ओर से आर्यमणि घिरा हुआ था। आर्यमणि सभी के खूनी जज्बात को मेहसूस कर सकता था। एक साथ सभी के क्ला आर्यमणि के बदन को फाड़ने के लिए दौड़ लगा चुके थे। आर्यमणि अपने गुस्से को समेटा और सबसे पहला वुल्फ जब हवा में उछलकर आर्यमणि के चेहरे पर अपने पंजे के निशान देने के कोशिश में था, आर्यमणि अपना एक हाथ ऊपर करके हवा में ही उसका गला पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसके ठुड्ढी पर इतना तेज मुक्का मारा की आर्यमणि के हाथ में उसका धर था और सर ट्विन ब्रदर के पाऊं में जाकर गिरा।
जैसे ही उनके बीच का साथी मरा, बचे हुए सारे बीटा गुस्से में वूऊऊऊऊऊ की खौफनाक आवाज निकालने लगे। आवाज इतनी खौफनाक थी कि आम इंसान डर से मूत दे। ट्विन अल्फा पैक अपने रौद्र रूप में आ चुकी थी और उनके सभी बीटा एक साथ आर्यमणि के ऊपर हमला कर चुके थे। ऐसा लग रहा था जैसे सियार का पूरा झुंड आज किसी शेर के शिकार पर निकला है। रूही को आर्यमणि लगभग दिखना बंद हो चुका था। केवल नीचे सूखे पत्तों के मसले जाने की तेज–तेज आवाज आ रही थी। तभी एक के बाद एक दर्द भरी चींख का सिलसिला शुरू हो गया।
भिड़ को चीरकर जो खड़ा हुआ, वो एक पूर्ण वेयरवुल्फ था। गाढ़े लाल रंग की आखें जो आज तक किसी अल्फा की नहीं हुई। चमचमाते उजले रंग का उसका पूरा शरीर था। वेयरवुल्फ और सुपरनैचुरल की दुनिया का एक ऐसा अद्भुत नजारा, जिसे आज तक किसी ने नहीं देखा था। और जिन्होंने भी कभी ऐसे किसी वेयरवोल्फ को देखा उसे सब पागल ही मानते थे। दंत कथाओं का एक वेयरवोल्फ जिसके होने के बारे में कोई सोच भी नही सकता था।
आर्यमणि पहली बार अपने पूर्ण स्वरूप में रूही के सामने खड़ा था। और फिर वहां का जर्रा–जर्रा उस खौफनाक गूंज की गवाह बनी, जिसे सुनकर ट्विन अल्फा के कुछ बीटा की धड़कने डर से ही थम गई। आर्यमणि की दहाड़ कुछ ऐसी थी की 10 मीटर के दायरे से बाहर किसी को सुनाई ना दे। और 10 मीटर के अंदर ऐसा भौकाल था मानो 10–12 तेज बिजली के कड़कने की आवाज एक साथ आ रही हो। आर्यमणि की दहाड़ ऐसी, जिसे सुन उसके पैक की एक बीटा रूही ने जंजीर से खुद को इस कदर छुड़ाया की कलाई पूरा खिसक गई। खून का बहाव इस कदर तेज की पेट से खून की धार निकलने लगी। लेकिन आर्यमणि की एक रण हुंकार (war cry) पर रूही पूरी तरह से सबको चीड़ने को तैयार थी। माहौल में आर्यमणि की एक खौफनाक गरज, जिसे सुनकर ट्विन अल्फा का प्रत्येक बीटा अपने घुटने पर आ गया और आर्यमणि से नजर नहीं मिला पा रहा था। आर्यमणि तेजी के साथ एक-एक करके बीटा के पास पहुंचा। किसी के हाथ तो किसी के पाऊं तोड़कर लिटाता चला गया।
अपने बीटा को असहाय हालत में देखकर ट्विन ब्रदर ने तुरंत ही एक दूसरे का कंधा थमा और देखते ही देखते दोनो एक दूसरे में समाते चले गये। दोनो मिलकर जब एक हुये, भीमकाय सी उनकी साइज थी। तकरीबन 12 फिट लंबा और उतना ही बलिष्ठ दिख रहा था। ऐसा लग रहा था सामने कोई दैत्य खड़ा हो। उनके ठीक पीछे रूही अपनी भृकुटी (eyebrow) ताने उन ट्विन ब्रदर्स पर हमला करने को तैयार। रूही उछलकर उनके पीठ पर अपने पंजे को घुसा दी। दत्यकार वुल्फ पर कुछ असर तो नही हुआ लेकिन नतीजा रूही को भुगतना पड़ा।
"कहां तू हम बड़ों के बीच में आ गयि, चल अभी दूर हट"… शायद ऐसा ही कुछ प्रतिक्रिया रहा हो जब दैत्याकार वुल्फ रूही को देख रहा था। "ओ..ओ लगता है जोश–जोश में कुछ गड़बड़ हो गयि"… शायद रूही के हाव–भाव थे, जब उसने दैत्याकार वुल्फ को घूरते देखी होगी। जैसे किसी खिलौने को उठाकर दूर फेंक देते है ठीक उसी प्रकार रूही को भी उठाकर ऐसा फेके की दर्द भरी कर्राहट रूही के मुंह से निकल गयि।
पैक यानी परिवार। वो भी एक मुखिया के सामने उसके बीटा पर जानलेवा हमला। ट्विन वुल्फ और आर्यमणि दोनो के दिल में एक सी आग लगी थी और दोनो ही एक दूसरे को परस्त करने दौड़े। दैत्याकार वुल्फ तेजी से दौड़ते हुए आर्यमणि के जबड़े पर ऐसा मुक्का मारा की पूरा जबड़ा ही हिला डाला। लेकिन आर्यमणि न तो अपनी जगह से हिला और न ही एक कदम पीछे गया। बस जब जबड़े पर कड़क मुक्का पड़ा तब मुंह से खून और खून के साथ जमीन पर एक दांत भी गिरा। आर्यमणि अपने उस टूटे दांत को देखकर गुस्से में भृकुटी तान दिया और जैसे ही सामने देखा.… ट्विन ब्रदर का दूसरा करारा मुक्का। आर्यमणि इस बार भी न तो हिला और न ही अपनी जगह से खिसका, बस तेज श्वास के साथ दर्द को भी पी गया।
अभी दूसरे मुक्के का दर्द ठीक से पिया भी नही था की तीसरा कड़ाड़ा मुक्का पड़ गया। अब तो एक के बाद एक जोरदार मुक्के पड़ते ही जा रहे थे। मानो आर्यमणि का चेहरा मंदिर का घंटा बन गया हो। तभी आया आर्यमणि के खून उबाल और फिर मचा दिया बवाल। साला 2 शरीर को जोडकर तू क्या गुंडा बनेगा रे बाबा। अभी तुझे मैं जरासंध बनाता हूं.… आर्यमणि ने मुट्ठी में दैत्याकार वुल्फ के बाल को दबोचा और जैसे मुट्ठी में पकड़ कर किसी कागज को चिड़ते हैं, ठीक वैसे ही आर्यमणि ने दैत्याकार वुल्फ को चीड़कर ट्विन वोल्फ को अलग किया और दूर फेंक दिया।
ट्विन एक साथ आर्यमणि के सामने पहुंचे। एक ओर से एक भाई तो दूसरे ओर से दूसरा भाई। लड़ाई के पहले हिस्से में ट्विन जहां मुक्का मार रहे थे। वहीं दूसरे हिस्से मे अपने पंजे चला रहे थे। 5 नाखूनों का पुरा क्ला आर्यमणि के चेहरे पर लगा और 5 नाखूनों के निशान उसके गाल पर छप गये। गाल से टप-टप करके खून नीचे गिरने लगा। आर्यमणि के हीरो वाले चेहरे पर वार, अब तो नही चलनी थी ये सरकार। वैसे भी ट्विन ब्रदर लगा रहे थे पूरा जोर और आर्यमणि मात्र उनसे कर रहा था खिलवाड़। लेकिन खेल–खेल में खेला हो गया।
उस ट्विन में दोबारा अपने पंजे उठाये थे। दूसरे गाल को भी पूरा फाड़ने का इरादा था। लेकिन आर्यमणि के सामने तो वो मात्र आदा–पदा ही था। आर्यमणि ने ट्विन वुल्फ के उस अल्फा का हाथ पकड़कर अपने फौलादी पंजों में कैद कर लिया। हाथ को उल्टा ऐसे मड़ोरा जैसे कपड़े निचोड़ दिए हो। फर्क सिर्फ इतना था की पानी की जगह खून और हड्डी का पाउडर नीचे गिर रहा था। निचोड़ने के बाद बारी आयि तोड़ने की। आर्यमणि उसके जांघ पर एक लात मारा और वो अल्फा दर्द से कर्राहते हुए अपनी आवाज़ निकालने लगा।
उसका जुड़वा भाई दाएं ओर से आर्यमणि के गर्दन से खून पीने में व्यस्त था। शायद आर्यमणि को कोई मच्छर लगा हो, इसलिए पड़ोस वाले भाई पर ध्यान न गया। लेकिन अब काल के दर्शन तो उस दूसरे भाई को भी करना था। अपने भाई की दर्द से बिलबिलाती आवाज सुनते ही खून पीना छोड़कर उसने तेज दहार लगाया। उसकी दहाड़ सुनकर उसके बीटा जो सहमे थे, अपने अल्फा की आवाज़ पर एक बार फिर उग्र रूप धारण कर चुके थे। लेकिन हमला करने के लिए उसके बीटा जबतक पहुंचते, आर्यमणि ने ट्विन के दूसरे अल्फा का दोनो हाथ पकड़कर उल्टा घुमा दिया।
"साले चीटर मैं अकेला और तू पहले से २ भाई लड़ रहा था। इतने से भी ना हुआ तो मुझे मारने के लिये और लोगों को बुलावा भेज रहा। ले साले एक्शन रिप्ले करता हूं। तेरे भाई का एक हाथ निचोड़ा था, तेरे दोनो हाथ निचोड़ देता हूं।"
आर्यमणि ने दूसरे भाई का तो दोनो हाथ उल्टा घूमाकर निचोड़ दिया। हाथ से कैल्शियम (हड्डी) और आयरन (ब्लड) का सिरप चुने लगा। उसे जैसे ही आर्यमणि ने छोड़ा वो धराम से नीचे जमीन में गिरा और उसके बीटा कूद–कूद कर हमला करने लगे। सबसे आगे आये तीन बीटा को आर्यमणि ऐसा मसला की उनकी कुरूर हत्या देखकर बाकी के बीटा अपनी जान बचाकर भागे। आर्यमणि भागने वालों के पीछे नहीं गया, बल्कि रूही के पास चला आया। आर्यमणि अपने साथ लाये बैग से स्ट्रिच करने वाला स्टेपलर निकला और रूही के पेट को सिलते हुए… "बहुत दर्द हो रहा है क्या"… रूही ने हां में सर हिलाया और धीमी-धीमी श्वांस लेने लगी।
आर्यमणि उसके पेट पर हाथ रखकर अपनी आखें मूंद लिया। आर्यमणि के नर्व में जैसे काला-काला कुछ प्रवाह होना शुरू हो गया हो और धीरे-धीरे रूही राहत की श्वांस लेने लगी। दर्द से बिलबिलाते रूही के पूरे बदन को एक असीम सुख का अनुभव होने लगा। वेयरवुल्फ की एक खास गुण, हील करना। यूं तो हर वेयरवुल्फ अपने नब्ज मे दर्द को खींचकर सामने वाले को राहत दे सकता था। किसी के भी तड़प को सुकून मे बदल सकता था, लेकिन फटे मांस, या टूटी हड्डी को हर वेयरवुल्फ हील नहीं कर सकते थे। हां हर वेयरवुल्फ हील भी कर सकते थे लेकिन इस लेवल पर नहीं। आर्यमणि अपने हाथ से रूही का दर्द खींचने लगा। रूही के खुद की हीलिंग क्षमता के साथ आर्यमणि के हीलर हाथ। थोड़ी ही देर में रूही सुकून में थी और वो पूरी तरह से हील हो चुकी थी।
जैसे ही रूही हिल हुई वह अपने घुटनों पर बैठकर अपना सर झुकाती… "दंत कथाओं का एक पात्र प्योर अल्फा से कभी मिलूंगी, ये तो कभी ख्यालो में भी नही था। प्योरे अल्फा अब तक की एक मनगढ़ंत रचना, जो किसी पागल के कल्पना की उपज मानी जाती थी, वह सच्चाई थी, यकीन करना मुश्किल है। मेरे नजरों के सामने एक प्योरे अल्फा हैं, अद्भुत... अब समझ में आया कि क्यों तुम पर वेयरवोल्फ के एक भी नियम लागू होते। अब समझ में आया की क्यों तुम्हे पहचान पाना इतना मुश्किल है। तुम तो सच के राजा निकले।"
जैसे ही रूही हिल हुई वह अपने घुटनों पर बैठकर अपना सर झुकाती… "दंत कथाओं का एक पात्र प्योर अल्फा से कभी मिलूंगी, ये तो कभी ख्यालो में भी नही था। प्योरे अल्फा अब तक की एक मनगढ़ंत रचना, जो किसी पागल के कल्पना की उपज मानी जाती थी, वह सच्चाई थी, यकीन करना मुश्किल है। मेरे नजरों के सामने एक प्योरे अल्फा हैं, अद्भुत... अब समझ में आया कि क्यों तुम पर वेयरवोल्फ के एक भी नियम लागू होते। अब समझ में आया की क्यों तुम्हे पहचान पाना इतना मुश्किल है। तुम तो सच के राजा निकले।"
प्योर अल्फा यह कोई शब्द, उपाधि या फिर वेयरवॉल्फ के प्रकार नही था। यह तो अपने आप में एक पूरी सभ्यता का वर्णन था। पौराणिक कथाओं की माने तो वेयरवोल्फ के जितने भी प्रकार होते है फिर चाहे वह बीटा, अल्फा या बीस्ट अल्फा क्यों न हो सब में खून के पीछे आकर्षण और प्रबल मानहारी प्रवृत्ति होती है। और अपने इसी आदतों के कारण वेयरवोल्फ अपनी बहुत सी अलग ताकत को खो देते हैं, जैसे की खुद को और किसी और को हिल करने की अद्भुत क्षमता। दूसरों के हिल किए जहर को हथियार के तरह इस्तमाल करना। कुछ अनहोनी होने से पहले के संकेत। किसी भी जीव के भावना को दूर से मेहसूस करना। अपने क्ला पीछे गर्दन में घुसकर किसी के भी मस्तिस्क के यादों में झांकना... और उन्हें मिटाने तक की काबिलियत... हालांकि यादों में तो हर अल्फा वुल्फ झांक सकते हैं लेकिन चुनिंदा यादों को मिटाने की शक्ति ट्रू–अल्फा होने के बाद ही विकसित होती है...
यधपी यह सभी गुण हर वेयरवोल्फ में पाए जाते हैं। लेकिन जैसे–जैसे वेयरवॉल्फ के अंदर का दरिंदा प्रबल होता है, बाकी सारी शक्तियां स्वतः ही कमजोर होती चली जाती है। इसलिए वेयरवोल्फ में सर्वोत्तम एक ट्रू–अल्फा माना जाता है। हां लेकिन एक ट्रू–अल्फा भी अपनी सर्वोत्तम शक्ति को खो देता है जब वह दरंदगी पर उतर जाता है। ट्रू–अल्फा को कठोर अनुसरण तमाम उम्र करनी होती है। और सबसे आखरी में वुल्फ के नियम... यह नियम हर वुल्फ पर लागू होते हैं, किसी में थोड़ा ज्यादा तो किसी में थोड़ा कम.… जैसे की वुल्फ को मारने की विधि... दूसरा इनका इंसानी पक्ष निर्बल होता है और वुल्फ साइड उतना ही बलशाली... एक बीटा 4 शेर के समान शक्तियां रखता है...
लेकिन प्योर अल्फा के साथ कोई बंदिशे नही। वेयरवॉल्फ के सारे अलौकिक गुण किसी परिस्थिति में नही खो सकता, फिर वह खुद को पूरा सैतान बना ले या फिर खुद को पूरा इंसान। इनके किसी भी रूप में, फिर वो इंसानी रूप हो या भेड़िए का, शक्ति एक समान होती है। इसके क्ला या फेंग से घायल होने वाले वुल्फ नही बनते... और भी बहुत सारे गुण जो वक्त के साथ एक प्योर अल्फा अपने अंदर विकसित कर सकता है। जबतक प्योर अल्फा खुद अपनी असलियत ना सामने लाये तबतक कोई जान नही सकता। और इनकी एक ही पहचान होती है जो हर वेयरवोल्फ को उसका अल्फा पौराणिक कहानियों का एक शक्तिशाली वुल्फ के रूप में बताता है... "प्योर अल्फा जब रूप बदलकर वेयरवोल्फ बनता है, तब उसका रूप अलौकिक होता है। उसका पूरा बदन चमक रहा होता है, जिसे दूर से भी देखकर पहचान सकते हैं।"
रूही के अंदर की हालत वही समझती थी। अंदर ऐसी भावना थी जिसे शब्दों में बयान नही किया जा सकता था। वह अभी अपने घुटनों पर थी। अपना सर झुकाये घोर आश्चर्य और अप्रतिम खुशी में संलिप्त थी। आर्यमणि, रूही का हाथ थामकर उसे उठाते हुये... "आओ मेरे साथ।" रूही, आर्यमणि के साथ घायल पड़े ट्विन अल्फा के पहले भाई के पास पहुंची।… "इसे मारकर अल्फा बनो। हां लेकिन खून चूसना और मांस भक्षण नहीं। मुझे अपने पैक में किसी भी जीव के खून चूसने और उनका मांस खाने वाले नहीं चाहिए।"
रूही अपनी सहमति देती.… "आप बैठ जाइये और शिकार का मज़ा लीजिए।"… रूही आगे बढ़ी। पाऊं के पास ही ट्विन अल्फा दर्द से बिलख रहे थे। हाथ तो बचा ही नहीं था। किसी तरह अपनी हलख से दर्द भरी आवाज मे रहम की भीख मांग रहे थे। रूही आराम से बैठकर ट्विन अल्फा के सर पर हाथ फेरती एक बार आर्यमणि से नजरें मिलाई। आर्यमणि ने इधर नज़रों से सहमति दिया और उधर रूही अपने 4 इंच लंबी धारदार नाखून, ट्विन अल्फा के गर्दन में घुसाकर पूरा गला फाड़ दी। गला फाड़कर अंदर के नालियों को तब तक दबोचे रही जबतक की उनके प्राण, उनके शरीर से ना निकल गये।
जैसे ही शरीर से प्राण निकला, रूही की विजयी दहाड़ अपने आप ही निकल गई। पीली सी दिखने वाली रूही की आंखें लाल दिखने लगी। पास पड़े घायल सभी बीटा और ट्विन का बचा हुआ एक अल्फा सोक की धुन निकालने लगा। रूही ने जब खुद के अंदर एक अल्फा की ताकत को मेहसूस की, तब एक और दहाड़ लगा दी। इधर रूही की ताकत के नशे कि दहाड़ निकली उधर आर्यमणि दहाड़। जैसे ही उसकी दहाड़ रूही सुनी वो अपने घुटने और पंजे को जमीन से टिकाकर गुलामों की तरह सर झुकाने पर विवश हो गई। रूही की नजर जमीन को ताक रही थी…. "रूही ताकत को मेहसूस करना अच्छी बात है लेकिन मेरा पैक ताकत के नशे को मेहसूस करे, मंजूर नहीं।"..
रूही…. पहली बार था, मै अपने अरमान काबू नहीं कर पायि।
आर्यमणि:- अगले 2 महीने तक मै तुम्हे शक्तियों को काबू करना सिखाऊंगा। काम जल्दी खत्म करो। पहले दूसरे अल्फा की शक्ति लो, फिर यहां से भागे बीटा को खत्म करो। मै नहीं चाहता कि प्योर अल्फा की भनक भी किसी को लगे।
रूही:- जैसा आप चाहो।
रूही ट्विन ब्रदर के बचे दूसरे भाई की ताकत को भी खुद में समाती, तेज दहाड़ के साथ दौड़ लगा दी। तकरीबन आधे घंटे बाद रूही खून में नहाकर विजयि मुस्कान के साथ लौटी… "लाश तक के निशान को मिटा आयी बॉस।"
आर्यमणि:- यहां भी सब साफ है.. अब चलें..
रूही आर्यमणि के करीब पहुंचकर कहने लगी… "जानवर जंगल में सहवास करते है और उनके बीच कोई बंधन नहीं होता"..
आर्यमणि उसकी आखों में झांका और उसके होंठ से होंठ लगाकर उसे चूमने लगा। रूही तुरंत ही अपने सारे कपड़े निकालकर नीचे बैठ गई और आर्यमणि के पैंट को खोलि और लिंग को बाहर निकालकर उसपर अपनी जीभ फिराने लगी। आर्यमणि उसके सर पर अपने दोनो पंजे टिकाये गर्दन को ऊपर करके तेज-तेज श्वांस लेने लगा। रूही कुछ देर तक अपनी जीभ लिंग पर फिराने के बाद, लिंग को पूरा मुंह के अंदर लेकर उसे चूसने लगी। ये उत्तेजना आर्यमणि के धड़कनों को उस ऊंचाई पर ले गयि जिस कारण उसका शेप शिफ्ट हो गया और वो पूर्ण वुल्फ दिख रहा था।
बिल्कुल सफेद वुल्फ अपने तरह का इकलौता। जैसे ही आर्यमणि ने शेप शिफ्ट किया उसने बड़ी बेरहमी से रूही का बाल पकड़ कर उठाया और उसके होंठ से होंठ लगाकर चूमते हुए उसके योनि को अपने बड़े से पंजे में दबोच कर मसलने लगा। उत्तेजना आर्यमणि पर पूरा हावी था और वो पूरी तरह से रूही पर हावी हो चुका था। दर्द और मज़ा का ऐसा खतरनाक मिश्रण रूही ने आज से पहले कभी मेहसूस नहीं की थी। वो भी अपने हाथ नीचे ले जाकर अपने दोनो हाथो से आर्यमणि के लिंग को पूरे गति में ऊपर नीचे करने लगी। लिंग पर हाथ की गर्माहट, आर्यमणि के अंदर के तूफान को ऐसा भड़काया... उसने तेजी से रूही को पेड़ से टिका दिया। रूही भी अपने हाथ के सहारे के पेड़ को पकड़ती कमर को पूरा झुका दी और अपने दोनो टांग को पूरा खोलकर, आर्यमणि को निमंत्रण देने लगी।
पंजे वाले दोनो हाथ रूही के कमर के दोनों ओर और जोरदार झटके के साथ पुरा लिंग योनि के अंदर। रूही सिसकियां लेती अपने कमर को आगे पीछे हिलाने लगी। हर धक्के के साथ नीचे के ओर लटक रहे स्तन मादक थिरक के साथ हिल रहे थे। रूही का पूरा बदन धक्के के झटके से हिल रहा था। आर्यमणि का जोश पूरे उफान पर था, जो रूही के योनि के अंदर तूफान मचा रहा था।
आर्यमणि लगातार धक्के दिए जा रहा था। प्योर अल्फा के स्टेनमना के सामने रूही कबका थक चुकी थीं। उसकी उखड़ती स्वांस अब बस इस खेल को अंतिम चरण में देखना चाहती थीं। तभी आर्यमणि की गति काफी तेज हो गई। रूही तेजी के साथ सीधी खड़ी हुई और घूमकर आर्यमणि के लिंग को अपने मुट्ठी में भरकर तेज-तेज मुठ्ठीयाने लगी। कुछ ही देर में तेज पिचकारी के साथ आर्यमणि ने अपना वीर्य छोड़ दिया और हांफते हुए वो पीछे हट गया।
रूही अपने फटे कपड़े अपने ऊपर डालकर आर्यमणि के पास ही बैठ गई। काफी देर तक दोनो ख़ामोश बैठे रहे। … "जाओ मेरा बैग ढूंढ़कर लाओ"..
रूही:- रुको तो काफी थकी हूं। थोड़ा रिलैक्स तो करने दो। मज़ा आ गया आर्य।
आर्यमणि:- जानवर है... जंगल में सेक्स करते है... फिर इमोशन इंसानों वाले क्यूं आने लगे।
रूही:- बाद ने पछतावा हो रहा था। इतने मजेदार सेक्स के बाद बिस्तर पर लुढकने का अपना ही मजा आता। कोई ना अगली बार..
आर्यमणि:- तुम्हे यकीन है मै दूसरी बार तुम्हारे हाथ आऊंगा?
रूही:- तुम्हे अपनी रानी चाहिये तो सेक्स के वक़्त तुम्हे अपनी बढ़ी धड़कनों पर काबू पाना सीखना होगा। तुम्हे कोई पकड़ नहीं पाया क्योंकि तुम पूर्ण नियंत्रण सीख कर नागपुर पहुंचे सिवाय एक के... राइट बेबी।
आर्यमणि:- हम्मम ! सही अनुमान है। बस एक ही बात का अब डर लगा रहा है।
रूही:- क्या?
आर्यमणि:- कहीं तुम मुझे ना चाहने लगो और हमारी बात पलक को ना पता चल जाये।
रूही:- हम सीक्रेट रिलेशन मेंटेन रखेंगे तुम परेशान ना हो। चलो अब स्माइल करो। वैसे भी तुम यहां आये हो इसका मतलब है आगे बहुत सी घटनायें होनी है।
आर्यमणि:- मै तुम्हारे ज्ञान को लेकर दुविधा में हूं। प्योर अल्फा का तो किसी को ख्याल भी नहीं आया होगा, तुम्हे कैसे पता?
रूही:- मेरी आई एक ट्रू–अल्फा थी। जिसके पैक को शिकारियों ने खत्म कर दिया, और मेरी मां को पकड़कर सरदार खान को सौंप दिया। मेरा जन्म सरदार खान के किले में ही हुआ था। मेरी आई एक कमल की हिलर थी, तुम्हारी तरह शानदार हीलर। सरदार खान की हवसी नजर मुझ पर हमेशा टिकी रहती और मेरी आई हम दोनों के बीच। एक दिन गुस्से में सरदार खान ने उसे खत्म कर दिया।
आर्यमणि:- तो क्या सरदार खान तुम्हारे साथ...
रूही:- जाने दो दरिंदे हैवानों की याद मत दिलाओ। उनका कोई परिवार नहीं होता। मै उस किले कि ऐसी बीटा वुल्फ थी, जिसका कोई पैक नहीं। उस किले में मुझे सड़क से लेकर बाजार तक नोचा गया है। और मेरी बेबसी पर सब हंसते रहते... जानते हो आर्य कॉलेज में जब लड़कों को अपने ओर हसरत भरी नजरो से घूरते देखती हुं, तब जहन में एक ही ख्याल आता रहता है... तुम्हारे लिए मैं यहां खास हूं लेकिन अपनी गली में मै सबकी रखैल सी हूं, जब जहां जिसका मन किया उसने नोचा, फिर किसी ने रहम नहीं दिखाया"
"मुझे नफरत है शिकारियों से। खुद को प्रहरी बताते है, पहरा देने वाले और भटकों को खत्म करने वाले। फिर क्या गलती थी मेरी आई की, जिन्हें इन दरिंदो के बीच में छोड़ दिया। अपने होश संभालते ही केवल नरक देखा है मैंने और महसूस की थी मेरी आई का दर्द, जो मुझे बचाने के लिए वहां घुटती रहती थी। कयी साल आर्य, नरक के कयी साल। हां लेकिन शायद ऊपर कहीं खुदा था, जब पहली वो इंसान मेरे जीवन में आयी। तुम्हारी बहन भूमि। मेरे लिए तो ईश्वर, अल्लाह, मसीहा ऊपर वाले के जितने नाम है, सब वही है।"
"7 साल पहले वो प्रहरी की मेंबर कॉर्डिनेटर बनी थी और अपने 10 साथियों के साथ हमारे किले में घुसी। निडर और ताकतवर प्रहरी, जिसे अपना कर्तव्य याद था कि केवल इंसान ही उनकी जिम्मेदारी नहीं है बल्कि सुपरनेचुरल का भी क्षेत्र उनके पहरे के क्षेत्र में आता है।"
"सड़क पर 4 जानवर मुझे नोच रहे थे और मेरी ख़ामोश आंखों के अंदर के आंसू भूमि ने देखे थे। उसका चाबुक चला और 2 बीटा को उसी किले में साफ कर दिया, बिना यह सोचे कि वह 200 से ऊपर वुल्फ से घिरी है। उसी ने मुझे बचाया था। फिर ये तय हुआ कि सुपरनैचुरल शांत है तो क्या हुआ, ऐसे जानवरो की जिंदगी उसे अपने क्षेत्र में नही चाहिये। सभी बच्चे air जवान वेयरवोल्फ पढ़ने जायेंगे और सबके डिटेल प्रहरी ऑफिस में पहुंचने चाहिये। उसी ने मुझे तुम्हारी जिम्मेदारी दी थी, कही थी नजर बनाए रखो।"
"सरदार खान, भूमि के वजह से ही बौखलाए हुए है। अपने अंदर कई सारे राज दबाए बैठा है वो बीस्ट, जिसकी जानकारी भूमि को चाहिए। क्योंकि उसको भनक लग गई है, शिकारी का बहुत बड़ा जत्था अपने आर्थिक फायदे के लिए वुल्फ से मर्डर करवाते है। केवल नागपुर में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में यह खेल चल रहा है।"
आर्यमणि:- हां इस खेल के बारे में मुझे भी भनक है। खैर, इतने इमोशनल सेशन के बाद एक सवाल का जवाब दो, पहली मुलाकात से ही मेरे पीछे क्युं पड़ी हो।
रूही:- मज़े करने के लिए। क्या मेरा हक नहीं बनता अपने मन से मज़े करने के। हां लेकिन मैं उनकी तरह तुम्हे निचोड़ना नहीं चाहती थी, इसलिए जबरदस्ती नहीं की।
आर्यमणि:- अच्छी लगती हो ऐसे बात करते। अब से पिछली ज़िंदगी को अलविदा कह दो। मुझे अपने पैक मे सब बिल्कुल मस्त और हसने वाले खास इंसान चाहिये। क्या समझी..
रूही:- बॉस बोल तो ऐसे रहे हो जैसे खुद हंसमुख होने का टैग लिए घूमते हो। सब तो तुम्हे खडूस ही कहते हैं।
आर्यमणि:- बकवास बंद... मुझे एक कंप्लीट पैक चाहिये। और हां तुमने मेरा दिल जीत लिया है, इसलिए तुम्हारी जहां से प्योर अल्फा की याद नही मिटा रहा। अब तुम एक अल्फा हो और अपने फर्स्ट अल्फा के लिए कोई ढंग का पैक बनाओ। तुम जानती हो न मुझे अपने पैक में कैसे वुल्फ चाहिये या उसकी भी डिटेल देनी होगी...
रूही:- बॉस पैक के लिये वेयरवोल्फ को तो मैं ढूंढ लूंगी लेकिन वो मेरे घर में, मेरे बिस्तर पर… उस वादे का क्या हुआ?
आर्यमणि:- बड़ी उम्मीदें जाग रही है तुम्हारी तो। मुझे निचोड़ने का इरादा तो नही?
रूही:- अपने बॉस से उम्मीद कर रही हूं और ये मेरा हक है। वुल्फ पैक के नियम तो मालूम ही होंगे, या उसकी पूरी डिटेल भी बतानी होगी।
आर्यमणि:- हां समझ गया। यूं तो धड़कन काबू करने के लिये रोज ही प्रैक्टिस चालू रहेगी। लेकिन सरदार खान के किले में बिस्तर वाला खेल एक शुभ मुहरत पर होगा। उस दिन बीस्ट की कहानी खत्म करेंगे और साथ में पूरी रात तुम मुझे निचोड़ती रहना। चलो अब चला जाय।
एक अध्याय समाप्त होने को था, और पहला लक्ष्य मिल चुका था। रात के तकरीबन 10.30 बजे आर्यमणि वापस आया। भूमि हॉल में बैठकर उसका इंतजार कर रही थी। आर्यमणि आते ही भूमि के पास चला गया… "किस सोच में डूबी हो।"..
भूमि:- सॉरी, वो मैंने तुझे टेस्ट के बारे में कुछ भी नही बताया।
आर्यमणि:- वो सब छोड़ो, मुझे पढ़ने में मज़ा नहीं आ रहा, मुझे कुछ पैसे चाहिए, बिजनेस करना है।
भूमि:- हाहाहाहा… अभी तो तूने ठीक से जिंदगी नहीं जिया। 2-4 साल अपने शौक पूरे कर ले, फिर बिजनेस करना।
आर्यमणि:- मुझे आप पैसे दे रही हो या मै मौसी से मांग लूं।
भूमि:- तूने पक्का मन बनाया है।
आर्यमणि:- हां दीदी।
भूमि:- अच्छा ठीक है कितने पैसे चाहिए तुझे..
आर्यमणि:- 10 करोड़।
भूमि:- अच्छा और किराये के दुकान में काम शुरू करेगा।
आर्यमणि:- अभी स्टार्टअप है ना, धीरे-धीरे काम बढ़ाऊंगा।
भूमि:- अच्छा तू बिजनेस कौन सा करेगा।
आर्यमणि:- अर्मस एंड अम्यूनेशन के पार्ट्स डेवलप करना।
भूमि:- क्या है ये सब आर्य। गवर्नमेंट तुम्हे कभी अनुमति नहीं देगी।
आर्यमणि:- दीदी भरोसा है ना मुझ पर।
भूमि:- नहीं।
आर्यमणि:- क्या बोली?
भूमि:- भाई कुछ और कर ले ना। ये हटके वाला बिजनेस क्यों करना चाहता है। आराम से एक शॉपिंग मॉल का फाइनेंस मुझसे लेले। मस्त प्राइम लोकेशन पर खोल। तेजस दादा को टक्कर दे। ये सब ना करके तुझे वैपन डेवलप करना है। भाई गवर्नमेंट उसकी अनुमति तुम्हे नहीं देगी वो सिर्फ इशारों और डीआरडीओ करता है।
आर्यमणि:- अरे मेरी भोली दीदी, गन की नली उसके पार्ट्स, ये सब सरकारी जगहों पर नहीं बनता है। मैंने सब सोच रखा है। मेरा पूरा प्रोजक्ट तैयार भी है। तुम बस 10 करोड़ दो मुझे और 2 महीने का वक़्त।
भूमि:- ठीक है लेकिन एक शर्त पर। तुझे कितना जगह में कैसा कंस्ट्रक्शन चाहिए वो बता दे। काम हम अपनी जगह में शुरू करेंगे।
आर्यमणि:- जगह 6000 स्क्वेयर फुट। 1 अंडरग्राउंड फ्लोर और 4 फ्लोर उसके ऊपर खड़ा।
भूमि:- ओह मतलब तू प्रोजेक्ट के बदले सरकार से लॉन लेता, फिर अपना काम शुरू करता।
आर्यमणि:- हां यही करने वाला था।
भूमि:- कोई जरूरत नहीं है, तू बस अपना प्रोजेक्ट रेडी रख, बाकी सब मैं देख लूंगी। और कुछ..
आर्यमणि:- हां है ना…
भूमि:- क्या?
आर्यमणि:- जल्दी से खुशखबरी दो, मै मामा कब बन रहा हूं।
भूमि:- हां ठीक मैंने सुन लिया, अब जाएगा सोने या थप्पड़ खाएगा। ..
सुबह-सुबह का वक़्त और आर्यमणि की बाइक सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस के घर पर। घर की बेल बजी और नम्रता दरवाजा पर आते ही…. "आई पहली बार तुम्हारे छोटे जमाई घर आये है, क्या करूं?"..
"छोटे जमाई"… सुनकर ही पलक खुशी से उछलने लगी। वो दौड़कर बाहर दरवाजे तक आयी और आर्यमणि का हाथ पकड़कर अंदर लाते…. "हद है दीदी आप तो ऐसे पूछ रही हो जैसे पहली बार कोई दुल्हन घर आ रही हो। यहां बैठो आर्य, क्या लोगे।"
आर्यमणि:- कल तुम्हारे लिए कुछ शॉपिंग की थी, रख लो।
नम्रता:- जारा मुझे भी दिखाओ क्या लाये हो?
जैसे ही नम्रता बैग दिखाने बोली, पलक, आर्यमणि के हाथ से बैग छीनकर कमरे में भागती हुई…. "पहनकर दिखा देती हूं दीदी, मेरे लिए ड्रेस और एसेसरीज लेकर आया है।"..
नम्रता:- हां समझ गई किस तरह के ड्रेस लाया होगा। और आर्य, आज से कॉलेज जाने की अनुमति..
आर्यमणि:- अनुमति तो कल से ही मिल गयि थी। लेकिन हां कल किसी ने जादुई घोल में लिटा दिया तो मेरे पूरे जख्म भर गये।
"माफ करना आर्य, तुम्हारे कारनामे ही ऐसे थे कि किसी को यकीन कर पाना मुश्किल था। हां लेकिन वो करंट वाला मामला कुछ ज्यादा हो गया था।"…. राजदीप उन सब के बीच बैठते हुए कहने लगा।
अक्षरा:- टेस्ट के नाम पर जान से ही मार देने वाले थे क्या? सीधा-सीधा वुल्फबेन इंजेक्ट कर देते।
राजदीप:- फिर पता कैसे चलता आर्यमणि कितना मजबूत है। क्यों आर्य?
आर्यमणि:- हां बकड़े की जान चली गई और खाने वाले को कोई श्वाद ही नहीं मिला।
राजदीप:- बकरे से याद आया, आज मटन बनाते है और रात का खाना हमारे साथ, क्या कहते हो आर्य।
"वो भेज है दादा, नॉन भेज नहीं खाता।".. अंदर से पलक ने जवाब दिया।
राजदीप:- पहला वुल्फ जो साकहारी होगा।
आर्यमणि:- मेरे दादा जी मुझे कुछ जरूरी ज्ञान देने वाले थे। इसलिए मै जब मां के गर्भ में नहीं था उस से पहले ही उन्होंने मां को नॉन भेज खाने से मना कर दिया था। जबतक मै पुरा अन्न खाने लायक नहीं हुआ, तबतक उन्होंने मां को मांस खाने नहीं दिया था। दादा जी मुझे कुछ शुद्घ ज्ञान के ओर प्रेरित करने वाले थे इसलिए..
उज्जवल:- तुम्हारे दादा जी बहुत ज्ञानी पुरुष थे। अब लगता है वो शायद किसी के साजिश का शिकार हो गये। कोई अपनी दूर दृष्टि किसी कार्य में लगाये हुये था जिसके रोड़ा तुम्हारे दादा जी होंगे। दुश्मन कोई बाहर का नहीं था, वो तो अब भी घर में छिपा होगा।
राजदीप:- बाबा ये क्या है? वो बच्चा है अभी। और सुनो बच्चे शादी तय हो गई है इसका ये मतलब नहीं कि ज्यादा मस्ती मज़ाक और घूमना-फिरना करो। पहले कैरियर पर ध्यान दो।
आर्यमणि:- कैरियर पर ध्यान दूंगा तो आपके जैसा हो जाऊंगा भईया। जल्दी शादी कर लो वरना सुपरिटेंडेंट से अस्सिटेंट कमिश्नर बनने के चक्कर में लड़की नहीं मिलेगी।
आर्यमणि की बातें सुनकर सभी हंसने लगे, इसी बीच पलक भी पहुंच गई। ब्लू रंग की पेंसिल जीन्स, जो टखने के थोड़ा ऊपर था। नीचे मैचिंग शू, ऊपर ब्राउन कलर का स्लीवलेस टॉप और उसके ऊपर हल्के पीले रंग का ब्लेजर। बस आज तैयार होने का अंदाज कुछ ऐसा था कि पलक नजर मे बस रही थी।
राजदीप:- ये उस दिन भी ऐसे ही तैयार होकर निकली थी ना? आई हमारे लगन फिक्स करने से पहले कहीं दोनो के बीच कुछ चल तो नही रहा था? जब इसका लगन तय कर रहे थे, तब पलक ने एक बार भी नहीं कहा कि वो किसी और को चाहती है। दाल में कुछ काला है।
पलक:- आप पुलिस में हो ना दादा, कली दाल पकाते रहो, हम कॉलेज चलते है। क्यों आर्य..
दोनो वहां से निकल गये और दोनो को जाते देख सभी एक साथ कहने लगे… "दोनो साथ में कितने प्यारे लगते है ना।"..
"बहुत स्वीट दिख रहे हो, चॉकलेट की तरह"… पलक आर्य के गाल को चूमती हुई कहने लगी।
आर्यमणि, कार को एक किनारे खड़ी करके पलक का हांथ खींचकर अपने ऊपर लाया और उसके खुले बाल जो चेहरे पर आए थे, उस हटाते हुए पलक की आखों में झांकने लगा… पलक कभी अपनी नजर आर्यमणि से मिलाती तो कभी नजरें चुराती… धीरे-धीरे दोनो करीब होते चले गए। आर्यमणि अपने होंठ आगे बढ़ाकर पलक के होंठ को स्पर्श किया और अपना चेहरा पीछे करके उसके चेहरे को देखने लगा।
पलक अपनी आखें खोलकर आर्यमणि को देखकर मुस्कुराई और अगले ही पल उसके होंठ से अपने होंठ लगाकर, उसे प्यार से चूमने लगी। दोनो की ही धड़कने बढ़ी हुई थी। आर्यमणि खुद को काबू करते अपना सर पीछे किया। पलक अब भी आंख मूंदे बस अपने होंठ आगे की हुईं थी।
आर्यमणि, होंठ पर एक छोटा सा स्पर्श करते…. "रात में ऐसे पैशन के साथ किस्स करना पलक, कार में वो मज़ा नहीं आयेगा।"
आर्यमणि की बात सुनकर पलक अपनी आखें दिखती…. "कॉलेज चले।"..
कॉलेज पहुंचकर जैसे ही पलक कार से उतरने लगी…. "पलक एक मिनट।"..
पलक:- हां आर्य..
अपने होंठ से पलक के होंठ को स्पर्श करते… "अब जाओ"… पलक हंसती हुई.. "पागल"…
आर्यमणि पार्किंग में अपनी कार खड़ी किया, तभी रूही भी उसके पास पहुंच गई… "हीरो लग रहे हो बॉस।"
आर्यमणि:- थैंक्स रूही..बात क्या है जो कहने में झिझक रही हो।
रूही:- तुम्हे कैसे पता मै झिझक रही हूं।
आर्यमणि उसके सर पर टफ्ली मारते… "मै किसी के भी इमोशंस कयि किलोमीटर दूर से भांप सकता हूं, सिवाय अपनी रानी के।"..
रूही:- चल झूटे कहीं के…
आर्यमणि, उसे आंख दिखाने लगा। रूही शांत होती… "सॉरी बॉस।"..
आर्यमणि:- जाकर कोई बॉयफ्रेंड ढूंढ लो ना।
रूही:- हमे इजाज़त नहीं आम इंसानों के साथ ज्यादा मेल-जोल बढ़ना। वैसे भी किसी पर दिल आ गया तो जिंदगी भर उसे साथ थोड़े ना रख सकते है। पहचान तो खुल ही जाना है। मुझसे नहीं तो मेरे बच्चे से।
आर्यमणि:- तुम मेरे पैक में हो और पहले ही कह चुका हूं, पुरानी ज़िन्दगी को अलविदा कह दो। खुलकर अपनी जिंदगी जी लो। तुम जिस भविष्य कि कल्पना से डर रही हो, उसकी जिम्मेदारी मेरी है।
रूही:- क्या सच में ऐसा होगा।
आर्यमणि:- मेरा वादा है।
रूही आर्यमणि की बात सुनकर उसके गले लग गई। आर्यमणि उसे खुद से दूर करते… "यहां इमोशन ना दिखाओ, जबतक सरदार का कुछ कर नहीं लेते। अब तुम बताओगी झिझक क्यों रही थी।"..
रूही:- अलबेली इधर आ…
रूही जैसे ही आवाज़ लगाई, बाल्यावस्था से किशोरावस्था में कदम रखी, प्यारी सी लड़की बाहर निकलकर आयी.. आर्यमणि उसे देखकर ही समझ गया वो बहुत ज्यादा घबरायि और सहमी हुई है। उसके खुले कर्ली बाल और गोल सा चेहरा काफी प्यारा और आकर्षक था, लेकिन अलबेली की आंखें उतनी ही खामोश। देखने से ही दिल में टीस उठने लगे, इतनी प्यारी लड़की की हंसी किसने छीन ली।
आर्यमणि, थोड़ा नीचे झुककर जैसे ही अलबेली के चेहरे को अपने हाथ से थामा... उस एक पल में अलबेली को अपने अंदर किसी अभिभावक के साये तले होने का एहसास हुआ, जो अंदर से मेहसूस करवा जाए कि मै इस साये तले खुलकर जी सकती हूं। उस एक पल का एहसास... और अलबेली के आंखों से आंसू फुट निकले...
आर्यमणि उसके चेहरे को सीने से लगाकर उसके बलो में हाथ फेरते हुए… "अलबेली रूही दीदी के साथ रहना। आज से तुम्हारे इस प्यारे चेहरे पर कभी आंसू नहीं आयेंगे, ये वादा है। जाओ तुम कार में इंतजार करो।"..
रूही:- ट्विन अल्फा के मरने के जश्न में अलबेली के बदन को नोचा जा रहा था। ये भी उस किले के उन अभगों मे से है, जिसका कोई पैक नहीं, सिवाय इसके एक जुड़वा भाई के। इसका जुड़वा, इसे बचाने के लिए बीच में आया तो उसे कल रात ही मार दिया गया। किसी तरह मै अलबेली को वहां से निकाल कर लायी हूं, लेकिन सरदार को मुझपर शक हो गया...
आर्यमणि:- हम्मम ! किसकी दिमागी फितूर है ये..
रूही:- और किसकी सरदार खान के चेले नरेश और उसके पूरे पैक की।
आर्यमणि:- चलो सरदार खान के किले में चलते है। अपना पैक के होने का साइन बनाओ। आज प्रहरी और सरदार खान को पता चलना चाहिए कि हमारा भी एक पैक है। अलबेली यहां आओ।
अलबेली:- जी भईया..
आर्यमणि:- तुम अपने बदले के लिए तैयार रहो अलबेली। हमे घंटे भर में ये काम खत्म करना है। लेकिन उससे पहले इसे ब्लड ओथ लेना होगा। क्या ये अपना पैक छोड़ने के लिए तैयार है?
रूही:- इसका कोई पैक नहीं। बस 2 जुड़वा थे। इसके अल्फा को पिछले महीने सरदार ने मार दिया था और बचे हुए बीटा अलग-अलग पैक मे समिल हो गये सिवाय इन जुड़वा के, जिन्हें कमजोर समझ कर खेलने के लिये किले में भटकने छोड़ दिया।
आर्यमणि:- चलो फिर आज ये किला फतह करते है। ब्लड ओथ सेरेमनी की तैयारी करो।
रूही अलबेली को लेकर सुरक्षित जगह पर पहुंची। चारो ओर का माहौल देखने के बाद रूही ने आर्यमणि को बुलाया। आर्यमणि वहां पहुंचा। रूही, चाकू अलबेली के हाथ में थमा दी। अलबेली पहले अपना हथेली चिर ली, फिर आर्यमणि का। और ठीक वैसे ही 2 मिनट की प्रक्रिया हुई जैसे रूही के समय में हुआ था।
अलबेली भी अपने अंदर कुछ अच्छा और सुकून भरा मेहसूस करने लगी। रूही के भांति वह भी अपने हाथ हाथ को उलट–पलट कर देख रही थी। अलबेली को पैक में सामिल करने के बाद आर्यमणि, उन दोनों को लेकर सरदार खान की गली पहुंचा, जिसे उसका किला भी मानते थे। जैसे ही किले में आर्यमणि को वेयरवॉल्फ ने देखा, हर कोई उसे ही घुर रहा था। आर्यमणि आगे–आगे और उसके पीछे रूही और अलबेली। तीनों उस जगह के मध्य में पहुंचे जिसे चौपाल कहते थे। इस जगह पर आम लोगों को आने नहीं दिया जाता था। 4000 स्क्वेयर फीट का खुला मैदान, जिसके मध्य में एक विशाल पेड़ था और उसी के नीचे बड़ा सा चौपाल बना था, जहां बाहर से आने वालों को यहां लाकर शिकार किया करते थे तथा सरदार खान की पंचायत यहीं लगती थी।
रूही को देखते ही वहां का पहरेदार भाग खड़ा हुआ। रूही ने दरवाजा खोला, आर्यमणि सबको लेकर अंदर मैदान में पहुंचा। रूही अपने चाकू से उस चौपाल के पेड़ पर नये पैक निशान बनाकर उसे सर्किल से घेर दी। सर्किल से घेरने के बाद पहले आर्यमणि ने अपने खून से निशान लगाया, फिर रूही ने और अंत में अलबेली ने। यह लड़ाई के लिये चुनौती का निशान था। इधर किले कि सड़क पर जैसे ही आर्यमणि को सबने देखा, सब के सब सरदार खान के हवेली पहुंचे। मांस पर टूटा हुआ सरदार खान अपने खाने को छोड़कर एक बार तेजी से दहारा….. "सुबह के भोजन के वक़्त कौन आ गया अपनी मौत मरने।".. ।
नरेश:- सरदार वो लड़का आर्यमणि आया है, उसके साथ रूही और अलबेली भी थी।
सरदार:- अलबेली और रूही के साथ मे वो लड़का आया है। क्या वो हमसे अलबेली के विषय में सवाल-जवाब करने आया है? या फिर कॉलेज के मैटर में इसने जो हमारे कुछ लोगों को तोड़ा था, उस बात ने कहीं ये सोचने पर तो मजबूर नहीं कर दिया ना की हम कमजोर है। नरेश कहीं हमारी साख अपने ही क्षेत्र में कमजोर तो नहीं पड़ने लगी...
नरेश:- खुद ही चौपाल तक पहुंच गया है सरदार, अब तो बस भोज का नगाड़ा बाजवा दो।
सरदार ने नगाड़ा बजवाया और देखते ही देखते 150 बीटा, 5 अल्फा के साथ सरदार चौपाल पहुंच गया। सरदार और उसके दरिंदे वुल्फ जैसे ही वहां पहुंचे, पेड़ पर नए पैक का अस्तित्व और उसपर लड़ाई की चुनौती का निशान देखते ही सबने अपना शेप शिफ्ट कर लिया… खुर्र–खुरर–खुर्र–खूर्र करके सभी के फेफरों से गुस्से भरी श्वंस की आवाज चारो ओर गूंजने लगी.…
सरदार ने नगाड़ा बजवाया और देखते ही देखते 150 बीटा, 5 अल्फा के साथ सरदार चौपाल पहुंच गया। सरदार और उसके दरिंदे वुल्फ जैसे ही वहां पहुंचे, पेड़ पर नए पैक का अस्तित्व और उसपर लड़ाई की चुनौती का निशान देखते ही सबने अपना शेप शिफ्ट कर लिया… खुर्र–खुरर–खुर्र–खूर्र करके सभी के फेफरों से गुस्से भरी श्वंस की आवाज चारो ओर गूंजने लगी.…
सबसे आखरी में सरदार ने शेप शिफ्ट किया। सभी वुल्फ की लंबाई 8 से लेकर 9 फिट की थी, लेकिन जब सरदार पुरा वुल्फ में बदला तब वह हाथी जैसा विशाल लग रहा था। वहां मौजूद सभी वेयरवोल्फ अपना सिर झुकाकर सरदार सम्मान देने लगे सिवाय रूही और अलबेली के, जो अब उसके पैक का हिस्सा नहीं थे। इससे पहले की सरदार हमले का आदेश देता, आर्यमणि अपने कमर से २ साई वेपन निकालकर….. "उस दिन केवल अपने हाथो से तोड़ा था फिर भी जख्म भड़ने के लिए इस सरदार को हील करना पड़ा था। जरा सोचो खंजर की तरह दिखने वाला ये हथियार जब पुरा सीने के अंदर घुसा दूंगा, फिर कौन बचायेगा। ओह एक बात तो कहना भुल ही गया, ये खंजर सा दिखने वाला एक फिट का हथियार वुल्फबेन में डूबा हुआ था, शायद आज तेरा सरदार भी ना बचे।"..
आर्यमणि की बात सुनकर सरदार ने एक जोरदार वूल्फ साउंड "वूऊऊऊऊ" की आवाज़ लगाई और देखते ही देखते सभी शेप शिफ्टर वापस से इंसान बन गए। सरदार भी अपने असली स्वरूप में आया…. "आर्यमणि, तुम जंग छेर रहे हो।"..
आर्यमणि:- सरदार मै यहां जंग करने आता तो केवल लाशें गिरी होती जैसा कि कल मैंने उन ट्विंस और उसके पैक का हाल किया था। कल यही 50 लोग सोक मना रहे थे ना, लेकिन इतना मजबूत पैक होने के बावजूद उसके इलाके में घुसे नहीं।
सरदार:- हम नियम से बंधे है।
आर्यमणि:- मै भी नियम से बंधा हूं। जैसा कि तुम सब मेरे पैक का निशान देख रहे हो। रूही और अलबेली मेरे पैक में है। और अब समझ ही गये होगे कि मैंने यहां किसे चैलेंज किया है। सरदार मेरा एहसान है तुम पर, ट्विंस को मारकर मैंने तुम्हारे सोक का बदला लिया है और अब बारी तुम्हारी है, मेरे सोक को संतुष्ट करने का। फर्स्ट अल्फा होने के नाते तुम्हे दोषी पैक को लड़ने के लिये भेजना होगा।
सरदार:- ठीक है आर्यमणि, नरेश अपने पैक के साथ आगे आओ।
नरेश और उसके साथ 42 लोग आगे आये। आर्यमणि रूही और अलबेली को चौपाल के पास ही रहने का इशारा करके, खुद आगे आया। सरदार खान अपनी कड़कती आवाज में.… "वुल्फबेन वाला हथियार वहीं छोड़कर आओ आर्यमणि।"
आर्यमणि:- जैसा तुम चाहो सरदार..
आर्यमणि अपने बैग मेटल मेश ग्लव्स निकाला और अपने दोनो हाथ में पहनते…. "अब ठीक है सरदार।"… (मेटल मेश ग्लव्स, धातु की बनी एक मजबूत ग्लव्स होती है जिसे तेज हथियार अंदर नहीं भेद सकते। किचेन से लेकर फैक्ट्री में मशीन से कटिंग के काम करने वाली जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है)
सरदार कुछ बोलता उससे पहले ही नरेश ने हमले की गरज लगा दीया। शायद रणनीति जैसे पहले से तय हो। 42 बीटा रूही और अलबेली पर हमला करने चले गये और अकेला नरेश अपनी जगह खड़ा रहा। नरेश को लगा आर्यमणि उन दोनों को बचाने जाएगा, लेकिन इसके उलट आर्यमणि ने तेजी के साथ अपने कदम नरेश के ओर बढ़ा दिया।
नरेश जब अपना शेप शिफ्ट किया तब वो आर्यमणि से 2 फिट लंबा लग रहा था और वैसा ही चौड़ा भी। आर्यमणि उसके सामने किसी बच्चे की तरह दिखने लगा। बच्चा समझकर नरेश ने अपना पंजा चलाया और आर्यमणि ने उसके पंजे पर ही अपना ऐसा मुक्का चलाया की कलाई की हड्डी पाउडर बन गयि।
अगले ही पल आर्यमणि ने दूसरा हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। ऐसा लगा जैसे कपड़े को निचोड़ रहा था। हाथ के अंदर का हड्डी कहीं हवा हो गया हो और हाथ मांस के सहारे झूल रही थी। दोनो हाथ को बेजान करने के बाद आर्यमणि एक जोरदार मुक्का उसके जांघ पर मारा। ऐसा लगा जैसे रोड रोलर के बीच एक ईंट आ गयि हो। ठीक वैसा ही हाल जांघ की की हड्डी का था। आशानिया पीड़ा से नरेश लगातार बिलबिला रहा था। लेकिन आर्यमणि, नरेश को वहां नीचे जमीन पर गिरने नही दिया क्योंकि पास में ही शक्ति का भूखा एक बीस्ट अल्फा था। इसलिए नरेश का अचेत शरीर को हवा में उछाल दिया जो सीधा गिरा पेड़ के पास।
इधर रूही अकेली ही नरेश के 42 बीटा के साथ जूझ रही थी और अलबेली को अपने पीछे लिये, बीटा के वार को झेलती उसपर हमला भी कर रही थी। महज चंद सेकेंड में नरेश को पेड़ के पास फेंककर आर्यमणि उसके बीटा की भीड़ पर टूट पड़ा। आर्यमणि के दमदार पंच पड़ना शुरू हो गया। वो इतनी तेज गति से एक के बाद दूसरे को मारता जा रहा था कि रूही और अलबेली को घेरे भिड़, जादुई तरीके से गायब हो गयि और उस माहोल में केवल दर्द भरी चींखें गूंज रही थी। जिसे भी कराड़ा मुक्का पड़ता, उसकी हड्डियां आगे से टूटकर शरीर के पीछे तक घुस जाती और वो बीटा तेज कर्रहाते हुए जमीन पर। अब तो आगे से एक नई अल्फा रूही और पीछे से किंग अल्फा आर्यमणि का हमला लगातार होते जा रहा था और सरदार खान सबको घायल होते देख रहा था।…. "सब क्लियर हो गया रूही।"..
रूही:- हां बॉस सब क्लियर..
आर्यमणि:- चलो अलबेली को कहो उस नरेश को अपने पंजे से पुरा सजा दे, और कल की पूरी भड़ास निकाल ले…
सरदार खान:- नहीं..
सरदार खान की नहीं होती रही लेकिन अलबेली ने अपने पंजे से नरेश कर सर उतार दिया। उसके बाद अलबेली और रूही ने मिलकर नरेश के बाकी पैक को भी ऊपर का टिकिट थमा दिया..… "बॉस यहां का काम हो गया।"
आर्यमणि:- रूही, अलबेली के साथ जाकर कार में बैठो मै आता हूं। सरदार जरा हम दोनों चौपाल पर बैठे, कुछ काम की बातें कर लेते है।
सरदार अपनी गुस्से में लाल आखें दिखाते…. "अब बात करने को बचा क्या है?"..
आर्यमणि:- कब तक इन अल्फा और बीटा की शक्तियों से बीस्ट बनते रहोगे, जो वुल्फबेन, माउंटेन एश, सिल्वर और ना जाने किस-किस चीज की गुलाम होगी। बाकी यदि तुम्हे लगता है कि मैंने यहां आकर तुम्हे नीचा दिखाया और तुम्हारी शक्तियों को चैलेंज किया है तो बेशक जंग छेड़ दो, मै हमेशा तैयार हूं।
सरदार:- तुम लोग जाओ यहां से, जरा हम फर्स्ट अल्फा आपस में कुछ बातें कर ले।
भीड़ के चौपाल से हटते ही… "सरदार वाकी वुड्स के प्रतिबंधित क्षेत्र में तूमने अपने लोग भेजे थे?"
सरदार:- हम्मम ! चारो ओर की खबर रखते हो।
आर्यमणि:- मेरे पास ऐसे कई सारे राज है जो तुम्हारे बहुत काम के है। जैसे लोपचे का वो भटकता मुसाफिर, एडियाना का मकबरा कुछ दिन में मेरे पास अनंत कीर्ति की वो पुस्तक भी खुली हुई होगी।
सरदार:- ये मनगढ़ंत बाते है जो तुम मेरे दुश्मनी से बचने के लिए कर रहे।
आर्यमणि:- "सरदार जितना बेवकूफ तुम खुद को दिखा रहे उतने हो नहीं। तुम अब भी यह पता लगाने में जुटे हो की मै हूं क्या? तुम्हारे शरीर को मेरा वो सई वैपन भेद नहीं पता, तुम चाहते तो मुझ पर बिना डरे हमला कर सकते थे, और हारने की स्थिति में तुम बड़ी आसानी से, यहां से भाग सकते थे, ये तो वक़्त की बात है जब हम भिड़े होते।"
"लेकिन तुमने पहली ही मुलाकात में मेरे अंदर वो मेहसूस किया जो कभी तुम्हारे पास थी लेकिन दूर हो गई। जिसकी तलाश में तुम कई दशकों से घूम रहे। अब मान भी जाओ सरदार की ये प्रहरी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकते जिसके लिए तुम काम करते हो।"
सरदार:- एक छोटा सा लड़का इतना स्मार्ट भी हो सकता है, ये तो कमाल हो गया। लेकिन बच्चे मुझे कुछ जानकारी निकालनी हो तो, मै वो बड़ी आसानी से निकाल सकता हूं। केवल अपने पांचो नाखून तुम्हारे गर्दन के पीछे घुसाने होंगे।
आर्यमणि:- तुम वो भी नहीं कर सकते क्योंकि थोड़ा भी उल्टा हुआ तो तुम अपनी इस बीस्ट की शक्ति से हाथ धो बैठोगे। अभी चलता हूं, लेकिन तुम्हे सच जानने का पूरा मौका मिलेगा।
सरदार:- कब... ???
आर्यमणि:- चन्द्र ग्रहण की रात सरदार, ताकि तुम मेरे साथ धोका ना कर सको। फिलहाल चलता हूं। साथ काम करोगे तो लंबा खेलेंगे, वरना तुम प्रहरी को उल्लू बना सकते हो, मुझे नही।
आर्यमणि अपनी बात कहकर वहां से चला आया। अलबेली और रूही पहले से कार में बैठे थे, आर्यमणि आते ही कार स्टार्ट किया और चल दिया… "ये कोई कॉलेज का रास्ता नहीं है।"
आर्यमणि:- हां जानता हूं। मै दीदी के ऑफिस जा रहा हूं।
रूही:- लेकिन हम वहां क्यों जा रहे है?
आर्यमणि, कार रोककर घूरते हुए… "मै इतना ज्यादा सवालों के जवाब आज तक कभी अपने पिताजी को नहीं दिया जितना तुम सवाल–जबाव करती हो। अब तो लगता है पैक बनाकर गलती कर दी क्या?
रूही:- सॉरी बॉस। लेकिन जबतक आप बात साझा नहीं करोगे मै समझूंगी कैसे।
आर्यमणि:- सरदार खान को मैंने झांसा दिया है शायद ही वो दुश्मनी करने का सोचे। कम से कम तबतक तो नहीं, जबतक उसे विश्वास है कि मैं उसके सपने पूरे कर सकता हूं। लेकिन उसकी बुद्धिमत्ता पर कितना भरोसा, ना जाने कब मतिभ्रम हो और वो तुम दोनो मे से किसी पर हमला कर दे..... मै जबतक बैकअप के लिए पहचुंगा तबतक तुम लोग... समझ रहे हो ना। इसलिए ये अलबेली भी पढ़ने जाया करेगी।
अलबेली:- भईया ये पढ़ाई क्या होती है?
रूही:- सवाल मत पूछ, बॉस का दिमाग सटका हुआ है।
आर्यमणि अपनी कार रोकते…. "दोनो बस्ती जाओ, रूही कुछ दिन कॉलेज मत आना, जबतक मै अलबेली का कुछ सोच नहीं लेता। तबतक तुम इसे कंट्रोल सिखाओ और कुछ भी गड़बड़ लगे तब बस्ती से भाग जाना..
रूही:- मै तो खुद 1 दिन पहले अल्फा बनी हूं और बनते ही डांट खा गई थी.. मैं कैसे कंट्रोल सिखाऊंगी... वैसे अभी तो कह रहे थे हम यहां खतरा है, फिर क्या सोचकर गाड़ी रोक दिये?
रूही की बकवास सुनकर आर्यमणि ने जैसे ही अपनी आंखें दिखाई... "सॉरी बॉस मै जाती हूं ना और अलबेली को कंट्रोल सिखाती हूं। आप जाओ.. शाम को मिलते है सेकंड प्वाइंट पर।"
रूही, अलबेली के साथ उतर गई और आर्यमणि गाड़ी घूमाकर सीधा अपनी मासी के घर। मासी बड़े आराम से हॉल में बैठकर टीवी का मज़ा ले रही थी। आर्यमणि अपना फोन और बेल्ट मेज पर रख दिया और अपना सिर मासी के गोद में रखकर…. "मासी थोड़ा सर दबा दो ना, सर भारी लग रहा है।"
मीनाक्षी उसके बलो में हाथ फेरती हुई टीवी देखने लगी, और आर्यमणि सुकून से अपनी आखें बंद करके सो गया। 15-20 मिनट तक सर को दबाने के बाद…. "बहुत स्वार्थी है रे आर्य, मतलब मै कुछ बोल नहीं रही तो पूछेगा भी नहीं की मासी क्या हुआ, बात क्यों नहीं कर रही।"
वैदेही, हंसती हुई… "आई वो सो गया, और आप नाराज किस बात पर है।"..
मीनाक्षी:- अनंत कीर्ति की किताब के बारे में उसके मौसा ने बताया और किताब कैसे खुलेगी उसकी शर्त भी। लेकिन ये...
वैदेही:- ओह तो अगला कोशिश हमारे आर्य जी करने वाले है।
मीनाक्षी:- इसलिए तो दिमाग खराब हो गया। कहता है फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ लूंगा लेकिन ये कोशिश नहीं करूंगा। मैंने सुकेश का चेहरा देखा था जब आर्यमणि ने ये जवाब दिया। उतर गया था। बड़ी उम्मीद थी उन्हें की उस किताब का कोई उत्तराधिकारी मिले। शायद ये हार जाता, लेकिन एक कोशिश कर लेता तो क्या चला जाता।
वैदेही:- आई कॉलेज में पढ़ने वाला बच्चा है ये, इतनी गहराई से नहीं समझता। बाबा एक बार और समझाकर बोलेंगे ना, तब ये पक्का ना नहीं करेगा।
मीनाक्षी:- हां सो तो है। लेकिन सुकेश ने भी इसलिए नहीं जोर दिया होगा, क्योंकि हंसने खेलने की उम्र में अभी इतने टेंशन वाला काम के लिए जोर क्यूं डालना।
वैदेही:- ये भूमि का चमचा है आई। कभी इसको मौज–मस्ती जैसी चीजें करते देखी हो? हमेशा कोई ना कोई सीरियस काम में ही लगा रहता है। आज सुबह भूमि से कह रहा था, दीदी अब मुझे पढ़ने में मन नहीं लगता बिजनेस करूंगा। बताओ, आप कह रही है हसने खेलने की उम्र है।
मीनाक्षी:- तू दोनो तरफ का पानी मत मार। अभी तो पहले तुमने ही कहा ना, कॉलेज में पढ़ने वाला लड़का है उतनी गहराई से नहीं समझता। और जब मै कह रही हूं, हां खेलने-कूदने की उम्र है तो कहती है सीरियस रहता है।
वैदेही:- आपका क्या करूं मै आई… गहराई मतलब बाबा के भावनाओ को गहराई से नहीं समझा। अभी उम्र कम है इन मामले में। बाकी की बात सच है, अपने हिसाब से जितना समझता है उसपर सीरियस रहता है।
मीनाक्षी:- थोड़ा और अच्छे से समझा।
वैदेही:- मतलब अनुभव की कमी है लेकिन लड़का गंभीर है।
मीनाक्षी:- हां ये तो सही बोली। लेकिन हंसना-बोलना और लोगों को समझना भी तो जरूरी है। वरना ये तो पूरी उम्र काम में ही निकाल देगा। पलक से बात कर इस बारे में और उसे समझाओ की आर्य को थोड़ा वक़्त दे। इसे सब चीजें समझाए।
वैदेही:- ढूंढ कर जोड़ी मिलाई है आप लोगो ने। पलक क्या कम है। दोनो रोमांस करने के बदले, "हम्मम हम्मम" करते हुए सो जाएंगे।
मीनाक्षी:- ना ना ऐसा नहीं होगा। ये लड़के बहुत चालू होते है। सबके सामने सरिफ और अकेले में जाते ही शैतान।
वैदेही:- आई आप भी ना। पूरा दिन काम के बारे में सोचते रहेंगे तो अकेले कब होंगे। अभी का ही ले लो। इन लोगो के 2 क्लास के बीच 1 घंटा गैप रहता है। अब ये यहां है और कॉलेज से पलक का कॉल भी अब तक नहीं आया। इसे थोड़ा रिलैक्स होना था तो आपकी गोद याद आ गई।
मीनाक्षी, आर्यमणि के चेहरे पर हाथ फेरती… "देख तो मेरा बच्चा मुझे कितना चाहता है। थू–थू किसी कि नजर ना लगे।"
वैदेही:- आई, कब आप बड़ी होगी। अभी तो इसे पलक के गोद मे होना चाहिए था। ड्यूट गाना चाहिए था। लेकिन ये यहां रिलैक्स हो रहा है और वो वहां किताब में लगी होगी। दोनो वक़्त कब देंगे…
मीनाक्षी:- अभी लगन में वक़्त है, तबतक दोनो के बीच प्यार जाग जाएगा।
वैदेही:- और नहीं जगा तब..
मीनाक्षी:- तब तेरी तरह प्यार जागेगा, सुहागरात के बाद।
वैदेही:- आई, आप घूम फिर कर मेरे ऊपर क्यों आ जाती हो।
मीनाक्षी:- गलत तो नहीं कह रही। तुम दोनो भी तो शादी के पहले वक्त नहीं देते थे। प्यार नहीं था।
शाम के 6 बजे..
आर्यमणि जंगल के अपने मीटिंग पॉइंट पर पहुंच चुका था। रूही और अलबेली भी वहां पहुंच चुकी थी।… "तुम दोनो में से कोई बताएगा सरदार खान की उम्र क्या होगी।"..
दोनो एक साथ… "70-80 साल"
आर्यमणि:- गलत, लगभग 500 साल। इंसानों और भेड़ियों का मांस खाता है, इसलिए वो बीस्ट की तरह दिखता है। यदि नहीं खाता तो इंसान की तरह दिखता। अब ये बताओ जब प्रहरी इतने बड़े शिकारी है तब ये सरदार खान आज तक इतने साल जीवित कैसे रह गया?
कोई और यह बात कहता तो शायद रूही और अलबेली उसे पागल समझती। लेकिन आर्यमणि ने खुलासा किया था इसलिए दोनो सोचने पर मजबूर हो गई की आखिर एक वुल्फ का इतना लंबा जीवन काल कैसे हो सकता है...
आर्यमणि जंगल के अपने मीटिंग पॉइंट पर पहुंच चुका था। रूही और अलबेली भी वहां पहुंच चुकी थी।… "तुम दोनो में से कोई बताएगा सरदार खान की उम्र क्या होगी।"..
दोनो एक साथ… "70-80 साल"
आर्यमणि:- गलत, लगभग 500 साल। इंसानों और भेड़ियों का मांस खाता है, इसलिए वो बीस्ट की तरह दिखता है। यदि नहीं खाता तो इंसान की तरह दिखता। अब ये बताओ जब प्रहरी इतने बड़े शिकारी है तब ये सरदार खान आज तक इतने साल जीवित कैसे रह गया?
कोई और यह बात कहता तो शायद रूही और अलबेली उसे पागल समझती। लेकिन आर्यमणि ने खुलासा किया था इसलिए दोनो सोचने पर मजबूर हो गई की आखिर एक वुल्फ का इतना लंबा जीवन काल कैसे हो सकता है...
रूही:- क्योंकि वो प्रहरी के नियम अनुसार चलता है। शांति बनाए रखता है और बुरे वक़्त में उनकी मदद भी करता है।
आर्यमणि:- अलबेली तुम कुछ कहना चाहोगी।
अलबेली:- आसपास कहीं खरगोश की प्यारी सी खुशबू आ रही है। मुझे दीवाना बना रही है। मै खुद को रोक नहीं पा रही।
आर्यमणि:- फिर तो अलबेली तुम हो गई सरदार खान और वो खरगोश हो गया अलबेली। जिसे बचाने के लिए उसका भाई आएगा लेकिन आज मारा जाएगा।
अलबेली:- सॉरी भईया। लेकिन क्या करूं ये खुशबू मुझे पागल कर रही है।
आर्यमणि:- यही तो सीखना है हमे.. कंट्रोल। कैसे खुद पर काबू रखे। यदि तुम केवल कच्चा मांस खाने वाली और नब्ज से गरम खून पीने वाली जीव होती, तो तुम्हे ऊपर वाला वैसा ही बनाता ना। तुम्हे इतना खास बनाने के पीछे जरूर कोई ना कोई वजह रही होगी। सो माय डियर गर्ल्स, हमारा पहला पाठ होगा कंट्रोल, और उसका पहला अध्याय होगा, फूड हैबिट। आज से तुम दोनो ना तो एक भी जानवर खाओगी और ना ही किसी का खून पियोगी।
अलबेली:- इस से अच्छा तो मार डालो।
आर्यमणि:- अच्छा ठीक है अभी के लिए थोड़ी ढिल दिया। वीकेंड में भूना मांस खा सकती हो। लेकिन इस से ज्यादा छूट नहीं। चलो अब दौड़ लगाओ और खुद पर काबू करना सीखो।
आर्यमणि के अनुसार अभ्यास करने का पहला दिन, और पहले दिन में ही रूही और अलबेली ध्वस्त सी हो गयि थी। एक तो काफी तेज दौड़ने के कारण धड़कन इतनी तेज हो जाती कि शेप कब शिफ्ट होता उन्हें खुद भी पता नही चलता और ऊपर से आर्यमणि का सितम। जैसे ही रूही और अलबेली वेयरवोल्फ में तब्दील होती, आर्यमणि की खौफनाक वुल्फ साउंड पर दोनो अपने घुटनों के बल आने पर मजबूर। तेज दौड़ने के बाद फिर शुरू हुआ दिमाग को चकराने वाला ट्रेनिंग शुरू, जहां जंगली जानवर को हल्का चिड़कर उसका ताजा खून रूही और अलबेली की आंखों के सामने बह रहा था। कुछ देर तक तो दोनो खुद को काबू रखी, लेकिन उसके बाद तेज दहाड़ के साथ झपट्टा मारने के लिए छलांग लगा चुकी थे।
आर्यमणि उतनी ही तेजी से जानवर को हटाया और फिर से आर्यमणि की ऐसी खौफनाक आवाज गूंजी, जिससे रूही और अलबेली दोनो अपने घुटने पर और सर नीचे जमीन में घुसा.… "बॉस इसे जुल्म करना कहते है।"… किसी तरह रूही ने अपने शब्द कहे..
अलबेली भी थोड़ी हिम्मत जुटाती.… "भैया ऐसे तो हमारा दिमाग ही फट जायेगा। किसी नशेड़ी के सामने उसके नशा का समान रखकर कहोगे कंट्रोल करने, कहां से होगा...
आर्यमणि:– मैं हूं ना, चिंता क्यूं करती हो। सब होगा, बस तुम देखती जाओ...
इतना कहकर आर्यमणि ने उस जानवर हो हिल करके जंगल में छोड़ दिया। रूही और अलबेली दोनो पास ही खड़ी थी, दोनो को कुछ और अभ्यास समझाकर जैसे ही आर्यमणि जाने लगा... "बॉस आप अपनी ट्रेनिंग भूल गये"..
आर्यमणि थोड़ा हिचकते हुए... "फिर कभी रूही, अभी अलबेली भी है।"…
अलबेली:– कौन सा अभ्यास...
आर्यमणि:– टैटू बनाने के अभ्यास...
अलबेली:– मुझे भी टैटू बनवाना है...
रूही:– हां क्यों नही... देखा बॉस अलबेली को भी टैटू बनवाना है, चलो प्रैक्टिस कर लेते हैं।
अलबेली:– मेरे ऊपर भी प्रैक्टिस कर सकते हो...
रूही, हंसती हुई... "पागल अभी प्रैक्टिस करने के लिए तेरी उम्र नही हुई। एडल्ट स्किन पर कुछ गड़बड़ भी हुई तो स्किन हटाकर हिल कर लेंगे। लेकिन जैसा की तुम्हारे Xabhi चाचू कहते है, बार–बार टैटू बनाने से स्किन कैंसर हो जाता है, इसलिए तुम्हारे स्किन के साथ यह जोखिम हो सकता है।
अलबेली:– ओह ये बात है, फिर ठीक है आप दोनो प्रैक्टिस करो, मैं बस्ती जाति हूं।
अलबेली के वहां से जाते ही रूही शरारती मुस्कान के साथ आर्यमणि को आंख मार दी, और हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ ले जाने लगी। कुछ दूर चलने के बाद रूही ने झाड़ियों का परदा हटाया और जो नजारा आंखों के सामने था उसे देखने के बाद.… "यहां तो तुमने पूरे सुहागरात की तैयारी कर रखी हो।"
चारो ओर फूल की झाड़ियां लगी थी। बीच में मखमली गद्दा, और किनारे पर कुछ अतिरिक्त वस्त्र भी रखा हुआ था। शायद अपनी पिछली मिलन में फटे कपड़े रूही को याद थे। आर्यमणि, रूही की तैयारी देखकर हंसने लगा और जाकर सीधा लेट गया।
रूही:– ये क्या है बॉस...
आर्यमणि:– मुझे बस मजे लेने है। तुम मेरे लिंग को खड़ा करो, उसपर बैठो, खेलो–कूदो और मुझे संतुष्ट करो।
रूही की आंखों में जैसे चमक आ गयि हो... "बॉस फिर आपके कंट्रोल का क्या?"
आर्यमणि:– सेक्स जैसे प्रक्रिया में भी कोई अपने एक्सिटमेंट को सम्पूर्ण नियंत्रण कर सकता है क्या? मैं यहां लेटे हुये एक्साइटमेंट और धड़कन बढ़ने की प्रक्रिया को अलग करने की कोशिश करता हूं।
रूही, पूर्ण जिज्ञासावश.… "क्या यह संभव है बॉस?"..
आर्यमणि:– हम न तो जानवर है और न ही इंसान। जिसे भगवान ने इतना खास बनाया हो, वो लोग यह कारनामे भी कर सकते है। हां पर थोड़ा वक्त लगेगा...
रूही:– ये पहला ऐसा काम होगा जहां वक्त लगना सबसे ज्यादा एक्साइटिंग है... क्या कहते हो बॉस..
आर्यमणि:– बातों में ही तुम सब कुछ कर लेना...
रूही, आर्यमणि की बात सुनकर हसने लगी और छलांग लगाकर ऊसके ऊपर कूदती... "आज तो सच में आपको निचोड़ लूंगी बॉस"… कहते हुये रूही सीधा अपने होंठ आर्यमणि के होंठ से लगा दी और हाथ नीचे ले जाकर उसके लिंग को मुट्ठी में दबोच लिया। आर्यमणि भी रूही का साथ देते उसके टॉप में हाथ डालकर उसके स्तन को मुट्ठी में पकड़कर दबोचने लगा।
कुछ ही देर बीते थे और दोनो के अंदर का जानवर जैसे जाग गया हो। पागलों की तरह एक दूसरे के बदन पर पंजे के निशान दे रहे थे। दोनो के शेप कब शिफ्ट हुए यह भी पता नही। बस पागलों की तरह दोनो एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे। रूही अपने मुंह में पूरा लिंग दबाए, नीचे अंडकोष को अपने मुट्ठी में दबोचे थी। वहीं आर्यमणि एक हाथ से रूही के गोल–सुडोल आकर्षक स्तन को दबा रहा था तो दूसरे हाथ से उसके योनि के साथ बड़ी बेरहमी से खेल रहा था।
एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते हुए जोश इतना उफान पर था कि आर्यमणि रूही को पटक कर नीचे कर दिया और उसके ऊपर चादर की तरह बिछकर लिंग को एक ही झटके में उसके योनि में उतार दिया.… "आह्ह्हहह्ह्हह्ह्ह्ह्ह" की मादक सिसकारी के साथ रूही अपना मुंह खोलकर आर्यमणि के कंधे पर अपना फेंग पूरा घुसा दी और रूही के क्ला आर्यमणि की पीठ में घुसे थे। आर्यमणि के कंधे और पीठ से निकलता लहू मानो अंदर के जोश को और चौगुना कर दिया हो। फिर तो आर्यमणि इतने जोश के साथ धक्के मार रहा था कि रूही हर धक्के के साथ अपनी सिसकारी और भी ज्यादा बढ़ा रही थी।
लाजवाब स्टेमिना में रूही कई बार बह गई लेकिन आर्यमणि का जोश था जो उसके लिंग से निकलने का नाम ही नही ले रहा था। कई बार झड़ने के बाद रूही अब इस खेल को खत्म होते देखना चाहती थी, लेकिन आर्यमणि उसे अपने नीचे दबाए हचक–हचक कर धक्के मार रहा था.… "नही, आर्य.. नही अब बस करो... अंदर पूरा छिल रहा है"… जोश खत्म होते ही रूही शेप शिफ्ट करके वापस इंसानी स्वरूप में आ चुकी थी, जिसके ऊपर लगभग २ क्विंटल का 8–9 फूटिया वेयरवोल्फ बिछा था, जिसपर रूही के मिन्नत का असर भी नही हुआ... तभी रूही के आंखों से आंसू आ गए और दोबारा मिन्नतें करती कहने लगी.… "बॉस मैं दर्द से मर जाऊंगी... प्लीज छोड़ दो"…
आर्यमणि के कान तक जैसे यह आवाज पहुंची हो और अचानक ही आर्यमणि घबराकर रूही के ऊपर से उठते... "नही ओशून, मैं यह करना नही चाहता था। तुम ठीक तो हो न। तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा।"…. आर्यमणि व्याकुलता से अपनी बात बड़बड़ाते हुये अपना एक पंजा रूही के स्तनों के बीच रखा और दूसरा पंजा रूही के योनि पर। दोनो पंजे रखने के बाद आर्यमणि लगातार ओशून का नाम बड़बड़ाते हुए रूही का दर्द अपने पंजे में उतार कर उसे दर्द मुक्त करने लगा।
कुछ देर बीत चुके थे। रूही का दर्द सुकून में बदल चुका था लेकिन आर्यमणि की आंखें अब भी नम थी और मुख से ओशून ही निकल रहा था। रूही, आर्यमणि को बड़े ध्यान से देखती जैसे ही उसके इमोशन को पढ़ने की कोशिश कि... तभी आर्यमणि की तेज दहाड़ उन फिजाओं में गूंज उठी। रूही अपने घुटनों पर आती केवल जमीन को ही तक रही थी। जैसे ही रूही ने अपना सर उठाकर कुछ कहना चाहा, उसका सामना आर्यमणि की घूरती नजरों से हुआ, उसके बाद तो जैसे रूही की आवाज गले में ही अटक गई हो और कितना भी कोशिश करके देख ली, लेकिन सर ऊपर नही उठा पाई।
आर्यमणि अपने कपड़े पहना और बिना कुछ बोले चुप–चाप वहां से चला गया।… "अकडू बॉस की तो यहां अलग ही कहानी है। कौन है ये ओशून जो एक पहाड़ जैसे अडिग इंसान को ऐसा उलझाया, कि वह भूल ही गया की किसके साथ संभोग कर रहा?"
अगली सुबह आर्यमणि अकेले ही कॉलेज पहुंचा। पहला क्लास गुमसुम ही कटा। ब्रेक के दौरान आर्यमणि दोस्तों से मिलने कैंटीन जा रहा था। इधर चित्रा, निशांत, पलक और माधव के साथ आज रूही भी कैंटीन में बैठी थी। आज से पहले रूही कभी अपने ग्रुप से बाहर नही बैठी, लेकिन आज वो अपने बॉस के टेबल पर बैठी उसका इंतजार कर रही थी। रूही को दूर से देखकर ही, आर्यमणि ने अपना रास्ता बदल लिया। रूही ने जैसे ही आर्यमणि को भागते देखा, वह भी झटपट उस टेबल से उठकर आर्यमणि के पीछे गई।
निशांत:– कमाल है... आर्य कैंटीन आते–आते अपना रास्ता बदल लिया। और उसे दूसरे रास्ते पर जाते देख ये रूही भी उसके पीछे कट ली।
पलक हैरानी से... "क्या बोले?"
निशांत:– तुमने मेरी बात सुनी नही या फिर स्पष्ट शब्दों में सुनना चाहती हो कि रूही, आर्य के पीछे गयि है।
निशांत ने इधर अपनी बात पूरी की और उधर से चित्रा का उड़ता सैंडल निशांत के मुंह पर.… "कुत्ता तुझे अपने दोस्त के जिंदगी में जहर घोलते शर्म नही आती"..
पलक:– अरे इतना क्यों हाइपर हुई जा रही हो। अभी आर्य को कॉल कर लेती हूं, और साथ में इसकी हरकत भी बताऊंगी...
निशांत:– लगा लो कॉल, वो फोन ही नही उठाएगा...
निशांत जनता था कि क्यों आर्यमणि कॉल नही उठायेगा। क्योंकि सुबह निशांत आर्यमणि को लेने भूमि के घर पहुंचा तब पता चला को आर्य कॉलेज निकल चुका था। और जब फोन लगाया तब फोन घर में ही बज रहा था। हुआ वही... पलक ने 4–5 बार कॉल लगाया लेकिन आर्यमणि के पास फोन हो तो ना उसे उठाए।… "अब भले पलक काफी खूबसूरत है लेकिन रूही... ओय होय होय... बिलकुल अप्सरा है अप्सरा... वो भला क्यों फोन उठाने लगा।"… निशांत ने पुनः अपना तीर दाग दिया।
चित्रा:– तू साबित क्या करना चाहता है निशांत...
निशांत:– यही की विश्वास होना अच्छी बात है लेकिन कोई मेनका बनकर आये तो भला विश्वामित्र खुद को कैसे बचाये। आर्यमणि यूं तो भटकता नही, लेकिन सामने रूही जैसी अप्सरा भटकाने की ठान ले, फिर कोई कितना खुद पर काबू रखेगा...
माधव:– तभी मैं कहूं की ये अलग–थलग ग्रुप में रहने वाली सबसे टॉप क्लास की लड़की अपने टेबल पर कैसे। और जबसे बैठी थी, केवल आर्य के बारे में पूछकर बस कैंटीन के रास्तों को ही ताक रही थी। हम सबसे तो कोई मतलब ही नहीं था।
पलक:– उसे भी आजमा लेने दो। आर्य जायेगा कहां...
पलक मुस्कुराती हुई अपनी बात कही और उठकर वहां से चल दी। यूं तो वो मुस्कुरा रही थी लेकिन वहां मौजूद हर किसी ने पलक के दिल जलने को भी मेहसूस किया था। पलक के जाते ही चित्रा और निशांत में एक राउंड फाइट भी हो गई। जिसका नतीजा कुछ ऐसा था कि निशांत के साथ माधव को भी चित्रा का एक कराड़ा झापड़ पड़ ही गया। चित्रा के वहां से जाते ही... "निशांत भाई ये पलक और आर्य के बीच फूट डालने का मतलब"..
निशांत:– क्योंकि कमीने ने मेरे भी बहुत मजे लिए थे। कोई लड़की जब रूठ जाती थी तब बहुत ताने दिया करता था। हर ब्रेकअप पर ऐसा मजा लेता की पूछ मत माधव... बस अपना भी छोटा सा बदला है ये... कमीने अब मनाते फिरो...
माधव:– ऊ सब तो ठीक है, लेकिन कहीं सच में आर्य का सेकेंड सेटअप हुआ तो...
निशांत:– नाय हो ही नही सकता..
माधव:– तुम सुनिश्चित हो तब तो कोई बात नही, लेकिन यदि ऐसा हुआ तो...
माधव की बात पर निशांत ने थोड़ा सोचा फिर वह भी दौड़ा–दौड़ा गया। इधर जैसे ही आर्य ने अपना रास्ता बदला था, वैसे ही रूही उसके पास पहुंची... "बॉस सुनो तो... बॉस"..
आर्यमणि:– रूही अभी मैं तुमसे बात नही कर सकता...
रूही तेजी से आगे आकर आर्य का रास्ता रोकते... "मैं कल शाम के बारे में एक भी सवाल नही पूछने वाली। अब तो रुक जाओ।"
आर्यमणि:– मुझे अभी अंदर से अच्छा नहीं लग रहा... शाम को मीटिंग पॉइंट पर मिलते है।
रूही:– जैसा तुम ठीक समझो बॉस...
इस छोटी सी वार्तालाप के बाद रूही वहां से चली गयि। रूही तो चली गयि लेकिन उसके जाते ही ठीक पीछे से पलक पहुंच गयि... "मेरे किंग वो रूही क्या कह रही थी?"..
आर्यमणि:– मैं उसके पैक का मुखिया हूं, इसलिए मुझसे मिलने चली आयि।
पलक:– क्या पैक के मुखिया???
आर्यमणि:– चौकने का अच्छा नाटक था। सरदार खान से तो अब तक ये खबर पूरे प्रहरी समुदाय में फैल ही चुकी होगी। क्यों तुम्हे किसी ने नहीं बताया की मैं सरदार खान के चौपाल में घुसकर उसके यहां रह रहे नरेश और उसके बड़े से पैक को समाप्त कर दिया...
पलक:– तुम्हे हुआ क्या है आर्य? सरदार खान और प्रहरी का क्या संबंध? तुम तो वुल्फ भी नही फिर उन्हे मारा कैसे?
आर्यमणि:– मैं एक बोर्न हंटर हूं। वेयरवोल्फ को मारने के लिए मुझे सोचना भी पड़ेगा क्या? छोड़ो ये सब चलो लॉन्ग ड्राइव पर चला जाए...
पलक:– चलो चलते हैं। वैसे भी जो बॉम्ब फोड़ा है उसका पूरी कहानी जाने बिना चैन न मिलेगा...
इधर आर्यमणि और पलक दोनो पार्किंग में चल दिए। पीछे से निशांत भी पहुंचा और दोनो को साथ जाते देख उसके हलख में जान वापस आयि। पलक और आर्यमणि का यह लॉन्ग ड्राइव, आर्यमणि के लिए काफी लाभदायक रहा। प्रहरी और वेयरवोल्फ के बीच चल रहे सांठ–गांठ की कहानी उसने पलक को बता दिया। साथ में आर्यमणि ने पलक का इस ओर ध्यान भी खींचा की कैसे भारद्वाज खानदान को कुछ लोग बर्बाद करने पर लगे है। वरना क्या इस वक्त केवल 2 ही भारद्वाज परिवार अस्तित्व में होता, बाकी परिवारों का क्या हुआ? और सबसे आखिर में उसने पैक बनाने के पीछे के कारण को बताया। जिसका एक कारण नागपुर में रह रहे सरदार खान की उम्र लगभग ५०० वर्ष कैसे हो गयि, जरूर प्रहरी का कोई काला राज इसके पीछे है? और दूसरा कारण सरदार खान अपने अंदर बहुत से राज समेटे है जिसका पता लगाने के लिए उसके किले में घुसना जरूरी था। और किले में घुसने के लिए उसे एक पैक की जरूरत थी।
आर्यमणि की बात सुनकर पलक के जैसे होश ही उड़ गए थे। वह गाड़ी मोड़कर वापस कॉलेज चली आयि और आर्यमणि से विनती करती हुई कहने लगी, जबतक पलक प्रहरी की एक मीटिंग न ले ले, वह किसी से भी इस बात की चर्चा न करे। आर्यमणि मान गया और मुस्कुराते हुए वहां से निकला।
शाम के वक्त आर्यमणि रूही और अलबेली से सेकंड पॉइंट पर मिला। आज भी दोनो का कड़ा अभ्यास जारी था। यूं तो कल की हरकत ने आर्यमणि को अंदर से झकझोर दिया था, लेकिन अलबेली को बस्ती भेजने के बाद रूही, आर्यमणि के साथ बैठी। दोनो काफी देर तक खामोश रहे। इस खामोशी को रूही तोड़ती... "बॉस और कितना गिल्ट फील करोगे?"
आर्यमणि:– रूही कल मुझे क्या हुआ था?
रूही:– बॉस तुम्हे कुछ नही हुआ था। बस आपके स्टेमिना के सामने मैं फेल हो गई। और आप कुछ ज्यादा एक्साइटेड थे।
आर्यमणि:– बस इतना ही... क्या मुझमें कोई दरिंदा तुम्हे नजर नही आया?
रूही:– बिलकुल नही... बस मेरे दर्द को देख आप किसी और के दर्द से जुड़ गए और वो आपको ज्यादा तकलीफ दे रही थी। बॉस ये ओशून कौन है?
आर्यमणि:– आज इस सवाल का जवाब नही दे सकता... कभी फुर्सत में तुम्हे पूरी बात बताऊंगा... चलो अभी मैं चलता हूं...
रूही:– और एक एकमात्र बचे कंट्रोल का क्या, जो आपके राज खोल सकती है?
आर्यमणि:– कल हुए घटना के बाद भी तुम ऐसा कह रही।
रूही:– क्यों तुम्हारे पास कोई और ऑप्शन है क्या बॉस?
आर्यमणि:– लेकिन रूही...
रूही:– बॉस तुम जल्द ही पकड़े जाओगे, ये तुम्हे भी पता है।
आर्यमणि:– हम्म्म...
रूही शरारत करती पीछे के ओर चल दी और एक–एक करके अपने सारे कपड़े उतारती... "बॉस हम्मम, हम्मम नही.. ये वक्त आह्ह्हह, उह्ह्ह, आउच का है।"
छटे बादल गिल्ट का और सारे पुर्जे सेक्स की आग में भड़क उठे। एक बार और धका–धक धक्के मारने का काम शुरू हो गया। जोश उफान पर और अरमान तूफान पर था। आज भी आर्यमणि ने शेप शिफ्ट कर लिया। लेकिन कल के मुकाबले आज दिमाग पूरा खुला था। शुरू से लेकर बीच तक तो शेप शिफ्ट नही हुआ था लेकिन जैसे–जैसे चरम की ऊंचाई पर पहुंचा, वैसे–वैसे आर्यमणि की धड़कने बेकाबू हो गयि।
लगभग 7 दिन का देह तोड़ धकाधक लिंग की लंबाई से योनि की गहराई मापने के बाद, पहले आर्यमणि ने पूरा नियंत्रण सीखा और उसके बाद रूही को नियंत्रण सिखाया। पहले जैसे–जैसे आर्यमणि चरम के ओर बढ़ता, वैसे ही उसकी धड़कने बढ़ने लगती। लेकिन अब उल्टा हो रहा था, धड़कन बढ़ने के बदले घटने लगती थी। "प्रैक्टिस मेक ए मैन परफेक्ट एंड वुमन टू (practice make a man perfect & woman too)" के तर्ज पर कुछ और दिन दोनो ने मजे लूटे। और फिर कहां–कहां नही लूटे। कम समय का सेक्स हो जैसे की कार या फिर किसी कोपचे में, या फिर हो लंबा मैराथन जैसे की बिस्तर में रात भर। फिर चाहे मिशनरी पोजीशन हो या स्पूनिंग या फिर हो रिवर्स स्पूनिंग... हर तरह के माहोल में हर तरह की पोजिशन में पारंगत हासिल करके ही दम लिया। आर्यमणि न सिर्फ खुद पारंगत हुआ बल्कि रूही को भी पारंगत कर दिया।
शाम के लगभग 7.30 बज रहे थे जब आज एक बार फिर रूही अलबेली को बस्ती भेज रही थी। लेकिन आर्यमणि, रूही को नजरों से ही समझा दिया की अब रुक जाना चाहिए और वह घर वापस लौट आया। जैसे ही वो पहुंचा भूमि अपने कमरे से बाहर निकलती… "आर्य तैयार हो जा"..
आर्यमणि:- ठीक है दीदी…
थोड़ी देर बाद पुरा परिवार साथ था। सभी लोग मंदिर जाकर पूजा किये। भूमि के चेहरे पर अलग ही खुशी थी। वो आर्यमणि के माथे पर तिलक लगती हुई कहने लगी… "बहुत जल्द परिवार में तुझे कोई मामा कहने वाला आयेगा। उसके नन्हे-नन्हे हाथो को पकड़कर तू उसे चलना सिखाएगा। सिखाएगा ना।"
आर्यमणि प्यार से भूमि के गाल पर रंग लगाते…. "मेरा उतराधिकारी वही बनेगा। केवल प्रहरी वाली इक्छा मत बोलना दीदी।"..
भूमि:- ठीक है नहीं बोलूंगी खुश। बस कुछ बातें हैं जो मै घर चलकर आराम से बताउंगी।
आर्यमणि:- हम्मम ! ठीक है दीदी।
वहां से सीधा भूमि अपने मायके निकल गई। घर गई, मीनाक्षी से मिली और घर में शोर-गुल होने लगा। इसी बीच जया और केशव भी पहुंच गए।… "अरे दीदी अब मै यहीं रहने वाली हूं, क्यों इतना शोर मचा रही हो।"..
तभी अंदर से भूमि निकल कर आयी और जया को पाऊं छू कर प्रणाम करने लगी। जया भूमि का खिला चेहरा देखते ही समझ गई और उसे अपने गले से लगाकर उसके गाल को चूमती… "अब तू यहां से हिलेगी नहीं। पूरे 33 महीने जबतक तेरा आने वाला 2 साल का नहीं होता। और इसपर कोई बहस नहीं होगी। आर्य, चल तू घर बदल ले बेटा। आज से तू भी यहीं रहेगा।"..
अब जब जया मासी ने बोल दिया फिर कौन बात टाल सकता था। ना तो भूमि ने एक बार भी ना नुकर की और ना ही जयदेव ने कुछ बोला। अगले 3-4 दिन तक तो बधाई देने वालों का मेला लगा हुआ था। जो आ सकते थे वो भूमि से आकर मिले। जो नहीं आ सकते थे उन्होंने फोन पर ही बधाइयां दे दी।
सनिवार की रात थी जब भूमि को आर्यमणि के वूल्फ पैक बनाने वाली बात पता चल गई। भूमि थोड़ी खींची और चिढी भी हुई थी, बस सही मौके के इंतजार में थी। थोड़ा इंतजार करना पड़ा लेकिन वो मौका भी मिल ही गया। भूमि अकेली थी और जैसे ही आर्यमणि उसके करीब आकर बैठ… "यहां मेरे पास क्यों आए हो?"
आर्यमणि:- आपसे बात करने।
भूमि:- क्यों?
आर्यमणि:- हम्मम ! इतना गुस्सा। मतलब आपको मेरी और सरदार खान की बात पता चल गई।
भूमि:- सरदार खान को बाद में देखूंगी। पहले तो मै तेरे पैक के बारे में जानना चाहूंगी। तू क्या वुल्फ है जो तुझे पैक चाहिए।
आर्यमणि, चौंकते हुए…. "वुल्फ इसे पैक का नाम देते है हम इसे क्लोज रिश्ता कहते है। इसमें गलत क्या है।
भूमि:- है गलत, जुबान ना लड़ाओ।
आर्यमणि:- आप मुझसे यहां झगड़ा करने बैठी हो या सवालों के जवाब चाहिए।
भूमि:- सवालों के जवाब।
आर्यमणि:- पहला सवाल?
भूमि हंस दी… "मुझे पिघला मत। पक्की खबर आयी है कि तूने वेयरवुल्फ का नया पैक बनाया है।"
आर्यमणि:- हां बनाया है, आपको बताता भी लेकिन उस रात आपने इतनी बड़ी खुशखबरी दी कि मै अपनी बात भुल गया। पैक का नाम भी है, अल्फा पैक।
भूमि:- पूछ सकती हूं क्यों पैक बनाया?
आर्यमणि:- भूमि देसाई ने उसी लड़की रूही को क्यों बचाया जिसे सड़क पर लड़के नोच रहे थे? आपको यदि रूही या अलबेली मे जानवर दिख रहा है तो आप दूर रहिए। मुझे वो इंसान नजर आती है जिनके अंदर भावनाएं है। इसलिए उनसे दोस्ती है। उन्होंने कहा हम पैक को परिवार मानते है और यहां मेरा कोई परिवार नहीं। सो मैंने उसके भावना का मान रखा। कोई मेरे परिवार को तंग कर रहा था, इसलिए मैंने तंग करने वालों को उसके नियम अनुसार सजा दे आया। अब आप मुझे कह दो कि मै गलत हूं।
भूमि:- बेटा तेरी बात सच है लेकिन अगर उसने भी तुझे अपने जैसा बना दिया तो।
आर्यमणि, भूमि के गाल खिंचते… "कितना चाहोगी आप मुझे। बस हर प्वाइंट में यही ढूंढ़ती हो की कहीं मै आपसे दूर तो नहीं हो रहा। बाइट का असर करने का नियम है। बाइट का विषाणु शरीर के ब्लड फ्लो से होते हुए सीने तक पहुंचने में 6 से 8 घंटे लेता है, जबकि लूथरिया बुलापिन उसी विषाणु का तोड़ है। रोज मेरे आने के बाद एक इंजेक्शन लगा देना।
भूमि:- हां लेकिन ये सुरक्षित तरीका नहीं है। यदि बाइट किसी स्ट्रॉन्ग अल्फा की हुई तो लूथरिया बुलापिनी जहर की तरह काम करेगा और बाइट के बाद जितनी दूर तक वो विषाणु फैला होगा, वो अंग निष्क्रिय हो जाएगा।
आर्यमणि:- तभी तो उन्हें कंट्रोल सीखा रहा हूं और साथ में ये भी की जानवर का शिकार करके मासहारी प्रवृति अपने अंदर ना लाए। हो सके तो फल सब्जी पर आश्रित रहे और भूना हुआ मांस ही खाए। अब बोलो।
भूमि:- ठीक है तू सही मै गलत। जा अपना लंबा चौड़ा पैक बना ताकि उन्हें अच्छी जिंदगी मिले। प्रहरी समूह मे इसपर कोई सवाल-जवाब हुआ तो तेजस दादा जवाब देंगे। वैसे भी मैं बहुत इक्कछुक है उस सरदार खान की नकेल कसने के लिए। जा तू आराम कर, बाकी के काम मैं देखती हूं।
आर्यमणि, अपने कमरे में आराम करने चला गया। यही कोई रात के 2 बजे उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा जब खुला तो सामने रिचा थी, और क्या अवतार में थी। एकबार तो आर्यमणि की नजर भी ठहर गयि। रिचा, आर्यमणि को किनारे कर अंदर उसके बिस्तर पर बैठती.… "वहीं खड़े अब भी मेरे बारे में कल्पना कर रहे क्या?"…
आर्यमणि:– नही तो...
रिचा:– तो फिर रूम लॉक करो और आओ...
जैसे ही आर्यमणि रूम लॉक करके पलटा उसकी आंखें फैल गई। रिचा अपने ऊपर के कपड़े उतारकर केवल ब्रा और पेंटी में बैठी थी।…. "देखो तुम शर्त की बात को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले ली हो। या फिर यहां कुछ और जानने के इरादे से हो"…
रिचा, आर्यमणि को देखकर हंसने लगी और अपने हाथ पीछे ले जाकर अपने हाथों से ब्रा को उतारती… "कुछ और जानने से तुम्हारा मतलब"…
आर्यमणि:– रिचा किसी को पता चला तो परिवार में बवाल हो जाएगा, तुम ऐसे अदा मत दिखाओ मुझे...
"और यदि मैं परिवार से नही होती तो"… रिचा अपने गोल सुडोल स्तनों के साथ खेलती हुई पूछने लगी...
आर्यमणि:– देखो मेरी शादी तय हो गई है। मेरी एक गर्लफ्रेंड है...
रिचा, अपने दोनो पाऊं फैलाकर पेंटी में अपना हाथ डाल ली, और मादकता से अपने होंठ काटती... "तो आओ ना लड़के, दिखाओ की तुम अपनी गर्लफ्रेंड को कैसे संतुष्ट करोगे"…
आर्यमणि:– ऐसी बात है रिचा... लेकिन एक बात बता दूं मैं... मुझे किसी लड़की को खुश करने का जरा भी अनुभव नही...
"आह्ह्ह… क्या वाकई में आर्य… तो जब तुम इतने कच्चे हो फिर तो अब तक तुम्हे कूदकर मेरे ऊपर चढ़ जाना चाहिए था और अपनी हसरत खोलकर दिखा देना थी"…
"ऐसी बात है क्या"…. कहते हुए आर्यमणि ने रिचा को धक्का देकर लिटा दिया और अपना पैंट खोलकर सीधा बिस्तर पर चढ़ गया.…
रिचा अपना हाथ आगे बढ़ाकर आर्यमणि के लिंग को अपने दोनो हाथ के बीच दबोचती.… "आज तो तुम्हारा हथियार भरी बंदूक की तरह तना है। उफ्फ ये कितना लंबा और मोटा है आर्यमणि... ये तो मेरे नीचे जब घुसेगा, मेरी छेद को और बड़ा कर देगा।…
"आह्ह्ह्ह, रिचा तुम्हारे हाथ... उफ्फ मजा आ रहा है ऐसे ही आगे पीछे करते रहो"….
रिचा अपना एक हाथ हटाकर आर्यमणि का एक हाथ अपने हरे भरे वक्ष पर डाली, और दूसरा हाथ ले जाकर अपनी योनि पर रखती... "जरा इनके साथ भी खेलो आर्य... निचोड़ डालो मेरे दोनो कबूतर को... मेरे योनि को पूरा मसल डालो... आह्ह्ह्हह… तुम्हारे होंठ मेरे होंठ से लगाकर... रस भरा चुम्बन का मजा दो आर्य"…
आर्यमणि, रिचा के कमर के पास अपना थोड़ा पाऊं फैलाकर बैठा। एक हाथ से उसके स्तन को जोर जोर से मसलने लगा। दूसरे हाथ पेंटी में डालकर उसकी योनि से खेलने लगा... होंठ से होंठ जुड़ चुके थे। आर्यमणि अपना जीभ अंदर तक डालकर रस भरा चुम्बन लेने लगा।
जिस्म में जैसे चिंगारी फूटी हो। रिचा का हाथ ऐसा कमाल कर रहा था की लिंग झटके खाने लगा। जोश इतना हावी था की आर्यमणि ने वक्ष को इतना तेज निचोड़ा की रिचा उठकर बैठ गई.… "आह.. जंगली.. उखड़ने तो नही वाले थे।"… लेकिन रिचा की बात का जैसे उसपर कोई असर ही नही हुआ हो।
आर्यमणि खड़ा हो गया। उसका खड़ा लिंग रिचा के मुंह के पास झूलने लगा। आर्यमणि रिचा के बाल को मुट्ठी में पकड़कर उसका गर्दन ऊपर किया और खुद का चेहरा नीचे झुकाकर एक जोरदार चुम्बन के बाद लिंग को रिचा के गाल से सटाकर हिलाने लगा। रिचा हंसती हुई पूछने लगी... "इसका क्या मतलब है मेरे भोले शिकारी"…
आर्यमणि बिना कोई जवाब दिए लिंग को अब उसके होंठ से लगा दिया... रिचा बिना कोई देर किए अपना मुंह खोल दी। जैसे ही रिचा मुंह खोली आर्यमणि अपना तना लिंग झटके में अंदर डालकर कमर को झटका देने लगा। रिचा का पूरा मुंह भर गया। आर्यमणि का जोश रिचा से संभाला नही जा रहा था। वह लिंग को बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी और आर्यमणि उसका बाल पकड़कर मुंह में ही जोर जोर से झटके मारने लगा... रिचा जब ज्यादा जोड़ लगाकर लिंग को मुंह से निकालने की कोशिश की, आर्यमणि एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
रिचा के पूरे गाल लाल हो गए। मुंह का लार चूकर उसके पूरे मुंह और छाती पर फैल गया था। रिचा का पूरा मुंह लाल हो गया था। रिचा किसी तरह हिम्मत जुटाकर आर्यमणि को धक्का दी और बिस्तर पर हाथ फैलाकर लेट गई। लेटकर वो अपने श्वांस सामान्य कर रही थी तभी आर्यमणि रिचा के पेंटी को एक झटके में उसके पाऊं खींचकर निकाल दिया। रिचा संभल भी नही पाई थी उस से पहले ही आर्यमणि ने उसके दोनो पाऊं फैला दिया। पाऊं फैलते ही रिचा की योनि बिलकुल सामने थी.… "यहां तो ऐसा लग रहा है कभी बाल ही नही थे... बाल कहां गए रिचा"…
रिचा झल्लाती हुई.… "तुझ चुतिए के लिए अपनी चूत को साफ़ करके आयी थी। साले जंगली, हरामजदा"…
रिचा इतना बोल ही रही थी की तभी आर्यमणि अपना बड़ा सा मुंह खोलकर उसकी योनि पर रखा और योनि के ऊपरी हिस्से पर अपने दांत घिसने लगा.… "आआआह्ह्ह.. हां हां... आह्हहहहह, मर गई आर्य.. उफ्फ…" चिंगारियां रिचा के बदन से फूटनी शुरू हो गई.. उसका सारा गुस्सा मादक सिसकारी में बदल गया। आर्यमणि के बाल को मुट्ठी में दबोच कर उसका मुंह अपने योनि के अंदर और भी दबाने लगी। अपने गोरे चिकने पाऊं से उसके गर्दन पर दवाब बनाने लगी। रिचा ऐसी पागल हुई की उसका कमर हिलने लगा।
कुछ देर की योनि चुसाई में ही रिचा पिघल कर बह गई। आर्यमणि के बाल को खींचकर वो अपने ऊपर ली और नीचे हाथ लगाकर उसका लिंग पकड़ती अपनी योनि पर घिसने लगी.… "आह्हहहहह, आर्य चूत को तुम्हारे लिए ही संवार कर लाई थी... आज शांत कर दो... बहुत जल रहा है।"..
आर्यमणि भी रिचा के पूरा ऊपर आते उसके गर्दन को चूमना शुरू किया और एक ही झटके में अपना पूरा लिंग रिचा के योनी में उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्" की मादक सिसकारी के साथ रिचा हवा में उड़ने लगी। आर्यमणि तो जैसे मजे के सागर में था। लिंग कसा हुआ अंदर जाता और बाहर आता। उसे ऐसा लग रहा था वह योनि के छेद को फैलाकर अंदर घुसा रहा और बाहर कर रहा।
दोनो के गोरे बदन पसीने से तर थे। रिचा अपने पूरा पाऊं फैलाए आर्यमणि के नीचे थी और ऊपर से आर्यमणि उभरा हुआ नितंब दिख रहा था जो नीचे अपने लिंग से कसी हुई योनि में लगातार जगह बनाते धक्का मार रहा था। रिचा अपना सर दाएं बाएं करती मादक सिसकारियां भर रही थी। आर्यमणि का नया खून पूरे उबाल पर थापा थाप धक्के लगा रहा था।
योनि और लिंग का संगम इतना झन्नाटेदार था की आर्यमणि पहले धक्के से जो शुरू हुआ फिर रुका ही नही... धक्कों की रफ्तार अपने बुलंदियों पर.. आर्यमणि हांफते हुए धक्का लगा रहा था। रिचा सिसकारी भरती हर धक्के मजा ले रही थी। तभी पहले रिचा की सिसकारी अपनी बुलंदियों पर गई फिर आर्यमणि धक्का मरते मारते पूरा उफान पर आ गया... "आह्हहहहहहहहहहहहह" की जोरदार आवाज दोनो के मुंह से एक साथ निकली और आर्यमणि हांफते हुए रिचा के ऊपर लेट गया।
कुछ देर बाद रिचा आर्यमणि को अपने ऊपर से हटती, उठ गई। रिचा जैसे ही उठी आर्यमणि उसका हाथ पकड़ते... तुम जा रही हो क्या?"..
रिचा:– अपनी एक बार की शर्त थी...
आर्यमणि उसका हाथ पकड़कर अपने ऊपर गिराया। उसके गोल सुडोल वक्ष आर्यमणि के सीने में धस गया। आर्यमणि रिचा के चेहरे को ऊपर करता... "हां शर्त ये थी की एक बार तुम न्यूड शो दिखाओगी और उसमे मैं अपनी मर्जी का कर सकता हूं"…
रिचा, हंसती हुई आर्यमणि के होंठ पर एक जोरदार चुम्बन देती... "मतलब"…. आर्यमणि, रिचा के दोनो पाऊं फैलाकर अपने कमर पर लदने के लिए विवश कर दिया और अगले ही पल अपने लिंग को उसके योनि के से लगाकर एक धक्का लगाते... "मतलब तुम्हारे अंदर मेरा हथियार कितनी बार जायेगा वो तय नहीं हुआ था"…
"आह्हहहहहहहहहहह... जंगली... पहले बता तो देते मैं तैयार हो जाती... उफ्फ कहर ढा रहे हो आर्यमणि"…
आर्यमणि घचाघच धक्के लगाते... "किसी शिकारी का शिकार करना काफी मजेदार होता है वो भी तब जब केवल एक बार के लिए आयी हो। फिर तो नाग का पूरा जहर उतर दो".…
"उफ्फफफफफफफफ, ऊम्ममममम आर्य... एक ही बार में पूरा निचोड़ लोगे क्या... मेरी चूत का भोसड़ा बना दिए"…
आर्यमणि, रिचा को सीधा बिठाया। रिचा आर्यमणि के लिंग पर सीधा बैठी थी और आर्यमणि लेटकर नीचे से धक्का मार रहा था... आर्यमणि अपने दोनो हाथ ऊपर ले जाकर उसके 34 के साइज के गोल वक्ष को अपने दोनो हाथ में दबोचकर... "ये चूत और भोसड़ा कहां से सीखी"…
"ऊम्मममममममममममम... आह्हहहहहहहहहह, तुम्हे किसी ने अब तक लंड, चूत नही सिखाया"…
"उफ्फफफफफ तुम हो न... मेरा हथियार जैसे बटर की भट्टी में जा रहा है... कितना मजा आ रहा है धक्का मारने में"…
"अह्ह्ह्ह… तुम्हारा लंड और स्टेमिना दोनो मजेदार है..." फिर रिचा अपने बालों को झटकती... "आह्हहहहहहह, और तेज चोदो मुझे... ऊम्मममममममम, आज चूत फाड़ दो… आज तो बड़ी तड़प रही... हां.. हां.. हां.. ऐसे ही तेज तेज धक्का मरते रहो… आह्हहहहहहहहहह, कहां थे आर्यमणि अब तक... उफ्फ चूची पर तो रहम नहीं किया.. चोदो.. चोदो… और तेज.. और तेज..."
"उफ्फ काफी गरम हो गई हो... वैसे रहता तो तुम्हारे पास ही हूं"…. "हां आर्यमणि काफी गरम हो गई.. ऐसे ही चोद चोद के ठंडा करो... आह्हहहहहहहह, ऊम्मममममम.. जब जी करे रात को लंड लेकर चले आना... आज शर्त वाला है... आगे कोई शर्त नहीं... जैसे मर्जी हो चोदना... उफ्फफफफफफफ, मेरा ओर्गास्म हो गया रे… आह्ह्ह्ह्ह"..
घमासान के बाद एक फिर दोनो हांफते हुए लेटे। रिचा को लगा की आर्यमणि कहीं तीसरे राउंड के लिए न तैयार हो जाए। नया–नया सेक्स के सुरूर में अक्सर हो जाता है इसलिए रिचा जल्दी से कपड़े पहनकर अपने कमरे में आ गई। जैसे ही कमरे में पहुंची वैसे ही कॉल लगा दी...
दूसरे ओर से... "सब हो गया"..
रिचा:– हां सब हो गया और आर्यमणि ने शेप शिफ्ट नही किया। और कोई टेस्ट बाकी है....
दूसरी ओर से... "नही और कोई टेस्ट बाकी नही। लगता है आर्यमणि के दादा ने उसे कुछ खास दिया है। या फिर गंगटोक में उसे कुछ ऐसा मिल गया है जिससे वेयरवुल्फ तो उसके सामने कुछ है ही नही... उसकी ताकत के सोर्स का पता करना होगा।"..
रिचा:– वो अच्छा लड़का है। वुल्फ की जिंदगी सवार रहा है। फिर आप सबको उसकी ताकत का सोर्स क्यों जानना है। शिकारी भी सक्षम है वोल्फ से लड़ने में। फिर आप उसकी ताकत का सोर्स जानकर क्या करेंगे.. वोल्फ की तरह खुद भी तो कहीं ताकत बढ़ाने की चाह है आप सबकी।
दूसरी ओर से:– ये तुम्हारे चिंतन का विषय नही। जितना कहा जाए बस उतना करो..
रिचा:– जितना कहा उतना कर दिया। अब यदि मुझसे आर्यमणि के बारे में कुछ भी पता करवाने की उम्मीद नहीं रखियेगा... मैं किसी के ताकत का सोर्स पता करके उसकी ताकत पाने की चाह में प्रहरी नही ज्वाइन की हूं, इसलिए आगे मुझसे कोई उम्मीद न रखिए...
रिचा फोन रखकर खुद में ही समीक्षा करती.… "आखिर ये सब के सब आर्यमणि के पीछे हाथ धोकर क्यों परे है। उफ्फ बात कुछ भी हो लेकिन रात बना दी लड़के ने। क्या जोश है... जबतक किसी की हो न जाति मैं तो पूरा मजा लूंगी अब"…
रविवार का दिन। छुट्टी कि सुबह लेकिन आपातकालिक बैठक प्रहरी की। उच्च सदस्यी बैठक में पलक बोर ना हो इसलिए अपने सहायक तौड़ पर वो आर्यमणि को ले जाना चाहती थी। लेकिन वुल्फ पैक के मसले को देखते हुए पलक निशांत को ले गयी।
निशांत के पापा राकेश और मां निलांजना भी इस सभा के लिए पहुंचे और घर में चित्रा हो गई अकेली। अकेले उसे बोर लगने लगा इसलिए वो माधव को कॉल लगा दी… "क्या हो रहा है बेबी।"
माधव:- तुम यकीन नहीं करोगी चित्रा दिमाग में एक दम धांसू कॉन्सेप्ट आया है। मै उस इंजिनियरिंग पर दिमाग लगा रहा था जिसने बिना हैवी मैकेनिकल प्रोसेस के समुद्र में पुल बांध दिया। रामायण का वो तैरता पत्थर का पुल।
चित्रा, थोड़ी उखड़ी आवाज़ में… "ठीक है पुल बनाकर मुझे कॉल करना।"..
माधव:- सॉरी सॉरी, अब क्या करे हमरा रूममेट भी बात नहीं करना चाहता और इतना बढ़िया कॉन्सेप्ट था कि तुम्हे बताए बिना रह नहीं पाए। सॉरी, लगता है फिर से तुम्हे बोर कर दिया।