- 698
- 2,662
- 124
Bhai me ek aur story shuru kar raha hu isme ek ladke ki kahani hai jo apne pyar or apne badle
ke liye har had se gujar jayega
ke liye har had se gujar jayega
Congrats bhaiBhai me ek aur story shuru kar raha hu isme ek ladke ki kahani hai jo apne pyar or apne badle
ke liye har had se gujar jayega
Congratulations so when story is startingBhai me ek aur story shuru kar raha hu isme ek ladke ki kahani hai jo apne pyar or apne badle
ke liye har had se gujar jayega
Mast update hai bhai ... Finally apna hero ka punarjanam ho gya ab dekhta hai aage kya kya hogaअध्याय 1
एक जंगल में एक तालाब के किनारे पर में बैठ कर ध्यान लगा रहा था मेरे अंदर से एक तिलस्मी धुआं सा निकल रहा था फिर वो धुआं मेरे अंदर समाने लगा धुएं के साथ साथ वहां पर उपस्थिति जो प्राकृतिक ऊर्जा भी मेरे अंदर समाने लगी़
कुछ समय बाद में अपनी आँखें खोल लेता हूं और हवा को नियंत्रण लाने की कोशिश करता हूं हवा को नियंत्रित होता देख में बहुत खुश हो जाता हु
फिर में अपना सामान समेट कर घर के लिए चल देता हूं
अरे मैंने अपना परिचय तो कराया ही नहीं मेरा नाम है देवा । मे आज 18 साल का हो गया हु जी आप लोग ठीक समझे आज मेरा जन्मदिन है
में एक छोटे से गाँव कोटवा में रहता हूँ में अपने बाबा(पिता ) के साथ रहता हूँ मेरे पिता का नाम प्रताप है वो एक लोहार है पर वो हमेशा शराब के नशे में ही रहते है मेरी मां मुझे जन्म देते ही भगवान के पास चली गई ऐसा मेरे बाबा कहते है
में आज इसलिए खुश नहीं हु कि आज मेरा जन्मदिन है बल्कि इस लिए खुश हु कि मेरी आज सारी शक्तियां जागृत हों गई है क्योंकि में बहुत सालो से प्रयास कर रहा था जो आज सफ़ल हुआ है
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मेरे पास शक्ति कहा से आई तो चलो ये भी बता देता हूं ये मेरा पुनर्जन्म है आज से 600 साल पहले में बहुत बहुत ही सुन्दर और शक्तिशाली योद्धा था जिसे कोई भी नहीं हरा पाता था मुझे सभी युद्ध कला और हर शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था
मुझे काली शक्ति का भी ज्ञान था
मुझमें बस एक कमी थी वो ये की औरत के बिना मेरी रात नहीं गुजरती थी मुझे हर रात के लिए नई औरत चाहिए होती थी
एक दिन में जंगल में शिकार के लिए गया हुआ था तो में जंगल में घूमते घूमते मुझे बहुत ज्यादा समय हो चुका था
इसी कारण में विश्राम करने के लिए एक स्थान तालाश कर रहा था तो मुझे एक छोटी झोपड़ी दिखाई दी तो में वहां पर पहुंच आवाज़ लगाई तों अंदर से एक साधु बाहर निकल कर आते है और उन्हें में अपना परिचय देकर उनसे आज रात विश्राम के लिए स्थान मांगता हूं तो वो मुझे अपनी झोपड़ी में विश्राम करने के लिये कहते है और खुद बाहर ही एक पद के नीचे बैठ कर ध्यान लगाने लगते है ऐसे ही थोड़ा बहुत अंधेरा हो जाता हैं तो में भी अंदर झोपड़ी में दो जाता हु
कुछ समय बाद ही मुझे ऐसे लगता है कि कोई स्त्री मुझे चूम रही है में भी ये सोचने लगता हु कि सपना देख रहा हूं और उस स्त्री को अपने नीचे खींच कर लेता हूं और फिर शुरू होती है काम क्रीड़ा उस रात में उस स्त्री के साथ चार बार शारीरिक संबंध बनाता हु
जब सुबह साधु झोपड़ी में अंदर आता है तो तो वो अंदर अपनी पत्नी को मेरे साथ नग्न अवस्था मे देख कर रहा बहुत क्रोधित हो जाता है
साधु - ये क्या हो रहा है
साधु की आवाज सुनकर मेरी ओर उस महिला की नींद खुल जाती हैं वो औरत मुझे देख कर अपना शरीर को ढकने लगीं
साधु - अरे नीच मैं ने तुझे रात गुजरने के लिए स्थान दिया और तु मेरी ही बीवी के साथ रंगरलियां मना रहा है और कुल्टा तू अपने पति को छोड़ कर इसके साथ रात गुजार रही हैं
साधु की bivi- स्वामी मुझ से भुल हो गई रात में जब अपने मायके से लौटी तो अंधेरा काफी हो चुका था
में पहचान न सकी मुझे क्षमा कर दे
साधु - क्षमा नहीं तुझे तो मृत्यु मिलेगी
फिर साधु ने कुछ मंत्र पड़ कर पानी की बूंदे अपनी की बीवी पर डाली ओर उसकी बीवी जल कर भस्म हो गई
ये देखकर मेरी तो फट कर चार हो गई ओर साधु के पैर पकड़ लिए
में - बाबा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है आप चाहे तो अपनी दिव्यदर्शिनी आंखो से देख सकते है
फिर साधु अपनी आँखें बंद कर जो कुछ हुआ देखा
साधु - मैंने सब कुछ देख लिया है तुमने जो भी किया वो अपने होश में होते हुए नहीं किया है इसी लिए हम तुम्हे दो रास्ते देंगे
में - कौन से दो रास्ते बाबा
साधु - पहला रास्ता की तुम अपनी सारी शक्तियां ओर जाएं को भुल जाना होगा और तुम किसी दुर्बल इंसान की भांति जीना हो गा
में - बाबा दूसरा
साधु - दूसरा कि तुम्हे अपने प्राण त्यागने होगे
मैंने बहुत देर सोचने के बाद
में - बाबा में दूसरा रास्ता ही चुनता हूं
साधु - दूसरा क्यों बताना चाहोगे
में - बाबा में एक कीड़े की भांति जीने से तो अच्छा मौत को स्वीकार कर लू
बाबा - जैसी तुम्हारी इच्छा
में - पर बाबा मुझे आपसे कुछ चाहिए क्या आप मरने वाले व्यक्ति की आखिरी इच्छा पूरी नहीं करेंगे
साधु - बोल अपनी इच्छा
में - बाबा में चाहता हूं कि मेरा पुनर्जन्म हो ओर मुझे मेरी शक्तियों के साथ साथ आपकी भी सारी शक्तियां प्राप्त हों
साधु - ठीक है पर तुम्हे मेरी शक्ती तभी प्राप्त होगी जब तुम्हे कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आएगा
में - बाबा मुझे मंजूर है पर आपने भी एक शर्त रखी है तो में भी कुछ चाहता हूं
साधु - अब ओर क्या चाहिए तुम्हें
में - बाबा मुझे एक सा लन्ड चाहिए जिससे में हर औरत को अपना गुलाम बना सकू
साधु - वैसे तुझे में देना तो नहीं चाहता हूं पर तुझे इसकी जरूरत कुछ ज्यादा ही होगी तथास्तु
फिर वो पानी मेरे ऊपर फेंक दिया और में भी परलोक सिधार गया अब मेरा पुनर्जन्म हुआ है
Nice Startअध्याय 1
एक जंगल में एक तालाब के किनारे पर में बैठ कर ध्यान लगा रहा था मेरे अंदर से एक तिलस्मी धुआं सा निकल रहा था फिर वो धुआं मेरे अंदर समाने लगा धुएं के साथ साथ वहां पर उपस्थिति जो प्राकृतिक ऊर्जा भी मेरे अंदर समाने लगी़
कुछ समय बाद में अपनी आँखें खोल लेता हूं और हवा को नियंत्रण लाने की कोशिश करता हूं हवा को नियंत्रित होता देख में बहुत खुश हो जाता हु
फिर में अपना सामान समेट कर घर के लिए चल देता हूं
अरे मैंने अपना परिचय तो कराया ही नहीं मेरा नाम है देवा । मे आज 18 साल का हो गया हु जी आप लोग ठीक समझे आज मेरा जन्मदिन है
में एक छोटे से गाँव कोटवा में रहता हूँ में अपने बाबा(पिता ) के साथ रहता हूँ मेरे पिता का नाम प्रताप है वो एक लोहार है पर वो हमेशा शराब के नशे में ही रहते है मेरी मां मुझे जन्म देते ही भगवान के पास चली गई ऐसा मेरे बाबा कहते है
में आज इसलिए खुश नहीं हु कि आज मेरा जन्मदिन है बल्कि इस लिए खुश हु कि मेरी आज सारी शक्तियां जागृत हों गई है क्योंकि में बहुत सालो से प्रयास कर रहा था जो आज सफ़ल हुआ है
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मेरे पास शक्ति कहा से आई तो चलो ये भी बता देता हूं ये मेरा पुनर्जन्म है आज से 600 साल पहले में बहुत बहुत ही सुन्दर और शक्तिशाली योद्धा था जिसे कोई भी नहीं हरा पाता था मुझे सभी युद्ध कला और हर शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था
मुझे काली शक्ति का भी ज्ञान था
मुझमें बस एक कमी थी वो ये की औरत के बिना मेरी रात नहीं गुजरती थी मुझे हर रात के लिए नई औरत चाहिए होती थी
एक दिन में जंगल में शिकार के लिए गया हुआ था तो में जंगल में घूमते घूमते मुझे बहुत ज्यादा समय हो चुका था
इसी कारण में विश्राम करने के लिए एक स्थान तालाश कर रहा था तो मुझे एक छोटी झोपड़ी दिखाई दी तो में वहां पर पहुंच आवाज़ लगाई तों अंदर से एक साधु बाहर निकल कर आते है और उन्हें में अपना परिचय देकर उनसे आज रात विश्राम के लिए स्थान मांगता हूं तो वो मुझे अपनी झोपड़ी में विश्राम करने के लिये कहते है और खुद बाहर ही एक पद के नीचे बैठ कर ध्यान लगाने लगते है ऐसे ही थोड़ा बहुत अंधेरा हो जाता हैं तो में भी अंदर झोपड़ी में दो जाता हु
कुछ समय बाद ही मुझे ऐसे लगता है कि कोई स्त्री मुझे चूम रही है में भी ये सोचने लगता हु कि सपना देख रहा हूं और उस स्त्री को अपने नीचे खींच कर लेता हूं और फिर शुरू होती है काम क्रीड़ा उस रात में उस स्त्री के साथ चार बार शारीरिक संबंध बनाता हु
जब सुबह साधु झोपड़ी में अंदर आता है तो तो वो अंदर अपनी पत्नी को मेरे साथ नग्न अवस्था मे देख कर रहा बहुत क्रोधित हो जाता है
साधु - ये क्या हो रहा है
साधु की आवाज सुनकर मेरी ओर उस महिला की नींद खुल जाती हैं वो औरत मुझे देख कर अपना शरीर को ढकने लगीं
साधु - अरे नीच मैं ने तुझे रात गुजरने के लिए स्थान दिया और तु मेरी ही बीवी के साथ रंगरलियां मना रहा है और कुल्टा तू अपने पति को छोड़ कर इसके साथ रात गुजार रही हैं
साधु की bivi- स्वामी मुझ से भुल हो गई रात में जब अपने मायके से लौटी तो अंधेरा काफी हो चुका था
में पहचान न सकी मुझे क्षमा कर दे
साधु - क्षमा नहीं तुझे तो मृत्यु मिलेगी
फिर साधु ने कुछ मंत्र पड़ कर पानी की बूंदे अपनी की बीवी पर डाली ओर उसकी बीवी जल कर भस्म हो गई
ये देखकर मेरी तो फट कर चार हो गई ओर साधु के पैर पकड़ लिए
में - बाबा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है आप चाहे तो अपनी दिव्यदर्शिनी आंखो से देख सकते है
फिर साधु अपनी आँखें बंद कर जो कुछ हुआ देखा
साधु - मैंने सब कुछ देख लिया है तुमने जो भी किया वो अपने होश में होते हुए नहीं किया है इसी लिए हम तुम्हे दो रास्ते देंगे
में - कौन से दो रास्ते बाबा
साधु - पहला रास्ता की तुम अपनी सारी शक्तियां ओर जाएं को भुल जाना होगा और तुम किसी दुर्बल इंसान की भांति जीना हो गा
में - बाबा दूसरा
साधु - दूसरा कि तुम्हे अपने प्राण त्यागने होगे
मैंने बहुत देर सोचने के बाद
में - बाबा में दूसरा रास्ता ही चुनता हूं
साधु - दूसरा क्यों बताना चाहोगे
में - बाबा में एक कीड़े की भांति जीने से तो अच्छा मौत को स्वीकार कर लू
बाबा - जैसी तुम्हारी इच्छा
में - पर बाबा मुझे आपसे कुछ चाहिए क्या आप मरने वाले व्यक्ति की आखिरी इच्छा पूरी नहीं करेंगे
साधु - बोल अपनी इच्छा
में - बाबा में चाहता हूं कि मेरा पुनर्जन्म हो ओर मुझे मेरी शक्तियों के साथ साथ आपकी भी सारी शक्तियां प्राप्त हों
साधु - ठीक है पर तुम्हे मेरी शक्ती तभी प्राप्त होगी जब तुम्हे कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आएगा
में - बाबा मुझे मंजूर है पर आपने भी एक शर्त रखी है तो में भी कुछ चाहता हूं
साधु - अब ओर क्या चाहिए तुम्हें
में - बाबा मुझे एक सा लन्ड चाहिए जिससे में हर औरत को अपना गुलाम बना सकू
साधु - वैसे तुझे में देना तो नहीं चाहता हूं पर तुझे इसकी जरूरत कुछ ज्यादा ही होगी तथास्तु
फिर वो पानी मेरे ऊपर फेंक दिया और में भी परलोक सिधार गया अब मेरा पुनर्जन्म हुआ है
Sahi hai par kya stri ki lalsa pichle janam bhi thinking vo ab haiअध्याय 1
एक जंगल में एक तालाब के किनारे पर में बैठ कर ध्यान लगा रहा था मेरे अंदर से एक तिलस्मी धुआं सा निकल रहा था फिर वो धुआं मेरे अंदर समाने लगा धुएं के साथ साथ वहां पर उपस्थिति जो प्राकृतिक ऊर्जा भी मेरे अंदर समाने लगी़
कुछ समय बाद में अपनी आँखें खोल लेता हूं और हवा को नियंत्रण लाने की कोशिश करता हूं हवा को नियंत्रित होता देख में बहुत खुश हो जाता हु
फिर में अपना सामान समेट कर घर के लिए चल देता हूं
अरे मैंने अपना परिचय तो कराया ही नहीं मेरा नाम है देवा । मे आज 18 साल का हो गया हु जी आप लोग ठीक समझे आज मेरा जन्मदिन है
में एक छोटे से गाँव कोटवा में रहता हूँ में अपने बाबा(पिता ) के साथ रहता हूँ मेरे पिता का नाम प्रताप है वो एक लोहार है पर वो हमेशा शराब के नशे में ही रहते है मेरी मां मुझे जन्म देते ही भगवान के पास चली गई ऐसा मेरे बाबा कहते है
में आज इसलिए खुश नहीं हु कि आज मेरा जन्मदिन है बल्कि इस लिए खुश हु कि मेरी आज सारी शक्तियां जागृत हों गई है क्योंकि में बहुत सालो से प्रयास कर रहा था जो आज सफ़ल हुआ है
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मेरे पास शक्ति कहा से आई तो चलो ये भी बता देता हूं ये मेरा पुनर्जन्म है आज से 600 साल पहले में बहुत बहुत ही सुन्दर और शक्तिशाली योद्धा था जिसे कोई भी नहीं हरा पाता था मुझे सभी युद्ध कला और हर शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था
मुझे काली शक्ति का भी ज्ञान था
मुझमें बस एक कमी थी वो ये की औरत के बिना मेरी रात नहीं गुजरती थी मुझे हर रात के लिए नई औरत चाहिए होती थी
एक दिन में जंगल में शिकार के लिए गया हुआ था तो में जंगल में घूमते घूमते मुझे बहुत ज्यादा समय हो चुका था
इसी कारण में विश्राम करने के लिए एक स्थान तालाश कर रहा था तो मुझे एक छोटी झोपड़ी दिखाई दी तो में वहां पर पहुंच आवाज़ लगाई तों अंदर से एक साधु बाहर निकल कर आते है और उन्हें में अपना परिचय देकर उनसे आज रात विश्राम के लिए स्थान मांगता हूं तो वो मुझे अपनी झोपड़ी में विश्राम करने के लिये कहते है और खुद बाहर ही एक पद के नीचे बैठ कर ध्यान लगाने लगते है ऐसे ही थोड़ा बहुत अंधेरा हो जाता हैं तो में भी अंदर झोपड़ी में दो जाता हु
कुछ समय बाद ही मुझे ऐसे लगता है कि कोई स्त्री मुझे चूम रही है में भी ये सोचने लगता हु कि सपना देख रहा हूं और उस स्त्री को अपने नीचे खींच कर लेता हूं और फिर शुरू होती है काम क्रीड़ा उस रात में उस स्त्री के साथ चार बार शारीरिक संबंध बनाता हु
जब सुबह साधु झोपड़ी में अंदर आता है तो तो वो अंदर अपनी पत्नी को मेरे साथ नग्न अवस्था मे देख कर रहा बहुत क्रोधित हो जाता है
साधु - ये क्या हो रहा है
साधु की आवाज सुनकर मेरी ओर उस महिला की नींद खुल जाती हैं वो औरत मुझे देख कर अपना शरीर को ढकने लगीं
साधु - अरे नीच मैं ने तुझे रात गुजरने के लिए स्थान दिया और तु मेरी ही बीवी के साथ रंगरलियां मना रहा है और कुल्टा तू अपने पति को छोड़ कर इसके साथ रात गुजार रही हैं
साधु की bivi- स्वामी मुझ से भुल हो गई रात में जब अपने मायके से लौटी तो अंधेरा काफी हो चुका था
में पहचान न सकी मुझे क्षमा कर दे
साधु - क्षमा नहीं तुझे तो मृत्यु मिलेगी
फिर साधु ने कुछ मंत्र पड़ कर पानी की बूंदे अपनी की बीवी पर डाली ओर उसकी बीवी जल कर भस्म हो गई
ये देखकर मेरी तो फट कर चार हो गई ओर साधु के पैर पकड़ लिए
में - बाबा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है आप चाहे तो अपनी दिव्यदर्शिनी आंखो से देख सकते है
फिर साधु अपनी आँखें बंद कर जो कुछ हुआ देखा
साधु - मैंने सब कुछ देख लिया है तुमने जो भी किया वो अपने होश में होते हुए नहीं किया है इसी लिए हम तुम्हे दो रास्ते देंगे
में - कौन से दो रास्ते बाबा
साधु - पहला रास्ता की तुम अपनी सारी शक्तियां ओर जाएं को भुल जाना होगा और तुम किसी दुर्बल इंसान की भांति जीना हो गा
में - बाबा दूसरा
साधु - दूसरा कि तुम्हे अपने प्राण त्यागने होगे
मैंने बहुत देर सोचने के बाद
में - बाबा में दूसरा रास्ता ही चुनता हूं
साधु - दूसरा क्यों बताना चाहोगे
में - बाबा में एक कीड़े की भांति जीने से तो अच्छा मौत को स्वीकार कर लू
बाबा - जैसी तुम्हारी इच्छा
में - पर बाबा मुझे आपसे कुछ चाहिए क्या आप मरने वाले व्यक्ति की आखिरी इच्छा पूरी नहीं करेंगे
साधु - बोल अपनी इच्छा
में - बाबा में चाहता हूं कि मेरा पुनर्जन्म हो ओर मुझे मेरी शक्तियों के साथ साथ आपकी भी सारी शक्तियां प्राप्त हों
साधु - ठीक है पर तुम्हे मेरी शक्ती तभी प्राप्त होगी जब तुम्हे कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आएगा
में - बाबा मुझे मंजूर है पर आपने भी एक शर्त रखी है तो में भी कुछ चाहता हूं
साधु - अब ओर क्या चाहिए तुम्हें
में - बाबा मुझे एक सा लन्ड चाहिए जिससे में हर औरत को अपना गुलाम बना सकू
साधु - वैसे तुझे में देना तो नहीं चाहता हूं पर तुझे इसकी जरूरत कुछ ज्यादा ही होगी तथास्तु
फिर वो पानी मेरे ऊपर फेंक दिया और में भी परलोक सिधार गया अब मेरा पुनर्जन्म हुआ है