अब नजिया सोचने लगी थी की कैसे आदर्श को वो अपना गिफ्ट दे आदर्श भी अब नजिया से अलग बैठ गया था वो सोचने लगती है की तभी उसके दिमाग मे एक सोच आती है वो चाय अपने कपड़े पर गिरा लेती है हल्की ही ज्यादा नही और वैसे भी वो जानती थी की घर जाकर उसको ये कपड़े बदलने है क्युकी अपने शोहर के सामने वो साड़ी पहन नही सकती थी तब
आदर्श : अरे नजिया.......... मम्मी को देखकर भाभी आराम से जल तो नही गया
नजिया : नही नही आप परेशान मत होइए बस ये गिर गया है साड़ी पर
मम्मी : अरे बच्ची मेरी ही नजर लग गयी बहुत प्यारी लग रही थी साड़ी और साड़ी मे प्यारी नजिया जा रे साड़ी साफ करा दे इसकी
नजिया : मम्मी जी ऐसा मत कहिए आपकी नजर नही लग सकती अपनो की नही लगती वो बस मुझसे गलती होगयी और वो आदर्श के साथ चल दी जैसे ही बाथरूम मे पहुची
आदर्श : ठीक हो ना जान
नजिया : पगलू ठीक हु तुमको कुछ देना था इसलिए गिराई
आदर्श : अच्छा जी बहुत तेज होगयी हो और उसे बाहों मे भर लेता है
नजिया : areee रुको कहीं भी शुरू हो जाते हो छोरो भी आदर्श जी वहाँ नही
आदर्श नजिया की गांड पर हाथ फेरने लगता है
नजिया : सुनिए ना
आदर्श : इति प्यार से तो जान भी मांग लो
नजिया : हट पागल ऐसी बात मत किया करो फिर नजिया अपने पेटीकोट मे हाथ डालती है
आदर्श : अरे वाह आज तो लगता है बोनस मिलेगा
नजिया : चुप बदमाश