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UPDATE 66
अपनी साँसें कंट्रोल करते हुए मोहिनी भाभी बोली – हां अब कुछ हरारत दूर हुई… अब मुझे किसी दवा की ज़रूरत नहीं है, ले चलो मुझे घर.
फिर मोहिनी भाभी छाया को संबोधित करके बोली – क्यों छाया.. पता लगा होंठ तर कैसे होते हैं?? तुझे भी करवाने हों तो बोल, अभी भी अंकुश के पास बहुत तरावट बाकी है. क्यों अंकुश सही कह रही हूँ ना मैं??
ये कहकर मोहिनी भाभी ने मेरी तरफ आँख मारकर मुस्कुराने लगी.
छाया मुस्कराते हुए बोली – हाय दीदी.. ऐसी तरावट लेने के लिए कौन मना करना चाहेगी भला… पर भैया मुझे थोड़ी ना वो तरावट देंगे… ये तो बस अपनी प्यारी भाभी के ही दुलारे हैं… क्यों निशा दीदी, सही कह रही हूँ ना???
निशा – ये तुमसे किसने कह दिया, मेरे पतिदेव इतने स्वार्थी नहीं हैं… चाहो तो तुम भी ले सकती हो..
छाया भी मेरे किस के लिए कब से प्यासी थी.. भैया के साथ शादी करने के बाद से ही हमने एक दूसरे को अलग ही रिश्तों की डोर में समेट लिया था.
छाया नज़रें झुकाए बोली – क्या ऐसा हो सकता है अंकुश?
मैंने भाभी के ऊपर से ही लंबा होकर छाया के चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले लिया, और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला – तुमसे तो मेरे और भी बहुत से रिश्ते हैं. भाभी तो तुम मेरी हो ही चुकी हो. उससे पहले मेरी शिष्या हो और अब तो तुमने मेरी जान बचाकर मुझे बिन मोल खरीद लिया है छाया… जो चाहोगी मिलेगा, किस कौन सी बड़ी बात है?
इतना बोलकर मैंने छाया के होंठों को चूम लिया. छाया ने भी मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी. जब अलग हुए तो छाया की आँखों में आँसू थे.
भर्राये स्वर में छाया बोली - मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, कि मेरी किस्मत इतनी अच्छी भी हो सकती है, एक ग़रीब माँ-बाप की बेटी को इतना उँचा और इतना प्रेम करने वाला परिवार भी मिल सकता है. मैं सच में बहुत सौभाग्यशाली हूँ दीदी.
फिर कुछ नटखट अंदाज में छाया बोली – कभी-कभी मुझे निशा दीदी को चिढ़ाने का मन करता है.
मोहिनी भाभी – वो क्यों??
छाया – मुझे लगता है, आप मुझे उनसे ज़्यादा प्यार करती हैं. उसकी बातें सुनकर हम सब की आँखें नम हो गयी.
निशा मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गयी थी, तो मैंने उसे अपनी गोद में बिठाकर बोला – अले… अले… मेरा बच्चा तो रह ही गया.
फिर उसे मैंने अपनी बाँहों में कस कर उसके चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. अभी हम चारों ये बातें कर ही रहे थे कि डॉक्टर वीना चेक-अप के लिए आ गयी.
हम सबको एक साथ मोहिनी भाभी के पलंग पर बैठे देख कर खुश होती हुई बोली – अरे वाह! मैं तो यहाँ मरीज़ों को देखने आई थी, लेकिन यहाँ तो मुझे कोई मरीज़ दिखाई ही नहीं दे रहा. सब एक दूसरे से चिपके पड़े हैं. अरे भाई अंकुश जी, अगर थोड़ी बहुत गुंजाइश बची हो तो हमें भी इस प्यार भरी मंडली में शामिल कर लो.
वीना की बात पर मोहिनी भाभी ने अपनी बाहें फैला दी. वीना लपक कर उनके सीने में समा गयी और उनकी पीठ के घाव को सहलाते हुए बोली – सच में आपका ये देवर हीरा है. इसके दिल में सबके लिए जगह है, बहुत बड़े दिलवाला है ये.
भाभी ने उसके कान में फुसफुसा कर कहा – आप भी इसके दिल में हो क्या?
वीना थोड़ा शर्मीली सी मुस्कान के साथ बोली – अर्जी तो दी थी, अब देखते हैं कब तक एक्सेप्ट होती है.
ऐसी ही कुछ चुहल बाज़ी के साथ-साथ उसने हम दोनों का चेक अप किया. सब कुछ एक दम नॉर्मल था. फिर भाभी ने घर जाने के लिए पूछा तो वीना ने केयर रखने का बोल कर परमिशन दे दी.
वीना – थोड़ा कुछ दिन इस जख्म की केयर रखना, वैसे सब ठीक है, हो सका तो दो दिन बाद मैं खुद आपको आपके घर आकर चेक कर लूँगी. इसी बहाने आपके वृंदावन के भी दर्शन हो जाएँगे.
भाभी समेत हम सभी ने एक साथ चौंक कर पूछा – हमारा वृंदावन??
वीना खुलकर हँस पड़ी – अरे मोहिनी जी, आपका घर किसी वृंदावन से कम है क्या?? जहाँ सबके दिल में सबके लिए प्रेम बसता हो. वो घर, घर नहीं मंदिर बन जाता है.
फिर मैंने डॉक्टर वीना से कहा – डॉक्टर अगर थोड़ा समय हो तो मैं आपसे कुछ डिसकस करना चाहता हूँ.
वीना – हां.. हां.. क्यों नहीं? चलो अभी, तुम मेरे केबिन में पहुँचो. मैं 5 मिनिट में और मरीजों को चेक करके आती हूँ.
उसके जाने के बाद भाभी ने मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा. मैंने आँख झपकाकर सब ठीक है का इशारा करके मैं वीना के केबिन की तरफ बढ़ गया. कुछ औपचारिक बातों के बाद.
मैंने डॉक्टर वीना से सवाल किया – आपने मेरा फुल चेक अप किया था??
वीना – हां.. क्यों?
मैं – कोई इन्फेक्शन वग़ैरह तो नहीं है ना?
वीना मेरे कहने का मतलब समझ गयी और बोली – तुम्हें एग्जामिन करते ही मैं समझ गयी कि तुम्हें ड्रग के ओवरडोज दे-दे कर तुम्हारे साथ जबरदस्ती और अनलिमिटेड सेक्स किया गया है. लेकिन ये एक अच्छी बात हुई, कि उन औरतों में कोई भी इन्फेक्टेड नहीं थी. शायद सो कॉल्ड सभी घरों की ही होंगी जो लिमिटेड और प्रोटेक्टेड सेक्स करने वाली हैं. अब मुझे तो पता नहीं है कि वो कौन-कौन थी और ना ही मैं जानना चाहूँगी. हां ये अलग बात है, कि तुम अगर अपनी मर्ज़ी से बताओ तो. ये कहकर वो मुस्करा दी.
मैं – मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगा वीना, थोड़ा समय दो.
वीना – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी अंकुश. तो हां.. मैं कह रही थी, कि वो सभी लिमिटेड सेक्स करने वाली ही औरतें होनी चाहिए या हो सकता है, उन्होंने कंडोम वग़ैरह यूज़ किया हो जिसकी संभावना कम ही है.
मैं – वो क्यों?
वीना – मैं अपने एक्सपीरियेन्स से कह सकती हूँ, कि जो औरतें अपने तन की प्यास बुझाने के पर्पस से किसी इनोसेंट मैन के साथ सेक्स करेगी, वो कम से कम कंडोम यूज़ नहीं करना चाहेगी. उससे उसे मज़ा कम आता है और यहाँ तो सेक्सुअली टॉर्चर किया गया है तुम्हें तो.. भला वो अपना मज़ा खराब क्यों करना चाहेंगी.
मैं – कुछ औरतों ने कंडोम यूज़ किया था. वो श्वेता के कहने पर.
वीना – तो ऐसी कितनी औरतों ने सेक्स किया था तुम्हारे साथ??
मैं – पहले दिन तो 6-7 औरतों ने किया था, जिनमें से 4-5 ने कंडोम यूज़ किया था.
वीना – तो वो 4-5 शायद धंधे वाली होंगी या कोई और रही होंगी उसके लिए. थोड़ा सा तुम्हारे पेनिस के मसल्स में डैमेज था. शायद ड्रग्स की वजह से वो ज़्यादा सख्त होने के कारण और फिर बहुत लंबे समय तक रफ सेक्स होता रहा उसकी वजह से. तो मेरी राय में अभी तुम कुछ दिन अपनी पत्नी के साथ भी सेक्स मत करना. 15 दिन में सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा, और तुम पहले की तरह ही मस्त चुदाई कर सकोगे.
फिर वीना ने एक ट्यूब का नाम लिखकर दिया.
वीना - इससे कुछ दिन अपने लंड की मसाज करवाते रहना सब कुछ पहले जैसा ही और शायद बेहतर ही करोगे. क्योंकि कुछ तो इस इन्सिडेंट के कारण और कुछ इस ट्यूब की मसाज से तुम्हारा लंड थोड़ा बड़ा हो जाएगा.
ये कहकर वीना हंस पड़ी. फिर आगे बोली - बाकी बस ड्रग्स की ही मात्रा कुछ ज़्यादा थी बॉडी में, तो लंबी नींद के कारण वो भी अब नॉर्मल है. डोंट वरी, एवेरी थिंग इस ऑलराइट नाउ. एंजाय योर लाइफ, और हो सके तो किसी बुरे सपने की तरह इसे भूल जाना.
मैं – इस सबका खर्चा भी बता दो, उस हिसाब से मैं पेमेंट का इंतज़ाम करूँ.
वीना मुसकुराकर बोली – खर्चा थोड़ा लंबा है… जिसे चुकाने के लिए तुम्हें मेरे पास आना पड़ेगा और जैसा किस तुमने अपनी प्यारी भाभी को किया था, वैसा ही करना पड़ेगा.
मैं – ओह्ह्ह… डॉक्टर.. यू आर सो स्वीट…
ये कहकर मैं लपक कर वीना के पास गया. मैंने वीना को सीट से भी नहीं उठने दिया और उसके होंठों पर टूट पड़ा. वीना के साथ एक लंबी स्मूच के बाद मैं उसे थैंक्स बोलकर ख़ुशी-ख़ुशी बाहर आया. अब मेरी सारी टेंशन दूर हो चुकी थी. मैंने जो सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ. भले ही अपने स्वार्थ वश सही श्वेता ने उन औरतों को प्रीकॉशन लेने को कहकर एक तरह से मेरा भला ही किया था.
मुझे खुश देख कर मोहिनी भाभी ने पूछा – अंकुश बड़े खुश दिख रहे हो… क्या बात है?? डॉक्टर वीना ने कुछ दे दिया क्या??
मैंने हँसते हुए कहा – ज़्यादा कुछ नहीं मोहिनी भाभी… जो आपने दिया था, वही उसने भी दिया है… वैसे मेरी ख़ुशी की वजह कुछ और है..
तीनों एक साथ बोली – हमें बताने लायक नहीं है वो वजह??
मैं – नहीं ऐसी कोई छुपाने वाली बात नहीं है. बस मैं ये जानने गया था, कि मेरे साथ कुछ अबनॉर्मल तो नहीं हुआ है. जो कि सब कुछ पहले जैसा ही है.
घर आकर छाया और निशा, मोहिनी भाभी की देखभाल में लग गयी. भाभी का बेटा सुवंश ज़्यादातर निशा के पास ही रहता था. स्कूल के बाद उसे रुचि भी संभाल लेती थी. कुछ दिनों में ही मोहिनी भाभी का जख्म सही हो गया. मोहिनी भाभी अब घर के काम संभालने लगी थी, छाया को हमने वापस शहर भेज दिया.
एक दिन हम तीनों ही बेड पर बैठे बातें कर रहे थे. मोहिनी भाभी ने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाते हुए कहा – अंकुश.. भानु और उस छिनाल श्वेता को यूँ ही छोड़ दोगे??
मैं – आप क्या चाहती हैं मोहिनी भाभी?? वैसे भानु तो जिस दिन पुलिस के हाथ लग गया, तो किडनैप चार्ज में जायेगा कम से कम 10 साल के लिए अंदर और रही श्वेता तो वो वैसे ही अपने अंदर के डर में रोज़ नई मौत मरती रहेगी कि मैं कुछ उसके साथ ना कर दूं.
मोहिनी भाभी मेरी तरफ गहरी नज़रों से देखती रही. मैंने उन्हें अपनी ओर ऐसे अंदाज में देखते पाकर कहा – ऐसे क्या देख रही हो भाभी??
मोहिनी भाभी – कुछ नहीं.. बस सोच रही थी कि कहीं तुमने उन्हें माफ़ तो नहीं कर दिया? पता है ना.. वो लोग तुम्हें जान से मारने वाले थे. 5-10 साल की जेल से भानु सुधर नहीं जाएगा. वो ऐसा जहरीला नाग है, कि मौका पड़ते ही फिर से चोट करेगा.. कब तक यूँ ही छोड़ते रहोगे उसे और वो हरामजादी छिनाल.. इतने बड़े क्राइम में इन्वॉल्व थी.. उसे तो क़ानून भी कभी कोई सज़ा नहीं दे पाएगा. एक अजनबी लड़की को इंसाफ़ दिलाने वाला आदमी, अपने ऊपर हुए अत्याचारों को ऐसे ही भुला देगा.. ये मैंने कभी सोचा भी नहीं था…
ये बातें कहते-कहते मोहिनी भाभी उत्तेजित दिखाई देने लगी. मुझे ये अहसास होने लगा कि अगर मैंने कुछ नहीं किया तो कहीं ये और छाया अपनी तरह से कुछ करने ना निकल पड़ें.
अतः मैंने उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उनके गुस्से को शांत करने के लिए कहा – मोहिनी भाभी अगर आप चाहती हैं कि उन्हें उनके गुनाहों की सज़ा मैं दूं, तो यकीन कीजिए वो दोनों अब ज़्यादा दिन खुले में साँस नहीं ले पाएँगे.
मेरी बात सुनकर मोहिनी भाभी थोड़ी सहम सी गयी. कुछ देर घूरने के बाद बोली – तो क्या तुम अपने हाथों से उनका खून करोगे??
मैं – मुझे अपने हाथ उनके गंदे खून से रंगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, बस अब आप देखती जाओ.. मैं कैसा चक्रव्यूह बनाता हूँ उन दोनों के लिए.
मैं अब फिर से कोर्ट जाने लगा था और अपने सारे काम सामान्य तरीक़े से करने लगा था. यहाँ तक कि अपनी निशा डार्लिंग के साथ बेड वाला गेम भी शुरू करने वाला था, जो कुछ दिनों के लिए पोस्टपोन कर रखा था डॉक्टर वीना की हिदायत के बाद.
उस दिन सोने से पहले निशा मेरे लंड की मालिश कर रही थी, वीना के प्रेसक्राइब किए हुए ट्यूब से. मेरा लंड पूरी तरह अपने आकार में आ चुका था, अब मेरा लंड निशा की मुट्ठी में भी नहीं समा रहा था. मालिश करते-करते निशा मदहोश होती जा रही थी. इससे पहले कि निशा अपनी नाइटी निकाल कर मेरे लंड पर बैठती कि तभी मोहिनी भाभी आ धमकी. मैंने झट से अपना शॉर्ट ऊपर करने की कोशिश की.
तभी मोहिनी भाभी बोल पड़ी - छुपा लो.. छुपा लो.. अपने खजाने को… अब तो इस पर निशा का ही हक़ रह गया है…
निशा मोहिनी भाभी की बात से थोड़ी दुखी स्वर में बोली – ऐसा क्यों बोल रही हैं दीदी?? अंकुश को शर्म आ रही होगी शायद इसलिए वो अपने लंड को ढकने लगा होगा.. मुझे खामख्वाह आपने स्वार्थी बना दिया.
मोहिनी भाभी ने फ़ौरन निशा को अपने गले से लगा लिया और बोली - ऐसी मेरी कोई मंशा नहीं थी निशा… मैं तो बस मज़ाक कर रही थी, तू तो सीरीयस हो गयी.
मैंने भाभी की गुदगुदी गान्ड दबाते हुए कहा – अब इस लंड को अपनी चूत में रखना आपके बस का रोग नहीं है भाभी…
मोहिनी भाभी आँखें चौड़ी करके बोली – अच्छा देखें तो सही, क्या सुरखाब के पर निकल आए हैं तुम्हारे लंड को??
ये कहकर मोहिनी भाभी ने मेरा शॉर्ट नीचे खिसका दिया और मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर देखने लगी.
मोहिनी भाभी - सच में अंकुश… तुम्हारा लंड तो पहले से बड़ा और मोटा सा लग रहा है… निशा तूने तो लेकर देखा होगा??
निशा – अभी कहाँ दीदी… आज ट्राइ करने वाली थी कि आप आ धमकी..
मोहिनी भाभी – अच्छा.. तो 900 चूहे ख़ाके बिल्ली हज़ करने चली है… मुझसे क्या शर्म?? आज दोनों बहनें मिल के फिर से अंकुश के लंड का तेल निकालते हैं…
ये कहकर वो दोनों मेरे आजू-बाजू बैठकर मेरे लंड को बारी-बारी से मुठियाने लगी. मैंने दोनों को नंगा करके दोनों की गान्ड अपनी तरफ औंधी करवा ली. एक की चूत चाटने लगा तो दूसरी की चूत में उंगली से चोदने लगा. हाल ही में क्रीम की मालिश की वजह से ना ही मोहिनी भाभी और ना ही निशा मेरे लंड को मुँह में ले पा रही थी. इसलिए एक के ऊपर दूसरी का हाथ रख के मुठियाने लगी. निशा पहले से ही गरम हो रही थी, तो वो मेरे ऊपर सवार हो गयी और मैं भाभी की चूत की सर्विस करने लगा. निशा ने बहुत कोशिश की लेकिन वो पूरा लंड नहीं ले पाई. अंत तक लेते-लेते, निशा का मुँह खुल गया. लंड अभी जड़ तक नहीं पहुँच पाया था कि निशा एक बार ऐसे ही झड़ गयी. निशा को ज़्यादा उछल-कूद ना करनी पड़े, इसलिए मैंने उसे अपने बगल में करवट से लिटा लिया और उसकी गान्ड मसलते हुए पीछे से अपना लंड उसकी रस से सराबोर चूत में सरका दिया.
निशा - आअहह… अंकुश… तुम्हारा लंड तो पहले से काफी ज़्यादा बड़ा हो गया है… थोड़ा बाहर ही रखना.. प्लीज़..
मैं निशा को 3/4 लंड से चोदने लगा. हल्के-हल्के धक्के लगाकर मैंने एक बार निशा की चूत को अपने पानी से तर कर दिया. मोहिनी भाभी ने नैपकिन से मेरे लंड को साफ किया और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. 5 मिनिट में ही वो फिर से डंडे की तरह सख्त हो गया. मैंने भाभी को घोड़ी बना दिया और उनकी गान्ड पर चाँटा मारते हुए उनके पाटों को सुर्ख लाल कर दिया. गान्ड में मुँह डालकर कुछ देर भाभी की चूत और गान्ड को चाटा. भाभी चुदने के लिए उतावली होने लगी.
मोहिनी भाभी – आअहह.. अंकुश.. अब जल्दी से अपना जबरदस्त लंड मेरी चूत में पेल दो… आअहह.. और जम कर मुझे चोद दो.. मेरी चूत बहुत ही चुदासी हो रखी है… जल्दी से डालो अंकुश... और इंतजार मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है…
मैंने पीछे से अपना हथौड़े जैसा 9” लंबा और 3” मोटा लंड मोहिनी भाभी की पनियाई चिकनी चूत के छेद पर रखा और एक तगड़ा सा धक्का लगा दिया. तीन-चौथाई लंड सर्रर्रर्ररर… से चूत के अंदर चला गया.
मोहिनी भाभी चुदाई के आनंद में आहें भरने लगीं…
मोहिनी भाभी - हाय अंकुश… तुम्हारा लंड सच्ची में बहुत मोटा हो गया है… थोड़ा आराम से अंकुश… नहीं तो मेरी चूत का भोसड़ा बन जाएगा.
मैंने बाकी बचे हुए लंड को भी पेलते हुए कहा – क्यों?? अब डर लग रहा है आपको भाभी?? तब तो बड़ी ताने दे रही थी निशा को… अब झेलो इसे..
मोहिनी भाभी – अरे अंकुश… थोड़ा धीरे.. प्यार से.. आराम से.. चोदो.. हाय राम कितना लंबा हो गया है… ये तुम्हारा लंड…
मैं - लो मेरी प्यारी भाभी… अभी तो मैं अपने लंड से तुम्हारी गान्ड खोलूँगा ना.. तब देखना क्या होता है…
मैंने मोहिनी भाभी की चूत में धक्के लगाते हुए कहा. आज पहली बार भाभी के मुँह से ऐसे शब्द निकल रहे थे, या तो ये कहा जाए कि मेरा फौलादी लंड उनकी चूत में पहले से ज़्यादा अंदर तक उनकी प्यारी चूत की दीवारों को चीरता हुआ जा रहा था तो उत्तेजना के मारे मोहिनी भाभी अनाप-शनाप बकने लगी थी.
गान्ड चोदने की बात सुनकर मोहिनी भाभी गिड़गिड़ाते हुए बोली – हाए… राम.. अंकुश… ऐसा मत करना अंकुश… मेरी गान्ड फट जाएगी तुम्हारे इतने बड़े लौड़े से तो…. चल भी नहीं पाऊँगी…. आअहह…. चूत में ही लेना भारी पड़ रहा है…. हे राम… मर गई मैं तो अंकुश..... ऐसे ही धीरे-धीरे…
मोहिनी भाभी की मादकता से भरपूर कराह भरी बातें सुनकर मेरा और जोश बढ़ता जा रहा था और मैंने भाभी की गान्ड मसलते हुए अपने धक्के और तेज कर दिए. भाभी की चूत लगातार रस बहाये जा रही थी. लंड की चोट सीधी उनकी बच्चेदानी में पड़ रही थी. इस वजह से भाभी की चूत लगातार रस छोड़ रही थी. फुकछ.. फुकछ.. पक… पक.. जैसी आवाज़ें भाभी की चूत में मेरे लंड के अंदर बहार होने से आ रही थी. मोहिनी भाभी झड़ने के बाद कुछ देर ढीली पड़ जाती हैं. मैं उनकी पोज़िशन चेंज करके फिर से चोदने लगता हूँ. लास्ट में मैंने भाभी को अपनी तरफ गान्ड करके अपने ऊपर बिठा लिया और गान्ड की दरार में उंगली करते हुए नीचे से ढका-धक धक्के लगाता रहा. मोहिनी भाभी की रेल बन चुकी थी. लेकिन मेरा मज़ा खराब ना हो इसलिए भाभी बेचारी मेरे ताबड़-तोड़ धक्कों को सहन करती रही. लगातार कुछ ना कुछ बड़बड़ाती जा रही थी. ऐसा लग रहा था मानो भाभी की कुँवारी चूत हो और को हब्शी उनकी चूत पहली बार चोद रहा हो. आधे घंटे की लगातार मदमस्त चुदाई के बाद मेरा लंड जवाब देने लगा और उसने मोहिनी भाभी की चूत को अपने गाढ़े-गाढ़े पानी से लबालब भर दिया.
मोहिनी भाभी पस्त होकर मेरे ऊपर पसर गयी. अपनी लंबी-लंबी साँसों को इकट्ठा करने की कोशिश करते हुए बोली – हे भगवान आज तो ग़ज़ब ही कर दिया अंकुश तुमने… मेरी तो जान ही अटक गयी थी.
मैंने भाभी की चुचियों को मसलते हुए कहा – इसका मतलब मज़ा नहीं आया आपको??
मोहिनी भाभी – मज़ा?? मज़े के मारे ही तो मैं होश ठिकाने नहीं रख पा रही थी… सच में बहुत दमदार हो गया है तुम्हारा लंड और स्टैमिना भी बहुत बढ़ गया है.
मैं – तो अच्छा ही है ना… मुझे अलग-अलग मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.. दोनों को एक साथ ही निपटा दिया करूँगा…
मोहिनी भाभी – अंकुश… मुझे तो लगता है, तुम हम दोनों को भी नानी याद दिला दोगे..
ये कहकर भाभी हंस पड़ी और मेरे लंड को चूम लिया.
निशा – दीदी की आज की चुदाई देख कर मुझे तो डर लग रहा है… डिलीवरी तक मैं तो अब अंकुश के पास फटकने वाली नहीं हूँ… कहीं मेरे बच्चे को ठोकर लग गयी जोश-जोश में तो…
मैंने हँसते हुए निशा को अपनी गोद में खींच लिया और उसके रसीले होंठों को चूमकर कहा – इतना भी निर्दयी मत समझो मुझे, की अपने बच्चे को ही चोट पहुँचा दूं. वो तो भाभी को ज़्यादा से ज़्यादा ख़ुशी देने के लिए मैंने उन्हें जमकर चोदा है. भाभी आप खुश तो हो ना??
मोहिनी भाभी ने मेरे गाल को कचकचाकर काट लिया. मेरे मुँह से आअहह निकल गयी, फिर मेरे गाल को चूमकर बोली – बहुत खुश अंकुश. भगवान करे ये ख़ुशी यूँ ही बनी रहे.
इस तरह हमारी लाइफ फिर से सामान्य गति पकड़ने लगी...