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Incest Mera Pyara Devar - Ankush

aidenabhishek

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UPDATE 66​

अपनी साँसें कंट्रोल करते हुए मोहिनी भाभी बोली – हां अब कुछ हरारत दूर हुई… अब मुझे किसी दवा की ज़रूरत नहीं है, ले चलो मुझे घर.

फिर मोहिनी भाभी छाया को संबोधित करके बोली – क्यों छाया.. पता लगा होंठ तर कैसे होते हैं?? तुझे भी करवाने हों तो बोल, अभी भी अंकुश के पास बहुत तरावट बाकी है. क्यों अंकुश सही कह रही हूँ ना मैं??

ये कहकर मोहिनी भाभी ने मेरी तरफ आँख मारकर मुस्कुराने लगी.

छाया मुस्कराते हुए बोली – हाय दीदी.. ऐसी तरावट लेने के लिए कौन मना करना चाहेगी भला… पर भैया मुझे थोड़ी ना वो तरावट देंगे… ये तो बस अपनी प्यारी भाभी के ही दुलारे हैं… क्यों निशा दीदी, सही कह रही हूँ ना???

निशा – ये तुमसे किसने कह दिया, मेरे पतिदेव इतने स्वार्थी नहीं हैं… चाहो तो तुम भी ले सकती हो..

छाया भी मेरे किस के लिए कब से प्यासी थी.. भैया के साथ शादी करने के बाद से ही हमने एक दूसरे को अलग ही रिश्तों की डोर में समेट लिया था.

छाया नज़रें झुकाए बोली – क्या ऐसा हो सकता है अंकुश?

मैंने भाभी के ऊपर से ही लंबा होकर छाया के चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले लिया, और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला – तुमसे तो मेरे और भी बहुत से रिश्ते हैं. भाभी तो तुम मेरी हो ही चुकी हो. उससे पहले मेरी शिष्या हो और अब तो तुमने मेरी जान बचाकर मुझे बिन मोल खरीद लिया है छाया… जो चाहोगी मिलेगा, किस कौन सी बड़ी बात है?

इतना बोलकर मैंने छाया के होंठों को चूम लिया. छाया ने भी मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी. जब अलग हुए तो छाया की आँखों में आँसू थे.

भर्राये स्वर में छाया बोली - मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, कि मेरी किस्मत इतनी अच्छी भी हो सकती है, एक ग़रीब माँ-बाप की बेटी को इतना उँचा और इतना प्रेम करने वाला परिवार भी मिल सकता है. मैं सच में बहुत सौभाग्यशाली हूँ दीदी.

फिर कुछ नटखट अंदाज में छाया बोली – कभी-कभी मुझे निशा दीदी को चिढ़ाने का मन करता है.

मोहिनी भाभी – वो क्यों??

छाया – मुझे लगता है, आप मुझे उनसे ज़्यादा प्यार करती हैं. उसकी बातें सुनकर हम सब की आँखें नम हो गयी.

निशा मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गयी थी, तो मैंने उसे अपनी गोद में बिठाकर बोला – अले… अले… मेरा बच्चा तो रह ही गया.

फिर उसे मैंने अपनी बाँहों में कस कर उसके चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. अभी हम चारों ये बातें कर ही रहे थे कि डॉक्टर वीना चेक-अप के लिए आ गयी.

हम सबको एक साथ मोहिनी भाभी के पलंग पर बैठे देख कर खुश होती हुई बोली – अरे वाह! मैं तो यहाँ मरीज़ों को देखने आई थी, लेकिन यहाँ तो मुझे कोई मरीज़ दिखाई ही नहीं दे रहा. सब एक दूसरे से चिपके पड़े हैं. अरे भाई अंकुश जी, अगर थोड़ी बहुत गुंजाइश बची हो तो हमें भी इस प्यार भरी मंडली में शामिल कर लो.

वीना की बात पर मोहिनी भाभी ने अपनी बाहें फैला दी. वीना लपक कर उनके सीने में समा गयी और उनकी पीठ के घाव को सहलाते हुए बोली – सच में आपका ये देवर हीरा है. इसके दिल में सबके लिए जगह है, बहुत बड़े दिलवाला है ये.

भाभी ने उसके कान में फुसफुसा कर कहा – आप भी इसके दिल में हो क्या?

वीना थोड़ा शर्मीली सी मुस्कान के साथ बोली – अर्जी तो दी थी, अब देखते हैं कब तक एक्सेप्ट होती है.

ऐसी ही कुछ चुहल बाज़ी के साथ-साथ उसने हम दोनों का चेक अप किया. सब कुछ एक दम नॉर्मल था. फिर भाभी ने घर जाने के लिए पूछा तो वीना ने केयर रखने का बोल कर परमिशन दे दी.

वीना – थोड़ा कुछ दिन इस जख्म की केयर रखना, वैसे सब ठीक है, हो सका तो दो दिन बाद मैं खुद आपको आपके घर आकर चेक कर लूँगी. इसी बहाने आपके वृंदावन के भी दर्शन हो जाएँगे.

भाभी समेत हम सभी ने एक साथ चौंक कर पूछा – हमारा वृंदावन??

वीना खुलकर हँस पड़ी – अरे मोहिनी जी, आपका घर किसी वृंदावन से कम है क्या?? जहाँ सबके दिल में सबके लिए प्रेम बसता हो. वो घर, घर नहीं मंदिर बन जाता है.

फिर मैंने डॉक्टर वीना से कहा – डॉक्टर अगर थोड़ा समय हो तो मैं आपसे कुछ डिसकस करना चाहता हूँ.

वीना – हां.. हां.. क्यों नहीं? चलो अभी, तुम मेरे केबिन में पहुँचो. मैं 5 मिनिट में और मरीजों को चेक करके आती हूँ.

उसके जाने के बाद भाभी ने मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा. मैंने आँख झपकाकर सब ठीक है का इशारा करके मैं वीना के केबिन की तरफ बढ़ गया. कुछ औपचारिक बातों के बाद.

मैंने डॉक्टर वीना से सवाल किया – आपने मेरा फुल चेक अप किया था??

वीना – हां.. क्यों?

मैं – कोई इन्फेक्शन वग़ैरह तो नहीं है ना?

वीना मेरे कहने का मतलब समझ गयी और बोली – तुम्हें एग्जामिन करते ही मैं समझ गयी कि तुम्हें ड्रग के ओवरडोज दे-दे कर तुम्हारे साथ जबरदस्ती और अनलिमिटेड सेक्स किया गया है. लेकिन ये एक अच्छी बात हुई, कि उन औरतों में कोई भी इन्फेक्टेड नहीं थी. शायद सो कॉल्ड सभी घरों की ही होंगी जो लिमिटेड और प्रोटेक्टेड सेक्स करने वाली हैं. अब मुझे तो पता नहीं है कि वो कौन-कौन थी और ना ही मैं जानना चाहूँगी. हां ये अलग बात है, कि तुम अगर अपनी मर्ज़ी से बताओ तो. ये कहकर वो मुस्करा दी.

मैं – मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगा वीना, थोड़ा समय दो.

वीना – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी अंकुश. तो हां.. मैं कह रही थी, कि वो सभी लिमिटेड सेक्स करने वाली ही औरतें होनी चाहिए या हो सकता है, उन्होंने कंडोम वग़ैरह यूज़ किया हो जिसकी संभावना कम ही है.

मैं – वो क्यों?

वीना – मैं अपने एक्सपीरियेन्स से कह सकती हूँ, कि जो औरतें अपने तन की प्यास बुझाने के पर्पस से किसी इनोसेंट मैन के साथ सेक्स करेगी, वो कम से कम कंडोम यूज़ नहीं करना चाहेगी. उससे उसे मज़ा कम आता है और यहाँ तो सेक्सुअली टॉर्चर किया गया है तुम्हें तो.. भला वो अपना मज़ा खराब क्यों करना चाहेंगी.

मैं – कुछ औरतों ने कंडोम यूज़ किया था. वो श्वेता के कहने पर.

वीना – तो ऐसी कितनी औरतों ने सेक्स किया था तुम्हारे साथ??

मैं – पहले दिन तो 6-7 औरतों ने किया था, जिनमें से 4-5 ने कंडोम यूज़ किया था.

वीना – तो वो 4-5 शायद धंधे वाली होंगी या कोई और रही होंगी उसके लिए. थोड़ा सा तुम्हारे पेनिस के मसल्स में डैमेज था. शायद ड्रग्स की वजह से वो ज़्यादा सख्त होने के कारण और फिर बहुत लंबे समय तक रफ सेक्स होता रहा उसकी वजह से. तो मेरी राय में अभी तुम कुछ दिन अपनी पत्नी के साथ भी सेक्स मत करना. 15 दिन में सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा, और तुम पहले की तरह ही मस्त चुदाई कर सकोगे.

फिर वीना ने एक ट्यूब का नाम लिखकर दिया.

वीना - इससे कुछ दिन अपने लंड की मसाज करवाते रहना सब कुछ पहले जैसा ही और शायद बेहतर ही करोगे. क्योंकि कुछ तो इस इन्सिडेंट के कारण और कुछ इस ट्यूब की मसाज से तुम्हारा लंड थोड़ा बड़ा हो जाएगा.

ये कहकर वीना हंस पड़ी. फिर आगे बोली - बाकी बस ड्रग्स की ही मात्रा कुछ ज़्यादा थी बॉडी में, तो लंबी नींद के कारण वो भी अब नॉर्मल है. डोंट वरी, एवेरी थिंग इस ऑलराइट नाउ. एंजाय योर लाइफ, और हो सके तो किसी बुरे सपने की तरह इसे भूल जाना.

मैं – इस सबका खर्चा भी बता दो, उस हिसाब से मैं पेमेंट का इंतज़ाम करूँ.

वीना मुसकुराकर बोली – खर्चा थोड़ा लंबा है… जिसे चुकाने के लिए तुम्हें मेरे पास आना पड़ेगा और जैसा किस तुमने अपनी प्यारी भाभी को किया था, वैसा ही करना पड़ेगा.

मैं – ओह्ह्ह… डॉक्टर.. यू आर सो स्वीट…

ये कहकर मैं लपक कर वीना के पास गया. मैंने वीना को सीट से भी नहीं उठने दिया और उसके होंठों पर टूट पड़ा. वीना के साथ एक लंबी स्मूच के बाद मैं उसे थैंक्स बोलकर ख़ुशी-ख़ुशी बाहर आया. अब मेरी सारी टेंशन दूर हो चुकी थी. मैंने जो सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ. भले ही अपने स्वार्थ वश सही श्वेता ने उन औरतों को प्रीकॉशन लेने को कहकर एक तरह से मेरा भला ही किया था.

मुझे खुश देख कर मोहिनी भाभी ने पूछा – अंकुश बड़े खुश दिख रहे हो… क्या बात है?? डॉक्टर वीना ने कुछ दे दिया क्या??

मैंने हँसते हुए कहा – ज़्यादा कुछ नहीं मोहिनी भाभी… जो आपने दिया था, वही उसने भी दिया है… वैसे मेरी ख़ुशी की वजह कुछ और है..

तीनों एक साथ बोली – हमें बताने लायक नहीं है वो वजह??

मैं – नहीं ऐसी कोई छुपाने वाली बात नहीं है. बस मैं ये जानने गया था, कि मेरे साथ कुछ अबनॉर्मल तो नहीं हुआ है. जो कि सब कुछ पहले जैसा ही है.

घर आकर छाया और निशा, मोहिनी भाभी की देखभाल में लग गयी. भाभी का बेटा सुवंश ज़्यादातर निशा के पास ही रहता था. स्कूल के बाद उसे रुचि भी संभाल लेती थी. कुछ दिनों में ही मोहिनी भाभी का जख्म सही हो गया. मोहिनी भाभी अब घर के काम संभालने लगी थी, छाया को हमने वापस शहर भेज दिया.

एक दिन हम तीनों ही बेड पर बैठे बातें कर रहे थे. मोहिनी भाभी ने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाते हुए कहा – अंकुश.. भानु और उस छिनाल श्वेता को यूँ ही छोड़ दोगे??

मैं – आप क्या चाहती हैं मोहिनी भाभी?? वैसे भानु तो जिस दिन पुलिस के हाथ लग गया, तो किडनैप चार्ज में जायेगा कम से कम 10 साल के लिए अंदर और रही श्वेता तो वो वैसे ही अपने अंदर के डर में रोज़ नई मौत मरती रहेगी कि मैं कुछ उसके साथ ना कर दूं.

मोहिनी भाभी मेरी तरफ गहरी नज़रों से देखती रही. मैंने उन्हें अपनी ओर ऐसे अंदाज में देखते पाकर कहा – ऐसे क्या देख रही हो भाभी??

मोहिनी भाभी – कुछ नहीं.. बस सोच रही थी कि कहीं तुमने उन्हें माफ़ तो नहीं कर दिया? पता है ना.. वो लोग तुम्हें जान से मारने वाले थे. 5-10 साल की जेल से भानु सुधर नहीं जाएगा. वो ऐसा जहरीला नाग है, कि मौका पड़ते ही फिर से चोट करेगा.. कब तक यूँ ही छोड़ते रहोगे उसे और वो हरामजादी छिनाल.. इतने बड़े क्राइम में इन्वॉल्व थी.. उसे तो क़ानून भी कभी कोई सज़ा नहीं दे पाएगा. एक अजनबी लड़की को इंसाफ़ दिलाने वाला आदमी, अपने ऊपर हुए अत्याचारों को ऐसे ही भुला देगा.. ये मैंने कभी सोचा भी नहीं था…

ये बातें कहते-कहते मोहिनी भाभी उत्तेजित दिखाई देने लगी. मुझे ये अहसास होने लगा कि अगर मैंने कुछ नहीं किया तो कहीं ये और छाया अपनी तरह से कुछ करने ना निकल पड़ें.

अतः मैंने उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उनके गुस्से को शांत करने के लिए कहा – मोहिनी भाभी अगर आप चाहती हैं कि उन्हें उनके गुनाहों की सज़ा मैं दूं, तो यकीन कीजिए वो दोनों अब ज़्यादा दिन खुले में साँस नहीं ले पाएँगे.

मेरी बात सुनकर मोहिनी भाभी थोड़ी सहम सी गयी. कुछ देर घूरने के बाद बोली – तो क्या तुम अपने हाथों से उनका खून करोगे??

मैं – मुझे अपने हाथ उनके गंदे खून से रंगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, बस अब आप देखती जाओ.. मैं कैसा चक्रव्यूह बनाता हूँ उन दोनों के लिए.

मैं अब फिर से कोर्ट जाने लगा था और अपने सारे काम सामान्य तरीक़े से करने लगा था. यहाँ तक कि अपनी निशा डार्लिंग के साथ बेड वाला गेम भी शुरू करने वाला था, जो कुछ दिनों के लिए पोस्टपोन कर रखा था डॉक्टर वीना की हिदायत के बाद.

उस दिन सोने से पहले निशा मेरे लंड की मालिश कर रही थी, वीना के प्रेसक्राइब किए हुए ट्यूब से. मेरा लंड पूरी तरह अपने आकार में आ चुका था, अब मेरा लंड निशा की मुट्ठी में भी नहीं समा रहा था. मालिश करते-करते निशा मदहोश होती जा रही थी. इससे पहले कि निशा अपनी नाइटी निकाल कर मेरे लंड पर बैठती कि तभी मोहिनी भाभी आ धमकी. मैंने झट से अपना शॉर्ट ऊपर करने की कोशिश की.

तभी मोहिनी भाभी बोल पड़ी - छुपा लो.. छुपा लो.. अपने खजाने को… अब तो इस पर निशा का ही हक़ रह गया है…

निशा मोहिनी भाभी की बात से थोड़ी दुखी स्वर में बोली – ऐसा क्यों बोल रही हैं दीदी?? अंकुश को शर्म आ रही होगी शायद इसलिए वो अपने लंड को ढकने लगा होगा.. मुझे खामख्वाह आपने स्वार्थी बना दिया.

मोहिनी भाभी ने फ़ौरन निशा को अपने गले से लगा लिया और बोली - ऐसी मेरी कोई मंशा नहीं थी निशा… मैं तो बस मज़ाक कर रही थी, तू तो सीरीयस हो गयी.

मैंने भाभी की गुदगुदी गान्ड दबाते हुए कहा – अब इस लंड को अपनी चूत में रखना आपके बस का रोग नहीं है भाभी…

मोहिनी भाभी आँखें चौड़ी करके बोली – अच्छा देखें तो सही, क्या सुरखाब के पर निकल आए हैं तुम्हारे लंड को??

ये कहकर मोहिनी भाभी ने मेरा शॉर्ट नीचे खिसका दिया और मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर देखने लगी.

मोहिनी भाभी - सच में अंकुश… तुम्हारा लंड तो पहले से बड़ा और मोटा सा लग रहा है… निशा तूने तो लेकर देखा होगा??

निशा – अभी कहाँ दीदी… आज ट्राइ करने वाली थी कि आप आ धमकी..

मोहिनी भाभी – अच्छा.. तो 900 चूहे ख़ाके बिल्ली हज़ करने चली है… मुझसे क्या शर्म?? आज दोनों बहनें मिल के फिर से अंकुश के लंड का तेल निकालते हैं…

ये कहकर वो दोनों मेरे आजू-बाजू बैठकर मेरे लंड को बारी-बारी से मुठियाने लगी. मैंने दोनों को नंगा करके दोनों की गान्ड अपनी तरफ औंधी करवा ली. एक की चूत चाटने लगा तो दूसरी की चूत में उंगली से चोदने लगा. हाल ही में क्रीम की मालिश की वजह से ना ही मोहिनी भाभी और ना ही निशा मेरे लंड को मुँह में ले पा रही थी. इसलिए एक के ऊपर दूसरी का हाथ रख के मुठियाने लगी. निशा पहले से ही गरम हो रही थी, तो वो मेरे ऊपर सवार हो गयी और मैं भाभी की चूत की सर्विस करने लगा. निशा ने बहुत कोशिश की लेकिन वो पूरा लंड नहीं ले पाई. अंत तक लेते-लेते, निशा का मुँह खुल गया. लंड अभी जड़ तक नहीं पहुँच पाया था कि निशा एक बार ऐसे ही झड़ गयी. निशा को ज़्यादा उछल-कूद ना करनी पड़े, इसलिए मैंने उसे अपने बगल में करवट से लिटा लिया और उसकी गान्ड मसलते हुए पीछे से अपना लंड उसकी रस से सराबोर चूत में सरका दिया.

निशा - आअहह… अंकुश… तुम्हारा लंड तो पहले से काफी ज़्यादा बड़ा हो गया है… थोड़ा बाहर ही रखना.. प्लीज़..

मैं निशा को 3/4 लंड से चोदने लगा. हल्के-हल्के धक्के लगाकर मैंने एक बार निशा की चूत को अपने पानी से तर कर दिया. मोहिनी भाभी ने नैपकिन से मेरे लंड को साफ किया और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. 5 मिनिट में ही वो फिर से डंडे की तरह सख्त हो गया. मैंने भाभी को घोड़ी बना दिया और उनकी गान्ड पर चाँटा मारते हुए उनके पाटों को सुर्ख लाल कर दिया. गान्ड में मुँह डालकर कुछ देर भाभी की चूत और गान्ड को चाटा. भाभी चुदने के लिए उतावली होने लगी.

मोहिनी भाभी – आअहह.. अंकुश.. अब जल्दी से अपना जबरदस्त लंड मेरी चूत में पेल दो… आअहह.. और जम कर मुझे चोद दो.. मेरी चूत बहुत ही चुदासी हो रखी है… जल्दी से डालो अंकुश... और इंतजार मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है…

मैंने पीछे से अपना हथौड़े जैसा 9” लंबा और 3” मोटा लंड मोहिनी भाभी की पनियाई चिकनी चूत के छेद पर रखा और एक तगड़ा सा धक्का लगा दिया. तीन-चौथाई लंड सर्रर्रर्ररर… से चूत के अंदर चला गया.

मोहिनी भाभी चुदाई के आनंद में आहें भरने लगीं…

मोहिनी भाभी - हाय अंकुश… तुम्हारा लंड सच्ची में बहुत मोटा हो गया है… थोड़ा आराम से अंकुश… नहीं तो मेरी चूत का भोसड़ा बन जाएगा.

मैंने बाकी बचे हुए लंड को भी पेलते हुए कहा – क्यों?? अब डर लग रहा है आपको भाभी?? तब तो बड़ी ताने दे रही थी निशा को… अब झेलो इसे..

मोहिनी भाभी – अरे अंकुश… थोड़ा धीरे.. प्यार से.. आराम से.. चोदो.. हाय राम कितना लंबा हो गया है… ये तुम्हारा लंड…

मैं - लो मेरी प्यारी भाभी… अभी तो मैं अपने लंड से तुम्हारी गान्ड खोलूँगा ना.. तब देखना क्या होता है…

मैंने मोहिनी भाभी की चूत में धक्के लगाते हुए कहा. आज पहली बार भाभी के मुँह से ऐसे शब्द निकल रहे थे, या तो ये कहा जाए कि मेरा फौलादी लंड उनकी चूत में पहले से ज़्यादा अंदर तक उनकी प्यारी चूत की दीवारों को चीरता हुआ जा रहा था तो उत्तेजना के मारे मोहिनी भाभी अनाप-शनाप बकने लगी थी.

गान्ड चोदने की बात सुनकर मोहिनी भाभी गिड़गिड़ाते हुए बोली – हाए… राम.. अंकुश… ऐसा मत करना अंकुश… मेरी गान्ड फट जाएगी तुम्हारे इतने बड़े लौड़े से तो…. चल भी नहीं पाऊँगी…. आअहह…. चूत में ही लेना भारी पड़ रहा है…. हे राम… मर गई मैं तो अंकुश..... ऐसे ही धीरे-धीरे…

मोहिनी भाभी की मादकता से भरपूर कराह भरी बातें सुनकर मेरा और जोश बढ़ता जा रहा था और मैंने भाभी की गान्ड मसलते हुए अपने धक्के और तेज कर दिए. भाभी की चूत लगातार रस बहाये जा रही थी. लंड की चोट सीधी उनकी बच्चेदानी में पड़ रही थी. इस वजह से भाभी की चूत लगातार रस छोड़ रही थी. फुकछ.. फुकछ.. पक… पक.. जैसी आवाज़ें भाभी की चूत में मेरे लंड के अंदर बहार होने से आ रही थी. मोहिनी भाभी झड़ने के बाद कुछ देर ढीली पड़ जाती हैं. मैं उनकी पोज़िशन चेंज करके फिर से चोदने लगता हूँ. लास्ट में मैंने भाभी को अपनी तरफ गान्ड करके अपने ऊपर बिठा लिया और गान्ड की दरार में उंगली करते हुए नीचे से ढका-धक धक्के लगाता रहा. मोहिनी भाभी की रेल बन चुकी थी. लेकिन मेरा मज़ा खराब ना हो इसलिए भाभी बेचारी मेरे ताबड़-तोड़ धक्कों को सहन करती रही. लगातार कुछ ना कुछ बड़बड़ाती जा रही थी. ऐसा लग रहा था मानो भाभी की कुँवारी चूत हो और को हब्शी उनकी चूत पहली बार चोद रहा हो. आधे घंटे की लगातार मदमस्त चुदाई के बाद मेरा लंड जवाब देने लगा और उसने मोहिनी भाभी की चूत को अपने गाढ़े-गाढ़े पानी से लबालब भर दिया.

मोहिनी भाभी पस्त होकर मेरे ऊपर पसर गयी. अपनी लंबी-लंबी साँसों को इकट्ठा करने की कोशिश करते हुए बोली – हे भगवान आज तो ग़ज़ब ही कर दिया अंकुश तुमने… मेरी तो जान ही अटक गयी थी.

मैंने भाभी की चुचियों को मसलते हुए कहा – इसका मतलब मज़ा नहीं आया आपको??

मोहिनी भाभी – मज़ा?? मज़े के मारे ही तो मैं होश ठिकाने नहीं रख पा रही थी… सच में बहुत दमदार हो गया है तुम्हारा लंड और स्टैमिना भी बहुत बढ़ गया है.

मैं – तो अच्छा ही है ना… मुझे अलग-अलग मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.. दोनों को एक साथ ही निपटा दिया करूँगा…

मोहिनी भाभी – अंकुश… मुझे तो लगता है, तुम हम दोनों को भी नानी याद दिला दोगे..

ये कहकर भाभी हंस पड़ी और मेरे लंड को चूम लिया.

निशा – दीदी की आज की चुदाई देख कर मुझे तो डर लग रहा है… डिलीवरी तक मैं तो अब अंकुश के पास फटकने वाली नहीं हूँ… कहीं मेरे बच्चे को ठोकर लग गयी जोश-जोश में तो…

मैंने हँसते हुए निशा को अपनी गोद में खींच लिया और उसके रसीले होंठों को चूमकर कहा – इतना भी निर्दयी मत समझो मुझे, की अपने बच्चे को ही चोट पहुँचा दूं. वो तो भाभी को ज़्यादा से ज़्यादा ख़ुशी देने के लिए मैंने उन्हें जमकर चोदा है. भाभी आप खुश तो हो ना??

मोहिनी भाभी ने मेरे गाल को कचकचाकर काट लिया. मेरे मुँह से आअहह निकल गयी, फिर मेरे गाल को चूमकर बोली – बहुत खुश अंकुश. भगवान करे ये ख़ुशी यूँ ही बनी रहे.

इस तरह हमारी लाइफ फिर से सामान्य गति पकड़ने लगी...
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Teri story me bhabhi ko bhut acha dikhaya gaya hai agar sex sambandh devar se count na Kiya Jaye lekin dost tujhe pata nahi asal me bhabhi gharo ko barbad kar deti hai
jis din Teri bhabhi agayi tere Ghar tu bhabhi ko nagin likhega chomu
 

aidenabhishek

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UPDATE 67​

एक दिन काम से मैं गुप्ता जी के यहाँ गया हुआ था. हमेशा की तरह हॉल में बैठा उनका इंतजार कर रहा था, तभी सेठानी, शांति, मेरे पास आकर बैठ गयी. ख़ुशी कालेज जा चुकी थी. मेरे पास आकर शांति मेरे किडनैप के विषय में पूछने लगी. इससे पहले कि मैं उनको कोई जवाब देता, कि गुप्ता जी अपने रूम से निकलते दिखाई दिए.

गुप्ता जी हमारी तरफ आते हुए बोले – क्या बातें हो रही हैं भाई?

शांति – कुछ नहीं… बस मैं पूछ रही थी, कि अंकुश का अपहरण किसने किया था? कैसे हुआ? वो सब.

गुप्ता जी – क्या बात है शांति?? तुम्हें भी अब हमारे वकील साहब की अच्छाइयाँ नज़र आने लगी… सुनकर अच्छा लगा कि तुम्हें इनकी फिकर हुई…

शांति – क्या आप भी बार-बार वही टोन्ट मारते रहते हैं… एक बार ग़लती क्या हो गयी आप तो उस बात को पकड़ के बैठ गये हैं.

मैं और गुप्ता जी उनकी बात पर हँसने लगे, फिर वो बोले – अब तुम इनकी कहानी बाद में सुनना.. हमें ऑफिस में बहुत सारे काम हैं, चलो वकील साहब निकलते हैं.

मैं उनके साथ चलने लगा, तो पीछे से शांति बोली – अंकुश… शाम को समय निकाल कर आना… ख़ुशी बहुत परेशान थी तुम्हें लेकर और मुझे भी बहुत सारी बातें करनी हैं तुमसे..

मैं हां बोलकर गुप्ता जी के पीछे लपक लिया. दो घंटे में गुप्ता जी का काम निपटाकर मैं अपने ऑफिस पहुँचा. बहुत सारे केस पेंडिंग पड़े थे, जिनकी डेट आगे की लेनी थी. कुछ की हियरिंग थी. सारे दिन की भागदौड़ में दिन कब निकल गया पता ही नहीं चला. घर जाना था लेकिन अब घरवालों की खास हिदायत थी कि लेट होने पर वहीं रुक जाना. मैंने सोचा आज रात कृष्णा भैया के बंगले पर बिताई जाए. कृष्णा भैया से भी बात किए बिना कई दिन हो गये थे. छाया तो हर रोज़ मेरी बाट जोहती रहती थी. शाम 8 बजे मैं कृष्णा भैया के बंगले पर पहुँचा. पता चला वो दोनों मियाँ बीवी छाया की मम्मी से मिलने मेरे ही फ्लैट पर गये हैं. मैंने फ़ौरन वहाँ से गाड़ी दौड़ाई और अपने घर पहुँचा वहाँ वो दोनों मुझे मिल गये.

कृष्णा भैया – क्यों भाई वकील साहब.. अभी जुम्मा-जुम्मा चार दिन हुए हैं एक मुसीबत से निकले हुए और फिर से खुले सांड की तरह इतनी रात तक सड़कों पर हांडते फिरते रहते हो.

मैंने कहा – भैया, इतने दिनों का पेंडिंग काम थे.. लोड ज़्यादा है. कुछ दिन तो ऐसे ही जाने वाले हैं. आप सुनाओ, मैं तो आपके बंगले पर गया था. वहाँ से पता चला कि आप यहाँ आए हो, तो इधर भागा, इसी चक्कर में और लेट हो गया.

कृष्णा भैया - चल कोई ना.. सही समय पर आया है. खाना शुरू करने ही वाले थे हम लोग.

मधु आंटी और छाया ने हम सबके लिए खाना लगाया, बातें करते हुए हम सभी खाना खाने लगे. मधु आंटी अब अच्छे रहन सहन और खाने पीने की वजह से उनके अंगों में निखार आता जा रहा था. मस्त टाइट 36C की उनकी बूब्स कसे हुए खुले गले के ब्लाउज से बाहर झाँक रही थी. खाना खाते हुए कृष्णा भैया की नज़र वहीं टिकी हुई थी.

मैंने मन ही मन मुस्कराते हुए भैया से पूछा – श्वेता के फार्म हाउस की क्या स्थिति है?

कृष्णा भैया – वो तो हमने अपनी कस्टडी में लिया हुआ है. पुलिस की सील लगी है, क्यों??

मैं - मुझे अनअफीशियली कुछ दिन के लिए उसकी अथॉरिटी चाहिए.

सभी चौंकते हुए बोले – क्यों? अब क्या करने वाला है वहाँ?

मैं – वो सब बाद में बताऊंगा, पहले आप मेरी बात का जवाब दीजिए.

कृष्णा भैया – देख ले, मैं दे तो दूँगा… लेकिन कुछ ऐसा वैसा मत करना जिससे तू भी फँसे और मुझे भी जवाब देना भारी पड़ जाए.

मैं – वो सब आप मुझ पर छोड़ दो, ऐसा कुछ भी नहीं होने दूँगा.

बातें करते हुए बीच-बीच में कृष्णा भैया की नज़र भटक कर अपनी सास के यौवन पर ज़रूर अटक जाती, जिससे उनके पैंट में उभार बढ़ने लगा था. शायद आंटी भी उनकी नज़र ताड़ गयी थी, तो मधु आंटी ने अपने आँचल को सही करने के बहाने उसे और ढलका दिया. मधु आंटी की गोरी-गोरी गोलाईयों में भैया का मन भटकने लगा. खाने के कुछ देर बाद आंटी ने फ्रीज़ से निकाल कर आईसक्रीम सर्व की जो छाया अपने साथ लाई थी. मधु आंटी ने बड़ी मादक अदा से भैया को आईस क्रीम सर्व की कुछ ऐसे पोज़ से जिससे उनके यौवन के दीदार, वो अच्छे से जी भरकर, कर सकें.

इस बीच मैंने छाया को अपनी बातों में उलझाए रखा. कुछ देर बाद छाया और कृष्णा भैया अपने बंगले पर लौट गये. मैं और मधु आंटी अपने-अपने कमरे में सोने चले गये. मैं अभी लेटा ही था, कि तभी मधु अपने कपड़े चेंज करके मेरे पास आ गयी. मधु इस समय एक शॉर्ट नाइटी पहने थी, जो मात्र घुटनो तक ही थी. नीचे शायद पैंटी और ब्रा भी नहीं थी. चलने से उनकी 36C सुडौल बूब्स थिरक रही थी. मधु धीरे-धीरे गान्ड मटकाते हुए मेरे पास तक आई और बिस्तर पर मेरी बगल में आकर लेट गयी. उन्होंने अपनी एक जाँघ मेरे लंड के ऊपर रख ली.

मधु अपने बूब्स को मेरे साथ सटाते हुए मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए बोली – उन गुण्डों ने तुम्हें किडनैप क्यों किया था??

मैंने मधु की नाइटी को और ऊपर सरका कर उनकी गान्ड को नंगा कर दिया और अपनी उंगली उनकी मस्त गुदगुदी गान्ड की दरार में ऊपर से नीचे तक घुमाते हुए कहा – मैंने उनको परेशान करके रखा था.. इसलिए उन्होंने मौका देख कर मुझे परेशान किया… वो तो अच्छा हुआ कि छाया और भाभी ने समय पर पहुँच कर बचा लिया, वरना ना जाने और कितने दिन टॉर्चर करते.

मधु आंटी ने मेरे लंड को शॉर्ट के ऊपर से सहलाते हुए कहा – तुमने छाया को इस काबिल बना दिया है कि वो इस तरह के ख़तरे उठा लेती है, वरना एक साधारण सी लड़की कभी ऐसा नहीं कर पाती अंकुश.

मैं – हां वो तो है, वैसे आंटी, कृष्णा भैया के बारे में आपका क्या ख़याल है??

मधु आंटी मेरी बात से एकदम चौंक पड़ी, फिर संभालते हुए बोली – किस बारे में अंकुश?

मैंने मधु की चुचियों को मसलते हुए कहा – उनकी नज़र आपके इन मस्त बूब्स पर थी…

मधु मेरी बात सुनकर शरमा गयी, फिर अंजान बनते हुए बोली – कब अंकुश?? मुझे तो पता नहीं, वैसे कृष्णा मेरे दामाद हैं. उनके मन में ऐसे भाव नहीं आ सकते…

मैंने अपनी एक उंगली मधु आंटी की गान्ड में डाल दी. आंटी ने अपने छेद को सिकोड़कर उसे कस लिया और उनके मुँह से एक सिसकी निकल गयी.

मैंने उंगली को और अंदर करते हुए कहा – वैसे आपकी अदाओं से तो ऐसा नहीं लगा कि कृष्णा भैया आपके दामाद हैं… और फिर उनके छोटे भाई का लंड ले सकती हो तो उनका लेने में कैसा परहेज??

मधु आंटी – आआहह… अंकुश… ज़्यादा अंदर मत करो.. अभी सूखी है..

मैंने अपनी उंगली गान्ड से निकाल कर चूत में पेल दी. दो उंगलियों को अंदर बाहर करते हुए पूछा– वैसे भैया अगर कोशिश करें तो क्या आप उन्हें रोकेंगी?

मधु – सस्स्सिईई.. आअहह. ऐसा कभी मौका आया तो शायद ना रोक पाऊं.. उउउइई.

मैंने मधु को सीधा लिटा दिया और उनके ऊपर आकर नाइटी निकाल दी और उनकी चुचियों को उमेठते हुए कहा – आप दोनों को पास लाने की मैं कोशिश करूँ??

मधु – आअहह… उखाड़ोगे क्या मेरे बूब्स को?? थोड़ा धीरे से मसलो अंकुश… छाया को पता चल गया तो…

मैंने अपना शॉर्ट निकाल दिया, अपने 9” के लंड को उनकी रसीली चूत के मुँह पर रख कर उसकी फांकों के ऊपर घिस्सा लगाते हुए कहा – छाया को बोलकर चुदना चाहती हो क्या? मज़े लो आंटी… भैया का लंड भी अंदर ही जाएगा…

ये कहकर मैंने एक तगड़ा सा धक्का अपनी कमर में लगा दिया. मेरा आधा लंड मधु आंटी की कसी हुई चूत में समा गया. आंटी के मुँह से आआहह निकल गयी.

मधु सिसकते हुए बोली – आराम से अंकुश… तुम्हारा लंड तो पहले से भी ज़्यादा मोटा लग रहा है…

मैंने थोड़ा और पुश करते हुए कहा – हां, उन लोगों ने ड्रग देकर इसे और तगड़ा कर दिया है. आअहह आंटी… बहुत कसी हुई चूत है आपकी… कृष्णा भैया आपको चोद कर खुश हो जाएँगे. मेरी बात से आंटी की उत्तेजना और बढ़ गयी और उन्होंने अपनी कमर को ऊपर उठा दिया. मेरा रहा-सहा लंड भी आंटी की रसीली चूत में सरक गया. आंटी की आँखें खुली रह गयी. कुछ देर बाद मैंने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए. आंटी भी कमर उठा-उठाकर मेरे लंड का मज़ा लेने लगी. मधु आंटी को चोदते-चोदते मेरा दिमाग़ श्वेता के फार्म हाउस में मेरे साथ हुए सेक्स एनकाउंटर की तरफ चला गया. मेरा लंड अपना काम कर रहा था लेकिन दिमाग़ कुछ और ही सोचों में खोया हुआ था. मुझे भाभी को दिया हुआ वचन भी पूरा करना है. सोचते-सोचते में आंटी की चूत में धक्के भी लगाता जा रहा था, मुझे किसी तरह भानु को फिर से पकड़ना था. श्वेता को छेड़ना अभी ठीक नहीं है, वरना वो चौकन्नी हो सकती थी और वैसे भी श्वेता के खिलाफ मेरे पास कोई ठोस सबूत नहीं थे. ना जाने कितनी देर से मैं मधु आंटी को चोदे जा रहा था. इस बीच मधु आंटी दो बार झड़ भी चुकी थी, लेकिन मैं अपनी सोचों में गुम एक लयबद्ध तरीक़े से धक्के लगाए जा रहा था. मेरा ध्यान उनकी कराह सुनकर टूटा. मेरे सीने पर हाथ रखकर मुझे रोकने की कोशिश करते हुए वो बुरी तरह से कराहने लगी थी.

मधु - आअहह… अंकुश… अब बस करो वरना मेरी चूत सूज जाएगी.

मैंने मधु के चेहरे की तरफ देखा जहाँ पीड़ा के निशान थे. बिना झड़े ही मैंने फ़ौरन अपने धक्के बंद किए और उनके ऊपर से उतर गया.

मैं - सॉरी मधु.. माफ़ करना, आप ठीक तो हैं?

मधु – आहहह… आज क्या हो गया है अंकुश तुम्हें…?? मेरी हालत खराब कर दी तुमने…

फिर मधु ने बिना कुछ कहे बाथरूम जाकर अपनी चूत को ठंडे-ठंडे पानी से साफ किया और बाहर आकर अपने कपड़े पहन कर सोने चली गयी. उनके जाते ही मैं फिर से अपनी सोचों में गुम हो गया.

दूसरे दिन से मैंने भानु को खोजने की अपनी मुहिम तेज कर दी, क्योंकि वो ही मेरे लिए एक कमजोर कड़ी था जिसके ज़रिए मैं अपना मक़सद पूरा कर सकता था, पर ना जाने वो हरामी कौन से बिल में छुपा बैठा था. उसके मिलने के सारे ठिकानों पर मैंने अपनी सोर्स से सब जगह पता करवा लिया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पा रहा था. श्वेता को छेड़ने की मैंने कोई कोशिश भी नहीं की. भानु का मोबाइल भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा था. कई अलग-अलग नंबरों से चेक किया. लैंड लाइन से भी ट्राइ किया लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ.

इसी क्रम में मैंने रागिनी की ससुराल का पता निकाला, शायद वो अपनी बहन के यहाँ छुपा बैठा हो. मैंने अपना हुलिया चेंज करके जोसेफ वाला गेटअप बनाकर अपनी गाड़ी लेकर उसको तलाश करने निकल पड़ा. रागिनी की ससुराल कृष्णा भैया की पहली पोस्टिंग वाले शहर में थी. जोसेफ के गेटअप में मैंने अपनी गाड़ी उसी शहर की तरफ दौड़ा दी. गर्मियों के दिन थे. समय दिन के कोई 11 ही बजे थे, कि रोड साइड में मुझे एक गाड़ी खड़ी दिखी जिसका बॉनेट खुला हुआ था. मेरी गाड़ी देखते ही उसके ड्राइवर ने मुझे हाथ देकर रोकने का इशारा किया. मैंने अपनी गाड़ी की स्पीड कम की, पास आकर मुझे खड़ी गाड़ी की पिछली सीट पर एक लेडी साड़ी पहने हुए दिखी.

मैंने थोड़ा आगे जाकर गाड़ी खड़ी कर दी, उस गाड़ी का ड्राइवर भागता हुआ मेरे पास आया, और रिक्वेस्ट करके बोला – साहब हमारी गाड़ी खराब हो गयी है, अगर आप अगले शहर तक जा रहे हों तो मेमसाहब को लिफ्ट दे सकते हैं?

मैंने कहा – अगर तुम्हारी मेमसाहब को कोई प्राब्लम नहीं हो तो मुझे उन्हें लिफ्ट देने में कोई प्राब्लम नहीं है, मैं भी उसी शहर तक जा रहा हूँ.

वो फ़ौरन वहाँ से भागा, कुछ देर में ही वो लेडी मेरी गाड़ी के बगल में खड़ी थी. मैंने एक सरसरी नज़र उस पर डाली. वो कोई 30-32 साल की परफेक्ट फिगर की 34-32-36, हाइट भी अच्छी ख़ासी थी. गोरा रंग गोल सा चेहरा, बोलती सी बिल्लौरी आँखें, मैं देखते ही समझ गया कि ये सेक्स पसंद करने वाली महिला है. उसका कारण था, उसकी आँखों का रंग और उसके ऊपर वाले होंठ पर एकदम सेंटर में तिल का निशान, जो किसी के भी सेक्स के प्रति आकर्षण का एक यूनिवर्सल साइन होता है. होंठों की बनावट कह रही थी, कि वो एक परफेक्ट चुंबन स्वामिनी होनी चाहिए. गर्मी के कारण उसे पसीना आ रहा था, जो उसके चेहरे से बहता हुआ, उसकी बूब्स की घाटी में लुप्त हो रहा था. बार-बार वो अपने रुमाल से उसे पोंछने की कोशिश करती. मैंने साइड ग्लास नीचे गिराया.

उसने थोड़ा झुक कर मुझे कहा – एक्सक्यूज़ मी मिस्टर.. क्या आप मुझे अगले शहर तक लिफ्ट दे सकते हैं?? आपकी बहुत मेहरबानी होगी…

झुकने से ही उसके बूब्स का अनुमान हो गया कि उनका साइज़ कितना बड़ा है.

मैं - ओह श्योर, व्हाई नॉट…

ये कहकर मैंने हाथ बढ़कर आगे का गेट खोल दिया. उसने बैठने के लिए अपना एक पैर आगे किया. साड़ी में कसी हुई उसकी परफेक्ट शेप्ड गान्ड बड़े कामुक अंदाज में थिरकी, जिसे देखकर मेरे लौड़े ने करवट बदली. अंदर बैठकर उसने राहत की साँस ली. मैंने अपने एसी का नंबर बढ़ा दिया.

एसी की ठंडी हवा का अहसास होते ही वो बोली – थैंक्स ए लॉट… बाहर बहुत गर्मी है.. हमारी गाड़ी खराब हो गयी है… अब पता नहीं कब तक ठीक होगी??

मैं – कोई बात नहीं.. मैं भी उसी शहर की तरफ ही जा रहा हूँ. मेरे लिए भी अच्छा होगा, किसी हसीन साथी के साथ सफ़र करने में.

मेरी बात सुनकर उसने तिरछी नज़र से मेरी तरफ देखा और एक कामुक सी मुस्कान देकर बोली – ओह्ह्ह… तो जनाब सुंदर औरत देखते ही फ्लर्ट करने लगे… एनीवेस थैंक्स फॉर द कॉम्पलिमेंट…

मैं – माय प्लेज़र मैडम..

बोलकर मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दी, मेरी नज़र आगे होते ही वो मेरी तरफ देखने लगी.

मैंने आगे नज़र रखे हुए ही उससे पूछा – आप उसी शहर में रहती हैं.

वो – हां… मेरा नाम शालिनी है. वहाँ मेरी ससुराल है…

फिर शालिनी ने अपने परिवार के बारे में बताया. वो एक जॉइंट फैमिली में रहते हैं. अच्छा ख़ासा गारमेंट का बिज़नेस है. दो भाई हैं, जो एक उसके पति से छोटा है यानी देवर जिसकी शादी किसी जमींदार की लड़की के साथ हो चुकी है. जमींदार शब्द सुनते ही मेरे दिमाग़ ने काम करना शुरू कर दिया. कहीं ये रागिनी की जेठानी तो नहीं? लेकिन अपनी एक्साइटमेंट पर काबू रखते हुए मैंने उस टॉपिक को और आगे नहीं बढ़ाया वरना शक़ पैदा हो सकता था.

बातों के दौरान मैंने शालिनी की तरफ नज़र डाली, वो लगातार मुझे ही देखे जा रही थी, मैंने चुटकी लेते हुए कहा – क्या देख रही हो शालिनी?? ऐसा कुछ खास नहीं है इस चेहरे में जो आप जैसी हसीना के देखने लायक हो.

शालिनी झेंप कर सामने देखने लगी. फिर कुछ सोच कर बोली – आप भी कुछ बताओ अपने बारे में.

मैं – मेरा कोई खास इंट्रो नहीं है, मुझे लोग जोसेफ के नाम से जानते हैं. मस्त मौला मस्त कलंदर आदमी हूँ, जिधर मुँह उठ जाता है, निकल पड़ता हूँ. खाने कमाने की टेंशन नहीं है. बाप दादा ने बहुत कमा के रख छोड़ा है, बस अपनी तो ऐश ही ऐश हैं.

शालिनी – वैसे आप बड़े दिलचस्प इंसान लगते हैं और हैंडसम भी, कोई भी लड़की आपके नज़दीक आना चाहेगी.

मैं – हाहाहा… हैंडसम और मैं?? क्यों चने के झाड़ पर चढ़ा रही हो शालिनी जी?? वैसे आप मेरे नज़दीक आना चाहेंगी क्या?

मेरी बात से शालिनी मन ही मन मुस्करा उठी, एक कामुक सी नज़र से देखते हुए बोली – अगर आप आने देंगे तो.

मैं – आप जैसी हूर से दूर कौन भागना चाहेगा?

ये कहकर मैंने अपना हाथ शालिनी की गुदाज़ जाँघ पर रखकर उसे धीरे से सहला दिया. वो मेरी तरफ झुकने लगी, शायद वो मेरे गाल पर किस करना चाहती थी. लेकिन तभी मैंने अपना मुँह उसकी तरफ घुमाया और हम दोनों के होंठ आपस में चिपक गये. शर्म और उत्तेजना से शालिनी के गाल लाल हो गये. धीरे-2 शालिनी का भी हाथ मेरी जाँघ से होता हुआ मेरी जाँघ के बीच आ गया और शालिनी जीन्स के ऊपर से ही मेरे लंड का आकर चेक करने लगी. शायद खेली खाई होने की वजह से समझ गयी, कि मेरा लौड़ा उसकी ओखली की कुटाई अच्छे से कर सकता है.

शालिनी – वैसे आप हमारे शहर में कहाँ जा रहे हैं?

मैं – वहाँ जाकर कोई अच्छा सा होटल लेकर एक-दो दिन मटरगश्ती करूँगा.

शालिनी – हमारे शहर में 3 स्टार होटल ही हैं. वैसे शालीमार होटल बहुत अच्छा है… अगर आप चाहो तो वहाँ रुक सकते हो.

मैंने शालिनी की तरफ स्माइल देकर कहा – अगर आपको पसंद है, तो वहीं रुक जाएँगे… हमें क्या? मुझे तो कहीं भी अच्छी जगह रुकना है, आप मिलने आओगी ना??

शालिनी – आप बुलाएँगे तो ज़रूर आऊंगी…

ये कहकर शालिनी ने मेरे लंड को अपनी हथेली से मसल दिया और खिल-खिलाकर हँस पड़ी. मैंने अपनी गाड़ी शालीमार होटल के सामने जाकर रोकी. शालिनी मेरी ओर देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी. मुझे पता था ये मेरे साथ अभी के अभी चुदना चाहती है फिर भी मैंने उसे छेड़ते हुए कहा.

मैं – अगर आप चाहें तो मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर दूँ?

शालिनी कामुक अंदाज से देखते हुए बोली – अभी तो आप दावत दे रहे थे आने की और अब टरकाना चाहते हैं… चलिए आपका रूम तो देख लूँ.

मैंने मुस्करा कर गाड़ी होटल के पोर्च की तरफ बढ़ा दी. एक अच्छा सा रूम लेकर हम कमरे में गये, काउंटर पर मैंने शालिनी का परिचय अपने परिचित के रूप में ही दिया, जो बस मिल-मिलाकर कर कुछ देर में चली जाएगी. रूम सर्विस के जाते ही शालिनी मुझसे लिपट गयी.

मैंने शालिनी की कसी हुई गान्ड को मसलते हुए कहा – ओहहहह… शालिनी जी… आप तो इतनी जल्दी शुरू हो गयी, थोड़ा फ्रेश तो होने दीजिए.

शालिनी की चूत रास्ते में ही रस छोड़ने लगी थी शायद, तो मेरे होंठों को चूमते हुए बोली.

शालिनी – मुझे घर भी जाना है… वरना ड्राइवर मुझसे पहले आ गया तो पता नहीं क्या-क्या बातें बना दे.

मैंने हँसते हुए कहा – चलो ठीक है शालिनी… जैसी आपकी मर्ज़ी…

ये कहकर मैंने शालिनी की साड़ी का पल्लू खींच दिया. साड़ी का पल्लू पकड़ते ही शालिनी खिलखिलाती हुई घूमने लगी. चन्द सेकेंड में ही उसकी साड़ी उसके बदन से अपना नाता तोड़कर मेरे हाथों में थी, जिसे मैंने इकट्ठा करके पास पड़े सोफे पर उछाल दिया. शालिनी की गोरी-गोरी बूब्स उसके कसे हुए चौड़े गले के ब्लाउज से बाहर को उबली पड़ रही थी. मैंने शालिनी की कमर में हाथ डाल कर अपने बदन से सटा लिया और अपना मुँह उसकी घाटी के बीच में डाल दिया. शालिनी के पसीने की महक मेरे नथुनों में सामने लगी. जिसका सीधा असर मेरे लंड पर पड़ा और वो मेरी जीन्स के पीछे नहा धोकर पड़ गया.

इस समय शालिनी मात्र ब्लाउज और पेटीकोट में थी. उसके गोल-मटोल नितंब फिटिंग वाले पेटीकोट को फाड़े दे रहे थे. शालिनी के नितंब कसकर मसलते हुए मैंने उसे अपनी ओर खींचा. मेरा लंड जीन्स फाड़कर शालिनी की चूत में सामने की कोशिश करने लगा. फिर मैंने अपना एक हाथ उसके सिर के पीछे ले जाकर उसके होंठ चूसते हुए दूसरे हाथ से उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा. ब्लाउज इतना कसा हुआ था कि ब्लाउज के बटन खुल ही नहीं रहे थे. शालिनी ने अपना ब्लाउज खुद से ही अपने आप उतार दिया. तब तक मैंने उसका पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया, वो सरसराता हुआ उसके कदमों में जा गिरा. आअहह… छोटी सी ब्रा और मात्र दो अंगुल की पट्टीदार पैंटी में शालिनी का भरा हुआ कामुक बदन क्या लग रहा था. गोरी रंगत लिए उसका मक्खन जैसा मादक कर्वी बदन देख कर में अपना कंट्रोल खोने लगा. खड़े-खड़े ही मैंने शालिनी के कंधों पर दबाव डालकर उसे नीचे दबाया. खेली खाई शालिनी मेरा इशारा समझ कर अपने पंजों पर बैठ गयी और मेरी जीन्स के बटन खोल कर उसने उसे फ्रेंची समेत नीचे खिसका दिया. बाहर आते ही मेरा 9” लंबा और उसकी कलाई जितना मोटा लंड किसी कोबरा नाग की तरह फनफनाकर शालिनी के मुँह पर जा लगा. शालिनी अपनी आँखें चौड़ी करके उसे देखने लगी.

शालिनी अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली - हे राम…. ये क्या है???
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UPDATE 1 - TEASER

आईईईईईईईईई……. भाबीईईईईईईई………..मररररर….. गय्ाआ…..रीईईईईईईईईईईईईईईईईईई……उफ़फ्फ़…उफ़फ्फ़….रुकूओ…प्लीज़… क्या हुआ मेरे शेर….को…, मेरे लेडल देवेर को…! पुच….!! मेरा राजा बेटा..!! क्या हुआ..? बताओ मुझे….? मोहिनी भाभी अपने लाड़ले देवर अंकुश के गाल को प्यार से सहलाते हुए बोली.

अंकुश – अरे… उठो.. जल्दी…मेरा फटा जा रहा है…! आईईई….माआ…!

मोहिनी – अरे क्या फटा जा रहा है..…. ?

अंकुश – अरे भाभी ! समझा करो… प्लीज़ उठो मेरे उपर से.. मेरा लंड फट गया… अह्ह्ह्ह…

मोहिनी अपनी एक स्तन को उसके मूह में ठूँसती हुई बोली- कुछ नही फटा, लो इसको चूसो.. सब ठीक हो जाएगा…!

कितना नाटक करता है ये लड़का.. उफ़फ्फ़… सांड हो रहा है, अभी भी कहता है फटा जा रहा, अरे तुम्हारी उमर के लड़के कोरी चूत को भोसड़ा बना देते हैं, और ये लाट साब… उफ़फ्फ़… हां ऐसे ही चूसो… इस्से… खा.. जाओ… शाबाश… ये हुई ना मर्दों वाली बात..आहह….. फिर धीरे से और थोड़ा सा दबाब डाल दिया अपनी 36” की सेक्सी गान्ड का उसके लंड के उपर और आधे लंड को अपनी चूत के अंदर कर लिया…! एक बच्चे की माँ मोहिनी की चूत भी आधे लंड में ही पानी बहाने लगी, क्योंकि उसके लाड़ले देवर का लंड था ही इतना मोटा और तगड़ा. मोहिनी भाभी के दबाब डालते ही अंकुश ने उसकी स्तन को मुँह से बाहर निकाल कर एक बार फिर से चीख उठा…भाभी… आईईई… मान जाओ ना…. दर्द हो रहा है…प्लीज़…! अभी भी दर्द हो रहा है… लो इसे चूसो, और उसने दूसरे स्तन को उसके मुँह में भर दिया… और उसके माथे को चूमते हुए उसके बालों को मसाज देती हुई, आँख बंद करके पूरी गान्ड उसकी जांघों पर रख दी…. एक साथ दोनो की ही चीख निकल गयी, और अब वो लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे.. मोहिनी अब शांति से उसकी जांघों पर अपनी गान्ड को लंड पर रख कर बैठी थी, फिर उसके चेहरे के उपर झुक कर उसके होंठो को चूम लिया और शरारती स्माइल अपने होठों पर लाकर बोली – सच में बड़ा कमाल का लंड हैं मेरे प्यारे देवर का. एक बच्चे की माँ की भी ऐसी की तैसी कर दी इसने तो…एकदम खम्भे जैसा धंसा पड़ा है…. हम्म्म…!

अंकुश – ये आपका ही सब किया धरा है… 5 साल से मालिश कर रही हो आप तो होगा ही ना..!

मोहिनी – हम्म्म … वो तो है.. वैसे अब दर्द तो नही हो रहा न मेरे प्यारे देवर को…!

अंकुश – अभी थोड़ा सा फील होता है.. कभी-कभी, पर ज़्यादा नही है..

मोहिनी – तो फिर शुरू करें अब.. और उसने अपनी गान्ड को धीरे से उपर उठाया, और उसके आठ इंच के लंबे लंड के सुपाड़े तक अपनी चूत के मूह तक ले आई, और फिर धीरे से बैठ गयी…!

दोनो के अंगों में इतनी जोरदार सुर सुराहट हुई कि एक साथ दोनो की सिसकी एक साथ निकल गयी और उनकी आँखें उन्माद में मुंद गई… ईईीीइसस्स्स्स्स्शह……आअहह…..सस्स्सुउउऊहह….. मेरे बूब्स को मस्लो देवर जी… बहुत मज़ा आ रहा है…. हाँ.... ऐसे ही बस करते रहो. आँ… और जोर से ईईई….आहह… अब धीरे-धीरे उसके उठने बैठने की गति बढ़ती जा रही थी…. अंकुश जिसकी आज जीवन की पहली चुदाई थी… वो तो पता नही कौन से लोक में था आज… उसकी प्यारी भाभी ने आज अपना वायदा जो पूरा किया था… कुछ देर में ही मोहिनी की चूत ने पानी बहाते हुए हथियार डाल दिए और वो अपने लाड़ले देवर के उपर पसर गयी. अंकुश को लगा कि पता नही भाभी को क्या हुआ, घबरा कर उसने उसके कंधे पकड़ कर हिलाया, भाभी..भाभी… क्या हुआ आपको… ?

वो मस्ती में कुन्मुनाई, और धीरे से अपनी बोझिल आँखों से उसकी ओर देखा और मुस्कुराकर बोली… मुझे तो कुछ नही हुआ, बस इस कोरे करारे मूसल की मार मेरी मुनिया ज़्यादा देर झेल नही पाई इसलिए थोड़ा सुस्ता रही थी..

अंकुश – लेकिन में क्या करूँ, मेरा लन्ड तो फटा जा रहा है, अब इसका क्या होगा..?

मोहिनी – अरे! तो मैं हूँ ना, ये तो बस शुरुआत थी, इसके उद्घाटन का..असली खेल तो अब शुरू होगा… लेकिन प्यारे, अब तुम्हें मेहनत करनी होगी.. ठीक है? और वो उसके उपर से साइड में लुढ़क गयी और अपनी टाँगें चौड़ी फैला कर लेट गयी.. लो आ जाओ, और बुझालो अपने लन्ड की प्यास मेरी नाजुक चूत चोद कर, लेकिन प्यार से. समझे, तुम्हारा मूसल ज़्यादा कुटाई ना करदे मेरी ओखली की… अंकुश का बुरा हाल हो रहा था, अब उसको जितनी जल्दी हो अपने लंड को शांत करना था, वरना दर्द से फटने का ख़तरा बढ़ने लगा था. उसने भाभी की टाँगों के बीच घुटने मोड़ कर बैठते ही आव ना देखा ताव अनाड़ी की तरह… लिसलीसी चूत के उपर अपना सोता सा लंड अड़ा दिया और लगा धक्का देने…. वो तो अच्छा हुआ कि दोनो हथेलिया भाभी के दोनो साइड होकर पलंग पर टिक गयी और वो चोदु गिरने से बच गया, वरना आज भाभी का मुँह का सूजना तय था उसके सर की चोट से. हुआ यूँ कि, पट्ठे को चुदाई का कोई आइडिया तो था नही, उसने सोचा लन्ड चूत के उपर तो रख ही दिया है, चला ही जाएगा अंदर जैसे कि चूत मूह खोले उसके लन्ड का ही इंतेज़ार कर रही हो. जैसे ही आवेश में आकर धक्का लगाया, चिकनी हो रही चूत, सर्ररर… से फिसलता हुआ लन्ड भाभी की नाभि के छेद में जा लगा…

ईीीइसस्स्शह….. क्या करते हो मेरे अनाड़ी देवर…? हटो ज़रा….!! वो थोड़ा उपर हुआ तो भाभी ने अपनी पतली उंगलियों से अपनी चूत के होठों को खोला और बोली – लो अब कुछ दिख रहा है…?
अंकुश – आहह… भाभी अंदर से क्या मस्त लाल-लाल दिख रही आपकी चूत… आह जी कर रहा है, इसे खा जाउ…!

मोहिनी – अह्ह्ह्ह… तो रोका किसने है… खा जाओ ना..!

अंकुश ने झट से उसकी लाल अंदरूनी दीवारों को अपनी खुरदूरी जीभ से खूब ज़ोर लगा कर रगड़ दिया…. आअहह…….हाइईईईईई….मम्मी…. उफफफ्फ़…ये कर डाला…. अब चूसो ईसीई…खा जाओ…मेरे प्यरीए…हाँ.. ऐसी.. ही…चूसो…अपनी जीभ घुसा दो…और अंदर…..सस्सिईईईईई…..आईई…अंम्म्म………मर गई. अंकुश ने मज़े-मज़े में अपनी प्यारी भाभी की चूत के पटों को अपने मूह में भर लिया और उसको ज़ोर से दाँत गढ़ा दिए… नहीं ई…इतनी ज़ोर से मत काटो…

अब मोहिनी भाभी से कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, अंकुश तो बावलों की तरह लगा था, उसको कुछ ठीक से सूझ ही नही रहा था, जहाँ नज़र जाती, भाभी उसे जन्नत ही लगने लगती और उसी में डूबने लग जाता.. मोहुनी ने उसके बाजू पकड़ कर अपने उपर खींच लिया और उसके होठों को चूम कर बोली – आहह… अब देर मत करो… लो डालो इसमें और अपनी चूत की फांकों को खोल दिया… अब अंकुश को समझ आया कि असल में चूत का छेद कौन सा है, तो उसने अपने लंड का सुपाडा उसके मूह पर रखा, उसका लंड इतना गरम हो चुका था मानो, किसी भट्टी से निकाल के लाया हो. अब आराम से धीरे-धीरे इसको अंदर डालो… देवर जी…. हाआँ … ऐसे ही… आराम से… हां.. डालते जाओ… हां बस… रूको ज़रा…आअहह… कितना गया… ईसस्शह… फिर उसने खुद ही अपनी उंगलियों से टटोल कर चेक किया. अभी तीन-चौथाई लंड ही अंदर गया था, और मोहिनी की चुदी-चुदाई चूत ऐसी ठसाठस भर गयी थी, मानो अब उसकी इच्छा ही ना हो और लेने की.

मोहिनी – हां अब धीरे- धीरे पहले इतने से ही अंदर-बाहर करो इसे..

अंकुश ने उतना ही लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, कुछ देर में ही भाभी को मज़ा आने लगा और उसने नीचे से अपनी कमर उचकाना शुरू कर दी… अंकुश और भाभी चुदाई में ऐसे खो गये कि उन्हें पता ही नही चला कि कब पूरा लंड उसकी चूत में चला गया, अब उसको उसका सुपाडा अपनी बच्चेदानी के मुंहाने पर फील होने लगा था. अंकुश को अब अपने उपर कोई अंकुश नही रहा, और अपनी हथेलियों को पलग पर जमा कर पूरी ताक़त से तेज-तेज धक्के लगाने लगा, मज़े ने उसे अब सब सिखा दिया. आज की चुदाई के आगे मोहिनी भाभी को अपनी जिंदगी की अब तक की करी सारी चुदाई फीकी लगने लगी थी. वो एक बार और झड चुकी थी, लेकिन अपने प्यारे देवार को उसने नहीं रोका. चाहे जो हो जाए आज वो उसको खुशी देकर ही रहेगी. उसने थोड़ा उसके सीने पर हाथ रखके रुकने का इशारा किया, और अपने उपर से हटा कर वो उल्टी हो गयी और अपनी सेक्सी गान्ड को अंकुश के लन्ड के आगे करके डॉगी पोजीशन में पेट के बल लेट गई. अंकुश को अब और कुछ सोचने और समझने की ज़रूरत नही थी, उसे तो बस अब सिर्फ़ चूत का छेद ही दिखाई दे रहा था. झट से पीछे आया, और सट से एक ही झटके में पूरा लंड पेल दिया भाभी की रसीली चूत में. भाभी के मूह से फिरसे एक मादक कराह निकली, लेकिन उसे रोका नही.. इस पोज़ में अंकुश को और ज़्यादा मज़ा आ रहा था, उसके धक्कों की स्पीड इतनी तेज थी, कि अगर कोई गिनना चाहे तो डेफनेट्ली नाकाम हो जाएगा.. आख़िरकार उसको अपनी मंज़िल नज़र आने ही लगी, उसको लगा जैसे कोई बहुत बड़ा झंझावात सा उसके पैरों से उठ रहा है, जो झटके मारता हुआ, लंड के रास्ते भाभी की चूत में देदनादन पिचकारियाँ छोड़ने लगा.

बाप रे ! इतना माल, लंड अंदर होते हुए भी चूत से बाहर घी जैसा उसका माल रिसने लगा और भाभी की जांघों से पिंडलियों तक बहने लगा. उसकी पिचकारी की धार से भाभी भी मस्त होकर फिर एक बार झड़ने लगी और इतनी झड़ी कि उसकी पूरी टंकी खाली हो गयी और वो औंधे मूह बिस्तर पर पसर गयी. अंकुश भी भाभी की चौड़ी पीठ पर ही लद गया, और हाँफने लगा. कुछ देर ऐसे ही बेसुधि में दोनो पड़े रहे, फिर वो भाभी की बगल को पलट गया, तब उसका लंड पच… की आवाज़ के साथ चूत से बाहर आया. अपने आधे खड़े लंड को भाभी की कमर से सटाये, उसकी पीठ पर अपना एक हाथ और जांघों पर अपनी एक टाँग चढ़ा कर वो भाभी की बगल में पड़ा-पड़ा सो गया….!!
Good teaser. I hope the story will be equally interesting.
 
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Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Shandar story 👌👌
 
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Premkumar65

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UPDATE 3

भैया अपना दर्द भूल गये और उन्होंने बड़े प्यार से उनके कंधे पकड़ कर उठाया और उनके माथे पर एक किस करते हुए बोले – कोई बात नहीं मोहिनी ! गलती मेरी ही थी, मुझे तुम्हें आवाज़ देनी चाहिए थी. सब चले गये थे तो मैंने सोचा कि आज तो कुछ बात हो जाए तुमसे.

भाभी – छोटू भैया कहाँ हैं..?

भैया – वो रमा के साथ पढ़ रहा है… शायद हमारी बहन अब समझदार हो गयी है, उसने ही उसे बुला लिया था. अब ये काम बंद करो, चल कर बातें करते हैं. शादी को दो साल से ज्यादा हो गये अभी तक हम मिले भी नहीं हैं, समय नष्ट ना करो प्रिय. चलो अब.

भाभी – आप चलिए जी ! मैं बस अभी ये बर्तन खतम करके आती हूँ.

भैया ने जाने से पहले उनके सुंदर से मुखड़े को जिस पर पानी की कुछ बूँदें पद छिटक कर आ गयी थी, अपने हाथों में लिया और बड़े प्यार से एक छोटा सा किस उनके होंठों पर कर दिया. आह्ह्ह्ह… जीवन का पहला किस कैसा होता है? मोहिनी को आज पता चला था, वो सिहर गयी और अपने आप ही उसकी आँखें बंद हो गयी. भैया वहाँ से चले गये, लेकिन वो अभी भी वैसे ही खड़ी रही, जब कुछ देर कोई हलचल नहीं हुई तब उसने अपनी सीप जैसी आँखें खोली, पति को सामने ना पाकर वो खुद से ही शरमा गयी, उसके चेहरे पर शर्म की लाली साफ दिखाई दे रही थी. काम खतम करके एक बार मोहिनी ने रमा के कमरे में झाँक कर देखा, दोनों पढ़ने में व्यस्त थे, खास कर में, दीदी ने तिरछी नज़र से भाभी को देखा और फिर पढ़ाई में लग गयी. फ्रेश होकर भाभी ने आज थोड़ा श्रृंगार किया, अपने को थोड़ा सजाया-सँवारा, आज आपने प्रियतम की होने जो जा रही थी. साथ ही ईश्वर से मन ही मन मन्नत माँगी, कि आज उनके मिलन में कोई बाधा ना आए.

भैया अपने कमरे में अपनी प्रियतमा के इंतजार में इधर से उधर टहल रहे थे, एक बेचैनी सी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी. कोई आधे-पोने घंटे बाद मोहिनी कमरे में आई, आहट पा कर भैया ने जैसे ही अपनी पत्नी की तरफ देखा, वो जड़वत वहीं खड़े रह गये. अपनी पत्नी की सुंदरता को आज वो इतने ध्यान से देख पा रहे थे. भैया अपनी पालक झपकाना ही भूल गये!! पति को यूँ अपनी ओर निहारते पाकर, मोहिनी तो जैसे शर्म से गढ़ी ही जा रही थी, वो वहीं जड़ होकर कमरे के फर्श को निहारने लगी. भैया हल्के कदमों से चलते हुए मोहिनी के पास पहुँचे और अपनी हथेलियों में उसके सुन्दर से मुखड़े को लेकर उपर किया और उसके माथे को चूम कर बोले- थोड़ा मेरी तरफ देखो मोहिनी… प्लीज़..

मोहिनी ने अपनी पलकें उपर की और अपने पति की ओर देखा, लेकिन वो ज़्यादा देर तक उनसे नज़रें मिला नहीं सकी, और फिर झुका ली. शर्म और रोमांच से उसके होंठ थरथरा रहे थे. 5’11” हाइट वाले भैया चौड़ा सीना, नियम से कसरत करने के कारण उनका बदन एकदम हृष्ट-पुष्ट था, शालीनता की मिसाल ऐसी कि शायद ही उन्होंने अब तक किसी लड़की या औरत की तरफ आँख उठा कर भी देखा हो. लोग उनकी शराफत के चर्चे उनके पिता से भी किया करते थे, जिसे सुनकर उनका सीना फक्र से चौड़ा हो जाता था. मोहिनी की सुंदरता में लीन वो अपनी शराफत को भूलते जा रहे थे, और उनका हक़ भी था ये.. उन्होंने मोहिनी को अपने कलेजे से चिपका लिया. मोहिनी उनकी ठोडी तक ही आती थी, पहले बार अपने पति के सीने से लग कर उसे ऐसा लगा मानो दुनिया के सारे दुख-दर्द, भय सब दूर भाग गये हों. पति की मजबूत बाँहों में उसे स्वर्ग की अनुभूति होने लगी और स्वतः ही उसकी पतली-पतली कोमल बाहें उनकी पीठ पर कस गयी, वो अमरबेल की तरह उनसे लिपट गयी. कितनी ही देर वो दोनों एक-दूसरे के आलिंगन में क़ैद वहीं यूँ ही खड़े रहे, मोहिनी का तो मन ही नहीं हो रहा था उनको छोड़ने का. मोहिनी के रूई जैसे मुलायम अनछुए उरोज जब राम को अपने सीने के निचले हिस्से पर फील हुए, तो उनके शरीर में एक अनजानी सी उत्तेजना बढ़ने लगी, और उनके पाजामे में क़ैद उनका सोया हुआ शेर सर उठाने लगा, जिसका आभास मोहिनी ने अपनी जांघों के बीच किया, वो उनसे और ज़ोर से चिपक गयी. राम भैया ने मोहिनी भाभी के कंधे पकड़ कर अपने से अलग किया और उसके हल्की लाली लगे पतले-पतले होंठों को चूम लिया और बोले – मैं कितना नसीब वाला हूँ, जो मुझे तुम जैसी सुन्देर पत्नी मिली. मेरे पास शब्द नहीं है मोहिनी! जो तुम्हारी सुंदरता का बखान कर सकें, सच में तुम बहुत सुन्दर हो!!! मोहिनी भाभी चाह कर भी कुछ बोल न सकी, उसके होंठ बस थरथरा कर रह गये और वो फिर से राम भैया के सीने से लग गयी. राम भैया का हाथ मोहिनी भाभी पीठ पर चल रहा था. फिर अनायास ही उसने जब उसके सुडौल गोल-मटोल छोटे-छोटे नितंबों को सहलाना शुरू कर दिया, मोहिनी बस अपनी आँखें बंद किए, आनंद के उडनखटोले में उड़ी चली जा रही थी, फिर भैया के हाथों ने जैसे ही उसके नितंबों को मसला.

अहह… ईीीइसस्स्स्शह…

ना चाहते हुए उसके मुंह से सिसकी निकल पड़ी. क्या हुआ जान? मैंने कुछ ग़लत कर दिया??

उउन्न्ह…

बस इतना ही निकला भाभी के मुंह से और वो ऐसे ही चिपकी खड़ी रही. भैया ने उसे अब अपनी गोद में उठा लिया और लाकर पलंग पर बड़े प्यार से लिटा दिया. भाभी शर्म से दोहरी हुई जा रही थी, और करवट लेकर अपने घुटनों को पेट से लगा कर चेहरे को अपने सीने में छिपाने की कोशिश करने लगी. भैया अपना कुर्ता उतार कर बनियान और पाजामे में उसके बगल में बैठ गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर प्यार से सहलाते हुए उसको सीधा करने की कोशिश की. भाभी किसी कठपुतली की तरह उसके इशारों पर चल रही थी. मोहिनी भाभी के सीधे लेटते ही भैया भाभी के चेहरे पर झुकता चला गया और उसके होठों पर किस करते हुए उन्हें चूसने लगा. शुरू-शुरू में मोहिनी को कुछ अजीब सा फील हुआ, लेकिन कुछ ही देर में उसे इसमें मज़ा आने लगा और वो भी अपने पति का साथ देने लगी. होंठ चूसते हुए राम के हाथों ने एक बार उसके वक्षों को सहलाया, और अब उसकी उंगलियाँ उसके ब्लाउज के बटनों से खेल रही थी. मोहिनी ने सवालिया नज़रों से अपने पति की तरफ देखा, तो उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान देख कर शर्म से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लिया.

राम ने एक बार फिर उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमाकर उसके पलकों को चूम लिया और गालों को सहलाते हुए वो उसकी आँखों में झाँक कर बोला- जान इस घर में तुम खुश तो हो ना? उसने अपने पति की बात का जवाब सिर्फ हूंम्म… करके दिया और अपनी पलकें झुका ली. राम अब उसके ब्लाउज को खोल चुका था, उसके दोनों पटों को इधर-उधर करके उसने एक बार उसके सपाट चिकने पेट पर हाथ से सहलाया और उसी हाथ को उपर लाते हुए उसके उरोजो को ब्रा के उपर से ही सहलाने लगा. मोहिनी अपनी आँखें मूंदे हुए पड़ी मस्ती की फ़ुआरों का मज़ा ले रही थी, अचानक राम के बड़े-बड़े हाथों ने उसकी 32” की चूचियों को अपनी मुट्ठी में कस लिया जो पूरे के पूरे उसके हाथ के नाप की ही थी और ज़ोर से उन्हें मसल दिया. अहह……सीईईईई…. आरामम्म.. से प्राण नाथ…. उफफफ्फ़… नहियिइ… राम उसके बगल में बैठा था, फिर उसने मोहिनी को कंधों से पकड़ कर बिठा लिया और उसके ब्लाउज और ब्रा को उसके बदन से अलग कर दिया. मक्खन जैसे मुलायम गोल-गोल स्तन देख कर वो बौरा गया और उन पर किसी भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ा. उसके छोटे-छोटे स्तन को मुंह में भरकर किसी वॅक्यूम पंप की तरह सक करने लगा. मोहिनी तो मानो आसमानों में उड़ रही थी, उसे होश तब आया जब राम ने उसके एक अंगूर के दाने जैसे निपल को अपनी उंगलियों से पकड़ कर उमेठ दिया… हइई…….माआआ…..मररररर…गाइिईई…रीईईई….. और उसने उसके मुंह को अपनी छाती पर दबा दिया.



राम ने उसकी पतली कमर को दोनो हाथों के बीच लेकर उसे उठाया और अपनी गोद में बिठा कर उसकी साड़ी और पेटिकोट निकालने लगा. मोहिनी ने लज्जावश अपने चेहरे को अपने हाथों से छिपा लिया.

राम- क्या हुआ जानन्न… चेहरा क्यों छुपा रही हो… मैं तो अब तुम्हारा ही हूँ ना..

मोहिनी – हूंम्म… फिर भी लाज आती है..

अब वो मात्र पेंटी में थी और अपनी इस अवस्था को देखार शर्म से दोहरी हुई जा रही थी. औरत की यही अदाएँ जो उसका स्वभाव है, आदमी के धैर्य के परखच्चे उड़ा देती हैं. राम ने भी अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और अब वो भी मात्र एक चड्ढी में था. उसने एक जेंटल टच उसकी गीली पेंटी के उपर से ही उसकी पूसी को दिया. मोहिनी का पूरा शरीर थर-थरा गया. उसके शरीर के रोँये खड़े हो गये. तब तो और ही गजब हो गया जब राम ने उसी गीली पेंटी के उपर से ही उसकी चूत को चूम लिया और फिर जीभ फैला कर चाट लिया.

हइई…. दैयाआआ…… ये क्या किया.. अपने…. छी छी.. ! वहाँ भी कोई मूह लगाता है भला आ….. आआ…. नहियीई… इसस्स्स्शह....मत करो ना प्लीज! एक तरफ तो वो उसे मना कर रही थी, दूसरी तरफ उसका मन कर रहा था कि उसका पति उसकी चूत को काट खाए. लेकिन नारी सुलभ ये सब वो कह ना सकी. अब राम का लंड भी उसके चड्ढी को फाड़ डालने को उतावला हो रहा था, उसने झट से मोहिनी की पेंटी उतार फेंकी, उसके उतावलेपन की वजह से वो फट ही गयी. च्चिईिइ…

ये क्या जान, ये क्या जंगल बढ़ा रखा है तुमने, इसको साफ नहीं करती कभी? राम उसकी बढ़ी हुई झांटो को देख कर बोला, तो वो अपना सर उठा कर बोली- हमें पता ही नहीं कि इन्हें कैसे साफ किया जाता है?

राम – ठीक है अगली बार मे तुम्हारे लिए हेयर रिमूवर ले आउन्गा.. और फिर से अपने काम में लग गया. असल में उसका मन उसकी कोरी चूत को चूसने का था, लेकिन बालों की वजह से मन नही किया, तो वो समय बर्बाद ना करते हुए, उसकी टाँगों के बीच आकर बैठ गया, उसके घुटनों को मोड़ कर एम शेप में किया. उसके बाद वो उसके उपर की ओर आया और मोहिनी के होठों को चूम कर अपने 6” लंबे लंड को सहलाया फिर उसकी चूत के होंठ जो अभी तक बंद थे, धीरे से खोला. उसकी कसी हुई चूत फैलने के बाद भी उसका लाल छेद थोड़ा सा ही खुल पाया. उसने मोहिनी की आँखों में देख कर कहा – जान फर्स्ट टाइम है, थोड़ा सहन करना पड़ेगा, और अपना सुपाडा, उस छोटे से मूह पर टिका दिया….

उसकी कसी हुई चूत फैलाने के बाद भी उसका लाल छेद थोड़ा सा ही खुल पाया.

मोहिनी की पूसी कमरस से एक दम गीली हो रही थी, सो थोड़े से दबाब से ही लंड का टोपा तो फिट हो गया, लेकिन अंदर नहीं गया. उसने थोड़ा और पुश किया तो उसका 1” टोपा अंदर समा गया, लेकिन मोहिनी की कराह निकल गयी. राम का लंड बहुत ज़्यादा मोटा तो नहीं था, लेकिन मोहिनी की कोरी चूत, जिसने कभी उंगली भी नही देखी थी, अपना मूह खोल पाने में असमर्थ दिखाई दे रही थी. राम ने अपने को अड्जस्ट किया और अपनी भारी जांघों का दबाब उसकी मक्खन जैसी जांघों के उपर बनाया और लंबी साँस लेकर एक जोरदार डक्का लगा ही दिया. आईईईईईईई ईईईईईईईईईईईईईईईई…… .माआआआआआआआ…… मररर्र्र्र्र्र्र्ररर….. गाइिईईई ईईईई ईईई… . हइईईई…निकालूऊऊऊ…. प्लीज … वो पलंग से उठने को हुई, पर राम का चौड़ा सीना सामने आ गया. आधा लंड अंदर किए राम वहीं रुक गया और अपनी प्यारी नाज़ुक कली जैसी पत्नी के सर पर हाथ फिरा कर सहलाने लगा, फिर उसके होठों को चूमते हुए बोला- बस मेरी जान अब जो होना था सो हो गया. थोड़ा सा बस और.. फिर मज़े ही मज़े इतना कह कर वो फिर से उसके होंठ चूसने लगा और साथ-साथ उसकी चुचियों को सहलाता जा रहा था. मोहिनी कुछ शांत हुई तो उसने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला और सुपाडे तक लाकर धीरे से फिर उतना ही अंदर किया. 5-6 बार ऐसे ही धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने से मोहिनी की चूत फिर से खुश दिखने लगी और अपनी लार से उसके लंड को चिकनाने लगी. जब उसको आधे लंड से मज़ा आने लगा तो वो भी नीचे से अपनी कमर मटकाने लग गयी. सही मौका देख, राम ने एक फाइनल स्ट्रोक लगा दिया और पूरा 6” लंड उसकी सील पैक चूत में फिट कर दिया. मोहिनी की फिर एक बार जोरदार चीख निकल गयी, लेकिन अब राम को रुकना मुश्किल हो रहा था, तो वो धीरे-धीरे आराम से धक्के लगाता रहा. मोहिनी की चूत अब सेट हो चुकी थी, अब वो भी धीरे-धीरे अपनी लय में आती जा रही थी, और अपने पति के धक्कों का जवाब नीचे से देने लगी. कहते हैं हर अंधेरी रात के बाद एक रुपहला सबेरा ज़रूर आता है, मोहिनी भी कुछ पल पहले की पीड़ा भूल कर दुगने जोश से चुदने लगी. आखिरकार दोनों पति पत्नी एक साथ अपनी मंज़िल पर पहुँच ही गये, और दोनों ही एक साथ स्खलित होकर लंबी साँस लेते हुए एक-दूसरे से चिपक गये.

कुछ देर बाद जब दोनो को थोड़ा राहत हुई तो अपने सुख-दुख, घर परिवार, आने वाले भविष्य की बातें करने लगे, साथ साथ अपने हाथों को हरकत भी देते जा रहे थे. मोहिनी की अब झिझक कम हो गयी थी सो वो भी अपने हाथों को अपने पति के अंगों पर फिरा रही थी, उनके साथ खेल रही थी. कुछ ही देर में एक बार फिर तूफान उठा और वो दोनों फिर से एक दूसरे में समाते चले गये. पहली रात का भरपूर सुख उठाते हुए उन्हें सुबह के 4 बज गये, फिर एक ऐसी नींद में डूब गये, जो सीधी सुबह 7 बजे दरवाजा खट खटाने की आवाज़ सुन कर ही खुली.

दूसरे दिन सनडे था, स्कूल बंद था, तो मैं थोड़ा देर तक सो लेता था. दीदी जब नहा धो कर फ्रेश हो गयी तब उन्होंने मुझे जगाया. रोज़ तो भाभी सोते हुए झुक कर मेरे माथे पर किस करती थी, और बड़े प्यार से आवाज़ देकर मुझे उठाती थी, मे बिना आँखें खोले उनके गले लग जाता था. आज ऐसा नही हुआ, दीदी ने आते ही सीधा मुझे ज़ोर से हिलाया और ज़ोर से आवाज़ देने लगी, छोटू…छोटू… उठ जा 8 बज गये, कब तक सोएगा?

मैंने सोचा भाभी ही होंगी, सो दोनों हाथ उनके गले लगने के लिए उपर किए. भाभी होती तो झुक कर उठती, दीदी पलंग के साइड में बैठ कर हिला रही थी, आँखें बंद किए ही मैंने जैसे ही अपने दोनों हाथ उपर किए तो वो उनके बूब्स से टकरा गये. मुझे बंद आँखों से कोई अंदाज़ा नहीं लगा, सोचा भाभी का गला और थोड़ा उपर को है, तो ऐसे ही हाथों को उनके बदन से रगड़ते हुए उपर ले जाने लगा. उनके बूब मेरे हाथों से एक तरह से मसल गये. हाथ लगते ही पहले तो दीदी ने सोचा गलती से लग गये होंगे.. और उन्हें ज़्यादा कुछ फील नहीं हुआ, लेकिन जब मेरे हाथों से उनके रूई जैसे मुलायम बूब्स मसल गये तो वो थोड़ा सॉक्ड हो गयी. उसके कुंवारे मन की भावनाओं को करंट सा लगा, और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर जोर से झटक दिया. मेरा हाथ चारपाई की पाटी से जा टकराया, खटक से मेरी आँखें खुल गयी और मैं उठकर अपना हाथ झटकने लगा. मेरे हाथ में दर्द होने लगा और मैं ज़ोर से दीदी के उपर चिल्लाया.

क्या करती हो, मेरा हाथ तोड़ दिया… माआ…. आह्ह्ह्ह…

दीदी गुस्से से चिल्लाती हुई बोली – ये क्या कर रहा था तू? हां..!

मैं और जोर से चिल्लाया – आप यहाँ क्या कर रही थी?

आवाज़ सुन कर भाभी दौड़ी हुई आई और बोली – अरे ! आप दोनों क्यों गुस्सा हो रहे हो..? हुआ क्या है..?

मैं – देखो ना भाभी, दीदी ने मेरा हाथ तोड़ दिया, कितना दर्द हो रहा है.. और उल्टा मुझ पर ही चिल्ला रही है. भाभी ने दीदी की तरफ देखा. तो वो नज़र नीची करके बिना कुछ बोले वहाँ से चली गयी. भाभी ने मेरे पास बैठ कर मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर सहलाया और फिर प्यार से मेरे गाल पर हाथ रख कर बोली – कोई बात नहीं मेरे प्यारे लल्ला चलो अब उठ जाओ, मे आयोडेक्स लगा दूँगी ठीक हो जाएगा. मैं उठकर फ्रेश होने चला गया, दूसरी तरफ भाभी ने दीदी से उस घटना के बारे में पुछा तो उन्होंने सकुचाते हुए सब बता दिया.

भाभी थोड़ी देर मन ही मन मुस्कराईं, फिर बोली – ये उस बेचारे ने जान बुझ कर तो नहीं किया होगा, उसको लगा होगा कि रोज़ की तरह में उसे उठाती हूँ, तो वो मेरे गले लग जाते हैं, बस यही सोच कर गले लगने जा रहे होंगे और गलती से हाथ टच हो गया होगा, इतना माइंड मत किया करो. ठीक है?

रमा– लेकिन भाभी आप भी उसे ज़्यादा सर मत चढ़ाओ, अब वो भी बड़ा हो रहा है.

मोहिनी – मेरे लिए तो तुम दोनों बच्चे ही हो, तुम दोनों को संभालने की मेरी ज़िम्मेदारी है.. तुम छोटू के बारे में चिंता ना करो और मुझपे भरोसा रखो.
Sexy update.
 
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