super hot bhai...Ankush ko to har jagah choot aur gaand naseeb hai... 
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Bahut hi jabardast update,kya turn mara hai story me, waiting for updateUPDATE 63
श्वेता अपनी साँसें नियंत्रित करते हुए बोली – बड़ा तगड़ा लौड़ा है इसका हेमा… मेरा तो काम हो गया, अब तू आजा…
श्वेता साइड में अपनी टाँगें फैला कर बैठ गयी और अपनी चूत से बह रहे रस को अपनी उंगलियों पर लेकर देखने लगी और फिर अपनी सनी हुई उंगलियाँ अपने मुँह में डालकर चूसने लगी.
हेमा मेरे मुँह से उठकर मेरे लंड पर बैठने लगी. जोश-जोश में वो एक साथ वजन रख कर बैठी, लेकिन जैसे ही उसे ये एहसास हुआ कि मेरे लंड को एक साथ अंदर लेना इतना आसान नहीं है तो आधे में ही उसकी आँखें बड़ी हो गयी और वो वहीं रुक कर लंबी-लंबी साँस भरते हुए बोली.
हेमा - सही कह रही थी तू श्वेता… ये तो साला कुछ ज़्यादा ही तगड़ा है यार… मेरी चूत फाड़ दी साले ने..
श्वेता हेमा के क्लिट को सहलाने लगी. हेमा ने फिर कोशिश की और पूरा लंड अंदर ले गयी. मैं सोचने लगा, पता नहीं ये श्वेता और हेमा कितनी देर तक मेरे ऊपर चढ़ेंगी. हर बार मैं भी अगर इनके साथ झाड़ता रहा तो मेरी तो टंकी खाली हो जाएगी, तो मैंने अपने ऊपर कंट्रोल बनाए रखने की कोशिश शुरू कर दी. लंड तो 4 घंटे तक बैठने वाला था ही नहीं. कुछ देर मेरे लंड पर कूदने के बाद हेमा भी लंबी हो गयी. उन दोनों को झड़ने के बाद भी मैंने अपना पानी नहीं निकलने दिया, तो वो साली चिढ़ गयीं, और मेरे लंड को फिर से बारी-बारी चूसने लगी.
1 घंटे के इस खेल में अब मुझे कंट्रोल रखना भारी होने लगा और मेरी भी कमर चलने लगी. ये देख कर वो दोनों मेरे लंड को हाथों में लेकर मुठियाने लगी. कुछ देर में ही मैंने एक लंबी हुंकार भरते हुए अपनी पिचकारी श्वेता की चुचियों के ऊपर छोड़ दी. बीच से ही हेमा ने लपक कर उसे अपने मुँह में ले लिया और बची हुई मलाई वो गटक गयी. हेमा ने मेरे लंड को चाट कर चमका दिया, फिर वो दोनों एक दूसरे के होंठों को चुस्ती रही. श्वेता की चुचियों से मलाई को चाटा और बाथरूम में जाकर नहाने लगी.
मैंने सोचा चलो अब ये नहा धोकर चली जाएँगी. इनकी खुजली जल्दी शांत हो गयी. लेकिन मेरा ये सोचना ग़लत साबित हुआ. वो कुछ देर बाद बाहर से आकर फिर मेरे ऊपर टूट पड़ी. इस तरह वो दोनों बहुत देर तक चुदाई करवाती रही. 4-4, 5-5 बार झड़ने के बाद वो संतुष्ट हुई. इतने में मेरा भी 3 बार पानी निकलवा ही दिया था दोनों ने. उसके बाद उन्होंने अपने कपड़े पहने, फिर श्वेता ने किसी को फोन किया और वो दोनों वहाँ से निकल गयी.
उन्हें गये हुए अभी 15 मिनिट ही हुए होंगे कि तभी एक साथ 4-5 औरतें कमरे में आई और देखते ही देखते वो सभी नंगी हो गयी. पर ये अच्छा हुआ, कि उन्होंने मेरे ऊपर बैठ कर लेटे-लेटे ही मुझे कुछ अंगूर और दूसरी चीज़ खिलाई और साथ-साथ मेरे बदन से खेलती रही. उसके बाद वो सब की सब मेरे ऊपर टूट पड़ी. किसी ने मेरे लंड को पकड़ा, कोई मेरी गोलियाँ ऐंठने लगी, तो किसी ने मेरे निप्पल के साथ खिलवाड़ करनी शुरू कर दी और एक-एक करके वो मेरे लंड के ऊपर बैठ-बैठ कर बारी-बारी से अपनी चूत का पानी निकलवाती रही. जबतक अंत में ड्रग का असर खतम नहीं हो गया और झड़-झड़ कर मेरा लंड, लंड से लुल्ली नहीं हो गया, तब तक उन्होंने मेरा पीछा नहीं छोड़ा. पर एक बात मैंने नोटिस की. श्वेता और हेमा के अलावा इन सभी ने कंडोम चढ़ाकर चुदाई करवाई थी.
मैं एकदम पस्त हो गया था. अब मेरे शरीर में सेक्स का एक कतरा भी नहीं बचा था. जब वो सब चली गयी, तो थकान के कारण मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयी. मैं एक तरह से बेहोशी की अवस्था में जा चुका था. पूरे 18-20 घंटे तक मैं सोता ही रहा.
दूसरे दिन किसी के झकझोरने पर ही मेरी आँख खुली. देखा तो सामने श्वेता ही थी, आज उसके साथ हेमा के अलावा एक और औरत थी. मेरे बेड की हालत बदतर हो रही थी, मैं तो पूरा नंगा ही था, पूरे बदन पर औरतों के थूक, लार, और चूत रस लगा हुआ था, जो अब सूख चुका था. बेडशीट, मेरे माल और उन सभी औरतों के कामरस से जगह-जगह सनी हुई थी, जिनके धब्बे सूख गये थे. कमरे के फर्श पर जहाँ तहाँ कंडोम बिखरे पड़े थे, जिनमें किसी-किसी में मेरा माल अभी भी भरा हुआ था.
कमरे की हालत देख कर हेमा ने बुरा सा मुँह बनाया, फिर श्वेता ने मेरे दोनों हाथ और एक पैर खोल दिया और चेतावनी देते हुए बोली – अंकुश अगर तुमने कोई चालाकी करने की कोशिश की तो बाहर भानु और उसके आदमी तैयार बैठे हैं. वो तभी तक चुप हैं, जब तक तुम इस कमरे में बंद हो. अगर ग़लती से भी बाहर दिखाई दे गये, तो तुम्हें शूट करने की उन्हें खुली छूट है. मुझे पलंग से नीचे खड़ा करके उसके साथ आई तीसरी औरत ने बेड शीट चेंज की. जिसपर पता नहीं कब मेरा पेशाब भी निकल गया था. एक गीला तौलिया लेकर मेरे पूरे बदन को अच्छे से साफ करवाया. फिर एक डिब्बे में पानी के साथ लिक्विड वॉश डालकर मेरे लंड और उसके आस-पास को अच्छे से धोया.
मैंने अपने खुश्क होंठों पर जीभ फिरा कर श्वेता से पूछा – अब तो बता दो तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही हो??
श्वेता मेरे मुँह को अपने हाथ से दबाते हुए बोली – जल्दी क्या है अंकुश डार्लिंग?? बता दूँगी.. थोड़ा धीरज रखना सीखो, मैंने जब इतने दिन धीरज रखा तो तुम कुछ घंटे भी नहीं रख सकते??
उसके बाद हेमा ने मुझे एक ग्लास में जूस डालकर दिया, जिसमें पहले से ही ड्रग मिलाया हुआ था. साथ में कुछ सैंडविच दिए जिसे मैंने जूस के साथ गटका. जूस पीकर खाली ग्लास उसे थमा दिया, उसके बाद मेरे शरीर में फिर से कुछ जान पड़ी. कुछ देर के लिए श्वेता और हेमा बाहर चली गयी, तो मैंने उस तीसरी औरत जो लगभग 35-36 साल की हल्की सी साँवली सी थी उस से पूछा - तुम कौन हो?
सरोज – मेरा नाम सरोज है. मैं श्वेता मैडम की पर्सनल एस्सिटेंट हूँ.
फिर सरोज मेरे लटके हुए लंड को सहला कर बोली – मैडम तो कह रही थी, कि बड़ा दमदार लंड है तुम्हारा… लेकिन ये तो किसी मरे चूहे जैसा लग रहा है…
मैंने सरोज की बात पर कोई गौर नहीं किया और अपना अगला सवाल दाग दिया – तुम्हारी मैडम ने मुझे यहाँ इस तरह से क़ैद क्यों कर रखा है?
सरोज – मुझे ज़्यादा तो कुछ नहीं पता लेकिन शायद तुमने उन्हें कोई बहुत गहरी चोट पहुँचाई है, जिसका वो बदला अब तुमसे ले रही हैं.
मैं सोचने लगा, कि मैंने उसे क्या चोट पहुँचाई है? फिर जैसे ही मेरे दिमाग़ में उसके भाई वाला सीन घूमा, मेरी खोपड़ी उलट गयी, एक सेकेंड में ही समझ गया. लेकिन उसे ये बात पता कैसे लगी, कि मैंने उसका इस्तेमाल करके वो सब किया था? मैं अपनी सोचों में गुम था. सरोज अपने काम में लगी थी, धीरे-धीरे उसे इस काम में सफलता मिलने लगी थी,
मेरा लंड सिर उठाने लगा था, जिसे देखकर सरोज के चेहरे पर एक कामुक सी मुस्कान आ गयी और उसने उसे अपने मुँह में ले लिया. सरोज के सिर को अपने लंड पर दबाकर मैं सोचने लगा, कि कहीं ये बात भैया के ऑफिस से लीक तो नहीं हुई, कि उसके भाई ने मुखबरी करके असलम के माल को पकड़वाया था और फिर उसने आपस में लिंक जोड़ दिए हों. फिर मैंने खुद ही अपने विचारों को खारिज कर दिया. श्वेता जैसी औरत इतना सब नहीं सोच सकती. फिर आख़िर उसे पता कैसे लगा, यही सब सोच-सोच कर मैं अपना लंड चुसवा रहा था, कि तभी वो दोनों भी कमरे में आ गयी और मेरे खड़े लंड को देख कर श्वेता खुश होते हुए बोली – अरे वाह सरोज… तूने तो समय से पहले ही इसे तैयार कर दिया… शाबाश…. अब तू पीछे हट, आगे का काम हम संभालते हैं.
लंड की सुंदरता देख कर सरोज उसे चूमते हुए बोली – मैडम, मेरा भी ख़याल रखना. इसे देखकर मेरी चूत भी आँसू बहाने लगी है…
श्वेता ने हँसते हुए कहा – अरे क्यों नहीं सरोज… अब तो ये अपनी ही प्रॉपर्टी है, जैसे चाहे इस्तेमाल करो, क्यों हेमा?? तो शुरू करें??
इतना कहकर उन तीनों ने मिलकर मुझे फिर से पलंग पर धकेल दिया और किसी भूखी बाघिनों की तरह अपने शिकार पर झपट पड़ी. लगभग 3-4 घंटे तक वो मेरे लंड से चुदवाती रही. मुझे पूरी तरह से निचोड़ डाला उन तीनों ने, तब जाकर उन्होंने मेरा पीछा छोड़ा. मुझे थोड़ा बहुत खाने को दिया, उसके बाद मेरे दोनों हाथ भी बाँध दिए. पैर दोनों खोल दिए और हाथों की रस्सियों को इतना लंबा कर दिया, जिससे कोशिश करके में पलंग के साइड तक आकर धार मार सकूँ.
खाने के बाद मैंने श्वेता से फिर पूछा – अब तो बता दो आख़िर तुम ये ज़ुल्म मेरे ऊपर क्यों कर रही हो??
श्वेता मेरे बालों को पकड़ कर अपने दाँत किटकिटा कर बोली – ज़ुल्म?? तुम इसे ज़ुल्म कहते हो अंकुश?? चूत चोदना तो तुम्हारा फ़ेवरेट काम है.. और देखो.. मैंने तुम्हें कितनी तरह-तरह की चूत चोदने को दी हैं अंकुश … फिर भी कहते हो कि तुम्हारे ऊपर ज़ुल्म हो रहा है… हाहहाहा….
फिर श्वेता अपने ठहाकों पर ब्रेक लगाकर आक्रोशित स्वर में बोली – हां.. मिस्टर अंकुश… बहुत नाज़ है ना तुम्हें अपने इस लंड पर… जिसका इस्तेमाल करके तुमने इतने बड़े-बड़े काम किए हैं…
ये कहते हुए श्वेता ने मेरे लंड पर एक जोरदार थप्पड़ लगा दिया. मैं दर्द से बिल-बिला उठा, और मेरे मुँह से कराह निकल गयी.
मैंने कराहते हुए कहा – मैंने ऐसा क्या किया है?? जिसकी तुम मुझे इतनी बड़ी सज़ा दे रही हो?
श्वेता – सुनना चाहते हो तो सुनो अंकुश… सबसे पहले तुमने अपने इस लंड का इस्तेमाल करके शिखा को चोदा और उसकी वीडियो क्लिप बनाकर भानु को अपना केस वापस लेने पर विवश किया. चौंको मत.. मुझे सब पता है.. क्योंकि भानु हमारी आर्गेनाइजेशन का एक अहम मोहरा रहा है हमेशा से… कामिनी के कहने पर ही उसने तुम्हारी निशा के साथ वो सब किया था..
मैं – तो श्वेता, तुम भी उस काली दुनिया का हिस्सा थी??
श्वेता ठहाका लगाते हुए बोली – लो कर लो बात.. अबे गधे… जिसके चारों ओर लोग जिस काम में लगे हों, वो उससे अछूता कैसे रह सकता है?? यहाँ तो उसकी नींव ही मैंने और कामिनी ने मिलकर रखी थी उस्मान भाई के साथ मिलकर. बाकी के लोग तो बाद में जुड़े.
श्वेता का ये खुलासा सुनकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी. फिर मैंने अपने आप को संयत कर के पूछा – तुम्हारे पति को ये सब पता था?
श्वेता – क्या बच्चों जैसा सवाल करते हो अंकुश?? जो आदमी हर बिज़नेस में पार्टनर हो.. वो उस काम में क्यों नहीं होगा? कामिनी ने तो पूरी कोशिश कि थी की उसका एसपी पति भी उसके साथ जुड़ जाए… लेकिन सीधे-सीधे नहीं कह सकती थी. शुरू-शुरू में तो वो उसके रूप जाल में फंसकर उसकी बात मानता था. कामिनी को लगने लगा था कि शायद वो भी हमारे साथ आ जाएगा. लेकिन फिर जब तुम भानु वाले केस में इन्वॉल्व हो गये और पुलिस पर मान हानि का दावा ठोक दिया. उसके बाद कहीं ना कहीं तुम्हें पटाने के चक्कर में उसका जमीर फिर से जाग उठा और उसका परिवार प्रेम फिर से जाग गया और वो तुम्हारे साथ हो गया. प्राची वाले केस में उसने तुम्हारा साथ दिया. इससे नाराज़ होकर कामिनी ने उसका बंगला छोड़ दिया, लेकिन कामिनी अपने पापा की वजह से डाइवोर्स देने के लिए तैयार नहीं हुई और शायद यही उसकी सबसे बड़ी ग़लती साबित हुई..
श्वेता जिस तरह से खुलासे पे खुलासे करती जा रही थी, मेरी जिज्ञासा उतनी ही बढ़ती जा रही थी. मैं मुँह फाड़े किसी अच्छे श्रोता की तरह श्वेता की बातें सुन रहा था.
श्वेता – ना कामिनी अपने डाइवोर्स को बचाने की कोशिश में तुमसे मिलती और तुम्हारे इसी लंड की चाह में फिर से तुम्हारे साथ संबंध सुधारने की कोशिश करती और ना ही वो मुझे तुमसे मिलवाती. चूँकि हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था, जो छिपा हो, तो उसने तुम्हारे लंड के इतने क़िस्से कह डाले, जिन्हें सुनकर मेरी चूत इसे लेने के लिए फड़फड़ाने लगी और मैंने तुमसे चुदवाने के लिए होटल में मिलने वाली तुम्हारी शर्त एक्सेप्ट कर ली. जहाँ तुमने फिर से वही चाल चली जो शिखा और भानु के साथ चली थी और हमारी चुदाई की वीडियो बनाकर मेरे भाई को दिखाकर पुलिस का मुखबिर बना लिया. भले ही मैं अपने छोटे भाई से चुदवाती थी, फिर भी कोई भी बाप या भाई, अपनी बहन बेटी की चुदाई को सार्वजनिक होने नहीं दे सकता. उसी का तुमने फ़ायदा उठाकर उसको हमारे ही आर्गेनाइजेशन के खिलाफ इस्तेमाल किया. न.. न.. चौंको मत अंकुश.. यही सोच रहे हो ना कि ये सब मुझे कैसे और कब पता लगा?
मैंने बिना कोई जवाब दिए उसको सवालिया नज़रों से देखा.
श्वेता – काश! ये बात मुझे बहुत पहले ही पता चल जाती तो आज ये नौबत नहीं आती अंकुश. मेरा भाई, मेरा बाप, मेरी बहन जैसी फ्रेंड, उसके पापा, हमारा आर्गेनाइजेशन सब कुछ वैसा ही होता, जैसा पहले था.
ये सब कहकर एक क्षण को श्वेता इमोशनल हो गयी और उसकी पलकों की कोरों पर पानी की बूँदें इकट्ठा हो गयी.
श्वेता फिर जल्दी ही सामान्य होकर बोली – तुम्हें याद है अंकुश… जिस दिन हमने मेरे ऑफिस में लास्ट चुदाई की थी. काफ़ी देर तक मुझे खूब जमकर चोदने के बाद तुम्हें टॉयलेट लगी और तुम बाथरूम चले गये. अच्छी तरह से साफ सफाई करने में तुम्हें काफ़ी वक़्त लगा. उसी बीच तुम्हारे मोबाइल पर कोई मेसेज आया. जिज्ञासावश मैं तुम्हारे मोबाइल को देखने लगी, मुझे याद नहीं वो मेसेज क्या था? लेकिन इस चक्कर में तुम्हारे मेसेज लिस्ट में मैंने असलम का नाम देखा. उसका नाम तुम्हारे मेसेज बॉक्स में देख कर में बुरी तरह से चौंक पड़ी. मैंने उसे खोलकर पढ़ा, और मेरी खोपड़ी ही उलट गयी. फिर मैंने समय बर्बाद नहीं किया और फ़ौरन तुम्हारे मोबाइल का हॉटस्पॉट ऑन करके सारे वीडियो और मेसेज अपने मोबाइल में कॉपी कर लिए. तुम्हारे जाने के बाद मैंने वो सारे मेसेज जिन्हें तुमने क्लिप के साथ मेरे भाई को भी भेजा था और दूसरी वीडियो भी सब कुछ देखा. जिन्हें देख कर अब मेरे मन में कोई शंका बाकी नहीं रही, कि हमारी बर्बादी के पीछे का कारण क्या था. सबसे बड़ा झटका तो मुझे तब लगा, जिसमें तुमने मेरे भाई को एसपी के साथ मीटिंग करते हुए वीडियो बनाकर असलम को भेजा था. असलम और गुंजन दोनों आपस की गोली से कैसे मरे, ये मेरे दिमाग़ में एकदम क्लियर हो गया और तुम्हारे दिमाग़ की दाद दिए बिना नहीं रह पाई. सच में तुमने बहुत बड़ा गेम खेला था. इसी दुश्मनी के चलते उस्मान भाई ने मेरे डैड को मार डाला.
मैंने बीच में टोकते हुए कहा – असलम को तुम्हारे भाई ने नहीं मारा था. उसको मैंने गोली मारी और फिर कामिनी के चचेरे भाई और कमिश्नर के लौन्डे को गन पॉइंट पर ड्रग्स का ओवरडोज देकर उनकी महबूबा के साथ मैंने ही मारा, जानती हो क्यों?
श्वेता – हां अंकुश, लेकिन तुम किसी को सज़ा देने वाले कौन होते हो? तुम कोई भगवान तो नहीं हो ना??
मैं – भगवान किसी को सज़ा देने खुद नहीं आते श्वेता. वो ये काम मेरे जैसे लोगों से करने के लिए प्रेरणा देते हैं. तुम सब क़ानून और समाज के दुश्मन हो, जिन्हें मैंने अपने तरीक़े से सज़ा दी. इसका मुझे कोई दुख या मलाल नहीं है. अब तुम बेशक मुझे गोली से उड़ा दो, कोई गम नहीं. बस थोड़ा सा ये दुख रहेगा, कि उन गुनहगारों में अभी कुछ बाकी रह जाएँगे और एक बात, तुम लोग समाज के लिए कलंक हो, एक फ्री की एडवाइस देता हूँ मुझे जल्दी से मार डाल. अगर मैं ग़लती से तुम्हारी इस क़ैद से निकल गया, तो तुम जितने भी बचे हो किसी को नहीं छोड़ूँगा. श्वेता मैं तुम्हें उन लोगों से अलग समझता था, इसलिए तुम और तुम्हारा पति जिंदा बचे हुए हो, वरना…
ये बात मैंने इतने सर्द लहजे में कही, कि श्वेता के बदन में डर के मारे झुरझुरी सी दौड़ गयी. श्वेता भयभीत नज़रों से कुछ देर मेरी तरफ देखती रही.
फिर कुछ अपने को संभालते हुए श्वेता बोली – अंकुश तुम्हें इतनी आसान मौत नहीं मिलेगी कुत्ते… मैं चाहती हूँ तुम एड़ियां रगड़-रगड़ कर खुद से अपनी मौत माँगो. अंकुश तुमने जिस हथियार का इस्तेमाल करके ये सब किया है, उसी का इस्तेमाल मैं तुम्हारे साथ करूँगी और तुम्हें हर रोज़ अनगिनत औरतों के साथ चुदाई करवा-करवा के इतना बेबस और लाचार बना दूँगी, तुम्हारे शरीर से खून की एक-एक बूँद तक निचोड़ लूँगी. तुम हर लम्हा ये सोचोगे कि काश इससे अच्छा तो मौत ही आ जाए.
मैं – लेकिन श्वेता तुम्हारे ऑफिस की चुदाई को इतने दिन हो गये. फिर इतना समय तुमने क्यों लगाया मेरे ऊपर हाथ डालने में.
श्वेता – अंकुश मैं तुम्हारी सारी चालें समझने के बाद मैं बहुत देर तक तो यही फ़ैसला नहीं कर पाई, कि ये सब तुमने किया है. फिर जब मैंने अपने आपको समझा लिया और तुमसे बदला लेने का फ़ैसला लिया. अब मेरे पास मेरा कोई गैंग तो बचा नहीं था, तुमने सब लोगों को मौत दिलवा दी, या अपने हाथों से दे दी. अब अगर मैं या मेरे पति सीधे-सीधे तुमसे से टकराते तो शायद सफल नहीं होते. तभी मेरे दिमाग़ में भानु का नाम आया, जो तुमसे से बुरी तरह खार खाए बैठा था. मैंने उससे कांटेक्ट किया. भानु इस शर्त पर मेरा साथ देने को तैयार हुआ, कि मैं तुम्हें आख़िर में मौत के घाट उतरवा दूँगी. क्योंकि अगर तुम इस बार बच गए, तो भानु को पूरी तरह बर्बाद करने से पीछे नहीं हटेगा. इसलिए तुम्हें फसाने के लिए उसने फिर से शिखा का ही सहारा लिया और देखो आज तुम मेरे रहमों करम पर हो. अब तुम्हें रोज़ सेक्सुअली टॉर्चर किया जाता रहेगा और तुम कुछ नहीं कर पाओगे. हाहाहा….