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Incest Meri maa

Rajkumarji5

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,, जैसे तैसे करके दिन गुजरता है और शाम का समय होता है,, रोहन ड्यूटी पर था,, शाम हो रही थी,, सरोज बेचैन थी अपने बेटे से बात करने के लिए वह किसी भी तरह अपने बेटे को मनाना चाहती थी,,, महिला की बात का कहा हो असर इस तरह हुआ था,, की सरोज के मन में अपने बेटे के लिए और भी,, इज्जत बढ़ गई थी वह अपने बेटे को बहुत ही अच्छा मान रही थी,, और उसे पर गर्व महसूस कर रही थी इसलिए वह अपने बेटे को पति जैसा पुकारने के लिए भी मन को मना ली थी,,, अब उससे और बर्दाश्त नहीं होता वह शाम के टाइम ही अपने बेटे को कॉल करती है रसोई में जाकर,,,

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,, फोन लगाते ही रिंग की आवाज होने लगती है,, और इधर सरोज का दिल तेज तेज धड़कने लगता है,, वह सोच रही थी कि उसका बेटा फोन उठाएगी तो वह पहला शब्द क्या होगा जो वह अपने बेटे के लिए पुकारेगी,,, उसका दिल तेजी से धड़क रहा था,, घबराने की बात नहीं थी लेकिन न जाने क्यों उसे घबराहट हो रही थी,, तभी कुछ देर रिंग होने के बाद रोहन फोन उठा लेता है,,

रोहन :- हम आप बोल क्यों बार-बार फोन करके परेशान कर रही हो,,,???

,, जैसी ही सरोज अपने बेटे की आवाज सुनती है उसका दिल और तेजी से धड़कने लगता है,, वह कुछ देर खामोश रहती है और अपने बेटे को गुस्से में देखकर,, कांपते हुए होठों से कहती है,,

सरोज:- ए... जी......आप भी नाराज हो क्या मुझसे????

,, यह शब्द सुनकर रोहन फोन काटने वाला था कि वह रुक जाता है,, मन में अलग ही तरंग दौड़ने लगते हैं खुशी के मारे वह फोन की स्क्रीन को देखा है,,

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,, उसे विश्वास नहीं होता कि उसकी मां आज उसे इस तरह बात कर रही है,, वह समझ जाता है कि उसकी नाराजगी की वजह से उसकी मां उसे मनाना चाहती है,, तभी फिर से सरोज,

सरोज:-- क्या हुआ आप कुछ काम कर रहे हो क्या,,,,

रोहन:- कंपनी में हूं बस जा रहा हूं छुट्टी होने वाली है और तुम क्या कर रही हो,,

सरोज:- शरमाते हुए उसे बहुत शर्म आ रही थी,, आपके नाना नानी के लिए खाना बना रही हूं,,,

रोहन:- एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगी,,,

,, रोहन को ऐसा लग रहा था जैसे वह अपनी होने वाली पत्नी से बात कर रहा हो,,, इस तरह से बात कर रहा था,,, कुछ देर सोचने के बाद सा रोग अपने बेटे से कहती है,,

सरोज:- बोलो क्या बोलना चाहते हो,,,???

रोहन:- पापा आपको कैसे पुकारते थे,,???

सरोज:- क्यों पूछ रहे हो??? अब इसमें पापा का क्या लेना देना,,

रोहन :- बताओ ना तभी बताऊंगा,,!!!

सरोज:- कभी-कभी नाम से पुकारते थे नहीं तो तू तड़प से ही बात करते थे,,,,,

रोहन:- अगर मैं भी आपको नाम से पुकारू और उसे तरह बात करूं तो बुरा तो नहीं लगेगा????

,,,, अब यह क्या नहीं वह है सरोज मन में सोचने लगती है,,, फिर भी अपने मन को शांत कर कर वह कहती है,,

सरोज:- अगर कोई सुनेगा तो क्या कहेगा कि अपनी मां को कैसे बोलता है,, मां का कोई नाम लेकर पुकारता है क्या,,,,???

रोहन:- मैं कौन सा सबके सामने बुक करूंगा अकेले में तो बोल ही सकता हूं,,??

सरोज:- ठीक है जी...जैसी आपकी इच्छा....

,,, यह कहकर सरोज शर्मा जाती है उसे बहुत शर्म आती है,, लेकिन वह मुस्कुराते हुए शर्म से सर झुका कर,,

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,, सरोज मन में यह मैंने क्या बोल दिया,, अब मेरा बेटा मुझे नाम से पुकारेगा,,, रोहन की नानी जी की आवाज आती है,,

नानी:- अरे सरोज बेटा एक गिलास पानी देना जरा,,,

,, सरोज थोड़ी घबराकर जी लाइव मम्मी जी,,, अच्छा मैं रखती हूं मम्मी बुला रही है,,

रोहन जल्दी में:- रुको रुको मेरी बात सुनो,, रात को फोन करेगी ना,,??

सरोज:- मैं तो करती हूं आप उठाते नहीं हो फोन,,,

रोहन:- अब उठाऊंगा इंतजार करूंगा तेरे फोन का करेगी ना????

,,, सरोज के दिल की धड़कन और बढ़ जाती है जब उसका बेटा उसे तू से बोलता है कि तेरे फोन का इंतजार करूंगा यह सुनकर वह फिर,, हिम्मत करके,,

सरोज:- करूंगी...मम्मी पापा के सोने के बाद,,,,

,, इतना कहकर सरोज फोन काट देती है और घर के काम में लग जाती है अपनी मम्मी को पानी देती है और अपने बेटे से अभी हुई बातों के बारे में सोचने लगती है,,, अब वह सोच रही थी कि उसका बेटा इस तरह से बात करेगा तो कैसा महसूस होगा,, परंतु अपनी बेटी की खुशी के लिए उसने अपने मन को बना लिया था,,, वह सारा काम निपटाती है और फिर रात होती है,,, रोहन अपनी मम्मी के फोन का इंतजार कर रहा था रात के 10:00 जाते हैं लेकिन कोई कॉल नहीं आती,,,, उधर सरोज भूल गई थी कि उसको उसके बेटे को कॉल करनी है,, सरोज के पास छोटा मोबाइल था वह अभी भी अपने मम्मी पापा से बात कर रही थी,,

नानी:= सरोज देखा हमारा बेटा कितना समझदार है और आजकल के बच्चे क्या कर रहे हैं गांव में,,

सरोज:- हां मम्मी बस इसी के सहारे जी रही हूं मेरा बेटा बहुत समझदार है,, आज तो गांव की औरतें भी उसकी तारीफ कर रही थी,,,

नानाजी :- देखना बेटा मैं जल्दी अपने नाती की शादी कर पाऊंगा,,, और इस घर में बहुत सारी खुशी आएंगे,,

सरोज :- यह है मेरी इच्छा पूरी हो जाए मेरे बेटे की शादी हो जाए,, फिर मेरे बेटे की बहू घर में आएगी तो और ज्यादा खुशियां आएंगी,,

नानी जी:- हमारा नाती अच्छा है और पैसे भी कमाता है हो जाएगी बेटा उसकी शादी,, और तो देखना उसके साथ बहुत सुंदर बहू आएगी,, उसकी किस्मत बहुत अच्छी है भले ही भगवान के घर में देर है लेकिन अंधेर नहीं,,, ऊपर वाला जब देता है तो चप्पल फाड़ के देता है बेटा,, और एक दिन ऐसा आएगा तेरी जिंदगी के सारे दुख दूर होंगे हमारे बेटे की शादी भी होगी,,,

सरोज:- बस मम्मी भगवान मेरी यह प्रार्थना सुन ले तो मैं,, देवी माता के मंदिर जाकर प्रसाद चढ़ाऊंगी,,

,, यही सब घर की बातें चल रही थी और समय 11:00 बज चुके थे रोहन अपनी मम्मी का फोन का इंतजार कर रहा था,, वह चाहता तो खुद भी कॉल कर सकता था लेकिन वह यही देख रहा था कि उसकी मम्मी उसको कॉल करती है भी है या नहीं,,, रोहन को थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था कि उसकी मम्मी ने कॉल नहीं किया,,, बार-बार वह फोन को देख रहा था कि अब कॉल आएगी अब कॉल आएगी लेकिन सरोज तो अपनी मम्मी पापा से बात करने में लगी हुई थी उसे ध्यान ही नहीं था कि उसे रोहन को फोन भी करना है,, उसने वादा किया था कि वह रात को फोन करेगी,,, काफी समय बात करने के बाद रोहन के नाना जी को नींद आ जाती है,, तभी रोहन की नई सरोज से कहती है,,

नानी:- बेटा तेरे पापा सो गए हैं अब जा तू भी आराम कर ले बहुत रात हो चुकी है घर का दरवाजा बंद कर दे,,,, कुछ काम हो तो मुझे बता दे मैं कर दूंगी,,

सरोज:- नहीं मम्मी कुछ काम नहीं है मैं जा रही हूं सोने,,

,, दरवाजा बंद करने के बाद,, सरोज अपने कमरे में सोने के लिए चली जाती है कि तभी उसकी मम्मी उसे फिर से कहती है,,

नानी:- अरे बेटा रोहन से बात हुई वह ठीक है,,

,, अपनी मां की बात सुनकर सरोज को याद आता है कि उसे तो रोहन को कॉल करनी थी और रात के 11:30 गए हैं,, शाहिद रोहन फिर से गुस्सा हो गया होगा या सो गया होगा,, फिर वह जल्दी-जल्दी अपनी मम्मी से कहती है,,

सरोज:- हां मम्मी बात हुई थी वह ठीक है एक बार फिर से कॉल करूंगी,,,

,, यह कहकर सरोज अंदर कमरे में जाती है और दरवाजा बंद करके मोबाइल उठाती है,,, थोड़ी घबराहट उसके मन में अभी भी थी रात के 11:30 बजे वह कभी भी किसी से बात नहीं करती थी,,, लेकिन आज वह अपने बेटे से ही अपने पति की तरफ बात करना चाहती थी,,, इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था वह मोबाइल को देखते हैं तो 12 बच चुके हैं,,, दूसरी तरफ रोहन की आंखों में अभी नींद नहीं थी वह इंतजार कर रहा था अपनी मम्मी के फोन का,, घबराहट के साथ फोन लगाती है,,, फोन की रिंग बस्ती है और रोहन फोन उठा लेता है,,, फोन देखकर उसे बहुत खुशी होती है,, फोन उठाती ही वह अपना हाथ अपनी पेट के लोअर के ऊपर से ही लिंग पर रखता है,,,

रोहन:- बड़ी देर कर दी फोन करने में क्या कर रही थी,,

सरोज:- जी....आप सोए नहीं अभी तक मुझे लगा आप सो गए होंगे""

रोहन:- पहले बताओ तुम कहां पर हो,,

सरोज:- मैं अपने कमरे में हूं,,,,

रोहन:- और नाना नानी सो गए क्या??

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सरोज:- हां वह सो गए हैं,,, बोलो क्या बोलना चाहते थे रात को फोन करने के लिए बोला था,,,

रोहन:- दरवाजा बंद है??

सरोज: हां दरवाजा बंद है मगर क्यों??? इतनी परेशान क्यों हो रहे हो क्या बात है क्या कहना चाहते हो,,, अब तो मैं आपको,,

,, सरोज यह कहकर रुक जाती है उसको आगे शब्द नहीं मिल रहे थे,, कि वह क्या कहें,, लेकिन रोहन समझ जाता है कि वह क्या कहना चाहती है वह,, रोहन अपने मन में ही सोते हुए,,

,, आज इसे ही पूछ कर देखता हूं फोन पर मुट्ठी कैसे मारते हैं देखता हूं क्या बताएगी कहीं गुस्सा तो नहीं करेगी,, नहीं मुझे नहीं लगता आप गुस्सा होगी,,,

रोहन:- मैं तो बस यह कहना चाहता था कि तुम मेरी शादी को लेकर परेशान मत होना मेरे लिए इतना ही काफी है बस तुम मुझे इस तरह से पुकार रही हो,, मैं इन बातों के सहारे ही जिंदगी काट सकता हूं और तुम्हें खुश रखूंगा हमेशा मम्मी,,,

सरोज :- बिस्तर पर लेटे हुए रजाई के अंदर जाकर,, लेकिन शादी तो करनी ही होगी घर कैसे चलेगा,, जीवन में एक साथी की जरूरत होती है मैं तो जिंदगी भर साथ नहीं रहूंगी आपकी,,,

रोहन:- अगर किसी का सहारा मिल जाए तो जिंदगी काटी जा सकती है और मुझे लगता है कि तेरी... बातों से ही जिंदगी काट लूंगा..

सरोज थोड़ा शरमाते हुए,, अच्छा ऐसा क्या है मेरी बातों में,,

,, मैंने पहले कभी ध्यान नहीं दिया लेकिन तेरी मीठी आवाज मुझे बहुत अच्छी लगती है,, और जब तुम्हारे चेहरे को देखता हूं तो मुझे एहसास होता है कि तुम कितनी सुंदर हो,,

,, इस तरह की तारीफ वाली बातें सुनकर सरोज को बहुत शर्म आती है लेकिन उसे अच्छा भी लग रहा था,,

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सरोज :- इतनी भी सुंदर नहीं हूं मैं,,, और केवल बातों से जिंदगी नहीं करती शरीर की कुछ और भी इच्छाएं होती है,,,

रोहन:- तू कितनी सुंदर है यह मेरे दिल से पूछ कर देख,, पहले कभी ध्यान नहीं दिया,, लेकिन अब लगता है कि मैं तेरे बिना रह नहीं सकता,, और मैं जानता हूं की मां बेटे के बीच वह सब नहीं हो सकता इसका भी मैंने एक उपाय पूछ लिया है डॉक्टर से,,,

,, यह सुनकर सरोज थोड़ी घबरा जाती है कि उसके बेटे ने इसका क्या उपाय पूछा होगा डॉक्टर से और वह घबराहट से कहती है,,

सरोज:- डॉक्टर से क्या पूछा है तुमने डॉक्टर से,,??

रोहन :- तुमने फिर से वही शब्द,,,

सरोज :- माफ करना क्या पूछा है आपने डॉक्टर से क्या बताया उसने,,,

रोहन:- उसने मुझे एक मेडिसिन दी है कि जब भी तुम्हारे शरीर में इस तरह की इच्छा हो इस गोली को खा लेना तुम्हारा शरीर शांत हो जाएगा,,,,

,, यह सुनकर सरोज बहुत घबरा जाती है उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका बेटा अपनी शरीर की इच्छा को पूरी करने के लिए कहीं गलत जगह नहीं गया और डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर की दवाई से,, उसे शारीरिक कमजोरी हो सकती है वह नपुंसक भी हो सकता है,, इतना तो वह जानती थी कि शरीर की इस इच्छा को करने के लिए कोई दवाई नहीं खाई जाती और अगर कोई ऐसी दवाई खाता तो उसे नुकसान हो सकता है,, इसलिए वह घबरा गई थी और अपने बेटे से,,,

सरोज:- नहीं उसे डॉक्टर की दवाई मत खाना वह नुकसान देगी आपको,,

रोहन:- मैं जानता हूं आप मेरे लिए चिंता कर रही हो मम्मी,, लेकिन आप एक मां की तरह ही मुझे समझाओ कि मैं क्या करूं,,

सरोज:- रोहन मेरे लाल में एक मां की तरह ही तुझे बोल रही हूं,, तेरी खुशी के लिए मैं तुझे आपसे बोल रही थी लेकिन मेरे बेटे मैं तेरी मां हूं तुझे अच्छे के लिए बोल रहा हूं वह दवाई मत खाना वह नुकसान देगी तुझे,,,

रोहन:- मम्मी अगर मैं आपको अपनी हालत बताऊंगा तो आप बुरा मान जाओगी इसलिए मैं आपसे कहता भी नहीं,,, और आप इसमें मेरी कोई मदद भी नहीं कर सकती इसीलिए यही एक समाधान है क्योंकि आप मुझसे बर्दाश्त नहीं होता मम्मी,,,

सरोज :- मैं समझ सकती हूं बेटा लेकिन इसका यह हाल नहीं है तेरी शादी होगी सब ठीक हो जाएगा बस कुछ दिन और,,,

रोहन :- मम्मी मैं आपको बात नहीं सकता मुझसे बर्दाश्त नहीं होता,,, आप ही बताओ मैं क्या करूं,,,

सरोज :- जब तेरी शादी होगी सब ठीक हो जाएगा बेटा इतने दिन बर्दाश्त किया है ना कुछ दिन और सही,, देख इसी बात को लेकर गांव में सब तेरी तारीफ कर रहे थे,,,

रोहन:- मम्मी आपसे एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगी,,

सरोज:- हां बोल बुरा नहीं मानूंगी,,,

रोहन:- जब मैं आपको दिखाया और आपका हाथ भी उसे पर रखा,, तो आपको कैसा लगा क्या उसमें कोई कमी है???

,, अब सरोज का दिल जोरो से धड़कने लगा था उधर रोहन अपने लिंग को लोअर के ऊपर से ही सहला रहा था,, डॉक्टर से दवाई और सलाह लेना तो उसका एक नाटक था ऐसा उसने कुछ भी नहीं किया था वह तो अपनी मम्मी को फसाने के लिए यह सब बोल रहा था,,, सरोज सोच रही थी कि इस बात का क्या जवाब दें अपने बेटे के लिंग की तारीफ अपने मुंह से कैसे एक मम्मी कर सकती है,,, उसे कुछ समझ नहीं आता कुछ देर खामोशी छाई रहती है तो रोहन फिर से पूछता है,,

रोहन:- मुझे पता था आप बुरा मान जाओगे इसलिए मैं आपसे कुछ कहना नहीं चाहता था अब मैं किसको बताऊं अपनी दिक्कत,,

सरोज :- नहीं बेटा ऐसी बात नहीं है लेकिन अपनी मां से यह सब थोड़ी ना पूछते हैं,,,,

रोहन:- मुझे मालूम है मम्मी लेकिन अब आपने देख लिया है तो यह तो बता सकती हो कि क्या मेरे अंदर कोई कमी है,,

सरोज: शरमाते हुए नहीं मेरे लाल तेरे अंदर कोई कमी नहीं है सब ठीक है,,

रोहन:- तो फिर बताओ आपको पसंद आया मेरा वह,,,

,, एक बार फिर से सरोज का दिल जोरो से धड़कने लगा और वह खामोश हो गई,, कुछ देर खामोशी छाई रही सरोज के दिल की धड़कन तेज तेज धड़क रही थी और उसकी सांसे भी तेज चलने लगी थी सर्दी में भी उसे गर्मी का एहसास हो रहा था,,, लेकिन न जाने क्यों आज उसकी योनि में चीटियां रंग रही थी मीठी-मीठी खुजली हो रही थी उसे,, उसका बेटा ही उसके मुंह से अपने लिंग की तारीफ सुनना चाहता था,, वह जानना चाहता था कि उसकी मां को उसका लिंग पसंद आया कि नहीं,, अब एक मां यह अपने बेटे से कैसे कह सकती है,, सरोज तो सोच रही थी कि कैसे बताऊं कि उसके लिंग में उसके दिमाग पर क्या छाप छोड़ी है यह याद करते हैं उसकी नजरों में फिर से उसके बेटे का लिंग आने लगा,,,

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,, सरोज सोच रही थी कि रोहन की बातों का क्या जवाब दे,,

रोहन:- बताओ ना मम्मी प्लीज आपको मेरी कसम,,,

सरोज:- अब मैं क्या बताऊं अच्छा है,,,

रोहन:- सबका ऐसा ही होता है पापा का भी ऐसा ही था कि मम्मी???

,, सरोज को और घबराहट हुई और उसकी सांसे तेज चलने लगी जो रोहन सुन रहा था उसे समझ आ गया था कि उसकी मम्मी की सांस किस तरह चल रही है,, और वह अपने मन में अपनी मम्मी की तस्वीर को इमेजिन करने लगा कि वह सांस लेते हुए उसकी पहनी हुई नाथ कैसे हिलती है,, सरोज कुछ बोल नहीं रही थी कि रोहन ने फिर से कहा,,


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रोहन:- अच्छा यह बताओ जो मैंने नाथ पहनी थी वह अभी भी पहनी है या उतार दी,,

सरोज : पहन रखी है,, उतरूंगी क्यों ऐसे क्यों बोल रहा है,,

रोहन माहौल को बदलते हुए,, उसकी बहुत याद आ रही है उसे देखने का मन कर रहा है,,

,, सरोज भी माहौल को बदलते हुए बात बदलने की कोशिश करते हुए कहती है,,

सरोज:- इतनी अच्छी लगती है,, या फिर मैं मेरी नाक,,,

रोहन:- आपकी नाक में पहनी हुई बहुत अच्छी लगती है इसलिए उसे बार-बार देखने का मन करता है आप इतनी सुंदर हो कि आपकी नाक को बार-बार देखने का मन करता है,,, एक बार अपने लिपस्टिक लगाकर नहीं दिखाई,,

सरोज:- मेरे पास लिपस्टिक नहीं है मैंने मना नहीं किया था लेकिन गुस्से में चला गया तो मैं क्या करती है,,,

रोहन:- मम्मी अब मैं दीपावली पर आऊंगा आप एक बार मुझे लगा कर दिखाना और यह नथनी अभी उतरना नहीं जब तक मैं ना कहूं,,,

सरोज: नहीं उतरूंगी,,, ठीक है अब फोन रख दो,,,???

रोहन:- मुझे पता था आप भी मेरा साथ नहीं दोगी,, इसीलिए मैं आपसे बात नहीं करना चाहता था अब मैं दिक्कत में हूं तो आप फोन रख रही हो,,

सरोज कुछ सोचते हुए,, नहीं मेरे लाल ऐसी बात नहीं है वैसे आप क्या दिक्कत है बात तो कर रही हो,,,

रोहन:- मम्मी आपसे कैसे बताऊं यह बहुत परेशान कर रहा है,, जब यह टाइट होता है कपड़ों के अंदर मुझे बहुत दर्द होता है मम्मी अभी भी बहुत दर्द हो रहा है,,,

,,, सरोज को अब घबराहट होने लगी और उसकी योनि में भी खुजली होने लगी थी अनजाने में ही उसका हाथ उसकी योनि पर जाता है,, जिसे वह एक बार सहलाने के बाद आंखें बंद करके अपना हाथ वहां से हटा लेती है,,

रोहन:- अपनी मम्मी के चेहरे को इमेजिन करते हुए,, बताओ ना मम्मी कुछ तो उपाय होगा क्या करूं मैं इसका या यह दवाई खा लूं जो डॉक्टर ने दी है,,

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,, सरोज अपने बेटे की चिंता को जाहिर करते हुए,, एक बार फिर सोच में पड़ जाती है कि उसका बेटा कहीं सच में ही दवाई ना खाने लगे फिर उसे आदत हो जाएगी और वह किसी बीमारी का या नपुंसक का शिकार हो सकता है,, इसलिए वह घबराते हुए कहती है,,

सरोज:- नहीं मेरे लाल वह दवाई मत खाना देख मैं तेरी बात मानी तूने कहा था कि मुझे पापा की तरह पुकारा मैं तेरे लिए वह भी किया,,, अब मैं अपनी मां होने के नाते रहती हूं यह दवाई मत खाना इससे तुझे नुकसान हो जाएगा बेटा,,

रोहन:- अपने लिंग को हाथ में लेकर:: मम्मी आप ही बताओ मैं क्या करूं इसमें बहुत दर्द हो रहा है जब लोअर के अंदर सोता हूं तो बहुत दर्द होता है मम्मी,,, क्या करूंगा मैं बताओ ना,,,
,, अब चिंता में डूबी सरोज को समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे को क्या कहें,,, मन ही मन विचार कर रही थी कि कैसे अपने बेटे को वह दवाई खाने से रोके,, और सोच रही थी कि भगवान मैं कर भी क्या सकती हूं अपने बेटे के लिए,, अब यह दवाई अगर यह मेरा बेटा खाएगा तो उसका बहुत गलत असर होगा क्या करूं भगवान कुछ समझ नहीं आ रहा और उसके दिल की धड़कन बहुत ही तेजी से धड़क रही थी सरोज कुछ देर के लिए सोचती रहती है,,

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,, कुछ देर सोचने के बाद जब सरोज कोई जवाब नहीं दे तो रोहन फिर से कहता है,,
रोहन:- आपको भी मेरी चिंता नहीं है.. मैं समझ गया आप मेरी शादी को लेकर भी मेरे सामने ही चिंता जताती हो,,, नहीं तो अब तक मेरे दो-तीन बच्चे हो गए होते,, कोई नहीं मम्मी आप सो जाओ मैं यह दवाई खाकर कैसे भी करके अपनी समस्या को सुलझा लूंगा,,,

,, सरोज घबराहट के साथ तुरंत बोलती है,,

सरोज,:- नहीं मेरे लाल वह दवाई मत खाना बता तुझे क्या हो रहा है,,

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,, रोहन :- मम्मी मैंने बताया तो इसमें बहुत दर्द होता है अकड़ जाता है यह बहुत दर्द कर रहा है लोअर के अंदर तो और भी दर्द होता है,,,

सरोज :- बेटा जब पहले होता था तब क्या करता था तू,,,

रोहन आप क्या जवाब दे यह सोच रहा था,, तभी उसके दिमाग में आइडिया आया और उसने तुरंत कहा,,

रोहन:- पहले इतना परेशान नहीं करता था मम्मी जब से आपको देखा है आपको यह नाथ पहना यह तब से बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही है,, आज तो बहुत दर्द कर रहा है मम्मी क्या करूं और भगवान..... इससे तो अच्छा भगवान मेरी जान ले ले...

सरोज:-- नहीं मेरे लाल ऐसे नहीं कहते,, सब ठीक हो जाएगा ऐसी कोई हरकत मत करना मेरे बच्चे की हम कहीं के भी ना रहे,,,

रोहन: अब मैं क्या करूं मम्मी आपको ही मेरी चिंता नहीं है तो मैं किसके लिए जी हूं,,,

सरोज: ऐसी बात नहीं है मेरे लाल तेरी वजह से ही तो हम लोगों का जीवन चलता है,, तुझे दर्द में देखकर मुझे भी तकलीफ होती है,, लेकिन मैं मां हूं बेटा तेरे लिए यह नहीं कर सकती,,

रोहन: मैं आपसे कुछ करने के लिए थोड़ी ना बोल रहा हूं मम्मी इसका कुछ तो समाधान होगा अभी बहुत दर्द हो रहा है इसमें अकड़ रहा है लोअर में तो बहुत टाइट हो रहा है,, कुछ बताओ ना क्या करूं,,

,, सरोज कुछ देर सोते हुए अपने बेटे की दर्द भरी आह सुनकर धीरे से कहती है,,

सरोज : तूने पजामे के अंदर नेकेड पहना है क्या???

रोहन:- हां मम्मी पजामी के अंदर नेकेड तो पहनते ही है,,

, सरोज :- एक बात बोलूं,,... कैसे बोलूं है भगवान.....

रोहन:- मम्मी आपके मेरे अलावा कौन सुन रहा है बताओ ना,,,

सरोज:-- कुछ देर सोते हुए कांपते हुए होठों से कहती है,, उसको पजामी से बाहर निकाल ले दर्द नहीं होगा,,,
 

Hulk

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दिलचस्प, रोमांचक और बेहतरीन लेखन!
 

Rajkumarji5

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यह सुनते ही रोहन के दिल की धड़कन बढ़ जाती है,,, यही वह चाहता था उसके मन की सारी इच्छाएं पूरी हो रही थी,, रोहन सोच रहा था उसकी मां तो मुट्ठी मारने के बारे में जानती ही होगी,,, इसलिए आज उसका काम हो जाएगा उसे आज अपने लिंग में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना हो रही थी,,, ऐसा मजा जो उसने कभी महसूस नहीं किया था इस पल जो महसूस कर रहा था,, इतना कह कर सरोज चुप हो जाती है और रोहन,,

रोहन :- मम्मी अंडरवियर भी निकाल दो क्या,,

सरोज :: शायद उसके बेटे को ना मालूम हो कि लड़के हाथ से भी कर लेते हैं अपनी संतुष्टि के लिए,, जब उसके महीना चलता था तो उसके बापू से यह काम करवाते थे सरोज ने अपने पति की मुट्ठी कई बार मेरी थी तो वह जानती थी कि हाथ से भी मुट्ठी मार कर संतुष्ट किया जा सकता है लड़कों को,, लड़के अपने हाथ से भी मुट्ठी मारते हैं लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि उसका बेटा यह काम नहीं करता,, और उसे अपने बेटे का शरीर देखकर अंदाजा लग गया था कि शायद उसका बेटा या काम नहीं करता होगा तभी तो इतना बेचैन है और इतना तगड़ा लिस्ट पुरुष है,, इसलिए उसे अपने बेटे को बहुत तरस आ रहा था,, कुछ सोच विचार करते हुए वह मन में ठान लेती है कि अपने बेटे को आज वह बता देगी कि हाथ से मुट्ठी मार कर संतुष्टि पाई जा सकती है,,

सरोज:- कपड़े नहीं निकलना बेटा बस उसे निकालना दोनों चीज से बाहर हवा लगेगी तो ठीक हो जाएगा,,,

रोहन :- जोश में आकर ठीक है मम्मी फोन नहीं काटना,, फोन तो नहीं काटोगी ना,,???

:- सरोज:- नहीं कटूंगी,,, निकाल लिया,,,


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,, कुछ उलझन में सोते हुए सरोज अपने बेटे से पूछता है,,

रोहन :- हां मम्मी निकाल लिया बड़ा अच्छा लग रहा है,,, मम्मी आप बहुत अच्छी हो???

,, अब दर्द काम हुआ मेरे लाल मुस्कुराते हुए,,

,, हां मम्मी पहले से थोड़ा सा काम है,, आप क्या करूं यह तो बहुत टाइट हो रहा है,,

,, सरोज कुछ सोचते हुए अपने,, बेटे से कहती है

,, धीरे-धीरे उसको सला ल दर्द कम हो जाएगा,,

,, रोहन तुरंत ही अपने लिंग को सहलाने लगता है और आहे भरते हुए कहता है,,,

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रोहन:- हो मम्मी कितना अच्छा लग रहा है आप कितनी अच्छी उम्र में पहले क्यों नहीं बताइए चीज.....?????

सरोज:- बस बेटा धीरे-धीरे ऐसे ही करता रे तुझे आराम मिल जाएग


,,, दोस्तों बड़े अपडेट दिए हैं 11 और 12 प्रश्न पर पढ़ो और इंजॉय करो और कमेंट करके बताना की कहानी कैसी है
 
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Rajkumarji5

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सरोज बेटा है इसके लिए तो यह कर नहीं सकती सच में डूबी हुई क्या करें अपने बेटे के लिए अगर पति होता तो उसकी मुट्ठी मार कर उसे शांत कर देती,, कितना नादान है मेरा बेटा यह भी नहीं जानता की मुट्ठी मार कर ही लड़के अपने आप को शांत कर लेते हैं,, यह भी मुझे ही बताना होगा क्या,, यह सब मुझे करवाइए अपने दोस्त की बात क्यों नहीं मान लेता जो उसे बताता है बार-बार,,,
 

Monpura

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