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Incest Meri maa

Rajkumarji5

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Update..

,, अपनी मम्मी की झुकी हुई नजरे देखकर,, रोहन कुछ समझने की कोशिश करता है और फिर उसके चेहरे को ऊपर उठकर आंखों में देखते हुए,,

XEX2Rohan --: कुछ देर अपनी मम्मी की आंखों में देखते हुए,,, बड़े ही प्यार से सहमे हुए लफ्जों में एक बात पूछूं मम्मी सच-सच बताओ,,,

सरोज: क्या???

R: आपको कैसी लगती है यह पहनी हुई नथनी,,,

,,, सरोज कुछ देर खामोश होकर अपनी बेटी की निगाहों,

सरोज, अच्छी लगती है अब तो जा यहां से नहीं तो तेरी नानी नाना देख लेंगे,,,

,,, रोहन कुछ देर अपनी मम्मी को देखते हुए,, सर नीचे झुका कर उदास चेहरा बनाकर जाने लगता है,,, सरोज को इस बात का एहसास होता है कि उसका बेटा किसी बात पर उदास है,, उसे थोड़ा बुरा लगता है,, और वह अपने बेटे की मनोदशा समझकर कुछ सोचते हुए,, रोहन को ना चाहते हुए भी आवाज देकर धीरे से,,

सरोज,, क्या हुआ चेहरा क्यों बना लिया आपका उदास क्यों????
रोहन अपनी मां को देखते हुए,, कुछ नहीं बस ऐसे ही,,,

,, यह कहकर रोहन वहां से चला जाता है और,, उसके बाद कुछ नहीं होता अगले दिन. सुबह होते ही रोहन अपनी पैकिंग करने लगता है,, जिसे देखकर उसकी नाना नानी कहते हैं,,

Nani -: अरे बेटा तू तो दो-तीन दिन रुकने वाला था ना अभी यह कहेंगे की तैयारी कर रहा है?

Rohan :- कुछ नहीं नई बस अब मन नहीं है फोन आया है कंपनी से मुझे जाना ही होगा"""

Nana ji:- लेकिन बेटा तूने तो दो-तीन दिन की छुट्टी ली थी ना,,

Rohan :- हां नाना जी छुट्टी ली थी लेकिन फोन आया है मुझे जाना ही होगा वहां पर बहुत कम है,,

,, यह सब बातें रोहन की मम्मी भी सुन रही थी,, अचानक हुए रोहन के बदलाव में उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके बेटे के मन में अब क्या चल रहा है,, वह तो खुद ही मुझसे माफी मांग रहा था अब हो सकता है मुझे कुछ गलती हुई हो,, लेकिन मैं तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा उसे और ना ही उसको डाटा फिर क्यों रोहन इतनी जल्दी जा रहा है,,, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अचानक क्यों जा रहा है,, रोहन अपनी नाना नानी के पास ही अपने बैग में कुछ सामान रख रहा था जिसे सरोज बड़े गौर से देख रही थी,,,

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,, परंतु रोहन का अपनी मम्मी पर कोई ध्यान नहीं था वह सामान पैक कर रहा था तभी रोहन की नानी ने सरोज से कहा,,

नानी जी,, अरे सरोज बेटा क्या हुआ तूने कुछ कहा है क्या इसको इतनी जल्दी जा रहा है कुछ बात भी नहीं रहा,,

,,, सरोज,, नहीं मम्मी मैंने कुछ नहीं कहा अब क्या पता इसके मन की बात कम होगा इसलिए जा रहा है,, वैसे भी यह ज्यादा दिन नहीं रुकता घर,,,

,, यह सब बातें चल ही रही थी कि गांव में शोर सराव होने की आवाज आती है कुछ लोग चिल्ला चिल्ला कर गालियां दे रहे थे,,

गांव का व्यक्ति :- पकड़ो मारो इस भोसड़ी वाले को इसकी हिम्मत कैसे हुई यह सब करने की सेल को जिंदा नहीं छोड़ना इसको,,,

गांव की एक महिला:- इतनी आग लगी है अपनी मां बहन को जाकर पकड़ ले हरामजादे कुत्ते तूने मेरी बेटी को हाथ कैसे लगाया,,, तुझे मैं जिंदा नहीं छोडूंगी

,, यह सब सुनकर सभी घर से बाहर आते हैं तो देखते हैं कि एक महिला हाथ में डरती लिए एक लड़के का गिरवान पड़कर उसे करने के लिए दौड़ रही है,,, कुछ लोगों ने महिला का हाथ पकड़ा हुआ था नहीं तो वह उसे लड़के पर वार करके उसकी गर्दन भी काट सकती थी,, महिला कुछ ज्यादा ही गुस्से में दिखाई दे रही थी,, महिला की उम्र रोहन की मम्मी से ज्यादा ही होगी,, तभी एक बुजुर्ग महिला आती है और,,

बुजुर्ग महिला:- अरे क्या हुआ बेटी क्यों मार रही है ऐसा कुछ बताओगे भी या इसको मार ही डालोगे,,

महिला:- देखो चाचा इसने मेरी बेटी के साथ जबरदस्ती की अभी इसकी उम्र ही क्या है इतनी आग लगी है इसको गांव में यह सब करता है,, सारा दिन आवाज गिरिडीह करता है दूसरे के बच्चों को देख कैसे बाहर रहकर काम कर रहे हैं,, अरे बेचारी इस रोहन को देख कितनी उम्र आ गई है शादी भी नहीं की कोई चर्चा सुना है क्या इसका गांव में,, कितना अच्छा है शहर में काम करता है अपना घर चलना है,,

,, महिला की बात सुनकर सरोज अपने आप पर और अपने बेटे पर गर्भ महसूस करती है,,, उसे आज अपने बेटे की तारीफ पहली बार सुनी थी लोग दिल में भले ही नफरत करते हो लेकिन काम के प्रति रोहन बहुत वफादार था और उसने आज तक कोई हरकत ऐसी नहीं की थी कि उसकी मां की और उसके घर की बदनामी हो,, आप भले ही शराबी था आरसी करता था लेकिन बेटा इस मामले में नंबर वन था वह अपनी मां की इज्जत के लिए और अपने घर की इज्जत के लिए किसी पर गंदी नजर नहीं रखता था,,, महिला को सभी पकड़ कर समझते हैं और उसे हिदायत देते हैं कि इसको सजा पंचायत देगी इस पंचायत में लेकर चलो,, महिला का गुस्सा थोड़ा शांत होता है लड़के को लेकर पंचायत में जाते हैं उसके मां-बाप भी उसके साथ थे जो काफी गुस्से में दिखाई दे रहे थे,, पंचायत में जाकर गांव के सरपंच इस बात का फैसला करते हैं और उसे लड़के को लड़की के पैरों में पड़कर हाथ जोड़कर माफी मांगने के लिए कहते हैं,,, तभी वह लड़की गुस्से में आकर उसे दो चप्पल मरती है और उसको गंदी-गंदी गाली देकर उसके मुंह पर थूक कर दोस्त चप्पल और मरती है और,, अपनी मां के पास चली जाती है,,,

,,, पंचायत में उसे लड़के के मां-बाप को और उसको सख्त हिदायत दी थी कि यदि आइंदा इसने ऐसा किया तो तुम लोगों को गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा,, या तो इसे कहीं बाहर काम करने के लिए भेज दो या अपने लड़के को समझ कर रखो इस तरह की हरकत गांव में बर्दाश्त नहीं होगी,,, लड़के के मां-बाप पंचायत से हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं और अपने बेटे को पीटते हुए घर ले जाते हैं,, लड़की की मां को थोड़ा सुकून मिलता है और उसका गुस्सा शांत होता है,, सभी अपने-अपने घर चले जाते हैं,, रोहन जो शहर जाने की तैयारी कर रहा था वह इस हादसे के बाद,, शहंशाह जाता है कि यह क्या हो रहा है गांव में,, कुछ सोच रहा था कि तभी उसे लड़की की मां उनके घर से गुजरती है जिसे देख सरोज आवाज देती है,,

सरोज:- दीदी दीदी,,,

,, सरोज की बात सुनकर वह महिला उसको देखकर अपनी बेटी से कहती है तुम घर चलो ना आते हो,,,

महिला:- हां सरोज बोल क्या हुआ,,,

सरोज:- क्या हुआ दीदी इस लड़के ने आपकी बेटी को छेड़ा क्या,,

महिला:- हां तूने सुना नहीं इसने मेरी बेटी को अकेले जाते हुए हाथ पकड़ा और गंदी-गंदी बातें कर रहा था उससे,,, वह तो अच्छा हूं मेरी बेटी ने चिल्ला दिया नहीं तो क**** पता नहीं क्या कर देता,,, मुझे तो समझ नहीं आता सरोज आजकल के चूहा से बच्चों को हो क्या गया है,, और एक तेरा बेटा है बेचारा कितनी उम्र आ गई है आज तक कोई बात सुनी है,, तू तो बहुत किस्मत वाली है तुझे इतना अच्छा बेटा मिल पाती भले ही तेरा शराबी था लेकिन बेटा हीरा है हीरा,,

सरोज:- दीदी गांव में रहते हैं तो ऐसा ही माहौल बना कर रखते हैं यह लोग इसलिए तो लड़कियों का बाहर निकलना दुश्वार है,, आप चिंता मत कीजिए दीदी अब यह आइंदा दोबारा ऐसी हरकत नहीं करेगा,,,

महिला:- अरे हां मैंने सुना है तेरे बेटे को देखने वाले आए थे क्या हुआ बात पक्की हुई क्या,,

,, यह सुनते ही सरोज का दिल से जाता है उसे अपने बेटे क्यों लेकर फिर से चिंता होने लगती है,, और वह उदास मन से महिला से कहती है,,

सरोज:- नहीं दीदी ना जाने कब मेरे बेटे की किस्मत सवेरे की,, आपने सही कहा मेरा बेटा तो हीरा है बहुत मेहनत करता है हम लोगों के लिए,,, अभी कल ही आया था और आज जा रहा है कंपनी में,, लड़की वालों ने मना कर दिया है,,

महिला सरोज को दुखी होते देखा,, अरे कोई नहीं चिंता मत कर हो जाएगी तेरे बेटे की शादी अब इतने अच्छे लड़के को कोई ना कोई लड़की तो मिल ही जाएगी,,, मगर मैं तो डांट देता हूं तेरे बेटे की,, की अपनी जवानी को कैसे संभाल के रखना है बेचारा कैसे बर्दाश्त करता होगा इस उम्र तक और आजकल के लिए चूहे से लड़के देखा क्या हाल कर रहे हैं,,, तेरे लड़के के जैसा ताकतवर तू गांव में कोई भी नहीं है,, बस बेचारा थोड़ा समल है तो क्या हुआ,, तुझ पर ही गया है,,

सरोज:- हां दीदी अब ऊपर वाले ने ऐसा रंग दिया है तो क्या कर सकते हैं,, अगर आपकी नजर में कोई लड़की हो तो बताना दीदी,,

महिला:- ठीक है सरोज मैं बात करती हूं इसके पापा से,, अगर कोई अच्छी लड़की होगी तो मैं जरूर बताऊंगी,,, अच्छा मैं चलती हूं,,

,, महिला के मुंह से अपने बेटे की तारीफ सुनकर,, सरोज उसकी बातों पर ध्यान देती है कि कैसे अपनी जवानी को संभाल रहा होगा यह बात उसके दिमाग में घूम रही थी,, और वह खुद भी सोच रही थी कि इतने दिन तक उसका बेटा अपनी गर्मी कैसे बर्दाश्त कर रहा होगा,, कितना अच्छा है उसका बेटा की किसी से कुछ कहता भी नहीं और ना ही उसने आज तक कोई ऐसी हरकत की की उसकी मां की बदनामी हो,,, उसे अपने बेटे पर यह सोचते हुए बहुत प्यार आता है फिर उसके दिमाग में आता है कि वह किस बात को लेकर नाराज है जो इतनी जल्दी जा रहा है,,, फिर कुछ सोचते हुए वह अपने बेटे को देखते हैं जो उसे दिखाई नहीं देता उसके मम्मी पापा बाहर ही बैठे थे,, सरोज समझ गई कि उसका बेटा अंदर कमरे में है,, सरोज तुरंत ही कमरे में जाती है तो देखी है उसका बेटा बेड पर बैठा हुआ कुछ सोच रहा है,,

सरोज :- कुछ देर सोते हैं,, क्या हुआ नाराज है अपनी मां से,,

रोहन:- मैं क्यों नाराज होने लगा आपसे,,

सरोज:- तो फिर यह जल्दबाजी में जाना,, तू तो तीन दिन की छुट्टी पर आया था ना,,

रोहन:- नहीं कंपनी से फोन आया है मुझे जाना होगा,,

सरोज:- अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसके पास आते हुए,, सच-सच बता क्या बात है,, अपनी शादी को लेकर नाराज है,, देख मैंने बात कर ली है कहीं ना कहीं लड़की पसंद आ जाएगी,, और मैं तेरी शादी बहुत खुशी से करूंगी,,

रोहन:- नहीं मन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है,, जब किस्मत में होगा हो जाएगा आप मुझे नाश्ता दो मैं चलता हूं,,

सरोज:- लेकिन अभी नाश्ता तो बना नहीं है इस लड़ाई झगड़े में मैं तो भूल ही गई नाश्ता बनाना,,,

रोहन:- कोई बात नहीं ठीक है मैं चलता हूं रास्ते में नाश्ता कर लूंगा,,,

,, यह क्या कर रोहन अपनी नाना नानी जी के पैर छूता है और अपनी मम्मी के भी पैर छूकर जाने लगता है,, जैसे ही घर से बाहर निकलता है सरोज तेज कदमों से चलती हुई आती है और एक बार अपने बेटे का हाथ पकड़ कर अपनी मम्मी पापा से नजरे बचा कर,,

सरोज:- बेटा तुझे मेरी कसम बताना क्या बात है ऐसा क्यों उदास होकर जा रहा है,,,

,, अपनी मां की कसम को सोते हुए रोहन कुछ देर उसे देखकर,, सोचने लगता है फिर वह कुछ देर सोचने के बाद अपनी मम्मी की आंखों में देखते हुए कहता है,,,

रोहन:- आपने मुझे कल वादा किया था कि आप मुझे अकेले में जैसे पापा जी को बुलाती थी वैसे पुकार होगी,,

,, रोहन के मुंह से यह बात सुनकर सरोज कुछ सोचने लगती है और उसे याद आता है कि उसने उसे वक्त यह बोल दिया था,, क्योंकि वह रोहन से जल्द ही पीछा छुड़ाना चाहती थी,, उसे अपनी गलती का एहसास होता है कि उसने जो बोला था उसका बेटा उसे अपने दिल में रखे हुए हैं,,, रोहन की बात का उसके पास कोई जवाब नहीं होता वह बस सोचते रहती है और रोशन को देखती रहती है,, रोहन इससे आगे कुछ नहीं कहता और अपना बैग उठाकर निकल जाता है,, रोहन घर से निकल चुका था लेकिन सरोज को अभी भी समझ नहीं आ रहा था वह क्या करें,,, कुछ देर सोचने के बाद रोहन की नानी जी की आवाज आती है और आवाज सुनकर सरोज जैसे होश में आती है तो वह देखी है उसका बेटा घर से जा चुका है वह उसे दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं देता,,, यह देखकर सरोज का भी मन उदास हो जाता है और उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं,,

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,, सरोज को बहुत बुरा लगता है पहचान कर भी उसको अपने बेटे की खुशी नहीं दे पा रही थी आखिर एक मां होने के नाते वह इससे ज्यादा कर भी क्या सकती थी,, यह सब वह सोच रही थी जो उसका बेटा चाहता है एक मां वह अपने बेटे को नहीं दे सकती,, आखिर कैसे वह अपने बेटे की तकलीफ दूर करें उसके बेटे के लिए शादी करना एक जरूरत बन गई है और हर व्यक्ति की इच्छाएं होती है,, वह तो सोच रही थी कि उसका बेटा बहुत ही समझदार और सहनशीलता रखने वाला लड़का है,, उसे अपने बेटे पर गर्व भी महसूस होता है और दुख भी,, कि आखिर वह अपने बेटे के लिए क्या करें,, फिर वह मन ही मन सोचती है जो भी हो मैं अपने बेटे की शादी जल्द से जल्द करवाऊंगी,, रोहन अब जा चुका था सरोज भी घर के काम में लग जाती है लेकिन उसके दिमाग में उसके बेटे की चिंता ही दौड़ रही थी,,, शाम होती है लेकिन रोहन का कोई फोन नहीं आता सरोज जी अपने बेटे को फोन करती है,, परंतु रोहन फोन नहीं उठाता,,, काफी रात तक सरोज अपने बेटे को कई बार कॉल कर लेती है लेकिन रोहन फोन नहीं उठाता,,, सरोज को चिंता होने लगती है लेकिन इस चिंता के आगोश में वह नींद में कब चली जाती है पता नहीं चलता,,, अगली सुबह होती है सुबह होते ही सरोज फिर से अपने बेटे को फोन लगाती है लेकिन रोहन फिर भी फोन नहीं उठाता,,, सरोज एक बार फिर से ट्राई करती है इस बार रोहन फोन उठा लेता है,,

रोहन:- हां बोलो क्या हुआ,,,

सरोज:- बेटा फोन क्यों नहीं उठा रहा,, तुझे पता है मैं कितनी परेशान हूं,, एक बार बात तो सकता था कि सही सलामत पहुंच गया है,,

रोहन:- मैं ठीक हूं मम्मी कंपनी जा रहा हूं रखता हूं फोन,,,

,, यह कहकर रोहन फोन रख देता है और उसके बाद सरोज एक बार फिर ट्राई करती है लेकिन रोहन इस बार फोन नहीं उठाता,, सरोज उदास मन से काम में लग जाती है,,, वह मन ही मन सोचती है कि अगर वह रोहन से उसके पापा की तरह बात करेगी तो शायद वह मान जाए,, लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था एक मां अपने बेटे को पति की तरह कैसे पुकार सकती है,, 26 साल से तो उसके बेटे को वह इसी तरह पुकारती थी,, लेकिन अब अचानक एक पति की तरह दर्जा देना बहुत ही मुश्किल था,,, सरोज के लिए यह आसान नहीं था,,, मन ही मन है अपने आप से लड़ रही थी और फिर कुछ सोचते हुए मुस्कुराती है,,

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सरोज मन में विचार करती,,, क्या हो गया अगर उसका बेटा इस बात से खुश है तो मैं उसे अपने पति की तरह ही पुकारूंगी उसका नाम लेकर नहीं बोलूंगी,,, अभी भी गुस्से में है फोन नहीं उठाएगी रात को बात करती हूं,,,,

,, दोस्तों अभी के लिए यही अपडेट दिया है आज कोशिश करूंगा एक और अपडेट देने,, भाई सभी से माफी चाहता हूं मैं मेडिकल लाइन का बंदा हूं इसलिए टाइम नहीं मिलता लेकिन जल्द ही जल्द अपडेट दूंगा आज एक और अपडेट देने की कोशिश करता हूं,, जिसमें आपको आनंद आएगा,,
 

Rajkumarji5

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भाई लोगों कमेंट करके बताना स्टोरी कैसी लग रही है देर से अपडेट देने के लिए माफी चाहता हूं,, लेकिन अगर स्टोरी शांत मन से लिखी जाए तो अच्छी हो सकती है,, जल्दबाजी में लिखी हुई स्टोरी में मजा नहीं आता,,
 
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