,, दोस्तों अब मैं यह कहानी हिंदी में लिखूंगा,,
,, सरोज,, कि सांसऐ से थमने का नाम नहीं ले रही थी,, उसके बेटे के लिंग ने,, उसके दिमाग में अपनी छाप छोड़ दी थी,,, दिल की धड़कन तो मन तुमने का नाम नहीं ले रही थी,,, सर्दी के मौसम में भी उसे पसीना आ रहा था,,, और शरीर में एक अलग ही कंपन महसूस हो रही थी,,, वह डरी हुई दौड़ते हुए रसोई में आ जाती है और अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करती है,,,,
,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह गलत कर रही है यार सही,,, बस मन में भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि है भगवान मेरे बच्चे को सही सलामत रखना,,
सरोज -: मन में विचार करते हुए '''' मुझे समझ नहीं आ रहा भगवान,, यह सही है या गलत,,, मगर मैं क्या करूं एक मन हो तो अपने बेटे का दुख देखा नहीं जाता,,, कितनी उम्र आ गई है उसकी दिन रात तड़पती है उसे देख नहीं सकती मैं,,, और उसका बो तो कितना बड़ा है कैसे संभालता होगा अपनी जवानी को मेरा लाल,,,, मुझे तो विश्वास नहीं होता मेरे बेटे का इतना बड़ा है,,,, हे राम.... यह मैं क्या सोच रही हूं भगवान.....
,, अपने मन में ही खुद से लड़ रही थी सरोज,, सही गलत उसे समझ में नहीं आ रहा था और,, उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का लिंग,, आने लगता है,,, मानव जैसी उसके मन पर उसका उसका भारीपन अभी भी महसूस हो रहा,,,,
सरोज --,,, हे राम... जिसके अंदर भी जाएगा एक बार तो सिकुड जाएगी... क्या कोई कुंवारी लड़की मेरे बेटे को जेल पाएगी,,,, और अगर यह मेरे अंदर गया तो,,, नहीं नहीं,,,, इसे तो मैं भी नहीं चिल पाऊंगी.... हे भगवान कहीं मैं पागल ना हो जाऊं वहां से मैं क्या सोच रही हूं?????
,,, सरोज यह सब सो ही रही थी कि,, रोहन स्नान कर कर वापस आता है,, वह देखता है कि,, किसी विचार में खोई हुई है, उसकी मम्मी,,, कुछ देर रोहन अपनी मम्मी के चेहरे पर निगाह डालता है,, इतनी गहरी सोच में थी कि उसे ध्यान ही नहीं जाता इसका बेटा भी उसे देख रहा है,,,, तभी रोहन अपनी मम्मी को आवाज देता है,,,, मेरे प्यार और धीरे से कहते हैं,,
रोहन - क्या हुआ मम्मी क्या सोच रही हो??? और मुस्कराने लगता है,,,
,,, यह सुनकर सरोज अपनी नींद से जाती है,, और तुरंत ही सहम जाती है अपनी बेटी की आवाज सुनकर,,, वह कुछ जवाब नहीं देती और लाज,,,और शर्मा से सर झुका लेती है,,
,,, इस तरह शर्म से झुके हुए सर को देखकर रोहन को अपनी मम्मी पर बहुत प्यार आता है,,, और वह उसके मन की दशा को समझ कर प्यार से उसको दोनों कंधों पर हाथ रखकर कहता है,,,,
रोहन --- माफ करना मम्मी मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था,,, इधर देखो मेरी आंखों में,,,
,,, और अपनी मम्मी को अपनी और घूम कर उसकी आंखों में देखते हुए कहता है,,
रोहन -- मैं जानता हूं यह गलत है मम्मी,, लेकिन न जाने क्यों जब से मैंने आपको आपकी नाक मैं यह नथ पहने है,,, तब से मुझसे बर्दाश्त नहीं होता,, ऐसा पहले कभी नहीं होगा,,,,
सरोज --: कोई नहीं बेटा लेकिन आगे से ऐसा कभी,, नहीं करना दुनिया की नजर में यह पाप है मेरा,,, बच्चे!!!! वैसे तेरी नाथ की तारीफ तेरी नानी भी कर रही थी,,, क्या तुझे यह बहुत सुंदर लगती है,,
,, रोहन एक बार अपनी मम्मी की नाक की ओर देखा है,, और अपनी पहनी हुई नाथ को देखते हुए कहता है,,,
रोहन :- मम्मी मेरी आंखों में देखकर बताओ क्या मैं झूठ बोलता हूं????
,, सरोज अपने बेटे की आंखों में देखते हुए,,
सरोज -:: मुझे क्या पता हो सकता है तुम मुझे,,,
,, सरोज बस इतना ही कह पाती है और नजर झुका लेती है,,, रोहन समझ गया था कि उसकी मम्मी क्या बोलना चाहती है लेकिन एक मां बेटे के रिश्ते के नाते वह बोल नहीं पाई,, और शर्म से अपनी नज़रें झुका लेती है,,
