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Incest Mukkader ka sikander

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Akash18

Magic You Looking For Is In The Work You Avoiding
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Bhai rishto ki rakh kahani bahut time se dhund rha hu net pe par mil nhi Rahi hai, please uska koi link send karo yr
 
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Hamantstar666

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4 साल बीत चुके थे... अलीना अब 22 साल की हो गई थी और सिकंदर 4 साल का... अलीना अब समझ गई थी की उसे एक बच्चे को पालना है... जो उसके बिना सादी किये उकसे गोद मे आ गया है.. समाज के तनो से बचने का एक ही तारीका है खुद को कामयाब बनाओ.. अलीना इस के लिए जी तोर मेहनत करने लगी.. और कुछ ही सालो मे वो एक नामी बुल्डर बन चुकी थी...उसके भाई और बाप के सपोर्ट ने उसे यहाँ तक पहुंचाया था...

अलिना के ऑफिस में फोन की घंटी बजी। "हाँ, मैं अभी आ रही हूँ।" उसने गुस्से से कहा और फोन पटक दिया।

वो जल्दी से घर पहुँची, देखा कि सिकंदर अपने कपड़े पूरे पेंट से खराब कर चुका था। रंग-बिरंगे हाथ, चेहरे पर भी पेंट के निशान। पास ही दीवार पर कुछ उल्टा-सीधा बना रखा था।

अलिना की आँखों में गुस्सा उमड़ पड़ा। "सिकंदर!" उसकी तेज़ आवाज़ से पूरा घर हिल गया।

सिकंदर डर कर कोने में दुबक गया। "मम्मा, मैंने कुछ नहीं किया…"

अलिना गुस्से में आगे बढ़ी, "ये क्या किया तूने? घर को कोई पेंट करता है क्या?"

सिकंदर की आँखों में आँसू आ गए, "मम्मा, मैंने आपके लिए हार्ट बनाया था... आप कहती हो ना कि मैं आपका शहज़ादा हूँ। तो मैंने लिखा था 'माई मम्मा, माई क्वीन'..."

अलिना ठिठक गई। उसने दीवार पर नजर डाली— टेढ़ा-मेढ़ा दिल बना था, जिस पर छोटे-छोटे अक्षरों में "माई मम्मा, माई क्वीन" लिखा था।

एक पल के लिए उसका दिल पिघल गया, लेकिन अगले ही पल वो खुद को संभालते हुए बोली, "ये सब बेकार की बातें मत कर। तू दिन-ब-दिन सर पर चढ़ता जा रहा है। जा, मुँह धो और ये सब साफ कर!"

सिकंदर मायूस हो गया। उसने धीरे से कहा, "मम्मा, आप मुझसे प्यार नहीं करतीं?"

अलिना ने कोई जवाब नहीं दिया। वो गुस्से में थी, लेकिन उसके दिल में कहीं कुछ टूट रहा था।

रात में जब सब सो चुके थे, सिकंदर अपने खिलौनों से खेल रहा था। तभी अलिना आई और उसे गोद में उठा लिया।

"मम्मा को अकेला छोड़ देगा तू?"

सिकंदर ने सिर हिलाया, "नहीं मम्मा, मैं आपको कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा।"

अलिना ने उसे सीने से लगा लिया। "पता नहीं तुझसे इतना गुस्सा क्यों आता है मुझे..."

सिकंदर ने अपनी नन्हीं हथेलियाँ उसकी गालों पर रखीं, "मम्मा, जब आप गुस्सा होती हो, तब भी आप मुझसे प्यार करती हो ना?"

अलिना की आँखों में नमी आ गई, लेकिन उसने जल्दी से उसे छुपा लिया।

"पागल है तू। सो जा अब!"

सिकंदर मुस्कुराया, "मम्मा, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा, तब भी आप मुझे ऐसे ही गोद में लोगी?"

अलिना ने गहरी साँस ली, "अगर तू मुझसे दूर गया, तो तुझे ढूंढकर वापस लाऊँगी।"

सिकंदर हँसते हुए उसकी गोद में समा गया, और अलिना को एहसास हुआ कि जितनी नफ़रत वो सिकंदर से जताने की कोशिश करती थी, उतनी ही गहराई से वो उसे प्यार भी करती थी।

लेकिन ये रिश्ता अभी भी अधूरा था…




अलिना का रुख़ सिकंदर के लिए अजीब था। एक पल में वो उसे दूर कर देती, और दूसरे ही पल उसे सीने से लगा लेती।

एक दिन सिकंदर खेलने के दौरान गिर गया और उसके घुटने छिल गए। जैसे ही वो रोते हुए अलिना के पास पहुँचा, उसने गुस्से में कहा—

"तू गिर गया? तो क्या मैं तुझे उठाऊँ? हर वक़्त कोई तेरी देखभाल नहीं करेगा, समझा?"

सिकंदर की आँखों में आँसू थे। उसने धीरे से कहा—

"लेकिन मम्मा, जब आप रोती हो, तब मैं हमेशा आपके पास आता हूँ।"

अलिना ठिठक गई।

रात को जब सब सो चुके थे, तो उसने धीरे से सिकंदर के पास जाकर देखा। उसका छोटा सा हाथ अब भी तकिए पर पड़ा था, जैसे वो सोते हुए भी किसी को पकड़ने की कोशिश कर रहा हो।

अलिना के दिल में कुछ चुभा। उसने उसके छोटे से घुटने पर मरहम लगाया और बुदबुदाई—

"पता नहीं तुझसे इतना प्यार भी क्यों है…"

तभी सिकंदर करवट बदलकर उसकी गोद में समा गया। वो आधी नींद में बुदबुदाया—

"मम्मा, मैं अच्छा बच्चा बनूँगा… बस आप मुझसे प्यार करना बंद मत करना…"

अलिना की आँखों में आँसू आ गए। उसने उसकी पीठ सहलाई और खुद से कहा—

"सिकंदर, तू नहीं जानता… मुझे खुद नहीं पता कि तुझे प्यार करूँ या तुझसे दूर भागूँ…"

पर एक बात तो साफ थी— वो सिकंदर के बिना जी नहीं सकती थी।

ऐसे ही दिन गुजरता जा रहा था.. एक दिन

अलिना अपने कमरे में तकिए में मुँह छुपाए रो रही थी। आज उसके हाथ से एक बहुत बड़ा टेंडर निकल गया था। उसके अब्बू-अम्मी पहले ही गुस्से में थे, और अब भाई भी नाराज़ था। सबकी बातें उसे अंदर तक चुभ रही थीं।

तभी दरवाज़े के पास हल्की हलचल हुई। छोटे-छोटे कदमों की आवाज़ आई और एक नन्हा सा शरीर अलिना के बिस्तर पर चढ़ आया।

सिकंदर (मासूमियत से) – "मम्मा, तुम रो रही हो?"

अलिना (आँसू पोंछते हुए, गुस्से में) – "नहीं, धूल चली गई आँख में!"

सिकंदर (हाथ जोड़कर) – "अल्#लाह जी से बोलूँ? वो पंखा बंद कर देंगे!"

अलिना (झुंझलाकर) – "पंखे से धूल नहीं आई, मेरे नसीब में धूल थी!"

सिकंदर (सोचते हुए) – "ओह! तो अब्बू-अम्मी ने तुम्हें भी ज़मीन पर घुटनों के बल चलाया क्या?"

अलिना ने आँसू पोंछते हुए उसे घूरा। सिकंदर झट से उसके आँसू देखकर खुद भी मुँह फुलाकर रोने लगा।

अलिना (चौंककर) – "अब तुझे क्या हुआ?"

सिकंदर (सुबकते हुए) – "तुम रो रही हो ना? तो मुझे भी रोना चाहिए! टीम वर्क मम्मा!"

उसने सिकंदर को गोद में खींचकर कसकर गले लगा लिया।

अलिना (हल्की मुस्कान के साथ) – "पगले, रोने से कुछ नहीं होता।"

सिकंदर (नाक सुड़कते हुए) – "अच्छा? फिर तुम क्यों रो रही थी?"

अलिना को जवाब नहीं सूझा। उसने धीरे से सिकंदर के बालों में उंगलियाँ फेरीं और कहा—

"क्योंकि कभी-कभी, जब दिल बहुत भारी हो जाता है, तो उसे हल्का करने के लिए रोना पड़ता है।"

सिकंदर (मासूमियत से) – "तो फिर तुम हँस क्यों नहीं देती? हँसने से भी दिल हल्का हो जाता है!"

अलिना ने पहली बार दिल से हँसी। इस नन्हे से बच्चे ने उससे ज़्यादा ज़िंदगी समझ ली थी। उसने सिकंदर के गाल खींचते हुए कहा—

"अगर तू मेरे साथ है ना, तो मुझे रोने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।"

सिकंदर (चमकती आँखों से) – "तो फिर हमेशा मेरे साथ रहो ना, मम्मा!"

रात के उस अंधेरे में, जब सारी दुनिया सो रही थी, अलिना और सिकंदर की दुनिया बस एक-दूसरे के आसपास सिमट गई थी।

अलिना ने सिकंदर को अपने सीने से लगाया, उसकी नन्हीं उंगलियाँ उसके गालों पर फिर रही थीं, जैसे वो उसकी उदासी को पोंछ देना चाहता हो।

सिकंदर (मासूमियत से) – "मम्मा, क्या तुम हमेशा ऐसे ही रोती हो जब कोई तुम्हें डाँटता है?"

अलिना (हल्की मुस्कान के साथ) – "नहीं, बस कभी-कभी, जब दिल बहुत दुखी होता है।"

सिकंदर (सोचते हुए) – "फिर जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और कोई मुझे डाँटेगा, तो मैं भी रोऊँगा?"

अलिना (चौंककर) – "नहीं! मेरा बेटा कभी नहीं रोएगा!"

सिकंदर (आँखें बड़ी करते हुए) – "तो फिर तुम क्यों रो रही थी?"

अलिना को कोई जवाब नहीं सूझा। वह सिर्फ उसे देखती रही। यह चार साल का बच्चा हर बार उसे उसकी ही बातों में फँसा देता था।

सिकंदर (शरारती अंदाज़ में) – "मम्मा, तुम बहुत गड़बड़ हो!"

अलिना (भौंहें उठाकर) – "अच्छा? और तू क्या है?"

सिकंदर (गर्व से) – "मैं सुपरहीरो हूँ! जब तुम रोती हो, तो मैं तुम्हें हँसाने के लिए आता हूँ!"





अलिना ने सिकंदर को कसकर गले लगा लिया।

अलिना (मुस्कुराते हुए) – "तू सच में मेरी सबसे बड़ी ताकत है, सिकंदर!"

सिकंदर (छाती चौड़ी करके) – "और सबसे बड़ा सर दर्द भी!"

अलिना हँसते-हँसते बिस्तर पर गिर पड़ी और सिकंदर उसके ऊपर चढ़कर खिलखिलाने लगा। उस रात, उसकी दुनिया के सारे दर्द सिकंदर की हंसी में घुल गए थे।

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सर्दियों की वो शाम, जब अलीना अपने नए बिज़नेस प्रोजेक्ट के सिलसिले में होटल के आलीशान कॉन्फ्रेंस हॉल में दाखिल हुई, तो वहाँ की रॉयल शानो-शौकत ने उसे कुछ सेकंड के लिए रोक दिया।

उसकी मुलाकात आज एक बहुत बड़े इन्वेस्टर से होने वाली थी— नवाब शेरज़ादा मीर हसन।

हॉल के एक कोने में, सिल्क के शेरवानी और काली पगड़ी में बैठे नवाब मीर हसन की शख्सियत किसी शेर से कम नहीं थी। गहरी आँखें, घनी दाढ़ी और एक ऐसा रुतबा कि पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया था। जैसे ही अलीना उनके करीब पहुँची, उन्होंने नज़र उठाकर उसकी ओर देखा।

मीर हसन (गहरी आवाज़ में) – "तो आप हैं मिस अलीना शाह?"

अलीना (प्रोफेशनल अंदाज़ में) – "जी, और आप नवाब मीर हसन। बहुत सुना है आपके बारे में।"

मीर हसन (हल्की मुस्कान के साथ) – "और मैंने भी। आप जिस तेज़ी से बिज़नेस की दुनिया में नाम कमा रही हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। पर आप जितनी खूबसूरत हैं, उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक भी लगती हैं।"

अलीना (हैरान होते हुए) – "खतरनाक?"

मीर हसन (हल्का हँसते हुए) – "हाँ, क्योंकि जिस औरत में इतनी हिम्मत हो कि वो अकेले ही अपनी दुनिया बना सके, वो किसी तूफान से कम नहीं हो सकती।"

अलीना उसकी बातों से ज़रा असहज हो गई, पर उसने खुद को संयम में रखा।

अलीना (मुस्कान दबाकर) – "मैं यहाँ बिज़नेस की बात करने आई हूँ, नवाब साहब। तारीफें सुनने की आदत नहीं है मुझे।"

मीर हसन (गंभीरता से) – "और मैं सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों की तारीफ करता हूँ, जो तारीफ के लायक होती हैं।"

दोनों की नज़रें टकराईं, जैसे एक शेरनी और एक शेर आमने-सामने खड़े हों। हॉल में मौजूद सभी लोग इस टकराव को महसूस कर सकते थे।

मीर हसन (धीरे से झुककर) – "ख़ैर, बिज़नेस की बात करते हैं। मुझे आपका प्रोजेक्ट पसंद आया, लेकिन मैं किसी ऐसे इंसान पर भरोसा नहीं करता, जिसे मैं ठीक से जानता न हूँ।"

अलीना (मजबूत लहजे में) – "तो फिर कैसे भरोसा करेंगे?"

मीर हसन (हल्की मुस्कान के साथ) – "जब आप मेरे साथ एक डिनर करेंगी और मुझे अपनी कहानी सुनाएंगी।"

अलीना कुछ देर तक सोचती रही। यह आदमी न सिर्फ़ रुतबे वाला था, बल्कि उसकी शख्सियत भी किसी पहेली से कम नहीं थी। उसे पहली बार किसी से इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ रहा था।

अलीना (गहरी साँस लेते हुए) – "अगर मेरे काम के लिए ज़रूरी है, तो ठीक है।"

मीर हसन (आँखों में चमक के साथ) – "तो फिर यह एक डील समझिए।"

घर पहुंचते ही उसकी आँखे सिकंदर को ढूंढने लगी सिकंदर आम तोर पर उसे बाहर हीं खरा मिलता था.. वो अलीना के आने का इंतज़ार करता रहता था... पर आज सिकंदर को ना देख कर वो चिढ़चड़ी होने लगी....

अलीना( भोये चढ़ाते हुवे )- सिकंदर कहाँ है...

नौकरानी- बीबी साहिबा... छोटे साहब छत पर पतंग उड़ा रहे है....

अलीना का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था। जैसे ही उसने सुना कि सिकंदर छत पर पतंग उड़ा रहा है, उसका पारा और चढ़ गया। उसे गुस्सा इस बात पर नहीं था कि वो अब तक खेल रहा था, बल्कि इस बात पर था कि वो घर आते ही सबसे पहले सिकंदर को क्यों नहीं देख पाई!

तेज़ कदमों से सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उसने छत का दरवाज़ा ज़ोर से खोला। सिकंदर, जो अपनी पतंग की डोर को ऊँचाई तक ले जाने में मग्न था, अचानक झटके से पलटा। उसकी आँखें चमक रही थीं, बाल बिखरे हुए थे और हाथ में पतंग की डोर थी।

अलीना (गुस्से से चिल्लाते हुए) – “सिकंदर! तू यहाँ क्या कर रहा है? रात के इस पहर पतंग उड़ा रहा है?”

सिकंदर समझ गया कि उसकी शामत आ चुकी है। उसने धीरे से पीछे हटने की कोशिश की, मगर तब तक अलीना उसके करीब पहुँच चुकी थी। उसने वहीं रखी पतली छड़ी उठाई और सिकंदर के हाथ पर मार दी।

सिकंदर (रोते हुए भागता हुआ) – "अम्मी मत मारो! अम्मी बस एक और पतंग उड़ानी थी!"

अलीना (गुस्से से डाँटते हुए) – "तुझे समझ नहीं आता? जब मैं घर आती हूँ, तो सबसे पहले तेरा चेहरा देखना चाहती हूँ! और तू यहाँ पतंगों में मस्त है! तुझे मेरी ज़रा भी परवाह नहीं है?"

सिकंदर आँखों में आँसू लिए छत के दूसरे कोने की तरफ भागा।

सिकंदर (हकलाते हुए) – "मम्मी, मैंने सोचा था आप बिज़नेस की मीटिंग से थक गई होंगी... इसलिए मैंने आपको डिस्टर्ब नहीं किया।"

अलीना (गुस्से में, छड़ी पटकते हुए) – "बहाने मत बना! अगर मैं कह रही हूँ कि तुझे सबसे पहले मेरे पास आना चाहिए, तो इसका मतलब यही है!"

सिकंदर और तेज़ रोने लगा।

सिकंदर (गिड़गिड़ाते हुए) – "मम्मी, बस एक पतंग! एक आखिरी पतंग काटनी थी!"

अलीना गुस्से से भरी हुई थी, लेकिन जैसे ही उसने सिकंदर के चेहरे को देखा, कुछ अजीब सा महसूस हुआ। उसकी छोटी-छोटी आँखों में आँसू थे, होंठ काँप रहे थे, और वो डर से सहमा हुआ था। अलीना का दिल अचानक पिघलने लगा।

उसका गुस्सा एक पल में हवा हो गया और उसके भीतर एक अलग ही एहसास दौड़ पड़ा—ये कैसा पागलपन था उसका? पहले गुस्सा, फिर प्यार... फिर गुस्सा, फिर प्यार...

उसने छड़ी दूर फेंकी और सिकंदर के पास आकर उसे अपनी बाहों में भींच लिया।

अलीना (धीमे स्वर में) – "तू जानता है ना, मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ?"

सिकंदर (सिसकते हुए) – "लेकिन आप मुझे बहुत मारती भी हो मम्मी..."

अलीना हल्का सा हँसी और उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा।

अलीना (मुस्कराते हुए) – "मार इसलिए खाता है क्योंकि तू बहुत ज़िद्दी है... और तुझे पता है, तेरा मेरी नज़रों से दूर होना मुझे पसंद नहीं।"

सिकंदर अपनी माँ के सीने में मुँह छुपा लेता है और मासूमियत से कहता है –

सिकंदर (धीमे से) – "मम्मी, मैं फिर भी पतंग उड़ाऊँगा!"

अलीना फिर गुस्से से उसे देखती है, लेकिन अगले ही पल उसका गाल पकड़कर हल्के से खींच देती है।

अलीना (हँसते हुए) – "अगर फिर उड़ाई, तो छत से नीचे फेंक दूँगी तुझे!"

सिकंदर उसकी बाहों में छुपकर हँसने लगता है, और अलीना खुद भी समझ नहीं पाती कि ये गुस्सा है या बेइंतेहा मोहब्बत...

खेर डिनर की रात आ गई....



रात का माहौल बेहद शानदार था। आलीशान रेस्तरां के चारों ओर मोमबत्तियों की हल्की रोशनी थी, और बैकग्राउंड में धीमी-धीमी सुरमई धुन बज रही थी। अलीना एक खूबसूरत काले रंग की गाउन में थी, जिसने उसकी खूबसूरती को और भी निखार दिया था। वहीं, हसन मिर्ज़ा अपनी रौबदार शख्सियत के साथ बैठे थे—एक हैंडसम, चार्मिंग नवाब, जिनकी आँखों में गहरी कहानियाँ छुपी थीं।

डिनर के दौरान, हसन मिर्ज़ा ने अचानक मुस्कराते हुए कहा—

हसन (हल्की मुस्कान के साथ) – "अलीना, इतनी खूबसूरत रात में सिर्फ बातें करना तो नाइंसाफी होगी। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे साथ एक डांस करो।"

अलीना (चौंककर, हल्का हँसते हुए) – "मैं... मैं डांस नहीं करती।"

हसन (आँखों में शरारत के साथ) – "ओह, यह तो बड़ा अन्याय हुआ! इतनी हसीन औरत, और डांस से डरती है?"

अलीना (मुस्कराते हुए) – "डरती नहीं, बस...आदत नहीं है।"

हसन (हल्के से झुकते हुए, हाथ आगे बढ़ाते हुए) – "तो फिर आदत डालनी पड़ेगी। मैं नवाब हूँ, हुक्म देना मेरा काम है। और आज मेरा हुक्म है—डांस!"

अलीना ने कुछ पल उसे देखा, फिर हल्की मुस्कान के साथ उसका हाथ थाम लिया। हसन उसे धीरे-धीरे डांस फ्लोर की ओर ले गया।

धीमी रोशनी में, संगीत की मधुर धुन पर दोनों थिरकने लगे।

हसन (उसकी कमर पर हाथ रखते हुए, धीमे स्वर में) – "तुम्हें शायद पता नहीं, लेकिन तुम्हारी आँखें किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी हैं।"

अलीना (हल्का हँसते हुए) – "ओह! तो आप flirting भी कर सकते हैं?"

हसन (गहरी मुस्कान के साथ) – "नवाब की जबान से निकले शब्द फ़्लर्ट नहीं, शायरी कहलाते हैं।"

अलीना हल्का सा मुस्करा दी, लेकिन तभी हसन की आँखों में एक गहरी उदासी झलक पड़ी।

अलीना (नरम आवाज़ में) – "क्या हुआ?"

हसन (थोड़ा रुककर, फिर धीमी आवाज़ में) – "आज से कुछ साल पहले, इसी तरह मैंने अपनी बीवी का हाथ थामा था। वह मेरी जान थी…लेकिन अब वो इस दुनिया में नहीं रही।"

अलीना (हैरानी से) – "ओह... मुझे अफ़सोस है।"

हसन (हल्की मुस्कान के साथ, लेकिन दर्द छुपाते हुए) – "ज़िंदगी किसी के बिना नहीं रुकती, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो भुलाए नहीं जा सकते।"

अलीना (धीमे स्वर में) – "आप उससे बहुत प्यार करते थे, है ना?"

हसन (गहरी नज़रें अलीना पर डालते हुए) – "हाँ, शायद उतना ही, जितना कोई अपनी सांसों से करता है। लेकिन जानते हो अलीना, जब कोई बिछड़ जाता है, तो उसकी यादें एक साए की तरह हमारे साथ रहती हैं...और कभी-कभी वो साया किसी और की मुस्कान में भी दिखने लगता है।"

अलीना उसकी गहरी नज़रों को पढ़ने की कोशिश करने लगी, लेकिन वह तुरंत अपनी नजरें झुका गई।

अलीना (हल्के से हँसते हुए, माहौल हल्का करते हुए) – "अगर आपकी बीवी ने आपको इतना रोमांटिक देखा होता, तो शायद वो भी आपसे और ज्यादा प्यार करने लगती।"

हसन (मुस्कुराते हुए, धीरे से उसकी उंगलियों को छूते हुए) – "शायद... लेकिन अगर वो यहाँ होती, तो मुझे तुम्हारे साथ डांस करने की इजाज़त कभी न देती।"

अलीना हल्के से हँस दी, लेकिन उसके दिल में कहीं न कहीं हसन के लिए सहानुभूति जाग उठी थी। उसे पहली बार लगा कि इस नवाब की रौबदार शख्सियत के पीछे एक टूटा हुआ दिल भी छुपा है…



धीरे-धीरे, अलीना और हसन की नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं। अक्सर दोनों को बड़े बिज़नेस इवेंट्स में साथ देखा जाता। कभी किसी रेस्तरां में, तो कभी किसी आलीशान महल में होने वाली पार्टियों में—हर जगह उनके रिश्ते के चर्चे होने लगे थे।

सुबह की ताज़ा अख़बार में एक हेडलाइन छपी:

"नवाब हसन मिर्ज़ा और बिज़नेस टायकून अलीना—क्या ये रिश्ता महज़ बिज़नेस पार्टनरशिप है या कुछ और?"

अलीना ने अख़बार की ये लाइनें पढ़कर हल्की मुस्कान दी। उसे महसूस होने लगा था कि उसकी ज़िंदगी में फिर से ख़ुशियाँ दस्तक देने लगी हैं।

हसन का न्योता

एक दिन हसन ने अलीना को अपने महल में आमंत्रित किया।

हसन (मुस्कुराते हुए) – "आज तुम्हें किसी ख़ास शख़्स से मिलवाना है।"

अलीना (हैरानी से) – "कौन?"

हसन (हल्के से मुस्कराकर) – "मेरे बेटे से।"

अलीना (थोड़ा चौंकते हुए) – "तुम्हारा बेटा?"

हसन (गर्व से) – "हाँ, शाहबाज़ मिर्ज़ा।"



महल में दाखिल होते ही, अलीना की नज़र शाहबाज़ मिर्ज़ा पर पड़ी—एक 22 साल का नौजवान, लंबा, बेहद रौबदार और आकर्षक। उसके चेहरे पर वही नवाबी ठसक थी, जो उसके पिता में थी।

शाहबाज़ (हसन से, हल्के मज़ाकिया लहज़े में) – "अब्बा, ये कौन हैं जिनके लिए आप इतने बेचैन थे?"

हसन (मुस्कुराते हुए) – "अलीना, मेरी बहुत खास दोस्त।"

शाहबाज़ (अलीना को देखता हुआ, हल्के से मुस्कुराकर) – "तो आप ही हैं, जिनकी तस्वीरें अब्बू के साथ हर अख़बार में छप रही हैं?"

अलीना उसकी बेबाकी पर हल्का सा हंस पड़ी।

अलीना (शरारत से) – "और तुम ही वो बेटे हो, जिसकी तारीफ हसन मिर्ज़ा करते नहीं थकते?"

शाहबाज़ (हंसते हुए) – "लगता है अब्बा ने आपको मेरी अच्छाइयाँ ही बताई हैं, बुराइयाँ नहीं।"

हसन (गंभीर लहज़े में) – "क्योंकि बुराइयाँ तुम्हारे अंदर हैं ही नहीं, शाहबाज़!"

शाहबाज़ ने हल्की मुस्कान दी और फिर अलीना से बोला—

शाहबाज़ (मज़ाकिया अंदाज़ में) – "वैसे, अगर आप अब्बू की जिंदगी में आ रही हैं, तो एक शर्त है।"

अलीना (हैरानी से) – "क्या?"

शाहबाज़ (हंसते हुए) – "आपको मुझसे भी दोस्ती करनी होगी!"

अलीना हंस पड़ी, और हसन मिर्ज़ा अपने बेटे को गर्व से देखने लगे।



उस शाम, हसन मिर्ज़ा ने अलीना को अपने खूबसूरत बागीचे में ले जाकर कहा—

हसन (गंभीर होते हुए) – "अलीना, मैं जानता हूँ कि तुमने बहुत कुछ सहा है…लेकिन क्या अब अपनी ज़िंदगी को एक नया मौका दोगी?"

अलीना (धीमे स्वर में) – "मौका…कैसा मौका?"

हसन (गहरी नज़रों से देखते हुए) – "ख़ुश रहने का। प्यार करने का। फिर से जीने का।"

अलीना ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन पहली बार उसे एहसास हुआ कि ज़िंदगी अब उसे दूसरा मौका दे रही है…
 
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Raj142

Well-Known Member
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JABARDAST UPDATE BHAI
KEEP POSTING.....
 

rajeev13

Well-Known Member
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dher dhre story apne origenal plot per aayege... Mujhe samay chahye plot bildupp ke liyee...

ye story mere pichle dono story se bheter hoge.. Ye mera manna hai
भाई शुरुवात तो बेहतर मगर कहानी को लेकर कुछ संशय है, क्या आपको PM कर सकता हूं इसे लेकर ?
 
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