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Incest Sagar (Completed)

Pitaji

घर में मस्ती
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Update..1.


" भैया भैया ‌, दीदी बुला रही है ।"

मैंने देखा सामने राहुल खड़ा था । राहुल मेरा कजन भाई । १८ साल का एक खुबसूरत और बहुत ही अच्छा लड़का ।

" क्या हुआ ? क्यों बुला रही है ? - मैंने पूछा ।

" पता नहीं भैया ।"

" तु चल , मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं ।"

" क्या बात है सागर ? " - अमर ने पूछा ।

अमर मेरे स्कूल के समय से ही खास दोस्त था । हमने अपनी जिंदगी में काफी सारी खुशियां और गम साथ साथ ही बांटे थे । वो भी मेरी ही उम्र का २४ साल का बांका नौजवान था ।

एक टी स्टाल पर बैठे चाय सिगरेट का लुत्फ उठा रहे थे हम ।

" पता नहीं यार । मैं निकलता हूं , बाद में मिलते हैं ।"

मैं वहां से लम्बे लम्बे डग भरता हुआ घर निकल गया ।

मैं सागर । सागर चौहान । दिल्ली से विलोंग करता हूं । इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर का स्टुडेंट हूं । हाईट पांच फुट दस इंच । सिक्स पैक एब्स तो नहीं लेकिन तीन , चार तो है ही । देखने में भी स्मार्ट हूं । ऐसा लोग कहते हैं । थोड़ा बहुत जीम और एक्सरसाइज का भी असर पड़ा है ।

मैं अपने घर से कुछ कदम दूर ही था कि डैड को रास्ते से आते हुए देखा ।

" सागर , कहां थे ? तुम्हारी माॅम कब से खोज रही है " - डैड ने कहा ।

" क्या हुआ ?"

" मुझे पता नहीं । शायद श्वेता को कुछ काम है ।"

" श्वेता दी अपने घर पर ही है क्या ?"

" हां । जाओ देखो , क्या बात है ।"

" ठीक है ।"

डैड से कहकर मैं घर चला गया ।

मेरे डैड राजेश चौहान । बैंक में असिस्टेंट मैनेजर । उम्र ५१ साल । मेरी माॅम वर्षा । उम्र ४३ साल । उन दोनों की अरेंज मैरेज थी । शादी के पच्चीस साल होने वाले थे । उनके संतानों में मेरे अलावा सिर्फ एक मेरी छोटी बहन थी जो अभी ग्रेजुएशन के लास्ट इयर में थी । उसकी उम्र कुछेक महिने बाद इक्कीस को शुरू होने वाली थी ।
Wooooooow sanju ji aapki story ..... kya baat hai main ise jaroor padhunga jis insaan ke coments itne shandaar hote hai uski story apne aap mein ek meel ka patthar hogi ..... kyuki aap ye story complate ho gayi hai isliye ise padhne me bahut maja aane wala hain
 

sam21003

Mirtyu hi satya hai
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Update 9 B.


" कपड़े तो चेंज कर लो ।" मैंने कहा ।

" नहीं । पहले बताओ राजीव से क्या बात हुई थी ।" श्वेता दी आराम से बिस्तर पर अपने को एडजस्ट करते हुए बोली ।

मैंने इमानदारी से पुरी बात बताई । वो राजीव के अनुष्का के साथ नाजायज संबंधों को सुनकर भड़क गई । मैंने बड़ी मुश्किल से उसे शान्त किया । मैंने उसे समझाया कि अनुष्का राजीव का पहला प्यार था और यदि वो राजी होती तो वो आज के तारीख में राजीव की पत्नी होती । और वैसे भी अनुष्का शादी शुदा है और वो अपने फिजूलखर्ची और लालची स्वभाव के कारण अपने पति को छोड़ने वाली नहीं है ।

वो आश्वस्त हुई । फिर बोली " एक और बात है ।"

" क्या?"

उसने चिंतित स्वर में कहा -" मुझे उस घर में सोने से डर लगता है । बाथरूम में जाती हूं तो ऐसा लगता है जैसे अमर अभी उठ कर खड़ा हो जाएगा और मुझे...."

मुझे उसकी बात जायज़ लगी । अमर की मौत कोई स्वाभाविक मौत तो थी नहीं । उसका कत्ल हुआ था । तो डरना वाजिब ही था । सोचते हुए मुझे एक आइडिया आया ।

मैंने कहा -" तुम लोग क्यों नहीं वो फ्लेट बेच देते हो ? और गाजियाबाद छोड़ कर दिल्ली में ही शिफ्ट हो जाओ ।"

" तुम्हें इतना आसान लगता है ? फ्लेट खरीदना अमूमन आसान होता है । लेकिन बेचना बहुत मुश्किल होता है । और गरजु हो कर बेचने में फ्लेट की कीमत भी सही नहीं मिलती है ।"

" इसका एक रास्ता हो सकता है ।"

" क्या ?"

" तुम लोग अमर के घर शिफ्ट हो जाओ । अमर के घर में उसके मां के अलावा और कोई भी नहीं है । वो बेचारी अकेली घर में अमर के यादों में डुबी रहती है । तुम लोगों के आने से उनका अकेलापन दूर हो जाएगा और उनका दिमाग भी दुसरी चीजों की तरफ केन्द्रित होगा । और फ्लेट की जब सही कीमत मिले तब बेच देना ।"

" बोल तो तुम सही रहे हो लेकिन क्या वो हमे अपने घर में रहने देगी ।"

" उसकी चिंता मत करो । तुम राजीव जीजू से बात करो फिर अपनी राय मुझे बता देना । और उनके लिए भी तो ये डिसीजन अच्छा ही होगा , वहां से उनकी आफिस काफी नजदीक हो जाएगी ।

श्वेता दी को ये मशवरा काफी अच्छा लगा । वो खुश हो कर बोली - ओके । चलो अब ताश खेलते हैं ।"

मैंने ताश अपने पैंट से निकाल कर उस के सामने रखा ।

" याद रखना मेरे पास हजार बारह सौ से ज्यादा रूपए नहीं है । वैसे खेलना क्या है ?"

" स्ट्रीप पोकर ।" श्वेता दी ने कहा ।

मैं चौंक गया । स्ट्रीप पोकर एक इरोटिक गेम है जिसे अमेरिका और यूरोप में अधिकतर खेला जाता है । इस गेम में पैसों की बाजी नहीं लगती है । इसमें प्रत्येक बाजी में हारने वाला अपने शरीर से एक कपड़े उतारता है । और अन्त में हारने वाले के शरीर से जब सभी कपड़े उतर जाते हैं मतलब हारने वाला जब पुरी तरह से नंगा हो जाता है तब जाकर ये गेम खतम होता है । इसे कार्ड या स्पाइन दि बोटल के द्वारा खेला जाता है ‌।

"तुम्हें स्ट्रीप पोकर के बारे में पता है न ।" मैं आश्चर्यचकित हो बोला ।

" हां पता है ।"

" केसे भाई "

" क्या सारी दुनिया का ज्ञान तुम्हारे ही पास है ? क्या इन्टरनेट तुम्हीं सर्च करते हो ।"

" तुम क्या जानती हो । ये तो बताओ ? " मैं अभी भी आश्वस्त नहीं था ।

" यहीं कि अगर मैं जीती तब तुम्हें अपने शरीर से एक वस्त्र निकालना पड़ेगा और यदि तुम जीते तो मैं अपने शरीर से एक वस्त्र निकालूंगी ।"

" और गेम शेष कब होगा ?"

" जब तक हारने वाले के शरीर से पुरी तरह कपड़े उतर नहीं जायेंगे ।"

" मतलब जब तक कोई एक पुरी तरह नंगा नहीं हो जाएगा ।" मैंने कहा ।

" हां ।"

मैंने उसे सर से पांव तक निहारा । वो अभी भी वहीं ब्लू कलर की साड़ी और ब्लाऊज़ पहने हुए थी । ब्लाउज में कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष गर्व से सीना तान कर खड़ी थी । शरीर का कोई भी भाग खुला तो नहीं था लेकिन उसके गदराए हुए का प्रत्यक्ष प्रमाण पेश कर रही थी ।मेरा दिल तो बल्लियों उछलने लगा । उसके नंगे होने की कल्पना से ही मेरा लिंग उत्तेजित हो गया । मुझे सालों की मेहनत साकार होते हुए नजर आने लगी ।

" सपने देखना बंद करो । और मेरे सामने नंगे होने के लिए तैयार हो जाओ ।" उसने मेरे चेहरे के हाव-भाव को पढ़ते हुए कहा ।

मैं मुस्कराते हुए बोला -" जब मैं टेंथ स्टैंडर्ड में और तुम हायर सेकंडरी में थी तभी से तुम को नंगा देखने की लालसा जगी हुई थी । लगता है आज उपर वाले को दया आ ही गई ।"

" बड़ी शौक है ना अपनी बहन को नंगी देखने की । मगर अफसोस तुम्हारी इच्छा अधूरी ही रह जाएगी । वैसे भी आज तक ताश में मुझसे हारते ही आए हो ।"

" देखते है आज तुम्हें हारने से तुम्हारी किस्मत कितना बचाती है ।"- मैंने मुस्कराते हुए ताश को फेंटते हुए कहा -" अब जरा कपड़ों के बारे में बात कर ले । हम दोनों के वस्त्र ‌भी तो बराबर बराबर होनी चाहिए न । मेरे शरीर पर इस वक्त चार कपड़े है पैंट , शर्ट , गंजी और जांघिया । अब तुम अपने बताओ ।"

" मेरे पांच हैं ।"

" कौन कौन सा ?"

" साड़ी , ब्लाउज , पेटिकोट , ब्रा और पैंटी ।"

" ये तो गलत है । मेरी तरह तुम भी चार कपड़ों में हो जाओ ।"

" नहीं । तुम्हारे कलाई की घड़ी को पांचवां वस्त्र मान लेंगे ।"

" ओके ।" - मैं राजी हो गया ।

मैंने ताश फेटी और उसने ताश को बीच से काटा । असल में कार्ड फ्लश की तरह ही बांटे जाते हैं । तीन तीन करके । फ्लश की तरह जिसका कार्ड बड़ा होगा वो ही जीतेगा ।वो अपने कार्ड उठाई ।

मैंने अपना कार्ड देखा । मेरे पास हार्ट का 7 और स्प्रेड का 10 और किंग आया था । मैंने उसे अपने कार्ड देखाने को बोला ।

उसके पास डायमंड का क्विन , स्प्रेड का गुलाम और क्लब्स का 9 आया था । उसके कार्ड मेरे से बड़े थे । मैं पहला गेम हार गया था । मैंने अपनी घड़ी निकाल कर पलंग के बगल में रखे मेज पर रख दिया ।

वो जीती थी इस बार कार्ड उसने बांटे । मैंने अपनी कार्ड देखी । इस बार डायमंड का तीन , क्लब्स का छः और स्प्रेड का नौ आया था । मैं निराश हो गया । जब उसने अपने कार्ड दिखाया तो उसके पास हार्ट के आठ और क्लब्स के दो और स्प्रेड के आठ निकले । उसके पास आठ का पेयर था । मैं फिर हार गया ।

मैंने अपना शर्ट निकाल कर मेज पर रख दिया । उसने मेरे बदन पर एक सरसरी निगाह डाली ।

वो मुस्कुराती हुई कार्ड बांटी । वो फिर जीत गयी । उसने कलर से मुझे बीट कर दिया जबकि इस बार मेरे पास भी अच्छे पते आये थे । मेरे पास किंग का पेयर था ।

मैंने अपनी गंजी उतार दी और उसे भी बगल में रख दिया । अब मैं उपर से नंगा हो गया था । मेरे शरीर पर सिर्फ पैंट और जांघिया ही बचा था ।

नेक्स्ट राउंड में मेरी तकदीर खुली । उसके पास दो का पेयर आया था जबकि मेरे पास छः का पेयर आया था ।

श्वेता दी ने पलंग पर खड़े होकर अपनी सारी उतारी और उसे उसी मेज पर रख दिया जिस पर मेरा वस्त्र था । साड़ी उतरने के बाद उसकी कमर नंगी हो गई थी । ब्लाउज में कैद उसके बड़े-बड़े वक्ष प्रत्यक्ष रूप से सामने आ गये ।

अगला राउंड भी मैं ही जीता । उसके पास सबसे बड़ा कार्ड गुलाम था जबकि मेरे पास दो तीन , चार का सिक्वेंस आया था ।

उसनेे बैठे बैठे ही अपने ब्लाउज को निकाला और बगल मेज पर रख दिया ।

उसकी ब्रा उसके बड़े-बड़े गोलाईयों को ढकने में पुरी तरह से नाकाम थी । वो उसके पुरे वक्ष का चालीस प्रतिशत ही ढक पाई थी । साठ प्रतिशत वक्ष नंगे हो गए थे । गोरी त्वचा अधनंगी गोलाईया नंगा कमर और गहरी नाभि देखकर मैं होशो-हवास खो बैठा । मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी ।

" कार्ड बांटो " - उसकी आवाज से मेरी तनदरा भंग हुई ।

अभी भी वो तीन वस्त्र पहने हुए थी जब की मैं दो । मैंने कार्ड बांटी । इस बार उसने मुझे हरा दिया । उसके पास तीन दहला आया था और मेरे पास तो सबसे बड़ा कार्ड ही नौ था ।

मैंने अपना पैंट निकाल कर रख दिया । अब मैं सिर्फ जांघिया पहने हुए था । मैंने महसूस किया कि वो मेरे बदन को चोरी छिपे निहार रही है । कभी उनकी नजर मेरे चौड़ी सीने पर जाती तो कभी मेरे माशल जांघों पर और कभी मेरे जांघिया में कैद उठे हुए उभारों पर । मैंने अपने शरीर पर काफी मेहनत की थी । मैंने जिन लड़कियों से संभोग क्रिया था वो सभी मेरे गठिले शरीर की कदरदान थी ‌।

" अब अपने आखिरी वस्त्र को निकालने और हारने के लिए तैयार हो जाओ ।" श्वेता दी ने मुस्कुराते हुए कहा ।

" देखते है । जब तक सांस तब तक आस ।"

उसने कार्ड बांटे । इस बार मैं जीता । मेरे कार्ड तो बहुत छोटे थे लेकिन उसके कार्ड मुझसे भी छोटे थे । मेरे पास छः , नौ और ग़ुलाम था जबकि उसके पास छः , आठ और दस था । अबकी बारी श्वेता दी को कपड़े उतारने की थी ।

" क्या उतारोगी ?" मैं तो चाहता था कि वो अपने ब्रा निकाल दे ताकि मैं उसके नंगे चुचियों का दिदार कर सकूं ।

लेकिन उसने अपना पेटीकोट उतारा । उसकी मोटी मोटी जांघें ‌जो दुध के समान गोरी थी मेरे आंखों के सामने साक्षात थी । वो अब पैन्टी में थी । पैन्टी उसकी चुत से चिपका हुआ था और वो उसके चुत के रस से भीगी हुई थी ।

मैं 'आह ' भर कर रह गया ।

" पत्ते बांटो । इस बार तो बच गए । लेकिन इस बार नहीं छोडूंगी ।"

मैं इतना भी अहमक नहीं था । कुछ कुछ समझ में आ रहा था लेकिन सगे संबंधियों के सामने मती काम करना भुल जाती है । मैंने पत्ते बांटे । धड़कते दिल से पत्ते उठाया और जैसे ही मैंने पत्तों पर नजर डाली मैं खुश हो गया । मेरे पास ग़ुलाम , बेगम , बादशाह का स्टेट सिक्वेंस था ।

श्वेता दी के पास स्प्रेड का कलर था । वो ये गेम हार गयी थी । मैं सोच रहा था अब वो क्या करेंगी । अपनी ब्रा उतारेगी या अपनी पैंटी । जो भी उतारें मुझे तो मजा ही आयेगा ।

श्वेता दी ने मुझे अपने नशीली आंखों से देखा और अपने जीभ को अपने होंठों पर फिराया । मैं उसके गुलाबी होंठ और रसीली जीभ को देख कर आहें भरता रह गया । कितना मज़ा आएगा इन को चुसने में । एक बार चुसने को मिल जाए तो फिर कयामत तक चुसता रहुं ।

वो मेरी आंखों में देखते हुए अपनी हाथ पिछे की तरफ ले गई और ब्रा को खोल कर नजाकत से मेरी गोद में फेंक दिया । और अपने सीने को अपने हाथों से ढक लिया ।

" ये ग़लत है । वहां से अपने हाथ हटाओ ।" मैंने कहा ।

" कपड़े उतारने की शर्त थी वो तो की ना मैंने ।"

" नहीं । अपने बदन को ढकना गेम के रूल में नहीं है ।"

" नहीं । मैं नहीं हटाउगी ।"

" ठीक है तब गेम बंद करते हैं ।"

" तुम एक नम्बर के बदमाश हो । नखरे करते हुए उसने अपने हाथ अपने वक्ष पर से हटा लिये ।

उसकी दुधिया कलर की बड़ी बड़ी चुचिया नग्न हो गई । उसकी चुची के निप्पल मध्यम आकार के थे । निप्पल का areola सांवला रंग का था । उसकी चुची गोलाकार और ठोस थी । शायद 38 D होगी ।

मेरी ‌नजर चुचियों पर से हटती ही नहीं थी । थोड़ी देर बाद मेरी नज़र चुचियों से निचे की तरफ गई तो उसके नंगे कमर और गहरी नाभि पर फ्रिज हो गई । अगर वो नहीं टोकती तो मैं घंटों उसके सुंदर और सेक्सी बदन को देखते ही रहता ।

" कार्ड बांटो ।" इस बार उसके आवाज में कामुकता और थोड़ी शरमाहटपन थी ।

मैंने मन ही मन उपर वाले को धन्यवाद दिया और कार्ड बांटी ।

अब हम दोनों के बदन पर सिर्फ़ एक एक ही वस्त्र था । वो सिर्फ पैंटी में थी और मैं सिर्फ जांघिया में । हम दोनों बिस्तर पर थोड़ी सी ही फासले पर बैठे थे।

मैंने सहुलियत के लिए अपने पांव थोड़ा फैला लिया था । मैं अपने पत्ते उठाते हुए उसकी तरफ देखा तो उसे मैंने अपने दोनों जांघों के बीच देखते हुए पाया । मैंने देखा मेरा लन्ड जांघिया को फाड़ कर बाहर निकलने के लिए फड़फड़ा रहा था ।

उसने अपनी पलकें उपर की ओर की । हमारी नजरें मिली । दोनों की आंखों में वासना चरम पर थी । उसने मेरी आंखों में देखते हुए बड़े ही इरोटिक ढंग से कार्ड को अपने पैन्टी के अन्दर किया और उसे अपने चुत से रगड़ कर बाहर निकाला फिर सेक्सी आवाज़ में बोली -

" इस बार मैं ही जीतूंगी । अपने पत्ते दिखाओ ।"

मेरा कलेजा मुंह पर आ गया । मुझे तो लगता था कि बिना कुछ किए मेरा लन्ड पानी फेंक देगा ।मैंने भी अपने लन्ड को जांघिया के उपर से मसलते हुए कहा - " दिखा रहा हूं जाने मन । पहले अपनी तो दिखाओ ।"

उसने अपने पत्ते दिखाए । मेरी आंखें उन पत्तों को देख कर फटी की फटी रह गई । उसके पत्ते उसके चुत के रस से भीगी हुई थी । मैं तो पागल सा हो गया ।

मैंने उसके पत्ते उठाये और उसकी आंखों में देखते हुए पत्तों को जीभ से चाटने लगा । वो ये देखकर काफी उत्तेजित हो गई । मैं उसके नमकीन पानी को चाट कर पत्ते से पुरी तरह साफ कर दिया । फिर उसके पत्तों पर देखा ।

उसके पास बहुत ही अच्छा कार्ड आया था । उसके पास तीन बेगम आई थी । मैं गेम हारने वाला था । मुझे उसकी चुत को देख ने की लालसा धूमिल होते हुए दिखाई देने लगी ।

" तुम्हारे कार्ड में देखूंगी ।" बोलकर उसने मेरे कार्ड उठा लिए ।

मैं धड़कते दिल से उसे देखा कि शायद मेरे पास उससे भी अच्छा कार्ड आ जाय और मैं उसकी चुत को देख सकूं ।

उसने मुझे देखा और निराशा भरे स्वर में कहा - " तुम्हारी किस्मत आज अच्छी है । तुम जीत गए ।"

मैं आश्चर्य और खुशी से मन ही मन झुम गया । मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने करोड़ों रुपए की लाटरी की बमपर प्राइज जीत ली हो । मैं मछली के आंख की तरह उसके पैन्टी पर नजर टिका दी ।

श्वेता दी ने बड़ी ही कामुकता पूर्वक अपनी उंगलियों को अपने पैन्टी पर रखा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसकाने लगी । पैन्टी को उतार कर मेरे मुंह पर फेंक दिया । मैंने जल्दी से उसे लपका और उसकी नंगी चुत को देखने का प्रयास करने लगा ।

श्वेता दी फिर से अपने सुखे होंठों पर जीभ फिराई और मेरी नज़रों में देखते हुए आंखों से नीचे की तरफ देखने की इशारा करते हुए अपनी दोनों टांगें फैला दी ।

मेरी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच पर गयी ।

मेरी आंखों के सामने उसकी चुत थी ।

एक दम चिकनी , डबल पावरोटी के समान फुली फुली , चुत के बीचों-बीच लम्बी दरार और मोटे मोटे ओंठ । उसके दरारों से रिसता हुआ पानी जो उसके जांघों तक आ पहुंचा था ।

" कैसी है ?"

मेरा ध्यान उसके बोलने से टुटा । मैं वासना से लथपथ उसकी तरफ प्रश्न भरी नजरों से देखते हुए कहा -" क.. क्या ?"


" ये ." - उसने अपनी चुत की तरफ इशारा करते हुए कहा ।


" क्या ये ?" - मैंने उसे दिखा कर अपना लौड़ा मसलते हुए कहा ।


वो थोड़ी सी मेरे तरफ़ घिसकी और मेरे जांघों के उपर अपने पांव रखते हुए फुसफुसा कर बोली - " तुम्हारी बहन की बुर ।"
Very hot and erotic
 

sam21003

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Update 12 A. Continue.


" वैलकम ! वैलकम ! " - कुलभूषण खन्ना अपनी चेयर पर बैठे हुए बोला ।

मैं उससे हाथ मिलाया और उसके सामने पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया ।

" और सब खैरियत है ।" वो अपने कान की लौ खिंचता हुआ बोला ।

" जी खन्ना साहब । सब खैरियत है ।"

उसने अपने स्टाफ को चाय लाने की आर्डर दी । मैं उसके बोलने की प्रतीक्षा करने लगा ।

" हम सोच रहे थे कि अमेरिका शिफ्ट हो जाएं ।"

" हम ?"

" मैं और अनुष्का ।"

" अमेरिका ?"

" मेरा छोटा भाई वहां रहता है । कयी साल से बुला रहा है ।"

" सैर कर आने को ?"

" वही सैटल हो जाने का ।"

" क्यों ? कोई खास वजह ?"

" वजह तुम जानते हो " - भावावेश में उसकी आवाज कांपने लगी -" तुम्हें यह भी पता है कि उस दिन मैंने यहां तुम्हें क्यों रोक रखा था ।"

" क्यों ?"

" अपनी बीवी से तुम्हारा आमना सामना करवाने के लिए ।"

" जी !"

"" तुम्हारी विजिट से मेरा यह शक विश्वास में बदल गया था कि तुम्हारे जीजा राजीव सोलंकी के फ्लेट में तुम्हारा जिस कटे बालों वाली युवती से आमना-सामना हुआ था , वह मेरी बीवी अनुष्का थी । तुम्हारी शक्ल देखते ही उसके चेहरे का रंग उड़ता मैंने साफ देखा था । और वो समझती है कि बाद में क्लब के बाहर उसने तुमसे जो खुसुर फुसुर की थी , उसकी मुझे खबर नहीं ।"

मैं खामोश रहा । अपनी नर्वसनेस छुपाने के लिए मैंने सिगरेट सुलगा लिया ।

" दो कौड़ी की औकात नहीं थी मेरी बीवी की मेरे साथ शादी से पहले " - वह जोर जोर से अपने कान को मसलता हुआ बोला -" कालेज की मामूली स्टूडेंट , टी. बी. सिरियल में काम पाने के लिए सारा सारा दिन मण्डी हाउस की खाक छाना करती थी । मैंने उससे शादी की , उसे रूतबा दिया , इज्जत दी , सुख-सुविधा और ऐश्वर्य दिया । जमीन से उठा कर आसमान पर बिठाया उसे । बदले में मुझे क्या मिला उस नाशुक्री और बेवफाई औरत से ? धोखा ! फरेब ! बेवफाई !"

वह ठिठका । मुझे यूं लगा जैसे वह रोने लगा हो । लेकिन ऐसा न हुआ । उसने अपने आप पर काबू पाया और अपेक्षा कृत सुसंयत स्वर में बोला -" मैं जिन्दगी का बड़े से बड़ा झटका बर्दाश्त कर सकता हूं लेकिन औरत की बेवफ़ाई नहीं बर्दाश्त कर सकता । मैं अपनी बीवी की कल्पना राजीव सोलंकी , तुम्हारे उस हरामजादे , कुत्ते के पिल्ले के पहलू में नहीं कर सकता । मैं खून कर दुंगा उसका ।"

" फांसी हो जाएगी " - मैं धीरे से बोला ।

" मैं उसे तबाह कर दुंगा " - वह यूं बोला जैसे उसने मेरी बात सुनी न हो -" मैं उसे कौड़ी कौड़ी का मोहताज कर दुंगा । मैं उसे गलियों में भीख मांगने वाला मंगता बना दुंगा ।"

मैं खामोश रहा । तभी स्टाफ चाय लेकर आया । स्टाफ के जाने के बाद फिर बोला -" मेरी बीवी बाद में तुमसे मिली थी ।"

मैंने उत्तर न दिया ।

" झुठ बोलने का कोई फायदा नहीं । मेरे आदमी को अनुष्का ने डाज दे दी थी । लेकिन फिर भी मुझे मालूम है कि वह तुम्हीं से मिली थी ।"

" फिर भी कैसे मालूम है ?"

" वो छोड़ो और बोलो मेरी बीवी तुमसे मिली थी । जबाव यह सोचकर देना कि इनकार भी करोगे तो मुझे विश्वास नहीं होगा ।"

" हां । मिली थी ।"

" क्या चाहती थी ?"

" खास कुछ नहीं ।"

" फिर भी ।"

" मेरा शुक्रगुजार होना चाहती थी कि मैंने उस दिन आपके सामने उसकी पोल नहीं खोली थी और आगे भी वह राज रखने का वादा लेना चाहती थी ।"

" यह वादा हासिल करने के लिए और क्या क्या किया उसने ?"

" क्या मतलब ?"

" तुम पर डोरे डालने की कोशिश नहीं की उसने ?"

" नहीं " - मैं बड़े सब्र से बोला ।

" क्यों झुठ बोल रहे हो । इसलिए इनकार कर रहे हो क्योंकि समझते हो कि मैं बुरा मान जाऊंगा । तुम खुबसूरत हो , नौजवान हो , मार्डन हो , उपर से....."

" खन्ना साहब " - मैं सख्ती से बोला -" ऐसा कहकर , ऐसा सोचकर आप अपने आप को टार्चर कर रहे हैं । ईशया की भावना ‌ने आपकी मति भ्रष्ट कर दी मालूम होती है । यूं तो जो मर्द एक सेकेंड के लिए आपकी बीवी के पास खड़ा होगा , आप उसी पर शक करने लगेंगे । ऐसा कहीं होता है ? इससे तो बेहतर है तो आप तलाक दे दें ऐसी बीवी को ।"

" उसने.... उसने तलाक का कोई जिक्र किया था ?"

" नहीं । कतई नहीं ।"

" हूं । "- वह बोला । उसने कान की लौ को खींचने मसलने की जगह सहलाना आरम्भ कर दिया -" अच्छा , यह बताओ तुम्हारे ख्याल से मेरी बीवी का उस आदमी के कत्ल से कोई रिश्ता हो सकता है जो राजीव के फ्लेट में मरा पाया गया था । क्या नाम था उसका ?"

" अमर । अमर गुप्ता ।"

" हां । अमर गुप्ता । उसके कत्ल से मेरी बीवी का कोई रिश्ता हो सकता है ?"

" मुझे नहीं मालूम ।"

" भई । मैंने तुम्हारा ख्याल पुछा है ।"

" मेरा इमानदराना ख्याल जानना चाहते हैं आप ?"

" हां ।"

" फिर तो हो सकता है । आप की बीबी के पास राजीव जी के फ्लैट की चाबी थी । और मौका-ए-वारदात पर वो पाई गई है । और हालात ऐसे पैदा हो गये हो सकते हैं कि आपकी बीवी को गोली चलानी पड़ गई हो ।"

" हूं । अगर ऐसा हुआ , वह पकड़ी गई और उसे सजा हो गई तो मुझे बहुत अफसोस होगा ।"

" अच्छा !"

" मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता ।"

" जी ।"

मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि ये शख्स किस टाइप का आदमी है । घड़ी में तोला , घड़ी में माशा ।

" मैं सच कह रहा हूं ।'

" अच्छा , मुझे आज्ञा दिजिए ।" मैंने उठने का उपक्रम किया ।

" जरा एक मिनट सुनो ।"- वो बोला -" तुम्हारा जीजा भी तो क़ातिल हो सकता है ?"

" होने को तो क़ातिल आप भी हो सकते हैं । "

" क्या बकवास कर रहे हो ।"

" मैं भी आप ही की तरह सम्भावना व्यक्त कर रहा हूं । आप को अपनी बीवी पर शक था । आपने अपनी बीवी का पिछा किया । वहां आपने अपनी बीवी को अपने दुसरे यार अमर की बाहों में देखा । आपका खून खौलने लगा । और आपने अमर का खून कर दिया । "

" क्या बे-सिर-पैर की बातें कर रहे हो । उसकी दोस्ती तो राजीव से थी । मुझे मारना होता तो मैं राजीव को मारता । और ये अमर नाम का लड़का कहां से फिट हो गया । उसे तो न मैं जानता हूं और न ही अनुष्का । उसे भला मैं क्यों मारूंगा ।"

" आप को अमर के मर्डर केस की सारी कहानी पता है । क्या आप बता सकते हैं कि मर्डर वाले दिन सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक कहां थे ?"

" घर में हुंगा और कहां होऊंगा । "

" अच्छी तरह से याद करके बताईए । शायद भविष्य में इससे आप को फायदा ही हो ।"

" मैं ‌घर में ही था ।"

" आप घर में थे , इसका कोई सबूत , या कोई गवाह ।"

" नहीं कोई भी नहीं था । एक मेड आती है रोज लेकिन ‌शायद उस दिन वो आई नहीं थी । और अनुष्का किसी सहेली के पास जाने के लिए कहकर चली गई थी ।"

" तब तो आपके पास भी उस वक्त की कोई पुख्ता एलीवाई नहीं है । अच्छा अब इजाजत दिजिए । क्लास के लिए लेट हो रहा है ।"

" ठीक है । जाते जाते ये तो बता जाओ कि पुलिस को अनुष्का के बारे में कोई खबर है ?"

" जी नहीं ।"

मैं वहां से क्लास चला गया । थोड़ी देर में ही मन उचट गया । और खन्ना साहब से बिदा ले कर घर चला गया । दरवाजा रीतु ने खोला । वो सलवार सूट पहने हुए थी । मैं अभी हाल में पहुंचा ही था कि रीतु पीछे से आकर बोली ।

" भाई । काजल को उसके घर छोड़ दोगे क्या ?"

" क्या " - मैं चौंकते हुए कहा -" वो अभी तक यहीं है ।"

" हां ।"

" ठीक है छोड़ दुंगा । कब तक निकलेगी ?"

" आधे घंटे में ।"

" माॅम कहां है ?

" किचन में ।" बोल कर वो अपने रूम में चली गई ।

मैं किचन में गया । माॅम हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहने खड़ी हो कर किचन स्लैब के उपर सब्जी काट रही थी । गर्मी के कारण पसीने से उनका ब्लाउज भीग गया था । साड़ी पेट से हट गयी थी जिससे उनकी गोरी गोरी थोड़े फुले हुए पेट दिखाई दे रही थी । साड़ी नाभि के थोड़ा नीचे से बंधा हुआ था । पसीने की बूंदें सरक कर नाभि से होते हुए साड़ी पर जमा हो रही थी । ये सब देखकर मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया । मैं उनके पास गया और पीछे से उनसे लिपट गया ।

" इतनी गर्मी में इतना हैवी साड़ी क्यों पहनती हो । पुरा पसीना पसीना हो गई हो । तुम्हारी नाइटी कहां गयी ?"

" बड़ा जल्दी आ गया ।" - माॅम पलट कर मेरे बालों को सहलाते हुए बोली ।

" हां । आज मन नहीं लगा इसलिए जल्दी चला आया । तुमने बताया नहीं तुम्हारी नाइटी क्या हुईं ?"

" पुरानी हो गई थी इसलिए फट गई ।"

" तो दुसरी ले लेती ।"

" मैंने रीतु को बोला था लेकिन वो बार बार भुल जाती है ।"

" अरे ! तो मैं हूं ना । मुझसे कहती मैं ले आता ।'

" अच्छा तो तु ही ले आना ।"

मैं माॅम के कन्धों के पसीने को हाथों से पोछता हुआ बोला -" कौन सी ले आऊंगा ?"

" कोई भी ले आना ।"

" कोई भी ?"

" हां । "

" तुम्हे पता है न नाइटी कयी तरह की आती है । एक पुरे एंडी तक आने वाली , एक घुटने से थोड़ी नीचे तक आने वाली और एक घुटने से थोड़ी उपर वाली ।"

वो फिर मेरी तरफ पलटी और मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बोली -" बड़ा ज्ञान है तुझे नाइटी का ।"

" मुझे तो सभी चीजों के बारे में थोड़ा थोड़ा ज्ञान है । तुम जानती ही हो ।"

" हां जानती हूं लेकिन थोड़ा थोड़ा नहीं बल्कि ज्यादा ज्यादा ज्ञान है ।"

" बोलो ना ।"

" क्या ?"

" कौन सी ले आऊं ?"

" घुटनों से ऊपर वाली अपनी बीवी को पहनाना । मुझे एंडी तक आने वाली ही ले आना ।"

" घुटनों तक वाली पहनोगी तो हवा अच्छी तरह से आयेगी और इतना पसीना पसीना नहीं रहोगी ।"

" जरूरत नहीं है । मुझे वही ले आना ।"

" ओके वही ले आऊंगा । अब ये बताओ कि किस टाइप का ले आऊं ?"

" अब ये ' किस टाइप ' क्या है ?"

" मतलब मोटे कपड़े वाली , पतले कपड़े वाली , सेमी ट्रांसपेरेंट या ..."

उसने मेरे पेट पर कस कर मुक्का मारा । " बहुत ज्यादा बदमाश हो गया है । तुम रहने ही दो मैं रीतु से मंगवा लुंगी ।"

मैं माॅम के गाल पर पप्पी लेते हुए बोला -" ऐसे कैसे रहने दो । मैं ही ‌ले आऊंगा और ‌अब से नाइटी ही नहीं बल्कि तुम्हारी हर चीजें मैं ही ले आऊंगा ।"

" बड़ा आया ले ‌आने वाला । पहले कमाना तब बातें करना ।"

" इतना तो कमा ही लेता हूं कि तुम्हारी जरूरत के चीजों को खरीद सकूं और रही बात ज्यादा कमाने की तो कुछ दिनों तक वेट करो । सोने की पलंग बनवा दुंगा ।"

" किसके लिए । अपनी बीवी के लिए ।" - माॅम मुस्कराते हुए बोली ।

" तुम्हारे लिए । "

" मैं क्या करूंगी सोने की पलंग ले कर । मेरे लिए मेरा टुटा फुटा लकड़ी का खटिया ही काफी है ।"

अभी मैं कुछ कहता तभी रीतु और काजल आ गयी । काजल घर जाने के लिए तैयार हो गई थी । मैं वहां से निकला और काजल को अपनी बाइक पर बैठा कर उसके घर की ओर रवाना हो गया ।
Very nice
 

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Annual Story Contest - XForum
Hello everyone!
We are thrilled to present the annual story contest of XForum!
"The Ultimate Story Contest" (USC).

"Win cash prizes up to Rs 8500!"


Jaisa ki aap sabko maloom hai abhi pichhle hafte hi humne USC ki announcement ki hai or abhi kuch time pehle Rules and Queries thread bhi open kiya hai or Chit Chat thread toh pehle se hi Hindi section mein khula hai.

Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 8000 words ke bich honi chahiye (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Cash Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 25th March ko open ho chuka matlab aap apni story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 25th April 2025 tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.

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Winner 3500 ₹ + image Award + 7000 Likes + 30-day Sticky Thread (Stories)
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