आपने इतना कुछ कह दिया
अब मैं क्या कहूं, कुछ कहने लायक छोड़ा ही नहीं
बस अनुरोध कर सकती हूँ, निवेदन कर सकती हूँ, कहानी के इन पन्नो से जुड़ाव बनाये रखें
और आभार, आप ऐसे कलम के धनी लेखक के कुछ शब्द ही काफी थी इस अकिंचन के लिए, आपने तो कोष ही खोल दिया
बार बार आभार
कोमल जी,
आप की प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत खुशी हुई। यह आपकी विनम्रता और सादगी का प्रतीक है।
सच कहूँ तो, आपकी कहानियों ने मुझे गहरे स्तर पर प्रेरित किया है.. छोटे शहरों का सटीक चित्रण, वहां के पात्रों की जीवंतता और उनके जीवन के जटिल पहलुओं को आपने जिस बारीकी से छुआ है, वह वाकई अप्रतिम है.. आपकी लेखनी में एक विशेष प्रकार की सच्चाई और सरलता है, जो पाठकों को अपने भीतर समेट लेती है.. और ईसी कारणवश, पाठक आपकी कहानियों से एक अकथित जुड़ाव भी महसूस करते है..
गुजारिश है, की आप हमेशा ऐसी ही सुंदर कहानियाँ लिखती रहें.. आपकी लेखनी, न सिर्फ मुझे, बल्कि औरों को भी प्रेरित करती है.. मैं आभारी हूँ कि मुझे आपकी रचनाएँ पढ़ने का अवसर मिला, और मैं आशा करता हूँ कि आप आगे भी इसी तरह की अनमोल रचनाएँ लिखती रहें, जो हमें जीवन और समाज के विभिन्न पहलुओं को अधिक गहराई से समझने का अवसर दें
आपका लेखन निरंतर समृद्ध हो, इसी शुभकामना के साथ
सादर,
वखारिया