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Incest हवस के कारनामे ~ A Tale of Lust

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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119,180
354

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
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Bas jeevan ki bhagdaud me sab kuchh pichhe chhutate nazar aa raha ab to :sad:.. kabhi kabhi to lagta hai ki lockdown ke din hi achhe the :verysad:
प्यार का सबूत story ka review pending hai ju ka, bich me chhod ke chale gaye the ju :roll:
Waise achha hi hai ye bhi Shubham bhai, ek baar to us raaste bhi jaane me koyi burayi nahi jahan aap kabhi nahi gaye :hinthint:.. baaki aapse behtar kaun jaanta hai forum par readers log ke baare me?
:laughing: Absolutely right....and apan aisa kiya bhi...only new experience ke liye. And end me yahi realise hua ki sab moh maya hi hai but apan ki reality sirf wo hai jiske liye apan pachana jata hai. Matlab ki kitna door bhagoge be :gaylaugh:
 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Jis kisse me daroga saahab ko daraya ja raha tha uske aage abhi tak nahi padh paaya hun.. :sad:
Asal kissa to uske baad me hua bro, wo to bas ek chhota sa hissa tha... ;)
Par jab bhi complete karunga apna reader waala farz ada kiye bina nahi jaunga, ye to aap bhi jaante hi ho :D
Intzar rahega mitra :dost:

Apan ne us story me ju ko bahut miss kiya. Readers ke roop me kuch dost bhai aise hain jinki upasthiti se khushi hoti hai aur unke reviews se aage likhne ke liye motivation plus energy milti hai. I know insaan personal life me bahut busy hota hai lekin apan bhi to usi life ka hissa hai aur sabke entertainment ke liye likhne ka time nikalata hai. Well, time nikaalo dost...to apan bhi purane form me aaye aur pahle jaise josh ke sath likhna shuru kare :roll:
 

only_me

I ÂM LÕSÉR ẞŪT.....
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123
Super

Update ~ 10




बेटीचोद, अपुन जितना सोचता गया उतना ही अपुन की गांड़ फटती चली गई लौड़ा। सेक्स और हवस के जोश में अपुन का लौड़ा जो इसके पहले अपने फुल फॉर्म में आ गयला था वो इस सबके सोचते ही गायब हो गया और वो मुरझा गया।

मजा तो खूब मिला था अपुन को लेकिन अब इस मजे की सजा का खयाल आते ही अपुन के तोते उड़ गएले थे। एकदम से खयाल आया कि अपुन को ये सब नहीं करना चाहिए था बेटीचोद।



अब आगे....


हालत तो साधना की भी खराब थी लेकिन ये भी सच था कि इस सीरियस सिचुएशन को उसी ने नॉर्मल बनाया था। असल में अपुन की गांड़ फटी वाली हालत देख उसे लगा था कि अपुन उसकी हालत देख टेंशन में आ गयला है तो उसने खुद को मजबूत बनाने का सोच लिया था और जबरन मुस्कुराने लगी थी लौड़ी। फिर अपुन को समझाने भी लगी थी कि अपुन को उसके लिए इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है। बोले तो वो ठीक है और उसकी ये हालत सुबह तक ठीक हो जाएगी।

अपुन को राहत तो मिली थी लौड़ा लेकिन अपुन का मजा थोड़ा खराब हो गयला था। ऐसा इस लिए क्योंकि उसने कहा था कि उसकी हालत सुबह तक तभी ठीक हो सकती है जब अपन लोग दुबारा सेक्स....हट लौड़ा सेक्स क्या होता है? मतलब कि अपन लोग दुबारा चुदाई न करें।

बेटीचोद, इस बात से तो अपुन का भेजा ही खिसक गयला था पर क्या कर सकता था? अपुन ये भी नहीं चाहता था कि जोर जबरदस्ती के चलते भारी गड़बड़ हो जाए और दुबारा साधना की चूत मारने को न मिले। इस लिए अपुन ने मन मार लिया था।

अब क्योंकि अपुन ऐसे खाली तो बैठे नहीं रह सकता था। बोले तो रात के इस वक्त घर में बिना किसी की जानकारी के यहां आयला था तो साधना के साथ कुछ तो मजा करना ही था अपुन को। सोने को तो अपुन अपने घर में भी सो सकता था पर यहां जब साधना जैसी खूबसूरत माल हो तो सोने का सोचना भी जैसे पाप था लौड़ा।

पर मजा करने से पहले जरूरी था कि थोड़ा हालत को ठीक किया जाए। मतलब कि साधना की हालत खराब थी तो जरूरी था कि उसके लिए कुछ किया जाए। अपुन को तो घंटा कुछ समझ नहीं आ रेला था कि क्या करे इस लिए साधना को ही उपाय सूझा था। यानि उसने अपनी चूत की सूजन को और साथ ही उसमें हो रहे दर्द को दूर करने के लिए गर्म पानी से सेंकाई करने को कहा था।

बस फिर अपन लोग ने ऐसा ही किया। बोले तो रात के अंधेरे और सन्नाटे में अपन लोग ने मोबाइल से रोशनी कर के किचेन में जा कर पहले पानी गर्म किया और फिर उस गर्म पानी को रूम के अटैच बाथरूम में ला कर साधना के चूत की सेंकाई की। इस सबमें साधना को थोड़ी बहुत तकलीफ तो हुई लेकिन उसी ने कहा था कि ये करना ज़रूरी है इस लिए किया। आखिर एक घंटे की मेहनत के बाद नतीजा ये निकला कि उसे अब पहले से आराम था। शुक्र था कि उसकी मां के पास पेन किलर भी रखी हुई थी जिसकी याद आते ही उसने अपुन के द्वारा अपनी मां के रूम से मंगवा लिया था। कुल मिला कर अब सिचुएशन पहले से काफी बेहतर थी।

इस वक्त अपन दोनों बेड पर एक दूसरे की तरफ करवट लिए पड़े हुए थे। साधना अपुन को बड़ी मोहब्बत से देखे जा रेली थी। असल में उसे अपुन का इतना ज्यादा केयर करना अच्छा लगा था। अब भला उस लौड़ी को क्या पता था कि अपुन ने तो अपुन की गांड़ न फटे इस लिए ऐसा किएला था।

खैर अपुन को लौड़ा तभी प्रॉब्लम होने लगती थी जब वो अपुन को मोहब्बत भरी नजरों से देखती थी। अपुन उसके इस तरह देखने से अंदर ही अंदर घबरा जाता था और कहीं न कहीं ये सोच के ग्लानि भी होने लगती थी कि एक वो है जो अपुन को प्यार करती है और अपुन की खुशी के लिए क्या कुछ कर रेली है और एक अपुन है जो उसकी मोहब्बत का ज़रा भी खयाल नहीं रख रहा और सिर्फ उसे चोदना चाहता है, हट लौड़ा।

तभी साधना की मधुर आवाज से अपुन चौंका।

साधना ─ काश! इस रात की कभी सुबह न हो और हम दोनों ऐसे ही इस बेड पर एक साथ लेटे रहें।

अपुन ─ अपन लोग जो चाहते हैं वैसा ज्यादातर होता नहीं है और ये होना तो इंपॉसिबल है।

साधना ─ हां जानती हूं बाबू लेकिन दिल तो यही चाहता है न।

अपुन ─ दिल को समझा के रखो।

साधना ─ तुम ही बताओ अपने दिल को कैसे समझाऊं?

अपुन क्या बताता? सच तो ये था कि उसके द्वारा प्यार मोहब्बत वाली बातें शुरू करते ही अपुन के अंदर बेचैनी होने लग गईली थी। बोले तो अपुन का दिमाग खराब होने लग गयला था। अपुन की धड़कनें बढ़ जाती थी और अपुन को किसी अनिष्ट के होने की आशंका होने लगती थी।

इतना तो अपुन समझ चुका था कि साधना सच में ही अपुन को प्यार करती है। ये उसका प्यार ही था कि उसने अपुन को अपना सब कुछ सौंप दिएला था। उसकी जगह कोई और होती तो ये सब होना या तो इंपॉसिबल था या फिर ये सब करना इतना आसान न होता।

साधना ─ झूठ मूठ का ही बोल दो बाबू कि तुम भी मुझे प्यार करते हो। तुम्हारे मुख से अपने लिए आई लव यू सुनना चाहती हूं। प्लीज बोल दो न जान।

अपुन ─ क्या झूठ सुनने से तुम्हें खुशी मिलेगी?

साधना ─ हां जरूर मिलेगी बाबू। मैं अपने दिल को ये कह कर समझा लूंगी कि तुम सच में ही मुझसे प्यार करते हो।

अपुन ─ देखो साधना पागल मत बनो। अपुन ने सुना है कि प्यार मोहब्बत बहुत खतरनाक चीज होती है। ये जिससे होती है उसी को पाने के लिए पागल रहती है और जब वो नहीं मिलती तो बहुत दुख होता है। अपुन नहीं चाहता कि तुम्हें किसी तरह का दुख झेलना पड़े। इस लिए झूठ भी मत सुनो क्योंकि इस झूठ को जब तुम अपने दिल से सच कहोगी तो वो सच में इसे सच मान लेगा और फिर तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि कब वो तुम्हें इसके लिए मजबूर करना शुरू कर दे।

साधना ─ तुम्हें कैसे पता कि मेरा दिल इस सबके लिए मुझे मजबूर करने लगेगा?

अपुन फ़ौरन कोई जवाब न दे सका। लौड़ा अपुन को सूझा ही नहीं कि क्या जवाब दे? अपुन खुद भी थोड़ा हैरान हुआ कि ये अपुन के मुख से कौन से लेवल की फिलॉस्फी निकल गईली है? पर लौड़ा कोई तो जवाब देना ही था उसे, इस लिए बोला।

अपुन ─ वो अपुन ने दो चार लव स्टोरी पढ़ेली थी उसी में अपुन को ये सब पढ़ने को मिलेला था।

साधना ने अपुन को गहरी नजरों से देखा। अपुन ज्यादा देर तक उससे नज़रें न मिला सका। अपुन एकदम से ही बेचैन और परेशान सा हो उठा। बोले तो अब अपुन का दिमाग पूरी तरह खराब होने को आ गयला था। तभी साधना बोली।

साधना ─ मैं बहुत कोशिश करती थी तुम्हें अपने दिल से निकालने की और आज से पहले तक शायद कहीं न कहीं मैं कामयाब भी थी लेकिन अब ये सब होने के बाद शायद ही मैं तुम्हें अपने दिल से निकाल पाऊं।

साधना की ये बात सुन कर अपुन को जोर का झटका लगा। दिल की धड़कनें ट्रेन के इंजन के माफिक दौड़ने लगीं लौड़ा। पलक झपकते ही दिमाग में यही खयाल आया कि बेटीचोद कहीं ये अपुन को किसी मुसीबत में न फंसा दे। बोले तो अपुन के लिए अच्छा यही होगा कि फ़ौरन ही भाग ले यहां से।

अपुन के दिमाग में तूफान खड़ा हो गयला था लौड़ा। बार बार अंदर से कोई आवाज दे रेला था कि विराट लौड़े भाग ले बेटा वरना लौड़े लग जाएंगे तेरे। फिर एकदम से अपुन को खयाल आया कि जब तक कुछ किया नहीं था तब तक अपुन सेफ था, मतलब कि वो अपुन को फंसा नहीं सकती थी लेकिन अब तो अपुन ने उसे चोद दिया है इस लिए इस मामले को ले कर वो अपुन को फंसा भी सकती है। लौड़ा कानून भी उसी का साथ देगा, और न्याय के रूप में अपुन को उसके साथ शादी भी करनी पड़ेगी।

ये सब सोचते ही अपुन की गांड़ फट गई लौड़ा। बोले तो अपुन की मां ही चुद गई बेटीचोद। तभी साधना की आवाज से अपुन को होश आया। वो लौड़ी अपुन की एकाएक बिगड़ी हालत देख घबरा गईली थी।

साधना ─ क्या हुआ बाबू? तुम ठीक तो हो न?

अपुन उसे क्या बताता कि इस वक्त क्या सोच के अपुन की फटी पड़ी है और अपुन क्या क्या सोच रेला है? पर कुछ तो जवाब देना ही था इस लिए बोला।

अपुन ─ हां...हां अपुन ठीक है।

साधना को शायद कुछ ठीक नहीं लग रेला था इस लिए झट से अपुन का चेहरा थाम लिया और अपुन से बोली।

साधना ─ नहीं बाबू, कुछ तो बात है। तुम अचानक से बहुत ज्यादा बेचैन और घबराए हुए नजर आने लगे हो। बताओ न बाबू क्या हो गया है तुम्हें?

अपुन ─ क..कुछ नहीं हुआ है। अपुन ठीक है, ट्रस्ट मी।

साधना कुछ पलों तक ध्यान से देखती रही अपुन को फिर एकदम से अपुन की तरफ सरकी और अपुन के होठों पर अपने सुलगते होठ रख दिए।

लौड़ा, उसके ऐसा करते ही अपुन पलक झपकते ही जैसे सब कुछ भूल गया। पूरे बदन में अपुन के करेंट दौड़ने लगा। उधर वो लौड़ी ऐसे अंदाज में अपुन के होठ चूसे जा रेली थी कि अपुन आधे मिनट से पहले ही किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया। अपुन के अंदर मदहोशी का नशा छाता चला गया और जाने कब अपुन भी उसका साथ देने लगा।

अपन दोनों ही नंगे थे इस लिए दोनों ही एक दूसरे के जिस्म को सहलाते जा रेले थे। कुछ ही देर में आलम ये था कि अपुन के कारनामे से साधना एक बार फिर से आहें भरने लगी थी। रूम के अंदर उसकी आहें और मादक सिसकारियां गूंजने लगीं थी।

अपुन उसके गोरे मुलायम दूध को मसल रेला था और दूसरे वाले के निप्पल को चूस रेला था। साधना बुरी तरह मचल रेली थी। इधर अपुन का लन्ड पूरे आकार में खड़ा हो के उसकी जांघों के आस पास चक्कर लगा रेला था। सहसा तभी अपुन ने महसूस किया कि साधना ने अपुन का लन्ड थाम लिया है।

उसके कोमल कोमल हाथ का स्पर्श पाते ही अपुन के लन्ड में सनसनी होने लगी। अपुन ने झट उसे छोड़ा और फिर सरक कर ऊपर ही आ गया। अब अपुन का लन्ड साधना के एकदम करीब था, पूरे रौद्र रूप में।

अपुन ─ अब तो ये तुम्हारी चूत में जा नहीं सकता इस लिए इसे ठंडा करने के लिए इसे मुंह में ले कर चूसो मेरी जान।

साधना अपुन की बात सुन कर झट से उठ बैठी। इस चक्कर में उसकी जांघों के बीच टीस उठी तो उसके मुख से दर्द भरी सिसकी निकल गई। उठ कर बैठने के बाद उसने हाथ बढ़ा कर अपुन के लन्ड को पकड़ लिया।

साधना ─ उफ्फ ये जब पूरी तरह खड़ा हो जाता है तो कितना बड़ा और भयानक लगने लगता है।

अपुन ─ क्या तुम्हें इससे डर लग रेला है?

साधना ─ हां थोड़ा थोड़ा लग रहा है बाबू। इसी ने तो मेरी मुनिया की हालत खराब की है।

अपुन ─ ये मुनिया क्या होता है? साफ साफ उसका नाम लो न।

साधना थोड़ा शरमाई फिर नजरें झुका कर बोली।

साधना ─ इसने मेरी चूत की हालत खराब कर दी है। उफ्फ बाबू ये तुम मुझसे क्या क्या बुलवा रहे हो? कुछ तो शर्म करो।

अपुन ─ जिसने की शरम, उसके फूटे करम। ऐसा अपुन ने कहीं सुनेला है।

साधना ये सुन कर हंस पड़ी। एक हाथ से वो अपुन के लन्ड को भी धीरे धीरे सहला रेली थी। उसकी नज़रें अपुन के लन्ड पर ही जमी थीं।

अपुन ─ अब सहलाती ही रहेगी या इसे प्यार भी करोगी?

साधना ने सिर उठा कर एक बार अपुन को देखा और फिर शर्माते हुए आहिस्ता से झुकने लगी। जल्दी ही उसके कोमल होठों की तपिश अपुन के लन्ड के टोपे पर स्पर्श हुई।

अपुन के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गई। मजे की तरंग में अपुन की आँखें बंद हो गईं और साथ ही अपुन ने अपना एक हाथ साधना के सिर पर रख दिया। साधना ने लन्ड के टोपे पर जीभ घुमाई और फिर मुंह खोल कर टोपे को अंदर ले लिया।

अगले ही पल उसके गर्म मुंह का एहसास हुआ तो अपुन एक बार फिर से रोमांचित हो उठा और उसके सिर पर रखे हाथ को थोड़ा जोर दे कर उसके सिर को लन्ड की तरफ झुकाया। अपुन से रहा न गया तो अपुन वहीं बेड से टेक लगा के अधलेटा सा हो गया। अब अपुन का लन्ड क्लियरली साधना के मुंह में जा सकता था।

साधना एक हाथ से अपुन का लन्ड पकड़े टोपे को धीरे धीरे चूस रेली थी। अंदर से जीभ को बार बार टोपे पर घुमाती तो अपुन के अंदर तेज सनसनी होती जिससे अपुन की सिसकी निकल जाती।

अपुन ─ आह्ह्ह्ह् साधना मेरी जान, ऐसे ही चूसो। थोड़ा और मुंह में लो न डियर।

साधना कुछ बोली नहीं, बस मुंह खोल के सिर को थोड़ा और नीचे की तरफ झुकाया जिससे अपुन का लन्ड उसके मुंह में थोड़ा और चला गया। उसके मुख के अंदर की गर्मी से अपुन का लन्ड पिघल सा रेला था और उसके होठों की गिरफ्त से अपुन को बड़ा ही अजीब लेकिन मजे का एहसास हो रेला था।

कुछ ही देर में अपुन ने देखा कि साधना एक हाथ से लन्ड को पकड़े करीब आधा लन्ड मुंह में भर लेती और फिर उसे बाहर निकालती। झुके होने की वजह से उसकी तेज चलती सांसें अपुन के जांघों के बीच पड़ रेली थी जिससे अपुन को अजीब सी झुनझुनी हो रेली थी।

अपुन ─ ओह! साधना, कितना अच्छा लग रेला है। बोले तो मस्त मजा आ रेला है अपुन को।

अपुन की ये बात सुनते ही साधना ने झट से अपुन का लन्ड मुंह से निकाल दिया और सिर उठा कर सीधा बैठ गई। उसकी सांसें उखड़ी हुईं थी। चेहरा अजीब सा दिख रेला था। मुंह भी अजीब सा बनाया हुआ था उसने। इधर जैसे ही उसने लन्ड मुंह से बाहर निकाला तो अपुन ने आँखें खोल कर उसे देखा। बोले तो अपुन के मजे में खलल पड़ गयला था जिससे अपुन को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था।

साधना झट से पलटी और बेड के नीचे फर्श पर थूकने लगी। फिर वापस अपुन की तरफ घूमी तो अपुन ने देखा उसने अजीब सा मुंह बनाया हुआ था।

अपुन ─ क्या हुआ?

साधना ─ तुम्हें तो मजा आ रहा था लेकिन मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था इस लिए तुम्हारे लं...लंड को बाहर निकाल दिया।

अपुन को उसकी ये बात सुन कर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। अपुन ने इस बार नाराजगी से देखा उसे।

अपुन ─ जब अपुन तुम्हारी चूत चाट रेला था तब अपुन ने नहीं कहा था कि अपुन को बड़ा अजीब फील हो रेला है। अपुन चाटता ही रहा था क्योंकि अपुन को अच्छा लग रेला था और तुम्हें भी बहुत मज़ा आ रेला था। लेकिन तुम्हें अपुन का लन्ड चूसने में न तो अच्छा लग रेला है और न ही मजा आ रेला है।

साधना अपुन की गुस्से में कही ये बातें सुन कर एकदम से हड़बड़ा गई और साथ ही घबरा भी गई।

साधना ─ सॉरी बाबू। मेरा वो मतलब नहीं था। प्लीज गुस्सा मत हो।

अपुन ─ तुमने जो किया है क्या उससे गुस्सा नहीं आएगा?

साधना ─ सॉरी बाबू। तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। मैं मानती हूं कि ऐसे में गुस्सा आएगा लेकिन समझने की कोशिश करो जान कि हर कोई एक जैसा नहीं होता।

अपुन ─ क्या मतलब है तुम्हारा एक जैसा नहीं होता? क्या तुम ये कहना चाहती हो कि अपुन कुत्ता है जो किसी की भी चूत बड़े आराम से चाट सकता है और तुम एक इंसान हो इस लिए लन्ड चूसने में तुम्हें प्रॉब्लम होती है?

साधना अपुन की बात सुन कर और भी घबरा गई। पलक झपकते ही उसकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से बोली।

साधना ─ ये ये तुम क्या बोले जा रहे हो बाबू। प्लीज ऐसा मत बोलो। मेरा वो मतलब नहीं था। मुझे माफ कर दो प्लीज।

अपुन का सच में भेजा घूम गयला था। बेटीचोद, ऐसा भी नहीं था कि अपुन का लन्ड इतना गंदा दिखता था या उसके आस पास बालों की गंदगी उगी हुई थी। बोले तो अपुन का लन्ड अपुन के रंग से बस थोड़ा ही अनफेयर था और झांटों का तो नामो निशान तक नहीं था। अपुन को झांटे पसंद ही नहीं थी लौड़ा। इसके बावजूद वो लौड़ी बोल रेली थी कि उसे अजीब फील हो रेला है, हट लौड़ी।

साधना अपुन को मनाने में लगी थी और अपुन का दिमाग लौड़ा शांत ही नहीं हो रेला था। फिर अचानक ही जब साधना सुबकने लगी तो अपुन को झटका लगा। पलक झपकते ही अपुन का गुस्सा झाग की तरह ठंडा पड़ गया लौड़ा।

साधना ─ प्लीज मुझे माफ कर दो बाबू। अब से कभी ऐसा नहीं बोलूंगी। बस एक बार मान जाओ।

अपुन ने उसे खींच कर गले से लगा लिया। बेटीचोद उसके यूं सुबकने पर अपुन को अब जा के बुरा लगने लग गयला था। खुद पर ये सोच के गुस्सा भी आया कि इतनी छोटी सी बात पर अपुन ने उसे रुला दिया।

अपुन ─ प्लीज चुप हो जाओ एंड आई एम सॉरी। पता नहीं कैसे गुस्सा आ गयला था अपुन को।

साधना ─ नहीं मेरी गलती थी। तुम्हारा गुस्सा करना जायज था।

अपुन ने इस बात को ज्यादा लंबा करना ठीक नहीं समझा इस लिए उसे प्यार से अलग किया और बेड पर लिटा दिया। वो मासूम सी शक्ल बनाए अपुन को ही देखे जा रेली थी। अपुन भी उसके साथ लेट गया। जैसे ही अपुन लेटा तो वो उठ गई। ये देख अपुन बोला।

अपुन ─ क्या हुआ? उठ क्यों गई?

साधना ─ वो मैं तुम्हारा लं...लंड मुंह में ले कर तुम्हें शांत कर देती हूं। ऐसे तो तुम्हें भी शांति नहीं मिलेगी न बाबू। मैं नहीं चाहती कि मेरी जान रात भर बेचैन रहे।

अपुन ─ अरे! अब इसकी जरूरत नहीं है। अपुन का लन्ड अब खुद ही शांत हो के बैठ गयला है। इस लिए अब तुम आराम करो और सो जाओ। वैसे भी तुम्हारी हालत ठीक नहीं है।

साधना ─ नहीं बाबू, मैं ठीक हूं। तुम आराम से लेटे रहो, मैं इस बार अच्छे से करूंगी।

पर अपुन ने मना कर दिया। बोले तो इस बार बड़े प्यार और स्नेह से उसे मना किया। असल में अपुन को अब सच में लग रेला था कि उसे आराम करना चाहिए। इस तरह का मजा तो बाद में भी लिया जा सकता था।

खैर अपन दोनों ने एक दूसरे को गुड नाइट किस किया और फिर एक दूसरे को बाहों में ले कर सोने की कोशिश करने लगे। पता नहीं कब अपन लोग को नींद आई लौड़ा।

अलार्म क्लॉक के बजने से अपन दोनों की ही आंख खुल गई। अपुन ने जब अलार्म क्लॉक में टाइम देखा तो उसमें सुबह के पांच बजे थे। साधना ने सिर उठाया और मुस्कुराते हुए पहले अपुन के होठों को चूमा, फिर बोली।

साधना ─ गुड मॉर्निंग बाबू।

अपुन ─ मॉर्निंग डियर। वैसे ये अलार्म तुमने बिल्कुल ठीक लगा रेला था वरना अपुन को यहां से निकलने में देर हो जाती।

साधना को भी सिचुएशन का एहसास हुआ तो वो फ़ौरन उठ गई। अपुन भी उठा और भाग कर बाथरूम में जा कर पहले पेशाब किया और फिर आ कर फटाफट कपड़े पहनने लगा।

अपुन को अब ये सोच के टेंशन होने लगी थी कि अगर समय रहते घर नहीं पहुंचा तो कहीं गड़बड़ न हो जाए। खैर जल्दी ही अपुन कपड़े पहन कर रेडी हो गया। बाइक की चाभी जेब में ही थी। इस बीच साधना ने भी अपने कपड़े पहन लिए थे। वो थोड़ा उदास थी। ज़ाहिर है अपुन के जाने के चलते ही उसका चेहरा उतर गयला था।

साधना ─ अब कब मिलोगे बाबू? प्लीज टाइम निकाल कर आ जाया करो न।

अपुन ─ अब से हर रोज यहां आने की कोशिश करेगा अपुन लेकिन अगर न आ सका तो टेंशन नहीं लेने का।

साधना ─ पहुंच कर फोन करना मुझे या मैसेज कर देना।

अपुन ─ ठीक है। तुम भी अपना खयाल रखना। खास कर अपनी चूत का।

साधना बुरी तरह लजा गई। फिर मुस्कुराते हुए बोली।

साधना ─ धत, कितने बेशर्म हो तुम।

अपुन ─ अपुन तो ऐसा ही है, तुम्हें भी ऐसे बेशर्म लड़के से प्यार नहीं करना चाहिए।

साधना ─ ये तो अब मुश्किल है बाबू। अच्छा एक बार अपने होठों को तो चूम लेने दो।

सच कहे तो अपुन का भी उसके होठ चूमने का मन था इस लिए झट से अपन लोग के होठ मिल गए।

करीब दो मिनट तक अपन लोग ने एक दूसरे के होठों को चूमा। इस बीच अपुन ने उसके टॉप के ऊपर से ही उसके दूध दबाए मगर लौड़ा अपुन को उन्हें नंगा कर के थोड़ा चूसने का भी मन कर रेला था इस लिए होठों को छोड़ते ही अपुन ने बिना उससे पूछे उसके टॉप को ऊपर किया और ब्रा से निकाल कर उसकी एक छाती को मुंह में भर लिया।

अपुन के ऐसा करते ही साधना मचल उठी और उसके मुख से मजे में डूबी सिसकी निकल गई। अपुन ने बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को दबा दबा के चूसा और फिर उससे अलग हो गया। जैसे ही अपन दोनों की नज़र मिली तो साधना शर्मा गई।

अपुन ─ तुम्हारे ये बूब्स सच में बहुत प्यारे हैं। काश! ये चौबीसों घंटे अपुन के पास होते तो जब भी मन करता इनको मुंह में ले कर चूसने लगता।

साधना ─ ये तो तभी पॉसिबल है बाबू जब मैं हर वक्त तुम्हारे ही पास रहूं और ऐसा तभी हो सकता है जब हम दोनों की एक दूसरे से शादी हो जाए।

अपुन ─ फिलहाल तो ऐसा संभव नहीं है। अच्छा अब चलता है अपुन। अपना खयाल रखना और हां उसका भी....अगली बार उसको अच्छे से प्यार करेगा अपुन और फिर दबा के पेलेगा भी।

साधना अपुन की ये बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई। फिर अपन दोनों दरवाजे तक साथ साथ ही आए। उसने दरवाज़ा खोलने से पहले एक बार फिर से अपुन के होठों को चूमा और फिर जब उसने दरवाज़ा खोला तो अपुन उसे बाय बोल कर चुपके से निकल लिया।


To be continued...


Aaj ke liye itna hi bhai log...
Read and enjoy :declare:
Super update Bhai 💯
 
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विराट साहब को बार-बार यह टेंशन सताने लगता है कि अगर किसी लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाया तो वह उस पर शादी करने के लिए दबाव बनाने शुरू कर देगी । यह हंड्रेड पर्सेंट सच है । लेकिन आज के जमाने मे लोग नए नए एक्सपेरिमेंट करना चालू कर दिए हैं , लिव इन रिलेशनशिप होने लगी है , वन नाइट स्टैंड का लुत्फ उठाया जाने लगा है ।
विराट साहब को किसी भी लड़की के साथ सेक्सुअल सम्बन्ध स्थापित करने से पूर्व यह अवश्य जान लेना चाहिए कि लड़की की रजा किस मे है । कम से कम झूठ बोल कर , बरगला कर , लालच देकर , ब्लैकमेल कर अनैतिक सम्बन्ध तो बिल्कुल ही नही बनाना चाहिए ।

वैसे संभोग के पश्चात मर्द अक्सर लड़की के प्रति उदासीन हो जाते हैं । मर्द अपने सेक्सुअल तृप्ति , अपनी थकान की वजह से लड़की के साथ वह अपनापन नही दिखा पाते हैं जो हमबिस्तर होने से पूर्व था । इस बुरे आदत से मर्द को बचना चाहिए । सेक्स के बाद लड़की को और भी अधिक प्रेम की जरूरत होती है , उनकी प्रशंसा की जरूरत होती है , उनके प्रति समर्पित भाव की जरूरत होती है ।

विराट साहब का नेचर स्पष्ट है पर उनकी मनः स्थिति उनके राह मे बाधक है । जब तक आप खुद अपने बात पर श्योर न हो तो आप दूसरों को कैसे कन्वेंश करोगे !

बेहतरीन अपडेट शुभम भाई ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एंड हाॅट अपडेट ।
 
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बेटीचोद, अपुन जितना सोचता गया उतना ही अपुन की गांड़ फटती चली गई लौड़ा। सेक्स और हवस के जोश में अपुन का लौड़ा जो इसके पहले अपने फुल फॉर्म में आ गयला था वो इस सबके सोचते ही गायब हो गया और वो मुरझा गया।

मजा तो खूब मिला था अपुन को लेकिन अब इस मजे की सजा का खयाल आते ही अपुन के तोते उड़ गएले थे। एकदम से खयाल आया कि अपुन को ये सब नहीं करना चाहिए था बेटीचोद।



अब आगे....


हालत तो साधना की भी खराब थी लेकिन ये भी सच था कि इस सीरियस सिचुएशन को उसी ने नॉर्मल बनाया था। असल में अपुन की गांड़ फटी वाली हालत देख उसे लगा था कि अपुन उसकी हालत देख टेंशन में आ गयला है तो उसने खुद को मजबूत बनाने का सोच लिया था और जबरन मुस्कुराने लगी थी लौड़ी। फिर अपुन को समझाने भी लगी थी कि अपुन को उसके लिए इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है। बोले तो वो ठीक है और उसकी ये हालत सुबह तक ठीक हो जाएगी।

अपुन को राहत तो मिली थी लौड़ा लेकिन अपुन का मजा थोड़ा खराब हो गयला था। ऐसा इस लिए क्योंकि उसने कहा था कि उसकी हालत सुबह तक तभी ठीक हो सकती है जब अपन लोग दुबारा सेक्स....हट लौड़ा सेक्स क्या होता है? मतलब कि अपन लोग दुबारा चुदाई न करें।

बेटीचोद, इस बात से तो अपुन का भेजा ही खिसक गयला था पर क्या कर सकता था? अपुन ये भी नहीं चाहता था कि जोर जबरदस्ती के चलते भारी गड़बड़ हो जाए और दुबारा साधना की चूत मारने को न मिले। इस लिए अपुन ने मन मार लिया था।

अब क्योंकि अपुन ऐसे खाली तो बैठे नहीं रह सकता था। बोले तो रात के इस वक्त घर में बिना किसी की जानकारी के यहां आयला था तो साधना के साथ कुछ तो मजा करना ही था अपुन को। सोने को तो अपुन अपने घर में भी सो सकता था पर यहां जब साधना जैसी खूबसूरत माल हो तो सोने का सोचना भी जैसे पाप था लौड़ा।

पर मजा करने से पहले जरूरी था कि थोड़ा हालत को ठीक किया जाए। मतलब कि साधना की हालत खराब थी तो जरूरी था कि उसके लिए कुछ किया जाए। अपुन को तो घंटा कुछ समझ नहीं आ रेला था कि क्या करे इस लिए साधना को ही उपाय सूझा था। यानि उसने अपनी चूत की सूजन को और साथ ही उसमें हो रहे दर्द को दूर करने के लिए गर्म पानी से सेंकाई करने को कहा था।

बस फिर अपन लोग ने ऐसा ही किया। बोले तो रात के अंधेरे और सन्नाटे में अपन लोग ने मोबाइल से रोशनी कर के किचेन में जा कर पहले पानी गर्म किया और फिर उस गर्म पानी को रूम के अटैच बाथरूम में ला कर साधना के चूत की सेंकाई की। इस सबमें साधना को थोड़ी बहुत तकलीफ तो हुई लेकिन उसी ने कहा था कि ये करना ज़रूरी है इस लिए किया। आखिर एक घंटे की मेहनत के बाद नतीजा ये निकला कि उसे अब पहले से आराम था। शुक्र था कि उसकी मां के पास पेन किलर भी रखी हुई थी जिसकी याद आते ही उसने अपुन के द्वारा अपनी मां के रूम से मंगवा लिया था। कुल मिला कर अब सिचुएशन पहले से काफी बेहतर थी।

इस वक्त अपन दोनों बेड पर एक दूसरे की तरफ करवट लिए पड़े हुए थे। साधना अपुन को बड़ी मोहब्बत से देखे जा रेली थी। असल में उसे अपुन का इतना ज्यादा केयर करना अच्छा लगा था। अब भला उस लौड़ी को क्या पता था कि अपुन ने तो अपुन की गांड़ न फटे इस लिए ऐसा किएला था।

खैर अपुन को लौड़ा तभी प्रॉब्लम होने लगती थी जब वो अपुन को मोहब्बत भरी नजरों से देखती थी। अपुन उसके इस तरह देखने से अंदर ही अंदर घबरा जाता था और कहीं न कहीं ये सोच के ग्लानि भी होने लगती थी कि एक वो है जो अपुन को प्यार करती है और अपुन की खुशी के लिए क्या कुछ कर रेली है और एक अपुन है जो उसकी मोहब्बत का ज़रा भी खयाल नहीं रख रहा और सिर्फ उसे चोदना चाहता है, हट लौड़ा।

तभी साधना की मधुर आवाज से अपुन चौंका।

साधना ─ काश! इस रात की कभी सुबह न हो और हम दोनों ऐसे ही इस बेड पर एक साथ लेटे रहें।

अपुन ─ अपन लोग जो चाहते हैं वैसा ज्यादातर होता नहीं है और ये होना तो इंपॉसिबल है।

साधना ─ हां जानती हूं बाबू लेकिन दिल तो यही चाहता है न।

अपुन ─ दिल को समझा के रखो।

साधना ─ तुम ही बताओ अपने दिल को कैसे समझाऊं?

अपुन क्या बताता? सच तो ये था कि उसके द्वारा प्यार मोहब्बत वाली बातें शुरू करते ही अपुन के अंदर बेचैनी होने लग गईली थी। बोले तो अपुन का दिमाग खराब होने लग गयला था। अपुन की धड़कनें बढ़ जाती थी और अपुन को किसी अनिष्ट के होने की आशंका होने लगती थी।

इतना तो अपुन समझ चुका था कि साधना सच में ही अपुन को प्यार करती है। ये उसका प्यार ही था कि उसने अपुन को अपना सब कुछ सौंप दिएला था। उसकी जगह कोई और होती तो ये सब होना या तो इंपॉसिबल था या फिर ये सब करना इतना आसान न होता।

साधना ─ झूठ मूठ का ही बोल दो बाबू कि तुम भी मुझे प्यार करते हो। तुम्हारे मुख से अपने लिए आई लव यू सुनना चाहती हूं। प्लीज बोल दो न जान।

अपुन ─ क्या झूठ सुनने से तुम्हें खुशी मिलेगी?

साधना ─ हां जरूर मिलेगी बाबू। मैं अपने दिल को ये कह कर समझा लूंगी कि तुम सच में ही मुझसे प्यार करते हो।

अपुन ─ देखो साधना पागल मत बनो। अपुन ने सुना है कि प्यार मोहब्बत बहुत खतरनाक चीज होती है। ये जिससे होती है उसी को पाने के लिए पागल रहती है और जब वो नहीं मिलती तो बहुत दुख होता है। अपुन नहीं चाहता कि तुम्हें किसी तरह का दुख झेलना पड़े। इस लिए झूठ भी मत सुनो क्योंकि इस झूठ को जब तुम अपने दिल से सच कहोगी तो वो सच में इसे सच मान लेगा और फिर तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि कब वो तुम्हें इसके लिए मजबूर करना शुरू कर दे।

साधना ─ तुम्हें कैसे पता कि मेरा दिल इस सबके लिए मुझे मजबूर करने लगेगा?

अपुन फ़ौरन कोई जवाब न दे सका। लौड़ा अपुन को सूझा ही नहीं कि क्या जवाब दे? अपुन खुद भी थोड़ा हैरान हुआ कि ये अपुन के मुख से कौन से लेवल की फिलॉस्फी निकल गईली है? पर लौड़ा कोई तो जवाब देना ही था उसे, इस लिए बोला।

अपुन ─ वो अपुन ने दो चार लव स्टोरी पढ़ेली थी उसी में अपुन को ये सब पढ़ने को मिलेला था।

साधना ने अपुन को गहरी नजरों से देखा। अपुन ज्यादा देर तक उससे नज़रें न मिला सका। अपुन एकदम से ही बेचैन और परेशान सा हो उठा। बोले तो अब अपुन का दिमाग पूरी तरह खराब होने को आ गयला था। तभी साधना बोली।

साधना ─ मैं बहुत कोशिश करती थी तुम्हें अपने दिल से निकालने की और आज से पहले तक शायद कहीं न कहीं मैं कामयाब भी थी लेकिन अब ये सब होने के बाद शायद ही मैं तुम्हें अपने दिल से निकाल पाऊं।

साधना की ये बात सुन कर अपुन को जोर का झटका लगा। दिल की धड़कनें ट्रेन के इंजन के माफिक दौड़ने लगीं लौड़ा। पलक झपकते ही दिमाग में यही खयाल आया कि बेटीचोद कहीं ये अपुन को किसी मुसीबत में न फंसा दे। बोले तो अपुन के लिए अच्छा यही होगा कि फ़ौरन ही भाग ले यहां से।

अपुन के दिमाग में तूफान खड़ा हो गयला था लौड़ा। बार बार अंदर से कोई आवाज दे रेला था कि विराट लौड़े भाग ले बेटा वरना लौड़े लग जाएंगे तेरे। फिर एकदम से अपुन को खयाल आया कि जब तक कुछ किया नहीं था तब तक अपुन सेफ था, मतलब कि वो अपुन को फंसा नहीं सकती थी लेकिन अब तो अपुन ने उसे चोद दिया है इस लिए इस मामले को ले कर वो अपुन को फंसा भी सकती है। लौड़ा कानून भी उसी का साथ देगा, और न्याय के रूप में अपुन को उसके साथ शादी भी करनी पड़ेगी।

ये सब सोचते ही अपुन की गांड़ फट गई लौड़ा। बोले तो अपुन की मां ही चुद गई बेटीचोद। तभी साधना की आवाज से अपुन को होश आया। वो लौड़ी अपुन की एकाएक बिगड़ी हालत देख घबरा गईली थी।

साधना ─ क्या हुआ बाबू? तुम ठीक तो हो न?

अपुन उसे क्या बताता कि इस वक्त क्या सोच के अपुन की फटी पड़ी है और अपुन क्या क्या सोच रेला है? पर कुछ तो जवाब देना ही था इस लिए बोला।

अपुन ─ हां...हां अपुन ठीक है।

साधना को शायद कुछ ठीक नहीं लग रेला था इस लिए झट से अपुन का चेहरा थाम लिया और अपुन से बोली।

साधना ─ नहीं बाबू, कुछ तो बात है। तुम अचानक से बहुत ज्यादा बेचैन और घबराए हुए नजर आने लगे हो। बताओ न बाबू क्या हो गया है तुम्हें?

अपुन ─ क..कुछ नहीं हुआ है। अपुन ठीक है, ट्रस्ट मी।

साधना कुछ पलों तक ध्यान से देखती रही अपुन को फिर एकदम से अपुन की तरफ सरकी और अपुन के होठों पर अपने सुलगते होठ रख दिए।

लौड़ा, उसके ऐसा करते ही अपुन पलक झपकते ही जैसे सब कुछ भूल गया। पूरे बदन में अपुन के करेंट दौड़ने लगा। उधर वो लौड़ी ऐसे अंदाज में अपुन के होठ चूसे जा रेली थी कि अपुन आधे मिनट से पहले ही किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया। अपुन के अंदर मदहोशी का नशा छाता चला गया और जाने कब अपुन भी उसका साथ देने लगा।

अपन दोनों ही नंगे थे इस लिए दोनों ही एक दूसरे के जिस्म को सहलाते जा रेले थे। कुछ ही देर में आलम ये था कि अपुन के कारनामे से साधना एक बार फिर से आहें भरने लगी थी। रूम के अंदर उसकी आहें और मादक सिसकारियां गूंजने लगीं थी।

अपुन उसके गोरे मुलायम दूध को मसल रेला था और दूसरे वाले के निप्पल को चूस रेला था। साधना बुरी तरह मचल रेली थी। इधर अपुन का लन्ड पूरे आकार में खड़ा हो के उसकी जांघों के आस पास चक्कर लगा रेला था। सहसा तभी अपुन ने महसूस किया कि साधना ने अपुन का लन्ड थाम लिया है।

उसके कोमल कोमल हाथ का स्पर्श पाते ही अपुन के लन्ड में सनसनी होने लगी। अपुन ने झट उसे छोड़ा और फिर सरक कर ऊपर ही आ गया। अब अपुन का लन्ड साधना के एकदम करीब था, पूरे रौद्र रूप में।

अपुन ─ अब तो ये तुम्हारी चूत में जा नहीं सकता इस लिए इसे ठंडा करने के लिए इसे मुंह में ले कर चूसो मेरी जान।

साधना अपुन की बात सुन कर झट से उठ बैठी। इस चक्कर में उसकी जांघों के बीच टीस उठी तो उसके मुख से दर्द भरी सिसकी निकल गई। उठ कर बैठने के बाद उसने हाथ बढ़ा कर अपुन के लन्ड को पकड़ लिया।

साधना ─ उफ्फ ये जब पूरी तरह खड़ा हो जाता है तो कितना बड़ा और भयानक लगने लगता है।

अपुन ─ क्या तुम्हें इससे डर लग रेला है?

साधना ─ हां थोड़ा थोड़ा लग रहा है बाबू। इसी ने तो मेरी मुनिया की हालत खराब की है।

अपुन ─ ये मुनिया क्या होता है? साफ साफ उसका नाम लो न।

साधना थोड़ा शरमाई फिर नजरें झुका कर बोली।

साधना ─ इसने मेरी चूत की हालत खराब कर दी है। उफ्फ बाबू ये तुम मुझसे क्या क्या बुलवा रहे हो? कुछ तो शर्म करो।

अपुन ─ जिसने की शरम, उसके फूटे करम। ऐसा अपुन ने कहीं सुनेला है।

साधना ये सुन कर हंस पड़ी। एक हाथ से वो अपुन के लन्ड को भी धीरे धीरे सहला रेली थी। उसकी नज़रें अपुन के लन्ड पर ही जमी थीं।

अपुन ─ अब सहलाती ही रहेगी या इसे प्यार भी करोगी?

साधना ने सिर उठा कर एक बार अपुन को देखा और फिर शर्माते हुए आहिस्ता से झुकने लगी। जल्दी ही उसके कोमल होठों की तपिश अपुन के लन्ड के टोपे पर स्पर्श हुई।

अपुन के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गई। मजे की तरंग में अपुन की आँखें बंद हो गईं और साथ ही अपुन ने अपना एक हाथ साधना के सिर पर रख दिया। साधना ने लन्ड के टोपे पर जीभ घुमाई और फिर मुंह खोल कर टोपे को अंदर ले लिया।

अगले ही पल उसके गर्म मुंह का एहसास हुआ तो अपुन एक बार फिर से रोमांचित हो उठा और उसके सिर पर रखे हाथ को थोड़ा जोर दे कर उसके सिर को लन्ड की तरफ झुकाया। अपुन से रहा न गया तो अपुन वहीं बेड से टेक लगा के अधलेटा सा हो गया। अब अपुन का लन्ड क्लियरली साधना के मुंह में जा सकता था।

साधना एक हाथ से अपुन का लन्ड पकड़े टोपे को धीरे धीरे चूस रेली थी। अंदर से जीभ को बार बार टोपे पर घुमाती तो अपुन के अंदर तेज सनसनी होती जिससे अपुन की सिसकी निकल जाती।

अपुन ─ आह्ह्ह्ह् साधना मेरी जान, ऐसे ही चूसो। थोड़ा और मुंह में लो न डियर।

साधना कुछ बोली नहीं, बस मुंह खोल के सिर को थोड़ा और नीचे की तरफ झुकाया जिससे अपुन का लन्ड उसके मुंह में थोड़ा और चला गया। उसके मुख के अंदर की गर्मी से अपुन का लन्ड पिघल सा रेला था और उसके होठों की गिरफ्त से अपुन को बड़ा ही अजीब लेकिन मजे का एहसास हो रेला था।

कुछ ही देर में अपुन ने देखा कि साधना एक हाथ से लन्ड को पकड़े करीब आधा लन्ड मुंह में भर लेती और फिर उसे बाहर निकालती। झुके होने की वजह से उसकी तेज चलती सांसें अपुन के जांघों के बीच पड़ रेली थी जिससे अपुन को अजीब सी झुनझुनी हो रेली थी।

अपुन ─ ओह! साधना, कितना अच्छा लग रेला है। बोले तो मस्त मजा आ रेला है अपुन को।

अपुन की ये बात सुनते ही साधना ने झट से अपुन का लन्ड मुंह से निकाल दिया और सिर उठा कर सीधा बैठ गई। उसकी सांसें उखड़ी हुईं थी। चेहरा अजीब सा दिख रेला था। मुंह भी अजीब सा बनाया हुआ था उसने। इधर जैसे ही उसने लन्ड मुंह से बाहर निकाला तो अपुन ने आँखें खोल कर उसे देखा। बोले तो अपुन के मजे में खलल पड़ गयला था जिससे अपुन को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था।

साधना झट से पलटी और बेड के नीचे फर्श पर थूकने लगी। फिर वापस अपुन की तरफ घूमी तो अपुन ने देखा उसने अजीब सा मुंह बनाया हुआ था।

अपुन ─ क्या हुआ?

साधना ─ तुम्हें तो मजा आ रहा था लेकिन मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था इस लिए तुम्हारे लं...लंड को बाहर निकाल दिया।

अपुन को उसकी ये बात सुन कर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। अपुन ने इस बार नाराजगी से देखा उसे।

अपुन ─ जब अपुन तुम्हारी चूत चाट रेला था तब अपुन ने नहीं कहा था कि अपुन को बड़ा अजीब फील हो रेला है। अपुन चाटता ही रहा था क्योंकि अपुन को अच्छा लग रेला था और तुम्हें भी बहुत मज़ा आ रेला था। लेकिन तुम्हें अपुन का लन्ड चूसने में न तो अच्छा लग रेला है और न ही मजा आ रेला है।

साधना अपुन की गुस्से में कही ये बातें सुन कर एकदम से हड़बड़ा गई और साथ ही घबरा भी गई।

साधना ─ सॉरी बाबू। मेरा वो मतलब नहीं था। प्लीज गुस्सा मत हो।

अपुन ─ तुमने जो किया है क्या उससे गुस्सा नहीं आएगा?

साधना ─ सॉरी बाबू। तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। मैं मानती हूं कि ऐसे में गुस्सा आएगा लेकिन समझने की कोशिश करो जान कि हर कोई एक जैसा नहीं होता।

अपुन ─ क्या मतलब है तुम्हारा एक जैसा नहीं होता? क्या तुम ये कहना चाहती हो कि अपुन कुत्ता है जो किसी की भी चूत बड़े आराम से चाट सकता है और तुम एक इंसान हो इस लिए लन्ड चूसने में तुम्हें प्रॉब्लम होती है?

साधना अपुन की बात सुन कर और भी घबरा गई। पलक झपकते ही उसकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से बोली।

साधना ─ ये ये तुम क्या बोले जा रहे हो बाबू। प्लीज ऐसा मत बोलो। मेरा वो मतलब नहीं था। मुझे माफ कर दो प्लीज।

अपुन का सच में भेजा घूम गयला था। बेटीचोद, ऐसा भी नहीं था कि अपुन का लन्ड इतना गंदा दिखता था या उसके आस पास बालों की गंदगी उगी हुई थी। बोले तो अपुन का लन्ड अपुन के रंग से बस थोड़ा ही अनफेयर था और झांटों का तो नामो निशान तक नहीं था। अपुन को झांटे पसंद ही नहीं थी लौड़ा। इसके बावजूद वो लौड़ी बोल रेली थी कि उसे अजीब फील हो रेला है, हट लौड़ी।

साधना अपुन को मनाने में लगी थी और अपुन का दिमाग लौड़ा शांत ही नहीं हो रेला था। फिर अचानक ही जब साधना सुबकने लगी तो अपुन को झटका लगा। पलक झपकते ही अपुन का गुस्सा झाग की तरह ठंडा पड़ गया लौड़ा।

साधना ─ प्लीज मुझे माफ कर दो बाबू। अब से कभी ऐसा नहीं बोलूंगी। बस एक बार मान जाओ।

अपुन ने उसे खींच कर गले से लगा लिया। बेटीचोद उसके यूं सुबकने पर अपुन को अब जा के बुरा लगने लग गयला था। खुद पर ये सोच के गुस्सा भी आया कि इतनी छोटी सी बात पर अपुन ने उसे रुला दिया।

अपुन ─ प्लीज चुप हो जाओ एंड आई एम सॉरी। पता नहीं कैसे गुस्सा आ गयला था अपुन को।

साधना ─ नहीं मेरी गलती थी। तुम्हारा गुस्सा करना जायज था।

अपुन ने इस बात को ज्यादा लंबा करना ठीक नहीं समझा इस लिए उसे प्यार से अलग किया और बेड पर लिटा दिया। वो मासूम सी शक्ल बनाए अपुन को ही देखे जा रेली थी। अपुन भी उसके साथ लेट गया। जैसे ही अपुन लेटा तो वो उठ गई। ये देख अपुन बोला।

अपुन ─ क्या हुआ? उठ क्यों गई?

साधना ─ वो मैं तुम्हारा लं...लंड मुंह में ले कर तुम्हें शांत कर देती हूं। ऐसे तो तुम्हें भी शांति नहीं मिलेगी न बाबू। मैं नहीं चाहती कि मेरी जान रात भर बेचैन रहे।

अपुन ─ अरे! अब इसकी जरूरत नहीं है। अपुन का लन्ड अब खुद ही शांत हो के बैठ गयला है। इस लिए अब तुम आराम करो और सो जाओ। वैसे भी तुम्हारी हालत ठीक नहीं है।

साधना ─ नहीं बाबू, मैं ठीक हूं। तुम आराम से लेटे रहो, मैं इस बार अच्छे से करूंगी।

पर अपुन ने मना कर दिया। बोले तो इस बार बड़े प्यार और स्नेह से उसे मना किया। असल में अपुन को अब सच में लग रेला था कि उसे आराम करना चाहिए। इस तरह का मजा तो बाद में भी लिया जा सकता था।

खैर अपन दोनों ने एक दूसरे को गुड नाइट किस किया और फिर एक दूसरे को बाहों में ले कर सोने की कोशिश करने लगे। पता नहीं कब अपन लोग को नींद आई लौड़ा।

अलार्म क्लॉक के बजने से अपन दोनों की ही आंख खुल गई। अपुन ने जब अलार्म क्लॉक में टाइम देखा तो उसमें सुबह के पांच बजे थे। साधना ने सिर उठाया और मुस्कुराते हुए पहले अपुन के होठों को चूमा, फिर बोली।

साधना ─ गुड मॉर्निंग बाबू।

अपुन ─ मॉर्निंग डियर। वैसे ये अलार्म तुमने बिल्कुल ठीक लगा रेला था वरना अपुन को यहां से निकलने में देर हो जाती।

साधना को भी सिचुएशन का एहसास हुआ तो वो फ़ौरन उठ गई। अपुन भी उठा और भाग कर बाथरूम में जा कर पहले पेशाब किया और फिर आ कर फटाफट कपड़े पहनने लगा।

अपुन को अब ये सोच के टेंशन होने लगी थी कि अगर समय रहते घर नहीं पहुंचा तो कहीं गड़बड़ न हो जाए। खैर जल्दी ही अपुन कपड़े पहन कर रेडी हो गया। बाइक की चाभी जेब में ही थी। इस बीच साधना ने भी अपने कपड़े पहन लिए थे। वो थोड़ा उदास थी। ज़ाहिर है अपुन के जाने के चलते ही उसका चेहरा उतर गयला था।

साधना ─ अब कब मिलोगे बाबू? प्लीज टाइम निकाल कर आ जाया करो न।

अपुन ─ अब से हर रोज यहां आने की कोशिश करेगा अपुन लेकिन अगर न आ सका तो टेंशन नहीं लेने का।

साधना ─ पहुंच कर फोन करना मुझे या मैसेज कर देना।

अपुन ─ ठीक है। तुम भी अपना खयाल रखना। खास कर अपनी चूत का।

साधना बुरी तरह लजा गई। फिर मुस्कुराते हुए बोली।

साधना ─ धत, कितने बेशर्म हो तुम।

अपुन ─ अपुन तो ऐसा ही है, तुम्हें भी ऐसे बेशर्म लड़के से प्यार नहीं करना चाहिए।

साधना ─ ये तो अब मुश्किल है बाबू। अच्छा एक बार अपने होठों को तो चूम लेने दो।

सच कहे तो अपुन का भी उसके होठ चूमने का मन था इस लिए झट से अपन लोग के होठ मिल गए।

करीब दो मिनट तक अपन लोग ने एक दूसरे के होठों को चूमा। इस बीच अपुन ने उसके टॉप के ऊपर से ही उसके दूध दबाए मगर लौड़ा अपुन को उन्हें नंगा कर के थोड़ा चूसने का भी मन कर रेला था इस लिए होठों को छोड़ते ही अपुन ने बिना उससे पूछे उसके टॉप को ऊपर किया और ब्रा से निकाल कर उसकी एक छाती को मुंह में भर लिया।

अपुन के ऐसा करते ही साधना मचल उठी और उसके मुख से मजे में डूबी सिसकी निकल गई। अपुन ने बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को दबा दबा के चूसा और फिर उससे अलग हो गया। जैसे ही अपन दोनों की नज़र मिली तो साधना शर्मा गई।

अपुन ─ तुम्हारे ये बूब्स सच में बहुत प्यारे हैं। काश! ये चौबीसों घंटे अपुन के पास होते तो जब भी मन करता इनको मुंह में ले कर चूसने लगता।

साधना ─ ये तो तभी पॉसिबल है बाबू जब मैं हर वक्त तुम्हारे ही पास रहूं और ऐसा तभी हो सकता है जब हम दोनों की एक दूसरे से शादी हो जाए।

अपुन ─ फिलहाल तो ऐसा संभव नहीं है। अच्छा अब चलता है अपुन। अपना खयाल रखना और हां उसका भी....अगली बार उसको अच्छे से प्यार करेगा अपुन और फिर दबा के पेलेगा भी।

साधना अपुन की ये बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई। फिर अपन दोनों दरवाजे तक साथ साथ ही आए। उसने दरवाज़ा खोलने से पहले एक बार फिर से अपुन के होठों को चूमा और फिर जब उसने दरवाज़ा खोला तो अपुन उसे बाय बोल कर चुपके से निकल लिया।


To be continued...


Aaj ke liye itna hi bhai log...
Read and enjoy :declare:

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बेटीचोद, अपुन जितना सोचता गया उतना ही अपुन की गांड़ फटती चली गई लौड़ा। सेक्स और हवस के जोश में अपुन का लौड़ा जो इसके पहले अपने फुल फॉर्म में आ गयला था वो इस सबके सोचते ही गायब हो गया और वो मुरझा गया।

मजा तो खूब मिला था अपुन को लेकिन अब इस मजे की सजा का खयाल आते ही अपुन के तोते उड़ गएले थे। एकदम से खयाल आया कि अपुन को ये सब नहीं करना चाहिए था बेटीचोद।



अब आगे....


हालत तो साधना की भी खराब थी लेकिन ये भी सच था कि इस सीरियस सिचुएशन को उसी ने नॉर्मल बनाया था। असल में अपुन की गांड़ फटी वाली हालत देख उसे लगा था कि अपुन उसकी हालत देख टेंशन में आ गयला है तो उसने खुद को मजबूत बनाने का सोच लिया था और जबरन मुस्कुराने लगी थी लौड़ी। फिर अपुन को समझाने भी लगी थी कि अपुन को उसके लिए इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है। बोले तो वो ठीक है और उसकी ये हालत सुबह तक ठीक हो जाएगी।

अपुन को राहत तो मिली थी लौड़ा लेकिन अपुन का मजा थोड़ा खराब हो गयला था। ऐसा इस लिए क्योंकि उसने कहा था कि उसकी हालत सुबह तक तभी ठीक हो सकती है जब अपन लोग दुबारा सेक्स....हट लौड़ा सेक्स क्या होता है? मतलब कि अपन लोग दुबारा चुदाई न करें।

बेटीचोद, इस बात से तो अपुन का भेजा ही खिसक गयला था पर क्या कर सकता था? अपुन ये भी नहीं चाहता था कि जोर जबरदस्ती के चलते भारी गड़बड़ हो जाए और दुबारा साधना की चूत मारने को न मिले। इस लिए अपुन ने मन मार लिया था।

अब क्योंकि अपुन ऐसे खाली तो बैठे नहीं रह सकता था। बोले तो रात के इस वक्त घर में बिना किसी की जानकारी के यहां आयला था तो साधना के साथ कुछ तो मजा करना ही था अपुन को। सोने को तो अपुन अपने घर में भी सो सकता था पर यहां जब साधना जैसी खूबसूरत माल हो तो सोने का सोचना भी जैसे पाप था लौड़ा।

पर मजा करने से पहले जरूरी था कि थोड़ा हालत को ठीक किया जाए। मतलब कि साधना की हालत खराब थी तो जरूरी था कि उसके लिए कुछ किया जाए। अपुन को तो घंटा कुछ समझ नहीं आ रेला था कि क्या करे इस लिए साधना को ही उपाय सूझा था। यानि उसने अपनी चूत की सूजन को और साथ ही उसमें हो रहे दर्द को दूर करने के लिए गर्म पानी से सेंकाई करने को कहा था।

बस फिर अपन लोग ने ऐसा ही किया। बोले तो रात के अंधेरे और सन्नाटे में अपन लोग ने मोबाइल से रोशनी कर के किचेन में जा कर पहले पानी गर्म किया और फिर उस गर्म पानी को रूम के अटैच बाथरूम में ला कर साधना के चूत की सेंकाई की। इस सबमें साधना को थोड़ी बहुत तकलीफ तो हुई लेकिन उसी ने कहा था कि ये करना ज़रूरी है इस लिए किया। आखिर एक घंटे की मेहनत के बाद नतीजा ये निकला कि उसे अब पहले से आराम था। शुक्र था कि उसकी मां के पास पेन किलर भी रखी हुई थी जिसकी याद आते ही उसने अपुन के द्वारा अपनी मां के रूम से मंगवा लिया था। कुल मिला कर अब सिचुएशन पहले से काफी बेहतर थी।

इस वक्त अपन दोनों बेड पर एक दूसरे की तरफ करवट लिए पड़े हुए थे। साधना अपुन को बड़ी मोहब्बत से देखे जा रेली थी। असल में उसे अपुन का इतना ज्यादा केयर करना अच्छा लगा था। अब भला उस लौड़ी को क्या पता था कि अपुन ने तो अपुन की गांड़ न फटे इस लिए ऐसा किएला था।

खैर अपुन को लौड़ा तभी प्रॉब्लम होने लगती थी जब वो अपुन को मोहब्बत भरी नजरों से देखती थी। अपुन उसके इस तरह देखने से अंदर ही अंदर घबरा जाता था और कहीं न कहीं ये सोच के ग्लानि भी होने लगती थी कि एक वो है जो अपुन को प्यार करती है और अपुन की खुशी के लिए क्या कुछ कर रेली है और एक अपुन है जो उसकी मोहब्बत का ज़रा भी खयाल नहीं रख रहा और सिर्फ उसे चोदना चाहता है, हट लौड़ा।

तभी साधना की मधुर आवाज से अपुन चौंका।

साधना ─ काश! इस रात की कभी सुबह न हो और हम दोनों ऐसे ही इस बेड पर एक साथ लेटे रहें।

अपुन ─ अपन लोग जो चाहते हैं वैसा ज्यादातर होता नहीं है और ये होना तो इंपॉसिबल है।

साधना ─ हां जानती हूं बाबू लेकिन दिल तो यही चाहता है न।

अपुन ─ दिल को समझा के रखो।

साधना ─ तुम ही बताओ अपने दिल को कैसे समझाऊं?

अपुन क्या बताता? सच तो ये था कि उसके द्वारा प्यार मोहब्बत वाली बातें शुरू करते ही अपुन के अंदर बेचैनी होने लग गईली थी। बोले तो अपुन का दिमाग खराब होने लग गयला था। अपुन की धड़कनें बढ़ जाती थी और अपुन को किसी अनिष्ट के होने की आशंका होने लगती थी।

इतना तो अपुन समझ चुका था कि साधना सच में ही अपुन को प्यार करती है। ये उसका प्यार ही था कि उसने अपुन को अपना सब कुछ सौंप दिएला था। उसकी जगह कोई और होती तो ये सब होना या तो इंपॉसिबल था या फिर ये सब करना इतना आसान न होता।

साधना ─ झूठ मूठ का ही बोल दो बाबू कि तुम भी मुझे प्यार करते हो। तुम्हारे मुख से अपने लिए आई लव यू सुनना चाहती हूं। प्लीज बोल दो न जान।

अपुन ─ क्या झूठ सुनने से तुम्हें खुशी मिलेगी?

साधना ─ हां जरूर मिलेगी बाबू। मैं अपने दिल को ये कह कर समझा लूंगी कि तुम सच में ही मुझसे प्यार करते हो।

अपुन ─ देखो साधना पागल मत बनो। अपुन ने सुना है कि प्यार मोहब्बत बहुत खतरनाक चीज होती है। ये जिससे होती है उसी को पाने के लिए पागल रहती है और जब वो नहीं मिलती तो बहुत दुख होता है। अपुन नहीं चाहता कि तुम्हें किसी तरह का दुख झेलना पड़े। इस लिए झूठ भी मत सुनो क्योंकि इस झूठ को जब तुम अपने दिल से सच कहोगी तो वो सच में इसे सच मान लेगा और फिर तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि कब वो तुम्हें इसके लिए मजबूर करना शुरू कर दे।

साधना ─ तुम्हें कैसे पता कि मेरा दिल इस सबके लिए मुझे मजबूर करने लगेगा?

अपुन फ़ौरन कोई जवाब न दे सका। लौड़ा अपुन को सूझा ही नहीं कि क्या जवाब दे? अपुन खुद भी थोड़ा हैरान हुआ कि ये अपुन के मुख से कौन से लेवल की फिलॉस्फी निकल गईली है? पर लौड़ा कोई तो जवाब देना ही था उसे, इस लिए बोला।

अपुन ─ वो अपुन ने दो चार लव स्टोरी पढ़ेली थी उसी में अपुन को ये सब पढ़ने को मिलेला था।

साधना ने अपुन को गहरी नजरों से देखा। अपुन ज्यादा देर तक उससे नज़रें न मिला सका। अपुन एकदम से ही बेचैन और परेशान सा हो उठा। बोले तो अब अपुन का दिमाग पूरी तरह खराब होने को आ गयला था। तभी साधना बोली।

साधना ─ मैं बहुत कोशिश करती थी तुम्हें अपने दिल से निकालने की और आज से पहले तक शायद कहीं न कहीं मैं कामयाब भी थी लेकिन अब ये सब होने के बाद शायद ही मैं तुम्हें अपने दिल से निकाल पाऊं।

साधना की ये बात सुन कर अपुन को जोर का झटका लगा। दिल की धड़कनें ट्रेन के इंजन के माफिक दौड़ने लगीं लौड़ा। पलक झपकते ही दिमाग में यही खयाल आया कि बेटीचोद कहीं ये अपुन को किसी मुसीबत में न फंसा दे। बोले तो अपुन के लिए अच्छा यही होगा कि फ़ौरन ही भाग ले यहां से।

अपुन के दिमाग में तूफान खड़ा हो गयला था लौड़ा। बार बार अंदर से कोई आवाज दे रेला था कि विराट लौड़े भाग ले बेटा वरना लौड़े लग जाएंगे तेरे। फिर एकदम से अपुन को खयाल आया कि जब तक कुछ किया नहीं था तब तक अपुन सेफ था, मतलब कि वो अपुन को फंसा नहीं सकती थी लेकिन अब तो अपुन ने उसे चोद दिया है इस लिए इस मामले को ले कर वो अपुन को फंसा भी सकती है। लौड़ा कानून भी उसी का साथ देगा, और न्याय के रूप में अपुन को उसके साथ शादी भी करनी पड़ेगी।

ये सब सोचते ही अपुन की गांड़ फट गई लौड़ा। बोले तो अपुन की मां ही चुद गई बेटीचोद। तभी साधना की आवाज से अपुन को होश आया। वो लौड़ी अपुन की एकाएक बिगड़ी हालत देख घबरा गईली थी।

साधना ─ क्या हुआ बाबू? तुम ठीक तो हो न?

अपुन उसे क्या बताता कि इस वक्त क्या सोच के अपुन की फटी पड़ी है और अपुन क्या क्या सोच रेला है? पर कुछ तो जवाब देना ही था इस लिए बोला।

अपुन ─ हां...हां अपुन ठीक है।

साधना को शायद कुछ ठीक नहीं लग रेला था इस लिए झट से अपुन का चेहरा थाम लिया और अपुन से बोली।

साधना ─ नहीं बाबू, कुछ तो बात है। तुम अचानक से बहुत ज्यादा बेचैन और घबराए हुए नजर आने लगे हो। बताओ न बाबू क्या हो गया है तुम्हें?

अपुन ─ क..कुछ नहीं हुआ है। अपुन ठीक है, ट्रस्ट मी।

साधना कुछ पलों तक ध्यान से देखती रही अपुन को फिर एकदम से अपुन की तरफ सरकी और अपुन के होठों पर अपने सुलगते होठ रख दिए।

लौड़ा, उसके ऐसा करते ही अपुन पलक झपकते ही जैसे सब कुछ भूल गया। पूरे बदन में अपुन के करेंट दौड़ने लगा। उधर वो लौड़ी ऐसे अंदाज में अपुन के होठ चूसे जा रेली थी कि अपुन आधे मिनट से पहले ही किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया। अपुन के अंदर मदहोशी का नशा छाता चला गया और जाने कब अपुन भी उसका साथ देने लगा।

अपन दोनों ही नंगे थे इस लिए दोनों ही एक दूसरे के जिस्म को सहलाते जा रेले थे। कुछ ही देर में आलम ये था कि अपुन के कारनामे से साधना एक बार फिर से आहें भरने लगी थी। रूम के अंदर उसकी आहें और मादक सिसकारियां गूंजने लगीं थी।

अपुन उसके गोरे मुलायम दूध को मसल रेला था और दूसरे वाले के निप्पल को चूस रेला था। साधना बुरी तरह मचल रेली थी। इधर अपुन का लन्ड पूरे आकार में खड़ा हो के उसकी जांघों के आस पास चक्कर लगा रेला था। सहसा तभी अपुन ने महसूस किया कि साधना ने अपुन का लन्ड थाम लिया है।

उसके कोमल कोमल हाथ का स्पर्श पाते ही अपुन के लन्ड में सनसनी होने लगी। अपुन ने झट उसे छोड़ा और फिर सरक कर ऊपर ही आ गया। अब अपुन का लन्ड साधना के एकदम करीब था, पूरे रौद्र रूप में।

अपुन ─ अब तो ये तुम्हारी चूत में जा नहीं सकता इस लिए इसे ठंडा करने के लिए इसे मुंह में ले कर चूसो मेरी जान।

साधना अपुन की बात सुन कर झट से उठ बैठी। इस चक्कर में उसकी जांघों के बीच टीस उठी तो उसके मुख से दर्द भरी सिसकी निकल गई। उठ कर बैठने के बाद उसने हाथ बढ़ा कर अपुन के लन्ड को पकड़ लिया।

साधना ─ उफ्फ ये जब पूरी तरह खड़ा हो जाता है तो कितना बड़ा और भयानक लगने लगता है।

अपुन ─ क्या तुम्हें इससे डर लग रेला है?

साधना ─ हां थोड़ा थोड़ा लग रहा है बाबू। इसी ने तो मेरी मुनिया की हालत खराब की है।

अपुन ─ ये मुनिया क्या होता है? साफ साफ उसका नाम लो न।

साधना थोड़ा शरमाई फिर नजरें झुका कर बोली।

साधना ─ इसने मेरी चूत की हालत खराब कर दी है। उफ्फ बाबू ये तुम मुझसे क्या क्या बुलवा रहे हो? कुछ तो शर्म करो।

अपुन ─ जिसने की शरम, उसके फूटे करम। ऐसा अपुन ने कहीं सुनेला है।

साधना ये सुन कर हंस पड़ी। एक हाथ से वो अपुन के लन्ड को भी धीरे धीरे सहला रेली थी। उसकी नज़रें अपुन के लन्ड पर ही जमी थीं।

अपुन ─ अब सहलाती ही रहेगी या इसे प्यार भी करोगी?

साधना ने सिर उठा कर एक बार अपुन को देखा और फिर शर्माते हुए आहिस्ता से झुकने लगी। जल्दी ही उसके कोमल होठों की तपिश अपुन के लन्ड के टोपे पर स्पर्श हुई।

अपुन के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गई। मजे की तरंग में अपुन की आँखें बंद हो गईं और साथ ही अपुन ने अपना एक हाथ साधना के सिर पर रख दिया। साधना ने लन्ड के टोपे पर जीभ घुमाई और फिर मुंह खोल कर टोपे को अंदर ले लिया।

अगले ही पल उसके गर्म मुंह का एहसास हुआ तो अपुन एक बार फिर से रोमांचित हो उठा और उसके सिर पर रखे हाथ को थोड़ा जोर दे कर उसके सिर को लन्ड की तरफ झुकाया। अपुन से रहा न गया तो अपुन वहीं बेड से टेक लगा के अधलेटा सा हो गया। अब अपुन का लन्ड क्लियरली साधना के मुंह में जा सकता था।

साधना एक हाथ से अपुन का लन्ड पकड़े टोपे को धीरे धीरे चूस रेली थी। अंदर से जीभ को बार बार टोपे पर घुमाती तो अपुन के अंदर तेज सनसनी होती जिससे अपुन की सिसकी निकल जाती।

अपुन ─ आह्ह्ह्ह् साधना मेरी जान, ऐसे ही चूसो। थोड़ा और मुंह में लो न डियर।

साधना कुछ बोली नहीं, बस मुंह खोल के सिर को थोड़ा और नीचे की तरफ झुकाया जिससे अपुन का लन्ड उसके मुंह में थोड़ा और चला गया। उसके मुख के अंदर की गर्मी से अपुन का लन्ड पिघल सा रेला था और उसके होठों की गिरफ्त से अपुन को बड़ा ही अजीब लेकिन मजे का एहसास हो रेला था।

कुछ ही देर में अपुन ने देखा कि साधना एक हाथ से लन्ड को पकड़े करीब आधा लन्ड मुंह में भर लेती और फिर उसे बाहर निकालती। झुके होने की वजह से उसकी तेज चलती सांसें अपुन के जांघों के बीच पड़ रेली थी जिससे अपुन को अजीब सी झुनझुनी हो रेली थी।

अपुन ─ ओह! साधना, कितना अच्छा लग रेला है। बोले तो मस्त मजा आ रेला है अपुन को।

अपुन की ये बात सुनते ही साधना ने झट से अपुन का लन्ड मुंह से निकाल दिया और सिर उठा कर सीधा बैठ गई। उसकी सांसें उखड़ी हुईं थी। चेहरा अजीब सा दिख रेला था। मुंह भी अजीब सा बनाया हुआ था उसने। इधर जैसे ही उसने लन्ड मुंह से बाहर निकाला तो अपुन ने आँखें खोल कर उसे देखा। बोले तो अपुन के मजे में खलल पड़ गयला था जिससे अपुन को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था।

साधना झट से पलटी और बेड के नीचे फर्श पर थूकने लगी। फिर वापस अपुन की तरफ घूमी तो अपुन ने देखा उसने अजीब सा मुंह बनाया हुआ था।

अपुन ─ क्या हुआ?

साधना ─ तुम्हें तो मजा आ रहा था लेकिन मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था इस लिए तुम्हारे लं...लंड को बाहर निकाल दिया।

अपुन को उसकी ये बात सुन कर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। अपुन ने इस बार नाराजगी से देखा उसे।

अपुन ─ जब अपुन तुम्हारी चूत चाट रेला था तब अपुन ने नहीं कहा था कि अपुन को बड़ा अजीब फील हो रेला है। अपुन चाटता ही रहा था क्योंकि अपुन को अच्छा लग रेला था और तुम्हें भी बहुत मज़ा आ रेला था। लेकिन तुम्हें अपुन का लन्ड चूसने में न तो अच्छा लग रेला है और न ही मजा आ रेला है।

साधना अपुन की गुस्से में कही ये बातें सुन कर एकदम से हड़बड़ा गई और साथ ही घबरा भी गई।

साधना ─ सॉरी बाबू। मेरा वो मतलब नहीं था। प्लीज गुस्सा मत हो।

अपुन ─ तुमने जो किया है क्या उससे गुस्सा नहीं आएगा?

साधना ─ सॉरी बाबू। तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। मैं मानती हूं कि ऐसे में गुस्सा आएगा लेकिन समझने की कोशिश करो जान कि हर कोई एक जैसा नहीं होता।

अपुन ─ क्या मतलब है तुम्हारा एक जैसा नहीं होता? क्या तुम ये कहना चाहती हो कि अपुन कुत्ता है जो किसी की भी चूत बड़े आराम से चाट सकता है और तुम एक इंसान हो इस लिए लन्ड चूसने में तुम्हें प्रॉब्लम होती है?

साधना अपुन की बात सुन कर और भी घबरा गई। पलक झपकते ही उसकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से बोली।

साधना ─ ये ये तुम क्या बोले जा रहे हो बाबू। प्लीज ऐसा मत बोलो। मेरा वो मतलब नहीं था। मुझे माफ कर दो प्लीज।

अपुन का सच में भेजा घूम गयला था। बेटीचोद, ऐसा भी नहीं था कि अपुन का लन्ड इतना गंदा दिखता था या उसके आस पास बालों की गंदगी उगी हुई थी। बोले तो अपुन का लन्ड अपुन के रंग से बस थोड़ा ही अनफेयर था और झांटों का तो नामो निशान तक नहीं था। अपुन को झांटे पसंद ही नहीं थी लौड़ा। इसके बावजूद वो लौड़ी बोल रेली थी कि उसे अजीब फील हो रेला है, हट लौड़ी।

साधना अपुन को मनाने में लगी थी और अपुन का दिमाग लौड़ा शांत ही नहीं हो रेला था। फिर अचानक ही जब साधना सुबकने लगी तो अपुन को झटका लगा। पलक झपकते ही अपुन का गुस्सा झाग की तरह ठंडा पड़ गया लौड़ा।

साधना ─ प्लीज मुझे माफ कर दो बाबू। अब से कभी ऐसा नहीं बोलूंगी। बस एक बार मान जाओ।

अपुन ने उसे खींच कर गले से लगा लिया। बेटीचोद उसके यूं सुबकने पर अपुन को अब जा के बुरा लगने लग गयला था। खुद पर ये सोच के गुस्सा भी आया कि इतनी छोटी सी बात पर अपुन ने उसे रुला दिया।

अपुन ─ प्लीज चुप हो जाओ एंड आई एम सॉरी। पता नहीं कैसे गुस्सा आ गयला था अपुन को।

साधना ─ नहीं मेरी गलती थी। तुम्हारा गुस्सा करना जायज था।

अपुन ने इस बात को ज्यादा लंबा करना ठीक नहीं समझा इस लिए उसे प्यार से अलग किया और बेड पर लिटा दिया। वो मासूम सी शक्ल बनाए अपुन को ही देखे जा रेली थी। अपुन भी उसके साथ लेट गया। जैसे ही अपुन लेटा तो वो उठ गई। ये देख अपुन बोला।

अपुन ─ क्या हुआ? उठ क्यों गई?

साधना ─ वो मैं तुम्हारा लं...लंड मुंह में ले कर तुम्हें शांत कर देती हूं। ऐसे तो तुम्हें भी शांति नहीं मिलेगी न बाबू। मैं नहीं चाहती कि मेरी जान रात भर बेचैन रहे।

अपुन ─ अरे! अब इसकी जरूरत नहीं है। अपुन का लन्ड अब खुद ही शांत हो के बैठ गयला है। इस लिए अब तुम आराम करो और सो जाओ। वैसे भी तुम्हारी हालत ठीक नहीं है।

साधना ─ नहीं बाबू, मैं ठीक हूं। तुम आराम से लेटे रहो, मैं इस बार अच्छे से करूंगी।

पर अपुन ने मना कर दिया। बोले तो इस बार बड़े प्यार और स्नेह से उसे मना किया। असल में अपुन को अब सच में लग रेला था कि उसे आराम करना चाहिए। इस तरह का मजा तो बाद में भी लिया जा सकता था।

खैर अपन दोनों ने एक दूसरे को गुड नाइट किस किया और फिर एक दूसरे को बाहों में ले कर सोने की कोशिश करने लगे। पता नहीं कब अपन लोग को नींद आई लौड़ा।

अलार्म क्लॉक के बजने से अपन दोनों की ही आंख खुल गई। अपुन ने जब अलार्म क्लॉक में टाइम देखा तो उसमें सुबह के पांच बजे थे। साधना ने सिर उठाया और मुस्कुराते हुए पहले अपुन के होठों को चूमा, फिर बोली।

साधना ─ गुड मॉर्निंग बाबू।

अपुन ─ मॉर्निंग डियर। वैसे ये अलार्म तुमने बिल्कुल ठीक लगा रेला था वरना अपुन को यहां से निकलने में देर हो जाती।

साधना को भी सिचुएशन का एहसास हुआ तो वो फ़ौरन उठ गई। अपुन भी उठा और भाग कर बाथरूम में जा कर पहले पेशाब किया और फिर आ कर फटाफट कपड़े पहनने लगा।

अपुन को अब ये सोच के टेंशन होने लगी थी कि अगर समय रहते घर नहीं पहुंचा तो कहीं गड़बड़ न हो जाए। खैर जल्दी ही अपुन कपड़े पहन कर रेडी हो गया। बाइक की चाभी जेब में ही थी। इस बीच साधना ने भी अपने कपड़े पहन लिए थे। वो थोड़ा उदास थी। ज़ाहिर है अपुन के जाने के चलते ही उसका चेहरा उतर गयला था।

साधना ─ अब कब मिलोगे बाबू? प्लीज टाइम निकाल कर आ जाया करो न।

अपुन ─ अब से हर रोज यहां आने की कोशिश करेगा अपुन लेकिन अगर न आ सका तो टेंशन नहीं लेने का।

साधना ─ पहुंच कर फोन करना मुझे या मैसेज कर देना।

अपुन ─ ठीक है। तुम भी अपना खयाल रखना। खास कर अपनी चूत का।

साधना बुरी तरह लजा गई। फिर मुस्कुराते हुए बोली।

साधना ─ धत, कितने बेशर्म हो तुम।

अपुन ─ अपुन तो ऐसा ही है, तुम्हें भी ऐसे बेशर्म लड़के से प्यार नहीं करना चाहिए।

साधना ─ ये तो अब मुश्किल है बाबू। अच्छा एक बार अपने होठों को तो चूम लेने दो।

सच कहे तो अपुन का भी उसके होठ चूमने का मन था इस लिए झट से अपन लोग के होठ मिल गए।

करीब दो मिनट तक अपन लोग ने एक दूसरे के होठों को चूमा। इस बीच अपुन ने उसके टॉप के ऊपर से ही उसके दूध दबाए मगर लौड़ा अपुन को उन्हें नंगा कर के थोड़ा चूसने का भी मन कर रेला था इस लिए होठों को छोड़ते ही अपुन ने बिना उससे पूछे उसके टॉप को ऊपर किया और ब्रा से निकाल कर उसकी एक छाती को मुंह में भर लिया।

अपुन के ऐसा करते ही साधना मचल उठी और उसके मुख से मजे में डूबी सिसकी निकल गई। अपुन ने बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को दबा दबा के चूसा और फिर उससे अलग हो गया। जैसे ही अपन दोनों की नज़र मिली तो साधना शर्मा गई।

अपुन ─ तुम्हारे ये बूब्स सच में बहुत प्यारे हैं। काश! ये चौबीसों घंटे अपुन के पास होते तो जब भी मन करता इनको मुंह में ले कर चूसने लगता।

साधना ─ ये तो तभी पॉसिबल है बाबू जब मैं हर वक्त तुम्हारे ही पास रहूं और ऐसा तभी हो सकता है जब हम दोनों की एक दूसरे से शादी हो जाए।

अपुन ─ फिलहाल तो ऐसा संभव नहीं है। अच्छा अब चलता है अपुन। अपना खयाल रखना और हां उसका भी....अगली बार उसको अच्छे से प्यार करेगा अपुन और फिर दबा के पेलेगा भी।

साधना अपुन की ये बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई। फिर अपन दोनों दरवाजे तक साथ साथ ही आए। उसने दरवाज़ा खोलने से पहले एक बार फिर से अपुन के होठों को चूमा और फिर जब उसने दरवाज़ा खोला तो अपुन उसे बाय बोल कर चुपके से निकल लिया।


To be continued...


Aaj ke liye itna hi bhai log...
Read and enjoy :declare:
Nice and superb update....
 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Update ~ 11




साधना ─ ये तो तभी पॉसिबल है बाबू जब मैं हर वक्त तुम्हारे ही पास रहूं और ऐसा तभी हो सकता है जब हम दोनों की एक दूसरे से शादी हो जाए।

अपुन ─ फिलहाल तो ऐसा संभव नहीं है। अच्छा अब चलता है अपुन। अपना खयाल रखना और हां उसका भी....अगली बार उसको अच्छे से प्यार करेगा अपुन और फिर दबा के पेलेगा भी।

साधना अपुन की ये बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई। फिर अपन दोनों दरवाजे तक साथ साथ ही आए। उसने दरवाज़ा खोलने से पहले एक बार फिर से अपुन के होठों को चूमा और फिर जब उसने दरवाज़ा खोला तो अपुन उसे बाय बोल कर चुपके से निकल लिया।



अब आगे....


बेटीचोद, जिसका डर था वही हुआ लौड़ा। अपुन जैसे ही बाइक से घर पहुंचा तो बाहर गार्डन में ही अपुन को साक्षी दी मिल गईं। अपुन तो भूल ही गयला था कि वो हर सुबह वॉकिंग करने के लिए जल्दी ही उठ जाती हैं और आज तो शायद छः बजे के पहले ही उठ गईं थी।

अपुन को इतनी सुबह बाइक से आता देख उन्हें बड़ी हैरानी हुई। इधर अपुन की तो पहले ही उन्हें देख फट गईली थी पर अब सामन तो करना ही था उनका। इस लिए अपुन फटाफट कोई मस्त सा बहाना सोचने लगा। तभी वो तेजी से चलते हुए अपुन के पास आ कर खड़ी हो गईं। फिर अपुन को अजीब सी नज़रों से घूरते हुए पूछीं।

साक्षी दी ─ तू इतनी सुबह बाइक से कहां से आ रहा है?

अपुन को याद आया कि अपुन ने उनको प्रॉमिस किएला था कि अब से अपुन टपोरी भाषा में किसी से बात नहीं करेगा। इस लिए अपुन ने बहाना बनाने के साथ ही ये भी सोच लिया कि उनसे सभ्य तरीके से बात करेगा तो वो खुश भी होंगी और डांटेगी भी नहीं।

अपुन ─ अरे! दी वो मैं अपने एक दोस्त से मिलने गया था।

साक्षी दी ने अपुन को सभ्य तरीके से बात करते सुना तो सच में उन्हें खुशी हुई। उनके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव भी दिखे लेकिन फिर हैरानी से बोली।

साक्षी दी ─ पर इतनी सुबह तू अपने कौन से दोस्त से मिलने गया था? एक मिनिट, इस वक्त सुबह के साढ़े पांच बजे हैं और तू अपने दोस्त से मिल के आ रहा है तो इस हिसाब से तू यहां से कब गया होगा?

अपुन की पहले तो फटी पर जल्दी ही अपुन ने खुद को सम्हाला और जल्दी से बोला।

अपुन ─ वो दी, मैं मॉर्निंग में सुबह चार बजे गया था। एक्चुअली सुबह पौने चार बजे उसका फोन आया था और अपु...मेरा मतलब है कि मैं उसी के फोन करने पर जगा था। पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया कि इतने टाइम कौन मेरी नींद खराब कर रेला...मतलब रहा है। फिर मैंने कॉल पिक की तो पता चला कि वो मेरा नया दोस्त अतुल है।

साक्षी दी ─ इस नाम का दोस्त कब बनाया तूने?

अपुन ─ अरे! अभी कुछ दिन पहले ही उससे मुलाकात हुई थी।

साक्षी दी ─ तेरे कॉलेज का ही है?

अपुन ने सोचा कि अगर कॉलेज का बताया तो किसी दिन उसे दी से मिलवाना न पड़ जाए इस लिए फ़ौरन झूठ मूठ का बताना ही ठीक समझा वैसे भी अतुल नाम का दोस्त काल्पनिक ही बनाया था अपुन ने।

अपुन ─ नहीं दी, वो दूसरे कॉलेज का है। असल में कुछ दिन पहले उसकी अपु...मतलब कि मैंने हेल्प की थी। बेचारे को लोकल लोग परेशान कर रहे थे तो अपु...मतलब मैंने बचाया था उसे। बस इतनी ही पहचान होती उससे लेकिन उस दिन मैंने जोश जोश में उसको अपना फोन नंबर भी दे दिया था और बोला था कि अगर फिर कोई प्रॉब्लम हो तो फोन करना।

साक्षी दी अपुन की ये बातें सुन कर घूर के देखने लगीं अपुन को। अपुन समझ गया कि उन्हें ये अच्छा नहीं लगा है। इस लिए जल्दी से बोला।

अपुन ─ अब आप तो जानती हो दी कि अपु....मतलब कि मैं कितना परोपकारी लड़का हूं। आखिर आपका भाई हूं, किसी को प्रॉब्लम में कैसे देख सकता हूं?

साक्षी दी ─ मस्का मत लगा। साफ साफ बता कि ऐसी क्या बात थी कि उसने तुझे चार बजे फोन किया और तुझे उसी वक्त यहां से बिना किसी को कुछ बताए जाना पड़ गया?

अपुन ─ सीरियस वाली कोई बात नहीं थी दी वरना अपु...मतलब कि मैं इस तरह जाता ही नहीं। उसने बताया कि उसे अर्जेंट अपने गांव जाना है लेकिन उसके पास किराए के लिए पैसे नहीं हैं। उसने अपने एक दो दोस्तों को भी फोन किया था लेकिन एक ने फोन नहीं उठाया और दूसरे ने कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। तब उसे अपु...मतलब कि मेरी याद आई।

साक्षी दी अपुन की बात सुन के थोड़ी देर कुछ सोचती रहीं और अपुन को देखती भी रहीं फिर बोलीं।

साक्षी दी ─ देख भाई, किसी की हेल्प करना अच्छी बात है लेकिन इस तरह रात के वक्त बिना किसी को बताए जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं था। मॉम डैड भी नहीं थे, ऐसे में अगर तेरे साथ कुछ हो जाता तो मैं मॉम डैड को क्या जवाब देती?

अपुन भी समझ रेला था कि उनकी बात सच थी लेकिन ये भी सच था कि अपुन उनको सच नहीं बता सकता था।

अपुन ─ सॉरी दी, अपु...मतलब कि मैंने सुबह के उस वक्त किसी को इस लिए नहीं बताया क्योंकि मैं आप में से किसी की नींद खराब नहीं करना चाहता था। मैंने सोचा था कि जरा सी तो बात है इस लिए यूं जाऊंगा और उसे पैसे दे के फौरन आ जाऊंगा।

साक्षी दी आगे बढ़ीं और अपुन के चेहरे को सहला कर बोलीं।

साक्षी दी ─ आगे से ऐसा कभी मत करना। तू मेरा भाई ही नहीं बल्कि मेरी जान भी है। मुझसे प्रॉमिस कर कि आज के बाद इस तरह रात में बिना किसी को बताए कहीं नहीं जाएगा।

अपुन ─ प्रॉमिस दी, नेक्स्ट टाइम से ऐसा कभी नहीं करूंगा।

साक्षी दी ने अपुन को पकड़ कर गले से लगा लिया। उनके ऐसा करते ही जहां एक तरफ अपुन ने राहत की सांस ली वहीं दूसरी तरफ उनके सीने के कोमल उभार जब अपुन की छाती में धंसे तो अपुन के समूचे जिस्म में रोमांच की लहर दौड़ गई और वो लहर दौड़ते हुए अपुन के लन्ड को भी झनझना ग‌ई लौड़ा। अपुन को मजा तो आया और मन भी किया कि साक्षी दी अपुन को ऐसे ही अपने गले से लगाए रहें लेकिन फिर अचानक ही अपुन के अंदर से कोई चीखा और बोला भोसड़ीके तू अपनी दी के बारे में इतना गंदा कैसे सोच सकता है....डूब मर साले।

और इस बात को सुनते ही अपुन गांड़ तक कांप गया लौड़ा। फिर अपुन झट से दीदी से अलग हो गया। साक्षी दी को पहले तो हैरानी हुई फिर सामान्य भाव से अपुन के चेहरे को फिर से सहलाईं और बोलीं।

साक्षी दी ─ आज तो संडे है इस लिए अपने रूम में जा के सो जा। जब बाकी की नींद पूरी हो जाएगी तो मैं उठा दूंगी तुझे।

अपुन ─ वाह! दी आप अपु...मतलब आप मुझे उठाने आएंगी। फिर तो अपु....ओह दी ये बार बार टपोरी भाषा ही मुंह से निकल जाती है.... हां तो मैं ये कह रहा था कि अगर आप मुझे जगाने आएंगी तो मेरा तो दिन ही बन जाएगा।

साक्षी दी अपुन की बात सुन के मुस्कुराईं और फिर हल्के से एक चपत लगाया अपुन के गांड़....मतलब कि गाल पर। फिर तिरछी नजरों से देखते हुए बोलीं।

साक्षी दी ─ अच्छा जी, तेरा दिन कैसे बन जाएगा भला? ज़रा मुझे भी तो बता।

अपुन ने फटाफट मस्त डायलॉग सोचा और फिर बोला।

अपुन ─ ओह! दी अब कैसे बताऊं आपको? बोले तो मैं उस खूबसूरत फीलिंग्स को लफ्जों में बता ही नहीं सकता।

साक्षी दी (हंस कर) ─ ओ हेलो मेरे भाई, जमीन पर आ जा। ज़्यादा उड़ मत।

अपुन ने झूठी नाराजगी दिखाते हुए साक्षी दी को घूरा, फिर बोला।

अपुन ─ देखो दी, आप बेशक मुझे जो चाहे बोलो, मारो या डांटो लेकिन बात जब मेरी ब्यूटीफुल साक्षी दी की आती है तो मैं किसी की नहीं सुन सकता।

साक्षी दी की मुस्कान गहरी हो गई। फिर बोलीं।

साक्षी दी ─ ओह! सॉरी भाई। तू बोल ले, जो बोलना चाहता है।

अपुन ─ हां तो अपु...सॉरी, मतलब कि मैं ये कहना चाहता हूं कि आप क्या हो और कैसी हो ये आपसे ज्यादा मैं....नहीं नहीं...मैं भी नहीं, बल्कि मेरा दिल जानता है, यस यस...मेरा दिल जानता है।

साक्षी दी की आंखें फैल गईं। फिर मुस्कुरा कर बोलीं।

साक्षी दी ─ अरे वाह! ये तो मुझे पता ही नहीं था मेरे भाई। वैसे मुझे भी बता न कि मेरे बारे में तेरा दिल क्या जानता है?

अपुन सोचने लगा कि अब कौन सा डायलॉग मारे अपुन? बोले तो एक तरफ अपुन की ये सोच के धड़कनें बढ़ गईली थीं कि ये अपुन किस लाइन में जा रेला है, मतलब कि कहीं फ्लो फ्लो में और जोश जोश में अपुन कुछ ऐसा न बोल जाए जो अपुन को नहीं बोलना चाहिए। पर लौड़ा, सवाल अपुन की सबसे खूबसूरत दी का था इस लिए किसी बात की परवाह न की अपुन ने। लेकिन....लेकिन...हां हां लेकिन अपुन को खयाल आया कि पहले दी से कुछ करार वरार कर लिया जाए वरना गांड़ में उनकी लात न पड़ जाए। इस लिए बोला।

अपुन ─ ज़रूर बताऊंगा दी लेकिन पहले प्रॉमिस करो कि अपु...मतलब कि मैं जो कुछ भी बोलूंगा उसे सुन कर आप मुझ पर गुस्सा नहीं करोगी।

साक्षी दी ये सुन कर थोड़ा सोच में पड़ गईं। कुछ देर जाने क्या सोचती रहीं फिर गहरी सांस ले कर बोलीं।

साक्षी दी ─ अच्छा ठीक है, मैं प्रॉमिस करती हूं कि गुस्सा नहीं करूंगी। वैसे भी तू मेरा सबसे प्यारा भाई है इस लिए गुस्सा होने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। तू बेझिझक बता।

अपुन ─ एक्चुअली अपु....मतलब कि मैं जो कुछ बोलूंगा वो सब मेरा नहीं बल्कि मेरे दिल का कहना होगा, आप समझ रही हैं ना?

साक्षी दी ने पलकें झपका कर हां कह दिया। उनके गुलाबी होठों पर दिलकश मुस्कान थी और चेहरे पर एक उत्सुकता।

अपुन ─ ओके, तो मेरे दिल का कहना है कि आप इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हैं और अपु...सॉरी...और मेरी खूबसूरत दी हैं। आपसे प्यारा, आपसे हसीन, आपके जैसी सादगी और आपके जैसा भाई को चाहने वाली दूसरी कोई कभी पैदा ही नहीं हो सकती।

साक्षी दी (मुस्कुराते हुए) ─ ओहो! बहुत खूब भाई, और क्या कहता है तेरा दिल?

अपुन ─ हां अभी और भी है। अपु...सॉरी मेरा दिल कहता है कि काश! आपके जैसी हसीन लड़की एक और होती जिससे अपु...मतलब कि मैं लैला मजनूं के माफिक प्रेम करता। बोले तो टूट टूट के प्यार करता और आपकी मोहब्बत में फमा...फमा..नहीं नहीं फना हो जाता, हां फना।

साक्षी दी अपुन की ये बातें सुन कर जोर जोर से हंसने लगीं। भोर के वक्त जबकि सन्नाटा था तो उनकी हंसी ऐसी गूंज उठी जैसे किसी मंदिर की कई सारी घंटियां एक साथ बज उठी हों। वो अपने एक हाथ को सीने पर रखे खिलखिलाते हुए हंसे जा रेली थी।

उनको यूं हंसता देख एकाएक अपुन को धक्का लगा और फिर एकदम से अपुन उनके हंसते चेहरे में खोता ही चला गया लौड़ा।

बेटीचोद, अपुन को पता ही न चला था कि कब तक अपुन उनमें खोया रहा और कब उनकी हंसी बंद हुई। होश तब आया जब उनकी आवाज अपुन के कानों में पड़ी।

साक्षी दी ─ अरे! तुझे क्या हुआ मेरे प्यारे भाई? कहां खो गया तू?

अपुन बुरी तरह हड़बड़ा गया। बड़ा अजीब सा फील हुआ अपुन को। थोड़ा शर्म भी आई और थोड़ा झेंप भी गया। फिर किसी तरह खुद को सम्हाला। उधर वो मुस्कुराते हुए अपुन को ही देखे जा रेली थीं।

अपुन ─ अ..आप हंसते हुए बहुत खूबसूरत लगती हैं दी। अपु...मतलब कि मैं तो आपकी हंसी में ही खो गया था। मेरा दिल आपके बारे में एकदम सच ही कहता है।

साक्षी दी ─ तू और तेरा दिल दोनों ही पागल हैं। चल अब जा, अपने रूम में आराम कर। मैं भी थोड़ा वॉकिंग कर लूं। फिर फ्रेश हो के बाकी के काम भी करने हैं।

अपुन का मन तो न किया उनसे दूर जाने का लेकिन जाना जरूरी था वरना उन्हें शक हो जाता कि आज मेरे बर्ताव में कुछ तो अलग है, कुछ तो खास है या फिर कुछ तो अजीब है।

खैर अपुन जाने के लिए मुड़ा लेकिन तभी जाने अपुन को क्या हुआ कि वापस पलटा और आगे बढ़ कर साक्षी दी के दाएं गाल को झट से चूम लिया। उसके बाद उनका कोई रिएक्शन देखे बिना ही जल्दी से बाइक खड़ी कर घर के अंदर की तरफ बढ़ गया। पीछे साधना दी अपुन के द्वारा यूं गाल चूम लेने पर पहले तो शॉक हुईं लेकिन फिर सिर और कंधे को जैसे लापरवाही से उचका कर वॉकिंग करने लगीं। उनके होठों पर हल्की मुस्कान थिरक रही थी।

~~~~~~

रूम में आ कर अपुन ने फटाफट कपड़े बदले और बेड पर लेट गया। अपुन के मन में अभी भी साक्षी दी से हुई बातें चल रेली थी और साथ ही आंखों के सामने बार बार साक्षी दी का हंसता हुआ खूबसूरत चेहरा दिख रेला था।

अपुन सोचने लगा कि सच में साक्षी दी कितनी खूबसूरत हैं। कितनी सादगी से रहती हैं। सबसे अच्छे से बात करती हैं और सबकी केयर करती हैं। इतना ही नहीं अपने इकलौते भाई पर यानि अपुन पर जान छिड़कती हैं।

फिर एकाएक अपुन को याद आया कि कैसे उन्होंने अपुन को गले से लगाया था और उस वक्त उनके बूब्स अपुन की छाती में धंसे हुए थे। बेशक उन्हें भी इसका आभास हुआ होगा लेकिन उन्होंने जरा भी खुद को अपुन से दूर नहीं किया था, बल्कि अपुन ही उनसे दूर हो गयला था।

न चाहते हुए भी बेटीचोद अपुन के मन में दी के बारे में गंदे गंदे खयाल उभरने लगे। इससे अपुन एकदम से बेचैन और परेशान हो उठा। अपुन ने झुंझला कर सिर को झटका और फिर मोबाइल निकाल कर यूं ही मन बहलाने के लिए उसे देखने लगा। तभी अपुन को याद आया कि साधना ने अपुन से कहा था कि घर पहुंच कर कॉल या मैसेज करना। अपुन ने झट से नेट ऑन किया और फिर वॉट्सएप खोला।

अपुन ने देखा कि साधना वॉट्सएप में ऑनलाइन थी। अपुन ये सोच के मुस्कुरा उठा कि लौड़ी अभी तक अपुन के कॉल या मैसेज का वेट कर रेली है। खैर अपुन ने उसे मैसेज भेज कर बता दिया कि अपुन पहुंच गयला है। उसका फ़ौरन ही रिप्लाई आया।

साधना ─ ओह! बाबू, तुम्हारा अब तक कोई कॉल या मैसेज नहीं आया था तो मुझे बहुत टेंशन होने लगी थी।

अपुन ─ हां वो एक गड़बड़ हो गईली थी। एक्चुअली अपुन जैसे ही घर पहुंचा तो साक्षी दी बाहर ही वॉकिंग करते हुए दिख गईं थी।

साधना ─ माय गॉड! फिर तो दी को पता चल गया होगा न?

अपुन ─ डॉन्ट वरी। अपुन ने सब सम्हाल लिया है।

साधना ─ कोई सीरियस बात तो नहीं हुई न बाबू?

अपुन ─ नहीं हुई, बोले तो अपुन ने दी को अच्छे से समझा दिया है। चलो, अब गुड नाइट, अपुन को नींद आ रेली है...बाय।

साधना ─ ओके बाबू, गुड नाइट। लव यू...बॉय।

अपुन ने मोबाइल का नेट बंद किया और उसे एक तरफ रख कर सोने की कोशिश करने लगा। सच में थोड़ी ही देर में अपुन नींद की आगोश में चला गया लौड़ा।

~~~~~~

जब अपुन की नींद खुली तो देखा साक्षी दी अपुन के पास ही बेड पर बैठी हुईं थी और अपुन को बड़े गौर से देख रेली थीं। आंख खुलते ही उन्हें देख कर सच में अपुन को ऐसा लगा जैसे अपुन के दिल को भारी खुशी मिल गईली है। उन्हें देख अपुन बस मुस्कुरा उठा।

उधर जैसे ही साक्षी दी ने अपुन को जग गया देखा तो उनके गुलाबी होठों पर भी दिलकश मुस्कान उभर आई। फिर बड़े ही प्यार से अपुन का चेहरा सहला कर बोलीं।

साक्षी दी ─ तो मेरे प्यारे भाई की नींद पूरी हो गई?

अपुन ─ खुल तो गई दी लेकिन अब सोचता हूं कि काश पहले ही खुल गई होती।

साक्षी दी ─ अच्छा, ऐसा क्यों भला?

अपुन ─ इसलिए कि अपु...मतलब कि मुझे अपनी खूबसूरत दी का चेहरा पहले ही देखने को मिल जाता।

साक्षी दी हल्के से हंसी फिर अपुन के बालों में उंगली फेर कर बोलीं।

साक्षी दी ─ तू सुबह सुबह ही शुरू हो गया? चल अब उठ जा, देख लंच का टाइम हो गया है।

अपुन ये सुन कर चौंक ही पड़ा लौड़ा। झट से इधर उधर गर्दन घुमा कर देखा तो सच में खिड़की से धूप की तेज रोशनी समझ में आ रेली थी। अपुन एकदम से ये सोच के घबरा उठा कि इतनी देर तक सोते रहने से दी को कहीं किसी बात का शक न हो जाए। इस लिए बोला।

अपुन ─ वो क्या है न दी, एक बार सुबह सात बजे नींद खुली थी लेकिन जब याद आया कि आज संडे है तो फिर से सो गया।

साक्षी दी ये सुन कर फिर से मुस्कुराईं। उनके मुस्कुराने पर अपुन ये सोच के घबरा उठा कि कहीं उन्होंने अपुन का झूठ पकड़ तो नहीं लिया लौड़ा? तभी दी बोलीं।

साक्षी दी ─ सात बजे तो मैं तेरे रूम में आई थी और तू तब भी घोड़े बेच के सो रहा था। अगर जगा होता तो मुझे भला क्यों वापस लौट जाना पड़ता?

अपुन ─ हो सकता है कि हमारी टाइमिंग इधर उधर हो गई हो दी पर सच यही है कि अपु...मतलब कि मैं उस टाइम जगा था।

साक्षी दी ─ चल मान लेती हूं कि तू ही सच बोल रहा है। अब चल उठ जा और जल्दी से फ्रेश हो ले।

अपुन ने मन ही मन राहत की सांस ली। फिर एकदम से खयाल आया कि दी से थोड़ा मजा लिया जाए। बोले तो उनकी तारीफ कर के उन्हें खुश किया जाए।

अपुन ─ फ्रेश तो मैं आपको देख के ही हो गया हूं दी। मतलब कि मुझे ऐसा फील हो रहा है। आप हर रोज ऐसे ही मुझे अपना दीदार करा दिया करो और मैं बिना बाथरूम गए ही फ्रेश फील कर लिया करूं।

अपुन की ये बात सुन कर साक्षी दी खिलखिला कर हंसने लगीं। उनके यूं हंसने से एक बार फिर अपुन को लगा जैसे मंदिर की कई सारी घंटियां एक साथ बजने लगीं हों। पूरा कमरा उनकी खिलखिलाहट से गूंज उठा और इधर अपुन एक बार फिर जैसे उनकी हंसी में खो गया। उनके सच्चे मोतियों जैसे सफेद चमकते दांत कितने आकर्षक लग रेले थे।

एकाएक उनकी हंसी बंद हो गई। शायद उन्होंने देख लिया था कि अपुन सुबह की तरह फिर से उनको हंसते देख खो गया है। इस लिए हंसना बंद कर के उन्होंने मुस्कुराते हुए पहले अपुन को देखा फिर बोलीं।

साक्षी दी ─ अब क्या हुआ तुझे? कुछ और भी बोलना है या फ्रेश होने जाएगा?

अपुन उनकी बात सुन थोड़ा हड़बड़ाया, फिर खुद को सम्हाल कर बोला।

अपुन ─ दिल तो बहुत कुछ बोलना चाहता है दी लेकिन खैर जाने दो।

साक्षी दी ने इस बार गहरी नजरों से देखा अपुन को। जैसे समझने की कोशिश कर रही हों कि अपुन आखिर क्या कहना चाहता है या फिर अपुन के कहने का क्या मतलब है?

साक्षी दी ─ ऐसे कैसे जाने दो? तेरा दिल अगर कुछ कहना चाहता है तो उसे बोल कि कह दे। वैसे भी मैं अपने प्यारे भाई को किसी बात के लिए निराश होते नहीं देख सकती। चल बता जल्दी कि तेरा दिल और क्या कहना चाहता है?

उनकी बात सुन कर अपुन का दिल जोर जोर से धड़कने लगा लौड़ा। बोले तो अपुन ने तो बस यूं ही कह दिया था लेकिन अब जब वो खुद कहने को बोल रेली थीं तो अपुन ये सोच के घबरा गया कि अब क्या बोले अपुन? हालांकि धड़कता दिल इसके बावजूद चीख चीख के कह रेला था कि दिल की बात बोल दे न लौड़े। खैर अपुन ने खुद को सम्हाला, फिर बोला।

अपुन ─ अरे! मैंने आपको बताया तो है दी। मेरा मतलब है कि आपसे बोला तो था मैंने कि आप हर रोज अपने खूबसूरत चेहरे का दीदार करा दिया करो तो दिन बन जाएगा मेरा।

साक्षी दी ─ अच्छा, बस इतना ही?

अपुन उनकी बात सुन कर चकरा सा गया लौड़ा। अपुन को समझते देर न लगी कि उन्हें समझ आ गयला है कि अपुन बस इतना ही नहीं बोलना चाहता था। उधर अपुन को कुछ सोचता देख वो हल्के से मुस्कुराईं फिर बोली।

साक्षी दी ─ चल अब ज्यादा मत सोच और जल्दी से जा के फ्रेश हो जा। हम सब डायनिंग टेबल पर तेरा इंतज़ार करेंगे और हां डैड का फोन आया था। उन्होंने कहा है कि वो कल आएंगे तो मुझे आज भी एक बार कम्पनी का चक्कर लगाना पड़ेगा।

अपुन ─ तो क्या आप अभी तक कंपनी का चक्कर लगाने नहीं गईं हैं

साक्षी दी ─ कहां गई हूं? सोचा था तेरी तरह मैं भी आज रेस्ट करूंगी। फिर जब डैड ने कॉल पर ऐसा कहा तो सोचा आज तुझे भी अपने साथ ले चलती हूं। क्या बोलता है, चलेगा न अपनी दी के साथ?

अपुन (खुश हो कर) ─ बिल्कुल चलूंगा दी। ये भी कोई पूछने की बात है? अरे! अपुन कभी अपनी दी की बात टाल सकता है क्या?

साक्षी दी पहले तो हौले से मुस्कुराईं लेकिन फिर सहसा घूरने लगीं।

साक्षी दी ─ तूने मुझसे प्रॉमिस किया था न कि टपोरी वाली भाषा नहीं बोलेगा। फिर ये अपुन अपुन क्या बोल रहा है?

ये सुन कर अपुन बुरी तरह हड़बड़ा गया। फिर जल्दी से बोला।

अपुन ─ सॉरी दी, वो खुशी के जोश में और जल्दी के चक्कर में निकल गया मुंह से।

साक्षी दी ─ इट्स ओके बट अब से भूल कर भी नहीं निकलना चाहिए।

अपुन ─ आप अगर हर वक्त मेरे साथ रहो तो पक्की बात है कि मेरे मुंह से टपोरी वाली भाषा नहीं निकलेगी।

साक्षी दी ─ मैं तो हमेशा तेरे साथ ही हूं प्यारे भाई लेकिन हां हर वक्त तेरे साथ रह पाना संभव नहीं है और ये तू भी समझ सकता है।

अपुन ─ हां ये तो है दी।

साक्षी दी ─ अच्छा अब चल ये सब बातें छोड़ और जा कर फ्रेश हो ले।

उसके बाद दी चली गईं। अपुन अब चाह कर भी उन्हें रोक नहीं सकता था। खैर अपुन भी उठा और बाथरूम में फ्रेश होने चला गया।

To be continued...


Aaj ke liye itna hi bhai log,
Pics and Gif upload karna band kar diya hai apan ne kyoki unhen khoj khoj ke upload karne ka time nahi hai apan ke paas. Regular update de raha apan yahi bahut badi baat hai :D

Well, read karo, enjoy karo aur haan...like comments ke sath feedback bhi dete raho warna apan story close kar dega. Fir mat bolna ki story adhuri chhod di apan ne :smoking:
 
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