डी बी साहब की मेहमाननवाज़ी का लुत्फ फाइव स्टार होटल के एक सुइट मे लिया जा रहा है ।
फुर्सत के क्षणों मे जब दो प्रेमी साथ होते हैं और परिवेश होटल के इस सुइट जैसा हो तो फिर आनंद ही आनंद होता है ।
हमारे आनंद साहब भी इसी आनंद का अनुभव कर रहे है ।
एक तो गुड्डी , जो अकेले सौ पर भारी , और ऊपर से तान्या जैसी सुपर हाॅट वैट्रेस की हाॅट सर्विस ; मेला लूट न जाए , हो नही सकता ।
वैसे डी बी साहब का नाम उनके पुज्य पिताश्री ने बड़ा ही अजीब रखा है । धुरंधर से बेहतर उत्पल ही रख देते तो फिर भी बेहतर होता । वैसे उत्पल दत्त साहब का मै भी बहुत बड़ा प्रशंसक हूं ।
खैर नाम - वाम मे क्या रखा है , काम बोलना चाहिए । और डी बी साहब का काम बोल रहा है ।
खुबसूरत अपडेट कोमल जी ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट ।