इन झलकियों की जरूरत मुझ इस लिए लगी की शुरू के चार पांच पोस्टों को पढ़ कर या इस कहानी का नाम देख कर या सिर्फ इरोटिका में शामिल होने से पाठक गण , विशेष रूप से जो इस कहानी की कहानी से परिचित नहीं है वो यह न समझ ले की
" एक और कहानी होली की " या
" इसमें तो एक बस टीनेज रोमांस ही लगता है " या
" हीरो का कुछ रोल ही नहीं लग रहा है "
इसमें नौ रसों में अधिकतर रस आये हैं करूण भी है, रौद्र भी , हास्य भी है श्रृंगार के दोनों पक्ष हैं लेकिन जो पाठक इन शुरू के भागों से कहानी से भाग सकते हैं ,...
उन्हें इस कहानी के थ्रिलर के आयामों से परिचित कराने के लिए झलकियां मैंने दी, आगे तो दो चार पार्ट पोस्ट होने के बाद ही अंदाज लगेगा की पाठक इसे किस रूप में लेते हैं।
जोरू का गुलाम में मैंने कमेंट्स या व्यूज की चिंता न कर के , क्योंकि मेरा पहला उदेश्य उस कहानी को पूरा करने का था, पोस्ट्स किया नतीजा यह हुआ की पहली चालीस पोस्ट्स , सिर्फ ४५ पेजों में और औसत व्यूज दो हजार के आसपास,... और बाद में जो पढ़ना चाहता भी है वो सोचता है की अरे अब तो आधी कहानी निकल गयी अब पढ़ने से क्या फायदा ,
इसलिए अबकी मैं शुरू से बार बार आग्रह कर रही हूँ पाठकों से कमेंट और व्यूज के लिए और झलकियां भी इसी लिए हैं।