जोरू का गुलाम भाग २५८- एम् ३ पृष्ठ १६२३
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आगे आगे देखिये होता है क्याकोमल तो अभी से दोनों जीजू की हालत खराब कर रही है...
और कमल तो पिछवाड़े के रसिया...
तो इस बार भी छोटी साली अपने दोनों जीजू से सैंडविच बनकर..
बल्कि छेद बदल-बदल कर भी..
मजे लेने-देने में दोनों की बराबरी करेगी...
आपने कहने के लिए कुछ छोड़ा नहींअंग-प्रत्यंग .. जैसे रस की खान..
और संभोग मतलब संपूर्ण आनंद..
देह का हर हिस्सा जैसे खिल कर अपनी ओर आमंत्रण दे रहा हो...
खजाने की चाभी तो इन्ही के पास थीं, जीजा साली के ताले में ताली न लगाएगा तो कौन लगाएगा।खुल जा सिम-सिम...
और खजाने का दरवाजा खुल गया...
और साथ साथ देखने वालों को भी मजा आता है और जिसका खिलाड़ी हो वो तो और हर्षाता हैखिलाड़ी बराबरी का हो तो..
मजे की इंतहां ..
अब बारी गुड्डी की शरारत भरी रीनू से छेड़छाड़ की है...
आखिर ननद भौजाई हैंईंट का जवाब पत्थर से..
गुड्डी भी रीनू के साथ उन सबका बदला भरपूर लेगी...
और बदले का आनंद दोनों उठाएंगे...
नहीं नहींलेकिन कल क्या मंजू गीता में से कोई आएगी?
नहीं नहीं दिल नहीं,रीना ओ रीना.. दिल तूने छीना...