ज्ञान की बातें -संध्या भाभी
लेकिन कुछ सोच के उन्होंने कुछ समझना शुरू किया,
" देख, तुम हो तो अभी नौसिखिया ही और गुड्डी का भी पहली बार ही होगा, इसलिए बता रही हूँ, जब नयी सील खोलनी हो, तो कुछ बातों का जरूर ध्यान देना चाहिए और ये जिम्मेदारी लड़के की है। सब सोचते हैं की टाँगे फैला लो, जाँघे खोल लो तो कच्ची कोरी बिल में घुसने का काम हो गया। एकदम गलत है, ये सब बातें ठीक हैं लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है तकिया। "
और बजाय रहस्य खोलने के वो मुस्कराने लगीं और मैं चकित हो के देखता रहा ।
मैंने मदन मंजरी से लेकर असली सचित्र कोकशास्त्र ८४ आसन सचित्र, बड़ा तक छुप छुप के पढ़ा था लेकिन कहीं तकिये का नाम नहीं आया। मैंने पूछ ही लिया
" मतलब "
" अबे स्साले तेरी उस भोंसड़ी वाली महतारी ने कुछ सिखाया नहीं, खाली अपने भोंसडे में, अरे भोंसड़ा चोदने और मेरी कुँवारी कोरी कच्ची छोटी बहिनिया को पेलने में बहुत फर्क है "

संध्या भौजी अपने रंग में आ गयी थीं, लेकिन उन्होंने मेरे बाल सहलाते हुए समझा दिया
" तकिया मतलब, ...चूतड़ के नीचे गुड्डी के तकिया जरूर लगाना. जितना चूतड़ उठा पाओगे, चार अंगुल, एक बित्ता, ....उतना ही उसकी बुर खुल के सामने आएगी और जब दोनों टांगों को गुड्डी के कंधे पे रखोगे न तो उसकी फूली फूली मालपुवे ऐसे बुर एकदम उभरी रहेगी,
तुझे दोनों फांको को फैला के तेल, वैसलीन जो भी लगाना हो, फांक दोनों फैला केअपने इस बदमाश को अंदर सरकाना हो, तो ज्यादा आसान रहेगा, वरना तेरे ऐसा बुरबक रात भर बिल का छेद ढूंढने में ही लगा देगा और मेरी गुड्डी तड़पती रहेगी। और हाँ एक बात और,..."
लेकिन बजाय एक बात और बताने के संध्या भाभी चुप हो गयीं, वो मुझसे कहलवाना चाहती थीं और मैंने पूछ ही लिया
" क्या बात भौजी? "
अब वो मेरे खूंटे को कस कस के दबा रही थीं, मूसल कड़ा भी हो रहा था, भौजी के मुलायम हाथ अब उसने पहचान लिए थे, वो बोलीं
" एक बात बल्कि, दो बात, एक तो कभी किसी लड़की को, औरत को, तोहार बहिन, महतारी, चाची, बूआ, मौसी जो भी हो, एक बार चोद के कभी मत छोड़ना। पहली बार में तो यही सोचने में लग जाता है लड़की को की स्साला टू मिंट नूडल है या लम्बी रेस का घोडा, और दूसरी बार ही असली मजा आता है, दोनों खिलाड़ी एक दूसरे को जान समझ लेते हैं। तो गुड्डी को एक बार पेलने के बाद गरम कर के दुबारा, बल्कि ऊपर तोहरी भाभी हैट ट्रिक करेंगी तो तुम भी कम से कम कम तीन बार, इस उम्र में रात सोने के लिए थोड़े ही होती है।
और मौका मिले तो दिन में भी नंबर जरूर लगाना, वैसे गुड्डी को कितने दिन के लिए ले जा रहे हो?

मैंने कुछ मन में जोड़ा, कुछ ऊँगली पे और संध्या भाभी को बताया,
" देखिये भौजी, चार दिन बाद तो होली है, और ओकरे बाद, ,...पहिले तो हम दोनों वहीँ आजमगढ़ में ही, लेकिन अब एक तो दूबे भाभी बोलीं हैं की रंग पंचमी के एक दो दिन पहले तो फिर उनकी बात और, गुड्डी की मम्मी, मेरा मतलब मम्मी भी हो सकता है कानपूर से जल्दी आ जाएँ तो हम दोनों उनसे बोले हैं की उन लोगो को लेने के लिए मैं और गुड्डी स्टेशन पे रहेंगे, तब भी छह सात दिन, सात दिन तो पक्का "
मैंने जोड़ के बोला
और जब मैंने गुड्डी की मम्मी मतलब मम्मी बोला तो जिस तरह से समझ के संध्या भाभी ने देखा, ...एक पल के लिए मैं लजा गया।
लेकिन संध्या भाभी भी कुछ जोड़ घटाना कर रही थीं, जोड़ के बोलीं,
" तो चलो सात दिन और जैसा तेरा बम्बू है और ताकत है तो रात में तो किसी दिन तीन बार से कम नहीं और दिन में भी एकाध बार जरूर नंबर लगाना और कुछ नहीं हो तो चुसम चुसाई, तो २८ बार, और उतना नहीं तो २०-२२ बार तो कम से कम, तो मेरे इस मुन्ने की दावत हो गयी। "
और उनका मुन्ना, उनकी मुट्ठी से बाहर आने के लिए जंग कर रहा था, अब वो एकदम बड़ा और खड़ा दोनों हो गया था और भौजी भी अब खुल के मुठिया रही थीं। एक तो गुड्डी का नाम लेने से ही वो मेरा जंगबहादुर आप से बाहर हो जाता था फिर संध्या भौजी का कोमल कोमल हाथ
संध्या भौजी ने सुपाड़े को अंगूठे से रगड़ते हुए कहा
" और असली दावत तो तेरी यहाँ पहुँचने पे होगी, गूंजा, गुड्डी की बहने,...."

और उनकी बात काट के मैंने याद दिलाया " और आपकी ननद और उसकी बेटी "
वो जोर से हंसी, " पहले आज गुड्डी को तो निबटाओ, "
पर मुझे याद आया उन्होंने दो बात कही थी और सिर्फ एक ज्ञान तकिये वाला देकर बात मोड़ दी पर मैं नहीं भूला था, मैंने तुरंत याद दिलाया,
" भौजी, आपने दो बात कही थी लेकिन दूसरी बात, "
" तुम स्साले, कुछ भुलाते नहीं हो " मुस्करा के भौजी बोलीं और समझाया,
" बात चिकनाई की है और खास तौर से कोरी कच्ची कली की, और तोहरे किस्मत में खाली गुड्डी नहीं दर्जनो की झिल्ली फाड़ना लिखा है, पहले तो वो तोहार बहिनिया, ...दूबे भाभी का हुकुम है. फिर यहाँ आओगे तो गूंजा, और गुड्डी की बहने,.. और भी .
लेकिन तोहार मूसल जस है, कउनो खूब चुदी चुदाई हो तोहरे बहिन महतारी की तरह,.... तब भी हर बार तेल पानी जरूरी है। कुछ लोग ये सोचते हैं की बिल में पानी गिरा है तो सट्ट से चला जाएगा, दुबारा करने पे। सबके लिए होगा तोहरे लिए नहीं,... एक तो बुरिया में जो बीज गिरता है केतना होता है फिर गिरता तो एकदम अंदर है, तो उससे कितनी चिकनाई होगी। हाँ एक बार सुपाड़ा घुस जाने के बाद,... इसलिए जितनी बार करो तेल पानी लगा के, और गुड्डी के साथ तो आज रात एकदम ध्यान रखना,"
और जैसी उनकी आदत थी ऐन मौके पे वो चुप हो गयीं जिससे मैं निहोरा करूँ, जैसे कुछ लिखने वालियां होती हैं न ऐन मौके पे पोस्ट पे ब्रेक दे देती हैं और फिर जब तक कमेंट न करो, आगे की पोस्ट आती नहीं है, एकदम वैसे।
और मैंने बोला,
" बताइये न भौजी, गुड्डी के साथ क्या, आज की रात के लिए " मैं एकदम उकता रहा था।
संध्या भौजी ने एक पल के लिए अपने मोटू मुन्ना को सहलाना बंद किया और मेरी आँखों में देखती बोलीं
" देख सबसे पहली बात ये सिर्फ तेरे साथ नहीं है सब मर्दो के साथ,...ख़ास तौर से नए लौंडो के साथ कच्ची चूत चोदने को सब पगलाए रहते हैं लेकिन इंतजाम नहीं करते "
मुझे भी लगा इसी गलती से आज गुंजा बच गयी अगर थोड़ा सा भी कडुवा तेल या कुछ भी होता तो बिना फाड़े मैंने उसे जाने नहीं देता लेकिन लौट के आऊंगा तो सबसे पहले उसी का नंबर लगेगा, जेब में अब से बोरोलीन की ट्यूब या वैसलीन की छोटी शीशी,
लेकिन अबकी संध्या भाभी रुकी नहीं उनका ज्ञान जारी था,
" देख यार सबसे अच्छा तो सरसो का तेल, एकदम सटासट जाता है ,
लेकिन आधी रात में कहाँ रसोई में डब्बा ढूंढते फिरोगे, फिर दाग धब्बा और सूंघने वाले अगले दिन भी सूंघ लेते हैं की सरसो की तेल की झार मतलब गपागप हुआ है तो तेल तो नहीं तो वैसलीन, इसका इंतजाम, "
मैं उन्हें क्या बोलता, मेरे बस का कुछ नहीं है लेकिन वो जो मेरी सारंग नयनी है जो मेरे जनम जिंदगी का ठेका ले के पैदा हुयी है उसने वैसलीन, की सबसे बड़ी शीशी खुद खरीदी है, मुझे दिखा के।
" और उसके बाद ऊँगली "
संध्या भाभी से आज मैं बहुत कुछ सीख रहा था, फिर उन्होंने जोड़ा,
"बहुत लोग बिस्तर पे जाने पे के पहले माउथवाश, मंजन सब करते हैं लेकिन ऊँगली का ध्यान नहीं रखते। "
मैं ध्यान से सुन रहा था और भौजी बोलीं " ऊँगली में एक तो नाख़ून एकदम नहीं, और दूसरे साफ़, एकदम साफ़, जैसे अमिताभ बच्चन नहीं हाथ धो के दिखाते हैं डिटॉल वाले में बस वैसे ही, "

" ये ऊँगली पे इतना जोर क्यों " मैं सच में इन मामलों में एकदम स्लो था। एक प्यार की चपत मेरे गाल पे मार के बोलीं
" स्साले मादरचोद, वैसलीन लगाएगा किस चीज से? लंड से की अपनी महतारी की बड़ी बड़ी चूँची से ? अरे लंड से पहले तोहरी जानेजाना, गुड्डी रानी की बुरिया में का घुसी, इहे उँगरिया न। "
फिर एक जोर की चुम्मी संध्या भाभी ने मेरे गाल पे ली और कचकचा के गाल काट लिया और बोलीं
"देख साले, कब भी कोरी बुर चोदो, और हमार आशीर्वाद है तोहें एक से कली मिलेंगी जिनकी झांट भी ठीक से नहीं आयी हो,... तो पहली बात ये याद रखो, एक ऊँगली का तर्जनी का कम से कम दो पोर,... और दोनों ऊँगली तर्जनी और मंझली का एक पोर.
पहले एक ऊँगली डाल के खूब तेल में, वैसलीन में चुपड़ के हलके हलके धँसाओ, पुश मत करना, और फिर गोल गोल, एक तो उससे बिलिया थोड़ी खुलेगी, दूसरे लौंडिया स्साली गर्माएगी, पनियायेगी, खुद चूतड़ पटकेगी लंड लेने के लिए। और जब दो पोर देर तक गोल गोल तो वो ऊँगली निकल के फिर से चिकनाई लगा के उसके पीछे एकदम चिपका के दूसरी ऊँगली और थोड़ी देर बाद दोनों ऊँगली अलग अलग, चूत की अंदर की दीवार पे, ....सब मजा तो वहीँ हैं, कभी अंदर बाहर कभी कैंची की फाल की तरह फैला दिया, चीखेगी स्साली, जोर से चीखेगी, तो घबड़ाना मत। तेरा इत्ता मोटा सुपाड़ा है कम से कम दोनों फांके इतनी तो खुल जाएँ, की सुपाड़े का मुंह उसमे फंस जाये, तो,.... चिकनाई और ऊँगली। "
भौजी की सब बाते मैंने गाँठ बाँध ली।
उन्होंने कुछ बात ही ऐसे की माहौल सीरियस हो गया, पहले तो मुस्करा के वो बोलीं,
" देखो २०-२५ बार तो वहां और यहाँ भी तीन चार दिन रहोगे तो मौका निकाल के आठ दस बार, तो जाने के पहले ३० -३५ बार तो पेलोगे ही उसको, लेकिन अभी भी मान नहीं सकती की आज के जमाने में तोहरे अस कोई लड़का, लड़की ढाई तीन साल से पटी, खुद शलवार का नाडा खोल दिया, औजार भी इतना मस्त तगड़ा, हरदम टनटनाया रहता है फिर भी चोदा नहीं, एकदम ही अलग हो। "
मैं क्या बोलता बस मुस्करा दिया। ३० -३५ बार का जो उन्होंने टारगेट दिया था अब गुड्डी के साथ मुझे डाँकना था,
लेकिन संध्या भाभी इस बार बिना मेरी हुंकारी के बोलीं,
" देखो, चुदाई का रिश्ता तीन चार तरह का, एक तो रंडी टाइप, उसमें भी कोई बुराई नहीं, और वो नहीं जो दालमंडी में खड़ी रहती हैं जहाँ तेरी बहनिया आके,... मेरा मतलब स्कूल में नंबर के लिए पास कराई, नौकरी में प्रमोशन, पोस्टिंग कुछ भी बात के लिए, लेकिन दोनों का काम होता है दोनों की ख़ुशी, तो मुझे इसमें कोई गलत नहीं लगता।
लेकिन ज्यादातर, जब दोनों की मर्जी हो, दोनों गर्मायें हो , दोनोंमज़ा लेना चाहते हों,... अब हर बार जिसको चोदोगे या लड़की जिससे चुदवायेगी उससे शादी थोड़ी हो ।जायेगी अब मैंने ही तुझसे चुदवाया सच में ऐसा मजा आज तक नहीं आया था और अब जब भी मिलोगे, स्साले, बिना तुझसे गपागप किये, भले मुझे तेरा रेप करना पड़े मैं छोडूंगी नहीं , लकिन शादी तो मेरी पहले ही हो गयी है।
फिर गुंजा है और गुड्डी की बहने, और भी लड़कियां, औरतें,.... तो सबसे शादी थोड़े कोई करेगा और ये बात लड़के से पहले लड़की को मालूम होती है इसलिए वो गोली वोली का इंतजाम किये रहती है। हाँ मजा असली तभी आता है जब पहले मन मिले, मन करे और लड़का केयरिंग हो, और तुझसे बड़ा केयरिंग तो मैंने देखा नहीं। सही कह रही हूँ न "
अबकी उन्होंने हुंकारी भरवाई और मैंने भरी भी बोला भी, " एकदम सही कह रही है आप , "
अब कल रात में मैंने चंदा भाभी को तीन बार चोदा था, अभी संध्या भाभी और दोनों शादी शुदा और गुंजा बस चुदवाती चुदवाती रह गयी, दो छटांक तेल के चक्कर में,... तो उस का भी तो रिश्ता तो जीजा साली का था।
लेकिन अब जो संध्या भाभी ने बात की,
"तो वही गुड्डी के साथ, मतलब ३०-४० बार तो, मेरा मतलब की तुम दोनों का मजा लेने का या,... मतलब अब कैसे कहूं, अब हर बार चुदाई के बाद बियाह, और का पता तोहरे घर वाले कहीं और लड़की वड़की देख के, ....या कोई और लड़की वाले तोहरे घरे, मतलब, देखो गुड्डी को मैं जानती हूँ , वो न बोलेगी न बुरा मानेगी"
मैं धक्क से रह गया, कुछ बोल ही नहीं निकल रहे थे बस किसी तरह से आवाज फूटी,
" मैं, मतलब, ....मेरा क्या, गुड्डी नहीं बोलेगी लेकिन मैं फिर, ....फिर मेरे रहने का क्या मतलब, होने का क्या मतलब, ....अगर वो, "
जैसे कोई भीत भहरा गयी।
जो कुछ मैंने कभी गुड्डी से भी नहीं, किसी से भी नहीं कहा था वो सब मेरे मुंह से निकल रहा था, मुझे पता भी नहीं
संध्या भाभी बड़े प्यार से देवर को समझाये
आनंद बाबू कुंवारी चूत को कैसे चोदा जाए
जब किसी औरत का होता है ख़तम महीना
हचक हचक के तब लेवे बुर में लंड हसीना
चूत के अंदर खारिश की उठती है जब चुल
लम्बा मोटा लन चाहे वो सब जाती है भूल

बंद गुलाब की कली होती है हर चूत कुँवारी
सुनो ध्यान से ऐसी चूत कैसी जाती है फाड़ी
कोमल चूतड के नीचे तकिया एक लगा के
दोनों टांगों को मोड़ के कधे पे जरा टीका के
दोनो पुतियो को चूत की उँगलि से फेलाना
बड़े चाव फ़िर अंदर तक कड़वा तेल लगाना

वैसलीन में चुपड़ के उंगली हल्के से घुसाओ
कैंची की फाल की तरह अच्छे से फेलाओ
बाबू बहुत कड़ा और मोटा है ये तेरा सुपाड़ा
थोड़ी चिकनी करलेना आराम से घुसे तुम्हारा

गिल्ली चूत की फाँको पे रगड़ हल्के से लौड़ा
अंदर तक पूरा घुसा देना प्यार से थोड़ा थोड़ा
पहले बार वो चीखेगी जोर से भी चिल्लाएगी
लौड़ा बाहर निकाल लो तुमसे गुहार लगाएगी
पहली बार का दर्द है यह उससे बस ये कहना
और नीचे से लड चूत में लगातर पेलते रहना
धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी चूत में जब चिकनाई
गांड उठाउठा करवायेगी वो तुमसे तब चुदवाई

पूरी रात रखो फिर ये लंड और चूत सटा के
पूरी रात हचक के चोदो लन पे उसे बिठा के
पूरी रात मिलकर खेलो लन व चूत का खेल
मौका मिले तो दिन में भी पटक के देना पेल