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अपडेट 19
जयंत ने फोन उठाकर कहा…
"हेलो…."
"जयंत आप और रिया जब तक मैं ना कहूं शहर छोड़ कर बाहर मत जाइएगा"
"परंतु परसों हमें शहर से बाहर जाना है"
"अभी परसों में बहुत वक्त है कल 10 बजे आप दोनों मेरे ऑफिस में आकर मिलिए "
जयंत घबरा गया उसकी आवाज में घबराहट साफ देखी जा सकती थी..
"क्या हुआ सर"
आइए कल बात करते हैं।
शशि कला के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी उसने जयंत से कहा
"जा राजा को बुला ला…"
अब आगे..
जयंत भागता हुआ राजा के कमरे में गया और कुछ ही देर में राजा शशि कला के सामने खड़ा था…
"तुमने तो सारी व्यवस्था कर दी थी पर अब इस राघवन को क्या हो गया है."
"मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूं अब तो सारा केस आईने की तरह साफ हो गया है फिर राघवन ने इन्हें क्यों बुलाया है?"
"प्रश्न के उत्तर में प्रश्न मत करो राजा…. इतना ध्यान रखना कि यदि मेरे बच्चों के साथ अन्याय हुआ तो मैं अपना समझौता तोड़ दूंगी फिर तुम जानो और तुम्हारा काम"
राजा के चेहरे पर परेशानी के भाव आ चुके थे। राघवन का इस समय फोन करना और जयंत और रिया को अपने कार्यालय में बुलाना बेहद अप्रत्याशित था।
राजा के चेहरे पर गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा था उसे राघवन के संदेह में कहीं न कहीं रजिया का हाथ होता दिखाई पड़ रहा था। जरूर रजिया ने राघवन को कोई ऐसी बात बताई थी जिससे उसके दिमाग में एक बार फिर शक ने जन्म लिया था राजा ने रजिया को तलब कर लिया…
रजिया भागती हुई राजा के कमरे में आई राजा को गुस्से में देख वह थरथर कांप रही थी
"जी मालिक।"
"?तूने राघवन को क्या बताया है"
रजिया को आज दोपहर में राघवन से हुई मुलाकात याद आ गई उसने हाथ जोड़कर कहा
"मालिक मैंने सिर्फ रघु की मृत्यु पर अपना शक जाहिर किया था मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे रघु को किसी ने मरवाया है"
"मुझे पूरी बात विस्तार से बता। कोई बात छुपाने की कोशिश मत करना वरना मैं यह भूल जाऊंगा कि तुम और तुम्हारी मां इस कोठी की विश्वासपात्र रही हो तब मेरा व्यवहार बदलते देर नहीं लगेगी" राजा के चेहरे पर गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
रजिया ने अपनी सारी बातें उसे स्पष्ट तौर पर बता दी परंतु उसमें कोई भी ऐसी बात न थी जिससे राघवन को शक होता।
उधर मूर्ति बाथरूम में नहा रही उस अर्धनग्न लड़की की तस्वीर अपने मोबाइल में खींच कर तथा रिया की पुरानी फोटो लेकर एक बार फिर उसकी सहेली रानी के घर पहुंच गया। रानी के पिता से अनुमति लेकर वह एक बार फिर रानी के समक्ष खड़ा था…
मूर्ति ने रिया की फेसबुक से निकाली गई तस्वीर रानी को दिखाते हुए पूछा
" इसे तो तुम जानती ही होगी"
"हां यह तो रिया की तस्वीर है"
"और यह"
मूर्ति ने अपने मोबाइल से ली हुई रिया की अर्धनग्न तस्वीर को दिखाया। रानी की आंखें फैल गई अर्ध नग्न लड़की रिया ही थी।
"यह भी रिया ही है परंतु यह तस्वीर किसने खींची थी रिया ऐसी लड़की कतई नहीं है।"
"पर यह लड़की रिया से कुछ ज्यादा ही मोटी है तुम यकीन से कह सकती हो कि यह रिया ही है"।
पिछली सर्दियों में रिया का वजन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था शायद यह तस्वीर तक की ही है रिया ने उसके पश्चात काफी मेहनत कर अपने शरीर को एक बार फिर सुडोल बना लिया है।
"क्या रिया को गुस्सा आता था?"
"सर गुस्सा किसी ने नहीं आता पर रिया बेहद शांत स्वभाव की है उसे अपने गुस्से पर काबू पाना और सब का दिल जीतना आता है।"
"क्या तुम जोरावर सिंह से मिली हो?"
"एक दो बार पर दूर-दूर से ही"
मूर्ति को आगे पूछताछ का कोई विशेष मतलब नहीं दिखाई पड़ रहा था। उसने अपनी बातचीत राघवन से साझा करना चाहा और उसके घर आ गया जो रास्ते में ही था। जैसे ही वह राघवन के ड्राइंग रूम में प्रवेश कर रहा था रजनी के स्कूल में कार्य करने वाला मनोहर राघवन के ड्राइंग रूम से बाहर जा रहा था दोनों की निगाहें मिली परंतु एक दूसरे से कोई बात नहीं की मूर्ति ने घुसते ही पूछा
"सर इसे क्यों बुलाया था?"
"रिया के बारे में और जानकारी लेने के लिए"
"कुछ पता चला सर?"
"यह रिया को समझ पाना कठिन हो रहा है। तुम बताओ रानी ने कुछ बताया क्या?"
"हां सर यह लड़की रिया ही है" मूर्ति ने रानी से हुई सारी बातें उसे स्पष्ट कर दीं।
मूर्ति और राघवन रिया से संबंधित सारी बातों को अपने जहन में क्रमवार सजा रहे थे..
क्या जोरावर सिंह रिया पर बुरी नजर रखता था? क्या रजनी को यह बात पता थी ? और यदि यह बात रजनी को पता थी तो उसने कोई प्रतिरोध क्यों नहीं किया? मनोहर के अनुसार रजनी रिया से बेहद प्यार करती थी। ऐसी स्थिति में जोरावर निश्चित ही रिया के साथ कुछ ऐसा वैसा नहीं कर सकता था।
परंतु फिर रिया की ऐसी अर्धनग्न तस्वीरें खींची किसने…?
राघवन के दिमाग में जयंत का चेहरा घूमने लगा. कहीं ऐसा तो नहीं कि अपने पिता कि काम पिपासा का कुछ अंश जयंत में भी था और वह रिया को प्यार करने के बावजूद अपनी काम पिपासा को शांत करने के लिए उसने रिया की अर्ध नग्न तस्वीरें खींची हों।
राघवन कभी-कभी अपनी पुरानी थ्योरी पर काम करता उसे रिया की अर्ध नग्न तस्वीर में जोरावर का हाथ दिखाई पड़ता। रिया आखिर उसकी अपनी पुत्री तो न थी और जब जोरावर न जाने कितनी लड़कियों की अस्मिता से खेल चुका था उसके लिए रिया भी एक भोग्या हो सकती थी। हो सकता है की रिया ने अपना बदला लेने के लिए जोरावर की हत्या कर दी हो परंतु उसने रजनी को क्यों मारा यह बात उसे समझ नहीं आ रही थी।
इस दुनिया में वैसे भी रिया का कोई सहारा था तो वह उसकी मां रजनी ही थी सिर्फ सबूत मिटाने के लिए रजनी को मारना यह रिया के दिमाग में नहीं आ सकता था।
घटना के दो मुख्य पात्र स्वर्ग या नरक सिधार चुके थे और दो कल राघवन के ऑफिस में उपस्थित होने वाले थे। और इस घटना का मास्टरमाइंड लाल कोठी के वैभव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में प्रयासरत था।
अपनी उधेड़बुन को अंजाम तक न पहुंचाने का मलाल राघवन के चेहरे पर दिखाई पड़ रहा था।
मूर्ति ने राघवन से विदा ली और कहा
आने दीजिए कल उन दोनों को कुछ न कुछ सुराग अवश्य मिलेगा..
मूर्ति के जाने के बाद भी राघवन को चैन नहीं था। उस दिन हुए हुए कत्ल में दो अलग-अलग बंदूकों का इस्तेमाल किया गया था अभी तक जो साक्ष्य मिले थे उसके अनुसार जोरावर की बंदूक से जो गोली चली थी उससे रजनी की मृत्यु हुई थी और जिस रिवाल्वर से जोरावर सिंह की मृत्यु हुई थी वह पठान की निशानदेही पर लाल कोठी से बरामद की गई थी
जो घटनाक्रम दिखाई पड़ रहा था उसके अनुसार पहले जोरावर सिंह ने रजनी की हत्या की और उसके पश्चात पठान ने आकर जोरावर सिंह की हत्या कर दी।
एक पल के लिए राघवन के दिमाग में रजनी का चरित्र घूम गया जो स्त्री अपने पति के रहते जोरावर सिंह से संबंध रख रंगरलिया मना सकती है कहीं ऐसा तो नहीं कि लाल कोठी में आने के पश्चात उसका मन जोरावर से भर गया और उसने पठान को अपनी कामवासना में शामिल कर लिया हो।
पठान जैसा हट्टा कट्टा मर्द के प्रति काम पिपासु स्त्री का आकर्षण सहज ही हो सकता था।
हो सकता है उस दिन भी रजनी और पठान के बीच अनैतिक संबंध बने हो जिसकी भनक जोरावर सिंह को भी लग गई हो और उसने रजनी की हत्या कर दी हो। गोलियों की आवाज सुनकर पठान अंदर गया हो और उसने अपनी बंदूक से जोरावर पर गोली चला दी हो।
राघवन की इस थ्योरी में साक्ष्य तो कई थे परंतु रजनी और पठान के बीच नजदीकियों के कोई भी सबूत नहीं थे। पठान जैसा चरित्रवान आदमी वासना के दलदल में डूबा होगा ऐसा सोच पाना कठिन था।
राघवन अपने प्रश्न तैयार कर रहा था और बेसब्री से जयंत और रिया से होने वाली मुलाकात का इंतजार कर रहा था।
अगली सुबह समाचार पत्रों नें सलेमपुर में लगने वाली फैक्ट्री की खबरें प्रमुखता से छापी थीं। खबरों के दोनों तरफ राजा भैया और भूतपूर्व विधायक जोरावर सिंह की भी फोटो छपी हुई थी।
बड़े भाई की इच्छा का मान रखते हुए छोटे भाई ने परिवार की आधी जमीन सलेमपुर में फैक्ट्री लगाने के लिए के पी एसोसिएट्स को दी। सलेमपुर में लगने वाली यह फैक्ट्री सलेमपुर के लोगों को न सिर्फ रोजगार देगी अपितु कई छोटी फैक्ट्रियों को लगाने का मार्ग प्रशस्त करेगी लाल कोठी के नए सितारे राजा भैया ने आते ही सलेमपुर को अपनी सौगात दे दी।
राघवन राजा भैया की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आश्चर्यचकित था। जोरावर सिंह की विरासत को कितनी तेजी से राजा भैया ने अपने कब्जे में ले लिया था वह बात राजा को विशेष बना रही थी। राघवन का अंतर्मन ने अब भी राजा को भी शक के दायरे में रखा हुआ था। राजा जैसा प्रभावशाली आदमी सबूतों से छेड़छाड़ कर केस को गुमराह कर सकता था। यदि वह अपने किसी मातहत को जोरावर सिंह की हत्या की जिम्मेदारी लेने को कहता तब भी वह शायद मना नहीं करता। कहीं ऐसा तो नहीं कि राजा ने हीं पठान को इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए मना लिया हो।
वैसे भी डीएसपी भूरेलाल जिस तरह राजा भैया की चाटुकारिता करता था वह उनके लिए कुछ भी कर सकता था।
राघवन को जोरावर सिंह के मृत्यु के दिन की घटना याद आ रही थी जब से यह सूचना प्राप्त हुई थी तब भूरेलाल नहीं उसे बताया था कि तीनों गोलियां एक बंदूक से चली है परंतु पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद यह मालूम चला कि दो गोलियां अलग बंदूक से थी और एक अलग से।
क्या राजा भैया ने भूरेलाल की मदद से गोलियां बदलवा दीं।
अगली सुबह एसीपी राघवन ऑफिस जाने से पहले डॉ शर्मा के घर पर उपस्थित था जिन्होंने जोरावर सिंह के शरीर का पोस्टमार्टम किया था..
राघवन के उग्र रूप को देखकर डॉ शर्मा की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। और उन्होंने सच बयान कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोलियां बदलने की बात डॉ शर्मा ने कबूल कर ली और उन्होंने यह भी बताया की उसे ऐसा काम करने के लिए लाल कोठी की पठान ने मजबूर किया था शर्मा के अनुसार ..
सर पठान ने मेरे सामने दो ही विकल्प रखे थे इस कार्य को करने के एवज में मुझे 10 लाख मिलने थे और न करने की एवज में सिर्फ एक गोली। मुझे लाल कोठी और पठान के बारे में जानकारी थी मुझे ही क्या सलेमपुर का हर आदमी लाल कोठी के प्रभुत्व को जानता है मैं अपनी जान से समझौता न कर पाया और अपने व्यवसाय से गद्दारी कर बैठा।
राघवन ने शर्मा को शहर से बाहर न जाने की हिदायत दी और मुस्कुराते हुए अपने ऑफिस आ गया।
राघवन ने देखा घड़ी में अभी 9:30 बजे थे जयंत और रिया को आने में अभी वक्त था वह पठान से मिलने चल पड़ा
"कैसे हो पठान..?"
पठान ने राघवन को सलाम किया और बोला
"ठीक हूँ"
"मुझे पता चला है कि तुम और रजनी बेहद करीब थे"
"आप का मतलब?"
"तुम दोनों के बीच जिस्मानी ताल्लुकात थे"
"अपनी जबान संभाल कर बात कीजिए। मेरे सामने ऐसी बेहूदा बातें कर अपने आप को मेरी नजरों में मत गिराईये।"
"पठान के चेहरे पर एक बार फिर वही क्रोध दिखाई पड़ा जो राघवन ने पठान से पहली मुलाकात में देखा था।"
पठान का चेहरा तमतमा गया था और यदि उसके सामने राघवन की जगह किसी और ने यह बात कही होती तो अभी तक वह पठान के तमाशे का शिकार हो चुका होता।
"ठीक है.. ठीक है.. हो सकता है यह बात गलत हो"
"हो सकता है नहीं यह गलत ही है" रजनी जी मेरे मालिक की पत्नी थी वह चाहे जैसी भी हो उनके लिए मेरे सम्मान में कोई कमी न थी। और जो बात आपने कही वह मैं कभी सोच भी नहीं सकता।
"अच्छा तो यह बताओ कि तुमने डॉ शर्मा को धमका कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्यों बदलवायी"
"पठान के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी उसका झूठ पकड़ा जा चुका वह बगले झांकने लगा राघवन ने अपने छोटी सी लाठी से उसकी छुट्टी को ऊपर किया और कहा
"पठान मेरी आंखों में देखो…"
पठान ने अपनी भारी पलकें ऊपर की उसे अपनी चोरी पकड़े जाने का पूरा एहसास हो गया।
उसने राघवन के सामने हाथ जोड़ लिए और बोला..
"मुझे माफ कर दीजिए पर मैं अब आपकी कोई मदद नहीं कर सकता मैंने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और इस केस को निपटाने में आपकी भरपूर मदद कर चुका हूं। इसके आगे मुझसे कोई उम्मीद मत रखिएगा। आप चाहे तो मुझ पर बल प्रयोग कर सकते हैं परंतु यह पठान की जुबान है चाहे आप मेरे शरीर के रक्त का कतरा कतरा बहा ले फिर भी मेरी जुबान नहीं खुलेगी मैंने जितनी बातें आपको बताए हैं वह मैं कोर्ट में कुबूल करूंगा और यह केस समाप्त हो जाएगा। कृपया बाल की खाल निकालने का प्रयास न करें।"
"तुम राजा भैया को बचा रहे हो"
"मैं किसी को बचा नहीं रहा मैं सिर्फ अपना फर्ज निभा रहा हूं"
पठान पलट चुका था और दीवार से अपना सर टिकाए एकदम शांत हो गया था।
राघवन ने पठान से और बहस करना उचित न समझा उसे लाल कोठी के अंदर घटी घटना समझ आ चुकी थी बस उसकी तस्दीक बाकी थी जो जयंत और रिया के आने के पश्चात होनी थी।
राघवन के ऑफिस के कंपाउंड में रिया और जयंत की गाड़ी आ चुकी थी। रिया और जयंत सजे धजे कपड़ों में राजकुमार और राजकुमारी की तरह गाड़ी से उतर रहे थे आसपास के पुलिस वाले उस खूबसूरत जोड़े को देखकर आपस में फुसफुसा रहे थे। जयंत और रिया राघवन के कमरे की तरफ बढ़ने लगे राघवन का
एक मातहत उन्हें राघवन के ऑफिस का रास्ता दिखा रहा था….
आइए मुझे आप दोनों का ही इंतजार था..
शेष अगले भाग मेँ।
जयंत ने फोन उठाकर कहा…
"हेलो…."
"जयंत आप और रिया जब तक मैं ना कहूं शहर छोड़ कर बाहर मत जाइएगा"
"परंतु परसों हमें शहर से बाहर जाना है"
"अभी परसों में बहुत वक्त है कल 10 बजे आप दोनों मेरे ऑफिस में आकर मिलिए "
जयंत घबरा गया उसकी आवाज में घबराहट साफ देखी जा सकती थी..
"क्या हुआ सर"
आइए कल बात करते हैं।
शशि कला के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी उसने जयंत से कहा
"जा राजा को बुला ला…"
अब आगे..
जयंत भागता हुआ राजा के कमरे में गया और कुछ ही देर में राजा शशि कला के सामने खड़ा था…
"तुमने तो सारी व्यवस्था कर दी थी पर अब इस राघवन को क्या हो गया है."
"मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूं अब तो सारा केस आईने की तरह साफ हो गया है फिर राघवन ने इन्हें क्यों बुलाया है?"
"प्रश्न के उत्तर में प्रश्न मत करो राजा…. इतना ध्यान रखना कि यदि मेरे बच्चों के साथ अन्याय हुआ तो मैं अपना समझौता तोड़ दूंगी फिर तुम जानो और तुम्हारा काम"
राजा के चेहरे पर परेशानी के भाव आ चुके थे। राघवन का इस समय फोन करना और जयंत और रिया को अपने कार्यालय में बुलाना बेहद अप्रत्याशित था।
राजा के चेहरे पर गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा था उसे राघवन के संदेह में कहीं न कहीं रजिया का हाथ होता दिखाई पड़ रहा था। जरूर रजिया ने राघवन को कोई ऐसी बात बताई थी जिससे उसके दिमाग में एक बार फिर शक ने जन्म लिया था राजा ने रजिया को तलब कर लिया…
रजिया भागती हुई राजा के कमरे में आई राजा को गुस्से में देख वह थरथर कांप रही थी
"जी मालिक।"
"?तूने राघवन को क्या बताया है"
रजिया को आज दोपहर में राघवन से हुई मुलाकात याद आ गई उसने हाथ जोड़कर कहा
"मालिक मैंने सिर्फ रघु की मृत्यु पर अपना शक जाहिर किया था मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे रघु को किसी ने मरवाया है"
"मुझे पूरी बात विस्तार से बता। कोई बात छुपाने की कोशिश मत करना वरना मैं यह भूल जाऊंगा कि तुम और तुम्हारी मां इस कोठी की विश्वासपात्र रही हो तब मेरा व्यवहार बदलते देर नहीं लगेगी" राजा के चेहरे पर गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
रजिया ने अपनी सारी बातें उसे स्पष्ट तौर पर बता दी परंतु उसमें कोई भी ऐसी बात न थी जिससे राघवन को शक होता।
उधर मूर्ति बाथरूम में नहा रही उस अर्धनग्न लड़की की तस्वीर अपने मोबाइल में खींच कर तथा रिया की पुरानी फोटो लेकर एक बार फिर उसकी सहेली रानी के घर पहुंच गया। रानी के पिता से अनुमति लेकर वह एक बार फिर रानी के समक्ष खड़ा था…
मूर्ति ने रिया की फेसबुक से निकाली गई तस्वीर रानी को दिखाते हुए पूछा
" इसे तो तुम जानती ही होगी"
"हां यह तो रिया की तस्वीर है"
"और यह"
मूर्ति ने अपने मोबाइल से ली हुई रिया की अर्धनग्न तस्वीर को दिखाया। रानी की आंखें फैल गई अर्ध नग्न लड़की रिया ही थी।
"यह भी रिया ही है परंतु यह तस्वीर किसने खींची थी रिया ऐसी लड़की कतई नहीं है।"
"पर यह लड़की रिया से कुछ ज्यादा ही मोटी है तुम यकीन से कह सकती हो कि यह रिया ही है"।
पिछली सर्दियों में रिया का वजन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था शायद यह तस्वीर तक की ही है रिया ने उसके पश्चात काफी मेहनत कर अपने शरीर को एक बार फिर सुडोल बना लिया है।
"क्या रिया को गुस्सा आता था?"
"सर गुस्सा किसी ने नहीं आता पर रिया बेहद शांत स्वभाव की है उसे अपने गुस्से पर काबू पाना और सब का दिल जीतना आता है।"
"क्या तुम जोरावर सिंह से मिली हो?"
"एक दो बार पर दूर-दूर से ही"
मूर्ति को आगे पूछताछ का कोई विशेष मतलब नहीं दिखाई पड़ रहा था। उसने अपनी बातचीत राघवन से साझा करना चाहा और उसके घर आ गया जो रास्ते में ही था। जैसे ही वह राघवन के ड्राइंग रूम में प्रवेश कर रहा था रजनी के स्कूल में कार्य करने वाला मनोहर राघवन के ड्राइंग रूम से बाहर जा रहा था दोनों की निगाहें मिली परंतु एक दूसरे से कोई बात नहीं की मूर्ति ने घुसते ही पूछा
"सर इसे क्यों बुलाया था?"
"रिया के बारे में और जानकारी लेने के लिए"
"कुछ पता चला सर?"
"यह रिया को समझ पाना कठिन हो रहा है। तुम बताओ रानी ने कुछ बताया क्या?"
"हां सर यह लड़की रिया ही है" मूर्ति ने रानी से हुई सारी बातें उसे स्पष्ट कर दीं।
मूर्ति और राघवन रिया से संबंधित सारी बातों को अपने जहन में क्रमवार सजा रहे थे..
क्या जोरावर सिंह रिया पर बुरी नजर रखता था? क्या रजनी को यह बात पता थी ? और यदि यह बात रजनी को पता थी तो उसने कोई प्रतिरोध क्यों नहीं किया? मनोहर के अनुसार रजनी रिया से बेहद प्यार करती थी। ऐसी स्थिति में जोरावर निश्चित ही रिया के साथ कुछ ऐसा वैसा नहीं कर सकता था।
परंतु फिर रिया की ऐसी अर्धनग्न तस्वीरें खींची किसने…?
राघवन के दिमाग में जयंत का चेहरा घूमने लगा. कहीं ऐसा तो नहीं कि अपने पिता कि काम पिपासा का कुछ अंश जयंत में भी था और वह रिया को प्यार करने के बावजूद अपनी काम पिपासा को शांत करने के लिए उसने रिया की अर्ध नग्न तस्वीरें खींची हों।
राघवन कभी-कभी अपनी पुरानी थ्योरी पर काम करता उसे रिया की अर्ध नग्न तस्वीर में जोरावर का हाथ दिखाई पड़ता। रिया आखिर उसकी अपनी पुत्री तो न थी और जब जोरावर न जाने कितनी लड़कियों की अस्मिता से खेल चुका था उसके लिए रिया भी एक भोग्या हो सकती थी। हो सकता है की रिया ने अपना बदला लेने के लिए जोरावर की हत्या कर दी हो परंतु उसने रजनी को क्यों मारा यह बात उसे समझ नहीं आ रही थी।
इस दुनिया में वैसे भी रिया का कोई सहारा था तो वह उसकी मां रजनी ही थी सिर्फ सबूत मिटाने के लिए रजनी को मारना यह रिया के दिमाग में नहीं आ सकता था।
घटना के दो मुख्य पात्र स्वर्ग या नरक सिधार चुके थे और दो कल राघवन के ऑफिस में उपस्थित होने वाले थे। और इस घटना का मास्टरमाइंड लाल कोठी के वैभव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में प्रयासरत था।
अपनी उधेड़बुन को अंजाम तक न पहुंचाने का मलाल राघवन के चेहरे पर दिखाई पड़ रहा था।
मूर्ति ने राघवन से विदा ली और कहा
आने दीजिए कल उन दोनों को कुछ न कुछ सुराग अवश्य मिलेगा..
मूर्ति के जाने के बाद भी राघवन को चैन नहीं था। उस दिन हुए हुए कत्ल में दो अलग-अलग बंदूकों का इस्तेमाल किया गया था अभी तक जो साक्ष्य मिले थे उसके अनुसार जोरावर की बंदूक से जो गोली चली थी उससे रजनी की मृत्यु हुई थी और जिस रिवाल्वर से जोरावर सिंह की मृत्यु हुई थी वह पठान की निशानदेही पर लाल कोठी से बरामद की गई थी
जो घटनाक्रम दिखाई पड़ रहा था उसके अनुसार पहले जोरावर सिंह ने रजनी की हत्या की और उसके पश्चात पठान ने आकर जोरावर सिंह की हत्या कर दी।
एक पल के लिए राघवन के दिमाग में रजनी का चरित्र घूम गया जो स्त्री अपने पति के रहते जोरावर सिंह से संबंध रख रंगरलिया मना सकती है कहीं ऐसा तो नहीं कि लाल कोठी में आने के पश्चात उसका मन जोरावर से भर गया और उसने पठान को अपनी कामवासना में शामिल कर लिया हो।
पठान जैसा हट्टा कट्टा मर्द के प्रति काम पिपासु स्त्री का आकर्षण सहज ही हो सकता था।
हो सकता है उस दिन भी रजनी और पठान के बीच अनैतिक संबंध बने हो जिसकी भनक जोरावर सिंह को भी लग गई हो और उसने रजनी की हत्या कर दी हो। गोलियों की आवाज सुनकर पठान अंदर गया हो और उसने अपनी बंदूक से जोरावर पर गोली चला दी हो।
राघवन की इस थ्योरी में साक्ष्य तो कई थे परंतु रजनी और पठान के बीच नजदीकियों के कोई भी सबूत नहीं थे। पठान जैसा चरित्रवान आदमी वासना के दलदल में डूबा होगा ऐसा सोच पाना कठिन था।
राघवन अपने प्रश्न तैयार कर रहा था और बेसब्री से जयंत और रिया से होने वाली मुलाकात का इंतजार कर रहा था।
अगली सुबह समाचार पत्रों नें सलेमपुर में लगने वाली फैक्ट्री की खबरें प्रमुखता से छापी थीं। खबरों के दोनों तरफ राजा भैया और भूतपूर्व विधायक जोरावर सिंह की भी फोटो छपी हुई थी।
बड़े भाई की इच्छा का मान रखते हुए छोटे भाई ने परिवार की आधी जमीन सलेमपुर में फैक्ट्री लगाने के लिए के पी एसोसिएट्स को दी। सलेमपुर में लगने वाली यह फैक्ट्री सलेमपुर के लोगों को न सिर्फ रोजगार देगी अपितु कई छोटी फैक्ट्रियों को लगाने का मार्ग प्रशस्त करेगी लाल कोठी के नए सितारे राजा भैया ने आते ही सलेमपुर को अपनी सौगात दे दी।
राघवन राजा भैया की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आश्चर्यचकित था। जोरावर सिंह की विरासत को कितनी तेजी से राजा भैया ने अपने कब्जे में ले लिया था वह बात राजा को विशेष बना रही थी। राघवन का अंतर्मन ने अब भी राजा को भी शक के दायरे में रखा हुआ था। राजा जैसा प्रभावशाली आदमी सबूतों से छेड़छाड़ कर केस को गुमराह कर सकता था। यदि वह अपने किसी मातहत को जोरावर सिंह की हत्या की जिम्मेदारी लेने को कहता तब भी वह शायद मना नहीं करता। कहीं ऐसा तो नहीं कि राजा ने हीं पठान को इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए मना लिया हो।
वैसे भी डीएसपी भूरेलाल जिस तरह राजा भैया की चाटुकारिता करता था वह उनके लिए कुछ भी कर सकता था।
राघवन को जोरावर सिंह के मृत्यु के दिन की घटना याद आ रही थी जब से यह सूचना प्राप्त हुई थी तब भूरेलाल नहीं उसे बताया था कि तीनों गोलियां एक बंदूक से चली है परंतु पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद यह मालूम चला कि दो गोलियां अलग बंदूक से थी और एक अलग से।
क्या राजा भैया ने भूरेलाल की मदद से गोलियां बदलवा दीं।
अगली सुबह एसीपी राघवन ऑफिस जाने से पहले डॉ शर्मा के घर पर उपस्थित था जिन्होंने जोरावर सिंह के शरीर का पोस्टमार्टम किया था..
राघवन के उग्र रूप को देखकर डॉ शर्मा की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। और उन्होंने सच बयान कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोलियां बदलने की बात डॉ शर्मा ने कबूल कर ली और उन्होंने यह भी बताया की उसे ऐसा काम करने के लिए लाल कोठी की पठान ने मजबूर किया था शर्मा के अनुसार ..
सर पठान ने मेरे सामने दो ही विकल्प रखे थे इस कार्य को करने के एवज में मुझे 10 लाख मिलने थे और न करने की एवज में सिर्फ एक गोली। मुझे लाल कोठी और पठान के बारे में जानकारी थी मुझे ही क्या सलेमपुर का हर आदमी लाल कोठी के प्रभुत्व को जानता है मैं अपनी जान से समझौता न कर पाया और अपने व्यवसाय से गद्दारी कर बैठा।
राघवन ने शर्मा को शहर से बाहर न जाने की हिदायत दी और मुस्कुराते हुए अपने ऑफिस आ गया।
राघवन ने देखा घड़ी में अभी 9:30 बजे थे जयंत और रिया को आने में अभी वक्त था वह पठान से मिलने चल पड़ा
"कैसे हो पठान..?"
पठान ने राघवन को सलाम किया और बोला
"ठीक हूँ"
"मुझे पता चला है कि तुम और रजनी बेहद करीब थे"
"आप का मतलब?"
"तुम दोनों के बीच जिस्मानी ताल्लुकात थे"
"अपनी जबान संभाल कर बात कीजिए। मेरे सामने ऐसी बेहूदा बातें कर अपने आप को मेरी नजरों में मत गिराईये।"
"पठान के चेहरे पर एक बार फिर वही क्रोध दिखाई पड़ा जो राघवन ने पठान से पहली मुलाकात में देखा था।"
पठान का चेहरा तमतमा गया था और यदि उसके सामने राघवन की जगह किसी और ने यह बात कही होती तो अभी तक वह पठान के तमाशे का शिकार हो चुका होता।
"ठीक है.. ठीक है.. हो सकता है यह बात गलत हो"
"हो सकता है नहीं यह गलत ही है" रजनी जी मेरे मालिक की पत्नी थी वह चाहे जैसी भी हो उनके लिए मेरे सम्मान में कोई कमी न थी। और जो बात आपने कही वह मैं कभी सोच भी नहीं सकता।
"अच्छा तो यह बताओ कि तुमने डॉ शर्मा को धमका कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्यों बदलवायी"
"पठान के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी उसका झूठ पकड़ा जा चुका वह बगले झांकने लगा राघवन ने अपने छोटी सी लाठी से उसकी छुट्टी को ऊपर किया और कहा
"पठान मेरी आंखों में देखो…"
पठान ने अपनी भारी पलकें ऊपर की उसे अपनी चोरी पकड़े जाने का पूरा एहसास हो गया।
उसने राघवन के सामने हाथ जोड़ लिए और बोला..
"मुझे माफ कर दीजिए पर मैं अब आपकी कोई मदद नहीं कर सकता मैंने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और इस केस को निपटाने में आपकी भरपूर मदद कर चुका हूं। इसके आगे मुझसे कोई उम्मीद मत रखिएगा। आप चाहे तो मुझ पर बल प्रयोग कर सकते हैं परंतु यह पठान की जुबान है चाहे आप मेरे शरीर के रक्त का कतरा कतरा बहा ले फिर भी मेरी जुबान नहीं खुलेगी मैंने जितनी बातें आपको बताए हैं वह मैं कोर्ट में कुबूल करूंगा और यह केस समाप्त हो जाएगा। कृपया बाल की खाल निकालने का प्रयास न करें।"
"तुम राजा भैया को बचा रहे हो"
"मैं किसी को बचा नहीं रहा मैं सिर्फ अपना फर्ज निभा रहा हूं"
पठान पलट चुका था और दीवार से अपना सर टिकाए एकदम शांत हो गया था।
राघवन ने पठान से और बहस करना उचित न समझा उसे लाल कोठी के अंदर घटी घटना समझ आ चुकी थी बस उसकी तस्दीक बाकी थी जो जयंत और रिया के आने के पश्चात होनी थी।
राघवन के ऑफिस के कंपाउंड में रिया और जयंत की गाड़ी आ चुकी थी। रिया और जयंत सजे धजे कपड़ों में राजकुमार और राजकुमारी की तरह गाड़ी से उतर रहे थे आसपास के पुलिस वाले उस खूबसूरत जोड़े को देखकर आपस में फुसफुसा रहे थे। जयंत और रिया राघवन के कमरे की तरफ बढ़ने लगे राघवन का
एक मातहत उन्हें राघवन के ऑफिस का रास्ता दिखा रहा था….
आइए मुझे आप दोनों का ही इंतजार था..
शेष अगले भाग मेँ।
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