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इस अध्भुत कहानी के इस मोड़ पर मैं इस संशय में हूँ के कहानी को किधर ले जाया जाए ?


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deeppreeti

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परिचय

आप सब से एक महिला की कहानी किसी न किसी फोरम में पढ़ी होगी जिसमे कैसे एक महिला जिसको बच्चा नहीं है एक आश्रम में जाती है और वहां उसे क्या क्या अनुभव होते हैं,

पिछली कहानी में आपने पढ़ा कैसे एक महिला बच्चे की आस लिए एक गुरूजी के आश्रम पहुंची और वहां पहले दो -तीन दिन उसे क्या अनुभव हुए पर कहानी मुझे अधूरी लगी ..मुझे ये कहानी इस फोरम पर नजर नहीं आयी ..इसलिए जिन्होने ना पढ़ी हो उनके लिए इस फोरम पर डाल रहा हूँ



GIF1

मेरा प्रयास है इसी कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाने का जिसमे परिकरमा, योनि पूजा , लिंग पूजा और मह यज्ञ में उस महिला के साथ क्या क्या हुआ लिखने का प्रयास करूँगा .. अभी कुछ थोड़ा सा प्लाट दिमाग में है और आपके सुझाव आमनत्रित है और मैं तो चाहता हूँ के बाकी लेखक भी यदि कुछ लिख सके तो उनका भी स्वागत है

अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है .


वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी स्वामी या महात्मा एक जैसा नही होता. मैं तो कहता हूँ कि 90% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर 10% खराब भी होते हैं. इन 10% खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.


1. इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा कही पर भी संभव है .

2. इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने अन्यत्र नहीं पढ़ी है .

Note : dated 1-1-2021

जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और अब कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का ।
Note dated 8-1-2024


इससे पहले कहानी में , कुछ रिश्तेदारों, दूकानदार और एक फिल्म निर्देशक द्वारा एक महिला के साथ हुए अजीब अनुभवो के बारे में बताया गया है , कहानी के 270 भाग से आप एक डॉक्टर के साथ हुए एक महिला के अजीब अनुभवो के बारे में पढ़ेंगे . जीवन में हर कार्य क्षेत्र में हर तरह के लोग मिलते हैं हर व्यक्ति एक जैसा नही होता. डॉक्टर भी इसमें कोई अपवाद नहीं है अधिकतर डॉक्टर या वैध या हकिम इत्यादि अच्छे होते हैं, जिनपर हम पूरा भरोसा करते हैं, अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं ...
वास्तव में ऐसा नहीं है की सब लोग ऐसे ही होते हैं ।

सभी को धन्यवाद,


कहानी का शीर्षक होगा


औलाद की चाह



INDEX

परिचय

CHAPTER-1 औलाद की चाह

CHAPTER 2 पहला दिन

आश्रम में आगमन - साक्षात्कार
दीक्षा


CHAPTER 3 दूसरा दिन

जड़ी बूटी से उपचार
माइंड कण्ट्रोल
स्नान
दरजी की दूकान
मेला
मेले से वापसी


CHAPTER 4 तीसरा दिन
मुलाकात
दर्शन
नौका विहार
पुरानी यादें ( Flashback)

CHAPTER 5- चौथा दिन
सुबह सुबह
Medical चेकअप
मालिश
पति के मामा
बिमारी के निदान की खोज

CHAPTER 5 - चौथा दिन -कुंवारी लड़की

CHAPTER 6 पांचवा दिन - परिधान - दरजी

CHAPTER 6 फिर पुरानी यादें

CHAPTER 7 पांचवी रात परिकर्मा

CHAPTER 8 - पांचवी रात लिंग पूजा

CHAPTER 9 -
पांचवी रात योनि पूजा

CHAPTER 10 - महा यज्ञ

CHAPTER 11 बिमारी का इलाज

CHAPTER 12 समापन



INDEX

औलाद की चाह 001परिचय- एक महिला की कहानी है जिसको औलाद नहीं है.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 002गुरुजी से मुलाकात.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 003पहला दिन - आश्रम में आगमन - साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 004दीक्षा से पहले स्नान.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 004Aदीक्षा से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 005आश्रम में आगमन पर साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 006आश्रम के पहले दिन दीक्षा.Mind Control
औलाद की चाह 007दीक्षा भाग 2.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 008दीक्षा भाग 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 009दीक्षा भाग 4.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 010जड़ी बूटी से उपचार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 011जड़ी बूटी से उपचार.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 012माइंड कण्ट्रोल.Mind Control
औलाद की चाह 013माइंड कण्ट्रोल, स्नान. दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 014दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 015टेलर की दूकान में सामने आया सांपो का जोड़ा.Erotic Horror
औलाद की चाह 016सांपो को दूध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 017मेले में धक्का मुक्की.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 018मेले में टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 019मेले में लाइव शो.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 020मेले से वापसी में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 021मेले से औटो में वापसीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 022गुरुजी से फिर मुलाकातNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 023लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 024लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 025नदी के किनारे.Mind Control
औलाद की चाह 026ब्रा का झंडा लगा कर नौका विहार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 027अपराध बोध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 028पुरानी यादें-Flashback.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 029पुरानी यादें-Flashback 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 030पुरानी यादें-Flashback 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 031चौथा दिन सुबह सुबह.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 032Medical Checkup.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 033मेडिकल चेकअप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 034मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 035मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 036मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 037ममिया ससुर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 038बिमारी के निदान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 039बिमारी के निदान 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 040कुंवारी लड़की.First Time
औलाद की चाह 041कुंवारी लड़की, माध्यम.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 042कुंवारी लड़की, मादक बदन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 043दिल की धड़कनें .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 044कुंवारी लड़की का आकर्षण.First Time
औलाद की चाह 045कुंवारी लड़की कमीना नौकर.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 046फ्लैशबैक–कमीना नौकर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 047कुंवारी लड़की की कामेच्छायें.First Time
औलाद की चाह 048कुंवारी लड़की द्वारा लिंगा पूजा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 049कुंवारी लड़की- दोष अन्वेषण और निवारण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 050कुंवारी लड़की -दोष निवारण.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 051कुंवारी लड़की का कौमार्य .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 052कुंवारी लड़की का मूसल लंड से कौमार्य भंग.First Time
औलाद की चाह 053ठरकी लंगड़ा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 054उपचार की प्रक्रिया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 055परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 056परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 057परिधान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 058टेलर का माप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 059लेडीज टेलर-टेलरिंग क्लास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 060लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 061लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 062लेडीज टेलर की बदमाशी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 063बेहोशी का नाटक और इलाज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 064बेहोशी का इलाज़-दुर्गंध वाली चीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 065हर शादीशुदा औरत इसकी गंध पहचानती है, होश आया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 066टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 067स्कर्ट की नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 068मिनी स्कर्ट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 069मिनी स्कर्ट एक्सपोजरNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 070मिनी स्कर्ट पहन खड़े होना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 071मिनी स्कर्ट पहन बैठनाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 072मिनी स्कर्ट पहन झुकना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 073मिनी स्कर्ट में ऐड़ियों पर बैठना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 074फोन सेक्स.Erotic Couplings
औलाद की चाह 075अंतर्वस्त्र-पैंटी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 076पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 077ड्रेस डॉक्टर पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 078परिक्षण निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 079आपत्तिजनक निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 080कुछ पल विश्राम.How To
औलाद की चाह 081योनि पूजा के बारे में ज्ञान.How To
औलाद की चाह 082योनि मुद्रा.How To
औलाद की चाह 083योनि पूजा.How To
औलाद की चाह 084स्ट्रैप के बिना वाली ब्रा की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 085परिधान की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 086एक्स्ट्रा कवर की आजमाईश.How To
औलाद की चाह 087इलाज के आखिरी पड़ाव की शुरुआत.How To
औलाद की चाह 088महिला ने स्नान करवाया.How To
औलाद की चाह 089आखिरी पड़ाव से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 090शरीर पर टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 091योनि पूजा का संकल्प.How To
औलाद की चाह 092योनि पूजा आरंभ.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 093योनि पूजा का आरम्भ में मन्त्र दान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 094योनि पूजा का आरम्भ में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 095योनि पूजा का आरम्भ में माइक्रोमिनी में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 096काँटा लगा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 097काँटा लगा-आपात काले मर्यादा ना असते.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 098गोद में सफर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 099परिक्रमा समापन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 100चंद्रमा आराधना-टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 101उर्वर प्राथना सेक्स देवी बना दीजिये।NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 102चंद्र की रौशनी में स्ट्रिपटीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 103चंद्रमा आराधना दुग्ध स्नान की तयारी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 104समुद्र के किनारेIncest/Taboo
औलाद की चाह 105समुद्र के किनारे तेज लहरIncest/Taboo
औलाद की चाह 106समुद्र के किनारे अविश्वसनीय दृश्यNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 107एहसास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 108भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 109भाभी का मेनोपॉजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 110भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 111भाबी का मेनोपॉज- भीड़ में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 112भाबी का मेनोपॉज - कठिन परिस्थिति.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 113बहन के बेटे के साथ अनुभव.Incest/Taboo
औलाद की चाह 114रजोनिवृति के दौरान गर्म एहसास.Incest/Taboo
औलाद की चाह 115रजोनिवृति के समय स्तनों से स्राव.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 116जवान लड़के का आकर्षणIncest/Taboo
औलाद की चाह 117आज गर्मी असहनीय हैNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 118हाय गर्मीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 119गर्मी का इलाजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 120तिलचट्टा कहाँ गया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 121तिलचट्टा कहाँ गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 122तिलचट्टे की खोजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 123नहलाने की तयारीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 124नहलाने की कहानीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 125निपल्स-आमों जितने बड़े नहीं हो सकते!How To
औलाद की चाह 126निप्पल कैसे बड़े होते हैं.How To
औलाद की चाह 127सफाई अभियान.Incest/Taboo
औलाद की चाह 128तेज खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 129सोनिआ भाभी की रजोनिवृति-खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 130सोनिआ भाभी की रजोनिवृति- मलहमNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 131स्तनों की मालिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 132युवा लड़के के लंड की पहली चुसाई.How To
औलाद की चाह 133युवा लड़के ने की गांड की मालिश .How To
औलाद की चाह 134विशेष स्पर्श.How To
औलाद की चाह 135नंदू का पहला चुदाई अनुभवIncest/Taboo
औलाद की चाह 136नंदू ने की अधिकार करने की कोशिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 137नंदू चला गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 138भाभी भतीजे के साथExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 139कोई देख रहा है!Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 140निर्जन समुद्र तटExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 141निर्जन सागर किनारे समुद्र की लहरेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 142फ्लैशबैक- समुद्र की लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 143समुद्र की तेज और बड़ी लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 144फ्लैशबैक- सागर किनारे गर्म नज़ारेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 145सोनिआ भाभी रितेश के साथMature
औलाद की चाह 146इलाजExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 147सागर किनारे चलो जश्न मनाएंExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 148सागर किनारे गंदे फर्श पर मत बैठोNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 149सागर किनारे- थोड़ा दूध चाहिएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 150स्तनों से दूधNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 151त्रिकोणीय गर्म नजाराExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 152अब रिक्शाचालक की बारीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 153सागर किनारे डबल चुदाईExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 154पैंटी कहाँ गयीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 155तयारी दुग्ध स्नान की ( फ़्लैश बैक से वापसी )Mind Control
औलाद की चाह 156टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 157दूध सरोवर स्नान टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 158दूध सरोवर स्नानMind Control
औलाद की चाह 159दूध सरोवर में कामुक आलिंगनMind Control
औलाद की चाह 160चंद्रमा आराधना नियंत्रण करोMind Control
औलाद की चाह 161चंद्रमा आराधना - बादल आ गएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 162चंद्रमा आराधना - गीले कपड़ों से छुटकाराNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 163चंद्रमा आराधना, योनि पूजा, लिंग पूजाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 164बेडरूमHow To
औलाद की चाह 165प्रेम युक्तियों- दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक माहौलHow To
औलाद की चाह 166प्रेम युक्तियाँ-दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक -फोरप्ले, रंगीलेHow To
औलाद की चाह 167प्रेम युक्तियाँ- कामसूत्र -संभोग -फोरप्ले, रंग का प्रभावHow To
औलाद की चाह 168प्रेम युक्तियाँ- झांटो के बालHow To
औलाद की चाह 169योनि पूजा के लिए आसनHow To
औलाद की चाह 170योनि पूजा - टांगो पर बादाम और जजूबा के तेल का लेपनHow To
औलाद की चाह 171योनि पूजा- श्रृंगार और लिंग की स्थापनाHow To
औलाद की चाह 172योनि पूजा- लिंग पू जाHow To
औलाद की चाह 173योनि पूजा आँखों पर पट्टी का कारणHow To
औलाद की चाह 174योनि पूजा- अलग तरीके से दूसरी सुहागरात की शुरुआतHow To
औलाद की चाह 175योनि पूजा- दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 176योनि पूजा - दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 177दूसरी सुहागरात - चुम्बन Group Sex
औलाद की चाह 178 दूसरी सुहागरात- मंत्र दान -चुम्बन आलिंगन चुम्बन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 179 यौनि पूजा शुरू-श्रद्धा और प्रणाम, स्वर्ग के द्वार Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 180 यौनि पूजा योनि मालिश योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 181 योनि पूजा मंत्र दान और कमल Group Sex
औलाद की चाह 182 योनि पूजा मंत्र दान-मेरे स्तनो और नितम्बो का मर्दन Group Sex
औलाद की चाह 183 योनि पूजा मंत्र दान- आप लिंग महाराज को प्रसन्न करेंगी Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 184 पूर्णतया अश्लील , सचमुच बहुत उत्तेजक, गर्म और अनूठा अनुभव Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 185 योनि पूजा पूर्णतया उत्तेजक अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 186 उत्तेजक गैंगबैंग अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 187 उत्तेजक गैंगबैंग का कारण Group Sex
औलाद की चाह 188 लिंग पूजा Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 189 योनि पूजा में लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 190 योनि पूजा लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 191 लिंग पूजा- लिंगा महाराज को समर्पण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 192 लिंग पूजा- लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 193 साक्षात मूसल लिंग पूजा लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 194योनी पूजा में परिवर्तन का चरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 195 योनि पूजा- जादुई उंगलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 196योनि पूजा अपडेट-27 स्तनपान NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 197 7.28 पांचवी रात योनि पूजा मलाई खिलाएं और भोग लगाएं NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 198 7.29 -पांचवी रात योनि पूजा योनी मालिश NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 199 7.30 योनि पूजा, जी-स्पॉट, डबल फोल्ड मालिश का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 200 7.31 योनि पूजा, सुडोल, बड़े, गोल, घने और मांसल स्त NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 201 7.32 योनि पूजा, स्तनों नितम्बो और योनि से खिलवाड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 202 7. 33 योनि पूजा, योनि सुगम जांच NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 203 7.34 योनि पूजा, योनि सुगम, गर्भाशय में मौजूद NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 204 7.35 योनि सुगम-गुरूजी का सेक्स ट्रीटमेंट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 205 7.36 योनि सुगम- गुरूजी के सेक्स ट्रीटमेंट का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 206 7.37 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों को आपसी बातचीत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 207 7.38 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों के पुराने अनुभव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 208 7.39 योनि सुगम- बहका हुआ मन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 209 7.40 बहका हुआ मन -सपना या हकीकत Mind Control
औलाद की चाह 210 7.41 योनि पूजा, स्पष्टीकरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 211 7.42 योनि पूजा चार दिशाओ को योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 212 7.43 योनि पूजा नितम्बो पर थप्पड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 213 7.44 नितम्बो पर लाल निशान का धब्बा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 214 7.45 नितम्ब पर लाल निशान के उपाए Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 215 7.46 बदन के हिस्से को लाल करने की ज़रूरत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 216 7.47 आश्रम का आंगन - योनि जन दर्शब Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 217 7.48 योनि पूजा अपडेट-योनि जन दर्शन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 218 7.49 योनि पूजा अपडेट योनी पूजा के बाद विचलित मन, आराम! NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 219 CHAPTER 8- 8.1 छठा दिन मामा-जी मिलने आये Incest/Taboo
औलाद की चाह 220 8.2 मामा-जी कार में अजनबियों को लिफ्ट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 221 8. 3 मामा-जी की कार में सफर NonConsent/Reluctance

https://xforum.live/threads/औलाद-की-चाह.38456/page-8
 
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deeppreeti

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मित्रो और पाठको को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

कहानी जल्द आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास रहेगा
 

deeppreeti

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औलाद की चाह

CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक- नंदू के साथ

अपडेट-1





सोनिआ भाभी-भाभी ने रजोनिवृति नन्दू के साथ अपना बताना जारी रखा

पांचवा और छठा दिन

सोनिआ भाभी बोली मैंने नंदू के साथ उस सेक्सी सत्र के बाद खुद को फिर से संगठित करने के लिए समय लिया, नंदू लगभग मेरे बेटे की तरह था। मैं नंदू से आँख नहीं मिला पा रही थी और मुझे ऐसा लगता था कि हर बार जब वह मुझे देख रहा था, तो जैसे वह मुझे मेरे कपड़ों के माध्यम से नग्न देख रहा था। मैं अपने बेशर्म कृत्यों को भूल नहीं पा रही थी और उसने मुझे एक महत्त्वपूर्ण अवधि के लिए पूरी तरह से उतार-चढ़ाव और काम उत्तेजित स्थिति में देखा थी। सौभाग्य से, आजकल मैं मेरे पति के साथ बिल्कुल बिस्तर पर नहीं मिलती थी और हमारा कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनता था, अन्यथा उन्हें यह समझाने में बहुत कठिनआयी होती कि मेरे दाहिने निप्पल पर उस नाखून का निशान कैसे आ गया। मनोहर को कभी भी पता ही नहीं चला कि उसकी पीठ पीछे क्या हो रहा है! उसकी बीवी किस तरह की सेक्स की गतिविधियों में लिप्त है उसे इसकी कोई भनक नहीं हुई थी । वास्तव में जब भी मैं अपने पति की ओर देखती थी तो मैं बहुत दोषी महसूस कर रही थी? नंदू भी अपनी पहली चुदाई की खुशी का अनुभव करने के बाद थोड़ा सयमित लग रहा था।

सातवा दिन

उस दिन शाम नंदू अपने घर के लिए निकलने वाला था और मैं उसे अपने तरीके से अलविदा कहना चाहती थी। लेकिन मुझे मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि उस दिन मनोहर घर पर था, परन्तु मुझे बाद में मौका मिला जब वह किसी कारण से थोड़ी देर के लिए बाहर गया। नंदू अपने कमरे में था और मैं वहाँ गयी।

मैं: नंदू!

नंदू: जी हाँ मौसी?

मैंने अपनी सारी ताकत इकट्ठी की और सीधे उसकी आँखों में देखा। नंदू मेरी नजरो का सामना नहीं कर सका और उसने अपनी आँखें नीची कर लीं।

मैं: बेटा, उस दिन जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह से गोपनीय रहना चाहिए। उसे दिमाग़ में रखो। किसी भी परिस्थिति में आप किसी के साथ उस पर चर्चा या साझा नहीं करेंगे। वादा करो?

नंद जी मौसी मैं समझता हूँ। आप मुझ पर भरोसा कर सकती हैं।

मैं: अच्छा। तुम्हारे जाने से पहले?

नंदू: क्या मैं आ सकता हूँ? मेरा मतलब मौसी, क्या मैं एक बार आपके करीब आ सकता हूँ?

मैं: एक मिनट। नंदू तुम भी वादा करो कि यह आखिरी बार होगा और अब से हम अपने पुराने रिश्ते की तरफ लौट आएंगे और मौसी भांजे की तरह ही व्यवहार करेंगे ...

नंदू: ठीक है मौसी, मैं वादा करता हूँ। यह आखिरी बार होगा।

मैंने उसकी आँखों की ओर देखा और उसे अपने पास आने का इशारा किया। सच कहूँ तो मैं भी उसके लौटने से पहले नंदू को एक बार गले लगाना चाहती थी। अगले कुछ मिनटों में हम एक दूसरे की बाहो में थे? नंदू ने मेरे सुडौल शरीर के हर इंच को अपने हाथों से महसूस किया और मैंने भी उसे जोर से चूमा। नंदू के हाथों ने मेरे ब्लाउज से ढके स्तनों को दबाया और निचोड़ा, जब उसके हाथ मेरे बड़े कूल्हों के आकार को महसूस कर रहे थे, मेरे होंठ उसके होठों का स्वाद ले रहे थे; तब मैं भी अपने बड़े स्तन उसकी सपाट छाती पर दबा रही थी फिर उसके हाथ मेरे मांसल कूल्हों पर उसकी गोलाकारता को महसूस कर रहे थे, उसके बाद मेरे हाथों ने उसके पायजामा के नीचे उसका लंड खोजा और उसे सहलाया। चीजें फिर से गर्म हो रही थीं। नंदू को भी शायद एहसास हो गया था और जब वह मेरी साड़ी के ऊपर मेरी गांड थपथपा रहा था तो उसने पाया मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी और उसकी अगली हरकत से मेरे दिमाग में खतरे की घंटी बज उठी।

नंदू धीरे-धीरे मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी टांगों से ऊपर उठा रहा था और मैं स्पष्ट रूप से अपने नग्न नितंबों को सहलाने की उसकी इच्छा को महसूस कर रही थी। हालांकि ईमानदारी से मैं भी इस तरह से छुआ जाना पसंद करती हूँ, लेकिन मुझे रेखा खींचनी थी।

मैं: नंदू! नहीं। ऐसा मत करो। कृपया।

नंदू: मौसी? कृपया। एक आखिरी बार! मैं तुम्हें कल से बिलकुल परेशान नहीं करूंगा!

मैं: नंदू, मुझे पता है कि लेकिन... अरे! नहीं नहीं? विराम!

इससे पहले कि मैं एक त्वरित कार्यवाही में ठीक से प्रतिक्रिया कर पाती, वह मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी जांघों तक उजागर करने में सक्षम हो गया था। जैसे ही उसके ठंडे हाथों ने मेरी नंगी गर्म जांघों को छुआ, मुझे एहसास हुआ कि मैं कमजोर हो रही हूँ।

मैं: नंदू, प्लीज मत करो। कृपया! आपके मौसा-जी किसी भी क्षण वापस आ सकते हैं।

जब तक मैं वाक्य पूरा कर पाती, मुझे महसूस हुआ कि इस लड़के ने मेरी विशाल गांड को पूरी तरह से खोल दिया है। उसने मेरी साड़ी को मेरी कमर पर अच्छी तरह से ऊपर कर दिया और मेरी कसी हुई गांड को निचोड़ने लगा। मैंने भी बेशर्मी से उसकी हरकतों के आगे घुटने टेक दिए और उसे अपने शरीर से कसकर अपने गले लगा लिया। नंदू ने अब मेरी साड़ी छोड़ दी और उसके हाथ मेरी साड़ी के नीचे मेरी नग्न गांड पर बने रहे। वह मेरी गांड पर चुटकी ले रहा था, मेरे तंग नितम्ब के गालों को दोनों हाथों से दबा रहा था और कुचल रहा था। कुछ क्षण और ऐसा ही चलता रहा और मेरे गाण्ड के दबाव से पूर्णतः संतुष्ट होने के बाद उसने मेरे नितंबों से अपने हाथ निकाल लिए। नंदू उस समय तक काफी उत्तेजित हो गया था क्योंकि उस समय मैं भी उसके पजामे के नीचे उसका कठोर लंड महसूस कर रही थी।

नंदू ने मुझे फिर से गले लगाया और एक कायाकल्प प्रयास के साथ मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया और वह मुझे इतना जोर से धक्का दे रहा था कि मैं अपना संतुलन नहीं रख सकी और मुझे पीछे हटना पड़ा और लगभग अपने बिस्तर पर गिर पड़ी। नंदू ने मुझे वस्तुतः अपने बिस्तर पर धकेल दिया और जैसे ही मैं उस पर बैठी, उसने फटाफट मेरा पल्लू मेरे कंधों से उतार दिया। मैंने उसे सावधान करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मैं: नंदू, अपना व्यवहार संयत करो!

वह अब आदमखोर की तरह था, जिसने एक बार खून का स्वाद चखा था। उसने मेरे जुड़वाँ स्तनों पर छलांग लगा दी और मेरे ब्लाउज और ब्रा पर दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया। मैं उसकी चालों में अतिरिक्त शक्ति को स्पष्ट रूप से देख सकता था और आज उसकी हरकतें बहुत निश्चित थीं! मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसकी हरकतों से स्पष्ट था कि उसने मुझे निर्वस्त्र करने की ठान ली है।

मैं: रुको! कृपया?

मेरा प्रतिरोध बहुत कमजोर था और वह मेरे तंग स्तनों से मेरे ब्लाउज और ब्रा को खींचने की कोशिश कर रहा था।

मैं: नंदू? नंदू, इस तरह तुम मेरा ब्लाउज फाड़ दोगे!

लेकिन शायद ही मेरी प्रतिक्रियाएँ उस तक पहुँची और यह देखकर कि वह मेरे ब्लाउज के हुक को जल्दी से नहीं खोल पा रहा था, बदमाश ने सीधे मेरे ब्लाउज के अंदर अपना हाथ डाला और मेरे सुस्वादु आम को पकड़ लिया। उसके चेहरे के भाव बदल गए थे और वह बहुत रूखा लग रहा था। हालाँकि मैं अपने आप को उसके चंगुल से छुड़ाने के लिए बहुत संघर्ष कर रही थी, फिर भी वह मेरे ब्लाउज से मेरे बाएँ स्तन को बाहर निकालने में कामयाब रहा! जैसे ही मुझे उसके नग्न स्तन पर उसके हाथ का आभास हुआ, मेरा संघर्ष लगभग खत्म हो गया और उसने उसका पूरा फायदा उठाया और कुछ ही समय उसने मेरे दाहिने स्तन को भी मेरे ब्लाउज के ऊपर खींच लिया। मैं बस एक फूहड़ रंडी की तरह लग रही थी जो बिस्तर के किनारे पर बैठी हो!

एक बार जब वह मेरे दोनों स्तनों को मेरी पोशाक से बाहर कर उजागर करने में सफल हो गया, तो उसने एक राहत ली और मेरी जुड़वां चोटियों पर बहुत आक्रामक तरीके दबाने लगा। उसके स्पर्श से उत्तेजित होने के बावजूद, मैं बहुत अपमानित महसूस कर रही थी और नंदू के इस बलात्कारी जैसे व्यवहार को पचा नहीं सकी और उसे जोर से थप्पड़ मारा।

मैं: आपको क्या लगता है कि आप क्या कर रहे हैं? सुन रहे ही नंदू!

जैसे ही मैंने उसे थप्पड़ मारा और डांटा, तुरंत मैंने अपने स्तनों को अपने हाथों से ढकने की कोशिश की, लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि नंदू ने जबरदस्ती मेरी बाहों को पकड़ लिया और मुझे मेरी इच्छा के विरुद्ध बिस्तर पर लेटने के लिए धक्का दिया। कुछ ही दिनों में नंदू एक बदला हुआ इंसान लगने लगा! , उसने न सिर्फ मेरे थप्पड़ को नजरअंदाज किया बल्कि उसने मुझे नीचे गिराने की कोशिश की! उसके चेहरे से मासूमियत पूरी तरह गायब हो गई थी!

मैं: नंदू, तुम हद पार कर रहे हो! यह किस तरह का व्यवहार है?

नंदू ने मुझे जवाब देने की परवाह नहीं की और न ही उसने अपनी भद्दी आक्रामकता को रोका। उसने मेरी बाहों को मजबूती से पकड़ रखा था और मेरे सीने के क्षेत्र को सूँघ रहा था और मेरे खुले निपल्स को चाटने की कोशिश कर रहा था जबकि मैं अपनी गरिमा को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

मैं: नंदू, रुको! ये मत करो! आखिर मैं तुम्हारी मौसी हूँ!

नंदू: बस एक बार मौसी? एक आखिरी बार!

मैं: आखिरी बार क्या?

नंदू: मैं मौसी आपको चोदना चाहता हूँ! तुम बहुत सेक्सी हो!

मैं जो भी सुन रही थी उसे सुन मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ जो! मेरा सिर जैसे घूम रहा था। क्या वह वही मासूम आज्ञाकारी नंदू था जिसके साथ मैंने पिछले कुछ दिनों में खिलवाड़ किया था? मैं इस बात को पचा नहीं पा रही थी कि नंदू जैसा छोटा लड़का मुझ पर अधिकार करने की कोशिश कर रहा था! इससे पहले कि मैं अपने आप को संभल पाती, उसने मेरी फैली हुई भुजाओं को एक हाथ में पकड़ लिया और अपना खाली हाथ मेरी कमर की ओर ले लिया और मेरी साड़ी को मेरे पैरों के ऊपर खींचने लगा। उस समय मेरी भावना बहुत अजीब और मिश्रित थी? यह मेरी यौन इच्छा और मेरे स्वाभिमान को बचाने के मिश्रण से मिली हुई अजीब स्थिति थी। यह मुझे मेरे ही घर में छेड़छाड़ करने जैसा था!

मैं: नंदू? कृपया मत करो! नहीं? नहीं? इसे रोको!


जारी रहेगी

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CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक- नंदू के साथ सातवा दिन

अपडेट-2



नंदू के साथ सातवा दिन



सोनिआ भाभी ने रजोनिवृति के बाद अपने बहनाजे नंदू के साथ अपनी कहानी सुननी जारी राखी

सोनिआ भाभी बोली मैं नंदू को बोली-नंदू... प्लीज मत करो। नहीं... नहीं ... इसे रोको। प्लीज रुक जाओ

मैंने चिल्लायी लेकिन कोई असर नहीं हुआ। मैं उठने के लिए संघर्ष कर रही थी क्योंकि वह मेरे ऊपर था इसलिए मेरी स्थिति बहुत कमजोर थी और नंदू पूरी तरह से मेरे ऊपर था। नंदू ने मेरे हाथ छोड़े और मेरे सिर को वापस बिस्तर पर रख दिया और मेरे होठों को चूमने की कोशिश की। मैं अब उससे बचने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन उसने अचानक मेरे कड़े सूजे हुए दाहिने निप्पल को इतनी जोर से घुमाया कि मैं चीख पड़ी और वह इस मौके का फायदा उठाने के लिए काफी होशियार था और अपने दांतों को मेरे निचले होंठों में दबा दिया। उसकी इस दोहरी हरकत से मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और अपने दूसरे हाथ से मेरे बाएँ स्तन को पकड़ लिया, तो मैं जो संघर्ष कर रहा था, उसे बनाए रखना मुश्किल था।

मैं-उह्ह्ह आआआआआआ:

मैं परमानंद की आह भर रहा था, हालांकि मैं अभी भी नंदू के असभ्य व्यवहार से बहुत आहत थी।

नंदू-हे मौसी... तुम कितने स्वीट हो। आह।

यह महसूस करते हुए कि मैंने उसके अश्लील स्पर्शों पर कामुक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया था, उसने नग्न स्तनों की मालिश करना शुरू कर दिया और मेरे काले निपल्स को अपनी उंगलियों से बार-बार घुमाया। साथ ही वह मेरी साड़ी के ऊपर अपना सीधा और कड़ा औजार मेरी चूत पर दबा रहा था।

नंदू-सॉरी मौसी, पर तुम्हे देखकर मैं खुद को काबू में नहीं रख पाया। तुम दुनिया की सबसे सेक्सी महिला हो मौसी... क्या तुम अब भी मुझसे नाराज़ हो?

उसने मेरे मोटे गाल को चूमा और सीधे मेरी आँखों में देखा। मैं अब उनका "सॉरी" सुनकर थोड़ा नरम हो गयी थी और उनके प्यार भरे स्पर्शों का आनंद लेने लगी थी।

मुझे याद आया की जब मेरी नई-नई शादी हुई थी और मैंने पहले बार मनोहर के साथ सेक्स किया था । तो उसके बाद मनोहर भी मुझे छोड़ता ही नहीं था और जब भी उसे मौका मिलता तो मेरे स्तन दबा देता था या चूम लेता था । यह कभी भी कहीं पर भी मुंडका मिलते ही सेक्स शुरू कर देते थे । अब नंदू का भयउ लगभग वैसा ही हाल था । पहले सेक्स के बाद इसे दूबरा करने की इच्छा बढ़ ही जाती है और साथ में मैं नंदू से पानी तारीफ सुन कर भी कझूश थी की मैं आज भी किसी तरुण लड़के को यौन उत्तेजित कर सकती हूँ ।

नंदू-मौसी जरा देखिये... ये अब ज्यादा देर और इंतजार नहीं कर सकता।

यह कहते हुए कि उसने मेरी चूत के हिस्से को अपने क्रॉच से दबाया, जिससे मुझे उसका सख्त लंड वहाँ महसूस हुआ।

मैं-हुह।

मैंने यह दिखाने की कोशिश की कि मैं अभी भी गुस्से में थी, लेकिन फिर अगले ही पल उसने जो किया मुझे उसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी। नंदू ने अचानक मुझे छोड़ दिया और मेरे शरीर से उतर गया और एक तेज कार्यवाही करते हुए उसने अपनी पायजामा की डोरी खोली और अपना गर्म लंड निकाल कर मेरे मुंह के ठीक सामने रख दिया। किसी भी विवाहित महिला की तरह, मैं उसके खड़े उपकरण को देखकर खुद का रोक नहीं स्की और सब कुछ भूलकर तुरंत उसे पकड़ लिया।

मैं-उल्स। उल्स। छ्ह एच। उम्म्म... ...

मैं हर तरह की सेक्सी आवाजें पैदा कर रही थी क्योंकि मैंने बिस्तर पर लेटे हुए उसके डिक को चूसा। नन्दू भी अपनी आँखें बंद करके खूब आनंद ले रहा था।

अचानक

"डिंग डाँग।" "डिंग डाँग।"

दरवाजे की घंटी बज रही थी। क्या मनोहर वापस आ गया था? लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि उसे कम से कम आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक का समय लेना चाहिए। या यह कोई और था? हम दोनों जल्दी से उठे और कपडे ठीक कर सामान्य लगने की कोशिश की। मैंने अपने पैरों और स्तनों को ढकने के लिए अपनी साड़ी नीचे खींची और नंदू अपना पायजामा बाँधने में व्यस्त था। नंदू झट से खिड़की के पास गया और बगल से देखने की कोशिश की कि दरवाजे पर कौन है।

नंदू-मौसी, मौसा-जी।

मैं-हे भगवान। क्या करें?

नंदू-मौसी घबराओ मत। मैं दरवाजा खोलता हूँ और तुम शौचालय जाओ और कपड़े पहनो।

मैं ठीक है नंदू ।

मैं लगभग अपने कमरे में भाग कर शौचालय के अंदर पहुँच गयी मेरे स्तन अभी भी मेरे ब्लाउज और ब्रा से बाहर थे। मैंने नंदू को दरवाजा खोलते सुना। मनोहर के पास जल्दी वापस आने के कुछ कारण थे और वह वास्तव में ये मेरा बहुत नजदीकी से हुआ संकीर्ण पलायन था जिसमे मैं बच गयी। शाम को नंदू चला गया और मनोहर के साथ स्टेशन के लिए ऑटो-रिक्शा में जाने से पहले मैंने उसे बहुत सामान्य रूप से गले लगाया (क्योंकि मेरे पति वहाँ मौजूद थे) । ये मेरी बहन के बेटे नंदू के साथ मेरे सेक्सी कारनामे का अंत था।

#### << नंदू के साथ सोनिआ भाबी की कहानी यहाँ समाप्त हुई >>

सोनिआ भाबी खाली छत पर देख रही थी। मैं उसकी मानसिक स्थिति को समझ सकती था और मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया। वह मुझ पर शुष्क रूप से मुस्कुराई और एक गहरी आह के साथ अपना पेय समाप्त किया। मैंने पुरुषो को बालकनी में हमारे पास आते हुए सुना और भाबी को सतर्क कर दिया। पल भर में मनोहर अंकल, राजेश और रितेश होटल के बरामदे में अपनी-अपनी शराब के गिलास साथ हमारे पास दिखाई दिए।



जारी रहेगी

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CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक-

अपडेट-3

सोनिआ भाभी रितेश के साथ


अनिल : तुम दोनों यहाँ इतने समय से क्या कर रहे हो? एह? तुमने किया है अभी तक? लेकिन बड़ा मजा आया यार! आप दोनों को भी मजा आता हमारे साथ

मैंने देखा कि अनिल की चाल काफी अस्थिर थी और मनोहर अंकल भी अस्थिर थे । ऐसा लग रहा था कि वे शराब के नशे में धुत थे। रितेश मनोहर अंकल को पकड़ रहा था ताकि गिर न जाए!

मैं: भगवान का शुक्र है कि आपने दारु खत्म कर दी है , चलो रात के खाने के लिए आदेश दें।

अनिल : ओ? ठीक है ।

मनोहर अंकल : ज़रूर ? रश्मि !

रितेश को छोड़कर कोई भी पुरुष सभ्य अवस्था में नहीं था। मैंने रूम सर्विस का आदेश दिया और हमने किसी तरह रात का खाना खाया क्योंकि मनोहर अंकल पूरी तरह से होश खो चुके थे? और अनिल भी काफी नशे में था।

अनिल: ओ-के-बाए ! सभी को शुभ रात्रि! मेरी प्यारी पत्नी कहाँ है?

अनिल बस अपने होश में नहीं था। उसने मुझे सबके सामने गले से लगा लिया और मेरे चेहरे पर अपना चेहरा ब्रश करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत अजीब लगा।

मैं: ओह! अनिल सम्भालो खुद को ! ठीक से व्यवहार करें!

लेकिन वह मुझे कसकर गले लगाता रहा और चलने ही वाला था। मुझे उस हालत मुझे इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई खासकर सोनिया भाबी और मनोहर अंकल के सामने कि मैं तुरंत शर्म से लाल हो गयी ।

मनोहर अंकल : वाह बीटा अनिल !मेरी बुलबुल कहां है?

यह कहते हुए कि अंकल भाबी की ओर मुड़े , लेकिन उस समय उनकी हालत इतनी दयनीय थी कि वह लड़खड़ा गया और लगभग टेबल से टकराकर गिर पड़ा। रितेश जो काफी करीब था उसे अंकल को संभाला नहीं तो अंकल को जरूर चोट लगती ।

सोनिया भाबी: बकवास बंद करो और सो जाओ।

रितेश: भाबी, आप जाकर बिस्तर तैयार करो। हम अंकल का ख्याल रखेंगे।

सोनिया भाबी: ठीक है। और अनिल , तुम भी अपना मुंह बंद रखो और सो जाओ। रश्मि , बस एक बार मेरे साथ आ जाओ ।

यह कहकर वह अपने कमरे की ओर चली गई और मैंने और अनिल ने भी उसका अनुसरण किया। जैसे ही हम चल रहे थे, राजेश ने नशे की हालत के कारण अपना पूरा शरीरका भार मुझ पर डाल दिया और मुझे गलियारे के माध्यम से उसका मार्गदर्शन करने में बहुत कठिनाई हुई और समय लगा। वह कुछ अजीब सी धुन गा रहा था और बीच-बीच में कठबोली बोल रहा था। जैसे ही हमने अपने कमरे में प्रवेश किया, वह बिस्तर पर जाने के लिए उत्सुक था। बिस्तर पर गिरते ही आमिल ने मुझे अपने पास खींच लिया और मैं उसके सीने पर गिर पड़ी । उसने मुझे गले लगाया और मेरे गोल चूतड़ों को सहलाने और निचोड़ने लगा। ईमानदारी से कहूं तो मैं पहले से ही भाबी के निजी जीवन की कहानियों को सुनकर काफी उत्तेजित थी और मैंने तुरंत उसकी हरकतों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया और आह भरने लगी । लेकिन दुर्भाग्य से अनिल काफी नशे में था और जल्द ही मेरे शरीर के कर्व्स पर उसके हाथ थिरकने लगे ।

मैं: ओहो! प्रिय आप क्या कर रहे हैं! मुझे ठीक से पकड़ो।

अनिल: ओह्ह! हां?.

वह मुझे चूमने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके मुंह से आने वाली गंध इतनी प्रतिकूल थी कि मैंने चुंबन से परहेज किया। उसमे मुझ पर जबरदस्ती करने की ताकत नहीं थी और उसके होंठ ढीले पड़ रहे थे और मुझे महसूस हो रहा था कि मुझ पर उसकी पकड़ भी फिसल रही है। हालाँकि मुझे अंदर से गर्मी लग रही थी और मैं उत्तेजित थी , लेकिन अनिल की हालत देखकर मैंने उसे सो जाने दिया। मैं बिस्तर से उठी और अपने कपड़े ठीक किए और शौचालय चला गयी । मैंने अपना चेहरा धोया, और नाइटी पहनी । अब मुझे एक बार भाबी के कमरे में जाने की जरूरत थी, क्योंकि उसने मुझे बुलाया था, इसलिए मैंने बस मेरी नाइटी के ऊपर हाउसकोट लपेट दिया ताकि मैं अच्छी दिखूं।

जैसे ही मैं सोनिया भाबी के कमरे में प्रवेश करने वाली थी, मुझे अंदर रितेश की आवाज सुनाई दी। मैं तुरंत उत्सुक हो गयी ।

रितेश: ठीक है, तो मैंने अपना कर्तव्य निभाया भाबी, अब तुम अपने खजाने की देखभाल करो! हा हा हा?

सोनिया भाबी: मेरा सोता हुआ मनोहर !

अब मैंने पर्दे के माध्यम से कमरे के अंदर ध्यान से देखा और मनोहर अंकल को बिस्तर पर लेटे हुए, खर्राटे लेते हुए देखा, और भाबी बिस्तर के एक तरफ खड़े रितेश से बात कर रही थी जबकि रितेश दूसरी तरफ खड़ा था।

सोनिया भाबी: वैसे, इन्होने कितने जाम लिए ?

रितेश: सिक्स प्लस भाबी!

सोनिया भाबी: हे भगवान!

रितेश: चाचा एक ड्रम हैं! हा हा हा?

सोनिया भाबी: हुह!

रितेश: ओह! एक बात भाबी, क्या मैं यहाँ जल्दी से नहा सकता हूँ? दरअसल मेरे शौचालय में नल?.

सोनिया भाबी: क्यों? समस्या क्या है?

रितेश: मुझे नहीं पता, लेकिन मैंने पाया कि ऊपर वाले शॉवर के नल से पानी नहीं निकल रहा है।

सोनिया भाबी: ओह! ठीक है, कोई बात नहीं! आप चाहें तो तुरंत नहाने जा सकते हैं।

रितेश: धन्यवाद भाबी। मुझे ज्यादा समय नहीं लगेगा।

सोनिया भाबी: मुझे भी बदलने की जरूरत है। आज बहुत गर्मी है, है ना?

रितेश: मुझे लगता है कि आपने जिस वोदका का सेवन किया है, उसकी गर्मी आपको महसूस हो रही होगी। हा हा?

मैं अभी भी परदे के पीछे दरवाजे के किनारे पर खड़ी थी , लेकिन तनाव में हो रहा था क्योंकि अगर कोई गुजरने वाला या हाउसकीपिंग स्टाफ मुझे देखता है, तो यह बहुत अजीब होगा। लेकिन साथ ही मैं तुरंत अंदर जाने के लिए भी उत्सुक नहीं थी , क्योंकि मैं रितेश और सुनीता भाबी के बीच की केमिस्ट्री को देखने के लिए उत्सुक थी । इसलिए मैंने अपने मौके का फायदा उठाया और ऐसे ही उनकी बातचीत सुनना जारी रखा।

सोनिया भाबी: रितेश क्या आप थोड़ी देर इंतजार करेंगे? तब मैं कपडे बदल पाऊँ ?

रितेश: ज़रूर भाबी।

मैंने देखा कि सुनीता भाबी कमरे के एक कोने में गई, अलमारी खोली, और एक नीली नाइटी ली और शौचालय के अंदर बदलने के लिए चली गई। किसी भी पुरुष, जो पहले से ही नशे में था, के लिए यह दृश्य अपने आप में विचारोत्तेजक था, एक परिपक्व महिला शौचालय में जाने के लिए हाथ में एक नाइटी के साथ जा आरही थी जबकि उसका पति खर्राटे ले रहा था। रितेश बिस्तर पर बैठ गया और सिगरेट जलाते हुए शौचालय के बंद दरवाजे को देख रहा था। फिर उसने एक पल के लिए उस दरवाजे की ओर देखा जहाँ मैं खड़ी थी । मेरे दिल की धड़कन मानो रुक गई। लेकिन शुक्र है कि उन्होंने वहां ध्यान केंद्रित नहीं किया और निश्चित रूप से मुझे भी पता नहीं चल सका क्योंकि मैं पर्दे के पीछे थी ।

फिर वह खड़ा हो गया और बहुत ही बेरहमी से अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से मोड़ लिया और बिस्तर पर लेट गया और मनोहर अंकल कुछ ही इंच की दूरी पर सो रहे थे। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था और मुझे अज्ञात उत्तेजना में पसीना आने लगा था। मैंने जल्दी से गलियारे की जाँच की; वहां कोई नहीं था।

सोनिया भाबी: रितेश, अब तुम वाशरूम में जा
सकते हो।

जारी रहेगी

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CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक-

अपडेट-3


सोनिआ भाभी रितेश के साथ


अनिल : तुम दोनों यहाँ इतने समय से क्या कर रहे हो? एह? तुमने किया है अभी तक? लेकिन बड़ा मजा आया यार! आप दोनों को भी मजा आता हमारे साथ

मैंने देखा कि अनिल की चाल काफी अस्थिर थी और मनोहर अंकल भी अस्थिर थे । ऐसा लग रहा था कि वे शराब के नशे में धुत थे। रितेश मनोहर अंकल को पकड़ रहा था ताकि गिर न जाए!

मैं: भगवान का शुक्र है कि आपने दारु खत्म कर दी है , चलो रात के खाने के लिए आदेश दें।

अनिल : ओ? ठीक है ।

मनोहर अंकल : ज़रूर ? रश्मि !

रितेश को छोड़कर कोई भी पुरुष सभ्य अवस्था में नहीं था। मैंने रूम सर्विस का आदेश दिया और हमने किसी तरह रात का खाना खाया क्योंकि मनोहर अंकल पूरी तरह से होश खो चुके थे? और अनिल भी काफी नशे में था।

अनिल: ओ-के-बाए ! सभी को शुभ रात्रि! मेरी प्यारी पत्नी कहाँ है?

अनिल बस अपने होश में नहीं था। उसने मुझे सबके सामने गले से लगा लिया और मेरे चेहरे पर अपना चेहरा ब्रश करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत अजीब लगा।

मैं: ओह! अनिल सम्भालो खुद को ! ठीक से व्यवहार करें!

लेकिन वह मुझे कसकर गले लगाता रहा और चलने ही वाला था। मुझे उस हालत मुझे इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई खासकर सोनिया भाबी और मनोहर अंकल के सामने कि मैं तुरंत शर्म से लाल हो गयी ।

मनोहर अंकल : वाह बीटा अनिल !मेरी बुलबुल कहां है?

यह कहते हुए कि अंकल भाबी की ओर मुड़े , लेकिन उस समय उनकी हालत इतनी दयनीय थी कि वह लड़खड़ा गया और लगभग टेबल से टकराकर गिर पड़ा। रितेश जो काफी करीब था उसे अंकल को संभाला नहीं तो अंकल को जरूर चोट लगती ।

सोनिया भाबी: बकवास बंद करो और सो जाओ।

रितेश: भाबी, आप जाकर बिस्तर तैयार करो। हम अंकल का ख्याल रखेंगे।

सोनिया भाबी: ठीक है। और अनिल , तुम भी अपना मुंह बंद रखो और सो जाओ। रश्मि , बस एक बार मेरे साथ आ जाओ ।

यह कहकर वह अपने कमरे की ओर चली गई और मैंने और अनिल ने भी उसका अनुसरण किया। जैसे ही हम चल रहे थे, राजेश ने नशे की हालत के कारण अपना पूरा शरीरका भार मुझ पर डाल दिया और मुझे गलियारे के माध्यम से उसका मार्गदर्शन करने में बहुत कठिनाई हुई और समय लगा। वह कुछ अजीब सी धुन गा रहा था और बीच-बीच में कठबोली बोल रहा था। जैसे ही हमने अपने कमरे में प्रवेश किया, वह बिस्तर पर जाने के लिए उत्सुक था। बिस्तर पर गिरते ही आमिल ने मुझे अपने पास खींच लिया और मैं उसके सीने पर गिर पड़ी । उसने मुझे गले लगाया और मेरे गोल चूतड़ों को सहलाने और निचोड़ने लगा। ईमानदारी से कहूं तो मैं पहले से ही भाबी के निजी जीवन की कहानियों को सुनकर काफी उत्तेजित थी और मैंने तुरंत उसकी हरकतों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया और आह भरने लगी । लेकिन दुर्भाग्य से अनिल काफी नशे में था और जल्द ही मेरे शरीर के कर्व्स पर उसके हाथ थिरकने लगे ।

मैं: ओहो! प्रिय आप क्या कर रहे हैं! मुझे ठीक से पकड़ो।

अनिल: ओह्ह! हां?.

वह मुझे चूमने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके मुंह से आने वाली गंध इतनी प्रतिकूल थी कि मैंने चुंबन से परहेज किया। उसमे मुझ पर जबरदस्ती करने की ताकत नहीं थी और उसके होंठ ढीले पड़ रहे थे और मुझे महसूस हो रहा था कि मुझ पर उसकी पकड़ भी फिसल रही है। हालाँकि मुझे अंदर से गर्मी लग रही थी और मैं उत्तेजित थी , लेकिन अनिल की हालत देखकर मैंने उसे सो जाने दिया। मैं बिस्तर से उठी और अपने कपड़े ठीक किए और शौचालय चला गयी । मैंने अपना चेहरा धोया, और नाइटी पहनी । अब मुझे एक बार भाबी के कमरे में जाने की जरूरत थी, क्योंकि उसने मुझे बुलाया था, इसलिए मैंने बस मेरी नाइटी के ऊपर हाउसकोट लपेट दिया ताकि मैं अच्छी दिखूं।

जैसे ही मैं सोनिया भाबी के कमरे में प्रवेश करने वाली थी, मुझे अंदर रितेश की आवाज सुनाई दी। मैं तुरंत उत्सुक हो गयी ।

रितेश: ठीक है, तो मैंने अपना कर्तव्य निभाया भाबी, अब तुम अपने खजाने की देखभाल करो! हा हा हा?

सोनिया भाबी: मेरा सोता हुआ मनोहर !

अब मैंने पर्दे के माध्यम से कमरे के अंदर ध्यान से देखा और मनोहर अंकल को बिस्तर पर लेटे हुए, खर्राटे लेते हुए देखा, और भाबी बिस्तर के एक तरफ खड़े रितेश से बात कर रही थी जबकि रितेश दूसरी तरफ खड़ा था।

सोनिया भाबी: वैसे, इन्होने कितने जाम लिए ?

रितेश: सिक्स प्लस भाबी!

सोनिया भाबी: हे भगवान!

रितेश: चाचा एक ड्रम हैं! हा हा हा?

सोनिया भाबी: हुह!

रितेश: ओह! एक बात भाबी, क्या मैं यहाँ जल्दी से नहा सकता हूँ? दरअसल मेरे शौचालय में नल?.

सोनिया भाबी: क्यों? समस्या क्या है?

रितेश: मुझे नहीं पता, लेकिन मैंने पाया कि ऊपर वाले शॉवर के नल से पानी नहीं निकल रहा है।

सोनिया भाबी: ओह! ठीक है, कोई बात नहीं! आप चाहें तो तुरंत नहाने जा सकते हैं।

रितेश: धन्यवाद भाबी। मुझे ज्यादा समय नहीं लगेगा।

सोनिया भाबी: मुझे भी बदलने की जरूरत है। आज बहुत गर्मी है, है ना?

रितेश: मुझे लगता है कि आपने जिस वोदका का सेवन किया है, उसकी गर्मी आपको महसूस हो रही होगी। हा हा?

मैं अभी भी परदे के पीछे दरवाजे के किनारे पर खड़ी थी , लेकिन तनाव में हो रहा था क्योंकि अगर कोई गुजरने वाला या हाउसकीपिंग स्टाफ मुझे देखता है, तो यह बहुत अजीब होगा। लेकिन साथ ही मैं तुरंत अंदर जाने के लिए भी उत्सुक नहीं थी , क्योंकि मैं रितेश और सुनीता भाबी के बीच की केमिस्ट्री को देखने के लिए उत्सुक थी । इसलिए मैंने अपने मौके का फायदा उठाया और ऐसे ही उनकी बातचीत सुनना जारी रखा।

सोनिया भाबी: रितेश क्या आप थोड़ी देर इंतजार करेंगे? तब मैं कपडे बदल पाऊँ ?

रितेश: ज़रूर भाबी।

मैंने देखा कि सुनीता भाबी कमरे के एक कोने में गई, अलमारी खोली, और एक नीली नाइटी ली और शौचालय के अंदर बदलने के लिए चली गई। किसी भी पुरुष, जो पहले से ही नशे में था, के लिए यह दृश्य अपने आप में विचारोत्तेजक था, एक परिपक्व महिला शौचालय में जाने के लिए हाथ में एक नाइटी के साथ जा आरही थी जबकि उसका पति खर्राटे ले रहा था। रितेश बिस्तर पर बैठ गया और सिगरेट जलाते हुए शौचालय के बंद दरवाजे को देख रहा था। फिर उसने एक पल के लिए उस दरवाजे की ओर देखा जहाँ मैं खड़ी थी । मेरे दिल की धड़कन मानो रुक गई। लेकिन शुक्र है कि उन्होंने वहां ध्यान केंद्रित नहीं किया और निश्चित रूप से मुझे भी पता नहीं चल सका क्योंकि मैं पर्दे के पीछे थी ।

फिर वह खड़ा हो गया और बहुत ही बेरहमी से अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से मोड़ लिया और बिस्तर पर लेट गया और मनोहर अंकल कुछ ही इंच की दूरी पर सो रहे थे। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था और मुझे अज्ञात उत्तेजना में पसीना आने लगा था। मैंने जल्दी से गलियारे की जाँच की; वहां कोई नहीं था।

सोनिया भाबी: रितेश, अब तुम वाशरूम में जा
सकते हो।

जारी रहेगी

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CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक-

अपडेट-4


कोई देख रहा है!

सोनिया भाभी शौचालय से बाहर आई। उसने अपनी रात में सोने की पोशाक पहनी हुई थी, लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि उन्होंने बिना आस्तीन की नाइटी पहनी हुई थी, लेकिन बिना ओवर कोट के! इन नाइटीज़ को बाहरी लोगों के सामने नहीं पहना जा सकता क्योंकि पूरे बाजू के साथ-साथ ऊपरी स्तन क्षेत्र भी खुला रहता है। सोनिआ भाबी को बस इतना ही पहन कर सामने से बाहर आते देख मैं हैरान रह गयी । मुझे लगा भाबी पर नशे का असर जरूर पड़ा होगा। वह बिस्तर के पास आई और रोशनी के नीचे खड़ी हो गई, मैं उसकी ब्रा और पैंटी लाइनों को भी उसकी नाइटी के पतले नीले कपड़े के माध्यम से स्पष्ट रूप से देख सकती थी। मैंने देखा कि रितेश भी भाबी को लेटे-लेटे देख रहा था।

सोनिया भाबी: क्या हुआ? अपने स्नान के लिए जाओ?

रितेश: आह! मेरा मन यही सोने का कर रहा है?

सुनीता भाबी: बढ़िया! तो आप यहाँ अपने चाचा के साथ सो जाओ ताकि अगर आप बीच में उठते हैं, तो बस अपनी बोतल फिर से खोल पाएंगे? हुह! तब मैं तुम्हारे कमरे में चैन की नींद सो सकूँगी!

रितेश: हा-हा हा? और अगर आधी रात में चाचा मुझे यह सोचकर गले लगाने लगे कि यह तुम हो, तो मेरा क्या होगा? हा-हा हा?

सुनीता भाबी: ओह्ह? बहुत अजीब बात है! बस चुप रहो और नहाने के लिए जाओ? चलो! चलो! । उठ जाओ!

वह अब बिस्तर के पास गई और रितेश को ऊपर खींच का खड़ा करने की कोशिश की। सुनीता भाबी जैसे-जैसे झुकी वह अपना काफी सेक्सी अंदाज़ पेश कर रही थी। उसकेस्तनों को दरार और स्तन उजागर हो गए और रितेश इतने करीब से इसका पूरा आनंद ले रहा था, लेकिन अगले ही पल उसने जो किया तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया!

भाबी उसे अपने हाथ से खींच रही थी और रितेश अपनी लेटी हुई स्थिति से थोड़ा ऊपर उठा और फिर एक झटका दिया और भाबी अपना संतुलन नहीं रख सकी और उसके ऊपर आ गई!

सुनीता भाबी: इ उईईई? ।

उसके शरीर पर गिरते ही भाभी चिल्लायी। निस्संदेह, यह दृश्य यादगार था। मनोहर अंकल सो रहे थे और ठीक उनके बगल में उनकी पत्नी उसी पलंग पर दूसरे पुरुष के ऊपर पड़ी हुई थी!

सामान्य परिस्थितियों में निश्चित रूप से भाबी ने रितेश के शरीर से तुरंत खुद को अलग कर लिया होता, लेकिन चूंकि दोनों नशे में थे, इसलिए घटनाओं का क्रम थोड़ा अलग था। मैंने देखा कि रितेश काफी स्मार्ट था और उसने दोनों हाथों से भाबी को जल्दी से गले लगा लिया और स्वाभाविक रूप से भाबी इस सेक्सी मुद्रा में अपने दोनों स्तनों को सीधे रितेश की सपाट छाती पर दबाते हुए तुरंत उत्तेजित हो गई।

रितेश: ऊई माँ! कोई मुझे बचाओ!

सोनिआ भाबी: तुम? तुम शरारती क्या मैं इतनी वजनी हूँ?

रितेश: अंकल कृपया उठो औरअपनी बुलबुल की सम्भालो? ।

सुनीता भाबी: बदमाश!

रितेश: आपको सलाम अंकल! सलाम! आप यह भार रोज उठा रहे हैं? हा-हा हा?

वे जोर से हँसे और मैंने देखा कि सुनीता भाबी उसके ऊपर पड़ी रही! उसने कभी भी उठने की कोशिश नहीं की और उसके स्तन उसके सीने पर और रितेश के टांगो ने भाभी की मांसल जांघों को कसकर दबाया हुआ था। मुझे खुद ही उत्तेजना जनित गर्मी लगने लगी और ये सीन देखकर ही पसीना आ गया!

सोनिआ भाबी: आई? रितेश? मुझे उठना है! मैं इस तरह नहीं रह सकती!

रितेश: क्यों? समस्या क्या है?

सोनिआ भाबी: क्या मतलब?

रितेश: अरे हाँ! कोई जरूर आपको देख रहा है!

सुनीता भाबी: कौन? मेरा मतलब है कौन?

भाबी काफी हैरान थी, उसकी आवाज में भी हैरानी झलकती थी और मैं भी। क्या रितेश ने मुझे पर्दे के पीछे देख लिया है?

रितेश: अरे! अंकल यार! आपका पूज्य पति-देव! वह अब आपको अपने सपनों में देख रहे होंगे? हा-हा हा! हो हो?

सुनीता भाबी: तुम भी न! छोड़ो मुझे और बस उठ जाओ! उठो मैं कहती हूँ।

आखिर में भाबी ने रितेश से खुद को अलग कर लिया और उठकर रितेश का मज़ाक उड़ा रही थी और वह भी बिस्तर से उठकर शौचालय की ओर भागा। सुनीता भाबी इतनी मोटी फिगर के साथ रितेश का पीछा करते हुए उसके पीछे भागी और उस नीली नाइटी में अविश्वसनीय रूप से सेक्सी लग रही थीं।

मैंने कुछ देर इंतजार किया और उसके बाद कमरे में प्रवेश करने का फैसला किया।

ठीक उस समय मुझे से देखकर भाबी थोड़ा अचंभित थी, लेकिन बहुत जल्दी सामान्य हो गयी और मुझे उसने 600 / -रुपये सौंप दिए और बोली कि ये पैसे उन पर मेरा उधार बकाया था। वह मुझे मेरे कमरे में जल्दी से वापस भेजने के लिए काफी ज्यादा अधिक उत्सुक थी और मैं भी रितेश के साथ उनकी छोटी-सी शरारती दौड़ में खलल नहीं डालना चाहती थी। मैंने उसे शुभ रात्रि बोली और अपने कमरे की तरफ चल दी। हालाँकि मैंने गलियारे से अपने कमरे की ओर कुछ कदम उठाए, ताकि सुनीता भाबी को पूरी तरह से यकीन हो जाए कि मैं दूर हूँ, फिर मैं वापस मुड़ी और एक मिनट में फिर से उसके कमरे की तरफ लौट आयी।

मेरा भाग्य था कि मैं आगे का भी दृश्य देखू!

दरवाजा अभी भी खुला था, हालांकि पर्दा ठीक कर दिया गया था। मैं जो कुछ भी कर रही थी उसमें से मैं एक अजीब उत्तेजना का एहसास था और मैंने फिर से झाँकने से पहले एक पल के लिए इंतजार किया। इस जोखिम भरे काम को करते हुए मुझे अपने दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। मैंने, एक बार फिर। परदे के ओट से अंदर झाँका।

सोनिआ भाबी: क्या आप का स्नान हो गया हैं?

रितेश: हाँ भाबी। एक सेकंड में बाहर आ रहा हूँ।

अगले ही पल मैंने रितेश थोडा-सा कपड़ा पहन कर शौचालय से बाहर आते देखा! मैंने देखा कि सुनीता भाबी भी उन्हें उस पोशाक एक टक देख ही थी। रितेश ने ऐसा किया कि वह भाबी को शायद सबसे अच्छे तरीके से अपना बदन दिखाना चाहता था। उसके अंडरवियर के चमकीले लाल रंग ने चीजों को और अधिक आकर्षक बना दिया क्योंकि उसके छोटे से अंडरवियर में से उसका सीधा उपकरण अपना सिर ऊपर करके खड़ा हुआ साफ़ नजर आ रहा था! स्वाभाविक रूप से सोनिया भाबी इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकीं और वह भी इसकी ओर आकर्षित हो गईं। वास्तव में, मैं भी ध्यान से उसके अंडरवियर के अंदर उसकी कड़ी छड़ का उभार देख रही थी।

रितेश: मुझे आशा है कि आपको बुरा नहीं लगेगा भाबी? मैं इस तरह बाहर आ गया हूँ? लेकिन मेरे पास कोई और उपाय नहीं है! मेरी पैंट बाल्टी में गिर कर गीली हो गयी है।

सुनीता भाबी: नहीं, नहीं? यह? ठीक है? ऐसी स्थिति में तुम और क्या कर सकते हो?

मैंने देखा की भाबी की लाली भरी आँखें उसके कच्छे के इर्द-गिर्द घूम रही थीं और साथ में वह जल्दी से अपनी ब्रा एडजस्ट कर रही थी वह रितेश के खड़े हुए लिंग को उसके कच्छे के अंदर देखकर जोर से सांस ले रही थी।

रितेश: मैंने रश्मि की आवाज सुनी? क्या वह यहाँ आई थी?

सुनीता भाबी: हाँ? मेरा मतलब है हाँ, कुछ क्षण पहले, मुझे उसके कुछ पैसे देने थे।

रितेश: ओह! तो बेहतर होगा कि मैं चला जाऊँ, अगर वह वापस आ गयी तो बहुत अजीब लगेगा? खासकर जब मैं यहाँ मैं इस तरह खड़ा हूँ।

सुनीता भाबी: नहीं, नहीं। वह चली गई है। वह नहीं आएगी अब? ।

सुनीता भाबी अपनी बात पूरी नहीं कर पाईं क्योंकि नींद में मनोहर अंकल ने सादे पलटी और एक तरफ से दूसरी तरफ घूम गए। रितेश और भाबी जैसे बिस्तर पर चाचा की हरकत देखकर ठिठक गए और जाहिर तौर पर वे डर गए। भाबी ने बिना शोर मचाए रितेश को तुरंत जाने का इशारा किया और रितेश ने भी अपने होठों पर उंगली रखकर दरवाजे की ओर दबे पाँव बढ़ गया। मनोहर अंकल अपनी मूल स्थिति में वापस आ गए थे और फिर से खर्राटे लेने लगे।

रितेश: शुभ रात्रि भाबी। रितेश लगभग फुसफुसाया।

सुनीता भाबी: ईई? एक मिनट।

भाबी लगातार अपने सोते हुए पति पर नजर रखने के बावजूद रितेश की ओर बढ़ी। मुझे यह भी एहसास हुआ कि मुझे अब चलना चाहिए।

लेकिन तभी?

सुनीता भाबी रितेश के बहुत करीब आ गई और मैं चकित रह गयी जब उसने सीधे उसके कड़े लंड को पकड़ लिया और उसके कानों में कुछ फुसफुसायी। भाबी की इस बेहद बोल्ड अदा से मैं दंग रह गयी। जैसा कि रितेश के हाव-भाव से जाहिर हो रहा था, रितेश ने भी शायद इसकी बिलकुल उम्मीद नहीं की थी और एक पल के लिए वह भी मानो विपन्न-सा देखा। जब वह ठीक हुआ तो उसने भाबी को पकड़ने की कोशिश की, वह उसे दरवाजे की ओर धकेलने लगी। मुझे घटनास्थल से जाना पड़ा नहीं तो अब मैं जरूर उन्हें देखती हुई पकड़ी जाती क्योंकि भाबी के धक्का देने के कारण रितेश दरवाजे के बहुत करीब था।

मैं तुरंत मौके से गायब हो गयी और जल्दी से अपने कमरे में आ गयी और दरवाजा बंद कर लिया। मैं अब भी सोच रही थी कि क्या रितेश इसके बाद सोने के लिए अपने कमरे में जाने को तैयार हो गया? या उस कमरे में ही कुछ और एक्शन हुआ या सुनीता भाबी रितेश के साथ उनके कमरे में गई! मुझमें दोबारा उनके कमरों में झाँकने की हिम्मत नहीं हुई और इसलिए मेरे लिए ये सस्पेंस रह गया।

राजेश गहरी नींद सो रहा था। मुझे सामान्य होने में कुछ समय लगा क्योंकि मैं यह ताक झाँक करते हुए हांफ गयी थी! ताक झाँक? और ईमानदारी से अभी मैंने जो भी आखिरी बार अपनी आँखों से देखा था मैं उस पर विश्वास करने असमर्थ थी । मैंने अपने आंतरिक वस्त्रों की निकला और बिस्तर पर सोने के लिए चली गयी और मैं सोने से पहले बहुत देर तक रितेश और भाबी के बारे में सोचती रही ।

अगली सुबह स्वाभाविक रूप से हम सभी देर से उठे और निश्चित रूप से नाश्ते की मेज पर पिछली रात से बारे में बात करते हुए और हंसी के साथ बाते हुई। मनोहर अंकल और राजेश एक बार फिर बाज़ार जाने को आतुर थे क्योंकि अगली सुबह हमे वहाँ से जाना था। सोनिया भाबी और मैं, रितेश के साथ बीच पर जाने के लिए तैयार हुए। आज हमने तय किया कि हम सूखे कपड़ों का एक सेट ले जाएंगे ताकि नहाने के बाद हमें अपने गीले कपड़ों में ज्यादा देर न रहना पड़े। कल हमने देखा था कि समुद्र तट पर चेंजिंग रूम थे।

जारी रहेगी



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