मैं कोशिश करुँगी की कम से कम आठ दस रस्मो के गाने दे सकूँ, बन्ना बन्नी और छेड़ छाड के गांव के अलावा, ऐसे गाने जो सुनने को कम ही मिलते हैं, सांझ जगाने का, भोर जगाने का, चुमावन और हल्दी, लावा भूजना, माटी पूजने ऐसी रस्मों के गानेIn geeto ka jabab nahi
गानो की यह मस्ती आगे भी जारी रहेगी और अगले दो भाग में तो गाने, नाच और गाँव की शादियों में जो महिलायें तरह तरह के रोल करती हैं, कभी चोर पुलिस तो कभी पंडित तो बरात जाने के बाद, शादी सुहागरात से लेकर बच्चा जनने तक सब कुछThreesome likhne main aap mahir hai.
Nanad bhojai ke sath(issi main).maa beti ke sath(manju or Geeta.).do dosto ke sath(is kahani ke pehle part main sayad yaad Nahi achhe se.)
Bus do behne ka nahi hua hai abhi tak.do behne hai bhi Rampur wali bhabhi or unki behena.sali hi lagegi.
Ek gadraya phul, kaam saastra main mahir.wahi ek kamsin kali,bus kaam saastra ki jankari.
Maza aa jaiga.
Baki aap to scene aisha create kar deti hai ki.
Agle post ka besabri se intjar rahega.![]()
आप के कमेंट पढ़ के बस मन करता है पढ़ती रहूं, पढ़ती रहूं, लेकिन पढ़ने के पहले चोरी करती हूँ, हर पोस्ट में आप जो पिक्स पोस्ट करती हैं , देखने के पहले उन्हें सेव कर लेती हूँ और कई बार कहानी के कैरेकटर भी उन्ही पिक्स को देखकर गढ़ती हूँ,
भौजाई तो भौजाईवाह अभी तो इमरतिया का खेल ख़तम हुआ है. और बुची आ गई. इमरतिया ने भी सूरजवा को अच्छे से समझा दिया. अब तो वो मानेगा भी. क्यों की एक तो उसकी महतारी ने अपने बेटे की जिम्मेदारी उसकी भौजी मतलब इमरतिया को शॉप दी. भौजी का हुकम महतारी का हुकम समझो. दूसरा भौजी से ज्यादा तो इमरतिया गुरु है. और बुची के पीछे तो सारी भौजी पड़ी है. उनके अमेज़िंग ताने भरे मज़ाक. माझा आ गया. और उसके भैया का सिराह फिर से खीर बोलके. जबरदस्त....
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अगले दो भाग भी गानो पर ही रहेंगे और गाने के साथ नाच, और तरह तरह के नाटक करने की सीन, हम गाँव वालियां थोड़े में ही खुश हो जाती हैं, खुशियां बाँट लेती हैंशानदार अपडेट कोमल जी
अबतक के सभी अपडेट पर भारी और कई दिनों बाद देशज गीतों का आना, मजा आ गया।
और पात्रों के नामों का तो कहना ही क्या !!! पता नहीं कहां - कहां से ढूंढ कर लाती हो एकदम अपने से लगते हैं, जाने पहचाने से।
nostalgic फीलिंग हो रही है, बुलऊंओं की यादें ताजा हो गई।
जल्दी से अपडेट दीजिए।
सादर
आप आती हैं थ्रेड में बहार आ जाती है।मै तो बहोत पहले से नांदिया के साथ छिनार शब्द जोड़ती आई हु. ऐसे ही थोड़ी. यह नांदिया पैदा होने से पहले ही छिनारपन का टाइटल लेकर आती है. क्या इरोटिक सीन क्रिएट किया है बाकि. नांदिया छिनार को सूरजवा उसके भैया की गोद मे बिठा दिया. और भरतपुर और मुँह का मिलन भी करवा दिया. गचा लगवाने तेल भी चुपड़वा दिया. पर एन्ड वक्त पर मंजू भाभी एंड पार्टी आ गई. अमेज़िंग अपडेट.
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Haan domkach main kuch aisha hi hota haiगानो की यह मस्ती आगे भी जारी रहेगी और अगले दो भाग में तो गाने, नाच और गाँव की शादियों में जो महिलायें तरह तरह के रोल करती हैं, कभी चोर पुलिस तो कभी पंडित तो बरात जाने के बाद, शादी सुहागरात से लेकर बच्चा जनने तक सब कुछ
यही तो मानव जाती को चलाता है तो इसमें गलत और बुरा क्या और जो जननी है, जिसका जन्म ही सृष्टि चक्र को चलाने के लिए हुआ उस काम में लाज क्या, संकोच क्या और जब सब औरतें हों, लड़कियां हो तो और खुल के,
Saitan g aap krupa barsate rahiye.भौजाई तो भौजाई
देवर की भी ननद की भी
तो इमरतिया एक तीर से दो शिकार खेल रही है, देवर की भी आग जगा रही है और ननद की भी और जब सूरजु अपने बुआ की लड़की पे चढ़ जाएंगे, वो भी दर्जा नौ वाली, कच्ची कोरी, जो हर राखी में दस कोस चल के उन्हें राखी बाँधने आती थी तो फिर पड़ोस की, गाँव की, बाइस पुरवा की किसी भी पुरवा वाली की टांग उठाने के पहले उन्हें जरा भी झिझक नहीं होगी,
और बुच्चिया भी,.... कित्ते लौंडे उसकी उठती हुयी कच्ची अमिया कुतरने के लिए बेताब हैं,
सबसे कुतरवायेगी
आप आती हैं , आपके कमेंट आते हैं मेरी कहानी की गति बढ़ जाती है ,
सातवीं पोस्ट कल मैंने इस महीने की पोस्ट की और और आप से ज्यादा कौन जानेगा पोस्ट की साइज के बारे में जो एक एक आखर संजो संजो के पढ़े, उसकी तारीफ़ करे
आपके कमेंट पढ़ के मेहनत वसूल हो जाती है
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जी आपने एकदम सही कहा, ज्यादातर जगहों पर डोमकच ही कहते हैं, पश्चिमी उत्तरप्रदेश और हरियाणा में शायद खोइया और कहीं रतजगा, नकटा, लेकिन जो आपने कहा वही होता हैHaan domkach main kuch aisha hi hota hai