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Jakash update mitrचैप्टर -1, ठाकुर कि शादी, अपडेट -10
गांव विषरूप, ठाकुर कि हवेली मे
भूरी काकी मदहोशी,उत्तेजना, डरी हुई अपने स्तन और चुत पे हाथ रखे तीन मर्दो के बीच खड़ी थी,
सभी भावनाये मिक्स हो रही थी, उत्तेजना से चुत टपक रही थी, निप्पल रगड़े जाने कि वजह से खड़े थे. और अब क्या होगा, बरसो कि इज़्ज़त मिट्टी मे मिल जायगी ये सोच के दिल धाड़ धाड़ कर धड़क रहा था सीना फट जाने पे आमादा था.
बिल्लू और रामु भूरी को अपने सामने नंगा खड़ा देख डर जाते है कि अब क्या होगा कही ठाकुर साहेब को ना कह दे,
भूरी :- ये क्या कर रहे हो तुम लोग? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? मुझे काकी बोलते हो तुम लोग.
जैसे तैसे खुद को संभाले अपनी इज़्ज़त बचाने के संघर्ष मे बोल गई भूरी.
कालू अभी तक शांत खड़ा था और आराम से दारू चूसक रह था, वही बिल्लू और रामु के चेहरे पे हवाईया उडी हुई थी.
कालू:- काकी आपको जो भी काकी बोलता है वो नीरा बेवकूफ है, कपडे के बाहर से कभी आपको देखने का मौका ही नहीं मिला.लेकिन अंदर से तो आप किसी जवान लड़की को भी मात दे दे...
भूरी कालू के मुँह से ऐसी तारीफ सुन सिसकरती है जो कि बहुत धीमी थी उसने अभी तक अपना पेटीकोट उठाने कि कोई जहामात नहीं उठाई थी
बिल्लू, कालू कि ऐसी हिम्मत देख के दंग रह जाता है, और थोड़ा हौसला रख के बोल देता है
" वैसे काकी आप इतनी रात गये अँधेरी तूफानी रात मे अर्धनग्न अवस्था मे क्या कर रही थी "
जिस बात का डर था वही हुआ भूरी बिल्लू कि बात सुन के शर्म से मरी जाती है उत्तेजना दबने लगती है.
कोई जवाब नहीं था...
भूरी :- वो वो .... मै मै..... वो मै.. हाँ... मै
कालू :- रहने दो काकी आपके पास कोई जवाब नहीं है शायद आप इस चीज कि तलाश मे थी?
ऐसा बोल के कालू अपनी धोती खोल फेंकता है. उसका नाग कि तरह फनफ़नाता लंड भूरी कि आँखों के सामने झलक पड़ता है.
भूरी पुरे 30 साल बाद लंड देख रही थी, वो भी बड़ा भारी मोटा 8इंच का लंड.
वो इसी के लिए तो तरसती थी यही तो वो खजाना था जिसे पा लेने कि चाह लिए ही लोकी तोड़ने चली थी.
भूरी कि चुत रुपी सुखी नदी मे बरसाती मौसम मे बाढ़ आ गई थी....
वो कुछ भी बोलने सुनने कि शक्ति खो चुकी थी.
कालू कि हिम्मत देख रामु बिल्लू दंग रह जाते है, वो भूरी कि तरफ देखते है तो पाते है कि भूरी एकटक कालू के झुलते इठलाते लंड को घूरे जा रही थी, उसकी छाती मारे हवस के ऊपर नीचे हो रही थी.
भूरी कि उत्तेजना और इज़्ज़त मे संघर्ष का अंत हो चूका था, इज़्ज़त शर्म पे हवस, कामवासना कि विजय हुई थी.
कालू :- क्यों काकी कैसा लगा? हम भी प्यासे है काकी
ऐसा बोल के कालू भूरी के नजदीक पहुंच के ठीक सामने खड़ा हो जाता है.
इतना पास कि जिस हाथ से भूरी ने चुत छुपा रखी थी उस हाथ पे कालू का लंड टकरा रहा था, जैसे मकान का मालिक अपने घर मे घुसने के लिए दरवाज़ा पिट रहा हो...
कालू कि सांसे दारू भरी सांसे सीधा भूरी के नाथूनो पे हमला कर रही थी.
भूरी इतना कुछ एक साथ होने से सिहर जाती है उसके हाथ पे लंड कि चुभन महसूस ही रही थी लगता था जैसे हथेली को पिघला के चुत मे घुस जायेगा.
शराब भरी सांसे भूरी को मदहोशी के कुएँ मे धकेल रही थी.
वो ये सब सहन नहीं कर सकती थी... आअह्ह्ह.... करती गर्म सांस छोड़ के आंखे बंद कर लेती है.
गर्म साँसो का भभका कालू अपने काले भद्दे होंठो पे पड़ते ही उसका लंड जोर जोर से चुत का दरवाजा खटखटाने लगता है.
बिल्लू रामु बैठे बैठे ये दुर्लभ दृश्य देख रहे थे उनके लोडे वापस बगावत पे उतर आये थे.
दोनों ही एक साथ खड़े हो जाते है और अपनी धोती निकाल फेंकते है.. अब हमाम मे सब नंगे थे.
भूरी अभी भी आंखे बंद किये आने वाले पल कि प्रतीक्षा कर रही थी.
तभी कोई गीली लपलापती चीज उसे अपने सूखे होंठो पे महुसूस होती है वो अपनी आंखे खोल देखती है कि कालू अपनी जबान से उसकी फड़फड़ाते होंठो को चाट रहा था, जैसे कोई सांप अपने शिकार से खेलना चाहता हो.
भूरीअब शर्म और इज़्ज़त का टोकरा पूरी तरह उतार फेंक देना चाहती थी, जिस चीज का 30 साल से इंतज़ार था वो आज कर लेना चाहती थी उसका बदन तो कबका शर्म छोड़ चूका था.
कालू धीरे धीरे भूरी के होंठ चाट रहा था उसे कामुक रस पिने कि अनुभूति हो रही थी, कालू थोड़ा पीछे हटता है तो भूरी कि नजर कालू के पीछे खड़े बिल्लू और रामु पे पड़ती है दोनों ही पूर्णतया नंगे खड़े थे अपना मोटा काला लंड पकड़े, भूरी को बता देना चाहते थे कि हम किसी से कम नहीं.
ऐसा विहंगम नजारा देख के भूरी कि चुत छल छला जाती है उसे महुसूस होता है कि हज़ारो चीटिया उसकी चुत मे चल रही हो.
अब हवस ऐसी सवार हुई कि भूरी कुछ भी कर सकती थी उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी कि बदन जलने लगा था, बिल्लू रामु भी आगे बढ़ के भूरी का हाथ पकड़ उसके स्तन से हटा देते है और अपने लंड पे रख देते है.
एक बार को तो भूरी हाथ पीछे खींच लेती है परन्तु वो भी ये मौका नहीं गवाना चाहती थी वो अब अपने होश मे नहीं थी स्वतः ही उसके हाथ बिल्लू रामु के लंड पे चले जाते है....
आअह्ह्हम... कितना गरम अहसास था ऐसा सुकून कभी नहीं मिला उत्तेजना से प्रेरित हो कर दोनों हाथ दोनों के लंड पे आगे पीछे होने लगते है
रामु बिल्लू भी मदहोशी मे अपने हाथ भूरी के स्तन पे रख सहलाने लगते है.
भूरी कि तो हालात ही ख़राब थी दोनों उसके निप्पल को नोच रहे थे कभी पुरे स्तन को जोर से दबा देते थे.
भूरी के मुँह से रह रह के सिसकारी निकले जा रही थी....
इतने मे कालू अपने घुटने के बल बैठ जाता है और सीधा फूली हुई चुत के सामनेबैठा घूरे जा रहा था.
अब कालू अपनी जीभ निकाल के भूरी कि साफ चिकनी मादकता से भीगी चुत पे रख देता है.... आअह्ह्ह..... भूरी सिहर उठती है पसीना छूट पड़ता है दोनों हाथ से रामु बिल्लू के लंड जोर से कस लेती है सिसकारी के साथ ही तीनो नीचे कालू कि तरफ देखते है, कालू लपा लप जीभ से चुत चाटे जा रहा था उसकी पूरी कोशिश थी कि वो लकीर के अंदर जीभ घुसा सके परन्तु भूरी के खड़े होने के कारण ऐसा संभव नहीं था.
रामु बिल्लू चुत चटाई देख कर उत्तेजना मे जोर जोर से भूरी के स्तन को मसलने लगते है
हमला तीन तरफा था भूरी अपना सर दिवार के सहारे पटक लेती है.
उसकी चुत कालू के थूक से भर गई थी, कालू लगातार जीभ को लकीर मे चलाये जा रहा था मानो कोई सुखी नदी है जिसे खोद खोद के पानी निकाल देगा उसकी मेहनत रंग भी ला रही थी भूरी कि चुत लबालब कामरस से भर गई थी नदी कभी भी अपना बांध तोड़ के बह सकती थी....
थोड़ी खुदाई और करनी थी कालू को...
इतने मे बिल्लू अपना होंठ भूरी के निप्पल पे रख उसे दाँत से पकड़ के खींच देता है, नीचे लगातर होती चुत चटाई से भूरी बेहाल थी अब नहीं अब नहीं...... कालऊऊऊ.....
आह्हःम्म.. आआहहहह.... मै गई
इसी के साथ सब्र का बांध टूट पड़ा भूरी कि छोटी सी फूली हुई चुत से पानी छलछला उठा, ऐसे भरभरा के झड़ी जैसे उसकी आत्मा ही चुत से बाहर निकल गई हो.
कालू का पूरा मुँह चिपचिपे पानी से गिला हो गया जो कि उसके लिए अमृत सामान था वो अभी भी चुत चाटे जा रहा था पूरी नदी का पानी एक बार मे ही पी जाना चाहता था...
आअह्ह्ह..... कर के एक धार और सीधा कालू के मुँह मे मार देती है और वही बिल्लू रामु का लंड पकड़े पकड़े ही झूल जाती है उसके प्राण चुत के रास्ते निकल गये प्रतीत होते थे.
ये स्सखलन 30 सालो से जमा था भूरी कि चुत मे.
तेज़ तेज़ सांस लेती भूरी निढाल पड़ी थी..
बिल्लू :- अबे कालू कही मर तो नहीं गई ये.
कालू :- साले उल्लू का पट्ठा कभी लड़की नहीं चोदी क्या, काकी जैसी कामुक औरत ने आज अपना अमृत बहाया है.
ऐसी औरते मर्दो को मारा करती है मरा नहीं करती.
भूरी कालू के मुँह से अपनी कामुकता कि तारीफ सुन मुस्कुरा पड़ती है.
वो भी अब इस खेल मे शामिल हो जाना चाहती थी.
भूरी :- सही कहाँ कालू तुमने ये कामरस मे पिछले 30 सालो से ले के घूम रही हूँ, कभी शर्म से बोल ही ना सकी.
लेकिन मुझे पता नहीं था कि बेशर्मी मे ज्यादा मजा है.
ऐसा बोल के भूरी पास खड़े बिल्लू के लंड को पकड़ के सहलाने लगती है.... बिल्लू कराह उठता है क्या कोमल हाथ है, रामु भी अपना नंगा लंड भूरी के मुँह के नजदीक ले आता है. भूरी झड़ने के बाद भी गरम थी रामु के लंड से आती खुशबू उसे वापस से मदहोश करने लगी.
भूरी अपना मुँह मे रामु का मोटा लंड भर लेती है, ऐसा करने से भूरी थोड़ा आगे को झुक जाती है जिस कारण उसकी गांड ऊपर को उठ जाती है
तीनो पहली बार भूरी कि गांड देख रहे थे, क्या गांड थी बिल्कुल गोरी चिकनी फैली हुई.
गांड के बीच रास्ते पे एक महीन सा छेद था
जो गांड कि खूबसूरती मे चार चाँद लगा रहा था. तीनो ही ऐसे दुर्लभ दर्शन पा के हैरान रह जाते है.
रामु :- वाह काकी क्या गांड है आपकी इतनी गोरी गांड हमने कभी नहीं देखि.
भूरी सिर्फ मुस्कुरा देती है अपनी तारीफ पे.. शर्माहाट उत्तेजना मे गांड का छेद खुल बंद होने लगता है.
ये देख के तीनो घनघना जाते है, कालू से अब सब्र नहीं होता वो तुरंत भूरी के पीछे जा के गांड के पास बैठ जाता है और किसी भूखे कुत्ते कि तरह जीभ लप लपाता भूरी कि गांड पे टूट पड़ता है.
लप लप कर के चाटने लगता है, उसके अंदर का जानवर बाहर आ रहा था.
भूति इस आक्रमण से चौक जाती है और आवेश मे आ के बिल्लू के लंड को जोर से मुँह मे पकडे दबा देती है...
बिल्लू :-आहहहह..... काकी मार दिया.
भूरी जो इतने सालो बाद मर्दो के स्पर्श का आनंद ले रही थी उसके अंदर कि कुतिया जाग चुकी थी वो सिर्फ चुदना चाहती थी, पीछे लगातार कालू गांड मे मुँह मारे जा रहा था.
भूरी अतिउत्तेजना मे आ के रामु का लंड भी मुँह के करीब ले आती है वो साथ मे दोनों लंडो को मुँह मे ठूस लेने कि कोशिश करती है.
ऐसा रंडिपन, ऐसी कामुकता देख के तीनो हक्के बक्के थे. इतनी उम्र मे भी ऐसी गर्मी... लपालप दोनों के लंड को भूरी चाटे जा रही थी पीछे अपनी गांड हिला हिला के कालू के मुँह पे मार रही थी.
वासना पूरी तरह हावी हो चुकी थी, कालू कभी जीभ से चाटता तो कभी अपने होंठो मे भर के छेद को अंदर ही अपनी जबान से चुभलाता,
कालू के ऐसे कामुक अंदाज़ से भूरी घनघना जाती है फिर भी नहीं बोल पाती कि मुझे चोदो जबकि तीनो सिर्फ उसके बदन से खेल रहे थे.
उन्हें इसमें ही आनंद आ रहा था, बहुत दिन बाद कोई औरत मिली थी वो भी भूरी जैसी कामुक हवस से भरी औरत पुरे आनंद से खेलना था सम्भोग का पूरा आनंद उठाना था.
भूरी कि गांड थूक से बिल्कुल गीली हो चुकी थी कालू का थूक गांड कि लकीर से रिसता हुआ नीचे झरने बहती चुत से जा के मिलन कर रहा था.... कामरस और थूक दोनों नीचे टपक टपक कर जाँघ के रास्ते रिस रहे थे.
भूरी से अब रहा नहीं जाता वो अपना एक हाथ पीछे ले जाती है और चुत को बेरहमी से मसलाने लगति है, उसे अपनी चुत से दुश्मनी थी वो उसे नोच के निकाल फेंक देना चाहती थी. घुटी घुटी सी सिसकारी उसके मुँह मे गु गु गुम... कि आवाज़ के साथ निकाल रही थी...
रामु भूरी को चुत सहलाते देख उसका हाथ पकड़ लेता है " काकी हमारे रहते खुद आपको ही रगड़नी पड़े तो हमारा जीना व्यर्थ है.
चाटक के साथ एक हाथ उसकी बहती चुत पे मार देता है, भूरी उछल पड़ती है.
आअह्ह्ह.... रामु क्या कर रहे हो.
एक और चटाक.... पड़ती है चुत पे...
आह्हः.... रामु..... आहहहह.... लेकिन इस बार सिसकारी के अलावा कुछ नहीं निकलता उसके मुँह से.
दो चार और थप्पड़ चुत पे पढ़ने से भूरी मदमस्त हाथनि कि तरह हो जाती है जिसे काबू करना तीनो के लिए मुश्किल होने वाला था.
अभी इस हथनि पे अंकुश नहीं लगाया तो बात हाथ से निकल जाएगी.
कालू भी भूरी कि गर्मी, बैचैनी से इधर उधर गांड हिलाती भूरी कि हालत समझ रहा था.
अब उसे आगे बढ़ना ही था....कालू अपना सूखा लंड एक बार मे ही थूक से गीली गांड मे एक ही बार मे जड़ तक डाल देता है...
आआहहहह...... चिहुक पड़ती है भूरी. जैसे किसी ने गर्म मोटी सलाख गांड मे जड़ तक उतार दि हो. हवस और दर्द से आंखे बंद कर आगे कि और गिरने लगती है.
ये पहला मौका था कि गांड मे कुछ गया था, चुत मे तो खुद ही कुछ ना कुछ डालती ही रहती थी. दर्द बर्दाश्त के बाहर था.... निढाल हो वो सर आगे जमीन पे रख देती है परन्तु कालू पीछे से गांड मजबूती से पकडे रखता है..
धचा धच धचा धच... बिना रहम के कालू गांड मारे जा रहा था, भूरी सिसकती जा रही थी अभी भी जोर से बिल्लू का लंड पकडे हुई थी.
रामु बिलकुल हैरानी से इस कामुक चुदाई को देख रहे थे, क्या गांड थी.... हर धक्के के साथ हिल जाती थी. हिल हिल के रामु बिल्लू को बुला रही थी कि तुम क्यों खाली बैठे हो? आओ तुम भी चोदो मुझे.
रामु एक हाथ भूरी के जलते बदन के नीचे दबे बड़े बड़े गोल स्तन पे रख देता है और तेज़ी से मसलने लगता है.
इस मर्दन से भूरी वापस से उत्तेजना हवास के आगोश मे जाने लगी और वापस से कुतिया बन जाती है, बिल्लू उसे सहारा दे के वापस उसके मुँह मे लंड डाल के धचा धच पेलने लगता है.
मुँह गांड दोनों भरे हुए थे, भूरी मादकता के चरम पे थी, यही मौका था रामु भूरी के जलते बदन के नीचे सरक जाता है और स्तन को पकड़ अपने मुँह मे ठूस लेता है, चाटता है, काटता है उत्तेजना मे भरा रामु बेरहमी से रगड़ाई चुसाई कर रहा था.निप्पल बिल्कुल सुर्ख लाल हो चुके थे. लगता था जैसे कोई गाय का बछड़ा बहुत बरसो बाद दूध पी रहा है चूस चूस के नोच ही डालेगा.
आअह्ह्ह..... आह्हब..... नोच रामु नोच खा जा इसे... तेरे लिए ही है.
कालू तू गांड फाड़ मेरी और तेज़ कर अंदर ही घुस जा.
बोल के वापस से बिल्लू का लंड गले तक ठूस लेती है
अब रुकना मुश्किल था..... कालू गचा गच लंड मारे जा रहा था
....उसे अब स्सखलित होना था गर्मी बहुत हो गई थी.
आअह्ह्ह... के साथ.... गांड मे वीर्य कि बौछार हो जाती है, पच पीच.... गांड मे गर्मी पाते ही भूरी कि रस बाहती चुत फट पड़ती है..
आहहहह..... उत्तेजना वंश बिल्लू का लंड टट्टो सहित पूरा मुँह मे डाल लेती है बिल्लू ऐसी लंड चुसाई सहन नहीं कर पाता वो भी फट पड़ता है भूरी के मुँह मे ही....
तीनो झाड रहे थे... कालू का वीर्य गांड से निकल के चुत के रास्ते नीचे गिर रहा था. रामु अभी भी दूध पीने मे बिजी था भूरी उस के ऊपर धम से गिर पड़ती है.
जिस वजह से बिल्लू का लंड बाहर निकल जाता है बिल्लू का लंड टट्टो तक पूरा वीर्य और थूक से भरा झूल रहा था.
भूरी लंड को देख के मुस्कुरा रही थी और अपनी सांसे दुरुस्त करने का प्रयास कर रही थी. कालू नाम का गांडफाड़ तूफान भी शांत हो चूका था, कालू कि नजर भूरी कि गांड पे पड़ती है वहाँ अब वो छोटा छेद नहीं था वहाँ गड्डा बन गया था ऐसा गड्डा कोई मेहनती मजदूर ही कर सकता था.
रामु भी भूरी के नीचे पड़ा स्तन चूस रहा था उसका लंड भी अब चरम पे था, भूरी कि चुत रामु के लंड से स्पर्श हो रही थी, भूरी अभी पूरी तरह सम्भली भी नहीं थी कि उसकी कामरस वीर्य से भीगी चुत गर्म सख्त मोटे लंड का स्पर्श पा के फिर कुलबुलाने लगी.... रामु का लंड भूरी के हिलने से फचाक से भूरी कि छोटी सी चुत मे उतर जाता है. भूरी सिर्फ कसमसा के रह जाती है क्युकी उसे रामु ने अपनी मजबूत भुजाओं मे जकड रखा था....
आआ..... हहह.... असीम संतोष कि प्राप्ति हुई थी, भूरी को समझ आ चूका था असली लंड और लोकी बैगन मे कितना अंतर होता है..
पुरे 30 साल बाद चुत ने लंड का अहसाह पाया था, लज्जत से भूरी कि आंखे पलट गई थी, वो विक्षिप्तो कि तरह अपने बाल पकडे सर इधर उधर किये रामु के लंड पे कूद रही थीउसे ये मौका मजा नहीं खोना था.
धपा धप करती भूरी अपनी गांड पटक रही थी एक बार मे पूरा लंड बाहर निकालती और दुगनी रफ़्तार से वापस लंड पे टट्टो के ऊपर कूद पड़ती.
तीनो ही भूरी काकी के इस रूप को देख के दंग रह गये थे.... एक हाथ से सर पकड़े दूसरे हाथ से अपने स्तन नोचती भूरी साक्षात् काम देवी लग रही थी....
बिल्लू जो अभी तक गांड चुत के सुख से अछूता था उसके दिल मे हुक सी मचने लगती है उसका लंड वापस से तन तनाने लगता है. उसका लंड अभी भी वीर्य और थूक से बिल्कुल गिला था.
बिल्लू उछलती भूरी के पीछे आ जाता है और जैसे ही गांड के छेद पे नजर पड़ती है उसका लंड बगावत पे उतर आता है, वहाँ गांड का छेद उसे बुला रहा था, खुल बंद हो रहा था ठीक उसके नीचे रामु का लंड सटा सट अंदर बाहर हो रहा था.
आव देखा ना ताव सीधा अपना मुसल लंड भूरी कि गांड मे धसा देता है.
आअह्ह्ह..... भूरी चीख पड़ती है, लेकिन अब इस चीख मे संतोष, हवस कामवासना शामिल थी दर्द का कोई नामोनिशान नहीं था.
अब भूरी को अपनी मुराद से ज्यादा मिल रहा था कहाँ एक लंड भी नहीं था आज दो दो लंड एक साथ घुसे पड़े थे.
भूरी चीख मारती सिसकारी लेती धचा धच पेली जा रही थी, कमरे पे फच फच.... फचाक का मधुर संगीत गूँजता रहा.
बिल्लू रामु दोनों ही एक साथ लंड बाहर निकालते और एक साथ अंदर जड़ तक़ समा जाते.
दोनों के टट्टे चुत और गांड पे चोट कर रहे थे जिस से मजा दुगना हो चला था भूरी का.....
ये हवस ये कामुकता आज रात रुकने वाली नहीं थी, कब किसने किस छेद मे कितनी देर तक मारा पता नहीं था.
प्रतियोगिता शुरू हो चुकी थी जिसमे भूरी नहीं हारने कि थी आज उसे पुरे 30 साल बाद जीत मिली थी.
इस जीत का उत्साह उसने ना जाने कितनी बार स्सखलित हो के मनाया.....
बाहर बारिश जारी थी और अंदर चुदाई कि प्रतियोगिता.
सुबह हो चुकी थी.
कथा जारी है..
Kadak update dostअपडेट -10 contd...
भूरी पूरी तरह वीर्य मे लथपथ कमरे मे तीनो मर्दो के बीच पड़ी थी. उसके बदन के हर छेद से वीर्य टपक रहा था, शरीर का ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं बचा था जहाँ भूरी वीर्य रुपी अमृत से अछूती रह गई हो.
बारिश बंद हो चुकी थी हवस का तूफान भी खत्म हो चूका था. सूरज कि पहली किरण भूरी के बदन को नहला रही थी,
उसका पूरा बदन चमक रहा था... नई सुबह के साथ हवस कि भी नई सुबह कि शुरुआत हो चुकी थी 30 साल का वनवास खत्म हो चूका था.
भूरी नंगी ही कमरे से बाहर निकल पड़ती है जाती हुई बस एक बार पलट के देखती है तीनो जमुरे पस्त पड़े हुए थे.
भूरी हवेली कि तरफ निकल पड़ती है.
सुबह कि किरण गांव कामगंज, रामनिवास के घर पे भी नया अध्याय लिख रही थी.
रात भर असलम सो ही नहीं पाए थे, उनके लंड पे रह रह के रतीवती के होंठ का कसाव महुसूस हो रहा था. उनके पैर पे लगे रतीवती के वीर्य को ऊँगली मे लपेट कर रह रह के चाट रहा था.
रतीवती भी असलम के वीर्य का स्वाद पा के फूली नहीं समा पा रही थी एक नई ऊर्जा नये जीवन का संचार हो चूका था. रतीवती नंगी ही सो चुकी थी.
इसी कसमाकस मे सुबह हो चली थी
ठाकुर साहेब भी उठ चूके थे, रामनिवास ठाकुर साहेब के उठने कि ही प्रतीक्षा कर रहा था,
ठाकुर साहेब और असलम ने नाश्ता कर लिया था वो जाने कि तैयारी मे थे... परन्तु असलम और रतीवती के चेहरे उतरे हुए थे. रतीवती इतना कुछ होने के बाद कुछ और पा लेना चाहती थी लगता था उसे इंतज़ार करना पड़ेगा.
असलम भी नये नये अहसास से बाहर निकला भी नहीं था कि उसके वापस जाने कि घड़ी आ गई थी.
रतीवती और रामनिवास ठाकुर साहेब और असलम को छोड़ने दरवाजे पे खड़े थे.
रामनिवास काफ़ी तनाव और चिंता मे खड़ा था.
ठाकुर :- क्या हुआ रामनिवास तुम उदास दिख रहे हो? लगता है तुम इस रिश्ते से ख़ुश नहीं हो
रामनिवास :- नहीं नहीं.... नहीं तो ठाकुर साहेब हम लोग तो बहुत ख़ुश है बस मे ये नहीं समझ पा रहा हूँ कि इतनी सारी तैयारी इतने कम समय मे कैसे हो पायेगी? इतनी जल्दी पैसे का इंतज़ाम कैसे कर पाउँगा मै?
ठाकुर :- हाहाहाहाहा.... रामनिवास बस इतनी सी बात कल ही बता देते ऐसी समस्या थी तो.
ऐसा बोल के वो अपनी जेब से 1000rs निकालते है और रामनिवास के हाथ ने थमा देते है (1857 मे 1000rs लाखो रूपए के बराबर थे)
रामनिवास :- ठाकुर साहेब ये... ये... क्या है? इतने सारे रूपये? रतीवती कि तो आंखे ही चमक उठती है इतना पैसा एक साथ सपने मे भी नहीं देखे थे मियां बीवी ने.
ठाकुर :- रखिये रामनिवास रखिये... अब आप हमारे समधी है, कामवती होने वाली ठकुराइन है ये मामूली रकम है.
और रही तैयारी कि बात तो मै ऐसा करता हूँ डॉ. असलम को 2दिन के लिए यही छोड़ जाता हूँ वो सब प्रबंध कर के वापस विषरूप चले आएंगे. क्यों डॉ. असलम आप कर देंगे ना?
डॉ. असलम कि ये बात सुन के ही फ्यूज उड़ गये थे... रतीवती भी स्तम्भ खड़ी ठाकुर साहेब को देख रही थी जैसे ठाकुर ने रतीवती के मन कि बात सुन ली हो.
डॉ. असल:- मै म.... मै..... ठाकुर साहेब मै.... जैसा आप कहे मै रुक के सारी तैयारी कर दूंगा आखिर आपकी शादी है लगना चाहिए कि इस घर मे ठाकुर ज़ालिम सिंह कि बारात आई है.
खुद को समय रहते असलम संभल चूका था.
इतना सुन ना था कि रतीवती काँप जाती है चुत से पानी छलक जाता है, वो शर्म से मुस्कुरा के सर नीचे कर लेती है.
इस बात का अहसास सिर्फ डॉ. असलम को ही हो पाया था.
फिर ठाकुर साहेब अपने गाड़िवान के साथ विष रूप के लिए निकल जाते है.
पीछे 2 दिन के लिए असलम रामनिवास के घर ही रह जाता है...
कैसी होंगी शादी कि तैयारी?
तैयार रहिएगा ठाकुर कि बारात मे चलने के लिए?
जल्द ही मिलेगा आपका दोस्त andy pndy![]()
Gajab ki update dostचैप्टर -1 ठाकुर कि शादी, अपडेट -11
डॉ. असलम और रतीवती कि बांन्छे खिल जाती है, रात कि खुमारी उतरी ही कहाँ थी के असलम के रुकने का इंतेज़ाम हो गया था. बिन बोले ही आँखों आँखों मे ही एक दूसरे के प्रीति जो हवस थी वो साफ झलक रही थी.
इधर उल्लू का चरखा रामनिवास ख़ुश था कि उसे कुछ नहीं करना पड़ेगा आराम से बैठ के शराब पी के मौज करूंगा असलम तैयारी देख लेगा.
रामनिवास :- अरी भाग्यवन ये लो पैसा और डॉ. असलम के साथ मिल के सामान कि लिस्ट बना ले ना देखना कोई कमी ना रह जाये.
मै अभी आता हूँ.... ऐसा कह के वो घर से बाहर निकल जाता है और सीधा शराब कि दुकान पे ही रुकता है.
आज पहली बार रतीवती उसके दारू पिने कि आदत से ख़ुश थी वो अब तो यही चाहती थी कि वो पड़ा रहे दारू के नशे मे असलम है ना सब संभाल लेगें....
वो भी मंद मंद मुस्कुरा के नहाने कमरे मे चली जाती है. असलम बलखाती रतीवती को देखते ही रह जाता है उसे कल रात नंगी अपनी गांड मटकाती रतीवती का नंगा गोरा कामुक बदन याद आ जाता है.
असलम अपना लंड मसलता कमरे मे चला जाता है,
तभी कमरे मे किसी के आने कि आहट होती है असलम चौक के ऊपर देखता है तो कामवती थी क्या सुंदर थी बला कि खूबसूरत.... उसकी माँ का जवानी वाला रूप थी कामवती.
कामवती :- काका नाश्ता कर लीजिये आगे बहुत काम है.
डॉ. असलम :- अरे कामवती तुम मेरी होने वाली भाभी हो इस हिसाब से तो मै तुम्हारा देवर हुआ ना. असलम मजाकिया लहजे मे बोलते है.
कामवती :- काका आप तो मेरे पिता के उम्र के है, आप को मै काका ही बोलूंगी.
और मुस्कुरा देती है.आप भी मुझे कामवती या कम्मो ही बुलाइये अच्छा लगेगा मुझे.
कितनी भोली मासूम मुस्कुराहट थी कामवती कि.
डॉ. असलम :- hahahaha.... ठीक है भाभी ज़ी... म.. मम... मेरेमतलब कामवती.
असलम के मन मे कामवती के लिए रत्तीभार भी कोई गलत भावना नहीं थी, थी ही इतनी मासूम कामवती
मै मस्जिद हो के आता हूँ फिर नाश्ता करता हूँ.
डॉ. असलम अपनी मुसलमानी टोपी पहने मस्जिद कि और निकल जाते है.
जहाँ रास्ते मे असलम मौलवी साहब से टकरा जाते है.
मौलवी :-अरे बरखुरदार देख के जरा, इस गांव मे नये लगते हो कभी देखा नहीं आपको?
डॉ. असलम :- ज़ी मौलवी साहेब मै कल ही ठाकुर साहेब के साथ रामनिवास के घर आया था, तैयारी के लिए 2 दिन रुक गया. सोचा अल्लाह का शुक्रिया अदा कर दू मेरी मुराद पूरी करने के लिए.
और अपने बारे मे बताते है.
मौलवी :- अच्छा अच्छा तो आप ही है डॉ. असलम भई काफ़ी नाम सुना है आपका और ठाकुर ज़ालिम सिंह ज़ी का.
आप आस पास के गांव मे एकलौते डॉक्टर है.
डॉ. असलम :- अरे मौलवी साहेब अब इतनी भी तारीफ के काबिल नहीं है हम. झेम्प जाते है थोड़ा तारीफ सुन के.
मौलवी और डॉ. असलम बात करते करते गांव कि और लौट रहे थे.
बातचीत करते हुए असलम को मालूम पड़ता है कि उनकी एक विधवा बेटी है जिसकी पति को डाकुओ ने मार डाला था.
असलम ये जान के दुखी होते है...
बात करते करते गांव आ जाता है.
असलम रामनिवास के घर आ जाते है और नाश्ते केिये कामवती को आवाज़ देते है..
कामवती कामवती....लाओ नाश्ता ले आओ भूख लगी है.
इधर मौलवी साहेब भी अपने घर पहुंचते है जहाँ रुखसाना खाना बना रही थी.
अपने बापू को आता देख उनके लिए नाश्ता निकलती है....
मौलवी :- अरी ये नाश्ता छोड़ और मेरी बात सुन, अपने गांव कि कामवती का रिश्ता पक्का हो गया है. अगले मंगलवार को उसकी शादी है. यहाँ पे ठाकुर ज़ालिम सिंह कादोस्त दो दिन के लिए रुझान हुआ है.
डॉ. असलम ज्ञानी पुरुष है हमें इसका भी वीर्य चाहिए होगा काम पूरा करने के लिए.
रुखसाना :- बापू पिछली बार ही तो मै रंगा बिल्ला का ताज़ा वीर्य लाइ थी.
मौलवी :- हाँ बेटा लेकिन जो हमें करना है उसके लिए ताकत के साथ अक्ल भी चाहिए, ताकत तो रंगा बिल्ला और अन्य पुरुषो से मिल जाएगी परन्तु दिमाग़ डॉ. असलम के पास से ही मिलेगा.
पिछला मंगलवार....
रुखसाना रंगा बिल्ला से चुद कर वापस घर आई थी तो उसकी गांड मे दोनों का ढेर सारा वीर्य भरा था, वोअपने बापू के कमरे मे घुसते ही जल्दी से एक कटोरा ढूंढती है और अपनी सलवार तुरंत नीचे खिसका के कटोरे पे बैठ जाती है.
वो अपनी गांड के छेद को थोड़ा ढीला छोड़ती है उतने मे ही पुररर.... पुररर.... फस फस... कर के वीर्य कि धार निकल पड़ती है. कटोरे मे वीर्य जमा होने लगता है.
मौलवी :- वाह बेटी आज तो बहुत सारा वीर्य लाइ है.
रुखसाना :- हाँ बापू आज दोनों का खेल सुबह तक चला. ऐसा कह मुस्कुरा देती है.
वीर्य ख़त्म हो चूका था बचाखुचा वीर्य वो अपनी गांड मे एक ऊँगली डाल के बाहर निकलती है और कटोरे के किनारे पे ऊँगली रगड़ के एक एक बून्द कटोरे मे गिरा देती है
रुखसाना :- लीजिये बापू भर दिया है कटोरा मैंने, अपना सलवार ऊपर कर नाड़ा बांधती हुई बोलती है.
मौलवी तुरंत उस कटोरे को उठा उसमे कुछ मन्त्र पढ़ने लगता है, और कटोरे पे फूंकता है
ऐसा दो तीन बार करता है और कटोरा रुखसाना कि तरफ बड़ा देता है ले बेटी इसे एक सांस मे पूरा पी जा.
इस से तुझे वो ताकत मिलेगी जो तुझे चाहिए....तुझे तेरे मकसद मे सफल होने के लिए ताकत कि जरुरत है.
रुखसाना बिना कुछ कहे कटोरा उठा अपने होंठो से लगा लेती है और गाटागट एक ही सांस मे हलक के नीचे उतार लेती है.
आअह्ह्ह.... मजा आगया बापू मुझे शक्ति ताकत का संचार होता लग रहा है. वैसे भी रुखसाना को वीर्य पसंद था.
वर्तमान मे आज के दिन
मौलवी :- समझी मेरी बच्ची हमें ताकत के साथ अक्ल भी चाहिए जो कि असलम से मिलेगा.
रुखसाना :- ठीक है बापू मै उसका वीर्य भी हासिल कर लुंगी....
ये किस ताकत, किस मकसद कि बात हो रही थी?
रुखसाना को अलग अलग मर्दो का वीर्य क्यों चाहिए था?
सब वक़्त ही जनता था...
रामनिवास के घर पे असलम कि आवाज़ का कोई उत्तर नहीं आता तो वो रसोई घर कि और चल पड़ता है.
रसोई घर मे भी कोई नहीं था.
डॉ. असलम :- कहाँ गई ये कामवती? वो रतीवती को आवाज़ देने का सोचता है.. रतीवती का ख्याल आते ही उसे क रात कि घटना याद आ जाती है... जो हुआ कैसे हुआ? कुछ नहीं पता.
लेकिन सुबह रतीवती के चेहरे पे कोई शिकायत नहीं थी. लगता है जिस आग मे मै तड़प रहा हूँ रतीवती भी उसी मे तड़प रही है.
असलम का सोचना ठीक ही था.
रतीवती अपनेबाथरूम मे पुरे कपडे उतार पूर्ण रूप से नंगी बैठी कल रात कि घटना याद कर रही थी, फचा फच अपनी चुत मे ऊँगली मार रही थी..... क्या लंड है असलम ज़ी का.
चूसने मे इतना मजा आया था, चुत मे कैसा मजा आएगा. फच फच... ऊँगली लगातार चुत चोदे जा रही थी.... रतीवती गांड उठा उठा के कल्पना मे खोई हुई थी..
इधर असलम रतीवती के कमरे कि और चल पड़ता है, दरवाजे के बाहर आ के आवाज़ देता है लेकिन कोई उत्तर नहीं मिलता वो दरवाजा खटखटाने का सोच के जैसे ही दरवाजे को हाथ लगाता है वो चरररर.... कि आवाज़ के साथ खुल जाता है.
अंदर बाथरूम मे रतीवती काम उत्तेजना, हवस मे इस कदर खोई थी कि उसे कोई आहट सुनाई नहीं देती.
कमरे से लगे बाथरूम मे दरवाजे कि जगह सिर्फ पर्दा था, वैसे भी दरवाजे कि जरुरत ही क्या थी कमरा रतीवती का था चाहे जैसे रहे कौन देखने वाला है..
असलम को बाथरूम से फच फच.... सिसकारी कि आवाज़ आ रही थी... आअह्ह्ह..... फच फच.... असलम
डॉ. असलम :- ये तो रतीवती को आवाज़ है और ये मेरा नाम क्यों ले रही है? कही कुछ तकलीफ तो नहीं?
अब असलम क्या जाने गरम और कामुक औरत कि आवाज़.
असलम उत्सुकता वंश बाथरूम कि ओर बढ़ चलता है.
तभी कही से हवा का झोका आता है ओर पर्दा हल्का सा नीचे से हट जाता है.
अंदर का नजारा देख असलम के तोते उड़ जाते है, एक झटके मे ही लंड फनफना जाता है, असलम का लंड इतनी तेज़ झटका देता है कि वो गिरतर गिरते बचते है..
अंदर का नजारा ही ऐसा था... काम रस मे भीगी गोरी चिकनी चुत... जिस पे बालो का एक भी कटरा नहीं था...
या.... अल्लाह चुत ऐसी भी होती है.
असलम को दिल का दौरा पड़ जाना तय था जीवन मे वो पहली बार चुत देख रहे थे.
कल रात सिर्फ मुख चोदन हुआ था परन्तु अँधेरे मे कुछ दिखा नहीं था... लेकिन आज असलम ने वो देख लिया था जो शायद उसकी किस्मत मे ही नहीं था.
अंदर रतीवती फचा फच चुत मे ऊँगली मार रही थी.
ऐसा कामुक ऐसा मादक नजारा देख असलम के मुँह से जोरदार चीख रुपी हवस कि चिंगारी निकल जाती है... उनका लंड फटने पे आतुर था.... वो लुंगी उतार फेंकते है
अंदर रतीवती भी मर्दना सिसकारी सुन के चौक जाती है
तभी पर्दा उड़ता है.... ओर दोनों एक दूसरे के सामने पेपर्दा हो जाते है.
कथा जारी है...
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रतीवती पर्दा हटने से चौक जाती है लेकिन जैसे ही सामने असलम को खड़ा देखती है उसका डर उत्तेजना मे तब्दील हो जाता है, उठने को हो चुकी रतीवती धम से वापस बैठ जाती है.... छापक कर के गांड पानी मे पड़ती है.
वापस से ऊँगली अन्दर बाहर होने लगती है. रतीवती मुस्कुराती असलम के तन तानाये लंड को घूरति रहती है जो उसकी कल्पना मे था वो सामने आ चूका था नियति पूरी तरह मेहरबान थी दोनों पर.
डॉ. असलम तो ये नजारा, ये कामुक दृश्य देख के दंग रह गये थे उनके सामने एक जवानी के चरम पे पहुंची औरत धकाधक अपनी चुत मे ऊँगली मारे जा रही थी....
औरत का ये रूप ये यौवन ऐसी कामुकता देख के असलम हैराम थे. हाथो मे चूड़ी, गले मे मंगलसूत्र, माथे पे बिंदी... ओर नीचे पानी बाहती चिकनी गोरी चुत... जिसमे खुद वो स्त्री खुद ऊँगली डाले कुछ ढूंढ रही थी... रातीवति अपनी चुत मे सुख ढूंढ रही थी, आनन्द ढूंढ़ रही थी जो बरसो से नहीं मिला था, उसे चरम सुख कि तलाश थी जो ऊँगली से ढूंढे नहीं मिल रहा था..... इस चरम सुख को तलाश करने का एक ही सहारा था जो परदे के पार मुस्लिम टोपी, गंजी पहने... नीचे से नंगा हैरान खड़ा था.
असलम ये सब कुछ पहली बार देख रहा था.... उसके कदम बाथरूम कि ओर बढ़ चलते है, सुध बुध खो चूका था.
उसे कल रात वाला सुख चाहिए था... उस से कम मे कोई समझौता नहीं.
रतीवती तो इस कदर उत्तेजना से घिरी थी कि उसे ये भी भान नहीं था कि वो किस अवस्था मे है वो जिस चीज को अपनी चुत मे ऊँगली डाले तलाश कर रही थी वो बाहर खड़ा था... असलम के रूप मे.
असलम अब अंदर बिल्कुल नीचे बैठी रतीवती के सामने खड़ा हो चूका था... उसका लंड सीधा रतीवती के लाल होंठो के सामने हिल रहा था.
उस से निकलती गंध रतीवती को ओर ज्यादा मदहोश कर देती है.
वो अपने घुटने के बल बैठ जाती है ओर एक बार मे ही पूरा लंड निगल लेती है.... आअह्ह्ह..... इस अहसास से असलम अपने पंजो पे खड़ा हो जाता है.
कल रात जैसा ही था या उस से भी बढकर.
असलम हैरान परेशान रतीवती कि कला का प्रदर्शन देखे जा रहा था... आज रतीवती को कोई रोकने वाला नहीं था.
लप लप... धचा धच.... मुँह चलाती रतीवती लंड को निगले जा रही थी...
ऐसी चटाई ऐसे मुख मैथुन से असलम घन घना गये थे... उन्हें आज कुछ ओर चाहिए था इस से भी ज्यादा.
उन्हें भी औरत कि चुत का रस पीना था...
असलम एक झटके से रतीवती को पीछे धक्का दे देते है... रतीवती चिहुक के पीछे कि ओर पीठ के बल गिर पड़ती है जिसकारण उसकी टांगे हवा मेउठ जाती है, टांगे दोनों दिशाओ मे फ़ैल जाती है.... अब असलम के सामने फूली हुई रस टपकाती चिकनी गोरी चुत थी जो उसे बुला रही थी... आओ असलम आओ.... आपके लिए ही है.
मदहोशी मे होश खोया असलम तुरंत चुत पे टूट पड़ता है ओर एक बार मे ही पूरी चुत को मुँह मे भर के चूस लेता है.
असलम अनाड़ी था उसे कामक्रीड़ा के बारे मे कुछ नहीं पता था, बस उसे आज चुत खानी थी अंदर का रस पी जाना था..
असलम चुत को मुँह मे भरे चूस रहा था अपने होंठो के साथ खिंचता हुआ अंदर से कुछ निकाल लेना चाहता था.... खींच खींच के चुत चूस रहा था.
रतीवती इस चुसाई से सातवे आसमान मे थी.... ऐसी चुसाई तो कभी रामनिवास ने भी नहीं कि थी.
वैसे रामनिवास चुत चाटता भी नहीं था वो तो कभी रतीवती बेकाबू होती तो नशे कि हालत मे सोये रामनिवास के मुँह पे अपनी नंगी चुत ले के चढ़ जाती थी..
अपनी चुत पे वो शराब गिरा लेती जिस वजह से रामनिवास खूब चाटाचट चुत चाट लेता था.. बस यही सुख ले पति थी रतीवती अपने नामर्द शराबी पति से.
लेकिन आज जैसे असलम चाट रहा था जैसे बरसो का भूखा हो, खा ही जायेगा चुत....
इतने मे असलम को चुत का दाना मिल जाता है वो उसे ही मुँह मे ले के चुबलाने लगता है.... रतीवती इस हमले से मर ही जाती है अपनी गांड उठा उठा के पटकने लगती है गीली जमीन पे, असलम बरसो कि प्यास बुझा रहा था उसे चुत का पानी चाहिए था... फिर कभी मिले या ना मिले आज ही पी लेना था.
रतीवती कि हालत ख़राब थी उसे ऐसा उन्माद कभी नहीं चढ़ा था. उसकी हालत बिगड़ती ही जा रही थी.
वोअसलम के सीने पे पैर रख जोर से धक्का दे के जमीन पे गिरा देती है ओर तुरंत असलम का लंड पकड़ के वापस अपने हलक मे डाल लेती है.
ये कुश्ती का खेल जैसा था बस यहाँ नियम थोड़े अलग थे, हारता कोई भी लेकिन जीत का जश्न दोनों मनाते.
यहाँ हार जीत मायने नहीं रखती थी ये खेल था ही कुछ ऐसा, हवस से भरा खेल....
डॉ. असलम ऐसा कामुक बदन, कामुक मुँह पा के पागल हो चूका था वो जानवरो कि तरह रतीवती का सर पकडे धका धक... गले तक़ पेले जा रहा था.
गु गुह.. गुह्म.... कि आवाज़ गूंज रही थी, टट्टे जोर जोर से आ के रतीवती के होंठ पे लग रहे थे.
रतीवती एकदम से खड़ी हो जाती है उसे सहन नहीं हो रहा था वो तुरंत बाथरूम के गीली जमीन पे लेट जाती है बिल्कुल नंगी टांग फैलाये टप टपाती चुत खोले जमीन पे पड़ी थी...
असलम रतीवती के इस कृत्य से हैरान था कि उसे क्या हुआ एकदम, परन्तु जैसे ही उसकी नजर रतीवती कि फूली चुत पे पड़ती है उसका तो दिल ही मुँह को आ जाता है. बिल्कुल कसी चुत टांग फैलाये भी सिर्फ लकीर दिख रही थी.
इसी पगडंडी पे असलम को खुदाई करनी थी, यही पे उसे चौड़ा रास्ता बनाना था
थूक से स्तन सने हुए थे, हाथो मे चूड़ी मांग मे सिंदूर पहने.... एक कामुक औरत पानी से भीगी जमीन पे टांग फैलाये अपना सर इधर उधर पटक रही थी.
रतीवती :- असलम ज़ी अब सहन नहीं होता प्यास बुझाइये मेरी, पहली बार रतीवती मुँह से कुछ बोल पाई थी, उत्तेजना चरम पे थी.
असलम अपनी शर्ट उतार देता है रतीवती टांगे फैलाये स्वागत के लिए तैयार थी
असलम रतीवती कि दोनों जांघो के बीच बैठ जाता है ओर अपना लंड उस पतली लकीर पे चलाने लगता है, यही वो पतला महीन रास्ता था तो आज तक कभी असलम को मिल ही नहीं पाया.
असलम लंड चुत पे टिकाये आगे को झुकता है लेकिन चुत इतनी गीली थी कि लंड फिसल के दाने को रगड़ता ऊपर को निकल जाता है. ऊपर से असलम ठहरा अनाड़ी इसके लिए तो ये सुख ही स्वर्ग से कम नहीं था... परन्तु रतीवती स्वर्ग कि अप्सरा थी वो तो इस सुख का आनंद जानती थी.
वो अपना हाथ नीचे ले जा के असलम का भारी मोटा लंड पकड़ लेती है, लंड पकड़ते ही एक बिजली दोनों के शरीर मे कोंध जाती है..
रतीवती लंड पकड़ के अपने चुत के मुहने पे रख देती है ओर पीछे से अपनी टांग से असलम कि गांड पे दबाव डालती है कि.... है वीर भेद तो लक्ष्य तुम्हरे सामने है.
असलम ठहरा अनाड़ी जोर से अपनी गांड नीचे को कर देता है.... आअह्ह्ह....... लंड चुत को चिरता हुआ पूरा जड़ तक समा जाता है. असली योद्धा एक बार मे ही लक्ष्य को भेद देते है असलम भी असली लड़ाका निकला.
रतीवती दर्द से बिलबिला जाती है, उसकी बरसो से सुखी चुत मे अजगर समा गया था. उसे क्या पता था कि असलम एक बार मे ही गच गचा देगा.
रतीवती कि चीख अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि असलम लंड हल्का सा बाहर निकाल के वापस जड़ तक ठोंक देता है.
रतीवती कि तो सांस ही अटक गई थी... ऐसा मुसल लंड एक बार मे ही अंदर जा के बच्चेदानी को भेद गया था.
आअह्ह्ह.... असलम... असलममम... बस यही निकला मुँह से.
असलम तो जानवर बन गया था उसे ये सब पहली बार मिला था उसे कुछ नहीं कहना था ना सुनना था.... बस धचा धच... धचा धच..... चुत मारे जा रहा था, उसे इस सम्भोग का आनंद उठा लेना था.
रतीवती पहली बार ऐसी चुदाई झेल रही थी उसकी चुत ने असलम के लंड को पूरी तरह जकड लिया था, जैसे ही असलम लंड को बाहर निकलता चुत उसी के साथ खींची चली जाती, जैसे ही अंदर डालता चुत पूरी कि पूरी अंदर को चली जाती ...
आअह्ह्ह..... क्या मजा था रतिवती उस मजे मे खोने लगी थी. आह्हः.... असलम ओर जोर से असलम ओर जोर से.... ओर अंदर ओर अंदर...
रतीवती कि ये विनती ये चितकार असलम का हौसला बढ़ा रही थी असलन एक पैर घुटने तक मोड के रतीवती के स्तन पे रख देता है ओर दे धचा धच .... लंड मारे जाता है.
रतीवती तो मरने के कगार पे थी.... उसे अब ये उत्तेजना ये गर्मी सहन नहीं हो पा रही थी... वो अपनी गांड उछल उछाल के असलम के लंड पे पटकने लगती है.
नतीजा 5 मिनट बाद ही सामने आता है असलम चुत कि गर्मी पा के भलभला के चुत मे ही झड़ने लगता है अनाड़ी जो ठहरा.... रतीवती भी वीर्य कि गर्मी पा के पिघलने लगी ओर एक के बाद एक झटके के साथ उसकी चुत असलम के वीर्य को पीने लगी....
दोनों हांफ रहे थे, सांसे दुरुस्त कर रहे थे.... दोनों एक साथ जीते थे, ये जीत हवस पे थी. सालो बाद कि हवस बरसो पुराना अकाल खत्म हो चूका था, वीर्य कि बारिश से चुत रुपी जमीन लहरा गई थी, चमन मे नई बहार आ गई थी.
इतने मे ही कमरे केबाहर से कामवती कि आवाज़ अति है.आवाज़ सुन के असलम जल्दी से खड़ा होता है पोक कि आवाज़ का साथ असलम का लंड रतीवती कि चुत खिंचता हुआ बाहर निकल जाता है परन्तु ये क्या वीर्य का कोई नामोनिशान नहीं.... सारा वीर्य रतीवती कि चुत ने सोख लिया था,
गजब औरत थी.... असलम को तो दिन पर दिन आश्चर्य घेरे जा रहा था, औरत नाम का अध्याय उसे हैरान कर रहा था.
कमवती : - माँ माँ... कहाँ है आप? अभी तक नहाई नहीं क्या?
रतीवती असलम को पीछे के दरवाजे से बाहर निकाल देती है, असलम गली से होता हुआ अपने कमरे मे पहुंच जाता है.
उसे तो कुछ कहने सुनने का मौका ही नहीं मिला था.... वो अभी अभी हुए सम्भोग पे यकीन ही नहीं कर पा रहा था.
इधर रतीवती तुरंत अपना हुलिया सुधारती है ओर दरवाज़ा खोल देती है.
कामवती :-माँ खरीदारी पे नहीं चलना क्या?
रतीवती :- हाँ बेटा चलते है पहले डॉ. असलम को खाना तो खा लेने दे, तू जा तब तक तैयार हो जा...
कामवती चली जाती है तैयार होने.
रतीवती भी खूब अच्छे से लाल सारी, लाल चूड़ी, लाल सिदुर पहने तैयार हो जाती है, शादी इसकी बेटी कि है लेकिन लगता है जैसे रतीवती कि ही शादी है, अब भले शादी ना हो परन्तु सुहागरात तो मन ही रही थी.
रतीवती को देख के कोई माई का लाल ये नहीं बता सकता था कि ये अभी अभी चीख चीख के चुद रही थी ओर अभी भी असलम का वीर्य अपनी चुत मे समेटे गांड मटकाती जा रही है.
रतीवती असलम को खाना देने चल पड़ती है....
असलम अपनी ही दुनिया मे खोया अपने साथ हुए घटना को सोच रहा था.... तभी उसके नाथूनो मे वही जानी पहचानी कामुक गंध पहुँचती है, वो अपने विचारों से बाहर आता है.... दरवाजे पे रतीवती खड़ी थी...
लगता था इन दो दिनों मे असलम को मार के ही छोड़ेगी, लाल ब्लाउज, लाल साड़ी मे क्या गजब कामुक लग रही थी, ब्लाउज से झाकते गोरे मोटे स्तन वापस से असलम के होश उड़ा रहे थे
वो अभी अभी इस कामुक औरत के चोद के हटा था फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार देख रह हो .... ये अहसास पक्का असलम कि जान ले लेगा ..... जिन्दा नहीं जाने का असलम.
रतीवती :- ये लीजिये असलम ज़ी खाना खा लीजिये, भूख लगी होंगी मैंने आपसे खमाखां सुबह सुबह मेहनत करा ली....
अब असलम को औरत कि संगत का अनुभव तो था नहीं
असलम :-...मै.. मै....क्या.....मेहनत कौनसी मेहनत?
रतीवती :- आप तो ऐसे हकला रहे है जैसे पहली बार किसी औरत के साथ सम्भोग किया हो.
रतीवती पूरी तरह खुल चुकी थी वो अब शब्दों से भी सुख पाना चाहती थी परन्तु अपने असलम मियां इन मामलो मे अनाड़ी ही थे..
डॉ. असलम:- ज़ी ज़ी ज़ी.... मेरा पहली बार ही है...
रतीवती :- हाहाहाहा..... क्या असलम मियां आप भी.
चलिए खाना खा के तैयार हो जाइये खरीदी पे चलना है. उसके बाद फिर रात मे खड्डा खोदना है
ऐसा बोल के रतीवती अपनी बड़ी सी गांड मटकाती कमरे से बाहर निकल जाती है.
असलम ठगा सा देखता ही रह जाता है, क्या औरत है किसी ने सही कहाँ है औरत हवस पे आ जाये तो मर्द के छक्के छुड़ा दे...
कथा जारी रहेगी, बने रहिये....
Lovely update dostचैप्टर -1 ठाकुर कि शादी, अपडेट -12
असलम, रतीवती ओर कामवती खरीद दारी के लिए बाजार निकल जाती है.
तांगे पे बैठे रतीवती अपनी अदाओ हरकतों से बाज़ नहीं आ रही थी. असलम मियां तो हैरान परेशान हक्के बक्के बाजार जल्दी पहुंचने कि दुआ कर रहे थे..
दूर गांव के बाहर रामनिवास आज दबा के शराब पिए जा रहा था... पिए भी क्यों ना ठाकुर साहेब मोटी रकम जो दे गये थे.
वही पास कि टेबल पे बैठे दो आदमी अपना मुँह ढके लगातार रामनिवास को देख रहे थे.... एक के बाद एक पैग मारे जा रहा था.
जब बिल्कुल नशे मे टुल्ल हो गया दो दोनों नकाबपोश व्यक्ति उठ के रामनिवास के पास आ बैठे.
पहला :- ओर भई रामनिवास आज बहुत दिनों बाद दिखे, क्या बात है बहुत चहक रहे हो आज?
रामनिवास को सब धुंधला दिख रहा था, उसे लगा उसके ही गांव का कोई दोस्त होगा
रामनिवास :- अरे भई खुशी का मौका है लो तुम भी पियो.
दूसरा :- लेकिन पैसे???
रामनिवास :- दोस्त के रहते पैसे कि चिंता करते हो, बहुत पैसा है मेरे पास, नशे मे शेखी बखार रहा था.
पहला :- वैसे खुशी कि क्या बात है दोस्त?
रामनिवास :- मेरी बेटी....हिक्क... हिक्क... मेरी बेटी का रिश्ता तय हो गया है वो हिक.... हिक्क.... अब ठकुराइन बनेगी.... हिक्क ठकुराइन....
रामनिवास नशे मे बेसुध था.
दूसरा :- अच्छा तो वहाँ से मिला है मोटा माल? कहाँ किस से हो रही है शादी?
रामनिवास :- अपने ठाकुर है ना विष रूप वाले हिक्क... ठाकुर ज़ालिम सिंह उनसे.
सारी बाते बताता चला जाता है कि कब शादी है, कब विदाई है, बेवकूफ रामनिवास.
बहुत अमीर है वो खूब पैसा है उनके पास.
ये बात सुन दोनों कि आंखे चौड़ी हो जाती है, मुस्कुराहट चेहरे पे तैर जाती है.
दोनों रामनिवास से विदा ले के निकल जाते है.
रास्ते मे
यार रंगा ये ठाकुर तो वाकई मोटी आसामी है, रुखसाना कि खबर पक्की है,इसे लूट लिया तो जिंदगी बन जाएगी.
रंगा :- हाँ बिल्ला योजना बनानी होंगी चल अड्डे पे, हमारे पास टाइम कम है.
. रंगा बिल्ला कम्बल से मुँह ढके वहाँ से निकल जाते है
परन्तु इन सब मे किसी कि नजर बराबर रामनिवास ओर रंगा बिल्ला कि बातचीत पे बनी हुई थी.
एक दुबला पतला लड़का, हलकी मुछे रखे वही आस पास टहल रहा था. चेहरे से इतना मासूम कि प्यार आ जाये गोरा चिट्टा... जैसे कोई राजकुमार हो...
लेकिन ये है चोर मंगूस... एकदम शातिर चोर.
रूप बदलने मे माहिर, चुत मारने मे दुगना माहिर
चोरी भले चुत कि हो या सोने चांदी कि सब चुरा लेता है.
आजतक इसे कोई पकड़ नहीं पाया पकड़ेगा क्या खाक जब कोई इसे देख ही नहीं पाया.
कब आता है कब चला जाता है कुछ पता नहीं...
चोर मंगूस सारी बाते सुन लेता है... उसकी योजना तुरंत तैयार हो चुकी थी
अब उसे भी ठाकुर कि शादी का इंतज़ार था..
विष रूप ओर कामगंज के बीच मौजूद जंगली इलाके मे एक शख्स टहल रहा था, उसके हाव भाव से लग रहा था जैसे कि वो किसी का इंतज़ार कर रहा हो.
तभी पता नहीं कहाँ अँधेरे मे से एक साया निकल के उस व्यक्ति के सामने खड़ा हो जाता है...
व्यक्ति :- कहो खबरी क्या खबर लाये हो?
साया :- मालिक खबर मिली है कि विष रूप के ठाकुर ज़ालिम सिंह, कामगंज के रामनिवास कि बेटी से शादी कर रहे है ओर मंगलवार को बारात आएगी उसी रात विदा भी हो जाएगी.
व्यक्ति :- इसका मतलब यही मौका है उन्हें पकड़ने का?
साया :- ज़ी दरोगा साहेब रंगा बिल्ला कि योजना ठाकुर को विदाई के वक़्त लूट लेने कि है जब ठाकुर कीमती सामानो के साथ वापस जा रहा होगा, उसकी दुल्हन सोने चांदी से लदी होंगी.
ज़ी हां ये है इस इलाके के दरोगा वीरप्रताप सिंह है जैसा नाम वैसा काम वीर पुरुष तो है लेकिन कभी किसी चोर डाकू को पकड़ नहीं पाए.
उम्र लगभग 40कि होंगी ऊँचा लम्बा कद है इनकी एक खूबसूरत बीवी कलावती भी है जो गांव से दूर शहर मे रहती है.
काम ओर जिम्मेदारी मे इस कदर डूबे है कि सम्भोग कि इच्छा ही ख़त्म सी हो गई है बीवी को हाथ लगाए बरसो बीत गये.
ना जाने इनकी बीवी कैसे रहती होंगी.
कलावती ने कई बार जिद्द कि मुझे भी अपने साथ ले चलो लेकिन यहाँ डाकुओ का खतरा था इसलिए साथ मे लाये नहीं.
वीरप्रताप :- चोर मंगूस कि कोई खबर?
खबरी :- नहीं मालिक उसकी ना तो कोई खबर मिलती है ना ही उसका हुलिया, कहाँ से आता है कहाँ जाता है कुछ पता नहीं है.
वीरप्रताप :- खेर कोई बात नहीं पहले रंगा बिल्ला को हो दबोच लेता हूँ फिर उस चोर मंगूस कि भी खबर लूंगा.
अब तुम जाओ कोई खबर हो तो यही मिलना
साया अँधेरे मे विलुप्त हो जाता है जैसे आया था वैसे ही गायब.
वीरप्रताप गहरी सोच मे डूब जाता है " ऊपर से निर्देश आ चुके है ये मेरा लास्ट मौका है रंगा बिल्ला को नहीं पकड़ा तो ससपेंड कर दिया जाऊंगा "
नहीं नहीं.... ये मौका मुझे गवाना नहीं है.
ठाकुर कि शादी का इंतज़ार करना होगा...दरोगा के दिमाग़ मे योजना तैयार हो चुकी थी.
सोचते सोचते वो जंगल के बाहर खड़ी गाड़ी कि ओर बढ़ जाते है.
यहाँ सभी को ठाकुर कि शादी का ही इंतज़ार था.
कैसी होंगी शादी?
हो भी पायेगी या नहीं?
बने रहिये... कथा जारी है...
सब शादी के लिए तैयार है... आप भी इंतज़ार कीजिये ठाकुर कि शादी का.
Parsanshniye update mitrचैप्टर -1 ठाकुर कि शादी, अपडेट -13
सबकी योजना तैयार थी.....
ठाकुर ज़ालिम सिंह भी अपने गांव विष रूप पहुंच चुके थे, उनके गांव मे उत्सव का माहौल था.
ठाकुर :- भूरी काकी शादी कि तैयारी करो, रिश्ता तय कर आया हूँ, अब हवेली कि रौनक फिर लौट आएगी.
बहुत ख़ुश थे ठाकुर साहेब.....
भूरी :- कैसी है कामवती?
ठाकुर :- बहुत सुन्दर
वो तीनो नामुराद कहाँ मर गये है जब से दिख नहीं रहे
भूरी उन तीनो का जिक्र सुनते ही घन घना जाती है, रात भर का सारा दृश्य एक बार मे ही जहाँ मे दौड़ जाता है,भूरी कि चुत पनियाने लगती है.
ठाकुर :- कहाँ खो गई काकी? तबियत तो ठीक है ना?
कहाँ है वो तीनो हरामी
तभी तीनो पीछे से एक साथ आते है
कालू :- ज़ी ठाकुर साहेब आदेश दीजिये?
ठाकुर :- कहाँ मर गये थे तुम लोग? सालो सिर्फ मुफ्त कि खाते हो.
बिल्लू :- मालिक वो... वो.... कल रात काकी ने बहुत मेहनत करवाई तो सुबह देर से उठे.
बिल्लू डर से जो मुँह मे आया बोल देता है.
भूरी चौक जाती है
ठाकुर :- कैसी मेहनत?
कालू :-ज़ी ठाकुर साहेब वो कल रात बारिश बहुत तेज़ थी हवेली मे पानी जमा हो गया था तो रात भर पानी ही निकलते रहे. क्यों भूरी काकी? कालू बात संभाल लेता है.
भूरी :- ज़ी ज़ी... ठाकुर साहेब तीनो ने अच्छे से पानी निकाला.
ठाकुर :- अच्छा अच्छा ठीक है जाओ काम पे लगो अब.
गांव के पंडित को बुलावा भेज दो, हलवाई को बुला लाओ.
ओर हवेली कि साज सज्जा का प्रोग्राम करो.
डॉ. असलम 2दिन मे आ जायेंगे तो बाकि का प्रबंध वो देख लेंगे.
चलो दफा हो लो अब हरामी साले....
शादी कि तैयारी जारी थी.
इन सब के बीच हवेली के तहखने मे एक शख्स ये सब बाते सुन रहा था, उसके कान बहुत तेज़ थे.... वो कामवती का नाम सुन के तन तना जाता है.
"कही कही... ये वही कामवती तो नहीं जिसका मै हज़ारो सालो से इंतज़ार कर रहा हूँ? यही वो कामवती तो नहीं जो मेरी नय्या प्यार लगाएगी "
मुझे भी ठाकुर कि शादी मे जाना होगा. मंगलवार का इंतज़ार है बस...
ये शख्स कौन था जो कामवती को जनता था?
कामवती कैसे नय्या पार लगाएगी?
वक़्त बताएगा
इधर गांव कामगंज मे
बाजार मे खूब रौनक थी कामवती ओर रतीवती कि मौजूदगी से, सभी कि नजर माँ बेटी पे ही थी उनकी दोनों कि खूबसूरती के बीच डॉ. असलम जैसे कुरूप को कोई देख ही नहीं पा रहा था, कहाँ असलन नाटा काल ओर कहाँ रतीवती कामवती सुन्दर सुडोल लम्बी.
असलम ने दिल खोल के खर्चा किया, ठाकुर साहेब के कहे अनुसार शादी मे कोई कमी नहीं रहनी चाहिए थी.
कामवती भी असलम से काफ़ी घुलमिल गई थी.
लेकिन असलम रतीवती के साथ अभी तक असहज थे.
वो दो बार रतीवती के संपर्क से निकल. चुके भी फिर भी ना जाने क्यों उनको रतीवती के साथ होने से खलबली मच जाती थी,रतीवती का हाथ कभी छू जाता तो सीधा करंट लंड पे जा के ही रुकता, फिर भी बाजार मे होने के कारण उसे अपने ऊपर काबू रखना था.
खेर इस खींचा तानी मौज मस्ती मे खरीददारी होती रही.
रतीवती ने एक लाल चटक सारी ली
रतीवती :- असलम ज़ी कैसी है ये साड़ी?
असलम : अ... अ.... अच्छी है रतीवती ज़ी
रतीवती :- कब तक शर्माएंगे असलम ज़ी आप, आप के लिए ही ले रही हूँ, आखिर अपने ही कद्र कि है मेरी.
ऐसा कह के मुस्कुरा देती है. असलम फिर से लजा जाये है.
दिन भर कि मेहनत के बाद तीनो शाम होने पे घर लौट पड़ते है, अंधेरा घिर चूका था..
घर पहुंच जाते है, रामनिवास अभी तक घर नहींआया था रतीवती को चिंता सताने लगी थी
कामवती अपने कमरे मे सामान रखने चली जाती है.
कामवती :- माँ मै सामान रख के आती हूँ फिर खाना बना लेती हूँ आप आराम कीजिये.
असलम भी अपने कमरे कि ओर निकल जाता है.
रतीवती अपने कमरे मे जाते ही लाल साड़ी पहन के देखने लगती है, सारे कपडे उतार के बिल्कुल नंगी हो जाती है.उसे जल्दी से तैयार हो के असलम को अपना रूप दिखाना था.
वो असलम आश्चर्य चकित चेहरे को देखना चाहती थी.
क्या मादक शरीर था रतीवती का बिल्कुल नक्कसी किया हुआ गोरा बदन
वो अपनी कमर के चारो तरफ साड़ी लपेट लेती है, ओर जैसे ही वो ब्लाउज उठाती है पहनने के लिए बाहर धममम.... से किसी के गिरने कि आवाज़ अति है.
रतीवती सब भूल के जल्दी से उसी अवस्था मे सिर्फ साड़ी लपेटे ही बाहर को भागती है.
बाहर आ के देखती है कि रामनिवास मुँह के बल गिरा पड़ा था.
रतीवती :- इस हरामी को दारू से ही फुर्सत नहीं आज बेवड़ा ज्यादा पी आया.
भागती हुई रामनिवास को उठाने जाती है... उतने मे असलम भी आवाज़ सुन के कमरे से बाहर आता है ओर जैसे ही दरवाजे कि ओर देखता है दंग रह जाता है.
या अल्लाह.... ये क्या हो रहा है मेरे साथ? कैसे कैसे नज़ारे लिख दिए तूने मेरे जीवन मे. शुक्रिया
असलम देखता है कि रतीवती झुकी हुई रामनिवास को उठाने कि कोशिश कर रही है इस कोशिश मे उसकी गांड पूरी बाहर को निकली हिल रही थी साड़ी का कुछ हिस्सा गांड कि बीच दरार मे घुस गया था.
आह्हः.... क्या गांड है रतीवती कि अपने लंड को मसलते रतीवती कि कामुक गांड को ही निहारते रहते है.
जैसे ही उनकी नजर आगे को बढ़ती है उनका मुँह से हलकी सिसकारी निकल पड़ती है.... ब्लाउज ना पहनने कि वजह से रतीवती के स्तन बाहर को निकल पड़े थे साड़ी तो कबका हट चुकी थी.
हलकी सिसकरी सुन रतीवती पीछे देखती है तो असलम मुँह खोले हाथ मे लंड पकडे मन्त्र मुग्ध खड़ा था.
रतीवती :-अरे असलम ज़ी मदद कीजिये? रतीवती मुस्कुरा देते है उसे असलम कि इसी हालत पे तो मजा आता था.
असलम रतीवती के पास आता है ओर रामनिवास को उठाने मे मदद करता है
इस मदद मे दोनों के शरीर रगड़ खा जाते है, रतीवती तो थी ही कामुक औरत हमेशा उत्तेजना से भरी रहती है, निप्पल कड़क हो जाते है असलम कि रगड़ से.
रतीवती :- असलम से अच्छे से उठाइये, ये तो इनका रोज़ का काम है
असलम अब समझ चूका था कि क्यों रतीवती इतनी कामुक ओर हमेशा गरम क्यों रहती है, उसकी चुत हमेशा क्यों पानी छोड़ती है, जिसका पति ऐसा हो उसकी औरत ओर क्या करे...
किस्मत ने ही मुझे रतीवती से मिलाया है. उनके दिल मे रतीवती के लिए हमदर्दी जगती है क्युकी वो खुद भी बरसो से सम्भोग नहीं कर पाया था, रतीवती ही थी जिसने उसका इस सुख से परिचय करवाया.
असलम मन ही मन रतीवती को धन्यवाद देता है.
अब तक असलम रतीवती मिल कर रामनिवास को कमरे मे ला के बिस्तर पे पटक चुके थे...
रतीवती सीधी खड़ी हो जाती है उसकी साड़ी स्तन से पूरी हट चुकी थी,बस उसके बाल ही बमुश्किल स्तन ढके हुए थे. नीचे सपाट पेट, गहरी नाभि, माथे पे बिंदी
गजब कि काया पाई है रतीवती ने
आह्हः.... कितनी खूबसूरत है रतीवती असलम बहुत कुछ कहना चाहते थे.
परन्तु कामवती रसोई से आवाज़ लगा देती है, माँ खाना बन गया है आ जाओ, ओर असलम काका को भी बोल दो.
असलम कि तंद्रा टूटती है, वो बाहर को जाने लगता है
रतीवती :- धन्यवाद असलम ज़ी आपकी वजह से है सब हो पाया
असलम समझ नहीं पाता कि किस बात का धन्यवाद
आंखे बड़ी किये प्रश्नभरी निगाहो से रतीवती कि तरफ देखता है.
रतीवती :- आज रात इंतज़ार रहेगा आपका ओर मुस्कुरा देती है...
Mast update dostअपडेट -13 contd...
रात हो चुकी थी, अंधेरा गहराने लगा था आसमान मे काले बादल छाने लगे थे.
मौसम पूरी तरह रूहानी बन चूका है गांव कि बरसाती रात ऐसी ही होती है. कामवती दिन भर कि तैयारी से थक हार कर कबका सो चुकी थी.
लेकिन इस घर मे दो लोग जगे हुए थे जो आग मे जल रहे थे काम कि आग मे
असलम अपने कमरे मे नंगा लेटा अपना लंड मसल रहा था ओर उसके जीवन मे आये बदलाव के बारे मे सोच रहा था कहाँ तो चुत नसीब नहीं थी लेकिन जब मिली तो ऐसी मिली कि इतने वर्षो कि कमी पूरी होने लगी.... वो निर्णय ले लेता है कि खुदा के इस फैसले का स्वागत करेगा ओर जम के सम्भोग आनंद उठाएगा.
असलम :- ये सब रतीवती ज़ी के कारण ही संभव हो पाया है उसे धन्यवाद देना ही चाहिए ऐसा सोच के वो कमरे से बाहर निकल रतीवती के कमरे कि ओर चल पड़ता है
रतीवती के कमरे मे रतीवती पूर्णतया नंगी कांच के सामने बैठी अपने हुस्न को निहार रही थी.चूड़ी पहने, माथे पे बिंदी खूबसूरत लग रही थी.
जब से उसने असलम का लंड चूसा है उनके वीर्य का स्वाद चखा है तबसे उत्तेजना शांत होने का नाम ही नहीं लेती थी, हमेशा चुत मे आग लगी रहती थी अभी भी कांच के सामने नंगी बैठी अपनी चुत मसल रही थी
उसे असलम का इंतज़ार था... लेकिन सब्र नहीं था.
उसे एक विचार आता है, वो कमरे मे कुछ ढूंढने लगती है, थोड़ी सी मेहनत के बाद ही उसे शराब से भरी बॉटल मिल जाती है,
वो बोत्तल पकड़ी रामनिवास के बगल मे लेट के टांग फैला लेती है... रामनिवास नशे मे बेसुध फैला पड़ा था.
रतीवती शराब कि बोत्तल उठा के अपनी फैली टांगो के बीच चुत मे पेल देती है, शराब गटा गट चुत मे सामने लगती है ना जाने कितनी गहरी चुत थी रतीवती कि, पूरी बोत्तल कि शराब चुत मे समा जाती है, शराब कि गर्मी से रतीवती चितकार उठती है, आअह्ह्ह....... असलम जल्दी आओ.
ऐसा बोल के रतीवती पास मे लेटे रामनिवास के खुले मुँह पे बैठ जाती है.
रामनिवास नशे मे बेसुध मुँह खोले सोया पड़ा था उसके मुँह पे जैसे ही दबाव बनता है वो अपना मुँह ऊपर नीचे करता है,ऊपर बैठी रतीवती अपने स्तन मसलती हुई अपनी चुत थोड़ी सी खोलती है जिस से शराब चुत से रिसती हुई रामनिवास के मुँह मे जाने लगती है.. रतीवती हद से ज्यादा गरम थी वो असलम के आने का इंतज़ार भी नहीं कर पाई थी.
रामनिवास पक्का शराबी था... अब शराबी को ओर क्या चाहिए शराब ही ना... उठते सोते सिर्फ शराब.
रामनिवास के मुँह मे दारू जाने लगती है तभी रतीवती अपनी चुत जोर लगा के बंद कर लेती है दारू रुक जाती है...
रामनिवास बेचैन हो जाता है वो जीभ निकाल निकाल के शराब ढूंढने लगता है आंख बंद किये बेसुध.
रामनिवास कि लपलापती जीभ रतीवती कि चुत पे चल रही थी, जिस वजह से रतीवती का मजा बढ़ता ही जा रहा था,उत्तेजना चरम पे पहुंच रही थी.... वो अपने स्तन को रगड़े मसले जा रही थी. वो जोर जोर से अपनी गांड रामनिवास के मुँह पे रगड़ रही थी कभी कभी चुत थोड़ी सी खोल के शराब गिरा देती, रामनिवास लालच मे आ के ओर जोर से जीभ लप लपाता... क्या खेल था वाह..
चुत से ले के गांड के छेद तक रतीवती चाटवाये जा रही थी.
तभी कमरे का दरवाजा धीरे से खुलता है, रतीवती कम्मोउत्तेजना मे पीछे मुड़ के देखती है असलम बिल्कुल नंगा दरवाजे पे खड़ा था सिर्फ मुसलमानी टोपी पहने, 9 इंच का लंड बिल्कुल तना हुआ झूल रहा था
हो भी क्यों ना जब भी असलम रतीवती से मिलता कुछ ऐसी ही स्थति मे मिलता वो बहुत सी बाते करना चाहता था लेकिन रतीवती का नंगा कामुक बदन बातो कि इजाजत कहाँ देता था वो सिर्फ सम्भोग चाहता था ओर शायद अब असलम भी यही चाहता था बिना बोले..
रतीवती असलम को देखते ही ख़ुश हो जाती है ओर दुगने जोश से गांड रामनिवास के मुँह पे घिसने लगती है जैसे घिस घिस के जिन्न ही निकाल देगी
असलम तो ये दृश्य देख के ही सन्न रह जाता है, वो जब भी सोचता कि बस एक औरत इतना ही कर सकती है तभी रतीवती उसका भ्रम तोड़ देती, बता देती कि स्त्री कि कामुकता का कोई अंत नहीं होता बरखुरदार.
आज असलम ये बात अच्छे से जान गया था.
रतीवती अपनी एक ऊँगली से असलम को अन्दर आने का इशारा करती है फिर वही ऊँगली अपनी गांड को पीछे सरका के गांड के छेद ने डाल देती है.
असलम इस रंडीपने इस कामुकता से हैरान था कि ऐसा भी होता है.... उसका लंड फटने लगा था.
वो तुरंत दरवाजा बंद कर रतीवती के बिस्तर पे चढ़ जाता है ओर अपना लंड पकड़े सीधा रतीवती कि उभरी गांड मे पेल देता है.
आआहहहहह..... असलम मार डाला.
ऐसा नहीं था कि रतीवती पहली बार गांड मे ले रही थी शादी के पहले ही वो अपनी गांड खुलवा चुकी थी गांव के लड़को से.
शादी के बाद गांड चुदाई का सुख आज मिलने वाला था
गांड मे लंड जड़ तक घुसने से चुत से शराब छलक पड़ती है, नीचे रामनिवास लेटा नशे मे लपा लप शराब पिए जा रहा था.
असलम के लिए ये गांड चुदाई का पहला मौका था वो सुबह ही रतीवती कि रसीली चुत पेल चूका था, लेकिन गांड का मजा दुगना था उसे समझते देर ना लगी.
अब हालत ये थे कि असलम पीछे से रतीवती के स्तन पकडे धका धक लंड गांड मे पेले जा रहा था, नीचे रामनिवास नशे मे चुत से शराब निकाल निकाल के पिए जा रहा था..
. रतीवती तो कामवासना से मजे मे पागल थी उसके जिंदगी मे ऐसी चुदाई कि बाहर कभी नहीं आई थी, अपने नामर्द पति के सामने चुदावाने का मजा ही अलग था.
पीछे असलम जानवर बन चूका था, वो भूल गया था कि रामनिवास नीचे लेटा हुआ है. स्तन पकड़े रतीवती के होंठो को अपने होंठ मे कैद किया चूसे जा रहा था गजब का स्वाद था रतीवती के लबों मे प्यास बुझा रहा था बरसो कि काम कि प्यास
वो तो स्तन का मर्दन किये गांड फाडे जा रहा था.... बरसाती रात मे रतीवती कि चीतकार सिसकारिया खोती जा रही थी... असलम जगह जगह काटे जा रहा था
रतीवती तो थी ही काम से भरी कामुक औरत उसे तो इस मे भी मजा था.
रतीवती आज अपने आपे मे नहीं थी... यहाँ बरसो कि प्यास बुझाई जा रही थी जो सुबह तक चली.
गांड मे सटा सट लंड जा रहा था, मोटा काला भयानक लंड... रतीवती कि बरसो कि प्यास बुझ रही थी गांड रुपी सुखी नदी मे बाढ़ आ गई थी लंड कि बाढ़
रात भर चुत गांड फाड़वाती रही रतीवती खुल के धन्यवाद बोल देना चाहती थी असलम को.
चुत से पूरी शराब निकल के रामनिवास के हलक मे उतर चुकी थी ओर असलम का वीर्य रतीवती के हलक, गांड, चुत मे चला गया था कितना गया पता नहीं.
सभी छेद लबा लब भर गए थे. दोनों छेद खुल के दोगुने चोड़े हो गये थे.
सुबह हो चुकी थी.... असलम कब का जा चूका था रतीवती नहा धो के तैयार हो गई थी.... रामनिवास ने रात भर दारू पी थी तो अभी तक सोया पड़ा था.
आज असलम का अंतिम दिन था
खूब खरीदारी हुई, सारे इंतेज़ाम कर चूका था, कोई कमी नहीं रह गई थी.... परन्तु आज अंतिम दिन मे रतीवती ओर असलम को कोई मौका नहीं मिल पाया सम्भोग का जिस वजह से रतीवती थोड़ी उखड़ी हुई थी... उसके बाद असलम अपने गांव विष रूप लौट गये.
आज मंगलवार था
ठाकुर कि शादी का दिन, जिस दिन का सभी को इंतज़ार था.
ठाकुर :- अरे हरामखोरो कमीनो कहाँ मर गये सालो सब....जल्दी चलो आज ही वापस आना है वरना विदाई नहीं हो पायेगी... फिर मुहर्त नहीं है
ठाकुर बड़बड़ये जा रहा था.
भूरी :- चिंता मत कीजिये ठाकुर साहेब सब तैयारी हो गई है,उन तीनो ने सब सामान लाद दिया है घोड़ा गाड़ी मे. आप कामवती को ब्याह के लाये बाकि तैयारी मै देख लुंगी.
कालू बिल्लू रामु तीनो ही तैयारी मे व्यस्थ थे, एक पल का चैन नहीं था....शादी मे सब लोग इतना बिजी रहे कि वापस भूरी को पाने का मौका ही नहीं मिला था किसी को भी.
कालू :-चलो भाइयों नई ठकुराइन लेने, वो आएगी तो ठाकुर साहेब थोड़ा व्यस्त हो जायेंगे ओर हमें भी कुछ मौका मिल जायेगा भूरी काकी कि लेने का हाहाहा....
तीनो हस पड़ते है
पीछे से हरामखोरों यहाँ हस रहे हो चलना नहीं है.
ठाकुर साहेब कि रोबदार आवाज़ से तीनो को सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है लेकिन शुक्र है कि काकी वाली बात नहीं सुन पाए ठाकुर साहेब
रामु :- ज़ी मालिक सब तैयारी ही गई है आप आदेश दे निकाल जाते है.
ठाकुर :- बस डॉ. असलम आ जाये निकलते ही है..
डॉ. असलम ओर बाकि मेहमान कुछ गांव वाले सब आ जाते है...
इन सब के बीच चुपके से कोई रेंगता हुआ सामान लदी घोड़ा गाड़ी मे चढ़ चूका था, " आखिर वो घड़ी आ ही गई, मै भी तो देखु कौन सी कामवती है ये "
बारात निकल चली थी,खूब गाजे बाजे के साथ ठाकुर कि बरात निकल चली थी...
चैप्टर -1 ठाकुर कि शादी
समाप्त
चैप्टर -2 कामवती का पुनःजन्म
आरम्भ...
बने रहिये कथा जारी है...