• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Adultery ठाकुर ज़ालिम और इच्छाधारी नाग

आपका सबसे पसंदीदा चरित्र कौनसा है?

  • कामवती

  • रतिवती

  • रुखसाना

  • भूरी काकी

  • रूपवती

  • इस्पेक्टर काम्या

  • चोर मंगूस

  • ठाकुर ज़ालिम सिंह /जलन सिंह

  • नागेंद्र

  • वीरा

  • रंगा बिल्ला


Results are only viewable after voting.

andypndy

Active Member
711
2,947
139
सॉरी दोस्तों आज संडे था तो सिर्फ एक ही अपडेट दे पा रहा हूँ,
लेकिन अब यहाँ से सभी रहस्ययो से पर्दा उठेगा.
कामवती कि कहानी कही जाएगी.
चैप्टर -2 स्टार्ट हो चूका है तो बने रहिये 👍🙏
 

andypndy

Active Member
711
2,947
139
चैप्टर -2 नागवंश और घुड़वंश कि दुश्मनी , अपडेट -15

वीरा लगातार दोड़े जा रहा था.... तूफानी रफ्तार थी उसकी
वीरा आज से 15 साल पहले रूपवती को जंगल मे घायल अवस्था मे मरने कि हालत मे मिला था, वीरा के पुरे शरीर मे जहर फैला हुआ था.
रूपवती उस वक़्त कच्ची जवानी कि दहलीज पे थी, दिल मे दयालुता थी... जंगल वो अपने पिता कसाथ शिकार पे आई हुई थी.... तभी उसकी नजर एक काले घोड़े पे पड़ती है जो दर्द से तड़प रहा था.
उस दिन वीरा मर ही जाता यदि रूपवती उसे अपने साथ हवेली ना ले अति... उसका उपचार ना कराती.
तब से आज तक वीरा हद से ज्यादा रूपवती का वफादार था... परन्तुआज उसे ऐसा क्या हुआ कि वो कामवती का नाम सुनते ही खुद को ना रोक सका दौड़ चला कामगंज कि ओर...
उसके मन मे कई सवाल उठ रहे थे जिसका जवाब वो खुद ही दे रहा था... " हे घुड़ देव ये वही कामवती निकले जिसकी मुझे 1000 सालो से तलाश है इसकी ही प्रतीक्षा किये मे ये नरक जैसा जीवन भोग रहा हूँ. कृपा करना घुड़ देव.... वीरा कामगंज कि दहलीज पे पहुंच चूका था...
ठाकुर कि बारात भी गांव कि दहलीज पे आ चुकी थी अब वीरा भी बारात मे शामिल था...
सब को एक ही जगह जाना था "कामवती के घर "

घर पे कामवती तैयार हो चुकी थी, क्या रूप निखर के आया था.. लगता था जैसे लाल जोड़े मे कोई स्वर्ग कि अप्सरा उतर आई है.
गहनो से लदी, तंग चोली मे कसे हुए मदमस्त दो गोल आकृतिया, नीचे सपाट गोरा पेट, नाभी से नीचे बंधा हुआ लहंगा. जो देखता देखता ही रह गया.
सखियाँ कामवती को देख हैरान थी कोई चुटकी ले रहा था तो कोई हिदायत दे रहा था.
"ठाकुर साहेब तो देखते ही गश खा जायेंगे "
एक सखी :- देखो कामवती सुहागरात को जैसा ठाकुर साहेब कहे वैसा ही करना.
लेकिन कामवती को जैसे इन सब बातो मे कोई दिलचस्पी ही नहीं थी, सुहागरात क्या है उसे पता था उसने पहले भी अपने शादी सुदा सहेलियों से सुना था परन्तु ये सब सुन क भी उसके दिल मे ना कोई हुक उठती थी ना ही कोई उत्तेजना आती थी.
कैसी स्त्री थी कामवती? नाम तो कामवती परन्तु काम कि लेश मात्र भी कोई इच्छा नहीं.
ऐसे कैसे हो सकता है?
खेर ठाकुर कि बारात दरवाजे आ चुकी थी.... रामनिवास के घर हड़कंप मचा हुआ था कोई स्वागत कर रहा था तो कोई खाने पीने कि तैयारी मे था.
रुखसाना जो कामगंज कि ही रहने वाली थी वो भी मौलवी साहेब म साथ रामनिवास क घर मौजूद थी..
अचानक उसकी नजर रंगा पे पड़ती है जो कि मजदूरों क साथ सामान अंदर रखवा रहा था.
दोनों कि नजर मिलती है और नजरों मे ही कुछ बाते हो जाती है.
तीन प्राणी और बेचैन थे एक ठाकुर साहेब जो अपनी होने वाली बीवी को देख लेना चाहते थे.
दूसरा वीरा जो कि देखना चाहता था कि कौन है ये कामवती.
तीसरा फलो कि टोकरी मै बैठा कामवती को देख लेने का ही इंतज़ार कर रहा था.
तभी पंडित ज़ी घोसणा करते है कि ठाकुर साहेब मंडप मे बठिये, और दुल्हन को लाया जाये.
रतीवती अपनी बेटी क साथ मंडप कि और चली आ रही थी... वाह कहना मुश्किल था कि माँ ज्यादा जवान है या बेटी ज्यादा खूबसूरत.
असलम तो जैसे ही रतीवती को देखता है उसकी बांन्छे खिल उठती है, जाते वक़्त भी रतीवती का साथ नहीं मिल पाया था उसे आजरात ही कोई मौका ढूंढना था..
रतीवती पे चोर मंगूस भी नजर टिकाये था.. क्या औरत है ये लगता है जैसे इसकी जवानी फटने पे आतुर है.
रतीवती अपनी बड़ी गांड हिलती कामवती को मंडप तक ले आती है और असलम के पास आ क बैठ जाती है.
वो बहुत ख़ुश थी डॉ. असलम को देखते ही उसकी चुत को चीटिया खाने लगती थी...
जैसे ही कामवती मंडप मे बैठती है एक जोर का हवा का झोंका आता है और उसका घूँघट उड़ जाता है ऐसा हसीन चेहरा देख के ठाकुर साहेब के होश उड़ जाते है..
ठाकुर :- कितना नसीब वाला हूँ मै जो कामवती जैसी सुन्दर स्त्री मिली...
वही दो और लोगो ने जैसे ही कामवती को देखा उनके तो दिलो पे बिजली गिरने लगी, उनकी बरसो कि तलाश पूरी ही चुकी थी..
वीरा :- वही है वही है.... यही है मेरी कामवती जिसकी मुझे तलाश थी धन्यवाद घुड़ देव इतने सालो बाद कामवती का पता चल ही गया.
टोकरी मे बैठा प्राणी :- हे नाग देव कही मै सपना तो नहीं देख रहा यही तो है मेरी कामवती जिसकी मुझे तलाश थी.
अब मेरा जीवन सफल होगा, मेरी शक्तियां वापस लौट आएंगी.
दोंनो कि बांन्छे खिली हुई थी.... परन्तु जैसे ही वीरा कि नजर उस प्राणी से मिलती है
उन दोनों का चेहरा घृणा और नफरत से भर जाता है.
वीरा :- ये मनहूस यहाँ कहाँ से आ गया? क्या इसने भी कामवती को देख लिया है.
परन्तु इस बात कामवती को मै हासिल कर क रहूँगा और इस सपोले नागेंद्र को मिलेगी मौत.
नागेंद्र :- ये कमीना अभी भी जिन्दा है, पर कैसे मैंने तो इसके बदन मे इतना जहर भर दिया था कि इसका मरना तय था.
खेर इस बार ये नहीं बचेगा कामवती मेरी ही रानी बनेगी. नफरत से वीरा कि तरफ फूंकार देता है.
वीरा का रुकना अब व्यर्थ था उसे जो देखना था देख चूका था वो वापस घुड़पुर कि और दौड़ चलता है रूपवती कि हवेली कि ओर...
पंडित मंत्रोउच्चारण मे लगे थे, शादी हो रही थी.. तभी रतीवती पेशाब का बहाना कर के उठ चलती है, घर के पीछे उसे चुत कि गर्मी सहन नहीं हो रही थी.... असलम पास हो ओर वो सम्भोग से अछूती रह जाये ये गवारा नहीं था
गली के मुहने पे खड़ी हो वो पीछे पलट क असलम कि ओर देखती है ओर एक हाथ अपने स्तन पे रख क हल्का सा मसल देती है.
असलम उसकी ऐसी निडरता पे हैरान था, इतने लोग होने क बावजूद भी उसे अपनी प्यास बुझानी थी...
डॉ. असलम कामुक औरत को ज्ञान ले रहे थे उन्हें समझ आ रहा था कि जब हवास हावी होती है तो जगह मौका नहीं देखा करती.
ऊपर से रतीवती जैसे औरत ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहती थी क्युकी आज कि रात थी सिर्फ फिर पता नहीं असलम कब मिलेंगे.
थोड़ी देर बाद असलम भी बहाने से उठ कर गली से लग के अँधेरे मे खो जाते है.
असलम जैसे ही घर के पीछे पहुँचता है भोचक्का रह जाता है. रतीवती हमेशा ही उसके होश उड़ा दिया करती थी... आज भी वो अपना ब्लाउज खोले खड़ी थी साड़ी सिर्फ उसकी कमर मे लिपटी पड़ी थी
20210802-203826.jpg

असलम को देखते ही उसे अपने पास आने का इशारा करती है असलम आ चूका था बिल्कुल नजदीक, असलम कि सांसे रतीवती क गोल सुडोल स्तन पे तीर कि तरह लग रही थी, असलम कि लम्बाई ही इतनी थी.
रतीवती प्यासी थी बहुत प्यासी... वो असलम का सर पकड़ धड़ाम से अपने स्तन क बीच दे मरती है
रतीवती :- असलम ज़ी सब्र नहीं होता पीजिये इसे, काटिये इसे...और अपना एक स्तन पकड़ के उसके मुँह मे दे देती है
असलम भी गरम हो चूका था, जो ऐसा दृश्य देख के भी गरम ना हो वो नामर्द ही होगा.
असलन लपा लप स्तन चाट रहा था, काट रहा था, निप्पल को तंटो तले चबा रहा था.
रतीवती का एक हाथ तुरंत असलम के पाजामे मे कुछ टटोले लगती है... जैसे ही उसे वो खजाना मिलता है उसके मुँह से सिसकारिया निकल पड़ती है
आहहहह.... असलम ज़ी चुसिये और जोर से काटिये.
आपके लिए ही तरस रही थी मै.
रतीवती असलम के पाजामे का नाड़ा खोल देती है पजामा तो जैसे मुर्दे इंसान कि तरह भर भरा के नीचे गिर जाता है और एक जिन्न प्रकट होता है काला मोटा, भयानक लंड के रूप मे.
रतीवती तुरंत इस कालजाई लंड का अहसास पा लेना चाहती थी तुरंत अपने गोरे चूड़ी पहने हाथ से सहलाने लगती है.

असलम :- आह रतीवती... क्या कर रही हो जान ही लोगी क्या समय कम है जल्दी से साड़ी ऊपर करो.
रतीवती तुरंत घूम के चौपया बन जाती है और अपनी साड़ी कमर तक ऊपर उठा लेती है.... एक दम गोरी गांड प्रकट होती है लगता था जैसे अमवास कि रात मे चाँद निकल आया हो इस चाँद के बीच एक लकीर भी थी जो चाँद को दो भागो मे बाटती थी... इसी लकीर मे दो अनमोल खजाने छुपे थे...
20210809-151528.jpg

रतीवती के पास यही तो एक अमूल्य धरोहर थी
जिसे असलम जल्द से जल्द खोद के निकाल लेना चाहता था.
इस गोरी गांड के दर्शन पा के कोई और भी हैरान था..
चोर मंगूस तो सुबह से ही रतीवती पे नजरें टिकाये बैठा था असलम क साथ साथ उसने भी ये हरकत देख ली थी.
वो भी असलम के पूछे चल पड़ा.
चोर मंगूस ने जब ये नजारा देखा तो उसकी बांन्छे खिल गई थी... रतीवती वाकई काम कि देवी ही है.
क्या बड़ी मुलायम गांड है इसकी मजा आ गया.लेकिन अब ये मेरी है... हाहाहाहा...
तभी हलकी से आहट करता है... पीछे कामक्रीड़ा मे लिप्त असलम और रतीवती ये आवाज़ सुन के चौंक जाते है.पीछे देखते है तो गली के पास कोई आकृति दिखती है
असलम भाग के गली के मुहने पे जाता है... लेकिन वहाँ कोई नहीं था, होता भी कैसे चोर मंगूस था ही छालावा.. हो गया गायब
लेकिन इनका काम बिगाड़ गया.
रतीवती असलम खौफजदा थे कि कही कोई देख ले... अभी उचित टाइम नहीं है.. वो दोनों वापस आ के मंडप के पास बैठ जाते है.
रतीवती तो काम अग्नि मे बुरी तरह जल रही थी... उसकी उत्तेजना चरम पे थी लेकिन मंजिल तक ना पहुंच सकी.
इधर दरोगा वीर प्रताप जो कि बारात मे ही अपने हवलदार के साथ शामिल था वो बारीकी से सब पे नजर बनाये हुए था.... उनका ध्यान सब जगह था बस सामने नहीं था
इधर रुखसाना घर से बाहर जा रही थी और दरोगा वीरप्रताप घर के अंदर.
दोनों आपस मे टकरा जाते है,
वीरप्रताप :- माफ़ करना बहन मैंने देखा नहीं.
रुखसाना : कोई बात नहीं मेरी भी गलती है माफ़ कीजियेगा
उठते वक़्त जैसे ही उनकी नजर पड़ती, दोनों के मन मे विचार उत्पन्न होता है... इसे तो कही देखा है?कौन है कहाँ देखा है? समझ नहीं आ रहा?
रुखसाना बाहर को चल पड़ती है और दरोगा घर के अंदर..

तभी अंदर पंडित घोषणा करते है कि शादी संपन्न हुई, दूल्हा दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाये... और विदाई आज ही होनी चाहिए ठाकुर साहेब वरना बढ़ा अपशुकुन होगा.
ठाकुर :- सब समय पे होगा पंडित ज़ी...
रुखसाना .. अपनी सोच मे आगे बढ़ती जाती है कहाँ देखा है कहाँ देखा है उस आदमी को..
अचानक उसे याद आ जाता है अरे हाँ ये तो दरोगा वीर प्रताप सिंह है मेरे पति कि मौत पे घर आये थे परन्तु ये यहाँ क्या कर रहे है....
कही कही कही.... इन्हे रंगा बिल्ला के बारे मे तो कोई खबर नहीं.
मुझे रंगा बिल्ला को बचाना होगा.. रुखसाना वापस रामनिवास के घर दौड़ पड़ती है.. रंगा को सचेत करने.
क्या रुखसाना पहुंच पायेगी?
रंगा बिल्ला कामयाब होंगे?
बने रहिये कथा जारी है..
 
Last edited:

Napster

Well-Known Member
5,428
14,719
188
बहुत ही शानदार जानदार रोमांचकारी और अद्भुत अपडेट है भाई मजा आ गया
क्या नागेंद्र ,विरा कामवती को पाने में कामयाब होंगे
नागेंद्र और विरा में क्या दुश्मनी हैं
चोर मंगूस और डॉ असलम में से कौन रतीवती प्यास बुझायेगा
रंगा और बिल्ला का क्या होगा
ठाकूर कामवती को अपने गाव ले के जा पायेगा
देखते हैं आगे
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

andypndy

Active Member
711
2,947
139
बहुत ही शानदार जानदार रोमांचकारी और अद्भुत अपडेट है भाई मजा आ गया
क्या नागेंद्र ,विरा कामवती को पाने में कामयाब होंगे
नागेंद्र और विरा में क्या दुश्मनी हैं
चोर मंगूस और डॉ असलम में से कौन रतीवती प्यास बुझायेगा
रंगा और बिल्ला का क्या होगा
ठाकूर कामवती को अपने गाव ले के जा पायेगा
देखते हैं आगे
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
धन्यवाद दोस्त.... बहुत सी घटनाये घट रही है, ये विदाई कि रात भारी होने वाली है 🙏
 

Curiousbull

Active Member
1,143
1,957
158
Romanchak update
 

Raj_sharma

परिवर्तनमेव स्थिरमस्ति ||❣️
Supreme
22,018
58,339
259
Great update With awesome writing skills bhai
 
Top