वह अपनी कमर को कार के वाइपर की भाँति हिला रही थी, और मेरी उंगलियाँ उसकी चूत में इंजन के पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रही थी.
“आहह अमन” वह दर्द से बोली”बड़ा मज़ा आ रहा है” “रुक क्यों गये, और करो न”शिखा अन्मनि होते हुए बोली,
मैने उंगलियाँ उसकी चूत से निकाल ली थी”यह देखो क्या है?” मैने उसके सामने हाथ नचाते हुए कहा
“ईईईई यह मुझे क्यों दिखा रहे हो?” उसने चीख कर कहा”अपने हाथ दूर करो मुझसे”
“यह तुम्हारे चूत का रस है शिखा जी, गौर से देखो मेरे हाथों की इन उंगलियों को, तुम्हारी चूत का गाढ़ा रस इन्हें कितना चिपचिपा बना रहा है” मैने मज़ाक करते कहा.
“प्लीज़ अमन मुझे यह उंगलियों से मत छूना”उसने बदन चुराते कहा
“क्यों शिखा डार्लिंग?” मैने दूसरे हाथ से उसे करीब खींचते कहा
“मुझे घिन आती है” वह छूटने की कोशिश करते बोली
“अब यह देखो
“उसने मुझे देखा और देखती रह गयी,
मैं उसके देखते देखते ही अपनी पाँचों उंगलियाँ चाट गया”तुम बहुत नमकीन हो शिखा, अब से खाने में नमक कम डाला करना”मैने उसको छेड़ते कहा
“वाश्बेसिन कहा है?” उसने कसमसा कर कहा मैने उसे वाश्बेसिन दिखाया, वह भागते हुई गयी और थोड़ी ही देर में आवाज़ आने लगी”वॅक वॅक,,आक थू” वह बाहर आई तो अपना मुँह पोछने लगी
“अरे वह तो मेरी कल की पहनी हुई अंडरवेर है” मैने कहा
उसने घबरा कर कपड़ा फेंक दिया”
हा हा हा, मैं तो मज़ाक कर रहा था”मैने हंसते हुए कहा
“तुम बहुत घिनौने हो, मेरी चूत का रस चाट गये, शर्म नहीं आती” वह दौड़ कर मेरे गले लग गयी और मुझे बिस्तर पर गिरा दिया
“तुम बहुत रसीली हो शिखा, मेरा बस चले तो तुम्हारी चूत को लॉलीपोप की तरह चौबीसों घंटे चूसा करूँ”उसको चूमते हुए मैने कहा
“लॉली पॉप तो तुम अपने दो पैरों के बीच लिए घूमते हो अमन”शिखा अपने हाथों से मेरे अंडकोष सहलाते बोली
“अच्छा मेरी गोटीयाँ तुम्हें इतनी मीठी लगती हैं?” मैने उसका हाथ पकड़ते कहा वह घुटनों के बल बैठ गयी और कहा
“अरे रसगुल्ले, गुलाब जामुन की मिठास एक तरफ और तुम्हारी गोटीयों की मिठास एक तरफ”
“अच्छा एक कम करो अपनी बटलियों नीचे करों, मैं उसकी गॅप में अपना लंड रखूँगा”मैने कहा
“हाँ चलो बड़ा मज़ा आएगा”वह उठी और अपने बाल बाँध लिए फिर ज़रा नीचे की ओर सरक कर मेरे लंड को अपने बूब्स की गॅप में भर लिया”चलो अब शुरू हो जाओ”उसने हुक्म दिया
मैं पीठ के बल बिस्तर पर लेटा था और वह मेरे उपर औंधे मुँह लेट कर मेरे लंड को अपनी मलाईदर और रसीले बूब्स के बीच दबाए जा रही थी.
मैने अपनी कमर थोड़ा उपर उठाई और मेरा लंड उसकी गॅप से निकल कर उसके मुँह तक पंहुचा, अब अंडकोष उसके गॅप में थे, मैने उसे उत्तेजित करने के लिए उसके निप्पल्स पर चुटकी काटी
“आह अमन नहीं” शिखा कराह उठी.
“क्यूँ मेरे आपके निपल्स पर चिकोटी काटने में आपको क्या आपत्ति है?” मैने उसका मज़ाक उड़ाते कहा
“प्राण नाथ, अब संभोग का आनंद उठाते मेरे शरीर के साथ यूँ खिलवाड़ करें और मैं वेदना भोगती रहूं?” उसने वैसे ही शुध हिन्दी में जवाब दिया
“क्यों? तुम्हे कौन कम्बख़्त आनंद लेने से रोकता है, तुम भी आनंद लो” उसके बूब्स को मैने हाथों से मसल्ते कहा
“आप जब मेरे शरीर को ज़ोरो से दबाएँगे तो मुझे आनंद की अनुभूति कैसे होगी?” उसने अपने बूब्स छुड़ाने की कोशिश करते कहा
“तुम्हारी कोशिश व्यर्थ है शिखा” मैने दाएँ हाथ से बूब्स दबाए और बाँया हाथ उसकी योनि चौड़ी कर उसके होठों को अपने दाँतों से काट खाया