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Adultery मैं क्या बीवी लगती हूँ तुम्हारी?

Umakant007

चरित्रं विचित्रं..
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जब मेरी आँख खुली तो शाम घिर आई थी उसके फोन पर राजन का फोन आया था और वो उस से बाल्कनी में खड़ी बतिया रही थी

मै शॉर्ट्स पहने और बाल्कनी में गया,वा मेरी ओर पीठ किए खड़ी थी, उसके बाल खुले थे और आपस में उलझे हुए थे, कमीज़ पर सिलवट पड़ी हुई थी, और सलवार पहनी नही थी, पीछे का गला काफ़ी गहरा था और उसकी गर्दन के डायन तरफ कंधे से तोड़ा नीचे एक तिल था, इस हालत में भी वह बला की खूबसूरत लग रही थी.

दबे पाँव मैं उसकी ओर गया और मुझे उसकी बातें सुनाई दी”अच्छा आज रात ऑफीस में ही रहोगे?”“क्या कहा दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रान्स्फर हो गया?”“ठीक है” कहते हुए उसने फोन काट दिया

मैने उसे पीछे से पकड़ लिया, अचानक से खुद को मेरी गिरफ़्त में देख कर वह घबरा गयी”अच्छा तुम हो मैं समझी...”

मैने उसकी बात काटते कहा”मैं समझी की वॉचमन होगा”

“छी कितनी गंदी सोच है तुम्हारी?” वह बोली

“सारे दिन मेरे साथ सेक्स किया और फिर भी पति की याद आ गयी?” मैने कहा

“नही उनका फोन आया था” उसने कहा मैं नीचे झुका और उसके कंधे के तिल को चूम कर कहा”तो आज आपके पति घर नही आएँगे?”

“हां” उसने अपने बालों को पीछे बाँधते कहा, उसने अपने मुँह में रब्बर बॅंड पकड़ा हुआ था

मैने उसके बूब्स दबाते कहा”तो फिर आज पूरी रात बॅंग बॅंग?” वह हँसे लगी, उसके मुँह से रब्बर बॅंड छूट कर नीचे गिर पड़ा, उसे उठाने वह नीचे झुकी और उसकी रेशमी काले बाल आज़ाद हो कर उसकी पीठ पर लहराने लगे.

मैने उसे उठा कर अपने बाएँ कंधे पर रख लिया और बेडरूम की तरफ बढ़ चला

“नही अमन मुझे नीचे उतारो मैं चिल्लाऊंगी”

“नही आज तो मैं तुम्हे सारी रात प्यार करूँगा” मैने उसको संभालते कहा

उसने मेरी पीठ पर काटा और गुद्दे मारने लगी

मैने उसे बेड पर लिटा दिया”शिखा जी आपका विरोध व्यर्थ है आज आप मेरे साथ कमाग्नि में जलेंगी” मैने उसकी शुद्ध हिन्दी में मज़ाक उड़ाया

“अमन जी मैं आपको सचेत कर दूं, आप मेरे पति की अनुपस्थिति में मुझसे संभोग करने की इच्छा कर रहे हैं| यह आप जैसी सभ्य पुरुष को शोभा नही देता कि आप अपने मित्र की पत्नी से रतिसुख की अपेक्षा करें”उसने मुझे चिढ़ाया

“मैं तो हूँ ही हरामी, दूसरे की बीवियों को चोद्ने में मुझे बड़ा आनंद आता है” मैने अपनी शॉर्ट्स खोलते कहा मेरा लंड उच्छल कर बाहर आ गया

“यदि ऐसा है, तो मैं उस आनंद से वंचित क्यूँ रहूं” शिखा ने कहा और मेरा लंड लपक कर पकड़ लिया”हे प्राण नाथ मैं अपने प्रेम की मुहर आप पर लगाउंगी अन्यथा न लें”उसने चुहल की

“अवश्य” मैने कहा और उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया,

मैने उसका सिर पकड़ लिया और उसके खुले बालों में अपनी उंगलियाँ फिरानी शुरू की लेकिन बाल कही कही उलझ गये थे”तुम अपने बालों का ध्यान नही रखती शिखा” मैने शिकायत करते कहा

एकदम से उसने अपने मुँह से मेरा लंड बाहर निकाला और उपर गर्दन करते मुझे देख कर कहा”यह सब आपकी कृपा है प्राण नाथ, दोपहर में आपके साथ संभोग करते समय आपके मुँह और लंड का गाढ़ा चिपचिपा द्रव्य मेरे केशों में लग गया इसी कारण मेरे केश उलझ गये” और हँसने लगी

“षट अप शिखा” मैने कहा

“विश्वास ना हो तो सूंघ कर देख लीजिए”, उसने अपने पीछे के बाल आगे कंधे पर लाते कहा

“हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या” मैने कहा

“अभी लो” और वह हँसने लगी.
 
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“ऐसी नहीं” मैने कहा”घूम कर खड़ी हो जाओं शिखा'

वह हँसने लगी”बॅक ओफिस में जॉब करना है क्या”

“पहले तुम उठो तो सही” मैने उसके कंधे पकड़ कर उठाते कहा

“जो आज्ञा प्राणनाथ” वह उठने लगी और उठते उठते उसने मेरे अंडकोष को अपने दाँतों में भींच लिया

“आह क्या कर रही हो' मैं दर्द से कराहा.

“हा हा हा”वह हँसने लगी वह घूम कर खड़ी हो गयी

“अब मेरी बारी” मैने कहा और हँसती खड़ी हुई शिखा को घुमा दिया अब उसकी पीठ मेरी तरफ थी.

“अमन तुमको तो मैने मेरे चिपके हुए बालों को सूंघने को कहा था, तुम तो मेरी गुदा में आईईईईईईई” शिखा बोलते बोलते चीखने लगी

“अब आया मज़ा?” मैने पीछे से उसके निप्पल्स मसल्ते कहा

“आह छोड़ो न अमन”वह रुआंसी हो गयी

“अपनी टांगे हटाओ”मैने कड़क आवाज़ में कहा

“क्यों” उसने दर्द भारी आवाज़ में कहा, उसके निप्पल्स मैने ज़्यादा ही जोरों से मरोड़ दिए थे

“तुम सवाल बहुत पूछती हो”कहते हुए मैने उसकी टाँग फैलाई

“अच्छा?” उसने पूछा

“हाँ, अब अपनी दाईं टाँग कुर्सी के हत्थे पर रखो” मैने उसकी जांघों में उंगलियाँ फिराते कहा

“नहीं अमन जांगों के बालों में कुछ न करो बहुत बुरी गुदगुदी होती है” उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा

“अब तो ज़रूर करूँगा”कहते हुए मैने उसकी जांघों में हाथ चलना शुरू किया

“आहह नहीं”

“हाँ बिल्कुल” मैने उसके विरोध को दरकिनार करते उसकी दाई तंग उठा कर कुर्सी के हत्थे पर रख दी.

“आहह अमन जो करना है जल्दी करों मेरी टाँग रबर की तरह लचीली नहीं है जो तुम ज़बरदस्ती चौड़ी कर रहे हो” शिखा परेशान होते बोली

“जो मैं कुछ करूँगा न शिखा, तुम्हारी दर्द भारी चीख से पूरा कमरा गूँज उठेगा”मैने उसे चेतावनी देते कहा

“रहने दो” वह अपने बालों को बाँधते हुए बोली”तुम बस बड़ी बड़ी हांकना जानते हो”

'बालों को खुला रहने दो शिखा तुम्हें चोद्ते हुए मैं उनकी खुश्बू लूँगा”मैने उसके बालों को पकड़ते कहा

“पहले बताते तो मैं गजरा लगा लेती, वैसे भी मेरे बाल तुम्हारी लिक्विड़ से उलझ कर चिपक गये हैं” उसने उलझे बालों को ठीक करते कहा

“रूको उन्हें उलझा ही रहने दो” कहते हुए मैने अपने बाएँ हाथ की उंगलियों से उसका योनि प्रदेश टटोला

'आह” वह चिहुन्क उठी”तुम्हारा नाख़ून गड़ गया”

“अभी तो बहुत कुछ गाड़ेगा”मैने कहा

“हाँ हाँ, तुम तो अपनी शेखी बघारोगे” उसने अपने चूतड़ मेरे लंड से रगड़ते कहा

“आहह शिखा, दुबारा करो” मैने कहा”तुम्हारी मक्खन जैसी गांड जब लंड से छूती है तो बदन में करंट दौड़ जाता है सच्ची” मैने कहा
 

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वह अपनी कमर को कार के वाइपर की भाँति हिला रही थी, और मेरी उंगलियाँ उसकी चूत में इंजन के पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रही थी.

“आहह अमन” वह दर्द से बोली”बड़ा मज़ा आ रहा है” “रुक क्यों गये, और करो न”शिखा अन्मनि होते हुए बोली,

मैने उंगलियाँ उसकी चूत से निकाल ली थी”यह देखो क्या है?” मैने उसके सामने हाथ नचाते हुए कहा

“ईईईई यह मुझे क्यों दिखा रहे हो?” उसने चीख कर कहा”अपने हाथ दूर करो मुझसे”

“यह तुम्हारे चूत का रस है शिखा जी, गौर से देखो मेरे हाथों की इन उंगलियों को, तुम्हारी चूत का गाढ़ा रस इन्हें कितना चिपचिपा बना रहा है” मैने मज़ाक करते कहा.

“प्लीज़ अमन मुझे यह उंगलियों से मत छूना”उसने बदन चुराते कहा

“क्यों शिखा डार्लिंग?” मैने दूसरे हाथ से उसे करीब खींचते कहा

“मुझे घिन आती है” वह छूटने की कोशिश करते बोली

“अब यह देखो

“उसने मुझे देखा और देखती रह गयी,

मैं उसके देखते देखते ही अपनी पाँचों उंगलियाँ चाट गया”तुम बहुत नमकीन हो शिखा, अब से खाने में नमक कम डाला करना”मैने उसको छेड़ते कहा

“वाश्बेसिन कहा है?” उसने कसमसा कर कहा मैने उसे वाश्बेसिन दिखाया, वह भागते हुई गयी और थोड़ी ही देर में आवाज़ आने लगी”वॅक वॅक,,आक थू” वह बाहर आई तो अपना मुँह पोछने लगी

“अरे वह तो मेरी कल की पहनी हुई अंडरवेर है” मैने कहा

उसने घबरा कर कपड़ा फेंक दिया”

हा हा हा, मैं तो मज़ाक कर रहा था”मैने हंसते हुए कहा

“तुम बहुत घिनौने हो, मेरी चूत का रस चाट गये, शर्म नहीं आती” वह दौड़ कर मेरे गले लग गयी और मुझे बिस्तर पर गिरा दिया

“तुम बहुत रसीली हो शिखा, मेरा बस चले तो तुम्हारी चूत को लॉलीपोप की तरह चौबीसों घंटे चूसा करूँ”उसको चूमते हुए मैने कहा

“लॉली पॉप तो तुम अपने दो पैरों के बीच लिए घूमते हो अमन”शिखा अपने हाथों से मेरे अंडकोष सहलाते बोली

“अच्छा मेरी गोटीयाँ तुम्हें इतनी मीठी लगती हैं?” मैने उसका हाथ पकड़ते कहा वह घुटनों के बल बैठ गयी और कहा

“अरे रसगुल्ले, गुलाब जामुन की मिठास एक तरफ और तुम्हारी गोटीयों की मिठास एक तरफ”

“अच्छा एक कम करो अपनी बटलियों नीचे करों, मैं उसकी गॅप में अपना लंड रखूँगा”मैने कहा

“हाँ चलो बड़ा मज़ा आएगा”वह उठी और अपने बाल बाँध लिए फिर ज़रा नीचे की ओर सरक कर मेरे लंड को अपने बूब्स की गॅप में भर लिया”चलो अब शुरू हो जाओ”उसने हुक्म दिया

मैं पीठ के बल बिस्तर पर लेटा था और वह मेरे उपर औंधे मुँह लेट कर मेरे लंड को अपनी मलाईदर और रसीले बूब्स के बीच दबाए जा रही थी.

मैने अपनी कमर थोड़ा उपर उठाई और मेरा लंड उसकी गॅप से निकल कर उसके मुँह तक पंहुचा, अब अंडकोष उसके गॅप में थे, मैने उसे उत्तेजित करने के लिए उसके निप्पल्स पर चुटकी काटी

“आह अमन नहीं” शिखा कराह उठी.

“क्यूँ मेरे आपके निपल्स पर चिकोटी काटने में आपको क्या आपत्ति है?” मैने उसका मज़ाक उड़ाते कहा

“प्राण नाथ, अब संभोग का आनंद उठाते मेरे शरीर के साथ यूँ खिलवाड़ करें और मैं वेदना भोगती रहूं?” उसने वैसे ही शुध हिन्दी में जवाब दिया

“क्यों? तुम्हे कौन कम्बख़्त आनंद लेने से रोकता है, तुम भी आनंद लो” उसके बूब्स को मैने हाथों से मसल्ते कहा

“आप जब मेरे शरीर को ज़ोरो से दबाएँगे तो मुझे आनंद की अनुभूति कैसे होगी?” उसने अपने बूब्स छुड़ाने की कोशिश करते कहा

“तुम्हारी कोशिश व्यर्थ है शिखा” मैने दाएँ हाथ से बूब्स दबाए और बाँया हाथ उसकी योनि चौड़ी कर उसके होठों को अपने दाँतों से काट खाया
 

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“उफ्फ आपने तो तीन जगह मोर्चा खोल दिया” शिखा मेरी बाहों में कसमसाते बोली

“प्रतिरोध ना करो शिखा, आनंद लो” मैने उसको चूमते कहा

“प्रतिरोध के बिना आनंद कैसा?” उसने कहा

“चुप, सेक्स करते बोला नही करते” मैने उसके होंठ चूमते कहा

“कौन कहता है?” उसने मुझे चूम कर मेरा चेहरा दोनो हाथों से पकड़ते बोला

कामसूत्र में लिखा है” मैने कहा और उसको दोबारा चूम लिया

“उफ्फ अमन” उसने दोबारा मेरा चेहरा अपनी हथेलियों में पकड़ कर कहा”मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूँ”

“अच्छा?” मैने कहा और दोबारा उसके होंठों को चूम लिया

“आहह अमन नहीं” उसने दोबारा मेरा चेहरा उपर उठा कर कहा”पहले मेरे सवाल का जवाब दो”

“पूछो” मैने उसकी ओर देखते कहा,

वह गंभीर हो कर मुझे देखते हुए बोली”तुमने कामसूत्र कहाँ पढ़ी मुझे भी पढ़नी है”

“क्यों? क्या करोगी जान कर? क्या सब सेक्स पोज़िशन्स अपने पति के साथ ट्राइ करोगी?” मैने उसे छेड़ते कहा

“हाँ” उसने मुस्कुराते कहा

“ठीक है लेकिन उसकी प्रॅक्टीस मेरे साथ करनी होगी” कहते हुए मैने उस पर किसेस की बौछार कर दी

बड़ी मुश्किल से उसने मुझे अपने आप से अलग किया और कहा”तो अब क्या कर रही हूँ” और पलटकर उसने अपना मुँह तकिये के नीचे छुपा लिया, उसके ऐसा करने से उसके कूल्हे उभर आए,

मैने उसके कूल्हे पर प्यार से हाथ फेरते कहा”शिखा जानेमन तुम्हारे कूल्हे कितने उठावदार हैं” मैने उसकी तारीफ करते कहा”ऐसा लगता है जैसे नदी के किनारे सफेद रेत के टीले बने हों” मैने उसके कुल्हों पर हाथ फेरते कहा

“और करो, गुदगुदी होती है” उसने अपना सिर तकिये के नीचे दबाए कहा

“क्या मुलायम गांड है तुम्हारी शिखा” मैने कहा और वह हंस दी,

मैने कुछ सोचा और उसको पूछा”वैसे शिखा?”

“हां?” उसने कहा

“तुम जब अपने बालों की चोटी बनाती हो तो वो तुम्हारे कुल्हों के नीचे तक पंहूचती होगी ना?” मैने उसकी गांड की दरार में उंगली डालते हुए पूछा

“हां, मेरे बाल बहुत लंबे हैं, हर हफ्ते शिककाई से इन्हे धोती हूँ और महँगा वाला आमला तेल लगती हूँ” उसने गर्व से कहा

“वाकई, तुम्हारे बाल बहुत अच्छे हैं” कहते हुए मैने उसके बाल हाथों में ले कर सूँघे

“अमन?” उसने पूछा

“हाँ?”

“तुम भी अपनी झाट् में तेल लगाओ न”

“क्यों?” मैने हैरत से पूछा

“मुझे तुम्हारी झाट के मोटे बाल बहुत पसंद हैं”उसने कहा और मेरी झाट के बाल पकड़ कर जोरों से खींचे

मेरी दर्द से कराह निकल पड़ी

“अमन” उसने पूछा

'हां” मैने कहा

“तुम्हे मेरे लंबे बाल इतने अच्छे लगते हैं” उसने अपने बालों को हाथों में ले कर कहा

“हां बहुत” मैने उसको दोबारा चूम लिया

“मेरी सासू माँ को भी मेरे बाल बहुत पसंद थे?” उसने दूर कहीं देखते कहा

“अब तुम्हारी सास कहाँ टपक पड़ी बीच में?” मैने झुनझूला कर कहा

“मेरी सास ने ही मुझे राजन के लिए पसंद किया था” उसने जवाब देते कहा”और उन्होने ही मुझे बालों की ग्रोथ के लिए आमला तेल लगाने को कहा था”

“अगर तुम्हारी सास तुम्हे मुझ से चुद्ते हुए देख ले तो?” मैने उसको छेड़ते हुए पूछा

“तो वो हार्ट अटॅक से ही उपर पंहुच जाएगी” कहते कहते हुए हंस पड़ी

“वाउ, मेरा तो मन करता है की तुम्हारी कुल्हों पर लटकती चोटी की गाँठ में अपना लंड डाल दूं, और तुम्हे तुम्हारी सासू माँ के सामने पटक पटक कर तुम्हारे साथ सेक्स करूँ” मैने उसको अपनी बाहों में जाकड़ लिया और अपना लंड उसकी गांड की दरार में फँसा लिया

वह ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी”ओह अमन तुम तो मुझे हंसा हंसा कर ही मार डालोगे”
 
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यह सुन कर मैने उसकी गांड में उंगली घुमाना शुरू कर दी

“छी छी कितने गंदे हो तुम” उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा

“तुम से थोडा कम” मैने उसको चिढ़ाते हुए कहा

“मैं तुमसे ज़यादा गंदी हूँ वो कैसे?” उसने आँखें चौड़ी करते कहा

“गैर मर्द से जो चुद्ति हो” मैने कहा

“तुम भी तो दूसरों की बीवियों को चोद्ते हो” उसने मुझे उंगली दिखाते कहा

“मैं तो कुँवारा हूँ, कुंवारे लड़कों को यह सब करने की छूट रहती है” कहते हुए मैने उसके दोनो पैर उपर उठा दिए

“कुँवारी तो मेरी गांड भी है” उसने कहा

“तो चोद दूं इसे?” मैने पूछा वह कुछ ना बोली, वापस अपने चेहरे पर तकिया रख लिया और हँसने लगी

“वॅसलीन है?” उसने चुप्पी तोड़ते हुए कहा

“नही अमृतंज़न है, चलेगा तुमको?”

“ना बाबा ना” उसने जीभ दाँत तले दबाते कहा”मेरी पोन्द जल जाएगी”

“क्यों गांड भी मरवानी है और जलवानी नही है?” मैने कहा”मेरा लंड भी तो जलेगा?”

'नहीं मेरी गीली गांड उसको जलने नही देगी” उसने कहा

“नहीं” मैने कहा

“हां मेरी गांड अगर मारनी है तो मेरी यही शर्त है” वह तुनक कर बोली”वॅसलीन ले आओ और मेरी पोन्द जी भर कर मार लो”

मैने ड्रावर खोला और हंस दिया .

मेरा हाथ उसने पकड़ लिया”क्या हुआ?” मैने पूछा

“वॅसलीन मत लगाओ, मैं कुछ जुगाड़ करती हूँ”उसने अपने बाल बाँधते हुए कहा

“जुगाड़?” मैने चौंक कर कहा”कैसा जुगाड़?”

“अरे बाबा तुम सवाल बहुत पूछते हो” उसने मुँह बना कर कहा

“मैं भी तो जानूं तुम चुदाई में कौन सा जुगाड़ लगाती हो” मैने कहा

“अरे बाबा कभी तो मुँह बंद रखा करो” उसने हाथ जोड़ कर कहा”और यहाँ मेरी तरफ मुँह करो”

मैने पलट कर उसकी ओर देखा

उसने अपने दाएँ हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया

मैने कहा”शिखा अब तुम्हें यह क्या सूझी?”

“तुम बस देखते जाओ” उसने तुनक कर कहा और मेरा पाँच इंची लंड मुँह मे भर लिया

“देखो दाँत मत गाड़ना” मैने उसे आगाह करते कहा

“उन्हुन्न्न” उसने मुँह में लंड भरते ही गर्दन को झटका दिया

मैने उसके बाल हाथों में पकड़ लिए और उसके मुँह में जोरों से धक्का दिया, मेरा लंड का सिरा उसके तालू से टकराया”आहह शिखा”मैने उत्तेजना से आँखें बंद कर लीं,

उसने मेरे लंड के सिरे पर अपनी जीभ का सिरा टीकाया और अंदर बाहर करने लगी,

मेरा लंड किसी फूल की भाँति खिलने लगा,
 
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दो मिनट में ही लंड के सिरे की चमड़ी उलट गयी

“ख़ौं ख़ौं”शिखा अचानक खांसने लगी,

मैने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया, लेकिन मुझे अपने लंड पर काफ़ी हल्की सी ठंडी जलन महसूस हुई, ऐसा लगा लंड पर किसी ने बाम लगा दिया हो.

“आक थू” शिखा ने बलगम वॉश बेसिन में थूकी,

मैने उसको देखा उसकी लंबी लंबी साँसे चल रहीं थी,

इधर मेरा लंड फूल कर कुप्पा हो गया था

“कैसे लगा मेरा लंड चूसना?” उसने आँखें घुमा कर मुझसे पूछा”मज़ा आया?”

“बहुत” मैने जवाब दिया.

“तो देर किस बात की?” उसने पूछा”अब तुम्हारा लंड मेरी पोन्द मारने को एकदम तैयार है”

“ठहरो” मैने कहा

“क्या हुआ?” उसने पूछा

“मेरा लंड तुम्हारे चूसने से ऐंठ गया है, ज़रा ठंडे पानी का फव्वारा मार लूँ”मैने बाथरूम की तरफ जाते कहा

“अरे नहीं उसने एंठा ही रहने दो, गांड में आसानी से जाएगा” शिखा ने मना किया

“नहीं कहीं फ्रॅक्चर हो गया तो?” मैने कहा

“पागल, शिश्न में हड्डी नहीं होती तो फ्रॅक्चर कैसे होगा?” उसने कहा

“ये शिश्न क्या है शिखा?” मैने पूछा”जीभ को संस्कृत में शिशिन कहते हैं?”

“तुम्हारा लंड”उसने गुस्से से देखते हुए कहा

“मेरा लंड तो फूल कर कुकुरमुत्ते की तरह हो गया है, तुम्हारी गांड में डालूँगा तो तुम्हें दर्द होगा” मैने प्रतिवाद करते कहा

“हूँह” उसने मुँह बनाया”और डालो ठंडा पानी अपने लंड पर, फिर तो मुरझा ही जाएगा”

“नहीं, दरअसल मेरे लंड की चमड़ी जो पलट गयी है वहाँ हवा लगने से मुझे हल्की जलन हो रही है” मैने सच कह दिया

“यह कहों की तुम्हारी फट रही है” उसने मेरा मज़ाक उड़ाते कहा

“कमाल है, गांड तो तुम्हारी मारी जानी है और मेरी फटेगी क्यों?” मैने कहा

“अहहाहा” उसने हाथ नचा कर कहा”बड़े आए मेरी गांड मारने वाले, मेरी कड़क कुँवारी गांड को तुम्हारा लंड भेद न पाएगा”

“देखते हैं” मैने कहा

“तुम तो बस दिखाते ही रहो, करो कुछ नहीं”शिखा ने तुनक कर कहा

“तुम जब अपनी गांड फैलाओगी तब न तुम्हारी गांड मारूँगा” मैने समझा कर कहा

“पेच कसने के लिए पेचकस को गड्ढे में घुसा कर कसना पड़ता है, न की गड्ढे को चौड़ा करना पड़ता है” उसने मुँह बनाते कहा

“इस तकनीकी ज्ञान के लिए शुक्रिया, वैसे ये लंड है मेरा लंड कोई पेचकस नहीं है और न तुम्हारी गांड की गहराई इतनी है कि मुझे पेच कस लाना पड़ जाए, इसके लिए तो मेरी उंगलियाँ ही काफ़ी है” मैने उसकी गांड में उंगलियाँ घुसा दी
 
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“अमन” उसने कहा”बात मेरी गांड मारने की हुई थी, गांड टटोलने की नहीं” शिखा बोली

“क्या फ़र्क पड़ता है?” मैने लापरवाही से कहा

“फ़र्क पड़ता है” उसने समझाते कहा”मेरा पेट खराब है”

“क्या?” मैने घबरा कर उंगलियाँ निकाल ली और हाथ धोने चला गया

“देखो तुम डर गये अमन” शिखा खिलखिला कर हंस पड़ी

“बात डरने की नहीं है, पूरा मूड बिगड़ सकता है” मैने उसे दबोच कर कहा

“तुम्हारा मूड तो बार बार बदलता है” शिखा पलट कर बोली

“बताने के लिए थॅंक्स, अब तुम जल्दी अपनी गांड फैलाओ वरना मेरा मूड बदल जाएगा, मैने उसको बाएँ हाथ से पेट के बल लिटाते कहा

“अरे ज़रा धीरे, तुम्हारी उंगलियाँ चुभती हैं” उसने अपनी कमर से मेरे हाथों को अलग करते कहा

“अभी इसकी आदत डाल लो शिखा, अभी तो उंगलियाँ चुभती हैं तो इतना नखरा कर रही हो जब मेरा सोटा अंदर जाएगा तो क्या करोगी?”मैने अपने लंड पर तेल लगाते कहा|

“क्या करूँगी माने?” शिखा ने पेट के बल लेटे लेते अपनी टाँगें हवा में चलाना शुरू कर दिया और मुझसे पूछा”लड़कियाँ आम तौर पर एनल सेक्स के दौरान क्या करतीं हैं?”

मैने उसकी टाँगें पकड़ते कहा”मुझे क्या पता? मैने ब्लू फिल्म में तो उनको चीखते चिल्लाते देखा है और तुम क्या करोगी यह तुम जानो”

“है न?” शिखा ने गर्दन मोड़ कर कहा”फिर इतना सोच क्या रहे हो? गांड में अपना लौडा डालो”

“तुम अपनी टाँगें हवा में चलाना तो बंद करो, तुम्हारी गांड तक कैसे पंहुचु?” मैने कहा

“यह तुम जानो” उसने भाव खाते कहा

“देखो नखरा मत दिखाओ” मैने उसे चेताया

“दिखाऊँगी” उसने बेफ़िक्र हो कर कहा

मुझे गुस्सा आ गया”मैं तुम्हारा पति नहीं जो तुम्हारा नखरा बर्दाश्त करूँ”

“तो?” उसने भौहें उचका कर कहा

“तो यह लो” कह कर मैने उसे दोबारा पलटा और अपना लंड उसकी गांड की दरार में डाल में पूरी ताक़त के संग ठेल दिया|

“आईईईईई अमन, उफ़ नहीं” वह दर्द से चीखी

“क्यों अब मज़ाक नहीं सूझ रहा तुम्हें?” मैने उसके बालों को खींचते कहा

“नही” उसने दर्द में किसी तरह जबाद दिया”

मैने पहले ही कहा था कि जब महारानी को मेरी नुकीली उंगलियाँ कमर में चुभती है तो गांड में लौडा कैसे लेंगी” मैने उसका मज़ाक उड़ाते कहा|

“आहह...तुम्हारा लौडा प्रेशर कुकर के हॅंडल की तरह चौड़ा है अमन आहह” वह दर्द से कराहती बोली

“ये लो प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाता हूँ”कहते हुए मैने उसको पहला धक्का मारा
 

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“आईईईईईईईई” वह चीख पड़ी, मेरा लौडा सचमुच उसकी गांड में गहरे तक धँस कर गड़ गया उसकी कोमल मुलायम कुंवारे गड्ढे की छुअन से मेरा लौडा कुकुरमुत्तेकी भाँति उसकी गांड में खिलने लगा

ज्यों ज्यों मेरा लंड उसकी गाँड़ में फैलता त्यों त्यों वह दर्द से दोहरी हो कर चिल्लाति”आहह अमन बस करो प्लीज़” शिखा ने तकिये के कवर को अपने हाथों से मसल्ते कहा

“सॉरी शिखा” मैने कहा”तुम्हें थोड़ा दर्द सहना होगा, मुझे अब मज़ा आ रहा है” मैने बेफ़िक्र हो कर कहा

“अरे तुम्हारे मज़े के चक्कर में मेरी गांड फट जाएगी” उसने कहा

“फटने दो, सुई धागे से सील लेना”मैने उसका मज़ाक उड़ाते कहा

“तुम ऐसे नहीं मनोगे”कहते हुए उसने एकदम से पलटी मारी,

कमरे में जैसे भूकंप आ गया मेरी आँखों के सामने एकदम से अंधेरा छा गया और लंड में तेज दर्द सा उठा.

“अमन”शिखा अपनी गर्दन को झटका देते बोली,

मेरा लंड अभी भी पूरी ताक़त से उसकी गांड की गहराइयाँ नाप रहा था

“हूँ?” मुझे उसका यूँ चुद्ते हुए बात करना पसंद न आया|

गर्दन को झटका देते ही उसके खुले बाल चेहरे पर आ गये थे, मैं शिखा को चोद्ते वक्त उसके काले लंबे बालों को हाथों में थाम कर जी भर उनकी महक सूँघा करता था और उसने अपने बालों को जब झटका दिया तो वह रेशमी बाल मेरे हाथों से छूट कर उसके चेहरे पर लहराने लगे|



शिखा ही नहीं जितनी भी सुंदर लड़कियों या कहूँ स्त्रियों को मैने चोदा है, मुझे उनके काले लंबे घने बालों ने उनकी ओर आकर्षित किया है, किसी ने सच ही कहा है पारंपरिक साड़ी में भारतीय नारी जितनी आकर्षक लगती है उतनी और किसी में नहीं|




खैर कहानी पर आते हैं, शिखा के बालों से उठती महक मुझे मदहोश कर देती थी जिससे मैं और उत्तेजित हो जाता था और मेरा लंड फूल जाता था, लेकिन वह बार बार अपने बाल मुझसे छुड़ा रही थी, वह अपने बलों का खास ख्याल रखती थी और मैं चाहे उसके पूरे नंगे बदन पर हाथ फेर लूँ लेकिन उसे मेरा उसके बालों को पकड़ना और सूंघना गंवारा नहीं था और मेरा मूड तो उसके बालों की खुश्बू लिए बगैर बनता नहीं था,



वह इससे गुस्सा हो जाती तो मेरा लंड पकड़ कर मरोड़ देती.
 
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Umakant007

चरित्रं विचित्रं..
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इस बार भी जब मैने उसके बालों की सुगंध लेने के लिए अपनी नाक उसके सिर से टकराई तो वह भड़क ही गयी, फ़ौरन अपने घुटनों से उठते हुए बोली”अमन कितनी बार कहा है मुझे तुम्हारा यूँ सूंघना पसंद नहीं?”



उसके यूँ एकदम झटके से उठने से मेरा नाज़ुक लंड उसकी गांड की दीवारों से टकरा गया, मुझे संभलने तक का मौका न मिला| और लंड में दर्द की टीस सी उठी और मैं कराह उठा”आहह शिखा” दर्द की लहर मेरे लंड से होती हुई सीधे दिमाग़ में पंहुची .नाख़ून के इर्द गिर्द की चमड़ी छीलने और उस पर ठंडा पानी पड़ने से कैसी जलन होती है? वैसी ही तेज जलन इस वक्त मेरे लंड पर हो रही थी जो बर्दाश्त से बाहर थी



“अमन” शिखा बड़े प्यार से बोली”अब फील हुआ? मुझे भी ऐसी ही झुन्झुलाहट होती है”“हा हा हा” वह मेरी फ़ज़ीहत पर बड़ी बेशर्मी से हँसने लगी



“क्या चूतियापा मचा रखा है तुमने शिखा?” मैने थोडा गुस्से से कहा, एक तो लंड की तेज़ जलन से बुरा हाल था दूसरे वह मुझे उसके बालों की खुश्बू लेने नहीं दे रही थी जिससे मैं सेक्स में इंटेरेस्ट खो रहा था और मेरा लंड की चमड़ी हवा निकले हुए गुब्बारे जैसी ढीली पड़ रही थी, उसकी चूत से तो धाराएँ निकल रहीं थी जो मेरे लंड की खुली हुई चमड़ी को और जला रही थी|



शिखा की रसीली चूत का पानी मानों गंधक का तेज़ाब लग रहा था, जब लंड की चमड़ी से छूता, लगता था लंड को गर्म तेल के कड़ाहे में डाला हो. अब तो मेरा दिमाग़ खराब हो गया था



“शिखा चुद्ना है या नहीं सीधी तरह बताओ” मैने उसको सुनाते हुए कहा”मज़ाक करना है राजन के साथ करो, मैं तुम्हारा पति नहीं हूँ” मैने गुस्से से कहा



“आहाहाहा अमन”उसने अपना चूड़ियों से भरा हाथ नचा कर कहा मैं तुम्हारे घर में आ कर तुम्हारे बिस्तर पर यूँ नंगी लेटी हुई हूँ, तुम जैसे गैर मर्द से अपनी गांड मरवा रहीं हूँ, क्या ये सुनने के लिए कि मेरा चुदने का मूड नहीं है”



“और क्या? तुम बार बार अपने बालों को झटका क्यों दे रही हो” मैने कहा



“मुझे तुम्हारा मेरे बालों को सूंघना पसंद नहीं आता”“क्यों? इससे मेरा मूड बनता है”



“मूड बनाने के और तरीके हैं” शिखा समझाते बोली



“वह क्या?” मैने पूछा



“मेरी चूत को प्यार से चाट कर, मेरे मम्मों को दबाओ उन्हें मस्लो और मेरी गांड को प्यार से सहलाओ, लेकिन तुम? तुम ऐसा कुछ भी नहीं करते” शिखा ने मुझसे शिकायत करते कहा

“तुम अपना मूड बनाने की बात कह रही हो और तो तुम मेरा मूड बिगाड़ रही हो” मैने गुस्से से कहा



“अच्छा बाबा मेरी ग़लती” उसने मेरे सामने हाथ जोड़ कर कहा सोचिए उस दृश्य को अपनी आँखों के सामने लाइए, आपकी स्वप्न सुंदरी अर्धनग्न हो कर अपने अस्त व्यस्त बालों को ले कर आपके सामने हाथ जोड़ कर आपसे संभोग करने की विनती करे तो आप क्या करेंगे?



उसके आपस में जुड़े हुए हाथों को अपने हाथों से पकड़ते हुए मैने उसकी ओर देखा, वह अपनी लाल मुलायम पतली से जीभ दांतो के बीच अपने सुर्ख गुलाबी होठों से दबाए मुस्कुरा रही थी, साफ था की वह नखरा कर रही थी|



“अब मान भी जाओ ना” उसने मुझे मनाते हुए कहा”ऐसे नही पहले अपने कान पॅक्डो और 10 उठक बैठक लगाओ” मैने कहा उसने अपने कान पकड़े और उठक बैठक लगाने लगी,



मैने उसे बाहों में भर लिया और बेतहाशा चूमने लगा.





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