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आप केसी सेक्स स्टोरी पढना चाहते है. ??

  • माँ - बेटा

  • भाई - बहेन

  • देवर - भाभी

  • दामाद – सासु

  • ससुर – बहु


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junglecouple1984

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मेरी बीवी अपने भाई से चुदने लगी थी




मेरा नाम अजय है. मैं पुणे का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 48 साल है.

मेरी वाइफ का नाम ज्योति है. उसकी उम्र 36 साल है.
वह देखने में हॉट और सेक्सी है. उसकी गांड 34 साइज की है. बूब्स 32 इंच के हैं.

ज्योति दिखने में इतनी ज्यादा सुंदर है कि उसे कोई भी बस एक बार देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए.

यह मेरी बेवफा बीवी की कहानी 14 साल पहले की है.
तब ज्योति की उम्र 22 साल थी और मैं 34 का था.
हमारा एक बेटा था, उसकी उम्र एक साल की थी.

मैं एक कंपनी में जॉब करता था.
मेरी ड्यूटी हर महीने 15 दिन रात की पाली में और 15 दिन दिन की पाली में होती थी.

रात की पाली 11 बजे रात से सुबह 7 बजे तक और दिन की पाली दोपहर को 3 बजे से रात 11 बजे तक रहती थी.

उन्हीं दिनों एक ऐसी घटना हुई कि हमारी जिन्दगी बदल गई.
उस दिन ज्योति का चचेरा बड़ा भाई विजय मेरे घर आया था.

विजय की उम्र 36 साल थी.
उसकी जॉब पूना में ट्रांसफर हुई थी.

वह 6 फिट का ऊंचे कद वाला बंदा था, दिखने में काला था, उसकी बॉडी किसी पहलवान के जैसी थी.

उस दिन वह अचानक ही मेरे घर आया था तो मैंने उससे पूछा- आज यहां कैसे?
उसने कहा- यहां मेरा ट्रांसफर हुआ है. अब यहीं कहीं किराए से एक घर देख रहा हूँ.
मैंने कहा- अरे यार यहीं रहो ना, बड़ा घर है, दो बेडरूम हैं. तुम्हारा पैसा भी बचेगा और ज्योति को कंपनी भी हो जाएगी.

वह तैयार हो गया और ‘कल मैं अपना सामान लेकर आता हूँ’ कहकर चला गया.

दूसरे दिन वह अपना सामान लेकर आ गया.
मेरी बीवी ज्योति उसे देख कर बहुत खुश हुई.

भईया भईया कहकर वह उसे सामान सहित दूसरे बेडरूम में ले गई.

ऐसे ही तीन महीने गुजर गए.
ज्योति अब ज्यादा खुश लगती थी.

एक दिन मैंने देखा उसने नई ब्रा और पैंटी खरीद ली थी जो एक जालीदार और वन पीस थी.
इस तरह की अंडरगारमेंट्स को मैंने पोर्न एक्ट्रेस को पहने देखा था.

मैंने उससे पूछा- ये कब लाई? मैंने तो लाकर नहीं दी!
तब उसने कहा- भैया की सैलरी की पेमेंट हुई, तो उन्होंने मुझे रूपए दिए थे. उन्हीं रुपयों से मैं यह लेकर आई.

मैं कुछ नहीं बोला.
मैंने सोचा कि चलो अच्छा हुआ, मेरे पैसे बच गए.

ऐसे ही चार महीने और गुजर गए.

मुझे उसके बूब्स और गांड बड़े दिखने लगे.
वह अब और ज्यादा हॉट लगने लगी थी.

एक दिन मेरी नाइट शिफ्ट थी.
ग्यारह बजे मैं काम पर चला गया.

सुबह सात बजे मुझे वापस आना था.
पर सुबह के तीन बजे मुझे अपनी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी तो छुट्टी लेकर घर आ गया.

मैंने बेल बजाई, कोई नहीं आया.

दो तीन बार बजाई तो ज्योति आई.
वह घबराई हुई थी.

मैंने पूछा- इतनी देर क्यों?
उसने कहा- मैं गहरी नींद में थी. तुम्हें क्या हुआ … इस वक्त कैसे?
मैंने कहा- कुछ तबियत ठीक नहीं लग रही थी इसलिए आ गया.

मैं अन्दर आ गया और सोफे पर बैठ गया.
मैंने ज्योति से कहा- चाय बनाकर लाओ जान!

ज्योति किचन की तरफ जाने लगी, तो मेरा ध्यान उसकी गांड की तरफ गया.
उसने सिल्की गाउन पहना था. लेकिन मेरा ध्यान गया कि पीछे से उसका गाउन गांड के चीरे पर अटका था.

मैंने देखा कि उसके पैर के पीछे पांव के पास से कुछ बह रहा है. वह जमीन पर गिर रहा था.
ज्योति किचन में गई, तो मैंने उस जगह पर जाकर देखा. वह कुछ चिपचिपा पदार्थ था.

मैंने उंगली से टच करके देखा तो वह ज्योति की चूत का पानी था.
मैं स्तब्ध रह गया.

में जल्दी से अपने बेडरूम की तरफ गया.

उधर मुन्ना सो रहा था. बेड के ऊपर की बेडशीट ऐसी साफ सुथरी बिछी हुई थी मानो उस पर कोई सोया ही नहीं हो.
यदि ऐसा था तो फिर ज्योति कहां सोई थी.

अब मुझे शक हुआ.
मैं धीरे से ज्योति के विजय भैया के बेडरूम की तरफ गया.

उसके बेडरूम की लाईट चालू थी और विजय दूसरी तरफ मुँह करके सोया था या शायद सोने का बहाना कर रहा था.
लेकिन उसके बेड की हालत ऐसी थी, जैसे वहां कुश्ती हुई हो.

तभी मेरा ध्यान बेड के नीचे गया तो वहां ज्योति की रेड कलर की वन पीस ब्रा पैंटी पड़ी थी, साथ में विजय की अंडरवियर भी पड़ी थी.

यानि भाई बहन की चुदाई पार्टी हुई थी.

न जाने क्यों … गुस्सा होने की जगह मैं उत्तेजित हो रहा था. मेरा लंड खड़ा होकर फनफनाने लगा था.
मुझे खुशी हो रही थी.

मैं अब किचन की तरफ गया.
ज्योति चाय बना रही थी.

मैं पीछे से गया और पीछे से ही उसे अपनी बांहों में भर लिया. मैं उसके मम्मे दबाने लगा तो वह कसमसाने लगी.

ज्योति धीरे से बोली- भैया जाग जाएंगे. बेडरूम में चलिए, वहीं आकर मुझे चोद लेना … पर यहां नहीं.

मैंने ज्योति को अपनी बांहों में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया.
उसे मैंने बेड पर लिटा दिया और उसके कपड़े उतारने लगा.

वह बोली- ऐसे नहीं पहले लाइट बंद करो.
मैंने कहा- तुझे तो उजाले में चुदना पसंद है ना!
वह बोली- हां लेकिन … अरे भैया घर पर हैं. वे जाग गए तो … एक काम करती हूँ कि तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांध देती हूँ. फिर जितना चाहे चोद देना मुझे.

मुझे उसका यह बोलना आज कुछ अजीब सा लग रहा था कि साला आंख पर पट्टी बांध देने से इसका भैया कैसे नहीं जागेगा.
पर आज मुझे उसे चोदना ही था.
मैं ओके कह कर अलग हो गया.

वह अलमारी में से पट्टी लेकर आई और उसने वह पट्टी मेरी आंखों में बांध दी.

अब वह मेरे सामने आई और मुझे किस करने लगी.

उसे किस करते-करते मैंने अपनी आंखों की पट्टी ढीली कर दी.
मुझे पट्टी के नीचे से साफ दिखाई देने लगा.

मैंने उसका गाउन ऊपर करके निकाला.
सामने नजारा देख कर मैं देख कर चौंक गया.

उसके मम्मों पर दांतों के काटने के निशान थे जो ताजा-तरीन थे.

मैं अब पूरी तरह से समझ गया था कि ज्योति को विजय ने जमकर चोदा है.
लेकिन अब भी मुझे गुस्से की जगह यह सब मस्त लग रहा था.

मैं उसके बूब्स दबाकर चूस रहा था और ज्योति मचल रही थी.
वह मस्ती में कह रही थी- आहहह ओह मजा आ रहा है जानू … और जोर से दबा कर चूसो जानू … खा खाओ मेरे मम्मे को … आह काटो जोर जोर से.

मैं दूध को चूसने लगा और काटने लगा.
ज्योति सिसियाई जा रही थी- आह इस्स आहह … ऑऑ ओऊ ऊऊ ओह जान … मजा आ रहा है.

उसके मम्मों को दबाते और जीभ चाटते हुए मैं नीचे आ रहा था.

मैं उसकी नाभि के अन्दर जीभ डालने लगा.
मुझे उसकी नाभि भी आज बड़ी हुई नज़र आ रही थी.

नाभि के अन्दर जीभ डालते ही वह तड़पने लगी.
वह अपने हाथों से बेडशीट खींचने लगी और अपने सर को यहां वहां करने लगी.

उसके बाद मैं नीचे चूत तक आने लगा.
चूत साफ सुथरी की हुई थी. उस पर झांट का एक भी बाल नज़र नहीं आ रहा था.

फिर मैं चूत की पंखुड़ियों के पास गया.
उधर देखा तो चौंक गया.

ओह माई गॉड … मेरी बीवी की चूत की पंखुड़ियां फूली हुई थीं और उसके ऊपर भी दांतों के काटने के निशान थे.

न जाने क्यों … मुझे यह सब देखकर मजा आ रहा था.
मैं उसकी चूत की पंखुड़ियों को चाटने लगा.
मुझे मस्त लग रहा था.

दस मिनट तक चाटने के बाद ज्योति चिल्लाई- आह मेरी चूत को काटो भैया!
मैं स्तब्ध रह गया … लेकिन वह चुदाई के नशे में थी.

मैं और जोर जोर से काटने लगा.
ज्योति गांड उठा उठा कर अपनी चूत मेरे मुँह पर दबाने लगी.

फिर मैंने उसके दोनों पैर फैला दिए.
ओह माई गॉड … उसकी चूत पूरी तरह से फैल गई थी.
ऐसा लग रहा था, जैसे वह घोड़े के लंड से चुदी हुई हो.
उसकी चूत में से पानी बह रहा था.

ज्योति फिर से चिल्लाई- चूत को चाटो भैया, खा जाओ मेरी चूत को … चाटो चाटो.
मैं फिर से चुत चाटने लगा.

वह गांड उठा उठा कर चूत चटवाने लगी थी.
लेकिन मुझे चूत में से आने वाला पानी मिक्स लगने लगा था, जैसे ज्योति का और विजय का वीर्य मिक्स हुआ हो.

तभी ज्योति बोली- भईया चूत का पानी मेरे मुँह में डालो.
मैंने चूत में का पानी अपने मुँह में भर लिया, जिसमें विजय का वीर्य भी मिक्स था.

मैं उस पानी को अपने मुँह में लेकर ज्योति के पास गया.
उसने मुँह खोलने के लिए आंखें खोलीं और मुझे देखकर सकपका गई.

मैंने जानबूझकर उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया.
ताकि उसे ऐसा लगे कि मैंने जैसे भैया का जिक्र सुना ही ना हो.
उसने मुँह खोला, तो मैंने सब पानी उसके मुँह में डाल दिया और उसके मुँह को चूसने लगा.

ज्योति की चूत का पानी और विजय का वीर्य हम दोनों के मुँह में घुलने लगा.

अब ज्योति जैसे पागल हो गई, वह जोर जोर से उस पानी को पीने लगी.
उसने इस बार विजय नाम तो नहीं लिया लेकिन शायद वह भी मेरे जैसे ही विजय के नाम को याद करके गर्मा गई थी.

कुछ देर बाद मैंने उसकी जीभ को अपने मुँह में भर लिया और जीभ को चूसने लगा.
वह भी कामातुर हो गई थी और उसकी चुदास लगातार बढ़ती ही जा रही थी.

कुछ देर बाद वह मेरे लंड को पकड़ने लगी और उसे मुठियाने लगी.
मैंने अब उसे चित लिटाया और उसकी चुत में लंड पेल दिया.

उसने बड़े आराम से लंड लील लिया और गांड ऊपर करके मेरे लंड को अपनी चुत की जड़ तक लेने की कोशिश करने लगी.

उसकी हरकत देख कर मुझे समझ आ गया कि विजय का लंड मुझसे काफी बड़ा होगा और शायद मोटा भी ज्यादा होगा, जिस वजह से ज्योति को मोटा लंड लेने की आदत हो गई है.

आज तो उसकी चुत अभी कुछ समय पहले ही अपने भाई के मोटे लंबे लंड से चुद कर आई थी, तो उसकी चुत ढीली थी.

मेरा लंड उसकी चुत को शायद मजा नहीं दे रहा था.
तो मैंने आसन बदला और उसे अपने ऊपर आने का कहा.
वह लपक कर मेरे लौड़े पर बैठ गई और पूरा लंड चुत में खाकर गांड उछाल उछाल कर लंड लेने लगी.

उसकी चूचियां गजब हिल रही थीं.
मैं उसकी आंखों में वासना से देखे जा रहा था और वह भी मेरी आंखों में किसी भूखी रांड सी देखे जा रही थी.

मैंने एक हाथ से उसके एक दूध को पकड़ा तो वह मेरे ऊपर झुक गई और अपने एक दूध को मेरे मुँह में देने की कोशिश करने लगी.

मैंने भी उसके दूध के निप्पल को अपने होंठों में दबाया और खींचते हुए गांड उठाने लगा.
वह तुरंत स्थिर हो गई और उसने अब मेरे लौड़े पर अपनी गांड को घिसना शुरू कर दिया था.

कुछ देर बाद मैंने उसके दूध को छोड़ दिया और दूसरे दूध की तरफ होंठ बढ़ाने लगा.
वह भी मेरे मुँह में अपना दूसरा निप्पल देकर आह आह करने लगी.

मैंने दूध खींच कर एक बार छोड़ा और कहा- साली … तुझे तो आगे पीछे एक साथ चोदने की इच्छा हो रही है.
वह तुरंत बोली- दोनों छेद में डालने के लिए दो लौड़े चाहिए होंगे.

मैंने कहा- हां, मेरे पास इंतजाम है दूसरे लंड का … वह तेरी गांड को फाड़ कर रख देगा!
वह हंसी और बोली- ठीक है राजा … तेरी खातिर फड़वा भी लूँगी.

इस तरह की बातों से हम दोनों की उत्तेजना बढ़ गई और वह झड़ने लगी.
वह झड़ कर मेरे सीने पर ढुलक गई.

अब मैंने सही मौका समझा और उसके कान में कह दिया कि यदि तुम चाहो तो एक छेद में विजय भाई का लंड भी ले सकती हो. मुझे कोई ऐतराज नहीं है.

मेरी बेवफा बीवी एकदम से मेरी तरफ देखने लगी और मैं उसे मजे से चोदता गया.

मेरा लंड भी उसकी चुत में झड़ गया और वह चुपचाप मेरे लौड़े पर चुत फँसाए पड़ी रही.
 

junglecouple1984

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गाँव वाली भाभी की चुदाई



मेरा नाम अंकित है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूं.
मेरे लंड का साइज काफी अच्छा है, यह 6 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा है.

अब तक मैंने कई लड़कियों को चोदा है. जिसको भी मैंने चोदा है, वह मेरे लंड की तारीफ ही करती गई है.

यह सेक्स कहानी मेरे और मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी की चुदाई की कहानी है.
उनको मैंने सैट करके चोदा और खुश किया.

हॉट इंडियन भाभी पोर्न कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको भाभी के बारे में बता देता हूँ.
उनका नाम रचना है. उनकी हाइट 5 फुट 4 इंच की है.
वे बहुत सेक्सी औरत हैं. जो भी उनको एक बार देख लेता है, उसका लंड गारंटिड खड़ा हो जाता है.

भाभी के बूब्स 32 इंच के, कमर 28 की और गांड 34 इंच की है.
उनकी इस मदमस्त फिगर से आप सभी समझ ही गए होंगे कि वे कितनी सेक्सी माल हैं.

दरअसल मेरी बिल्डिंग में जो भैया रहते है, उनका नाम सचिन है.
वे एक लिमिटेड कंपनी में जॉब करते हैं. वे मेरे ऊपर वाले फ्लैट में रहते हैं.
मैं पहले माले पर रहता हूं.

मेरी और भैया की खूब बनती है.
भैया का स्वभाव काफी अच्छा है. उनकी शादी हो गई थी, पर भाभी गांव में रहती थीं.
यह क्या कारण था, मुझे समझ नहीं आया था.

शायद उसका यही कारण रहा होगा कि भैया एक बिजी व्यक्ति हैं और वे घर पर ज्यादा रहते नहीं हैं. तो भाभी को अकेला रहना पड़ जाएगा.
इसी वजह से ही मेरी भी उनसे कम बात हो पाती थी.

वे सुबह जल्दी निकल जाते और शाम को देर से आते थे.

एक दिन छुट्टी का दिन था.
मैं भैया के घर गया.
मैंने डोर बेल बजाई.

जब दरवाजा खुला तो मैंने देखा कि एक खूबसूरत औरत ने दरवाजा खोला था.
उन पर से मेरी नज़र ही नहीं हट रही थी.

उन्होंने एक प्यारी से आवाज में पूछा- जी कहिए?
उनकी इस आवाज से मुझे होश आया और मैंने कहा- सचिन भैया हैं क्या?

तब तक भैया ने आवाज दे दी- अरे अंकित, अन्दर आ जाओ.
मैं अन्दर आ गया.

तब भैया ने बताया- ये तुम्हारी रचना भाभी है.
मैंने भाभी को नमस्ते किया.
तो बदले में भाभी ने भी बड़ी प्यारी आवाज में नमस्ते कहा.

वे किचन में चली गईं.
मैंने भैया से पूछा- भाभी कब आ गईं?
तो भैया ने बताया- मैं शनिवार को घर गया था, तभी ले आया था.

उनसे कुछ देर बात हुई फिर मैं चाय पीकर अपने घर आ गया.
उतनी देर में भाभी को मैंने नजर भर कर देख लिया था.

अब मैं भैया के यह अक्सर जाने लगा था.
मैं उनके घर में किसी न किसी बहाने से जाने का एक भी मौका नहीं छोड़ता था.

मैं जब भी जाता तो एक बात नोटिस करता कि भाभी उदास रहती थीं.
मेरी भाभी से ज्यादा बात नहीं होती थी तो उन्होंने भी मुझे कुछ बताया नहीं था.

मुझे मेरे मन में शक था कि कोई न कोई ऐसी बात जरूर है, जिससे भाभी उदास रहती हैं.

मैं जब भी उनके घर जाता, तो उनसे हँसी मजाक की बातें किया करता था जिससे वे भी बहुत खुश होती थीं.

इसी तरह से धीरे धीरे 5 महीने गुजर गए.
तब तक मैं भाभी से खूब हँसी मजाक करने लगा था.

मैं मजाक मजाक में भाभी टच भी कर लेता था, वे कभी कुछ नहीं बोलती थीं.

रविवार को हम तीनों सारे दिन खूब मस्ती करते थे.
भैया को भी मुझ पर भरोसा था, तो वे भी मुझे अपने घर का सदस्य जैसा मानने लगे थे.

मेरा काम का समय जल्दी शुरू होता था और जल्दी ही घर वापसी हो जाती थी.

घर आकर मैं भाभी के पास चला जाता था और उनके साथ बैठ कर बातचीत करने लगता था.

एक दिन मैंने भाभी से पूछा कि शादी से पहले आपका कोई ब्वॉयफ्रेंड था?
इस पर उन्होंने हंस कर पूछा- पहले तुम बताओ कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने कहा- कहां यार भाभी … मैं तो अभी सिंगल ही हूँ.

वह मेरी बात सुनकर पहले तो हंसी, फिर बोलीं- सच बताना!
मैंने कहा- सच में भाभी, कोई नहीं है.
उन्होंने कहा- अच्छा ठीक है, मैंने मान लिया.

अब मैंने कहा- आप भी तो बताओ भाभी!
उन्होंने कहा- मेरा एक ब्वॉयफ्रेंड था कॉलेज में.

उनकी इस बात से मेरे मन में आया कि उसने भाभी को जरूर चोदा होगा.
मैंने उनसे पूछा कि आपने शादी से पहले कभी ब्वॉयफ्रेंड के साथ कुछ किया?

इस पर उन्होंने एकदम से तल्ख स्वर में पूछा- क्या मतलब है तुम्हारा?
मैं डर गया. पहले तो मैं चुप हो गया, फिर मैंने कहा- आजकल तो नॉर्मल है ब्वॉयफ्रेंड ओर गर्लफ्रेंड सब कुछ करते हैं.

यह सुनकर भाभी थोड़ी देर के लिए चुप हो गईं, फिर अचानक से बोलीं- तुम्हें क्यों बताऊं मैं?
मैंने कहा- क्योंकि मैं आपका दोस्त हूँ और कभी किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.

भाभी हंसने लगीं और बोलीं- और कहीं बता दिया तो?
मैंने कहा- पक्का वादा है भाभी, किसी को नहीं बताऊंगा. खास तौर पर भैया से बिल्कुल भी नहीं कहूँगा.
वे हंसने लगीं.

फिर कुछ देर बाद भाभी बोलीं- हां हम दोनों ने बहुत मस्ती की थी!
मैंने कहा- सिर्फ मस्ती की थी या कभी सेक्स भी किया था?

इस बार उन्होंने हां में सर हिला दिया.
मैं उनकी तरफ वासना से देखने लगा.

मेरी आंखों में वासना के डोरे देख कर भाभी ने कहा- अब तुम अपने घर जाओ, तुम्हें बहुत देर हो गई है.

मैं कुछ नहीं बोला और अपने फ्लैट पर आकर भाभी के बारे में सोच कर लंड हिलाने लगा.
जब तक मेरा लंड झड़ नहीं गया, तब तक मुझे चैन नहीं पड़ा.

उसके बाद से मुझे भाभी की आंखों में लंड के लिए भूख नजर आने लगी थी.

दूसरे दिन मैं अपने दोस्त के साथ बाहर घूमने चला गया था.
मैं उस दिन भाभी के पास नहीं गया था.

रात को भी मैं देर से घर आया और चूंकि बहुत थक गया था तो आते ही मैं लेट गया और तुरन्त ही सो गया.

सुबह उठ कर मैं अपने काम पर चला गया.
रोज की तरह मैं काम से 3 बजे घर वापस आ गया और आने के बाद सीधे कपड़े चेंज करके भाभी के घर चला गया.

भाभी ने गेट खोला, तब वे टीवी देख रही थीं.
वे मुझे गुस्से से देख रही थीं.

मैंने कान पकड़ कर पूछा- अन्दर आ जाऊं क्या?
तब वे हंस कर बोलीं- हां आ जाओ न … कल कहां चले गए थे?

मैंने कहा- क्यों … आपको मेरा इंतजार था क्या?
वे मेरी तरफ देख कर बोलीं- हां, मुझे तुम्हारी आदत लग गई है.

मैंने उनको बताया कि मैं एक दोस्त के साथ घूमने चला गया था.
भाभी सहज होकर बात कर रही थीं.

मैंने उनसे बातों ही बातों में पूछा कि आपको अपने ब्वॉयफ्रेंड की याद आती है क्या?
उन्होंने कहा- अब नहीं आती, अब तुम याद आने लगे हो.
यह सुनकर मैं समझ गया कि मामला सैट होता दिख रहा है.

वह दोपहर का समय था. मैंने कुछ सोचा और भाभी से कहा- भाभी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.
यह कह कर मैंने भाभी के हाथ पर अपना हाथ रख दिया.

भाभी ने हाथ धीरे से हटाया और वे किचन में चली गईं.
उनके कुछ न कहने से मेरी हिम्मत बढ़ गई.

मैं भाभी के पीछे किचन में गया और मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगीं.
वे बोल रही थीं कि कोई आ जाएगा!

मुझे पता था कि 8 बजे से पहले भैया आने वाले नहीं हैं.
उन्होंने काफी कोशिश की मगर वह खुद को छुड़ाने में नाकाम रहीं.

मैं उनकी गर्दन पर किस करने लगा था और गर्म सांसें उनकी गर्दन पर छोड़ रहा था.
इससे भाभी गर्म होने लगीं.

मैंने उनको अपनी तरफ घुमाया और उनके होंठों से अपने होंठ मिला दिए.
दो ही मिनट में वे भी मेरा साथ देने लगीं.

अब कुछ मिनट तक मैंने भाभी के होंठ चूसे और साथ में मैं उनके बूब्स भी दबाने लगा था.

वे भी मचलने लगी थीं और मेरे लौड़े को पकड़ने लगी थीं.
उनकी चुदास जाग गई थी.

मैंने धीरे धीरे भाभी को पूरी नंगी कर लिया और उनके मस्त रसभरे दूध चूसने लगा.
भाभी मेरा सर पकड़ कर अपने बूब्स में दबा रही थीं और आह आह करती हुई मुझसे अपने दूध चुसवा रही थीं.

कुछ देर बाद भाभी ने मुझसे पैंट निकालने को कहा.
मैंने कहा- आप खुद ही निकाल दो न!

उन्होंने मेरी पैंट निकाल दी और मेरा लंड देख कर वे खुश हो गईं.

मैंने कहा- भाभी इसको चूसो न!
वे खुश होकर लंड चूसने लगीं.
हॉट इंडियन भाभी पोर्न देखती थी शायद!

मैं 69 में हो गया और उनकी चूत चाटने लगा.
भाभी की चुत से बहुत ही मादक खुशबू आ रही थी.

चूत चाटते हुए भाभी का एक बार पानी निकल गया.
मैंने उनकी चुत से निकला पूरा पानी पी लिया.

भाभी अब मेरे लंड से चुदने के लिए तड़प रही थीं.
वे बोलीं- अब चोद दो मुझसे रहा नहीं जाता!

मैंने भाभी को सीधा किया और उनकी टांगें फैला कर चूत पर लंड रख दिया.

वे लंड की गर्मी से एकदम से चुदासी रांड सी मचलने लगीं और गांड उठाने लगीं. मैंने लंड को थोड़ा सा अन्दर घुसेड़ दिया.
जरा सा लंड लेते ही वे कराह कर बोलने लगीं- आह दर्द हो रहा है.

मैंने पूछा- क्यों भैया नहीं चोदते क्या?
उन्होंने कहा- वे हफ्ते में एक या दो बार ही चोदते हैं … और उनका लंड तुमसे छोटा भी है.

मैंने यह सुनकर एक जोर से धक्का लगाया और इससे मेरा लंड 3 इंच अन्दर घुस गया.
वह दर्द से तड़फ कर कहने लगीं- आह बाहर निकालो इसे … बहुत दर्द हो रहा है.

मैं कहां कुछ सुनने वाला था.
बस एक मिनट रुका और मैंने दूसरा धक्का फिर से लगा दिया. इससे मेरा पूरा लंड उनकी चूत में उतरता चला गया.

कुछ देर बाद मैं रुक रुक कर लंड पेलता रहा.
अब वे खुद बोलने लगीं- आह … मजा आ रहा है … आह जोर जोर से चोदो मुझे.

मैंने उनको ताबड़तोड़ चोदना शुरू कर दिया.
दस मिनट तक तो मैंने भाभी की दोनों टांगें हवा में उठा कर चोदा.

जब मैं थक गया, तो मैंने उनको अपने लंड पर बैठा लिया.
वे मेरे लंड पर एक अनुभवी रंडी की तरह कूद रही थीं और अपने दूध मेरे मुँह में देती हुई मजा ले रही थीं.

कुछ देर बाद भाभी थक गईं.
अब मैंने उनको घोड़ी बनाया और पीछे से पेलने लगा.

इस आसन में चुदवाने से उनका पानी निकल गया था.
वे दर्द से आवाज निकालने लगी थीं- आह आह मर गई छोड़ दो मुझे!

मैंने काफी देर तक भाभी की चुदाई की.
वे मुझसे चुदवा कर बहुत खुश हो गई थीं.

अब शाम के 6 बज गए थे.
मैं अपने घर आ गया.

शाम को भैया के आने के बाद मैं फिर से उनके घर चला गया.
उस शाम को मैंने भैया के साथ ही खाना खाया.

अब हम दोनों रोज चुदाई करते हैं. उस वक्त भैया तो घर में होते नहीं हैं, तो हम दोनों धकापेल चुदाई का मजा कर लेते हैं.
 

Gary1511

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अजनबी आंटी ने माँ बन चुदाई करवायी



दोस्तो, मेरा नाम समीर है, मेरी उम्र 27 साल है और मैं मुंबई का रहने वाला हूँ.

बारिश का महीना था और तेज बारिश होन शुरू हो गई थी. मैं बाइक पर अपने घर जा रहा था. ऐसी तेज बारिश में रास्ते में एक बस स्टैंड दिखा. मैंने उधर रुकने का सोचा. मैं एक पल के लिए रुका भी, मगर फिर सोचा कि भीग तो जाऊंगा ही, क्या रुकना. मगर इस एक पल के ठहराव में मेरी निगाह उधर खड़ी एक आंटी पर चली गई.

मैं उनको देखते ही दंग रह गया. उफ़फ्फ़ क्या फिगर था उनका … मैंने एक गहरी निगाह उन पर ऊपर से नीचे तक फेंकी, तो उनका मस्त जिस्म मेरी आंखों में अपना नाप देने लगा. आंटी का फिगर 36-34-38 का रहा होगा. उनकी उम्र 50 साल के आसपास रही होगी.

उनको देख कर मैंने बाइक रोक दी और उनकी तरफ आशा से देखने लगा. उन्होंने भी मेरी तरफ देखा और न जाने कैसे वो मुझसे लिफ्ट मांगने लगीं.
मैंने पूछा- आंटी, आपको कहां जाना है?
उन्होंने अपना एड्रेस बताया. वो पता मेरे घर के आगे दो किलोमीटर की दूरी पर था.

तो मैंने कहा- ओके आंटी चलो … मैं छोड़ देता हूँ.
उन्होंने कहा- हां … अब जरा बारिश भी कम हो गई है, चलो चलते हैं.
मैंने मुस्कान दे दी.

उन्होंने भी स्माइल पास की और कहा- चलो.

वो मेरी बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठ गईं और उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया.

कुछ देर चलने के बाद मैंने आंटी से उनके बारे में पूछा, तो उन्होंने अपना नाम सुनीता बताया. मैंने भी उन्हें अपना परिचय दिया. हम दोनों की बातें होने लगीं.

सुनीता- समीर बाइक थोड़ा फास्ट चलाओ नहीं, पानी का कोई भरोसा नहीं है, कहीं फिर से तेज हो गई, तो हम दोनों पूरे भीग जाएंगे.
मैं- नहीं आंटी, बाइक फास्ट चलाऊंगा, तो बाइक स्लिप हो जाएगी.
सुनीता- समीर बारिश भी हो रही है … लगता है हम दोनों घर सही सलामत पहुंच नहीं पाएंगे.

मैं- अच्छा आंटी आप बस मुझे कसके पकड़ लो, मैं तेज चलाता हूँ … आपको मैं घर तक बिना भिगाए लेकर पहुंच जाऊंगा.

आंटी ने मुझे कसके पकड़ लिया. अब उनकी चूचियों की नर्मी मुझे मस्त करने लगी थी. आंटी मुझसे चिपक कर बात करने लगीं, जिससे उनकी गर्म सांसें मुझे कामुक करने लगीं.

सुनीता- समीर तुम क्या काम करते हो … और इतनी रात को कहां गए थे?
मैं- वो वो आंटी …
सुनीता- वो वो क्या लगा रखा है … बताओ न!
मैं- आंटी मैं मूवी देखने गया था.

आंटी समझ गईं कि जहां मैं उनको मिला था, वो एक रेड लाइट एरिया के पास का इलाका था.

सुनीता- अच्छा हां, तुम जवान हो … इसलिए इधर से निकल रहे थे. खैर इतनी रात को मत घूमा करो.
मैं- आंटी आप ग़लत समझ रही हो, मैं वैसा नहीं हूँ.
आंटी ने कुछ नहीं कहा … बस हंस दीं.

अचानक रास्ते में सामने एक कुत्ता आ गया, तो मैंने ब्रेक मार दिया और तभी आंटी एकदम से मुझसे चिपक गईं. इसी समय अचानक से उनका हाथ मेरी पैन्ट के ऊपर चला गया.

सुनीता- स..सॉरी!
मैं- इट्स ओके आंटी.

तभी फिर से ज़ोर से बारिश होने लगी. आंटी और मैं दोनों बारिश में भीग गए. पानी इतना तेजी से गिरने लगा कि हम दोनों कांपने लगे. आंटी मुझसे चिपक गईं, उनके बड़े बड़े चूचे मेरी पीठ पर चिपक गए. उनके चूचों की गर्मी से मुझे उस ठंड भरी बारिश में भी पसीना आने लगा. शायद आंटी समझ गईं. उन्होंने जब ये देखा कि मेरी पैन्ट के सामने वाला भाग टाइट हो रहा है, तब उन्होंने धीरे से हाथ मेरे पैन्ट के ऊपर लंड पर रख दिया.

सुनीता- समीर तुम बाइक धीरे धीरे चलाओ … नहीं तो मैं गिर जाऊंगी.
मैं समझ गया कि आंटी का मूड बनने लगा है.
मैंने कहा- जी आंटी.

कुछ देर के बाद हम दोनों एक दूसरे के जिस्म की गर्मी का मजा लेते हुए उनके घर की बिल्डिंग के नीचे पहुंच गए. आंटी का हाथ इस दौरान लगातार मेरे लंड पर ही रखा रहा.

मैंने आंटी को छोड़ने के बाद कहा- ओके आंटी बाय … अब मैं चलता हूँ.

तभी सुनीता आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगीं- ऐसे कैसे जा सकते हो समीर … तुम पूरे भीग चुके हो, चलो घर में चाय पीकर जाना.

मैं उन्हें मना नहीं कर पाया और उनके पीछे पीछे सीढ़ियां चढ़ते आने लगा.

उनके पीछे पीछे चलते हुए मैं आंटी की बलखाती गांड को ही देखे जा रहा था, शायद आंटी की गांड इस वक्त कुछ ज्यादा ही मटकने लगी थीं.

उफ़फ्फ़ सीढ़ी चढ़ते हुए सुनीता आंटी की गांड क्या मस्त लग रही थी … यार उनको देख कर मेरे लंड ने फुंफकार भरना शुरू कर दी. अपने फ्लैट के सामने पहुंचते ही सुनीता आंटी ने अपने पर्स से चाभी निकाली और ताला खोल कर हम दोनों अन्दर चले गए. आंटी का घर काफ़ी ठीक ठाक लग रहा था.

सुनीता- समीर तुम अपने कपड़े निकालो, मैं तुमको अपने बेटे का नाइट पैन्ट देती हूँ.

मैंने उनके बेटे का जिक्र सुना तो चौंकते हुए कहा- आपका बेटा कहां है?
उन्होंने जवाब में कहा- वो गुजरात में जॉब करता है. मैं इधर घर पर अकेली रहती हूँ.

मुझे उनके अकेले घर में रहने से बड़ी तसल्ली हुई. हालांकि मैं उनके पति के बारे में पूछना चाहता था, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा.

मैं कपड़े चेंज करने लगा, तभी सुनीता आंटी ने मेरे सामने आ गईं. वो अपनी साड़ी खोल कर सिर्फ़ पेटीकोट ब्लाउज में नाइट पैन्ट लेकर आ गई थीं. मैंने उन्हें अपलक देखा और उनके सामने ही अपनी पैन्ट निकाल दी. मेरा 7 इंच का लंड टाइट हो कर मेरे अंडरवियर के अन्दर से ही आंटी की जवानी को सलामी दे रहा था.

वो मेरे खड़े लंड को देख कर मुस्कुरा दीं. मेरा लंड निहारते हुए आंटी बोलीं- मैं चाय बना देती हूँ, तुम तब तक नाइट पैन्ट पहन लो.
मैंने कहा- ओके.

सुनीता आंटी कसे हुए पेटीकोट और ब्लाउज में क्या मस्त माल लग रही थीं. उनकी बड़ी सी गांड, गदराया हुए जिस्म, बड़े बड़े चूचे … उफ़फ्फ़ …
आंटी अन्दर चली गईं. मैं आंटी की मदभरी काया देख कर लंड सहलाने लगा.

तभी उन्होंने आवाज देते हुए कहा- समीर रसोई में आ जाओ … गैस पर अपने हाथ सेंक लो … बाइक चलाते चलाते तुम्हारे हाथ काफ़ी ठंडे हो गए होंगे.

मैं बिना नाइट पैन्ट के उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया. मेरा लंड फुल टाइट हो गया था. मैं सुनीता आंटी की गदराई गांड से लंड टच करते हुए अपने हाथ आगे करके गैस पर सेंक रहा था. मेरे दोनों हाथ आंटी के शरीर के दोनों तरफ से निकल कर आगे थे. वो भी मेरे लंड का टच पाते ही थोड़ा सा पीछे को सरक गईं, जिससे मेरा लंड उनकी गांड की दरार में सैट हो गया.

सुनीता- समीर क्या बात है … तुमको सर्दी कुछ ज्यादा ही लग रही है और तुमने नाइट पैन्ट अब तक क्यों नहीं पहनी?
मैं- आंटी … वो मेरी अंडरवियर गीली है.
इस पर उन्होंने कहा कि गीली अंडरवियर नहीं पहनते … जाओ अंडरवियर उतार कर नाइट पैन्ट पहन लो.
मैंने कहा- आंटी आप बस ऐसे ही खड़ी रहो … मैं अंडरवियर उतार कर नाइट पैन्ट पहन लेता हूँ. मुझे आग में बदन को सेंकना अच्छा लग रहा है.

आंटी हंस दी.

मैंने अपनी अंडरवियर निकाल कर फेंक दी और पीछे से अपना नंगा लंड आंटी की गांड में लगा दिया. वो नंगे लंड का अहसास पाते ही और थोड़ा पीछे को सरक आईं. मैंने भी हिम्मत करके आंटी से चिपक गया और धीरे से आंटी की गर्दन पर किस कर दिया.

सुनीता आंटी खुद भी गर्म हो गयी थीं. फिर भी उन्होंने मुझे पीछे धक्का दे दिया. जब वो पीछे पलटीं, तब मेरा 9 इंच लंड, जो फुल टाइट हो चुका था … उसको देख कर कुछ कह ना पाईं. मैं उनके पास हो गया और उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया. वो कुछ ना बोलीं. मैंने उनको किस करना स्टार्ट कर दिया. एक दो पल की झिझक के बाद वो भी मेरा साथ देने लगीं.

तभी गैस पर रखी हुई चाय उबल गई और ज़मीन पर गिरने लगी. आंटी को एकदम से होश आया और उन्होंने पलट कर गैस बंद कर दी. मैंने उनको अपनी बांहों में ले लिया और धीरे से हाथ आगे करके उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. पेटीकोट ने सुनीता आंटी की कमर को छोड़ दिया और वो नीचे गिर गया.

सुनीता आंटी काफ़ी गर्म हो गयी थीं. उनकी चिकनी टांगें देख कर मेरा काबू हवा हो गया.

उन्होंने थरथराते हुए कहा- आआहहह बेटा … ये क्या कर रहे हो … अपनी माँ के साथ!
मैं- आंटी ये आप क्या कह रही हो, आप सुनीता आंटी हो … मेरी माँ सुमन नहीं हो.

सुनीता आंटी का जवाब सुन कर मैं चौंक गया.
सुनीता- समीर, मैं हमेशा Xforum पर माँ बेटे की चुदाई की कहानियां पढ़ती हूँ. मुझे माँ बेटे का सेक्स बहुत अच्छा लगता है … तुम आज मेरे बेटे बन जाओ, मैं भी आज तुम्हारी माँ सुमन बन जाती हूँ.

मैं भी आंटी को चोदने का ये मौका नहीं जाने देना चाहता था. मैं भी Xforum पर माँ बेटे की चुदाई कहानियां पढ़ना पसंद करता हूँ. अपने सामने इतनी सेक्सी औरत हो, तो कौन चोदना नहीं चाहेगा.

मैंने अपनी बांहें फैला कर उनको पास बुलाया. तब वो मुझसे चिपक कर मुझे बेताबी से किस करने लगीं- मैं बहुत प्यासी हूँ समीर मेरे बेटे … आहह आज तुम अपनी माँ की प्यास बुझा दो बेटा.
मैं- उम्महा मुउहा उफ मम्मी … आपका बेटा आज आपको चोदना चाहता है … तुम कितनी सेक्सी हो मम्मी.

अब मुझे मेरे सामने अपनी मम्मी दिखने लगी थीं. मैं आज आंटी को अपनी मम्मी सुमन समझ कर चोदने की कल्पना करने लगा.
सुनीता- उम्महाअ समीर बेटे … आज तेरी माँ अपने बेटे से चुदवाएगी.

मैं मम्मी को बेडरूम में लेकर गया और बेड पर लिटा दिया. मैं उनको किस कर रहा था, वो भी मेरा साथ दे रही थीं. उनके होंठों को किस करते करते मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया. वो ब्रा पैन्टी में क्या मस्त सेक्सी माल लग रही थीं.

मैं उनको किस करते करते उनके मम्मों को दबा रहा था. मम्मी के चूचे काफ़ी मुलायम लग रहे थे.

रोल प्ले करते करते सुनीता मम्मी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया- आहह बेटा … तेरा लंड तो बहुत बड़ा है बेटे … मैंने अभी तक इतना बड़ा लंड कभी नहीं देखा … आह इतना बड़ा लंड मेरी रियल लाइफ में पहली बार मुझे चोदेगा.

मैंने उनकी ब्रा और पैन्टी को निकाल दिया. अब हम दोनों माँ बेटे पूरे नंगे हो गए थे. मैंने मम्मी की चूचियां चूसते हुए कहा- आहह मम्मी तुम्हारा जिस्म बहुत सेक्सी है मम्मी.

सुनीता माँ- आह चूस लो … चाट लो आज अपनी माँ के दूध निचोड़ लो मेरी जान … अपनी माँ के प्यासे जिस्म की आग बुझा दो बेटा.

मैं सुनीता मम्मी के निप्पलों को चूसते हुए अपने एक हाथ दो उंगलियों को उनकी चुत में डाले जा रहा था. मम्मी की चुत एकदम सफाचट थी और थोड़ी बड़ी थी. ऐसे लग रही थी कि जैसे उनकी चुत बिल्कुल मेरे लंड के लिए ही बनी हो.

सुनीता मम्मी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… उईईइइ ममाँआ … बेटा आहह चूस ले अपनी माँ के दूध को आहह … और चूस मेरे बेटे.

मम्मी इतना गर्म हो गयी थीं कि अपनी गांड नीचे से ऊपर उठा उठा कर अपनी चुत में फिंगरिंग का मज़ा ले रही थीं.
मैं- उम्म्महाआ आहह मम्मी … आज से तुम इस बेटे की रंडी माँ बन गयी हो. मैं हमेशा तुम्हें चोदूँगा … आह अपनी माँ को बहुत प्यार करूँगा.

फिर मैं धीरे धीरे मम्मी के मम्मों से नीचे होते हुए उनकी नाभि में जीभ डाल कर चाटने लगा. वो तो समझो बस लंड के लिए तड़प रही थीं.

फिर मैंने उनको सीधा लिटाया और उनकी चुत को चाटने लगा. उफफफ्फ़ कितनी टेस्टी चुत थी. चुत में से नमकीन रस निकल रहा था. मैं पूरी जीभ चुत में डाल कर मम्मी को मज़ा दे रहा था. वो मेरे सर के बाल पकड़ कर चुत पर दबा रही थीं. मैं उनकी प्यासी चुत को चाटे जा रहा था.

फिर तभी मैंने उनकी गांड के छेद में एक उंगली डाल दी.
सुनीता मम्मी- आहह समीर बेटे आहह उउउंम्म उउऊइई माँआआ आहह चाट ले अपनी मम्मी की चुत को. मुझे भी अपने बेटे का लंड चूसना है.

ये सुनकर मैं कुछ पल बाद 69 की पोज़िशन में आ गया. अब वो मेरे लंड को चूस रही थीं. साथ ही नीचे से गांड उठा उठा कर चुत चुसवा रही थीं.

अचानक उन्होंने अपनी कमर ऊपर को उठाते हुए पानी छोड़ दिया. मैंने उनका नमकीन पानी पी लिया. मैं अब अपनी सुनीता मम्मी को चोदना चाहता था. मैंने उसकी दोनों टांगों अपने कंधे पर रखा और लंड को चुत पर सैट कर दिया.

मैं- मम्मी, आपकी चुत में अपने बेटे का लंड जाने वाला है.
मम्मी ने बस नीचे से कमर उठा कर हम्मह कहा.
“हां मम्मी, अपने बेटे के लंड के लिए तैयार है.”

मैंने एक ही झटके में अपना पूरा 9 इंच का लंड चुत में डाल दिया. वो लंड के झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाईं- आहाहह मर गई बेटे … तेरा लंड बहुत बड़ा है … आहह मैं बहुत दिनों बाद चुदवा रही हूँ … जरा धीरे चोद बेटा.

मैंने उनकी बात को अनसुना कर दिया और दूसरा झटका मार दिया. वो मेरे लंड के तगड़े झटकों को बर्दाश्त नहीं कर पाईं और चिल्लाने लगीं- साले मादरचोद … धीरे चोद.
मैं उनकी चिल्लपौं को सुने बिना तेजी से दबादब चोदे जा रहा था. एक मिनट बाद वो भी मस्त हो गईं और अब वो भी खुल कर चुदवाने लगी थीं.

मैं- आह मम्मी लो अपने बेटे का लंड … आपके बेटे का लंड आज आपकी चुत फाड़ देगा.
“उफ्फ़ बेटा आअहह … चोद दे अपनी माँ को … अपने मूसल जैसे लंड से फाड़ दे चुत को … आआहह!”

लगातार 30 मिनट की चुदाई के बाद जब मेरा पानी निकलने वाला था, तो मैंने कहा- मम्मी मेरा रस निकलने वाला है … कहां डालूं?
वो कहने लगीं- बेटे मेरी चुत बहुत प्यासी है … अन्दर ही डाल दे अपनी मम्मी की चुत में!

कुछ तेज धक्कों के साथ में मैंने सुनीता मम्मी की चुत में अपना गर्मागर्म वीर्य निकाल दिया.
हम दोनों थक कर लेट गए.

इसके बाद तो आंटी मेरी पक्की जुगाड़ बन गई थीं. बाद में मालूम हुआ कि उनके पति भी उनको छोड़ कर चले गए थे.
 
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जेठ जी से चुदवाकर गर्भ धारण किया- 1




दोस्तो, मेरा नाम शनाया उर्फ सन्नो है.


आज मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रही हूँ,

मेरी शादी को कुछ साल हो चुके थे और मेरी कोख अभी भी सूनी थी क्योंकि बच्चा पैदा करने की मेरी प्लानिंग पहले नहीं थी.
फिर जब प्लानिंग की तब पति ने उस पर रबर फेर दी … मतलब वह सब अब उनके बस का ही न रहा.

मैंने उनसे ज्यादा कहा तो उन्होंने अपना चेक़अप कराया.
जिसमें स्मोकिंग एक बड़ा कारण उभर कर सामने आई.

इसलिए मेरा आप सभी से भी अनुरोध है कि स्मोकिंग ना ही करें या कम करें.

मेरे पति हद से ज्यादा सिगरेट और हुक्का पीते थे जिस वजह से उनके वीर्य में स्पर्म काउंट कम हो गया.
इसी के चलते हमारे बच्चे पर असर आने वाला था.

डॉक्टर के अनुसार हमारा बच्चा अपंग पैदा हो सकता था.
यह सुनकर मैं घबरा गई और अपने पति के बच्चे की माँ नहीं बन पा रही थी.

लेकिन मुझे अपनी कोख भरना जरूरी था.

मैं पति से सब तरीके पर चर्चा करती हुई बड़ी मुश्किल में यह बता सकी कि आईवीएफ सही रहेगा.

पर मैं रंगीन मिजाज वाली लड़की हूँ, मुझे मर्दों की कमी कभी नहीं हुई.

इसलिए न जाने क्यों मुझे लंड सीधे अपनी चूत में लेकर गर्भवती होने का मन था.

उन्हीं दिनों मेरे परिवार में एक गमी हो गई थी.
हमारे में गमी आदि में तेरह दिनों तक रोज उस गमी वाले घर में जाया जाता है.

शहर से थोड़ी ही दूरी पर हमारा गांव था.
उधर हमारे एक रिश्तेदार थे.

वे मेरे पति के रिश्ते में करीबी भाई लगते थे और पति से बड़े थे.
उस गमी में वे अमेरिका से आए थे.

उनकी उम्र 52 वर्ष की थी लेकिन उनकी कद काठी अच्छी दिखती थी.

चूंकि वे मेरे घर पर रुके थे तो एक दिन मैंने उनको योगा करते देखा था.
मुझे उनका जिस्म भा गया था.
क्या पहलवानों जैसा कसरती बदन था. मैं तो उन्हें एक चड्डी में देख कर एकदम से गर्मा गई थी.

चूंकि वे गांव में रहना पसंद नहीं करते थे. उनका बचपन और जवानी अमेरिका में ही बीता था.
मैं भी गांव जाना कम पसन्द करती थी.

इसी वजह से मेरे पति मुझे और उनको घर पर छोड़ कर अकेले गांव चले गए थे.

मेरे पति ने रोज आना जाना फिक्स कर लिया था.
पर तीसरे दिन के बाद उन्होंने गांव में रहना ही ठीक समझ लिया था.

इधर अमेरिका से ये हुए भाईसाब रिश्ते में मेरे जेठ लगते थे.
भले ही उनकी उम्र ज्यादा थी लेकिन वे मेरे पति से ज्यादा जवान लगते थे.
मैं उनको भाईसाब कहती थी.

जेठ जी एकदम कूल और फ्रेंक थे.
मैं अपना दिल उन पर हार चुकी थी.

उस दिन मेरे पति जा चुके थे.
पति की गैरमौजूदगी में हम दोनों का पहला दिन काफी अच्छा गया.

हम दोनों के अलग अलग कमरे थे, लेकिन हम दोनों साथ में बैठ कर टीवी देखते रहे.
करीब 11-30 पर मैंने पति से वीडियो कॉल की.

उसके बाद जेठ जी भाईसाब अपने कमरे में चले गए और मैं अपने कमरे में आकर सो गई.

उनका शरीर काफी अच्छा था, वे बहुत लंबे थे और उनका पेट भी हल्का सा बाहर को निकला था.
वे मुझे बता रहे थे कि हमारे यहां लड़कियां शॉर्ट में घूमती हैं, वहां यह घूँघट वगैरह नहीं चलता है.

मैं तो पहले से ही फ्रेंक थी इसलिए जेठ जी मेरे रहन सहन और पहनावे पर कुछ नहीं कहते थे.
उनकी सेवा करने में मैं नम्बर बन थी.

अगले दिन जब मैं उठी तो चाय और नाश्ता उनके द्वारा तैयार हो चुका था.
मैंने बल्कि कहा भी- अरे आप उझे आवाज लगा देते.
वे हंस दिए और बोले- आज मेरे हाथ से बना नाश्ता करो और बताओ कैसा बना है?

मैं उनके साथ ही बैठ गई और हम दोनों ने चाय नाश्ता किया.
नाश्ता के दौरान बातें चलने लगीं तो समय का ध्यान ही न रहा.

उसके बाद करीब 11 बजे मैं अपने बाथरूम में नहा रही थी.
मैं जल्दबाजी में अन्दर से दरवाजे की कुंडी लगाना भूल गई थी.

मुझे रोज का ही याद रहता था कि पति हैं, तो क्या कुंडी लगाना.
बस उसी के चलते मैंने बिना कुंडी लगे नंगी होकर नहाने लगी थी.

उसी वक्त जेठ जी सुसु करने आए और बिना कुछ सोचे समझे उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खींच कर खोल दिया.
अन्दर मैं आदमजात नंगी थी और अपने बदन पर शॉवर से पानी ले रही थी.

उन्होंने एक ही झटके में मेरा सब कुछ देख लिया.
मैं उन्हें देख कर ‘अरे अरे …’ कहने लगी और वे सॉरी सॉरी बोल कर वापिस चले गए.

मैंने जल्दी से दरवाजा बंद किया और नहाना-वहाना खत्म करके जल्दी से कपड़े पहन कर शर्म से पानी पानी होती हुई बाहर आ गई.

हालांकि जेठ जी वहां नहीं थे.
मैं अपने कमरे में चली गई.

कमरे में अपने आपको सही से किया और बाहर आकर मैं उनको आवाज लगाने लगी- भाई साब अब आप जा सकते हो?
वे मेरी आवाज सुनकर बोले- अभी के लिए सॉरी, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ.
और वे बाथरूम में चले गए.

वे बाथरूम में नहाने लगे.
मगर देखिए फिर से चूक हुई.

उनके पास तौलिया नहीं था तो वे बिना कपड़ों के ही बाहर निकल आए.
उस समय मैं किचन में जा रही थी.
मैंने उनकी आहट सुनी तो पलट कर उन्हें देखा.

उतनी देर में वे झट से भागे और तौलिया के पास आ गए.
मगर इतनी देर में मैंने उनको देख लिया था.

मैंने देखा कि उनका लंड कुछ ज्यादा ही फूला हुआ था और नीचे लटक कर दाएं बाएं हिल रहा था.

मैंने उनसे कहा- ये आप क्या कर रहे हैं. मुझसे कह देते, मैं आपको उधर ही तौलिया पकड़ा देती!
उन्होंने कहा- अरे मुझे लगा कि तुम नहीं आओगी, इसलिए मैंने तुम्हें परेशान करना नहीं चाहा. कोई बात नहीं … सब भूल जाओ.

मैंने कहा- ओके मैं खाना तैयार करती हूं.
वे कुछ नहीं बोले और जाकर टीवी देखने लगे.

कुछ देर बाद खाना आदि हो गया तो वे पुनः टीवी देखने लगे.
अब भाई साब और मैं अपना अपना टाइम काट रहे थे.

कुछ देर बाद मैं भुट्टे भून कर ले आई और खाने लगी.
वे बोले- अरे शनाया, अकेले अकेले खा रही हो. इधर लाओ, मुझे भी खिलाओ.

मैं- हां भाईसाब.
फिर वे कहने लगे- अरे इधर आकर बैठ जाओ न!

मैं उनके बाजू में बैठ गई.
उस दिन मैंने एक बड़े गले वाली टी-शर्ट पहन रखी थी और अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.

मुझे गर्मी लग रही थी.
वे मुझ पर नजर तो नहीं डाल रहे थे लेकिन मेरे 34 इंच के मम्मे मेरी टी-शर्ट में से अलग ही उठे हुए दिख रहे थे और गले से झांकने से मेरी दोनों चूचियां साफ साफ दिख रही थीं.

जेठ जी भुट्टा खा रहे थे और शायद मेरी चूचियों से आकर्षित हो रहे थे.
मैं इस बात से अनभिज्ञ होकर मजे से भुट्टा खा रही थी.

उसी समय मेरी नीचे नजर गई तो मुझे एक कॉकरोच दिखाई दिया.

मैं चिल्ला उठी- आह भैया कॉकरोच है … उई मम्मी रे … बचाओ.

कॉकरोच से मैं बहुत डरती हूँ.
मैंने डर के मारे पैर ऊपर कर लिए.

वे बोले- अरे डरना क्यों … तू एक काम कर शनाया, अपने पैर मेरे पैर पर रख दे.

मैं- अरे नहीं भाई साहब आप बड़े हो.
वे- अरे तो क्या हुआ पगली!

फिर उन्होंने खुद से पकड़ कर मेरे पैर अपने पैरों पर रख दिए.

जेठ जी कुछ ज्यादा ही फ्रेंक हो गए थे.
मैं पैर रखने की वजह से थोड़ी आगे को खिसक आई थी और मेरे दोनों मम्मे हल्के से उछल गए थे.

यह सीन जेठ जी ने देख लिया था और वे बिना किसी झिझक के सीधे बोले- अरे तू सपोर्टर क्यों नहीं पहनती है … पहना कर, सही रहता है. देखो तुम्हारे ब्रेस्ट उछल रहे हैं. इससे बाद में तुझे प्रॉब्लम होगी.

मैं उनकी बात सुनकर कहने लगी- हां सॉरी भाई साब, आज कुछ ज्यादा ही गर्मी लग रही थी, इसलिए मैंने ब्रा निकाल दी थी.
वे बोले- अच्छा कोई बात नहीं.

उनकी इन बातों को सुनकर मैं थोड़ा सहज सा महसूस करने लगी थी.
अब जेठ जी मुझसे बातें करने लगे और मैं भी उनसे बातें करते करते भुट्टे को मुँह से कुतरती हुई मजा लेने लगी.

सामने टीवी पर एक मूवी चल रही थी.
वे मुझसे बोले- चलो अब मैं सोने जा रहा हूँ.

मैंने कुछ नहीं कहा. अपने पैर हटाए और सोफ़े पर ही रख लिए.
जेठ जी कमरे में चले गए.

उनके जाने के कुछ देर बाद मैं भी अपने कमरे में चली गई.

जेठ जी के कमरे का पंखा नहीं चल रहा था.
उन्होंने मेरे पति को कॉल करके बोला- पंखा खराब हो गया है यार और बिना पंखा के मुझे नींद नहीं आएगी!

उसी समय मेरे पति का मेरे पास कॉल आया- तुम हाल में सो जाओ. भैया अपने कमरे में सो जाएंगे.

मैंने कहा- नहीं, बाहर हॉल में मैं कैसे सो पाऊंगी?
पति बोले- तो तुम नीचे सो जाना. भैया बेड पर सो जाएंगे.

मैंने ओके कहा और जेठ जी को अपने कमरे में बुला लिया.

उस वक्त मैं हाफ मैक्सी पहनी हुई थी.
मेरे घुटने साफ दिख रहे थे.

वे आए और कहने लगे- मुझे माफ करना यार, मेरा पंखा नहीं चल रहा था.
मैंने कहा- हां उसमें क्या बात है. आप आ जाओ और बेड पर सो जाओ. मैं नीचे सो जाउंगी.

वे बोले- अरे तुम नहीं, मैं नीचे सो जाता हूं.
मैंने कहा- नहीं, मैं सो जाऊंगी.

वह बोले- चलो एक काम करते हैं. मैं बेड के एक बाजू सो जाऊंगा. दूसरी बाजू तुम सो जाना.
मैंने कहा- ठीक है.

वे- वैसे भी छोटू बोल रहा था कि मैं रात में घर आ जाऊंगा तो मैं गेट ओपन कर दूँगा और उसके बाद मैं हॉल में सो जाऊंगा. तुम दोनों यहीं सो जाना.

जेठ जी मेरे पति से छोटू बोलते थे.

यह मेरे घर में आज पहली बार हुआ था कि मैं अपने बिस्तर पर एक गैर मर्द के साथ सो रही थी.

मेरे जेठ जी अपने बरमूडा में थे और उन्होंने गर्मी के कारण ऊपर कुछ नहीं पहना था.

वे लेट गए.
मैं अपनी तरफ लेट गई.

वे मुझसे बातें करने लगे और मेरे पति की बात बताने लगे कि मैंने अभी बात की थी.

मैंने कहा- आप उनसे यह चर्चा मत करना कि हम दोनों एक ही बेड पर सो गए थे. क्योंकि वे आपके जैसे फ्रेंक नहीं हैं.
वे कहने लगे- अच्छा, इतना चूतिया है?

मुझे हंसी आ गई.

फिर बोले- ठीक है, मैं नहीं बोलूंगा.
मैंने ओके कह दिया और वे मेरी ही तरफ मुँह करके लेट गए.

कुछ देर बाद मैं टायलेट करने गई तो उधर गलती से मेरी पैंटी गीली हो गई.
मैं पैंटी चेंज करने का सोचने लगी और अपनी गीली पैंटी वहीं उतार कर वापस आ गई.

मैंने देखा कि दूसरी पैंटी तो भाईसाब के सर के ऊपर वाले दराज में रखी है.
फिर मैं वैसे ही एक चादर ओढ़ कर लेट गई.

मैं दूसरी तरफ करवट लेकर लेटी थी.
जेठ जी मुझसे थोड़ी बातें करने लगे.

फिर गुड नाईट कहकर सोने लगे.
मैं भी सो गई.

दोस्तो, सभी मर्दों की तरह उनका लंड भी रात में टाइट हुआ होगा.
मैं इस सबसे अनजान थी कि रात में कुछ और भी हो सकता है.

पता नहीं मैं काफी गहरी नींद में थी और उसी नींद में मैं उनकी तरफ करवट लेकर घूम गई और अपना पति समझ कर मैंने उनके पैर के ऊपर अपना पैर रख दिया.
साथ ही रोजाना की आदत के चलते मैंने अपना एक हाथ उनके लंड पर रख दिया.

शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी.
उनका लंड शायद उस समय आजाद था इसलिए वह मेरे हाथ में आ गया.
 

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जेठ जी से चुदवाकर गर्भ धारण किया- 2




कहानी के पहले भाग

में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपने जेठ जी के साथ एक ही बिस्तर पर लेटी हुई थी और सो गई थी.
गहरी नींद में मेरा हाथ उनके लंड पर चला गया था.

अब आगे :

मैंने थोड़ी देर तक इस सबका बिल्कुल भी अहसास नहीं किया कि किसी और मर्द का लंड मेरे हाथ में है.

इसके बाद मैं अपने पति से जैसे कहती हूं, वैसे ही कहने लगी- बेटू, आप कब आ गए?
जेठ जी ने भी कह दिया- तुम सो जाओ बेटू.

मैं वैसे ही नींद में अहसास लिए जा रही थी.
अगले ही पल जेठ जी ने मेरी करवट बदल दी और मैंने भी अपने पति के होने का अहसास करते हुए करवट बदल ली.
जेठ जी ने अपने लंड को मेरे पीछे से मेरी चूत की फांक में रख दिया और अन्दर ठेल दिया.

मैंने चिकना चिकना सा टोपा अपनी चूत में अहसास किया.
तभी जेठ जी ने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा और झटका दे दिया.

उस तेज झटके से उनका आधा लंड मेरी चूत के अन्दर सरक गया और मेरी नींद पूरी तरह खुल गई.
मैं तब भी नहीं समझ पाई थी कि मेरी चूत में लंड पेलने वाला कौन है.

मैंने धीरे से कराहते हुए कहा- आह बेटू दर्द हो रहा है, जरा थूक लगा लो न!
यह सुन कर जेठ जी ने थूक लगा कर लंड फिर से पेल दिया.

मैं ‘आह मम्मी …’ करके तड़पने लगी.
वे- बस बेटा, बस हो गया.

यह आवाज सुनकर मैं घबरा गई और पलट कर देखने लगी.
ये तो भाईसाब हैं. पति का लंड इतना है ही नहीं.

मैं- भाईसाब आप ये सब मत करो, छोड़ दो.
वे- बेटा तुम्हीं ने हिला हिला कर खड़ा किया और तुमने ही बोला कि डालो इसको अन्दर, तभी तो मैंने अन्दर किया है!

बस यह कह कर जेठ जी झटके देने लगे.
उनके बड़े लंड से मस्ती चढ़ने लगी और मैं आह आह करती हुई कहने लगी- प्लीज मत करो … दर्द कर रहा है यार.

वे बोले- तो दर्द कौन सी नई बात है. अभी थोड़ा सा रुक जाओ, सब दर्द ठीक हो जाएगा.
मैं बोली- भाईसाब, आपके साथ में ये सब … अभी मेरे पति आ जाएंगे तो लफड़ा हो जाएगा.

वे बोले- उसको नहीं आना तीन दिन तक … तुम निश्चिंत रहो. मेरी उससे फोन पर बात हुई है.
अब वे मेरी चूत में ताबड़तोड़ झटके देने लगे और मैं आह आह आया ईई एई ऊऊ कर रही थी.

मैं- आह भाई साब आपका कितना बड़ा है … आह मुझे बहुत लग रहा है अन्दर तक!
वे- अरे बेटा, ज्यादा बड़ा नहीं है.

मैं बोली- भाई साब मुझे दिखाओ.

वे बोले- पहले तो तुम भाई साब कहना बंद कर दो.
मैंने कहा- ठीक है.

वे मुझे चोदने लगे.

मैं- आह आह ई बस उ ऊऊ एई बस करो प्लीज यार … यह तो बताओ कि मैं क्या कहूं?
वे- तुम मुझे अपने पति की भांति कह सकती हो.

मैं- ओके जानू बस करो … आह अब दिखा भी दो यार!
वे बोले- चलो टॉइलेट में चलते हैं.

मैंने उठ कर लाइट ऑन कर दी और उनका लंड देखा तो गांड फट गई.

‘बाप रे जानू … आपका कितना बड़ा और मोटा है!’
वे बोले- चलो चलो उधर चलते हैं. अपने सारे कपड़े उतार दो.

मैंने मैक्सी उतार दी.
ब्रा पहले से ही नहीं पहनी थी और पैंटी गीली हो जाने की वजह से उतार दी थी.
अब जेठ जी और मैं हम दोनों बाथरूम में आ गए.

गर्मी के कारण नहाने का जी कर रहा था तो जेठ जी ने शॉवर चालू कर दिया.

‘अरे जानू मेरे बाल भीग जाएंगे!’
वे- ठीक है, बाल नहीं भीगने दूँगा.

उसके बाद जेठ जी शैंपू लेकर मेरे बदन पर लगाने लगे.
उनके हाथ मेरे दूध मसल रहे थे.
यह अहसास कुछ अलग ही था.

मेरे चूचे पहली बार जेठ जी के हाथों से मसले जा रहे थे.
वे मेरे पूरे बदन में शैंपू लगा कर रुक गए.

फिर बोले- लो देखो लंड.
‘हां जानू मस्त है.’

वे- चूसना चाहोगी?
मैं- नहीं बाबा, मैं नहीं चूस सकती!

वे- क्यों, कभी चूसा नहीं क्या?
मैंने झूठ बोल दिया कि नहीं चूसा.

वे बोले- अच्छा चलो लंड पर शैंपू लगा दो.
मैं उनके लंड पर शैंपू लगाने लगी और फैन को पानी से साफ करने लगी.

धीरे धीरे मैंने जेठ जी के पूरे बदन पर शैंपू रगड़ दिया और पानी से साफ करने लगी.
मैंने उनको पूरी तरह से साफ कर दिया. फिर जेठ जी ने मेरी चूत को साफ कर दिया.

उसके बाद बाहर आकर तौलिया से पानी पौंछते हुए जेठ जी ने मुझे वापस बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर बैठ गए.
वे मेरी चूत पर मुँह रख कर जीभ से चाटने लगे.

उनका भारी भरकम लंड मेरे मुँह के बाजू में था. उसकी सुगंध मुझे कामुक कर रही थी.
जेठ जी ने आखिरकार मेरा मुँह खुलवा ही दिया और मेरे मुँह में लंड डाल ही दिया.

वे कहने लगे- मजे लेकर चूसो.
मैं भी लाज शर्म छोड़ कर उनके लंड के झटके लेने लगी.

दूसरी तरफ वे मेरी चूत को खाने में लगे थे.

कुछ देर तक 69 का सुख लेने के बाद मैंने उनको सही से लेटने के लिए कहा.
वे भी चूत चुसाई का मजा अच्छे से लेना चाहते थे.

वे कहने लगे- अच्छे से लंड चूसो मेरी जान!

मैं तो वैसे भी लंड चूसने की शौकीन हूँ. अब मैं उनके लंड को जीभ से चाटने लगी और पूरा लंड चाट चाट कर गीला कर दिया.

मैं जेठ जी का पूरा लंड अपने गले तक लेने लगी थी.
वे मेरे सर को पकड़ कर लंड पर दबाने लगे थे और मैं भी जेठ जी के पूरे लंड को मस्ती से अन्दर ले रही थी.

अपने गले गले तक लंड का अहसास करती हुई मेरी आंखों से आँसू निकल रहे थे और मुँह से लार ही लार लंड पर गिरने लगी थी.

मैं उनकी जांघों पर दोनों हाथों से थपथपाने लगी थी.
बड़ी मुश्किल के बाद जेठ जी ने मुझे छोड़ा.

उनका पूरा लंड चिकना हो गया था.
मैं अपने थूक भरे मुँह को एक रूमाल से साफ करने लगी.

वे बोले- चलो अब जल्दी से लंड पर आ जाओ.
मैं चढ़ गई.

वे मेरी चूत को अपने लंड पर रखवा कर जोर देने लगे, मेरे पिछवाड़े को पकड़ कर मुझे नीचे को बिठाने लगे.

उनके लंड पर ढेर सारा थूक होने की वजह से उनका लंड मेरी चूत की दरार को फाड़ते हुए अन्दर जाने लगा.

उनका लंड बहुत बड़ा था. मैं पूरा बैठने को राजी नहीं हो रही थी.

वे मुझे पकड़ कर खुद ऊपर को उठ गए उस वजह से उनका पूरा लंड अन्दर चला गया और मैं उनके लौड़े के ऊपर बैठ गई.

मेरी आह निकल गई थी. पहले की अपेक्षा इस बार लंड चूत की जड़ तक चला गया था.
उनके पेट पर मेरे हाथ थे और उनका पेट मस्त उठ बैठ रहा था.
मैं यदि उस पर लेट जाती तो मुझे गद्दे का मजा मिल सकता था.

अब वे मुझे हिलने को कहने लगे थे.
मैं उनके लंड पर बैठ कर अपने चूतड़ों को हिलाने लगी.

उनके हाथ मेरे चूतड़ों और पट्ट पट्ट पड़ने लगे.
वे तबला सा बजा रहे थे.

मैं- अरे यार जानू मत मारो … लाल कर दोगे क्या!
मगर जेठ जी नहीं मान रहे थे.

मैंने उनके हाथ पकड़ लिए.
वे मेरी चूत की माँ चोदने में लगे थे.

और मेरे स्तनों का कुछ पूछो ही मत.
जेठ जी ने इतने ज्यादा चूस डाले थे कि ढीले कर दिए थे.
निप्पलों को तो वे पागलों के जैसे काटने लगे थे.

मैं अपने हाथों से जबरदस्ती अपने दूध छुड़वा रही थी.
वे स्तनों पर चमाट मार रहे थे.

मैं भी इस सब का बदला लेना चाहती थी.
मैंने हाथों में थूक लगाया और उनके पेट पर पट्ट पट्ट मारने लगी.

यह देख कर वे कहने लगे- अरे बेबी, पागल हो गई क्या?
मैं- मुझे दर्द हो रहा है. अपने हाथ चलाना रोको. वरना मैं भी आपकी मां चोद दूँगी.

वे- अरे बेबी सॉरी.
कुछ देर बाद झकास चुदाई होने लगी.

अब जेठ जी को कुछ याद आया और वे बोले- कॉन्डोम है क्या?
मैंने कहा- नहीं है.

वे बोले- अरे मेरा छोटू यूज़ नहीं करता क्या?
मैं- नहीं. कंडोम अभी खत्म हो गए हैं … आपका छोटू अभी लाया नहीं. ऐसा करना … आप स्पर्म बाहर निकाल देना.

वे- नहीं, मैं तो तेरे मुँह में डालूँगा.
मैंने कहा- अच्छा आप अन्दर ही कर देना. मैं गोली खा लूँगी.

वे बोले- ओके ठीक है.
मैं- कब तक निकालना है?

वे- अभी तो बहुत टाइम है.
मैं- क्यों … अब कितना और टाइम लगेगा यार?

वे- क्यों, कभी इतनी लंबी नहीं चुदी क्या?
“नहीं जानू, आज आपने बहुत ज्यादा चोद दिया है … अब आराम करना है.”

वे- अभी नहीं, अभी रुको … मुझे टाइम लगेगा.
मैंने कहा- अच्छा पोजीशन बदल लो.

यह सुनकर जेठ जी ने मुझे अपने बाजू में लिटाया और पैर को उठा लंड पेल दिया.
वे मेरे गालों पर किस करने लगे थे.

उनका पेट मेरे स्लिम पेट को रगड़ रहा था.
कुछ देर बाद जेठ जी जोर जोर के झटके मारने लगे.

मैं आह उम्म्म करने लगी.

मेरी आवाज उनके किस में ही दब कर रह गई.
वे मेरे एक हाथ को हाथ से पकड़े हुए थे और पैर को पैर से पकड़े हुए चोद रहे थे.

कुछ देर बाद जेठ जी ने अपना मुँह मेरे एक दूध पर रख दिया और दूध खींचते हुए चूत चोदने लगे.

करीब दस मिनट बाद उन्होंने मुझे चित लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.
उन्होंने अपने लौड़े में ढेर सारा थूक लगाया और चूत में पेल दिया.

वे मेरे ऊपर पूरे चढ़ गए थे. उनके भारी शरीर को मैं न जाने कैसे सहन कर रही थी.

कुछ देर बाद मैंने कहा- जानू, आपका पूरा वजन मेरे ऊपर है.
वह कुछ नहीं बोले और सटासट झटके देने लगे.

करीब 7-8 मिनट बाद जेठ जी चरम पर आ गए.
मुझे यह बताते हुए कि ‘मैं झड़ने वाला हूँ’, उन्होंने अपनी स्पीड एकदम से बढ़ा दी.
मैं- आह … और तेज करो जानू.

वे मेरे मम्मों के ऊपर पूरे लेट गए और अपने जिस्म को मेरे जिस्म से रगड़ने लगे थे.

मैं- आह मम्मी री मर गई आज तो!
वे झड़ने लगे.

मैं भी मस्त हो गई और आराम से उनकी पीठ को सहलाती हुई अपना हाथ फेरने लगी.
झड़ जाने के बाद भी जेठ जी मेरे ऊपर से नहीं उठे.

कुछ देर बाद मैंने कहा- जानू, अब उठ जाओ.
तो वे खिसक कर बाजू में लेट गए.

मैं उन्हें किस करके कहने लगी- जानू अब सो जाओ.
मैंने उनके ऊपर हाथ रख लिया सो गई.

जबरदस्त चुदाई की थकान थी, तो करीब 7 बजे नींद खुली.
मैंने उनका लंड चूस कर खड़ा कर दिया और फिर से चुदाई करवाने के लिए उनके लौड़े की सवारी करने लगी.

एक घंटा तक मैं जमकर चुदाई के मजे लेती रही और उनके वीर्य को अपनी चूत के अन्दर ही डलवा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
जेठ जी फ्रेश होने चले गए.

मैं उस वक्त अपने पैरों को ऊपर करके लेटी रही.

दोस्तो, इस तरह से हम दोनों जेठ बहू का रिश्ता, जानू और बाबू का प्यार बन गया था.

पति को 3 दिन बाद आना था.
उन तीन दिनों में हम दोनों ने सारे सारे दिन जमकर मजा लिया.

अगले तीन दिनों की घटना मैं आपको अगले भाग में लिखूँगी.

इस प्रेगनेंसी सेक्स कहानी में मैं अपनी सच्ची घटना को बयान कर रही हूँ क्योंकि जेठ जी से चुदवाने के बाद मैंने दवा नहीं ली थी, जिस वजह से आज मैं तीन महीने की प्रेग्नेंट हूँ.
मेरी कोख में यह बच्चा जेठ जी के प्रेम की निशानी है.

मेरे पास मेरे जेठ जी के लंड की फ़ोटो और उनके लंड का उत्पादन आज भी मेरे पेट में कैद है.
मैं आज भी उनसे फोन पर बात कर लेती हूं.

दोस्तो, जिसने मुझे माँ बनने का सौभाग्य दिया, भला मैं उसे कैसे भूल सकती हूं.
मैंने अपने जेठ जी से दिल से प्यार किया और शायद यह प्यार कभी नहीं भूल सकती.
 

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बहन को मां बनाकर उसका घर बसाया- 1




दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं गाजियाबाद का रहने वाला हूं.
मेरी उम्र 23 साल है.

यह सेक्स कहानी आज से दो साल पहले की है और मेरी बहन के साथ हुई चुदाई की कहानी है.

माय हॉट सिस्टर का नाम कनक है जो 25 वर्ष की है.
उसकी शादी हो चुकी थी.

जब यह घटना शुरू हुई थी, तब मेरी बहन 23 वर्ष की थी.

मैं अंतर्वासना डॉट कॉम पर बहुत सारी सेक्स कहानियां पढ़ता रहता था.
उसमें भाई बहन की चुदाई की बहुत सारी कहानियां आती थीं.

पहले मैं यह सब झूठ समझता था. फिर एक बार भाई बहन की चुदाई की कहानी को पढ़ कर मुझे बड़ी मस्ती चढ़ गई थी.
अब मैं उन सेक्स कहानियों को बड़े चाव से पढ़ने लगा था और अपना लंड हिला लिया करता था.

मैंने एक दिन अपने एक दोस्त राज से पूछा कि क्या कोई भाई अपनी बहन को चोद सकता है?
उसने मुझसे कहा कि हां अगर उसकी बहन की इच्छा हो, तो यह हो सकता है.

उसकी बात सुनकर मेरे मन में कामुकता जाग गई और मैंने भी ठान लिया था कि अब मैं अपनी बहन की चुदाई करूंगा.

मैं उसी वक्त से अपनी बहन को चोदने के लिए तरीके सोचने लगा.
यही सब सोचते हुए मैं घर आ गया.


मैं उधर एक सेक्स कहानी पढ़ने लगा और अपने कमरे में बने बाथरूम में जाकर मुठ मारने के लिए लंड को तैयार करने लगा.

फिर मैं बाथरूम में जाकर नंगा हुआ और वाशबेसिन के सामने अपने मोबाइल में सेक्स कहनी को पढ़ते हुए लंड हिलाने लगा.

कुछ ही देर में लंड से वीर्य छलक गया और मैं कपड़े पहन कर बाहर आ गया.
अब मैं जाकर अपने घर के मेन हॉल में बैठ गया.

तभी कनक दीदी अपने कमरे से आकर मेरे पास सोफे पर बैठ गईं.
मैं उन्हें देखने लगा.

मैंने देखा कि कनक दीदी ने बहुत छोटे-छोटे कपड़े पहने हुए थे, जिससे उनकी ब्रा साफ दिख रही थी.
उन्होंने नीले रंग की ब्रा पहनी थी.

इधर मैं आपको अपनी दीदी के बूब्स के बारे में बता दूं.
उनकी चूचियां 34 इंच की हैं. वे 34-30-36 की फिगर वाली मस्त माल हैं. उनकी चूचियां एकदम टाइट और सामने को तनी हुई हैं.
जब मेरी दीदी चलती हैं तो उनकी गांड गजब थिरकती है.

वह एकदम दूध की तरह सफेद माल हैं.
अगर कोई मेरी कनक दीदी को एक बार देख भर ले, तो बगैर मुठ मारे नहीं रह पाएगा.
जब वे किसी काम से बाहर जाती थीं, तो लोग उन्हें देख देख कर अपना लंड पकड़ कर सहलाने लगते थे.

मैंने खुद एक दो बार कुछ लोगों को कहते सुना था.
अधिकतर की यही चाह समझ आती थी कि मेरी बहन एक बार उनके हाथ लग जाए, तो उनके लौड़े को मजा ही आ जाए.

अब तो मैं भी कनक दीदी को चोदना चाहता था.
मैं रोजाना दीदी को याद करता और बाथरूम में जाकर मुट्ठ मार लेता.

कुछ ही दिनों में स्थिति यह हो गई थी कि मैं उन्हें छिप कर देखने लगा था और उन्हें देख कर पागल हो जाता था.

कुछ दिन ऐसे ही चलने के बाद मैंने अपनी बहन को अनजाने में टच करना शुरू कर दिया था.
मेरी दीदी को कुछ भी अहसास नहीं होता था कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ.

दीदी जब भी मेरे कमरे में आतीं, तो मैं उन्हें बहुत घूर घूर कर देखता था.
कभी कभी जब दीदी ने ब्रा नहीं पहनी होती थी, तब उनकी चूचियां बहुत मस्त हिलती थीं.

एक बार मैंने दीदी को नहाते हुए भी देखा था.
मेरी बहन की चूत एकदम से सफेद थी. उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

उस दिन हुआ यह था कि दीदी अपने कमरे के बाथरूम में नहा रही थीं.
मैं किसी काम से उनके कमरे में गया था.

उन्होंने अपने कमरे के बाथरूम का दरवाजा लॉक नहीं कर रखा था, दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ भी था.

तो मैंने देख लिया था कि दीदी नहा रही हैं.
वे बिल्कुल ही नंगी थीं तो मैंने देखा कि दीदी की चूत बिल्कुल साफ थी.
दीदी खुद भी बहुत ज्यादा गोरी थीं.

मैं कुछ देर तक उनके कमरे से उन्हें नंगी नहाती हुई देखता रहा.
फिर मैं बाहर निकलकर अपने कमरे में आकर अपने बाथरूम में चला गया.

मैंने फिर से मुट्ठ मार ली.

फिर एक दिन दीदी बाहर हॉल में बैठकर टीवी देख रही थीं तो मैं भी उनके पास आकर बैठ गया.
मैं दीदी के बाजू में बैठ कर टीवी देखने लगा.

मैं दीदी को देख रहा था.
तो दीदी मुझसे बोलीं- राहुल तू अब उठ, मैं लेट कर टीवी देखूंगी.

मैं फट से उठ गया और दीदी लेट गईं.

जब दीदी लेट गईं तो मैं उनके पास बैठ गया.
उनका पेट मेरी पीठ की तरफ हो गया था और मेरा एक हाथ दीदी की चूचियों की तरफ था, दूसरा हाथ दीदी की चूत की तरफ था.

मैंने दीदी के बूब्स को टच करने का सोचा तो अपना हाथ मैं दीदी की तरफ धीरे-धीरे ले जाने लगा था.

हाथ ले जाकर मैंने हल्के से दीदी के बूब्स टच कर दिए.
मेरा हाथ दीदी के मस्त मम्मों को छू रहा था.
उसने कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं की.

तभी मैंने सोचा कि क्यों ने एक खास तरीके उनकी चूत पर अपना हाथ रखूँ.
तो मैं अपना दूसरा हाथ धीरे-धीरे उनकी चूत की तरफ ले गया.

पर उसी समय अचानक से दीदी ने अपनी टांगें सिकोड़ लीं.
मैंने तुरंत अपने दोनों हाथ अलग कर लिए.

शायद दीदी को मुझ पर शक होने लगा था.
उन्होंने कहा- जरा उठना, मैं अपने कमरे में जा रही हूं.

मैं उठ कर सीधा हो गया और दीदी वहां से अपने कमरे की ओर चली गईं.
वे जाकर अपने कमरे में लेट गईं.

मैं भी समझ गया कि दीदी को मुझ पर शक हो गया है.
पर मैं तो हवस के दरिया में बह रहा था और इस विषय पर ज्यादा कुछ ना सोचते हुए अपने कमरे में जाकर लेट गया.

उधर मैंने अंतर्वासना डॉट कॉम पर स्टोरीज पढ़ना शुरू कर दी.

कुछ समय ऐसे ही बीतता गया.
मैं अपनी बड़ी बहन के जिस्म से खेलने की कोशिश करता रहा पर सफलता नहीं मिली.

हालांकि उनको इस बात का आभास हो गया था कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ.

फिर एक दिन पापा और मम्मी आपस में बात कर रहे थे कि कनक दीदी अब बड़ी हो चुकी हैं. उनकी शादी कर दी जाए.
यह सब सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गया कि मेरी बहन की शादी हो जाएगी, तो मेरी हवस कैसे पूरी होगी.

मैं कनक दीदी को अब जल्दी ही चोदने के लिए कुछ और तरकीब सोचने लगा.
मगर तब भी मेरे हाथ कुछ न लग सका.

कुछ दिन बाद पापा बोले- मैंने कनक के लिए एक रिश्ता ढूंढा है. यह रिश्ता बहुत ही अच्छे घर से है. लड़के का बहुत ही बड़ा बिजनेस चलता है.
मां बोलीं- ठीक है, चलो कनक से बात करते हैं.

मम्मी पापा कनक दीदी के पास गए और उनसे शादी के बारे में बात करने लगे.
उन्होंने दीदी को लड़के के बारे में बताया और उनसे पूछा कि तुम शादी के लिए तैयार हो?

तो कनक दीदी मैं भी सर हिलाकर हां में जवाब दे दिया.
इसके बाद दो महीने बाद दीदी की शादी हो गई और वे अपनी ससुराल चली गईं.

माय हॉट सिस्टर को चोदने की इच्छा अधूरी ही रह गई.

मैं अब अपनी गर्लफ्रेंड बनाने लगा.
एक लड़की को मैंने सैट भी कर लिया और उसे चोदने लगा.

यूं ही समय निकलता गया.
मेरी दीदी की शादी को 2 साल हो चुके थे.

एक दिन दीदी का फोन आया और उन्होंने मुझसे मां से बात करवाने के लिए कहा.
मैंने दीदी की मां से बात करा दी.

दीदी ने बात की और उन दोनों में यह तय हुआ कि वे अपने मायके वापस आ रही हैं.
उस समय दीदी काफी रो रही थीं.

मैंने मां से पूछा कि क्या हो गया?
तो मां ने कहा- कल तू अपनी दीदी के घर जाकर अपनी दीदी को ले आ!

तो मैंने कहा- बताओ तो क्या दिक्कत हो गई… कोई बात हो गई क्या?
मां बोलीं- तेरी बहन के घर पर उसकी अपने पति से लड़ाई हो गई है.

माने मेरे जीजा जी से बहन की लड़ाई हो गई थी.
मैंने कहा- ठीक है मां, मैं कल जाकर दीदी को ले आऊंगा.

फिर अगली सुबह होते ही मैं अपनी बहन की ससुराल पहुंच गया और अपनी दीदी को लेकर अपने घर वापस आ गया.

मैंने देखा कि अब मेरी दीदी और भी ज्यादा मस्त हो गई थीं.
वे एकदम कड़क माल जैसी दिख रही थीं.

दीदी मां के पास आकर गले लग कर रोने लगीं और मां दीदी को अपने साथ कमरे में ले गईं.

मां ने दीदी से पूछा कि क्या हुआ?
तो दीदी ने पहले मां दरवाजा बंद करने को कहा.

मां ने दरवाजा बंद कर दिया और बोलीं- अब बता, क्या हुआ?
तो दीदी बोलीं- मां मैं अपनी ससुराल वालों से परेशान हूं. मेरे सास-ससुर कहते हैं कि तू अभी तक हमें बच्चा क्यों नहीं दे पाई. इस पर मैंने अपने पति से डॉक्टर के पास जाकर चेकअप कराने के लिए कहा. मैं पति के साथ डॉक्टर के पास गई और अपना चेकअप भी करा लिया. मेरी रिपोर्ट्स बिल्कुल सही आई थीं. मेरे अन्दर कोई कमी नहीं निकली.

इस बात को सुन कर मेरी मां दीदी से पूछने लगीं- तो क्या तेरे और तेरे पति के बीच संबंध नहीं बनते हैं?
दीदी बोलीं- मां, मैं आपको कैसे बताऊं कि मेरे पति एक नामर्द हैं.
मां बोलीं- इसका क्या मतलब है कि वे ऐसे हैं? क्या अभी तक तेरे पति ने एक भी बार तेरे साथ संबंध नहीं बनाया?

बहन ने सर हिलाते हुए हां कहा और यह जान कर मां एकदम से चौंक गईं.
मां बोलीं- अब क्या करना है?
बहन ने कहा- मां, मैं अपनी ससुराल के ऐशो आराम को नहीं छोड़ सकती हूं.

मां बोलीं- वह सब ठीक है, पर अब तूने इस बारे मे क्या सोचा है कि तू बच्चा कहां से देगी?
दीदी मां से कहने लगीं- आप कोई जुगाड़ क्यों नहीं करतीं?

मां कहने लगीं- तू किसी अपने दोस्त से संबंध बना ले!
दीदी कहने लगीं- मां, अगर मैं अपने किसी दोस्त से सेक्स कर लेती हूं, तो आगे चलकर वह मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर देगा, तब क्या होगा?

मां कहने लगीं- हां यह तो तू बिल्कुल सही कह रही है.
तभी मेरी दीदी के दिमाग में एकदम से मेरे बारे में ख्याल आया.

वे मां से बोलीं- मां यदि तुम राहुल को मना लेती हो, तो मेरा काम बन सकता है.
मां ने सोचते हुए कहा- लेकिन वह तेरा तो भाई है, वह कैसे मानेगा?

दीदी ने मां से खुल कर कहा- मां, राहुल पहले से ही मुझे चोदने की इच्छा रखता था. मैंने देखा था कि राहुल ने मुझे देखकर कई बार मुठ मारी थी और वह मेरी पैंटी ले जाकर अपने मुठ के सारे माल से उसे खराब करके वापस रख जाता था.

यह सब बातें हुईं.
तो मां ने कहा- चल ठीक है, मैं कल राहुल से तेरे बारे में बात करती हूं.

उन दोनों के बीच हुआ यह सारा वार्तालाप मैंने सुन लिया था.
अगले ही दिन मां मुझे लेकर अपने कमरे में आईं और वहां ले जाकर बोलीं- बेटा, तेरी दीदी बहुत ज्यादा परेशानी में है.

मैंने मासूम बनते हुए कहा- क्या हुआ दीदी को … उनके पति यानि कि मेरे जीजाजी उन्हें मारते हैं क्या … या फिर उनके ससुराल वाले परेशान करते हैं?
मां ने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

फिर मैंने पूछा- जब ऐसा नहीं है, तो हुआ क्या है?
मां बोलीं- बेटा तुझे एक काम करना है.

मैंने कहा- क्या हुआ मां, आप जो बोलोगी, मैं दीदी के लिए कोई भी काम करने के लिए तैयार हूं.
मां बोलीं- बेटा, देख हम एक प्रतिष्ठित परिवार से हैं और यह जो मैं कहने जा रही हूँ … बड़ा ही गोपनीय है.
मैंने कहा- मां आप बताओ तो?

मां बोलीं- बेटा, तेरी दीदी अभी तक मां नहीं बनी है!
तो मैंने कहा- क्यों, ऐसा क्या हुआ?

मां ने कहा- तेरी दीदी मुझसे कह रही थीं कि वह ऐशो आराम नहीं छोड़ सकती है और उसके ससुराल वाले उसे बच्चे के लिए परेशान कर रहे हैं. वे यह कह रहे हैं कि अगर उसने बच्चा नहीं दिया तो उसके पति की दूसरी शादी करा देंगे.

मैंने कहा- अरे … तो आप बताओ न मां कि मुझे क्या करना होगा?
मेरी मां बोलीं- बेटा, तुझे अपनी दीदी को अपने बच्चे की मां बनाना होगा!

यह सुन कर मेरे लौड़े ने तुरंत एक झटका मार दिया.
मैंने मन ही मन खुश होते हुए मां की तरफ सवालिया नजरों से देखना शुरू कर दिया.
 

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बहन को मां बनाकर उसका घर बसाया- 2




कहानी के पहले भाग

में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी बहन ने मेरी मां को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि वे मुझे दीदी को चोद कर गर्भवती करने के लिए कहें. इसी लिए मेरी मां मुझसे बहन की चुदाई करके उन्हें मां बनाने की बात कह रही थीं.

अब आगे:

मैंने कहा- यह काम जीजाजी क्यों नहीं करते?
मां बोलीं- वह नामर्द है और शादी के बाद अब एक भी बार तेरी दीदी के साथ संबंध नहीं बना पाया है.

यह बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ कि मुझे सीलपैक माल मिलने वाला है.
पर मैंने अपनी खुशी कि दबाते हुए कहा- मां वे तो मेरी बड़ी बहन हैं. उनके साथ यह सब मैं कैसे कर सकता हूं?

मां ने कहा- बेटा हमारी भी जिंदगी बदल जाएगी. तेरी दीदी कह रही थी कि मुझे बच्चा होने के बाद मैं आप सबकी जिंदगी एकदम से बदल दूंगी. बेटा वह तुझे अपनी दौलत से भर देगी. अब बता बेटा कि क्या तू यह काम करने के लिए राजी है? तेरे फैसले से हमारी सबकी जिंदगी एकदम से बदल जाएगी!

मैंने मां से कहा- मां, यदि दीदी नहीं मानी तो?
मां ने कहा- यह सब मुझसे तेरी दीदी ने ही कहा है कि तुझे राजी कर लूँ. यदि कोई बाहर का लड़का तेरी दीदी के साथ ऐसा करेगा तो वह लड़का तेरी दीदी को बाद में परेशान भी कर सकता है.

यह भी देखें: होली की मस्ती की रंग बिरंगी तितलियाँ

मैं चुप रहा तो मां ने एक ऐसी बात कह दी कि जिसे सुनकर मैं एकदम से हैरान रह गया.

मेरी मां यह बोलीं- तेरी दीदी मुझे बता रही थी कि उसकी शादी से पहले तू उसे चोदने की इच्छा रखता था!
अपनी मां के मुँह से बहन को चोदने की बात एकदम खुल्लम खुल्ला सुनकर मैंने अपनी नजरें शर्म से नीचे कर लीं.

वे मेरे हाथ को पकड़ कर हँसती हुई कहने लगीं- मान जा बेटा, तुझे रसमलाई खाने मिल रही है.
यह सुनकर मैंने भी अपनी मां से कह दिया- अगर यह सब आपको और दीदी को ठीक लगता है, तो मैं यह काम करने के लिए तैयार हूं.

मां हंसकर मुझे अपने गले लगाने लगी और बोलीं- यह सुनकर तेरी दीदी बहुत ज्यादा खुश हो जाएगी. आज रात से ही तू अपने काम को अंजाम देना शुरू कर दे.
फिर हम दोनों बाहर आ गए.

मां ने दीदी की तरफ अपने थंब से काम बन गया का इशारा करते हुए कमरे में आने के लिए कहा.
दीदी मां के साथ कमरे में चली गईं और मां ने दीदी को मेरे बारे में सब कुछ बता दिया.

दीदी हंसती हुई बाहर आईं और मेरी तरफ देख कर स्माइल करने लगीं.
मैंने भी उनकी तरफ देख कर स्माइल करना शुरू कर दी और अपनी नजरें नीचे कर लीं.

इसके कुछ ही देर बाद दीदी की ससुराल से जीजा जी का फोन मेरे पास आया.
जीजा जी बोले- तुम अपनी दीदी को घर पहुंचा जाओ. मैं जरा काम से बाहर जा रहा हूं. तेरी दीदी मम्मी पापा का ख्याल रख लेगी.

मैंने फोन रख कर दीदी से कहा- जीजा जी ने आपको घर बुलाया है. वे कह रहे हैं कि वे कहीं बाहर काम से जा रहे हैं.
दीदी बोलीं- ठीक है, अपने जीजा जी से कह दो कि कल सुबह घर आ जाएंगे.

मैंने जीजा जी से कहा- जीजा जी, ठीक है, कल सुबह मैं दीदी को आपके घर पहुंचा दूंगा.

अगले दिन मैं सुबह उठ कर फ्रेश हुआ और तैयार होकर दीदी की ससुराल उन्हें छोड़ने जाने लगा.

रास्ते में दीदी मुझसे बोलीं- राहुल, मैंने मां के जरिए तुझसे कुछ कहलवाया था, क्या तू तैयार उस काम के लिए राजी है?
मैंने कहा- हां दीदी मैं तैयार हूं. पर दीदी अभी तो आप अपनी ससुराल जा रही हो. अब यह काम कैसे होगा?

दीदी बोलीं- मैं कुछ करती हूं.
मेरे मन में एक ख्याल आया कि मैं दीदी से कहूँ.

मैंने कहा कि दीदी एक बात मेरे मन में आ रही है.
दीदी बोलीं- क्या?

मैंने कहा- यदि मैं आपको चोद कर अपने बच्चे की मां बना दूँ, तो यह बात जीजाजी को पता चल जाएगी क्योंकि उन्होंने आपके साथ एक भी बार सेक्स नहीं किया है!
दीदी बोलीं- हां तेरे जीजा जी को यह सब पता है. वे भी मुझे छोड़ना नहीं चाहते हैं क्योंकि अगर वह दूसरी शादी करते हैं, तो उस लड़की की भी जिंदगी खराब हो जाएगी. इसलिए तेरे जीजा जी ने मुझे अपने दोस्त के साथ करने को कहा था, तो मैंने मना कर दिया था. मैंने उन्हें कह दिया था कि मैं आपके दोस्त के साथ नहीं कर सकती हूँ, तो वे बोले कि जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा कर लो. तुम चाहे अपने दोस्त के साथ कर लो या फिर किसी और के साथ. तो मैंने उनसे कहा कि मैं सब कुछ ठीक कर लूँगी, आप टेंशन ना लो.

मैं यह बात सुनकर एकदम से चौंक गया और कहने लगा- इसका मतलब यह हुआ कि आपने जीजा जी को यह सब बता दिया है.
दीदी हां में जवाब देने लगीं.

मैं मन ही मन बड़ा खुश था कि मैं सभी की जानकारी में अपनी बहन की चुदाई करने वाला हूँ.
कुछ देर बाद हम दोनों दीदी की ससुराल पहुंच गए.

दीदी अपने कमरे में चली गईं और मैं जीजा जी से मिलकर उनसे वापस जाने की बात कहने लगा.
मैं- जीजा जी, अब मैं वापस अपने घर के लिए निकलता हूं.

तभी दीदी आईं और बोलीं- तू आज यहीं रुक जा!
मैंने कहा- नहीं दीदी, वहां घर पर मां अकेली हैं और पापा अपने काम से बाहर गए हुए हैं. उन्हें आने में 2 हफ्ते लग जाएंगे.

इस पर जीजा जी बोले- ठीक है तुम जाओ और अपनी माताजी का ख्याल रखना.
मैं वहां से चला आया और मां से सब बताया.

मां कहने लगीं- चल मैं कुछ करती हूं.
फिर मेरी मां ने मुझे एक प्लान बताया- मैं दो दिन बाद तेरे जीजाजी को फोन करूंगी और उनसे कहूंगी कि मुझे सीढ़ियों से गिरने से मेरे पैर में बहुत ज्यादा चोट आई है. तेरी दीदी को मेरा ध्यान रखने के लिए भेज दें.

अपनी मां का यह प्लान सुनकर मैं बहुत प्रसन्न हो गया और अपनी मां को गले लगाकर कहा कि हां यह ठीक रहेगा.

बस अब क्या रह गया था.
मुझे अपनी दीदी की चुदाई के लिए बहुत ज्यादा हवस चढ़ने लगी. मुझे तो एक एक दिन एक एक साल की तरह लग रहा था.

दो दिन बाद मां ने शाम को मेरे जीजा जी को फोन लगाया और कहा- बेटा, मैं सीढ़ियों से गिर गई हूँ. यदि तुम कनक को घर पर भेज दो तो बड़ी मेहरबानी होगी. वह मेरा ध्यान रख लेगी क्योंकि मुझसे उठा ही नहीं जा रहा है. मेरे पैर में बहुत ज्यादा चोट आई है.

जीजा जी ने कहा- ठीक है मम्मी जी, कल आप राहुल को भेज देना. मैं अभी कनक को फोन करके कह देता हूं कि कल आप माता जी के घर चले जाना.
इस पर मां ने कहा- ठीक है बेटा, आप फोन करके कनक से कह देना क्योंकि मैं अगर उससे कहती हूँ, तो वह आने से मना कर देती.

फिर मां ने मेरा फोन मुझे वापस दे दिया और कहा- जाकर ले आना अपनी दीदी को!

अब मैं अगली सुबह का बहुत बेसब्री से इंतजार करने लगा.
सुबह होते ही मैं दीदी की ससुराल पहुंच गया और दीदी को लेकर अपने घर आ गया.

मैं दीदी से कहा- देख मां ने कहा था कि कोई प्लान करके मुझे घर पर बुला लेगी, तो मां ने बुला लिया है.
इस पर मैंने दीदी से कहा- दीदी आपने अपनी ससुराल वाले घर में क्यों नहीं करवा लिया.

दीदी ने मुझसे कहा कि मेरे सास-ससुर बहुत तेज हैं और यदि उन्होंने यह सब करते हुए देख लिया तो मुझे घर से निकाल देंगे. तभी तो मां ने यह प्लान बनाया और मुझे अपने घर बुला लिया.

घर आकर दीदी अपने कमरे में चली गईं और मैं अपने कमरे में चला गया.
मुझे पता था कि मेरी बरसों की हवस आज पूरी हो जाएगी.

मैं आज की रात होने के लिए और भेनचोद बनने को बेताब था.
अपनी सगी बहन को चोदकर उसे गर्भवती करने के लिए मुझे उसकी सील पैक चुत मिलने वाली थी.

मैं सोचने लगा कि एक बार में ही मेरी बहन पेट से हो जाएगी या पता नहीं उसे कितने दिन तक चोदना होगा.
यह सब सोचते हुए मैं बाहर घूमने के लिए चला गया.

बाहर घूमते हुए मैंने सोचा कि आज मैं अपनी दीदी की चुदाई करूंगा, तो कितनी देर तक चुदाई कर सकूँगा.
सामान्यतया सेक्स करने में ज्यादातर मर्दों का पांच दस मिनट में काम हो जाता है.

इतने से मेरा काम सही से नहीं होगा.
तो मैंने सोचा कि आज तो मुझे अपनी दीदी को दो-तीन घंटे लगातार चोदना चाहिए. तभी उसे अपने भाई की ताकत पर गुमान हो सकेगा.

यह सब सोचते हुए मैं मेडिकल स्टोर की तरफ चला गया.
उधर काम करने वाली एक लड़की को मैंने अपने पास बुलाया और उससे पूछा- आपके स्टोर में कोई ऐसी दवा है, जिसे लेकर मैं दो घंटे तक लगातार सेक्स कर सकूं?

वह बोली- हां है पर बहुत महंगी दवा है.
मैंने कहा- कितनी महंगी है?

वह बोली- आठ सौ रुपए का एक स्प्रे आता है.
मैंने पूछा- उससे कितनी देर तक सेक्स कर सकते हैं.
वह बोली- लगातार दो घंटे तक!

मैंने उससे कहा- उससे करने से कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
वह मुझसे बोली- नहीं, उसे यूज करने से कोई दिक्कत नहीं होती है.

मैं अभी कुछ और कह पाता कि वह लड़की वापस बोली- इसे यूज करने से आपके टूल का साइज भी बहुत बढ़ जाता है और वह फूल कर मोटा भी हो जाता है.
मैंने मुस्काते हुए उसे देखा और उसके हाथ में पैसे दे दिए.

वह भी अपनी गांड मटकाती हुई गई और स्प्रे ले आई.
मैंने पूछा- इसे कितनी देर पहले लगाना चाहिए?

वह बोली- उसमें सब लिखा रहता है.
मैं ओके कह कर उससे स्प्रे लेकर घर आ गया.

मैंने देखा दीदी एकदम से छोटे छोटे कपड़ों में पहले की तरह सोफे पर बैठी हुई थीं.
पर मुझे आज उनको उन छोटे कपड़ों में नहीं चोदना था. मुझे तो उनको शादी वाले लहंगे में चोदने का मन था.

मैं अपनी मां के पास गया और मैंने कहा- मैं दीदी को बिल्कुल वैसे ही चोदना चाहता हूँ, जैसे एक पति अपनी पत्नी को सुहागरात पर करता है.
मां बोलीं- हां तो ले जाना अपनी इस कुतिया को … और इसे चोद कर मना ले अपनी सुहागरात … और बना दे इसे अपने बच्चे की मां.

मैं हंसते हुए मां से बोला- मां, दीदी को मैं इन छोटे छोटे कपड़ों में नहीं चोदूंगा. आप जाकर दीदी से कह दो कि वे शादी के जोड़े में मुझसे मिलें. वे वही लहंगे को पहने, जो उन्होंने अपनी शादी के समय पहना हुआ था.
मां हंसती हुई बोलीं- चल मैं अभी तेरी दीदी से कहे देती हूं.

मैं यह सुन कर अपने बाथरूम में चला गया और जाकर फ्रेश होकर खाना खाने के लिए आया.

मैंने देखा कि मेरी दीदी ने लहंगा चोली पहन हुआ था.
उनकी चोली एकदम टाइट थी.

उस वक्त दीदी ने अपने मम्मों के ऊपर चुनरी नहीं डाली हुई थी तो गहरे गले वाली चोली से दीदी के आधे से ज्यादा दूध दिखाई दे रहे थे.
वे शायद मुझे गर्म करने के लिए बिना चुनरी के आ गई थीं.

मैं उन्हें देखकर एकदम ठगा सा देखता रह गया.
मेरा लंड एकदम से खड़ा होने लगा.

मैं सेक्स कहानी पढ़ने वाली पाठिकाओं और गांड मराने वाले लड़कों को अपने लंड के बारे में बताऊं कि मेरा लंड काफी लंबा और ढाई इंच मोटा है, जो कि किसी की भी चूत फाड़ने के लिए एक बहुत मोटा और लंबा लंड है.

दीदी ने मेरी टांगों के बीच मेरे फूलते हुए लौड़े को देखा और वे इठला कर सामने वाली कुर्सी पर बैठ गईं.

मैंने खाना खाया और अपनी बहन की चुदाई के लिए तैयार हो गया.

पर मेडिकल स्टोर वाली लड़की ने मुझे एक बात और भी बताई थी कि इस स्प्रे के पैक के अन्दर एक कागज मिलेगा, उसे पढ़ना जरूरी है.

मैंने बाथरूम में जाकर उसे कागज को निकाल कर पढ़ा.
उसमें लिखा था कि इस स्प्रे को चुदाई करने से 15 से 20 मिनट पहले अपने लंड पर लगा लेना चाहिए. वरना ठीक लंड को चूत में पेलने के समय यह स्प्रे असर नहीं दिखाता है.

अब मैंने स्प्रे को अपने लौड़े पर अच्छी तरीके से छिड़क लिया और बाहर आ गया.
उस वक्त तक मेरी बहन कमरे में चली गई थीं.

मां ने मुझसे कहा- अब तू जा और अपने काम को अंजाम दे.
मैं मां की तरफ देख कर हंसते हुए उठा और दीदी के कमरे में आ गया.

दीदी दरवाजे पर ही मेरे अन्दर आने का इंतजार कर रही थीं.

तब दीदी मेरी तरफ हंस कर देखने लगीं और मैं भी उनकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा.

मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और उनको बेड पर ले गया.
अपनी सगी दीदी को मैंने बेड पर लेटा दिया और झुक कर उनके गालों पर चूम लिया.

तभी दीदी ने मुझे अपने हाथों से पकड़ा और अपने होंठों से लगा कर चूमने लगीं.
मैं एकदम से सिहर सा गया.

मुझे अपनी बहन के रसीले होंठों का स्वाद आज पहली बार मिला था.
अभी तो न जाने कितनी चीजों का स्वाद पहली बार मिलने वाला था.
 

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बहन को मां बनाकर उसका घर बसाया- 3



कहानी के दूसरे भाग में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपनी बहन को बिस्तर पर लिटा कर उसके होंठों का रस चूसने लगा था.

अब आगे:

कुछ पल बाद दीदी मेरे होंठों से अपने होंठ हटा कर कहने लगीं- आज तुम बिल्कुल मुझे वैसे ही चोदना, जैसे तू अपनी पत्नी की सुहागरात पर चोदने की सोचता है.
मैंने कहा- हां दीदी, मैं आपको एक पत्नी की तरह ही चोदूंगा.

दीदी ने मुझे अपने पास खींच लिया.
हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों में भर लिया और चूमाचाटी करने लगे.
कुछ देर बाद मैं दीदी की लाल रंग की चोली को उतारने के लिए बटन खोलने लगा.

उनके चिटकनी वाले बटन पल भर में खुल गए.
मैंने उनकी चोली को अलग फेंक दिया.

अब दीदी मेरे सामने अपनी काली रंग वाली रेशमी ब्रा में थीं.
उनके दूध से सफेद आधे चूचे काली ब्रा में कैद दिख रहे थे.

मैंने दीदी के बूब्स को उनकी ब्रा के ऊपर से दबाना और मसलना शुरू कर दिया.
साथ ही दीदी के गुलाबी रंग के होंठों को भी चूसना शुरू कर दिया.

दीदी भी मेरे होंठ चूस रही थीं.
उन्होंने मुझसे कहा- मेरी चूत गीली हो रही है!

मैंने दीदी का लहंगा भी उतारना चाहा.
पर मेरी कुतिया बहन ने अपने लहंगे का नाड़ा बहुत टाइट बांधा था.

वे शायद देखना चाह रही थीं कि मैं उनका नाड़ा खोल पाऊंगा या नहीं… या लहंगा यूं ही ऊपर उठाकर उनको चोद दूंगा.

पर मैं तो पुराना खिलाड़ी ठहरा. अब तक मैं छह लड़कियों के साथ सेक्स करके चुदाई का मजा ले चुका था.

मैंने दीदी का नाड़ा खोल दिया और उनका लहंगा भी उतार कर अलग कर दिया.
दीदी कहने लगीं- तुम तो बहुत तेज हो!

लहंगा हटते ही मैंने देखा कि दीदी ने काले रंग की पैंटी पहनी थी.
उनकी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी क्योंकि उनकी चूत पानी छोड़ रही थी.

अब दीदी मेरे सामने ब्रा और पैंटी में थीं.
वे एकदम चिकनी, गोरी और एकदम बेदाग नजर आ रही थीं.

मैंने कहा- दीदी, मैं आपको कब से चोदना चाह रहा था … आखिर आज यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी.
दीदी बस मुस्कुरा रही थीं.

मैंने दीदी की ब्रा की खोलकर उतार दिया और अब मेरी सगी बहन की मस्त चूचियां मेरे सामने तनी हुई थीं.

अपने दोनों हाथ मैंने उनके मम्मों पर रख दिए और उनके होंठों को चूसने लगा था.

दीदी बोलीं- राहुल पहले मुझे तू जल्दी से नीचे से खुश कर दे.
मैंने कहा- हां जरूर दीदी, पर जल्दी क्या है. मैं सब तरह से आपको खुश कर दूंगा. आज तो आप मेरी कुतिया हो.

उन्होंने मुझे स्माइल करते हुए एक हल्का सा थप्पड़ मार दिया और बोली- चल नीचे को जा और चूत चाट!

मैं बेड पर पीछे को हटते हुए उनकी टांगों के पास पहुंच गया और उनकी पैंटी उतारने लगा.

पैंटी उतार कर मैंने देखा कि उनकी एकदम चिकनी झांट रहित चूत मेरे सामने आ गई थी.
मैं उनकी सील पैक चूत देखकर बहुत खुश हो गया और चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा.

दीदी एकदम से सिहर रही थीं.

मैंने कुछ देर चूत चाटने के बाद अपना मुँह हटा लिया और अपनी एक उंगली उनकी चूत में डाल दी.
वह एकदम से चिहुंक उठीं. उनकी दर्द भरी आह निकल गई.

मैंने कहा- क्या हुआ?
वे बोलीं- मैं अभी तक सील पैक हूं.

मैंने कहा- क्या सच में आपने अभी तक किसी का लंड नहीं लिया?
वे बोलीं- नहीं.

मैंने सोचा कि यदि सच में दीदी की चूत सील पैक निकली तो आज तो मेरी बल्ले बल्ले हो जाएगी.

यह सोचते हुए मैं खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा.
मैंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी.

दीदी बोलीं- रुक, तेरा अंडरवियर मैं उतारूंगी.
मैंने कहा- हां क्यों नहीं मेरी जान, आप ही उतारो.

मैं दीदी के पास पहुंच गया और मेरा लंड किसी सख्त लोहे की रॉड जैसा खड़ा हो चुका था.
मैं यह भूल गया था कि मैंने अपने लंड पर स्प्रे लगाया हुआ है.

जब मैंने अपना लंड देखा तो मेरा लंड और लम्बा लंबा और काफी मोटा हो चुका था.

दीदी लौड़ा देखकर एकदम हैरान हो गईं और कहने लगीं- आज तो तू मेरी चूत को फाड़ ही देगा.
मैंने कहा- नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं होता है. चूत में बहुत गजब का जादू होता है, वह जरूरत के अनुसार फैल जाती है!

दीदी बोलीं कि तू मुझे मत बता, मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म में देखा है कि अगर लंड मोटा और लंबा हो, तो लड़की की चूत फट जाती है.
मैंने कहा- ठीक है, जैसा आप समझो.

अब मैंने अपना लंड अपने हाथ से सहलाते हुए अपनी दीदी के मुँह पर रख दिया.
पर उन्होंने मुँह घुमा लिया.
वे लंड चूसने के लिए मना कर रही थीं.

मैंने उनसे थोड़ा प्यार जताते हुए कहा- मुँह से चूस कर देखो तो दीदी… बहुत मजा आता है.
वे बोलीं- नहीं नहीं.

मैंने उनका मुँह पकड़ा और अपने लंड को उनके मुँह पर रखते हुए अन्दर घुसेड़ने लगा.
उन्होंने हल्का सा मुँह खोला और मैंने लंड उनके मुँह के अन्दर धकेल दिया.

वे मेरा आधा लंड अपने मुँह तक ले गईं और हल्के हल्के से चूसना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद दीदी बोलीं कि सच में लंड चूसते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा है.
मैंने कहा- साली कुतिया, तू तो लंड चूसने से मना कर रही थी और अब कह रही है कि मजा आ रहा है.

वे हंसने लगीं.

तभी मैंने अपनी दीदी का सर पकड़ते हुए अपना पूरा लंड उनके मुँह में धकेल दिया.
मेरा लंड जाकर उनके गले तक पहुंच रहा था और वे सही से सांस भी नहीं ले पा रही थीं.

मैं अपना लंड आगे पीछे आगे पीछे करके उनके मुँह को चोदने लगा.
उन्हें क्या पता था मैं अपना लंड पर इस पर स्प्रे लगा कर आया हूं. इसमें से आसानी से पानी नहीं निकलेगा.

अब मेरी दीदी भी बिल्कुल गर्म हो चुकी थीं और कह रही थीं कि राहुल अब तो मुझे चोद कर अपने बच्चे की मां बना दे.

मैं नीचे आया और उनकी चूत को देखने लगा.
सच में कुंवारी चूत कितनी मस्त लगती है. लंड से फटने ले बाद इसका क्या होगा.

मैंने दीदी से टांगें फैलाने को कहा तो उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं.

मैंने चुदाई के लिए दीदी की कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया.
इससे उनकी चूत उठकर ऊपर आ गई थी.

मैं अपना लंड सैट करने लगा.
लंड सैट करते ही मैं धक्का लगाने लगा.

पर दीदी की चूत तो बिल्कुल एक कुंवारी चूत थी.
वे अभी तक किसी से नहीं चुदी थीं और सील पैक माल थीं.

मैं धक्का मारने लगा पर मेरा लंड दीदी की चूत के अन्दर नहीं जा रहा था.
ज्यादा मोटा होने के कारण लंड बार-बार फिसला जा रहा था.

फिर मैंने दीदी को उठने को कहा.
वे उठ गईं और मैं लेट गया.

मैंने कहा- दीदी तुम अपनी चूत मेरे लंड के ऊपर रखकर अपने आप ही अपनी सील तोड़ो.
वे बोलीं- ठीक है.

फिर दीदी ने वैसा ही किया.
दीदी को दर्द होने के कारण वे अपने आप ही मेरे लंड से दूर हटी जा रही थीं.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं.
मैंने दीदी को अलग किया और उनको बेड पर घोड़ी की तरह बना दिया.

उसके बाद अपने लंड को उनकी चूत की फांकों में फंसा कर मैंने एक जोरदार धक्का मारा. इस बार मेरे लंड की टोपी उनकी चूत को फैलाती हुई अन्दर चली गई.
इससे दीदी की चीख निकल गई.

वे दर्द से कराहती हुई कहने लगीं- बाहर निकालो!

दीदी की चीख सुनकर मां कमरे के बाहर दरवाजे के पास आकर बोलीं- क्या हुआ बेटा?
मैं बोला- कुछ नहीं मां, आपकी बेटी की चूत फट गई.

मां बोलीं- बेटा, आज चोदता जा इस रंडी को … और बना दे अपने बच्चे की मां!
यह बोल कर वे अपने कमरे में चली गईं.

और मैंने देर न करते हुए दूसरा धक्का दे मारा.
मेरा आधा लंड दीदी की चूत में घुस गया.

कुछ देर रुकने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और जोर का धक्का मारते हुए अपना पूरा लंड दीदी की चूत में घुसेड़ दिया.

दीदी की चीख निकल गई और वह तेज तेज रोती हुई कहने लगीं- आह मर गई … राहुल प्लीज अपना लंड बाहर निकालो … मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मेरी चूत फट गई.

मैं कुछ देर वैसे ही रुका रहा.

थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गईं और मैंने धीरे-धीरे धक्का लगाना शुरू कर दिया.
दीदी आह आह की आवाज करती हुई मेरा साथ देने लगीं.

कुछ देर मुझे याद आया कि मैंने ब्लू फिल्मों में जिस तरह से लड़की की चुदाई करते हुए देखा था, वैसे ही करना चाहिए.

अब मैं अपनी दीदी को सोफे पर ले आया.
उधर मैंने उनका एक पैर सोफे पर रखा और एक नीचे रख लिया.

अब मैंने लंबे लंबे शॉट मारते हुए दीदी की चुदाई करना शुरू कर दी.
उनकी चूत बहुत टाइट थी इसलिए मेरे लंड में भी दर्द हो रहा था, पर मैं कहां मानने वाला था.

एक तो मैंने अपने लंड पर स्प्रे लगा दिया था, तो वह और ज्यादा मोटा हो गया था.
करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद दीदी ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
उससे उनकी चूत बहुत ज्यादा चिकनी हो गई और सूज कर लाल भी हो गई थी.

लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा था. मुझे दीदी को चोदते हुए अभी 20 मिनट हुए थे. इन 20 मिनट में दीदी दो बार झड़ चुकी थीं.
मैं अभी भी दीदी को चोदता जा रहा था.

दीदी के मुँह से लगातार आह आह की आवाज निकलती जा रही थी. दीदी कामुक सिसकारियां भी लेती जा रही थीं.

काफी टाइम बाद अब मुझे लग रहा था कि मैं भी झड़ने वाला हूं, तो मैंने दीदी से कहा- तुम जल्दी से सीधी लेट जाओ.

दीदी भी जल्दी से सीधी लेट गईं और मैं देसी स्टाइल में दीदी की चुदाई करने लगा था.

कुछ देर बाद ही दीदी की सिसकारियां और बढ़ गई थीं.
उनकी आवाजें मुझे और ज्यादा कामुक कर रही थीं.

उनके झड़ने के साथ ही मेरे लंड ने भी अपना पानी उन्हीं की चूत में छोड़ दिया था.
मेरे लंड ने दीदी की चूत में कम से कम आठ दस पिचकारियां छोड़ी थीं.

चूंकि पिछले एक महीने से मैंने किसी की भी चूत नहीं मारी थी और न ही मुठ मारी थी.
इसलिए मैंने दीदी की चूत में बहुत सारा अपना माल छोड़ दिया.

झड़ कर मैं दीदी के ऊपर ही लेट गया.
कुछ देर लेटने के बाद जब मैं खड़ा हुआ तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.

मैंने दीदी की चूत की तरफ देखा तो उनकी चूत से मेरा माल निकल रहा था.
दीदी की पैंटी उठाकर मैंने उनकी चूत से निकल रहा माल पौंछ दिया.

फिर मैंने देखा कि चुदाई से बेडशीट खून से लाल हो चुकी थी.
इसका मतलब साफ था कि दीदी की सील आज मेरे लंड ने तोड़ दी थी.

उस रात मैंने अपनी दीदी को चार बार चोदा और अपना सारा माल दीदी की चूत में ही निकाल दिया था.
सुबह जब मैं उठा, तो मैंने देखा कि दीदी उठ गई थीं और वे मुझसे लिपटी हुई थीं.

मैं उन्हें चूम कर उठा और बाहर आने लगा.
तभी मैंने देखा कि दीदी कमरे में खड़ी तो हो गई थीं, पर उनसे सही से चलना नहीं हो पा रहा था.

रात को मैंने दीदी की इतनी ज्यादा चुदाई की थी कि वे चल नहीं पा रही थीं.

बाहर खड़ी मां ने मुझे अपने पास बुलाया और बोलीं- कैसा रहा रात का इंतजाम?
मैंने उनसे कहा- अपनी कुतिया से ही पूछ लो कि उसको मैंने कैसे ठोका!

यह कह कर मैं हँसते हुए फ्रेश होने के लिए अपने कमरे में चला गया.
मां ने बेटी से सारी सेक्स कहानी पूछ ली कि रात को क्या क्या हुआ.

दीदी ने मां को सब बता दिया.
फिर मां ने दीदी से कहा कि सुबह से सेक्स करने पर बच्चा जल्दी ठहर जाता है.

मैं फ्रेश होकर आया तो दीदी ने फिर से चुदवाने की इच्छा जताई.
उस बार मैंने कमरे का दरवाजा खुला रख कर ही अपनी बहन को चोद दिया.
मां ने भी मुझे अपनी बहन को चोदते हुए देखा.

इस तरह से एक महीने तक लगातार मैंने अपनी बहन को चोदा.
सुबह शाम दोपहर, जब भी मेरा मन करता, मैं तब दीदी को कहीं भी चोद देता था.

अब तो दीदी भी रांड हो गई थीं वे मम्मी के सामने ही नंगी होकर लंड चूसने लगती थीं और चुदवाने लगती थीं.

एक महीने बाद जब बहन अपनी ससुराल गई, तो उसे माहवारी नहीं हुई.

उसने डॉक्टर से अपना चेकअप कराया, तो डॉक्टर ने उसे प्रेग्नेंट होने की खुशी देते हुए कहा कि बधाई हो, आप मां बनने वाली हो.
दीदी ने फोन लगाकर मुझको बताया कि मैं तेरे बच्चे की मां बनने वाली हूं.

मैं बहुत खुश हुआ और कहा- हां मेरी रानी, जल्दी से मेरे बच्चे को जन्म दो.

हम दोनों भाई बहन की चुदाई के 9 महीने बाद बहन ने एक लड़के को जन्म दिया, जो कि मेरे लंड से निकले बीज से हुआ था.

जब मेरा बेटा 5 साल का हो गया था, उसके बाद मेरी बहन ने मुझसे दो और बच्चे पैदा करवाए.

मेरी बहन बच्चे के बच्चों की शक्ल मुझसे ही मिलती जुलती थी.
मैं अपनी बहन को अब अपनी बीवी की तरह रखता था और समय-समय पर चोदता रहता था.

जब भी मुझको मौका लगता, मैं अपनी बहन की ससुराल में जाकर चोद आता. तो कभी अपने घर पर बुलाकर खूब चोद लेता था.
 

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दीदी और जीजाजी की थ्रीसम चुदाई का खेल



मैं आकाश उत्तर प्रदेश से हूँ. मैं एक 30 वर्षीय छात्र हूँ और अभी मेडिकल की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूँ.

यह मेरी सच्ची कहानी है, बस इसमें कुछ नामों में परिवर्तन किए गए हैं.

मेरी फैमिली में मेरे मम्मी-पापा, मैं और मेरी दो बहनें हैं.
दोनों बहनों की शादी हो चुकी है.

बड़ी दीदी अनुपमा लगभग 38 साल की हैं; वे कानपुर में हैं.
और छोटी दीदी ममता 35 की हैं वे इलाहाबाद में हैं.

अपने दोनों जीजाजी से मेरी बहुत अच्छी पटती है.

लखनऊ के पास होने की वजह से मेरा बड़े जीजाजी के घर ज़्यादा जाना हो जाता है.
दीदी और जीजाजी दोनों अकेले रहते हैं. उनके बच्चे दिल्ली में रहते हैं.

अनुपमा और ममता दीदी दोनों बहुत सेक्सी हैं.

अनु दीदी की बॉडी भरी हुई है जबकि ममता दीदी स्लिम ट्रिम हैं.

बड़ी दीदी का फिगर भरा हुआ है. उनके मम्मे 36 इंच के हैं और हल्के से लटके हुए हैं. जबकि उनकी गांड चौड़ी है.
ममता दीदी के बूब्स 34 के, कमर पतली और मस्त गांड है.

जैसा कि मैंने बताया कि मैं अक्सर ही अनु दीदी के यहां जाता रहता हूं और अधिकांशत: रात को उनके घर रुक भी जाता हूं.
उनके लिए मेरे दिमाग में अब तक कभी कोई भी गंदा विचार नहीं आया था.

पिछले साल की बात है, भाई दूज पर मैं दीदी के घर गया था.
शाम को मैं, दीदी और जीजाजी तीनों बाहर घूमने गए.

दीदी ने जींस टॉप पहना हुआ था.
जींस में उनकी गांड इतनी टाइट लग रही थी, जैसे जींस से बाहर आ जाएगी.

उनके चलने पर दोनों चूतड़ हिलते हुए देख कर मेरा ध्यान उन पर टिक गया.
यह पहला मौका था जब मेरे दिमाग में ऐसा ख्याल आया था.

फिर मैंने ये सोच कर अनदेखा करने की कोशिश की कि वे मेरी सगी बहन हैं, मेरे दिमाग में ऐसा विचार नहीं आना चाहिए.
लेकिन उनकी हिलती गांड पर मेरा ध्यान बार बार जा रहा था.

खैर … घर वापस आकर हमने थोड़ी बहुत बातें की, फिर खाना खाकर सोने चले गए.
मुझे ऊपर वाले रूम में सोना था और उन लोगों का बेडरूम नीचे था.

मुझे देर रात सोने की आदत थी.
मैंने कमरे में आकर कपड़े चेंज किए और बिस्तर पर लेट कर फोन देखने लगा.

एक बजे के करीब सिगरेट पीने के लिए मैं बाहर छत पर निकला और एक सिगरेट सुलगा ली.

मैं छत की रेलिंग से टेक लगाकर कश मार रहा था.
अचानक मेरी नजर आंगन में खुली हुई खिड़की से आती हुई रोशनी पर पड़ी जो दीदी जीजा के बेडरूम की खिड़की से आ रही थी.

न चाहते हुए भी मेरी नजर उधर बार बार जा रही थी.

मेरी सिगरेट खत्म हो चुकी थी.
मैं फिर भी खड़ा था और कुछ सोच रहा था.

तभी उधर से कुछ आवाज आती सुनाई दी.

अब मेरे दिमाग में शैतान घुस चुका था; मैं देखना चाहता था कि कमरे में क्या हो रहा है.

मैं आंगन में देखने के लिए छत पर दूसरी तरफ वाली ग्रिल के पास आ गया.
उधर से मैं कमरे की खिड़की ज्यादा खुली दिख रही थी.

मैंने उधर खड़े होकर नीचे झांका.
दीदी जीजा का आधा बेड एकदम साफ दिख रहा था.
उधर से अन्दर का सीन देख कर मेरे दोनों कान गर्म हो गए और लंड खड़ा होने लगा.

अनु दीदी और जीजाजी दोनों ही नंगे थे.
दीदी बेड पर बैठी जीजाजी का लंड हाथ में लेकर उससे खेल रही थीं और जीजाजी दीदी का एक दूध अपने हाथ में पकड़ कर उसे रगड़ रहे थे.

मैं आज पहली बार दीदी को नंगी देख रहा था.
उनके बड़े बड़े बूब्स छाती पर लटक रहे थे और मस्त गोरी व मोटी जांघें देख कर मेरा लंड टाइट हो चुका था.

थोड़ी देर तक वह दोनों ऐसे ही खेलते रहे.
फिर दीदी ने जीजा जी का लंड अपने मुँह में ले लिया और वे लंड चूसने लगीं.

जीजाजी का लंड पूरा टाइट हो चुका था और दीदी उसे आइसक्रीम की तरह चूस रही थीं.

उसके बाद जीजाजी ने दीदी को लिटा दिया और उनकी दोनों टांगों के बीच आकर बैठ गए.
अब दीदी की चिकनी चूत एकदम साफ दिख रही थी.

जीजा जी उनकी चूत पर अपना मुँह रख कर उसे चाटने लगे.

दीदी अपनी गांड उचका उचका कर ‘आह … ऊह …’ की आवाजें निकाल रही थीं.

वे जल्दी से लंड चूत के अन्दर लेना चाहती थीं लेकिन जीजाजी उन्हें तड़पा रहे थे.
वे दीदी की चूत चूसे जा रहे थे.

मैं भी उनकी चूत में जीजाजी का लंड घुसते हुए देखने को बेताब था कि तभी जीजाजी ने एक दुपट्टा उठाया और दीदी की आंखों के पर बांध दिया.

अब मुझे और ज्यादा उत्सुकता हुई कि ये तो अजब ही स्टाइल चल रहा है.

मेरा लंड मेरे हाथ में था और ध्यान पूरा आगे होने वाले खेल पर लगा था कि ये दोनों आगे क्या करेंगे?

तभी अचानक मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा.
मुझे उसी रूम में एक तीसरी परछाई दिखी.

मेरा दिमाग सन्न रह गया और मैं सोचने लगा कि ये कैसे हो सकता है.
इन दोनों को चुदाई में कोई तीसरा कौन हो सकता है?

फिर वह तीसरा सख्स जो कि एक 30-32 साल का हैंडसम लड़का था, बेड के पास आकर खड़ा हो गया.
इससे पहले मैंने उसे कभी नहीं देखा था.

जीजाजी ने उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने कपड़े उतारने को कहा.
वह लड़का तुरंत ही नंगा हो गया.

दीदी सामने बेड पर नंगी टांगें फैलाए पड़ी थीं.
जीजाजी अपनी उंगली से उनकी चूत की चुदाई कर रहे थे.

फिर अचानक से जीजाजी दीदी से अलग हुए और उस लड़के को दीदी की टांगों के बीच आने का इशारा कर दिया.
वह लड़का दीदी की टांगों के बीच में बैठ कर गांड के नीचे हाथ लगाकर उनको उठाकर उनकी चूत चाटने लगा.

उसका लंड पहले से ही खड़ा था.
शायद वह उनका फोरप्ले पहले से ही देख रहा था.

एक मिनट तक चूत चाटने के बाद उसने दीदी के दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और अपना लंड दीदी की चूत में डालते हुए अन्दर तक घुसा दिया.
दीदी के मुँह से आह का स्वर निकला और वह दीदी की चुदाई करने लगा.

तभी जीजाजी उठे और दीदी के सिर के पास खड़े हो गए. उन्होंने अपना लंड दीदी के होंठों पर लगा दिया.

जैसे ही जीजा जी का लंड उनके होंठों पर लगा, वे एकदम से चौंक गईं और दीदी ने अपने हाथों से आंखों पर बंधा दुपट्टा हटा दिया.

सामने किसी और को चोदते हुए देख कर वे एकदम से शॉक्ड हो गईं और उठ कर बैठ गईं.
लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं और हल्के से मुस्कुरा कर जीजाजी से चिपक गईं.

मैं समझ गया कि ये उनके लिए सर्प्राइज गिफ्ट था.
शायद उनकी पहले ही इस बारे में बात हुई होगी.

दीदी जीजाजी से चिपकी हुई थीं और वह लड़का दीदी के पीछे अपना लंड उनकी गांड में सटा के हाथों से उनके बूब्स दबाने लगा था.

दीदी आंखें बंद किए दो दो मर्दों का मजा ले रही थीं.
मुझे ये सब एक लाइव पोर्न मूवी की तरह लग रहा था और मेरा लंड फनफनाने लगा था.

कुछ देर इसी पोजीशन में रहने के बाद जीजाजी लेट गए.
दीदी उनके ऊपर आ गईं और वह लड़का दीदी के ऊपर चढ़ गया.

उसका लंड पूरी तरह तन चुका था.
उसने अपने हाथ से लंड को दीदी की चूत पर सैट करके जोर का धक्का दे मारा.

उसका पूरा लंड दीदी की पहले से ही गीली चूत में चला गया.
लंड पेल कर वह लड़का जोर जोर से धक्के मारते हुए मेरी दीदी की चुदाई कर रहा था.

दीदी मजे से जीजा जी का लंड चूस रही थीं और अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा भी रही थीं.
कुछ देर बाद दीदी ने जीजा जी का लंड एकदम से कड़क कर दिया था.

तो जीजा ने दीदी की चूची मसलते हुए उनसे कुछ कहा.
दीदी हंस दीं और शायद राजी हो गईं.

अब उस लड़के ने मेरी दीदी की चूत से अपना लंड बाहर खींच लिया था.
जीजा जी कुछ देर के लिए मेरी नजरों से दूर हो गए.

एक पल बाद वे मुझे कुछ करते से दिखे, पर समझ नहीं आ रहा था कि वे क्या कर रहे हैं.
तभी वे हाथ में एक काले रंग का स्टैंड जैसा लिए दिखे. मैं तुरंत समझ गया कि वे कैमरा सैट कर रहे हैं.

इसका मतलब यह था कि अब दीदी की चुदाई की वीडियो बनाई जाने वाली है.

अगले ही कुछ पलों बाद जीजा जी वापस दीदी के पास आ गए और उन लोगों ने चुदाई की पोजीशन बनानी शुरू कर दी.

पहले वह लड़का आया.
मैंने देखा कि उसने अपनी आंखों पर एक रंगीन कवर जैसा लगाया हुआ था, जैसा कि देसी ब्लू फिल्मों में खुद को छिपाने के लिए पॉर्न एक्टर आदि लगाते हैं.

वह बिस्तर पर लेट गया और अपने खड़े लंड को सहलाने लगा.
उसके ऊपर दीदी चढ़ गईं.
उन्होंने भी ठीक उसी तरह से अपना चेहरा छिपाया हुआ था.

दीदी ने लड़के के लौड़े को अपने हाथ से पकड़ा और उसके लंड के ऊपर अपनी चूत सैट कर दी.

फिर दीदी ने आह की आवाज निकालने जैसा मुँह खोला और लड़के का लंड गायब हो गया.
मतलब यह कि लड़के का लंड मेरी दीदी ने अपनी चूत में ले लिया था.

उसके बाद जीजू दीदी की गांड को अपनी एक उंगली से सहलाने लगे.
वे भी अपने चेहरे को उसी तरह के मास्क से छिपाए हुए थे.

यह देख कर मुझे समझ आ गया कि आज इधर मेरी दीदी की सैंडबिच चुदाई का सीन फिल्माया जा रहा था.
अब मैं सोचने लगा कि यह कुछ और मामला है.

जीजा जी ने अपनी उंगली में कुछ सफेद सफेद सा लगाया और दीदी की गांड में उस सफेद क्रीम को लगाने लगे.
दीदी की गांड मस्ती से हिल रही थी, जिससे साफ समझ आ रहा था कि दीदी गांड मराने की अभ्यस्त हैं.

कुछ देर बाद जीजा जी ने अपना लंड दीदी की गांड में सैट किया और धक्का देते हुए सुपारे को गांड के अन्दर ठेल दिया.
मुझे छत तक दीदी की आह की दबी हुई चीख सुनाई दी.

खैर … कुछ देर की मशक्कत के बाद दीदी की गांड और चूत दोनों छेदों में दो लंड चलने लगे थे.

यह सब देख कर मैंने अपने लंड को छोड़ा और एक सिगरेट जला कर लाइव ब्लू फिल्म का मजा लेने लगा.

तभी मुझे कुछ ख्याल आया और मैंने अपने मोबाईल से उन तीनों की वीडियो बनानी शुरू कर दी.
कुछ ही देर बाद उन तीनों ने अपनी पोजीशन बदली.

अब जीजा जी नीचे आ गए थे और दीदी की चूत में लंड पेलने लगे थे.
उधर वह लड़का मेरी दीदी की गांड मारने लगा था.

यह सब देख कर मेरे लौड़े ने भी अपनी चरम सीमा पर अकड़ना शुरू कर दिया था.
इधर मेरा लंड भी झड़ने लगा और मैंने छत के फर्श पर ही अपना वीर्य टपका दिया.

उधर उन तीनों का खेल भी खत्म होने को था.
पहले उस लड़के ने अपने लंड से वीर्य की धार दीदी की गांड में निकाल दी थी और वह हट गया था.

उसके हटते ही दीदी भी जीजा जी के लौड़े से हट गईं क्योंकि जीजा जी शायद पहले ही झड़ चुके थे.
उन सभी का खेल खत्म हो गया था.

रात के ढाई बजे का समय हुआ था, अब मुझे भी नींद आने लगी थी.
मैं नीचे कमरे में आ गया और सो गया.
 

junglecouple1984

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रंडी मां को फूफा के बाद मैंने पेला




नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोनी है. मैं मध्यप्रदेश के रतलाम जिले का रहने वाला हूँ.
मेरे घर में मेरी मम्मी, पापा और मैं, हम तीन जन ही रहते हैं.

यह मेरी हॉट माँ सेक्स कहानी है.
वे मेरी मम्मी सौतेली हैं और वे बड़ी ही हॉट हैं.
शायद मेरे पापा उन्हें खुश नहीं कर पाते थे.

मेरी मम्मी का नाम जमना है.
वह इतनी चुदक्कड़ हैं कि क्या ही कहूँ.
उनको एक लंड से पूरा नहीं पड़ता है.

पापा के लौड़े के अलावा भी वे अनेकों लंड अपनी चूत में ले चुकी थीं.
छोटे मोटे लंड से तो मेरी मम्मी की चूत की झांट का बाल भी टेढ़ा नहीं हो पाता था.

उन्हें सिर्फ बड़े लंड वाले मर्द ही पसंद आते थे.

एक दिन फूफा जी बुआ जी को लेकर घर पर आए हुए थे.
बुआ किसी काम से घर से बाहर चली गई थीं.
तो घर पर केवल मम्मी और फूफा जी ही थे.

घर में शक्कर ख़त्म हो गई थी तो मम्मी ने मुझे किराने की दुकान पर लेने के लिए भेज दिया था.

मैं चला गया, पर तुरंत ही अपना मोबाइल लेने के लिए वापस आ गया.
वापस आकर मोबाइल उठाया ही था कि मुझे वह सीन देखने को मिल गया जिसने मेरे लंड को मां की चूत दिला दी थी.

जैसे ही मैं मोबाइल उठा कर वापस बाहर आने को हुआ कि फूफा जी की आवाज आई.
उन्होंने मेरी मां से कहा- मैं फ्रेश होकर आता हूँ और हाथ पैर धो लेता हूँ. तुम चाय बना दो.

यह सुनकर मेरी मम्मी चाय बनाने के लिए किचन में चली गईं.
फूफा जी ने अपने पैंट व चड्डी को निकाल दिया और उन्होंने अपनी कमर पर एक तौलिया लपेट ली.

वे बाथरूम में चले गए. तब तक मैं चला गया और जल्दी ही शक्कर लेकर वापस आ गया था.
अब तक मम्मी ने चाय तैयार कर ली थी.

कुछ देर के बाद जब फूफाजी हाथ पैर धोकर बाहर आए, तब तक मम्मी ने चाय लाकर बैठक में रख दी थी और वे टीवी देखने लगी थीं.

फूफा जी बाहर आए और उनकी कामुक नजर मम्मी पर आ गई.
उनका लंड यह देख कर खड़ा हो गया था क्योंकि मेरी मम्मी बड़ी हॉट लग रही थीं.

उस समय मेरी मम्मी के गहरे गले वाले ब्लाउज से उनके आधे दूध दिख रहे थे.
उन्होंने अपनी साड़ी का आधा पल्लू गिरा रखा था.

यह देख कर फूफा जी का लंड खड़ा हो गया था.
उसी वक्त फूफा जी की कमर पर बंधी तौलिया नीचे गिर गई थी.
उनका कड़क हो चुका लंड मम्मी के सामने आ गया.

फूफा जी का काला लंड काफ़ी बड़ा और मोटा था.
उनका लंड एकदम सीधा खड़ा था, तो तौलिया हटते ही ऊपर नीचे होकर फनफनाने लगा.

मम्मी उनके काले कड़क लौड़े को देख कर पागल हो गईं कि इतना बड़ा लंड और मोटा लंड उनके घर में आ गया है और उनके सामने लहरा रहा है.
वे भूल गई थीं कि यह लंड उनके पति का नहीं बल्कि फूफा जी का लंड है.
उनको तो बस अपनी प्यासी चूत में फूफा जी का मोटा लंड लेने की इच्छा बलवती होने लगी थी.

मम्मी ने तुरंत जाकर फूफा जी की तौलिया को उठाया और एक तरफ रख कर फूफा जी के लंड पेर हाथ फेर दिया.
इससे फूफा जी का लंड और ज्यादा खड़ा हो गया.

वे भी आगे बड़े और उन्होंने मेरी मम्मी के मुँह के सामने अपने लंड कर दिया.
मम्मी ने एक पल की भी देर नहीं की और उन्होंने फूफा जी के लंड को बेरहमी से चूसना चालू कर दिया.

फूफा जी भी गर्मा गए और वे अपने लौड़े को मेरी मम्मी के मुँह के अन्दर जोर जोर से पेलने लगे.
फिर फूफा जी ने मेरी मम्मी के ब्लाउज को खोल दिया और उनकी ब्रा के ऊपर से ही मम्मों को दबाने लगे.

मम्मी ने फूफा जी के लंड को चूसना छोड़ा और उनके सीने से लिपट गईं.
उन दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक गए और वे दोनों एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे.

कुछ देर बाद फूफा जी ने मम्मी की ब्रा को भी खोल दिया और अपने हाथ को नीचे ले गए.
उनकी एक उंगली मम्मी की नाभि को कुरेदने लगी.

मेरी मम्मी ने फूफा जी को कुछ इशारा किया तो वे नीचे बैठ गए और मम्मी की नाभि को चाटने लगे.

उसके बाद फूफा जी ने मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उनका पेटीकोट नीचे सरका दिया.

पेटीकोट के हटने के बाद मम्मी की भीगी हुई पैंटी सामने आ गई.
फूफा जी मम्मी की पैंटी के अन्दर हाथ डाला और वे मम्मी की चूत को सहलाने लगे.

मम्मी की चूत और ज्यादा रोने लगी.
वे वासना से तड़पने लगीं, उनकी हालत बिन पानी की मछली की तरह हो गई थी.

मेरी मम्मी की बड़े लंड से मुहब्बत तो इतनी ज्यादा थी कि वे यदि किसी के बड़े लंड को देख भर लें, तो वे उस मोटे लौड़े को बिना अपनी चूत में लिए छोड़ती ही नहीं थीं. फिर वह लंड चाहे किसी भी सड़क चलते मर्द का क्यों न हो.

बस अपनी इसी आदत के चलते मेरी मम्मी, फूफा जी का पूरा लंड अपने गले के आखिरी छोर तक ले रही थीं और जोर-जोर से चूस रही थीं.

काफी देर के बाद फूफा जी की नजर मेरी मम्मी की चूत पर गई, जो कि बहुत मोटी फाँकों वाली चूत थी और बिल्कुल गुलाबी चूत थी.
वे तुरंत अपनी ज़ुबान को निकाल कर मम्मी की चूत पर टूट पड़े.

फूफा जी ने मम्मी की चूत के छेद में अपनी जीभ को डाल दिया और वे जोर जोर से चूत चाटने लगे.
मम्मी बिन पानी की मछली के जैसे तड़पने लगीं.

तब मम्मी की कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह मुझे चोद डालो आह चोद दो.
वे काफी जोर जोर से चिल्ला रही थीं.

मेरी मम्मी की गांड बहुत ही रसीली है और इतनी बड़ी है कि वे किसी से भी अपनी गांड मरवा लेती थीं.
उन्हें जब भी कोई सांड जैसा मर्द मिल जाता था तो वे मुझको खेलने के लिए बाहर भेज देती थीं.
उसके बाद वे पूरी नंगी होकर अपनी चूत व गांड दोनों मरवाती थीं.

फिर फूफा जी ने मेरी मम्मी की चूत के अन्दर उंगली डाल दी और चूत को अपनी उंगली से चोदने लगे.

मम्मी की चूत में रस आने लगा था.
फूफा जी की उंगली मेरी मम्मी की चूत में सटासट अन्दर बाहर होने लगी थी.
जिस चूत को मोटे मोटे लौड़े खाने की आदत हो, उसे भला एक उंगली से क्या फर्क पड़ने वाला था.

वह तो फूफा की उंगली से चूत का दाना मसला जा रहा था, तो चूत को रस छोड़ना पड़ा था, वरना सिर्फ गुदगुदी के अलावा और कुछ नहीं होना था.

खैर … फूफा जी भी उंगली करते जा रहे थे.
अब तक उनका लंड और भी ज़्यादा टाइट हो गया था.

मेरी मम्मी से रहा नहीं गया और मम्मी ने फूफा जी का लंड पकड़ कर कहा- अब इसे पेलो … अपनी उंगली से मेरी आग और ज्यादा न भड़काओ.
फूफा जी ने मेरी मम्मी को बिस्तर पर झुकाया पीछे से उनकी चूत के मुँह पर लंड का सुपारा रख कर एक जोर से शॉट मार दिया.

फूफा जी का समूचा लंड एक बार में ही चूत के अन्दर घुसता चला गया.
भले ही मेरी मम्मी एक बड़ी रांड हैं लेकिन फूफा जी का लंड भी किसी सांड के लंड से कम नहीं था.

एक ही झटके में लंड पेला तो मम्मी की गांड फट गई और उन्होंने जोर से चीख निकाल दी- उई मां मर गई … आह फट गई!
उनकी आवाज इतनी तेज थी कि मैं भी सुनकर डर गया कि क्या हुआ!

मैंने देखा कि मेरे फूफा जी ने मेरी मम्मी को बेड के ऊपर घोड़ी बनाए हुए थे और पीछे से खुद घोड़ा बनकर उनकी चूत फाड़ रहे थे.

मुझे मम्मी की जोर जोर की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं.

अब वे दर्द भूल चुकी थीं और अपनी चूत चुदाई के मज़े ले रही थीं.
पीछे से फूफा जी मेरी मम्मी की गांड पर चमाट मार मार कर उनको मस्त चोद रहे थे.

उस दिन मेरी मम्मी ने फूफा जी काफी देर तक अपनी चूत चुदवाई.
मैं भी उन दोनों की चुदाई को छुप कर देखता रहा. मैं दो बार अपना लंड हिला चुका था मगर उन दोनों की चुदाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी.

मेरी बाहर जाने में इसलिए भी गांड फट रही थी कि कहीं मैं गया और उन्हें दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दे गई तो मामला गड़बड़ हो जाएगा.
इसलिए मैं बाहर नहीं गया.

उसके बाद जब उन दोनों की चुदाई ख़त्म हुई और फूफा जी मम्मी के ऊपर से अलग होकर अपने कपड़े पहनने लगे.
तब मम्मी ने भी किसी तरह से एक मैक्सी पहन ली और लेट गईं.

वे फूफा जी चुदवा कर बहुत थक गई थीं.
उनकी चूत फूल कर पकौड़ा हो गई थी.

वे मैक्सी ऊपर करके अपनी सूजी हुई चूत को सहला रही थीं और फूफा जी से कह रही थीं- कितना बेरहमी से चोदा है आपने कि मेरी चूत फूल कर पकौड़ा बन गई है.
इस पर फूफा जी ने हंसते हुए कहा- हां यार सच में तुम्हारी चूत चुदाई में बहुत मजा आया. यह तो तुम थीं जो मेरा मूसल लंड झेल गईं, वरना तुम्हारी ननद तो रो देती है और मुझे अपने लंड की मुठ मार कर इसका पानी निकालना पड़ता है. अब तो रंडियां भी मेरी शक्ल देख कर पर्दे के पीछे छिप जाती हैं. उनकी भोसड़ा हो चुकी चूत भी मेरे लौड़े से पनाह मांगने लगती है.

यह सुनकर मम्मी खुश हो गईं कि उन्होंने फूफा जी जैसे राक्षस के लंड से चूत को चुदवा लिया है.
कुछ देर बाद फूफा जी चले गए और मेरी मम्मी सो गईं.

मैं अन्दर आकर पढ़ने बैठ गया.
जब शाम हुई और जैसे ही अंधेरा हुआ, तो खाना खाने के बाद मैं मम्मी के साथ बिस्तर पर लेट कर टीवी देखने लगा था.

वे सीरियल देख रही थीं तो मुझे टीवी देखने में मन नहीं लग रहा था.
मैं अपना मोबाइल चलाने लगा था.

मम्मी ने मुझसे कहा कि बेटा जरा मेरे पैर दबा दे.

मैंने कहा- ठीक है, पर आज आपको क्या हो गया? आपकि तबियत तो ठीक है न!
वे बोलीं- हां तबियत तो ठीक है, बस पैर दर्द कर रहे हैं. आज बहुत देर तक काम किया था न इसलिए दर्द हो रहा है.

मुझे पता था कि उन्होंने आज क्या काम किया है लेकिन मैं कुछ कहना नहीं चाहता था इसलिए मैं कुछ नहीं बोला.

उसके बाद मैं उनके पैर दबाने लगा.
मम्मी ने साड़ी पहनी हुई थी और उनके पैर रज़ाई के अन्दर थे.

मैंने रज़ाई के अन्दर हाथ डाला और मैं साड़ी के ऊपर से मम्मी के पैर दबाने लगा.
मैंने काफ़ी देर तक उनके पैर दबाए, तो मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैं अब उनकी साड़ी के अन्दर हाथ डालकर उनके पैरों को दबाने लगा था.
मेरी मम्मी को आराम मिल रहा था तो वे सो गईं.

जैसे ही मैंने देखा कि उनको नींद आने लगी है तो मैंने दो बार चेक किया.

जब वे नहीं उठीं तो मैंने धीरे-धीरे करके अपने हाथों को उनकी जांघों तक ले जाना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर में मैं उनकी जांघ को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने थोड़ा और हाथ ऊपर कर दिया.

अब जैसे ही मैंने उनकी चूत को टच किया, वे उठ गईं और मुझ पर चिल्लाने लगीं- यह क्या कर रहा है तू … साले तुझे पैर दबाने को बोला था, तू कहां उंगली कर रहा है?

मैंने सहमते हुए कहा- वह गलती से चली गई थी.
तो वे बोलीं- चल हो गया. बस अब मत दबा … हट!

मैं हाथ हटाने के मूड में नहीं था, मुझे तो आज अपनी मम्मी को चोदना ही था.
मैं उस वक्त तो हट कर उनके साइड में लेट गया.

मम्मी वापस से सोने लगीं.
जब कुछ देर बाद मैंने देखा कि मम्मी गहरी नींद में सो गई हैं, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मम्मी की एक बांह से स्पर्श किया.

वे नहीं उठीं.
उसके बाद मैं अपने लंड को मम्मी के होंठों तक लेकर गया और उन्हें लंड चुसाने की कोशिश करने लगा.

वे कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं कर रही थीं.
मैं थोड़ा और साहस जुटा कर अपने लंड को उनके होंठों के करीब ले गया.

डरते डरते मैंने अपना लंड उनके होंठों से लगाया, तो मेरा लंड और ज्यादा कड़क हो गया था.
अचानक से मम्मी के होंठ खुल गए और मैंने लंड का सुपारा उनके होंठों के बीच में लगा दिया.

उसी समय मेरे लंड से एक प्रीकम की बूंद मम्मी के मुँह में चली गई.
मम्मी ने जीभ से अपने मुँह को चलाया, तो उनकी जीभ मेरे लौड़े के सुपारे से लगने लगी.

मेरी मम्मी शायद सपने में थीं तो वे मेरे लंड को जीभ से चाटने लगीं.

अब मुझसे रहा नहीं गया, मैंने हाथ से उनकी गांड दबा दी.
वे कुछ नहीं बोलीं.

मुझे लगा कि मम्मी पक्का सो गई हैं.
अब मैंने उनकी साड़ी को उनके घुटनों तब चढ़ा दी.
मुझे अब अपनी मम्मी के सेक्सी घुटने दिखने लगे.

उसके बाद मैंने लंड को उनकी जांघ पर रख दिया और इधर-उधर करने लगा.

इससे उनको गर्म-गर्म अहसास हुआ, तो वे उठ गईं.
मम्मी ने सब देखा और अचानक से मुझ पर चिल्लाने लगीं- क्या कर रहा है यह … साले पता भी है कि मैं तेरी मां हूँ!

मैंने कहा- मुझसे पता नहीं यह सब कैसे हो गया. मुझसे गलती हो गई.
फिर मम्मी ने खुद को सही करते हुए कहा- मैं कल तेरे पापा से यह सब बोलूँगी कि तुमने मेरे साथ क्या किया!

तो मैंने कहा- आपको पापा को बोलने की जरूरत नहीं है.
वे बोलीं- क्यों?

मैंने कहा- क्योंकि मेरे पास भी ऐसा कुछ है, जो मैं बोल सकता हूँ.
उन्होंने पूछा- तू क्या बोल सकता है?

मैंने दिन में उनकी चुदाई की वीडियो बना ली थी, तो उन्हें दिखा दी.
उस वीडियो में मम्मी फूफा जी के साथ सेक्स करती हुई दिख रही थीं.
वे सन्न रह गईं.

मैंने कहा- मैं भी पापा को यह दिखाऊंगा कि आप दोनों दिन में क्या कर रहे थे.

यह देख कर मम्मी ने धीमी आवाज में कहा- यह वीडियो तुम्हारे पास कहां से आया?
मैंने कहा- मैंने ही बनाया है. दिन में मैंने सब देखा है!

उन्होंने एकदम से आत्मसमर्पण करते हुए कहा- मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूँ, यह सब किसी से मत कहना.
मैंने कहा- अब फूफा जी को बुलाओ. फूफा और मैं तुमको आज रात एक साथ दोनों रात भर चोदेंगे. आपकी चूत पेलेंगे और गांड भी मारेंगे.

मम्मी ने कहा- नहीं, तुम दोनों एक साथ नहीं करना. मेरी चूत गांड दोनों फट जाएंगी. मैं एक साथ दो लंड नहीं ले पाऊंगी. आज तुम अकेले ही मेरी ले लो.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है, आज रात आप सिर्फ मेरा लंड ले लो.
उन्होंने कहा- ठीक है अपनी पैंट निकालो.

मैंने अपनी पैंट निकाल दी और नंगा हो गया.
उसके बाद मम्मी की साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट आदि उतार दिया.
मैंने उनको पूरी नंगी कर दी.

तो वह सीन देख कर मेरा लंड इतना ज्यादा टाइट हो गया कि वह संभाले नहीं संभल रहा था.

मम्मी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और बोलीं- आह मर गई … इतना बड़ा है तेरा … यह तो तेरे फूफा जी से भी बड़ा है!

फिर मेरी मम्मी ने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसना चालू कर दिया.
वे इतनी अन्दर तक लंड को ले रही थीं कि मुझे उनके गले की गर्मी का अहसास होने लगा था.

कुछ देर तक लंड चुसवाने के बाद मैंने मम्मी को बेड पर चित लेटाया और उनके दोनों पांव अलग करके उनकी चूत को चाटने लगा.
मुझे मम्मी की चूत का स्वाद पसंद आ गया, तो मैं जोर जोर से चूत चाटने लगा.

वे बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगीं.
कुछ देर के बाद मैंने कंडोम लगा कर उनकी चूत में अपना लौड़ा एक झटके से पेल दिया.
मेरी हॉट माँ की कामुक आह निकल गई.

मैंने उन्हें रात भर में चार बार चोदा.
उसके बाद मैंने फूफा जी के साथ भी अपनी मम्मी को सैंडविच चुदाई का मजा दिया.

अब वे बिंदास लंड लेने लगी हैं.
बल्कि मैं खुद अपनी सौतेली मम्मी के लिए मोटे मोटे लंड ढूंढ कर लाता हूँ.
 
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