>राज_मस्ताना> बड़ा प्यारा ही डिल्डो लाई हो?.. इसे तो तुम्हारी चूत पूरी तरह चौड़ा गयी है.
>Hot milf> हां.. अब अपने लंड पर क्रीम लगाकर उसे चिकना कर लो.
राज ने प्रीति के क्मरे से लाई हुई क्रीम अपने हाथों पर लगाई और अपने लंड पर मलने लगा... और प्रीति राज और गीली चूत की बातो का मज़ा लेते हुए राज से बातें कर रही थी. वो उसे बता रही थी कि उसका चिकना लंड कितना अछा लग रहा है.. और वो बाद मे उसके सारे पानी को अपनी जीब से चाट लेगी.. वो साथ ही अपनी चूत मे तेज़ी से उंगलियाँ अंदर बाहर कर रही थी...
राज और प्रीति दोनो के नज़रे स्क्रीन पर टिकी हुई थी जहाँ वो नकली लंड गीली चूत के अंदर बाहर हो रहा था...
>राज_मस्ताना> मेरा छूटने वाला है इतना लीखकर राज अपने हाथ पर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.. और उसके लंड ने उसके हाथो पर वीर्य उगल दिया...
प्रीति और राज दोनो गीली चूत्को झाड़ते देखते रहे..और प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. वो अपने हाथों मे अपने वीर्य को पकड़े रहा.. और तभी गीली चूत ऑफ लाइन हुई और राज ने भी कंप्यूटर बंद कर दिया.. प्रीति खिसक कर उसके पास आ गयी...
राज ने अपना हाथ प्रीति के मुँह के आगे कर दिया.. और वो उसके हाथो पर से उसके वीर्य को चाटने लगी.. राज का लंड फिर फुदकने लगा.. पूरी तरह उसके हाथों को साफ करने के बाद खड़ी हुई और अपने कमरे मे चली गयी..
रविवार की सुबह पूरा परिवार आराम से सोकर उठा... और घर के काम काज़ मे जूट गया... वसुंधरा की सफ़र की थकान अभी भी उत्तरी नही थी इसलिए वो दोपहर को फिर बच्चो से कह अपने कमरे मे सोने चली गयी... और उसे रात के खाने पर ही जगाने को कहा...
राज और प्रीति दोनो ही रात से ही काफ़ी उत्तेजित थे और एक दूसरे के स्पर्श के लिए तड़प रहे थे... जैसे ही प्रीति को विश्वास हो गया कि उसकी मा सो गयी है वो राज को घसीटते हुए उसके कमरे मे ले गयी... और कमरे मे आते ही वो उसके लंड को पकड़ मसल्ने लगी.. प्रीति ने अपने कपड़े उतार दिए और कुर्सी पर बैठ गयी और अपनी चूत पर हाथ फिराने लगी... "देखो ना राज ये कैसे रात से तुम्हारी जीब के लिए तरस रही है.. प्लीज़ आज इसकी प्यास अछी तरह बुझा दो ना? " राज ने भी अपने कपड़े उतार दिए.. और उसके पास आकर उसकी टाँगो के बीच बैठ गया.. उसकी टाँगो को फैलाते हुए उसने अपनी जीब उसकी चूत पर रख डी... वो अपनी जीब को उसकी चूत को उपर से नीचे फिरा चाटने लगा...
राज अपनी जीब को अपनी बेहन की बिना बालों की चूत पर फिरा रहा था.. प्रीति की चूत उत्तेजना मे थिरक रही थी... की तभी प्रीति ने राज के मुँह कोअपनी चूत पर से हटा दिया... राज को लगा कि प्रीति उत्तेजना के मारे जल्दी ही झाड़ गयी है... उसने देख की प्रीति उसे ही देख रही थी...
"राज में चाहती हूँ की आज तुम मुझे चोदो" "क्या तुम सही मे ये चाहती हो?" राज ने असचर्या से पूछा. "हां में बहोत सीरीयस हूँ में भी इस बात का अनुभव लेना चाहती हूँ कि जब लंड चूत मे घूस्ता है तो कैसा महसूस होता है.. क्यों लड़कियाँ बड़े मोटे लंड को देख चुदवाने को बैतब हो जाती हैं." प्रीति ने जवाब दिया..
"अगर तुम यही चाहती हो तो तुम्हे ये अनुभव देकर मुझे खुशी होगी" राज ने खुशी से कहा.... प्रीति कुर्सी से खड़ी हो राज के पलंग पर लेट गयी.... राज अपनी बेहन की टाँगे के बीच आ गया और उसे चूमते हुए उपर तरफ बढ़ने लगा.. आख़िर उसके होंठ उसके सपाट पेट को चूमते हुए उसकी चुचियों पर आए फिर उसके होंठों को अपने होठों से क़ैद कर लिया...
>Hot milf> हां.. अब अपने लंड पर क्रीम लगाकर उसे चिकना कर लो.
राज ने प्रीति के क्मरे से लाई हुई क्रीम अपने हाथों पर लगाई और अपने लंड पर मलने लगा... और प्रीति राज और गीली चूत की बातो का मज़ा लेते हुए राज से बातें कर रही थी. वो उसे बता रही थी कि उसका चिकना लंड कितना अछा लग रहा है.. और वो बाद मे उसके सारे पानी को अपनी जीब से चाट लेगी.. वो साथ ही अपनी चूत मे तेज़ी से उंगलियाँ अंदर बाहर कर रही थी...
राज और प्रीति दोनो के नज़रे स्क्रीन पर टिकी हुई थी जहाँ वो नकली लंड गीली चूत के अंदर बाहर हो रहा था...
>राज_मस्ताना> मेरा छूटने वाला है इतना लीखकर राज अपने हाथ पर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.. और उसके लंड ने उसके हाथो पर वीर्य उगल दिया...
प्रीति और राज दोनो गीली चूत्को झाड़ते देखते रहे..और प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. वो अपने हाथों मे अपने वीर्य को पकड़े रहा.. और तभी गीली चूत ऑफ लाइन हुई और राज ने भी कंप्यूटर बंद कर दिया.. प्रीति खिसक कर उसके पास आ गयी...
राज ने अपना हाथ प्रीति के मुँह के आगे कर दिया.. और वो उसके हाथो पर से उसके वीर्य को चाटने लगी.. राज का लंड फिर फुदकने लगा.. पूरी तरह उसके हाथों को साफ करने के बाद खड़ी हुई और अपने कमरे मे चली गयी..
रविवार की सुबह पूरा परिवार आराम से सोकर उठा... और घर के काम काज़ मे जूट गया... वसुंधरा की सफ़र की थकान अभी भी उत्तरी नही थी इसलिए वो दोपहर को फिर बच्चो से कह अपने कमरे मे सोने चली गयी... और उसे रात के खाने पर ही जगाने को कहा...
राज और प्रीति दोनो ही रात से ही काफ़ी उत्तेजित थे और एक दूसरे के स्पर्श के लिए तड़प रहे थे... जैसे ही प्रीति को विश्वास हो गया कि उसकी मा सो गयी है वो राज को घसीटते हुए उसके कमरे मे ले गयी... और कमरे मे आते ही वो उसके लंड को पकड़ मसल्ने लगी.. प्रीति ने अपने कपड़े उतार दिए और कुर्सी पर बैठ गयी और अपनी चूत पर हाथ फिराने लगी... "देखो ना राज ये कैसे रात से तुम्हारी जीब के लिए तरस रही है.. प्लीज़ आज इसकी प्यास अछी तरह बुझा दो ना? " राज ने भी अपने कपड़े उतार दिए.. और उसके पास आकर उसकी टाँगो के बीच बैठ गया.. उसकी टाँगो को फैलाते हुए उसने अपनी जीब उसकी चूत पर रख डी... वो अपनी जीब को उसकी चूत को उपर से नीचे फिरा चाटने लगा...
राज अपनी जीब को अपनी बेहन की बिना बालों की चूत पर फिरा रहा था.. प्रीति की चूत उत्तेजना मे थिरक रही थी... की तभी प्रीति ने राज के मुँह कोअपनी चूत पर से हटा दिया... राज को लगा कि प्रीति उत्तेजना के मारे जल्दी ही झाड़ गयी है... उसने देख की प्रीति उसे ही देख रही थी...
"राज में चाहती हूँ की आज तुम मुझे चोदो" "क्या तुम सही मे ये चाहती हो?" राज ने असचर्या से पूछा. "हां में बहोत सीरीयस हूँ में भी इस बात का अनुभव लेना चाहती हूँ कि जब लंड चूत मे घूस्ता है तो कैसा महसूस होता है.. क्यों लड़कियाँ बड़े मोटे लंड को देख चुदवाने को बैतब हो जाती हैं." प्रीति ने जवाब दिया..
"अगर तुम यही चाहती हो तो तुम्हे ये अनुभव देकर मुझे खुशी होगी" राज ने खुशी से कहा.... प्रीति कुर्सी से खड़ी हो राज के पलंग पर लेट गयी.... राज अपनी बेहन की टाँगे के बीच आ गया और उसे चूमते हुए उपर तरफ बढ़ने लगा.. आख़िर उसके होंठ उसके सपाट पेट को चूमते हुए उसकी चुचियों पर आए फिर उसके होंठों को अपने होठों से क़ैद कर लिया...