एकदम होगा, और पूरे विस्तार से होगा, समस्या व्याकरण की थी,
असली मस्ती तब शुरू हुयी जब मैं बहन से चुपके से अपने देवर की ओर सरक ली थी, अब परेशानी की बात ये है की यह कहानी मैं ' फर्स्ट परसन ' में कह रही हूँ , सूत्रधार की तरह,... और कोई आचार्य व्याकरण दोष कह के खड़ा हो जाता,... तो अब कहानी का कुछ हिस्सा थर्ड परसन में , भी आएगा,... जहाँ मैं नहीं रहूंगी ,... तो कुछ देर इन्तजार के बाद छुटकी के साथ मेरी सास लोगों ने
और सिर्फ सास क्यों ननदें भी तो जिस दिन से छुटकी मेरे साथ आयी है गाँव में , सब की सब उस के आते जोबन को देख के बौराई थीं , तो सब हाल चाल मिलेगा , बिना किसी सेंसर के,...