देखिये इस कमेंट का दो असर तो हुआ
एक तो आपने कमेंट कर दिया, और मुझे इस बात का विश्वास हुआ की कुछ लोग तो हैं ऐसे, जो पोस्ट्स का इन्तजार करते हैं,
दूसरे आपके कमेंट के बाद, पहला कमेंट पोस्ट के पोस्ट होने के करीब दो दिन बाद, मेरी मित्र लेखिका का आया, जो मेरे सूत्रों की अभिन्नं अंग है।
हाँ, अगर इस पुड़िया का असर ऐसा है जैसा आपने कहा तो मुझे उत्पादन और वितरण में सुधार करना चाहिए और मैंने आज जोरू का गुलाम में भी पुड़िया दे दी है और कोशिश करुँगी की फागुन के दिन चार में भी कल पोस्ट कर दूँ।
एक बार फिर से धन्यवाद, आप ऐसे थोड़े भी पाठक हों तो लिखना सार्थक हो जाता है जो एक एक लाइन पढ़ें और उसपर प्रतिक्रया दें
आभार।