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Erotica फागुन के दिन चार

komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६

बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ


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बुच्ची

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2... लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से

लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से



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इमरतिया ने दोनों को अलग किया,

थोड़ी देर में बुच्ची हंसती खिलखिलाती फर्श पर लेटी थी, अपने उभारों को उचकाती और इमरतिया धीरे धीरे खीर उसके जोबन पर गिरा रही थी, और फिर अपने देवर से बोली

" लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से "

दूध से गोरे गोरे जोबन, बड़े बड़े,


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भरे भरे, रस से छलकते, अपने भैया को ललचाते, बुलाते, और उन दूधिया जोबन पर वो गाढ़ी गाढ़ी खीर, जो इमरतिया धीरे धीरे सूरजु को दिखा के गिरा रही थी, और इस तरह से निपल तब भी खीर से डूबे भी रहें और दिखते भी रहें।

पूरे बड़े कटोरे भर खीर थी, और उसकी दर्जा नौ वाली कोरी कुँवारी ननद की कच्ची अमिया पे धीरे धीरे इमरतिया भौजी चुवा रही थी।
आज खीर उसका भाई बहन की चूँची पर से,



लेकिन बुच्ची भी कम बदमाश नहीं थी।
वह लेटे लेटे साइड में देख के अपने भैया को ललचा रही थी, उसकी मुस्कराहट में दावत थी और बदमाशी भी।

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नयी आती कच्ची अमिया पर मर्द की जीभ, और मरद वो भी भाई, जिसे बचपन से आज तक राखी बांधती चली आयी, थोड़ी ही देर में बुच्ची पहले अपनी जाँघे रगड़ने लगी, फिर अपने आप उसके मुंह से सिसकियाँ निकल रही थीं,

" उफ़ भैया उफ्फ्फ्फ़, बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसे ही करो ओह्ह "

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गाढ़ी गाढ़ी खीर थोड़े देर में भैया के पेट में, और बुच्ची के निपल खड़े, चूँची पथराई, एक चूँची भाई की मुट्ठी में और दूसरे निपल को मुंह में लेकर वो चुसूर चुसूर चूस रहा था। पहली बार कच्चे टिकोरे कुतर रहा था,
कच्ची कलियाँ को ऐसे ही रगड रगड़ के पेलने से वो जिंदगी भर के लिए छिनार हो जाती हैं।

थोड़ी देर में बुच्चिया फर्श पर लेटी थी, इमरतिया ने बची हुयी सब खीर उसके बुर पर उड़ेल दी थी


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और उसका भाई सपड़ सपड़ चाट रहा था।

भाई की एक ऊँगली बहन की पिछवाड़े की कसी कसी दरार में धंस गयी,

बुच्ची ने जोर से सिसकी ली,

इमरतिया ने फैसला ले लिया, इस स्साली की गाँड़ भी आज फड़वा दी जायेगी, आगे की झिल्ली अभी फटेगी, और रात में पिछवाड़ा,


साँड़ चढ़ा बछिया (बुच्चिया) पर


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जो हफ्ते भर बाद नयी आयी दुलहिनिया के साथ जेठानियाँ करतीं. ... ये काम अभी से मंजू भाभी और रामपुर वाली के जिम्मे था,....
कुल आठ भाग , गाँव की शादी की रस्में, गाँव का माहौल और एक दस हजार शब्दों से बड़ा मेगा अपडेट

जरूर पढ़ें और अपने कमेंट भी दें


https://exforum.live/threads/छुटकी-होली-दीदी-की-ससुराल-में.77508/page-1203
 
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komaalrani

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शायद डॉ राजी कोई शीर्षक सजेस्ट कर दें तो....
मार्च तक का टारगेट था ,लेकिन तब तक उन्होंने सजेस्ट किया नहीं चलिए अगस्त तक बढ़ा देती हूँ अब पंच लोग ही उन्हें समझाएं बुझाएं
 

komaalrani

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शेरनियों के पंजे में शिकार...
अभी वो खिजा खिजा के खेल रही हैं....
बहनों का नाम ले लेकर छेड़ रही हैं...

लेकिन स्टैचू के केस में जब तक ओवर नहीं बोलते तब तक स्टैचू हीं रहना पड़ता है...
फिर आनंद बाबू स्टैचू से निजात पा के कैसे अपने हाथों को हरकत दे पाए....
कभी कभी टाइमर भी सेट रहता है, दस मिनट से ज्यादा नहीं
 

komaalrani

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“आ ना मेरी माँ। क्या वहां से। देख ना तेरे यार ने कितनी कसकर दबोच रखा है। प्लीज गुड्डी। अगर ना आई ना। तो जब तेरी फटेगी ना। तो मैं भी ताली बजाऊँगी…” रीत ने फिर पुकार लगायी।
ताली बजाउंगी नहीं मोटी ताली पकड़ के लगवाउंगी...
वो भी बिना तेल-पानी के...
“हे। हे अच्छा, आएगी ना वो तुम्हारी बहना कम रखैल मेरी पकड़ में। ना अपने सारे भाईयों को चढ़वाया उसके ऊपर। एक निकालेगा दूसरा डालेगा। एक आगे से एक पीछे से…” उसकी गालियां भी मजे दे रही थी, लेकिन उसकी बात गुड्डी ने पूरी की।

“और एक मुँह में…” गुड्डी अब तक पास आ गई थी।

तीनों छेद की बुकिंग पक्की हो गई...
साथ में रॉकी फ्री फ्री फ्री...
लोग भाभियों को बुरा भला कहते हैं लेकिन अभी से अपनी होने वाली ननद का कितना ख्याल रख रही हैं गुड्डी और रीत, ये नहीं की अकेले अकेले खुद ही सारा मजा
 

komaalrani

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“ये कोई तरीका है किसी जवान लड़की से पेश आने का। मेरी तो इत्ती कस-कसकर दबा रहे थे की अब तक दुःख रहा है और उसकी। फूल से छू रहे हो। क्या मजा आएगा बिचारी को और फागुन में सब लोग बनारस में एकदम खुल्लम खुल्ला बोलते हैं और तुम…”
अब तो चंदा भाभी के साथ साथ रीत का भी समर्थन मिल गया...
गुड्डी के बत्तीस से चौंतीस बनाने का कार्यक्रम चालू...
देश तरक्की कर रहा है तो जोबन ही क्यों पीछे रह जाएँ
 

komaalrani

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गुड्डी- “हे हे। क्या करते हो?” कहकर वो नखड़ा दिखा रही थी।
यही नखड़ा .. ठिनकना तो औरतों का गहना है...
अंदर मन तो करता है लेकिन मुँह से...
और आनंद बाबू को चंदा भाभी ने पूरा सिखा पढ़ा दिया है...
तो अब सारी शरम.. गायब करने की जिम्मेदारी भी निभानी है...
“रीत इज बेस्ट…” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

जवाब में वो सिर्फ सिसक दी। खुली छत। लेकिन मैं जैसे पागल हो रहा था। थोड़ा सा बरमूडा सरका के मैंने अपना हथियार सीधे,
“ओह्ह… नहीं फिर कभी अभी नहीं…” वो सिसकियां भर रही थी। लेकिन साथ ही उसने अपनी टांगें चौड़ी कर ली।

सचमुच ... रीत इज बेस्ट....
हर मामले में , लेकिन ऐन मौके पे कोई न कोई आ ही जाता है
 

komaalrani

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अब तो हेडमास्टरनी के सामने सबकी बोलती बंद...
किसने किया जवाब देना भारी...
लेकिन आनंद बाबू ने दोनों को साफ बचा लिया....
और सामने हाथों के थापे ने उन एविडेंस की पुष्टि कर दी...
“क्या मस्त रसीला रसगुल्ला है। क्यों अकेले-अकेले…”
शायद दूबे भाभी... चंदा भाभी के रात में हुए कारनामे को भांप गई....
रीत की दोस्ती, रीत का सिखाना पढ़ाना

आनंद बाबू का मगज अस्त्र काम करने लगा, हाथ के थापे का सबूत काम में आया, दोनों लड़कियां बच गयी और वो दोनों थैंक यू अपने ढंग से बोलेंगी
 

komaalrani

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सच कहूँ तो दो चार शब्द चुराने आया था अपने लिये
लेकिन हाय रे लेखनी , आप लिखतीं नहीं बल्कि दिल पर गोदतीं हैं :D
फिर वो गुदगुदी और आलस होती है , अन्गडाईया उठने लगती है , मिजाज खुश , होठ खिल जाते है और दुनियादारी वो क्या होती है 😏 मन होता है कि चादर ओढ़ कर सो जायें ।
इसी आलस मे बाकी कहानियों भी छूट रखी है ।

अत: अब आपसे अनुरोध है कि ऐसा कोई टानिक बता दो कि एक सांस मे आपकी कहानियां पढ लूँ 🤭

खैर शुरुवात हुई है पहले अपडेट से देखता हु कहा तक हुन्कारि भर पाता हु
हाय मेरी निन्दिया रे !!
ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे,

एक पुराने जमाने के डाकू होते थे, चिट्ठी भेज के आते थे और पूरे गाँव को मालूम होता था की गब्बर आया है, बल्कि आस पास के गाँवों को भी

अरे कम से काम लाइक वाला बटन दबा के, एक दो लाइन झूठी सच्ची तारीफ़ लिख के जता तो दिया करिये की आये थे, मैं भी खुश हो के दस पांच मोहल्लों में आस पास के बता आती, एक से एक बड़े लेखक आते हैं मेरी कहानी पढ़ने, और इसी बहाने दो चार लोग आ भी जाते,

स्वागत है आपका, थ्रेड है आपका, और जहाँ तक पढ़ाई वर्धन टॉनिक की बात है, महीने में दो तीन पोस्ट होती हैं बस किसी दिन कमर कस के बैठिये, कड़वी दवा की तरह पी जाइये और नाइस, गुड ऐसा कुछ लिख दीजिये बस।

मैं आपकी वयस्तता समझ सकती हूँ, जब भी समय मिले आने की कोशिश करिये, आप के कमेंट्स से कहानी और कहने वाली दोनों को संबल मिलेगा हिम्मत बढ़ेगी।
 

komaalrani

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Next part soon
 

komaalrani

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छुटकी -होली दीदी की ससुराल में

भाग ८५ - ननद के भैया बन गए सैंया

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, पसंद करें और कमेंट करे धन्यवाद
 
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