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Erotica फागुन के दिन चार

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komaalrani

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फागुन के दिन चार

भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१

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komaalrani

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शायद डॉ राजी कोई शीर्षक सजेस्ट कर दें तो....
मार्च तक का टारगेट था ,लेकिन तब तक उन्होंने सजेस्ट किया नहीं चलिए अगस्त तक बढ़ा देती हूँ अब पंच लोग ही उन्हें समझाएं बुझाएं
 

komaalrani

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शेरनियों के पंजे में शिकार...
अभी वो खिजा खिजा के खेल रही हैं....
बहनों का नाम ले लेकर छेड़ रही हैं...

लेकिन स्टैचू के केस में जब तक ओवर नहीं बोलते तब तक स्टैचू हीं रहना पड़ता है...
फिर आनंद बाबू स्टैचू से निजात पा के कैसे अपने हाथों को हरकत दे पाए....
कभी कभी टाइमर भी सेट रहता है, दस मिनट से ज्यादा नहीं
 

komaalrani

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“आ ना मेरी माँ। क्या वहां से। देख ना तेरे यार ने कितनी कसकर दबोच रखा है। प्लीज गुड्डी। अगर ना आई ना। तो जब तेरी फटेगी ना। तो मैं भी ताली बजाऊँगी…” रीत ने फिर पुकार लगायी।
ताली बजाउंगी नहीं मोटी ताली पकड़ के लगवाउंगी...
वो भी बिना तेल-पानी के...
“हे। हे अच्छा, आएगी ना वो तुम्हारी बहना कम रखैल मेरी पकड़ में। ना अपने सारे भाईयों को चढ़वाया उसके ऊपर। एक निकालेगा दूसरा डालेगा। एक आगे से एक पीछे से…” उसकी गालियां भी मजे दे रही थी, लेकिन उसकी बात गुड्डी ने पूरी की।

“और एक मुँह में…” गुड्डी अब तक पास आ गई थी।

तीनों छेद की बुकिंग पक्की हो गई...
साथ में रॉकी फ्री फ्री फ्री...
लोग भाभियों को बुरा भला कहते हैं लेकिन अभी से अपनी होने वाली ननद का कितना ख्याल रख रही हैं गुड्डी और रीत, ये नहीं की अकेले अकेले खुद ही सारा मजा
 

komaalrani

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“ये कोई तरीका है किसी जवान लड़की से पेश आने का। मेरी तो इत्ती कस-कसकर दबा रहे थे की अब तक दुःख रहा है और उसकी। फूल से छू रहे हो। क्या मजा आएगा बिचारी को और फागुन में सब लोग बनारस में एकदम खुल्लम खुल्ला बोलते हैं और तुम…”
अब तो चंदा भाभी के साथ साथ रीत का भी समर्थन मिल गया...
गुड्डी के बत्तीस से चौंतीस बनाने का कार्यक्रम चालू...
देश तरक्की कर रहा है तो जोबन ही क्यों पीछे रह जाएँ
 
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komaalrani

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गुड्डी- “हे हे। क्या करते हो?” कहकर वो नखड़ा दिखा रही थी।
यही नखड़ा .. ठिनकना तो औरतों का गहना है...
अंदर मन तो करता है लेकिन मुँह से...
और आनंद बाबू को चंदा भाभी ने पूरा सिखा पढ़ा दिया है...
तो अब सारी शरम.. गायब करने की जिम्मेदारी भी निभानी है...
“रीत इज बेस्ट…” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

जवाब में वो सिर्फ सिसक दी। खुली छत। लेकिन मैं जैसे पागल हो रहा था। थोड़ा सा बरमूडा सरका के मैंने अपना हथियार सीधे,
“ओह्ह… नहीं फिर कभी अभी नहीं…” वो सिसकियां भर रही थी। लेकिन साथ ही उसने अपनी टांगें चौड़ी कर ली।

सचमुच ... रीत इज बेस्ट....
हर मामले में , लेकिन ऐन मौके पे कोई न कोई आ ही जाता है
 

komaalrani

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अब तो हेडमास्टरनी के सामने सबकी बोलती बंद...
किसने किया जवाब देना भारी...
लेकिन आनंद बाबू ने दोनों को साफ बचा लिया....
और सामने हाथों के थापे ने उन एविडेंस की पुष्टि कर दी...
“क्या मस्त रसीला रसगुल्ला है। क्यों अकेले-अकेले…”
शायद दूबे भाभी... चंदा भाभी के रात में हुए कारनामे को भांप गई....
रीत की दोस्ती, रीत का सिखाना पढ़ाना

आनंद बाबू का मगज अस्त्र काम करने लगा, हाथ के थापे का सबूत काम में आया, दोनों लड़कियां बच गयी और वो दोनों थैंक यू अपने ढंग से बोलेंगी
 

komaalrani

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सच कहूँ तो दो चार शब्द चुराने आया था अपने लिये
लेकिन हाय रे लेखनी , आप लिखतीं नहीं बल्कि दिल पर गोदतीं हैं :D
फिर वो गुदगुदी और आलस होती है , अन्गडाईया उठने लगती है , मिजाज खुश , होठ खिल जाते है और दुनियादारी वो क्या होती है 😏 मन होता है कि चादर ओढ़ कर सो जायें ।
इसी आलस मे बाकी कहानियों भी छूट रखी है ।

अत: अब आपसे अनुरोध है कि ऐसा कोई टानिक बता दो कि एक सांस मे आपकी कहानियां पढ लूँ 🤭

खैर शुरुवात हुई है पहले अपडेट से देखता हु कहा तक हुन्कारि भर पाता हु
हाय मेरी निन्दिया रे !!
ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे,

एक पुराने जमाने के डाकू होते थे, चिट्ठी भेज के आते थे और पूरे गाँव को मालूम होता था की गब्बर आया है, बल्कि आस पास के गाँवों को भी

अरे कम से काम लाइक वाला बटन दबा के, एक दो लाइन झूठी सच्ची तारीफ़ लिख के जता तो दिया करिये की आये थे, मैं भी खुश हो के दस पांच मोहल्लों में आस पास के बता आती, एक से एक बड़े लेखक आते हैं मेरी कहानी पढ़ने, और इसी बहाने दो चार लोग आ भी जाते,

स्वागत है आपका, थ्रेड है आपका, और जहाँ तक पढ़ाई वर्धन टॉनिक की बात है, महीने में दो तीन पोस्ट होती हैं बस किसी दिन कमर कस के बैठिये, कड़वी दवा की तरह पी जाइये और नाइस, गुड ऐसा कुछ लिख दीजिये बस।

मैं आपकी वयस्तता समझ सकती हूँ, जब भी समय मिले आने की कोशिश करिये, आप के कमेंट्स से कहानी और कहने वाली दोनों को संबल मिलेगा हिम्मत बढ़ेगी।
 

komaalrani

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komaalrani

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छुटकी -होली दीदी की ससुराल में

भाग ८५ - ननद के भैया बन गए सैंया

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, पसंद करें और कमेंट करे धन्यवाद
 
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