अरे कैसे भेंट नहीं होगी ? आनंद बाबू की जिंदगी का सवाल है, गुड्डी के बारे में लाइफ टाइम फैसला बिना गुड्डी की मम्मी के हाँ के तो हो नहीं सकता और उन्होंने पहले ही हुकुम सुना दिया है की आनंद बाबू को ' होली आफटर होली ' में कम से कम तीन दिन बनारस में भी बिताने हैं तो मम्मी का हुकुम और ऊपर से भी अब दूबे भाभी ने भी वही बात कह दीं,
राजा नल है एक और दमयन्तिया अनेक, तो एक दिन में किसकी किसकी प्यास बुझेगी और नए ज़माने की लड़कियां तो हैं नहीं क्विकी से काम चला लिया, नेपकिन से मलाई पोछी, जींस ऊपर सरकायी और बाइक पे पीछे बैठ के, दूसरे यार के साथ, यहाँ तो सब चंदा भाभी टाइप, जब तक रात भर आसन बदल बदल कर कबड्डी न हो, तीन चार राउंड तो क्या मजा आएगा, इसलिए दूबे भाभी ने तीन दिन वाली शर्त रखी
हाँ आज छुआ छुआई, मुंह दिखाई हो जायेगी, औजार कैसा है, काम लायक है की नहीं, और गुड्डी भी चाहती है की आनंद बाबू के कपडे उतरें,
वो तो देख ही चुकी हैं, पकड़ भी चुकी है लेकिन मामला ओनर्स प्राइड नेबर्स एनवी वाला है , सबको मालूम हो जाए गुड्डी वाला कितना जबरदस्त है, इसलिए वो सबके ऊपर चढ़ने के लिए ग्रीन सिग्नल दे रही है