किसी राइटर को रोमांटिक स्टोरी लिखने मे महारथ हासिल होता है , किसी को थ्रिलर - सस्पेंस लिखने मे महारथ हासिल है , कोई हाॅरर लिखने मे स्पेशलिस्ट है , कोई साइंस फिक्शन मे तो किसी को अन्य - अन्य विधा मे दक्षता हासिल प्राप्त है ।
आपके बारे मे मै पुरी गारंटी के साथ कहता हूं - होली से सम्बंधित इरोटिका लिखने मे आप जैसा कोई नही । आप की यह विधा पढ़कर रीडर्स " वाह वाह " न करें , ऐसा हो नही सकता ।
इन अपडेट मे भी आपने इरोटिका को एक ऊंची उड़ान पर पहुँचा दिया । आनंद साहब के साथ पांच पांच महिलाएं - दो परिपक्व मैच्योर औरतें दूबे भाभी और चंदा भाभी , एक नई नई सुहागन बनी औरत संध्या भाभी और दो कच्ची कली कचनार की रीत और गुड्डी - और सभी की सभी हुस्न की दौलत से मालामाल , यह सब कल्पना कर किसका दिल व्याकुल न हो जाए ! किसका दिल न मचल जाए ! किसके दिल के तार झंकृत न हो जाए !
बहुत ही खूबसूरत सीन्स और उतना ही शानदार लेखनी ।
बिहार और पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश मे होली और चैत्र मास के दौरान पुरे माह भोजपुरी लोकगीत गाने की परम्परा थी । यह गीत ही इन दो माह को अन्य महीने से अलग बनाता था । एक मे जहां रस रंग का उत्सव होता था वहीं दूसरे मे पुरे माह हम अपने पुज्य का जन्मोत्सव मनाते थे ।
जाने कहां गए वो दिन !
बहुत बहुत खुबसूरत अपडेट कोमल जी ।
जगमग जगमग अपडेट ।