तौबा ! पहले चंदा भाभी और अब संध्या भाभी ने जिस तरह से , जिस बारीकी से और जिस तरीके से आनंद साहब को सेक्सुअल ज्ञान का पाठ कंठस्थ करा रही है उससे आनंद साहब बहुत जल्द शहजादा गुलफाम के अवतार मे दिखाई देने लगेंगे ।
इनके छतरी से छाया ...साॅरी छत्रछाया मतलब छतरछाया से यह बालक कहीं वूमेनाइजर , लेडीजमैन न बन जाए तो बड़ी बात नही होगी ।
शादी के बंधन मे बंधकर बड़े बड़े आशिक मिजाज सुधर जाते हैं और एकपत्नीब्रत का पालन करने लगते हैं लेकिन आनंद साहब के इर्द-गिर्द जिस तरह से निहायत खुबसूरत हसीन और नौजवान महिलाओं का मेला लगा हुआ है और वो न्यौछावर होने के लिए मरी जा रही है उससे आनंद साहब तो क्या ऋषि - मुनिगण भी विचलित हो जाए ।
बहुत ही बेहतरीन कन्वर्सेशन था संध्या और आनंद का । सेक्स सिर्फ हमबिस्तर होने का चीज नही है यह एक आर्ट भी है । दो दिलों को जोड़ने का एक साधन भी है । यह एहसास दिलाता है कि आप बहुत ही खास है । मानसिक तनाव दूर करने का प्रयास भी है ।
इस अपडेट से पता चला कि आनंद साहब और गुड्डी के लग्न की डोर आनंद के भाभी जी और गुड्डी की मां के हाथो मे है । अम्मा जी ऑलरेडी तैयार बैठी है और भाभी जी इंकार कर नही सकती ।
लेकिन संध्या भाभी का हथौड़े का निरिक्षण करना , साइज नापना और हथौड़े की शक्ति आजमाना शादी से पूर्व हर लड़के पर नही लागू हो सकता । यह वहीं सम्भव है जहां रिश्ते लिव इन रिलेशनशिप पर आधारित हो ।
श्वेता मैडम इतनी तजुर्बेकार थी यह हमे पता ही न चला । साथ मे गुड्डी की सबसे छोटी बहन भी । आनंद साहब के जलवे ही जलवे है ।
पुराने जमाने मे ऐसे ही तो सयाने लोग नही कहते थे कि कुएं का जल , ईट का घर , बड़ का पेड़ और युवा नारी का शरीर -- गर्मियों मे ठंडा और सर्दियों मे गरम ।
बेहतरीन और शानदार अपडेट कोमल जी ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग ।